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Incest PAAP PUNYA (INCEST + ADULTERY) Completed

१५ मिनट बाद जब मैं कमरे में गया तो मज़ा आ गया, अंदर रिक्की बहुत ही सैक्सी टॉप-स्कर्ट में तैयार हो कर बैठी थी. रिक्की ने टॉप के उपर के चार बटन खोल कर नीचे से गाँठ बन्धी हुई थी और गज़ब का मेक-अप करा हुआ था. मुझे देख कर रिक्की खड़ी हो गयी और अपने चूत्तड़ हिलाने लगी. मैंने चुपचाप पीछे से जा कर उसकी मचलती हुई चूचियों को पकड़ लिया और रिक्की को घूमा लिया. फिर सीधा कर के हमने एक दूसरे को बाहों में कस लिया और तड़ातड़ एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे. रिक्की बहुत ही सैक्सी लग रही थी और अगर वो ऐसे रूप में कहीं सड़क पर चली जाती तो जरूर उसकी चूत का भोंसड़ा बन जाता.

मैंने पीछे से रिक्की की स्कर्ट नीचे खिस्का दी और झुक कर कुत्ते कि तरह उसके चूत्तड़ों में अपना मुँह लगा दिया और चाटने लगा. रिक्की ने काले रंग की नेट की बहुत ही टाईट रेशमी पैंटी पहनी थी जिससे वो उसकी गाँड की दरार में घुस गयी थी और उसके गोरे फूले हुए छोटे-छोटे मस्त चूत्तड़ों को और मादक बना रही थी.

रिक्की ने मेरी गर्दन में अपनी बाहें डाल कर बोली, "मोनू. मोनू. आज जी भर के अपने दोस्त की बहन को चोद लो!" और मुझे बिस्तर पर बिठाकर मेरी अंडरवियर में तन्नाए हुए लंड पर अपने चूत्तड़ घिसने लगी. मैंने उसकी टॉप के बटन और बंधी हुई गाँठ को खोल कर उतार दिया. रिक्की ने एक मस्त काले रंग की रेशमी ब्रा पहनी थी. एकदम पतले स्ट्रैप थे और ब्रा के कप सिर्फ़ उसके आधे निप्पल और नीचे की गोलाइयाँ छुपाये हुए थे. रेशमी नेट के अंदर से उसकी दूधिया चूचियों की साफ झलक मिल रही थी. मैंने उसे खड़ा होने को कहा और कुर्सी पर टाँगें फैला कर बैठ गया और रिक्की को बोला कि वो अपनी टाँगें मेरी टाँगों के दोनों तरफ करके अपनी पैंटी में कसी हुई चूत मेरे लंड पर रखे और आराम से बैठ जाये. तब तक मैं उसकी कसी हुई मस्त जवानी जम कर चूसना और दबाना चाहता था.

रिक्की बड़े ही कायदे से मेरे लंड के उठान पर बैठ गयी और बहुत हल्के-हल्के ढँग से अपनी पैंटी मेरे लंड से उठी हुई मेरी अंडरवियर पर घिसते हुए मेरी गर्दन में बाहें डाल कर बोली, "मोनू भैया मसल डालो मेरी इन जवानियों को. देखो तो सही कैसे तन कर खड़ी है तुमसे चुस्वाने के लिये."

मैं भी अपने हाथ उसकी पीठ पर ले गया और उसकी ब्रा के हूक खोल दिये और बड़े प्यार से उसकी चूचियाँ नंगी करी. उसकी चूचिया मेरे सामने तन कर खड़ी हुई थीं और मैंने भी बिना वक्त गँवाये दोनों चूचियों पर अपना मुँह मारना शूरू कर दिया. मैं बहुत ही बेसब्रा हो कर उसकी चूचियाँ मसल और चूस रहा था जिससे उसको थोड़ा सा दर्द हो रहा था. पर फिर भी मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाते हुए कह रही थी, "भैया आराम से मज़ा लो, इतने उतावले क्यों हो रहे हो. आज तो हमारा हनीमून है. कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ. जम के चूसवाऊँगी और मसलवाऊँगी. इनको इतना मसलो कि कॉलेज में मेरी चूचियाँ सबसे बड़ी हो जायें."
 
थोड़ी देर की चूसाई के बाद मैंने कहा, "रिक्की, अब तो आप तैयार हो जा दुबारा मेरा लंड लेने के लिये."

मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और पलंग पर लिटा दिया. काले रंग की पैंटी से ढका रिक्की का गोरा बदन ऐसा लग रहा था जैसे कोई अपसरा अपने कपड़े उतार के सो रही हो और काला भँवरा उसकी ताज़ी चूत का रस चूस रहा हो. मैं करीब पाँच मिनट तक रिक्की के नंगे बदन की शराब अपनी आँखों से पीता रहा, और फिर बिस्तर पर चढ़ कर मैंने रिक्की की कमर चूसनी चालू किया और चूसते हुए अपना मुँह उसकी पैंटी पर लाया और पैंटी का इलास्टिक अपने दाँतों में दबा कर अपने मुँह से उसकी पैंटी उतारने लगा.

रिक्की ने भी अपने चूत्तड़ हवा में उठा दिये थे ताकि पैंटी उतारने में परेशानी ना हो. पर उसने इतनी टाइट पैंटी पहनी थी कि मुझे अपने हाथ भी लगाने ही पड़े. पैंटी उतार के मैंने देखा की जो हलके रोयें रिक्की की चूत पर थे अब वो भी उसने साफ़ कर लिए थे. रिक्की चूत चुदने के लिये इतनी बेकरार थी कि चूत से पानी टपक रहा था.

मैंने कहा रिक्की तूने अपनी चूत शेव कर ली मेरी जान.

रिक्की बोली, "भैया मम्मी ने मेरी चूत को क्रीम से साफ किया है मैंने नहीं."

मेरा लंड तो रिक्की की चिकनी नंगी मस्ताई हुई, चुदने के लिये तैयार चूत को देख कर ही मेरी अंडरवियर को फाड़ कर बाहर आने के लिये बेकरार था और उछल-कूद मचा रहा था. मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी अंडरवियर उतार दी और अपना मुँह मेरे सामने लेटी हुई नशे की बोतल के खज़ाने के मुँह पर लगा दिया. रिक्की तो मस्त हो गयी और मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी. मैं भी चाहता था कि रिक्की थोड़ा पानी और छोड दे ताकि उसकी चूत थोड़ी चिकनी हो जाये. मैंने उसकी चूत का दाना चूसते हुए अपनी जीभ से उसकी चुदाई चालू कर दी और करीब पाँच मिनट बाद ही रिक्की ने मेरा सिर अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और कस कर अपनी पूरी ताकत से मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा लिया और जोश में काँपते हुए चूत्तड़ों के धक्के देती हुई मेरे मुँह में अपना रस देने लगी. मैंने भी मन से उसकी जवान चूत चूसी और चूत के लाल होंठों को अपने होंठों से चूसा.
 
फिर मैं घूटने के बल रिक्की के सामने बैठ गया और बूरी तरह अकड़ा हुआ अपना लंड उसके सामने कर दिया और रिक्की की गर्दन में हाथ डाल कर उसका मुँह अपने लंड के पास लाया और बोला, "रिक्की, मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर अपनी चूत बजाने के लिये तो इनवाइट करो."

रिक्की ने तपाक से अपना मुँह खोला और मेरा सुपाड़ा अपने होंठों के बीच ले लिया और जीभ फेरने लगी. मेरे लंड पर रिक्की के जीभ फेरने ने वो काम किया जो आग में घी करता है. मुझसे रहा नहीं गया और दोनों हाथों से रिक्की का सर पकड़ कर उसके मुँह में ही मैंने आठ-दस शॉट लगा दिये. लौड़े का तो मारे गुस्से के बूरा हाल था. उसके सामने ऐसी मलाईदार चूत थी और मैं उसकी भूख मिटाने की बजाये चुम्मा चाटी कर रहा था.

अपना लंड रिक्की के मुँह से बाहर निकाल कर के मैंने रिक्की की जाँघों को अपने हाथों से पूरा फैला दिया और एक हाथ से लंड पकड़ कर दूसरे हाथ से रिक्की की चूत के लिप्स खोल कर अपना गुस्साया हुआ लाल सुपड़ा उसकी गुलाबी चूत से सटा दिया और बहुत हल्के-हल्के घिसते हुए बोला, "देख लो मेरी जान. अपने लंड की तेरी चूत से मुलाकात करा रहा हूँ."

रिक्की को भी अपनी चूत पर लंड घिसाई बहुत अच्छी लग रही थी. वोह सिर्फ़ मस्ती में "ऊँमम ऊँमम" कर सकी. एक दो मिनट बाद मैंने देखा कि रिक्की पर मस्ती पूरी तरह से सवार हो चूकी है तो मैंने अपने लंड का एक हल्का सा शॉट दिया जिससे मेरा लंड रिक्की की चूत बहुत ज्यादा कसी होने के कारण से फिसल कर बाहर आ गया. इससे पहले कि रिक्की कुछ समझ पाती, मैंने एक हाथ से अपना लंड रिक्की के चूत के लिप्स खोल के उसके छेद पर रखा और अपने चूत्तड़ों से कस के धक्का दिया जिससे मेरा लंड रिक्की की चूत में घुस गया.

वो जोर से चीखी, "हाय मोनू ओह मार डाला" मैंने लंड थोडा बाहर निकाल कर एक शॉट और लगाया और अब मेरा लंड जड़ तक रिक्की की चूत में समा गया. ऐसा लग रहा था जैसे किसी बोत्तल के छोटे छेद में अपना लंड घुसा दिया हो और बोत्तल के मुँह ने कस कर मेरे लंड को पकड़ लिया हो. मैंने रिक्की से पूछा, "रिक्की कैसा लग रहा है?"

रिक्की बोली, "आह्ह भैया इस्स्स्सस लगता है मैं ज़न्नत में हूँ. मेरे बदन से ऐसी मस्ती छूट रही है कि क्या बताऊँ. मोनू भैया बहुत मज़ा आआआ आ रहा है. अब तुम जी भर के मुझे चोदोऊऊऊऊ ."
 
मैंने रिक्की की दोनों जाँघें चौड़ी कर दीं और अपने हाथों से उसके पैरो के पंजे पकड़ लिए और खुद घूटने के बल बैठ कर अपनी गाँड के दनादन धक्के मारने लगा. रिक्की को अब भी तकलीफ हो रही थी पर वो भी अब चुदाई में पूरा साथ दे रही थी. वो ज्यादा मस्ती सहन नहीं कर पायी और सितकारी भरती हुए अपनी चूत का पानी मेरे लंड पर गिराने लगी और बड़बड़ा रही थी, "आह आँह मोनू मज़ा आ गया. मुझे क्या मालूम था अआह इतना मजा आएगा आःह्ह. इसके लिये तो मैं अपनी चूत बार-बार तुमसे फड़वाऊँगी."

मैंने भी लगातार आठ-दस शॉट लगाये और उसकी चूत में जड़ तक अपना लंड उतार के झड़ गया. मैं रिक्की की चूत को चोद कर मस्त हो गया था और आराम से उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को चूस रहा था. थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हटा और और उसका मुँह पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया और कहा, "बहन की लौड़ी रिक्की जब तक मैं न कहूँ मेरा लंड चूसती रहना नहीं तो गाँड मार मार के लाल कर दूँगा!" और आराम से अपनी पीठ टिका कर बैठ लगा.

रिक्की ने भी पूरी हिम्मत दिखायी और बिना वक्त बर्बाद करे मेरा लंड चूसना चालू कर दिया. करीब दस- पँद्रह मिनट की लगातार चूसाई से मेरा लंड फ़िर से तन्ना गया पर मैंने अपने आप पर पूरा कंट्रोल रख कर रिक्की के मुँह में अपना लंड तबियत से चूसवाता रहा. आज मैंने जितना रिशू से सीखा था सब उसकी सगी बहन पर अजमाना चाहता था.

करीब दस मिनट बाद मैंने रिक्की को बोला, "चलो आज तुझे घोड़े की सवारी करना भी सिखा दूँ. मेरी प्यारी रिक्की. करेगी ना मेरे लंड पर घोड़े की सवारी?"

रिक्की ने बड़े आश्चर्य से पूछा, "मोनू भैया तुम्हारा मतलब है कि मैं तुम्हारे लौड़े पर बैठ और उसे अपनी चूत में अंदर लूँ और अपने चूत्तड़ ऊपर-नीचे उछाल-उछाल कर लंड को अपनी चूत में लूं, जैसा ब्लू फिल्मों में होता है.?"

मैंने कहा, "हाँ मेरी कुतिया. लगता है बहुत ब्लू फिल्मे देखी है तूने. अरे जो ब्लू फिल्मों में होता है वो सब असलियत में भी होता है समझी. पर ध्यान रहे लंड बाहर नहीं निकलना चाहिए."
 
रिक्की मेरे लंड के दोनों तरफ़ पैर करके खड़ी हो गयी और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी और एक हाथ से मेरा तन्नाया हुआ लंड पकड़ा और एक हाथ की उंगलियों से अपनी चूत के लिप्स खोले. जब मेरा लंड उसकी चूत से टकराया तो थोड़ा सा वोह घबरायी पर मैंने उसकी घबराहट देख कर उसके चूत्तड़ कमर के पास से कस कर पकड़ लिये और इससे पहले वो कुछ समझ पाती मैंने नीचे से अपने चूत्तड़ एक झटके से उछाले और पूरा लंड गप से उसकी चूत में उतार दिया. रिक्की बहुत छटपटाई पर मैंने भी उसकी कमर कस कर पकड़ी हुई थी.

दो तीन मिनट बाद जब उसक दर्द कम हुआ तो मैंने उसको अपने ऊपर झुका लिया और बोला, "रिक्की अब तू अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल कर ऊपर नीचे कर और लंड सवारी का मज़ा लें."

इतना कह कर मैंने उसका सिर दबा कर उसके होंठ अपने होंठों में ले लिये और चूसते हुए अपने दोनो हाथों से उसके पीछे से फैले हुए चूत्तड़ पकड़ लिये और मसलने लगा. रिक्की भी बड़े प्यार से उछलते हुए मुझे चोद रही थी, और दूसरी बार काफी देर तक हमने इसी पोज़ में चूदाई करी और मैंने अपने लंड का माल उसकी चूत में गिरा दिया और रिक्की को दबोच कर अपने ऊपर ही लिटा कर रखा और लगातार दो बार चुदाई करने के कारण हम थोड़ा सुस्ताने लगे और मेरी आँख लग गयी.

करीब एक घण्टे बाद मेरी जब आँख खूली तो देखा रिक्की मेरे लंड से खेल रही थी. जब मुझे उसने अपनी और घूरते पाया तो थोड़ा शरमा उठी.
मैंने भी कहा, "मेरी जान चूस इसे. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है."

इस समय मेर गन्ना पूरी तरह से तन्नाया हुआ था. मैंने रिक्की से कहा, "रिक्की जब भी मैं या रिशू तुझे चुदाई का मज़ा देंगे तो ये हमेशा याद रखना की तुझे ये मज़ा मिलने में कामिनी आंटी का बहुत बड़ा हाथ है समझी."

रिक्की तपाक से बोली, "यू आर राइट भैया, ऑल थैंक्स टू मम्मी. पर वैसे भी मैं अब ज्यादा इंतज़ार नहीं करने वाली थी, अंकुर या जय लाटरी कभी भी लगने वाली थी पर अब बेचारे हाथ मलते रह जायेंगे."

मैंने कहा कोई नहीं उनकी भी लाटरी लगवा देना. क्या दिक्कत है.

रिक्की बोली जब भूख घर में ही मिट गयी तो बाहर का खाने का रिस्क क्यों लूं.

अब मेरा लंड फिर से रिक्की की चूत फाड़ने के लिए तैनात हो गया था. मैंने रिक्की से कहा की तू तैयार हो जा तब तक मैं पानी पीकर आता हूँ.
 
मैं नंगा ही बाहर गया तो देखा कि कामिनी आंटी ब्रा और पेटीकोट में बैठी हुई सिगरेट और शराब पी रही थी. मुझे देख कर बोली "क्या बात है मोनू" कामिनी आंटी की ज़ुबान नशे में बहुत लड़खड़ा रही थी और आँखें भी नशे में भारी थीं.

मैंने कहा "कुछ नहीं आंटी पानी पीने आया था पर आप तो व्हिस्की पी रही है. रिशू कहाँ है."

कामिनी: रिशू तो सो गया. मुझे नींद नहीं आ रही थी तो सोचा 2-4 पेग ही मार लूं. ले पानी क्या पीएगा. एक पेग लगा ले तू भी. रिक्की सो गयी क्या. आंटी ने मेरी तरफ गिलास बढ़ाते हुए पुछा.

मैंने भी एक साँस में पूरा पेग गटक लिया और बोला "कहाँ आंटी, रिक्की अन्दर रूम में है. लंड ले कर एक दम मस्त चूत हो गयी है साली की. अभी तक दो बार लंड का पानी पी चूकी है, और तीसरी बार चुदाने को मचल रही है. चुदाने के मामले में एक दम तुम्हारी बेटी है! साली की बहुत गरम चूत है. इसको अगर दमदार मर्द नहीं मिला तो ये तो दूसरे मर्दों से खूब चुदवायेगी."

कामिनी आंटी बोली, "अच्छा? तो जा जाकर ठंडा कर उसे."

मैंने कहा, "कामिनी आंटी आप भी चलो न अन्दर. मेरी बड़ी इच्छा है कि तुम्हारी बेटी के सामने तुम्हें चोदूँ."

कामिनी आंटी बोली "पागल है क्या. मुझे रिक्की के सामने चुदाने में बहुत शरम आएगी."

मैंने कामिनी आंटी की एक न सुनी और उन्हें जबरदस्ती कमरे में ले आया. रिक्की बोली अरे मम्मी को क्यों ले आये. मैंने कहा देखो न यहाँ हम दोनों मज़े ले रहे है और जिनकी वजह से मजे ले रहे है वो बाहर उदास बैठी है इसीलिए इनको भी यहीं ले आया. पर ये शर्मा रही है.

रिक्की बोली, "मम्मी आज से तुम मेरी सबसे बेस्ट फ़्रैंड हो और चुदवाने में क्या शरमाना. मैं भी तो देखूँ कि चुदाई का असली मज़ा कैसे लिया जाता है."

मैंने रिक्की को कहा, "चलो रिक्की अपनी मम्मी का पेटीकोट उतारो और अपनी मम्मी की चूत नंगी कर के मुझे दिखाओ."

मैंने कामिनी आंटी की ब्रा खोल कर उनकी चूचियाँ नंगी कर दीं. रिक्की ने भी कामिनी आंटी के सारे कपड़े उतार दिये और बोली "लो मोनू मेरी मम्मी की चूत हाज़िर है." अब दोनों माँ बेटी एक साथ बिल्कूल नंगी मेरे सामने थीं. मैंने भी नंगी कामिनी आंटी को अपनी बाहों में ले लिया और किस करने के बाद बोला, "कामिनी डार्लिंग! आज तुम्हारी बेटी की चूत खोली है तो आज मैं तुम्हारे साथ भी हनीमून मनाऊँगा तो डार्लिंग तुम्हारी बेटी मेरा लंड चूस कर मोटा करेगी और आज मैं तुम्हारी गाँड मारूंगा. अपनी गाँड मरवाओगी ना कामिनी डार्लिंग."
 
कामिनी आंटी नशे के कारण बहकी हुई आवाज़ में बोलीं, "मोनू, साले तू. तूने. मेरी चूत मारी. मेरे मुँह, गले में मादरचोद अपना लंड चोदा और मेरी चूचियों के बीच में भी लंड घिस के चोदा और.. और. यहाँ तक की साले तूने मेरी गांड को भी नहीं छोड़ा.. बोल साले भोसड़ी के. तुझे कभी मैंने ना कहा क्या. हैं, तेरा मूत भी पिया है मैंने? तो इसके बाद क्या पूछता है. जैसे तू मुझे चोदना चाहता है वैसे चोद, गाँड मारनी है. तो साले गाँड मार ले"

मैंने कहा "आंटी तुम बस आराम से कुत्तिया बन कर अपनी गाँड हवा में उठाओ. मैं अपना लंड रिक्की से तबियत से चुसवाकर तुम्हारी मस्त गाँड के लिये तैयार करता हूँ." मैंने रिक्की को बुला कर अपने सामने घुटने बर बैठा कर लंड चूसने के लिये बोला और कहा, "लो रिक्की, चूस के तैयार करो अपनी मम्मी के लिये. देखो आज आपकी मम्मी कैसे नशे में धुत्त होकर मेरा लंड अपनी गाँड में लेगी. आंटी देख तेरी बेटी क्या तबियत से मेरा लंड चूसे के मोटा कर रही है तेरी गाँड के लिये. ये तो आज अपनी मम्मी की गाँड फड़वाकर ही मानेगी. देख तो सही साली एक दिन में ही क्या रंडी की तरह चूसने लग गयी है."

मैं रिक्की का मुँह पकड़ कर हलके-हलके शॉट लगाने लगा. इतनी देर में कामिनी आंटी भी एक हाथ में बोत्तल पकड़ कर पलंग पर जैसे मैंने कहा था वैसे ही कुत्तिया बन गयी. मैने रिक्की के मुँह से अपना लंड निकाला और बोला, "रिक्की चलो ज़रा अपनी मम्मी कि गाँड के छेद को तैयार करो मेरे लंड के लिये. अच्छे से क्रीम लगाओ ताकि आंटी को ज्यादा तकलीफ न हो."

रिक्की ने अपने हाथ में खूब सारी क्रीम भरी और कामिनी आंटी की गाँड के छेद पर लगाने लगी और बोली, "मोनू मम्मी की गाँड का छेद तो बहुत टाईट है. मेरी उँगली भी बड़ी मुशकिल से अंदर जा रही है लंड डालोगे तो गांड फट जाएगी."

मैंने कहा, "कुछ नहीं होगा. हम पहले भी आंटी की गांड मार चुके है. आराम से खूब क्रीम मलो. थोड़ी देर बाद जब गाँड का छेद रीलैक्स हो जायेगा तब बड़े आराम से मेरा लंड अंदर जायेगा." मेरी बात सुन कर रिक्की अपनी माँ की गाँड पर पूरी लगन से क्रीम मलने लगी और कामिनी की गाँड को लंड के लिये तैयार करने लगी. जब कामिनी तैयार हो गयी तो मैं पलंग पर चढ़ा और अपना तन्नाया हुआ लंड कामिनी आंटी के चूत्तड़ों पर फेरने लगा और रिक्की को बोला, "अब ज़रा मेरे लंड के ऊपर भी क्रीम लगाओ! अब मैं तेरी मम्मी के भूरे रंग के गाँड के छेद को खोलूँगा."

रिक्की ने बड़े ही प्यार से मेरे लंड पर क्रीम लगायी और एकदम चिकना कर दिया. मैंने रिक्की को कहा कि वो अपने दोनों हाथों से अपनी मम्मी के चूत्तड़ पकड़ ले और खींच कर चौड़े करे ताकि कामिनी आंटी की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल जाये. रिक्की ने मेरे कहे अनुसार अपनी मम्मी के दोनों विशाल चूत्तड़ों को पकड़ लिया और चौड़े कर दिये जिससे कामिनी आंटी की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल गया. मैंने अपने हाथ से लंड पकड़ा और गाँड के छेद पर टिका दिया और दूसरे हाथ की उँगलियों से गाँड के छेद को और चौड़ा किया और लंड का सुपाड़ा टिका कर हल्के से झटका दे कर कामिनी आंटी की गाँड में सरका दिया. क्रीम की चिकनाहट के कारण मेरा एक इंच लंड कामिनी आंटी की गाँड के छल्ले में जा कर फँस गया.

कामिनी आंटी बोलीं, "मोनू दर्द कर रहा है."

मैंने कहा, "कामिनी घबराओ नहीं. आराम-आराम से दूँगा. बस तुम हिम्मत कर के लंड लेती रहो."
 
इतना बोल कर मैंने रिक्की को इशारा किया कि वो अपनी माँ की गाँड एक दम कस कर पकड़ ले. रिक्की ने भी मेरा कहना माना और मैंने अपने दोनों हाथों से कामिनी आंटी की कमर पकड़ ली और ज़ोरदार झटका मारा जिससे चिकनाहट होने के कारण मेरा लंड सरकते हुए पूरा कामिनी आंटी की गाँड में समा गया. कामिनी आंटी को तो जैसे बिजली का शॉक लग गया हो. अगर रिक्की ने उनके चूत्तड़ और मैंने उनकी कमर कस कर नहीं पकड़ी होती तो शायद कामिनी आंटी मेरा लंड निकाल देतीं पर बेचारी मजबूर थी. सिवाये कसमसाने के और गालियाँ देने के अलावा वो कुछ भी नहीं कर सकती थीं.

मैंने भी बिना कुछ परवाह किये बिना अपना पूर लंड कामिनी आंटी की गाँड में उतार कर ही दम लिया और हल्के-हल्के शॉट देने लगा. कामिनी आंटी तो दर्द के मारे पागल हो गयी थी और बोले जा रही थीं, "अरे मादरचोद, भोसड़ी वाले मार डाला रे. तेरी माँ का भोंसड़ा मादरचोद. बहनचोद मैं ज़िंदगी भर तुझे जैसे कहेगा वैसे ही चुदवाऊँगी और चूसूँगी. तू जिसको बोलेगा मैं उसको चुदवा दूँगी तेरे से. मुझे छोड़ दे माँ के लौड़े. हाय मेरी माँ. फट गयी मेरी गाँड. मादरचोद सत्यानाश कर दिया तूने आज मेरी गाँड का. आज तेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा लग रहा है."

कामिनी आंटी बोलती रहीं पर अब मैं जोश में आ चुका था और हुमच-हुमच कर अपना लंड गाँड में पेल रहा था. कामिनी आंटी को भी अब अच्छा लगने लगा था क्योंकि अब वो कह रही थीं, "मार ले मोनू, मार ले अपनी आंटी की गाँड. हाय हाय! शूरू-शूरू में तो बहुत दर्द हुआ पर बाद में बहुत मज़ा आता है. रिक्की तू भी मोनू से अपनी गाँड जरूर मरवाना."

करीब बीस पच्चीस मिनट तक कामिनी आंटी की गाँड मारने के बाद मैंने अपना रस कामिनी आंटी की गाँड में ही निकाल दिया.
अब मैं भी काफी थक गया था और हम तीनो नंगे एक दुसरे से लिपट कर सो गए.

सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं अकेला ही सो रहा था. मैं कपडे पहन कर बाहर आया तो देखा कामिनी, रिशू और रिक्की नाश्ता कर रहे थे.

रिशू बोला बहुत देर तक सोता रहा तू. मेरे कुछ कहने से पहले ही रिक्की बोली रात भर मेहनत भी तो बहूत की है मोनू भैया ने. आंटी ने कहा फ्रेश होकर नाश्ता कर ले मोनू. मैंने कहा नहीं आंटी अब घर जाकर ही फ्रेश होउंगा. और मैं घर से बाहर आ गया तभी रिशू ने पीछे से मुझे आवाज़ दी और बोला यार मैं सोच रहा था की रश्मि, रिक्की, मैं और तुम जब मिल कर फौर्सम करें तो कितना मज़ा आयेगा. मैंने कहा हा मज़ा तो आयेगा. बना प्लान. रिशू बोला प्लान क्या बनाना रश्मि को लेकर आजा घर पर. मैंने कहा ठीक है.
 
मैं घर पंहुचा और नहा धोकर जब पापा के पास गया तो पापा बोले.

पापा: तेरी बहन की शादी तय हो गयी है. अगले महीने की २० तारीख को बरात आयेगी. बहुत काम करने है. सिर्फ २५ दिन बचे है. तो अब तुम फालतू घूमना बंद करो और तैयारी में मेरा हाथ बटाओ.

उस दिन के बाद कभी गेस्ट हाउस की बुकिंग, कभी कार्ड छपवाने का चक्कर, कभी बाटने का चक्कर, कभी शादी की शॉपिंग कुल मिला कर टाइम निकलता ही गया और मेरा और रिशू के रश्मि दीदी और रिक्की को एक ही बिस्तर पर चोदने का प्लान कामयाब नहीं हो पाया. घर में काफी सारे मेहमान भी आ गए थे. शादी से ३ दिन पहले मनीष भी मोनिका को ले कर आ गया. मौसा मौसी शादी वाले दिन ही सुबह आने वाले थे. मोनिका भी चुद चुद कर काफी गदरा गयी थी. उसे देख कर मुह में पानी आ गया. पर इतने सारे लोगों के घर में रहते कुछ करना नामुमकिन था. सोचा की शादी के बाद मोनिका और मनीष को कुछ दिन रोक लूँगा तभी कुछ होगा.

रात को मनीष और मैं छत पर बैठे थे तो मनीष बोला यार दो दिन बाद रश्मि शादी करके बेंगलोर चली जाएगी फिर पता नहीं कब मिलना हो. यार कम से कम एक बार उसकी चूत तो दिला दे.

मैंने कहा भैया मैंने खुद एक महीने से दीदी की चूत की शकल नहीं देखी. दीदी की क्या २५ दिन से किसी की चूत नहीं देखी पर क्या करू. कुछ होना संभव नहीं है क्योंकि रश्मि दीदी अब किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती. रिशू भी तो मरा जा रहा है. उसने दीदी को फ़ोन करके अपने घर बुलाया था पर दीदी ने साफ़ मना कर दिया. कल मैं रिशू के घर कार्ड देने जाऊँगा तब बात करूंगा. हो सकता है कुछ हो जाये.

अगले दिन मैं कार्ड देने कामिनी आंटी के घर गया. आंटी ने शिकायत करते हुए कहा की सबसे आखिरी में मुझे कार्ड देना था क्या. मैंने कहा क्या आंटी आपको तो सबसे पहले खबर दी थी पर क्या करूं मुझे ही सारे कार्ड बाटने है. अभी भी करीब १० कार्ड बचे है जो आज बाटूंगा. रिक्की और रिशू कहा है.

कामिनी: रिशू रिक्की को दिल्ली छोड़ने गया है. कल वापस आ जायेगा. रिक्की का एक पेपर है वहां २२ तारीख को. पेपर दे कर २३ को वो अपने पापा के साथ वापस आ जाएगी.

मोनू: ओह, उसने मुझे बताया नहीं.

कामिनी: कुछ काम था क्या?

आंटी को मैंने सारी बात बता दी की हम लोग रश्मि दीदी को शादी से पहले एक बार और चोदना चाहते है पर दीदी नहीं मान रही. इसीलिए रिशू से बात करनी थी. आंटी ने कहा देखो अब रश्मि की शादी में दो दिन बचे है. वो अपनी जगह सही है. अगर कुछ गड़बड़ हो गया तो. अब तुम लोगो को भी सब्र करना चाहिए.

पर आंटी दीदी 2 दिन के बाद हनीमून के लिए सिंगापुर जा रही है और वहां से लौट कर बेंगलोर. अब पता नहीं कब उनसे मुलाकात होगी. क्या पता शादी के बाद वो हमें भाव ही न दे. इसीलिए आखिरी याद के तौर पर हम उनको चोदना चाहते है.

कामिनी: अच्छा रिशू तो कल रात तक वापस आयेगा. एक तरीका है की तुम्हारा काम भी हो जायेगा और रश्मि भी मान जाएगी. सुनो तुम्हारा गेस्ट हाउस तो यही है मेरे घर के पीछे. परसों जब रश्मि ब्यूटी पार्लर जाये तो तुम उसके साथ चले जाना और उसको तैयार करवा कर मेरे घर ले आना. पार्लर वाली मेरी दोस्त है मैं उससे कह दूँगी वो तुम्हे ७.३० की जगह ६.३० पर एक घंटे पहले छोड़ देगी. यहाँ तुम और रिशू १ घंटे में उसकी चूत मार लेना. अगर थोडा बहुत मेकअप बिगड़ा तो मैं ठीक कर दूँगी और ८.०० बजे जयमाल तक हम गेस्ट हाउस पहुच जायेंगे.

मोनू: वह आंटी. मजा आ जायेगा दीदी को दुल्हन बना कर चोदने में. पर एक बात है मनीष मेरी मौसी का लड़का भी दीदी की लेना चाहता है. उसको भी यही ले आऊं.

कामिनी: अरे तू पूरी फौज ले आ बेहनचोद. सुन जिसको लाना है ला पर एक घंटे में सब कुछ कर लेना. ताकि हम ८ बजे तक जयमाल में पहुच जाये. समझा.
 
मैं खुश होकर बाकि के कार्ड बाटने निकल गया और शाम को घर पहुच कर मनीष को सारा प्लान बताया. मनीष भी खुश हो गया. शादी वाले दिन करीब ३ बजे मैंने दीदी से कहा की चलो तुम्हे पार्लर ले चलू. तो दीदी ने कहा इतनी जल्दी क्या है 4 बजे तक चलेंगे. तो मैंने कहा की पार्लर वाली का फ़ोन आया था उसने ३ बजे आने को कहा है. मम्मी भी बोली जा रश्मि चली जा. वहां टाइम लगेगा. दीदी ने अपने कपडे लिए और मेरे और मनीष के साथ पार्लर के लिए चल दी. मोनिका भी साथ आना चाहती थी पर हमने उसे टाल दिया. पार्लर में दीदी अन्दर चली गयी और हम दोनों बाहर बैठ गए. करीब ६ बजे रिशू भी वही आ गया और बोला सब ठीक है न. मम्मी ने कहा की एक बार पूछ लू की तुम लोग रश्मि को लेकर आ रहे हो न.

मनीष ने रिशू से कहा जाओ अपने लौड़े पर तेल लगा के रखो हम दुल्हन को लेकर आ रहे है. रिशू वापस चला गया. ६.३० बज गए पर अभी तक दीदी तैयार नहीं हुई थी. हमें लगा की प्लान चौपट हो गया. मैंने जा कर पुछा तो पार्लर वाली बोली ब्राइडल मेकअप में टाइम लगता है. फुल बॉडी हेयर रिमूवल, वैक्सिंग, ब्लीचिंग, फाउंडेशन इसी में कितना टाइम लगता है. हेयर स्टाइल सेट हो रहा है बस फिर कपडे ठीक करके भेज देंगे. १५-२० मिनट और लगेगा. खैर ७ बजे दीदी तैयार हो कर बाहर आई. मेरी और मनीष की तो सांस ही रुक गयी. हरे रंग के लहंगे में दीदी क़यामत लग रही थी. खैर हम जल्दी से दीदी को लेकर वहा से निकले और गाडी में बैठ गए. मैंने मनीष से जल्दी गाडी चलाने को कहा तो दीदी बोली जल्दी किस बात की अभी बहुत टाइम है.

मोनू: हमे पहले कामिनी आंटी के घर जाना है.

रश्मि: क्यों?

मोनू: तुम्हारी शादी से पहले आखिरी बार तुम्हे चोदने.

रश्मि: अरे अब टाइम कहाँ है पागल हुए हो क्या. गेस्ट हाउस भी बगल में है किसी ने देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी.

मोनू: अरे पहले वहां पहुचे तो फिर देखेंगे.

करीब १५ मिनट में हम वहां पहुच गए. कार हमने घर के अन्दर ही कर दी ताकि कोई देखे न. रिशू ने जल्दी से दरवाजा खोल दिया और हम तीनो घर के अन्दर घुस गए. रश्मि दीदी काफी घबरा रही थी.

कामिनी: काफी देर कर दी तुम लोगो ने. अब आधे घंटे में जो करना है कर लो. फिर हम सब चलते है. रश्मि तू घबरा मत. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. जा जल्दी से बेड रूम में. रिशू ने गुलाबो से बेड सजाया है तेरे लिए. सुनो अब कोई भी रश्मि के कपडे मत उतारना. रश्मि को घोड़ी बना देना और लहगा उठा के पैंटी उतार कर चोद लेना. चलो जल्दी करो तब तक मैं भी कपडे बदल लेती हूँ.

कामिनी आंटी की बातों से दीदी की घबराहट दूर हुई और वो कमरे में चली गयी पीछे पीछे हम तीनो भी अन्दर घुस गए. दीदी ने हमसे कहा देखो जल्दी जल्दी करलो पर देखना मेकअप और कपडे न ख़राब हो. समझे.
 
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