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रात को राज जय और राठी से थोड़ी थोड़ी दूर बैठा डॉली से बात कर रहा था । उसे खुश देखकर जय मुस्कुरा दिया और पेट्रोलिंग में लग गया।
राठी अब दूर से ही चिल्लाने लगा - ओ कबीरे ,इस लड़के ने लड़की कहां से पटा ली?
जय (हंसते हुए ) - अरे क्या बताऊं मन्जीते , , लड़की तो पहले से ही पटी हुई थी पर हमारे इस बंदे ने ही देर कर दी कहने में ।
राठी ( हैरानी से ) - ऐसे कैसे ? अभी कल तक तो अकेला था फिर आज कैसे चमत्कार हुआ ?
जय - कुछ नहीं यार , लड़का लड़की सालों से एक-दूसरे को पसंद करते थे फिर अब दोस्ती और कल इजहार हुआ।
राठी - फिर चट मंगनी और पट ब्याह।
अब जय और राठी हंसने लगे।
राज (खीझकर ) - तुम लोग धीरे-धीरे बोलो ना , मुझे परेशानी हो रही है बात करने में । वैसे भी ये , राठी कब से चिल्ला कर बातें कर रहा है, पूरे कैन्ट को बता दोगे ऐसे तो तुम मेरी लव स्टोरी ।
राठी - तो इतनी दूर से हम क्या फुसफुसाए ? ओह, सॉरी यार हम तो भूल ही गए थे कि हमारा राज अब हमारा नहीं रहा , यह तो पराया हो गया है । क्यों कबीरे, सही कहा ना ?
दूर खड़ा जय फिर से हंस पड़ा - सही कहा मन्जीते ।
अब दोनों हंसते हुए गाने लगे - दोस्त दोस्त ना रहा ।
उनकी हरकतें देख कर राज हँसने लगा।
डॉली - क्या हुआ ,किस से बात कर रहे हो ?
, राज - अरे यही हैं जय और मेरा दोस्त मन्जीत राठी । दोनों तंग कर रहे हैं मुझे ।
डॉली - अगर जिंदगी में अच्छे दोस्त ना हो तो बड़ी बेजान सी लगती है - कहते हुए उसने घोड़े बेच कर सो रही ललिता को मुस्कुराते हुए देखा।
राज - हां सही कहा । यही वह लोग हैं जो जिंदगी में हमें कभी निराशा और अकेलापन महसूस नहीं होने देते ।
डॉली - अच्छा ये मनजीत राठी कौन है ?
राज - हमारा ही बैचमेट है। बहुत जिंदादिल इंसान है । इसके पापा हरियाणा से तो माँ पंजाब से है । इससे कोई काम करवाना हो तो बस दोस्ती और प्यार का वास्ता देकर करवाया जा सकता है । अब देखो ड्यूटी मेरी है पर फिर भी कैसे खुशी-खुशी लगा हुआ है ? बेटा है इसका एक साल का, दिन भर उसी की बातें करता रहता है , कि मेरा बेटा ऐसे करता है ,वैसे करता है कि तभी उसे मंजीत की आवाज आई ।
मंजीत - देख कबीरे , भाभी को हमारा परिचय दिया जा रहा है । यह सुनकर जय , राज और डॉली हंसने लगे ।
डॉली - रात बहुत हो गई है , कल कोचिंग भी जाना है और प्री का पेपर 2 हफ्ते बाद ही है ।
राज - जानता हूं ,10 बार कह चुकी हो और यह भी जानता हूं कि तुम्हारे पापा का सपना है । वैसे अच्छा ही रहेगा हमारे रिश्ते के लिए यह क्योंकि जब तुम भी अपने पैरों पर खड़ी हो जाओगी तो लोगों के मुंह कम ही खुलेंगे हमारे रिश्ते के खिलाफ ।
इस बार फिर मन्जीत की आवाज राज के कानों में पड़ी - कौन लोग हैं तेरे और हमारी भाभी के , कि मेरा बेटा ऐसे करता है ,वैसे करता है कि तभी उसे मंजीत की आवाज आई ।
मंजीत - देख कबीरे , भाभी को हमारा परिचय दिया जा रहा है । यह सुनकर जय , राज और डॉली हंसने लगे ।
डॉली - रात बहुत हो गई है , कल कोचिंग भी जाना है और प्री का पेपर 2 हफ्ते बाद ही है ।
राज - जानता हूं ,10 बार कह चुकी हो और यह भी जानता हूं कि तुम्हारे पापा का सपना है । वैसे अच्छा ही रहेगा हमारे रिश्ते के लिए यह क्योंकि जब तुम भी अपने पैरों पर खड़ी हो जाओगी तो लोगों के मुंह कम ही खुलेंगे हमारे रिश्ते के खिलाफ ।
इस बार फिर मन्जीत की आवाज राज के कानों में पड़ी - कौन लोग हैं तेरे और हमारी भाभी के , खिलाफ ,बता अभी ।गोलियों से भून देता हूं उन्हें ।
दूर खड़ा जय मुस्कुरा दिया - मन्जीते , गोलियों की जरूरत नहीं है । तु बस उनके सामने जाकर खड़ा हो जाना और काम हो जाएगा ।
राज अब उठ खड़ा हुआ - तू इधर आ राठी , ले तू ही बात कर ले अपनी भाभी से।
मन्जीत - अरे सॉरी भाई , तू तो बुरा मान गया - कहते हुए अब थोड़ी और दूर चला गया ।
राज - अच्छा सुनो , क्या हम मिल सकते हैं ?
डॉली ।- मिला तो मैं भी चाहती हूं लेकिन कैसे मिलेंगे ??
राज ( कुछ देर सोच कर ) - देखता हूं अगर छुट्टी का जुगाड़ हो जाए तो, फिर मैं और जय दोनों , आएंगे तुम्हारे शहर। डेढ़ सौ किलोमीटर दूर है ना ?
डॉली (हंसते हुए ) - कह तो ऐसे रहे हो कि डेढ़ सौ किलोमीटर नहीं सिर्फ डेढ़ किलोमीटर ही दूर है पर मैंने सुना है कि आर्मी वालों को छुट्टी बड़ी मुश्किल से मिलती है ।
राज - हां जी बिल्कुल सही सुना है पर तुमसे मिलने के लिए कुछ ना कुछ तिकडम तो लगानी ही पड़ेगी। अच्छा तुम्हारा पेपर कब है ?
डॉली - 1 अगस्त ।
राज - अभी तो 15 दिन है , देखते हैं क्या कर सकते हैं पर तुम बाद में मना मत कर देना कि नहीं मिल सकती।
, डॉली - नहीं , अभी तो मैं पूरा एक महीना यही हूं ।
राज - तो ठीक है ,मैं जय से बात करता हूं । दोनों मिलकर कुछ सोचते हैं कि क्या किया जाए ? तुम सो जाओ - कहते हुए उसने फोन काट दिया ।
डॉली अब सोने की कोशिश करने लगी लेकिन राज , जय से मिलने की खुशी में उसे अब नींद ही नहीं आ रही थी।
राज अब राठी की ओर बनावटी गुस्से से देखने लगा ।
राठी उसे छेड़ने के अंदाज में जय से बोला - कबीरे, भाभी है कैसी ?
जय - हां , अच्छी है ।
,
राठी - तूने देखी नहीं है क्या ?
जय - नहीं , देखी तो नहीं है लेकिन बातें जरूर की है । बड़ी अच्छी बातें करती है तो पता चलता है कि साफ दिल की है।
राठी - तो गधे तूने उसे क्यों छोड़ दिया इस राज के लिए, तू ही पहले उसे पटा लेता । बार बार ऐसी अच्छी लड़की नहीं मिलती।
जय ( हंस कर ) - अरे मंजीते, अपने दोस्त के लिए तो मैं ऐसी सैकड़ों लड़कियां कुर्बान कर दूं । हम दोनों भाईयों के बीच कोई नहीं आ सकता ।
राज - क्यों करवा ली ना अपनी बेइज्जती ? सुन राठी, तू चाहे कितना भी जहर घोल ले मेरे और जय के बीच लेकिन तू हम दोनों को कभी भी अलग नहीं कर पाएगा । हम दोनों दोस्तों के बीच में तू तो क्या कभी कोई नहीं आ पाएगा।
, तू बहुत देर से तंग कर रहा है मुझे, अब देखता हूं तुझे - कहते हुए राज राठी की ओर भागा । राठी बचने को इधर उधर भागने लगा ।
राज - बडे मजे ले रहा था ना, रूक तु ।
राठी अब भाग कर जय के पीछे आ खड़ा हुआ - यार ये मजनू तो सच में पागल हो गया है, दोस्तों की जान का दुश्मन बना बैठा है ।
जय ( हंसते हुए) - अरे यार , मजाक कर रहा था ।
राठी दुखी सा मुँह बनाकर बोला - थोड़ा मस्ती मजाक तो चलता है इसमें इतना रूठने की क्या जरूरत है? तूने अगर मुझे हाथ भी लगाया तो मैं भाभी से तेरी शिकायत कर दूंगा फिर देखना वह तुझे कैसे सबक सिखाएंगी।
राज - जा छोड़ दिया तुझे , वह तो मैं अपने , भतीजे की वजह से छोड़ रहा हूं वरना वह कहेगा कि चाचू ने पापा को मारा।
राठी - बहुत-बहुत मेहरबानी जनाब ।
जय - जा मंजीते, आराम कर। अब हम ड्यूटी कर लेंगे।
राठी - ठीक है कबीरे, एक तू ही मेरा सच्चा दोस्त है जो मेरे बारे में सोचता है वरना यह तो मुझे रातों में जगाकर ड्यूटी करवा रहा है अपने प्यार के लिए - कहते हुए वह गुनगुनाता हुआ वहां से चला गया ।
राज - कमाल का इंसान है अपना राठी, पिछले 7 महीने में बेटे को देखने के लिए तरस गया है और तुझे पता है , ये पागल क्या कहता है ? कहता है कि दुश्मन की किसी भी गोली में इतना दम नहीं कि इस मंजीत राठी की सांस रोक दे ।
, दोनों दोस्त अब हँसने लगे।
जय - अच्छा यह बता, क्या बात हुई ? सब बढ़िया है ना?
राज - सब बढ़िया पर एक इच्छा है यार ।
जय - क्या?
राज - एक बार देखना चाहता हूं उसे, 7 साल हो गए डॉली को देखे हुए ।
जय - वह सब तो ठीक है लेकिन छुट्टी का भी तो जुगाड़ करना पड़ेगा ना तेरी।
राज - मेरी ? ये तेरी मेरी कब से होने लगा ? तुझे पता है ना, ड्यूटी के काम के अलावा मैं कहीं भी तेरे बिना नहीं जाता और फिर मैं डॉली से मिलने जा रहा हूं ।भूले मत कि वह तेरी भी दोस्त है , तु , भी तो देखना चाहता होगा उसे ? तु मुझसे अलग नहीं हो सकता कभी भी।
जय - जानता हूं और मैं खुद हमेशा तेरे साथ रहूंगा ।इतनी आसानी तेरा पीछा नहीं छोडूंगा लेकिन बात वही है यार - छुट्टी की परेशानी ।
राज - सिन्हा सर से बात करता हूं । कुछ होता है तो ??
जय - ठीक है , देखते हैं ।
अब दोनों वापस पेट्रोलिंग में लग गए।
राठी अब दूर से ही चिल्लाने लगा - ओ कबीरे ,इस लड़के ने लड़की कहां से पटा ली?
जय (हंसते हुए ) - अरे क्या बताऊं मन्जीते , , लड़की तो पहले से ही पटी हुई थी पर हमारे इस बंदे ने ही देर कर दी कहने में ।
राठी ( हैरानी से ) - ऐसे कैसे ? अभी कल तक तो अकेला था फिर आज कैसे चमत्कार हुआ ?
जय - कुछ नहीं यार , लड़का लड़की सालों से एक-दूसरे को पसंद करते थे फिर अब दोस्ती और कल इजहार हुआ।
राठी - फिर चट मंगनी और पट ब्याह।
अब जय और राठी हंसने लगे।
राज (खीझकर ) - तुम लोग धीरे-धीरे बोलो ना , मुझे परेशानी हो रही है बात करने में । वैसे भी ये , राठी कब से चिल्ला कर बातें कर रहा है, पूरे कैन्ट को बता दोगे ऐसे तो तुम मेरी लव स्टोरी ।
राठी - तो इतनी दूर से हम क्या फुसफुसाए ? ओह, सॉरी यार हम तो भूल ही गए थे कि हमारा राज अब हमारा नहीं रहा , यह तो पराया हो गया है । क्यों कबीरे, सही कहा ना ?
दूर खड़ा जय फिर से हंस पड़ा - सही कहा मन्जीते ।
अब दोनों हंसते हुए गाने लगे - दोस्त दोस्त ना रहा ।
उनकी हरकतें देख कर राज हँसने लगा।
डॉली - क्या हुआ ,किस से बात कर रहे हो ?
, राज - अरे यही हैं जय और मेरा दोस्त मन्जीत राठी । दोनों तंग कर रहे हैं मुझे ।
डॉली - अगर जिंदगी में अच्छे दोस्त ना हो तो बड़ी बेजान सी लगती है - कहते हुए उसने घोड़े बेच कर सो रही ललिता को मुस्कुराते हुए देखा।
राज - हां सही कहा । यही वह लोग हैं जो जिंदगी में हमें कभी निराशा और अकेलापन महसूस नहीं होने देते ।
डॉली - अच्छा ये मनजीत राठी कौन है ?
राज - हमारा ही बैचमेट है। बहुत जिंदादिल इंसान है । इसके पापा हरियाणा से तो माँ पंजाब से है । इससे कोई काम करवाना हो तो बस दोस्ती और प्यार का वास्ता देकर करवाया जा सकता है । अब देखो ड्यूटी मेरी है पर फिर भी कैसे खुशी-खुशी लगा हुआ है ? बेटा है इसका एक साल का, दिन भर उसी की बातें करता रहता है , कि मेरा बेटा ऐसे करता है ,वैसे करता है कि तभी उसे मंजीत की आवाज आई ।
मंजीत - देख कबीरे , भाभी को हमारा परिचय दिया जा रहा है । यह सुनकर जय , राज और डॉली हंसने लगे ।
डॉली - रात बहुत हो गई है , कल कोचिंग भी जाना है और प्री का पेपर 2 हफ्ते बाद ही है ।
राज - जानता हूं ,10 बार कह चुकी हो और यह भी जानता हूं कि तुम्हारे पापा का सपना है । वैसे अच्छा ही रहेगा हमारे रिश्ते के लिए यह क्योंकि जब तुम भी अपने पैरों पर खड़ी हो जाओगी तो लोगों के मुंह कम ही खुलेंगे हमारे रिश्ते के खिलाफ ।
इस बार फिर मन्जीत की आवाज राज के कानों में पड़ी - कौन लोग हैं तेरे और हमारी भाभी के , कि मेरा बेटा ऐसे करता है ,वैसे करता है कि तभी उसे मंजीत की आवाज आई ।
मंजीत - देख कबीरे , भाभी को हमारा परिचय दिया जा रहा है । यह सुनकर जय , राज और डॉली हंसने लगे ।
डॉली - रात बहुत हो गई है , कल कोचिंग भी जाना है और प्री का पेपर 2 हफ्ते बाद ही है ।
राज - जानता हूं ,10 बार कह चुकी हो और यह भी जानता हूं कि तुम्हारे पापा का सपना है । वैसे अच्छा ही रहेगा हमारे रिश्ते के लिए यह क्योंकि जब तुम भी अपने पैरों पर खड़ी हो जाओगी तो लोगों के मुंह कम ही खुलेंगे हमारे रिश्ते के खिलाफ ।
इस बार फिर मन्जीत की आवाज राज के कानों में पड़ी - कौन लोग हैं तेरे और हमारी भाभी के , खिलाफ ,बता अभी ।गोलियों से भून देता हूं उन्हें ।
दूर खड़ा जय मुस्कुरा दिया - मन्जीते , गोलियों की जरूरत नहीं है । तु बस उनके सामने जाकर खड़ा हो जाना और काम हो जाएगा ।
राज अब उठ खड़ा हुआ - तू इधर आ राठी , ले तू ही बात कर ले अपनी भाभी से।
मन्जीत - अरे सॉरी भाई , तू तो बुरा मान गया - कहते हुए अब थोड़ी और दूर चला गया ।
राज - अच्छा सुनो , क्या हम मिल सकते हैं ?
डॉली ।- मिला तो मैं भी चाहती हूं लेकिन कैसे मिलेंगे ??
राज ( कुछ देर सोच कर ) - देखता हूं अगर छुट्टी का जुगाड़ हो जाए तो, फिर मैं और जय दोनों , आएंगे तुम्हारे शहर। डेढ़ सौ किलोमीटर दूर है ना ?
डॉली (हंसते हुए ) - कह तो ऐसे रहे हो कि डेढ़ सौ किलोमीटर नहीं सिर्फ डेढ़ किलोमीटर ही दूर है पर मैंने सुना है कि आर्मी वालों को छुट्टी बड़ी मुश्किल से मिलती है ।
राज - हां जी बिल्कुल सही सुना है पर तुमसे मिलने के लिए कुछ ना कुछ तिकडम तो लगानी ही पड़ेगी। अच्छा तुम्हारा पेपर कब है ?
डॉली - 1 अगस्त ।
राज - अभी तो 15 दिन है , देखते हैं क्या कर सकते हैं पर तुम बाद में मना मत कर देना कि नहीं मिल सकती।
, डॉली - नहीं , अभी तो मैं पूरा एक महीना यही हूं ।
राज - तो ठीक है ,मैं जय से बात करता हूं । दोनों मिलकर कुछ सोचते हैं कि क्या किया जाए ? तुम सो जाओ - कहते हुए उसने फोन काट दिया ।
डॉली अब सोने की कोशिश करने लगी लेकिन राज , जय से मिलने की खुशी में उसे अब नींद ही नहीं आ रही थी।
राज अब राठी की ओर बनावटी गुस्से से देखने लगा ।
राठी उसे छेड़ने के अंदाज में जय से बोला - कबीरे, भाभी है कैसी ?
जय - हां , अच्छी है ।
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राठी - तूने देखी नहीं है क्या ?
जय - नहीं , देखी तो नहीं है लेकिन बातें जरूर की है । बड़ी अच्छी बातें करती है तो पता चलता है कि साफ दिल की है।
राठी - तो गधे तूने उसे क्यों छोड़ दिया इस राज के लिए, तू ही पहले उसे पटा लेता । बार बार ऐसी अच्छी लड़की नहीं मिलती।
जय ( हंस कर ) - अरे मंजीते, अपने दोस्त के लिए तो मैं ऐसी सैकड़ों लड़कियां कुर्बान कर दूं । हम दोनों भाईयों के बीच कोई नहीं आ सकता ।
राज - क्यों करवा ली ना अपनी बेइज्जती ? सुन राठी, तू चाहे कितना भी जहर घोल ले मेरे और जय के बीच लेकिन तू हम दोनों को कभी भी अलग नहीं कर पाएगा । हम दोनों दोस्तों के बीच में तू तो क्या कभी कोई नहीं आ पाएगा।
, तू बहुत देर से तंग कर रहा है मुझे, अब देखता हूं तुझे - कहते हुए राज राठी की ओर भागा । राठी बचने को इधर उधर भागने लगा ।
राज - बडे मजे ले रहा था ना, रूक तु ।
राठी अब भाग कर जय के पीछे आ खड़ा हुआ - यार ये मजनू तो सच में पागल हो गया है, दोस्तों की जान का दुश्मन बना बैठा है ।
जय ( हंसते हुए) - अरे यार , मजाक कर रहा था ।
राठी दुखी सा मुँह बनाकर बोला - थोड़ा मस्ती मजाक तो चलता है इसमें इतना रूठने की क्या जरूरत है? तूने अगर मुझे हाथ भी लगाया तो मैं भाभी से तेरी शिकायत कर दूंगा फिर देखना वह तुझे कैसे सबक सिखाएंगी।
राज - जा छोड़ दिया तुझे , वह तो मैं अपने , भतीजे की वजह से छोड़ रहा हूं वरना वह कहेगा कि चाचू ने पापा को मारा।
राठी - बहुत-बहुत मेहरबानी जनाब ।
जय - जा मंजीते, आराम कर। अब हम ड्यूटी कर लेंगे।
राठी - ठीक है कबीरे, एक तू ही मेरा सच्चा दोस्त है जो मेरे बारे में सोचता है वरना यह तो मुझे रातों में जगाकर ड्यूटी करवा रहा है अपने प्यार के लिए - कहते हुए वह गुनगुनाता हुआ वहां से चला गया ।
राज - कमाल का इंसान है अपना राठी, पिछले 7 महीने में बेटे को देखने के लिए तरस गया है और तुझे पता है , ये पागल क्या कहता है ? कहता है कि दुश्मन की किसी भी गोली में इतना दम नहीं कि इस मंजीत राठी की सांस रोक दे ।
, दोनों दोस्त अब हँसने लगे।
जय - अच्छा यह बता, क्या बात हुई ? सब बढ़िया है ना?
राज - सब बढ़िया पर एक इच्छा है यार ।
जय - क्या?
राज - एक बार देखना चाहता हूं उसे, 7 साल हो गए डॉली को देखे हुए ।
जय - वह सब तो ठीक है लेकिन छुट्टी का भी तो जुगाड़ करना पड़ेगा ना तेरी।
राज - मेरी ? ये तेरी मेरी कब से होने लगा ? तुझे पता है ना, ड्यूटी के काम के अलावा मैं कहीं भी तेरे बिना नहीं जाता और फिर मैं डॉली से मिलने जा रहा हूं ।भूले मत कि वह तेरी भी दोस्त है , तु , भी तो देखना चाहता होगा उसे ? तु मुझसे अलग नहीं हो सकता कभी भी।
जय - जानता हूं और मैं खुद हमेशा तेरे साथ रहूंगा ।इतनी आसानी तेरा पीछा नहीं छोडूंगा लेकिन बात वही है यार - छुट्टी की परेशानी ।
राज - सिन्हा सर से बात करता हूं । कुछ होता है तो ??
जय - ठीक है , देखते हैं ।
अब दोनों वापस पेट्रोलिंग में लग गए।