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Incest सपना-या-हकीकत

इस बीच मुझे घासो की खस खस सुनाई दी और फिर एक मधुर संगीत, जिससे पता चलने लगा की कोमल मुत रही थी । ये सोच कर की कोमल अपनी मुलायम गोरी गाड़ फैलाये मेरे पीछे ही मुत रही है, इस उत्तेजना ने मेरे लण्ड मे नयी हलचल भर दी और मेरा लण्ड तन गया ।

करीब तीन मिंट होने को आये और अब तक कोमल के मुतने की आवाज भी बन्द हो चुकी थी ।

मै - अरे कितना समय लगेगा जी मेरा गरदन दर्द हो रहा हो

कोमल थोदा परेसान आवाज मे - राज मेरा प्लाजो ये एक झाड़ मे फस गया है , तुम घुमना मत प्लीज ,,बस एक मिंट थोडा रुको ना

मै खुश हो गया चलो इसी बहाने कुछ दर्शन हो जायेगा

मै - थोडा जल्दी करो कोमल देखो कोई आये ना इस तरफ

मेरी बात सुन कर कोमल और हडबड़ा गयी

कोमल - ये निकल नही रहा है राज ,

मै थोडा सा गरदन घुमा कर - मै कुछ मदद करु

कोमल चौक कर - नही , ब्स एक मिंट रुको ना

मै - कोमल समझो मुझे हैल्प करने दो ,, अगर कोई हम दोनो कोई ऐसे देख लिया तो बहुत गड़बड हो जायेगी ।

कोमल डर से मजबुर होकर - ठीक है ,,,आओ

मै एक शैतानी मुस्कान से घुमा तो देखा कि कोमल सीधा खड़ी है और उसने फुल वाली काले रंग की लॉन्ग पैंटी पहनी हुई थी , और उसने ब्लैक प्लाजो का दाहिना हिस्सा पकड़ा हुआ जो उसके घुटनो तक टगा हुआ था और बाया साइड जो बगल के एक झाड़ से फसा हुआ था

उसकी गोरी गोरी जान्घे और पिंडलियों पर हल्के बाल थे ।

कोमल मुझे खुद को ऐसा घुरता देख बोली - जल्दी करो राज प्लीज

मै झट से कोमल के बाई तरफ गया जिस तरफ का प्लाजो झाड़ में फसा हुआ था । मै कोमल के प्लाजो को पकड कर हल्का हल्का निकालने लगा

कोमल - जरा आराम से राज फटे नही ,

मै बडे आराम से उसका प्लाजो निकाला - हो गया अब पहन लो

कोमल ने झट से घूम कर प्लाजो उपर चढा लिया

कोमल - चलो राज अब

मै - क्या चलो कोई थैंक्स वैंकस नही मिलेगा क्या

कोमल इतरा कर- हा थैंक यू

मै सोचा इससे बात कैसे आगे बढ़ाऊ कुछ तो ऐसा करू जिस्से ये मुझसे सेक्स वाली बाते करे

मै - रुको थोडा मै भी फ्रेश हो लू

ये बोलकर मै जहा था वही खड़ा होकर झट से अपना लण्ड बाहर निकाला और एक तेज धार से मूतने लगा

कोमल इससे पहले कुछ बोल समझ पाती उसकी नजरे मेरे धार देते मोटे टोपेदार लण्ड पर रुक गयी और आवाज गले मे ही ।

कोमल को चौकन्ना देख मै उसकी खिचाई करने के मूड मे बोला - अरे अरे क्या कर रही हो उधर देखो

कोमल जैसे ही मेरी आवाज सुनी शर्मा गयी और पलट गयी ।

कोमल मुस्कुरा कर - तुम बता नही सकते थे क्या

मै मुत कर लण्ड झाड़ कर अंडरवियर मे रख दिया और बोला - अरे तुम को भी तो चाहिये ना की देख ली तो घूम जाना चाहिए,,,तुम तो नजरे गडाये ऐसे देख रही थी कि जैसे कितना पसंद हो गया हो
 
कोमल मुस्कुरा कर - भक्क पागल , ऐसी बात नही है वो तो बस

मै - क्या बताओ ना

कोमल मुस्कुरा कर - कुछ नही

मै - बताओ ना, तुम भी इतना शर्माती हो ना

कोमल - वो मै इतना बड़ा नही देखा था कभी इसलिये , और लड्की हू मै शर्माना हक है मेरा

मै बात उधेरते हुए - क्या सच मे तुमको बड़ा दिखता है मेरा

कोमल थोडा झिझक कर - हा मैने ऐसा पहले नहीं देखा था

मै थोडा मजाक मे - तो मुझसे पहले किसका देखा था हाह्हाह्हा

कोमल हस्ते हुए मुझे मारने आती है मै थोडा सा दौड़ आगे हुआ

कोमल खीझ कर - तुमको सच मे पीट दूँगी मै

मै हसते हुए - अभी तुम्ही तो बोली ना की इससे बड़ा नही देखी ,,इसका मतलब इससे पहले किसी का देखी हो

कोमल - हा तो राह चलते नजर पड़ जाती है , तुम लोगो की तो आदत है खड़ा होकर कहो भी शुरू हो जाने की

मै थोडा उसकी खिचाई करते हुए - वैसे मै कभी ध्यान नही दिया कि तुम भी सुन्दर हो यार

कोमल हस्ते हुए - अच्छा जी बड़ी मेहरबानी जो हमे इस काबिल समझा

मै - हा सच मे असली खुबसूरती अंदर ही छिपी होती है हिहिहिही

कोमल समझ गई की मै क्या बात कर रहा हू - तुम मेरी खीचाई कर रहे हो या तारिफ

मै - अभी तक देखा ही क्या जो तारिफ करू , कोमल के सामने उसको ताड़ते हुए कहा

कोमल शर्मा कर - तुम ना पिटोगे मुझसे और ये तुम्हारा ऐसे ही रहता है क्या

कोमल मेरे अंडरवियर मे लण्ड से बने टेन्ट को देख कर बोली

मै - हा कभी कभी क्यू

कोमल थोडा अजीब सा मुह बना कर - दर्द नही होता

मै ह्स्ते हुए - होता है तो तेल से मालिश कर लेता हू ना आराम हो जाता है

कोमल - हम्म्म ये बात

मै - वैसे दर्द तो अभी भी हो रहा है

कोमल थोडा फ़िकर के भाव मे - तो मालिश कर लो

मै - लेकिन यहा तेल कहा मिलेगा

कोमल थोडा उत्सुकता से मानो वो मेरे लण्ड को देखने को बेचैन हो - तो वैसे ही सहला लो ना निकाल कर ,, इतना कसा हुआ पहनते भी तो ये

मै सोचा कोमल क्या सच मे इंटरेस्ट ले रही है

मै थोडा सा मुह बना कर - लेकिन कहा , वहा तो गीता बबिता होगी ना

कोमल थोडा उत्सुकता से - ऐसा करो यही खडे होकर कर लो यहा कोई है नही और वो लोग भी दुर ही है अभी

मै भी मौके का फायदा उठा कर झट से वापस लण्ड निकाला सच मे बहुत आराम मिला क्योकि कोमल के साथ कामुक बाते करने से मै बहुत उत्तेजित मह्सुस कर रहा था ।

एक बार फिर से कोमल के सामने लण्ड को थामा और इस बार चमडी आगे पीछे कर हिलाने लगा

मै जानबुझ कर ऐसे आवाजे करने लगा जिससे कोमल को लगे की मुझे थोडी राहत मिल रही है

कोमल को मानो सच मे मेरी फ़िकर महसूस हो रही थी

कोमल - क्या हुआ राज दर्द ज्यादा तो नही है ना

मै - हा वो काफी समय से अंदर था ना बाहर निकालने से अचानक दर्द बढ़ गया है अह्ह्ह ,,,मैं लगातार लण्ड की चमडी आगे पीछे किये जा रहा था

कोमल - तब क्या करोगे राज ऐसा करो घरो चलते है वही मालिश कर लेना

मुझे भी खुले मे कुछ करने मे डर लग रहा था तो मै बोला - हा सही कह रही हो कोमल ,,

कोमल - हा चलो

मै थोडा सा परेसानी का भाव लाते हुए - कोमल क्या तुम इसे अंदर कर दोगी ,,, मै दोनो हाथ से अपने अंडरवियर की लास्टीक को फैलाये हुए था और मेरा लण्ड का सुपादा उसी लास्टीक पर टिका हुआ था
 
कोमल थोडा हिचकी लेकिन मुझे परेसान देख वो थोडा सा हिम्मत करके मेरे लण्ड के सुपाडे को दो उंगलियो से पकड कर उठाना चाहा तो गिर गया

और मै जान बुझ कर आह्ह निकाला

कोमल - सॉरी सॉरी

फिर इस बार कोमल ने बीच से मेरे लण्ड को थामा

कोमल - ओह गॉड, ये तो कितना तप रहा है राज

मै - हा अब डालो इसे इस्स्स्स

कोमल ने जल्दी से लण्ड को मेरे अंडरवियर मे डाला और फिर हम ट्यूबवेल की तरफ निकल गये ।

कोमल को सच मे मेरे लिए फ़िकर देख कर मुझे थोडा अजीब सा लगा कि क्या इतनी अच्छी लडकी का फायदा उठाना सही होगा ।

वही कोमल के मन मे काफी सवाल थे जो वो मुझे पुछ रही थी और मै उसको घर पर बात करने का बोल कर टाल दिया क्योकि बातो ही बातो मे हम ट्यूबवेल तक आ चुके थे ।

जहा गिता बबिता नहा कर कपडे बदल लिये थे और हमारा इन्तेजार कर रहे थे ।

गीता - क्या भैया हम कबसे यहा इंतजार कर रहे है

कोमल - सॉरी गीता

बबिता - भैया चलो आप कपड़े पहन लो बुआ ने आपके मोबाईल पर फोन किया था घर बुला रही है ।

मेरा अंडरवियर लगभग सुख चूका था तो मैने झटपट मे अपने कपड़े पहन लिये और फिर हम लोग निकल गये घर की तरफ ।

देखते है दोस्तो आगे क्या होने वाला है।

............................
 
हम चारो खेत से घर के लिए निकल गये ।

रास्ते मे कोमल बार बार मेरे तरफ देखती और मुस्कुराती , जब मै इशारे से पछता क्या हुआ तो वो ना मे सर हिला देती और आगे चलने लगती ।

शाम करीब 6 बजे तक हम सब घर पहुचे तो आगन मे खटिये पर सारे लोग बैठे चाय नास्ता कर रहे थे ।

मामी और मामा एक खाट पर बैठे हुए थे ।

नाना एक खाट पर लेटे हुए थे उनके बगल मे मौसी बैठी उनका पैर दबा रही थी । वही विमला मौसी , मामी के बगल वाली खाट पर बैठी थी । मा कही नजर नही आ रही थी ।

हमे एक साथ आता देख कर नाना बोले - आजाओ बच्चो तुम भी बैठो

मामी - हा बच्चो बैठो मै तुम लोगो के लिए चाय लाती हू ।

फिर मै और गीता एक खाट बिछा कर बैठ गये कोमल और बबिता , विमला मौसी के साथ बैठ गयी ।

नाना बबिता - कहा घुमाने ले गयी थी गुडिया सबको

बबिता - वो बाबा हम लोग ट्यूबवेल पर गये थे घुमाने

नाना - अच्छा , फिर तो तुम दोनो नहाए होगे , मस्ती किये होगे हाहाहाहाहा

बबिता - हा बाबा , और भैया भी नहाए थे हम लोगो के साथ

नाना कोमल की तरफ - और तुम बिटिया तुम नही की मस्ती

कोमल - नानू वो मै दोपहर को ही नहा ली थी तो मन नही था लेकिन मस्ती हम सबने की ।

फिर नाना ने मेरी तरफ देखा - और मेरे शेर क्यू गुमशुम से क्यू हो यहा आ मेरे पास

मै उठा तो एक नजर कोमल को देखा तो वो बडे उदार नजरो से मुझे देख रही थी , मानो उसकी नजर मे कितना असहाय हो गया हू ।

मै नाना के पास उनकी जांघ के बगल मे बैठ गया ।

नाना मेरे हाथ पकड कर - बेटा कोई दिक्कत तकलीफ तो नही है ना यहा तुझे

मै मुस्कुरा कर - नही नाना जी ,,मुझे क्या तकलीफ होगी ।

नाना - बिलकुल यहा सब कुछ तेरा ही तो है और हमारे बाद सब कुछ मेरे नतीयो का ही होने वाला है हाहाहाहहा

मै मुस्कुरा रहा था इतने मा और मामी चाय का ट्रे लिये आ गयी ।

मामी - चलो बच्चो नास्ता कर लो तुम भी

फिर मामी और मा ने वापस से सबको चाय दी और हम सब बाते करते हुए चाय का मज़ा लेने लगे ।

इस दौरान मै विमला मौसी को नोटिस किया की वो बार बार को देख कर मुस्कुरा रही है ।

और मेरी नजर जब मामा पर गयी तो पता चला कि वो तो विमला मौसी को ताड़ रहे थे ।

अब ताडते ही क्यो नही एक तो कसे बदन वाली विमला मौसी और वही मामा का मिजाज ठरक से भरा हुआ

एक तरफ जहा मामा और विमला मौसी के बीच नैन मट्क्का चल रहा था वही कोमल थोडी उदास दिख रही थी , मैने उसे इशारे से पुछा की क्या हुआ वो फिर ना मे सर हिला दी ।

ऐसे ही 7 बजने को आये तो मै उठा और कमरे में जाने लगा ।

मा - कहा जा रहा है बेटा

मै - मा थोडा आराम करने का सोच रहा हू , खाना का टाईम हो तो बुला लेना

मामी - हा बेटा तुम आराम कर लो वैसे भी आज बहुत किये हो ,,ये बात मामी मुस्कुरा कर बोली

मै समझ उनका तंज और मुस्कुरा कर उठने लगा

मौसी - चलो भाभी हम लोग रात के खाने की तैयारी कर ले

मामी - हा दीदी चलिये

विमला - चलिये मै भी चल्ती हू

मामी - अरे दीदी आप आराम करिये बात चित करिये

मामा - हा विमला बैठो थोडा बहुत दिन बाद तो आई हो ।

फिर मै उथा और जाने लगा

गीता बबिता भी मेरे साथ ही जाने लगी अपने कमरे मे उनके होमवर्क बाकी थे ।

तो कोमल अकेले क्या करती वो भी गीता बबिता के कमरे मे चल गयी ।

बाहर अब खाट पर नाना सोये थे ।

मा उनको हवा करते हुए विमला से बात कर रही थी और वही मामा विमला मौसी को ताड़ रहे थे ।

मै अपने कमरे मे पहुचा और झट से अपने कपडे निकाले और अंडरवियर बदल कर वैसे ही लेट कर मोबाईल खोल कर चलाने लगा ।

अभी ज्यादा समय नही हुआ था कि किसी ने दरवाजा खटखटाया

मै - खुला है आजाओ अन्दर

दरवाजा खुला तो देखा कि कोमल थी और उसके हाथ मे नारियल के तेल की शिशि थी।

और उसने दुपट्टा भी नही लिया था ,,,जिससे उसकी चुचियो का उभार साफ दिख रहा था ।

मै - अरे कोमल तुम , आजाओ और दरवाजा बंद कर देना

कोमल चुपचाप से दरवाजा बंद की और मेरे बिस्तर पर बैठ गयी ।

मै - क्या हुआ कोमल तू ऐसे चुप क्यू हो

कोमल शर्मा कर - वो मै तुम्हारे लिए ये तेल लाई थी मालिश के लिए

मै कोमल की बाते सुन कर सोचने लगा अरे वाह कोमल ने खुद से मेरा ख्याल रखते हुए मेरे लण्ड के लिए तेल लेके आई है ।
 
मै उसकी मासुमियत पर फीदा होने लगा था । सच मे कितनी प्यारी और केयरिंग मेरे लिए

मै - हा थैंक्स कोमल ,,,

कोमल थोडा हिचक कर - इससे आराम हो जाएगा ना तुमको

मै - हा कोमल हो जाता है लेकिन

कोमल - लेकिन क्या

मै - लेकिन ये मेरे लिए रोज का है तो तुम परेशान ना हो ज्यादा

कोमल - क्या रोज दर्द होता है

मै - हा जब लम्बे समय तक ये खड़ा रहता है और अन्दर होता है तो होता ही है।

कोमल - ओह्ह्ह ठीक है अभी मालिश कर लो फिर

मै - ठीक है रुको मै बाथरूम मे करके आता हू

कोमल - क्यू यही कर लो बैठ कर ना

ये बात बोल कर कोमल को उसकी गलती का अह्सास हू और उस्की जुबान अब उसके दोनो दातो मे थी और होठ मुस्कुराने की कोशिस कर रहे थे ।

मै मुस्कुरा कर - ठीक है यही कर लेता हू

फिर मै बेड पर खड़ा हुआ और अपना अंडरवियर निकाल कर पुरा नंगा हो गया और चल कर कोमल तक गया और फिर निचे उतर के उसके सामने आ गया ।

कोमल मुझे नंगा देख कर नजरे निचे कर लेती है और तेल की शीशी मेरी तरफ कर देती है ।

मै उसके हाथ से तेल की शीशी लेके उसके सामने ही तेल की हल्की सी पतली धार अपने लण्ड के जड़ से सुपाडे तक गिराता हू और दुसरे हाथ से अच्छे से लिप देता हू ।

कोमल तेज सांसे लेते हुए कनअखियों ने मेरे क्रियाकलाप को निहार रही थी

और मै उसके घाटियो के दर्शन करते हुए लण्ड को तेल से चमका रहा था ।

कोमल के सामने लण्ड पर हाथ सरकाने मे जो मजा था वो कही नही था । एक अलग ही रोमानच का अहसास था ।

कोमल - एक बात पूछू राज

मै - हा बोलो ना

कोमल - तुमको सच मे शर्म नही आती है मेरे सामने ये सब करने मे

मै - देखो कोमल , मै तुम्हे सच एक अच्छा दोस्त समझता हू , और मेरे मन में तुमको लेकर कोई भी गलत भावना नही है और तुम मेरे लिये इतनी फिक्रमन्द हो तो , बस यही सब है की मै तुमसे खुल कर बाते करता हू

कोमल - अच्छा एक बात बताओ

मै लण्ड को सहलाते हुए - हा बोलो ना

कोमल - ये खड़ा क्यू होता है हमेशा , क्या तुम हर वक़्त वही सब सोचते हो क्या

मै - मतलब

कोमल ने इस बार पहले मेरी आँखो मे देखा और फिर आँखो से मेरे लण्ड की तरफ इशारा करते हुए बोली - ये हमेशा खड़ा क्यू रहता है , क्या तुम सेक्स के बारे मे ज्यादा सोचते हो क्या

मै - नही यार ऐसी बात नही है अह्ह्ह उह्ह्ह

कोमल - फिर

मै - ये नेचुरल है कोमल इसका खड़ा होना ,,जब कोई चीज़ हम सेक्सी सा देख लेते हैं या मह्सूस कर लेते है तो खड़ा हो जाता है

कोमल मुस्कुरा कर - तो वहा तुम क्या देख लिए की तुम्हारा ये

मै - नही तुम नाराज ही जाओगी

कोमल - अरे बताओ ना राज मै दोस्त हू तुम्हारी

मै - वो जब मै तुम्हारा प्लाजो झाड़ से निकाल रहा था उस समय मैने तुम्हारी गोरी गोरी टाँगे देखी थी तो
 
कोमल चिढ़ कर ह्सते हुए - छीई गंदे ,,अभी तो बोल रहे थे की मेरे बारे मे कोई गलत ख्याल नही रखते हों और अब क्या क्या गुल खिला रहे

मै - मै क्या करता मजबूरी हो जाती है यार

कोमल - अच्छा आज का तो ठीक था लेकिन उस दिन बस मे कैसे

मै - उस दिन बस मे भूल गयी क्या की तुम मेरे गॉड मे गिरी थी और तुम्हारे बू. ( कोमल की चुचियो पर इशारा करते हुए) मेरे हाथ मे आ गये थे और जब तुम खड़ी हुई तो तुम्हारी बैक साइड ,,,,

कोमल शर्मिंद्गी से हस्ते हुए - बस बस बस मै समझ गयी , मतलब नियत पहले दिन से ही खराब है

मै लण्ड सहलाते हुए कहा- नही कोमल मेरे मन मे ऐसा कोई विचार नही है तुमको लेके ,,वो सब बस एक संयोग था

कोमल - वो सब तो संयोग था मान लिया लेकिन अभी ये क्यू नही छोटा हो रहा है ,, देख रही हू मालिश से और भी बड़ा हो रहा है ,,,,, छीईई क्या क्या बोल रही हू मै

मै मुस्कुरा कर - वो तो उसकी वजह से ,,,मैने एक बार फिर कोमल के चुचियो के घाटी की तरफ इशारा करते हुए कहा

कोमल ने झट से अपने चुचियो के बिच मे हाथ रख लेती है

कोमल - छीईई कितने गंदे हो तुम

मै इस समय लगातार लण्ड हिला रहा था जिससे मुझे सेक्स का नशा होने लगा था और मेरे मुह से काफी गंदी जुबाने बाहर आने लगी थी ।

मै - अह्ह्ह कोमल

कोमल थोडा फ़िकर से - क्या हुआ राज दर्द ज्यादा है

मै ना ना मे सर हिलाते हुए अह्हे भर रहा था

कोमल - बताओ ना राज

मेरी आंखे अब बंद होने लगी और मै बोला - मेरा निकलने वाला है कोमल अह्ह्ह उह्ह्ह इसससससस अह्ह्ह्ह

कोमल समझ गई कि मै झड़ने वाला हू इससे पहले कि कोमल बचने का कुछ पाती मेरे लण्ड के सुपाडे ने तेज पिचकारी कोमल के मुह और सीने पर मारनी शुरू कर दी

कोमल - छीईई राआआआज्ज्ज्ज क्या कर रहे हो दुर हटो छीई माआ य्क्क्क्क

मै जब होश सम्भाला तो आन्खे खोल कर देखा सामने बिस्तर पर बैठी कोमल के चेहरे मेरा वीर्य टपक रहा है कुछ हिस्सा उसके चूचि के घाटियो मे रिस रहा था और बाकी का माल अपने चेहरे को बचाने के लिए कोमल ने जो हाथ लगाये थे उनपर रिस रहे थे ।

कोमल के मूछ पर लगा वीर्य रिस कर होटों पर जा रहा था जिसका आभास होते ही कोमल ने अपने होठ भीच लिये ,,पर कबतक उसे रोक पाती ना ही अपने हाथो से साफ कर सकती थी क्योकि वो पहले से ही वीर्य से सने थे । जैसे ही उसकी सांसे भारी होने लगी उसे मजबुरन मुह खोलना पडा और जैसे ही वीर्य की कुछ बुंदे उसके होटो से जीभ तक गयी

वो जोर से चिल्ल्ला कर - राआज्ज्ज ये क्या

कोमल अचानक से रुक गई और अपने जीभ एक बार अपने मूछ के हिस्से पर फिरा कर चाता गयी । उसके चेहरे के भाव बदल गये ।

ये शायद उसके लिये वीर्य चखने का पहला अवसर था और मेरे उम्मीदन उसे मेरे लण्ड का गरमा गर्म बीर्य उसके जीभ लग चुका था तभी वो शांत थी ।

मै - सॉरी कोमल वो आवेश मे मुझसे कण्ट्रोल नही हुआ

कोमल का गुस्सा शांत था ये मै समझ गया था क्यौंकि उसके चेहरे के भाव बदल गये थे

कोमल थोडा नरमी से - कम से कम एक बार बता देते मै हट जाती ना

कोमल - देखो मुझे सब साफ करना पडेगा

मै झट से एक गम्छा लिया और उसकी तरफ किया - लो इससे पोछ लो

कोमल को वीर्य गमछे मे पोछना पन्सद नही आया शायद तो वो बोली - यार इसमे कपड़े खराब हो जायेंगे

ऐसा करो तुम कपडे पहनो और मेरे साथ पीछे बाथरूम मे चलो ।

मै घूमा और झट से बिना अंडरवियर के लोवर पहन लिया

कोमल - अरे उसे भी पहन लेटे

मै - मै रात सिर्फ एक ही चीज़ पहनता हू

कोमल - ठीक है जैसा तुमको सही लगे , अब उपर भी पहनो कुछ जलड़ी ये सुख रहा है

मै झट से टीशर्त उठाया और जैसे ही मैने उसे गले डालने के फैलाया ,,, मैने देखा कोमल ने झट से अपने बाये हाथ पर लगे बीर्य को चाट ली

मै मुस्कराया और टीशर्ट पहन लिया और आगे आगे चलने लगा

और जब मै पीछे बाथरूम के बेसिन तक गया तो देखा कि दोनो हाथो के वीर्य वो साफ कर चुकी थी ।

मै जानबुझ कर उसका मन टटोल कर - ये कोमल हाथ पर जो लगा था कहा पोछ लिया

कोमल थोडा हिचक कर खुद को confident दिखाते हुए बोली - अरे वो सुख गया है

फिर वो साबुन से अच्छे से हाथ और मुह धुल लेती है और फिर चुल्लू मे पानी लेके सीने पर लगे माल को धुलती है जिससे उसकी कुर्ती भीगने लगती है और कुछ ही समय मे उसके ब्रा की पट्टी और कप दोनो साफ साफ दिखने लगते है ।

फिर मैं उसे आंगन मे टगा एक तौलिया देता हू और वो उसे पोछ लेती है

मै - चलो छत पर जाते है टहलने

कोमल - क्यू

मै - अरे एक बार आईने मे देखो खुद को और फिर बोलो

कोमल ने जब सीसे मे देखा खुद को तो उसको भी उसकी ब्रा के कप और चुचियो का शेप दिखा

मै - इसिलिए बोला की छत पर टहलते हुर सुख जायेगा

कोमल थोदा मुस्कुराई और बोली - हम्म्म ठीक है चलो

फिर हम दोनो साथ मे उपर जाने लगे ।

छत पर बहुत अच्छी हवा चल रही थी ।

मै - कोमल थैंक्स

कोमल - क्यू भई थैंकस क्यू

मै - वो तूमने बुरा नही माना उसके लिये ,,,अगर आज तुम्हारी जगह कोई और होती तो शायद वो थप्पड़ भी मार देती

कोमल मुस्कुरा कर - कोई बात नही दोस्त हू ना , मै नही समझूगी तो कौन समझेगा

मै - हा कोमल सही कह रही हो

कोमल - लेकिन मुझे ये नही समझ आ रहा है कि तुम रोज रोज मालिश करके अपना वो वेस्ट क्यू कर देते हो ,, जानते हो ना कितना इम्पोर्टेंट होता है वो बॉडी के लिए

मै - हा जानता हू , लेकिन वो मेरा रोज नही निकलता है आज बहुत दिनो बाद निकला था ।

कोमल - बहुत दिन बाद मतलब

मै - कोमल मै भी जाता हू की स्पर्म बॉडी के लिए कित्ना जरुरी है ,,इसिलिये मै हिसाब भर मालिश करता हू ताकि ड्रॉप ना हो

इससे पहले जब शुरू शुरू मे मालिश सुरु की थी तब करीब 10 दिन तक रोज स्पर्म वेस्ट किया था फिर थोडी कमजोरी हुई , तब से छोड दिया था ।

कोमल - ओह्ह्ह कोई बात नही राज , होता है अकसर ऐसा कुछ

हम दोनो ऐसे ही बाते करते हुए छत के सामने रेलिंग के पास खडे हो कर बाते करने ल्गे ।

तभी मुझे विमला मौसी सामने के गोशाला मे घुसते हुए दिखी,, मै थोडा confuse था और रात मे हल्की फुल्की रोशनी मे दिख नही रहा था ।

मै - कोमल वो देखो तुम्हारी मम्मी है क्या

मै इशारे से सामने की गोशाला के गेट से अन्दर जाते हुए देखा

कोमल - हा वो मम्मी ही है लेकिन वहा क्यू जा रही है

तभी मेरी नजर मेरे मामा पर गयी वो भी चुप्के से देखते हुए गोशाला मे घुस गये ।

मै - अरे देखो मेरे मामा भी गये है ,,,चलो देखते है कही कोई बात तो नही है ना

और मै जल्दी से सामने वाली सीढ़ी से निचे जाने को हुआ कि कोमल ने मेरा हाथ पकड़ कर रोक लिया

कोमल - नही राज हम लोग वहा नही जायेन्गे

मै चौक कर - अरे देख लेते हैं ना वहा कुछ हुआ तो नही है ना

कोमल - वहा कुछ नही हुआ है मै जानति हू आओ चलो उधर चल्ते है

कोमल मेरा हाथ पकड कर छत के बिच मे लाई

मै अचरज मे था कि क्या बात है कोमल ऐसे क्यू रियक्ट कर रही है ।

मै - क्या हुआ कोमल क्या बात है

कोमल सीसकते हुए - कुछ नही राज

मै चौक गया कि कोमल रो रही थी

मैने उसके कन्धे पे हाथ रखा और बोला- क्या हुआ कोमल तू अचानक से ऐसे रो क्यू रही हो

कोमल झट से मुझसे लिपट गयी और फफक फफक कर रोने लगी ।
 
मुझे मेरे बदन पर कोमल का अह्सास पाते ही मेरे अंदर उतेजना हुई लेकिन कोमल के आशुओ ने उसे गुमा दिया

मैने उसके पीठ को सहलाया और सामने कर उसके आंसू पोछे और बोला - कोमल सच सच बताओ क्या बात है आखिर ,, तुमको मेरी कसम है

कोमल - ये कया कर रहे हो राज ,, कसम क्यू दी

मै - देखो तुम अगर मुझे अपना दोस्त समझती हो तो मुझे बताओ क्या बात है , ये वादा है मै किसी से भी वो बात नही करूँगा

कोमल सिसकते हुए - प्रोमिस ना

मै - हा भाई प्रोमिस

कोमल - राज मै अपनी लाइफ से बहुत ज्यादा तंग आ गई । पिछ्ले 2 दिनो से मुझे आजादी मह्सूस हुई नही घर पर मेरी जिन्दगी नरक है नरक

मै - मै स्म्झा नही क्या बात है कोमल खुल कर बताओ

कोमल अब जो कहने वाली थी उससे मेरे रौंगटे खड़े होने वाले थे ।

मै - खुल कर बताओ कोमल क्या बात है ,आखिर ऐसा क्या है घर पर जिससे तुम्हारी लाइफ नरक बन गयी है

कोमल - मेरे दोनो चाचाओ ने मेरी जिन्दगी नरक कर दी है राज

और कोमल फफक कर फिर से रोने लगी ।

मै उसे वापस से शांत करके - उन लोगो क्या किया

कोमल - तुम तो जान्ते ही हो ना मेरे पापा को मरे 4 साल हो गये । इसी बात का फायदा उठा कर मेरे चाचा ने बेईमानी से पहले हमारे घर के कागज ले लिया और अपनी चाल के मम्मी को फसा लिया

मै - हमम फिर

कोमल - और मेरे दोनो चाचा रोज मेरी मम्मी के साथ वो सब करते थे धीरे धीरे मम्मी को भी इस चीज़ की लत हो गयी और वो अब उन्ही के इशारे पर चल्ती है ।

और अब मेरे चाचाओ की नजर मुझ पर है । आये दिन वो मुझे गंदे गंदे बाते बोल्ते है और मेरे बदन को छूने की फिराक मे ल्गे रहते है ,,बदले मे अगर मेरा छोटा भाई कूछ बोल देता है तो वो उसे मारते भी है ।

मै - ओह्ह्ह ये बात है

कोमल - हा राज और मेरी मा की बुरी लत बहुत ज्यादा हो गयी है । वो एक दिन भी अब बिना वो सब किये नही रह पाती है और आज उनको नही मिला तो तुम्हारे मामा के साथ गोशाला मे चली गयी

मै - ओह्ह इसिलिए तुम मुझे वहा जाने से रोक रही थी

कोमल - हम्म्म्म सॉरी राज मै ये सब नही ब्ताना चाहती थी ।लेकिन इन दो दिनो मे मुझे तुम जितना भरोसे का दोस्त आज तक नही मिला ।

मै - कोई बात नही कोमल मै हमेशा हाजिर हू तुम्हारे लिये

कोमल - थैंक यू

मै - वैसे कुछ सोचा है इस बारे मे कि कैसे अपने चाचा लोगो से पिछा छुड़वाना है

कोमल - हा मैने सोचा एक जॉब मिल जाये फिर मै मा और अखिल को लेकर शहर चली जाऊंगी घर जमीन सब छोड कर

मै - लेकिन कोमल वो तुम्हारे पापा का घर है ना

कोमल - तो क्या कर बताओ

मै - अच्छा ये बताओ इस मामले मे तुम्हारी मा क्या तुम्हारे साथ है

कोमल - हा वो बोली है कि वो छोड देगी घर ,

मै - ठीक है फिर मै मा से बात करता हू और फिर कोई रास्ता निकाल के बताता हू ।

कोमल - क्या सच मे तुम मेरी हैल्प करोगे राज

मै - क्यू नही आखिर दोस्त जो है हम

कोमल ने वाप्स से कस कर मुझे हग कर लिया - थैंक यू राज ,

और मेरे गाल पर किस्स दिया

मै थोडा मस्ती के मूड मे - इतना मेहनत का ब्स एक किस्स दोगी

कोमल - तो और क्या चाहिये

मै कोमल की कमर को खिच कर अपनी तरफ किया और बोला - अब बताऊ क्या चाहिये

कोमल आंखे बन्द किये - हम्म्म्म्ं

मै झुक कर उसके माथे को चूम लिया और बोला - ब्स तुम खुश रहो दोस्त इतना ही ।

और फिर कोमल को ढिला छोड दिया ।

कोमल मुझसे अलग होते हुए - तुम तो बडे सीधे निकले यार ,, हाथ आया मौका भी छोड दिया

मै - मै मौके का फायदा नही उथाता हू

कोमल - ओह्हो फिलोश्पर साहब चलो अब निचे चले

मै - जी हुजुरे आला

कोमल हस्ते हुए - आला की आली

फिर हम दोनो हसने ल्गे और निचे चले गये

देखते है दोस्तो आने वाले अपडेट मे क्या क्या बाते होने वाली है ।

.........................................
 
हम लोग निचे आये तो देखा किचन मे मामी मा और मौसी काम कर रही है ।

फिर हम लोग बिना कुछ बोले अपने कमरे की तरफ जाने लगे ।

मै - तब बताओ क्या किया जाय सब लोग बिजी है

कोमल - मतलब

मै - अरे देखो मामी मा और मौसी कीचेन मे है । गीता बबिता अपना होमवर्क कर रही है , नाना आराम कर रहे है और तुम्हारी मम्मी और मेरे मामा तो ....हिहिहिही

कोमल ह्स्ते हुए - तुम कोई भी बात सीरियस नही लेते हो ना

मै - नही हाहाहाहाह

ऐसे ही बाते करते हुए हम अपने कमरे मे आ गये और बिस्तर पर अगल बगल बैठ कर बाते करने लगे ।

कोमल - चलो ना कुछ अपने बारे मे बताओ फिर

मै - मै क्या बताऊ मेरे बारे मे सब कुछ जान ही चुकी हो

कोमल - हा ये तो है , तो क्या सच मे तुमने कभी वो सब नही किया किसी के साथ

मै - क्या नही किया

कोमल थोडा हिचक कर - सेक्स , फिर वो नजरे नीची कर लेती है

मै हस्ते हुए - नही यार , कभी इन सब पर फोक्स नही किया

कोमल - क्या तुम्हारा मन नही होता है वो करने का

मै - किसका नही करता है लेकिन उसके लिए एक लडकी होनी चाहिए ना पास

कोमल - अच्छा एक बात पूछू सच सच बताना

मै - हा पुछो ना

कोमल मुस्कुराते हुए - क्या तुमने कभी किसी को ओपेन देखा है

मै - मतलब

कोमल मुस्कुरा कर - अरे बुधु क्या तुमने कभी किसी लडकी को नंगा देखा है

मै - ना पुरा नही देखा है बस पीछे से

कोमल उस्तुसक्ता से - किसका

मै - मेरी मा का , मै कयी बार नहाते हुए देखा है उनको

कोमल की आंखे बड़ी हो गयी - तुम अपनी मा को नंगी देखते हो

मै - तुम गलत समझ रही हो कोमल , हम लोग एक ही घर मे नहाते है और मेरा घर ज्यादा बड़ा है नही तो ये सब चीजे होना नॉर्मल है ,, एक दो बार तो मैने दीदी को भी पीछे से देखा है ,

कोमल के चेहरे के भाव अजीब थे - तो क्या तब तुम्हारा वो खड़ा हुआ था जब तुमने पहली बार अपनी बहन को वैसे देखा था ।

मै - हा पहली बार देखा तो हुआ

कोमल - क्या तुमको गलत नही लगा कि वो तुम्हारी दीदी है

मै - नही पहली बार लगा था लेकिन अब नही और अब तो

कोमल जिज्ञासा से - क्या अब तो बताओ ना प्लीज

मै - तुम मुझे गलत नही स्म्झोगी ना

कोमल ना मे सिर हिला के - नही बताओ ना राज

मै - मै तो दो तीन बार दिदी को देख कर वीर्य भी निकाल चुका हू ,, क्योकि उस समय मेरे पेनिस मे दर्द हो रहा था

कोमल मुस्कुराई

मै - तुमको अजीब नही लगा

कोमल - क्या

मै - यही की मै मेरे दीदी के लिए ऐसा सोचता है दीदी के लिए

कोमल मुस्कुरा कर - नही ,,,, क्योकि मेरे घर मे भी मेरा भाई है और वो भी मुझे सोच कर अपना स्पर्म निकालता है ,,,मै देखा है कयी बार

मै - तो तुमको कैसा फील होता है तुम्हारा भाई तुम्हारे नाम से अपना लण्ड हिलात है

कोमल मेरे मुह से पहली बार लण्ड शब्द सुन कर शर्मा गयी

कोमल - पता नही लेकिन मुझे एक अजीब सी सिहरन होती है मानो वो मुझे छू रहा हो और

मै - और क्या कोमल

कोमल - मुझे भी मन होने लगता है कि मै अपने प्राइवेट पार्ट से खेलू

मै समझ गया कि अब कोमल को थोडा सा आगे लाने की जरुरत है

मैने कोमल का हाथ थामा

कोमल - क्या हुआ राज

मै - मुझे तूमसे कुछ कहना है कोमल

कोमल शर्मा कर- हा बोलो ना

मै - कोमल मै भी तुम्हारा नाम लेके हिलाना चाह्ता हू

कोमल - हम्म्म्म सच मे राज , मै तुम्हे इतनी पसंद हू

हम दोनो पर हवस हावी हो रहा था

मै कोमल के गालो को सहला कर - हा कोमल सच मे तुम बहुत सेक्सी हो

कोमल - मुझे तुम पन्सद हो राज और

मै - और क्या बोलो ना

कोमल - और मै तूम्हे सोच कर वो सब करना चाहती हू

मै झट से झुक कर कोमल की लिपस को मुह मे भर लिया और चूसने लगा ,,जिसमे कोमल भी मेरा साथ देने लगी ।

फिर मै अगल हुआ

मै - कोमल क्या तुम मुझे अपना बदन दिखाओगी मै तुम्हारे बदन पर अपना लण्ड निचोड़ना चाहता हू

कोमल शर्मा गयी - क्या देखना चाहते हो राज

मै कोमल के गाल को छुते हुए उसके गरदन पर हाथ फेरने लगा ,,जिससे कोमल सिहरने लगी और मेरे हाथो पर अपने चेहरे को घुमाने लगी ।

मै अपनी उंगली को घुमाते हुए उसके चुची के घाटियो मे ले गया ,,, लेकिन कोमल के लिए अब सम्भल पाना मुस्किल था

और मैने कोमल की बाई चुचि को कुर्ती के उपर से ही हाथ मे भर लिया

कोमल - अह्ह्ह्ह राआआज्ज्ज उफ्फ्फ्फ हा राज सह्लाओ उसे अह्ह्ह

मै - कोमल क्या तुम मुझसे चुदना चाहोगी

कोमल - इस्स्स उम्म्ंम्ं हा राज मुझे आह्ह तुम्हारा वो बहुत पसंद है

मै कोमल को पकड कर बिस्तर पर लिता दिया और उसके बगल मे लेट के उसको बाहो के भर लिया

कोमल - उफ्फ्फ राज ये अह्सास ,,, ये गरमी हय्य्य्य मम्मी

मै कोमल के गरदन को चूमते हुए अपने हाथ उसकी जाघो से लेकर मुलायम चर्बी वाली गाड़ पर फेर रहा था और बीच बीच में कोमल की चुचियो को भर भर कर मसल रहा था ।

कोमल - राज राज सुनो ना

मै - उसकी आँखो मे देखते हुए उसकी एक चुची को मसल रहा था

कोमल - चलो ना जल्दी जलदी हम लोग अपना काम निपटा ले नही तो कोई भी आ सकता है और खाना खाने का समय भी हो रहा है

मै - और बाकी का क्या

कोमल - मै कहा भागी जा रही हू , सब करेंंगे हम लोग धीरे धीरे

मै - हा चलो ना मेरी जान

फिर मै झट से उठा और घूटनो के बल आकर कोमल के सामने खड़ा होकर अपना खड़ा मोटा लण्ड हाथ मे लेके हिलाने लगा ,,, कोमल मेरे लण्ड के निचे लेटे लेटे ही अपनी कुर्ती उपर की और प्लाजो के उपर से चुत को रगडने लगी ।

मै - अह्ह्ह कोमल देखो ना तुम्हारे बारे सोच कर कितना मोटा हो रहा है मेरा लण्ड

कोमल - सीई उह्ह्ह हा राजजज इसस उम्म्ंम देख रही हू ,,, मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है तुम्हारे सामने अपना चुत सहलाने मे अह्ह्ह राज इह्ह्हउफ्फ्फ ओह्ह्ह राअज्ज्ज झड़ जाओ ना मेरे मुह पर ,,

मै - कोमल मुझे भी अपना चुत दिखाओ ना प्लीज

कोमल ने झट से प्लाओ और पैंटी एक साथ घुटनो तक ले गयी और उसकी गुलाबी चुत देख कर मेरे मुह मे पानी आ गया

मैने सोचा आगे जाकर चाट लु

मै - उफ्फ्फ कोमल कितनी गुलाबी चुत है तुम्हारी ,,,मन कर रहा है चाट लू इसे

कोमल - नही राज आज नही आज बस तुम्हारे इस मुसल को देख कर मुझे अपनी चुत रगड़ लेने दो प्लीज ,,, तुम भी मेरे मुलायम चुत को देख लो मैने आज से पहले किसी को अपनी चुत नही दिखाई आह्ह्ह्ह राअज उफ्फ्फ्द हय्य्य वहा दर्द हो रहा है अह्ह्ह्ह राज कुछ करो

मै कोमल को गाड़ पटकता देख समझ गया वो झडने वाली है तो मै झुक कर एक हाथ उसके हाथ पर रख कर उसके साथ चुत सहलाने लगा और वो अपना दुसरे हाथ से मेरे तपते लण्ड की थाम लिया

लेकिन कुछ ही पल मे वो तेज़ी से गाड़ पटकते हुए झडने लगी ।
 
कोमल - आह्ह राज हा हा उह्ह्ह मा इस्स्स अह्ह्ह आह्ह उफ्फ्फ

कोमल का सारा कामरस मेरे हाथों मे लग गया और मै उसके चुत से हाथ हटा कर अपनी सारी उंगलियाँ एक एक करके कोमल के सामने चाटने लगा ,,, वही कोमल भी अपनी चुत के पानी से सने हाथ को मेरे लण्ड पर फेरने लगी उसे हिलाने लगी

मै - उफ्फ्फ कोमल हा ऐसे ही कित्नी गर्म माल हो तुम अह्ह्ह्ह

कोमल - सिरफ दो दिनो मे तुमने मेरे अन्दर के हवस को जगा दिया अह्ह्ह झड़ जाओ ना राज उफ्फ्फ मेरे हाथ दर्द हो रहे है

फिर मैने कोमल के हाथो को हटा कर अपने हाथ से तेज़ी से अपना लण्ड हिलाने लगा

कोमल के चुत का पानी धीरे धीरे सुख गया था तो मेरे लण्ड बराबर से आगे पीछे नही हो रहा था

मै - आह्ह कोमल ये तो चिपक जा रहा है हाथ ,,इसे गिला करना पडेगा

मै इधर उधर देखा और बिस्तर पर खड़ा हुआ और तेल की शिसी नही मिल रही थी तो

मै सोचा थोडा थूक लगा लू लेकिन उससे पहले ही कोमल घुटतो के बल बैठ कर मेरे लण्ड को मुह मे निकल गयी और ढेर सारा लार मेरे लण्ड लार लगा कर दोनो हाथ से उसे सहलाने लगी ,,,, कुछ ही देर मे मै चरम सीमा पर पहुंच गया

मै - ओह्ह्ह कोमल अह्ह्ह मै आ रहा हू

कोमल - हा राज झड़ जाओ ना कबसे इन्तेजार है अह्ह्ह प्लीज

मै तेज़ी से पिचकारी मारते हुए कोमल के मुह पर झडने लगा और कोमल मेरे वीर्य की पिचकारी को अपने मुह मे लेने लगी और अच्छे से चाट चाट कर मेरे आड़ो को मसल मसल कर लण्ड को चूसा फिर चेहरे पर लगे हुए वीर्य को चाटने लगी ।

मै - ओह्ह कोमल मज़ा आ गया ,,, थैंक यू सो मच

कोमल मुस्कुरा कर - थैंक्स यू टू राज

मै - सच मे आज जितना मज़ा पहले कभी नही आया

कोमल शर्मा कर ह्सते हुए - मुझे भी राज ,,तुमहारे साथ रह कर दो दिन मे ही मै कितना खुल गयी ।

मै हस्ते हुए - हा और मै भी हीहीहि

कोमल - चलो कपडे सही करो कोई आ ना जाये

मै भी झट से लोवर पहन लिया और वही कोमल भी अपनी पैंटी प्लाजो उपर कर ली ।

हम दोनो एक दुसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे।

मै - हम दोनो के ख्याल कितने मिलते है ना

कोमल - हम्म्म शायद कुछ कुछ हिहिहिही

इधर हम लोग बाते कर रहे थे कि गीता बबिता भैया भैया करते हुए दरवाजा खोलने लगी ,

कोमल ने उठ कर दरवाजा खोला

गीता - क्या भैया मै कबसे आपको खोज रही चलो मा बुला रही है , खाना खाने के लिए

मै - हा चलो हम लोग फ्रेश होकर आते है

फिर हम दोनो पीछे आगन मे गये फ्रेश हुए और फिर खाना खाने के लिए किचन मे चले गये । जहा पर नाना मामा मौसी, विमला मौसी और गीता बबिता बैठे हुए थे ।

हम दोनो भी बैठ गये, मामी और मा ने सबके लिये खाना लगाया ।

खाने के दौरान मा ने बताया की कल हम लोग घर जा रहे है

नाना - अरे छोटी इतनी जल्दी क्या है

मा - बाऊजी घर पर वहा मेरे देवरानी के मायके मे शादी के लिए चली गयी तो इसके चाचा को दिक्कत होती है खाने पीने की

गीता बबिता का ये सुन कर चेहरा उतर गया

गीता - बुआ आप चले जाओ भैया को रहने दो ना

मा हसते हुए - हा रख ले यही अपने भैया को हीहीहि

सब हसने लगे

फिर नाना और मामा खाना खा कर अपने क्मरे मे चले गये ।

गीता - भैया आप आज भी हमारे साथ सोना हम लोग खुब सारी बाते करेंगे

मै मुस्कुरा के - ठीक है मीठी

वही मा और मौसी के शकल उतर गये थे और बगल मे बैठी मेरी मामी मेरे जांघो को दबाए मुह बना रही थी ।

मै समझ गया कि आज रात मे तो सब मेरे पीछे है अब किसको दुखी करू और किसको खुश

देखा जाय तो मुझे गिता बबिता के साथ सोना तो था ही।

वही मामी आज मामा के साथ ही सोएंगि

कोमल अपने मा के साथ सोती

अब बची मा और मौसी तो वो दोनो एक साथ सोने वाली थी । कल की तरह

मै भी जाने से पहले एक बार सबसे मज़े लेना चाहता था

अब देखना था कि आज की रात मे मुझे क्या मिलता है क्या छूटता है ।

आने वाले अपडेट मे क्या नया हंगामा होने वाला है

....................................
 
रात मे सोने के विचार से सारे लोग परेशान तीन उम्मीद भरी नजरे मुझसे आस लगाये थी ।

वही दुसरी तरफ विमला मौसी और मामा के बीच अलग ही नैन इशारे हो रहे थे । मेरे दुसरे बगल मे बैठी कोमल अपनी मा को मुस्कुराता देख कुछ खास खुश नही नजर आ रही थी । क्योकि वो भली भांति परिचित थी अपनी मा के करतुतों से कि जाने से पहले वो मेरे मामा से जरुर चुदेगी ।

वही अगर कोई सबसे ज्यादा कोई खुश था वो गीता बबिता थी , मासूम सी अल्हड़ जवानी मे घुस्ती मदमस्त लडकिया जिनको अभी एक दिन पहले ही तो जिस्मो का सुख से रुबरू होने का अह्सास मिला था तो वो भी मेरे जाने से पहले से ट्यूबवेल के उस हवस भरे खेल का मज़ा लेना चाहती थी ।

मै मन इसी उधेड़बुन मे था कि कैसे कोई रास्ता निकालू

कुछ तो करना ही पडेगा ।

इसी समय नाना खाना खा कर उठे और मुझसे कहा

नाना - बेटा तू थक तो नही गया है ना

मै मुस्कुरा कर - नही नाना जी कहिये क्या बात है ,

नाना - जरा खाना खा कर मेरे कमरे मे आना तुझसे कुछ बात करनी है ।

मै - जी नाना

फिर हम सब खाना खाये और मै खाना खाने के बाद निकल गया नाना के पास

कमरे मे नाना बिस्तर पर बैठे थे टेक लगाये और तम्बाकु रगड़ रहे थे । ये उनकी रोज की दिनचर्या मे शामिल था कि खाने के बाद तंबाकू खाना

मुझे देखते ही मुस्कुराये और बिस्तर पर बैठने को बोला

मै उन्के पाव के पास बैठा

नाना - और बेटा तू भी लेगा तम्बाकू

मै हस्ते हुए - अरे नही नही नाना जी मै नही खाता ये सब

नाना - धत्त पगले जिसने तम्बाकू ना खाया तो मर्द कैसा रे

मै अचरज से - क्यू , जो नही खाते वो मर्द नही होते

नाना - तू अभी नही समझेगा , जब तेरे भी बदन को औरत का स्पर्श मिलेगा तब तू जानेगा कि ये तम्बाकू किस काम का है हाहाहा

मुझे नाना के साथ ऐसे कोई संवाद की उम्मीद नही थी इस लिए मै सही मायने मे शर्मा कर बिना कुछ बोले शर्माने लगा ।

नाना - अरे मेरे शर्मा मत , मर्द तो ऐसी बाते करते ही है बेटा , तू मुझे अपना दोस्त समझा कर

मै जिज्ञासा भरे भाव से भौहे सिकोड़ कर - दोस्त ???

नाना - हा भई दोस्त , तुझे पता है नाना पोते मे और दादा पोते मे बहुत गहरी दोस्ती होती है

मै मुस्कुरा कर - हीहीहि क्या नाना आप भी

नाना - तू मान नही रहा है अरे मेरे दादा तो यहा कि कहते थे कि औरत से कैसे बात करनी चाहिए उनको खुश कैसे करना है

मै इस बार और शर्म से लाल हुआ

नाना - देख बेटा मेरे लिये मेरे पोते ही मेरी वंश की शाखाएँ है और मै नही चाहता की तू अनाड़ी ही रह जाये।

मै - कैसा अनाडी नाना जी , मै समझा नही

नाना मुस्कुरा कर - लगता हकि तेरी कोई लड़कियो मे दोस्त नही है अब तक तभी तू ऐसे नासमझो के जैसे बाते करता है ।

मै - है ना नाना जी ,

नाना - हहाहह्हाअह्हा , कौन वो कोमल

मै - हम्म्म्म क्यू

नाना - अरे बुड़बक मै स्कूल की दोस्ती की नही , प्रेमिका की बाते कर रहा हू , क्या कहते वो तू लोग उसको ,,हा गर्लफ्रैंड हाहाहाहहा

मै मुस्कुरा कर शर्मा गया

नाना- तो बता है कोई तेरी गर्लफ्रैंड

मै मुस्कुरा कर शर्माते हुए ना मे सर हिलाया

नाना - मुझे लगा ही था कि तू क्यू नही समझ पाया ,,,, अरे तू तो लण्ड को भी नुनी ही बुलाता होगा ,,हाहाहहहहा

मै शरमा कर - क्या नाना ,,,मुझे पता है कि किसको क्या कहते है इतना भी भोला नही हू मै ,,,, और आपने यही सब बाते करने के लिए बुलाआ मुझे

नाना हस्ते हुए - हाहाहहा , अरे नही बेटा काम तो कुछ और था लेकिन अभी तेरे लिए कोई और ज्ञान जरुरी हो गया

मै अचरज भाव से - कैसा ज्ञान नाना जी ,,

नाना - बेटा ऐसे बात कोई भी मा बाप अपने बेटो से नही करते है । इसलिये तो दादा या नाना को अपने नाती पोता का दोस्त बनना पड़ता है । हाहाह्हाहा

मै नाना की बाते सुन कर मुस्कुरा रहा था

नाना - तू बता आखिर तुझे किस तरह की लडकी पसंद आती है , मान ले तुझे शादी करनी हो तो

मै अबतक की बातो से समझ गया था कि नाना मेरे साथ सेक्स की बातो पर खुल कर बाते करना चाह्ते है । मगर इतनी जल्दी नही खुलना चाहता था और ना ही ऐसे मज़ेदार बातो का मज़ा किरकिरा करना चाहता था ।

मै - अब ऐसे कैसे बताऊ कोई सामने रहे तब ना

नाना - हम्म्म अच्छा मान ले तेरी मौसी , तेरी मा या मामी या वो तेरी दोस्त कोमल या फिर उसकी मा वो विमली ,,, मे सबका रिस्ता तेरे लिये आया हो तो किसे चुनेगा

मै हस्ते हुए - क्या नाना जी आप भी , मेरी मौसी मा और मामी का रिस्ता क्यू आयेगा मेरे लिए

नाना - अरे तू रिस्ता ना देख ये बता उन पांचो मे किसका बदन तुझे पसन्द है ,,

मै मुस्कुरा कर - नाना सारे लोग अपने जगह पर सही है

नाना - अच्छा वो कैसे

मै संकोचवश - वो वो

नाना - अरे खुल कर बता ना बेटा अपने दोस्त से क्या शर्म

मै मुस्करा कर - देखो नाना मा हल्की सावली है लेकिन उनका चंचल स्वभाव और भरा बदन पसंद है , मामी बहुत खुबसुरत है , कोमल मेरे हमउम्र मे है और अच्छी लडकी है और विमला मौसी थोडे नये जमाने के हिसाब से रहती है तो वो भी ठीक है।

नाना - और तेरी रज्जो मौसी का क्या , उसमे क्या खास है

मै - वो मुझे उनका भारी बदन अच्छा लगा उन्का सब बड़ा बड़ा है जो मुझे पसंद आया

नाना मुस्कुराये और धोती मे हुकार भरते लण्ड को सहला कर - हम्म्म्म बात तो तेरी सही है

मेरी नजर नाना के हाथो पर गयी और नाना ने मुझे खुद का लण्ड सहलाते देखा तो हसते हुए बोले - हाह्हाह्हा देखा तम्बाकू का असर बेटा, बुढापे मे भी मुसल को खड़ा कर देता है और अभी तो जोश इतना हो रहा है कि दो गदरायी औरत अभी चोद दू हाहहा

मै शरम से निचे देखने लगा

इसीबिच गीता मुझे बुलाने नाना के कमरे मे आ गई

गीता - चलो भैया हमारे साथ भी बाते करो ना

नाना - हा अब जा बेटा हमारी बाते आगे फिर कभी होगी हाहाहाह्हा

मै - जी नाना

फिर हम दोनो जाने लगे तो नाना ने पीछे से आवाज दी

नाना - बेटा जरा अपनी रज्जो मौसी को बोल देना कि मैने आवाज दी है और तुम सब सो जाना

मै समझ गया कि आखिर क्यू नाना ने रज्जो मौसी की बुलाने को कहा लेकिन उससे जरुरी ये था कि उनकी तबियत ठीक नहीं थी तो क्या फिर भी वो ये सब करेंगे ।

खैर मै गीता को कमरे मे आने को बोल कर मौसी के कमरे मे गया ,,,जहा मा और मौसी बैठी सोफे पर कुछ बाते कर रही थी ।

मुझे देख कर दोनो के चेहरे खिल गये

मौसी - अरे राज बेटा वो दोनो सो गयी क्या

मै - नही मौसी वो नाना ने आपको बुलाया है

मा - लेकिन दीदी बाऊजी की तबियत ठीक नहीं है न तो कैसे

मौसी - उन्की तबियत तम्बाकू खाते ही ठीक हो जाती है रे छोटी हिहिहिही

मा - भ्क्क्क और जो डॉक्टर ने बोला वो ,,,

मौसी - चार दिन बादाम वाला दूध मिला नही की सब चुस्त दुरुस्त हीहीहि

मा हस्ते हुए लेकिन मन मे एक नयी खुशी को समेटे जिसे सिर्फ मै और मा ही समझ सकते थे - अच्छा

मौसी - चल ठीक है अभी आती हू

फिर मौसी नाना के रूम मे निकल गयी और वही मा मुझे देखा और फिर शर्माने लगी । वो समझ चुकी थी कि इस समय हम दोनो के मन मे क्या था ।

मै - मा अब खुश हो ना

मा शर्मा कर - तू ना चुप रह और जल्दी से उन दोनो को सुला कर मेरे पास आ जा ,,
 
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