S
StoryPublisher
Guest
रात भर चारों लोग न जाने किन बातों में लगे रहे।सुबह-सुबह चार बजे सबकी नींद लगी थी शायद।अभ्युदय मेरे पास पड़ी चेयर पर,रिया और माँ बगल वाले बेड पर और पंकज दूसरी साइड की चेयर पर।
मेरी नींद खुल गई थी और इन सबको डिस्टर्ब करने का मेरा कोई मूड नही था।
पापा जी मुझे फोन दे गए थे नया।मैं उसे ही उठाकर देखने लगी।माँ और पापा जी का नम्बर सेव किया।रिया,अभ्युदय जी का भी।पंकज का नम्बर अब भी मुझे याद नही हुआ तो सोचा बाद में ही करूँगी। मैंने फोन का कैमरा शुरू किया और सबकी वीडियो बना ली।पंकज के खर्राटे,अभ्युदय जी का सिर को चेयर पर टिकाना अजीब तरीके से।वीडियो बना कर भी जब बोर हो गई तो अपनी ही फोटोज लेने लगी। अजीब-अजीब मुँह बनाकर,अजीब-अजीब सी भौहें चढ़ाकर।
अचानक ही हंसने की आवाज सुनाई दी।मैंने देखा तो अभ्युदय जी मुझे देखकर मुस्कुरा रहे थे।
"बस भी करो।"
"आप कब जागे?"
"अभी-अभी।"
"बताना चाइये था न?"
"तुम्हारे इतने सारे चेहरे कैसे देखता फिर?"
"अभ्युदय जी गलत बात।"
"क्या चुपचाप वीडियो बनाना, गलत बात नही?"
"आप जाग रहे थे?"
"हाँ,जाग रहा था।"
"चाय पीने का मन कर रहा है।"
"पियोगी?"
"अभी कैसे लेकिन?"
"रुको।"
अभ्युदय जी ने ड्राइवर भैया को काल किया और चाय लेकर आने को कह दिया।
दस मिनट भी नही लगे और चाय हमारे सामने थी।
"थैंक्यू अभ्युदय जी।"
"कैसा थैंक्यू?तुम से ज्यादा मेरा मन हो रहा था चाय पीने का।"
"तो पहले क्यों नही मंगवाई आपने?"
"उधर देखो।"
चाय के कम से कम 20 से 25 डिस्पोजल कप पड़े हुए थे।
"इतनी चाय?आप सभी ने पी?"
"तुम्हें मिस किया हमने।"
"तो उठाया क्यों नही?"
"तुम बहुत गहरी और सुकून की नींद में थी निशी।"
"अभ्युदय जी रिया के लिए क्या प्लानिंग की है आप दोनों ने?"
"सब कुछ फाइनल कर दिया है।शादी 3 दिन बाद होगी, 7 अगस्त को।"
"7 अगस्त?"
"हाँ।क्यों क्या हुआ?"
"वो रिया का बर्थडे भी 7 अगस्त ही होता है।"
"ये तो और अच्छा है।रवीश को जन्मदिन और एनीवर्सरी अलग-अलग याद नही करनी होगी।"
"वेरी फनी,अभ्युदय जी।मैं तो भूल ही गई थी।हम दोनों में यही स्पेशल है, 7 जुलाई मैं,7 अगस्त वो।"
"फिर तो अच्छा सेलिब्रेशन होना चाहिए और भी प्लानिंग करनी होगी।"
"अभी तक क्या-क्या प्लानिंग है,वो भी तो बता दीजिए।"
"निशी सब जाग जाएंगे,धीरे बोलो।"
"सॉरी।अब धीरे ही पूछ रही हूँ, बता दीजिए न?"
मैंने धीमी आवाज में कहा।
"शादी गायत्री मन्दिर में सुबह 11 बजे होगी।रवीश की ट्रेन 9 बजे आ जायेगी।"
"अगर लेट हो गई तो?"
"शुभ-शुभ ही बोलो।कुछ गड़बड़ नही होनी चाहिए।"
"हाँ पर रिया की शादी होनी है न?शांति से होगी नहीं।उसकी शादी में पंगे न हों ऐसा होना मतलब गधे के सिर पर सिंग होना है।"
"निशी आगे सुनो।शादी के बाद दोनों का अरिहंत में कमरा बुक करवा दिया है।शाम को ही टिकट है वापिस दिल्ली की।"
"अरे,ऐसा क्यों?उसी शाम को क्यों?दोनो को साथ मे रहने का मौका भी नही मिलेगा क्या?और सुहागरात का क्या होगा?"
"मिलेगा न।सुहागरात न मना कर सुहाग दिन भी तो मनाया जा सकता है न?"
"हम्म.. पर फिर भी।ये तो साथियां मूवी सा हो गया न?"
"उफ्फ,तुम और तुम्हारे ये खयालात।मूवी क्यों ले आई अब बीच मे?"
"तो?शादी करके वो दिल्ली ये अपने घर?"
"कौन अपने घर?"
"रिया?"
"रिया भी दिल्ली जा रही है।रवीश-रिया का रेज़र्वेशन हो गया है।दोनों ही निकलेंगे साथ में।"
"लेकिन रिया क्यों?"
"ताकि वो अपने पापा को बता सके।"
"हम्म..ये भी ठीक है।यंहा ही हुई तो अंकल तो इसका पता नही क्या करेंगे।कुछ पंगा हुआ तो?"
"वकील है न अपने पास!"
"कौन वकील?"
"रवीश।"
हम दोनों साथ ही मुस्कुरा दिए।
"अभ्युदय जी।"
"हम्म.."
"हमारी शादी.."
"निशी, अभी नही।"
अभ्युदय जी ने अपने मुह पर उंगली रखकर माँ की तरफ इशारा कर के कहा।
मैं चुप हो गई।कुछ भी नही कहा बस अभ्युदय जी की आंखों में देखती रही।
"रिया को लेहगा गोल्डन चाहिए।"
"ह्म्म्म.."
"अभ्युदय जी।"मैंने जोर से कहा।अभ्युदय जी अब भी मेरी आँखों मे खोकर ही बैठे थे।
"हम्म बोलो।क्या हुआ?"
"रिया का लेनहगा? गोल्डन चाहिए उसे।"
"वो सब तुम वेदी से बात कर लेना।उसका नम्बर सेव कर लो।"
मैंने वेदी का नम्बर ले लिया।
बातें करते कितना समय बीत गया।माँ की नींद खुली तो देखा मैं और अभ्युदय जी बातों में व्यस्त हैं।
माँ उठकर पास आईं।सिर पर हाथ रखा और बहुत प्यार से गले लगा कर पूछा।
"अब कैसा लग रहा है निशु?"
"मैं ठीक हूँ माँ।दर्द तो बिल्कुल भी नही है।"
"आपको नींद ठीक से नही आई न?"
माँ की आंखे बिल्कुल लाल हो रखी थी।
"मैं ठीक हूँ निशु।बस नहाकर पूजा के लुंगी अच्छा लगेगा।"
माँ ने रिया कप जगाया और उसे लेकर रूम चली गईं।
वार्ड रूम में मैं अभ्युदय जी और पंकज थे।
मेरी नींद खुल गई थी और इन सबको डिस्टर्ब करने का मेरा कोई मूड नही था।
पापा जी मुझे फोन दे गए थे नया।मैं उसे ही उठाकर देखने लगी।माँ और पापा जी का नम्बर सेव किया।रिया,अभ्युदय जी का भी।पंकज का नम्बर अब भी मुझे याद नही हुआ तो सोचा बाद में ही करूँगी। मैंने फोन का कैमरा शुरू किया और सबकी वीडियो बना ली।पंकज के खर्राटे,अभ्युदय जी का सिर को चेयर पर टिकाना अजीब तरीके से।वीडियो बना कर भी जब बोर हो गई तो अपनी ही फोटोज लेने लगी। अजीब-अजीब मुँह बनाकर,अजीब-अजीब सी भौहें चढ़ाकर।
अचानक ही हंसने की आवाज सुनाई दी।मैंने देखा तो अभ्युदय जी मुझे देखकर मुस्कुरा रहे थे।
"बस भी करो।"
"आप कब जागे?"
"अभी-अभी।"
"बताना चाइये था न?"
"तुम्हारे इतने सारे चेहरे कैसे देखता फिर?"
"अभ्युदय जी गलत बात।"
"क्या चुपचाप वीडियो बनाना, गलत बात नही?"
"आप जाग रहे थे?"
"हाँ,जाग रहा था।"
"चाय पीने का मन कर रहा है।"
"पियोगी?"
"अभी कैसे लेकिन?"
"रुको।"
अभ्युदय जी ने ड्राइवर भैया को काल किया और चाय लेकर आने को कह दिया।
दस मिनट भी नही लगे और चाय हमारे सामने थी।
"थैंक्यू अभ्युदय जी।"
"कैसा थैंक्यू?तुम से ज्यादा मेरा मन हो रहा था चाय पीने का।"
"तो पहले क्यों नही मंगवाई आपने?"
"उधर देखो।"
चाय के कम से कम 20 से 25 डिस्पोजल कप पड़े हुए थे।
"इतनी चाय?आप सभी ने पी?"
"तुम्हें मिस किया हमने।"
"तो उठाया क्यों नही?"
"तुम बहुत गहरी और सुकून की नींद में थी निशी।"
"अभ्युदय जी रिया के लिए क्या प्लानिंग की है आप दोनों ने?"
"सब कुछ फाइनल कर दिया है।शादी 3 दिन बाद होगी, 7 अगस्त को।"
"7 अगस्त?"
"हाँ।क्यों क्या हुआ?"
"वो रिया का बर्थडे भी 7 अगस्त ही होता है।"
"ये तो और अच्छा है।रवीश को जन्मदिन और एनीवर्सरी अलग-अलग याद नही करनी होगी।"
"वेरी फनी,अभ्युदय जी।मैं तो भूल ही गई थी।हम दोनों में यही स्पेशल है, 7 जुलाई मैं,7 अगस्त वो।"
"फिर तो अच्छा सेलिब्रेशन होना चाहिए और भी प्लानिंग करनी होगी।"
"अभी तक क्या-क्या प्लानिंग है,वो भी तो बता दीजिए।"
"निशी सब जाग जाएंगे,धीरे बोलो।"
"सॉरी।अब धीरे ही पूछ रही हूँ, बता दीजिए न?"
मैंने धीमी आवाज में कहा।
"शादी गायत्री मन्दिर में सुबह 11 बजे होगी।रवीश की ट्रेन 9 बजे आ जायेगी।"
"अगर लेट हो गई तो?"
"शुभ-शुभ ही बोलो।कुछ गड़बड़ नही होनी चाहिए।"
"हाँ पर रिया की शादी होनी है न?शांति से होगी नहीं।उसकी शादी में पंगे न हों ऐसा होना मतलब गधे के सिर पर सिंग होना है।"
"निशी आगे सुनो।शादी के बाद दोनों का अरिहंत में कमरा बुक करवा दिया है।शाम को ही टिकट है वापिस दिल्ली की।"
"अरे,ऐसा क्यों?उसी शाम को क्यों?दोनो को साथ मे रहने का मौका भी नही मिलेगा क्या?और सुहागरात का क्या होगा?"
"मिलेगा न।सुहागरात न मना कर सुहाग दिन भी तो मनाया जा सकता है न?"
"हम्म.. पर फिर भी।ये तो साथियां मूवी सा हो गया न?"
"उफ्फ,तुम और तुम्हारे ये खयालात।मूवी क्यों ले आई अब बीच मे?"
"तो?शादी करके वो दिल्ली ये अपने घर?"
"कौन अपने घर?"
"रिया?"
"रिया भी दिल्ली जा रही है।रवीश-रिया का रेज़र्वेशन हो गया है।दोनों ही निकलेंगे साथ में।"
"लेकिन रिया क्यों?"
"ताकि वो अपने पापा को बता सके।"
"हम्म..ये भी ठीक है।यंहा ही हुई तो अंकल तो इसका पता नही क्या करेंगे।कुछ पंगा हुआ तो?"
"वकील है न अपने पास!"
"कौन वकील?"
"रवीश।"
हम दोनों साथ ही मुस्कुरा दिए।
"अभ्युदय जी।"
"हम्म.."
"हमारी शादी.."
"निशी, अभी नही।"
अभ्युदय जी ने अपने मुह पर उंगली रखकर माँ की तरफ इशारा कर के कहा।
मैं चुप हो गई।कुछ भी नही कहा बस अभ्युदय जी की आंखों में देखती रही।
"रिया को लेहगा गोल्डन चाहिए।"
"ह्म्म्म.."
"अभ्युदय जी।"मैंने जोर से कहा।अभ्युदय जी अब भी मेरी आँखों मे खोकर ही बैठे थे।
"हम्म बोलो।क्या हुआ?"
"रिया का लेनहगा? गोल्डन चाहिए उसे।"
"वो सब तुम वेदी से बात कर लेना।उसका नम्बर सेव कर लो।"
मैंने वेदी का नम्बर ले लिया।
बातें करते कितना समय बीत गया।माँ की नींद खुली तो देखा मैं और अभ्युदय जी बातों में व्यस्त हैं।
माँ उठकर पास आईं।सिर पर हाथ रखा और बहुत प्यार से गले लगा कर पूछा।
"अब कैसा लग रहा है निशु?"
"मैं ठीक हूँ माँ।दर्द तो बिल्कुल भी नही है।"
"आपको नींद ठीक से नही आई न?"
माँ की आंखे बिल्कुल लाल हो रखी थी।
"मैं ठीक हूँ निशु।बस नहाकर पूजा के लुंगी अच्छा लगेगा।"
माँ ने रिया कप जगाया और उसे लेकर रूम चली गईं।
वार्ड रूम में मैं अभ्युदय जी और पंकज थे।