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mastram kahani एक अधूरी प्यास.... 2

नौकरानी शांति धड़कते दिल के साथ शुभम को अंदर कमरे में ले गई,,, शुभम को घर में लाते हो उसे आस पड़ोस में किसी ने नहीं देखा था वैसे भी इतनी ठंड और ऊपर से हल्की हल्की बर्फ गिरने की वजह से सड़क पर चहल-पहल बहुत ही कम थी,,,
शुभम शांति को अपनी बाहों में लेने के लिए बेहद उतावला था लेकिन वह अपने आप पर कंट्रोल किए हुए था,,, शांति की गोलाकार नितंबों का घेराव गर्म कपड़ों में साफ नजर आ रहा था,,,।

बैठो,, छोटे बाबू,,,

तुम मुझे शुभम कह सकती हो,,,

बड़ा अजीब लगता है आप लोग इतने बड़े घर के हो,,,, पहली बार कोई अच्छे घर का मेरे घर आया है,,,।( शांति शर्माते हुए बड़े संकोच में बोली,,,) यह छोटा सा कमरा( अपने कमरे में चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए,,) तुम्हारी हैसियत के हिसाब से मैं तुम्हारी खातिरदारी तो नहीं कर सकती लेकिन क्या लोगे गर्म या ठंडा,,( शांति अपनी मादक अदा बिखेरते हुए बोली,,,।)

अब तो मुझे शर्मिंदा कर रही हो मेरी नजर में कोई छोटा बड़ा बिल्कुल भी नहीं है अमीरी गरीबी यह सब मुझे बिल्कुल भी रास नहीं आती मेरे लिए सब बराबर है,,,, बस खूबसूरत होना चाहिए,,,( शुभम अंतिम में खूबसूरत शब्द पर दबाव देते हुए बोला था और शुभम के कहने का मतलब शांति अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए उसके होठों पर मुस्कान आ गई,,,।)

फिर भी मेरे घर आए हो तो थोड़ी बहुत तो खातिरदारी का मौका मुझे मिलना ही चाहिए,,,।

तुम जिस तरह की खातिरदारी करोगी शांति शायद उस तरह की खातिरदारी कोई नहीं कर पाएगा,,,,

तुम्हारे कहने का मतलब मैं अच्छी तरह से समझ रही हूं लेकिन फिर भी औपचारिकता रूप से,,, कॉफी पियोगे या कुछ और,,, कुछ और से मेरा मतलब है कि यहां ठंडी के मौसम में लगभग लगभग सभी लोग शराब या बीयर का सेवन जरूर करते हैं,,, तुम क्या लोगे,,,।

मैं तो गरमा गरम दूध पियूंगा,,,( शुभम शांति की बड़ी बड़ी छातियों की तरफ देखता हुआ बोला,,,।)

जरूर वह भी पीने को मिलेगा लेकिन उसके लिए अभी थोड़ा समय है,,,,( शांति अपने ओवरकोट को व्यवस्थित करते हुए बोली क्योंकि यह जानती थी कि ऐसा करना कोई मायने नहीं रखता फिर भी वह शुभम की बातों से थोड़ा शर्म महसूस कर रही थी,,,) मैं गरमा गरम कॉफी लेकर आती हूं,,,।
( और शुभम का जवाब सुने बिना ही शांति रूम से सटे किचन में चली गई और थोड़ी ही देर में गरमा गरम कॉफी लेकर आ गई,,,। कॉफी के ट्रे को टेबल पर रखते हुए एक कप शुभम को पकड़ा कर दूसरा कब लेकर कुर्सी पर बैठ गई और गरमा गरम कॉफी की चुस्की लेने लगी,,, शुभम अच्छी तरह से देख रहा था कि शांति बड़े ही मादक अदा से गरमा गरम कॉफी की चुस्की ले रही थी,,, उसके लाल-लाल होठों को और होटो पर लगी हुई कॉफी के रस की बूंद देखकर शुभम का मन डोलने लगा था,,, शुभम के पेंट में हलचल मची हुई थी,,, वह बार-बार शांति की आंखों के सामने ही अपने पेंट में आए बवंडर को दबाने की कोशिश कर रहा था और शुभम की इस हरकत पर शांति की नजर चली जा रही थी,, और यह देख कर शांति की हालत खराब होती जा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि शुभम अपना हाथ पैंट के ऊपर रख कर क्या कर रहा है,,,।

वैसे कौन-कौन रहता है यहां,,,

मैं मेरे पति और मेरे दो बच्चे जो कि आज मेरे पति उन्हें लेकर घूमने गए हैं,,,

घूमने गए बच्चों को लेकर और ऐसे बर्फ बारी में,,,

इतना तो यहां वालों के लिए नॉर्मल है कोई ज्यादा दिक्कत नहीं होती आप सब बाहर से आए हैं इसलिए आप लोगों को दिक्कत होती है,,,।
( कॉफी खत्म होते-होते दोनों के बीच में काफी वार्तालाप हो चुकी थी,,, शुभम और नौकरानी शांति के लिए यह वार्तालाप एक औपचारिकता बस ही थी,,, बल्कि दोनों एक दूसरे में जल्द से जल्द समाने के लिए उतावले हुए जा रहे थे लेकिन समझ में नहीं आ रहा था कि शुरू कौन करें,,,।)

तुम उस दिन भाग क्यों गई,,,?( शुभम कॉफी का कप ट्रे में रखते हुए बोला)

भागती नहीं तो और क्या करती कोई देख लेता था मैं तो बदनाम हो जाती,,,।

तुम नाहक ही डर कर वहां से भाग गई वह कार तो सीधे चली गई,,,। अगर मेरी बात मान कर वहां रुक गई होती तो शायद,,,,( इतना कहकर शुभम खामोश होकर उसकी तरफ देखने लगा तो शांति बोली,,,।)

अगर वहीं रह गई होती तो इस तरह से तुम मेरे घर ना आते,,,,।

( दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा दिए,,, शांति की टांगों के बीच हलचल मची हुई थी,,, उस दिन किचन में और पेड़ के पीछे शुभम के कठोर पन को वह अपनी टांगों के बीच बहुत ही अच्छी तरह से महसूस की थी,,,, इसलिए तो शुभम की मर्दाना ताकत के आगे विवश होकर हुआ है आज शुभम को एक रत होने के लिए अपने घर बुलाई थी,,,। क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि ऐसी कातिल ठंडी में गर्मी का एहसास सिर्फ शुभम ही दिला सकता है,,, दोनों कॉफी पी चुके थे,,, शांति को समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें वह खाली कप को ट्रे में रख कर,, ट्री को उठाने ही वाली थी कि शुभम के सब्र का बांध टूट गया क्योंकि जिस कार्य को करने के लिए वह इतनी दूर चल कर आया था उसमें काफी समय लग रहा था और वह इस तरह से अपना समय गंवाना नहीं चाहता था,,,, इसलिए जैसे ही शांति ट्रेन थाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाई तुरंत शुभम अपना हाथ आगे करके उसकी कलाई थाम लिया,,,, शुभम इतने जोरो से उसकी कलाई को पकड़ा था कि उसे दर्द महसूस होने लगा,,,।

आहहहह,,, क्या कर रहे हो शुभम छोड़ो ना,,,( शांति इतराते हुए अपनी कलाई को शुभम के हाथों से छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली,,,।)

मैं छोड़ने के लिए नहीं तुम्हें पकड़ने के लिए इतनी दूर आया हूं,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम शांति को अपनी तरफ खींचा तो शांति एकदम से उसके ऊपर गिरने लगी और शुभम उसे पकड़ कर अपनी बाहों में ले लिया,,, शांति शुभम की गोदी में एकदम से बैठ गई थी और शुभम उसे दोनों हाथों से अपनी बाहों में लेकर उसके खूबसूरत चेहरे को देख रहा था,,,, और उसके खूबसूरत चेहरे को देखते हुए बोला,,)

बनाने वाले ने तुम्हें बहुत ही फुर्सत से बनाया है,,, दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी कोई कह नहीं सकता कि तुम शादीशुदा हो,,,
( इस तरह की तारीफ सुनकर शांति एकदम से शरमा गई और शर्मा कर दूसरी तरफ नजर फेर ली,,, शुभम की गोद में बैठ कर शांति को बेहद शर्मिंदगी का अहसास हो रहा था क्योंकि वह शुभम और अपने बीच के उम्र की खाई को अच्छी तरह से भाप चुकी थी वह शादीशुदा और दो बच्चों की मां थी और शुभम जवानी की दहलीज पर खड़ा था,,, गोरे गोरे चेहरे पर आई लालिमा को देखकर शुभम के तन बदन में उत्तेजना का ज्वर चढ़ने लगा वह दोनों हाथों से शांति का खूबसूरत चेहरा पकड़कर अपनी तरफ किया और देखते ही देखते उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उसे चूसना शुरू कर दिया,,, शांति एकदम से मदहोश होने लगी बरसों बाद किसी ने इस तरह से उसके होठों को चुंबन किया था,,,, चुंबन क्या शुभम तो उसके होठों को अपने मुंह में लेकर उसके रस को पीना शुरू कर दिया था,,, और साथ ही अपना एक हाथ उसके ऊपर कोर्ट में डाल कर उसकी नंगी चिकनी कमर को हल्के हल्के सहला रहा था,,, देखते ही देखते दोनों का चुंबन और जबरदस्त होने लगा मदहोशी के आलम में शांति भी उसका सहयोग करने लगी,,, जिस तरह का उत्तेजना से भरपूर शुभम ने उसके होंठों को चूमना शुरू किया था इस तरह से तो उसके पति ने कभी उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर चुंबन भी नहीं किया था,,,,,

करता भी कैसे दिन रात शराब के नशे में जो डूबा रहता था,,, औरतों से कैसे प्यार किया जाता है यह उसे आता ही नहीं था,,, शुभम के हाथ उसकी चिकनी कमर पर से पूरे बदन पर घूमने लगे थे,,,। देखते ही देखते उसके होंठों का रसपान करते हुए शुभम ब्लाउज के ऊपर से उसकी मदमस्त गोल-गोल चूचियों को दबाना शुरू कर दिया,,,।

क्रमशः
 
आहहहह आहहहहह,,,,ऊहहहहहहह,,
(शुभम जोर-जोर से नौकरानी शांति की चूचियों को दबा रहा था जिसकी वजह से उसके मुख से गर्म सिसकारी के साथ-साथ कराहने की आवाज निकल रही थी,,शुभम को शांती की चूचियों को दबाने में बहुत आनंद आ रहा था क्योंकि उसकी दोनों चूचियां टेनिस के बोल की कड़क कड़क थी,,, शुभम हैरान था क्योंकि अब तक उसने कड़क दिखने वाली चूचियों को दबा कर इनकी गर्माहट का अहसास ही किया था लेकिन शांति की चुचिया ऊतनी नरम नहीं थी जितनी की होनी चाहिए थी,,,। शांति की दोनों चुचियों को देखने की उत्सुकता शुभम के अंदर बढ़ती जा रही थी। वह जल्द से जल्द शांति के दूध से भरी दोनों गुब्बारो के दर्शन करना चाहता था,,,। इसलिए शांति का ओवरकोट उसके बदन से उतारे बीना ही वह ब्लाउज के बटन खोलने लगा,,,

बहुत तेज हो तुम,,,,(शांति शुभम की आंखों में आंखें डाल ते हुए बोली)

अगर तेज नहीं होता तो इस समय मैं तुम्हारे घर पर नहीं होता,,,।(पर इतना कहने के साथ ही शुभम शांति के ब्लाउज के सारे बटन खोल कर उसकी ब्राह्मी के दर्द नंगी चूचियों को अपने दोनों हथेली में भरकर दबाना शुरू कर दिया,,,, पीले रंग की ब्रा में शांति की मदमस्त चूचियां बेहद खूबसूरत लग रही थी,,,,)

आहहहहह,,, थोड़ा धीरे ,,,(शांति कराहते हुए बोली,,)

धीरे धीरे दबाऊंगा तो ना तो तूम्हे मजा आएगा और ना ही मुझे ,,, चुचियों का असली मजा तभी आता है जब उन्हें जोर जोर से मसला जाता है।(ऐसा कहते हुए शुभम शांति की ब्रा को नीचे से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींच दिया जिससे उसकी दोनों संतरे उछल कर बाहर आ गए, और उसके दोनों मदमस्त चुचियों को देखकर शुभम की आंखें चकाचौंध हो गई। वास्तव में शांति की चुचियों में एक अजीब प्रकार का आकर्षण था। शुभम फटी आंखों से शांति की दोनों चूचियों को घूरे जा रहा था,,,, शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसकी दोनों चूचियों की गोलाइयों को थाम लिया,,, चॉकलेटी कलर की निप्पल अलग अंदाज में अपनी चुचियों का आकर्षण और ज्यादा बढ़ा रही थी। उसकी कड़ी तनी हुई निप्पल को देखते ही शुभम के मुंह में पानी आ गया,,,शांति की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि वह शुभम की गोद में बैठी हुई थी और शुभम का लंड पुरि औकात में आ चुका था जो की सीधा शांति के गोलाकार नितंबों पर गड़ रहा था,,,, लेकिन शुभम के लंड की चुभन अपनी गांड पर महसूस करके शांति कामातुर हुए जा रही थी,,,, शुभम से रहा नहीं गया और वह शांति की दोनों चुचियों को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, शांति उत्तेजना के मारे शुभम की गोद में कसमसा रही थी, शुभम के मुंह में पानी आ रहा थावैसे भी वह जब से शांति को देखा था तब से उसका दूध पीने का बहुत उसका मन कर रहा था इसलिए वह बिल्कुल भी समय गवाएं बिना अपना मुंह नीचे की तरफ लाकर अपने होंठों में उसकी कड़ी निप्पल को भर लिया और उसे जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया,,, यह सब शांति के सोचने के बिल्कुल विपरीत हो रहा था,,
शांति को यही लगा था कि शुभम भी दूसरे मर्दों की तरह घर में आते ही उसके कपड़े उतारे गया तो उसकी साड़ी कमर तक उठाकर उसको चोदना शुरू कर देगा और काम खत्म करके चला जाएगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह यह बात नहीं जानती थी कि तुम दूसरे मर्दों की अपेक्षा उनसे बहुत ही अलग था, वह तब तक औरतों के जिस्म से खेलता था जब तक की औरत पूरी तरह से काम विह्वल ना हो जाए,,,शांति को शुभम का इस तरह से उसके दूध को मुंह में भर कर पीना बहुत ही अच्छा लग रहा था,, पेशे से वह एक नौकरानी थी इसलिए उसे ऐसा ही लग रहा था कि शुभम उसके बदन से इस तरह से खुलकर नहीं खेलेगा। लेकिन ऐसा लग रहा था कि शुभम उसके जिस्म से नहीं बल्कि उसके दिमाग से खेल रहा था क्योंकि पल-पल शुभम शांति को एक नया झटका सा दे रहा था इसलिए तो वह मुंह में उसकी चूचियों को भरकर पीते हुए एक हाथ नीचे की तरफ लाकर उसकी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रहा था,,,,मखमली चिकनी टांगों पर शुभम की गर्म हथेलियों का स्पर्श शांति को पूरी तरह से मदमस्त कर रहा था।देखते ही देखते शुभम शांति की साड़ी को घुटनों के ऊपर तक ला दिया उसकी मदमस्त मोटी मोटी जांघों पर अपनी हथेली घुमाते हुए शुभम को यह एहसास हो रहा था कि जैसे वह मक्खन को अपनी हथेली से फैला रहा हो,,,शुभम की हरकत की वजह से शांति के पूरे बदन में चीटियां रेंग रही थी उत्तेजना की चिकोटि उसके बदन के हर एक कोने को काट रही थी,,

आहहहहह शुभम,, ऐसे मत काटो दर्द होता है,,,

लेकिन मुझे तो ऐसे ही मजा आता है तुम्हारी चूचियों के निप्पल एकदम कैडबरी चॉकलेट की तरह है,, जैसे मुंह में लेकर चूसने में मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,(इतना कहने के साथ शुभम फिर से उसकी दोनों चूचियों पर टूट पड़ा बारी-बारी से दोनों चूचियों को मुंह में लेकर स्तनपान करने का आनंद लूट रहा था,,,। स्तनपान करना शुभम की विलासिता में संपूर्ण रूप से शामिल था वैसे भी उसने अपनी मां का दूध कम और दूसरी औरतों की चुचियों का स्तनपान कुछ ज्यादा ही किया है,,, शांति पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी वह आंहे भर रही थी,,, उत्तेजना की मदहोशी में उसकी दोनों आंखें बंद थी बस एहसास उसे जगा रहा था,,,। घुटनों तक उठी हुई साड़ी के अंदर हाथ डालकर शुभम उसकी बुर को टटोल कर देखना चाहता था और जैसे ही उसकी हथेली शांति की दोनों टांगों के बीच आई तो बुर की गर्माहट से वह पूरी तरह से पिघलने लगा,,, शांति अंदर पेंटिं नहीं पहनी थी,,, यह एहसास शुभम को शांति की दोनों टांगों के बीच हाथ लगाते ही हो गया वह मन ही मन सोचने लगा कि शांति पूरी तैयारी के साथ घर के अंदर उसका इंतजार कर रही थी,,,बुर पर हाथ पढ़ते ही शुभम से रहा नहीं किया और वह उसकी समोसे जैसी खुली हुई बुर को अपनी हथेली में जोर से दबोच लिया,,,,।

आहहहह,,,,(शांति एकदम से सिहर उठी उसे इस बात का अहसास बिल्कुल भी नहीं था कि शुभम उसकी बुर के साथ यह हरकत करेगा... लोग तो दूर को अच्छे से सहलाते हैं हल्का-हल्का दबाते हैं,,, लेकिन यह मुआ तो उसे जोर से मसल दिया,,,, शांति अपने मन में ही यह बात बोल कर अपने चेहरे पर बनावटी गुस्सा करने लगी। शुभम उसके चेहरे के बदलते भाव को देखकर बोला,,,)

क्या हुआ मेरी जानू,,,

इतनी जोर से कोई दबाता है क्या,,,,?

मैं दबाता हूं ना जानू,,,,,(शुभम के मुंह से अपने लिए जानू शब्द सुनकर शांति के चेहरे पर मुस्कान आ गई,, क्योंकि शांति अपनी और शुभम के बीच उम्र की गहरी दीवार को अच्छी तरह से समझती थी,,, और इतनी छोटी उम्र का होकर वह उसे जानू कह रहा था,,,, खैर कोई बात नहीं शांति शुभम से खुश थी,,,,कचोरी जैसी फुली हुई बुर को अपनी हथेली में लेकर वह बार-बार उसे जोर जोर से दबा दे रहा था,,,,उत्तेजना के मारे शांति अपना संतुलन खोती जा रही थी बार-बार वह उसकी गोद से नीचे की तरफ खसक जा रही थी जिसे शुभम बार-बार उसकी बड़ी गांड के नीचे हाथ लगाकर उसे अपनी तरफ खींच ले रहा था।
शुभम को उसके बदन से खेलने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी साथ ही उसे यह भी एहसास हो रहा था कि उसका खड़ा लंड उसकी गांड के बीचो-बीच चुभ रहा था,,।
कुछ देर तक शुभम ऐसे ही शांति के बदन से खेलता रहा जब तक की शांति एकदम गरम होकर पूरी तरह से गर्म सिसकारी की आवाज निकालने लगी और थोड़ी देर में शांति के मुख से गरमा गरम आवाज आने की वह पूरी तरह से गरमा चुकी थी,,,। आनंद की परकाष्ठा के एकदम करीब पहुंच गई थी,,, उसकी बुर से मदन रस का लगातार बहाव हो रहा था।,,,शुभम को समझते देर नहीं लगी कि अब वह घड़ी आ चुकी है जब उसके एक-एक वस्त्र को उतारकर निर्वस्त्र किया जाए,,, एक बार फिर शुभम उसके लाल-लाल होठों को मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,,साथ ही अपनी गोदी में लिए हुए ही वह शांति के ओवरकोट को उतारने लगा शांति भी समझ गई कि अब शुभम उसे नंगी करना चाहता है,,, इसलिए वह शुभम का पूरी तरह से सहयोग करने लगी,देखते ही देखते शुभम शांति के कपड़े उतार कर पूरी तरह से उसे निर्वस्त्र कर दिया वह उसकी आंखों के सामने खड़ी थी और वह भी उसके सामने ही खड़ा था जिसके आखरी वस्त्र के रूप में वह ऊसकी ब्रा को उसकी बाहों में से निकाल रहा था,,,,जिंदगी में पहली बार शांति को शुभम के द्वारा कपड़े उतारने में बेहद आनंद की प्राप्ति हुई और शायद बरसों बाद वह किसी मर्द के सामने इस तरह से निर्वस्त्र खड़ी थी,,,शुभम तो उसकी मदद से नंगी जवानी को देखता ही रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों के सामने जो महिला खड़ी है वह पैसे से नौकरानी है,,। शायद नौकरानी बनना उसकी मजबूरी ही रही होगी वरना वह किसी के घर की महारानी होने के काबिल थी। शुभम से रहा नहीं गया और वह उसके चारों तरफ चक्कर काटते हुए उसके खूबसूरत नंगे बदन के संपूर्ण वजूद को अपनी आंखों से देखने लगा।

यकीन नहीं होता कि तुम इतनी खूबसूरत हो
(शुभम की बातें सुनकर शांति मंत्र में तो मुस्कुरा रही थी उसके बाद खुले हुए थे जो कि अपनों को उतारते समय शुभम ने ही उसके बाल के बक्कल को खोल कर उसके रेशमी बालों को खुला कर दिया.)

तुम्हारा जवानी से भरा यह बदन मेरी जान ले रहा है,,,,सच तुम्हें इस तरह से नंगी देख कर मैं बहुत खुश हूं आज तक मैंने तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखा कि दो दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी इतनी टाइट हो।
(भला दुनिया में ऐसी कौन सी औरत होगी जो अपनी तारीफ नहीं सुनना पसंद करेगी,,, शुभम के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर शांति फूले नहीं समा रही थी,,,वह अंदर ही अंदर बेहद प्रसन्न हो रही थी और उसकी प्रसन्नता उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी। और वह चोर नजरों से शुभम के पेंट में बने तंबू को भी देख रही थी जिस पर इस समय उसका पूरा हक था। शुभम भी यह बात समझ गया था कि शांति नजरें झुका कर उसके कौन से अंग को देख रही है इसलिए वह शांति की आंखों के सामने खड़ा हो गया और उसकी खूबसूरती की तारीफ जारी रखते हुए अपनी जींस का बेल्ट खोलने लगा। यह देख कर शांति की सांसे ऊपर नीचे होने लगी उसका संपूर्ण बदन कसमसाने लगा,,,एक औरत के लिए यह पल बेहद उन्माद और उत्तेजना से भरा होता है जब उसकी आंखों के सामने कोई मर्द अपने कपड़े उतारता हो,,, खास करके जब अपनी पैंट उतार रहा हो,,, क्योंकि औरत अच्छी तरह से समझ जाती है कि अब यह क्या करने वाला है,,।उसकी आंखों के सामने ही वह अपनी पैंट उतार कर उसके कौन से मर्दाना ताकत भरा अंग दिखाने वाला है,,, ओर यही क्रिया शुभम को करता देख कर शांति की टांगों के बीच हलचल होने लगी उसका पूरा बदन उत्तेजना के मारे कसमसाने लगा,,,,
Shubham apni naukrani k ghar me

delete repeated words
वह ललचाए आंखों से चोर नजरों से शुभम की तरफ देख रही थी शांति संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में शिमला की कड़कड़ाती सर्दी में अपने कमरे के बीचों बीच खड़ी थी। लेकिन ऊसे ठंडी का एहसास जरा भी नहीं हो रहा था क्योंकि जवानी का जोश और शुभम की कामुक हरकतों ने उसके तन बदन में आग लगा दी थी।
शुभम अपना बेल्ट खोलते हुए शांति को ही देख रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि नौकरानी का जिस्म इतना खूबसूरत और जवान हो सकता है,,,, शुभम शायद यह भूल गया था कि वह नौकरानी बाद में लेकिन एक औरत पहले थी,, उसके पास भी उसी तरह का हुस्न का खजाना था जो कि उसकी मां के पास था। शुभम की आंखों में नौकरानी शांति की टांगों के बीच की पतली दरार एकदम से बस गई थी,,, एकदम चिकनी रेशमी बालों का रेशा तक नजर नहीं आ रहा था ऐसा लग रहा था कि अभी कुछ घंटों पहले ही उसने क्रीम लगाकर उसे अच्छी तरह से साफ की थी उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह पूरी तरह से फुल चुकी थी,,, शांति की गरम तवे पर फूली हुई रोटी की तरह बुर को देख कर यह बात अच्छी तरह से समझ में आ रही थी कि रोटी और बुर में कुछ ज्यादा फर्क नहीं होता। क्योंकि दोनों का काम भूख मिटाना ही होता है। रोटी पेट की आग जाती है और बुर जिस्म की,,,
Naukrani ki masti

देखते ही देखते सुभम अपनी बेल्ट को उतार कर एक साइड में रख दिया और अपने पेंट की बटन खोलने लगा,,, यह सब देख कर शांति के मन में मलाल पैदा हो रहा था क्योंकि यह शुभ काम वह अपने हाथों से करना चाहती थी लेकिन शर्म के मारे वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। देखते ही देखते शांति की आंखों के सामने शुभम अपनी पेंट को नीचे उतारकर घुटने तक कर दिया,,, शांति हैरान थी क्योंकि शुभम के अंडर वियर में अच्छा-खासा तंबू बना हुआ था।
अंडरवियर में बना था वो बेहद मनमोहक और उन्माद से भरा हुआ लग रहा था।

ओह शांति,,, मेरे करीब आ ओ,,,आहहहहह,,,(शुभम बेहद ऊतेजनात्मक तरीके से अपनी अंडरवियर में उठे हुए तंबू को अपनी मुट्ठी में लेकर दबाते हुए गरम सिसकारी लेकर बोला,,,शांति अपनी नजरों से शुभम की हरकत को देखकर पूरी तरह से पानी-पानी हो गई लेकिन उसके मन में लालच पैदा हो गई बहुत जल्द से जल्द शुभम के करीब जाना चाहती थी,,, अपने मलाल को पूरा करना चाहती थी इसलिए वह एक कदम आगे बढ़ा कर शुभम के करीब पहुंच गए शुभम उसे एक झटके में अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसकी पतली कमर को थाम कर अपनी तरफ खींच लिया और उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर चुंबन लेना शुरू कर दिया। देखते ही देखते शांति पूरी तरह से उत्तेजित होने लगी क्योंकि वह पूरी तरह से शुभम के बदन से चिपकी हुई थी और उसके अंडरवीयर में बना तंबू उसकी टांगों के बीच सीधा उसकी बुर के ऊपरी दीवारों पर ठोकर मार रहा था,,,।शांति से रहा नहीं गया और वह अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अंडरवियर के ऊपर से ही शुभम के लंड को पकड़ ली,, अंडरवियर के ऊपर से ही शांति के नारा मुगलों का स्पर्श पाते ही शुभम का लंड पूरी तरह से अंडरवियर के अंदर हलचल मचाने लगा,,,, जिससे शुभम का चुंबन और ज्यादा प्रगाढ़ हो गया। शुभम पागलों की तरह शांति के लाल लाल होंठों को चूस रहा था।
शांति पागलों की तरह अंडरवियर के ऊपर से ही शुभम के लंड को अपनी मुट्ठी में कस के ऐंठ रही थी,,,, शुभम की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,, शुभम अपने हाथों से ही अपनी टी-शर्ट उतारने लगा,, अपना ओवरकोट वह पहले से ही उतारकर कुर्सी पर रख दिया था। देखते ही देखते लगभग शुभम भी संपूर्ण रूप से नंगा हो चुका था बस उसके बदन पर अंडर वियर ही रह गई थी और उसकी पेंट घुटनों में फंसी हुई थी। दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी शांति को यकीन नहीं हो रहा था कि वह अपने से कम उम्र के लड़के के साथ इस तरह से मदहोश हो जाएगी। इतनी देर में शांति को समझते देर नहीं लगी कि शुभम काफी अनुभवी लड़का है। शुभम की हरकत को देखते हुए वह समझ गई कि वह कई औरतों के साथ संबंध बना चुका है,,, तभी तो वह अपनी हर एक हरकत से उसे मदहोश किए जा रहा था।
Naukrani Shubham k sath maje lete huye

remove duplicate lines
दोनों के बीच किसी भी प्रकार का वार्तालाप हो नहीं रहा था दोनों एक दूसरे के चेहरे पर अपनी गर्म सांसे छोड़ रहे थे। दोनों की सांसो की गति बड़ी तेज चल रही थी शुभम उसके होठों का रसपान करते हुए उसके दोनों संतरो को पकड़ कर अपनी मुट्ठी में भींच रहा था,,,

आहहहहह आहहहहहब,,, सुभम,,,,ओहहहहहहह,,,
स्तन मर्दन से लगातार शांति के मुख से गर्म सिसकारी फूट रही थी।,,

ओहह शांति मेरी रानी मेरी जान,,,आहहहहहह,,,,(ऐसा कहते हुए शुभम उसके दोनों कंधों पर अपना हाथ रख कर उसे नीचे की तरफ दबाने लगा क्योंकि उसे नीचे बैठने की इशारा कर रहा था,,, शांति उसके हाथों के दबाव के नीचे बेटी चली गई और देखते ही देखते वह अपने घुटनों के बल हो गई... शुभम की अंडर वियर में अपना तंबू ठीक उसकी आंखों के सामने था. जिसे देख कर उसकी टांगों के बीच थरथराहट हो रही थी. शायद जो शुभम कराना चाहता था वह शांति समझ गई थी इसलिए शुभम की तरफ देखते हुए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर शुभम के अंडर वियर को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ खींचने लगी। और देखते ही देखते शांति ने , श्रम के अंडरवियर को उतारकर उसे घुटनों तक खींच दी,, अंडरवियर की कैद से आजाद होते ही शुभम का लंबा तगड़ा लंड हवा में झूलने लगा,,,


उसके ऊपर नीचे होकर झूलते हुए लंड को देखकर शांति की आंखें फटी की फटी रह गई, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह हकीकत में यह सब देख रही है या कोई सपना है। क्योंकि शांति आज तक इस तरह के मर्दाना ताकत से भरे हुए लंबे तगड़े मोटे लंड को नहीं देखी थी।उससे रहा नहीं गया और वह अपने हाथ आगे बढ़ाकर उसके झूलते हुए लंड को अपने हाथ में थाम ली।लंड की गर्माहट उसे अपनी हथेली के साथ-साथ पूरे बदन में महसूस हो रही थी खास करके शुभम के लंड को पकड़ते ही उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी थी,,,

Naukrani ki har tarah se chudai karta hua Shubham

how to remove duplicates in word

इसे मुंह में लो शांति,,,, तब जाकर इसे शांति मिलेगी,,,,
(शुभम के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर शांति एकदम हैरान थी क्योंकि दोनों के बीच उम्र का फर्क कुछ ज्यादा ही था...शुभम को जब वह पहली बार देखी थी तो उसे इस बात का आभास तक नहीं था कि यह लड़का इतना तेज तर्रार होगा। जोकि धीरे-धीरे इस मकाम तक पहुंच जाएगा कि उसे उस लड़के को अपने घर बुलाना पड़ेगा। लेकिन होनी और हकीकत को कौन टाल सकता है शायद शांति के नसीब में शुभम की तरफ से तृप्ति का एहसास लिखा हुआ था इसलिए तो आज वह अपने ही कमरे में एक अनजान लड़की के सामने एकदम नंगे होकर घुटनों के बल बैठ कर उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने की तैयारी कर रही थी। अगले ही पल शांति के लाल-लाल होठों के बीच से गुजरता हुआ शुभम का मोटा तगड़ा लंबा लंड एकदम गले तक पहुंच गया,,,,)



आहहहहह,,,,गजब ,,,,,,,(शांति के होठों के बीच की गर्माहट को पाकर शुभम के मुख से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,, सुभम अद्भुत अहसास से भर गया था,,, गजब का सुख मिल रहा था,,, शांति तो पागल हुए जा रही थी वह आइसक्रीम के कौन की तरह पूरा मुंह खोलकर शुभम के लंड का स्वागत करते हुए उसे अपने गले तक आश्रय दे रही थी उसका बस चलता है तो वह गले से नीचे गटक जाती,,,,देखते ही देखते शांति के तन बदन में कुमारी का नशा छाने लगा मदहोशी अपनी गिरफ्त में लेने लगी इसलिए तो वह पागलों की तरह अपना मुंह जोर-जोर से आगे पीछे करते हुए शुभम के लंड को चूस रही थी और शुभम भी अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ शांति के मुंह को चोद रहा था,,, शुभम के लिए सब पूरा मामला परम उत्तेजना से भरा हुआ था क्योंकि किसी के घर में घुसकर उसके पति की गैर हाजिरी में चोरी-छिपे उससे शारीरिक संबंध बनाने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है।इसलिए तो इस अद्भुत पल का मजा लेते हुए शुभम अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ शांति के मुंह को चोद रहा था।
शांति के मुख से घुटी-घुटि सी आवाज बाहर आ रही थी,,,,
कुछ देर तक दोनों मजा लेते रहे शुभम कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव कर रहा था वह इस बात से डर रहा था कि कहीं शांति के द्वारा अद्भुत चुसाई से गर्म होकर उसका लंड पिघल ना जाए,,, इसलिए वह गरम आहें भरते हुए शांति के मुंह से अपने बमपिलाट लंड को बाहर निकाल लिया,,,। लंड के मुंह से बाहर निकलते ही शांति गहरी गहरी सांसें लेने लगी उसका मुंह खुला का खुला था और वह नजर ऊपर करके शुभम की तरफ देख रही थी। शुभम नीचे जो कर उसकी दोनों बाहें थाम लिया और उसे ऊपर उठाने लगा,,, पर एक बार फिर से शुभम ऊसके लाल-लाल होठों में एकाकार हो गया,,,पास में ही बिस्तर था और एक नजर बिस्तर पर डालकर शुभम शांति को अपनी गोद में उठा लिया,,,,

आहहहह,,, क्या कर रहे हो गिर जाऊंगी मुझे डर लगता है,,,, अरे सुनो तो नीचे उतारो मुझे,,,,
(शांति कुछ और कह पाती इससे पहले ही धम्म की आवाज के साथ,, पलंग पर बिछाई गद्दी पर चारों खाने चित हो गई,,, शुभम उसे पलंग पर गिरा तो ही अपने लैंड को पकड़कर हीलाते हुए बोला,,,)

जानेमन मेरी बाहों में तुम्हें डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है,,,(शांति शुभम की तरफ देखी तो देखती ही रह गई वाकई में वह अपना हीलाते हुए बलशाली लग रहा था,,,शांति के लिए पहली बार था कि किसी ने उसे अपनी गोद में उठाया था और वह भी तब जब वह पूरी तरह से नंगी थी एक अद्भुत अहसास से वह भर गई,,, शांति शुभम के ऊपर नीचे हो रहे लंड को देखते हुए बोली।)

मैं तो डर ही गई थी,,,,

मैं तुमसे कहा ना डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है इतना कहने के साथ ही शुभम घुटनों के बल बिस्तर पर चढ़ गया,,, और उसकी दोनों टांगों को अपने हाथ में पकड़ कर फैला दिया,,, शांति को ऐसा लग रहा था कि अब वह उसे चोदेगा,,,लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था इतनी जल्दी शुभम किसी भी औरत पर चढ़ नहीं जाता जब तक कि उसे अपनी हरकतों से पानी पानी ना कर दे,,, शांति की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,, उसके बदन में हलचल मची हुई थी। जिंदगी में पहली बार मैं अपने से कम बहुत ही कम उम्र के लड़के के सामने इस तरह से नंगी लेटी थी,,वह कर भी क्या सकती थी एकदम मजबूर हो गई थी वरना अपनी मर्जी के बिना व किसी को हाथ भी नहीं लगाने देती थी लेकिन क्या करें शुभम की बात ही कुछ और थी उस दिन किचन में जिस तरह की हरकत करते हुए उसने उसे उत्तेजना के परम शिखर पर ले गया था और साथ ही रात को सड़क पर चलते हुए जिस तरह से वह उसका हाथ खींच कर पेड़ के पीछे ले जा कर के उसे चोदने की कोशिश किया था उससे शांति पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी थी और जल्द से जल्द शुभम से चुदवाने कि आस बंधा कर रखी थी,,, जो कि आज उसकी मंशा पूरी होने जा रही थी,,,, देखते ही देखते कब शुभम अपना मुंह उसकी दोनों टांगों के बीच ले जा करके उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर के ऊपर रखकर उसके मदन रस को चाटना शुरू कर दिया यह शांति को पता ही नहीं चला,,,,,

आहहहरहह,,,,,की गरम सिसकारी की आवाज के साथ ही शांति अपनी भारी-भरकम गोलाकार गांड को ऊपर की तरफ उठा दी,,, शुभम को अपनी दोनों टांगों के बीच झुका हुआ देखकर एकदम मस्त हो गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो वह अपनी आंखों से देख रही है वह सच है,,‌क्योंकि उसका पति कभी भी उसे इस तरह से प्यार बिल्कुल भी नहीं करता था और बुर चाटने की तो बात ही दूर थी,, अपने पति के बाद उसने किसी से भी संबंध बनाई थी उन लोगों ने आज तक उसकी बुर को अपने मुंह से नहीं लगाया था लेकिन शुभम उन सब से अलग सबसे जुदा था। क्योंकि वह शांति के पेसे से नहीं बल्कि उसके खूबसूरत जिस्म को प्यार करता था इसलिए एक हाई क्लास औरत और नौकरानी शांति में उसे बिल्कुल भी फर्क नहीं लग रहा था तभी तो वह बिना झिझक के उसकी रसीली बुर को अपने होठों से लगाकर उसके मदन रस को जीप से चाट रहा था,,,,
शुभम अपनी जीभ का कमाल उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर पर बराबर दिखा रहा था,,,,शांति शुभम की हरकत की वजह से पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी और वह पलंग पर अपना सर उत्तेजना के मारे दाएं बाएं पटक रही थी,,,।
ओहहहह,,, शुभम यह क्या कर रहा है तू आहहहहह,,,,,शांति की उत्तेजना उसके बस में बिल्कुल भी नहीं थी वह अपने दोनों हाथों से अपनी बड़ी बड़ी चूची को दबाए जा रही थी और शुभम की हरकतों का मजा लूटे जा रही थी,,,,, शुभम को भी शांति की बुर चाटने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। देखते ही देखते शुभम उसकी रसीली पुर के अंदर एक साथ अपनी दो उंगली डाल दिया क्योंकि वह जानता था,,, उसके लंड के लिए उसकी बुर के अंदर रास्ता बनाना बेहद जरूरी है,,, वरना उसके मोटे लंड का मोटा सुपाड़ा उसकी बुर के छोटे से छेद को पार नहीं कर पाएगा,,,,,दो ऊंगली एक साथ अपनी बुर के अंदर महसूस करते ही शांति एकदम पागल होने लगी एकदम मदहोश होने लगी उसकी आंखों में नशा छाने लगा। उसकी सिसकारियां की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी,,,, शुभम उसकी बड़ी बड़ी गांड की नीचे अपनी दोनों हथेली ले जाकर के उसके नितंबों को दबाता हुआ उसकी बुर चाटने का आनंद लूट रहा था,,,,, शिमला की कड़कड़ाती 3डी में दोनों निर्वस्त्र होकर पलंग पर जवानी का आनंद लूट रहे थे इस बात से शांति भी एकदम हैरान थी क्योंकि अधिकतर जब भी बर्फ गिरती रहती है तब वह अपने पूरे कपड़े उतार कर अपने पति से नहीं चुदवाती या किसी से भी नहीं चुदवाती,,,क्योंकि ठंडी ही ईतनी पडती है कि बिल्कुल भी हिम्मत नहीं होती कि अपने सारे कपड़े उतार कर चुदाई का आनंद लूट सके,,, और ऐसा उसके साथ नहीं बल्कि अधिकतर लोगों के साथ होता था,,, उसको चोदने वाला भी कभी भी अपने सारे कपड़े उतारता नहीं था केवल काम भर का ही,,, अपनी पेंट नीचे करके साड़ी ऊपर करके ज्यादा कुछ हो तो ब्लाउज के बटन खोल कर मजा ले लिया जाता था लेकिन शुभम की कामुक हरकतो ने उसे इतना अधिक गर्म कर दिया था कि,,,वर्क आप अपने हाथों से उसके सारे कपड़े उतार कर उसे निर्वस्त्र कर दिया यह उसे पता ही नहीं चला था और आलम यह था कि शिमला की कड़कड़ाती ठंडी में उसी समय ठंडी का बिल्कुल भी एहसास नहीं हो रहा था। शुभम कुछ देर तक यूं ही शांति की बुर पर अपने होंठ लगाकर उसके रसीले रस को चूसता रहा,,,। शांति के बदन को कसमसाता हुआ देखकरशुभम को समझते देर नहीं लगी कि अब ऊसे अपनी बुर के अंदर उंगली नहीं बल्कि लंड चाहिए,,,,इसलिए शुभम देखते ही देखते शांति की मखमली मोटी चिकनी जांघों के बीच अपने लिए जगह बना लिया।


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शांति का दिल जोरों से धड़क रहा था सांसो की गति के साथ उसकी गोलाकार चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था। लेकिन अभी वह अपना सारा ध्यान शांति की दोनों टांगों के बीच केंद्रित किया हुआ था अपने लंड के मोटे सुपाड़े को शांति की बुर पर रखकर वह हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला,,, तो शांति थोड़ा सा और पीछे की तरफ अपने आप सरक गई इसलिए शुभम शांति की बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और अब शायद उसके लिए पोजीशन एकदम सही हो गई थी क्योंकि शांति की मोटी चिकनी सुडोल जांगे सुभम की जांघों के ऊपर थी,,, इस बार शुभम के प्रयास सफल होते नजर आने लगे जैसे-जैसे शुभम का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी गुलाबी पत्तियों को चीरता हुआ अंदर की तरफ जा रहा थावैसे वैसे शांति के खूबसूरत चेहरे का हाव भाव बदलता जा रहा था उसे दर्द का एहसास हो रहा था लेकिन एक अनुभवी औरत होने के नाते उसे इस बात का आभास हा के दर्द के बाद ही असली मजा है,,,, देखते ही देखते शुभम धीरे-धीरे अपने लंड के मोटे सुपाडे सहित अपना आधा लंड ऊसकी बुर में पेल दिया,,शांति की हालत खराब हो रही थी उसे इस बात का अहसास हो गया था कि शुभम का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था और आज तक उसने इतना मोटा लंड अपनी बुर में कभी भी नहीं ली थी ,,, वैसे भी हर काम जिंदगी में पहली बार ही होता है शांति के लिए शुभम का लंड अपनी बुर के अंदर तक लेना आज उसके लिए यह काम पहली बार का ही था,,, शुभम पसीना पसीना हो गया था और दर्द के मारे यही हाल शांति का भी था। वह बार-बार अपना सर उठा कर अपनी दोनों टांगों के बीच देख ले रही थी जिसकी बीच की पतली दरार में शुभम का मोटा लंड आधे से ज्यादा फंसा हुआ था,,, शांति अपने दर्द को अपने फोटो के पीछे दबा ले गई थी। शुभम जीतना लंड घुसा था उतने को ही बाहर निकाल कर अंदर बाहर करते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया था,,,, थोड़ी ही देर में शांति को मजा आने लगा और मौके की नजाकत को समझते हुए शुभम उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथों में थाम कर एक जबरदस्त करारा धक्का लगाया और इस बार शुभम का मोटा तगड़ा लंड बुर के अंदर की सारी अड़चनों को दूर करता हुआ सीधे जाकर के उसके बच्चेदानी से टकरा गया और इस जबरजस्तप्रहार को शांति झेल नहीं पाई और उसके मुख से चीख निकल गई,,,,

आहहहह मर गई रे हाय दैया मेरी तो बुर गई,,,(इतना कहते हुए शांति अपना सर उठा कर अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगी जिसके अंदर सुभम का पूरा लंड गहराई में खो सा गया था,,,,, शांति एकदम हैरान थी उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी बुर शुभम के मोटे तगड़े लंबे-लंबे को अपनी दूर के अंदर पूरा का पूरा ले ली है,,, लेकिन उसे बहुत जोरों का दर्द हो रहा था,,,) बहुत दुख रहा है सुभम ईसे निकाल ले,,,,,

एक बार निकाल लिया तो जानेमन तुम मुझे दोबारा डालने नहीं दोगी,,, तुम बस थोड़ा हौसला रखो इसके बाद बहुत मजा आएगा।

हौसला कैसे रखूं शुभम मुझसे रहा नहीं जा रहा है जो दर्द सहा नहीं जा रहा है मुझे तो लगता है कि मेरी बुर फट गई,,

सब सही सलामत है मेरी जान,,,,(शुभम अच्छी तरह से जानता था कि औरतों को इस दर्द से कैसे निकाला जाता है इसलिए आवाज झुककर शांति की दोनों चूचियों को पकड़ कर बारी बारी से उसे मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,, थोड़ी ही देर में शांति एकदम रास्ते पर आकर उसके मुख से गर्म सिसकारी फूटने लगी,,,, यह देखकर शुभम उसकी आंखों में झांकते हुए बोला।)

अब बोल जानेमन क्या इरादा है,,,
(सुभम की बातें सुनकर शांति बोली कुछ नहीं बस शर्म के मारे अपनी नजरें दूसरी तरफ फेर ली,,, उसकी शर्मो हया और उसकी मुस्कान देख कर शुभम को समझते देर नहीं लगी क्या वह पूरी तरह से तैयार है उसका हर एक धक्का झेलने के लिए,,, फिर क्या था शुभम उसकी कमर थाम लिया और एक बार अपने लंड को वापस बाहर की तरफ खींच कर फिर से धक्का लगाया इस बार शांति के मुंह से हल्की सी आह निकल गई,,, जो कि इस चुदाई के लिए उसकी तरफ से पूरी तरह से हामी थी,,, बस फिर क्या था शुभम शुरू हो गया देखते ही देखते शांति का पलंग चरमराने लगा,,, हर धक्के के साथ शांति को स्वर्ग का सुख मिल रहा था उसने जिंदगी में इस तरह की जबरदस्त चुदाई का मजा कभी नहीं लूटी थी, शुभम धीरे धीरे से चर्मसुख के करीब लेता जा रहा था,,, वह आज के दिन उसके बदन से हर तरह का मजा ले लेना चाहता था इसलिए अपना लंड उसकी बुर से बाहर निकाल कर उसे घोड़ी बनने के लिए बोला,,,वह भी शुभम की जबरदस्त चुदाई से अपने घुटने टेक दी थी इसलिए जैसा वह बोला वैसे ही अपनी पोजीशन बना ली शुभम उसका भारी-भरकम पिछवाड़ा देखकरउत्तेजना से भरा जा रहा था बिल्कुल भी देर किए बिना वहां उसके पीछे जा करके उसकी बड़ी बड़ी गांड को थाम दिया और अपना लंड उसकी बुर में पेल कर चोदना शुरू कर दिया,,,, तकरीबन 25 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद शुभम का पानी निकल गया लेकिन इस दौरान शांति दो बार झड़ चुकी थी। पहली बार 25 मिनट के दौरान वह दो बार झड़ी थी,,, और पहली बार ही वह इतने लंबे समय तक चुदाई का मजा लूट रही थी,,, दोनों की नंगी एक दूसरे की बाहों में बिस्तर पर लेटे थे कि तभी शुभम के मोबाइल की घंटी बजने लगी सुबह बिस्तर पर से नंगा ही उठा और चलता होगा अपनी पेंट उठाया और उसमें से मोबाइल निकाल कर देख ने लगाई स्क्रीन पर उसकी मां का नंबर था वह कॉल रिसीव करके बोला।

क्या हुआ मम्मी,,

तुम इधर से गए काफी देर हो गई है कहां हो तुम,,,

बस मम्मी 15 मिनट में निकलने वाला हूं यहां पर एक अच्छा सा रेस्टोरेंट हाउस में बैठकर कॉफी पी रहा हूं,,,

ठीक है बेटा जल्दी करना शाम होने वाली है।

तुम चिंता मत करो मम्मी मैं समय पर पहुंच जाऊंगा,,
(इतना कहकर शुभम फोन काट दिया और शांति की तरफ देखने लगा शांति बिस्तर पर लेटे हुए ही उससे बोली ।)

काम तो पूरा हो गया है अब चले जाओ तुम्हारी मम्मी चिंता करती होंगी,,,

मेरी जान आज मिली हो पता नहीं कब मिलोगी ऐसा मौका में अपने हाथ से नहीं जाने दूंगा,,,

मतलब तुम्हारा फिर से करने का इरादा है।

हां लेकिन पीछे से,,,

करतो लिए पीछे से,,,,

मेरा मतलब तुम समझी नहीं मेरी जानेमन आगे का खजाना तो लुटा चुकी हो पीछे का भी लुटा दो,,,
(शुभम की बात का मतलब समझते ही शांति शर्म से पानी पानी हो गई और अंदर तक सिहर उठी क्योंकि वह अच्छी तरह से समझ रही थी कि जब शुभम का मोटा लंड उसकी बुर में बड़ी मुश्किल से खुश रहा था तो उसकी गांड के छोटे से छेद में कैसे घुसेगा,,,)

नहीं नहीं सुभम यह मुझसे बिल्कुल भी नहीं हो पाएगा आज तक मैंने कभी भी गांड नहीं मरवाई,,,

नहीं मरवाई हो तो आज मरवाने बहुत मजा आएगा,,

बहुत दुखेगा,,,,

मजा भी बहुत आएगा,(शुभम अपने लंड को हिलाते हुए बिस्तर की तरह आगे बढ़ते हुए बोला,,,)

मेरे पति और बच्चों के आने का समय हो गया है,,,

तब तक तो हम दोनों का काम हो जाएगा शांति मेरी जान,,,
(शांति को अंदर ही अंदर घबराहट भी हो रही थी गांड मरवाने की बात सुनकर ही उसके बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि शुभम ऊसकी गांड मारने वाला है,,, बहुत पहले लगभग शादी के 2 साल बाद ही उसका बॉयफ्रेंड उसकी गांड मारने की कोशिश कर रहा था लेकिन अंदर जाने से पहले इसका पानी निकल गया था तब से शांति ने कभी भी गांड मरवाने का प्रयास नहीं की थी और ना ही किसी ने मारने की,,, लेकिन सुभम की मर्दाना ताकत को देखकर शांति के मन में थोड़ी आस का दिया जल रहा था,,, क्योंकि भले ही उसे घबराहट हो रही थी लेकिन गांड मरवाने की उत्सुकता भी हो रही थी। एक बार फिर से शुभम उसके बिस्तर पर पहुंच गया था।)

दर्द हुआ तो।

कुछ नहीं होगा बस मुझ पर छोड़ दो।

(एक बार फिर से शुभम शांति को पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया शुभम की हरकतों के आगे वह एक बार फिर से अपना घुटना टेक दी, देखते ही देखते शुभम शांति को एक बार फिर से घोड़ी बना दिया उसकी भारी-भरकम बड़ी-बड़ी गोरी मदमस्त पिछवाड़े को देखकर शुभम का घोड़ा फिर तैयार हो गया,,,, शुभम अच्छी तरह से जानते थे औरत को किस तरह से आनंद देना है,,,उनकी गांड मारने के लिए किस तरह से आगे बढ़ा जाता है इसमें वह अच्छी तरह से माहिर था देखते ही देखते शुभम पूरी तरह से शांति पर छा गया पहले तो शांति को दर्द का एहसास होने लगा लेकिन धीरे-धीरे शुभम के कहे अनुसार उसे मज़ा आने लगा और देखते ही देखते शांति खुद अपनी बड़े पिछवाड़े को पीछे की तरफ खोलकर शुभम के द्वारा गांड मरवाने का आनंद लूट रही थी,,,,

आखिरकार शुभम ने शांति की आगे और पीछे से दोनों जगह से ले चुका था अब वह कपड़े पहनकर जाने के लिए तैयार हो गया था शांति जिंदगी में पहली बार संपूर्ण शुद्ध तरीके का तृप्ति का एहसास की थी,,, वह शुभम के गले लग गई और उसके होठों को चूम कर उसे विदा की,,,
शुभम मुस्कुराता हुआ घर से बाहर निकल गया और चलते हुए अपने घर की तरफ जाने लगा,,,। और अपने मन में यही सोच रहा था कि एक साथ अगर शीतल और उसकी मां की गांड मारा जाए तो कैसा रहेगा,,,

नौकरानी शांति इस तरह से शुभम के लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी

 
शुभम का समय बड़े अच्छे से कट रहा था,,, शाम ढलते ढलते वह घर पर पहुंच चुका था,,, बस दो रातें और 2 दिन रह गया था उन तीनों के हिस्से में शिमला की खूबसूरत वादियों में गुजारने के लिए,,, अब तीनों नहीं बल्कि निर्मला के मन में शीतल को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका नहीं रह गई थी,, निर्मला को तो अब शीतल के साथ अपने बेटे से चुदवाने की जैसी आदत सी पड़ गई थी। कुछ भी हो शुभम के दोनों हाथों में स्वादिष्ट व्यंजन की थाली थी जिसको वह जब चाहे तब खा सकता था,,, शीतल के साथ-साथ निर्मला अपने बेटे की जबरदस्त ताकत की दीवानी हो चुकी थी क्योंकि शिमला में आए 8 दिन हो चुका था और इन दिनों में शुभम ने उन दोनों की एक साथ ना जाने कितनी बार चुदाई की हद है लेकिन एक भी बार ऐसा नहीं लगा था कि शुभम थक गया है हर बार वह दोनों ही थक कर चूर हो जाते थे,,,रात भर की जबरदस्ती चुदाई के बाद भी शुभम का लंड ज्यों का त्यों खड़ा का खड़ा ही रहता था,,,निर्मला एकदम मस्त हो जाती थी जब उसका बेटा शुभम अपने लंड को शीतल की बुर से बाहर खींचकर उसके मदनरस से सना हुआ लंड उसकी बुर में पेलता था,, एक अजीब सा अद्भुत एहसास उसके तन बदन में अंदर तक पसर जाता था,,, शिमला की कातिल ठंडी तीनों के अद्भुत संभोग क्रीडा के आगे घुटने टेक रही थी,,, तीनों को शिमला की ठंडी इतनी अधिक नहीं लग रही थी जितना कि लोग कहते थे,,, इसका कारण सिर्फ शीतल निर्मला थी जिसकी तपती हुई जवानी की भट्टी में शुभम रात दिन अपने हाथ सेंका करता था,,,।
Nirmala apne bete k lund se khelti huyi


नौकरानी शांति के घर से लौटते हुए तकरीबन 6:30 बज चुके थे,,, शुभम डोर बेल बजाया तो थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला शीतल दरवाजे पर थी और शुभम को देख कर मुस्कुरा दी लेकिन अंदर सोफे पर लेटी हुई निर्मला बोली,,,।

बहुत समय लगा दिया तुमने घूमने में,,, यह शहर यह गलियां सब कुछ अनजान है इतनी देर तक घूमना ठीक नहीं है,,,(अपनी मां की बात सुनकर शुभम मुस्कुराता हुआ घर में प्रवेश किया तो शीतल बोल पड़ी,,)


क्या यार तू भी शुभम को अभी तक तू बच्चा समझ रही है,,, अब ये औरतों को चोदकर बच्चा पैदा करने लायक हो गया है,,,(इतना कहते हुए शीतल दरवाजा बंद कर दी,,,शीतल के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर निर्मला शर्म से पानी पानी हो गई और वह शीतल से बोली)

क्या सीतल पागल हो गई है इस तरह की बातें कर रही है,,,तुझे इस तरह की बातें करते हुए शर्म नहीं आ रही है।

तू भी निर्मला एकदम बच्चों जैसी बातें कर रही है,,, अब शुभम से कैसा शर्माना,,, अपने बेटे की आंखें टांगे खोल देने के बाद शर्मो हया का लिबास ओढकर रखना बेवकूफी है,,, तो अपने आपको झूठा दिलासा दे रही है,,,जब एक औरत किसी मर्द के साथ सारी संबंध बनाती है तो उसी समय उसकी सारी मर्यादाएं टूट कर बिखर जाती है उस मर्द के आगे शर्म करना सबसे बड़ी बेवकूफी होती है,,,, और तू भी वही कर रही है तेरी और शुभम के बीच में क्या कुछ नहीं होगा जो एक पति और पत्नी के बीच होता है तो इस बात को स्वीकार करने में हर्ज ही क्या है,,, क्यों शुभम तु क्या कहता हैं,,?

अब मैं तुम दोनों बड़ों के बीच में क्या कह सकता हूं,,,

अच्छा बच्चे कुछ नहीं कह सकता हम दोनों को एक साथ कर सकता है लेकिन हम दोनों के बीच में कुछ कह नहीं सकता,, अच्छा निर्मला यह बता शुभम तो तेरी बहुत दिनों से ले रहा है ,,, और अपना पानी भी तेरी बुर में छोड़ता है तो क्या तुझे कभी रुका नहीं,,,,( शीतल की बात सुनते ही निर्मला हक्की बक्की रह गई उसके चेहरे से हवाइयां उड़ने लगी वह कभी शुभम की तरफ तो कभी सीतल की तरफ देख रही थी,,, सीकर की बात सुनते ही उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी थी,,, क्योंकि भले ही शुभम और उसके बीच सबकुछ हो चुका था लेकिन,, इस तरह की बातें कभी भी नहीं हुई थी इसलिए निर्मला को अपनी बेटे के सामने इस तरह की बातें करने में बेहद शर्म का एहसास हो रहा था। निर्मला को देखकर एक बार फिर से शीतल शुभम की तरफ देखते की बोली।)

तू शुभम के सामने क्यों शर्मा रही है बोलना,,, बोलने में क्या जाता है,,,,।

(सीतल के इस तरह की बातें सुनकर शुभम की भी हालत खराब होने लगी थी वाकई में अब तक शुभम और उसकी मां के बीच सारी हदें पार हो चुकी थी मर्यादाएं बिखर चुकी थी लेकिन बात इधर तक कभी नहीं पहुंची थी,,, शुभम भी अपनी उत्तेजना को दबाते हुए बोला।)

बोलो ना मम्मी शीतल क्या कहना चाह रही हैं,,,।

तू चुप कर तेरे मतलब की बात नहीं है,,,।
(निर्मला की बात सुनकर शीतल जोर जोर से हंसने लगी और हंसते हुए बोली।)

क्या निर्मला एक टीचर होकर तु बेवकूफी भरी बातें कर रही है,,,,
(शीतल की जीद देखकर निर्मला समझ गई थी कि यह बिना सोने मानने वाली नहीं है इसलिए वह शरमा कर अपनी नजरें नीचे झुका कर धीरे से बोली,)

शुभम के पैदा होने के 2 साल बाद ही में ऑपरेशन करा चुकी हूं,,,

क्या बात कर रही है निर्मला क्या सच में तु इतनी जल्दी ऑपरेशन करा दी थी,,,,।(शीतल हैरान होते हुए बोली शुभम को भी कुछ कुछ समझ में आ रहा था और उसका मन भी उत्तेजना से व्याकुल हुए जा रहा था क्योंकि यह सीधे-सीधे अपनी मां को भी प्रेग्नेंट करने वाली बात थी..)

हां मैं बहुत जल्दी ऑपरेशन करा दी थी जो कि बाद में बहुत पछता भी रही थी,,,।

गलती तो तू ने की थी निर्मला भला इतनी जल्दी कोई ऑपरेशन कर आता है जब तक दो-तीन बच्चे नहीं हो जाते तब तक ऑपरेशन के बारे में सोचना भी ठीक नहीं रहता,,,

मैं क्या करती शीतल शुभम के पैदा होने के बाद से ही अशोक का व्यवहार मेरे प्रति बदलने लगा था। इसलिए गुस्से में आकर मैं भी बिना बताए ऑपरेशन करवा ली,,,

निर्मला तू अगर ऑपरेशन नहीं करवाई होती तो शायद तेरे घर में अभी दो-तीन बच्चे और होते ,,,(शुभम भी यह बात सुनकर एकदम हैरान क्योंकि जिस तरह की दोनों बातें कर रहे थे उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि अगर उसकी मां यह गलती ना की होती तो शायद उसका भाई या बहन जरूर उसके साथ होते.)
भगवान तुझे दे रहे थे और तू खुद ही रास्ता रोक ली और यहां देखें इतने साल से में एक संतान के लिए तरस रही हुं।(शीतल उदास होते हुए बोली।)

चलि ये सब छोड़ तू भी तो शुभम का लंड बिना कंडोम लगवाए अपनी बुर में लेती है और पूरा का पूरा पानी अपनी बुर में ही निकलवा लेती है अगर तुझे कहीं कुछ हो गया तो,,,

हो जाता तो अच्छा ही था,, लेकिन जो इतने सालों में नहीं हुआ अब क्या होने वाला है।

भगवान पर भरोसा रख एक न एक दिन जरूर तेरी सुनी गोद हरी हो जाएगी,,,
( कमरे का माहौल थोड़ी देर के लिए एकदम गमगीन हो गया था उसे ठीक करते हुए शीतल बोली,,)

चल छोड़िए यह सब बात,,, अब हम लोगों के पास केवल दो राते ही हैं,,, पर इसे हम तीनों बड़े अच्छे से बिताएंगे,,,

इसमें कोई शक नहीं है,,,(निर्मला अपने बंधे हुए बालों में से बक्कल को निकालते हुए बोली,,,।)

तो आज हम यह करेंगे कि शुभम कुछ भी नहीं करेगा वह सिर्फ बिस्तर पर पीठ के बल लेटा रहेगा और जो कुछ भी करेंगे हम दोनों ही करेंगे,,,,

हां यह ठीक है बहुत मजा आएगा जब हम दोनों बारी-बारी से शुभम की लैंड पर बैठकर अपनी गुलाबी बुर के अंदर उसके मोटे लंड को लें(निर्मला एकदम मस्ती के साथ गर्म आहें भरते हुए बोली,,, शुभम भी मस्त होने लगा वैसे भी उन दोनों की बातें सुनकर उसका लंड एकदम टाइट हो चुका था,,,, दिन भर घर की नौकरानी की चुदाई करने के बाद भी इन दोनों की मस्ती भरी बातें नहीं उसके तन बदन में एक बार फिर से उत्तेजना की लहर दौड़ा दिया था,,, उसका चोदने का मूड बन चुका था,,, लेकिन किसको अब यह उसके सामने सवाल था उसकी मां तभी सोफे पर से खड़ी हुई और अपनी बड़ी बड़ी गांड से अपने बेटे के सामने करके नीचे झुक कर अपने सैंडल की पट्टी को बांधने लगी,,, उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा पूरी तरह से चुदवासा हो गया है,,,, शुभम की किस्मत उस समय बहुत जोरों पर थी क्योंकि उसकी मां यहां मॉल से खरीदा हुआ छोटा कपड़ा पहनी हुई थी और ऊपर से ऊपर कोट चढ़ाई हुई थी जिसमें से उसकी मोटी मोटी जांगे दिख रही थी और अपनी मां की तूतिया जांघों को देखकर शुभम की आंखें चमक उठी अब उससे रहा नहीं जा रहा था वैसे भी शर्म मर्यादा अब उन तीनों के बीच किसी भी प्रकार से मायने नहीं रखती थी,,, शीतल भी कुछ काम करने की तैयारी कर रही थी नौकरानी के आने का समय हो गया था लेकिन अभी कम से कम 20 मिनट का समय बाकी था उसके आने में शुभम को यही समय एकदम ठीक लग रहा था उसकी मां की भी छुट्टी हुई थी उसकी भारी-भरकम गोलाकार गांड को देखकर शुभम के तन बदन में आग लग गई और वह पीछे से जाकर अपनी मां को दबोच लिया और सीधा उसकी कमर को पकड़ कर अपने पेंट की बटन खोलने लगा,,,

अरे यार यह क्या कर रहा है शुभम मुझे छोड़ तो,,,
(यह सुनकर शीतल भी उसकी तरफ देखने लगी तो वह हैरान हो गई निर्मला की बात सुनकर सीतल भी बोली,,)

अरे तू तो बहुत उतावला हो गया रात का इंतजार तो कर लिया होता,,,

रात का इंतजार करके भी कोई फायदा नहीं है क्योंकि आज तो मैं कुछ कर नहीं पाऊंगा जो कुछ भी करना है तुम दोनों को ही करना है इसलिए सोचता हूं अभी कुछ कर लुंं(शुभम अपनी पेंट खोलकर घुटनों तक नीचे खींचता हुआ बोला...)

शीतल तुम्हारा बेटा बहुत चालाक है।

अरे चालाक तो है लेकिन मुझे छोड़ तो बाद में कर लेना,,, मुझे उठने तो दे। (निर्मला उठने की कोशिश करते हुए बोली लेकिन शुभम अपनी मां को इस तरह से अपने दोनों हाथों से दबोचा हुआ था जैसे एक कुत्ता कुतिया को चोदते समय अपने पैरों से उसे दबा कर रखता है ठीक वही हाल निर्मला का था सुभम ऊसे उठने नहीं दे रहा था,,,)

बस थोड़ी देर ऐसे ही रहो मम्मी,,,(इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां की गुलाबी रंग की पैंटी को खींचकर घुटनों तक कर दिया,,, अब उसकी मां भी कमर से पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,शीतल की आंखों से साफ नजर आ रहा था कि शुभम का लंड पूरी तरह से खड़ा था,,, शुभम की उत्तेजना को देखकर वह भी हैरान थी,,, और देखते ही देखते शुभम अपना पूरा लंड अपनी मां की बुर में पेल किया उसे चोदना शुरू कर दिया,,, थोड़ी ही देर में दोनों मस्ती में आ गए कुछ देर पहले जो निर्मला उसे रुकने के लिए बोल रही थी अब वह गरम सिसकारी के साथ शुभम के हर धक्के को जेल रही थी,,, और देखते ही देखते तकरीबन 10 मिनट की चुदाई के बाद दोनों झड़ गए,,,।

रात पूरी तरह से जवान हो गई थी शुभम पेट के बल दम नंगा बिस्तर पर लेटा हुआ था और शीतल और निर्मला दोनों अपने अपने तरीके से शुभम के अंगों से खेल रहे थे,,, निर्मला अपनी बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी तो सीतल अपनी बड़ी बड़ी गांड शुभम के मुंह पर रखकर उसे अपनी बुर चटा रही थी,,, थोड़ी थोड़ी देर में शीतल निर्मला अपनी अपनी पोजीशन बदल दे रही थी दोनों को काफी ऊतेजना और आनंद दोनों प्राप्त हो रहा था,,,देखते ही देखते शीतल और निर्मला बारी-बारी से शुभम के लंड पर चढ़ाई कर दीए,,, लेकिन शुभम को भला इसमें क्या दिक्कत हो सकती थी उसे तो मजा ही आ रहा था वह कभी बड़ी बड़ी गांड पर जोर जोर से अपना हाथ मारने लगता तो कभी उन दोनों के खरबूजे को पकड़कर जोर जोर से दबाने लगता था और मौका देखकर नीचे से धक्के भी लगा दे रहा था,,,।
तकरीबन रात के 3:00 बजे तक तीनों का यह अद्भुत खेल चलता रहा इसके बाद तीनों एक-दूसरे की बांहों में नींद की आगोश में चले गए,
 
दो सहेलियां एक तरफ शीतल तो दूसरी तरफ



निर्मला दोनों खूबसूरती की मिसाल लेकिन निर्मला खूबसूरती और मादकता में एक कदम आगे,,,



जोकि वासना के अधीन होकर अपनी प्यासी जवानी को अपने ही बेटे के लंड से बुझाने लगी।



वही सीतल अपनी जवानी का जलवा शुभम के ऊपर बिखरने लगी,,, दोनों किसी से कम नहीं थी,, एक पूरी तरह से सेक्सी थी


तो निर्मला पूरी तरह से गदराए जिस्म की मालकिन थी,,, जिसकी बड़ी-बड़ी गांड का आशिक खुद उसका बेटा था,,



शीतल और निर्मला दोनों ही शुभम के प्रति पूरी तरह से आकर्षित और दीवानी हो चुकी थी जिसमें फायदा सिर्फ शुभम का ही था उसके दोनों हाथों में लड्डू था एक तरफ उसकी खूबसूरत हुस्न की मल्लिका उसकी मां निर्मला थी तो दूसरी तरफ शीतल थी दोनों शुभम की जवानी का रस अपने अपने हिसाब से चूस रहे थे,


और सुभम भी दोनों औरतोंं की मत मस्त जवानी और दीवानगी दोनोंं का फायदा उठाते हुए बारी-बारी से दोनोंं की चुदाई करता आ रहा था।



निर्मला शुभम और शीतल के बीच चल रही है वासना की कहानी एक अधूरी प्यास पार्ट 2 अब अपने अंतिम अध्याय पर पहुंच चुकी है,,,


अब देखना यह है कि आगे क्या होता है
 
शिमला में अब सिर्फ एक रात ही रह गई थी जिसमें शुभम को अनमोल से मिलना था,,, अनमोल का खूबसूरत चेहरा और गर्म कोट में ढका हुआ बदन शुभम को भा गया था हालांकि उसे सिर्फ अनमोल का खूबसूरत चेहरा ही नजर आता था लेकिन ओवरकोट के घेराव की वजह से उसके खूबसूरत बदन के ढांचे का अनुमान वह लगा चुका था,,, अनमोल से मिलने के लिए उसके होटल जाना चाहता था उसे ना जाने क्यों मन में उम्मीद हो रही थी कि अनमोल के साथ भी उसकी बात बन जाएगी ,,,, इसलिए दोपहर के समय जिस समय वह शांति से मिलने के लिए घर से निकला था उसी समय घूमने का बहाना करके अनमोल से मिलने के लिए वह घर से निकल गया। लेकिन इस बार वह अपने आप को काफी तैयार करके घर से बाहर निकला था ताकि वह पहली बार में ही एकदम इंप्रेशन जमा सके इसलिए आंखों पर गॉगल्स लगा लिया था । खूबसूरत घटीले बदन का तो वह पहले से ही था,, आंखों पर गूगल चढ़ा लेने की वजह से उसके इंप्रेशन में चार चांद लग जा रहा था,,, आज बर्फ बिल्कुल भी नहीं कर रही थी मौसम साफ था,, मन में गीत गुनगुनाता हुआ वह होटल अनमोल की तरफ आगे बढ़ता चला जा रहा था,,। वह मन में यही सोच रहा था कि अगर वह अनमोल को पा सका तो यहां पर भी आकर वह अपना झंडा गाड़ने में पूरी तरह से सफल हो जाएगा वैसे तो शांति उसके हाथ लगी चुकी थी लेकिन यह बात वह भी अच्छी तरह से जानता था कि शांति का लेवल थोड़ा डाउन था भले ही खूबसूरती और गदराए बदन में वह हुस्न की मल्लिका थी,, लेकिन बड़े आराम से वह उसकी बाहों में आ गई थी,,, अगर अनमोल उसकी बाहों में आ सकी तो उसके लिए बहुत ही बड़ा शीमला में आकर अचीवमेंट होगा,,,
वैसे इस बात से शुभम पूरी तरह से अनजान था कि शुभम को देखकर अनमोल भी उसकी तरफ आकर्षित हो गई थी,,ऊसकी ईमानदारी बात करने का ढंग उसका भोला भाला मासूम चेहरा उसका गठीला बदन सब कुछ अनमोल को अच्छा लगा था,,, इसलिए तो वह उसे दोबारा मिलने के लिए अपने होटल अनमोल में बुलाई थी,,,
थोड़ी ही देर में शुभम होटल अनमोल के सामने खड़ा था,,, उसका दिल भी जोरों से धड़क रहा था उसी समझ में नहीं आ रहा था कि उनसे मिलना चाहिए या नहीं मिलना चाहिए लेकिन फिर भी उसने खुद से बुलाई थी तो मिलना भी जरूरी था,,, होटल अनमोल बाहर से बेहद खूबसूरत लग रहा था,, बाहर दो दरबार खड़े हुए थे शुभम दरवाजे के करीब पहुंच गया था और दरबान उसे सलाम करते हुए दरवाजा खोल दिया शुभम भी अपने ओवरकोट में दोनों हाथ डालकर होटल में दाखिल हुआ,, शुभम अपने व्यक्तित्व के हिसाब से बेहद डेसिंग लग रहा था,, जिस पर शायद सबकी नजर पड़ी थी,,,वह मुस्कुराता हुआ इंक्वारी टेबल पर गया,, जहां पर एक बहुत ही खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी,,, जो कि शुभम को देखते ही बोली।

मैं आई हेल्प यू सर,,,,

जी देखिए मुझे अनमोल जी से मिलना था,,,

क्या,,?
( वह लड़की आश्चर्य से बोली,,, क्योंकि शुभम की उम्र को देखते हुए लड़की इतना तो समझ गई थी कि भला इतने बड़े होटल की मालकिन अनमोल को इससे बच्चे से क्या काम हो सकता है,, वैसे शुभम चेहरे से मासूम लगता था बाकी गठीला बदन तो उसे अपनी उम्र से दो 4 साल ज्यादा ही बयान करती थी,,,)

इसमें चौंकने वाली कौन सी बात है,,,?

लेकिन मैडम किसी से नहीं मिलती।

मुझसे मिलेंगी,, उन्हें फोन लगा कर कहो कि शुभम आया है,,,(इतना कहकर सुभम होटल के चारों तरफ नजर घुमाने लगा,,, होटल का नजारा बेहद खूबसूरत था कोई भी टेबल खाली होने का सभी टेबल बुक नजर आ रहे थे और टेबल की सजावट भी बेहतरीन तरीके से की गई थी,,, होटल की रंगीनियत को देख कर ही पता लग रहा था कि अनमोल काफी पैसे वाली औरत थी,, शुभम के आत्मविश्वास को देखकर वह लड़की हैरान थी ना चाहते हुए भी वह अनमोल को फोन लगा दी,,, और शुभम का नाम सुनते ही अनमोल एकदम खुश होते हुए उसे भेजने के लिए बोली,,,)

क्या हुआ,,,?(शुभम अपने चेहरे पर विजई मुस्कान लाते हुए उस लड़की से बोला)

मैडम ने आपको बुलाया है,,,(वह लड़की फटी आंखों से शुभम की तरफ देखते हुए बोली) वैसे तुम अनमोल मैडम के रिश्तेदार हो क्या,,,?

ऐसा ही समझ लीजिए,,, वैसे जाना कहां,, है,,,?

सीढ़ियों से होते हुए ( सिड़ियों की तरफ इशारा करते हुए) बाई तरफ से सीधे चले जाना है 001 कमरा है।

बहुत-बहुत शुक्रिया,,,(इतना कहते हुए शुभम सिढीयों की तरफ जाने लगा,,, भले ही शुभम आत्मविश्वास से भरा हुआ था लेकिन अनमोल से मिलने की उत्सुकता में उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, थोड़ी ही देर में भाग कमरा नंबर 001 के सामने खड़ा था,,,दरवाजा खोलने से पहले वह अपने आप को पूरी तरह से व्यवस्थित करने लगा था,,, डॉल्फिन बजाकर वह बड़े ही शालीनता के साथ खड़ा हो गया,,,, कुछ ही सेकंड में दरवाजा खुला,, सामने अनमोल का खूबसूरत चेहरा देखकर वह प्रसन्नता से भर गया,,,

आओ शुभम तुम्हारा स्वागत है,,,(इतना कहकर अनमोल उसे कमरे में अंदर आने का ईसारा की,,, शुभम उसके अंदाज से खुश होकर कमरे में दाखिल हो गया और कमरे में दाखिल होते ही अनमोल ने दरवाजा बंद कर दी,,)

मुझे नहीं लगता था कि तुम आओगे,,,

ऐसा कैसे हो सकता है तुम बुलाओ और मैं ना आऊं,,,
(शुभम बड़े हीरोमांटिक अंदाज में बोला और अनमोल उसके रोमांटिक अंदाज से काफी प्रभावित हुई,,)

बैठो,,, मैं तुम्हारे लिए कुछ आर्डर कर देती हूं,,,,,
(इतना कहकर अनमोल सोफे पर बैठ कर फोन से नाश्ते का आर्डर कर दी,,, मरुन रंग की ओवरकोट में अनमोल का खूबसूरत बदन काफी खूबसूरत लग रहा था,, उसने नेवी ब्लू रंग की जींस और वाइट कलर की टी-शर्ट पहनी हुई थी जो कि उसके गोरे बदन पर बेहद खिल रही थी,,, शुभम के लिए पहला मौका था जब वह किसी हाई क्लास लेडी से मिल रहा था जो जींस और टी-शर्ट पहनती थी वरना अब तक भले ही भाई क्लास औरत से मिल चुका था लेकिन साड़ी पहनने वाली ही औरतों से मिला था इस तरह की मॉडर्न टाइप औरत से वह पहली बार मिल रहा था,,, इसलिए सुभम के बदन में कुछ ज्यादा ही आग लगी हुई थी,,,। सुभम बार-बार चोर नजरों से अनमोल की तरफ देख ले रहा था,, ऑर्डर देकर फोन रखने के बाद वह शुभम से मुखातिब होते हुए बोली,,,)

और बताओ सुभम कैसा चल रहा है सब,,,

सब ठीक ही है,,, आज आखिरी रात है शिमला में,,

मतलब कि कल चले जाओगे,,,

हां,,,

चलो अच्छा हुआ कि जाने से पहले एक बार मुलाकात हो गई,,,

मेरा भी सौभाग्य है कि आज यहां बैठकर तुमसे बातें करने का मौका मिल रहा है,,,

मैं कोई सेलिब्रिटी तो हूं नहीं कि तुम्हें मुझ से बातें करना अपना सौभाग्य लग रहा है,,,।

तुम्हारे लिए यह औपचारिक ही होगा लेकिन मेरे लिए यह सचमुच सौभाग्य की बात है,,,
(शुभम की यह बातें सुनकर अनमोल मुस्कुराने लगी लेकिन अनुमान को क्या पता था कि यह शुभम की चिकनी चुपड़ी बातें एकदम फ्लर्ट है,,, शुभम का यह सबसे बड़ा हथियार था किसी भी औरतों को फसाने के लिए क्योंकि यह बात अच्छी तरह से जानता था कि दुनिया की कोई भी औरत उसकी तारीफ कर देने से एकदम से पिघल जाती है ।और धीरे-धीरे उसकी यह ट्रिक काम कर रही थी अनमोल को शुभम की इस तरह की बातें बेहद फिल्मी टाइप के लग रही थी ना जाने क्यों उसे शुभम के अंदर फिल्मों का शाहरुख खान नजर आ रहा था जो अपनी इसी तरह की बातें से हीरोइन के दिल पर एकदम से अपनी छाप छोड़ देता था,,)

वैसे तुम्हारी तरह की बातें मुझे बहुत अच्छी लगी,,,

और मुझे तुम,,,, मेरा मतलब है कि तुम्हारा एटीट्यूड तुम्हारा ढंग और सबसे बड़ी बात तुम्हारी खूबसूरती,,,
( इतना सुनते ही अनमोल जोर जोर से हंसने लगी इतना की उसकी हंसी नहीं रुक रही थी,,,)

मेरी बात सुनकर तुम हंस क्यों रही हो सीरियसली तुम बहुत खूबसूरत हो,,,(अनमोल बिना रुके हंसे जा रही थी,, और यही हंसने का फायदा उठाते हुए शुभम अपने दिल की बात बोल गया,,) और सच कहूं तो यहां आने का मेरा मकसद यही था कि एक बार जाने से पहले तुम्हारे खूबसूरत चेहरे का दीदार कर सकूं,,,
(यह बात सुनते ही अनमोल अपने हंसी पर एकदम से काबु कर ली,,, शुभम के बात से एकदम अंदर तक झकझोर कर रख दी,,, तुरंत ही अनमोल के चेहरे का भाव एकदम से बदल गया,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे कुछ याद आ गया हो,,, फिर एकदम सेवा अपने आप को संभालते हुए बोली,,,)

ऊमममम,,, बातों के जादूगर हो,,,

जादूगर नहीं,,, सच बोलता हूं,,,
( अनमोल कुछ कह पाती इससे पहले ही डोर बेल बज उठी,, और अनमोल सोफे से उठ कर दरवाजा खोलने के लिए गई,,, दरवाजा खुलते ही बेटा ऑर्डर का सारा सामान ट्रे में रखकर ले आया जिसे वह खाली टेबल पर रख कर औपचारिकता निभा कर चला गया शुभम इस दौरान होटल के कमरे के चारों तरफ देखकर उसका मुआयना न कर रहा था जो कि काफी खूबसूरती से सजाया हुआ था,,, एक तरह से अनमोल ने इस कमरे को ऑफिस बना कर रखी थी,,,)

आओ शुभम कुछ खा लो वैसे भी बरसों बाद किसी को मेहमान नवाजी के लिए मैं निमंत्रण दी हुं,,( इतना कहते हुए सबसे पहले अनमोल बीयर की बोतल का ढक्कन खोल कर पूरी बीयर की बोतल शुभम की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोली,,) उम्मीद है कि इसे तो तुम लेते ही होंगे,,,

नेता को नहीं हूं लेकिन यहां आकर इसकी आदत सी पड़ गई है,,(शुभम हाथ बढ़ाकर अनमोल के यहां से बीयर की बोतल ले लिया,,)वैसे सच कहूं तो तुम्हारे हाथों से जहर पीना भी मंजूर है,,

यार तुम डायलॉग बहुत मारते हो,,(इतना कहकर अनमोल हंसने लगी,,, और उसकी खूबसूरत हंसी देखकर शुभम भी प्रसन्न हो गया और बीयर की बोतल को मुंह से लगा लिया और धीरे-धीरे पीना शुरु कर दिया,,, अनमोल दारू की बोतल का ढक्कन खोल कर कांच के गिलास में उसे उड़ेल रही थी,,,

तुम बियर नहीं पीती,,,

मैं वोडका पीती हूं,,,,(इतना कहते हुए आधे से ज्यादा ग्लास वोडका से भरली और शराब की बोतल पर ढक्कन लगा दी और धीरे-धीरे पीना शुरू कर दी,,, शुभम बियर का मजा लेते हुए अनमोल को ही देखे जा रहा था,,, इतनी बड़ी होटल की मालकिन और उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचकर अनमोल शुभम के इस नजरिए को अच्छी तरह से पहचान रही थी,,, शिवम का इस तरह से उसे घूरना उसे अच्छा अभी तक रहा था उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी एक तो शुभम और उसके बीच उम्र की दूरी और इस उम्र के दौरान शुभम जैसा नौजवान लड़का उसकी तरफ आकर्षित था यह सोचकर ही अनमोल मदहोश हुए जा रही थी,,,)

वैसे तुम्हारी फैमिली में कौन-कौन है,,,

बस में ही मैं हूं,,,(लंबी सांस लेते हुए बोली)

मैं कुछ समझा नहीं मेरा मतलब है कि पति बच्चे मां बाप,,,

कोई नहीं बस एक बहन है जो कनाडा में पढ़ रही है,,,

शादी नहीं की तुमने,,,

की थी,,, लेकिन धोखा खा गई,,,

धोखा,,,, मैं कुछ समझा नहीं ,,,(शुभम आश्चर्य जताते हुए बोला)

बहुत लंबी कहानी है इतना बताने का समय नहीं है बस इतना समझ लो कि,,, सही मौके पर मेरी आंख खुल गई वरना मैं कहीं की नहीं रह जाती,,, उसे मेरी दौलत से प्यार था मुझसे नहीं मुझसे शादी करके वह सब कुछ अपने नाम पर कराना चाहता था वह तो मेरी किस्मत बड़ी तेज निकली कि एक एक्सीडेंट में वह मारा गया,,,।

ओहहह,, एम सॉरी मुझे मालूम नहीं था,,,

अफसोस जताने की जरूरत नहीं है शुभम मैं तो खुश हूं कि वह मर गया वरना शायद मैं मर गई होती,,,( एक लंबी सीप भरते हुए वह बोली,,)

तब से तुम अकेली हो,,,

बिल्कुल अकेली,,,

दोबारा शादी क्यों नहीं की,,,?

भरोसा उठ गया मर्द जात पर से,,,,

तुम अच्छा नहीं कर रही हो एक ने धोखा दिया और सारे मर्दों पर उंगली उठा दी,,,

आज के बाद तुम सच कह रहे हो लेकिन क्या करूं दूध का जला इंसान छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है और इसी में उसकी भलाई भी है,,,

सच कहूं अनमोल,,, मैं अगर उम्र में दो 4 साल और बड़ा होता तो सच में मैं तुमसे शादी कर लेता,,,,

( सुभम की बात सुनकर एक बार फिर से अनमोल जोर जोर से हंसने लगी,,,।)

ऐसे ही हंसती रहा करो हंसती हुई तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो।

तुम्हारी यह सब बातें मुझे पागल कर देगी,,,( अनमोल हंसते हुए बोली)

और मुझे तुम,,,,

( शुभम की आवाज सुनकर अनमोल एकदम से खामोश है उसे एकटक देखती रह गई ना जाने क्यों की आंखों में ऊसे प्यार नजर आ रहा था,,, बरसों बाद अनमोल ने भी किसी से अपने दिल की सारी बातें कह दी थी,,, वो खुद हैरान थी कि एक किसान को अपने दिल की हकीकत क्यों बयां कर रही है,,, अपने आप को संभालते हुए अनमोल बोली,,)

अाओ कुछ खा लो,,, नॉनवेज तो खाते हो ना,,,

जी हां बिल्कुल,,(इतना कहते हुए बहुत अनमोल के ठीक सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया और अनमोल प्लेट के ऊपर से ढक्कन हटाने लगी,, प्लेट में चिकन लेग पीस रखा हुआ था,, उसे देखते ही सुभम के मुंह में पानी आ गया,,,)

मुझे उम्मीद है कि तुम्हें यह पसंद आएगा,,,

तुम्हारे हाथों से तो मुझे कुछ भी पसंद आएगा,,

यार कभी नॉर्मल ही रहते हो कि इस तरह से डायलोग बाजी करते रहते हो,,,

अच्छा एक बात बताओ अनमोल जी,,, डायलॉगबाजी किस के सामने किया जाता है,,,
(शुभम की यह बात सुनकर अनमोल कुछ देर सोचने के बाद बोली,)

मैं नहीं जानती,,,(इतना कहते हुए वह एक प्लेट को शुभम की तरफ आगे बढ़ा दी और अपनी प्लेट में से लैग पीस निकालकर दांतों से काटने लगी,,,)

अफ कोर्स विलन या हीरोइन के सामने,,, और विलेन तो तुम हो नहीं,,, और हीरोइन माशा अल्लाह सब कुछ दिया है भगवान ने तुमको,,,
(सुभम की बात सुनते ही एक बार फिर से अनमोल हंसने लगी,, खाने का दौर शुरू हो गया था शुभम वैसे नॉनवेज ज्यादा नहीं खाता था लेकिन अनमोल की बात को इंकार नहीं कर सका और नॉनवेज का मजा ले रहा था,, शुभम की बियर खत्म हो चुकी थी लेकिन अनमोल बीच-बीच में वोडका की बोतल में से बोडका का सोमरस अपनी कांच की गिलास में उड़ेल ले रही थी,,, धीरे-धीरे अनमोल को नशा सा छाने लगा था,,, शुभम अपनी तेज पैनी नजरों से अनमोल के वाइट कलर के टीशर्ट में से झांक रहे दोनों को गोलाइए को घूर रहा था,,,, अकेलेपन का एहसास कहो या शराब का नशा अनमोल को उसका इस तरह से घूरना बेहद ऊन्मादक लग रहा था,,,, उसे सुरूर सा चढ रहा था,,, अनमोल की खूबसूरत खीलती हुई जवानी की मादक खुशबू शुभम को बेचैन कर रही थी उसके पैंट के अंदर हलचल मचा हुआ था,,,
देखते ही देखते दोनों ने खाना खत्म कर लिया था,,, अनमोल का दिमाग बड़ी जोरों से घूम रहा था,,, बरसों के बाद किसी का व्यक्तित्व अनमोल को भाया था वरना वह किसी मर्द को इस तरह से अपनी मेहमान नवाजी का मौका नहीं देती थी,,, ना जाने क्यों अनमोल का मन फिसल रहा था,, वह मर्दों से दूर रहना चाहती थी लेकिन आज ना जाने क्यों शुभम की तरफ पूरी तरह से आकर्षित होती जा रही थी,,, दूसरी तरफ सुभम भी परेशान था,,, आया किसी और मकसद से था लेकिन उसे अपना मकसद कामयाब होता नजर नहीं आ रहा था क्योंकि अब तक अनमोल की तरफ से उसे किसी भी तरह का इशारा नहीं मिला था जिससे वह अपनी मंजिल की तरफ आगे बढ़ सके वरना अब तक कोई भी औरत उसके झांसे में आ जाती थी। शुभम को इधर आओ तकरीबन डेढ़ घंटा से ज्यादा गुजर गया था,, समय धीरे-धीरे बीतता जा रहा था,,, ना तो शुभम को ही कुछ समझ में आ रहा था कि क्या करना है नाही अनमोल को,,, लेकिन अनमोल इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी,,, बरसों बीत गए थे संभोग सुख का आनंद लिए,, लेकिन आज वर्षों की तपस्या भंग होती नजर आ रही थी इसका कारण यह भी था कि सुभम ईस शहर का नहीं था वो दूसरे शहर से सिर्फ घूमने के लिए इधर आया था,,,, उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने मैं उसे कोई दिक्कत नहीं थी,,, इसलिए कोई रास्ता नजर ना आता देखकर अनमोल उसे वापस आने की कोशिश करने लगी,,, और अपने मन में आए युक्ति के तहत,,, वहां सुभम के सामने पूरी तरह से नशा में होने का नाटक करने लगी,,,और कुर्सी पर से उठते ही लड़खड़ा ने का नाटक करते हुए गिरने वाली थी कि शुभम फुर्ती से अपनी जगह से खड़ा हुआ और उसकी बांहे पकड़कर उसे संभाल लिया,,,

संभाल कर अनमोल जी अभी तो आप गीरी होती,,,

मैं नहीं गीरूंगी तुम हो ना,,,,(यह शब्द अनमोल इस तरह से बोली जैसे कि पूरी तरह से नशे में धुत हो,,, वह बाथरूम की तरफ जाने लगी तो शुभम उसे रोकते हुए बोला,,,)

कहां जा रही हो गिर जाओगी ईधर बैठ जाओ,,,
( सुभम की यह बात सुनते ही,,, एकदम से पलटकर शुभम की तरफ देखिए और नशे में होने का ढोंग करते हुए एकदम मादक स्वर में बोली,,)

मैं नहीं रुक सकती बहुत जोरों की पेशाब आई है,,,

(अनमोल के मुंह से इतना सुनते ही शुभम के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी मदहोशी पूरे बदन को अपनी गिरफ्त में ले ली,,, वह आंखें फाड़े अनमोल को देखता ही रह गया उसे उम्मीद नहीं थी कि इस तरह की हाई क्लास औरत उससे एकदम देसी भाषा में पेशाब करने के लिए बोलेगी,,)
 
शुभम पूरी तरह से हैरान था एकदम सुन्न हो गया था,, ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई उसके कान में मधुर रस घोल दिया हो,,, वह एकटक अनमोल को देखता ही रह गया था अनमोल पूरी तरह से नशे में होने का नाटक कर रही थी,, वह लड़खडाते हुएबाथरूम की तरफ आगे बढ़ रही थी कि तभी जानबूझकर गिर गई और उसे गिरता हुआ देखकर तुरंत शुभम दौड़ कर गया और उसे उठा लिया,,,,।

मैं बोल रहा था संभाल कर लेकिन तुम मानने वाली नहीं हो,,

अरे कैसे मानूंगी मुझे जोरो की पिशाब लगी है नहीं गई तो इधर ही हो जाएगी,,,,(अनमोल नशे में इधर-उधर आंखें घुमाते हुए बोल रही थी शुभम की तो हालत खराब होने लगी क्योंकि वह अनमोल को संभाल कर पीछे से पकड़े हुए था,,, शुभम काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था लेकिन फिर भी वह उसके कमर के निचले हिस्से को अपने आगे वाले भाग से सटने से बचा रहा था,, उसके पेंट में पूरी तरह से तंबू बन चुका था,, लेकिन अनमोल मौके का फायदा उठाते हुए अपने आप को पूरी तरह से नशे में होने का आभास करा कर वह अपने नितंबों को पीछे की तरफ ले गई और तुरंत ही उसे शुभम के मर्दाना ताकत से भरे हुए अंग के कठोर पन से भरा हुआ तंबू का स्पर्श हुआ,,, और अपने नितंबों पर शुभम के तगड़े पन का एहसास करते ही उसके बदन में सरसराहट दौड़ गई वह पूरी तरह से कांप गई क्योंकि उसे इस बात का अहसास हो गया कि जब उसका स्पर्श इतना तगड़ा है तो पूरी तरह से नंगा होकर जब उसकी बुर में जाएगा तब क्या गुल खिलाएगा,,, अब तो अनमोल पूरी तरह से व्याकुल हो गई शुभम के साथ संभोग रत होने के लिए,,वो बार-बार अपनी गांड को पीछे की तरफ करके शुभम के पेंट में बने तंबू से स्पर्श करा रही थी,,,अनमोल भी पूरी तरह से उत्तेजना से भर गई थी वर्षों के बाद ऊसे इस तरह की उत्तेजना का अनुभव हुआ था,,, नशे में होने का नाटक करते करते हो सच में पूरी तरह से मदहोश होने लगी थी,,, लेकिन यह बात भी नोटिस कर रही थी कि शुभम की तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी शायद यह अनुभव शुभम के लिए पहला था कि कोई औरत उसके सामने उसकी बाहों में इस तरह से पूरी तरह से नशे में हूं इसलिए वह अपने आपको बेहद असहज महसूस कर रहा था, हालांकि अनमोल की हरकत की वजह से वह पूरी तरह से गरमा गया था,,,लेकिन अनमोल के साथ नशे में होने के बावजूद भी उसके बदन से किसी भी प्रकार की छूट लेने के लिए तैयार नहीं था,,और अनमोल अपने नशे में होने का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहती थी। इसलिए वह मदहोसी में लड़खड़ाते स्वर में बोली।

सुभम मुझे बाथरूम तक छोड़ दो,, मुझे जोरो की पेशाब लगी है,,,
(एक बार फिर से अनमोल की यह बात सुनकर शुभम के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,, टांगों के बीच की हलचल बढ़ने लगी इसमें सुभम को किस बात का एतराज हो सकता था,,,)

ठीक है चलो मैं चलता हूं,,,
(और शुभम उसे सहारा देते हुए पीछे से उसकी दोनों बाहो को थामकर उसे आगे की तरफ ले जा रहा था,,, लेकिन अनमोल पूरी तरह से फायदा उठाते हुए अपने नितंबों को बार-बार पीछे की तरफ कर दे रही थी अनमोल की यह हरकत शुभम को बेहद मदहोशी से भर दे रही थी,,अनमोल की खुद की हालत खराब थी वह चाह रही थी कि उसकी हरकत की वजह से शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो जाए और जो औरत के साथ एक मर्द को करना चाहिए वही उसके साथ करें,,, लेकिन शायद नशे में होने की वजह से वह औरत के नशे का फायदा उठाना नहीं चाहता था इसलिए वह अपने तरफ से अपने आप पर पूरी तरह से काबू किए हुए था,,, लेकिन अनमोल के बदन से उठती हुई माता खुश तो उसके तन बदन में नशा ही नशा फैला रहा था,, चार पांच कदम की दूरी पर ही बाथरूम था लेकिन अनमोल के इस तरह से लड़खडाने की वजह से बहुत धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ रहा था,,, एक हाथ से अनमोल को संभाले हुए वह दूसरे हाथ से बाथरूम का दरवाजा खोल दिया जो की अंदर की तरफ खुलता था दरवाजा खुलते ही सुभम बोला,,,)

जाईए दरवाजा खोल दिया हूं लेकिन संभाल कर,,,,
(बाथरूम का दरवाजा खोलते हैं अनमोल के तन बदन में आग लगी उसकी जा रहा था कि शुभम को बाथरूम के अंदर की तरफ खींच कर मनमानी कर ले,,, लेकिन ना जाने क्यों ऊसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,, लेकिन बाथरूम में कुछ नहीं से पहले वह अपना ओवरकोट उतारने लगीतो सुबह में उसकी मदद करते हुए दोनों हाथों से उसका ओवरकोट पकड़ कर उसकी दोनों बाहों में से बाहर निकाल दिया,,, और अपने कंधे पर टांग दिया,, ओवरकोट के निकलते ही शुभम को इस बात का आभास हुआ कि उसकी टीशर्ट स्लीवलेस थी जिसमें से उसकी गोरी गोरी बाहें चमक रही थी उसकी दोनों गोलाइयों के बीच वाली लकीर एकदम साफ नजर आ रही थी,,दोनों चूचियों के बीच की गहराई को देखकर शुभम को उसमें डूब जाने की इच्छा हो रही थी,,,
शुभम खाली अपना मन मसोसकर रह जा रहा था,उसके मन में तो बहुत कुछ और रहा था लेकिन उसे कर गुजरने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,, तभी अनमोल बाथरूम के अंदर प्रवेश की शुभम को लगा कि वह दरवाजा बंद कर लेगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ दरवाजा अंदर की तरफ खुलता था इसलिए खुले में दरवाजे से अंदर की तरफ जाकर वह ठीक शुभम की आंखों के सामने ही आंखों को नशे में बंद करके अपनी जींस का बटन खोलने का नाटक करने लगी,,,, शुभम चोर नजरों से अनमोल की तरफ देख रहा था,, अनमोल को जींस की बटन खोलता हुआ देखकर उसके तन बदन में आग लग रही थी,,, उत्तेजना के मारे गला सूख रहा था और अनमोल नशे में होने का ढोंग करते हुए सिर्फ अपने जींस की बटन खोलने का नाटक भर कर रही थी उसे खोल नहीं रही थी क्योंकि उसके मन में कुछ और चल रहा था,,, तभी वह शुभम की तरफ देखे बिना ही हिलते हुए बोली,,,

शुभम मुझसे मेरे जिंस की बटन नहीं खुल रही है और मुझे जोरो की पेशाब लगी है,,। तुम खोल दो ना प्लीज,,,,

इतना सुनते ही शुभम के तन बदन में अरमानों के तार झनझनाने लगे,,, ऐसा नहीं था कि पहली बार वह किसी औरत के कपड़े उतारने जा रहा था बल्कि जिंदगी में पहली बार इतनी हाई क्लास लेडी के कपड़े उतारने का उसे आमंत्रण खुद सामने से निमंत्रण मिल रहा था वैसे तो उसने अपनी जिंदगी में ना जाने कितनी औरतों के कपड़े अपने हाथों से उतार चुका था,,, पर जितने के भी उतारे थे उन सब की साड़ी और पेटीकोट ही उतारा था ज्यादा से ज्यादा सलवार लेकिन आज जिंदगी में पहली बार उसे किसी आई क्लास निधि के जींस की बटन खोलने का मौका मिल रहा था यह सुनकर उसके तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा,,,अनमोल की तरफ से मिले इस निमंत्रण से वह पूरी तरह से गनगना गया था,,, पहले तो वह जानबूझकर नानू कुर करते हुए बोला,,,।

अनमोल जी में कैसे,,, मतलब,,,,(अनमोल के सामने वह झिझक के मारे कुछ बोल नहीं पा रहा था,,,)

मैं कैसे मतलब,,, अपने हाथ से यार तुम भी यहां हालत खराब हो रही है और तुम संस्कार पेल रहे हो,,, जल्दी आओ मेरे जिंस की बटन खोलो,,,
(हाई क्लास लेडी के मुंह से इस तरह की देसी भाषा सुनकर वह पूरी तरह से चौक गया था हालांकि इस तरह की बातें हुआ काफी औरतों के मुंह से सुन भी चुका था जिनमें उसकी मां भी शामिल थी,,, लेकिन अनमोल की बात कुछ और थी इसलिए तो अनमोल के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर सुभम के ऊतेजना का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया था,,, सुभम अब पीछे हटने के बारे में सोच भी नहीं रहा था ऐसे भी ऊसके पास समय कम था शाम होने वाली थी और वह जल्द से जल्द जो कुछ भी होने वाला था उसे खत्म करके घर जाना चाहता था क्योंकि वक्त से पहले पहुंचना जरूरी था उस दिन शांति के घर पर उसे काफी समय हो गया था,,,इसलिए वो बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था और अनमोल जैसी खूबसूरत हो रहा था इस तरह का आमंत्रण स्वीकार करके वह बाथरूम में अपने कदम रख दिया,,, शुभम जेसे ही बाथरूम के अंदर आया वैसे ही अनमोल के तन बदन में उत्तेजना का अद्भुत संचार होने लगा उसका बदन कसमसाने लगा क्योंकि उसे पता था कि कुछ ही सेकंड में शुभम की उंगलियां उसके जींस की बटन पर होंगी जो की हरकत करते हुए उसे अपने हाथों से खोलेंगी,, यह एहसास ही अनमोल की बुर गीली करने के लिए काफी थी,,।
और अगले ही पल शुभम की उंगलियां अनमोल के जींस के बटन पर थी जिसे खोलते हुए शुभम की उंगलियां कांप रही थी,,, अनमोल नशे में होने का ढोंग कर रही थी लेकिन वह पूरी तरह से होश में थी,,इसलिए तो शुभम के द्वारा चींस की बटन खोले जाने पर वह पूरी तरह से कसमसा रही थी। देखते ही देखते सुबह में उसके जींस के बटन खोल दिया अब अनमोल को आगे क्या करना है यह बोलने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी उसके जींस के बटन खोल कर शुभम अपने दोनों हाथों से उसकी जींस के छोर को पकड़ कर पेंटिं सहित नीचे की तरफ सरका ने लगा,,,अनमोल के नितंबों का घेराव कुछ ज्यादा था जिसकी वजह से उसकी जींस पूरी तरह से कसी हुई थी और शुभम जिस तरह से उसे नीचे खींच कर ला रहा था मुमकिन नहीं था कि एकदम सपाट तरीके से उसकी जींस नीचे खिसक आती,,और यह बात अनमोल भी अच्छी तरह से जानती थी इसलिए वह खुद ही अपने नितंबों को दाएं बाएं करके हिलाते हुए शुभम को इसकी जिंस नीचे सरकाने मे मदद कर रही थी,,,और शुभम अनमोल के ठीक सामने घुटने मोड़कर बैठा हुआ था चाहता तो वह खड़े होकर भी उसकी जींस उतारने में मदद कर सकता था लेकिन वह अनमोल की बुर को एकदम करीब से देखना चाहता था,,, क्योंकि अनमोल की बुर देखने की इच्छा उसके अंदर कुछ ज्यादा ही थी,,, वैसे तो वह भी अच्छी तरह से जानता था कि औरतों के पास जो बुर होती है सबकी एक जैसी ही होती है,, लेकिन फिर भी मर्दों की सबसे बढी चाहत औरतों को नंगी और उनकी रसीली बुर के दर्शन करना ही होती है,,, अपनी इस उम्र के दौरान ही शुभम ने ना जाने कितनी बुर के दर्शन कर चुके थेलेकिन जितना उत्साह उसे अनमोल की बुर देखने की थी शायद इतना उत्साह उसकी मां के बाद किसी की बुर देखने की नहीं हुई थी,,। देखते ही देखते अपने प्रयास से और अनमोल के सहकार से जींस के साथ-साथ उसकी गुलाबी रंग की पेंटी भी धीरे-धीरे करके उसके रेशमी मक्खन जैसी चिकनी जांघों से होती हुई घुटनों तक आ गई,,
शुभम की नजर जैसे ही अनमोल की बुर पर पड़ी वह तो उसे देखता ही रह गया, अद्भुत अनमोल नाम की तरह ही एकदम अतुल्य जो कि किसी से तुलना करने जैसी नहीं थी सबसे खूबसूरत नशीली और रसीली,,, शुभम को यकीन नहीं हो रहा था कि अनमोल इतनी खूबसूरत बुर में से पेशाब करती होगी,,,क्योंकि अनमोल की खूबसूरत रसीली बुर को देख कर उसे ऐसे लग रहा था कि अनमोल इसमें से पेशाब नहीं बल्कि अमृत की धार मारती होगी,, सुभम पागलों की तरह मदहोशी में अनमोल की रसीली व कसी हुई बुर को देखे जा रहा था, कसी इसलिए कि अनमोल की बुर मात्र पतली लकीर की तरह ही नजर आ रही थी बाकी लकीर के इर्द-गिर्द वाला हिस्सा हल्का फुला हुआ था और लकीर के बीचो-बीच से गुलाब की पत्ती नुमा उसकी खूबसूरती बाहर को झांक रही थी,,शुभम के मुंह में पानी आ रहा था सुभम अपने होठों को उसकी बुर से लगाकर उसके रस को पीना चाहता था,,, अनमोल नशे का ढोंग करते हुए चोर नजरों से शुभम की तरफ देख ले रही थी और यह देखकर काफी खुश और उत्साहित थी की शुभम उसकी बुर को पागलों की तरह देख रहा था उसकी आंखों में बुर देखकर उस की चमक साफ नजर आ रही थी,,, शुभम का गला उत्तेजना के मारे सुखता चला जा रहा था,,। सुभम का वहां से हटने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था,,, और पेशाब का बहाना करते करते उसे सच में जोरों की पेशाब लग चुकी थी,,, अनमोल भी खुद बेहद उत्तेजना से भरी हुई थी बरसों के बाद उसके सामने इस तरह का नजारा जो देखने को मिल रहा था और बरसों के बाद ही वह किसी गैर इंसान के सामने अपने कपड़े उतारी थी,,और दूसरी मुलाकात में ही उसने अपने खूबसूरत बदन का वह खूबसूरत और कीमती खजाना दिखा दी थी जिसे देखने के लिए न जाने कितने लोग तड़प रहे थे,,,
शुभम का दिल अनमोल के खूबसूरत खजाने को अपने हाथों में लेकर लूटने का मन कर रहा था,, और शायद अनमोल भी यही चाहती थी इसलिए बार-बार अपनी कमर को आगे की तरफ करके उसकी आंखों के सामने अपनी बुर को परोस रही थी लेकिन शायद नशे में होने का ढोंग कर रहे होने के नाते शुभम उसके ईसारे को समझ नहीं पा रहा था,,, अनमोल को वास्तव में पेशाब का प्रेशर बहुत तेज आ रहा था और वह अपने आप को रोक नहीं पा रही थी वह बैठने ही वाली थी कि उसकी गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों के ऊपरी छेद से पेशाब की धार फूट पड़ी और वह सीधे जाकर शुभम के चेहरे पर गिरी शुभम एकदम हक्का-बक्का रह गया,,, और यह देखकर अनमोल भी एकदम शर्म के मारे पानी पानी हो गई वह शुभम को भले ही उत्तेजित करना चाहती थी लेकिन अपने आप को इस तरह से निर्लज्ज साबित नहीं करना चाहती थी,,, शुभम थोड़ा सा पीछे हो गया लेकिन बोला कुछ नहीं,,, अनमोल मन में सोच रही थी कि अच्छा ही हुआ कि वह नशे में होने का ढोंग कर रही थी वरना शुभम उसके बारे में क्या सोचता,,, अपने पेशाब की तेज धार पर काबू कर के वह तुरंत नीचे बैठ गई और मुतना शुरू कर दी,,,अनमोल के लिए जिंदगी में यह पहला वाक्या था जब वह गैर मर्द के सामने इस तरह से बेशर्म बन कर पेशाब कर रही थी,,, लेकिन अपनी इस बेशर्मी में उसे काफी उत्तेजना का एहसास हो रहा था,,, उसकी गुलाबी बुर में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी,,, और उसमें से सीटी की आवाज किसी बांसुरी की मधुर आवाज की तरह लग रही थी,,,शुभम अनमोल के खूबसूरत खजाने और उसकी मद मस्त जवानी को देखकर इतना मदहोश हो गया था कि मंत्रमुग्ध वहीं खड़ा रहा और उसे पेशाब करता हुआ देखता रह गया लेकिन बाथरूम के बाहर नहीं गया,,,,, अनमोल इतना तो समझ गई थी कि शुभम उसकी तरफ पूरी तरह से आकर्षित हो चुका है तभी तो उसके पेंट के आगे वाले भाग में पूरी तरह से तंबू बन चुका था और यह अनमोल की नजरों से बचा नहीं था उसके पेंट में बने तंबू को देख कर अनमोल की गुलाबी बुर फुदकने लगी थी,,,।
वह शर्म के मारे शुभम की तरफ देख नहीं रही थी लेकिन चोर नजरों से उसकी पेंट का तंबू जरूर देख ले रही थी और उसके तंबू को देखकर उसे समझते देर नहीं लगी थी कि तंबू के अंदर का बंबू काफी दमदार है,, और इसीलिए अनमोल काफी व्याकुल हो गई थी संभोग रत होने के लिए,,,
थोड़ी ही देर में अनमोल की गुलाबी बुर में से आ रही सीटी की आवाज कमजोर पड़ने लगी, शुभम समझ गया कि अनमोल पेसाब कर चुकी है,,,,लेकिन वह उठ नहीं रही थी वह शर्म के मारे नहीं उठ रही थी और सुभम समझ रहा था कि शायद वह पूरी तरह से नशे में है इसलिए उठ नहीं पा रही थी,,, इसलिए शुभम आगे बढ़ा और उसकी बांहें पकड़कर उठाने लगा एक पल के लिए उसे लगा कि शायद नशे में होने के नाते उसके साथ मनमानी करने में ही भलाई है लेकिन फिर उसकी इंसानियत उसे यह गवारा नहीं समझ रही थी क्योंकि आज तक उसने जिसके साथ भी संभोग किया है पूरे होशो हवास में और औरत के रजामंदी के साथ मही किया था,,क्योंकि यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि रजामंदी के साथ किया गया संभोग तृप्ति के एहसास से भर देता है,।
इसलिए शुभम अनमोल जैसी खूबसूरत औरत के नसीब में होने का फायदा ना उठा ते हुए वह ऊसको सहारा देकर खड़ी करने लगा,,,,शुभम के व्यवहार को देखकर अनमोल को लगने लगा था कि वह उसके साथ मनमानी नहीं करेगा इसलिए उसे ही कुछ करना होगा,,,,

चलो संभाल कर तुम्हें कमरे तक पहुंचा दु तुम काफी नशे में हो,,,(इतना कहकर शुभम अनमोल को खड़ी करने लगा अनमोल खड़ी होते हुए लड़खड़ा ने का नाटक करते हुए बोली,,)

कौन नशे में है मैं बिल्कुल नशे में नहीं हूं मुझे पूरा होश है,,,

हां मैं जानता हूं तुम होश में हो लेकिन बाहर चलो,,, पेशाब कर चुकी हो रुको मुझे तुम्हारी जींस ऊपर चढ़ाने दो,,,
(इतना सुनते ही अनमोल समझ गई कि अगर जिंस एक बार फिर से ऊपर आ गई तो शुभम उसकी दोनों टांगों के बीच नहीं आ पाएगा,,, इसलिए शुभम नीचे की तरफ झुक कर उसकी जींस ऊपर करता है इससे पहले ही,,, वाह शुभम के चेहरे को पकड़कर नशे की हालत में बोली जबकि वह नशे में बिल्कुल भी नहीं थी,,,।

तुम बहुत अच्छे हो सुभम तुम बहुत अच्छे हो,,,आई लव यू,,, सुभम,,,(शुभम को तो समझ रहा था कि यह अनमोल क्या कह रही है,, लेकिन कुछ समझ पाता इससे पहले ही अनमोल सुभम के होठों पर अपने लाल लाल होठ रख कीस करने लगी,,,,अनमोल यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम को सिर्फ रास्ता दिखाने की जरूरत है मंजिल तक वह खुद पहुंच जाएगा,,, सुबह को इस बात का अंदाजा बिल्कुल भी नहीं था कि अनमोल इस तरह की हरकत करेगी,,,, और अनमोल का सोचना बिल्कुल सही निकला कब तक शुभम अपने आप को संभाल कर रखता वैसे भी वह यही तो करने आया था जब सामने से ही औरत खुद मजा लेना चाहती हो तो भला शुभम कैसे पीछे हट सकता था,,, सुभम भी उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,,, देखते ही देखते अनमोल एकदम मदहोश होने लगी बरसों के बाद कोई मर्द उसके होंठों को चूस रहा था,,,शुभम पागल में जा रहा था हवा इस मौके का पूरी तरह से भरपूर फायदा उठाने के मूड में था इसलिए उसके लाल-लाल होठों का रस पीते हुए वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ लाकर उसकी मदमस्त चूचियों को टी शर्ट के ऊपर से ही मसलना शुरू कर दिया,,,, थोड़ी ही देर में बाथरूम के अंदर से अनमोल की गर्म सिसकारियां आने लगी,,,,शुभम पागलों की तरह उसकी चूचियों को टी शर्ट के ऊपर से ही दबाया जा रहा था और साथ ही उसके लाल होठों से उसके मदन रस का स्वाद लिया जा रहा था,,,
अनमोल के तन बदन में आग लग चुकी थी जिसे शुभम ही बुझा सकता था,,शुभम उत्तेजना के मारे बड़े जोर-जोर से उसकी चूचियों को दबा रहा था जिससे अनमोल को दर्द का एहसास तो हो ही रहा था लेकिन आनंद की पराकाष्ठा को भी हो अच्छी तरह से महसूस कर पा रही थी।पल भर में ही शुभम उसके साथ क्या कर ले या खुद शुभम को भी नहीं समझ में आ रहा था इसलिए वह तुरंत अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के एकदम चिकनी मदमस्त गुलाबी बुर को अपनी हथेली से मसल ना शुरू कर दिया,,,,

आहहहह ,,,सुभम ,,,ओहहहहहह,,,,,
(शुभम की इस हरकत की वजह से अनमोल के मुंह से गर्म सिसकारी फुट पड़ी,,,शुभम अच्छी तरह से समझ गया था कि यह गर्म सिसकारी उसकी कौन सी हरकत की वजह से निकली है,,, इसलिए शुभम बिल्कुल भी देर किए बिना ही तुरंत नीचे कुछ मुझे बल बैठ गया और उसकी रसीली बुर पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया,,,शायद शुभम बाथरूम से बाहर जाने का रिस्क नहीं उठा सकता था कि कब जाने ईसका मूड बदल जाए,,, क्योंकि शुभम यही समझ रहा था कि अभी वह नशे में है नशा कब ऊतर जाए इसका एहसास उसे बिल्कुल भी नहीं था,,, इसलिए वह जी जान लगाकर बुर पर टूट पड़ा था,,,शुभम की हरकत की वजह से उसे दोनों टांगों के बीच कंपन महसूस हो रही थी वह काफी उत्तेजित हो गई थी शुभम की हरकत की वजह से वह डगमगा गई थी और सीधे जाकर दीवाल से एकदम सट गई थी,,,

आहहह शुभम बहुत मजा आ रहा है मुझको,, आई लव यू शुभम,,,,आहहहहहह,,,(अनमोल लगातार शुभम के बालों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे जोर जोर से अपनी बुर पर रगड़ रही थी और साथ ही अपने नितंबों को गोल-गोल घुमा भी रही थी,,अनमोल जैसी हाई क्लास औरत के साथ इस तरह की हरकत करके शुभम की उत्तेजना और खुशी दोनों का ठिकाना बिल्कुल भी नहीं था।
शुभम कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी जिंदगी में ऐसा भी मोड़ आएगा कि जब एक खूबसूरत चौहान और काफी अमीर औरत होटल की मालकिन उसके साथ संभोग करने के लिए व्याकुल हो जाएगी,,,शुभम पूरी मस्ती के साथ इस पल का आनंद उठाते हुए जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ को अनमोल की बुर के अंदर डाल कर उसके मदन रस को अपने गले में गटक ने की कोशिश कर रहा था,, और शुभम की यह हरकत से वह पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच जा रही थी उसे बार-बार ऐसा लग रहा था कि उसका पानी निकल जाएगा लेकिन संभल जाती थी,,,, अभी भी वह पूरी तरह से अर्धनग्न अवस्था में थी,, कमर के नीचे से एकदम नंगी घुटनों तक जींस गिरी हुई थी,,, जिंसको ऊपर चढ़ा कर बटन लगाना शायद अब दोनों के बस में नहीं था,, शुभम अपने लंड के लिए रास्ता बनानेके लिए अपनी दो उंगली उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करते हुए उसकी बुर चाटने का आनंद लूट रहा था,,, शायद यह अनमोल के लिए संभोग से कम नहीं थाक्योंकि बरसों बीत गए थे वह अपनी बुर के अंदर अपनी एक उंगली भी नहीं डाली थी और यहां तो शुभम अपनी दो उंगली डालकर उसे मस्त कर रहा था,,
अनमोल एकदम पागल हुए जा रही थी मदहोश हुए जा रही थी इससे पहले तो वह नशे में होने का ढोंग कर रही थी लेकिन अब ऐसा लग रहा था कि जवानी का नशा उस पर पूरी तरह से हावी हो चुका था,,, उसके बदन में कसमसाहट हो रही थी,। उसे शुभम की दो उंगली से लंड से कम मजा नहीं मिल रहा था वह मम्मी यही सोच रही थी कि जब दो उंगली से इतना मजा आ रहा है जब शुभम अपना मोटा लंड उसकी बुर में डालेगा तब क्या होगा,,,, और सुभम शायद उसे चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका था,,, वह बाथरूम के अंदर उसकी चुदाई करना चाहता था इसलिए अपनी चीज की बटन खोल कर वह अपनी जिंस को भी घुटनों तक कर लिया और अपने मोटे तगड़े लंड को हिला कर अनमोल को घुमा कर दीवार से सटा दिया और उसकी बड़ी-बड़ी गांड को अपनी तरफ खींच लिया,,, अनमोल को समझते देर नहीं लगेगी वह उसके पीछे से चुदाई करने वाला है और इस पोजीशन में उसे भी काफी आनंद आता था अब देखना यह है कि शुभम उसे कितना तृप्त कर पाता है,,,अनमोल कुछ भी नहीं बोल रही थी बस आंखों को बंद करके इस एहसास में पूरी तरह से डूब रही थी थोड़ी ही देर में शुभम अपने लिए जगह बना कर,, उसकी बड़ी बड़ी गांड के दोनों फांकों को फैला कर ऊसकी गुलाबी बुर के अंदर अपना लंड डालना शुरू कर दिया,, थोड़ा सा लंड घुसते ही अनमोल को उसके मोटे पन का एहसास हो गया उसकी सांस अटक नहीं लगी शुभम लेकिन पीछे हटने वाला तुमको देखते देखते हो अपना आधा लंड ऊसकी बुर के अंदर डाल दिया,,,आहहहह आहहहहहह की आवाज लगातार आ रही थी अनमोल को समझते देर नहीं लगी कि शुभम कर लंड कुछ ज्यादा ही मौटा है,, लेकिन अनमोल काफी मजबूर औरत थी पक्के निर्धार वाली वह भी अपने मन में ठानी थी कि सुगम के पूरे लंड को अपनी बुर के अंदर लेगी,,,और जब तक शुभम का लंड पूरी तरह से उसकी गहराई में पहुंच नहीं गया तब तक वह अपनी सास को रोके रह गई,,,
शुभम फतेह पा चुका था,,, धीरे धीरे वह अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,, अनमोल को काफी मजा आ रहा है जैसे-जैसे उसका लंड अंदर बाहर हो रहा है अनमोल सातवें आसमान में उड़ने लगी थी,, गर्म सिसकारियां से पूरा बाथरूम गूंज रहा था,, शुभम काफी उत्साहित था उसने आज बेहद खूबसूरत और हाई लेवल की औरत को चोद रहा था अनमोल के चेहरे का हाव भाव पल-पल बदलता जा रहा था एक पल के लिए तो उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे शुभम ने उसकी बुर के अंदर लोहे का रोड डाल दिया हो क्योंकि अनमोल समझ गई थी कि उसका लैंड असामान्य है,,,, बिना पूरे कपड़े उतारे वह अनमोल की होटल में और उसके ही कमरे में चुदाई कर रहा था,,, बरसों बाद चुदाई का असली सुख अनमोल भोग रही थी वह काफी खुश थी काफी उत्साहित और काफी उत्तेजित उसकी सांसो की गति तेज होती जा रही थी वो झड़ने वाली थी लेकिन शुभम पर करा था वह बार-बार अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेल दे रही थी और शिवम का भी उसकी पतली कमर तो कभी बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर चोदते रहता था,,, और देखते ही देखते तेज चीख के साथ अनमोल झड़ गई लेकिन फिर भी शुभम उसकी बुर में अपना लंड पेलता रहा,,, शुभम अभी झड़ा नहीं था अच्छी तरह से जानता था कि अभी वह कितनी देर तक टिक सकता है,,, शुभम का मन अब ऊसे बिस्तर पर ले जाकर जमकर चोदने का था,,, इसलिए वह उसकी पूरी से अपना नंबर बाहर निकाल कर उसे गोद में उठा लिया अनमोल तो उसकी ताकत को देखकर हक्की बक्की रह गई वह कुछ बोल नहीं पा रही थी बस उस एहसास में अपने आप को जिए जा रही थी देखते ही देखते शुभम बाथरूम से बाहर आकर उसे नरम नरम गद्दे पर पटक दिया और थोड़ी ही देर में से बटन से सारे वस्त्र उतार कर पूरी नंगी कर दिया।अनमोल पूरी तरह से जोश से भरी हुई थी इसलिए शिमला की कड़कड़ाती ठंड में उसे ठंड का बिल्कुल भी एहसास नहीं हो रहा था,, पूरी नंगी होने के बाद उसकी चकाचौंध जवानी देख कर शुभम की आंखें फटी की फटी रह गई और वह बिस्तर पर जाकर अपने लिए जगह बनाया और एक बार फिर से उसकी दोनों चूचियों को थामकर उसे चोदना शुरू कर दिया,,,थोड़ी ही देर में अनमोल फिर से तैयार हो गई और उसकी गरम सिसकारी पूरे कमरे में गुंजने लगी,, जिंदगी में पहली बार से चुदाई का असली सुख प्राप्त हो रहा था और वह भी एक लड़के से वह काफी खुश थी,, और वह शुभम का बराबर साथ दे रही थी,,, शुभम इतनी जबरदस्तऔर पूरी ताकत लगाकर धक्के लगा रहा था कि उसकी ताकत को देखकर अनमोल हैरान रह गई थी,,और वह इतनी देर तक टिका था इस बात से भी वह काफी रोमांचित हो गई थी। उसके हर धक्के के साथ में पीछे की तरफ चली जा रही थी और पूरी पलंग चर मरा रही थी,,तकरीबन 15 मिनट की जबरदस्त घमासान चुदाई के बाद दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी दोनों का पानी निकलने वाला था और शुभम अपना दोनों हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसे कसके अपनी बाहों में भर लिया और जोर जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए ,,, यह अद्भुत अहसास तृप्ति से भरा हुआ सुखद संभोग अनमोल की जिंदगी में पहली बार का था शुभम कुछ देर तक उसके ऊपर ही लेटा रहा,,, अनमोल तृप्ति के एहसास के साथ अपनी आंखों को बंद करके एक दम मस्त हो गई थी,, थोड़ी देर बाद से कम उसके ऊपर से उठा तो अनमोल की तरफ देखा तो अभी भी उसकी आंखें बंद थी उसे गर्म रजाई उसके ऊपर डाल कर उसके माथे पर चुंबन करके अपने कपड़े पहना और कमरे से बाहर निकल गया,,,।
 
[color=rgb(51,]आज आज शिमला में शुभम निर्मला और शीतल की आखिरी रात थी शुभम चाहता था कि आज की रात जिंदगी भर याद रखना इस तरह की गुजरे और इसीलिए वह अपने मन में सारी तैयारी कर चुका था,,
बिस्तर पर पहुंचते ही तीनों ने अपने आप ही अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगे हो गए,,, शुभम के अंदर आज की रात को ज्यादा ही जोश चढ़ा हुआ था वह अपनी मां के कपड़े उतरते हैं सीधा उसके दोनों बड़े-बड़े खरबूजे को अपने दोनों हाथ में ले लिया। पर इतना जोर जोर से दबाने लगा कि निर्मला के मुंह से दर्द के मारे आह निकल गई। शीतल भी हैरान थी क्योंकि शुभम कुछ ज्यादा ही सख्ती दिखा रहा था।

क्या बात है शुभम आज कुछ ज्यादा ही जोश आ गया है क्या तुझ में,,,

शीतल मेरी रानी,,,,,तू तो जानती है कि आज की रात शिमला में आखिरी रात है तो क्यों ना इस रात को एकदम यादगार बनाया जाए,,,(शुभम अपनी मां की दोनों चूचियों को अपने दोनों हथेली में जोर-जोर से दबाते हुए बोला,,,)

सही कहा मेरे राजा,,,आज की रात एकदम यादगार बना देना है ताकि जिंदगी भर यह रात याद रहे,,,

तू चिंता मत कर शीतल मेरा बेटा सच में आज की रात एकदम यादगार बना देगा इसके जोश को देख कर मुझे ऐसा ही लग रहा है,,,आहहहह धीरे से,,, मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूं,,,(जोर से शुभम अपनी मां की चूची को दांत से काट लिया था इसके लिए निर्मला कराह उठी,, शीतल से रहा नहीं जा रहा था वह मां बेटे की कामुक हरकत को देखकर अपने आप ही अपने हाथों से अपनी बड़ी बड़ी चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर दी,,,, और बड़े ही मादक अंदाज से दोनों को देख रही थी,,, निर्मला पागल हुए जा रही थी मदहोसी उसके तन बदन में अपना असर दिखा रही थी,,,,मस्ती में आकर वह अपनी दोनों आंखों को बंद करके बस अद्भुत एहसास का मजा ले रही थी,,,,

सहहहह आहहहह ,,,, ऊमममम,,,, ओहहहह शुभम मेरे राजा,,,बहुत मजा आ रहा है रे बस ऐसे ही मुंह में लेकर जोर-जोर से भी पूरा रस निचोड़ डाल मेरी चुची का,,(निर्मला मदहोशी के आलम में अपने बेटे को अपनी बाहों में जकड़ कर उसे अपनी बड़ी बड़ी नरम नरम चूचियों पर दबा रही थी,,, यह देखकर शीतल के तन बदन में आग लग गई और वह शुभम के पीछे आकर,,,अपनी बड़ी बड़ी चूची हो के साथ-साथ अपनी दोनों टांगों के बीच की पूरी हुई पतली दरार को उसकी पीठ के निचले हिस्से पर रगड़ना शुरु कर दी,,, शुभम को अपनी पीठ के निचले हिस्से पर शीतल की गरमा गरम बुर की गर्माहट एकदम साफ महसूस हो रही थी जिससे वह काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और वह बड़ी शिद्दत से अपनी मां की दोनों चूचियों पर डटा हुआ था,,, वैसे भी पहले से ही निर्मला की चुचियों का आकार काफी जबरदस्त गोलाकार था लेकिन जब से सुगम के हाथों में आया था निर्मला की फुंसियों के आकार में बढ़ोतरी हुई थी जिससे निर्मला की चुचीया काफी आकर्षक हो गई थी तभी तो शुभम की सबसे पहली पसंदीदा चीज भी यही थी,,,दोनों हाथों से दबा दबा कर मुंह में डालकर पीने में जो मजा था वह शायद शुभम को और कहीं नजर नहीं आता था,,, शीतल पीछे से अपनी करामात दिखा रही थी वह अपने दोनों चुचियों को सुभम की पीठ पर मसलते हुए अपनी रसीली गरमागरम बुर को उसकी पीठ के निचले हिस्से से रगड रही थी,, और लगातार गर्म सिसकारियों की आवाज मुंह से निकाले जा रही थी,,। शुभम की हालत खराब होती जा रही थी क्योंकि उत्तेजना के मारे शीतल की बुर फ़ूल कर कचोरी की तरह हो गई थी और, इसकी रगड़ शुभम को अपनी पीठ पर बराबर महसूस हो रही थी,,, निर्मला को अपने बेटे का इस तरह से चूची को दबा दबा कर पीना बेहद आनंददायक लग रहा था,,, शुभम जी जान से अपनी मां की चूचियों से खेल रहा था रात के तकरीबन 11:00 बज रहे थे और तीनों के आंखों से नींद कोसों दूर थी,, दोनों एक ही पलंग पर अपनी जवानी का मजा लूट रहे थे लूटा रहे थे,,, तीनों संपूर्ण नग्न अवस्था में थी तीनों के बदन पर कपड़े का रेशा भर भी नहीं था,,[/color]
[color=rgb(51,]तकरीबन आधा घंटा गुजर चुका था शुभम अपनी मां की चूचियों को छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे पहली बार वह अपनी मां की चूचियों से खेल रहा है शुभम के लिए तो उसकी मां की चूची फुटबॉल के साथ जी भर के खेल लेना चाहता था निर्मला को भी अच्छा लग रहा था उसकी चुचियों के साथ इस तरह से जुझना,,, तीनों की सांसो की गति बढ़ती जा रही थी शीतल पागलों की तरह जोर-जोर से अपनी बुर रगड रही थी,,, वही सोच रही थी कि शुभम उसके ऊपर भी थोड़ी दया भाव रखें,,, पर ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी मन की बात सुभम सुन रहा हो,,, और अपनी मां की चूचियों को छोड़ते ही हो शीतल की खरबूजे को अपने हाथ में पकड़ लिया और जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया साथ ही उसके गुलाबी होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,,, कमरे की गर्माहट बढ़ती जा रही थी साथ ही तीनों के बदन का पारा ऊपर होता जा रहा था,,, तीनों अति उत्तेजीत अवस्था में हो चुके थे,,,,कुछ देर पहले जो क्रिया शीतल शुभम के साथ कर रही थी अब वही क्रिया निर्मला अपने बेटे के साथ कर रही थी शीतल और निर्मला इतनी ज्यादा चुदवाती हो चुकी थी कि दोनों को अपनी तोड़ के अंदर शुभम का मोटा तगड़ा लंड लेने की आवश्यकता पड़ रही थी,,, लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे यह शुभम के ऊपर ही निर्धारित था कि,, कब वह किसकी बुर में अपना लंड पेलेगा,,
लेकिनलेकिन यह बात भी दो ना अच्छी तरह से जानते थे कि तब तक शुभम उन दोनों की चुदाई करना शुरू नहीं करता था जब तक कि वह दोनों एकदम से अत्यधिक गर्म ना हो जाए लेकिन दोनों को इस बात का एहसास हो रहा था कि आप दोनों चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार है,,, लेकिन शायद शुभम को अभी कमी लग रही थी,,, इसलिए तो वह देखते ही देखते शीतल को पीठ के बल लेटा दिया और उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी गीली बुर के अंदर अपना मुंह रख कर उसे चाटना शुरू कर दिया,,, यह देख कर निर्मला के तन बदन में आग लग गई,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे ही वह शीतल की बुर को चाटने की अग्रिमता देखकर शीतल से जलने लगी,,, और वह खुद शीतल के कंधे के अगल-बगल अपनी दोनों घुटनों को रख कर उसका सिर पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाई और उसके मुंह को अपनी रसीली टपकती हुई बुर पर सटा दी,,,,शीतल को मालूम था उसे क्या करना है इसलिए तुरंत अपनी जीभ निकालकर उसकी दूरी को क्या करना शुरू कर दी और जैसे ही शीतल के जीभ को अपनी बुर के ऊपर स्पर्श होता हुआ महसूस की वैसे ही उसके मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,, अपनी मां की हरकत देखकर शुभम के तन बदन में उत्तेजना की लहर और तेज दौड़ने लगी,,, वह शीतल की पूर के ऊपर से अपना मुंह हटा कर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड की तरफ हाथ बढ़ाकर उसे अपनी हथेली में पकड़ते हुए बोला,,।

तुम दोनों रंडियों के साथ मुझे जन्नत का मजा मिलता है,,, तुम दोनों साली एक से बढ़कर एक हो,,

तो लेना मादरचोद मचा,,,, तेरे लंड की तो हम दोनों दीवानी हो गई है जब तक तेरा लैंड हम दोनों की बुर में नहीं जाता तब तक चैन की नींद नहीं आती,,,(निर्मला मादक स्वर में बोली,,,)

और तू क्या बोल रही है भोसड़ा चोदी रंडी,,,

हाय रे मादरचोद तूने तो मस्त कर दिया मुझे,,, तेरी जुबान और लंड दोनों कमाल के हैं जब चलते हैं तो मजा ही मजा देते हैं,,,,

तेरी बुर भी बहुत मस्त है अरे मादरचोद एकदम रंडी की तरह चुदवाती है तू तुम दोनों को देखकर किसी को यकीन नहीं होगा कि तुम दोनों स्कूल में टीचर हो जिस तरह से दोनों टांगे खोल खोल कर लंड लेती हो एकदम रंडी लगती हो,,,,,,

हारेहम दोनों रंडी हैं तेरी रंडी तेरे लंड के दिनों में जब तक तेरा लंड हम दोनों की बुर के अंदर घुसकर चुदाई नहीं करता तब तक हम दोनों को मजा नहीं आता,,, तुम दोनों से शादी कर ले मादरर्चोद,,,

तुमदोनों के साथ में यहां किस लिए आया हूं हनीमून मनाने आया हूं मेरी जान देखना आज की रात में तुम दोनों को कैसे मजा देता हूं,,,( और इतना कहने के साथ शुभम एक बार फिर से शीतल की दोनों टांगों के बीच मुंह डाल दिया,,, एक बार फिर से दोनों की गरम सिसकारी पूरे कमरे में गूंजने लगी निर्मला अपनी बुर शीतल से चटवा रही थी,,, शुभम की मदहोश कर देने वाली हरकतों के आगे दोनों घुटने टेक चुके थे,,,शुभम शीतल की बुर चाटते हुए अपनी मां की बड़ी-बड़ी कांड की तरफ देख रहा था जो कि गोल-गोल हिलाते हुए शीतल से बुर चटाई का मजा ले रही थी,,,,शुभम से रहा नहीं गया और अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की कमर को थाम लिया और उसे अपनी तरफ खींचने लगा,,, निर्मला की सबसे बड़ी तेजी से चल रही थी वह पीछे नजर घुमाकर अपने बेटे की तरफ देखी वह उसे अपनी तरफ खींच रहा था इसलिए बिना रोक-टोक के निर्मला शुभम की तरफ खींचती चली गई और जैसे ही अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड शुभम की आंखों के करीब आई,,,, शुभम से रहा नहीं गया और वह 2 4 चपतअपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर लगाते हुए बोला,,,।

रंडी मादरचोद अपनी गांड थोड़ी ऊपर की तरफ उठा थोड़ी ऊंची कर,,,
(निर्मला को अपने बेटे की दी हुई गाली बेहद आनंददायक लग रही थी,,, शुभम के द्वारा इस तरह की अश्लील गालियां निर्मला की उत्तेजना को निरंतर बढ़ाती जा रही थी शुभम की बातें सुनकर निर्मला समझ गई कि उसका बेटा आप कुछ करने वाला है इसलिए जैसा वह बोला वैसा ही वह नीचे की तरफ झुक कर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को ऊपर की तरफ उठा ली,,,शुभम एकदम मदहोश हो चुका था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह जोर-जोर से अपनी मां की गांड पर तमाचा लगा रहा था और दोनों गांड की बड़ी-बड़ी फांकों को पकड़कर अपनी नाक को अपनी मां की गुलाबी बुर पर रख रहा था उसमें से निकल रहा मदन रस से उसकी नाक पुरी तरह से भीगने लगी,,,,लेकिन फिर भी सुनो ना अपनी नाथ हटाने की जगह जितना हो सकता था अपनी नाक को ही अपनी मां की बुर में घुसेड़ने लगा,,,इससे निर्मला की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को गोल गोल नचाते हुए अपने बेटे के चेहरे को अपनी गांड पर ही रगड़ रही थी,,,, शीतल कहां शांत बैठने वाली थी वह निर्मला की लटकती हुई दशहरी आम को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर दबाना शुरू कर दी,,, उत्तेजना के मारे शुभम का लंड आगबबूला हो रहा था अब उसके अंदर सब्र करने की क्षमता खत्म होती जा रही थी बार-बार वह ऊपर की तरफ उठकर अपनी मां की मदमस्त जवानी को सलामी दे रहा था,,, शुभम को यकीन नहीं हो रहा था कि जिस बुर से वह बाहर निकला था ,,, और आज ऐसा दिन था कि उसी बुर में अपना लंड डालकर मजे ले रहा था,,,,

गरम गरम सिसकारियां पूरे कमरे को मादक स्वर से भर दे रही थी साथ में दोनों के हाथों की खनकती हुई चूड़ियां और ज्यादा शोर मचा रही थी लेकिन यह गर्म सिसकारियां और चूड़ी की खनक कमरे से बाहर नहीं पहुंच पा रही थी,,,शुभम को औरतों का मदद स्वर और उनकी चूड़ियों की आवाज बेहद कामाग्नि से भर देती थी,,,शुभम के सब्र का बांध अब टूट चुका था वह समझ चुका था कि उसके साथ-साथ उसकी मां और शीतल दोनों एकदम गरम हो चुकी है और गरम लोहे पर हथोड़ा मारना ही ठीक रहता है वरना हथौड़ा मारने का कोई भी मतलब नहीं निकलता,,,, इस समय निर्मला और शीतल दोनों की बुर गरम लोहा थी और शुभम का लंड हथोड़ा,,,,जिसे वह अपने हाथ में पकड़कर हीलाते हुए आगे की तरफ बढ़ रहा था,,,

रंडी मादरचोद निर्मला आज देखना मैं तेरी क्या हालत करता हूं,,,,

पहले कर तो सही भोसड़ी वाले तब कहना मैं भी देखूं तेरे में कितना दम है,,,,(निर्मला अपने बेटे को उकसा रही थी ताकि वह उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन सुख ऊसे दे सकें,,, भला शुभम कहां पीछे हटने वाला था वह भी सीना तान के आगे बढ़ रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मां की लहराती हुई बड़ी बड़ी गांड थी जो कि ऐसा लग रहा था कि जैसे युद्ध मैं रक्षा के लिए और दुश्मनों पर हमला के लिए किले पर तोप तैनात की हुई है जो दुश्मनों के परखच्चे उड़ाने में काबिल है,,,, अब देखना था कि शुभम के ऊपर यह क्या असर करती हैं,,, शुभम भी अपनी बंदूक लेकर तोप से भिड़ गया और पहले ही हमले में उसकी मां के मुंह से गर्म आह निकल गई,,, निकलती थी कैसे नहीं इस बार उसका निशाना ही कुछ और था,,,,

नहीं-नहीं बेटा गांड नहीं बुर में डाल दे,,,,

साली आज कि रात तेरी बुर नहीं तेरी गांड मारूंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही शुभम ढेर सारा थूक अपने लंड कैसे पाले पर लगा कर एक बार फिर से गांड के भूरे रंग के छेद पर अपना लंड टीका दिया,, सुपाड़े की गर्माहट पाकर निर्मला का पूरा वजूद पिघलने लगा उसे मालूम था कि आप क्या करने वाला है शुभम को रोकने का कोई तरीका उसके पास नहीं था वह उसके आगे घुटने टेक चुकी थी लेकिन यह बात भी अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम की हाथों में दिया गया बागडोर अच्छी तरह से संभाल लेगा क्योंकि इससे पहले भी वह उसकी गांड के पूरे रंग के छेद से खेल चुका था,,,,और देखते ही देखते अपनी मां की गर्म आहे और हल्की हल्की चीख के साथ आगे बढ़ता रहा,,, और देखते ही देखते निर्मला के जन्नत का द्वार उसके भूरे रंग का छेद चौड़ा होता चला गया,,, सुभम मोटा तगड़ा लंड भूरे रंग के छेद के अंदर की सारी अड़चनो को दूर करता हुआ,,, अंदरकी तरफ दाखिल होता चला जा रहा था ऐसा लग रहा था कि दुश्मनों के एक-एक किलो को ध्वस्त करता हुआ अपना विजई पताका हाथ में लिए वह किले की तरफ अग्रसर होता जा रहा था वह फतेह पा लेने की बिल्कुल करीब हो चुका था क्योंकि अब उसका आधे से भी ज्यादा उसकी मां की गांड के अंदर घुस चुका था शीतल जैसे-जैसे शुभम का लंड उसकी गांड के छेद में खुश रहा था वैसे वैसे निर्मला के चेहरे के बदलते हुए को देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,, वह लगातार निर्मला के दशहरी आम से खेल रही थी,,, हालात एकदम गरम होते जा रहे थे,,, गर्मी का पारा बढ़ते जा रहा था शिमला की ठंडक का तीनों को बिल्कुल भी एहसास नहीं था ऐसा लगी नहीं रहा था कि तीनों शिमला में है तीनों एकदम नंगे होकर एक ही बिस्तर पर जवानी का मजा लूट रहे थे,,,शुभम अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से था मैं अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल रहा था,,,, देखते ही देखते शुभम का पूरा लंड निर्मला की गांड के अंदर घुस गया,,,,

आह रे जालिम यह क्या कर दिया,,,, हाय मैं मर गई पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया मादरचोद मेरी गांड फाड़ देगा क्या,,,,

तेरी गांड नहीं फाडुगा रंडी तुझे मजा दूंगा,,,, देखना अभी कैसे अपनी गांड उछाल उछाल कर गांड मरवाती है,,,,,
(इतना कहने के साथ ही शुभम अपना लंड बाहर की तरफ खींचा और फिर जोर से अंदर की तरफ डाल दिया एक बार फिर से निर्मला के मुंह से चीख की आवाज निकल गई लेकिन अपनी मां की चीखो की आवाज की परवाह किए बिना शुभम अपना लंड अंदर बाहर करके अपनी मां की गांड मारना शुरू कर दीया,,,
शुभम को अपनी मां की गांड मारने में बेहद आनंद आता था,,,शुरु शुरु में तो निर्मला घबराती थी लेकिन धीरे-धीरे अपने बेटे की करामत और उसकी सूझबूझ से उसे भी गांड मरवाने का आनंद अद्भुत तरीके से मिलने लगा,,, देखते ही देखते निर्मला के मुख्य से गांड मरवाने के सुख भरी आवाज आने लगी,,, निर्मला को गांड मरवाती है देखकर शीतल की हालत खराब होने लगी शीतल तुरंत अपने हाथों की कहानी के सहारे उपर की तरफ आई और अपनी कमर उठाकर इशारों में ही निर्मला को अपनी बुर चाटने के लिए बोली,,, शीतल भी एकदम मदहोश हो चुकी थी उसके बेटे ने पीछे से धक्के लगा लगा कर उसे दीवाना कर दिया था,,, अब बड़े आराम से सितम कर लेना उसकी मां की गांड के अंदर बाहर हो रहा था शुभम अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ा कर अपनी मां के कंधों को थाम लिया ,,, इस तरह से शुभम को और ज्यादा मजा आता था शुभम पागलों की तरह अपना कमर हिलाने लगा निर्मला की मोटी चिकनी सुडोल जांघों से शुभम की जांघें जब भी टकराती थी तो उसमें से मदहोश कर देने वाली थाप थाप की आवाज आती थी,,, जो कि पूरे कमरे को मधुर संगीत से भर दे रही थी,,,, हर धक्के के साथ निर्मला के मुंह से आह की आवाज निकल जाती थी तकरीबन 15 मिनट तक शुभम अपनी मां की गांड मारता रहा,, बीच-बीच में निर्मला एकदम मस्त होकर अपना हाथ नीचे की तरफ लॉकर अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों का मसल दे रही थी जिससे उसकी आनंद की सीमा और बढ़ जा रही थी,,,,,

शुभम लंबी लंबी सांसे ले रहा था ,, उसका लंड पूरा उसकी मां की गांड में समाया हुआ था। वह उसी तरह से खड़ा होकर अपनी मां की भारी-भरकम गांड और उसके अंदर फंसा हुआ अपना लौड़ा देख रहा था,,, नीचे शीतल उत्तेजना के मारे छटपटा रही थी,,, शुभमसे शीतल की तड़प देखी नहीं गई और वह उसकी दोनों टांगों को पकड़कर नीचे की तरफ खींच लिया,,,शीतल को तो कुछ समझ में नहीं आया कि यह उसके साथ क्या हुआ और कुछ समझ पाती इससे पहले ही सुदाम उसकी दोनों टांगों को ऊपर की तरफ करके चौड़ा कर दिया,,,, जिससे उसकी भी गांड का भुरे रंग का छेद नजर आने लगा,,,, एक बार फिर से शीतल की गांड का छेद देखकर सुभम के मुंह में पानी आ गया,,, और देखते ही देखते शुभम दम लगा कर अपने मोटे लंड को सीतल की गांड में भी प्रवेश करा दिया,,,, और उसकी गांड मारना शुरू कर दिया,,,,,इस बीच निर्मला लगातार अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में सुभम के मुंह के करीब हिला रही थी,,,, जिसे देखकर शुभम अपनी लालच को रोक नहीं पाया और अपना मुंह अपनी मां की गांड से लगाकर उसकी गांड के छेद को चाटना शुरू कर दिया,,,,, देखते ही देखते पूरे कमरे में हम दोनों औरतों की गरम सिसकारी की आवाज बजने लगी,,,,शुभम को बहुत मजा आ रहा था वह लगातार शीतल की गांड मारते हुए अपनी मां की गांड चाट रहा था,,,, तभी वह शीतल की गाड से अपना लंड बाहर निकाल करअपनी मां की गांड में डाल दिया इस तरह से लगातार कभी अपनी मां की तो कभी शीतल की गांड मारता रहा,,, तीनों मिलकर आनंद लूट रहे थे जिंदगी का असली सुख लूट रहे थे सुख की परिभाषा क्या होती है,,, इस समय तीनों से बेहतर भला कौन जान सकता था,,, शुभम एक साथ दो दो औरतों की गांड मार रहा था एक अपनी मां की और एक शीतल की दोनों के अंगों से खेलता हुआ शुभम अपने आपको किस्मत का धनी समझता था और किस्मत का धनी था भी वह,,,,,, तकरीबन आधा घंटा तक वह दोनों की लगातार गांड मारता रहा और दोनों आधे घंटे तक उसी स्थिति में अपनी दोनों टांग उठा ले और निर्मला अपनी गांड में उठाए उसी तरह से स्थिर खड़ी रही तभी तो जवानी का मजा बराबर मिल रहा था,,, तीनों झड़ चुके थे तीनों हांफ रहे थे,, निर्मला और शीतल थक चुकी थी लेकिन शुभम बिल्कुल भी नहीं थका था,,,,

करीब 15 मिनट के अंतराल के बाद सुभम फिर तैयार हो गया था,,, और एक बार फिर से बिस्तर पर तीनों का घमासान शुरू हो गया था,,, और यह सिलसिला सुबह के 4:00 बजे तक चलता रहा,,, तीनो बिना कपड़े पहने ही एक दूसरे की बाहों में सो गए,,,, सुबह 7:00 बजे डोर बेल की आवाज के साथ तीनों के लिए थोड़ी तो तीनों हक्के बक्के रह गए और तीनों जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहन कर बाहर आ गया शीतल दरवाजा खोली तो सामने नौकरानी खड़ी थी,,, नौकरानी को देखते हैं इसी पर जल्दी से नाश्ता तैयार करने के लिए बोली क्योंकी उन्हें एक घंटे में निकलना था,,,,

1 घंटे के बाद तीनों शिमला से निकलने के लिए तैयार हो गई तीनों गेट पर अपना अपना सामान लेकर खड़े थे शुभम सामान को कार की डिक्की में डाल रहा था,,, शांति को उन तीनों का जाना है अच्छा नहीं लग रहा था खास करके शुभम का,,, शुभम को शांति की आंखों में निराशा साफ नजर आ रही थी,,, उसकी आंखों में आंसू की बूंदे साफ दिखाई दे रही थी,,,लेकिन शुभम कर भी क्या सकता था वह चोरी से अपना नंबर कागज पर लिखकर उसके हाथ में थमा गया,,, निर्मला कार में बैठ चुकी थी लेकिन कुछ याद आ गया वह कार से बाहर निकल कर अपना पर्स खोल कर शांति के हाथ में ₹1000 थमा ने लगी,,, लेकिन शांति लेने से इंकार कर दी लेकिन शुभम के कहने पर वह पैसे ले ली,, शुभम फिर आने का दिलासा देकर कार में बैठ गया और निर्मला एक्सीलेटर देकर कार को आगे बढ़ा दी,,,
दूसरे दिन सुबह 4:00 बजे ही वह तीनों अपने शहर पहुंच गए,,,शीतल निर्मला के घर के सामने उतर कर अपने घर की तरफ बेग ले कर चली गई,,, शुभम और निर्मला दोनों काफी खुश हैं,,,शुभम डोर बेल बजाने ही जा रहा था कि निर्मला उसे रोकते हुए बोली,,,।

रहने रहने दे डोरबेल मत बजा तेरे पापा की नींद खराब हो जाएगी दूसरी चाबी है ना अपने पास,,,(इतना कहकर निर्मला अपने पर्स में से दूसरी चाबी निकालने लगी और चाबी निकालकर वह दरवाजा खोल दी,,,
आज आज 10 दिन बाद वह दोनों अपने घर लौट रहे थे इसलिए थोड़ा अजीब लग रहा था शिमला की हसी वादियो मैं और यहां फर्क तो था,,, शुभम दरवाजा बंद कर दिया अंदर डीम बल्ब जल रहा था,,,, निर्मला शुभम से बोली।

शुभम पहले यह बेग मेरे कमरे में पहुंचा दे फिर अपने कमरे में जाकर सो जाना,,,,,,

ठीक है मम्मी,,,,(इतना कहकर शुभम बैग उठा लिया निर्मला आगे आगे और वह पीछे पीछे जाने लगा देखते ही देखते निर्मला अपने कमरे के बाहर पहुंच गई दरवाजे हल्का सा खुला हुआ था,,, अंदर ट्यूबलाइट अभी भी जल रही थी,,,निर्मला को समझ में नहीं आ रहा था कितनी रात तक अभी तक ट्यूबलाइट क्यो जल रही है,,, तब उसे यही लगा होगा कि शायद अशोक की आंख लग गई होगी और व्हाट इज लाइट बंद करना भूल गया होगा,,,, यही सोचकर निर्मला हल्का खुला दरवाजे को धक्का देकर खोल दी और सामने बेहतर पर का नजारा देखकर एकदम से हैरान रह गई उसके नीचे से तो मानों जमीन ही खिसक गई हो,,, तब तक सुभम भी कमरे में दाखिल हो चुका था और वह भी बिस्तर का नजारा देखकर एकदम से चौक गया,,,,दोनों मां-बेटे पूरे कमरे में इधर उधर नजर दौड़ाई तो नीचे फर्श पर कहीं पेंटी तो कहीं ब्रा पड़ी थी,,, दोनों के कपड़े अस्त-व्यस्त नीचे फर्श पर गिरे हुए थे शुभम ध्यान से चेहरे की तरफ देखा तो एकदम चौक ते हुए बोला,,,

बुआ जी,,,,

निर्मला को तो जैसे सांप सूंघ गया हो वह एकदम हक्की बक्की खड़ी रह गई,,, अशोक अपनी ही बहन को अपनी बाहों में लेकर सोया हुआ था चादर दोनों की छातियों तक फैली हुई थी,,,, निर्मला एकदमगुस्से में थी वह चादर एकदम से नीचे की तरफ खींची और चादर हटते ही,,,दोनों एकदम नंगे एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर लेटे हुए नजर आए,,,

क्रमश[/color]
 
कमरे में पहुंचते ही निर्मला पूरी तरह से स्तब्ध हो चुकी थी उसे तो अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था वह बार-बार अपने आप को पूरी तरह से होश में होने का एहसास दिला रही थी,,,कर भी क्या सकती थी आंखों के सामने मंजर ही कुछ ऐसा पेश आ गया था कि,, उसकी जगह कोई और औरत होती तो शायद उसे भी अपनी आंखों पर भरोसा नहीं होता,,,, शुभम भी कमरे में आकर बिस्तर के गरमा गरम तेरे से को देखकर हैरान था उसे समझते देर नहीं लगी थी कि उन लोगों के शिमला जाते ही यहां घर पर क्या हो रहा था लेकिन वह खामोश था क्योंकि अब सब कुछ उसकी मां की आंखों के सामने था,,,
चादर के हटते ही दोनों का नंगा बदन नजर आने लगा अशोक अपनी ही छोटी बहन को अपनी बाहों में लेकर लेटा हुआ था और वह भी एकदम बेशर्म होकर अपने बड़े भाई की बाहों में सुकून और चैन की नींद सो रही थी,,, लेकिन जैसे ही चादर को निर्मला ने खींच ली वैसे ही दोनों की नींद खुल गई,,,, और दोनों अपनी सामने निर्मला और शुभम को खड़ा देखकर एकदम दंग रह गए उन दोनों को तो मानो जैसे सांप सूंघ गया हो दोनों के पैरों तले जमीन खिसक गई हो,,,, निर्मला अच्छी तरह से जानती थी कि दोनों को कुछ भी कहने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी बिस्तर पर दोनों का नंगा बदन और फर्श पर बिखरे हुए दोनों के कपड़े सब कुछ बयां कर रहे थे,,, फर्श पर पड़ी हुई ,,, ब्रा पेंटी और जींस टीशर्ट सब अपने आप ही बयां कर रहे थे की सोने से पहले इस कमरे में क्या हुआ होगा,,,,
अशोक और उसकी छोटी बहन दोनों अपने नंगे बदन को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे,,,, निर्मला की आंखों के सामने उसकी छोटी ननंद अपनी नंगी चूचियों को अपने हाथों से ढक कर अपने दोनों टांगों को सटा कर अपनी बुर को छुपाने की कोशिश कर रही थी,,, की तभी निर्मला बोली,,,।

अब छुपाने की कोई जरूरत नहीं है सब कुछ मेरी आंखों के सामने है,,, तो मेरी पीठ के पीछे यह सब चल रहा था यहां पर,,,,

निर्मला तुम तो कल आने वाली थी,,,,(अशोक अभी भी अपनी गलती को ना मानकर बल्की अपनी बेशर्मी दिखाते हुए बोला,,,)

काश मैं कल ही आई होती,,, तो यह सब अपनी आंखों से तो ना देख पाती,,, हे भगवान मैं मर क्यों नहीं गई यह सब देखने से पहले,,,

यह क्या कह रही हो निर्मला,,,,

तुम बिलकुल चुप रहो एक शब्द भी मत कहना,,,वरना जो कुछ भी यहां हुआ है ना हमें सब कुछ बाहर जाकर बता दूंगी कि एक बड़ा भाई कैसे अपनी छोटी बहन के साथ यह रासलीला रचता है,,,,(निर्मला एकदम गुस्से में बोली अशोक की छोटी बहन एकदम से घबरा गई थी,,,, वह तो तू बोल सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी,,, तभी निर्मला अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)
और तू कल मूई,,, इतनी बेशर्मी पर उतर आई कि अपने ही भाई के साथ चुदाई का खेल खेल रही है,,,,(निर्मला के शब्दों में अश्लीलता झलक रही थी,,,)

नहीं नहीं भाभी ऐसा बिल्कुल भी नहीं,, है,,,

अच्छा ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तो तु हम दोनों की गैरमौजूदगी में,,, यहां पर आकर नंगी होकर अपने भाई को राखी बांध रही थी,,,,
(निर्मला के एक-एक शब्द उसके ऊपर हथौड़े की तरह चल रहे थें,,,) हरामजादी शाली कुतीया कहीं बाहर मुंह मारी होती तो शायद मैं तुझे माफ भी कर देती,,, लेकिन तू मेरे ही घर पर डाका डाली है मेरे ही पति तो अपनी जवानी के जाल में फंसाकर उसके साथ गंदे गंदे काम कर रही है,,, तु यह भीभूल गई की ये तेरा बड़ा भाई है,,,,,(निर्मला की बातों में अब पहले की तरह सब पता बिल्कुल भी नहीं थी वह अपने पति के लिए भी तुच्छछ शब्दों का प्रयोग कर रही थी,,,)

नहीं नहीं भाभी इसमें मेरी कोई गलती नहीं है मैं मजबूर हूं,,,,

तू मजबूर है मुझे तो तू कहीं से मजबूर नहीं दिख रही है अपना घर बिगाड़ कर अब तू मेरा घर बिगड़ना चाहती है,,,

नहीं भाभी मेरा इरादा बिल्कुल भी ऐसा नहीं है बस मैं मजबूर हूं मेरी बात समझने की कोशिश क्यों नहीं करती,,,

निर्मला तुम इस बार हम दोनों को माफ कर दो आइंदा से ऐसी गलती कभी नहीं होगी,,,,

कभी नहीं होगी,,, ना जाने कितने वर्षों से तुम दोनों का ही है गंदा काम चलता रहा है अभी मैं सब समझ रही हूं किस लिए तुमने इसे अपने इस शहर बुलाए इसे नौकरी दिलाई इसकी मदद की,,, सिर्फ और सिर्फ अपनी हवस मिटाने के लिए,,, और वह भी अपनी ही छोटी बहन के साथ,,,, छी छी छी,,,, मुझे तो सोचकर ही घिन्न आ रही है,,, तुम दोनों की घिनौनी हरकत देखकर मेरा सर शर्म से एकदम झुक गया है,,,
(अपनी मां की यह बात सुन शुभम अपनी मां की तरफ आश्चर्य से देखने लगा,,, क्योंकि वह अपने पति को तो अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाने पर दुनिया भर का भाषण दे रही थी लेकिन इस समय शायद वह खुद भूल गई थी कि अपने ही बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाते आ रही है,,, और खुलकर मजा लेने के लिए ही शिमला गई थी,,, वह कभी अपनी मां को तो कभी अपने बाप को,,, देख रहा था,, और अपनी बुआ के नंगे बदन को देख कर उसके बदन में सुरुर छा रहा था,,, क्योंकि जिस तरह से वह घबराकर अपनी नंगे बदन को छुपाने की कोशिश कर रही थी,,, शुभम काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,, निर्मला अपनी छोटी ननद पर इल्जाम पर इल्जाम लगाए जा रही थी,,, और वह कुछ भी कहने के लायक नहीं थी क्योंकि उसके संबंध अपने भतीजे शुभम के साथ भी थे और शुभम भी कुछ भी नहीं कह रहा था शुभम तो बहुत खुश था जो सब कुछ उसकी मां की आंखों के सामने आ गया था क्योंकि शायद अब यह नजारा देखने के बाद घर में छुप छुप कर चुदाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी,,, क्योंकि जैसी करनी वैसी भरनी,,,, बाप जो अपनी छोटी बहन के साथ कर रहा था वही मां अपने बेटे के साथ कर रही थी हिसाब बिल्कुल बराबर था,,,। शुभम काफी उत्साहित नजर आ रहा था लेकिन अपनी उत्साह को छुपाए हुए था,,,

यह क्या कर दीए पापा आपने,,, अपनी ही बहन के साथ बुआजी को भी आपने नहीं छोड़ा,,,,

बुआ जी को भी मतलब,,,(निर्मला शुभम की तरफ देखते हुए एकदम आश्चर्य से बोली,,, यह सुनकर अशोक तो हक्का-बक्का रह गया,,, वह घबराहट से शुभम की तरफ देखा और शुभम अपने बाप की तरफ अपने बाप के चेहरे पर उड़ती हुई हवाई यों को देखकर वह समझ गया कि उसका बाप एकदम घबरा गया है इसलिए वह आगे कुछ भी कहना ठीक नहीं समझा और वैसे भी वह आंखों ही आंखों में अपनी बेटे को इशारा कर रहा था कि कुछ भी ना बताएं,, वरना और ज्यादा गजब हो जाएगा,,,)

बुआ जी को भी मतलब बुआ जी को,,,, और किसको,,,(शुभम बड़ी चालाकी से अपने बात के रुख को मोड़ते हुए बोला) बुआ जी आप अपने कपड़े पहन लीजिए,,,
(इतना सुनते ही वह तुरंत अपने नंगे बदन को छुपाते हुए बिस्तर पर से नीचे उतरी और झुक कर एक-एक करके फर्श पर बिखरे हुए अपने सारे कपड़ों को इकट्ठा करने लगी,,, अपनी पेंटी को उठाकर दीवार की तरफ मुंह करके उसे पहनने लगी,,, जांघो के बीच का अंग छुपाने की खातिर वह अपने गोलाकार नितंबों को दिखा रही थी वह काफी घबराई हुई थी,,,,उसकी गोलाकार नितंबों को देखकर शुभम की हालत खराब होने लगी हालांकि वह अपनी बुआ जी की जमकर चुदाई कर चुका था लेकिन काफी दिनों बाद वह अपनी बुआ को नंगी देख रहा था,,,इसलिए अपनी बुआ को देख कर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी कोई और वक्त होता तो शायद वह अब तक चुप नहीं रहता वह अपने बुआ की बुर में लंड डालकर अपनी गर्मी शांत कर लिया होता लेकिन अभी मामला कुछ और ही उलझा हुआ था इसलिए यह सब करना उचित नही था,,वह तिरछी नजरों से अपनी बुआ के नंगे बदन के दर्शन करके एकदम मस्त हुआ जा रहा था और निर्मला एकदम आग बबूला हो रही थी,,,यह तो अच्छी तरह से जानती थी कि उसका पति रंगीन मिजाज का था लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह दूसरी औरतों के साथ इस तरह का संबंध रखता है शंका तो उसे पहले से ही थी लेकिन आज जाकर उसे पूरी तरह से तसल्ली हुई थी कि उसके पति का नाजायज संबंध दूसरी औरतों के साथ भी है दूसरी औरतों के साथ क्या खुद की छोटी बहन के साथ है अपने पति को देखकर निर्मला की आंखों में शर्म उतार आ रही थी वह काफी शर्मिंदा थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि बिस्तर पर बैठा बैठा हुआ आदमी उसका पति है,,। निर्मला का गोरा चेहरा लाल टमाटर की तरह हो गया था और काफी गुस्से में थी और जोर-जोर से सांसे ले रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे सांस की बीमारी हो गई है कभी सपने में भी नहीं सोचा कि कुछ ना आंखों के सामने इस तरह का मंजर नजर आएगा,,,लेकिन शायद गुस्से में बात हुआ खुद भूल गई थी कि हर इंसान की अपनी अपनी जरूरत होती है जैसे कि वह खुद अपनी जरूरत पूरी करने के लिए अपने ही बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाकर पूरी तरह से संतुष्ट होती आ रही थी,,,यह बात भी अच्छी तरह से जानती थी कि बिस्तर पर उसके पति को गर्म औरत की जरूरत थी ना कि ठंडी और वह अपने पति के साथ एकदम ठंडी ही थी और इसी वजह से उसका पति दूसरी औरतों में दिलचस्पी रखने लगा था,,,वरना यह बात वो खुद भी जानती थी कि स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा से वह बिल्कुल भी कम नहीं थी,,।

सुबह के 4:30 बज रहे थे और कमरे का दृश्य बिल्कुल बदला हुआ सा था ,,, रात को संभोग के सुख से तृप्त होकर दोनों भाई बहन सोने से पहले यह सोचे भी नहीं होंगे की आंख खुलेगी तो उनकी जिंदगी में तूफान आ जाएगा,,, वह तो मस्त होकर एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर चैन की नींद सो रहे थे,,,

निर्मला की मेहनत अपने कपड़े पहन चुकी थी उसका नंगा बदन वस्त्र के अंदर ढक चुका था लेकिन अभी भी निर्मला का पति एकदम नंगा ही बिस्तर पर बैठा हुआ था शायद अब अपने आप को छुपाने के लिए उसके पास कुछ भी नहीं बचा था सब कुछ तो आंखों के सामने आ गया था छुपाए भी तो क्या छुपाए,,, लेकिन निर्मला के मन में कुछ और चल रहा था अपनी आगे की जिंदगी का रास्ता पूरी तरह से साफ कर लेना चाहती थी,,,वह अपने मन में यही सोचकर संतुष्टि की अच्छा ही हुआ कि आज उसे अपने पति को रंगे हाथ पकड़ने का मौका मिल गया और वह भी पकड़ी भी तो किसके साथ अपनी ही छोटी ननंद के साथ जो की निर्मला के लिए ही अच्छा था वैसे भी घर में चुदाई इससे बड़ा सुख और कोई नहीं होता है शायद यह बात निर्मला अच्छी तरह से समझ गई थी,,।लेकिन वह अपने क्रोध को किसी भी तरह से कम होने नहीं देना चाहती थी वह ऐसा ही जताना चाहती थी कि जो 3 से उसने अपनी आंखों से देखी है उससे वह काफी क्रोधित है और इस गलती को वह कभी माफ नहीं करेगी,,, इसलिए वह अपनी छोटी ननद की तरफ मुखातिब होते हुए गुस्से से बोली,,,

तुम मुझे सच सच बता कब से चल रहा है यह सब क्योंकि जिस तरह से तुम लोग नंगे एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर लेटे हुए थे यह अभी का नहीं है कि बहुत पहले से चल रहा है,,,

तुम ठीक कह रही हो भाभी,,,(वह शर्म से नीचे नजर झुकाए हुए बोली) यह सब अभी से नहीं बल्कि बहुत पहले से चल रहा है बहुत पहले से मतलब भैया और मेरी शादी से पहले से यह सब चल रहा है,,,

बाप रे जवानी के दिनों से ही तुम लोग जवानी का मजा लूट रहे हो,,,,अब इसमें गलती किसकी है यह तो मैं नहीं जानती लेकिन इससे तुम अपना और मेरा घर दोनों बर्बाद कर रही हो अपना तो कर ही चुकी है शायद अब मेरा भी घर बर्बाद हो जाएगा क्योंकि मैं अब यह घर में एक पल भी नहीं रुकने वाली अपने बेटे को लेकर चली जाऊंगी,,, क्योंकि तुम दोनों की गलती की वजह से मेरे बेटे ने आज तुम दोनों को इस हालत में देख लिया है,,। पता नहीं उसके दिल पर क्या गुजरेगी,,,
(अपनी भाभी की यह बात सुनकर अशोक की बहन मन में यही सोच रही थी कि है क्या सोचेगा इसे तो अच्छा लगा होगा क्योंकि वह खुद उसके साथ चुदाई करना चुकी थी इसलिए अपनी इस बात को बोलने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी वरना एक और राज सबके सामने खुल जाता इसलिए वह खामोश ही रही,,, अशोक अपना बचाव करते हुए बोला,,,)

शुभम तुम अपने कमरे में जाओ,,,,

शुभम कहीं नहीं जाएगा शुभम यही रहेगा जब वह सब कुछ अपनी आंखों से देख ही लिया है तो सब कुछ अपने कानों से सुन भी लेगा,,,,(इतना कहकर वह शुभम का हाथ पकड़ ली ताकि वह वहीं खड़े रहे,,,)

निर्मला शुभम के सामने यह सब,,,,

क्या,,,, क्या शुभम के सामने अब बचा ही क्या शुभम के सामने आने के लिए तुम दोनों की चुदाई,,, देखना बाकी रह गया है इसके लिए बाकी सब कुछ तो यह देख लिया है अब बचा ही क्या है,,,(निर्मला जानबूझकर अश्लील शब्दों का प्रयोग कर रही थी,,)

यह कैसी बातें कर रही हो निर्मला इतनी गंदी बातें करते तुम्हें शर्म नहीं आ रही है,,,

मादरचोद भोसड़ी वाले,,, मेरी जुबान खुलवाना चाहता है अपना खुद गंदी गंदी हरकत कर रहा है और वह भी अपनी बहन के साथ और मुझे बोल रहा है कि शर्म नहीं आती गंदी बातें करती हुए,,,(निर्मला का गुस्सा देखकर अशोक एकदम शांत हो गया उसकी ननंद भी एक दम शांत खड़ी थी.. निर्मला गुस्से से अपनी ननद की तरफ आगे बढ़ी पर उसके करीब जाते ही दो चार थप्पड़ उसके गाल पर लगा दी,,,)
हरामजादी छिनार मेरा घर बर्बाद करने आई है,,, देख लेती आंखों से तेरी वजह से मेरे घर में क्या कोहराम मचा हुआ है,,,।

मेरी गलती नहीं है इसमें भाभी सब भैया की गलती है,,,जो कुछ भी हो रहा है या होता हो रहा है यह सब मैं बिल्कुल भी नहीं चाहती थी,,,(वह रोते हुए बोले जा रही थी,,) मैं एक लड़के से प्यार करती थी और यह बात भैया को पता चल गई थी और मुझे ब्लैकमेल करते हुए उन्होंने मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाया मेरे बार-बार मना करने पर भी भैया अपनी मनमानी करते रहे,,,,यहां तक कि अपने मर्जी से शादी करके जब मैं अपने ससुराल गई तो वहां पर पति ने मुझे धोखा दिया और मेरा उसमें कोई भी नहीं था ना घर वाले ना बाहर वाले तमे भैया को फोन करें और भैया मुझे यहां आने के लिए बोले लेकिन मुझे क्या मालूम था कि यहां बुलाने में भी इनका अपना ही मकसद है,, मुझे सहारा देने के बहाने मुझसे फिर से शारीरिक संबंध बनाने लगे,,, मैं मजबूर थी कहां जाती बेसहारा थी,,, मजबूरन मुझे वह सब कुछ करना पड़ा जो भैया मुझसे कहते थे और तुम लोगों के सिमला जाकर ही मुझे फोन करके यहां बुला लिया और तब से लेकर अब तक,,,,(इतना कहकर वह रोने लगी)

हरामजादे इसका मतलब है कि यह सब मेरी ही गलती है तूने अपनी हवस मिटाने के लिए अपनी बहन को भी नहीं छोड़ा,,,तभी तो मुझे बार-बार बिस्तर में ठंडी होने का ताना मारता था क्योंकि मैं कुछ कर नहीं पाती थी,,, तुझे गर्म औरत चाहिए ना बिस्तर पर,,, मैं तुझे बताती हूं कि गर्म औरत कैसी होती है,,, हरामजादे,,,,

और तू अब जब भी तुझे मदद की जरूरत हो तो मुझसे कहना अगर मैं जान गई कि तूने फिर से इसकी मदद मांगी है तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा और तो यहां से जा सकती है,,, निकल जा मेरे घर से दोबारा कभी यहां शक्ल मत दिखाना,,,,
(निर्मला की बात सुनते ही वह तुरंत घर से बाहर निकल गई कमरे में केवल शुभम निर्मला और उसका पति अशोक ही बचा था,,, निर्मला का गुस्सा देखकर अशोक की हालत खराब हो चुकी थी वह पूरी तरह से सदमे में था,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह इस तरह से रंगे हाथ पकड़े जाएगा उसे तो उम्मीद ही नहीं थी कि यह लोग आज पहुंच जाएंगे उसे तो यही लग रहा था कि कल पहुंचेंगे इसीलिए वह आज की रात अपनी बहन के साथ जमकर चुदाई का आनंद लूट कर सो रहा था,,, लेकिन सब कुछ खत्म हो चुका था जिस राज को छुपाना चाहता था वह अपने आप नहीं उसकी पत्नी की आंखों के सामने आ चुका था,,, निर्मला काफी गुस्से में थी और शुभम काफी उत्साहित और प्रसन्न था,,, क्योंकि ना जाने क्यों उसे लगने लगा था कि आज उन तीनों की जिंदगी नया मोड़ लेगी,, निर्मला गुस्से में थी वह दरवाजा बंद कर दी,,, अशोक अभी भी पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर बिस्तर पर बैठा हुआ था बिल्कुल लाचार सहमा हुआ लग रहा था,,, निर्मला गुस्से में बडबडाए जा रही थी,,, उसे शांत करने के लिए शुभम बोला,,)

जाने दो ना मम्मी जो हो गया सो हो गया अब गुस्सा करने से कोई फायदा नहीं है माफ कर दो पापा को,,,,(शुभम अपने लाचार बाप को देखते हुए बोला,,,)

नहीं इस हरामजादे को गर्म औरत चाहिए बिस्तर पर मेरी जैसी ठंडी औरत नहीं,,,साले कुत्ते आज मैं दिखाती हूं कि मेरे अंदर कितनी गर्मी है मेरी गर्मी देखेगा तो तेरा पूरा वजूद पिघल जाएगा हरामजादे रुक मैं तुझे दिखाती हूं,,, अपनी ही बहन के साथ वासना का खेल खेला ना तूने रुक मैं तुझे बताती हूं,,, हरामजादे,,,,

(अशोक और शुभम दोनों समझ नहीं पा रहे थे कि वह क्या करेगी अशोक सहमा हुआ सा बिस्तर पर बैठा हुआ था अगर वह कुछ कहने की कोशिश करता तो उसे बदनाम करने की धमकी देकर उसे शांत करा दे रही थी निर्मला के मन में कुछ और चल रहा था और वह अपने मन में चल रहे युक्ति को आकार देना चाहती थी जिसके लिए वह पूरी तैयारी कर चुकी थी अपने आप को तैयार कर चुकी थी,, लेकिन यह बात ना तो अशोक समझ पा रहा था ना शुभम कहीं पल्ले पड़ रहा था,,, दोनों बस आश्चर्य से निर्मला की तरफ देखे जा रहे थे जो कि काफी गुस्से में थी,,)
 
घर का माहौल इस कदर बिगड़ जाएगा यह अशोक ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था और ना ही निर्मला ने,,, अपने मन में यही सोच रही थी कि अच्छा ही हुआ कि टाइम से पहले वह घर पहुंच गई वरना यह खिचड़ी युं ही पकती रहती,, हालात पर अशोक का काबु बिल्कुल भी नहीं था,
निर्मला का गुस्सा देखकर अशोक की हिम्मत भी नहीं हो रही थी कि वह बीच में कुछ बोल सके उसे अपने कपड़े पहनने तक की हिम्मत नहीं थी कि बिस्तर से नीचे उतर करो अपने कपड़े पहनकर अपने नंगे बदन को ढक सके,,, बेहद शर्मिंदगी से भर देने वाला यह पल अशोक के लिए बहुत भयानक था क्योंकि वह अपनी बीवी और अपने बेटे के सामने बिल्कुल नंगा बिस्तर पर बैठा हुआ था,,,,।
शुभम चाहता तो अपने बाप की पहले की भी करतूत बता कर आग में घी डालने का काम कर सकता था लेकिन वह अपने बाप के करतूत पर पर्दा डाल दिया था शायद यह पर्दा डालना उसके ही पक्ष में आता,,,

मम्मी जाने दो ना जो हुआ सो हुआ,,,, माफ कर दो पापा को,,,,

तुझे क्या लगता है शुभम मैं तेरे पापा को ऐसे ही माफ कर दूंगी मैं इसे बिल्कुल भी बात नहीं करूंगी इसलिए मुझे बहुत पेचिश किया है मुझे ठंडी औरत कहकर कर ना जाने कितना ताना मारा है मैं अपनी जिंदगी कैसे गुजार रही हूं यह सिर्फ मैं जानती हूं तेरा बाप नहीं तेरा बाप तो दूसरी औरतों के साथ रंगरेलियां मनाता हैं अपनी हवस मिटाता,, अपनी गर्मी शांत करता है मेरे बारे में इसने आज तक कभी नहीं सोचा लेकिन अब इसे में सोचने के काबिल भी नहीं छोडूंगी,,,

(अशोक और से बंद होना हैरान थे पहली बार वह निर्मला का इस तरह का रूप देख रहे थे वह काफी गुस्से में थी उसकी आंखों से अंगारे बरस रहे थे गोरे गाल लाल टमाटर की तरह हो गए थे शुभम ज्यादा कुछ बोल सकने की हिम्मत नहीं रख पा रहा था,,, और अशोक की तो जैसे घिघ्घी बंध गई थी,,,,, डर के मारे उसका गला सूख रहा था,,, अशोक की बहन चली गई थी,,, लेकिन अपने पीछे
इस परिवार के लिए बवंडर छोड़ गई थी जो कि इस परिवार को पूरी तरह से तबाह कर सकता था लेकिन निर्मला के मन में इन मौके पर कुछ और चलने लगा था,,,, वह अशोक को एकदम क्रोधित निगाहों से देख रही थी और अशोक था कि उसे नजरें मिलाने में कतरा रहा था घबरा रहा था वह अपनी नजरों को नीचे झुका है लाचार इंसान की तरह बिस्तर पर बैठा रहा और शुभम कभी अपने बाप की तरफ तो कभी अपनी मां की तरफ देख रहा था,,, शुभम अच्छी तरह से समझ गया था कि अपने पापा के लिए बीच-बचाव करने का मतलब था कि खुद मुसीबत मोल लेना इसलिए वह मुक साक्षी बनकर बस देखता रहा,,,,,निर्मला मारे क्रोध के अपने पति को गाली दिए जा रही थी जिंदगी में पहली बार हुआ इस तरह की गालियां भी दे रही थी हालांकि वह शुभम के साथ संभोग रत हो कर उत्तेजना में गंदी गंदी गालियां और भाषाओं का प्रयोग करती थी लेकिन इस तरह से खुले में अपने पति को कभी भी गंदे शब्द नहीं बोली थी लेकिन आज का दिन कुछ और ही था निर्मला अपने आप को पूरी तरह से बदल डाली थी,,,निर्मला का यह रूप देखकर किसी को यकीन ही नहीं होगा कि यह औरत स्कूल में शिक्षिका है बच्चों को अच्छी अच्छी बातें सिखाती है,,,, लेकिन हालात के आगे सब मजबूर होते हैं पल में क्या बदल जाएगी खुद इंसान नहीं समझ सकता और यही निर्मला के साथ हो रहा था यहां आने से पहले उसे उम्मीद भी नहीं थी कि उसकी जिंदगी एक अलग मोड़ लेने वाली है,,, लेकिन शायद यही मोड़ से मंजिल तक पहुंचाने वाली भी थी,,, )

मैं कभी सपने में भी नहीं सोच इतनी क्यों तुझे इस हालत में देखूंगी और वह भी अपनी बहन के साथ मुझे सब समझ में आ रहा है जो तू अपनी बहन की इतनी तरफदारी करता था किस लिए करता था मुझे लगता था छोटी बहन है शायद लाड प्यार आता है उसके ऊपर मुझे क्या मालूम था कि उसे देखकर तेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,, वह भी छिनार जिन हाथों से जिन कलाई में राखी बांधना चाहिए उसी हाथ से कलाई की जगह लंड पकड़ कर हीलाती है,,,,(अशोक कुछ भी बोल नहीं रहा था बस सुने जा रहा था,,, शुभम स्तब्ध था हैरान था पहली बार अपनी मां का इस तरह का रूप देख रहा था और इस तरह की अश्लील शब्द उसके मुंह से सुन रहा था,,,, पहले भी सुन चुका था लेकिन मस्ती के आलम में यह शब्द उसे मधुर मिठास से भरे हुए लगते थे लेकिन आज की बात कुछ और थी,,,) साले मादरचोद जिन हाथों से अपनी बहन को गोद में लेकर खिलाया उन्हीं हाथों से उसके नंगे बदन छूने ने तुझे शर्म नहीं आई,,, हरामखोर,,,,
(ना तो शुभम और ना ही अशोक समझ पा रहे थे कि निर्मला इस तरह के शब्दों का प्रयोग क्यों कर रही है क्यों इतना क्रोध दिखा रही है,,, अशोक का तो खैर छोड़ो लेकिन शुभम कुछ ज्यादा ही हैरान था जिस रिश्ते की दुआ ही वह अपने पति को दे रही थी वही वह खुद मां बेटे के रिश्ते की सारी मर्यादा को भूल कर अपने ही बेटे के साथ बरसों से संभोग सुख का आनंद लेते आ रही है,,,, यह बातें दोनों के समझ के बाहर थी लेकिन निर्मला एक सोची समझी साजिश के तहत अपनी एक-एक बात को अशोक के सामने रख रही थी,,,)

तू बड़ा गरम मर्द है ना और तुझे बिस्तर में गर्म औरत चाहिए ठंडी नहीं खास करके मेरी जैसी ठंडी नहीं मैं खूबसूरत हूं मेरा बदन खूबसूरत है तेरी बहन मेरी अभी कुछ भी नहीं लेकिन फिर भी तू अपनी बहन की जवानी का रस पी रहा है और मुझे बिस्तर पर तड़पता हुआ छोड़ देता है,,, तेरे लिए हालात कुछ बदले ना बदले लेकिन तेरी जरूरत के लिए बुर बदल देता है,,, पहले मेरी बुर फिर अपनी खुद की बहन की बुर और इस दौरान ना जाने कितनी बुर के साथ तो अपनी हवस मिटाया होगा,,,,(अपनी मां की इस तरह की अश्लील बेहद अश्लील बातें सुनकर शुभम का दिमाग झनझना जा रहा था उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह शब्द जिसके कानों में पढ़ रहे हैं उसकी मां के द्वारा कहे गए हैं वह उत्तेजित हुआ जा रहा था उसके जींस में तंबू बनना शुरू हो गया था,,, जिस पर शायद निर्मला की भी नजर पड़ जा रही थी,,,)
मैं ठंडी औरत हु ना बिस्तर पर तुझे मजा नहीं देती,,,,मुझे कुछ नहीं होता मर्दों को कैसे खुश किया जाता है यह मुझे बिल्कुल भी नहीं आता तभी तु,,, अपनी गर्मी शांत करने के लिए अपनी छोटी बहन को इधर लाता है,,,, उसे सब कुछ आता है वह बिस्तर पर बहुत गरम है,,, और मैं ठंडी हूं कोई भी मर्द मुझसे खुश नहीं होगा मुझे तो मर्दों को खुश करने नहीं आता ना मै ठंडी हूं,,,, मुझे कोई मर्द प्यार नहीं करेगा,,, यही ना हरामजादे,,,(निर्मला अपने पति को उंगली दिखा दिखाकर उसे जैसे धमकाते हुए सब कुछ बोल रहे थे और वह डर के मारे बस नजरों को नीचे किए हुए बिस्तर पर बैठा था,,) कुत्ते कमीने मादरचोद,,, मुझे देखकर किसी का लंड नहीं खडा होगा ना,, कोई भी मर्द मुझे सी ठंडी औरत को चोदना नहीं चाहेगा यही सोचता है ना तु,,, कुत्ते तुम्हें तुझे दिखाती हूं कि मैं कितनी गर्म हूं,,, पल भर में किसी का लंड खड़ा कर सकती हूं,,,, देखना चाहेगा हरामजादे,,,,
(शुभम और अशोक दोनों हैरान थे शुभम तो समझ नहीं पा रहा था कि उसकी मां क्या करने वाले हैं और शायद यह बात अशोक के भी पल्ले नहीं पड़ रही थी,,,)
देखेगा मादरचोद बिस्तर पर मेरी गरमी देखेगा,,, मैं गर्म हो गई ना तो तेरे में मुझे ठंडा करने की ताकत भी नहीं है साला 2 मिनट में पानी छोड़ देता है ऊपर से मुझे ठंडी कहता है,,,
देखेगा मादरचोद मेरी गर्मी,,,,तू ऐसे नहीं मानेगा अभी दिखाती हूं तुझे मैं अपनी गर्मी,,,,
(इतना कहने के साथ ही निर्मला अपने पति की आंखों के सामने ही अपने बेटे का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींची और तुरंत उसे अपनी बाहों में लेकर अपने प्यार से लाल-लाल होठों को अपने बेटे के होठों पर रखकर चूसना शुरु कर दी,,,,शुभम हैरान था इस तंत्र था अपनी मां की इस हरकत को वह समझ पाता इससे पहले ही निर्मला अपने बेटे पर पूरी तरह से काबू पा चुकी थी,,, अशोक की आंखें फटी की फटी रह गई,,,,वह मूकदर्शक बना हुआ बिस्तर पर से अपनी पत्नी की कामलीला को देखता रहा,,,, निर्मला पागलों की तरह उत्तेजित अवस्था में अपने बेटे के होंठों को चूस रही थी उसे कसके अपनी बाहों में भरी हुई थी,,,, अपने बाप के सामने शुभम शर्मिंदा हुए जा रहा था हालांकि वह भी काफी गर्म हो चुका था लेकिन फिर भी वह अपने बाप के सामने इस स्थिति में अपने आप को लाना नहीं चाहता था वह अपनी मां को हटाने की कोशिश कर रहा था लेकिन निर्मला कसके उसे अपनी बांहों में जकड़े हुए थी,,,)

क्या कर रही हो मम्मी छोड़ो मुझे यह अच्छी बात नहीं है मुझे छोड़ो,,,,
(लेकिन शुभम की बातों का असर निर्मला पल बिल्कुल भी नहीं हो रहा था वह लगातार उसके होठों का रस अपने मुंह में भर कर चूसे जा रही थी,, निर्मला पर काम वासना पूरी तरह से छा चुका था उसे अब बिल्कुल भी शर्म नहीं थी अपने पति के सामने वह सारी मर्यादा की दूरी को तोड़ देना चाहती थी अपने संस्कार के बंधनों को तोड़कर वह हवा में खुली सांस लेना चाहती थी,,,, हालांकि ऐसा वह पहले ही कर चुकी थी लेकिन आज वह अपने पति की नजरों में अपने आप को एक गर्म औरत साबीत करना चाहती थी,,, वह दिखा देना चाहती थी कि उसकी गर्मी को उसका पति खुद शांत नहीं कर सकता,,, तो किस बीसात पर वह उसे ठंडी औरत कहता हैं,,,शुभम लगातार अपनी मां को अपने से दूर करने की कोशिश कर रहा था लेकिन शायद अब यह उसके बस में नहीं था उसकी मां पूरी तरह से उसकी कमर को अपनी दोनों मजबूत हाथों से पकड़कर अपने बदन से सटाए हुए थी,,,, शुभम अपनी मां को इतना कामातुर देखकर खुद काम भावना से ग्रस्त होने लगा,,, पेंट में उसका लंड धीरे-धीरे खडा होना शुरू हो गया,, जो किसी ने साड़ी के ऊपर से ही है निर्मला के मुख्य द्वार पर दस्तक देने लगा था,,,, जिससे निर्मला के तन बदन में और ज्यादा उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,।लेकिन अभी शुभम की तरफ से कोई सहकार उसे नहीं मिल रहा था क्योंकि वह अपने बाप के सामने शर्म आ रहा था अपनी औरत की इस तरह की हरकत देखकर और वह भी अपने ही बेटे के साथ उससे रहा नहीं गया और अशोक बोला,,,।

यह क्या कर रही हो निर्मला दो शर्मा हो गई हो क्या अपने ही बेटे के साथ ही क्या कर रही हो छोड़ो उसे,,,,
(इतना सुनकर शुभम तो शर्म से पानी पानी हो गया लेकिन निर्मला लगातार अपने बेटे के होठों को चुस्ती रही और अपना एक हाथ अशोक की तरफ बढ़ाकर चुटकी बजाते हुए उसे बिस्तर पर ही बैठे रहने के लिए इशारे में बोली,,, जिस तरह से निर्मला चुटकी बजाते हुए उसे बिस्तर पर ही बैठे रहने का इशारा की अशोक उसकी इस अदा से समझ गया था कि वह कितनी गुस्से में है,,,, निर्मला को अपने पति की आंखों के सामने ही अपने बेटे के साथ इस क्रिया को करते हुए बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी मजा तो शुभम को भी आ रहा था, लेकिन वह अपने बाप से शर्म आ रहा था वरना अब तक जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव कर रहा था अपनी मां को लिटा कर उसके ऊपर चढ़ गया होता,, फिर भी वह धीरे धीरे अपनी मां की मदहोश जवानी के नशे में मदहोश होता जा रहा था,,, निर्मला पागल हुए जा रही थी उत्तेजना ने उसे पूरी तरह से अपने काबू में ले लिया था,,, वह मदहोश होते हुए अपने बेटे के संपूर्ण बदन पर अपना हाथ घुमा रही थी एक हाथ आगे की तरफ लाकर पेंट में खड़े उसके लंड को पकड़ कर जोर जोर से ऊपर से मसल रही थी और यह नजारा उसका पति अपनी आंखों से देख रहा था उसे भी शर्म आ रही थी कि उसकी पत्नी उसकी आंखों के सामने यह अपने बेटे के साथ यह कौन सा खेल खेल रही है लेकिन वह कुछ भी बोल सकने के काबिल नहीं था,,, शुभम को मजा आ रहा था रह ररकर वह भी अपनी मां के लाल होठों को चूसने लग जा रहा था,,, लेकिन अपने बाप से शर्मा भी रहा था,,,।
अशोक हैरान था क्योंकि उसकी आंखें जो देख रही थी शायद वो सपने में भी नहीं सोचा था कि उसेइस तरह का मंजर अपनी आंखों के सामने देखना पड़ेगा निर्मला अपने बेटे के होठों को चूसते हुए अपने दोनों हाथ नीचे की तरफ लाकर उसके पेंट की बटन खोल रही थी,,, और देखते ही देखते जल्दबाजी में हुआ उसकी पेंट को नीचे की तरफ कर दी अंडर वियर में खड़ा लंड पूरी तरह से तंबू बनाए हुए था,,, और अंडरवियर में बने तंबू को देखकर अशोक हैरान था क्योंकि इस तरह का तंबू उसने कभी भी अपने पेंट में बनता हुआ नहीं देखा था शायद उससे आधा भी नहीं बन पाता था,,,, क्योंकि अशोक कैलेंडर में इतनी ताकत नहीं थी कि वह खड़ा होकर उसके पेंट को आगे की तरफ तानकर तंबू की शक्ल दे सके,,,,अशोक को तो अपनी आंखों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों के सामने जो कुछ भी हो रहा है वह हकीकत है उसे ऐसा लग रहा था कि यह सपना ही है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कब तक अशोक अपने आप को धोखा दे पाता उसकी आंखों के सामने जो कुछ भी हो रहा था वह हकीकत ही था बहुत जल्द अशोक यह समझ गया,,,, निर्मला होंठ चुसाई का मजा लूटते हुए अंडरवियर के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को जोर-जोर से पकड़ कर मसल रही थी,,, पर वह इतनी जोर से मसल रही थी कि शुभम के मुंह से कराहने की आवाज निकल जा रही थी,,,, जो कुछ भी निर्मला ने कही थी वह अशोक को सच होता नजर आ रहा था कुछ देर पहले ही वह अपने मुंह से बोली थी कि वह किसी का भी लंड खड़ा कर सकती है,,, और नतीजा उसकी आंखों के सामने था वह खुद के ही बेटे के लंड को खड़ा कर दी थी,, लेकिन अशोक यह सब देखकर हैरान था खास करके अपने बेटे के खड़े होते हुए लंड को देखकर क्योंकि यह बात वह अच्छी तरह से जानता था कि मर्द का लंड कब खड़ा होता है जब उसके अंदर किसी औरत को चोदने की भावना या आकर्षण के साथ उत्तेजना का अनुभव होता है तब जाकर मर्द का लंड खड़ा होता है और यहां तो उसके बेटे के सामने उसकी मां थी मतलब उसकी मां की हरकत को देखकर शुभम का लंड खड़ा हो गया था जो कि उसके मन में भी अपनी मां को चोदने की भावना जागृत हो गई होगी,,,, यही बात अशोक को हैरान कर रही थी,,,, निर्मला तो चलो गुस्से में यह सब कर रही थी लेकिन उसका बेटा तो होश में था उसके अंदर यह भावना क्यों जाग रही थी इस बात को वह समझ नहीं पा रहा था,,,, इसीलिए वह फिर से निर्मला को रोकते हुए बोला,,,,।

निर्मला यह क्या कर रही हो तुम अनर्थ कर रही हो ऐसा मत करो प्लीज मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं,,,, शुभम तू अपने कमरे में चले जा,,,,
(इतना सुनते ही निर्मला एकदम आग बबूला होते हैं बोली,,)

अशोक मादरचोद अपनी इज्जत सही सलामत चाहता है तो शांति से बिस्तर पर बैठ कर ये तमाशा देख वरना सारे समाज में तुझे बेइज्जत कर दूंगी और अपना बिजनेस भी करने के लायक तु नहीं रह जाएगा,,, और तू यहां से जाने के बारे में सोचना भी नहीं,,,(इतना कहने के साथ ही वह फिर से अपने बेटे के होठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी,,,अपने दोनों हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अंडर वियर के ऊपर से ही उसके लंड से खेलने लगी,,,,अशोक भी आखिर कब तक अपने आप पर काबू कर पाता शर्म तो उसे आ ही रही थी लेकिन उसकी आंखों के सामने उसकी बीवी के द्वारा अपने ही बेटे के साथ गरमा-गरम दृश्य जो चल रहा था काम भावना अशोक के अंदर भी जागने लगी थी,,, लेकिन देखने के सिवा और कुछ कर नहीं सकता था,,,। निर्मला मन ही मन बहुत खुश हो रही थी भगवान का धन्यवाद दे रही थी कि ठीक समय पर उसे घर पर भेज दिया था आज वह वर्षों से चले आ रहे अपने ही बेटे के साथ अपनी कामलीला को पूरी तरह से अपने पति के द्वारा स्वीकृति का प्रमाण पत्र दिला देना चाहती थी,,, जो कि एक तरह का लाइसेंस ही था,,,, इस बात से इंकार भी नहीं कर रही थी कि आज अपने पति के सामने ही अपने बेटे के साथ इस तरह की हरकत करते हुए उसे कुछ ज्यादा ही अत्यधिक उत्तेजना कार्गो हो रहा था उसके तन बदन में वासना चीटियां बनकर रेंग रही थी,,, जवानी कुछ ज्यादा ही हीलोरे मार रही थी,,,शुभम की भी इच्छा हो रही थी कि वह अपने हाथ को अपनी मां के संपूर्ण बदन पर इधर-उधर घूमाए खास करके उसके नितंबों को अपनी हथेली में भरकर दबाए लेकिन अपने बाप की शरम उसे ऐसा करने से रोक रही थी,,। निर्मला तो बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए अपने बेटे के साथ रंगरेलियां मनाने के मूड में आ चुकी थी और वह भी अपने पति की आंखों के सामने ही और ऐसा करने में उसे काफी उत्तेजना का अनुभव भी हो रहा था,,वह लगातार अपने बेटे के होठों को चूसते हुए वह अपने हाथ से शुभम के अंडरवियर में तना हुआ उसके लंड से खेल रही थी,,,, शुभम की हालत खराब हो रही थी ,,।
पल-पल शुभम उत्तेजना से भरता चला जा रहा था,,, अशोक के पास देखने के सिवा और कुछ नहीं था,,, निर्मला को इस कदर उत्तेजित होता हुआ वह पहली बार देख रहा था,,निर्मला अपने पति को और ज्यादा जलाने के लिए वह अपने बेटे के होंठों को चूमते हुए तिरछी नजर करके उसकी तरफ देख ले रही थी और जब भी अशोक की नजर निर्मला से टकराती तो शर्म के मारे वह अपनी नजरें नीचे झुका ले रहा था,,,, ऐसा करने में निर्मला को बहुत आनंद मिल रहा था,,,
निर्मला अपने मन में सोच रही थी कि आप अपना असली रूप दिखाने का समय आ गया था इसलिए वह शुभम को धीरे धीरे बिस्तर की तरफ ले जा रही थी,,, और जैसे ही वह बिस्तर के करीब पहुंची निर्मला शुभम को धक्का देकर बिस्तर पर पीठ के बल गिरा दी,,,, धम्म की आवाज के साथ शुभम बिस्तर पर चारों खाने चित हो गया,,,, किंग साइज बेड पर एक कोने पर अशोक नंगा बैठा हुआ था उसके एकदम करीब शुभम बिस्तर पर गिरा था,,, शुभम के दोनों पैर बिस्तर के नीचे झूल रहे थे,,, निर्मला अशोक की तरफ देखते हुए अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी हालांकि अभी भी वह गहरी गहरी सांसे लेते हुए अपने क्रोध का असर अशोक को दिखा रही थी,,,,जब वह ब्लाउज के बटन खोल रही थी तब अशोक उसकी तरफ देख कर एक बार फिर से उसे रोकने की कोशिश करते हुए बोला,,।

यह क्या कर रही हो निर्मला मेरी गलती की सजा तुम खुद अपने आप को ही दे रही हो,,, अपने बेटे के साथ यह क्या कर रही हो,,,

तू चुप रे मादरचोद रिश्तो की दुआरी मुझे मत दे रिश्तो को तार-तार तू करता आ रहा है मैं नहीं मैं तो तुझे बस यह दिखाना चाहती हो कि मैं ठंडी नहीं हूं गर्म औरत हूं,,,बस अपने संस्कार और मर्यादा के बंधन में बंधे हुए हु लेकिन आज यह बंधन खोल रही हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही निर्मल अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और पल भर में ही अपना ब्लाउज निकाल कर नीचे फर्श पर फेंक दे,, काली रंग की ब्रा में उसके दोनों खरबूजे जानलेवा हथियार नजर आ रहे थे,,, अशोक के तन बदन में भी आग लग रही थी बार-बार वह अपने बेटे की अंडरवियर में बने हुए तंबू की लंबाई को देख ले रहा था जो कि बेहद आकर्षक लग रहा था,,,अपने पति की आंखों के सामने ही निर्मला अपने बदन से साड़ी खोलने लगी और देखते ही देखते हैं उसके बदन से साड़ी भी अलग हो गई और नीचे फर्श पर गिर गई अब केवल वहां पेटीकोट और ब्रा में थी,,,,)
मादरचोद अशोक भोसड़ी वाले मैं अभी तक अपने मां-बाप के शिकार हुए संस्कार और मर्यादा के रास्ते पर चल रही थी लेकिन तूने मुझे रास्ता बदलने के लिए मजबूर कर दिया है,,, देखना आज मैं तुझे अपनी गर्मी दिखाती हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही निर्मला अपने पेटिकोट को घुटनो तक उठाकर अपने दोनों हाथ अंदर की तरफ डालकर अपनी काली रंग की पेंटी भी निकाल कर फर्श पर फेंक दी... अब वह पेटीकोट के अंदर बिल्कुल नंगी थी,,, लेकिन अभी भी उसके बदन पर पेटीकोट थी... देखते ही देखते निर्मला अपने बेटे के जींस को दोनों हाथों से खींचकर निकालने लगी शुभम को बहुत मजा आ रहा था उत्तेजना की पराकाष्ठा तक पहुंचने पर कैसा है ऐसा होता है यह उसी पल भर में ही पता चल गया था देखते ही देखते निर्मला अपने बेटे की जींस को निकाल कर नीचे फेंक दी,,,कुछ देर पहले का दृश्य एक बार फिर से सामने आ गया थोड़ी देर पहले ही फर्श पर निर्मला की ननद की ब्रा और पेंटी पड़ी हुई थी अशोक के कपड़े पड़े हुए थे और अब निर्मला की खुद की पेंटिं और ब्लाउज साड़ी के साथ-साथ शुभम का जींस भी नीचे बिखरा पड़ा था,,,,)

गर्मी देखेगा ना मादरर्चोद गर्म औरत तुझे पसंद है ना बिस्तर में,,,, मैं दिखाती हूं कि मैं कितनी गर्म हूं,,,(इतना कहने के साथ ही वह घुटनों के बल बिस्तर पर आगे बढ़ी और दोनों हाथों से शुभम की अंडर वियर पकड़ कर उतारने ही वाली थी किसी को अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे रोकते हुए बोला)

यह क्या कर रही हो मम्मी यह गलत है,,,

चुप बे मादरचोद भोसड़ी वाले तू भी अपने बाप की तरह है क्या,,, मैं आज तुझे मादरचोद बनाऊंगी,,, मादरचोद समझा,,,,(इतना कहने के साथ ही निर्मला अपने बेटे के अंडरवियर को एक झटके में ही खींच कर बाहर निकाल दी,, और जैसे ही शुभम के तन से अंडरवियर अलग हुई उस का टनटनाता हुआ लंड ऊपर की तरफ मुंह करके हवा में झूलने लगा,,, अशोक तो एकदम आश्चर्य से अपने बेटे के लंड को देखने लगा वाकई में शुभम का कुछ ज्यादा ही मोटा और काफी लंबा था,,, उसके सामने उसका खुद का लंड बच्चे के लंड की तरह लग रहा था,,,,, अशोक की आंखें फटी की फटी रह गई थी अपने बेटे के लंड को देखकर,, और निर्मला अपने पति को दिखाते हुए अपनी बेटे के लंड को जड़ से पकड़ कर जोर जोर से हिलाते हुए बोली,,)

देखा मादरचोद इसको बोलते हैं लंड,,, देख तेरा इससे आधा भी नहीं है तु बुझाएगा मेरी प्यास,,, मादरचोद तू मेरी प्यास बुझाता नहीं था बल्कि और ज्यादा भडका देता था,,,और तु जिसको भी चोदता है ना वह तुझ से संतुष्ट नहीं होती बस मजबूरी में तेरे साथ सोती है,,,,(अशोक को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह फटी आंखों से अपनी बेटे के लंड को देख रहा था जो कि ईस समय उसकी पत्नी के हाथ में झुल रहा था,,,,, निर्मला को अपने बेटे का लंड अपने पति को दिखाने में आनंद की अनुभूति हो रही थी,,, वास्तव में जब एक पत्नी अपने पति की आंखों के सामने अपने बेटे के लंड की तारीफ करो तो एक बाप की क्या मनोस्थिति होती है वह अशोक से बेहतर भला कौन जान सकता था,,,,)
देख लिया शोक इसको कहते हैं एक मर्द का दमदार लंड अब देखना यह कैसे मेरी बुर के अंदर जाता हैं,,,,
(निर्मला की यह बात सुनकर अशोक के तन बदन में आग लग गई उत्तेजना से नहीं बल्कि गुस्से में लेकिन वह कुछ कर सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था वह आज निर्मला के सामने घुटने टेक दिया था लेकिन निर्मला की यह बात सुनकर शुभम का जोश दोगुना हो गया आज वह अपने आप को सातवें आसमान में उड़ता हुआ महसूस कर रहा था,,,, क्योंकि यह बात अच्छी तरह से जानता था कि आज की चुदाई उसके बाप के लिए एक सबक होगीवह अपने बाप के सामने अपनी मां की चुदाई करते हुए किसी भी तरह से फेल नहीं होना चाहता था,,, इसलिए वह भी अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुका था निर्मला तो उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो गई थी,,, वह अपने पति की आंखों के सामने ही अपनी पेटीकोट को कमर तक उठा दी,, और उसकी गोलाकार गांड देखकर अशोक का मन बहकने लगा,,,निर्मला अपने बेटे के कमर के इर्द-गिर्द अपने घुटने टेककर एक हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने बेटे के खड़े लंड को पकड़ ली,,, और अपने बेटे से बोली,,,।

शुभम मादरचोद देख क्या रहा है,,,, मैं जानती हूं आज तेरी जिंदगी की पहली चुदाई है,,, थोड़ा सा थुक अपने लंड पर लगा ले,,, ताकि तेरा मोटा लंड मेरी बुर में आराम से जा सके,,,(इतना सुनना भर था कि शुभम तुरंत ढेर सारा थूक अपने हाथ पर लगाकर उसे अपने लंड पर चुपडने लगा,, देखते ही देखते हैं उसका लंड पूरी तरह से चिकना हो गया,,,)

अब ठीक है,,,
(इतना कहने के साथ ही निर्मला फिर से अपने बेटे के लंड को पकड़कर अपनी गुलाबी बुर के छेद पर लगा दी,,, और धीरे-धीरे अपने भारी-भरकम नितंबों का दबाव उस पर बढ़ाने लगी शुभम का लंड काफी चिकना था देखते ही देखते वह निर्मला की बुर के अंदर सरकना शुरू हो गया,,, अशोक आश्चर्य से अपनी फटी आंखों से यह नजारा देख रहा था वह शर्म से पानी पानी हो जा रहा था क्योंकि आज तक वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि यह सब कुछ होगा कि 1 दिन ऐसा आएगा कि उसकी बीवी अपने ही बेटे से उसकी आंखों के सामने चुदवाएगी,,,,अशोक अपनी बीवी के चेहरे के बदलते हाव-भाव को देख रहा था थोड़ी देर पहले जो गुस्से से तिलमिला रही थी अब उसके चेहरे का रंग बदलने लगा आनंद की अनुभूति में उसके गोरे गाल सुर्ख होते जा रहे थे,,,,देखते ही देखते ही निर्मला अपने नितंबों का दबाव बराबर बनाते हुए शुभम के लंड को पूरी तरह से अपनी गुलाबी बुर के छेद के अंदर गटक गई,,,,आहहहरहह,,,,की आवाज के साथ ही इस बात का एहसास अशोक को भी हो गया कि उसके बेटे का समूचा लंड उसकी बीवी की बुर में घुस गया है,,,, शुभम की हालत खराब होती जा रही थी अब तक वह अपनी मां को अपने काबू में रखता था लेकिन आज सारा पैसा उल्टा हो गया था आज वहां अपनी मां के काबू में था या यूं कह लो कि अपनी मां के हाथों की कठपुतली बना हुआ था,,, बेहद शर्मनाक लेकिन उत्तेजना से बना हुआ नजारा था एक ही किंग साइज बेड पर मां बेटे और बाप तीनों मौजूद थे,,,लेकिन बाप कुछ भी कर सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था ना तो वह इसमें शामिल होकर बजे लूट सकता था ना कि उन दोनों को रोक सकता था और उसकी आंखों के सामने उसकी बीवी उसके ही बेटे के साथ संभोग सुख भोग रही थी। देखते ही देखते निर्मला अपने बेटे के लैंड पर उठाकर बैठक करने लगी,,,और लगातार उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फूट रही थी जो कि वह अपने पति के सामने देख कर निकाल रही थी,,,, शुभम कुछ भी नहीं कर रहा था सारी बागडोर निर्मला के हाथों में थी,,, घड़ी में 5:15 का समय हो रहा था सुबह हो चुकी थी लेकिन अशोक की जिंदगी में अंधेरा छाने लगा था,,, निर्मला तो अपने भविष्य का रास्ता साफ कर रही थी क्योंकि आज के बाद से कुछ भी छुपाने लायक नहीं होगा सब कुछ सामने था,,, निर्मला की गरम सिसकारियां पूरे कमरे में गुंजने लगी,,,अशोक आश्चर्य से अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को उसकी मां की बुर के अंदर बाहर होता हुआ देख रहा था,,, वह पीठ के बल लेटा हुआ था जरा भी हरकत उसमें नजर नहीं आ रही थी तो खुद निर्मला ही अपनी ब्रा का हुक पीछे हाथ लाकर खोलते हुए अपनी दोनों चूचियों को आजाद कर दिया और शुभम का हाथ पकड़कर अपनी चूचियों पर रखते हुए बोली,,,।

मेरे दशहरी आम का तो मजा ले मादरचोद,,,
(शुभम को क्या था हमसे तो बस मजा लेना था वह जानता था कि निर्मला के आगे अब उसके बाप की बिल्कुल भी चलने वाली नहीं थी इसलिए वह अपने दोनों हाथों में आए दशहरी आम को दबाना शुरू कर दिया जिससे निर्मला और ज्यादा जोर जोर से सिसकारी लेने लगे अशोक हैरान था क्योंकि जिस तरह की सिसकारी वाले रही थी आज तक उसने उसके मुख से इस तरह की सिसकारी की आवाज नहीं सुना था इसलिए उसके तन बदन में भी उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,)
देख मादरचोद अशोक इसको बोलते हैं चुदाई,,, जमकर चुदाई और मुझे कहते ही गर्म औरत समझा जिस की गर्मी शांत करने का हौसला तुझ में बिल्कुल भी नहीं है,,, देख रहा है मेरे बेटे को कैसे घोड़े की तरह दौड़ रहा है,,, तुझसे यह बिल्कुल भी नहीं होगा,,,,साले सिर्फ बिस्तर में गर्म औरत मिल जाने से कुछ नहीं होता उसकी कर्मी भी शांत करने का हुनर होना चाहिए,,,
(अपने पति को लगातार अपने बेटे के सामने अपमानित करते हुए निर्मला जोर-जोर से अपने बेटे के लंड पर कूद रही थी,,,अपने पति के सामने अपने बेटे से चुदवाने में उसे और भी ज्यादा आनंद आ रहा था,,,,,करीब 20 मिनट का समय गुजर चुका था लेकिन दोनों एक दूसरे से मजा ले रहे थे यह देखकर अशोक हैरान था कि उसके बेटे का अभी तक पानी नहीं निकल पाया था,,,, निर्मला लगातार अपने बेटे का लंड अपनी बुर में लीए जा रही थी,,,)

साले मादरर्चोद तु कुछ क्यों नहीं करता क्या तु भी अपने बाप की तरह ढीला है क्या,,,रे,,,,
(इतना सुनना था कि शुभम अपने बाप की तरफ देखा जो कि उसे ही देख रहा था वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां को अपनी तरफ खींचा और उसे बाहों में ले लिया और तुरंत अपना पोजीशन बदल लिया वह सब घुमा के निर्मला को पता ही नहीं चला कि कब हुआ पीठ के बल चित हो गई और वह उसके ऊपर आ गया अशोक भी हैरान था इस कलाबाजी को देखकर,,,अब शुभम को लगने लगा कि सारी बागडोर उसके हाथ में आ गई और वह पोजीशन लेते हुए अपने बाप की आंखों के सामने ही अपनी मां की कमर पकड़ कर उसे थोड़ा सा अपनी तरफ खींच कर अपनी जांघो पर ले लिया और पेलना शुरू कर दिया,,,, तकरीबन 15 मिनट तक और शुभम अपनी मां की चुदाई करता रहा इस दौरान निर्मला गहरी गहरी सांसे लेते हुए दो बार झड़ चुकी थी और जब जब वह‌ झडी थी तब तक वह अशोक को बता भी रही थी कि उसका पानी निकल गया है,,, अशोक हैरान था कि उसका बेटा इतना दमदार है कि तकरीबन आधे घंटे तक उसकी जमकर चुदाई करता रहा और इस दौरान वह अपनी मां को दो बार झाड़ चुका था,,,
दोनों एक दूसरे की बाहों में जोर-जोर से हांफ रहे थे,,,,
थोड़ी देर बाद शुभम अपनी मां के ऊपर से उठा और बिस्तर के कोने पर जाकर बैठ गया,,,।

देखा अशोक मेरी गर्मी,,, क्या तू बुझा सकता है मेरी गर्मी को मेरी प्यास मिटा सकता है नहीं मिटा सकता लेकिन फिर भी मैं तुझसे कभी भी इस बारे में शिकायत नहीं की लेकिन तो मुझे कभी भी इज्जत नहीं दिया सम्मान नहीं दिया बस मुझे जलील करता रहा लेकिन आज मुझे एक बार फिर से जिंदगी जीने का मकसद मिल गया है अब मैं तेरी आंखों के सामने ही अपने बेटे से चुदवाऊंगी,,,,,, अब मैं तुझसे डरने वाली नहीं हूं और ना तु मुझे रोक सकता है,,,

लेकिन यह गलत है निर्मला ,,,(अशोक एक बार फिर से लाचार होता हुआ बोला,,,)

तो फिर जो तू अपनी बहन के साथ कर रहा था वह सही था,,हरामजादे इतनी सुंदर बीवी होने के बावजूद भी तो इधर उधर मुंह मारता फिरता रहता है अगर थोड़ी बहुत इज्जत मुझे दिया होता तो मैं भी तुझे जिंदगी का असली सुख देती,,, लेकिन तू मुझे कभी समझा ही नहीं,,,,

सुबह हो चुकी थी लेकिन सूरज निकलने में अभी भी समय था अभी भी अंधेरा छाया हुआ था,,,,सूरज निकलने के साथ ही निर्मला की जिंदगी का सवेरा होने वाला था एकदम मुक्त हो चुकी थी,,, दुनिया रिश्ते सारे बंधन से,,,,

अशोक तु मिटाएगा मेरी प्यास को मैं तुझे एक मौका और देना चाहती हूं,,,, अपने बेटे की आंखों के सामने तु मुझे चोद और जैसा मजा मुझे आज जिंदगी में पहली बार अपने बेटे के साथ चुदवीकर मिला है,,,, वैसा ही मजा तो मुझे दे कसम खाकर कहती हो जिंदगी भर तेरी गुलाम हो जाऊंगी फिर तू मेरी आंखों के सामने किसी भी औरत को घर में भी लाकर चोदेगा तो भी मैं तुझे कुछ नहीं कहूंगी,,,,
(तो कुछ भी नहीं कह रहा था बस शांत बैठा हुआ था,,, निर्मला ही जबरदस्ती कर रही थी क्योंकि वह आज ऐसा कुछ कर देना चाहते थे ताकि भविष्य में अशोक उसे शुभम के साथ चुदवाने पर एतराज ना जता सके इसलिए वह अपनी जगह से उठी और अशोक के पास घुटनों के बल चलते हुए आई,,,)

अशोक मैं तुझे एक मौका और देना चाहती हुं,,,यह तेरी और मेरी इज्जत का सवाल है अपने खुद के बेटे के सामने,,,,(इतना कहकर निर्मला अपने पति की दोनो टांगे खोलने लगी और टांगे खुलते ही,, अशोक का छोटा सा लटकता हुआ लंड नजर आया,, निर्मला अच्छी तरह से जानती थी कि कुछ होने वाला नहीं है लेकिन फिर भी वह अपने पति के लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी और बोली,,,)

रुक जा मैं इसे खड़ा करके चोदने लायक कर देती हु,,
(और इतना कहने के साथ ही निर्मला अपने पति के दोनों टांगों के बीच अपना मुंह डाल दी और अपने पति का लंड चूसने लगी,,, अपनी मां का व्यवहार देखकर शुभम को भी अजीब लग रहा था,, वह भी हैरान था,,आज उसकी मां को ज्यादा ही बेशर्मी दिखा रही थी लेकिन फिर भी शुभम खुश था थोड़ी ही देर में वहां अपने पति के लिए को चूस कर खड़ा कर दी,,,, अशोक को भी मजा आने लगा था वैसे भी अब उसकी इज्जत का सवाल था उसे इतना यकीन था कि वह अच्छे से चुदई कर पाएगा जल्दी पानी नहीं निकलेगा क्योंकि रात को ही वह अपनी बहन को चोद कर पानी निकाल चुका था,,, निर्मला खुद पीठ के बल अपनी दोनों टांगे फैला कर लेट गई,, और देखते ही देखते अशोक भी अपने बेटे की आंखों के सामने ही निर्मला की दोनों टांगों के बीच आ गया,,, शुभम भी बड़े ध्यान से अपने मां-बाप के क्रियाकलाप को देख रहा था,,,,, गीली बुर के अंदर अशोक ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया,,,और ना ही उसके लंड घुसने का एहसास निर्मला को ठीक से हो पाया वह 45 धक्के में ही हांफने लगा,,,

हट जा मैं जानती थी यही होगा,,,, शुभम जल्दी आ,,,
(अशोक निर्मला के ऊपर से हट गया और शुभम की तरफ देखा तो हैरान रह गया उसका लंड फिर से पूरी तरह से खड़ा हो चुका था जैसे कि पहले था,,, अपने बाप की आंखों के सामने ही सुभम एक बार फिर से पोजीशन बना लिया,,और एक बार फिर से पूरे कमरे में निर्मला की सिसकारी गुंजने लगी तकरीबन 20 मिनट तक शुभम ले फिर से अपनी मां की चुदाई किया तब जाकर दोनों एक साथ झड़ गए,,,

अशोक हार मान लिया था निर्मला काफी खुश थी अब घर में पकड़े जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था निर्मला ने ही अपने पति से यह कहकर मामले को एकदम शांत कर दी कि वह जिसके साथ चाहे उसके साथ संबंध बना सकता है चाहे तो वह अपनी छोटी बहन को घर में लाकर भी चोद सकता है अब उसे एतराज नहीं है,,, लेकिन अब वह शुभम के साथ संभोग करके संतुष्ट होगी इस बात का भी वह अशोक के सामने खुलासा कर चुकी थी,,, निर्मला के उस सुझाव से अशोक भाी खुश था,, शुभम तो खुश ही था उसे अपनी मां के दिमाग पर गर्व होने लगा,,, क्योंकि यह सब उसकी ही सूझबूझ का नतीजा था,,,

एक महीने बाद ही शीतल को उल्टियां होना शुरू हो गया जो कि मां बनने की निशानी थी निर्मला उसके हालात से वाकिफ थी वह भी खुश थी क्योंकि शीतल की कोख से उसका पोता जो जन्म लेनेवाला था,,, शुभम बिना शादी के बाप बनने वाला था और वह भी एक बच्चे का नहीं तीन तीन बच्चों का क्योंकि सरला की बहू को जुड़वा बच्चे पैदा हुए थे एक लड़की एक लड़का और उसके कुछ महीनों बाद शीतल ने भी एक सुंदर से बच्चे को जन्म दी हालांकि इस दौरान शुभम की कामलीला सभी के साथ जारी थी,, निर्मला को यह बात तो अच्छी तरह से मालूम थी कि शीतल के बच्चे का बाप शुभम ही है लेकिन इस बात का आभास तक नहीं था कि उसके पड़ोस में ही सरला की बहू की कोख से जन्म लिए जुड़वा बच्चों का बाप भी शुभम ही है,,।

,,,,,,,,,,,,,,,,समाप्त,,,,,
 
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