• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Romance Sex kahani रंडी से प्यार

अध्याय 38

इंस्पेक्टर बड़े ही रौब के साथ हमारे पास आ रहा था वही मुखिया ने मुस्कुराते हुए कहा,

"अरे हरिया ,साले भीखमंगे की औलाद के पास इतना पैसा कहा से आया रे,तेरा बेटा चोर है पता नही साले ने इतना पैसा कहा से कमाया है अभी जब स्टेशन में ले जाकर डंडे पड़ेंगे तो सब उगलेगा"

मुखिया की बात से मेरे पिता बुरी तरह से डर गए थे,वही इंस्पेक्टर आकर मेरे कॉलर को पकड़ चुका था ..

मेरे पिता के मुह से निकल गया

"मालिक."

लेकिन वो कुछ और बोल पाते उससे पहले ही अविनाश ने उन्हें चुप करवा दिया और खुद बोलने लगा

"ये इंस्पेक्टर तू सरकार की खाता है या इस मुखिया का कुत्ता है ,जो इसकी एक बात पर यंहा दुम हिलाता हुआ चला आया.."

इंस्पेक्टर मेरा कॉलर छोड़ अविनाश की ओर मुड़ा वो अविनाश की बात से भन्ना गया था ..

"ये शहरी लड़के साले ज्यादा जुबान चल रही है तेरी... "

इंस्पेक्टर कुछ और बोलता उससे पहले ही अविनाश गरजा

"चुप कर भोसडीवाले तेरे जैसे दो कौड़ी के इंस्पेक्टर से डरेंगे हम लोग ,साले अपनी औकात में रह कर बात कर तू जानता नही तूने किसपर हाथ लगाया है ,जिसका तूने कॉलर पकड़ा है ना वो मेरा भाई है ,और मैं तेरा बाप हु ,रुक साले ."

अविनाश ने तुरंत ही अपना मोबाइल निकाला और किसी को फोन लगाने लगा,इंस्पेक्टर को जैसे सांप ही सूंघ लिया था,अविनाश ने चीजे इतने कांफिडेंस के साथ बोली थी की उसकी भी फटने लगी थी ,वही मुखिया भी मुह खोले सब देख रहा था,मुखिया ही क्यो सारे गांववाले भी अपना मुह फाड़े हुए थे.

"हैल्लो हा मंत्री जी ,हा मैं ठीक हु दोस्त के साथ गांव आया था,जी ,असल में एक इंपेक्टर मेरे दोस्त के साथ बत्तमीजी कर रहा है ,...जी ..ठीक है लीजिए बात कीजिये "

अविनाश ने फोन इंस्पेक्टर के सामने कर दिया ..

"ले गृहमंत्री है बात कर "

गृहमंत्री का नाम सुनकर वो कांपने लग गया था ..

"मुझे माफ कर दो सर "

वो गिड़गिड़ाया

"अरे बात कर साले "

अविनाश फिर से उसके ऊपर भड़का और उसने कांपते हुए हाथो से फोन पकड़ा

"जी ..जी सर ..समझ गया सर...सॉरी सर ...ओके सर ..ओके सर .."

बात करके उसने फोन अविनाश को पकड़ा दिया और अपने माथे में आया हुआ पसीना पोंछा ..और सीधे अविनाश एक पैरों में गिर गया

"सर गलती हो गई माफ कर दीजिए मैं इस मुखिया की बातों में आ गया था,इसने ही कहा था की बहुत गरीब घर का लड़का है और इतने पैसे इतने कम समय में कमाया है तो जरूर कोई गलत काम किया हुआ इसने शायद कोई कोई बैक वगेरह लुटा हो या कोई बड़ा घोटाला ,नही पता था सर की आप लोग तो इतने पहुचे हुए लोग हो "

अविनाश ने उसे उसकी बांहे पकड़कर उठाया .

"कोई बात नही लेकिन गरीबो का माजक बनाना बंद कर दो तुमलोग ,और ये मुखिया तुझे लगता है इसने जो पैसे कमाए है वो सब इसकी मेहनत के है ,जांच करवाऊं क्या ,पता चल जाएगा की इसने कितने काले कारनामे किये है "

मुखिया के चहरे का रंग ही उड़ गया वो सीधा मेरे पिता के पैरों में गिर गया

"मुझे माफ कर दो हरिया,गलती हो गई .."

उसकी इस दशा को देखकर मेरे होठो में मुस्कान आ गई लेकिन मेरे पिता तो ठहरे गांव के भोले आदमी

"नही मालिक ये आप क्या कर रहे हो ,आप तो मालिक हो आप तो हमारे अन्नदाता हो '

उनकी बात सुनकर मेरी नजर अविनाश पर पड़ी वो आंखों ही आंखों में मुझे इशारा किया जैसे कह रहा हो 'ये नही सुधरेंगे '

***************

रात गई बात गई और हम शहर के लिए निकल पड़े ,मा पिता जी के आने के बाद मैंने अपने दो मंजिला घर का उद्घाटन किया और फिर शुरू हो गई मेरी शादी के तैयारियां,हमने प्लान किया था की पहले शादी कोर्ट में करेंगे फिर एक रिसेप्शन शहर में फिर जब गांव का घर बन जाए तो फिर वंहा रीति रिवाज से फिर से शादी करेंगे ..

काजल खुश थी बहुत ही खुश थी ,मैं भी खुश था,काम भी अच्छे से चल रहा था ,शादी की तारीख भी पास आ रही थी ..काजल अभी तरुणा के साथ ही रहती थी लेकिन अधिकतर समय हमारे घर में ही बिताती थी,वही अविनाश भी होस्टल नही छोड़ना चाहता था उसी की वजह से तो वो नेता बना था,मेरे दोस्त भी हमारे घर आते जाते रहते थे,

मेरे माता पिता भी शहर के वातावरण के साथ होतदे कंफरटेबल हो रहे थे,वो आसपास घूमने जाते ,बाजार जाय करते और पास के ही पार्क में बैठा करते सब कुछ ठीक चल रहा था,वो मेरे साथ यंहा रहने को भी राजी हो गए थे लेकिन कहते है ना की जब किस्मत में लगे हो लौड़े तो कहा से मिलेंगे पकोड़े ....

माँ पिता जी एक दिन शाम गार्डन से घूम कर आये लेकिन इस बार उनका चहरा उतरा हुआ था वो बेहद ही दुखी लग रहे थे.

"क्या हुआ माँ ऐसे क्यो मुह उतार कर रखे हो "

मैं माजक में उनसे बोला

"बेटा .."

माँ की आवाज कांप रही थी जैसे वो कुछ कहना तो चाहती थी लेकिन कह नही पा रही थी .

क्या हुआ मा..मुझे भी उनकी आवाज से बात की गहरी का आभास हुआ ,मैं उनके साथ सोफे में बैठ गया ..

"वो बेटा ."

वो फिर से बोलने को हुई लेकिन कुछ नही बोल पाई

"हा बोलो ना "

उन्होंने पिता जी की ओर देखा ,मैंने भी उनकी ओर देखा ,उनका चहरा मानो गुस्से से धधक रहा था ..

"क्या हुआ पिता जी "

अब मुझे भी डर लगने लगा था ,उन्होंने एक बार मुझे देखा जैसे आंखों में आग लिए हो ,मैं बुरी तरह से डर गया था

"क्या सर रही हो इससे बोल दो ना "

उन्होंने मा को देखा लेकिन वो कुछ नही बोल पाई बल्कि उनके आंखों में आंसू जरूर आ गए मैं बेहद ही असमंजस के भाव से दोनों को देख रहा था ..

"तेरी माँ और मैंने ये फैसला किया है की काजल से तेरी शादी नही हो सकती "

"क्या ???"

ऐसा लगा जैसे कोई आसमान ही मेरे ऊपर टूट पड़ा हो .

'ये...ये आप लोग क्या कह रहे हो .."मेरी आवाज लड़खड़ा रही थी

"हम सही कह रहे है ,हम इतने भी बेगैरत नही है की एक जिस्म बेचने वाली से अपने बेटे की शादी करवा दे "

पिता जी की बात से मैं बुरी तरह से चौका था की एक आहट ने मुझे और भी जोरो से चौका दिया था ,दरवाजे पर काजल खड़ी थी ,उसकी आंखों में आंसू था और चहरे में बेहद ही गहरे दर्द का भाव ..

"काजल '

मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही वो मुड़ी और भागी,मैं उसकी ओर भागने ही वाला था की किसी के हाथ ने मेरे हाथो को थाम लिया ,वो मेरे पिता जी थे...उनकी आंखे अब भी जल रही थी और साफ साफ बता रही थी की वो क्या चाहते है ,वो नही चाहते थे की मैं काजल के पीछे जाऊ,

एक ओर वो लोग थे जिन्होंने मुझे अपना पेट काटकर पढ़ाया लिखाया था जो मेरे लिए देवता के समान थे तो दूसरी ओर मेरी काजल थी जिसके कारण ही तो इस मुकाम में पहुच पाया था,जो मेरा प्यार थी मेरा सहारा थी मैं बस इसी असमंजस में फंसा हुआ बस कभी दरवाजे को देख रहा था तो कभी अपने मा बाप को ......
 
अध्याय 39

काजल जा चुकी थी और मैं बस देखता ही रह गया ..

मेरे मा और पिता जी गांव जाने की जिद कर रहे थे,वो मुझसे काजल के विषय में कोई भी बात नही करना चाहते थे,कुछ आधे घण्टे ही हुए थे की मेरे घर के सामने एक गाड़ी आकर रुकी ,

और अविनाश के साथ तरुणा अंदर आयी ..

अविनाश सीधे मेरे पिता जी के पैरों में जा बैठा था .

"बापू पता नही की आपको क्या पता चला है ,लेकिन यकीन करे ये उसकी बीती जिंदगी थी,और वो राहुल से बेहद ही प्यार करती है "

मेरे पिता जी उसका चहरा भी नही देख रहे थे.

"ये हमारे घर का मामला है ,अच्छा होगा की हमे अकेले छोड़ दो "

मेरे पिता ने बस इतना ही कहा

"वो बहुत अच्छी लड़की है ,इनकी शादी मत तोड़ो ये दोनों एक दूसरे के बिना जिंदा नही रह पाएंगे "

अविनाश के आंखों में आंसू थे,लेकिन मेरा बाप हंसा

"वाह बेटा तुम तो अपने को राहुल का दोस्त बोलते हो ,और ऐसी लड़की के साथ उसकी शादी करवाने को राजी हो गए,अगर तुम्हारा कोई अपना होता ना तो तुम्हे पता चलता की इज्जत क्या चीज होती है ,वो लड़की जिसे दुनिया रंडी कहती है ,जिसका नंगा जिस्म सारे दुनिया के सामने नुमाया हो रहा है,लोग मोबाइल में जिसे देख रहे है,उसे तू हमारे घर की इज्जत बनाना चाहता है ,ये हरगिज नही होगा,और अगर इसे उस लड़की से शादी करनी है तो ....तो इसे हमसे हमेशा के लिए रिश्ता तोडना होगा "

मेरे पिता जी के चहरे से मानो आग उगल रहा था,मैं जानता था की वो एक गरीब मजदूर जरूर है लेकिन अपने उसूलों के पक्के भी है,उन्होंने जो ठान लिया वो ठान लिया,एक सच्चे और सीधे आदमी के साथ यही सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी दोनों ही होती है की वो अपने उसूल के सामने दुनिया की कुछ भी नही सुनते..

अविनाश मानो उनके पैरों में गिर ही गया था,उसने अपना सर पिता जी के पैरों में गिरा दिया .

"अपने कहा की मेरा क्या रिश्ता है तो सुनिए वो मेरी बहन है ,और उसके इस हालत का मैं ही जिम्मेदार हु मेरे ही कारण उसकी ये हालत हुई है ,वरना .."

अविनाश फुट फुट कर रोने लगा था ,मैं और तरुणा तुरंत ही उसके पास आकर उसे दिलासा दिलाने लगे लेकिन अविनाश के दिल से मानो कोई ज्वालामुखी सा फुट गया था ,उसके रोने में वो करुण भाव था की एक बार को मेरे पिता भी गल से गए थे वही मेरी माँ तो अभी भी अपने ही आंसुओ को सम्हाल रही थी और अवाक सी बस अविनाश की ओर देख रही थी ..

"मेरी प्रिया कितनी प्यारी लड़की थी ,पूरे घर की दुलारी थी ,लेकिन मेरे ही कारण वो काजल बनी ,मेरी ही गलती थी की उसे ऐसा काम करना पड़ा ,मेरी गलती की सजा मेरी बहन को मत दो ,वो राहुल से प्यार करती है ."

अविनाश रोये जा रहा था,उसने कभी काजल को अपनी बहन नही कहा था लेकिन आज कह रहा था,आखिर मामला क्या था लेकिन जो भी था उसके बातों की सच्चाई उसके आंखों से आता हुआ पानी बयान कर रहा था वही उसके चहरे के भाव चीख चीख कर सच्चाई कह रहे थे..

अविनाश थोड़ा सामान्य हुआ और फिर उसने कहना शुरू किया ..

"प्रिया और मेरे पिता बहुत ही अच्छे दोस्त थे,उनकी अकस्मात मौत के बाद प्रिय हमारे ही साथ रहने लगी ,हम एक ही उम्र के थे ,मैंने कभी उसे बहन नही कहा ,असल में मेरे घर वाले चाहते थे की वो उनके घर की बहु बने,हमे ऐसे ही पाला गया था ,हमारे बीच प्रेम का रिश्ता तो था लेकिन उसे कोई नाम नही दिया गया था ,मेरे घर वाले नही चाहते थे की मैं उसे बहन कहु ,इस रिश्ते को हमने दोस्ती का नाम दे रखा था,मै उसे अपने जान से ज्यादा चाहता था वही वो अपनी जान मुझपर लुटाती थी,हमे एक दूसरे के आंसू और तकलीफें बर्दास्त नही थे ,हम जवान हुए और स्कूल के दिनों में मेरे जीवन में एक लड़की आयी ,नाम था काजल ...मुझे नही पता था की ये बस एक छलावा थी ,मैं एक बड़े बाप का लड़का था और उसे मुझसे नही मेरे पैसों से प्यार था लेकिन उस लड़की ने मेरे अंदर अपने लिए प्यार जगाया और मैं पीछे पागलों की तरह भागने लगा,प्रिया को जब इस बात का पता चला तो उसने मेरे कारण काजल से दोस्ती कर ली ,हम खुश थे लेकिन हमे क्या पता था की उस दोस्ती का ये सिला हमे मिलेगा,असल में काजल एक बहुत ही कमीने इंसान शकील की रखैल जैसी थी ,उसने पैसे के कारण मुझे प्यार के जाल में फसाया था लेकिन जब शकील की नजर प्रिया पर पड़ी तो वो उसे पाने को बेताब हो गया ,बेचारी मेरी प्रिय काजल के साथ इसी उम्मीद में रहती थी की वो मेरा प्यार है लेकिन उसे क्या पता था की उसे भी फसाया जा रहा है ,कजाल तो मेरी नही हो सकी लेकिन शकील ने प्रिय को पाने की बहुत कोशिस की लेकिन प्रिय ने उसे हर बार मना कर दिया लेकिन मेरे प्यार के कारण उसने कभी शकील का जिक्र मुझसे नही किया,उसे यही लगता था की शकील काजल का भाई है और जैसे बहन की आम आवारा आशिकों को अपने बहन की सहेलियों से लगाव हो जाता है वैसे ही शकील को भी उससे हो गया है ,आखिर वो वक्त आया जब शकील ने प्रिया और काजल को अपने घर बुलाया,प्रिया इसी भरोसें में उसके साथ चली गई की उसकी सहेली का भाई उसे बुला रहा है और उसकी सहेली उसके साथ है,लेकिन वंहा शकील के प्रिया को कोई मादक दवाई देकर उसके साथ जबरदस्ती की और मुझे बुलाकर ये सब दिखाया गया ,मुझे नही पता था की ये शकील ही था लेकिन मुझे प्रिया से उस वक्त नफरत सी हो गई ,मुझे लगा की वो एक बतचलन लड़की है ,मुझे काजल ने बताया की वो ऐसा पैसों के लिए कर रही है और वो एक रंडी है ,मुझे उसी दिन से रंडियों से चिढ़ सो हो गई मैं अब प्रिया का चहरन भी नही दिखना चाहता था,लेकिन फिर दिन बीते लेकिन प्रिय घर नही आयी ना ही काजल कभी लौट कर आई ,मैंने पता किया तो मुझे काजल की सच्चाई का पता चला की वो खुद किसी और की रंडी थी ,और दौलत वालो को फसाना उसका पेशा था ,तब मुझे समझ आया की मेरी प्रिया इन सबके जाल में फंस गई है मैंने उसे बहुत ढूंढा लेकिन वो कही नही मिली ,अब वो प्रिया से काजल बन चुकी थी ,फिर आपके बेटे की वजह से वो मुझे मिल गई ,शकील ने उसके ऊपर इतनी ज्यादती की है की अगर कोई सुन ले तो उसकी रूह कांप जाए ,फिर उसके जीवन में राहुल आया ,एक ऐसा लड़का जो उसकी हर हकीकत जानते हुए भी उसे प्यार करता है,ये दोनों एक दूसरे के प्यार में पड़ गए और आज हम आपके सामने है ..."

अविनाश की बात सभी बड़े ही ध्यान से सुन रहे थे,लेकिन किसी ने कुछ भी नही कहा

"मैंने ये कभी नही कहा,मैंने आज तक मेरे और प्रिया के रिश्ते को कोई नाम नही दिया ,लेकिन आज आप कह रहे हो की मेरा उससे रिश्ता क्या है तो मैं कहता हु,अपने दिल की गहराइयों से कहता हु की प्रिय मेरी बहन है ,हमारा रिश्ता इतना ही पवित्र और प्यार से भरा हुआ है जैसे किसी भाई बहन का होता है,उसने मेरे लिए बहुत कुर्बानियां दी है मैं उसे और दुख में नही देख सकता,उसके लिए जीवन की एक ही उम्मीद है वो है राहुल ,उसे और कुछ नही चाहिए उसे बस एक आम लड़की की तरह जिंदगी जीने का एक मौका चाहिए और वो मौका आप दे सकते है,इनके प्यार के दुश्मनों ने इन्हें अलग करने की कई कोशिशें की थी ,उनमे एक को अपने मोबाइल में देखा लेकिन आप ही मुझे बताइए की आखिर इसमें उस बेचारी की गलती क्या थी ??,उसे बंधक बना लिया गया था उसके साथ ज्यादती की गई ,जो एक सहानभूति की काबिल है उसे आप घृणा की दृष्टि से देख रहे है...मैं आपसे अपनी बहन के जीवन की भीख मांगता हु उसके जीवन में बस तकलीफें ही तकलीफें रही है मैं उसकी खुसी आपसे मांगता हु ,मैं आपका राहुल आपसे मांगता हु ...इन दोनों को जुदा मत कीजिये ये एक दूसरे के बिना मर जाएंगे."

अविनाश रोता हुआ मेरे पिता के पैरों को जकड़ लेता है ..

"लेकिन समाज का क्या ???"

मेरे पिता ने अनायास ही कहा

"समाज किस समाज की बात कर रहे हो बापू तुम,जो एक बेसहारा लड़की के जिस्म को भोगता है और उसे ही रंडी कहकर तिरिस्कार की नजरो से देखता है,ऐसे समाज की चिंता है तुम्हे ,जिसने काजल को जिस्म बेचने पर मजबूर किया उसे कभी किसी ने कुछ नही कहा,जिसने ये वीडियो बनाया,जिसने ज्यादती की उसे ये समाज कुछ नही कहता और जो इन ज्यादतियों का शिकार हुआ उसे ही समाज गालियां दे रहा है ,और अगर ऐसा है तो मैं इस समाज को और इसके नियमो को नही मानता,आप मेरे लिए भगवान के समान हो लेकिन मेरी काजल से तो मुझे कोई भगवान भी जुदा नही कर सकता ...."

मेरी बात सुनकर मेरे पिता सकते में आ गए थे ,आखिर उन्होंने चिल्लाकर कहा

"आज तो तू उसके प्यार में है लेकिन जब जिंदगी भर रास्ते में जाते हुए लोग तुझे एक रंडी का पति कहकर बुलाएंगे तो क्या ,ये कलंक लेकर तू जी पायेगा "

मेरे पिता भी भावुक हो गए थे उसके आंखों में ना सिर्फ आंसू थे बल्कि उनकी आवाज भी धीमी पड़ गई थी

मैं उसके चरणों में बैठ गया था ..

जो लोग किसी लकड़ी को रंडी कहते है उन्हें पहले ये सोचना चाहिए की वो लड़की रंडी क्यो है ,वो इसी समाज के किसी व्यक्ति के कारण एक रंडी है जो उसके जिस्म को भोगता है,लेकिन समाज उस इंसान को कुछ नही कहता जिसके कारण एक लकड़ी रंडी बनती है ,और अगर कोई कहे की मैं एक रंडी का पति हु तो भी मेरे लिए ये कोई जिल्लत की बात नही होगी क्योकि मुझे पता है की रंडी होना क्या होता है ,रंडी वो है जो इस समाज में फैले हुए वासना के आग को अपने जिस्म से बुझती है,जिस्म का शोदा तो हर जगह किया जाता है,कोई पैसे के लिए तो कोई पॉवर के लिए,और यंहा तक की लड़के भी दहेज की लालच में शादी करके अपना जिस्म बेच रहे है ,लेकिन समाज उन्हें तो ऐसे नामो से नही बुलाता ..."

सभी शांत थे बस शांत थे लेकिन ना जाने सबके अंदर क्या तूफान चल रहा था..

"तू प्यार में अंधा हो गया है पढ़ लिख कर और भी बेवकूफ हो गया है तुझे वो नही दिख रहा है जो सामने है मटर भविष्य क्या होगा बेटा उस लड़की से शादी करके "

मेरा बाप आखिर फुट ही गया था वो रोये जा रहा था,मेरी मा रो रही थी ,अविनाश रो रहा था,तरुणा रो रही थी और मैं भी ,इस कमरे में भावनाओ का तूफान सा आ गया था सभी के आंखों में आंसू थे लेकिन सबके अलग कारण थे ..

पिता जी की बात से मेरे होठो में एक अजीब सी मुस्कान खिल गई

"आप मेरे भविष्य की बात कर रहे है ,जब मैं गांव से यंहा आया तो क्या था,मैं आज जो भी हु वो इसी लड़की की वजह से हु,इसके प्यार ने मुझे हिम्मत दी वो करने की जो मैं सोच भी नही सकता था,मेरा भविष्य तो इसी के साथ है बापू,मुझे फर्क नही पड़ता की वो क्या थी मुझे बस इस चीज से फर्क पड़ता है की वो क्या है ,और वो मेरा प्यार है ,मेरी जान है ,मेरा सब कुछ वो ही है ,वो है वो मैं हु,उसके बिना मैं जिंदगी की कोई कल्पना भी नही कर सकता..

आप लोगो ने मुझे जन्म दिया मेरे लिए इतना कुछ किया आप मेरे भगवान है लेकिन उसने मुझे जीना सिखाया है मुझे जिंदगी का मतलब बताया है,आप का कहा मैं नही टाल सकता ,आप कहो तो मैं ये शादी नही करूंगा लेकिन ....आपका बेटा सिर्फ उसका है उसके सिवा किसी और का नही हो सकता ,और मेरी जिंदगी भी सिर्फ उसकी है उसके सिवा किसी और की नही हो सकती ..."

मेरी बात से वंहा बस शांति थी मेरे पिता ही नही कोई भी कुछ बोलने के हालत में नही था ...

तभी तरुणा का मोबाइल बज उठा ..

"क्या????????"

वो जोरो से चिल्लाई

"क्या हुआ "मैं और अविनाश एक साथ उसे देखने लगे

"काजल .....काजल ने जहर खा लिया है "
 
अध्याय 40

वही हॉस्पिटल अब तो इस हॉस्पिटल का सारा स्टाफ भी मुझे और काजल को पहचानने लगा था ,आज काजल फिर से वहां थी,हमे बाहर तरुणा की सहेली मिल गयी जिसने काजल को यंहा लाया था,थोड़ी ही देर बाद डॉ ने हमे काजल से मिलने की इजाजत दे दी..

"ये क्या बचपना है काजल क्यो किया तुमने ऐसा "

मैं काजल के पास ही बैठा था ,वो आंखे खोले मुझे प्यार से देख जरूर रही थी लेकिन उसकी आंखों में अब भी दर्द साफ दिखाई दे रहा था .

"राहुल तुम्हे यंहा नही आना चाहिए था,तुम्हे मा-पिता जी के साथ ही रहना चाहिए था,तुम्हारे यंहा आने से उन्हें बुरा लगेगा.."

उसकी बात से मैं मुस्कुरा उठा ,

"तुम्हे क्या मेरे मा-पिता जल्लाद लगते है ,वो भी इंसान है और उनके सीने में भी दिल है ,वो भी मेरी खुशी चाहते है और वो भी मेरे साथ यंहा आये है बाहर ही बैठे है ."

मेरी बात से वो थोड़ी घबरा सी गई

"राहुल पिता जी सही कह रहे थे मैं तुम्हारे लायक नही हु "

"तूम पागल हो गई हो क्या,मैं आज जो भी हु वो तुम्ही ने तो बनाया है मुझे और अब तुम कह रही हो की तुम मेरे लायक नही हो ,अरे पागल हम तो बने ही एक दूसरे के लिए है "

"नही राहुल वो सही कह रहे थे,जीवन भर दुनिया तुम्हे ताने मारेगी ,हम जंहा भी रहे मेरी सच्चाई दुनिया से छिप नही सकती ,उन्होंने सही कहा राहुल की मैं एक रंडी हु.."

"मुझे दुनिया की कोई फिक्र नही है काजल ,मैं तो बस तुम्हारा साथ चाहता हु ,और तुम्हे किसने कहा की तुम रंडी हो तुम तो एक देवी हो जिसने मुझे इतना प्यार दिया इतना दुलार दिया,इस अदन से इंसान को तुमने क्या बना दिया .."

"राहुल मैं तुम्हारे लिए कुछ भी हो सकती हु लेकिन ये दुनिया,ये तो मुझे उसी नजरो से देखेगी ,उसके लिए तो मैं वही रंडी हु जिसका वीडियो आज सभी लोग देख रहे है ,मैं दुनिया के सामने नंगी हो चुकी हु राहुल ,मैं अपने स्वार्थ के कारण तुम्हारा भविष्य खराब नही कर सकती .."

"ओह तो तुम इसलिए अपनी जान देने निकल गई "

काजल सकपकाई और नीचे देखने लगी ,मैंने उसके चहरे को अपने हाथो से सहलाया ,उसकी इस हालत को देखकर मेरा दिल भर आया था.

'तुम मेरी जान हो काजल ,और ये दुनिया मुझे तुमसे अलग नही कर सकती ,अगर मैं तुम्हारा नही हुआ तो और किसी का नही होऊंगा...और किस दुनिया के तानों से डर रही हो तुम ,उन लोगो से जो खुद ही इंटरनेट से ढूंढ ढूंढ कर तुम्हारे वीडियो निकाल कर देख रहे है,या उन नामर्दो से जो किसी लड़की की इज्जत लुटता देख कर भी मजे ले रहे है,या उन लोगो से जो खुद पैसे देकर अपनी हवस मिटाते है और फिर उन्ही को रंडी कहकर जलील करते है,नही काजल उन लोगो के ताने ना मेरे लिए कोई अहमियत रखते है ना ही तुम्हारे लिए रखने चाहिए ,इनका खुद का कोई जमीर नही है तो वो दूसरे को क्या जमीर की शिक्षा देंगे...मैं तुमसे प्यार करता हु और तुम मेरे लिए मेरी जान हो ,क्या तुम मेरी जान को मुझसे दूर कर दोगी ."

एक बार फिर से हमारी आंखे मिली लेकिन इस बार उसकी आंखों में दर्द नही था बल्कि अपार प्रेम था,वो मेरे गालों को सहलाते हुए उसे अपने पास लाई और हमारे होठ आपस में मिल गए ,ना जाने कितनी देर हम इस अहसास में ही डूबे हुए थे की दरवाजा खुला और किसी के खांसने की आवाज से हम दोनों अलग हुए ,वो मेरे मा-पिता जी थे .

"बेटी हमे माफ कर दो ,हम तुम दोनों के प्रेम को समझ नही पाए,मैं तो एक जाहिल मजदूर हु मुझे हीरे और कोयले में कोई फर्क समझ नही आया ,मुझे अपने बेटे की पसंद पर गर्व है बेटी ,एक वादा करो अब कभी मेरे बेटे को छोड़कर यू जाने की सोचोगी भी नही .."

मेरे पिता जी भावुक हो गये थे वही मा ने अपने आंखों से कजाल निकाल कर मेरी काजल के माथे में लगा दिया ...

****************

ल गयेला जब लिपिस्टिक हिलेला आधा डिस्टिक .

डीजे के शोर में गाना अपने जोर पर था ,तभी मेरे पास खड़े संजय सर कह उठे .

"ये तेरे शादी की पार्टी कम और डांस बार ज्यादा लग रहा है,कौन है ये सब लडकिया जो इतने घण्टो से पागलों जैसे नाचे जा रही है,और इस साले प्यारे को तो देखो ऐसे लग रहा है जैसे बार में कोई शराबी आ गया है "

उनकी बात सुनकर मैं हँस पड़ा,मैं और काजल अभी अपने शादी के रिसेप्शन में स्टेज पर थे ,

"अरे सर ये सभी काजल की पुरानी दोस्त है आज कल सभी मॉडल बन गई है ,और प्यारे इनका डारेक्टर "

"ओह तो इस काम में बिजी है ये जनाब आजकल "

"कभी तू भी पुस्तक से बाहर निकल जाया कर "

इस बार अविनाश था जो संजय सर के पास आ खड़ा हुआ था वो पसीने से पूरी तरह भीगा हुआ था ..

"अरे सर आप तो जानते हो .."

"बेटा मैं कुछ नही जानता आज तो तू पियेगा भी और नाचेगा भी "

संजय सर मानो वंहा से भागने को हुए लेकिन अविनाश और उसके दोस्तो ने उन्हें उठा ही लिया और शराब की एक बोतल उनके मुह में डाल दी अब वो मेरी तरफ बड़े मैं समझ गया था की क्या होने वाला था उन्होंने हमे भी उठाकर डांस फ्लोर में ला दिया .

मैं नाच रहा था काजल नाच रही थी ,मेरे माता पिता,शबनम ,प्यारे,अविनाश,चंपा मौसी,तरुणा, संजय सर,और हमारे कई दोस्त सभी नाच रहे थे.

सभी ने मिलकर मुझे और काजल को एक दूसरे की तरफ धकेल दिया ,काजल मेरे बांहों में थी उसके आंखों में पानी था .

हम उस शोर से थोड़ी दूर खड़े हो गए वंहा शांति थी क्योकि पार्टी तो खत्म हो चुकी थी बस डीजे चल रहा था और कुछ खास दोस्त बस रुके हुए थे...काजल को मैंने फिर से अपनी बांहों में भर लिया था ...

"यकीन नही होता की ये सच है "

उसने मेरे कानो में कहा ,

"अच्छा एक किस लेके देखो तो की पता तो चले की सच है या सपना "

उसने मेरे छाती पर एक जोर का मुक्का मारा ,तभी हमारे कानो में कुछ आवाज पड़ी ..

"अबे जानता है ये वो ही लड़की है जिसका वीडियो बना था ,सुना है पहले रंडी थी शकील भाई के चाल वाली "

कोई आदमी घिनोनी सी हंसी लिए बोल रहा था,

"हा सही है बड़ा अच्छा मुर्गा फसाया है साली ने ,और वो भी कैसा चूतिया है जो एक रंडी से प्यार कर बैठा "

दोनों ही जोरो से हँसने लगे

"ना जाने साली रांड कितनो से चुदी होगी, साला दूल्हा तो कड़ाई में चम्मच चलाएगा "दोनों फिर जोरो से हंसे

उनकी बात सुनकर मेरा खून ही ख़ौल गया ,वो दोनों वंहा के वेटर थे ,मैं गुस्से में आग बबूला होकर उधर जा ही रहा था की काजल ने मुझे और भी जोरो से जकड़ लिया .

"इन मादरचोदों को तो मैं .."

काजल ने मेरे होठो में उंगली रख दी

"अब एक रंडी से प्यार किया है तो ये सब बाते तो होती ही रहेगी,"

इतना सुनने के बाद भी उसके होठो में मुस्कान ही थी ..

"तुम फिर से शुरू हो गई "

"आपका अतीत आपका पीछा कभी नही छोड़ता राहुल ये सच्चाई है,लेकिन मैंने तुमसे ही सीखा है की अतीत को पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाना चाहिए चाहे वो हमारा पीछा क्यो ना छोड़े "

"लेकिन .."

उसने फिर से मेरे होठो में उंगली टिका दी

"अगर दुनिया की बातों से तुम्हे कोई फर्क पड़ता है तो हमे अगल हो जाना चाहिए "

"ये क्या बोल रही हो .."

"सच बोल रही हु,अगर तुम ऐसे लोगो की बातों में आकर गुस्सा करोगे तो मुझे प्यार कब करोगे ,दुनिया में ऐसी सोच के लोग मिलेंगे ही राहुल,दुनिया इनसे भरी हुई है ,हमे इनसे फर्क नही पड़ना चाहिए हमे तो बस इस बात से फर्क पड़ना चाहिए की हम एक दूसरे से प्यार करते है या नही और मैं तुमसे बहुत प्यार करती हु "

काजल की आंखों में आंसू थे मैंने अपने होठो से उसके आंसू को पी लिया .

"पगली कही की बात बात पर रो देती है "

"पगली हु या जैसी भी हु अब तुम्हारी हु,बस तुम्हारी हु "

हम दोनों एक दूजे के आंखों में गहराई से देख रहे थे ,जैसे हमारे रूह भी एक हो गए हो हमारे होठ अपने ही आप मिल गए ,जब हम अलग हुए तो दिल में कोई दुख नही था बस पाने की खुसी थी अपना प्यार पाने की ...दोनों के ही होठो में मुस्कान थी .

"अब चले सब ढूंढ कर रहे होंगे "काजल ने धीरे से कहा

"ह्म्म्म ,यार उस वेटर ने जो कहा ,कढ़ाई में चम्मच चलाना इसका मतलब क्या होता है "

मुझे सच में ये बात समझ नही आयी थी ,लेकिन काजल जोरो से हँस पड़ी .

"तुम सच में चूतिया ही हो ,अब चलो जल्दी "

अब उसका मतलब जो भी हो लेकिन मेरी काजल की हंसी सुनकर और उसके मुह से ये शब्द सुनकर ऐसा लगा जैसे मुझे जन्नत ही मिल गई ,मैं चाहता था की वो ऐसे ही हंसते रहे और मुझे कहती रहे ..

'तुम सच में चूतिया हो ..'

**************** समाप्त ***************
 
Back
Top