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Incest सपना-या-हकीकत

हम लोग घर पहुचे और दुकान तो हम दोनो के ना होने से बंद ही पडा था फिर हम लोग घर मे गये फिर छत पर चले गये

उपर सिर्फ सोनल दीदी थी , बुआ और अनुज भी नही दिख रहे थे ।

जैसे ही दीदी की नजर मुझसे मिली मैने उसको आंखे उठा कर हालचाल पूछा इशारो मे ही वो भी मुस्करा कर इत्मीनान होने का इशारा दी ।

दीदी - मा आप दोनो कमरे मे बैठो मै पानी लाती हू

मा - हा बेटा जरा ठण्डा लाना गला बहुत सुख रहा है

फिर हम लोग बेडरूम मे लगे सोफे पर बैठ गये और फैन चला दिया

सच मे बहुत आराम मिल रहा था

फिर दीदी एक ट्रे मे पानी और मीठा लेके आई

फिर हमने पानी पिया और सोफे पर रिलैक्स करने लगे ।

दीदी - मा खाना लगा दू खाओगी

मा - नही बेटा मुझे गैस हो रही है गर्मी की वजह से , इसे देदे

दीदी शरारती अन्दाज मे अपनी तरफ बुलाते हुए - आओ भाई खा लो

मानो खुद को भोगने के लिए बुला रही हो

मै मुस्कुरा कर झट से उठा और उसके पीछे किचन मे गया उसको पीछे से हग कर लिया

दीदी कसमसा कर मुझसे अलग हुई और बोली - पागल है क्या , मम्मी है बगल मे

मै - हमम ठीक है मेरा सरप्राइज़ लाओ फिर

दिदी - हा टेबल पर बैठ देती हू

मै अचरज मे पड़ गया कि ऐसा क्या है जो ये मुझे टेबल पर बैठने को बोल रही

फिर मै खाने की टेबल पे बैठ गया । इतने मे कोमल गरमा गरम आलू के पराठे और दही लेके आई

जिसे देख कर मेरे मुह में पानी आ गया

दीदी हस्ते हुए - कैसा लगा सरप्राइज़ भाई

मै मुह मे चबाता निवाला रोक कर दीदी को हसते हुए देख रहा था और समझ चूका था कि वो मेरा लोल कर चुकी थी सरप्राइज़ के नाम पर

मुझे गुस्सा आया और मै हाथ पीछे लेकर उसके चुतड को एक हाथ से जकड़ लिया

जिससे सोनल के चेहरे के भाव बदल गये और वो मुझे बार बार बेडरूम की तरफ इशारा करते हुए खुस्फुसा कर मम्मी है यही , मम्मी है यही बोल रही थी । साथ मे अपने एड़ीयो के बल गाड़ को ऊचा कर छुड़ाने की कोसिस भी कर रही थी

मै ह्सते हुए उसके चुतड के एक पाट को सलवार के उपर से मसल रहा था और जब दीदी समझ गई मै नही मानूँगा तो वो तेज आवाज मे मा को आवाज दी

दीदी - म्म्म्मीईईईई

मा कमरे से - हा क्या हुआ बेटा

मै झट से अपना हाथ हटा लिया और वो मौका पाकर कमरे मे जाते हुए बोली - मम्मी कहिये तो सर पर तेल लगा दू फिर आप सो जाना

ये बोलकर मेरे तरफ एक शरारत भरी मुस्कान से देखी और कमरे मे चली गयी ।

मै उसकी शरारत पर हसा और खाना खाने लगा फिर मै किचन मे हाथ धुल कर कमरे मे चला गया

जहा दीदी मा के सर की मालिश कर रही थी और मुझे दुर रहने का इशारा कर रही थी ।

मै बिस्तर पर बैठते हुए - अच्छा दीदी बुआ और अनुज कहा गये हैं

दीदी - बुआ तो अभी चाचा के लिए खाना लेके गयी है और अनुज स्कूल गया है ।

मै - चलो ठीक है मै भी थोडा आराम कर लू अह्ह्ह

बिस्तर पर लेटते हुए मै बोला

दिदी - क्यू दुकान नही खोलेगा

मा - हा बेटा दुकान खोल दे अभी मै आती हू निचे फिर तू आराम करना

मै बिस्तर से अंगड़ाई लेते हुए खड़ा हुआ - उम्म्ंमममंं अह्ह्ह थिक्क्क्क है माआआ जा रहा हू

फिर मै जानबुझ कर दीदी की तरफ बढने लगा और मुझे अपनी तरफ आता देख

दिदी - मम्मी

मा - हा बेटा

मै झट से दरवाजे तक आया तभी

दीदी - अब आप सो जाओ बिस्तर पर , मै पैर में तेल लगा देती हू

फिर मै पलट कर दीदी को देखा तो वो वही शरारती मुस्की के साथ हस रही थी ।

फिर मै मुस्कुरा कर निचे दुकान खोलने चला गया

दो दिनो से दुकान बन्द होने से कचरा भी जमा हो गया जिसे साफ करने मे मेरी हालत खराब हो गयी

लेकिन 2 घन्टे की मस्कत के बाद आखिर दुकान मे रौनक लौट आई ।

करीब 3 बजे बुआ घर आई जो इस समय साडी पहनी थी और उनका गदरायी जिस्म का उभार हर जगह से दिख रहा था ।

बुआ - अरे लल्ला तू कब आया

मै मुस्करा कर - आप जब चाचा को खाना देने गयी थी , बड़ी देर लगा दी आज वहा

बुआ - लल्ला वो छोटे ( चाचा) की दुकान पर मेरे एक सहेली मिल गयी थी वो भी राखी पर आई थी ना तो उससे बात करने मे समय लग गया और मुझे तो पता ही नही था न कि तुम लोग आ गये हो

मै मन मे - देखो रन्डी को कैसे झुट छिपाती है ,, जैसे मुझे नही पता की चाचा से चुद्ने ही जाती है रोज दोपहर मे

मुझे चुप देख कर बुआ - क्या हुआ बेटा बोल , और भाभी कहा है

मै - वो छत पर सो रही है थक गई थी

बुआ - ओह्ह कोई बात नही मै उपर ही जा रही हू बर्तन रखने

फिर बुआ अपने मोटे चुतडो को हिलाते उपर चली गयी ।

मै दो दिन से लगातर सेक्स से बहुत थक गया था और मुझे निद भी बहुत आ रही थी इसिलिए मै दुकान मे बैठे बैठे ही झपकी लेने लगा ।

इस दौरान मा कब छत से निचे आ गई पता ही नही चला

मेरी आंखे तो तब खुली जब वो प्यार से मेरे कन्धो को हिला कर मुझे जगा रही थी

मा - बेटा जा अन्दर कमरे मे सो जा

मै नीद भरी आँखो से मा का धुधला चेहरा देखते हुए - नही मा मुझे कोचिंग जाना है

मा - नही रहने दे आराम कर तू आज थक गया है

मै - नही मा काफी समय से गैप हो रहा है चलो आप एक मस्त चाय पिला दो मै हाथ मुह धुल के आता हू

मा - हा तू फ्रेश होकर आ फिर मै बना देती हू

मै - अरे नही मा उपर जा रहा हू तो बुआ या दीदी को बोल दूँगा

मा - अरे वो तेरी दीदी तैयार हो रही है कोचिंग के लिए और बुआ सोयी है अभी अभी

मै दीदी के बारे मे सुन के मुझे एक शैतानी सुझी - ठीक है रहने दो फिर मै बाद मे पी लूंगा

फिर मै झटपट उपर गया और सीढ़ी से सररर से उपर वाली मजिल पर गया जहा बाथरुम से पानी की आवाज आ रही थी

मै - अरे नहा रही हो की तैर रही हो दीदी

दीदी मेरी आवाज सुन कर बाथरुम के अन्दर से बोली - तू यहा क्या कर रहा है भाई

मै - वही जो तुम कर रही हो, नहाने आया हू तुम्हारे साथ

दीदी - मेरे साथ , पागल हो गया क्या???

मै हस्ते हुए - देखो जल्दी से दरवाजा खोलो मै सारे कपडे निकाल चुका हू जल्दी खोलो

दीदी चौकते हुए - पागल मत बन राज ,,, घर मे किसी को पता चला तो बहुत गडबड़ हो जायेगी ।

मै - अच्छा अच्छा ठीक है नहा लो मै यही हू टहल रहा हू

दीदी - बस 5 मिंट भाई

मै ओके बोल कर छत की बालकीनि से निचे गलियारे में टहलती लडकियों औरतो की गदराई घाटियो के नजारे देखने लगा तो कभी आस पास के मकानो पर देखने लगा

किसी किसी छत पर कोई लडकी दिख जाती तो उसपे थोडा फोक्स करता और फिर कही और ध्यान लगा देता

इसी दौरान मेरी नजर चंदू के छत पर गयी जहा चंदू की मा छत की चारदिवारी पर झुक कर बगल वाली एक आंटी से बाते कर रही थी ।

रजनी के बगल मे रामवीर भी खड़ा था और वो रजनी के बाहर निकले चुतडो को मैक्सि के उपर से सहला रहा था,

मै ये सीन देख के बहुत खुश हुआ

बीच बीच में रामवीर अपनी बीच की ऊँगली को रज्नी की गाड़ के दरारो मे घुसा दे रहा था लेकिन मजाल था रजनी पलट कर रामवीर को रोकती या सिसकी हो
 
इधर रामवीर लगातार रजनी की कोई प्रतिक्रिया ना मिलने से बेचैन होने लगा था , जैसा की आम मर्दो को होता है जब वो अपनी काम मे व्यस्त पत्नियो को रिझाते है लेकिन वो अपने भावनाओ को ऐसे रोक देती है मानो सब कुछ उदासीन हो गया और बदले मे पति झल्ला जाते है

दुर से ही सही लेकिन मुझे स्पषट समझ आ रहा था कि रामबीर जैसे जैसे रजनी की गाड़ मे ऊँगली को खोदता वैसे वैसे ही रजनी के चेहरे के भावो को पढने की कोसिस करता

मै इस शो का मज़ा ले ही रहा था कि दीदी मेरे कन्धे पर हाथ से थपथपा कर - क्या हीरो क्यू हस रहा है

मै पलट कर देखा तो दीदी एक महरून रंग की चुस्त लेगी के साथ हरे रंग की कुर्ती पहने हुई थी और उसका गोरा बदन हल्की बारिश की धूप मे चटक चमक दे रहा था

फिर मेरी नजर उसकी उभरी हुई घाटियो पर गयी जहा चेहरे और बालो का पानी रिस कर जा रहा था

दीदी मेरे नजर को भाप गयी और एक शरारत भरी मुस्कान से मेरे चेहरे के ठुडी से उपर किया जो उसकी चुचियो मे गड़े हुए थे और बोली - नजारा देख लिया हो तो जा नहा ले हीहीहि

मै - अभी कहा अभी तो नजारा शुरू हुआ है दीदी , वो देखो

मै चंदू की छत पर इशारा करते हुए बोला

लेकिन जहा दीदी खड़ी थी वहा से उन्हे सिर्फ रजनी ही दिखी ।

दिदी - वहा तो रजनी दीदी किसी से बात कर रही है इसमे क्या नजारा

मै उनका हाथ पकड कर अपनी जगह पर किया और उसके पीछे खडे होकर बोला - अब देखो

अब तक रामबीर रजनी की मैक्सि कमर तक उठा दिया था और पैंटी मे हाथ डाल कर उसके गाड़ के दरारो मे ऊँगली घुसेदे हुए था

दीदी की नजर उसपे गयी तो वो मुह पर हाथ रख कर हसी । मै उसके पीछे सट कर खड़े होकर उसके कान मे बोला - देखा ना नजारा

दीदी ह्स्ते हुए - हम्म्म्म्ं , लेकिन रजनी दीदी तो कुछ रेपोन्स ही नही कर रही है कितना नियंत्रण है उनके पास

जहा दीदी रामवीर की रासलीला देखने मे मगन होने लगी वही मै दीदी को धीरे धीरे अपनी गिरफ्त मे लेने लगा और अब मेरा खड़ा लण्ड दीदी की गाड़ को छुने लगा था

और मेरे हाथ उनकी कमर को कस चुके थे

उधर रामवीर को ये मह्सूस होने लगा कि वो हार जायेगा तो उसने आखिरकार वो किया जिसकी ना तो मुझे उम्मीद हो सकती थी ना रजनी को

रामवीर ने रजनी के कदमो मे आकर उसकी पैंटी को निचे किया और उसकी जांघो को खोल कर अपनी जीभ रज्नी के चुत के निचले हिस्से पर लगा दी । अपनी कमजोर नश पर रामवीर का प्रहार रजनी झेल ना सकी और दिवार पकडे पहली बार रजनी कसमसा उथी ।

ये सीन देख कर मै बहुत उत्तेजित होने लगा और अपना हाथ सोनल के चुचियो तक ले जाने लगा जिसका आभास होते ही दीदी मेरे बाहो मे छटपटाने लगी और हसते हुए छोडने की दुहाई करने लगी ।

मै हस्ते हुए अपने लण्ड को उसकी गाड़ पर दबाते हुए आखिर कर एक हाथ मे दीदी की एक चुची को थाम ही लिया और जैसे ही मेरे हाथ मे दीदी की चुची आई , वो एक दम शांत हो गयी लेकिन उसके सांसो की रफ्तार बढ़ गई ।

दीदी तेज सास लेते हुए - रा रा रज्ज्ज्ज भाई प्लीज यहा नही कोईई दे ,,,,,ख अह्ह्ह्ह उम्म्ंम प्लीज अह्ह्ह्ह मा मान जा भा भा भा भैईईई उफ्फ्फ

मै भी दीदी की बात से सहमत हुआ और उसको छोड दिया

कुछ देर तक वो मुझसे तरह तरह की बाते करने लगी और मुझे इस बात का अन्दाजा तक नही होने दिया की वो मेरा ध्यान भटका रही थी और मौका मिलते ही वो दौड़ कर हस्ते हुए निचे भाग गयी ।

मै उसकी शरारत पे फिर हसा और वापस चंदू की छत पर देखा तो वो दोनो वहा नही थे शायद निचे जा चुके थे

मै भी मुस्कुराते हुए चंदू के छत पर हुए वाक्ये को याद कर फ्रेश हुआ और निचे चला गया जहा दीदी मेरा ही इंतजार कर रही थी दुकान मे

वो मुझे आता देख हसी और मैने उसे रास्ते मे सबक सिखाने को इशारा किया ।

फिर हम दोनो अपना नोटस लेके निकल गये कोचिंग के लिए,,,,,

......................
 
हम दोनो रास्ते में फुसफुसा कर बाते करते हुए जा रहे थे और मै बाजार से बाहर आने का इंतजार कर रहा था

क्योकि हमारी कोचिंग चंदू के चौराहे वाले घर मे थी और

बाजार से चौराहे के बिच 400 मीटर का फासला था जो काफी सुनसान होता है इतना भी नही की कोई आये जाये ना

बस मेन बाजार या चौराहे जितना रौनक नही होती थी । थोडा खाली खाली होता था और थोड़े अगल बगल खेत होते थे ।

जब हम बाजार से 50 60 मिटर आगे आ गये

मै - तुम ऐसा क्यों कर रही हो दीदी

दीदी मुस्कुरा कर - मैने क्या किया

मै उसके करीब आने को होकर बोला - बताऊ अभी , बताऊ हा

दीदी हस्ते हुए - नही भाई प्लीज सड़क पर नही

मै - वहा था तो बहुत याद आ रही थी ना अब क्या हुआ हा

दीदी - भाई मुझे समय चाहिए थोडा इन सब के लिए ,,, क्या तुम इतना भी नही करोगे मेरे लिए ।

वो मुह बना कर मासूमियत से बोली

मै तरस खा कर - हम्म्म ठीक है लेकिन चिढ़ाना बंद करो

दीदी हस्ते हुए - तुझे छेड़ने मे मज़ा आता है भाई हिहिहिही

मै - जिस दिन मै छेड़ दिया ना तब और भी मज़ा आयेगा

दीदी शर्मा कर - चुप कोई सुन लेगा

हमारी ऐसे ही हल्की नोक झोक जारी रही कोचिंग तक

फिर हम क्लास मे गये लेकिन इस बार भी मै ज्यादातर दीदी पर फोक्स किया रहा , और वो भी मुझे कभी कभी अपनी तरफ देखता पाकर सामने बोर्ड पर देखने का इशारा करके मुस्कुरा देती ।

करीब साढ़े चार बजे चंदू जल्दी जल्दी मेरे बगल मे आकर बैठ रहा था कि सर की नजर उसपे गयी और शुरू कर दिया बेज्ज्त करना कि कहा लेट हो गए और ना जाने क्या क्या

वही चंदू बीच क्लास में खडे होकर मन ही मन टीचर पर अपनी भड़ास निकाल रहा था

फिर वो बैठा

चंदू - ये भोस्डी वाला औकात से ज्यादा उड़ रहा है इसको निकलवा देता हू अपने घर से अगले महीने , मादरचोद कही का

मै हस्ते हुए - तो साले लेट क्यू आया , उसकी आदत जानता है ना लेट आने पर किसी को नही छोडता , उस दिन जब ठाकुर की नतिनी को नही छोडा तो तुझे क्या हहहाहा

चंदू चौक कर - क्या कहा इस भोस्डी के पिल्ले ने मेरी मालती को भी बेज्ज्त किया ,,, मादरचोद को तो कल ही खदेड़ रहा हू

मै अचरज से - साले तेरी मालती कैसे बे ,,, ठाकुर गाड़ मे तेरे इतनी गोलिया भरवा देगा की गाड उठा भी नही पायेगा वजन से

चंदू दिवानो की तरह उदास मन से - भाई सच मे मै उसे चाहता हू

मै - अबे लवड़े तू उसे चाहता है ये इम्पोर्टेंट नही है वो ठाकुर की नातिन है ये इम्पोर्टेंट है

चंदू - भाई तू कुछ मदद कर ना

मै - मै क्या करू मदद तू खुद उसको दुर करने पर अडा है

चंदू - मै कैसे

मै - साले तू ये कोचिंग बंद करवा देगा तो वो वैसे भी नही आयेगी यहा तो क्या करेगा और वैसे भी वो शहर के कालेज मे पढने जाती है

चंदू झल्ला कर - अबे वो तो मै ऐसे ही फेक रहा था ,,,अगर मै मेरे बाप को बोलूंगा तो वो मुझे ही घर से भगा देगा

मै ह्सने लगा

चंदू - भाई प्लीज कुछ कर ना यार , एक मुलाकात तो करा दे प्लीज भाई प्लीज

मै कुछ बोलता कि तभी चंदू के लिलाट पर लिखने वाले मार्कर का ढक्कन पट्ट से लगा जो हमारे सर ने फेका था और उसके मुह निकला- ये मादर्चोद मानेगा नही

मै हस्ते हुए - अभी पढ ले फिर कभी बाद मे बात करेंगे इसपे

फिर हमने क्लास खत्म की और फिर हम तीनो ( मै ,दिदी और चंदू ) साथ मे घर के लिए निकल गए

मै सोचा - यार ये अमन क्यू नही आया

मै दिदी के करीब गया और धीरे से पुछा - आज अमन नही आया

दीदी मुस्कुरा कर - वो अपने चाचा के साथ कही बाहर गया है कुछ दिन के लिए

मै इस बात को इग्नोर किया और घर की ओर जाने लगा ।

फिर सब कुछ सामान्य ही रहा। रोज रात मे पापा मा और बुआ को चोदते है तो कभी गोदाम मे बुला लेते और दिन मे बुआ चाचा से चुदती और मौका मिलने पर मै भी दोपहर मे कभी मा तो कभी बुआ को पेल देता था ।

धीरे धीरे 10 दिन गुजर गये

इस दौरान मेरे और दीदी के बीच काफी नजदीकिया आई और हम साथ मे काफी घुल मिल कर रहते । जब भी मुझे मौका मिलता मै उन्के साथ थोडी बहुत मस्ती कर लेता लेकिन उनकी शरारत कभी कम नही होती जब भी मौका मिलता मुझे परेशान जरुर करती और मुझे दिदी का ये बात बहुत अच्छी लगती थी ।

वही कोमल से कभी कभी बात होती तो मेरे लण्ड की आस लगाये हमेशा मेरे खडे लण्ड की तस्वीर मागती जब मै रात को मालिश करता और कभी कभी वीडियो काल पर दिखाने को बोलती ।

वैसे तो मै रात मे कभी भी मालिश नही करता था लेकिन कोमल को दिखाने के चक्कर मे आदत होने लगी ।

फिर 10 दिन बाद चाची निशा और राहुल सब भोपाल से वापस आ गये।

एक दिन चाचा के यहा रुक कर शिला बुआ अपने घर चली गई ।

बुआ के जाने के बाद घर सुना सुना सा लगने लगा ।

जब तक वो थी दिन रात सेक्स की आअह्ह्ह उह्ह्ह से निचे का कमरा चीखता ही रहता ।

हमारी लाइफ भी पहले जैसे नही रही अब सबके मन मे बीते एक महीने मे हवस ने एक खास जगह बना ली थी ,,, एक तरफ जहा मा को मुझसे दिन मे प्यार मिल जाता था , वही दीदी भी मुझसे काफी करीब हो चुकी थी और पापा को भी नये चुत की तलब होने लगी जो कभी कभी मा चुदाई के समय मुझसे बताती रहती थी ।

लेकिन जैसा भी था समय की इस रवैये से हम सभी खुश थे जिसने हमें जिन्दगी मे मज़े लेने के ढ़ेरो आसार दिखाये ।

समय बीता और फिर तय हुआ की अगले महीने से नये घर का काम शुरू होना है। जिसमे कुछ दिन ही बाकी थे ।

उधर निशा की वापसी हो चुकी थी जो मुझसे मिलने को बेकरार थी और मुझे नये घर के लिए तैयारी से फुर्सत नही मिल रही थी ।

और इधर मेरे कन्धे पर दो जरुरी भार थे जिनको समय रहते पुरा करना था ।

एक तो दीदी की शादी अमन से कराने के लिए मा को मनाना

दुसरी कोमल के घर की समस्या को पापा के साथ मिल कर पुरा करना था

लेकिन दोनो की पहल के लिए मुझे सही मौके का इंतजार करना था ।

देखते है दोस्तो कि राज अपनी जिम्मेदारी को कैसे निभाता है और आने वाला समय राज को कौन से नये सबक सिखाता है ।

जल्द ही एक नये रोमांच का आरम्भ होने को है

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बीते एक महिने का अनुभव मेरे जीवन मे बहुत बदलाव ला चूका था , जहा एक तरफ मुझे मेरे पहले सेक्स का अनुभव हुआ वही दुसरी तरफ एक सभ्यता का नकाब ओढी ये सोसाइटी असल मे हवस से कितनी भरी है वो मुझे समझ आने लगा था ।

हवस के इस दलदल मै भी देख समझ कर पाव उतार दिया था और इस लत के साथ मेरे कंधो पर जिम्मेदारीयो के बोझ उम्र के साथ बढ़ रहे थे ।

मेरे नये घर का काम शुरू हुआ जो चौराहे पर था और चंदू के मकान से महज दो घर बाद ही था ।

घर के नीव के लिए पूजा रखी गई जिसमे चाचा और चंदू का परिवार आया और मैने मा को बोल कर जानबुझ कर कोमल और उसकी मा को भी बुलवाया ताकि मेरे पापा से भी मेल जोल बढ़ जाये ।

2000 sqaure फीट की जमीन थी एक किनारे उत्तर पूरब की दिशा देख कर पंडित जी ने भूमि पूजन शुरू की ,,, मा और पापा एक साथ पूजन स्थल पर थे बाकी सब बगल मे लगे टेन्ट मे बैठे थे और भी मुहल्ले की औरते आई थी । निशा और दीदी दोनो तो पूजापाठ के काम मे लगी थी और प्रसाद का सारा समान चंदू के मकान पर ही तैयार करवा रही थी ।

मै एक किनारे खडे होकर सबकी आवभगत मे लगा था ।

पूजा समाप्त होने की थी बस आखिरी अध्याय बाकि था और मै चंदू के घर प्रसाद की टोकरी लेने गया जहा दीदी और निशा ही थी

मै दरवाजा धकेल कर अन्दर गया तो हाल मे कोई नजर नही आया । तख्त पर दो टोकरी तैयार थी जिसमे मनभोग और फल काटे हुए थे ।

मुझे अजीब सा लगा अंदर की ये दोनो कहा गयी होगी ।

मै एक आवाज दी - दिदीईई कहा हो आप लोग

फिर मै सोचा शायद उपर गयी हो तो मै जीने से आवाज देने गया तो देखा कि वो जीने के दरवाजे पर बैठे आपस मे बाते कट रही थी और खुब हस रही थी ।

निशा - सच कह रही हो दीदी ,, इन लड़को को लचकती कमर मिल जाये तो लट्टू की तरह आगे पीछे घुमेन्गे ,,, अब मेरे मामा के यहा की बात लेलो

दीदी अचरज से - क्या हुआ वहा निशा

निशा - अरे वहा शादी मे मामी के भाई के लडके मेरे पीछे पढ गये और घूम फिर किसी न किसी बहाने से मेरे पास आ जाते ,, उम्र मे छोटे सब थे लेकिन किसी ने दीदी नही बोला मुझे

दीदी - हाहहहह्हह तब तुने तेरे छोटे आशिको को लटके झटके दिखाये की नही

निशा ह्स्ते हुए - और क्या बिलकुल दिखाये दीदी

दीदी - ओह्हो फिर तो कोई ना कोई बाथरूम थका जरुर होगा तेरी याद मे हाहहहा

निशा- छीई दीदी आप भी ना

मै उनकी बाते सुन कर मस्त मुस्कुरा रहा था और सोच रहा था कि लडकिया आपस मे बहने ही क्यू ना हो इनसब टॉपिक पर खुल कर बाते करती है । तभी मेरा फोन पर पापा का नं रिंग हुआ और मुझे याद आया कि मै किस लिये आया

मै जीने के निचे से ही - ओ हेल्लो लटके झटके वाली दीदीयो ,,,,जल्दी चलो पापा बुला रहे है ।

मेरी लटके-झटके वाली बात पर दोनो झेप गयी और एक दुसरे को देखते हुए सहम कर उठ रही थी । डर तो दोनो मे से किसी को नही था क्योकि दोनो मेरे से खुल कर ही थी लेकिन फिर भी वो एक दूसरे के सामने ऐसे जता रही थी कि जैसे उनकी चोरी पकड़ी गई हो

फिर वो निचे आई और मै फल की टोकरी लेके हस्ते हुए बोला - जल्दी से लेके आओ इसको

फिर मै घूम कर आगे जाने लगा

निशा खुसफुसाते - दीदी लगता है राज ने हमारी बाते सुन ली अब क्या होगा

उनकी खुसफुसाहट भी उस खाली मकान मे गूज रही थी

मै तेज आवाज - अभी भी सुन रहा हू जल्दी से टोकरी लेके आओ

फिर मै प्रसाद लेके पूजा वाली जगह आया और मेरे पीछे वो दोनो आई ।

निशा ने प्रसाद की टोकरी रखी और मुझसे नजर चुराते हुए अपनी मा के पास बैठ गई और मै दीदी के बगल मे खड़ा होकर उनकी तरफ झुक कर उनके कान मे बोला - क्या यही सब बाते करती हो आप लडकिया

दीदी अपने दोनो हाथ बांधे खड़ी थी मेरे बगल मे जैसे ही मेरे सवाल सुने तो मुस्कुरा कर अपनी कोहनी मेरे बाजू पर मारते हुए चुप रहने को बोली ।

इधर पूजा समाप्त हुई और फिर मैने और अनुज ने मिल कर प्रसाद बाटे और सबको दिये ।

फिर मा ने पापा को विमला मौसी से मिलवाया और कोमल से भी ।

कोमल ने पापा के पैर छूये

पापा - अरे खुश रहो बेटा

पापा - और भाई साहब नही आये

चुकी पापा विमला मौसी से पहले नही मिले थे तो उनको नही पता था कि अब उन्के पति नही रहे है और विमला हमेशा सजसवर के ही रहती तो कोई भी अंजान ऐसे ही कहेगा ।

पापा की बाते सुन के विमला की आखे भर आई और मा ने पापा को धीरे से कान मे बताया कि इनके पति को मरे 4 साल हो गए है

पापा को बहुत अफ्सोस हुआ - माफ करना बहन जी मुझे नही पता था

विमला अपनी भरी आँखो से आन्सू साफ करती हुई - अरे कोई बात नही भाईसाहब

फिर पापा ने विमला को साथ मे घर चलने का निमन्त्रण दिया और मैने जिद की तो वो मान गयी ।

फिर सारे औरते और लोग चले गये घर

फिर मै अनुज और राहुल मिल कर सारा समान ठीक किये और एक घंटे बाद घर के लिए निकल गये ।

घर पहुचे तो सारे लोग उपर के बेडरोम मे एकठ्ठा हुए थे बस मा और चाची नही नजर आ रही थी ।

राहुल और अनुज महिला मंडली देखकर छत पर खसक लिये और चाचा अपनी दुकान पर चले गये थे

कमरे मे कोमल , निशा और दीदी आपस मे बाते कर रहे थे क्योकि उनको एक बाते करने के लिए नया मेहमान मिल गया था

वही पापा और विमला मौसी एक साथ बाते कर रहे थे ।

फिर मै मा और चाची की आवाज किचन से सुना तो उधर चला गया

मा - अरे वाह शालिनी चाय की खुस्बू तो मस्त आ रही है

चाची - आखिर बनाने वाली भी तो मस्त है ना दीदी हिहिही

मा ह्स्ते हुए - बिलकुल बिलकुल देवर जी ने मस्त माल चुना है हहाहहह

चाची - मस्त माल ती जेठजी ने भी चुन है और लगता है इस उम्र मे भी पुरा ख्याल रखते है

मा - और नही तो क्या , कहो तो कह दूं तुम्हारा भी रख देंगे

मुझे जेठानी देवरानी की चुलबुली बात सुनने मे बड़ा मज़ा आ रहा था

चाची शर्मा कर - क्या दीदी आप भी मैने ऊँगली दिया तो आप हाथ ही पकड लेते हो

चाची ट्रे मे कप लगाकर चाय छानते हुए बोली

मा उनको चाय छानता देख - क्यू डरती हो क्या जेठ जी के हथियार से ,

चाची मुस्कुरा कर - मै क्यू डरने लगी दीदी अभी चाहू एक ही झटके मे जेठ जी के पसिने छुड़वा दू हिहिही

मा - अच्छा ये बात है

चाची - तो

मा - लगी शर्त वो तुमको देखेन्गे तक नही

चाची - ऐसा है फिर तो आज देख ही लेते है कि जेठजी का सबर

मा हस्ते हुए - हार जाओगी शालिनी बात मान लो

चाची - तब का तब देखेंगे अभी बात मेरी जवानी के जलवे की है

मा ह्स्ते हुए - अरे मै मजाक कर रही थी पागल तू भी ना

चाची - नही फिर भी मै देखू तो खुद को इतना मेनटेन करने का कुछ फायदा है भी या नही

मा हसरही थी

इधर चाची ने अपने साडी का पिन अपने कन्धे से निकाल कर पल्लू को ढीला किया फिर सर पर रख ओढ़ लिया और चाय की ट्रे लेकर बोली - अब चलो दीदी

मा ह्स्ते हुए - तू बावरी हो गयी है ,, जा जो करना हो कर बाद मे मुझे मत कहना कुछ गडबडी हुई तो हीहीहिह

मै झट से बेडरूम मे गया और पापा के बगल मे बैठ गया ।

इधर मा और चाची चाय लेके कमरे मे आई

पहले चाची ने विमला को चाय दी और जैसे ही पापा के तरफ आई तो ज्यादा झुकी जिससे उनका पल्लू झुल गया और 36 की चुचियो की झलक मुझे और पापा दोनो को मिल गयी ।

पापा फटी आखो से चाची की चूचियो को निहारते हुए चाय का प्याला उठाया लेकिन वो ट्रे मे ही गिर गया और पापा की ऊँगली जल गयी

चाची एक कातिल मुस्कान से - ओहो भाईसाहब आराम से लिजीये ना

पापा ने एक नजर चाची के कामुक चेहरे को देखा और वापस चुचियो को निहारते हुए दुसरा प्याला ले लिया

चाची फिर मुझे चाय दी और फिर मा और बाकी तीनो को दी

इस दौरान पापा चाची की मटकती कमर पर नजर गड़ाये चाय पी रहे थे और धोती मे उनका लण्ड टनटना गया ।

उधर मा और चाची आपस मे बैठ कर मुस्कुरा रही थी क्योकि चाची जीत जो गयी थी।

चाय खत्म हुई तो विमला ने जाने की इजाजत मागी और फिर आने का बोल कर कोमल के साथ चली गयी ।

फिर थोडी देर बाद चाची और निशा भी चले गये ।

फिर दोपहर के खाने का इंतजाम होने लगा और मै दुकान खोल कर बैठ गया ।

मै सोचने लगा क्या अभी पापा से बात करू या बाद मे क्योकि मै जल्दीबाजी नही चाहता था ।

पापा मेरे वैसे बहूत सहायक प्रवृति के इन्सान से और किसी का भी बुरा नही सोचते थे लेकिन फिर भी एक दिन के पहचान वाले लिये मदद मागना मुझे जमा नही तो मैने इस बात को टाल दिया और धीरे धीरे उस दिन को 6 महीने का बीत गये ।

मेरा नया घर लगभग तैयार हो चुका था लेकिन अभी फर्नीश का काम बाकी था ।

इन 6 महिनो मे मै सिर्फ घर के कामो मे ही लगा रहा और समय के साथ पापा मुझ पर पहले से ज्यादा भरोसा करने लगे और हर काम से पहले मेरे सुझाव को लेना बेहतर समझने लगे ।

इस दौरान मैने दीदी के मस्ती करने में मै पीछे नही रहता था दिया और फिर फोन पर बाते करके जितना हो पाया उनको खुश रखा । कोमल और निशा भी मुझसे फोन पर ही बाते कर लिया करती थी । मा भी मेरे काम से खुश होती और मेरी सेहत का ध्यान रखना सुरु कर दी और दुलार मे पहले से ज्यादा चुदने लगी । हर रोज दोपहर मे मै मा को बिना चोदे रह नही पाता क्योकि रात मे मुझे नये घर की रखवाली के लिए वही सोना पड़ता था और पूरी रात मै दीदी से तो कभी कोमल से चटपटी बाते करके काट लेता ।

इन 6 महिनो मे मैने खुद से पहल करके कोमल के घर से नजदीकीया बढाई और पापा विमला मौसी की मजबूरी समझ कर मुझे कभी नहीं टोका । आये दिन त्योहारों पर पर आना जाना लगा रहा जिससे जल्दी ही हमारी फैमिली अब फैमिली फ्रेंड हो गयी ।

मै समझ चुका था कि अब समय आ गया है कि जल्द से जल्द पापा के सामने कोमल के घर की बात रखी जाय ।
 
ऐसे ही एक दिन

मै पापा और मा नये घर पर काम देखने गये । सारा काम लगभग खतम होने को था और सब खुश थे ।

मै - पापा मुझे आपसे कुछ बात करनी है

पापा खुश होकर - बताओ ना बेटा

मा - हा बोल ना मेरा बच्चा क्या बात है बहुत उदास लग रहा है

मै मन गिरा के हिम्मत करते हुए - मुझे आपको कुछ बताना है

पापा - लग रहा है रागिनी लडकी का मामला है क्यू जनाब

मै - नही पापा वो कोमल ....

पापा - ओहो तो कोमल है वो हम्म्म ,,,वैसे पन्सद तो बहुत अच्छी है बहुत प्यारी बच्ची है

मै - क्या पापा , मै और कोमल अच्छे दोस्त है ऐसा कुछ नही है हमारे बिच

मा - फिर क्या बात है ,,कोमल को कोई दिक्कत है क्या बेटा

मै उदास मन से - हम्म्म्म्ं

पापा - क्या हुआ बताओ बेटा

मै - पापा उसको उसके चाचा लोग परेशान करते है

पापा - मै समझा नही बेटा

मै मा को देखा तो - पापा वो वो

पापा - रागिनी तुम थोडी देर के लिए बाहर जाओ शायद तुम्हारे सामने नही बोलना चाहता है

मा - ठीक है आप लोग बाते करो फिर मुझे आवाज दे देना

फिर मा बाहर चली गयी

पापा - हा बोलो बेटा

मै रुआस होकर - पापा कोमल के चाचा लोग बहुत दुष्ट है और वो लोग..........

फिर मैने वो सारी बाते बताई पापा को जो कोमल ने मुझे बताई कि कैसे कैसे उसके चाचाओ ने उसकी मजबुर मा को फसा कर जमीन के कागज ले लिए और अब कागज के बदले कोमल के साथ सम्ब्न्ध बनाने के उसकी मा को मजबुर कर रहे है

पापा मेरी बात सुन के चुप थे और मुझे रुआस देख कर गले लगा लिया

पापा - चुप हो जा बेटा ,,सब ठीक होगा तू चिंता मत कर मै सब ठीक कर दूँगा

मै पापा से चिपक कर फफ्क पडा - थैंक यू पापा

इत्ने मे मा आ गई और मुझे रोता देख वो रोने लगी और बार बार मेरे सर पर हाथ फेर कर पुछने लगी - फिर पापा ने सब कुछ मा को ब्ताया जिससे मा को धक्का लगा

मा - इतना सब कुछ हो गया और विमला ने मुझसे एक शब्द तक नही कहा

पापा - वो बदनामी के डर से किसी से नही बोल सकती थी वो तो कोमल बेटी ने राज से कह दी नही तो पता ही नही चल पाता हमे भी ।

मा - मेरा बेटा कितना बड़ा हो गया है और समझदार भी

मा मेरे माथे को चूम कर अपने सीने से लगा ली और मै भी उनको हग करके उनकी मुलायम चुचियो मे अपनी आँखो को आराम देने लगा

फिर पापा ने मा से और मुझसे पूछा कि आगे क्या किया जाय

मा- ऐसा करती हू कल ही मै राज को भेज देती हू विमला के घर वो उसको लिवा कर बर्तन वाली दुकान पर लाएगा वही उससे बात की जायेगी

पापा - हा ठीक कह रही हो रागिनी तुम वहा गोदाम मे एकान्त होगा और वो खुल कर बात भी कर पायेगी ।

फिर हम सब वापस घर आ गये ।

शाम को कोचिंग से वापस आकर मैने कोमल को फोन किया

फोन पर

कोमल - और हीरो क्या हाल चाल

मै - बस अपने यार की याद आ रही थी तो सोचा बात कर लू

कोमल - हा तू बस बात ही कर हा नही तो कभी मिलने नही आ सकता है इतना भी क्या बिज़ी यार

मै - ठीक है फिर कल आ रहा हू तेरे घर

कोमल खुश हो कर - सच मे मेरे घर आयेगा

मै - हा भाई क्यू

कोमल - अरे मुझे यकीन नही हो रहा है लास्ट टाईम दिवाली पर मिठाई देने आया था हिहिही

अभी 3 महिने हो गये

मै - बस दिवाली की मिठाई याद है और वो भूल गयी जो रसमलाई मैने चटाई थी

कोमल - धत्त पागल छोड ना वो सब और ये बता कब तक आयेगा

मै - यही कोई 11 बजे तक खाना खा पी के

कोमल - खबरदार जो खाना खा के आया ,, कल मै तेरे लिए स्पैशल लंच रेडी करूंगी तू टाईम से आ जाना

मै हस कर - ठीक है मेरी मा आ जाऊंगा

कोमल - हम्म्म गुड

मै - सुनो कोमल मुझे तुमको कुछ बताना है

कोमल - हा बोल न

मै - वो मैने पापा से आज तुम्हारे घर के प्रोब्लम के बारे मे बात की है

मेरी इस बात से चह्कती कोमल एकदम शांत हो गयी

मै - और पापा ने कल विमला मौसी को बुलाया है बात करने के लिए,,अब जल्द ही तेरी टेनसन खत्म हो जायेगी दोस्त

कोमल रोते हुए - थैंक यू राज

मै - अरे रो क्यू रही है पागल

कोमल - कुछ नही ,,मै मा को बता दू ये बात या नही

मै - नही मै खुद आकर मा से विमला मौसी की बात करवा दूँगा नही तो वो तुझे डाटेंगी

कोमल खुश होकर - ठीक है राज

मै - चलो अभी मै डिनर के बाद बात करता हू

कोमल - ठीक है राज थैंक्स बाय

फिर मैने फोन रखा और शाम को मा के साथ कोमल के मुद्दे पर बात हुई ।

रात का खाना खा कर मै नये घर पर सोने चला गया और अगली सुबह नहा धोकर नासता करके कोमल को खबर देदी की मै 11 बजे तक आ जाऊंगा और 11 बजे की बजाय 10 बजे ही उसे घर पहुँच गया उसको सरप्राइज़ देने ।

जारी रहेगी .....

...........................
 
नया परिचय

कोमल का परिवार

पापा - रमेश ,अब जिन्दा नही है

मा - विमला , पूर्व परिचित

भाई - मनोज 19 साल

बडे चाचा - महेश उम्र 45 एक नं का कमीना इन्सान

बड़ी चाची - अनिता 44 साल , मोटी और भारी शरीर लेकिन मन से बहुत ही कुटिल औरत

बेटा - गुलशन , 20 साल

छोटे चाचा - सुरेश 44 साल , हमेशा बडे भाई महेश के साथ घटिया कामो मे लगा रहता है

छोटी चाची - महिमा 42 साल सुन्दर और सुशील इसके विचार अच्छे है लेकिन पति कि आदतो से परेसान होकर काफी सालो से मायके मे ही रहती है ।

बेटी- जिया अभी काफी छोटी है और मा के साथ ही नाना के यहा रहती है ।

(सभी किरदार के डिटेल वर्तमान समय के है पाठक इस बात का खास ध्यान रखे)

कोमल के दोनो चाचा एक साथ अलग घर मे रहते है जो कि कोमल के घर से सटा हुआ है । लेकिन कोमल का घर उसके चाचाओ के घर से काफी बड़ा था

मै 10 बजे तक टहलता हुआ कोमल के घर पहूचा और मेन गेट खुला ही था और मै चुप चाप घर मे घुसा और कुछ दुर बरामदे से होते हुए हाल मे गया

वहा भी सन्नाटा था तभी मुझे पास के कमरे से किसी के गुनगनाने की आवाज आई और मै उसी तरफ गया।

फिर मै खिडकी से कमरे मे झाका तो मेरी जीभ टपकने लगी अब सीन ही कुछ ऐसा था

अंदर कमरे मे विमला मौसी नहा कर आई थी और अपना पेतिकोट बान्ध रही थी जिससे उनके खुले चुचे हिल रहे थे ।

उन भूरे घुंडीयो वाली भीगी रसिली मुलायम और दूध सी गोरी चुचीयो को देख कर मेरा लण्ड पैंट उछलना शुरू कर दिया और कब मै उसे सहलाने लगा मुझे पता ही नही चला ।

तभी मेरे खुशीयो को नजर लग गई क्योकि विमला ने अपने चुचो पर ब्लाउज चढा लिये और बटन बंद करते हुए बोली - कोमल बेटा राज कितने बजे आने वाला है

तभी उस कमरे के बगल वाले कमरे से आवाज आई जो कोमल की थी

कोमल - 11 बजे बोला है मा

विमला - ठीक है , मै भी तैयार हो लेती हू

मै सोचा अब तो यहा कुछ देखने को मिलेगा नही तो क्यू ना कोमल से कुछ मस्ती करू

मै चुपचाप वहा से हट गया और बगल के कमरे मे जाने को हुआ तो देखा

मै मन मे - अरे ये तो किचन है इसका मतलब कोमल अभी खाना बना रही है । मै धीरे धीरे कमरे की खिडकी की तरफ गया जो खुली हुई थी

अंदर झाका तो कोमल अंदर टीशर्त स्कर्ट पहने पनीर काट रही थी और सामने के टेबल पर रखे चूल्हे पर मसल भुन रही थी ।

कमरे मे मेरे मन पसंद मसालो की खुस्बु आ रही थी ।

मै अब चुपचाप जहा था वही बैठ गया फिर घुटनो और हाथ के बल धीरे धीरे झुक कर चलता हुआ किचन के दरवाजे से होकर अंदर कोमल के बगल मे आ गया ।

कोमल अपने काम मे मगन थी और मै सांसो तक को रोके हुए उसके पीछे धीरे से खड़ा हुआ और उनके कान मे हौले से बोला - सरप्राइज़ज्ज्ज

कोमल झट से पलती और मुझे देख कर चिल्लाने को हुई लेकिन मैने तुरंत उसके मुह पर हाथ रख कर चुप रहने का इशारा किया

मै - याररर चुप रहो मौसी सुन लेगी

कोमल - लेकिन तुम तो 11 वजे आने वाले थे ना

मै उसके कमर मे दोनो तरफ से हाथ डाल कर अपनी तरफ खिचते हुए - क्यू पहलें नही आ सकता

कोमल मेरी बाहो मे आते ही शर्मा गयी - क्यू नहीं आ सकते हो

मै उसके गुलाबी होते गालो को चूमते हुए - बहुत दिनो से मौका नही मिल रहा था और आज मिला है तो ।

कोमल शर्मा कर - कैसा मौका राज

मै उसके गाड़ पर हाथ फिराते हुए - अभी बताता हू

कोमल - नही अभी नही मुझे खाना वनाना है राज

मै उसको किचन डेस्क की तरफ घुमा कर उसको पीछे से पकड कर अपना लण्ड अन्दर से ही उसकी गाड़ पर रगड़ते हुए - तू बनाओ ना अपना खाना मै तुमको नही रोकूगा

कोमल - ठीक है ,,, लेकिन परेशान मत करना प्लीज

फिर कोमल अपने काम मे लग गई और मै उसके पीछे वही घूटनो के बल बैठ गया और उसके चुतडो पे अपना चेहरा रख दिया

कोमल निचे मेरे तरफ देखते हुए - पागल उठो ना मम्मी है बगल मे पलीज

मै नही माना और उसके आँखो मे देखते हुए उसके स्कर्ट को उपर किया अन्दर अपना चेहरा डाल दिया ।

उसकी ब्लू रंग की फुल पैंटी मे उसके चुतड सब तरफ भरे हुए थे और मुझे उसके चुतड और चुत की खुस्बु के नशे मे डुबो रही थी

वही मेरा स्पर्श पाकर कोमल सिहर उठी और उसके मुलायम जांघो के रोए खडे हो गये । जैसे जैसे मेरा चेहरा उन्के चुतडो की दरार मे पैंटी के उपर से रगड़ खाता वैसे वैसे कोमल किचन टेबल को पकडे अपनी एड़ी उचका कर सिस्क देती थी ।

मैने अपने दोनो हाथ भी अन्दर लेके गया और उसकी पैंटी को स्कर्ट के अन्दर से ही निचे उतारने लगा और जल्द ही उसकी पैंटी पैरो मे आ गई और मेरे जीभ उसकी चुतडो की दरारो मे ,,,,जब जब मै अपनी जीभ को कोमल के गाड़ के पाटो से उसकी गहरी दरारो मे ले जाता वो अपनी गाड़ को सिकोड़ कर अपने पाटो को सख्त कर लेती और जैसे ही मेरे हाथ उसके नंगे कूल्हो पर सरकते वो अपनी गाड़ को ढिला कर देती

मै धीरे धीरे कोमल की मुलायम गाड़ के फैलाते हुए छेद तक गया और गरदन को उचका कर लपालप उसे चाटना शुरू कर दिया

जैसे जैसे मेरे जीभ उसके सुराख को छुते कोमल सिस्क कर एड़ी उठा देती

कोमल - उम्म्ंम राज क्या कर रहे हो अह्ह्ह मा बस करो उम्म्ं इस्स्स्स उफ्फ्फ

मै बिना कुछ बोले उसके जांघो को फैलाये हुए उसके चुत के निचले हिस्से से गाड़ के उपरी सिरे तक लकीरो मे जीभ को नचा रहा था ।

इस दौरान कोमल सिस्क रही थी कि तभी विमला मौसी ने किचन के बाहर खिडकी से देखते हुए आवाज लगा दी

विमला - कोमल क्या कर रही है , मसाला जला देगी क्या

विमला की आवाज सुनते ही हम दोनो की फट गयी और मै कुछ पल के लिए रुक गया

और इधर हड़बड़ी मे कोमल ने झट से काराही मे पानी डाल कर मसाले को चलाने लगी

विमला कोमल को पसीना पसीना होते देख - तू ठीक है ना बेटी,,,कही वो गुलशन आया तो नही था न आज

कोमल भावों को छिपाए हुए - नही मा मै ठीक हू वो गैस के पास हू न ती गर्मी है

विमला - ठीक है मै ये कपडे डाल कर आती हू ,, वैसे क्या क्या तैआर हो गया है

कोमल नोर्मल होते हुए - मा सब कुछ तैयार है बस पनीर ऊबालना है

मै कोमल को नोर्मल होता देख वापस से अपने काम मे लग गया और चुत के निचले हिस्से में जीभ को घुमाने लगा जिससे कोमल टेबल को थामे अकड़ने लगी

विमला - क्या हुआ है तुझे आज

कोमल - वो बस कबसे खड़ी हू ना तो पैर दर्द हो रहे हैं बस

विमला - ठीक है मै आती हू उपर से

फिर विमला के जाने पर उसके चप्प्ल की आहट दुर होती समझ आई और यहा कोमल ने मेरा सर पकड़ कर अपनी गाड़ मे तेज़ी से दबाने लगी

मै कोमल को उत्तेजित देख उसे अपनी तरफ घुमा कर सीधा उसके चुत पर मुह लगा दिया और होठो से उसके मुलायम दाने को चुबलाने लगा

कोमल की आहे अब खुल कर बाहर आने लगी और वो अब वो मेरे सर को अपनी चुत पर दबाते हुए अपनी गाड़ हिलाने लगी

कोमल - आह्ह्ह राजज तुम तो जादुगर हो उफ्फ्फ मा इस्स्स अह्ह्ह और चुसो और अह्ह्ज ऐसा लग रहा है मै उड़ रही हू और चाटो इसे अह्ह्ह

मै कोमल मे चुत मे जीभ घुसाये अपने उपर के होठ को उसके चुत के उपरी चमडीयो पर रगड़ रहा था

कोमल - अह्ह्ह राअज्ज उफ्फ्फ मेरा निकलेगा राज्ज्ज अह्ह्ह मा रुको मत आह्ह आह्ह औसे ही ओफ्फ्फ मा उह्ह्ह

कोमल तेजी से गाड़ हिलाते हुए मेरे सर को अपनी चुत पर जोर लगाकर दबाते हुए अपनी कमर को झटकने लगी और उसके चुत का नमकीन पानी मेरे जीभ से होकर मुह मे जाने लगा

जब कोमल ने झटका देना बंद किया और मेरे सर से पकड को हल्का किया तो मै भी एक गहरी सास लेते हुए वापस से चुत को चाट कर साफ किया और कोमल को उसकी पैंटी पहना दी और चुत के उपर अपना मुह रगड़ के साफ किया

कोमल हाफते हुए हस रही थी

मै खड़ा हुआ और खुद के कपड़े ठीक किये

कोमल - अब जाओ हाल मे बैठो मै ये पनीर डाल के आती हू

मै उसे एक किस्स किया बाहर हाल मे आकर बैठा ही था की तभी विमला हाल मे लगे सीढ़ी से निचे आती हुई दिखी

मै उठ कर उसके पैर छूने गया

विमला ने मुझे रोक लिया और बोली - अरे नही लल्ला मुझ अभागन के पैर ना छू ,,,मै क्या दे सकती हू तुझे

मै थोड़ा गुस्से मे - खबरदार मौसी आज के बाद ऐसे लफ्ज अपनी मुह से निकाला तो ,,, मै कभी भी आपसे बात नही करूँगा

विमला - माफ कर दे मेरे बच्चे ,,और विमला ने मेरे माथे को चूम लिया

विमला - तू बैठ मै पानी लेके आती हू

मै मुस्कुरा कर हा मे सर हिलाते हुए वापस सोफे पे बैठ गया

फिर विमला कमर मटकाते हुए किचन मे गयी और एक ट्रे मे पानी और गुलाबजामुन लेके आई

मै - अरे मौसी यही से तो आ रहा हू इसकी क्या जरुरत है

मौसी मेरे बगल के सोफे पर बैठते हुए - ले पानी पी फिर कुछ बोल

मै एक गुलाबजामुन लेके मुह मे डाला और पानी पिया

विमला - अकेले क्यू आया रागिनी क्यू नही आई

मै - वो मै आपको घर लिवा जाने के लिए ही आया हू

विमला अचरज से सोच भरी अवस्था मे - मुझे लेने ,,, लेकिन क्यू

मै ह्सते हुए - वही से आपको भगा ले जाऊंगा हिहिहिही

विमला हस्ते हुए - बदमाश बहुत बिगड गया है तू

मै - क्यू नही भागोगी मेरे साथ हिहिही

विमला मुस्कराते हुए - हम्म्म्म्म्ं सोच रही हू मै भी हिहिहिही

इतने मे कोमल किचन से आई और मुझसे ऐसे मिली मानो अभी हमारे बीच कुछ हुआ ही नही

कोमल - हाय राज

मै - और कोमल कैसी हो

कोमल मुस्करा कर - मै ठीक हू और आंटी कैसी है

मै - सब मस्त है आओ बैठो

फिर कोमल मेरे बगल मे बैठ गयी

विमला - अच्छा अब बता क्यू आया यहा

मै थोडा शांत हुआ और बोला - वो मा ने बुलाया है आपको

विमला ह्सते हुए - अरे कुछ तो बताया होगा ना

मै - नही बस बोली है अगर ना नुकुर करे तो मुझसे बात करवा देना

विमला - फिर लगा फोन मै बात करती हू

मै दीदी के मोबाइल पर फोन किया

फोन पर

दीदी - ओए होए हीरो अभी तो गया है न घर से इतनी जल्दी याद आ गई हा

मै दीदी की बात सुन के झेप गया और थोडी हड़बड़ी मे

मै - हा वो वो जरा मा को फोन देना विमला मौसी बात करेंगी

दीदी - तू वहा कब चला

मै - दो ना दीदी मा को जरुरी है

दीदी - रुक निचे जा रही हू ,,ऐसे भडक रहा है जैसे खा जायेगा हुउह

फिर मा के पास पहुच कर फोन मा को देते हुए उसकी आवाज आई- मा राज फोन किया है

मा - हा तू जा उपर

मा - हा बोल बेटा कहा है

मै - मै विमला मौसी के यहा हू लो बात करो

मा - हा दे

फिर विमला और मा के बीच बाते चली जिसमे सिर्फ विमला के बोले अल्फ़ाज से मै समझ गया कि मा उनको डाट कर घर बुला रही है

विमला - चल ठीक है मै अभी आ जाउंगी

फिर विमला ने फोन काट दिया

मै - बोला था ना चलने को खामखा डाट सुनी आप हिहिहिही

विमला - अरे कोई बात नही चलता है रे हमारे बिच ये सब , चल उठ अब खाना खा लेते है ।

फिर मै डायनिग टेबल पे गया और कोमल ने हम तीनो के लिए खाना लगाया

पनीर , गुलाब जामुन , पुलाव , पापड़ , भिन्दी की सुखी सब्जी , दाल फ्राई , पूरी और रायता

आह्ह मज़ा ही आ गया खाने मे ।
 
खाने के बाद कोमल थाली सब किचन मे ले जाने लगी और इधर

मै - चलो मौसी अब चलते है

मौसी - अरे रुक बेटा थोडा तैयार हो लेने दे ना

मै मौसी को एक नजर उपर से निचे घूरा , मौसी ने ब्लैक रंग की सिफान सारी पहनी थी जिसमे उसके बदन का हर कटाव निखर कर बाहर आ रहा था और होठो पे महरुन लिपस्टिक,,, कयामत थी विमला क्यामत

मुझे ऐसा देखता देख विमला - अरे क्या हुआ ऐसे क्या घुर रहा है

मै - देख रहा हू ऐसी कौन सी कमी है जिसके लिए आप फिर से तैयार होने जा रही हो

विमला शर्मा गयी - अच्छा ठीक है बाबा नही जाती बस

मै - हम्म्म ठीक है चलो

विमला - कोमल बेटा मै जा रही हू अभी एक दो घन्टे मे आ जाऊंगी

मै - अरे तो कोमल अकेले रहेगी यहा

विमला - अरे अभी मनोज आता होगा स्कूल से 12 बजे तक आ जाता है ।

मै थोडा आशवस्त हुआ फिर हम दोनो घर से निकल गये

मेन रोड पर आकर हमने एक ई-रिक्शा किया और निकल गये मेरे दुकान की तरफ

विमला - अरे बेटा कहा लिवा जा रहा है मुझे

मै ह्स्ते हुए - बोला था ना भगा के ले जाऊंगा हिहिहिही

विमला झेप कर ह्सते हुए - ओह्ह ये लड़का भी ना ,

विमला थोडा अपनी भौहो को चढा कर गुस्सा दिखाते हुए मुस्कुरा कर - अरे बता ना बेटा , क्यू परेशान कर रहा है

मै उसके चेहरे को देख के हस्ते हुए - हिहिहिही आपको तो गुस्सा करना भी नही आता । अरे सबर करो अभी जान जाओगी

विमला इससे पहले कुछ बोलती की हमारा मार्केट वाला दुकान आ गया

मै - बस बस भैया यही रोक दो

फिर मैं और विमला बाहर आये और मैने उस रिक्सेवाले को पैसे दिये

विमला मेरे दुकान को देख के - पागल दुकान पर क्यू लाया

मै - अरे मौसी , मा यही आई है ना

फिर हम दोनो दुकान की तरफ बढ़े जहा गल्ले पर पापा बैठे हुए थे और हमे साथ आता देख खडे हुए और विमला का स्वागत किया ।

जारी रहेगी

.........................
 
पापा विमला को देख कर गदगद हो गए और एक बार अच्छे विमला की जवानी का एक्सरे करने के बाद उसे अंदर आने का आमंत्रण दिया ।

पापा - आइयें बहन जी आईये अन्दर चलते है । रागिनी भी अंदर है

फिर विमला मौसी आगे गयी और फिर उनके पीछे पापा उनकी मटकती गाड़ को देखते चले और उनके पीछे मै था

गोदाम के रेस्टरूम मे पहुचे जहा मा बैठी हुई थी और विमला को देख कर वो गले मिली और फिर अपने बगल मे बिठाया

पापा बिस्तर पर बैठ गये और मुझसे बोले - बेटा जा 4 कोल्ड ड्रिंक बोल दे

विमला - नही भाईसाहब हम लोग तो खाना खा के आये है ।

मा - और बता बच्चे कैसे है

विम्ला मुस्कुरा कर - सब ठीक है रागिनी लेकिन तुने मुझे अचानक से क्यू बुलाया

मा - अब तू हम लोगो को पराया समझने लगी है तो क्या करती बुलाना ही पडेगा

विमला सोच मे पड़ गई- मैने कब तुम लोगो को पराया समझा ,, तुम लोग ही तो हो जिनके साथ मै परिवार का मतलब मह्सूस करती हू नही तो ....

इत्ना बोलकर विमला चुप हो गयी

मा - आगे बोल ना अब रुक क्यू नही

विमला की आँखो मे आसू थे - क्या रागिनी मै समझी नही

मा थोडा गुस्से मे - यही कि नही तो तेरे देवरो ने तो तेरी जिन्दगी नर्क बना रखी है ,,,

विमला की आखे बड़ी हो गई और आंसू छलक कर गालो तक आ गये और वो एक नजर मुझे देखी उसे लग रहा था कि कहीं मैने उस दिन जंगल मे हुई बात को कही मा से तो नही ना बता दीया

मा - उसको मत देख और बता तुझे मेरी कसम है

विमला फफ्क पड़ी और रोते हुए - क्या बताऊ रागिनी पिछ्ले 4 सालो मे मेरी जिन्दगी जह्नम बन गयी है ,,,, मेरे ही देवरो ने मेरी मजबूरी का फायदा उठाकर अपनी हवस का शिकार बनाया और मेरे पति की जायजाद के सारे कागज हड़प लिये और अब वो

इतना बोल के विम्ला रोने लगी

मा - और अब वो कोमल को भी अपनी हवस मे शामिल करना चाहते है क्यू

विमला अचरज और आसुओ से भरी आखो से मा की तरफ देखी मानो मा को कैसे सब पता चल गया

मा - देख क्या रही है विमला मुझे सब पता है लेकिन एक बार भी तुने मुझे अपना समझ कर बताने की कोसिस नही की

विमला रोते हुए मा से - मुझे माफ कर दे बहन ,,मै तुझे कोई तकलीफ नही देना चाहती थी

मा - ठीक है ये रोना बंद कर और चल मूह धुल के आ उठ

फिर मा विमला को लेके पीछे मुह धुलवा के आई और फिर उनको पानी पीने को दिया

पापा - देखिये बहन जी हम सब आपके अपने ही है आप जरा खुल के बतायेगी ये सब कब कहा से सुरु हुआ

विमला एक नजर मुझे देखी तो पापा बोले - उसे यही रहने दिजीये ,,, सबसे पहले उसी ने हमे बताया कि आप कितनी जिल्लत झेल रही है और उसे ये सब कोमल बिटिया के माधयम से पता चला

मा - और तू सुन ले खबरदार जो मेरी फुल सी बेटी को डाटा इसके लिए तो

विमला थोडी हसी - हा ठीक है बाबा नही बोलूंगी कुछ तेरी चमेली के फूल जैसी बेटी को

फिर सब हसने लगे

पापा - बहन जी प्लीज बताईये न

फिर हम सब शांत हो गये

विम्ला ने एक गहरी सांस ली और बोलना शुरु किया - उन दिनो मेरा संसार उजड़ गया था । मेरे पति की ट्रेन दुर्घटना मे मौत हो गयी और हम अकेले पड गये । ऐसे में मेरे सामने मेरे परिवार का फरिश्ता बन कर आया मेरा बड़ा देवर महेश ,

रोते को जानवर भी सहारा देदे तो लोग उसको अपना मान लेते हैं जबकि महेश घर का था । उसने मेरे भाई दीदी जीजा के सामने मेरे परिवार के देखभाल की जिम्मेदारी ली और मेरे पति के क्रियाकर्म से लेकर ब्रह्मभोज तक की जिम्मेवारी अपने सर लेके किया । सबको यकीन हो गया था कि सुख दुख मे महेश एक अच्छे परिवार के सद्स्य के तरह हमारा साथ देगा ।

लेकिन हम सब गलत थे धीरे धीरे समय बीता और वो हमसे बहुत घुल मिल गया जिसमे मेरी बड़ी देवरानी भी शामिल थी । "उसकी मीठी बाते याद करती हू तो आज मेरा कलेजा जल जाता है भाईसाहब " , विमला गुस्से से लाल होते हुए बोली

पापा - आप शांत रहे बहन जी , आगे बतायीये

विमला - फिर समय के महेश मेरे साथ नजदीकिया बढाने लगा और धीरे धीरे मै भी उसके बातो के जाल मे फस कर उसके एहसानो के कर्ज तले दब कर उसकी हवस का शिकार हो गई ।

विमला - ऐसे ही एक दिन महेश ने मुझे बताया कि ट्रेन हादसे मे मरे हुओ को सरकार उनकी संपति जाच कर एक लाख का मुआवजा देने का ऐलान की है और मै भोली अनपढ उसकी ये शातिर चाल को समझ ना पाई और उसने मेरे घर के कागजात अपने पास रख लिये थे ।

जब मै उससे बोलती कि कागज का क्या हुआ तो वो हर बार नये बहाने मारने लगा और मुझे समझ आने लगा कि वो मेरे कागज हड़प चूका है । क्योकि आये दिन उसके व्यवहार बदलने लगे और उसने इस घिनौने काम मे अपने छोटे भाई को भी शामिल किया और फिर मुझे ब्लैकमेल कर जबरन मेरे छोटे देवर सुरेश से सम्बंध बनवाये ,, लेकिन इस बात का पता जब छोटी देवरानी को चला तो वो घर छोड कर मायके चली गयी ।

लेकिन इन दोनों हैवानो के चंगुल मे मै फस गयी और अब ये मुझसे मेरी बेटी का सौदा करना चाहते हैं और मेरे बेटे को पीटते हैं । मेरे बडे देवर का बेटा गुलशन आये दिन मेरी बच्ची को परेसान करता है

ये सब बाते बोल कर विमला फिर से रोने लगी

मा ने वापस विमला को चुप करवाया और बोली - ठीक है अब शांत हो जा ,, सब ठीक हो जायेगा

पापा - हा बहन जी आप बिलकुल चिन्ता ना किजीये मेरा एक मित्र वकिल है वो आपके कागजात दिलवाने मे हमारी कानूनन मदद करेगा ।

विमला अपने आसुओ को साफ करते हुए उम्मीद भरे नजरो से पापा की बाते ध्यान से सुनती है ।

पापा - जहा तक मेरा अंदाजा है वो कागज अभी आपके पति के नाम से होंगे उन्हे आपके नाम पर करवाना पडेगा बस। जो मामूली फारमैलिटी से भी हो जायेगा । बाकी महेश और सुरेश को सबक कैसे सिखाना है उसका इन्तेजाम मै कर लूंगा ।

पापा की बाते सुन कर हम सब के चेहरे पर मुस्कान आ गई । खास कर मुझे तो बहुत खुशी थी कि मैने मदद के सही आदमी का हाथ थामा था ।

इधर विमला उठी और मेरे पास आई । पहले उसने मुझे प्यार से देखा और मेरे माथे को चूम कर मुझे अपने सीने से लगा लिया ।

विमला - तेरा बहुत बहुत शुक्रिया बेटा ,,इतने सालो से जो हिम्मत मै नही दिखा पाई वो तुने कर दिया

मै उनसे अलग होकर - इसमे शुक्रिया कैसा मौसी , क्या मै आपका बेटा नही हू

विमला रोते हुए वापस से मुझे अपने सीने से लगाते हुए - हा बेटा तू तो मेरा राजा बेटा है मेरे लाल

मै धीरे से अलग होकर विमला के कान मे - मौसी छोडो ये सब अकेले मे करते है हग वग , आप सबके सामने किये हो

मेरी बाते सुन कर विमला हस पड़ी - बदमाश कही का

और मेरे गाल को चूम ली

मै विमला से अलग होकर सबके सामने अपने गाल पोछते हुए - क्या मौसी सब गिला गिला कर दिया

विमला ह्स्ते हुए वापस से मेरे दुसरे गाल को भी चूम ली जिससे मम्मी पापा भी हसने लगे

मै - ओहोहो अब छोड भी दो ब्च्चे की जान लोगे क्या

पापा हस्ते हुए - अरे बेटा कोई प्यार करे तो मना नही करते है ,,,और तेरी तो कितनी अच्छी किस्मत है कि दोनो गालो पर चुम्मीया मिल रही है ,,,मुझे देख सब सुखा सुखा है हाहाह्हाह्हा

मा हस्ते हुए - क्या जी बच्चे के सामने कैसी बाते करते हो आप भी

पापा - अब जो है वो कह रहा हू ,,,,देख नही रही बहन जी ने सामने से ही मुझसे मुह फेर लिया

इस बार विमला पापा की बातो से शर्मा कर लाल हो गयी ।

मा - अब बस भी करो वो शर्मा रही है जी

फिर हम सब हसने लगे ।

पापा - बहन जी आप बिलकुल निश्चिंत हो जाईये अब पहले मै मेरे वकिल दोस्त से बात कर लूंगा फिर जैसा होगा आपको बता दूँगा फिर आगे जो होगा उसी हिसाब से किया जायेगा

विमला पापा के बगल मे बिस्तर पर बैठ कर हाथ जोडते हुए - बहुत बहुत मेहरबानी होगी भाईसाहब

विमला को हाथ जोडते देख पापा ने तुरंत विमला के हाथ रोक लिये - अरे अरे बहन जी ये क्या पाप करवा रही है मुझसे ,, आप मेरे पत्नी की सहेली है उसकी बहन जैसी है मेरे लिये आप घर की एक सद्स्य की तरह है

पापा - प्लीज आप मुझे अपना ही समझिये

विमला - माफ करना भाईसाहब ,,, कोमल के पापा के जाने के बाद जितनी इज्ज्त आप लोगो ने दी शायद मै इस जन्म मे सोच भी पाती और ये सब आपका बड़प्पन है जो मुझ अबला को सहारा दे रहे है ।

मा - बस विमला अब शांत हो जा बहुत हो गया ,,,इन्होने कह दिया ना तो हो गया समझ

मा - बेटा राज जा 4 ग्लास जूस बोल दे ठण्डा

पापा - हा बेटा वो बबलू काका होगे दूकान मे उनको बोल दे वो लेते आयेंगे

मै उठ कर दुकान मे गया और बबलू काका को 4 ग्लास पपीता शेक लाने को बोला और वाप्स आ गया ।

यहा आया तो देखा कि अभी विमला का हाथ पापा के हाथ मे ही है और वो ऐसे ही बाते कर रहे है ।

फिर ऐसे ही बाते चली और फिर काका जूस लेके आये

विमला - अरे इसमे तो आइक्रिम है

पापा - अरे पीजिए बहन जी थोडा मन भी शांत होगा और ताकत भी आयेगी ।

फिर सबने जूस खतम की और मै विमला को लिवा कर वापस उसके घर छोडने को बाहर आया

मै - चलो मौसी रिक्शा आ गया

विमला - अरे उसकी जरुरत नही है मै चली जाऊंगी बेटा तू रहने दे ,, हा अगर घर पर रुकना हो तो बता हिहिही

मै - अभी तो आना जाना है ही मौसी कभी घर भी रुक जाऊंगा

फिर विमला सबसे विदा होकर अपने घर चली गयी । मा भी पापा को बोल कर मुझे लेके घर की तरफ चली गयी

घर पहूचा तो देखा की दुकान पर अनुज बैठा था आज

मै - अरे मा ये स्कूल नही गया

मा - नही बेटा मैने ही रोका था

मै अनुज की तरीफ मे - ओह्ह लग रहा है अब अनुज भी दुकान देख स्म्भाल लेता है

अनुज थोडा खुश मन से - और क्या ,,अब मै घुमने भी नही जाता हूँ

मा उसके बालो मे हाथ फेरते हुए - हा मेरा अनुज भी बड़ा हो गया है

हम अक्सर ऐसा करते है कि छोटे बच्चों के कंधो पर हल्की फुल्की जिम्मेदारीया देके उनकी आदतो मे सुधार ले आते है और बदले मे उनकी तारिफ कर उनका अच्छे काम के लिये मनोबल बढ़ाते है ।वही सब मा अनुज के साथ कर रही थी ताकि मेरी अनुपस्थिति मे वो दुकान को थोडा बहुत सम्भाल सके ।

लेकिन एक दिक्कत भी बढ़ जाती है जब बच्चो को नये काम से मज़ा आने लगता है तो वो जिद करके वहा से हटना नही चाहते क्योकि बाल स्वभाव ही कुछ ऐसा होता है और वही अनुज करने वाला था आने वाले पलो मे ।
 
शाम के 3 बज गए थे और आज मैने मा को चोदा नही था मैने मा को इशारा भी किया तो वो मुस्कुरा कर अनुज की तरफ इशारा करते हुए ना बोल देती ।

मै थोडा उदास चेहरा बना कर उनसे गुजारिश करने लगा

मा मुस्करा कर - अनुज बेटा ऐसा कर अब तू जा थोडा टहल ले

अनुज दुकान मे लगी घूमने वाली कुर्सी पर बैठे हुए इधर उधर घुमा रहा था - नही मा मुझे यही अच्छा लग रहा है

मा - अरे बेटा थोडा बहुत घुमना खेलना भी चाहिये जिससे देह मे ताकत बनी रहती है ,,, जा थोडी देर अपने दोस्तो के साथ खेल ले

अनुज उदास सा मुह बनाकर -- नही मा मै नही जाऊंगा ,,,वो सब बहुत गंदे है

मा - क्या मतलब गंदे है

अनुज रुआस सा होकर - नही मा मै नही ब्ताऊगा बस

मा थोडा सख्ती से अनुज के कन्धे हिला कर - बता क्या बात है अनुज

अनुज कुर्सी पर बैठे बैठे गरदन नीची किये आसू बहा रहा था - लेकिन कुछ बोला नही

वही मै अनुज के गंदे दोस्तो का मतलब समझ गया था ।

समय के साथ अनुज बड़ा हो गया था और इस साल 9वी मे पढ भी रहा था तो मुहल्ले और स्कूल के लडके कैसे आपस मे बाते करते है मै समझ सकता था ।

ये वो दौर होता है जब बच्चे अपने युवा अवस्था मे अपने कदम रखते है । उनके तन मन मे यौवन का बीज फलना सुरु हो जाता है , लिंग के आस पास झाटो के रोए निकलना शुरु हो जाते है , हल्की मूछ के बाल भी दिखने लगते है ।

इसी समय लड़को को अपने हमउम्र की लड़कियो के प्रति उनकी शर्ट और कुर्ती मे निकले छातियो के उभारो पर आकर्षण होने लगता है ,,,वही पहली महवारी मे आते ही लडकीया अपने से बडे दिदी या क्लास की लडकियो के संपर्क मे आकर समय से पूर्व ही सजना सवरना शुरू कर देती है। जिनसे इस दौरान लड़को मे होड़ भी सुरु हो जाती है कि कौन किसकी है ।

वही दुसरी तरफ लडके गाव या एरिया के लोगो के संगत मे आकर सेक्स की बाते करना सुरु कर देते है । धीरे धीरे महज एक साल का अंतर एक नादान बच्चे को युवा वर्ग मे ला देता है ।

ये सब मेरे मासूम अनुज के साथ भी हो रहा था और पहले मेरे साथ भी हुआ था तो मै उसके दिल की बात समझ सकता था कि कैसे कोई लड़का सीधा सेक्स के मुद्दो पे बाते करे ।

लेकिन मा उसे बार बार सख्ती से बोल रही थी और वो बस सर निचे किये रो रहा था

मै - अरे मा रहने दो क्यू डाट रही हो ,,अच्छा है कि वो उन गंदे दोस्तो के साथ नही जाना चाहता था

मा - लेकिन राज

मै मा को इशारा करके बोला की मै बात करूँगा

मै - चलो अनुज जाओ तुम मुह धुल कर आओ फिर तुम्हे दुकान मे बैठना है मै कोचिंग जाऊंगा ना

अनुज मेरी बाते सुन के सर उपर किया तो उस्का चेहरा पुरा आसुओ से चखत गया था

अनुज - हा ठीक है भैया आता हू

फिर वो छत पर गया

मा - राज तुने मुझे रोका क्यू

मै - मा मै जानता हू वो क्या बात होगी जो अनुज नही बोल रहा है आपके सामने ,, याद मै जब इसकी उम्र का था तो मै भी आवारा दोस्तो का साथ छोड दिया था

मा - हा अचानक से कयू

मै मा को आश्व्त कर - वो मै बाद मे ब्ताऊगा और आज अनुज को लिवा कर मै नये घर सोने जाउँगा ताकि वो मुझे खुल कर अपनी बाते बताये ।

मा खुश होकर - ठीक है बेटा ,,, कितना ख्याल रखता है तू सबका

मै - मा वो मेरा ही भाई है और समय रहते मुझे उसे गलत रास्ते पे जाने से रोकना भी मेरा फर्ज है ।

मा - हा सही कह रहा है तू , और मुझे लग रहा है कि वो जरुर आवारा लड़को ने कुछ गलत बात बोली होगी तभी मेरा अनुज नही जाता है घुमने

मै - हो सकता है मा या नही भी , अब वो अनुज से बात करने पर पता चलेगी ।

मै - आप चिन्ता ना करे मै उसे समझा दूँगा ।

फिर अनुज निचे आया और मै तैयार होने उपर चला गया ।

और समय से दिदी के साथ कोचिंग चला गया

शाम को कोचिंग से घर आया तो पापा भी आ गये थे और दुकान मे मा से बाते कर रहे थे ।

मुझे आता देख पापा ने मुझे दुकान मे ही रोक लिया जबकि दिदी उपर चली गयी ।

मै - पापा क्या हुआ आप बात किये वो वकिल अंकल से

पापा - हा बेटा मैने तुम लोगो के जाने के बाद सुभाष से बात की थी और बोला है कि कागज विमला जी के नाम पर करवाने के लिए वो कागज कोर्ट मे पेश करना जरुरी है तभी बात आगे बढ़ पायेगी

मै थोडा सोच मे पड़ गया कि अब क्या होगा क्योकि कागज तो महेश के पास है और वो देगा नही इतनी आसानी से

मै - पापा लेकिन कागज तो उस महेश के पास है ना

पापा - हा बेटा पता है हमे

मै - तो फिर कैसे बात आगे बढेगी

पापा मुस्कुरा कर - वो मैने सोच लिया है बेटा तू फिकर ना कर

मै खुश होकर - तो बताओ ना पापा कैसे मिलेगा

पापा थोडा संकोच करते हुए कभी मुझे तो कभी मा को देख कर हस रहे थे

मै - प्लीज पापा बताओ ना

पापा - बेटा वो मै तुझे अभी नही बता सकता

मै - क्यू पापा

पापा - अरे भई समझ , सब कुछ तुझे नही जानना चाहिये ।

मै थोडा अजीब सा मुह बना कर - ऐसा क्या बात है जो मै नही जान सकता

पापा - देख बेटा ये काम निकलवाने के लिए मैने मेरे मित्र संजीव ठाकुर की मदद ली है

मै सन्जीव ठाकुर का नाम सुन कर चौक गया क्योकि उसके पिता राजीव ठाकुर चमनपुरा के सबसे बड़े और समृध इन्सान थे । चमनपुरा क्या आस पास जितनी बस्तिया थी वो सब के मालिकार भी थे । उसी राजीव ठाकुर की नातिन थी मालती जिसका दीवाना मेरा लंगोटीया यार चंदू था ।

मै खुश होकर भी अचरज मे - लेकिन संजीव ठाकुर से आपकी दोस्ती कैसे हुई

पापा थोडा गर्व और मुझे इत्मिनान देते हुए - बस कुछ रिश्तो की कोई वजह नही होती बेटा वो खुद ब खुद बन जाते है । मेरे जवानी के समय मे मैने एक बार संजीव भाई की जान बचाई थी ।

मै - लेकिन कब और कैसे

पापा - बेटा वो हुआ यू था कि संजीव भाई अपनी राजदूत मोटरसाइकिल से किसी रिश्तेदार के यहा से आ रहे थे लेकिन बरसात के मौसम मे उनकी गाड़ी चमनपुरा की सीमा पर फिसल गयी और उनको बहुत चोट लगी ।

उस दिन मै अपने बाऊजी के साथ खेत मे घान की रोपाई करवा कर लौट रहा था और मेरी नजर उन पे गयी तो वो राजदूत के नीचे दबे हुए थे और पैर मे काफी चोट लग गई थी ,,,उस दिन मैने और बाऊजी ने मिल के उनको पास के गाव के हस्पताल ले गये । बस उस दिन से उन्होने मुझे अपना दोस्त बना लिया

मै - वाह पापा

मै - तो फिर आगे बताओ ना कैसे ये काम होगा

पापा - वो सब तू मुझ पर छोड दे । किस्मत ने साथ दिया बस कुछ ही हफ्तो मे ये काम हो जायेगा ।

मै - लेकिन मुझे भी बताईये न

मा - बेटा जिद मत कर तेरे पापा ने जो सोचा होगा अच्छा ही सोचा होगा ।

मै खुश होकर - ठीक है पापा जैसा आपको ठीक लगे लेकिन काम खत्म होने के बाद मुझे बताना जरुर

पापा हस्ते हुए - अच्छा ठीक है अब जा फ्रेश हो ले और कुछ चाय नासता कर ले

फिर मै उपर चला गया और रात के खाने के बाद अनुज को भी अपने साथ लिवा कर नये घर पर सोने चला गया ।

देखते हैं दोस्तो कहानी आगे जाकर क्या मोड लेती है ।

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UPDATE 62

रात के खाने के बाद मै और अनुज साथ मे निकल गए नये घर के लिए

रास्ते में

अनुज - भैया मुझे क्यू लाये , यहा मच्छर कटेगा तो मै सोउँगा कैसे

मै - अरे छोटे एक दिन की तो बात है , फिर तेरी मर्जी

अनुज चुपचाप मेरे साथ चलता रहा और फिर हम नये घर पहुचे ।

मै ताला खोल कर अन्दर गया और पीछे से अनुज दरवाजा बंद करके आया

हम लोग सीढियो से उपर की छत पर गये जहा हाल मे पहले से मच्छरदानी वाली चौकी लगी थी ।

फिर मैने सारे बिस्तर झाड़ कर फिर से लगाया और फिर मच्छरदानी लगा कर हम दोनो अन्दर आ गये ।

फरवरी का महीना था तो थोडी ठण्ड होती थी रात मे उसके लिए एक कम्बल रखा था मैने ।

मै - क्यू अब नही काटेगा ना मच्छर

अनुज ह्स्ते हुए - हा भैया नही काटेगा हिहिह

मै - तब और बता पढाई लिखाई कैसी है तेरी

अनुज - सब ठीक है भैया बस दो महीने बाद परीक्षा है

मै - और स्कूल मे कोई तंग नही करता न तुझे

अनुज - नही भैया

मै - फिर वो कौन से दोस्तो की बात कर रहा था तू शाम को

अनुज चुप हो गया और छत की तरफ देखने लगा ।

मै - देख छोटे तू अब बड़ा हो रहा है और तेरी उम्र से मै भी गुजर चूका हू तो तेरी सम्स्या भलीभांति समझ सकता हू , तू मुझे अपने स्कूल का सीनियर दोस्त समझ ले और बता आखिर बात क्या है

अनुज - भैया वो मेरे दोस्त गंदी गंदी बाते करते है और लड़कीयो के बारे गन्दा गन्दा बोलते है

मै - तू खुल कर बोल भाई

अनुज - भैया वो लोग पेलने वाली बाते करते है और लड़कियो के दूध के और उनकी बुर को लेके गाली दते है

मै - हम्म्म और क्या

अनुज - भैया वो हरामी रामुआ हमारी दीदी को लेके हमेशा गन्दा गन्दा बोलता है और कहता है कि अपनी दीदी की बुर मुझसे पेलवा दे ,,मुझे बहुत गुस्सा आता है लेकिन वो मुझसे बड़ा है तो मै नही बोल पाता हू कुछ

मै - हम्म्म तो तेरा एक ही दोस्त है वो रमुआ

अनुज - नही भैया वो मेरा दोस्त नही है , मेरे दोस्त अलग है लेकिन जब भी हम लोग मैदान मे खेलते हैं तो वो मुझे देख कर हमारे पास आ जाता है और दीदी को गन्दा गन्दा बोलने लगता है इसिलिए मै नही जाता और अब तो

मै - क्या अब तो

अनुज - अब मेरे दोस्त भी मेरा मज़ा लेने लगे हैं वो सब रमुआ के संगत मे आकर गन्दा काम करने लगे हैं

मै - कैसा गन्दा काम

अनुज - भैया वो रमुआ उनलोगो से उनकी नुनी की चमडी आगे पीछे करवाता है और फिर उनके नुनी से सफेद खुन बाहर आता है

मै अचरज से - सफेद खुन

अनुज - वो जिससे बच्चा होता है भैया , रमुआ उसको बीज बोलता है लेकिन मुझे वो शब्द से सुन कर उल्टी आती है

मै अनुज की मासूमियत भरी संवाद से हस रहा था लेकिन इस बात की खुसी थी कि वो गलत रास्ते पर नही जायेगा और उसे सेक्स के बारे मे जानकारी भी है ।

रही बात रमुआ की वो बगल के गाव का एक नं का जुआरि शराबि आदमी था उसकी शादी नही हुई थी और उम्र 26 27 की होगी तब और शरीर से भी कमजोर था बस जुबान से मुहफट था जिसको मन करे पी कर गाली देना और छोटे बच्चो को फसा कर उनकी कुवारि गाड़ मारने से उसका काम चलता था क्योकि कोई भी लडकी उसे बस्साते मुह वाले को अपने मुह क्यू लगाती । इसके लिए सही यही था कि अनुज को उसकी संगत से दुर किया जाय लेकिन अनुज बहुत समझदार था और सही गलत की परख उसे भी थी ।

मै - तब तुने भी निकाला था कभी बीज , अह मतलब वो सफेद खुन

अनुज - नही भैया वो मेरी चमडी पीछे नही जाती बहुत दर्द करता है

मै - क्यू चमडी क्यू नही जाती पीछे

अनुज - मुझे नही पता भैया , लेकिन मेरा एक दोस्त बता रहा था ये बिमारी है और मै अपनी बीवी को पेल कर बच्चा नही कर पाऊन्गा

मै हस्ते हुए - हाहाहा पागल किसने बोला तुझे ऐसा कुछ नही होता

अनुज - भैया वो स्कूल का दोस्त है मेरा

मै - अच्छा ये बता , ये चमडी आगे पीछे करने वाला खेल कबसे सुरु हुआ

अनुज - भैया वो इसी साल ठंडी मे

मै - इससे पहले कभी ट्राई नही किया

अनुज - नही भैया मुझे पता नहीं था न

मै - तो तू तेरे नुनी मे तेल लगाता है रोज नहा कर की नही

अनुज - नही तो , वो बचपन मे मा लगाती थी तभी , मैने खुद से नही लगाया

मै - हमम ठीक है ऐसा कर कल से रोज नहाने के बाद सरसो का तेल लगा कर 5 मिंट तक हल्का हल्का रोज कोसिस करना चमडी को पीछे करने की , अभी ठंडी है लेकिन गर्मी मे वहुत जल्दी तेरी भी चमडी ढीली हो जायेगी

अनुज - ठीक है भैया मै कल से ही तेल लगाउँगा और थैंक यू

मै - हा और एक बात अभी से नुनी हिला कर वो सफेद खुन मत निकालना , नही तो कमजोर हो जायेगा और बाल झदने लगेगे

अनुज बाल झडने की वात से डर गया - नही भैया तो मै बिलकुल नही करूँगा

मै - हम्म्म ठीक है चल अब सो जा , और आगे से ऐसा कोई बात हो तो मुझे बताना , और रमुआ जैसे बेहूदा लोगो से दुरी करके रख ,

अनुज - ठीक है भैया

फिर थोडी देर शान्ति हुई कि

अनुज - भैया

मै - हुउउऊ

अनुज - मै कल भी आउँगा आपके साथ सोने

मै मुस्करा कर उसकी मनोभावना समझ कर - ठीक है

चुकी एक ही दिन मे अनुज को मुझसे अपनी दिल की बाते खुल कर रखने को मिली तो वो बहुत खुश था और हो भी क्यू ना उम्र के जिस दौर से वो गुजर रहा था उस समय ऐसे दोस्त मिलना जिससे वो खुल कर अपनी तकलीफ कह सके और सेक्स जैसे टॉपिक पर नयी नयी जानकारी मिले तो किसे मज़ा नही आयेगा ।

फिर तीन हफ्तो का समय बीता और इस दौरान 2 3 रात अनुज मेरे साथ रहा बाकी के दिन मैने खुद उसे घर पर रखा क्योकि उसके रहने पर ना तो दीदी से ना ही कोमल से बात हो पाती थी ।

वही तीन हफ्तो मे पापा ने कोमल के घर के कागजात हासिल कर लिये और मुझे मिलने के लिए दुकान पर बुलाया

मै मा को बोलकर उस दिन 2 बजे तक दुकान पर गया

फिर पापा मुझे रेस्टरूम मे ले गये जहा संजीव ठाकुर बैठे थे ।

मै संजीव ठाकुर को देख कर थोडा हिचक कर - बाऊसाहब नमस्ते ( उतरीपूर्व भारत मे उत्तरप्रदेश और बिहार के क्षेत्र में आज भी ठाकुरो को लोग बाबूसाहब कहते है ।)

संजीव ठाकुर हस्ते हुए - अरे बेटा , मुझे अंकल कहो मै तुम्हारे पापा का दोस्त हू

मै मुस्कुराकर - जी अंकल

संजीव - हा ये हुई ना बात , वैसे रंगी भाई आपका लड़का बहुत होनहार है

पापा - सही कह रहे हैं संजीव भाई , मेरे तो भाग्य खुल गये ऐसा बेटा पाकर जो दूसरो की दुख तकलीफ को अपना समझ कर दुर करना चाहता है।

मै भी अपनी तारिफ से थोडा शर्मा रहा था

संजीव - फिर ठीक है रंगी भाई मै चलता हू और कोई जरुरत होगी तो बताना

पापा - जी ठाकुर जी

संजीव - क्या यार रंगी तुम फिर से

पापा - अरे भाई मै मज़ाक भी नही कर सकता अपने दोस्त से हाहाहाहा

संजीव हस्ते हुए - हम्म्म फिर ठीक है हहहहहाआ

उसके बाद पापा उनको बाहर छोड कर वापस आये ।

मै खुश होकर - क्या सच मे कागज मिल गये पापा

पापा मुस्कुरा कर - हा बेटा ये देख

फिर पापा एक फ़ाईल मुझे दते है

मै उस फ़ाईल को देख कर खुशी से उनके कागज को देखता हुआ- लेकिन ये मिले कैसे

पापा - उसकी चिन्ता छोड तू तेरा काम हुआ न

मै जिद करते हुए - नही पापा आप बोले थे कि बताओगे प्लीज बताओ ना

पापा - ठीक है लेकिन ये राज सिर्फ हमारे बिच ही रहेगा

मै खुसी से सर हिला कर - हा पापा

पापा - तो सुन , आज से दो हफ्ते पहले मै संजीव भाई को अपनी सम्स्या ये सोच कर बताई कि वो कुछ जोर जबरदस्ती से कागज निकलवा लेंगे लेकिन उन्होने बताया कि ऐसे कागज निकलवा तो लेंगे लेकिन कही वो सब बागी होकर कोमल के परिवार वालो को नुक्सान पहुंचाने का न सोचने लगे । इसिलिए संजीव भाई ने पहले महेश के बेटे गुलशन को अपने यहा गोदाम पर काम पर रखा और कुछ दिन बाद ही अपने यहा काम करने वाली एक नौकरानी को उसके साथ गोदाम मे सम्बंध बनने के लिए भेज दिया और 3 4 बार उसके साथ संबंध बनवा कर प्लान के मुताबिक संजीव भाई ने उसे परसो दुपहर को रंगे हाथो पकड़ लिया ।

उसे थोडा बहुत पीत कर उसके मा बाप को हवेली बुलवाया और मै भी वहा गया लेकिन उनलोगो से छिप कर उनकी बाते सुनी

संजीव - आओ महेश यही संस्कार दिये हो तुम अपने बेटे को

महेश गिडगिडा कर - बाऊसाहब का गलती होई गयी हमार लईका से

संजीव - तुम खुद पुछ लो इससे क्या गुल खिला रहा था हमारे ही गोदाम मे

सन्जिव - भरी दूपहरि मे हमारे यहा काम करने वाली औरत को चोद रहा था ये हरामखोर
 
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