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Update 63
मै पापा को बोलकर खुशी खुशी कोमल के घर की तरफ जाने लगा ।
घर पहुचा तो मेन गेट पहले की तरह खुला ही था लेकिन कोई नजर नही आ रहा था आज भी ।
मै हाल से होते हुए आस पास के सभी कमरे देखे जिसमे से सिर्फ एक कमरा खुला था तो मै उस तरफ गया और कमरे मे देखा तो वहा भी कोई नही था , और कमरे की हालत देख कर साफ पता चल रहा था कि ये मनोज का कमरा है , बेड पर मनोज का बैग ही पडा था ।
मै फिर कमरे से बाहर होकर हाल के आगे आगन मे गया जहा से किसी के कपडे धुलने की आवाज आ रही थी साथ मे सरफ की भीनी भीनी खुशबू फैली हुई थी ।
मै मन मे - वहा कौन हो सकता है आगन मे , कही विमला मौसी कपडे धुल तो नही रही है । अगर वो धुल रही है तो क्या पहनी होगी , उनकी सरफ के झाग से भीगी चुचिया और गोरी पिंडलि कैसी दिख रही होगी ।
ये सब सोच कर मेरा लण्ड टनटनाने लगा ।
मै दबे पाव धीरे धीरे गैलरी से होकर पीछे आगन की तरफ जाने लगा और जैसे ही मै गैलरी के मुहाने पर पहुंचा मेरी नजर एक लडके पर गयी जो नल के आगन की चारदिवारी से लग कर एक मोके से अंदर देखते हुए अपना लण्ड हिला रहा था ।
मै मन मे - अरे तो मनोज है और ये किसको देख कर हिला रहा है
मै मुस्कुरा कर मन मे - यार सारे घर के लडके अब ऐसे ही होते है , मै तो सोचता था कि एक मै ही मादरचोद हू लेकिन देख रहा हू आजकल सब अपने घर की माल को घर मे ही चोदने को बेताब हैं ।
मैने मनोज के लण्ड पर गौर किया तो वो 6 इन्च के करीब लम्बा था लेकिन मोटा ज्यादा नही था , तभी उसके मुह से सिसकियाँ निकलने लगी और वो आंखे बंद करके झडने लगा - आह्ह मा अह्ह्ह अह्ह्ह आह्ह
मै गैलरी से ही अंदर की तरफ देख रहा था
उसकी सिस्कियो से आगन मे बैठी विमला ब्लाउज पेटिकोट मे बाहर आई , उसका पेटिकोट नीचे से पूरा भीगा हुआ था और हाथ भी गीले थे
विमला गुस्से से मनोज को देखते हूए - तू आज फिर से उसी गंदी चीज़ मे लग गया ,, अभी परसो मुझसे वादा किया था ना
मनोज की जैसी फत कर हाथ मे आ गई और मै भी चौक गया कि विमला को पता है कि उसका बेटा उसको देख कर अपना लण्ड हिलाता है
मनोज अपना सर नीचे कर लिया
विमला थोडा भावुक होकर - बेटा अब तू ही तो एक सहारा है मेरा ,,और तू अगर अपने चाचाओ जैसे मुझसे पेश आयेगा तो मेरा जीना बेकार है,,इससे अच्छा है कि मै मर जाऊ
मनोज झट से विमला के पैर पकड कर रोने लगा - मा प्लीज ऐसा मत कहो , मै भी मर जाऊंगा आपके बिना
फिर विमला ने मनोज को खड़ा किया - बेटा तू समझता क्यू नही , ये सब गलत है मै मा हू तेरी , कल को किसी को पता चला तो क्या मुह दिखाऊंगी मै किसी को
मनोज सर झुकाये खड़ा रहा और उसका लण्ड पूरी तरह से मुरझा गया था लेकिन अभी भी पैंट की चैन से बाहर लटका हुआ था ।
विमला मनोज के आखो से बहते आसुओ को देख कर पिघल गयी , आखिर एकलौता बेटा था वो उसका
विमला मनोज की तरफ मुस्कुरा कर देखी और बोली - तू खुद देख अभी ढंग से तेरा छुटकू बड़ा भी नही हुआ और तू ऐसे ऐसे काम करता है
विमला मनोज के मुरझाए लण्ड की तरफ इशारा करते हुए बोली
मनोज को भी हसी आई - मा वो आप डांट रही हो तो छोटा हो गया है
विमला हसते हुए - चल उसे अन्दर कर अभी
मनोज मुस्कुरा कर अपने आसू पोछे और अपना लण्ड अन्दर कर लिया
विमला - अब आगे से ये सब मत करना बेटा , खा मेरी कसम
मनोज निराश मन से - मा बहुत तकलीफ होती है सोने मे रात को
विमला - क्यू तकलीफ कैसी
मनोज - वो रात मे खड़ा होता है ना
विमला - क्या सोचता है तू ऐसा , कही तू गंदी फिल्मे तो नही देख रहा है ना
मनोज - नही मा मै नही देखता
विमला - फिर कैसे तुझे दिक्कत हो रही है या तो तू किसी के बारे मे सोचता होगा , कोई लडकी मे दोस्त वोस्त है तेरी
मनोज - नही मा ऐसा कुछ नही है वो तो मै
विमला - बोल कुछ आगे
मनोज - वो मुझे आपकी याद आती है रात मे इसलिये
विमला हस के - मेरी याद क्यू ,मै तो इसीघर मे हू
विमला थोडा सोचने के भाव मे - कही तू मुझे लेके वो सब गंदी हरकते नही सोचता है ना
मनोज एक दम चूप था
विम्ला थोडे गुस्से मे - हे राम अभी क्या कम तकलीफ थी मेरी जिन्दगी मे जो आप उसे और नर्क बना रहे है
विमला - अभी तू जा यहा से मेरा सर घूम रहा है मै बाद मे बात करती हू तुझसे
मै भी समझ गया कि मुझे यहा से हट जाना चाहिये और मै वापस हाल मे आकर बैठ गया ।
तभी सामने गैलरी से मनोज आता हुआ दिखा और मुझे देख कर सहम गया
मै हस्ते हुए - और मनोज भाई कैसा है
मनोज थोडा सहम कर - ठी ठी ठीक हू भाइया ,,आप यहा कैसे
मै - अरे वो मै मौसी को मिलने आया था तो यहा कोई दिखा नही , तो सोचा यही बैठ कर इन्तेजार कर लेता हू
मै - कहा है सब कोई दिख नही रहा है
मनोज थोडा शांत हो कर - वो दीदी बगल मे सिलाई कढ़ाई सेंटर गयी होगी और मा तो अन्दर नहा रही है
इतने मे अन्दर से विमला की आवाज आई - कौन आया है मनोज
मनोज गैलरी की तरफ मुह करके - राज भैया आये है मा
तभी गैलरी से दौड़ते हुए विमला आई , वो ब्लाउज मे हिलते चुचे देखकर वापस मेरा लण्ड खडा होने लगा
विमला मुझे देख के खुश होते हुए - अरे राज बेटा तू
मै उठ कर उसके पाव छुए और उसके कपड़ो से अब भी सरफ की खुशबू आ रही थी
विमला खुशी से- खुश रह मेरे लाल
विमला - वो मै थोडे कपडे धुल रही थी तो ऐसे ही चली आई ,मनोज तू इसे बिठा कर पानी पिला मै आती हू
मनोज - जी मा
फिर मनोज किचन मे चला गया और विमला घूम कर गैलरी की तरफ गयी , ओह्ह उसके चुतड भीगी हुई पेटिकोट से चिपके हुए थे और पूरी घाटी का दिदार मेरे सामने था
मै वापस सोफे पर बैठ गया
मै पापा को बोलकर खुशी खुशी कोमल के घर की तरफ जाने लगा ।
घर पहुचा तो मेन गेट पहले की तरह खुला ही था लेकिन कोई नजर नही आ रहा था आज भी ।
मै हाल से होते हुए आस पास के सभी कमरे देखे जिसमे से सिर्फ एक कमरा खुला था तो मै उस तरफ गया और कमरे मे देखा तो वहा भी कोई नही था , और कमरे की हालत देख कर साफ पता चल रहा था कि ये मनोज का कमरा है , बेड पर मनोज का बैग ही पडा था ।
मै फिर कमरे से बाहर होकर हाल के आगे आगन मे गया जहा से किसी के कपडे धुलने की आवाज आ रही थी साथ मे सरफ की भीनी भीनी खुशबू फैली हुई थी ।
मै मन मे - वहा कौन हो सकता है आगन मे , कही विमला मौसी कपडे धुल तो नही रही है । अगर वो धुल रही है तो क्या पहनी होगी , उनकी सरफ के झाग से भीगी चुचिया और गोरी पिंडलि कैसी दिख रही होगी ।
ये सब सोच कर मेरा लण्ड टनटनाने लगा ।
मै दबे पाव धीरे धीरे गैलरी से होकर पीछे आगन की तरफ जाने लगा और जैसे ही मै गैलरी के मुहाने पर पहुंचा मेरी नजर एक लडके पर गयी जो नल के आगन की चारदिवारी से लग कर एक मोके से अंदर देखते हुए अपना लण्ड हिला रहा था ।
मै मन मे - अरे तो मनोज है और ये किसको देख कर हिला रहा है
मै मुस्कुरा कर मन मे - यार सारे घर के लडके अब ऐसे ही होते है , मै तो सोचता था कि एक मै ही मादरचोद हू लेकिन देख रहा हू आजकल सब अपने घर की माल को घर मे ही चोदने को बेताब हैं ।
मैने मनोज के लण्ड पर गौर किया तो वो 6 इन्च के करीब लम्बा था लेकिन मोटा ज्यादा नही था , तभी उसके मुह से सिसकियाँ निकलने लगी और वो आंखे बंद करके झडने लगा - आह्ह मा अह्ह्ह अह्ह्ह आह्ह
मै गैलरी से ही अंदर की तरफ देख रहा था
उसकी सिस्कियो से आगन मे बैठी विमला ब्लाउज पेटिकोट मे बाहर आई , उसका पेटिकोट नीचे से पूरा भीगा हुआ था और हाथ भी गीले थे
विमला गुस्से से मनोज को देखते हूए - तू आज फिर से उसी गंदी चीज़ मे लग गया ,, अभी परसो मुझसे वादा किया था ना
मनोज की जैसी फत कर हाथ मे आ गई और मै भी चौक गया कि विमला को पता है कि उसका बेटा उसको देख कर अपना लण्ड हिलाता है
मनोज अपना सर नीचे कर लिया
विमला थोडा भावुक होकर - बेटा अब तू ही तो एक सहारा है मेरा ,,और तू अगर अपने चाचाओ जैसे मुझसे पेश आयेगा तो मेरा जीना बेकार है,,इससे अच्छा है कि मै मर जाऊ
मनोज झट से विमला के पैर पकड कर रोने लगा - मा प्लीज ऐसा मत कहो , मै भी मर जाऊंगा आपके बिना
फिर विमला ने मनोज को खड़ा किया - बेटा तू समझता क्यू नही , ये सब गलत है मै मा हू तेरी , कल को किसी को पता चला तो क्या मुह दिखाऊंगी मै किसी को
मनोज सर झुकाये खड़ा रहा और उसका लण्ड पूरी तरह से मुरझा गया था लेकिन अभी भी पैंट की चैन से बाहर लटका हुआ था ।
विमला मनोज के आखो से बहते आसुओ को देख कर पिघल गयी , आखिर एकलौता बेटा था वो उसका
विमला मनोज की तरफ मुस्कुरा कर देखी और बोली - तू खुद देख अभी ढंग से तेरा छुटकू बड़ा भी नही हुआ और तू ऐसे ऐसे काम करता है
विमला मनोज के मुरझाए लण्ड की तरफ इशारा करते हुए बोली
मनोज को भी हसी आई - मा वो आप डांट रही हो तो छोटा हो गया है
विमला हसते हुए - चल उसे अन्दर कर अभी
मनोज मुस्कुरा कर अपने आसू पोछे और अपना लण्ड अन्दर कर लिया
विमला - अब आगे से ये सब मत करना बेटा , खा मेरी कसम
मनोज निराश मन से - मा बहुत तकलीफ होती है सोने मे रात को
विमला - क्यू तकलीफ कैसी
मनोज - वो रात मे खड़ा होता है ना
विमला - क्या सोचता है तू ऐसा , कही तू गंदी फिल्मे तो नही देख रहा है ना
मनोज - नही मा मै नही देखता
विमला - फिर कैसे तुझे दिक्कत हो रही है या तो तू किसी के बारे मे सोचता होगा , कोई लडकी मे दोस्त वोस्त है तेरी
मनोज - नही मा ऐसा कुछ नही है वो तो मै
विमला - बोल कुछ आगे
मनोज - वो मुझे आपकी याद आती है रात मे इसलिये
विमला हस के - मेरी याद क्यू ,मै तो इसीघर मे हू
विमला थोडा सोचने के भाव मे - कही तू मुझे लेके वो सब गंदी हरकते नही सोचता है ना
मनोज एक दम चूप था
विम्ला थोडे गुस्से मे - हे राम अभी क्या कम तकलीफ थी मेरी जिन्दगी मे जो आप उसे और नर्क बना रहे है
विमला - अभी तू जा यहा से मेरा सर घूम रहा है मै बाद मे बात करती हू तुझसे
मै भी समझ गया कि मुझे यहा से हट जाना चाहिये और मै वापस हाल मे आकर बैठ गया ।
तभी सामने गैलरी से मनोज आता हुआ दिखा और मुझे देख कर सहम गया
मै हस्ते हुए - और मनोज भाई कैसा है
मनोज थोडा सहम कर - ठी ठी ठीक हू भाइया ,,आप यहा कैसे
मै - अरे वो मै मौसी को मिलने आया था तो यहा कोई दिखा नही , तो सोचा यही बैठ कर इन्तेजार कर लेता हू
मै - कहा है सब कोई दिख नही रहा है
मनोज थोडा शांत हो कर - वो दीदी बगल मे सिलाई कढ़ाई सेंटर गयी होगी और मा तो अन्दर नहा रही है
इतने मे अन्दर से विमला की आवाज आई - कौन आया है मनोज
मनोज गैलरी की तरफ मुह करके - राज भैया आये है मा
तभी गैलरी से दौड़ते हुए विमला आई , वो ब्लाउज मे हिलते चुचे देखकर वापस मेरा लण्ड खडा होने लगा
विमला मुझे देख के खुश होते हुए - अरे राज बेटा तू
मै उठ कर उसके पाव छुए और उसके कपड़ो से अब भी सरफ की खुशबू आ रही थी
विमला खुशी से- खुश रह मेरे लाल
विमला - वो मै थोडे कपडे धुल रही थी तो ऐसे ही चली आई ,मनोज तू इसे बिठा कर पानी पिला मै आती हू
मनोज - जी मा
फिर मनोज किचन मे चला गया और विमला घूम कर गैलरी की तरफ गयी , ओह्ह उसके चुतड भीगी हुई पेटिकोट से चिपके हुए थे और पूरी घाटी का दिदार मेरे सामने था
मै वापस सोफे पर बैठ गया