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Romance Sex kahani रंडी से प्यार

अध्याय 18

काजल के कोमल होठ मेरे होठो में थे,उसके होठो का स्पंदन मेरे दिल की धड़कनों के साथ साथ ही बढ़ने लगे थे,हमे जैसे ही अपने स्तिथि का आभास हुआ हम अलग हुए,काजल शर्म से मुझसे नजर ही नही मिला पा रही थी ,वही स्तिथि मेरी भी थी लेकिन मैं अगल बगल झांकने लगा,काजल के चहरे पर इतना गहरा शर्म मैंने आजतक नही देखा था ,उसकी कोमल आंखे नीची झुकी हुई थी ,होठो में अब भी हल्की हल्की हलचल मालूम पड़ती थी ,इतने दिनों से दोनों के दिल में जो प्यार की लहर चल रही थी वो आज प्रगट हुई थी,आज इस खुसी के मौके पर जब मैंने अनजाने में ही सही लेकिन कुछ ही घंटो में इतना पैसा कमा लिया था,और इसी खुशी में हम फिसल गए..

मैं वंहा से तुरंत ही उठा और बाहर को निकल गया मैं नही चाहता था की मेरे कारण काजल और भी असहज हो जाए .

मैं बाहर खड़ा हुआ नीचे को देख रहा था,मैं अपने को रोकने की बहुत ही कोशिस कर रहा था लेकिन साली जुबान से मुस्कान थी की जा ही नही रही थी,तभी मुझे लगा की कोई मेरे पीछे आकर खड़ा है,

"अब यंहा क्या देख रहे हो .."

वो काजल ही थी,वो शायद मुझे सहज करने की गरज से यंहा आयी थी ..मैंने उसके चहरे को देखा लगा जैसे आंखों में कुछ नमी हो लेकिन होठो की मुस्कान भी एक अलग ही कहानी कह रही थी,

"कुछ नही बस यही सोच रहा हु की जो हुआ वो ..."मैं आगे नही बोल पाया

"क्या हुआ ??"काजल के चहरे में मासूमियत और आंखों में शरारत ने घर कर लिया था,मैं भी थोड़ा चौका ..

"मतलब..जो अंदर हुआ "

"वही तो पूछ रही हु की क्या हुआ "

उसके होठो में अब मुस्कान साफ साफ दिख रही थी साथ ही आंखों में एक शरारत भी थी,

"बोल के बताऊँ या करके "

मैं भी पीछे थोड़ी ना रहने वाला था,मेरी बात सुनकर वो बुरी तरह शरमाई

"धत्त कुछ भी "

वो बस इतना ही बोलकर मेरे बाजू में आकर खड़ी हो गई ,मैं उसके उस हसीन चहरे को ही देख रहा था,एक बार उसने मुझे देखा और आंखों से ही पूछा की क्या देख रहे हो ,मैंने भी सर हिला कर कह दिया की कुछ नही ..

वो सामने देखने लगी ,कही आसमान में ना जाने वो क्या देख रही थी ,उसके चहरे में आयी हुई मुस्कुराहट धीरे धीरे गुम होने लगी थी,उसका चहरा संजीदा होने लगा था,मैं उसके भाव को पढ़ रहा था,हमारे बीच जो हुआ वो महज एक इत्तेफाक ही तो था लेकिन देखा जाए तो ये कोई इत्तफाक नही था,इतने दिनों से हम साथ थे,हम एक दूसरे को चाहने लगे थे,मन ही मन ही सही लेकिन दोनों को ही पता था की हमारे अंदर क्या चल रहा है,हम इसे दोस्ती का नाम दे रहे थे लेकिन ये दोस्ती से कुछ अलग था,बस इसे व्यक्त करने का एक माध्यम हमे मिल गया था और वो ही हुआ जो होना था,भावनाओ के तूफान ने हमे डुबो दिया था..

काजल का संगीन चहरा देखते ही देखते बदल रहा था,उसके आंखों में कुछ आंसुओ की बूंदे आने लगी थी,उसने मुड़कर मुझे देखा मैं अब भी उसके चहरे को देख रहा था,

मुझे अपनी ओर देखता हुआ पाकर वो थोड़ी हिचकिचाई और आंखों से आंसू को पोछते हुए तुरंत ही अपने कमरे में चली गई ,मैं भी उसके पीछे बढ़ा.

वो कमरे में अपने बिस्तर पर पाव सिकोड़े बैठी थी ,मैंने उससे कुछ भी नही कहा और उसके करीब जाकर बैठ गया.

"जो हुआ वो भूल जाओ राहुल ,सोचो जैसे कुछ हुआ ही नही.."

उसने मुझे देखे बिना ही कहा था

"क्या नही हुआ "मैं उसके होठो में मुस्कान लाने की गरज से बोला,उसने एक बार मुझे देखा और उसके होठो में कोई भी मुस्कान नही थी,उसका चहरा संजीदा ही था..

"यही की हम एक दूसरे से प्यार करते है,ये नही हुआ हमारे बीच ...हम एक दूसरे से प्यार नही कर सकते राहुल .."

उसके आंखों से जैसे बांध सा टूट गया था,उसके आंसू बहते ही चले गए ..वो अपना सर छिपकर सिसक रही थी..मैं उसके और भी करीब जा चुका था..

"काजल..ये मैं कैसे मान लू की मैं तुमसे प्यार नही करता,मेरी आंखों में देखो तुम्हे क्या लगता है .."

उसने मेरी आंखों में नही देखा ,वो तो अब भी वैसे ही सिसक रही थी..

मैंने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा

"बोलो ना काजल ,देखो ना मेरी आंखों में "

"मुझे कुछ नही देखना..प्यार रंडियों के लिए नही होता राहुल "

मेरे दिल में उसकी बात सुनकर एक टिस सी उठी थी मैं उसका सर उठना चाहता था लेकिन वो उठा ही नही रही थी वो मुझे देखना ही नही चाहती थी,

"मेरे लिए तुम कोई रंडी नही हो काजल "इस बार मेरी आवाज भर्राई हुई थी मैंने अपना रोना रोके रखा था.उसने अपना सर उठाया लेकिन इस बार उसकी आंखे लाल थी वो मुझे अजीब निगाहों से गहरे जा रही थी...

"तुम अब पैसे कमाने लगे हो ,तुम एक दिन बहुत बड़े आदमी बनोगे,दुनिया तुम्हारे कदम चूमेगी तुम्हारे पास तुम्हारा भविष्य है ,तुम इसे ऐसे बर्बाद नही कर सकते ..मैं इसे बर्बाद होने नही दूंगी .."

उसने मानो एक गर्जना की ,ऐसा लगा जैसे उसके आंसू सुख चुके है उसके चहरे में एक अजीब सा संकल्प था और मैं उस संकल्प से मानो डर ही गया..

"तुम मुझसे प्यार नही कर सकते,हम एक दूसरे के लिए नही बने है .."वो उठ खड़ी हुई

"लेकिन .."मैं कुछ बोलने ही वाला था की उसने मुझे रोक दिया..

"मैं एक रंडी हु राहुल और मुझे रंडी ही रहने दो ,आजतक मैं जिसके जीवन में आयी उसकी जिंदगी बर्बाद ही की है मैंने,और मैं अब तुम्हारी जिंदगी बर्बाद नही करना चाहती,मेरे जीवन में प्यार हो ही नही सकता,जिसे मैंने प्यार किया वो मुझसे छीन गया,बर्बाद हो गया ..नही नही राहुल ऐसा अब नही होगा,बिल्कुल भी नही "

उसके चहरा मानो किसी बुखार से तप रहा हो,वो तैश में आ चुकी थी,मैं आज उसका ये अलग ही रूप देख रहा था,

"काजल .."मेरे मुह से आवाज निकलने के बजाय बस फुट कर रोना निकला ,उसने एक बार मुझे देखा

"मैं तुम्हे कमजोर नही बनाना चाहती राहुल किसी भी हाल में नही ...तुम्हे बहुत आगे जाना है तुम बहुत ही आगे जाओगे ..बहुत पैसे और नाम कमाओगे .."

वो जाने क्या सोच कर उठी और बाहर चली गई मैं बस उसे देखता ही रहा,वो सीधे मौसी के कमरे की तरफ बढ़ने लगी थी...

मैं वही खड़े हुए बस मौसी के कमरे को देखे जा रहा था लेकिन काजल वंहा से बाहर नही आयी..

लेकिन थोड़ी ही देर में कुछ लोग मौसी के कमरे में आये और फिर वो मेरी ओर बढ़ने लगे,मैं देख कर आश्चर्यचकित था की ये हो क्या रहा है,मैं उनमें के कुछ को पहचान भी गया था ये शकील के लोग थे,

"तुम अपना समान बांधो और हमारे साथ चलो ,अब से तुम शकील भाई के साथ रहोगे.."

"क्या??"

मैं बुरी तरह से चौक चुका था,काजल अब भी मौसी के कमरे में ही थी,

"लेकिन.."

"लेकिन वेकिंन कुछ भी नही शकील भाई का ऑर्डर है की तुम्हे अपने साथ ही लाये,जल्दी चलो "वो गुर्राया

मैं बस परेशान सा एक बार फिर से उस कमरे की ओर देखने लगा लेकिन काजल और मौसी दोनों का ही वंहा कोई अतापता नही था,दोनों ही अंदर थे ये देखने भी नही निकले की यंहा क्या हो रहा है,मैने बुझे हुए मन से अपना लेपटॉप और बेग उठाया इसके अलावा था भी क्या मेरे पास ,वो लोग मुझे गली से बाहर ले गए और एक कार में बैठने को कहा.

मैं अब भी सकते में था की आखिर काजल ने ऐसा क्या कह दिया की ये लोग मुझे लेने आगये..मैं जानता था की काजल कभी मेरे साथ कुछ गलत नही होने देगी,मैं ये भी जानता था की वो भी मुझे बेहद ही प्यार करती है और उसने ऐसा मेरे भविष्य के लिए किया है लेकिन मुझे बस एक ही बात खाये जा रही थी कि मेरे बाद आखिर काजल का ख्याल कौन रखेगा.??
 
अध्याय 19

शकील के सामने मैं सर झुका कर बैठा था ,ना जाने काजल ने मौसी से क्या कहा था की शकील ने मुझे बुलाया था..

"तो छोटे उस्ताद कैसे हो तुम "

शकील के लहजे से मुझे समझ नही आया की ये ऐसे क्यो बोल रहा है ..

मैंने उसे सर उठा कर देखा वो मुस्कुरा रहा था

"ठीक हु भाई.."

"तो पूरा प्रॉफिट खुद ही डकार जाना चाहते हो क्या ?"

मैं चौका

"क्या?? ये आप क्या बोल रहे है "

"आज तुम्हे मार्किट से बड़ा प्रॉफिट हुआ है और तुमने हमे बताया भी नही "

ओह्ह तो ये बात थी जो काजल ने मौसी को बताई और इसलिए शकील मुझे अपने पास ही रखना चाह रहा है ताकि साला अपने प्रॉफिट पर नजर रख सके

"अरे भाई मैं तो महीने के आखिर में आपको सारा हिसाब किताब देने ही वाला था,आप कहा काजल की बातों में आ गए वो तो नासमझ है उसे कहा हिसाब किताब की कोई समझ है "

मेरी बात सुनकर शकील मुस्कुराया

"हा सही कहा तूने ,इन साली रंडियों के बात में तो आना ही नही चाहिए ऐसे भी काजल तो सबसे बड़ी रंडी है हमारे रंडीखाने की है ना भोला "

उसने पास ही खड़े 50-55 साल के दुबले पतले शख्स को देखा जिसका नाम भोला था,वो साला अपने सड़े हुए दांत निकाल कर हँसने लगा था..

रंडी ...काजल को उसने रंडी कहा था,उस काजल को जो मेरे लिए किसी देवी से कम ना थी ,जिसने मुझे माँ वाला प्यार दिया था,जो मेरा पहला प्यार थी ,जो मेरी मोहोब्बत थी ..

मैंने भी तक की अपनी जिंदगी में ना जाने कितने बार कितने लोगो से काजल के बारे में ये बात सुनी थी लेकिन कभी मेरे जेहन में वो दर्द नही उभरा था,मन किया की अभी शकील का चहरा तोड़ दु लेकिन इतनी हिम्मत मुझमें नही थी ,शायद काजल को भी पता था की अगर मैं उससे प्यार करता हु तो ये दर्द मुझे जीवन भर झेलना पड़ सकता है शायद इसीलिए उसने मुझे अपने से अलग करने की सोची थी.

मैं बस अपना सर झुकाए हुए था,काजल को रंडी कहना मुझे बिल्कुल भी पसंद नही आया लेकिन मैं कर भी क्या सकता था,इन्हें ये तो नही बता सकता था की मैं उसके बारे में क्या सोचता हु,और मेरे अलावा किसी को इसकी फिक्र ही कहा थी,यंहा तक की काजल ने भी इसकी क्या फिक्र की उसने तो मुझे अपने से दूर ही कर दिया था.

"सुन बे छोरे,एक बात दिमाग में भर ले ,अगर मुझसे गद्दारी की ना तो तेरी बहन से यंहा रंडी नाच करवाऊंगा समझा ,बहन है की नही तेरी "

शकील की आवाज में एक दबंगई आ गई थी ,मैंने ना में सर हिलाया

"भाई ऐसे ये भी चिकना है ,इसका पिछवाड़ा मारने के लिए ग्राहक मिल जाएगा "भोला की बात सुनकर शकील फिर से बुरी तरह से हंसा फिर थोड़ा गंभीर हो गया..

"कितना मुनाफा कमाया आज तूने "

"भाई 4 गुना लगभग जितना अपने दिया था"

शकील और भोला दोनों की ही आवाज बंद हो गई ,मुझे समझ नही आ रहा था की आखिर ये दोनों चुप क्यो हो गए मैंने सर उठा कर देखा तो वो दोनों आंखे फाडे मुझे ही देख रहे थे..

"साला इतना फायदा तो अपने धंधे में भी नही है बे ,शाबास मेरे शेर ,अब तू एक काम कर की वो रंडीखाना छोड़ और यही रह तेरे लिए आलीशान कमरा तैयार कर देता हु और किसी चीज की जरूरत हो तो मांगने में बिल्कुल भी हिचक मत करना ,तुन आज इतना बड़ा प्रॉफिट किया है तो बोल आज तुझे क्या चाहिए,आज तेरी एक मुराद मैं पूरी कर दूंगा ."शकील के चहरे में खुशी के भाव आ गए लेकिन मेरे लिए ये जगह किसी जेल से कम नही होने वाली थी ..

"अरे शर्मा क्यो रहा है बोल भी दे,दारू पियेगा या किसी रंडी को बुलावा दु ठोकने के लिए"

शकील और भी मुस्कुरा रहा था..

"मुझे एक बार काजल से मिलना है.."

मेरी बात सुनकर वो और भोला दोनों ही मुझे आश्चर्य से देखने लगे ..

"मुझे पता था मुझे पता था मुझे पता था .."शकील ऐसे हंसा जैसे कोई बड़ा जोक सुना दिया गया हो ,वो जोरो से हँस रहा था जबकि भोला आंखे फाडे उसे ही देख रहा था..

अचानक ही शकील ने मुझे देखा,उसकी हंसी रुक गई थी और आंखों में जैसे अंगारे नाच रहे हो ,वो स्थिर आंखे जैसे अभी उनकी नशे फट जाएगी ,उसके आंखों में असीमित गुस्से का उबार आ गया था, मैं उसकी इस मनोस्तिथि को समझ ही नही पा रहा था वो मुझे खा जाने वाली निगाहों से देख रहा था,ऐसा लगा जैसे वो सच में मुझे आंखों से ही मार देने वाला है,बहुत देर तक वो मुझे ऐसे ही घूरता रहा,मेरे हड्डियों में जैसे कंपन हो गई मुझे लगा की अभी ये उठेगा और मुझे जोरो से एक थप्पड़ लगाएगा या शायद जान से ही मार दे.

लेकिन...उसके चहरे के भाव अचानक ही बदलने लगे उसके होठो में मुस्कुराहट ने जगह ले ली थी ..

"जा आज दिया समय तुझे जितना समय तुझे चाहिए दिया,मिल ले काजल से ,मेरे आदमी तुझे वंहा ले जायेगे ."

उसने बड़े ही शांत भाव से कहा,और अपने आदमियों को मुझे वंहा ले जाने की नसियत दे दी ,भोला के चहरे में असीम आश्चर्य देख मुझे माजरा कुछ समझ नही आया ,मैं उसे सलाम करके वंहा से निकला ही था की भोला की आवाज से मेरे पैर रुक गए,शकील के कमरे से मैं बाहर निकल चुका था और उसके आदमी मेरे आगे थे,मैं वही रुक कर उनकी बात सुनने की कोशिस करने लगा.

"आपने उसे काजल से मिलने की इजाजत दे दी भाई"भोला की बात में के आश्चर्य था.

"जाने दे उसे ,मैं चाहता हु की ये काजल से और काजल इससे इतनी मोहोब्बत करे की इन्हें जुदा करने में मजा ही आ जाए "

उसकी बात सुनकर मैं दंग रह गया था

"जैसे पिछली बार किया था "भोला की हँसने की आवाज आयी,मैं और भी दंग हो गया,अब मुझे काजल की कही हर बात का मतलब समझ आने लगा था ..

"पिछली बार तो वो साली बच्ची ही थी,लेकिन इस बार तो उसे ऐसा तड़फाउंगा की उसे अपने लिए फैसले पर जीवन भर दुख रहेगा,मुझे ना कहा था उसने आज देख दुनिया भर से मरवाते फिर रही है,इस बार उसे फिर से प्यार में पड़ने दे,फिर से उसके दिल को चकनाचूर करने का ये मौका मिला है जाने कैसे दु "

शकील की आवाज मुझे किसी दैत्य सी लगने लगी थी,काजल के लिए उसके दिल में इतनी नफरत बेवजह तो नही हो सकती थी,लेकिन उसकी बातों से इसका अनुमान साफ लगाया जा सकता था की वो काजल से कितनी नफरत करता है,वो चाहता था की काजल किसी से बेपनाह प्यार करे और फिर वो उस लड़के को काजल की जिंदगी से जुदा कर दे ,लेकिन क्यो..??

शकील के आदमी मुझसे दूर निकल चुके थे मैं झट से उनकी ओर दौड़ा अब इन सवालों का जवाब तो मुझे काजल ही दे सकती थी....

********

मैं कमरे के दरवाजे में खड़ा था,अंदर भावनाओ का तूफान खलबली मचा रहा था,मैंने धीरे से दरवाजे को खटखटाया..

"कौन है ."

काजल की वो तीखी आवाज मेरे कानो से टकराई थी ,उसकी आवाज से मुझे समझ आ रहा था की उसका मूड कुछ ठीक नही है ,मैंने कुछ नही कहा था,शकील के आदमी नीचे खड़े थे,शायद मौसी के पास बैठे हो या पान के टपरी में बैठे गपिया रहे हो,शकील ने मुझे काजल से बात करने का पूरा समय दिया था.

दरवाजा खुला ...और .

काजल की निगाह मुझपर ही टिक गई वो थोड़ी घबरा गई थी.

"यंहा क्यो आया है तू शकील को पता चलेगा तो ."

"मैं उसकी परमिशन लेके ही आया हु "वो थोड़ी चौकी फिर कमरे से निकल कर नीचे देखने लगी उसे शकील के आदमी बेफिक्र दिखाई दिए होंगे,वो फिर से मेरे पास थी..

"यंहा क्या लेने आया है चूतिये,यंहा अब तेरा कोई भी नही है,या मेरी लेने आया है "

अब उसके चहरे में फिक्र की जगह गुस्सा था,मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुराया

"अंदर नही आने बोलोगी "

वो मेरे चहरे को देखती रही मैं बिना कुछ बोले ही अंदर चला गया था और उसके बिस्तर में बैठ गया.

वो मुझे अब भी देख रही थी .

"तूने ऐसा क्यो किया काजल ,क्या तुझे मेरे प्यार में यकीन नही था."

मेरी बात से उसके चहरे में एक अजीब सा तूफान आ गया था...वो थोड़ी देर चुप रही

"कितनी बार कहु तुझे की मुझे प्यार करने का हक नही है ,मैं अब एक रंडी हु बस एक रंडी जो लोगो के जिस्म की आग तो बुझा सकती है लेकिन ...लेकिन किसी को अपने सीने में जगह नही दे सकती .."

वो थोड़ी झल्लाते हुए बोली लेकिन बोलते ही बोलते उसकी आवाज धीमी हो चुकी थी

"लेकिन क्यो.?क्या किया था शकील ने तेरे साथ जो तू प्यार से इतना डरती है ,तू शकील की फिक्र मत कर मैं उसे देख लूंगा."

मेरी बात सुनकर थोड़ी देर के लिए उसकी नजर मेरे चहरे में जम गई ,फिर उसके होठो में एक फीकी सी मुस्कान आ गई

"तू शकिल को देख लेगा...मेरे लिए..कितनी बार तुझे कहु की तेरे सामने एक उज्वल भविष्य है ,इस रंडी के चक्कर में उसे खराब मत कर रे..अगर ऐसा कुछ हुआ तो सबसे ज्यादा मुझे दुख होगा,क्योकि इसका कारण मैं ही रहूंगी.."

वो रोते हुए बैठ गई थी मैंने बड़े ही प्यार से उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया वो मेरे सीने में छुपने लगी .

"तुझे नही पता की शकील कितना बड़ा कमीना है ,और वो चाहता है की मैं तुझसे बेपनाह मोहोब्बत करू ताकि उसे तुझे बर्बाद करने में मजा आये,मैं फिर से ये सब नही झेल पाऊंगी राहुल प्लीज्...प्लीज् मेरी जिंदगी से चले जा और फिर कभी मेरे बारे में मत सोचना .."

उसके आंखों से टपकते हुए मोतियों ने मेरे कमीज को गीला कर दिया था,मेरी आंखों में कोई पानी नही था मैं बस अपनी ही दुनिया में खोया था,जो शकील हमे मिलने नही देना चाहता,जो शकील हमारे प्यार में सबसे बड़ी बाधा है मैं उसे ही मिटाने के ख्वाब देखने लगा था,मुझे पता था की उसके पास मुझसे ज्यादा पैसे है पॉवर है और मैं अभी तो उसका कुछ भी नही कर सकता लेकिन मैं अपनी काजल को भी नही छोड़ सकता था,और काजल को पाने का एक ही रास्ता था ,शकील के नाक के नीचे से मुझे काजल को ले जाना था,मुझे काजल को इस जहन्नुम से आजाद करना था और अब मेरे लिए यही मेरा लक्ष्य था.

काजल ना जाने कब से मेरे चहरे को देख रही थी

"क्या हुआ तू कहा खो गया .."

"मैं उस शकील को बर्बाद कर दूंगा,तुझे इस जहन्नुम से बाहर निकलूंगा,तू ही मेरी पत्नी बनेगी ,मेरा पहला प्यार है तू मैं तुझे किसी भी कीमत में नही खो सकता ."

काजल के चहरे में आश्चर्य नाचने लगा था,वो थोड़े देर मुझे ऐसे ही देखती फिर .

'चटाक'

एक जोरदार झापड़ आकर मेरे गालों में पड़ा.

"तू पागल होई गया है ,मैं तुझे समझने की कितनी कोशिस कर रही हु और तू है की मेरी बात ही नही सुन रहा है,वो एक दैत्य है तुझे खा जाएगा,तेरा केरियर तेरे सपने,तेरे माँ बाप के सपने सबको खा जायेगा ,तेरे लिए क्या इन सबकी कोई अहमियत नही है ,तुझे बस अपनी पड़ी है ,क्या चाहिए तुझे मेरा जिस्म ले अभी पूरी कर ले अपनी तमन्ना "

काजल ने अपनी साड़ी का पल्लू अपने छाती से अलग कर दिया ,उसके आंखों में आंसू लेकिन चहरे में तमतमाहट थी .

और मेरे होठो में उसे देखकर बस एक मुस्कान ..

"तुझे भी पता है की मुझे क्या चाहिए,अगर ये ही सब चाहिए होता तो तू मुझे अपने से यू अलग नही करती ..है ना."

काजल की नजर झुक आई और उसने मेरे सीने को एक जोर का मुक्का मारा और फिर मुझसे सट गई ..

"तू क्यो समझ क्यो नही रहा है ,हमारा यू मिलना खतरनाक हो सकता है.हमारा प्यार हमारी बर्बादी का कारण बन सकती है "

अब वो खुलकर रोने लगी थी,वो मुझे समझाने में असफल रही थी ..

"मुझे सब चीजो की समझ है काजल,और आज के बाद मैं ऐसे तुझसे कभी नही मिलूंगा,मुझे अपने सपनो की और अपने माता पिता के सपनो की भी फिक्र है और मैं उसे पूरा भी करूंगा,लेकिन इन सबका मैं क्या करूंगा जब तू ही मेरे साथ ना हो ....तू फिक्र मत कर आज के बाद हम कभी नही मिलेंगे,लेकिन तुझे मुझसे एक वादा करना होगा."

उसने फिर से मुझे असमंजस से देखा

"तू जब तक ठीक नही हो जाती तब तक कोई धंधा नही करेगी ,दूसरा बनवारी काका तुझे अगर कोई पैसे दे तो तू चुपचाप उसे रख लेगी ,तीसरा तू डॉ के पास नियमित जाएगी और समय पर अपनी दवाई लेगी ..बस इतना तुझे करना है करेगी ना.."

उसने मुझे झूठे गुस्से से देखा

"मतलब तू नही सुधरेगा "

उसकी वो मासूम आंखे कुछ खिल गई थी जैसे उसे मेरे प्यार और प्यार की ताकत पर भरोसा हो गया हो ,

"मरना और बर्बाद होना इससे ज्यादा वो क्या बिगड़ लेगा मेरा और तेरा हमने इससे भी बत्तर दुनिया देखी है काजल,अब हम और नही सताए जा सकते,अब तो रोने की बारी उनकी है जो हमारे बीच में आएंगे,मुझपर भरोसा कर ,तुझे भरोसा है ना .."

हम दोनों ही एक दूजे की आंखों में खो गए थे,उसने बस हा में अपना सर हिलाया और मेरे होठो पर अपने होठो को रख दिया,हमारे होठ मिले ,इतने नाजुक होठो को चूमने के बाद भी मेरे जेहन में कोई हलचल नही कौंधी थी मुझे बस उसके प्यार भरे स्पर्श का अहसास हुआ ,वो नाजुक सी छुवन का अहसास ,वो मेरे प्यार की गंध जो मेरे नासिका में गहरा रही थी ,वो भरोसे की महक,वो दर्द के हर कतरे से आजाद होने की खुशी.

मैं उनमे डूब रहा था वो मुझमें डूब रही थी,ना मेरे दिमाग में कोई शकील था ना ही कोई केरियर मेरे दिमाग में थी सिर्फ और सिर्फ मेरी काजल,मेरी काजल जिसे मैं सच में पाना चाहता था,ये पाना क्या होता है मुझे इसका आभास ही था क्योकि काजल तो शायद अब मेरी ही थी,......

बस उसके पास होने के अहसास में ही वो खुशी थी जो दुनिया की कोई दौलत मुझे नही दे सकती थी और ना ही दुनिया का कोई डर मुझसे वो छीन सकती थी.....
 

अध्याय 20

मेरे दिमाग में बस काजल और शकील ही चल रहे थे,मुझे भी पता था की शकील कितना खतरनाक और पैसे वाला है,वो कितना ताकतवर है इसका अंदाजा भी मुझे नही था ,इसलिए कुछ भी करने की जल्दबाजी करना बहुत ही बड़ी मूर्खता थी,लेकिन मैं काजल को किसी भी हालत में खोना नही देना चाहता था.

सोच सोच कर मेरा दिमाग फटने लगा था लेकिन कुछ भी समझ नही आ रहा था,आखिर में मैं आंखे बंद करके सो गया,मैंने खुद को बिल्कुल ही ढीला छोड़ दिया कई सारे दृश्य मेरे सामने तैरने लगे थे,

काजल का आंसू से भरा हुआ वो चहरा मेरे सामने आ जाता था,उसकी आंखों में मेरे लिए वो प्यार जिसे देख कर मेरे मन एक सिहरन सी दौड़ जाती थी,वही शकील की बाते भी मेरे दिमाग में घूम जाती,मैंने खुद को शांत किया और बस अपने को छोड़ दिया.

मेरे बचपन का वो दृश्य मेरे आंखों में घुमा...

गांव में मेरे बचपन में जब हम स्कूल जाय करते थे तो एक टीचर थे पांडे सर,पांडे सर बच्चों से कई सवाल पूछा करते थे,एक दिन उन्होंने पूछा था.

"बताओ बच्चों की ताकत,पैसा और दिमाग में सबसे महत्वपूर्ण क्या है ."

सभी बच्चों ने अपने अपने तर्क दिए थे,मैंने कहा था की पैसा सबसे महत्त्वपूर्ण है क्योकि उसके बिना जीवन नही चल सकता,अधिकतर बच्चों ने पैसे और ताकत को अहम बताया था,तब सर मुस्कुराए और कहने लगे..

"सभी चीजो का अपना महत्व है लेकिन मेरे हिसाब से अगर तुम्हरे पास दिमाग ही नही है तो तुम पैसे और ताकत का गलत उपयोग करोगे,हो सकता है की तुम उसे खो भी दो लेकिन अगर तुम्हारे पास दिमाग है तो तुम पैसा और ताकत दोनों कमा सकते हो,तुम ऐसा कुछ कर सकते हो जिससे पैसा और ताकत दोनों तुम्हारे कदम चूमे..सोचो एक राजा के बारे में उसकी सेना में बहुत से ताकतवर लोग होते है और साथ ही उसके राज्य में कई धनवान लोग भी होते है लेकिन सभी राजा के गुलाम होते है,अगर राजा को जरूरत पड़ी तो उनका उपयोग करता है,सोचो ऐसा क्यो होता है,क्योकि राजा के पास वो दिमाग है की वो पैसे की मदद से ताकत को खरीदता है और फिर उसी ताकत की मदद से पैसे वालो पर अपना कब्जा जमाता है,और अगर राजा मूर्ख हुआ तो तुमने इतिहास में पढ़ा ही है की बड़े से बड़े राजवंश किस तरह से एक राजा की मूर्खता के कारण खत्म हो गए...हमेशा राजा जैसा सोचो ,दिमाग से सबको काबू में रखो यही राजनीति है."

पांडे सर की बात याद आते ही मैं अचानक से उठ खड़ा हुआ,जैसे मुझे राह मिल गई हो ....

रात के करीब दो बज चुके थे और मैं अपने लेपटॉप खोले हुए कुछ सर्च कर रहा था,मैंने एक गेमप्लान तैयार किया मैंने अपनी कैलकुलेशन की और मुस्कुराते हुए सो गया....

************

मेरे पहले सेमेस्टर का रिजल्ट आ चुका था और सभी की उम्मीद से और शायद खुद की उम्मीद से भी ज्यादा अच्छा मेरा परफार्मेंस रहा था मैंने क्लास में टॉप किया था,इससे मेरा दोस्त प्यारे और संजय सर भी बहुत खुश थे.

"यार पार्टी तो बनती है "मेरे दोस्त ने कहा

"अबे जानता है न की इसकी कंडीसन क्या है और तुझे पार्टी चाहिए"संजय सर ने उसे डांट दिया

"कोई बात नही सर एक नई नॉकरी मिल गई है और सेलरी बहुत ही अच्छी है,एक एक बियर तो पिला ही सकता हु आप लोगो को .

दोनों मुझे आंखे फाडे देख रहे थे.

"बहुत पैसे वाला हो गया बे तू तो "

"सर कुछ जैकपॉट टाइप की चीज हाथ लग गई है लेकिन अभी कमियाबी ये नही है ,असल में असली जैकपॉट के लिए मुझे आप लोगो की भी मदद चाहिए "

दोनों मुझे आश्चर्य से देख रहे थे.

"क्या बात है तू कहना क्या चाह रहा है,और कोई ऐसा वैसा काम हो तो भाई हमे माफ कर "

संजय सर थोडा थोड़े फिक्र मंद नजर आये

"ऐसी कोई बात नही है सर,सब कुछ लीगल ही है..एक बार मेरी बात सुन लीजिए ,क्यो ना बियर के साथ बात किया जाए "

हम तीनो बैठे बियर पी रहे थे,प्यारे चारो ओर ऐसे देख रहा था जैसे बार नही किसी जन्नत में आ गया हो ,

"अब बताओ भी की आखिर ऐसा क्या कर रहे हो की तुम इतने पैसे वाले बन गए हो "

संजय सर थोड़ा घबरा रहे थे..

"सर मैं पैसे वाला नही बना हु बस समझ लीजिए की किसी दूसरे के पैसे पर ऐश कर रहा हु "

"क्या मतलब???"

मैंने संजय सर को बताया की मैं कैसे शकील के पैसे को शेयर मार्किट में इन्वेस्ट कर रहा हु ..

"तू पागल हो गया आई क्या उसके पैसे को ऐसे उड़ा रहा यही अगर उसे कुछ पता चल जाएगा तो .."

"सर यही तो मुझे आपकी मदद चाहिए "

"मतलब??"

"मतलब ये की सिर्फ एक ही अकाउंट क्यो हम कई अकाउंट से ट्रेडिंग कर सकते है ,मैं चाहता हु की आप और प्यारे भी एक एकाउंट बनाये इसके लिए आपको कुछ भी नही करना है ना ही कोई पैसे लगाने है ,बस आपको अपनी एक आईडी बनानी है ,आपलोगो के पास बस स्मार्टफोन होना चाहिए उसका इंतजाम हम कर लेंगे,यंहा कोई सस्ता स्मार्टफोन आराम से मिल जाएगा,मैं कुछ दिनों में पैसे का जुगाड़ भी कर लूंगा,मैं जिस शेयर को जिस भाव में कहु आपको बस वो खरीदना है,और जिस भाव में कहु उसमें बेच देना है ,जब पैसे ज्यादा हो जायेगे तो हम और भी ब्रोकर के साथ अकाउंट खुलवायेगें ,ताकि हमारा पैसा रोटेट होता रहे,बस इनिशियल अमाउंट का जुगाड़ करना होगा वो मैं कर लूंगा,कम से कम 10 हजार से शुरू करेंगे ."

दोनों मुझे अजीब निगाहों से देख रहे थे..

"तू उसका पैसा मारेगा और उसे पता नही चलेगा ??"

उनकी बात सुनकर मैं मुस्कुराया ..

"सर मैंने कब कहा की मैं उसका पैसा मारूंगा...मैं मैनेज करता हु वो सब आप बस वो कीजिये जो मैं कह रहा हु .."

प्यारे और संजय सर ने एक दूसरे को देखा और फिर धीरे से सर हिलाया ...

**************

मैं शकील के सामने खड़ा था,

"भाई मुझे कुछ पैसे चाहिए "

उसने मुझे थोड़ी देर घुरा..और मेरे हाथो में रखी किताब को देखा जो उसने ही मुझे पढ़ने के लिए दी थी ..

"अरे छोटे पैसे तो तेरे ही अकाउंट में है ना फिर भी मुझसे मांग रहा है ,"

"भाई पैसे मेरे अकाउंट में जरूर है लेकिन वो आपके पैसे है,उन्हें मैं आपके इजाजत के बगैर कैसे हाथ लगा सकता हु "

शकील के होठो में एक मुस्कान खिली

"कितने चाहिए"

"10 हजार "

"10 हजार.??? साले इतने पैसे का क्या करेगा तू,रहता तू मेरे पास ही है ,खाना तुझे मैं देता हु तो पैसे का करेगा क्या ??"

इस बार शकील के आवाज में थोड़ा गुस्सा था..

"भाई अपने कहा था की आप मुझे सेलरी देंगे और प्रॉफिट में हिस्सेदारी भी देंगे..मैं अपना काम बहुत ही जी जान लगा कर कर रहा हु ,मैंने आपके दिए 30 हजार को कुछ ही दिन में 1.5 लाख बना दिया है,तो इसमें मेरा प्रॉफिट कितने परशेन्ट का हुआ ..??"

मेरी बात से वंहा खड़ा हर आदमी खामोश हो चुका था..

"मादरचोद आज तक किसी की इतनी हिम्मत नही हुई की शकील भाई से हिस्सेदारी मांगे.."

एक आदमी जोरो से चिल्लाया ,वही शकील अब भी खामोशी से मुझे ही देख रहा था..

"भाई आपलोग जो काम करते हो वो अलग काम है ,उसमें हिस्सेदारी वाली चीज नही होती लेकिन ये काम बिल्कुल अगल है और लीगल भी है ,इसमें पैसे में बात नही होता बल्कि परसेंटेज मे बात होती है ,और मैं उस हिसाब से अपना केलकुलेशन करूंगा अगर आप ये बता दे की इसमें मेरा क्या फायदा होने वाला है..

मैं पूरा हिसाब किताब क्लियर रखना चाहता हु ताकि बाद में फिर कोई प्रॉब्लम ना हो .."

मैं जो रट कर आया था एक ही सांस में बोल दिया

शकील अब भी खामोश था और सभी उसे ही देख रहे थे..

"ह्म्म्म लगता है तुझसे बैठ कर बात करनी पड़ेगी ..तो बोल कितना परशेन्ट लेगा तू .."

आखिर शकील की आवाज आयी

"भाई मैं कौन होता हु आपसे परशेन्ट मांगने वाला आप जितना दे दो .."

"10% कैसा रहेगा .."शकील ने बोला

"अरे भाई इस साने को 10% दोगे,??साला पैसा तो आपका है फिर इसे 10% क्यो "पास खड़ा हुआ उसका चमचा बोल उठा..

लेकिन शकील ने उसे घूर कर देखा और वो चुप हो गया ..

"चल दिया तुझे 10% "आखिर शकील ने बोला

"नही भाई मुझे सिर्फ 5% बस दे दो तो भी चलेगा ,लेकिन प्रॉफिट का 5% "

इस बार शकील थोड़ा कंफ्यूज था

"मतलब ??"

"मतलब भाई की जैसे अभी तक हमे लगभग 1 लाख 10 हजार का शुध्द प्रॉफिट हुआ है इसका 5% आप मुझे दो मतलब 5हजार 500 रुपये बाकी आपका "

शकील थोड़ा खुश दिखा

"लेकिन इससे तुझे क्या फायदा होगा "

"भाई मेरे पास पैसे नही है,अगर घाटा हुआ तो मैं कहा से दूंगा,इसलिए मैं फायदे का 5% मांग रहा हु घाटा हुआ तो वो आपका रहेगा,ऐसे भाई लोग तो 20-30% चार्ज करते है और कई तो बस 20-30% देते है बाकी खुद ही रखते है ,आपका मेरे ऊपर इतना अहसान है तो मैं ज्यादा कैसे मांग सकता हु "

शकील थोड़ा सोच में पड़ गया

"ठीक है ,फायदे का 5% तू रख .."

"भाई मैं वो पैसा हर महीने निकालना चाहूंगा,आपकी इजाजत चाहिए "

"ठीक है."

मेरा काम हो चुका था

"भाई और वो 10 हजार रुपये "

"साले तुझे तो 5 हजार मिलने चाहिए थे ना "

"जी भाई लेकिन अभी थोड़ा काम भी तो है ,इतना बड़ा फायदा करवाया हु आपका आप कितना तो कर ही सकते हो ,अगले बार से जो महीने में फायदा होगा उसी से पैसे लिया करूंगा "

शकील को शायद मेरी बात अच्छी लगी ..

"ठीक है इसे 10 हजार दे दो रे...और ये पुस्तक क्यो पकड़कर घूम रहा है "

"भाई वो आपसे कुछ पूछना था "

शकील ने इजाजत दे दी और मैंने उस पुस्तक को खोलकर एक चेप्टर निकाला ..और शकील के पास जाकर उसे दिखाने लगा

"भाई मैं सोच रहा था की क्यो ना हम penny स्टोक्स में पैसे लगाए,ऐसे स्टोक्स जिनका रेट बहुत ही कम है ,सोचिए की अगर कोई स्टॉक सिर्फ 10 पैसे मे मिल जाए तो ,1000 रुपये में हम कितना खरीद सकते है ,और 1000 रुपये का स्टॉक 2हजार होने में बहुत समय लग सकता है लेकिन 10 पैसे के स्टॉक को 20 पैसा होने में कितना समय लगेगा ...कुछ ऐसे ही स्टोक्स है जो 100 रुपये से कम के है उन्हें खरीदा जाए तो वो परसेंटेज में जायद पैसा कमा कर देंगे "

शकील ने थोड़ी देर अपना सर खुजलाया

"ठीक है ठीक है जो तुझे समझ आये वो कर ,छोटी छोटी बातों को पूछने की क्या जरूरत है "

"भाई वो इसमें रिस्क भी तो ज्यादा रहता है,कमा भी सकते है और गंवा भी सकते है ,मतलब है की 10पैसे का स्टॉक 5 पैसे भी तो हो सकता है ना,इसलिए आपकी इजाजत चाहिए ताकि बाद में आप मुझे ना बोले "

शकील थोड़ी देर चुप रहा और बुक को पढ़ने की कोशिस करने लगा मुझे पता था की उसे घण्टा कुछ भी समझ नही आने वाला था ..

"ठीक है दिया इजाजत जो करना है कर "

"थैंक्यू भाई "

"हम्म और काजल से मिलने गया था ना क्या हुआ उसका "

इस बार शकील के होठो में एक कमीनी मुस्कान थी,लेकिन मैं भी अपने आप को पहले से तैयार करके आया था

"अपने सही कहा था भाई,रंडी तो साली रंडी ही रहेगी..मैं ही चूतिया था जिसे उससे लगाव हो गया था,लेकिन अब नही भाई अब तो जमकर पैसे कमाने है ,पैसे रहेंगे तो वैसी कई रंडियों को खरीद लेंगे .."

मेरी बात सुनकर जैसा मुझे यकीन था शकील का चहरा थोडा बुझा बुझा सा हो गया,वो तो चाहता था की हमारे बीच प्यार हो ना सिर्फ प्यार हो बल्कि काजल मुझे टूटकर चाहे ताकि वो हमे अलग करके मजे ले सके,लेकिन अब बेचारा शकील किस चीज के मजे लेता,वो मुझे निकाल भी नही सकता था क्योकि मैंने उसे ऐसा ख्वाब दिखा दिया था जिसे पूरा करने में उसे मेरी जरूरत पड़ती ,कम से कम अब मैं सेफ था और मुझे काजल को भी सेफ करना था..

 

अध्याय 21

शकील की इजाजत मिलने से मेरा एक टेंशन दूर हो गया था मैंने संजय सर और प्यारे के अकाउंट में 5-5 हजार डाले अब टाइम था मेरे गेम प्लान का .

इसे समझने से पहले आपको शेयर मार्किट के कुछ टेक्निकल टर्म को समझना होगा..जिसमे है ask price,bid price,aur volume.

पहले आते है ask प्राइज पर ask प्राइज वो प्राइस होता है जिसपर कोई व्यक्ति किसी स्टॉक को खरीदने के लिए तैयार हो ,वही bid प्राइज वो प्राइज है जिसपर कोई उस स्टॉक को बेेेचने के लिए तैयार हो ..मतलब ये की अगर कोई किसी स्टॉक को 100 रुपये में बेचना चाहे तो वो उसका bid प्राइज हो गया,अब अगर किसी को लगता है की 100 रुपये सही रेट है तो उसमें उसे खरीद लेगा नही तो वो अपना ask प्राइज लगा देना 98 रुपये का ,

अब आते है वॉल्यूम में की आखिर स्टॉक मार्किट में वॉल्यूम क्या चीज है,जब कोई ask और bid प्राइज एक भाव में मिल जाते है,मतलब की किसी एक भाव में कोई समझौता हो जाता है माना की किसी शेयर को कोई 100 रुपये में बेचने को तैयार हो और 100 रुपये में ही कोई खरीदने को भी तैयार हो और वो 1 शेयर बेचे और 1 शेयर खरीदे तो वॉल्यूम हो गया 1 का ..

अधिकतर बड़े शेयर में ज्यादा वॉल्यूम होते है वही छोटे शेयर को खरीदने या बेचने में किसी का ज्यादा इंटरेस्ट नही होता इसलिए उसमें वॉल्यूम ज्यादा नही होता,ये 10करोड़ भी हो सकता है तो कही कही आपको 500-100 भी देखने को भी मिल जाता है,

मैंने ऐसे ही स्टोक्स को सलेक्ट किया जिसमे वॉल्यूम 500 से नीचे हो और उसकी प्राइज भी 5 रुपये से कम ही हो ..मुझे ऐसे कुछ स्टोक्स भी मिल गए अब मेरा प्लान शुरू होने वाला था,

उन कुछ स्टोक्स में से मैंने एक ऐसे स्टॉक को लिया जिसमे वॉल्यूम बहुत कम था और वो ज्यादा बढ़ता भी नही था ताकि मैं उसमें कुछ कर सकू..

मैंने एक शेयर को 1 रुपये में खरीदना शूरू किया इसतरह मैंने कुछ दिनों में लगभग 7000 शेयर खरीद लिए

अब मैंने संजय सर और प्यारे को उस स्टॉक को 1.50 रुपये में 3300 शेयर खरीदने के लिए कहा,उन दोनों ने 3300 शेयर खरीदे और मैंने 1.5 के रेट में उसे बेच दिया इसतरह मुझे लगभग 3300 रुपये का प्रॉफिट हो गया...लेकिन उसी दिन मैंने संजय सर और प्यारे से कहा की पूरे शेयर को 3 रुपये की bid लगा दो ,मतलब की अब वही शेयर 3 रुपये में बिकने को तैयार थे,और मैंने इधर से 3 रुपये की ask लगा कर पूरे शेयर फिर से खरीद लिए ,स्वाभाविक था की इससे उन दोनों में हर एक को 4950 की प्रॉफिट हो गई ,लेकिन पैसा शकील के जेब से गया,इसतरह हमने मिलकर 9900 का प्रॉफिट कर दिया ,और पूरा पैसा लीगल तरीके से हमारे पास पहुच गया ,शकील को शक होने का सवाल नही था क्योकि इससे पहले मैंने वही शेयर 1 रुपये में खरीद कर 1.5 रुपये में बेचे थे ,अब उस शेयर का प्राइज 3 रुपये पहुच गया था,मैं जानता था की अब उसे इस रेट में खरीदने को कोई तैयार नही होगा लेकिन फिर भी मैंने उसे अपने पास रख लिया ताकि अगर उस प्राइज में कोई खरीदने वाला मिल जाए तो मैं उसे ये माल चिपका दु अगर ऐसा होता तो शकील को भी कोई नुकसान नही होता ,और हो भी जाता तो मुझे क्या था मेरे पास तो पैसे आ चुके थे,मैंने पहले ही सोचा था की शकील को भी पता नही लगाना चाहिए और उसका पैसा धीरे धीरे हमारे अकाउंट में ट्रांसफर होता रहे इसके लिए ये भी जरूरी था की उसे मैं कुछ फायदा भी दिखता रहू ताकि उसका लालच भी बना रहे ,इसलिए मैंने अपना ट्रेडिंग शुरू कर दिया,कभी कभी मैं पैनी स्टोक्स के जरिये शकील का पैसा प्यारे और संजय सर के पास भेजता रहा लेकिन बाकी समय में मैं शेयर मार्किट से मुनाफा कमाने के लिए जीतोड़ मेहनत करता था और जिस शेयर में मैं पैसा लगाता था उसपर ही संयज सर और प्यारे को भी पैसा लगाने बोलता,वो मेरे हिसाब से काम कर रहे थे और कुछ लॉस और कुछ प्रॉफिट के साथ हम पैसा कमा रहे थे..

कुछ ही दिन बीते थे और मैं काजल का हाल जानने के लिए डॉ के पास पहुचा

"तो राहुल आजकल तूम काजल के साथ नही आते.."

"वो टाइम पर आ तो रही है ना डॉ .."

"हा बिल्कुल तुमने कसम जो दे रखी है उसे.."

डॉ मुस्कुराने लगा..

"डॉ आप उससे पैसे मत लेना,आपके और दवाइयों के जो भी पैसे बनेंगे वो मैं आकर दे जाया करूंगा.."

"मैं जानता हु तुमने ये बात मुझे पहले भी कही की इलाज में कितना खर्च हो रहा है वो किसी को पता नही लगाना चाहिए लेकिन राहुल अब समय आ गया है की उसे हॉस्पिटल में एडमिट करना होगा.."

डॉ की बात सुनकर जैसे मेरी सांस ही रुक गई

"डॉ अपने तो कहा था की ये दवाइयों से ठीक हो जाएगा .."

मेरी बात पर डॉ थोड़ा चिंतित हो गए थे,वो कुछ देर तक सोचते रहे ..

"मैंने अपनी तरफ से बहुत कोशिस की राहुल लेकिन .."

"लेकिन क्या डॉ.."

"तुम जानते हो की काजल को lungs केंसर है,अभी वो पहले स्टेज में है लेकिन मैं नही चाहता की वो फैल जाए फिक्र वाली कोई बात नही है एक छोटा सा ऑपरेशन होगा बस"

डॉ की बात से मैं गहरे सोच में पड़ गया,क्योकि हॉस्पिटल में एडमिट करने का मतलब था की उसे वंहा से कुछ दिनों के लिए बाहर निकलना था और जैसा मुझे पता था की उसके पीछे शकील के लोग लगे हुए है जो उसपर नजर रखते है,और अगर ये बीमारी की बात शकील तक पहुची तो वो खुश होगा ना की काजल को हॉस्पिटल में एडमिट करने की परमिशन देगा,मुझे उसकी बीमारी के बारे में टेस्ट के बाद से ही पता चल गया था,इसीलिए 16 हजार का टेस्ट करवाया गया था,मैंने गूगल से ही सारी जानकारी निकाल ली थी लेकिन अभी तक मैंने काजल को कुछ भी नही बताया था ..

मुझे सोचता हुआ देखकर डॉ बोल पड़े ..

"राहुल फिर से सोच लो इस बारे में जल्द ही कुछ करना होगा,दवाइयों से हम उसे कुछ फील गुड़ तो करवा सकते है लेकिन पूरी तरह से ठीक नही कर सकते और अगर कही से भी वो फैलाना शुरू हुआ तो ...तुम पढ़े लिखे हो तुम्हे तो इसका अंदाजा होगा.."

"जी डॉ लेकिन पैसे कितने लग जायेगे.."

डॉ ने मेरी ओर देखकर एक गहरी सांस छोड़ी

"कम से कम 2-3 लाख,हा अगर कही से कोई सहायता मिल जाए तो कम में भी हो सकता है मतलब अगर कोई पोलिटिकल सपोर्ट हो वो विधायक या संसद निधि से पैसे मिल सकते है ,मुझे नही लगता की ऐसे केस में कोई दानदाता सामने आएगा,और जैसा तुमने बताया की उसके इलाज की किसी को खबर नही होनी चाहिए तो तुम्हारे लिए खुद ही फंड का इंतजाम करना थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन इससे कम में तो बात नही बनेगी,मैं अगर अपनी फीस भी माफ कर दु तो जो डॉ ऑपरेशन करेंगे और दवाईयो का खर्च तो आएगा ही ...तुम्हे 2-3 लाख का इंतजाम तो करना ही होगा.."

डॉ की बात सुनकर मेरे माथे पर पसीना गहरा गया,एक तो काजल को हॉस्पिटल में लाने की टेंशन थी वही दूसरी ओर पैसों की ,मैं डॉ से बिदा मांगकर तो आ गया लेकिन मेरे मन में वही कौतूहल चल रहा था..

मैं संजय सर और प्यारे के साथ उसी चाय की टपरी में खड़ा हुआ चाय पी रहा था,मैंने वंहा से कुछ दूर पर आकाश (पैसे वाला लॉन्डा) को देखा वो बनवारी के साथ खड़ा कुछ बात कर रहा था,अचानक उसकी नजर मुझपर पड़ी और वो मुस्कुरा दिया,क्लास में टॉप करने से मुझे कम से कम मेरी क्लास के लोग तो पहचानने लगे थे,और आकाश मुझे कुछ और भी कारणों से जानता था जिन लोगो को पिछले अपडेट याद हो वो समझ गए होंगे,वही वो लड़का था जिसने काजल को 5 लाख का ऑफर दिया था,एक बार मेरे जेहन में वो बात गूंज गई थी ,5 लाख...सारी मुसीबत एक ही बार में हल हो सकती थी,और मैं जानता था की आकाश काजल से बदला लेने के लिए 5 क्या ज्यादा भी दे सकता था,एक बार मैं सोच में पड़ गया लेकिन अगले ही पल मेरे जेहन में काजल का प्यारा चहरा चमका..

वो उसकी भोली आंखे और उसमें से टपकती हुई मासूमियत,कितने दिन हो गए थे उसे देखे हुए,अगर 5 लाख के लालच में मैं काजल को मना बीच लू तो ये आकाश काजल की क्या हालत करेगा ये सोच कर ही मेरे जेहन में खुद के लिए इस फैसले की वजह से नफरत सी उठ गई ,नही नही ये नही हो सकता मैं ऐसा नही कर सकता....लेकिन मैं करू तो क्या करू,एक तरफ मेरी जान की ये हालत है की उसे इलाज की जरूरत है और दूसरी तरफ मेरे पास ना तो पैसे है ना ही उसे उस रंडीखाना से निकालने की कोई तरकीब..

इतना तो फिक्स था की अगर काजल वंहा से निकली तो वो वंहा फिर से नही जा सकती थी और शकील ना उसे जिंदा छोड़ेगा ना ही उसे निकालने वाले को मुझे कुछ ऐसा करना था की शकील बस धुंए को खोजता रह जाए और काजल कही धुंए सी उड़ जाए,एक बार वो उड़ गई तो पैसे भी कही ना कही से जुगाड़ ही लूंगा.

दोस्तो मेरे जैसे आदमी के लिए 3 लाख बहुत बड़ी रकम थी लेकिन प्यार आपको वो हिम्मत देता है की आप अपने प्यार के लिए असंभव को भी संभव कर दिखाए,ये एक बार मेरे साथ हो चुका था जब काजल के टेस्ट के लिए 16 हजार लगने थे,मैंने जैसे ही उस टेस्ट का नाम गूगल किया मुझे समझ आ चुका था की ये टेस्ट केंसर के मरीजों के लिए होता है ये कन्फर्म करने के लिए की उन्हें केंसर है की नही ,और मुझे ये भी समझ आ चुका था की काजल के लिए ये टेस्ट कितना जरूरी है ,उस समय भी मेरी वो हैसियत नही थी आज भी नही थी,लेकिन एक यकीन उस समय भी था आज भी है.की मैं अपनी काजल के लिए कोई भी असंभव को संभव कर सकता हु और मुझे ये करना था,या ये कहु की करना ही था..

मैं उसे किसी भी कीमत में नही खो सकता था,वो मेरी किस्मत थी और किस्मत के आगे कोई भी कीमत कम ही होती है ....
 

अध्याय 22

मैं चलता हुआ बनवारी के पास चला गया

"अरे कैसे हो इंजीनियर बाबू ,तुम्हारी तो ठाठ है "

बनवारी की बात सुनकर मैं नकली हंसी में हँसने लगा..

"ये आकाश क्या कह रहा था"मैने जाते हुए आकाश की तरफ इशारा किया

"अरे कहेगा क्या वही पुराना चुद का जुगाड़ ऐसे तेरी आइटम पर इसकी नियत पूरी तरह से डोली है ,आज भी उसे पाने को कुछ भी करने को तैयार रहता है "बनवारी ने गंदी हंसी हंसी

"अरे कहे की मेरी आइटम काका,रंडीया आजतक किसी की हुई है क्या ,बस साली के साथ कुछ कर नही पाया "

मैंने बड़ी मुश्किल से ये कहा लेकिन ये कहना जरूरी था ,बनवारी जोरो से हंसा

"और कुछ कर भी नही पाओगे...हा हा जब तक की शकील की मेहरबानी ना हो जाए ,वैसे भी काजल उसकी खास माल जो है "

मैंने उसे थोड़े शक के निगाहों से देखा जैसे मुझे कुछ भी ना पता हो

"क्यो"

"अरे तुझे पता नही "

"नही तो "

"असल में शकील और काजल दोनों ही इस शहर में एक साथ आये ,शकील ही काजल को कही से उठा कर लाया था,उस समय यंहा शकील नही बल्कि उसके चाचा कयामत का जोर था ,जब शकील काजल जैसी माल को लेकर आया तो कयामत बहुत ही खुश हुआ और शकील को अपने साथ ही रख लिया,काजल बेचारी के लिए वो दिन उसके जीवन के सबसे मुश्किल दिन थे,सारे गुंडों ने उसे कई दिनों तक लगातार रौंदा,मैंने ये ये भी सुना है की जितना काजल को दर्द मिलता शकील को उतनी ही खुसी मिलती,पता नही कैसी दुश्मनी थी उस जल्लाद की शकील के साथ ,फिर काजल को रंडीखाने में ले जाकर पटक दिया,और कुछ ही दिनों में शकील ने कयामत को मारकर उसकी जगह ले ली ,तब से शकील इस जगह का राजा है,धीरे धीरे काजल का दर्द कम होने लगा और शकील का उससे ध्यान भी ,लेकिन फिर पता नही उसे क्या हो गया जो काजल का पीछा करने के लिए उसके कई गुंडे साथ ही रहते है ,शायद तेरे कारण हो "

बनवारी हँसने लगा था मैं भी साथ साथ हँसने लगा

"अरे मेरी इतनी औकात कहा जो मैं शकील भाई से पंगा लू.."

"लेना भी मत,सोचना भी मत वरना तेरे जिस्म से चमड़ी उतरवा देगा वो शकील ,महामादरचोद आदमी है साला,जल्लाद है "

मैंने हांमी भारी और बनवारी से दुवा सलाम करके उसको चलता किया,मैं फिर से उसी टपरी में आकर खड़ा हो गया था..

मेरे चहरे में आये हुए भाव से प्यारे और संजय सर बेखबर नही रह पाए,

"क्या हुआ राहुल कुछ परेशान लग रहे हो "

संजय सर ने पूछा था,मैं इसी कसमकस में था की इन्हें कुछ बताऊँ या नही लेकिन सोचा की शायद कोई मसाला निकल जाए

और मैंने काजल के बीमारी और अपनी मजबूरी वाली पूरी बात उन्हें बता दी .

"ओह यार ...ये तो बड़ा लोचा है भाई तू इन सबमे मत पड़ .."प्यारे ने झट से कहा

"यार मुझे पैसों की फिक्र नही है लेकिन काजल को वंहा रहने नई दे सकता उसे वंहा से भागना होगा"

"तू पागल हो गया है ,अभी अभी तो तूने कहा की शकील के गुंडे काजल के पीछे है ,साले तेरी चमड़ी निकाल लेगा वो "

संजय सर के चहरे पर एक गंभीरता सी आ गई

"सर कोई तो होगा जो मेरी मदद कर सके .."मैं जैसे फुसफुसाया लेकिन सभी खमोश थे,

"एक है "प्यारे चहका हम दोनों ने उसकी ओर देखा वो एक उंगली दिखा रहा था,बाइक पर एक हट्टा कट्टा नवजवान आ रहा था,माथे में तिलक लगाए उसका गौरा रंग और भी उभर कर सामने आ रहा था ,कंधे पर एक कपड़ा लपेटे हुए और आंखों में गॉगल लगाए वो किसी हीरो से कम नही लग रहा था.

"तू पागल हो गया है "संजय सर की आवाज अचानक से कांपने लगी थी,ये लड़का था हमारा प्रेसिडेंट अविनाश .

अविनाश भी संजय सर को देखकर रुक गया,

सभी ने उसे नमस्कार किया

"क्यो रे छोटे इधर आ ."उसने मुझे ही बुलाया था

"मादरचोद तू तो टॉप कर गया बे,तुझे देख कर लगता नही की तू इतना साना होगा,क्यो बे संजय तेरा लौंडा तो एकदम धांसू निकला ,तुझे ही प्रॉब्लम थी ना कमरे की अब कैसे चल रहा है "अविनाश ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा

"कुछ भी ठीक नही है भाई "

प्यार बोल उठा ,हम उसे ऐसे देख रहे थे की वो कुछ और ना बोल दे संजय सर की मानो फट के चार ही हो गई थी लेकिन प्यारे तो साला प्यारे ही था.

"भाई जिस बंदे ने इसे कमरा दिया था ना ,इस साले को उसकी मासूका से ही इश्क हो गया ,वो भी इसे प्यार करती है लेकिन .."

हम सब चौक गए थे प्यारे ने हमे आंखों से ऐसे इशारा किया जैसे कह रहा हो की मैं सब सम्हाल लूंगा तुम बस हा बोलो ..

अविनाश भी मुझे बड़ी अजीब निगाह से देखने लगा

"मैं तो साला तुझे सीधा साधा समझ रहा था तू तो एक नंबर का कमीना निकला "

"कमीनापन नही भाई इसने तो उसे अभी तक छुआ भी नही है ,लेकिन इसके मालिक को शक है की उसकी माशूका का किसी और के साथ चक्कर है और रोज बेचारी को बहुत मारता है,जंहा भी वो जाती है उसके गुंडे उसके साथ होते है,,अब ये बेचारा क्या करे वो ठहरा यंहा का डॉन और ये तो सीधा साधा आदमी है,इसकी बस इतनी गलती है की ये प्यार कर बैठा,अब गरीब का प्यार करना भी कोई गुनाह है क्या भाई..वो भी इससे मोहोब्बत करती है लेकिन बेचारी वंहा घुट घुट कर रह रही है "

अविनाश के आंखों में अचानक से मेरे लिए हमदर्दी का भाव आया,जंहा गरीब कह दो तो अविनाश भावुक हो जाता था..

"कोई नही छोटे कोन है वो मादरचोद तेरा मालिक उसके घर में घुस के उसे मारूंगा "

"नही नही भाई"मैं बुरी तरह से डर गया था क्योकि अविनाश को गरीबो से जितनी हमदर्दी थी उतना ही वो जिस्म बेचने वाली औरतो से नफरत करता था,दुनिया भी अजीब है वो रंडियों से नफरत करती है लेकिन ये कोई नही देखता की वो किस मजबूरी में इस धंधे में आ गई है ,ऐसे ही कुछ आदर्शवादियों में अविनाश की भी गिनती थी ..

"वो वो बहुत ही ताकतवर आदमी है शहर का डॉन है,और मैं उसके पास काम भी करता हु मैं नही चाहता की मेरा काम इस वजह से बंद होई जाए अभी उससे कुछ अच्छे पैसे बन जाए तो फिर मैं उसे छोड़ दूंगा "मैंने हड़बड़ाते हुए कहा

"ह्म्म्म क्या नाम है उसका "

अविनाश कुछ सोचता हुआ बोला

"किसका ??"

"अबे तेरी आइटम का और उस डॉन का "

"क क क क क क "मेरी जुबान लड़खड़ा गई थी

"किरण ??"
"नही भाई काजल ,और वो डॉन है शकील .."

"ओह तो शकील की माल है ,वही ना जो साला रंडियों का धंधा करता है सारे शहर को गंदा करके रखा है मादरचोद की रंडियों ने ,ठीक है छोटे तू फिक्र मत कर तेरा प्यार तुझे मिलेगा और उस शकील के बच्चे को पता भी नही चलेगा ,उस साले के गुंडों के नाक के नीचे से उठाकर लाऊंगा उसे ...ओ चाचा चलो सबको चाय पिलाओ ."

अविनाश की बात सुनकर हम सब एक दूसरे को देखने लगे,ये क्योकि ये जितना आसान लग रहा था उतना ही मुश्किल भी था,अगर अविनाश को थोड़ी भी भनक लग जाती की जिसे वो मेरे लिए उठाने वाला है वो एक जिस्म का धंधा करने वाली है तो हमारी खैर नही थी .....

 
अध्याय 23

मैं शकील के हवेली के दूसरे माले में बने एक कमरे में बैठा हुआ था जो उसने मुझे दिया था,वंहा एक बड़ा सा स्मार्ट tv लगा हुआ था और उसमें शेयर के भाव से संबंधित चार्ट चल रहे थे ,उसके कुछ भी दूर पर मैं एक लेपटॉप और एक डेस्कटॉप लिए हुए एक टेबल पर बैठा था बैठा था,शकील को मैं पैसे कमा कर दे रहा था और वो भी अब मेरे मनमुताबिक चीजे मुझे लाकर दे देता,मैं एक प्रोफेसनल ट्रेडर और इन्वेस्टर बनने की राह में निकल पड़ा था,महंगे सॉफ्टवेयर से लेकर महंगा ट्रेडिंग डेस्क तक उससे निकलवाना था लेकिन धीरे धीरे.

सामने की खिड़की खुली हुई थी और कुछ तेज आवाजे मेरे कानो में पड़ रही थी और साथ ही साथ मेरे चहरे में मुस्कान भी बढ़ रही थी,मैं आराम से अपना काम कर रहा था,तभी मेरे कमरे का दरवाजा धड़ाम से खुला,मैंने जानबूझकर बड़े बड़े हेडफोन लगा रखे थे जो मैंने कुछ ही दिनों पहले शकील से मंगवाए थे...मैंने कुछ ना सुनने की एक्टिंग की और साथ ही पेन निकलाकर अपने नोटबुक में शेयर के कुछ प्राइस लिखने लगा..कुछ देर तक कुक नही हुआ थोड़ी ही देर में किसी ने मेरे कानो से हेडफोन निकाल दिया ..मैं हड़बड़ाया ..

"अरे भाई आप यहां "शकील साक्षात मेरे सामने खड़ा था साथ ही उसके कुछ लोग भी थे ,सभी के चहरे में गुस्सा मानो टपक रहा था ..

"ये कान में क्या ठूस के रखा है बे मादरचोद "

उसके एक आदमी ने कहा ..

"इसे हेडफोन कहते है गवार साले.."

मैंने उसके हाथो से अपना हेडफोन छीनते हुए कहा ..

"आइए ना भाई बैठिए,वो क्या है ना की बाहर की आवाज से दिमाग डिस्टर्ब ना हो इसलिए काम करते समय ये लगा लेता हु ,आप के आने का पता ही नही चला,माफ कीजियेगा,बैठिए ना "

मेरी बैठत सुनकर भी शकील नही बैठा..

वो बस मुझे घूरता रहा जैसे सभी लोग घूर रहे थे.

"क्या हुआ भाई की प्रॉब्लम है क्या ??"

मैं थोड़ा डरते हुए उससे पूछा ..

"काजल गायब हो गई है .."

शकील ने सपाट शब्दो में कहा ..

"वाट क्या मतलब की गायब हो गई है .."

"वो चाल से निकली थी कही जाने के लिए,मेरे आदमी उसके पीछे ही थे लेकिन फिर एक मोड़ से वो गायब हो गई ,हर जगह ढूंढा लेकिन कही दिखाई नही दी ...तुम्हे कुछ पता है की वो कहा जा सकती है .."

शकील की आवाज बिल्कुल ही नार्मल थी ,उसे मेरे ऊपर शक तो था लेकिन वो भी जानता था की मैं पिछले दो दिनों से कही नही गया हु क्योकि मैंने कह रखा था की कंपनियों के तिमाही रिजल्ट आने वाले है और मुझे उसकी स्टडी करनी है ,मैं दिन भर अपने कमरे में बैठा हुआ कुछ ना कुछ पढ़ता रहता और ये मैं कोई एक्टिंग नही कर रहा था मैं सच में यही कर रहा था,और शकील भी इसकी जांच करता रहता की मैं क्या कर रहा हु ,इसलिए उसका दिमाग ये फैसला ही नही कर पाया की मैं काजल के गायब होने में शामिल हो सकता हु या नही ...आज उसने मुझे जिस अवस्था में पूरी तरह से मगन होकर काम करते देखा था उसका थोड़ा मोड़ा शक भी डगमगा सा गया होगा.

"भाई मुझे उस रंडी का क्या पता,मैं तो अंतिम बार आपसे परमिशन ले के ही मिलने गया था,उसके बाद से मैंने उसे अपने दिमाग से निकाल कर फेक दिया था और अपने काम में लग गया ..भाई एक चीज कहु इस तीन दिनों में मैंने 5 ऐसी कंपनियां ढूंढ ली है जिसमे 6 महीनों के निवेश में हमे बहुत ही ज्यादा मुनाफा हो सकता है ,भाई इस बार थोड़ा बड़ा अमाउंट लगाएंगे,बहुत हो गया छोटा मोटा गेम अब बड़ा गेम खेलते है,आप बोलो तो मैं कंपनियों के बेलेंस शीट दिखता हु आपको "

मुझे काजल के ऊपर कोई इंट्रेट ना लेता हुआ देखा वंहा खड़े सभी लोगो के चहरे थोड़े फीके पड़ गए शायद उन्हें लगा था की वो आज मुझे तबियत से धोएंगे...वही मैंने कम्पनियों के बारे में इतने इंटरेस्ट से कहा की शकील का भी थोड़ा मोड़ा शक जाता रहा..

"हम्म बाद में देखेंगे अभी नही ,हा अगर उसका कही पता चले तो बताना "शकील ने फिर से शालीनता से कहा

"अरे भाई छोड़ो उस रांड को जितना वो जिंदगी भर में कमा के देगी उतना तो मेरे शेयर आपको 6 महीनों में कमा कर दे देंगे"

मैं हँसने ही वाला था की एक आदमी भड़क गया

"ये मादरचोद चुप कर ,यंहा बात पैसे की नही है इज्जत की है ,भाई के चकले से कोई रांड भाग जाए ऐसा आज तक नही हुआ है ,वो मादरचोद तो मरेगी अब .."

उसके आंखों में आग था मैं सच में डर गया था..

"सॉरी भाई ,मुझे उन सब धंधों का कुछ नही पता.."

मैंने थोड़ा कांपते हुए कहा

"ये जाने दे उसे इन सबका कुछ नही पता,इसे इसका काम करने दे .."

शकील ने उस आदमी को थोड़ा झड़का और बाहर निकल गया

..

मैं जानता था की शकील मुझपर कितना भी भरोसा करे लेकिन वो अपने लोगो को मेरे पीछे लगा कर ही रखेगा,इसलिए काजल से मिलना अभी भी मेरे लिये बस सपना था ,लेकिन अविनाश ने अपना काम बड़े ही खूबसूरती से कर दिया था,शकील को काजल के गायब होने की भनक भी नही लगी ,अविनाश ने ये कैसे किया ये तो वही जाने लेकिन मेरे दिल ने एक डर फिर से उमड़ गया था की अगर अविनाश को काजल की सच्चाई का पता चल गया तो फिर क्या होगा खैर मुझे अभी इन सबसे अपना दिमाग हटाना था,और इसका एक ही तरीका था,पैसे कमाना,मैंने फिर से अपनी नजर स्क्रीन में गड़ा दी ...

**********

मैं बेचैनी से अपने कालेज के एक कमरे में टहल रहा था,शकील के लोग मेरे एक एक मूवमेंट पर नजर रखे हुए थे,मैंने प्यारे और संजय सर से भी अभी के लिए ट्रेडिंग बंद करने को कह दिया था,मैंने उनसे उन शेयर में पैसा लगाने को कह दिया जो 6 महीने में पैसा कमा कर देते,रोज वाली झंझट खत्म कर दिया था क्योकि मैं उनके टच में नही रहना चाहता था,इससे शकील को शक हो सकता था,शकील के लोग कालेज तक तो मेरा पीछा कर सकते थे लेकिन कालेज के अंदर नही क्योकि अंदर आने के लिए आई डि चाहिए था और वो ऐसे मेरा पीछा कर रहे थे जैसे जेम्स बांड की औलाद हो उन्हें लगता था की मुझे नही पता की कोई मेरा पीछा कर रहा है ...खैर मैं बेचैन था क्योकि अविनाश ने मुझे उस खाली कमरे में बुलाया था,काजल को गायब हुए 2 दिन बीत चुके थे मैं भी उसकी हालत जानने को बेताब था,प्यारे ने मुझे बताया था की अविनाश के लड़को ने पहले तो काजल की रेकी की और पता लगाया की कौन कौन है जो उसके पीछे लगे है फिर सफाई से एक मोड़ में काजल को क्लोरोफार्म सूंघा कर बेहोश कर दिया और वही पड़े एक कचरे के डिब्बे में डाल दिया और निकल गए ,शकील के आदमी पागलों की तरह पूरा शहर ढूंढते रहे लेकिन उनके आंखों के सामने रखे कचरे के डिब्बे पर उनकी नजर नही गई जिसे रात में मुन्सिपर्टी की गाड़ी उठाकर ले गई और काजल को सही सलामत गर्ल्स होस्टल के एक कमरे में पहुचा दिया गया...काजल ने होश में आकर कैसे रिएक्ट किया इसके मुझे पता नही लेकिन इतना जरूर जानता हु की उसने इतने नरक अपने इस जीवन में देखे है की कोई भी सिचुएशन उसे डरा नही सकती ..

चिंता में मेरे माथे में आया हुआ पसीना और भी बढ़ रहा था तभी मुझे खिड़की से आविनाश आता हुआ दिखा साथ ही कई चेले भी थे लेकिन वो सभी बाहर ही रुक गए..

"गुड मॉर्निंग सर "

मैंने उसे अंदर आता देख तुरंत ही विस् किया ..

"मादरचोद .."

अविनाश मुझतक तेजी से बड़ा और चटाक ..

एक जोरो का झापड़ मेरे गालों में धर दिया..

"मादरचोद तुझे अपना भाई बोला,तेरी मदद की और मुझसे ही गद्दारी की तूने,जिससे मैं सबसे ज्यादा नफरत करता हु तुने मुझसे उसकी ही मदद करवाई ,रंडी के प्यार में तूने मुझसे ऐसा काम करवाया तेरी माँ को चोदू"

चटाक चटाक ..अविनाश मेरे बालो को पकड़कर मुझे मार रहा था,ये समझने में मुझे बिल्कुल भी देरी नही लगी की उसे काजल की असलियत का पता चल चुका है,अविनाश रंडियों का चहरा देखना भी पसंद नही करता था लेकिन उसके कुछ दोस्त पक्के रंडीबाज भी थे,और काजल तो शहर की सबसे फेमस वाली थी तो शायद कोई उसे पहचान गया होगा.

"वो तो गिरधारी ने उसे पहचान लिया वरना मैं तेरे कारण उससे मिलकर उसे बहन कहने वाला था...मादरचोद ..भाग जा और ले जा अपनी रांड को यंहा से ,तेरे कारण मैंने एक रांड को गर्ल्स कालेज में रखा है,तेरी माँ का "

मैं नीचे गिर चुका था और वो मुझे लातों से मार रहा था..अविनाश ने अभी तक काजल को नही देखा था और वो अब देखेगा भी नही क्योकि वो रंडियों का चहरा भी नही देखता,लेकिन मेरे लिए ये बड़ी आफत थी क्योकि काजल को वंहा से बाहर निकलना यानी हम दोनों की मौत पक्की ..

"सर आप जितना मरना चाहो मारो लेकिन मेरी बात तो सुनो,वो मर रही है भाई उसे केंसर है ..मेरी बात तो सुनो "

मैं नीचे पड़ा हुआ गिड़गिड़ा रहा था लेकिन वो मेरी बात सुनने के बिलकुल भी मूड में नही था.

"कल की मरने वाली आज ही मर जाए साली रांड ,दुनिया से भार ही कम होगा "वो मुझे और भी जोरो से मारने लगा था

तभी वंहा दो लोग और आ गए

"सर प्लीज एक बार उसकी बात तो सुन लीजिए,एक बार प्लीज् ...मेरी खतिर "

ये संजय सर थे..वो हांफ रहे थे शायद उन्हें पता चल गया था की मेरे साथ क्या हो रहा है ..

"तेरी खातिर मादरचोद तू भी खायेगा,तेरे कारण ह मैंने इस चूतिये की मदद की है "

अब अविनाश मुझे छोड़कर संजय सर को मारने लगा तब तक मैं खड़ा हो चुका था ..

"मारिये सर और जोर से मारिये मुझे भी मारिये और मार ही डालिये लेकिन एक बात याद रखिये वो भले ही जैसी भी है लेकिन मेरा प्यार है.,और कोई रंडी जानबूझकर नही बनती सर कभी वो भी एक अच्छी लड़की थी लेकिन शकील ने उसे रंडी बना दिया,कभी वो भी ऐसी लड़की थी जिसे आप बहन कह सकते थे लेकिन उसे उसके घर से किडनैप करके लाया गया ,उसे मारा गया उसके साथ ना जाने कितने बार बलात्कार किया गया,उसको अपना जमीर बेचने पर मजबूर किया गया,और उसे वो बना दिया गया जो मौत से भी गंदी जिंदगी है ...आप आज उसे भले ही कितनी भी गली दे दे लेकिन याद रखियेगा सर की असली गुनहगार काजल नही बल्कि उसे रंडी बनाने वाला शकील है ...वो तो एक मासूम लड़की थी आज भी वो उतनी ही मासूम है लेकिन लोगो ने उसकी मासूमियत को नही उसके जिस्म को देखा और आज उसके जिस्म का सौदा कर रहे है ,उस बेचारी को केंसर जैसी बीमारी है लेकिन ...काश की उसे आसान मौत आ जाती तो शायद उसे इस नरक जैसी जिंदगी से तो आजादी मिल जाती ,लेकिन नही मौत ने भी अपनी क्रूरता दिखाई अब अगर उसकी बीमारी बढ़ गई तो वो पल पल मरेगी,और हा सर आप मुझे भले ही चूतिया कहे लेकिन मैं उससे प्यार करता हु,वो मेरे लिए क्या है ये आप नही समझ पाओगे,उसने मुझे माँ के तरह प्यार दिया,बहन की तरह मेरा ख्याल रखा,वो आपके लिए एक रंडी होगी लेकिन मैंने कभी उसे उस नजर से ना ही देखा है ना ही छुआ है ...वो मेरे लिए एक देवी है सर .."

मैं रोता हुआ नीचे बैठ गया था प्यारे ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा,वही अविनाश मेरी बात को सुनकर रुक चुका था,वो कुछ देर तक कुछ भी नही बोल पाया ...

"तेरे लिए वो क्या है इससे मुझे कोई मतलब नही ,आज ही उसे होस्टल से निकल कर ले जा वरना मैं खुद उसे शकील के पास छोड़कर आऊंगा ,तेरे लिए होगी वो देवी मेरे लिए वो रंडी थी और रहेगी."

अविनाश इतना ही बोलकर जाने के लिए मुड़ा था

"सर सोचिए की अगर कोई गुंडा तरुणा को किडनैप कर ले "

अविनाश तुंरत ही मुड़कर मुझे देखने लगा,तरुणा अविनाश की मुहबोली बहन थी जो हमारे ही कालेज में पढ़ती थी ,सभी जानते थे की अविनाश उसे अपनी सगी बहन से ज्यादा मानता था ..

तरुणा का नाम सुनकर उसके आंखों में अंगारे जलने लगे वही प्यारे और संजय सर तो ऐसे अकड़ गए जैसे सांप सूंघ लिया हो ..

"सोचिए की उसके साथ कई सप्ताह तक लगातार कई लोग बलात्कार करे "

"मादरचोद .."अविनाश के सब्र का बांध टूट गया था उसने पास ही पड़ा हुआ डस्टर उठा कर मेरे सर में मार दिया,मेरे सर से खून बहने लगा था .

"और सोचिए की फिर उसे किसी रंडीखाने में फेक दिया जाए ,जब उसका जिस्म मौत से लड़ रहा हो तो भी उसके जिस्म का सौदा किया जाए "

"तेरी इतनी हिम्मत बहनचोद "

अविनाश मेरे ऊपर टूट पड़ा था उसने मुझे जमीन में गिरा दिया था और मेरे ऊपर चढ़कर घूंसों की बारिश कर दी थी ,मैं कुछ बोलता उससे पहले ही मेरे चहरे पर घूंसा पड़ जाता था ..

लेकिन फिर भी मैं बड़ी ही मुश्किल से बोलने लगा

"सर... ,,अगर ,,अपनी भूख मिटाने...के लिए...अपना जिस्म बेचने के सिवा कोई ..चारा ना बचे.."

इस बार अविनाश के मुक्कों की ताकत कम पड़ने लगी थी ...आखिर वो रुक गया लेकिन मेरे ऊपर से नही उठा,उसके हाथ मेरे खून से लाल हो चुके थे,मेरा पूरा चहरा खून से लथपथ था,मैं बेहोश होने की कंडीशन में था लेकिन कोई ताकत मुझे अब भी जगाए रख रही थी ..

"सर...सोचिए की उसके लिए जिस्म की अहमियत ही खत्म हो गई हो,सोचिए की जब आत्मा ही मर जाए तो जीना कैसा लगता होगा,जब प्यार शब्द बस कहानियां लगने लगे,जब अपना कहने को आपके पास बस आपका दलाल हो तो कैसा लगता होगा,जब आंखों में कोई सपना नही रह जाए और आंसू भी सुख जाए तो जीना कैसा लगता होगा..सर उसे ही रंडी कहते है..और जो मैंने आपको बताया वो किसी मासूम लड़की के साथ हो चुका है ,वो भी तरुणा की तरह किसी की बहन रही होगी ,...आज वो एक रंडी है ...वो मेरी काजल है सर ..उसका भाई शायद उसे नही बचा पाया लेकिन आप उस तरुणा को बचा लीजये ,आप भी एक रंडी के अंदर उस खोई हुई तरुणा को देख पाएंगे,उसे जिंदा रहने दीजिए,उसे फिर से प्यार कर पाने का हौसला दीजिए ,उसे भी खुदा पर और खुद पर भरोसा करने दीजिए सर..."

मेरे आंखों के सामने अंधेरा छा रहा था,चहरा खून से लथपथ था लेकिन मैं अविनाश के आंखों से गिरते हुए आंसुओ को अपने चहरे पर महसूस कर पा रहा था..मेरे होठो में एक मुस्कान खिली और सामने बस अंधेरा ही रह गया ...
 
अध्याय 24

जब मेरी आंखे खुली मैंने खुद को एक बिस्तर में लेटा हुआ पाया,मैं किसी अस्पताल में था ,प्यारे मेरे सामने बैठा हुआ मुस्कुरा रहा था ..

"क्या हुआ बे "

मेरे जबड़े में अब भी दर्द था मैं बड़े ही मुश्किल से बोल पाया..

"तू मुझे सच सच बता ,तूने जो अविनाश को बोला वो पहले से लिख कर लाया था या जो दिल में आया वो बोल दिया.."

वो अब भी मुस्कुरा रहा था

"क्यो"

"क्यो?? अबे उसका तो जैसे हृदयपरिवर्तन ही हो गया,उसने ही तुझे यंहा दाखिल करवाया और साथ में कहा है की वो काजल को होस्टल में रहने देगा और उसकी सुरक्षा भी करेगा ,लेकिन बस वो उसे देखेगा नही ,साले ने कसम जो खाई है की किसी रंडी का चहरा नही देखेगा.."

प्यारे बोल तो गया लेकिन फिर अचानक उसे कुछ याद आया

"ओह सॉरी भाई काजल को ऐसा बोलने के लिए"

उसकी बात सुनकर मैं बस थोड़ा मुस्कुराया और आंखे बन्द करके लेटा रहा..

थोड़ी ही देर हुए थे की शकिल अपने आदमियों के साथ मेरे सामने था..

"किस मादरचोद की इतनी हिम्मत हो गई जो हमारे आदमी पर हाथ उठाये "

शकील मेरे सामने ही खड़ा था ,जबकि प्यारे एक कोने में दुबक गया था..

मैं शकील को देखकर मुस्कुराने लगा

"छोड़ो ना भाई ,वो कालेज का एक छोटा सा मेटर था,सुलझ गया है"

"अबे कैसे छोड़ दे अब तू हमारा आदमी है ,तुझपर हाथ उठाने का सीधा सा मतलब है की हमारे ऊपर हमला ,तू बता बे किसने मारा इसे "

शकील प्यारे का कॉलर पकड़ कर हिला रहा था,प्यारे की तो संट हो चुकी थी वो मुझे देखने लगा ,मैं अब भी मुस्कुरा रहा था ,क्यो??

पता नही लेकिन जीवन में पहली बार मुझे ऐसा आभास हुआ की मैं भी किसी के लिए इतना इम्पोर्टेन्ट हु ,एक कालेज का प्रेजिडेंट मुझे हॉस्पिटल में भर्ती करवाता है,एक मेरा दोस्त जो अपना काम धाम छोड़कर घंटो से मेरे साथ बैठा है और एक शहर का सबसे बड़ा गुंडा जो मेरे ऊपर हुए हमले का बदला लेना चाहता है,कही ना कही सभी के अंदर मेरे लिए प्यार देख पा रहा था,ऐसा इसलिए भी क्योकि मेरे साथ ऐसा कभी नही हुआ था,

प्यारे और शकील दोनों ही मुझे मुस्कुराते हुए देख रहे थे..

"तू क्यो हँस रहा है बे बहनचोद "

शकील का दिमाग थोड़ा खराब हो गया

"भाई मुझे नही पता था की आप मुझसे इतना प्यार करते है,मेरे लिए किसी से लड़ने को तैयार हो गए,सच में ये जानकर बहुत खुसी हुई "

मेरी बात सुनकर जंहा प्यारे चौक गया वही शकील बुरी तरह से झेंप गया,उसके लिए मैं सिर्फ एक मोहरा था जिसे वो लीगल तौर से पैसा कमाने के लिए यूस कर रहा था लेकिन मेरी बातों में छिपे इस अपनत्व के भाव से वो थोड़ा हड़बड़ाया,उसके पूरे गिरोह में उसके साथ अपनत्व का संबंध किसी से नही था सभी के लिए वो बस बॉस था..

"भाई जाने दीजिए बस छोटी मोटी लड़ाई थी ,एक दो दिन में मैं ठीक हो जाऊंगा"

"हम्म लेकिन कौन था वो मादरचोद "

शकील फिर से जोरो से बोला

"अविनाश तिवारी...इसके कालेज का प्रेजिडेंट हु ,इस साले ने मेरी बहन के बारे में उल्टा सीधा बोला था इसलिए ठोक दिया,लेकिन इसने माफी मांग ली और इसे अस्पताल में भी ले आया ,बात खत्म आखिर मेरा भी जूनियर है .. "

सभी दरवाजे की ओर देखने लगे जंहा अविनाश खड़ा था,उसके पीछे ना जाने कितने लड़के और थे,ये सरकारी अस्पताल आज किसी जंग के मैदान जैसा दिख रहा था...शकील और अविनाश आमने सामने थे,लेकिन शकील के चहरे में अजीबो गरीब भाव आ जा रहे थे.

तभी अस्पताल का डॉ अंदर आया

"देखिए ये अस्पताल है आपलोगो का जो भी झगड़ा है वो प्लीज् बाहर निपटाये "

शकील ने एक बार डॉ को देखा एक बार मुझे और एक बार अविनाश को

"ह्म्म्म इसने गलती की तूने मार दिया चल ठीक ,लेकिन आइंदा अगर इसे हाथ लगाने से पहले ये याद रखना की ये मेरा आदमी है "

शकील ने अविनाश से कहा और अपने आदमियों के साथ तुरंत ही वंहा से निकल गया,डॉ ने भी चैन की सांस ली ..

अविनाश भी मुस्कुराता हुआ मेरे पास आया ..

"क्यो बे छोटे अब कैसा है ,होस्टल की लड़कियों को तेरी आइटम का ख्याल रखने के लिए बोल दिया है,मैं तो उससे नही मिल पाऊंगा लेकिन फिक्र मत कर उसे कोई तकलीफ नही होगी ,उसे बता दिया गया है की उसे तूने वंहा लाया है,अब आगे क्या करना है तू देख ले ."

अविनाश पलटा ही था की मैंने उसे रोक लिया

"सर....धन्यवाद बोलकर आपका मान कम नही करूंगा ,आप मुझे छोटे बोलते हो अपना भाई बोलते हो तो एक छोटे से प्रश्न का उत्तर चाहता हु,आप जिस्म का सौदा करने वाली लड़कियों से इतनी नफरत क्यो करते हो "

मेरी बात सुनकर अविनाश एक बार पलटा उसकी आंखों में जैसे अजीब सा दुख देखा मैंने..वो कुछ भी नही बोला बस एक व्यंगात्मक मुस्कान थी उसके होठो में ,एक दर्द था उस मुस्कान में ,और वो चला गया ...

प्यारे ये सब देखता हुआ उछलता हुआ मेरे पास आ गया अब पूरे कमरे में हम दोनों ही थे ..

"भाई तूने तो कमाल ही कर दिया ,अविनाश और शकील दोनों को सेटल कर दिया ,क्या दिमाग लगाया तूने "

उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुराया

"दिमाग नही दोस्त ,बस दिल लगाया,जो दिल से कहने की इक्छा हुई बस वही कहा."

"ओह तो प्यार का असर है ,दिल विल की बात बहुत ही ज्यादा करने लगा है तू ,"

हम दोनों ही हँस पड़े थे,दिल प्यार ये शब्द ही मुझे मेरी काजल की याद दिला देते थे ..

कैसी होगी क्या कर रही होगी,और फिर मुझे आगे क्या करना है,अभी भी 2-3 लाख का इंतजाम मेरे पास नही था,कुछ 1 लाख मैं इधर उधर से जुगाड़ भी सकता था मैं बस सोचता ही रह गया..

********

हॉस्पिटल से आये मुझे दो दिन हो चुके थे,एक तरफ मैं था जो अपने काम के जरिये अपने मन को सम्हालने की कोशिस में लगा था,.एक तरफ काजल थी ना जाने उसपर इन सबमे क्या बीत रही होगी,शकील मुझपर कितना भी भरोसा करे लेकिन मेरे ऊपर से नजर नही हटाई थी और मैं कोई रिस्क नही लेना चाहता था.

शाम रात में बदल गई थी और मैं लेटा हुआ ना जाने कब नींद के आगोश में डूब गया.

एक मखमली हाथ मेरे सर को सहला रहा था,कुच नर्म जुल्फों की आहट मेरे चहरे में महसूस हो रही थी,एक भीनी सी खुशबू मेरे नथुनों में समा रहे थे,मैंने हल्के से आंखे खोली और खुद को काजल के पास पाया,उसका चहरा मेरे चहरे में झुका हुआ था,उसके मोटे गाल और भी गुलाबी लग रहे थे,उसकी आंखों में चंचलता थी जो मेरे आंखों में समाने लगी थी,मेरी ये हालत देख कर वो मुस्कुराई और बड़ी ही अदा से अपने बालो को सवार..

"तुम यंहा क्या कर रही हो .."मैं चौक कर उठ चुका था,

"क्यो तुमसे मिलने नही आ सकती क्या ??"

उसने थोड़ा नाराज हो कर कहा

"पागल हो गई हो क्या,यंहा शकील का कोई आदमी देख लेगा तो "

"दुनिया की कोई ताकत मुझे तुमसे मिलने से नही रोक सकती,और मैं यंहा तुमसे मिलने आयी हु और तुम हो की डर के दुबके हुए हो ""

उसके आंखों की चमक से मेरे दिल में एक अजीब सी शीतलता का प्रवाह हो गया था,मैं उससे लिपट गया..

"इतने दिन हो गए हमे मिले हुए मैं तुम्हारे बिना कैसे रह पाता हु ये मैं ही जानता हु .."

काजल बड़े ही प्यार से मेरे बालो को सहला रही थी

"और तुम्हे क्या लगता है मुझे अच्छा लगता है तुमसे बिछड़कर जीना ...अब हमे कोई अलग नही कर सकता राहुल.."

मैंने नजर उठाई और उसके कोमल गालों पर अपनी उंगलियां चलाने लगा,वो मखमल से मुलायम थे बेहद ही चिकने,मैं उसकी आंखों में देख रहा था..

"तुम कोई सपना हो या हकीकत "

वो बस मुस्कराई तभी मेरे दरवाजे में कोई खटखटाहट हुई ..

"अबे चूतिये इतनी रात को किससे बात कर है "

बाहर मेरे निगरानी में खड़े आदमी ने कहा,मैंने झट से काजल की ओर देखा वो वंहा नही थी..

मैं मुस्कुराया

"कुछ नही बस सपना देख रहा था.."

"साले लगता है सर में चोट का असर थोड़ा ज्यादा हो गया है सो जा "

उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुराने लगा और फिर से आंखे बंद करके सो गया,दिल में बस काजल ही काजल थी और थोड़ी ही देर में मेरे बाजू में लेटी हुई मिली ,वो अब भी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी,मैं उसके गालों को सहला रहा था

"मैं जानता हु की तुम एक सपना हो लेकिन तुमसे वादा करता हु मेरी जान जल्द ही मैं इसे हकीकत में तब्दील कर दूंगा."

मैं काजल के सीने में फले वक्षो में अपना सर लगाकर सो गया,उसके हाथो के प्यार भरे स्पर्श को मैं अब भी अपने सर में महसूस कर पा रहा था...सोने की इससे बेहतर जगह मेरे लिए और क्या ही हो सकती थी....
 
अध्याय 25

जब से मैं हॉस्पिटल से आया था शकील से मेरी बात नही हुई थी,पता नही क्यो लेकिन ना उसने मुझे मिलने बुलाया ना ही कोई मार्किट के संबंध में बात हुई ,इधर मेरे दिमाग में पैसे को लेकर टेंशन बढ़ रही थी मेरे लिए अभी पैसे कमाना जरूरी हो गया था वही मैं प्यारे और संजय सर से भी बात नही कर पा रहा था,मेरे ऊपर सिक्युरिटी बहुत ही बढ़ गई थी ,ऐसे तो हमेशा ही रहती थी लेकिन हॉस्पिटल से आने के बाद से जो बदलाव हुआ था वो मुझे अचंभित करने लगा था ,मैं बहुत हद तक ठीक हो चुका था और अब मुझे बाहर जाना था लेकिन कालेज जाने से भी मुझे मना कर दिया गया था ,मैंने प्यारे को अपने पास बुलाना चाहा लेकिन इसके लिए भी मुझे मना कर दिया गया..

मैं बेहद ही गुस्से में था लेकिन कर भी कुछ नही सकता था ,प्यारे और संजय सर मेरी अनुपस्थिति में काजल की देखभाल कर सकते थे या अगर जरूरत पड़ी तो उसे डॉ के पास ले जा सकते थे ,लेकिन हॉस्पिटल में ले जाने के लिए पैसे चाहिए थे,मैं सोच में ही पड़ा था की आखिर क्या किया जाए .

मैं हवेली में अपने कमरे से बाहर जाकर वंहा काम करने वाले लोगो से मिलने जुलने लगा,क्या पता वक्त में यही लोग मेरे काम आ जाए,वो लोग मुझे कुछ नही समझते थे लेकिन हॉस्पिटल वाले वाकये के बाद से कुछ कुछ सम्मान मुझे मिलने लगा था ,वही मैं एक टोली के साथ बैठा हुआ चाय पी रहा था .

"ऐसे चिरकुट तूने वो कमाल ही कर दिया रे उस तिवारी की बहन को छेड़ दिया तूने हा हा हा."

यंहा आखिरकार लोग मुझे या तो चिरकुट कहते या चूतिया,खैर ..

"अरे नही भाई बस गलती से निकल गया था "

"हा लेकिन वो अविनाश भी साला है बड़ा वाला,कई बड़े नेताओ से उसके पहचान है ,हमारे भाई की पुरानी दुश्मनी है उससे "

मेरे दिमाग में ये बात खटक गई ,अविनाश ने तो कभी नही कहा था की उसकी शकील से कोई दुश्मनी है.मेरे सामने हॉस्पिटल का वो मंजर घूम गया जब अविनाश और शकील आमने सामने हुए थे,शकील के चहरे में एक अजीब से भाव आये थे ..

"क्यो.."

"क्या पता यार बस जब जब भाई उसका नाम सुनते है तो उनका चहरा ही थोडा अजीब हो जाता है,हॉस्पिटल में भी देखा ना कैसे उन्होंने कुछ नही कहा और उनका चहरा थोड़ा अजीब हो गया जैसे कुछ सोच रहे हो ."

साला आखिर उनके बीच कौन सी दुश्मनी हो गई ,हर चीज की एक शुरुवात होती है तो हो उनके दुश्मनी की भी कही ना कही से शुरुवात हुई होगी ,आखिर कहा से

"ओ ऐसे भाई यंहा आने से पहले किस जगह में थे ."

"पहले भाई केशरगढ़ में रहता था,यंहा से कुछ 200 किलोमीटर की दूरी पर है ,बढ़िया जगह है पहाड़ झरने सब है वंहा ,उस रंडी काजल के साथ भाई यंहा आया और फिर छा गया ."

रंडी काजल...मेरे जेहन में फिर से काजल का ख्याल उभरा

"भाई आखिर काजल का क्या हुआ वो मिली की नही "

"अभी तक तो नही लेकिन मिल जाएगी ,साली जाएगी कहा,शकील भाई जब से उस अविनाश से मिले तब से उसके पीछे भी आदमी छोड़ रखे है,उन्हें शक है की शायद उसी ने काजल को उठवाया होगा ."

"अविनाश ने वो क्यो उठवायेगा "

मैं बुरी तरह से चौका और साथ ही साथ मेरे जेहन में डर की एक लहर भी दौड़ गई

""वो तो भाई ही जाने लेकिन जब से उससे मिले है तब से कह रखा है की उसे निगरानी में रखो ,पहले लगा की तेरे कारण कह रहे है लेकिन फिर एक बार उनके मुह से सुना की अगर काजल को इसने उठवाया है तो दोनों को जान से मार दूंगा,तब पता लगा की आखिर वो क्यो ऐसा करवा रहे है "

उसकी बात सुनकर मेरी सांस ही फूलने लगी थी ,मैं चुपचाप वंहा से निकला और अपने कमरे में चला गया,मेरे अंदर डर का एक साम्राज्य खड़ा हो गया क्योकि शकील ने अविनाश के लिए भी आदमी लगा रखे थे,लेकिन फिर मुझे अविनाश की एक बात याद आ गई जब उसने कहा था की वो काजल का चहरा भी नही देखेगा ,यानी वो उससे नही मिलेगा...हे राम ..मैंने एक गहरी सांस ली मुझे थोड़ा सकून मिल रहा था मैं सीधे शकील से मिलने पहुच गया .

"भाई मुझे कालेज जाना है "

"क्या करेगा तू कालेज जाकर ,यंहा रह और काम कर "

"लेकिन भाई पढ़ाई??"

"अरे मादरचोद पढ़ कर किसने आजतक क्या उखाड़ लिया है जो तुझे पढ़ाई करना है ."

"भाई मैं ऐसे भी कभी कभी ही कालेज जाता हु,सप्ताह में कम से कम दो दिन तो जाना ही पड़ेगा वरना मुझे एग्जाम में बैठने नही देंगे "

"अबे यंहा तो तू कमा रहा है ना फिर क्या करेगा पढ़कर "

पास खड़े हुए एक आदमी ने कहा मैं शकील की तरफ होकर बोला

"भाई ये कमाई कोई कमाई है ,अगर पढ़ लिया डिग्री ले ली तो इसे ही बड़े लेवल में ले जा सकते है,इसके बाद MBA भी कर सकता हु और खुद का एक इन्वेस्टमेंट फर्म भी खोल सकते है ,आपको फिर ये सब करने की जरूरत ही नही होगी एक ही फर्म से आप इतना कमा सकते हो ,और आपके पास इतने आदमी है की हम उनसे मार्केटिंग करवाकर अपने क्लाइंट जोड़ा करेंगे ,पूरी तरह से वाइट मनी वो भी करोड़ो नही अरबो में ,अभी इस हवेली में रहते हो तब आप बंगले में रहोगे वो भी कई एकड़ के ,और स्कार्पियो की जगह आपके बंगले में मर्सडीज और लम्बेर्गिनी खड़ी होगी ,भाई आजकल अंडरवर्ड के धंधे में ना पैसा है ना ही सम्मान ,सोचो अगर पैसा होगा तो आप इलेक्सन भी लड़ सकते हो ,फिर वो अविनाश जैसे चिरकुट आपके सामने मुह भी नही खोल पाएंगे ."

अविनाश का नाम सुनते ही शकील ने मुझे घुरा..

"हा भाई अगर हम ऐसे ही रहे तो एक दिन वैसे लड़के साले इलेक्सन लड़कर फिर नेता बन जायेगे पावर में बैठे तो आपका पूरा धंधा ही चौपट करवा सकते है "

मेरी बात सुनकर शकील तो शांत था लेकिन उसका एक चमचा भड़क गया

"मादरचोद भाई का धंधा बंद करवा दे इतना दम किसी में नही है ,काट के रख देंगे "

उसकी बात सुनकर मैं हंसा

"भाई सही कहु आपकी जितनी भी पहुच हो लेकिन धंधा तो इनलीगल ही है ना,कोई मंत्री अगर चाहे तो आज के आज ही सब बंद करवा देगा ये आप भी जानते हो ,सरकार के पास इतने पुलिस और आर्मी वाले है की आपके एक एक आदमी का एनकाउंटर कर दे ,जब तक सब चल रहा है तब तक सब ठीक है अगर कुछ हुआ तो सब खत्म एक ही झटके में ...भाई आज असली पावर तो सत्ता में ही है ,और अगर आपका कोई लीगल बिजनेस हो तो कोई आपके ऊपर उंगली भी नही उठा पायेगा "

मेरी बात सुनकर वहां एक सन्नाटा सा छा गया था वंहा खड़े लोग सालों से शकील के वफादार थे लेकिन किसी में इतनी हिम्मत नही थी की कोई उसके सामने ऐसी बात बोल सके ,शकील भी मुझे ही घूर रहा था...आखिर वो जोरो से हँस पड़ा..

"साले तू सपना बहुत ही बड़े दिखाता है ,तुझे कालेज जाना है ठीक है जा,लेकिन इतना मत फेका कर कभी कभी पचता नही है "

शकील फिर से मुस्कुराने लगा

"नही भाई क्यो नही हो सकता बिल्कुल हो सकता है"

शकील फिर से हंसा लेकिन इस बार उसकी हंसी में वो बात नही थी ..

"वो बाद की बात है ,अभी तू जा,पहले तो मैं उस रंडी काजल को ढूंढ कर उसे उसके कर्मो की सजा दे दु फिर नेता भी बन जाऊंगा ,और उस अविनाश के सामने फिर से उसे नंगी करके चोदूगा तभी मुझे सकून मिलेगा ."

शकील की बात में वो गुस्सा था की मैं अंदर तक हिल गया था ,मुझे समझ नही आ रहा था की अखिर मैं कैसे रिएक्ट करू ,मेरे दिमाग में उसका कहा एक शब्द बार बार घूमने लगा था 'फिर से '.....

******************

संजय सर और प्यारे को मैं सप्ताह भर की स्ट्रेटिजी बता रहा था .

"सर ये अविनाश सर है कहा से ."

"शायद केसरगढ़ से क्यो ??"

मैं बस सोच में ही पड़ा रहा

"नही बस ऐसे ही ,सर उनका तो कई लोगो से संपर्क है क्या किसी मंत्री से बोलकर काजल का इलाज नही करवाया जा सकता ,यानी मैंने सुना था की वो केंसर के इलाज के लिए पैसे दे सकते है ,अगर कोई मान जाए तो ."

संजय सर ने एक गहरी सांस ली ,

"हुउम्म देखते है बात करके "

***********************

"ये हीरो इधर सुनो "

मैं अपनी क्लास खत्म करके निकला ही की मेरे कानो में किसी की आवाज पड़ी ,मैं उस देखा तो मुझे तरुणा दिखाई दी ,तरुणा अविनाश की मुहबोली बहन है .

मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया

"यस मेम."

वो मेरी सीनियर थी,संजय सर की क्लासमेट

"तुम्हारा ही नाम राहुल है जिसे भाई ने बहुत मारा था "

"जी मेम"

"चलो मेरे साथ कुछ बात करनी है "

मैं उनके पीछे पीछे चलने लगा हम अब कैंटीन में थे

अविनाश से मार खाने के बाद मैं पहली बात कालेज आया था और आज मुझे पता चला की मैं कितना फेमस हो गया हु ,सभी मुझे ही देख रहे थे,इस बात से मुझे डर भी लग रहा था क्योकि मेरे फेमस होने से मेरी और काजल की कहानी भी चर्चा आम हो सकती थी .

मेरा डर शायद तरुणा समझ गई

"फिक्र मत करो काजल के बारे में सिर्फ भाई के खास लोगो को और गर्ल्स होस्टल में कुछ लड़कियों को ही पता है ,ऐसे बहुत ही प्यारी लड़की है तकदीर ने उसके साथ बहुत बुरा किया ,मुझे भाई पर गर्व है की उसने इस लड़की की मदद की ,हा ये अलग बात है की तुम्हे बहुत मार खानी पड़ी ..कुछ लोगे "

तरुणा थोड़ा मुस्कुरा रही थी,और काजल के बारे में सुनकर मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगी थी .

"मेडम काजल कैसी है "मैने तत्परता से पूछा

"मैंने पूछा था की कुछ लोगो ,कोल्ड काफी चलेगा मेरा फेवरेट है "

"मेडम जहर पिला दीजिए सब चलग आप लोग मेरे लिए जो कर रहे हो उसका अहसान मैं जान देकर भी ना उतार पाऊं "

मेरे आंखों ना जाने क्यो लेकिन पानी आ चुका था,जिसे देखकर वो मुस्कुरा रही थी

"चलो इमोशनल ड्रामा बंद करो ,भइया दो कोल्ड काफी "उसने वही बैठे बैठे काउंटर में हाथ दिखाया

"मेडम काजल."

"अरे बता रही हु ,थोड़ा आराम से ,सांस तो ले लो ,सही कहती है काजल तुम बिल्कुल ही चूतिया हो .."

वो जोरो से हँस पड़ी ..

और दोस्तो मेरी काजल ने मुझे चूतिया कहा था ,दिल में खुसी का गुबार फुट पड़ा था,कोई गाली भी किसी को इतनी खुशी दे सकती है ये मैंने आज ही जाना था ,मेरे चहरे में मुस्कान थी दिल में प्यार ही प्यार था और आंखों में कुछ बून्द जो मैं लाना तो नही चाहता था लेकिन बस साले आ गए थे,तरुणा मेरी हालत को देख कर मुस्कुरा रही थी ..

"बहुत प्यार करते हो उससे "

"क्या पता मेम प्यार को कैसे नापते है मुझे नही पता ,बस इतना जानता हु की कुछ तो हमारे बीच "

वो हँस पड़ी

"तुमने उसके लिए अपने जान और केरियर की परवाह नही की ,आज भी तुम उसके लिए इतने खतरे उठा कर उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हो ,तुम उसके लिए मार खा रहे हो ,इतने खरनाक आदमी से पंगा लेकर रखे हो ,गरीब होते हुए भी पैसे की चिंता ना करते हुए उसके लिए तुमने जो कुछ हो सकता था उतना किया ,अब यार अगर ये प्यार नही तो और क्या होगा ,तुमने कभी भी काजल को उस नजर से नही देखा जिससे उसे दुनिया देखती है ,जानते हो काजल के लिए तुम क्या हो .."

मैं चौक कर उनके चहरे को देखने लगा,काजल ने मेरे बारे में ये सब उन्हें बताया था

"तुम काजल के लिए देवता हो जिसे वो कुछ भी दे सकती लेकिन जिसने उसे दुनिया की हर खुशियां दी है "

इस बार तरुणा के आंखे भी हल्की गीली थी,मैं भी अपने अंदर से फूटते हुए शैलब को बड़ी मुश्किल से सम्हाल पा रहा था,मेरी काजल मुझसे इतना प्यार करती थी की उसने मुझ जैसे आदमी को देवता का दर्जा दे दिया था ..

"नही मेम मैंने कुछ भी नही किया है उसके लिए ,उसने मुझे जो प्यार दिया है उसके सामने तो ये कुछ भी नही है ,जितना प्यार और अपनत्व उसने दिखाया है उतना आज तक मुझे किसी ने नही दिया "

तरुणा के होठो में एक मुस्कान खिल गई

"तुम दोनों को समझना ही बेकार है दोनों एक दूसरे की ही तारीफ करते रहोगे ..खैर छोड़ो ,भाई बता रहे थे की काजल बीमार है क्या हुआ है उसे ."

मैने काजल की बीमारी के बारे में बताया साथ ही ये भी की अगर अविनाश चाहे तो काजल की कुछ मदद कर सकता है ,तरुणा ने मुझे वचन दिया की वो अविनाश से बात करेगी ,मेरे लिए इससे सुकून की कोई बात नही थी क्योकि अगर तरुणा अपनी तरफ से अविनाश को ये बोले तो अविनाश मानेगा ही .

"तो मजनू जी अपनी लैला से कुछ बोलना हो तो बता दो मैं उसे बता दूंगी "

"धन्यवाद मेडम,आप उसके साथ है तो मुझे कोई फिक्र नही है,हा बस उसे ये पुछएगा की उसका घर कहा है ,मैं जानता हु वो बताना नही चाहेगी इसलिए उसे ये मत बताइएगा की मैंने पूछा है बस यू ही बातों बातों में पूछियेगा की वो कहा की रहने वाली है... "

तरुणा के चहरे में अजीब से भाव आये

"क्यो.???"

"बस कुछ जरूरी काम है,शकील से संबंधित .."

"ठीक है आई होप की तुम जो कर रहे हो सोच समझ कर ही कर रहे होंगे ,ओके टेक केयर अगली बार मिलते है .."
 
अध्याय 26

जिंदगी कई उलझनों में लिपटी हुई चल रही थी तरुणा ने मुझे बताया की काजल ने अपने अतीत के बारे में बताने से उसे साफ मना कर दिया जो हो चुका था वो उसे याद नही करना चाहती थी,

मैं बस कुछ शक ही कर सकता था लेकिन यकीन से कुछ भी नही कह सकता था की आखिर शकील और अविनाश के बीच रिलेशन क्या है.

खैर जो भी हो वो बस इतना तो पता था की शकील अविनाश को जानता है लेकिन अविनाश शकील को नही जानता,क्योकि अविनाश का नाम सुनकर और उसे देखकर शकील के चहरे की हवाइयां उड़ी थी जबकि अविनाश बिल्कुल ही नार्मल था ...और अविनाश और काजल के बीच कोई सम्बंध जरूर है.

खैर अभी मेरे लिए सबसे बड़ी मुसीबत थी दिन रात का पहरा,सिर्फ कालेज के अंदर ही मैं शकील की नजर से दूर रहता था बाकी समय उसके लोग मेरे आसपास ही रहते थे.

कालेज में मेरी मुलाकात मेरे एक सीनियर से हुई जो कम्प्यूटर साइज़ के जीनियस कहे जाते थे,मेरा कोडिंग में इंटरेस्ट देखकर उन्होंने मुझे बुलाया,नाम था देबुजीत ,उन्होंने मेरे अंदर कम्प्यूटर और टेक्नोलॉजी की दुनिया का कुछ अलग ही कीड़ा लगा दिया,उन्होंने मुझे हैकिंग के बारे में बताया जो की नेटवर्किंग का पार्ट था,और अभी कोर्स में भी नही था लेकिन ऐसी चीजो में मुझे इंटरेस्ट बढ़ गया क्योकि मुझे कुछ ऐसा साधन खोजना जरूरी था जिससे मैं शकील के आंखों के सामने ही अपना काम कर सकू और उसे भनक भी ना लगे,देबू सर ने मुझे डार्क वेब के बारे में बताया,डार्क वेब इंटरनेट की वो दुनिया है जंहा कई इनलीगल काम होते है और उन्हें पकड़ा भी नही जा सकता वो एक ऐसा जाल है जंहा अनजान आदमी जाए तो अपना सब कुछ लुटा कर ही आएगा,हैकर्स का गढ़ ,अंडरवर्ड और टेरीरिस्ट लोग भी यंहा एक्टिव है तो पुलिस भी यंहा निगरानी करने की कोशिस करती है,उन्होंने मुझे कुछ बेसिक समझाए और हैकिंग सीखने के लिए डार्क वेब में अपने साथ जुड़ने की सलाह दी ताकि वो मेरा मार्गदर्शन कर सके और वंहा उन लोगो से मिलाए जो की हैकिंग तो करते है लेकिन उसका कोई गलत उपयोग नही करते ..

मैंने भी अपने एक लेपटॉप को खाली किया वंहा से अपने सारे पर्सनल इंफेरमशन डिलीट किया और डार्क वेब के लिए ही उसे रखा,और फिर एक नए दुनिया में प्रवेश किया जो की सामान्य इंटरनेट की दुनिया से बेहद ही अलग थी,कहा जाता है की इंटरनेट की दुनिया का सिर्फ 30% ही सामान्य इंटरनेट है बाकी का 70% डार्क वेब के जरिये ऑपरेट होता है,वो आपको कुछ भी करने की सुविधा देता है लेकिन अगर आप गलत लोगो के हाथ लग गए तो आपका खेल खत्म क्योकि सुरक्षा की कोई गारेंटी वंहा नही होती.

मैं देबू सर के बताए साइट में विजिट किया और उनके रिफरेंस से मुझे वंहा का मेंबर भी बना लिया गया,

वाह ...ये भी एक दुनिया थी,नए नए इन्फॉर्मेशन वंहा अवेलेबल थे,मुझे बस सीखना था और मैं सीखने लगा था.

इधर

शकील के हवेली में एक हलचल सी थी,दुबई से किसी डॉन का काल शकील को आया था और वो उसे अपने साथ काम करने के लिए दुबई बुला रहा था..वो चाहता था की इंडिया में उसका काम शकील ही देखे ,इससे शकील की पॉवर बेहद ही बढ़ने वाली थी उसे बेहिसाब पैसा मिलने वाला था जिससे वो यंहा नेताओ और पुलिस को खरीद कर अपने काम को और भी आसानी से चला सके ,पहले तो शकील को यकीन ही नही हुआ लेकिन फिर उसने अपनी इन्वेस्टीगेशन करवाई वो नंबर दुबई का ही था आर साथ ही उस डॉन का पर्सनल नंबर था ,बाकायदा उसके लोग शकील से मिलने आये और उनसे बात की ,आखिर शकील का दुबई जाना फाइनल हो गया था,वो यंहा के काम को जल्दी से जल्दी निपटान चाहता था और एक जरूरी काम था काजल को ढूंढना .

मैं शकील के सामने खड़ा हुआ था

"क्यो बे तुझे क्या प्रॉब्लम हो गई अब"

"भाई वो आप दुबई जा रहे हो और यंहा मेरे ऊपर इतने आदमी लगा के रखे हो,आप के जाने के बाद तो ये लोग मनमानी ही करने लगाएंगे, क्या अब भी आपको लगता है की काजल के गायब होने में मेरा कोई हाथ था ,इतने दिन बीत गए है छोड़िए इन सबको ये साले मुझे कोई काम ठीक से नही करने देते हर बात पर सवाल करते रहते है,मैं परेशान हो गया हु इन सबसे और वो रंडी तो साली ना जाने कहा भाग गई अगर इस शहर में रहती तो क्या अभी तक वो नही मिलती .."

शकील अपने तैयारी में ऐसे भी परेशान था और मेरे मुह से काजल का नाम सुनकर वो और भी बौखला गया ..

"अबे तुझे चाहिए क्या "

"भाई इन चिरकुट लोगो को मुझसे दूर ही रहने के लिए बोलिये ,सालों को कुछ समझ तो आता नही है बस मेरा दिमाग खाते रहते है,आप थे तो आपका नाम लेकर इन्हें समझा देता था अब तो ये मेरे सर में चढ़कर मुतेंगे."

अब मेरी भाषा भी कुछ कुछ शकील के गैंग वालो की तरह ही हो रही थी .

"ह्म्म्म ठीक है अब से कोई इसका पीछा नही करेगा रे,ऐसे भी यंहा धंधा सम्हालने के लिए मुझे और आदमी चाहिए चूतिये पर अब और आदमी बर्बाद नही करूंगा मैं ,चल जा अब "

मेरी तो बांछे ही खिल गई थी ,शकील कुछ 10 दिनों के लिए बाहर रहने वाला था इन 10 दिनों में मुझे अपने सभी बचे काम करवाने थे,सबसे जरूरी था काजल का इलाज ...

**********

शकील जा चुका था और मेरे पीछे लगे लोगो को उसने बाकी के कामो में लगा दिया था,दुबई वाले डॉन की शर्त ऐसी थी की शकील को काजल और बाकी चीजो से अपना ध्यान हटाकर उन कामो में ही फोकस करना पड़ा,फिर पासपोर्ट वीसा आखिर शकील दुबई के लिए रवाना हो गया..

***********

मैं अभी अभी शहर के एक मशहूर हॉस्पिटल के सामने खड़ा था ,मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था,कारण साफ था की आज मैं इतने दिनों के बाद अपनी काजल को देखने वाला था,तरुणा ने डॉ से बात करके ऑपरेशन की डेट फिक्स करवा ली थी,काजल हॉस्पिटल में एडमिट भी हो चुकी थी,उसके टेस्ट चल रहे थे दूसरे दिन उसका ऑपरेशन होना था..

धड़कते हुए दिल से मैं हॉस्पिटल की ओर बढ़ रहा था,रिसेप्शन में ही मुझे तरुणा मिल गई ..

"क्यो मजनू आखिर आ ही गए लैला से मिलने"

मैं क्या कहता

"कहा है वो ..?"

"सेकंड फ्लोर रूम नंबर 132"

तरुणा ने मुझे मुस्कुराते हुए कहा और बाहर की ओर निकल गई ,मैं भागता हुआ लिफ्ट के पास पहुचा वो ऑलरेडी ऊपर थी मैंने सीढ़ियों का सहारा लिया और दौड़ाते हुए 2nd फ्लोर में पहुच गया ..

सामने वो कमरा था जंहा मेरी जान थी,मैंने धीरे से उसे खोला..

"कौन है आप बाहर जाइये "

मेरे अंदर घुसने से पहले ही एक नर्स चिल्ला पड़ी,

"जानते नही ये केंसर वार्ड है जाइये पहले ग्लब्स पहन कर आइए "

नर्स मेरे साथ ही बाहर आ गई मेरे ही उम्र की लड़की थी लेकिन बेहद ही तीखी..

"मेडम मैं उसका दोस्त हु "

"सभी तो जबसे उसके दोस्त ही आ रहे है परिवार वाले कहा है उसके "

"वो ....वो यंहा कालेज में पढ़ती है तो परिवार वालो के आने में समय है "

"ओह दोस्त हो तो ठीक है अपनी दोस्त से बाद में मिल लेना चलो जाओ यहां से कल आना ऑपरेशन खत्म हो जाए उसके बाद अभी वोऑब्जेर्वशन में है .परिवार वाले होते हो मिलने की अनुमति थी "

उसकी बात सुनकर मेरा चहरा उतर गया ,मैंने अपना सर झुका लिया था जब मैंने चहरा उठाकर फिर से उस नर्स को देखा तो मैं चौका क्योकि उसके होठो में एक शरारती मुस्कान थी ,मैं उसे प्रश्न भरे नजरो से देखने लगी और वो खिलखिला उठी ..

"तरुणा ने मुझे बताया था की इसका मजनू आने वाला है उसकी लेना,मैंने तो ले ली ,जाओ जाओ तुम्ही लैला अंदर तुमसे मिलने की बेचैनी में मरी जा रही है "

वाह ,यार क्या बताऊँ कैसा लगा ,लगा जैसे उस नर्स को पकड़ कर अभी जोर की झप्पी दे दु लेकिन मैं भगा और तुरंत ही अंदर घुस गया,

मेरी नजर उस चहरे पर थी जिसे देखने को मैं इतने दिनों से बेताब था जिसे मैं बस अपने सपने में ही देख रहा था,काजल ने मुझे देखा और उसके चहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई,वो अभी बिस्तर में लेटी हुई थी ,हॉस्पिटल में मिलने वाला मरीज वाला गाउन पहने हुए थी ,उसके चहरे को देखकर मेरा दिल ही डूब गया,वो बेहद ही कमजोर दिख रही थी ,आंखों में काले घेरे आ चुके थे,चहरे की रंगत उतर सी गई थी,उसकी मुस्कान से ही उसकी कमजोरी का आभास हो रहा था.

मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसके हाथो को अपने हाथो में ले लिया...

"क्या हो गया तुझे इतनी कमजोर लग रही है तू"

उसने अपने हाथ मेरे गालों में फिराये

"तू नही था ना मेरा ख्याल रखने के लिए "

उसके आंखों में आंसू आ गए थे,साथ ही मेरे भी

"किसने कहा था मुझे खुद से दूर करने के लिए,तुझे छोड़कर उस उस साले शकील के साथ रहना पड़ रहा है मुझे .."

काजल मुस्कुराई

"बहुत बड़ा हो गया है ना तू मेरे लिए शकील से पंगा ले लिया,मुझे उठवा लिया,और अब...इतने बड़े हॉस्पिटल में मेरा इलाज करवा रहा है पैसे कहा से आये रे तेरे पास "

"अरे तू अपनी चिंता कर वो मैं देख लूंगा "

"कैसे उतारूंगी तेरा इतना कर्ज "

उसकी बात सुनकर मेरे होठो में एक शरारती सी मुस्कान खिल गई पता नही क्यो लेकिन शायद उसने भी कुछ समझा जो मैंने नही कहा था,उसने मेरे गालों में हल्की सी चपत मारी.

"चूतिया "

और मैं खुद को नही रोक पाया रोता हुआ उससे लिपट गया..

"ये सुनने के लिए तरस गया था मैं "

वो मेरे बालो को सहला रही थी ...

"पूरा बच्चा है तू,मेरा बच्चा.."

उसने बड़े मुश्किल से उठकर मेरे बालो को चूमा और फिर से लेट गई

कुछ पल होते है ना वो जिसमे आप अपना सब कुछ भूल जाते हो ,मेरे लिए वो वही पल था,शकील की सारी टेंशन,काजल के पास्ट की सारी टेंशन सब कुछ उसके इस एक प्यार भरे किस ने ही भुला दिया था,मैं उसकी आंखों में देख रहा था कोई बात हमारे बीच नही हो रही थी ना जाने कितना समय ऐसे ही निकल गया जब मुझे कुछ याद आया .

"मैंने तरुणा को कुछ पूछने को कहा था ,की तुम कहा की रहने वाली हो "

मेरे सवाल से काजल का खिला चहरा कुछ उतर सा गया

"क्या करोगे जानकर.जो बीत गया वो वापस नही आता "उसकी आवाज बेहद ही कमजोर थी

"मुझे जानना है की शकील तुमसे इतनी नफरत क्यो करता है "

काजल ने कुछ देर मुझे यू ही देखा फिर जोरो से हँस पड़ी

"मुझे तो ये समझ नही आता की शकील तुमसे इतनी मोहोब्बत कैसे करने लगा है,साला तू जो भी बोलता है मान ही लेटा है "

काजल बातों ही बातों में बातों को घुमा रही थी बड़ी ही खूबसूरती से मुझे उसका इंटेंसन तो समझ आ गया लेकिन मैं चुप ही रहा .

मैंने भी बात कोई घुमाया

"अविनाश सर से मिली "

मैं देखना चाहता था की अविनाश का नाम सुनकर उसके चहरे में क्या कोई परिवर्तन आता है और वो आया

"वो तो रंडियों को देखना भी पसंद नही करते ना,खैर उनको मेरा धन्यवाद कहना की उन्होंने एक रंडी की इतनी मदद की "

काजल के चहरे में एक अजीब सा दुख था जिसे मैं पढ़ ही नही पा रहा था और मेरे इस सवाल से और उसके इस जवाब से माहौल कुछ गमगीन सा हो रहा था,मैं काजल के बड़े दिन पर उसे दुखी नही करना चाहता था...मैंने बात वही छोड़ दी

"तरुणा मेडम कैसी है तुम्हारा ध्यान तो रखती है ना "

काजल के होठो में फिर से मुस्कान आ गई

"वो तो बिल्कुल मेरे बहन के जैसी है,राहुल मुझे आज भी यकीन नही होता की मैं यंहा हु,उस रंडीखाने के बाहर जिंदगी जी रही हु,सिर्फ तुम्हारे कारण "

काजल की आंखों में असीमित प्यार देखकर एक बार मैं उनमे डूब ही गया,इतना स्नेह इतना प्यार था उन आंखों में और थोडा सा पानी भी ..

"तेरी याद आती है रे "

मेरा गाला कुछ भर सा गया था,उसने बस मुस्कुराते हुए मेरे बालो में अपनी उंगलियां फंसा ली ,वो बस मेरे आंखों में देख रही थी,वो अजीब पल होते है जब होठो में मुस्कुराहट होती है और आंखों में प्यार से भरा हुआ पानी .

वो कुछ बोल नही रही थी बस मेरे बालो को सहला रही थी ,मुझे निहार रही थी ,मैं उसकी छतियो में सर रखकर सो गया,ये मेरे लिए जन्नत थी इतना सकून दुनिया में कही नही होता जीतना अपने से प्यार करने वाले के सीने में सर रखने का होता है ,

ना जाने कितनी देर ,कोई शब्द कही से नही आ रहे थे ,ना किसी को अपना प्यार जताने की कोई होड़ थी ,ना कुछ समझने समझाने की कोई चिंता,बस मैं था वो थी और अहसास था,शायद ये कहना गलत होगा..

क्योकी कोई दूसरा तो था ही नही बस हम थे जो एक थे और था अहसास वो भी एक ही था....
 
अध्याय 27

मैं कालेज से जब हवेली पहुचा तो पता चला की शकील वापस आ चुका है,उसे गए 4 दिन ही हुए थे,माहौल बेहद हि टेंशन का था और जाते ही मुझे कहा गया की शकील भाई मुझे बुला रहे है ,

शकील बेहद ही गमगीन मुद्रा में बैठा हुआ था साथ ही उसके सभी पंटर भी दुखी और उदास ही दिख रहे थे,

"भाई आदाब ,आप बहुत ही जल्दी आ गए,अपने तो कहा था की 10 दिन लगेंगे "

शकील ने सर उठाकर मुझे देखा उसका चहरा बेहद ही ख़ौफ़नाक लग रहा था,चहरे में अजीब से भाव थे,

"तू कम्प्यूटर इंजीनियर है ना मुझे एक चीज बता क्या कोई किसी और के मोबाइल से किसी और कोई काल कर सकता है "

"मतलब "

"मतलब की जैसे क्या कालिया के मोबाइल से तू मुझे काल कर सकता है.."

कालिया शकील का आदमी था और वही पास में ही खड़ा था

"है बिल्कुल क्यो नही ,कालिया भाई अपना मोबाइल देना "

"ऐसे नही ,अगर तेरे पास कालिया का मोबाइल ना हो तो "

मैं चुप हो गया और सोचने लगा..

"ऐसे कैसे हो सकता है भाई ??"

"हो तो सकता है,मुझे एक इंसान ने बताया जो मुझे दुबई में मिला था..सोच सोच "

"हुआ क्या है भाई किसे काल करना है,और मुझे नही पता लेकिन मेरे टीचर शायद बता पाए ऐसे अगर मैं कालिया का मोबाइल हैक कर लू तो ये हो सकता है ,लेकिन वो कैसे करते है मुझे नही आता,हा मैंने सुना जरूर है "

"हम्म्म्म"

शकील ने मुझे ध्यान से देखा

"तो पता कर और ये भी अगर किसी का मोबाइल हैक कर लिया जाए तो क्या उसका पता लगाया जा सकता है की ये काम किसने किया है "

"जी भाई लेकिन हुआ क्या है और आप इतने परेशान क्यो लग रहे है "

"किसी ने हमसे धोखा किया है ,दुबई वाले डॉन ने हमे कभी बुलाया ही नही था,किसी ने उसके नंबर से हमे और इंडिया में उसके कुछ नेटवर्क को चूतिया बनाया ,समझ नही आ रहा है की ये किसने और क्यो किया होगा,"

"भाई मतलब आपका नही बल्कि उस डॉन का मोबाइल हैक किया गया है "

"वही तो साला और भी बढ़ा सर दर्द हो गया है ,उन्होंने मुझे पकड़ कर रखा था उसके पूरे गैंग में ये बात फैल गई ,साला जिंदगी में इतना जलील कभी नही हुआ जिनता उस मादरचोद ने किया "

"लेकिन भाई अगर उसका मोबाइल हैक हुआ तो वो उसकी गलती है आपकी नही और उसके गैंग के किसी आदमी ने ही किया होगा.."

"वो पता लगा रहा है,उसने बड़े बड़े हैकर्स को लगा दिया है की आखिर कौन है वो जिसने उसका मोबाइल हैक करके मुझे काल किया,फिर इंडिया में उसके लोगो को सिर्फ इसलिए की वो मुझे दुबई भेज सके "

शकील की बात से मेरा माथा ठनक रहा था..

"भाई ऐसा भी तो हो सकता है की कोई उसे ये अहसास दिलाना चाह रहा हो की डॉन भी उसके सामने कुछ नही है ,हो सकता है की आप उसके टारगेट हो ही नही ,बल्कि उसने आपको रेंडमली ही चुन लिया हो "

"हु हो सकता है ,डॉन के लोग भी यही कह रहे थे,बड़ी मुश्किल से वंहा से निकल कर आया हु ,वो साला जो भी हो मिलेगा तो साले को कुत्ते की मौत दूंगा "

"भाई उसे तो वो डॉन भी ढूंढ रहा होगा,उसके हाथ लगेगा तो वो ही मार देंगा."

"हा ये तो है ,तू कुछ कर सकता है क्या "

"भाई वंहा बड़े बड़े हैकर्स बैठे है मैं क्या कर सकता हु ,मैंने तो अभी अभी कम्प्यूटर पकड़ा है "

"देख ले यार अगर कोई ऐसा आदमी मिले जो ये बता पाए की वो आदमी कौन था तो ...हो सकता है की दुबई वाले भाई के नजरो में मेरी कुछ इज्जत बढ़ जाए,साला ना जाने क्या क्या सोच लिया था मैंने सब मिट्टी में मिल गया.."

पहली बार शकील मुझसे कुछ मांग रहा था,छिनने वाला आदमी कभी कभी इतना मजबूर हो जाता है की मांगना शुरू कर देता है वाह क्या बात है,वक्त इंसान को क्या क्या नही बना देता.

"ओके भाई पता करता हु "

"लेकिन साला ये कम्प्यूटर,टेक्नालजी भी क्या जोर की चीज है साला इतने बड़े डॉन को भी चूतिया बना दिया "

शकील अचानक से हँसा..फिर मुझे देखने लगा

"छोटे तू सिख जो ये कहते है ना हैकिंग...तू सिख जो चीज लगे मैं तुझे दूंगा साला अगर ये हमारे हाथ लग जाए तो सोच क्या क्या कर लेंगे..आज हर आदमी के हाथो में मोबाइल है,हर जगह कैमरा लगे है,हर कोई इंटरनेट चला रहा है ,आज जिसने टेक्नोलॉजी को जीत लिया वो तो राजा है ,वही असली डॉन है ."

शकील के चहरे में अजीब सी महत्वकांक्षा खिल गई थी ..

उसने बोलना जारी रखा

"सोच जब उस डॉन को पता चला की उसके मोबाइल से मुझे और उसके बंदों को काल गया था तो साले का चहरा देखने लायक था,जिसका यंहा की पुलिस कुछ नही बिगड़ पाई वो आदमी डर रहा था,"

शकील जैसे सदमे में पहुच गया था ,वो जोर जोर से हँस रहा था..

"वंहा जो हैकर्स आये उन्होंने बताया की किसी का भी बैक अकाउंट भी हैक किया जा सकता है,कुछ भी हैक किया जा सकता है ,सोच मादरचोद इतनी मेहनत करने की ही क्या जरूरत जब सब हमे घर बैठे ही मिल जाए ..हा हा हा ."

"छोटे तू सिख जो लगे मैं तुझे दूंगा लेकिन तू ये सब सिख यार "

शकील की बात सुनकर मैंने बस हा में सर हिलाए और मंद मंद मुस्कुराने लगा ..मैं मन ही मन सोच रहा था

'सीखा चूतिये सीखा,जिस दिन सिख गया पहले तो तेरी ही गांड फाडूँगा ..'

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मैं अपने कमरे में अपना लेपटॉप खोले हुए बैठा हुआ था,मैं डार्क वेब में गया,और एक वेबसाइड में अपनी id जिसका नाम rocky था से लॉगिन किया,सामने चैट बॉक्स में जाकर मैंने के मेसेज किया

rocky: हैल्लो भाईजान

BadeBhaiya :ह्म्म्म छोटे,कैसी रही

rocky:सोचा नही था उससे कही ज्यादा अच्छा ,धन्यवाद आपका,मछली तो खुद ही जाल में फंसने को तैयार बैठी है ..

BadeBhaiya :गुड ,अब बता की और क्या चाहता है..

rocky:बस यही की उसे बर्बाद कर दु

BadeBhaiya :तब तो पूरा जाल डालना पड़ेगा

rocky:वो खुद ही तैयार है बस आप बताओ की आगे क्या करना है ...

BadeBhaiya :ओके..तो अपने घर में ****** ये सब समान मंगवा ले ,और ये ******* साफ्टवेयर उसके मोबाइल में इंस्टाल करवा ले ,बाकी वो खुद ही बर्बाद हो जाएगा ..

(उसने कुछ डिवाइस और कुछ साफ्टवेयर के बारे में लिखा जिसे मैंने नोट कर लिया )

rocky: धन्यवाद भाईजान आपका अहसान कैसे चुकाऊंगा

BadeBhaiya :उसकी फिक्र मत कर ,मैं अपना हिस्सा खुद ही ले लूंगा...

मेरे चहरे में उसकी बात सुनकर एक मुस्कान आ गई

rocky:ओके

BadeBhaiya :ओके सेटअप तैयार कर फिर बताना,फिर मैं बताउगा की आगे क्या करना है ...

rocky : ओके

मेरे चहरे में मुस्कान थी और दिल में अपार खुसी ,शकील को रोड में लाना इतना आसान होगा मुझे पता भी नही था..

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इधर

एक कम्प्यूटर स्क्रीन पर

I_am_a_dog :मछली ने चारा कहा लिया

BadeBhaiya :वो तो खुद ही तैयार बैठा है लूटने के लिए

I_am_a_dog :गुड ,तुम्हारा ईमान भी तगड़ा होगा

BadeBhaiya :थैंक्स ,लेकिन लड़का मासूम है

I_am_a_dog :मासूम देखेंगे तो काम कैसे करेंगे,मा चुदाने गई उसकी मासूमियत खुद ही मारने आया है यंहा पर

BadeBhaiya :हम्म ओके

I_am_a_dog :तू रेडी है ना या किसी और को कहु

BadeBhaiya :नही मैं कर लूंगा

I_am_a_dog :गुड सेटअप तैयार हो जाए फिर बताना

BadeBhaiya :ओके ..

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