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Incest सपना-या-हकीकत

मै तस्वीर लेके छत पर गया और दीदी किचन मे खाना बना रही थी ।

मै दीदी को फ़ोटो देते हुए - लो दीदी आपका एक और दीवाना हाजिर है

दीदी बडे गौर से तस्वीर को देखा और मज़ाक मे बोली - ये चिरकुटवा कौन है भाई हिहिहिही नाक देख इसकी हाहाहाहा

मै - आपका ही होने वाला पति है शायद मा पापा ने पसंद किया है

दीदी सीरियस होते हुए मुझे अवाक सा देख्ते हुए - तू झूठ बोल रहा है ना

मै हस कर - सच मे ये आपके लिये आया है रिश्ता ,,लड़का शहर मे सरकारी बाबू है

दीदी थोडा भौहे चढा कर - तो

मै आश्वस्त होकर - तो पापा ने मुझे भेजा है कि मै आपकी मन की इच्छा जान लू ,,,तो क्या कहती हो हा या ना

दीदी थोडा मन गिरा कर - तू जानता है ना भाई मै अमन से

मै थोडा दीदी को छेड़ कर - तो क्या हुआ मुझे कोई दिक्कत नही है और तेरा भी फाय्दा होगा ,,, यहा मायके मे दो दो अशिक़ भी रहेंगे हाहहाहा

दीदी हस कर - धत्त नही मुझे एक ही आशिक़ चाहिये और एक पति वो भी मायके मे ही

मै - तो मतलब मै मना कर दू

दीदी - बिल्कुल भाई

मै किचन से वापस निकलते हुए - ठीक है मै पापा को बता देता हू

दीदी मुझे रोकते हुए- लेकिन तू उनको कहेगा क्या

मै जल्दी जल्दी बोलता हुआ एक सास मे - यही की तुमको ये लड़का पसन्द नही है और तुम अमन को चाहती हो और मायके मे एक आशिक़ है उसको भी नही छोड़ना चाहती हो हिहिहिहिह

दीदी हाथ मे लिये कल्छुल उठाकर मारने को होती हुई बोली - ब्क्क्क ये सब नही , तू बस मना कर दे और बाकी मै अमन से बात करके बताती हू आगे क्या करना है

मै - हा उसको बोलो जल्दी से घर पर आये रिश्ता लेके नही तो कोई और कब्जा कर लेगा

दीदी हस कर - हा ठीक है लेकिन तू थोडा ध्यान से बोलना ताकि कोई बखेडा ना हो घर मे ,,समझ रहा है ना

मै बिंदास होते हुए - चिल करो दीदी सब सही होगा

फिर मै हस कर वाप्स नीचे आ गया

और मुझे वापस देख कर मा उत्सुकता से - क्या हुआ बेटा क्या बोली वो

मै - अरे मा उसको सोचने का समय दो उसकी भी लाइफ है ना ,,यहा हम सब उसके अपने है व्हा के लोगो के बारे मे नही जान्ती वो और ऐसे सिर्फ तस्वीर देख के क्या होता है

पापा - हा बेटा ठीक कह रहा है तू ,,कोई बात नही उसे इत्मीनान से जवाब देने दे वैसे भी लड़के वालो को भी अभी कोई जल्दी नही है मै उनको होली के बाद जवाब देने को बोला है ।।

मा खुश होकर - ब्स ये रिश्ता हो जाये और मेरी बच्ची किसी अच्छे घर सेट हो जाये तो मै गंगा नहा लू

मा की बात सुन कर हम सब भी खुश थे लेकिन मेरे मन मे एक योजना ने जन्म ले लिया।

रात मे हम सभी ने खाना खाया और फिर मै सोने के लिए नये घर निकल गया और 11 बजे करीब सोनल का मेरे पास फोन आया ।

फोन पर

मै - हाय जानू क्या हुआ

दीदी - जानू के बच्चे तुने क्या बोला मम्मी से ,, तेरे जाने के बाद मम्मी मुझे convence करने मे लगी है कि मै इस रिश्ते के लिए हा कर दू

फिर मैने उनको मम्मी पापा की बात चित और अपना मास्टर प्लान समझाया

सोनल खुश होकर - अरे वाह सेम यही मैने सोचा था और इसके लिए अमन से मैने बात भी कर ली है और एक खुशखबरी भी है ।

मै उत्साही होकर - क्या दीदी बताओ ना

दीदी - भाई अमन ने बताया कि उसकी मा हमारे रिश्ते के लिए राजी है और होली के एक दिन पहले ही हमारे घर आने वाले है

मै खुशी से - ओह्ह हो ,, फिर तो आगे मम्मी पापा को मनाने की जिम्मेदारी मेरी

दीदी - हा भाई प्लीज तू सम्भाल लेना

मै - कोई नही दीदी चिल्ल ,, लेकिन बदले मे मुझे क्या मिलेगा

दीदी हस कर - तुझे क्या चाहिये

मै - वही जिसका वादा आप शादी से पहले मुझे देने का की है

दीदी - भाई एक बार रिश्ता होने दे सब कुछ तुझ पर लुटा दूँगी मै और मैने तुझे रोका है क्या कभी आज सुबह भी तो तुने जो किया वो

मै - क्यू मज़ा नही आया क्या मेरी जानू को

दीदी शर्मा कर - चुप पागल

मै - आज तो जीभ डाली थी जल्द ही उसमे वो भी जायेगा

दिदी - भाई प्लीज चुप हो जा ना मुझे शर्म आती है ऐसे

थोडी देर ऐसे ही दीदी से चटपटि बाते कर मै सो गया ।

अगली सुबह मै उठा और वही नये घर पर फ्रेश हुआ और निकल गया टहलने के लिए

आज फिर से सरोजा की मस्तानी जिस्मानी हुस्न का दिदार हुआ और सवेरे सवेरे लोवर मे तम्बू बन गया ।

आज मेरा मन नही माना और मै सरोजा जी के पीछे पीछे निकल गया। यहा तक की वापसी मे भी उन्के पीछे लगा रहा ,, सरोजा भी बखूबी मेरी दिवानगि को समझने लगी थी और मुस्कुरा कर एक दो पलट कर मुझे पीछे आता देखती भी थी ।

जब हवेली का मोड आया तो मै वही रुक गया और आगे जाने की हिम्मत नही हुई लेकिन सरोजा की बेकाबू जवानी ने मेरे लण्ड को और भी बेकाबू कर दिया तो मै छिप कर सरोजा के पीछे जाने लगा ।

सरोजा अब आराम से चल रही थी और वो हवेली के मेन गेट मे ना जाकर सीधा हवेली के बगल से गये एक चकरोड से होकर हवेली के पीछे की तरफ जाने लगी ।

चुकी ठाकुर की हवेली टाउन के थोडा बाहर ही पड़ती थी और उसके पीछे पूरा 50 बीघे का सिवान था जो ठाकुर की ही संपति थी ।

मै चुपचाप सरोजा के पीछे पीछे चला दिया , लेकिन हवेली के बगल की दीवाल की सीमा खतम होते ही वो हवेली के पीछे हाते की तरफ घूम गयी और इसी समय मै अपनी चाल तेज करके हवेली के पीछे आया तो वहा कोई नजर नही आया

मै हवेली के पिछवाड़े इधर उधर देख रहा था कि किसी ने मुझे पीछे से पकड़ा और हाते मे खिच लिया

पहले तो मै चौका फिर ध्यान दिया तो वो सरोजा जी ही थी

सरोजा - तुम पागल हो सड़क पर कम था क्या जो पीछे पीछे यहा तक चले आये

मै सरोजा को नोर्मल देख कर थोडा रिलैक्स हुआ और बोला - सॉरी वो मै रास्ता भूल गया था

सरोजा मुस्कुरा कर - ध्यान कहा था तुम्हारा जो रास्ता ही भूल गये

मै सरोजा की लुभाव्नी बाते सुन कर मस्ती मे - ध्यान तो सही जगह ही था ब्स मै गलत जगह आ गया उसके चक्कर मे

सरोजा ह्सते हुए - तुम पागल हो अब जाओ यहा से कोई देख लिया तो फालतू का बखेडा कर दोगे

मै - तो देख लेने दो हम कौन सा कुछ गलत कर रहे है कि लोगो का डर हो

सरोजा अपना माथा पिट कर - हे भगवान ये लड़का भी ना ,,,,अरे बुधु ये हवेली का पिछवड़ा है और कोई हमे देख लिया तो क्या सोचेगा

मै हस कर - हा वही तो क्या सोचेगा

सरोजा शर्मा कर ह्सते हुए - वो सोचेगा कि हम कि हम

मै उनको उक्सा कर - हा बोलिए ना

सरोजा शर्मा कर - तू बडे चालाक हो मेरे मुह से बाते निकलवा रहे हो ना मुझे जान्ते हो ना मै तुम्हे

मै - तो चलो जान पहचान बढ़ा लेते है हिहिही वैसे आपके भैया मुझे बहुत अच्छे से जानते है और मेरे पापा के दोस्त भी है

सरोजा ध्यान से मेरी बाते सुनते हुए - हम्म्म ये बात

मै - तो अब तो डरने की जरुरत नही है मै आपका अपना ही हू

सरोजा इतरा कर - ओहो इतनी जल्दी मेरा होने को जरुरत नही है हुउह

मै बालो मे हाथ फेरते हुए - फिर क्या करना होगा उसके लिए मुझे

सरोजा शर्मा के - अभी तुम जाओ यहा से बाद मे देखती हू क्या कर सकते है

फिर वो पीछे से ही हवेली मे चली गयी और मै मस्त होकर घर के लिए निकल गया ।

घर पर मै नहा धो कर काम मे लग गया ।

होली को अब कुछ ही दिन रह गये थे तो शाम को पापा के घर आने के बाद नये घर को लेके चर्चा हुई कि जब सारी तैयारियाँ हो ही गयी है तो क्यू ना होली के दिन ही छोटी मोटी पूजा करवा कर लगे हाथ गृह प्रवेश भी करवा लिया जाये और फिर आगे सोनल की शादी तक जब सारे मेहमान एक्थ्था होगे तब विधिवत तरीके से एक बार और पूजा पाठ करवा दिया जायेगा ।।

घर मे सबको पापा का सुझाव पसंद आया और सभी ने अपनी सहमती दिखाई ।

समय बीता और होली के एक दिन पहले तय योजना के अनुसार अमन के चाचा मदनलाल और उसकी मम्मी ममता देवी दोनो पापा से मिलने दुकान पहूचे ।

जिसकी सूचना मुझे सोनल के माध्यम से मिल गयी थी और फिर हम सब शाम को पापा के आने के इन्तजार करने लगे ।

दिन भर मेरी और अनुज की भी काफी भागदौड़ रही क्योकि कल होली के साथ साथ नये घर मे प्रवेश का प्रोग्राम भी था ।

लेकिन समय रहते मैने और अनुज ने सारी तैयारिया पुरी कर ली ।

मेरे अनुमान अनुसार और कल होली की तैयारी को देखते हुए पापा शाम को 5 बजे तक घर आ गये थे और उनके आने के बाद मै और अनुज भी नये घर से दुकान वाले घर आ गये ।

फिर पापा ने मुझे रोका और कुछ बात करने के लिए कहा

मै समझ गया कि क्या बात हो सकती थी ।

फिर पापा ने दुकान मे अनुज को बिठा कर मम्मी और मुझे लेके पीछे कमरे मे गये ।

मा थोडी चिन्ता के भाव मे - क्या हुआ जी क्या बात है , सब ठीक है ना

पापा मुस्कुरा के - हा रागिनी सब ठीक है वो तो एक और खुशी की बात है

मा खुश हो कर - अच्छा तो बताईये ना

पापा - लेकिन उससे पहले मुझे राज से बात करनी है

मै - जी पापा बोलिए

पापा - बेटा ये मुरारीलाल जी का बेटा तेरे साथ ही पढता है ना

मै - जी पापा क्या हुआ

पापा थोड़ा अनुमान लगाते हुए - बेटा ये अमन कैसा लड़का है , मतलब बात व्यव्हार कैसा है और तू उसके साथ बचपन से पढा है तो जानता भी होगा ना

मै खुश होकर - पापा वो तो बहुत ही अच्छा लड़का है और पढने मे होशियार है और हालही मे उसने इन्डियन नेवी की परीक्षा दी है और आंसर-की के हिसाब से वो पास हो गया है । जल्द ही उस्का फाइनल रिजल्ट आने वाला है

मा खुश होकर - अरे वाह फिर तो बहुत किस्मत वाले उसके मा बाप जो उनको इतने हीरे जैसी औलाद मिली है ।

पापा मुस्कुरा के मा को थोड़ा कन्फुज करने के अन्दाज मे - क्या हो रागिनी अगर हमारी सोनल की भी ऐसी किस्मत हो जाये तो

मा उत्सुकता से - मै समझी नही राज के पापा

पापा ह्स कर - क्या हो अगर सोनल की शादी अमन से हो जाये तो

मा पहले खुश हुई लेकिन फिर कुछ सोच कर - वो तो ठीक है लेकिन इतने पास मे क्या उसके घर वाले मानेगे

पापा खुशी से - अरे उसकी कोई चिन्ता नही है आज खुद अमन के चाचा और उसकी मा मेरे दुकान पे आये थे सोनल की रिश्ते की बात करने

मा खुश होकर - क्या सच मे राज के पापा ,,अगर ऐसा हो जाये तो कितना अच्छा होगा हमारी बेटी हमसे ज्यादा दुर भी नही होगी और खुश भी रहेगी ।

पापा - वही मै भी सोचा ही रागिनी

मा थोडी परेशान होकर - हा लेकिन क्या सोनल को अमन पसंद आयेगा

पापा ठहाका लगाते हुए - अरे मजे की बात तो तुम जानोगी तो और भी खुश होगी

मा एक अंजान खुशी का भाव लाते हुए - क्या बताओ तो सही

पापा हस कर - अरे रागिनी हमारी सोनल और अमन पहले से एक दूसरे को पसंद करते है और अमन ने खुद पहल करके अपने चाचा और मा को भेजा था ।

मा खुशी से आसू छलक देती - मुझे सम्भलिये राज के पापा ,,,मै मै कही मै पागल ना हो जाऊ ।

पापा ह्स कर मा को कन्धे को थाम कर बोले - कय हुआ जान

मा रोते हुए - मेरे जीवन की सबसे ब्ड़ी चिन्ता आज खतम हो गयी और आज इतनी सारी खुशिया एक साथ मिल रही है तो समझ ही नही आ रहा है कि मै क्या करु

पापा को सम्भालते हुए हस रहे थे लेकिन उन्के आंखे भी छलक गयी और इत्ना इमोसनल सीन देख के मेरे भी आंखे भर आई और मै पापा से चिपक कर उनको हग कर लिया और इधर पापा मेरा भार सम्भाल नही पाये और वो थोडा मा की तरफ झुके

पापा ह्सते हुए - अरे अरे अरे बेटा आराम से

जब तक पापा सम्भाल पाते तब तक देर हो गयी और मै भी मा के उपर आ गया और हम तीनो बिस्तर पे गिर गये
 
थोडी देर हसी ठहाके बाद मैने ये खुशखबरी सोनल को दी और बदले मे मुझे प्प्पीया झ्प्पीया भी मिली । लेकिन मै ज्यादा इनसब पर ध्यान ना देके सोनल को अमन के साथ बात करने को बोलकर नीचे चला आया

नीचे आने पर मा पापा से सवाल पर सवाल पुछ रही थी और यहा पाप हस कर सब जवाब दे रहे थे ।

फिर मा - तो मतलब सारी तैयारियाँ हो गयी है

मै हस कर - हा मा , मैने पंडित जी को कल 8 व्जे के लिए बोल दिया है और चाचा चाची को भी बोल दिया है कि समय से 8व्जे तक सबको लेके नये वाले घर पहुचे ।

मा - और वो मीठाइयो का क्या

पापा - अरे तुम चिन्ता मत करो रागिनी सब कुछ हो गया

मा परेशान होकर- हा लेकिन

तभी पापा मा की बात काटते हुए - ऐसा करना राज आज रात तुम अपनी मा की लिवा चले जाना वो सारी तैयारियाँ भी देख लेंगी और सुबह सारा काम भी हो जायेगा

मै खुश होकर हामी भरता हू

और फिर ढेर सारी ना खतम होने वाली बाते होती रहती है और फिर रात के खाने के बाद मा अपना एक बैग लेके मेरे साथ नये घर पर सोने के लिए चल देती है ।

आने वाला पल और होली के रंग राज की दुनिया मे कितने बहार लेके आती है ।

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रात 10 बजे तक मै और मा दोनों साथ मे बाते करते हुए जा रहे थे। मम्मी काफी खुश नजर आ रही थी ।

मै - क्या बात है मा काफी खुश लग रही हो

मा मुस्कुरा कर - हा अब खुश रहूँगी ना मेरी सारी टेन्सन जो दुर हो गयी और अब तो जिवन मे खुशिया ही खुशिया है

मै खुशी के भाव मे - हा वो तो है लेकिन अभी एक टेन्सन और बाकी है मा

मा उत्सुकता से - वो क्या

मै ह्स कर - मेरे लिए लडकी कौन खोजेगा मा हाहाह्हा

मा - अरे हा !!!

अभी तेरे लिए और अनुज के लिए भी तो देखना है

मै हस्ते हुए - अरे मा मेरे लिए ना मिलेगी तो भी चलेगा

मा उत्सुकता से- क्यू तू नही करेगा शादी

मै हस कर मा की कमर मे हाथ फेरते हुए - मेरे लिए तुम हो ना मेरी जान

रात मे सुनसान सड़क पर मेरी हरकत से मा घबरा गयी

मा - तू पागल है क्या रास्ते मे ये सब ,,,,कोई देख लेता तो

मै हस रहा था मा की प्रतिक्रिया पर

मा - मै हू तो क्या मतलब ,, तू शादी नही करेगा क्या

मै - शादी तो कर लू मा लेकिन पता नही वो कैसी होगी ,,आप जितनी गर्म और सेक्सी होगी भी या नही

मा हस कर - धत्त पागल , वो तो तेरे उपर है कि तू उसे कैसा बनाना चाहता है

मै संकोची होकर - मतलब मै कैसे

मा मुझे समझाते हुए - बेटा शादी शुदा औरत अपने पति पर ही निर्भर होती है और सुहागरात से लेके आने वाले जीवन के सभी नयी परिस्थितीयो मे वो अपने पति के बताये रास्ते पर ही चल कर आगे बढ़ती है और एक पति चाहे तो उसे संस्कारी बहू या एक सड़कछाप बेश्या बना सकता है ।

मै मा की बाते बहुत गौर से सुन रहा था और कही न कही खुद को इनसब से जोड कर एक नयी कलपना को मन मे जन्म देने लगा था ।

मा - इसिलिए मै कह रही थी कि तू जैसी चाहेगा वो वैसी ही हो जायेगी , अगर तू उसे रोज प्यार करेगा तो वो भी मेरे तरह गर्म और सेक्सी हो जायेगी और नही ज्यादा ध्यान देगा तो कही बाहर मुह मारेगी हाहहहहह समझा

मै मा की बातो मे सहमती जताते हुए हस रहा था

इतने मे हमारा नया घर आ गया था जो बाहर की लगी लाईट से जगमग था

नये घर का परिचय

मेन गेट से घुस्ते ही थोडी खाली जगह रखी गई और फिर बीच से एक गलियारे से होते हुए हाल मे प्रवेश ।

गलियारे के दाई तरफ बाथरूम अटैच गेस्टरूम और बाई तरफ किचन है ।

हाल मे दाई तरफ सोफ़ा रखा गया है और बाई तरफ से सीधी उपर को जाती है ।

सामने की तरफ 2 बड़े मास्टर साइज़ बेडरूम है दोनो के सेप्रेट बाथरूम है ।

सामने दोनो बेडरूम के बिच से एक गैलरी पीछे जाती है जहा पर कपडे धोने के लिए जगह छोडी गयी है ।

फ़र्स्ट फ्लोर

उपर भी नीचे के जैसे सेम दो बडे मास्टर साइज़ बाथरुम अटैच बेडरूम है

ब्स वॉशिंग एरिया को स्टोररूम मे बदल दिया गया है

और किचन को स्पेयर रूम के लिए रखा गया और गेस्टरूम को बालकीनि मे बदल दिया गया है ।

पूरा घर वेल फर्नीश्ड है

फर्श पर टायल , टीवी , फ्रिज, वॉशिंग मशीन की सुबिधा

सबसे उपर के फ्लोर पर एक टोइलेट बाथरूम बनवाया गया सबसे पीछे की तरफ

मा नये घर की रौनक देखकर काफी खुश नजर आ रही थी और मेरे द्वारा की गई तैयारीयो के लिए मेरी तारिफ भी की

फिर हम गेस्टरूम मे गये और वहा रखे सारे सामान के बारे मा ने देख परख की और जब मन से संतुष्ट हुई तो उसके चेहरे की लाली देखने लायाक थी ।

मै मा को पकड कर वही गेस्टरूम के बिस्तर पर लेट गया

मै - बाकी का काम होता रहेगा पहले हम अपना काम निपटा ले

मा समझ गयी औए शर्मा कर - नये घर का भी सत्यानाश करेगा क्या

मै हस कर मा की चुचियो को साडी के उपर से ही मिजते हुए बोला - सत्यानाश नही मा मै तो इस नये घर सबसे पहली चुदाई का उद्घाटन करना चाह रहा हू

मा शर्मा कर - धत्त बदमाश

मा को शर्माता देख मै उनके उपर चढ़ गया और उनको रगड़ने मसलने लगा ।

जल्द ही मा भी गर्म होके मेरे साथ लग गयी और मै मा के उपर चढ़ कर उसकी चुचियो को मसलते हुए उन्के मोटे होठो को चूसना शुरु कर दिया और मा भी मेरे सर को सहलाते हुए मेरे होठ खिचे जा रही थी ।

होठो के साथ हम दोनो एक दूसरे के जिभ को भी पकडने की भरपुर कोसिस मे अपनी चुम्बन को और गहरा करते गये जिससे मेरे कमर ने मा के जांघो को खोलना भी शुरु कर दिया

मा भी मेरे बदन पर हाथ फेरते हुए अपने जन्घो को खोल कर कमर उच्काना शुरु कर दी

जल्दी मैने मा की साडी का पल्लू उनकी छाती से हटाया और उनकी मुलायम चुचो को ब्लाउज के उपर से ही दबाते हुए काटने लगा । वही मा जबरदस्त मस्ती मे आ गई और मै उनकी मादकता को देख के उन्के ब्लाउज के बटन खोल दिये और ब्रा के एक कप से एक चुची को हलोर के बाहर निकाला जिस्से मा की सिसिकिया बढ़ गयी ।

और मै जीभ लपल्पाते हुए उनकी चुची को मुह मे भर लिया और चूसना शुरु कर दिया

मा अपने चुचे पे मेरे जीभ को साप के जैसा लोटता पाकर अपने कन्धे झटकते हुए गाड़ हिच्काने लगी और मै भी अपना लण्ड साडी के उपर से ही मा की पेड़ू वाले हिस्से पर रगड़ते हुए चुचियो को मिजते हुए चुसने लगा ।

जल्द ही मा की तडप बढी और वो खुद से अपनी साड़ी और ब्रा ब्लाउज निकाल दी और मेरे सर को वापस अपने चुचो मे घुसाते हुए - ले बेटा पी ले और चुस हा अह्ह्ह्ह मा ऐसे ही और्र ले बेटा उह्ह्ह्ह माआ ऐसे ही अझ्ह

मै मा को लिता कर झट से उनका पेटिकोट उथाया तो देखा अन्दर खुली चुत अपना सफेद क्रीम छोड रही थी और चोकोलेटी चुत की फल्के बहुत ही टेस्टि दिख रही थी तो मैने भी देर ना करते हुए झट से मा की जांघो को फैला के अपना मुह उन्के भोस्दे मे लगा दिया और किसी कुत्ते के लपालप जीभ चलाने लगा ।

मा की हल्के बालो वाली मुलायम चुत पर मेरे जीभ के मुलायम और नुकीले स्पर्श से मा कामूकता से भर गयी और मेरे बाल को खिचते हुए अपने भोस्दे के होठो पर मेरे नथुने और होठो को रगड़ते हुए गाड़ पटकने लगी ।

मा - अह्ह्ह बेटा डाल दे नही रहा जा रहा है उह्ह्ह मा अह्ह्ह मेरा लल्ल्ला आह्ह

मै सर उथा कर देखा मा आखे बंद किये अपने सर इधर उधर लण्ड की तडप मे झटक रही थी तो मै भी बिना देरी के अपना लोवर नीचे के बिना किसी आव देख न ताव घ्च्च्च से सुखा मोटा लण्ड मा के भोस्दे मे पेल दिया जिस्से मा की चीख और आंखे और चीख बाहर आ गई एक साथ

मै मा की जांघो को कन्धे पर उठाए उनकी चुत की गहराइयों मे लण्ड को उतारते हुए बोला - क्या हुआ मा म्ज़ा आया

मा हाफ्ते हुए - आह्ह हा बेटा ऐसे ही फाड उफ्फ्फ अह्ह्ह ऊहह सीईई उम्म्ंम्ं ह्य्य्य कितना गर्म और मोटा है बेटा अह्ह्ह्ह और चोद फाड दे

मै घ्चा घच मा की चुत मे लण्ड चोदे जा रहा था और मा भी भरसक उत्तेजित किये जा रही थी और जल्द ही हमारी यात्रा को विराम लगा जब मा ने जोश मे आकर खुद को झडने से रोकने के लिए मेरे लण्ड को निचोड़ना शुरु कर दिया और मेरी सारी ऊर्जा मा की चुत मे घ्प घप पेलने जाने लगी

जल्द ही मेरे लण्ड की नशे सिथिल हुई और भलभला मै मा की चुत मे उन्का नाम लेते हुए झडने लगा और आखिरी धक्को के साथ मा के चुचो पर गिर गया ।

वही गेस्टरूम मे मैने मा को नये बेड पर देर रात तक चोदा और सुबह 5 बजे का अलार्म सेट कर एक दुसरे से चिपक कर सो गये ।

सुबह 5 बजे अलार्म बजा तो मेरी निद खुली और लण्ड भी हल्की ठण्डक भरी सुबह मे गरमाहाट से खड़ा होने लगा था ।

फिर मेरी नजर मेरे गदराई नंगी मा पर गयी और उसके सुखे मोटे होठ देख कर मुझसे रहा नही गया तो मै उन्के बगल मे आकर अपना लण्ड का सुपाडा उनके होठो से टच करने लगा ।

जल्द ही मेरे सुपाडा की गन्ध ने मा की निद मे खलल डालना शुरु कर दिया और वो धीरे धीरे मादक सिसकिया लेने लगी क्योकि मै एक हाथ उन्की मुलायम चुचियो को सहला रहा था और उन्के कडक मोटे किस्मिस के दाने जैसे निप्प्ल मेरे हथेली को टच कर मेरे बदन मे एक गजब का सिहरन पैदा कर रहे थे जिस्से मेरे लण्ड मे नयी ऊर्जा का संचार होने लगा और मै मा के हल्के खुले होठो के बिच सुपाड़े को डाल दिया और धीरे धीरे मा को सांस लेने दिक्कत आनी शुरू हुई जिस्से उन्होने गहरी सांस के लिए और मुह खोला और मेरा लण्ड गप्प से उन्के गले तक उतर गया जिससे अफ्नाहत मे मा की आन्खे झट से बाहर को आ गयी मानो और वो मेरे जाघो पर मारते हुए लण्ड बाहर निकालने को बोलने लगी ।

फिर मैने वाप्स लण्ड बाहर निकाला तो मा ने थोडी देर गहरी सांस ली और थोड़ी गुस्से मे मुझे देखने लगी तो मै मुस्कुरा कर अपना लण्ड वापस उन्के मुह पे पटकने लगा और वो एक कातिल मुस्कान के साथ मुह खोल कर मेरे लण्ड को चूसना शुरु कर दी जल्द ही उन्के होठो के जादू से मेरा सुबह का पहला वीर्यपान मा ने कर लिया ।

फिर समय देख के हम दोनो जल्दी नहा धो कर तैयार हुए और गृहप्रवेश की पुजा के लिए सारी तैयारियाँ कर ली और 7 बजे तक पापा दीदी और अनुज भी तैयार होके आ गये । फिर 8 बजते बजते चाचा का पूरा परिवाए और विमला मौसी भी आ गई ।

फिर तय मुहूर्त मे पंडित जी ने पूजा करवा कर नये घर मे प्रवेश करवाया और फिर पापा ने चाय नास्ते का व्यव्स्था करवाया और 10 ब्जे तक सारे कार्यकर्म समाप्त हुए
 
सभी ने घर का एक एक हिस्सा देखा और काफी तारिफ भी की ।

दीदी और अनुज ने तो उपर का दोनो बेडरूम बुक कर लिया और मा ने भी नीचे का बाई तरफ का बेडरूम अपने लिये चुन लिया तो बचा आखिर मे एक ही वो मेरा हो गया ।

इधर सब घर देखने मे बिज़ी थे और उधर पापा ने सबसे उपर वाले फ्लोर पे होली खेलने के लिए व्यव्स्था कर दी और सारे समान मीठाईया, सब कुछ उपर एक छोटा स्ताल लगवा कर सेट कर दिया । और होली हो उसमे डीजे पर गाना बजाना ना हो तो सब फीका पड़ जाता तो मैने पापा को बोल कर वो अरेंजमेंट भी करवा दिया था ।

फिर 11बजे तक पापा ने सबको होली खेलने का प्रस्ताव रखा और सारे लोग अपने कपडे बदलने के लिए अलग अलग कमरो मे चले गये जो ये प्लान कल शाम को ही मैने चाचा और विमला को बता दिया था और सारे लोग अपने कपडे और समान लेके आये थे ।

देखते है दोस्तो ये होली कितनी रंगीन होगी ???

और क्या क्या धमाल होगा जब भाई बहन , देवर भाभी , जेठ - भयोह , पति- पत्नी और एक गर्म रसभरी गदरायी विधवा होली के रंग मे सारे एक साथ रगेंगे ।

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पापा के कहने के बाद सभी अलग अलग कमरो मे चले गए ।

निशा और सोनल एक साथ एक बेडरूम मे

मा , चाची और विमला एक बेडरूम मे

और बाकी सारे जेन्स गेस्ट रूम मे चले गये ।

अक्सर होली मे लोग बडे शहरो मे नये कपडे सिलाते है लेकिन हम मिडिल क्लास के लोगो अपनी पूरानी जीन्स और जेब फटी शर्ट भी होली के दिन नयी लगने लगती है ।

जैसा ही आम छोटे शहरो मे होता है , मैने भी अपने पीछले साल के गर्मी वाले हाफ़ लोवर डाले और एक पूरानी टीशर्ट पहन ली जिसकी नीचे की फोल्डिंग खुली थी और एक दो जगह होल बने हुए थे ।

वही अनुज मेहमानो के आने वजह से खुद को थोडा अच्छे साफ कपड़ो मे रखते हुए एक शर्त और जीन्स पहन लिया जो कि दिवाली पर ही लिया था उसने ।

राहुल भी शर्मिला था या कहू अनुज के साथ मिल कर उसने भी हालही मे खरीदे कपड़े पहने थे ।

वही पापा ने तो होली के स्पेशल सफेद कुर्ता पजामा सिलाया और चाचा ने भी सेम पापा के जैसे ही सिलाया था । मानो दोनो मे मिल के साथ मे कपड़े लेके सिलवाये हो लेकिन ऐसा नही था और पापा तो हर साल होली के लिए कपडे सिल्वाते है क्योकि वो अब टाउन मे नामी सेठ मे थे और शाम तक अपने कमेटी के बडे लोगो और दोस्तो के साथ उठना बैठना होता था इसिलिए ।

बाकी हम सब तैयार होकर हाल मे आये ।

पापा चाचा ने अपने मोबाईल बंद करके वही गेस्टरूम मे रख दिया लेकिन मैने नही रखा क्योकि मुझे काफी तस्वीरे निकाल्नी थी वो भी रंग बिरंगी

हाल मे आते ही मैने सारे जेन्स को साथ मे खड़ा कर एक सेल्फी ली ।

तब तक सामने के एक बेडरूम से मा विमला और चाची निकली

ओहो क्या बात थी

विमला ने पहले की तरह ही जैसा वो कपड़े पहना करती थी , हल्के गुलाबी कुर्ती और सफेद लेगी मे थी और एक सफेद दुपट्टे को एक साइड से क्रॉस करके कमर मे बाँधा हुआ था । लेकिन उसकी 40 के उभरे हुए चुतड ने कुर्ती को उठा रखा था और लेगी मे कसी जान्घे और कुल्हे , चुतड़ की निचले गोलाई के साथ साफ साफ दिख रही थी

वही चाची भी मॉडर्न लूक मे एक धानी रंग की कुर्ती प्लाजो सेट मे बिना दुपट्टे के थी जिससे उनकी 36की चुचीयो ने कुर्ती और सीने के बिच गैप बना कर अपनी घाटीया दिखा रही थी और वो पापा के सामने मा के पीछे होकर थोडी छिप कर थी ।

वही मा ने एक बैगनी सूती ब्लाउज के साथ हल्के अंगूरी रंग की सिफान की साड़ी पहने हुए थी । जिसमे उनका कामुक जिस्म का कताछ और भी निखर रहा था । सूती ब्लाउज मे भरे हुए चुचे साडी के पल्लू से झाक रहे थे और चुचियो की घाटी उस पारदर्शी सिफान की साडी के बाहर से भी दिख रही थी।

आज तीनो के तीनो क्या कमाल लग रही थी , लण्ड खड़ा करके रख दिया था

मा - अरे एक दो तस्बिरे हमारे साथ भी लेलो जी

मा की बाते सुन कर पापा - कहो तो फ़ोटोग्राफर बुला देता हू वैसे भी किसी हेरोइन से कम नही लग रही हो रागिनी

मा , पापा की बात सुन के शर्मा गयी और पापा को आंख दिखा कर - क्या जी बच्चे हैं फिर भी आप

पापा ह्स्ते हुए - अरे भाग्यवान आज होली है और आज कोई शर्म नही रखना चाहिए ,

पापा चाची को देखते हुए बोले - और राहुल की मम्मी तुम भी मत शर्माओ आओ सबके साथ तस्वीरे जो जाये

चाचा - हा शालिनी यहा कोई दिक्कत नही है तुम चिन्ता ना करो आओ यहा

फिर मा पापा के सामने आई और पापा उन्हे अपने थोडा सा बगल मे किया। ठीक वैसे ही चाची आगे और चाचा उन्के कन्धे पकडे हुए उन्के पीछे और फिर बगल मे विमला मौसी फिर राहुल और अनुज एक दुसरे के कन्धे मे हाथ डाले हुए खडे हुए

मै सबके सामने आकर एक जगह चुनी जहा से सारे लोग एक ही सेल्फी मे आ जाये और फिर स्माइल बोलकर दो तीन सेल्फी ली

फिर मैने राहुल को बोला की वो तस्वीरे निकाले और मै विमला मौसी के पीछे खड़ा हो कर सामने देखते हुए स्माइल करने लगा कि मुझे विमला के बदन ने आती परफ्युम की खुस्बु ने उसके जिस्म को स्कैन करने पर मजबुर कर दिया और ना चाहते हुए भी सबकी मौजूदगी मे मैंने विमला के पिछवाड़े पर नजर मारी और गुलाबी कुर्ती मे उभरी गाड़ की गोलाई ने मुझे और मेरे लण्ड दोनो को एक अन्गडाई लेने को मजबुर कर दिया और मैं विमला के थोडा सट कर विमला की मखमली गाड़ की गोलाई को सहलाने लगा

पहले विमला सहम गई लेकिन फिर उसे अह्सास हुआ कि मै हू तो वो अपनी कोहनी से हल्का सा मार के आंख दिखाती हुई मुस्कुरा रही थी वही मै उसे एक शरारत भरी मुस्कान देके उसके गाड़ के मुलायाम पाट को एक बार अच्छे से दबा कर छोड दिया और फिर तस्बिरे निकलवाने लगा ।

इसी बीच सोनल और निशा स्कर्ट और टॉप मे कमरे से बाहर आई।
 
सोनल जो कि लॉन्ग आसमानी टॉप और मैटी पिंक मे लॉन्ग स्कर्ट पहने हुए थी वही निशा भी रानी कलर की टीशर्ट और एक हरे रंग की प्रिंटेड स्कर्ट पहने थी ।

सोनल - अरे अरे पापा हम लोग भी है ना

पापा हस के - हा बेटा आओ ना यहा आओ तुम

फिर पापा के आगे एक तरफ मा और एक तरफ दीदी खड़ी हुई और पापा ने दोनो के कमर मे हल्के हाथ डाल दिया जिससे पहले तो सोनल हिचकी लेकिन फिर नोर्मल होकर तस्वीरे निकलवाई

पापा को देख के चाचा ने भी चाची और निशा के साथ ऐसे ही पोज मे तस्वीरे निकलवाई

फिर हम सब भाई बहनो ने एक दूसरे से चिपका चिपकी करते हुए और एक दुसरे के गालो पर किस्स करते , और पाऊट करते हुए काफी तस्वीरे निकाली और फिर हम सब उपर की छत पर जाने लगे ।

जैसे ही हम सीढियो की ओर जाने को हुए की राहुल और अनुज मे होड़ हुई की कौन उपर पह्ले जायेगा और वो दौड़ लगाते हुए तेजी से उपर भागे और तभी मेरे दिमाग मे एक आइडिया आया

मै भी उन्के पीछे दौडता हुआ तेजी से उपर गया और जल्दी से अनुज और राहुल को अपना प्लान बताया ।

इधर अनुज ने राहुल से उसका मोबाईल लिया और झट से डीजे के पास गया फिर एक होली का मस्त गाना लगा दिया वो भी भोजपूरी ट्यून मे

भोजपुरी धुन पर खेसारी लाल की जबरदस्त होली की आईटम सोंग सुन कर मै भी मस्ती मे झूम गया और अपने फोन का कैमरा चालू किया

वही राहुल भी झट से एक बाल्टी भर अबीर लेके जीने के दरवाजे पर बने रैक पर जाकर खड़ा हो गया ।

मै सबके आने का इन्तेजार करने लगा और जैसे ही पापा चचा मम्मी चाची आगे आये मैने खुब तेज आवाज मे ह्ल्ल्ला करते हुए बोला - होली है !!!!!!

और तभी राहुल मे हाथ मे ली बाल्टी उल्टी करके स्ब्के उपर मिक्स रंग वाली अबीर गिरानी सुरु कर दी और सारे लोग ह्स्ते चिल्लाते भागते हुए छत के बीच मे आये और अबीर से सराबोर हो गये । लेकिन सोनल और निशा वही अन्दर ही रुक गये ।

पापा और चाचा जल्दी जल्दी अपने बाल झाड़ने मे लगे थे और

मा अपना पल्लू सिने से हटा कर ब्लाउज मे घुसे अबीर को सामने की तरफ झूक कर झाड़ रही थी जिससे उसकी मोटी चुचियो पर अबीर और फैलने लगा

विमला भी अपने सर झाड़े

लेकिन स्ब्से ज्यादा अगर किसी की दिक्कत थी वो थी चाची को

उनकी खुली कुर्ती और सीने के बिच खुली घाटियो मे अबीर स्ब्से ज्यादा भर गया था और वो तो मुथ्थीया भर कर निकाल रही थी ।

वही ये सब चीजे मै रिकॉर्ड करते हुए हस रहा था ।

मा हस कर झल्लाते हुए - ये क्या मज़ाक है राज

मै मा के सामने कैमरा ले जाकर हाथ मे लिये अबीर उन्के गालो पर मलते हुए कहा- हैप्पी होली मा येईईईईईईए

मा परेशान होकर मेरी तरफ आई और मै झट से मोबाईल बंद कर ह्स्ते हुए भागा । मा ने स्टॉल से हरे रंग की अबीर दोनो हाथ मे लेके मेरे तरफ भागी और विमला को बोली - पकड इसे विमला

मै ह्स्ते हुए भागरहा था पर

ज्यादा दुर नही जा पाया था कि विमला ने मुझे एक तरफ से दबोच लिया और ऐसा पकड़ा की मेरे हाथ भी उसके बाजुओ के गिरफ्त मे थे वही मेरे छटपटाने से उसकी मुलायम चुचिया मेरे पीठ मे गुदगुदी करने लगी और हसी इत्नी आ रही थी कि मै चाह कर भी कोई ताकत नही लगा पा रहा था और इसी ने मम्मी आई और दोनो हाथो से मेरे चेहरे को अबीर से रंग दिया ।

दो गदराई औरतो ने मिल कर मानो मेरी इज्ज्ज्त पर हमला कर दिया था और उन्के मदमस्त स्पर्श ने मेरे लन्ड मे तनाव ला दिया था ।

फिर विमला ने मुझे छोडा और वो मा के साथ हस्ते हुए स्टॉल पर चली गयी ।

इधर अनुज एक से एक अस्लील भोजपूरी गाना चला रहा था ।

सब केहू आपन चोख पिचकारी हूरे के चाहेला ।

हम सबकर भला चाहिला हमार सब बुरे चाहेला ।।

यहा गाने पर कहा कोई ध्यान दे रहा था । सब अपने मे मस्त थे ।

तभी पापा बोले - अरे बेटा थोडा हमारे समय का भी कोई मस्त गाना लगाओ

तभी मुझे एक मस्त गाने का ध्यान आया और मैने झट से यूट्यूब से एक 70s का सुपरहित राजेश खन्ना का होली का गाना चला दिया

जिसके शुरुवाती धुन सुन कर पापा चहक उठे और हाथो मे अबीर लेके मा के तरफ जाते हुए गाने की धुन पर लटके झटके लगाते हुए और गाने के साथ खुद भी तेज आवाज मे सुर मिलाते हुए गाना गाने लगे - हे आज ना छोड़ेंगे

दीपकक धी ढिपकक धी

दीपकक धी ढिपकक

मा पापा को अप्नी तरफ आता देख खुद को बचाने के लिए अपने गाल छिपाने लगी लेकिन पापा ने जबरजस्ती गाल गुलाबी करने लगे ।

और फिर मा के गाली को गुलाबी करते हुए - हा आज न छोड़ेंगे बस हमजोली ,,, खेलेंगे हम होली , खेलेंगे हम होली

मा पापा की हरकतो से शर्मा गयी और छत के दुसरी तरफ स्टॉल से दुर भागने लेकिन पापा गाने से सुर मिलाते हुए मा को प्यार जताते हुए पीछे से पकड कर उनकी नंगी क्मर और मुलायम पेट पर अबीर मल्ते हुए गाना गाते है - चाहे भीगे तेरी चुनरिया ,, चाहे भीगे रे चोली खेलेंगे हम होलीईईईईई

होली है!!!!!!

ये बोल कर पापा हवा मे अबिर उड़ा देते है और मा का हाथ पकड़कर नाचने लगते है ।

पापा की मस्ती देख कर अनुज भी मस्ती मे आकर मुझे अबीर लगाता है तो मै उसको राहुल से पकडवा कर स्टॉल तक लाता हू और नीचे लिता कर एक एक रंग का अबीर ऐसे लगाता हू मानो शादी मे हल्दी लगाया जा रहा हो और हम सब की हरकते देख कर चाचा चाची विमला , और सोनल निशा सब मस्त थी ।

वही सोनल पहल करके थोडे अबिर लेके पहले चचा चाची को लगाती है और उन्के पैर छूकर आशीर्वाद लेती फिर विमला के पास जाकर उसको भी गालो मे रंग लगा कर उसके भी आशीवाद लेती है और ठीक वैसे ही निशा भी अपने मम्मी पापा को रंग लगा कर उन्के आशीर्वाद लेते हुए विमला को लगाती है और विम्ला उस्का माथा चूम कर उसको खुश रहने को कहती है

लेकिन जब मेरी नजर मेरी साफ सुथरी बहनो पर जाती है तो मै राहुल और अनुज को इशारा करके उनको घेरने को कहता हू , लेकिन सोनल मुझे ऐसा करते देख समझ जाती है और स्तर्क होने लगती है

लेकिन मै भी कम नही था भर कर मुठी मे अबीर लेके उसको पकड कर झुकाते हुए मुह पर हरा अबीर दर दिया और गालो को चूम भी लिया ,,,

सोनल ह्स्ते हुए - कमिने रुक बताती हू

इधर वो अबीर लेने गयी और यहा निशा को नीचे लिटा कर अनुज और राहुल जमकर उस्के बालो गालो और गरदन पर रंग लगा के छोड दिया ,, जमीन पर गिरने से उसका टीशर्ट उपर होगया और उसकी नाभि दिखने लगी थी

वही सोनल मेरे तरफ अबीर लेके आती है तो मै उस्के सामने आंखे बंद कर बाहे फैला कर खड़ा हो जाता हू और फिल्मी होते हुए शाहरुख के अंदाज मे बोलता हु - आओ लगा लो मै नही रोकूँगा तुम्हे

इधर मम्मी पापा भी वाप्स स्टॉल तक आ गये थे ।

मेरे मस्त होकर रंग लगवाने के हरकत से सब हस रहे थे और मै आंखे बन्द किये सोनल के मुलायाम हाथो से अपने चेहरे पर अबीर लगने का इन्तेजार कर रहा था कि तभी मुझे मेरे लोवर की लास्टीक मे पीछे की तरफ से खिचाव मामूल पडा और मैने आन्खे खोली तो देखा सोनल सामने खड़ी हस रही थी और जब तक मै कुछ समझकर पीछे घूमता किसी के मुलायम हाथ मेरी नंगी चुतडो के गालो को गुलाल से ठण्डा कर रहे थे और मेरी नजर जब घूमी तो वो मा थी जो मेरे लोवर मे हाथ डाल कर मेरे पिछवाड़े मे अबीर डाल रही थी

मा को देखते ही मै झटक कर उनसे दुर हुआ और अपने लोवर की लास्टीक फैला के पिछ्वाडा झाड़ने लगा और मुझे ऐसा करते देख सारे लोग

हस हस कर लोटने लगे ।

मा मुह पे हाथ रखे हस कर भागने लगी और कभी विमला के पीछे छिपने लगी तो कभी चाची के और जब चाची के पीछे गयी तो मै चाची के सामने से उनको लपक कर पकड चाहा इस चक्कर मे चाची और मै डिसबैलेंस होकर गिरने लगे और चाची बगल मे खडे पापा के हाथ को पकड कर सहारा लेने चक्कर मे उनका पैजामा खिच दिया और फिर हम फर्श पर आ गए पापा के पायजामे क साथ ही

पापा ने झट से वापस पैजमा उपर चढ़ाया और हम खडे खडे हसने लगे ।

चाची शर्म से लाल हो गयी थी और वो पापा को सॉरी बोलती है तो पापा उनको रिलैक्स होंने का इशारा करते है ।

इधर हसी का महोल चल ही रहा होता है की मा छोटी वाली बाल्टी मे अबीर भर कर स्टॉल वाली टेबल पर चढ़ते हुए चुपके से चाचा के सर पर बाल्टी उडेल देती है

मा हस्ते हुए - देवर जी बडे साफ साफ लग रहे थे अब मज़ा आया हिहिहुही

इतने चाचा ने मा की कलाई पकड ली और नीचे उतार कर दुसरे हाथ मे गुलाबी अबीर लेके छिटा मारते हुए मा के गरदन और छातियो पर मारते हुए बोले - म्ज़ा तो अब आया है भौजी हाहाहा हाह

और शुरु हो गयी देवर भौजी वाली मस्तीया रंग भरी वो उनको पुरे छत पे दौडाने लगे
 
इधर विमला अकेले किनारे खडे हस रही थी और पापा की नजर उसपे गयी तो वो भी बडे इत्मीनान से हाथो मे रंग लेके विम्ला की तरफ गये

पापा हस कर - अरे बहन जी थोडा बहुत आप भी मज़ा लिजिए आईये हम भी आपको गुलाल लगा देते है

विम्ला शर्मा कर नही नही करती रही लेकिन पापा एक हाथ से थोडा थोडा गुलाल विम्ला के गालों पर हल्के हाथो से लगा कर होली की बधाई दी

तो बदले मे विमला उनका हाथ पकड कर स्टॉल तक ले आई

और अबीर से भरी थाली मे केसरिया रंग हाथो मे भर के पापा के पुरे चेहरे पर मलते हुए कहा- आपको भी होली की बहुत बहुत बधाई भाईसाहब

पापा का चेहरा जब अबीर से भर गया तो वो भी बदले मे विम्ला की कलाई पकड कर बोले - आपने तो कुछ ज्यादा ही बधाई देदी बहन जी , आईये थोडा हिसाब बराबर कर लेते है

इधर पापा ने भी वापस से अबीर लेके विमला के गरदन और मूलायम गालो पर अबीर अच्छे से मला

इधर सारे लोग मस्ती मे मगन थे और डीजे पे गाना तेजी से चल रहा था जिसे मन हो रहा था मिठाइया खा रहा था पानी पी रहा था और मै भी ऐसा खोया था कि जो भी मिलता उसके साथ चिल्ला के रंग लगाते हुए नाच रहा था ।

फिर मुझे थोडा पेसाब मह्सुस हुआ तो मै स्टॉल से हट कर पीछे की तरफ पेसाब करने जाने लगा

डीजे पर बज रहे गाने पर झुमता हुआ मस्त बाथरूम् खोला और मुतना चालू किया और जेब से मोबाईल निकाल कर देखा तो चंदू के काफी मिसकाल आये थे और मैसेज मे काफी गालिया भरी हुई थू की

कहा है तू , फोन क्यू नही उठा रहा , उसने मेरी मा बहन को भी काफी इज्ज्ज्त भरे लहजे मे कुछ अच्छे सामाजिक शब्द लिखे थे

मुझे उसका मैसेज पढ कर हसी आई और मैने उसको एक मैसेज करके बोल दिया कि मै नये घर पर हू और यही होली खेल रहा हू, शाम को पंडाल मे मिलूंगा

फिर मैने मोबाइल वापस जेब मे रखा की तभी डीजे पर एक गाना खतम हुआ और दुसरा शुरु होने का था कि मुझे किसी के खिलखिलाने की आवाज आई बाहर से ही

मै चौका और बाथरूम से निकल कर बाथरूम के बगल और छत की चारदिवारी के बिच मे जो खाली जगह थी वहा बाथरूम की दिवाल से लग कर हल्का सा झाका

तो चाचा मा को पीछे से पकड के उनकी नाभि मे अबीर मल रहे थे और मा उन्हे ना ना कर रही थी । मा को चाचा की बाहो मे छतपताता देख मेरा लण्ड खड़ा हो गया

चाचा - आज मना मत करो भौजी आज तो मै इनको रंग लगा कर ही रहुन्गा

मा - तो लगा लो ना कहो तो चोली खोल दू हिहिहुही

चाचा मा की बात से खुश होकर उन्की मुलायम नाभि वाले हिस्से के पेट को हाथ मे दबोचते हुए कहा - बड़ी जल्दी है भौजी आपको चोली खोलने की हा

मा मुस्कुराते हुए छटकती रही वही चचा ने मा का पल्लू हटा के मा की चुचियो पर गुलाबी अबीर मल दिया और बलाऊज के उपर से चुचियो को मिजने लगे

मा चाचा के स्पर्श से पागल होने लगी और वो चाचा की बाहो मे ढीली पडने लगी

चाचा - आह भाउजी आपकी छाती तो काफी मुलायम है अह्ह्ह

मा हफते हुए - बस करिये देवर जी कोई आ जायेगा अह्ह्ह उम्म्ंम

चाचा को ध्यान आया कि वो कहा खो गये थे तो उन्होने मा को छोडा और मा झट से हस्ती हुई भाग गयी और मै भी वहा से वापस बाथरुम मे घुस गया कि वो मुझे ना देख पाये

फिर थोडा रुक कर वापस स्टॉल की तरफ आया तो सारे लोग म्स्त थे लेकिन पापा और विमला कही नजर नही आ रहे थे ।

मै इधर उधर काफी देखा लेकिन वो नजर नाही आये

आखिर कहा गये होगे मै सोच ही रहा था की निशा मेरे पीछे से आकर मेरे गालो मे अबिर मला और हस्ते हुए बोली - क्या हीरो हमारे साथ नही खेलोगे क्या होली हिहिहिह

मै सब छोड कर उसकी तरफ भागा और वो भी ह्स्ते हुए भागी और मैने निशा को पकड कर अच्छे से उसके गालो गरदन मे अबीर मल्ते हुए उसकी चुचियो को छिप कर दबा कर छोड दिया और इधर मा ने चाचा के साथ चाची को दबोच लिया ,,, राहुल अनुज सोनल के पीछे लगे थे और उसे छत पर दौडा कर दुसरे तरफ ले गये ।

मैने सबको बिजी देखकर धीरे से निशा को डीजे के पीछे ले गया और उसकी चुचियो को मिजते हुए थोडी देर उसके उसके होठो को चुस कर स्टॉल की तरफ आ गया ,,,

जहा मा ने चाची के कुर्ती मे हाथ डाल कर उनकी चुची को मल कर रंग लगा रही थी और चाचा चाची के पैर पकडे हुए मा को चढा रहे थे- हा हा भौजी और लगाओ , हमसे बड़ा शर्माती है हाहाहहा

जैसे हम बाहर आये निशा यहा का सीन देख कर शर्मा कर छज्जे की तरफ चली गयी ।

वही छत के दुसरी तरफ बाथरूम के पास अनुज ने बाल्टी मे पानी वाला रंग घोल दिया था और पिचकारी दीदी और राहुल के उपर चला रहा था ।

इनसब के बीच मुझे वापस पापा और विमला नजर नही आये

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पापा और विमला की अनुपस्थिति मुझे खलने लगी और मुझे इस बात की धक-धक होने लगी कि कही मेरा ठरकी बाप और वो आवारा औरत मिल कर नीचे अपनी अलग होली तो नही ना मना रहे हैं ।

इतने में निशा वापस मेरे पास आई और मुझे सोच मे डूबा देख मेरे कन्धे थपथपा कर बोली - कहा खो गया तू , देख गाना बंद हो गया

मै घबडाहट भरे लहजे मे - अब ब ब वो हा रुको मै देखता हू आओ

फिर वापस मै और निशा के साथ डीजे के पास गया और फिर से एक भोजपुरी होली वाला प्लेलिस्ट का गाना चला दिया

मै निशा से- दीदी आपने पापा को देखा क्या

निशा - अरे वो तो विमला आंटी का चेहरा धुलवाने नीचे गये है , यहा वाले बाथरुम मे तुम गये न

मै नोर्मली - ओहहह ये बात

फिर मै जेब से अपना मोबाईल निकाला और उसे देखते हुए कहा- ओहो ये चंदू भी ना

निशा - क्या हुआ राज

मै परेशान होने के भाव मे - ये कबसे फोन करके मुझे बुला रहा और यहा कैसे बात करू

निशा - अरे बुधु नीचे चले जाओ ना हिहिहिही

मै हस कर - हा सही कह रही हो रुको मै अभी बात करके आता हू ।

फिर मै झट से सीढी से नीचे गया और हाल मे उतरा, उपर के डीजे के गाने की आवाज नीचे खाली कमरो मे गूंज रही थी लेकिन फिर भी एक सन्नाटा सा पसरा था ।

मै भी बडे आराम से आस पास नजर घुमाई और सोचा आखिर पापा विम्ला को लिवा कर गये तो कहा गये होगे । तभी मेरी नजर सीढी से लगे बेडरूम के हलके खुले दरवाजे पर गयी और मै दबे पाव उसकी तरफ गया और दरवाजे के महीन गैप से अपनी आँखो के फोकस को बढ़ाते हुए आँखो को छोटा कर कमरे मे बिना कोई हलचल किये देखना चाहा लेकिन कुछ नजर नही आया और बाहर से कोई खिडकी भी नही थी तो मैने वही फर्श पर बैठ कर बहुत हल्के हल्के स्लो मोशन मे दरवाजे के निचले हिस्से पर जोर लगाया और थोडा सा गरदन जाने जितना खोला और अन्दर झाका तो कोई कही नजर नही आया तो मै खड़ा होकर बहुत हौले से दरवाजा खोल कर अन्दर गया तो बाथरूम का दरवाजा आधा ही खुला था और मेरी दिल की धड़कन तेज होने लगी क्योकि कमरे मे घुसते ही थरूम से कुछ कसमसाहट भरी सिस्किया आ रही थी ।

मुझे घबडाहट मे भी एक अलग ही उत्तेजना का अनुभव होने लगा और अपने ठरकी बाप की कामयाबी पर हसी भी आई

फिर मै दबे पाव बाथरूम की दीवाल तक गया और मुझे यहा से अन्दर झाक्ना रिस्की लग रहा था पर मै देखना चाह रहा था कि क्या नजारा हो सकता है अन्दर का

तभी मेरे दिमाग मे एक आइडिया आया और मै खुश हूआ फिर मैने जेब से मोबाइल निकाल कर बैक कैमरा खोलकर फ्लैश लाईट ऑफ कर रिकॉर्डिंग चालू कर दिया और धीरे धीरे बाथरूम के दरवाजे के बने गेट से आगे बढ़ाते हुए मोबाइल का उतना ही हिस्सा आगे ले गया जिससे कैमरा अन्दर की रिकॉर्डिंग अच्छे से कर पाये ।

कुछ एक आध मिंट की रिकॉर्डिंग के बाद मैने वापस मोबाइल लिया और वही खडे खडे मोबाइल का वेल्यूम म्यूट कर वीडियो प्ले किया तो ऐसा सीन आया कि मै थूक गटकने लगा

अन्दर बाथरूम मे विमला वेसिन थामे खड़ी थी और पापा उसके पीछे बैठ कर उसकी लेगी और पैंटी को जांघो तक लाये हुए उसकी गाड़ मे मुह गाड़े हुए थे और विमला अप्नी गाड़ उचका कर पापा के नथुने पर अपने छेद रगड़वा कर सीसक रही थी ।

मै वीडियो देख ही रहा था कि विमला की आवाज बाथरुम से आई

विमला सिस्क्ते हुए लहजे मे - उम्म्ंम सीई आह्ह ब्स करिये भाईसहाब हमे अब चलना चाहिये काफी समय आह्ह हो गया है उफ्फ्फ आह्ह

पापा - अब ब हा हा ठीक कह रही है आप बहन जी ,, वैसे आपके इनका टेस्ट काफी जायकेदार था

विमला इतराने के स्वर मे - आप भी कम नही है भाईसाहब , भरपूर स्वाद लिया आपने भी तो

पापा - अभी तो इनको भी चखना है , बहुत गजब की माल हो आप बहन जी ,,, ऐसे नही महेश का मन बिगडा था आप पर

विमला सिस्कर- आह्ह छोडिए ना भाईसाहब कबसे मिज रहे थे इनको अब तो छोड दो और चलिय उपर चलते है

पापा - ऐसे नही जान,,, आप ब्रा निकाल दो जब रंगीन पानी इन मुलायम चुचियो पर गिरेंगे तो ये और खिलेंगे

विमला शर्माहट भरे लहजे -धत्त नही मेरे निप्प्ल दिखने लगेंगे सबको तो

पापा हस कर - तो क्या हुआ ,,, आखिर इस उम्र मे जब कसी हुई चुचियो के भिगे कुंडे देखने मे सबको मजा भी आयेगा और सबका लण्ड ही तो खड़ा होगा ना बहन जी ,,, अब तो आप भी मज़े लिजीये

मै पापा और विमला की बाते सुन कर उत्तेजित हो गया था और लण्ड को लोवर के उपर से ही दबा रहा था ।

तभी वापस कमरे से विमला की आवाज आई - ओह्ह आराम से , मै निकाल रही हू ना हिहिहि नही अभी मत छुइये इन्हे अह्ह्ह मा उफ्फ्फ सीई आह्ह मत मसलो ना भाईसाहब ह्य्य्य आह्ह

मै समझ गया कि पापा इस वक़्त विमला के चुचे मल रहे होगे

तभी वापस से विमला की आवाज आई - सब होगया, अब चलिये

पापा - एक बार इन रसिले होठो का स्वाद भी देदो ना मेरी जान

मै समझ गया अब ये बाहर आयेगे इसिलिए मै झट से कमरे से बाहर आया और सररर से सीढि से उपर आ गया

छत पर आया तो यहा अलग ही रोमांच मचा हुआ था पानी वाले रंगो का

एक तरफ अनुज और राहुल अपनी गैंग बनाये हुए थे दो दो बाल्टी भर कर हाथो मे पिचकारी लिये हुए चला रहे थे

वही निशा और सोनल भी पिचकारी पकडे दूसरो को भिगो रही रही थी ।

चाची मा को पकडे हुए थी और चाचा सामने से मा के पेट पर पिचकारी मारते है जिससे मा की साडी उन्के उभरे पेट से चिपक जाती है और उनकी साड़ी पारदर्शरी हो जाती है । जिससे उनकी गहरी नाभि दिखने लगती

वही मा भिया हस्ते हुए उनको पिचकारी लेके दौडा देती है

इनसब से बच कर मै चुपचाप अप्नी जेब से मोबाईल निकाल कर डीजे के पास ऑफ करके रख देता हूँ और स्टॉल से एक पिचकारी लेके मै भी अनुज के गैंग मे शामिल होकर शुरु हो जाता हू

इधर सोनल की मतकती गाड मेरे सामने आती है और मै भर पिचकारी उसके चुतडो पर चला देता हू जिससे उसका स्कर्ट उसकी गाड़ की गोलाई का सेप ले लेता है और दो तीन बार लगातार उसकी कमर पर धार देता हू

सोनल ह्स्ते हुए - रुक बेटा बताती हू तुझे ,

मै हस्ते हुए वापस पिचकारी भरने लगा और तबतक मेरे गरदन पर पिचकारी की धार आई और मै अन्दर से गिला होने लगा ।

सामने देखा तो सोनल ही थी और मै झट से पिचकारी की तेज धार उसकी चुचियो पर मारी और वो आउच करते जए छ्टक कर अपनी चुचीयो छिपा ली

सोनल - ऊहह मा , पागल कितनी तेज लगी आह्ह्ह्ह

मै झट से सोनल के पास गया और वापस से उसकी गरदन के पास पिचकारी मार कर उसके बदन को भिगो कर दुसरी तरफ भाग गया ।

स्टॉल की तरफ आया तो पापा भी पिचकारी भरे विमला की छातियो पर धार मार रहे थे जिसे विमला हाथ आगे किये रोकते हुए इधर उधर भागती है

लेकिन जल्द ही उसकी चुचियो के डार्क निप्प्ल दिखने ल्गते है

वही मौका देख कर चाची पापा के पीठ पर पिचकारी लेके चला रही थी ।

वही मा और चाचा के बीच गिलास से रंग एक दुसरे पे फेक जा रहा था ।

मै भी भरी पिचकारी उठाई और चाची के पीछे से उनकी चुतडो पर धार मारी जिससे उनकी प्लजो की बेल्ट और गाड़ की गोलाई साफ पता चलने लगी और मैने वाप्स से रंग भर कर विमला के चुचियो को साध कर निप्प्ल पर धार मारी और वो तनमना कर अपनी चुचिया पकड कर बैठ गयी ।

सब मस्ती मे मगन थे और सभी गहरे लाल रंग मे रंग चुके थे ।

मै भी थोडा अबीर लेके वापस से चाची के पास गया और उन्के गीले गालो पर हरा अबीर मल दिया जिससे वो उनका चेहरा अबीर स भर गया और मै वहा सं निकल गया , इधर देखा तो चाचा मेरी मा के साथ कुछ ज्यादा जी मजे के रहे थे और पापा भी विमला के साथ मजे मे थे , उधर बाथरुम की तरफ चारो भाईबहन आपस मे लगे हुए थे ।

मै थोडी देर स्टॉल मे बैठा और एक ग्लास पानी पीकर एक नजर मा की तरफ डाला तो देखा उसकी सिफान की साड़ी उसके जिस्म से चिपकी हुई थी और लाल रंग के वो चखत गयी थी ,,,चचा लगातार मा की चुचियो और नाभी पर निशाना मारते और गुलाल उड़ाते

मुझे मस्ती सुझी और मै भर बाल्टी रंग लिया और दबे पाँव धीरे धीरे मा को इशारा करते हुए चाचा के पीछे गया और जैसे ही चाचा बाल्टी से रंग भरने को झुके लपक कर मैने उनकी बाजुओ के साथ ही उनको पीछे से पकड लिया

मै ह्स्ते हुए - मा अब डालो चाचू पर हिहिही

मा ह्स्ते हुए अपनी खुली साडी कमर मे खोसते हुए बोली - कस कर पकडे रहना बेटा , आज आये हो पकड मे देवर जी ह्हिहिहिह

और मा ने रंग से भरी बाल्टी चाचा पर उडेल दी जिस्से मै भी आधा भीग गया

मा ह्स्ते हुए - रुक अभी छोडना मत राज

मै चाचा को बाजुओ ने कस्ता हुआ - हा लाओ मा मै पकडे हुए हू

तब तक मा ने बैगनी रंग की अबीर से भरी थाली लेके आई और अच्छे से चाचा के भिगे चेहरे और गरदन पर मला और फिर एक नजर बाकियो पर डाला फिर बोली - जरा उस कोने मे ले चल बेटा
 
मै ह्स्ते हुए चाचा को पीछे की तरफ जोर लगा के बड़ी मुस्किल से खिचते हुए लेके छज्जे के पास लेके आया जहा स्टॉल का पर्दा लगा था और य्हा हमे कोई देख नही पाता

तभी मा बोली - बेटा तू आंखे बंद कर के थोडा तो

मै चौक कर - क्यू

मा ह्स्ते हुए - ब्न्द कर ना पूछ मत कुछ

मै ओके बोल कर हल्की सी आंखे बंद की बाकी मम्मी का ध्यान मुझ पर नही था लेकिन मै बकायदा उनकी हरकतो पर नजर बनाये रहा

तभी अचानक से चाचा मेरे बाहो मे पहले से तेजी से छ्टकने लगे - हिहिहिही नाही भौजी उहा ना लगाओ नही तो ठीक ना होगा

मा ह्स्ते हुए - तुमने भी तो हमको नही छोडा था देवर बाबू , लल्ल्ला कस कर पकड बहुत फड़फड़ा रहे है तेरे चाचा

मै जोर लगा कर चाचा को पकडे हुए - हा मा जल्दी करो मै ज्यादा देर तक नही पकड सकता हू

इधर मा ने चाचा कुर्ता उठा के पायजामे का लास्टीक खिचा जिस्से चाचा ने छ्टकना शुरु कर दिया और वही मा जबरदस्ती हस्ते हुए थाली को उनके पायजामे के अन्दर की तरफ घुमा कर सारा अबीर उनके पायजामे मे भर दिया जिससे चाचा ह्स्ते हुए मुझे झटक कर अलग हुए और मा की कलाई पकड कर पास की रखी बाल्टी मे जिस्मे चाचा का रंग रखा था उसको मा पे सर उपर उडेल दिया जिस्से मा भी उपर से नीचे तक लाल हो गयी । सारा रंग मा के बाल से होकर उनके चेहरे से रिस कर उनकी उभरी हुई चुचियो से झरने के जैसे गिरने लगा

फिर चाचा मेरी तरफ झपटते हुए - रुको बेटा बताते है तुमको

मै वापस स्टॉल की तरफ भागा ह्स्ते हुए , वहा चाचा मुझे लपक कर पकड लिये , मै छ्टपटाते हुए जमीन पर लोट गया

इधर चाचा ने चाची को आवाज देके बुलाया और अबीर की थाली मागी

चाची हस्ते हुए केसरिया रंग के अबीर की थाली लेके आई और मेरे चेहरे पर मल दिया

तभी चाचा ने लोवर पकड कर सामने से अंडरवियर से साथ खीचा और चाची ने सारा अबीर एक एक मुथ्थी भर भर कर मेरे खडे लण्ड पर फेकना शुरु कर दिया

सारे लोग मेरी बेज्ज्ती हस रहे थे और मुझे थोडी शर्म मह्सूस हुई लेकिन मै वापस खड़ा हुआ और बोला - चाची अब बच कर दिखाओ

एक बाल्टी रंग उठाया और सामने पापा मिले

मै चिल्लाते हुए - पापा चाची को पकडिए हिहिही

पापा पहले थोडा संकोच किये लेकिन जब देखा कि चाची उनको देख कर मुस्कुरा कर इधर उधर भाग रही थी है

मै वापस बाल्टी लिये हुए पापा को - पापा पकड़ो ना जल्दी

तो पापा लपक कर उनको साइड से कमर मे हाथ डाल कर पकड लिया और हड़बड़ी मे चाची के हाथ पापा के लण्ड के सामने पड गया वो उसको स्पर्श करने लगा जिस्से चाची और भी ज्यादा छ्टपटाने लगी ।

मै एक शरारती मुस्कान के साथ से पूरी बाल्टी चाची और पापा के उपर उडेल दी । फिर पापा ने चाची को छोड दिया और चाची पापा को देख कर हसने लगी वही पापा भी चाची के सामने अपना खड़ा लण्ड एडजेस्ट करते हुए हस रहे थे ।

चाची उपर से नीचे तक पूरी गीली हो गयी और उनकी कुर्ती चुचो के उभार को और भी ज्यादा सेप मे दिखाने लगी।

इधर मै चाची मे मगन था कि दुसरी ओर से मा के खिलखिलाने की आवाज आई जब नजर उधर गयी थी देखा कि वो विमला के कुर्ती मे हाथ डाल कर नंगी चुचियो को रंग लगा रही थी और चाचा स्टॉल मे बैठे सुस्ता कर ऊन दोनो की मस्ती देख कर लण्ड को पजामे के उपर से मुठिया रहे थे ।

तभी छ्त के दुसरी तरफ से अनुज की गैंग मे आवाजे आई और उधर देखा तो निशा और सोनल ने मिल कर अनुज को नंगा कर दिया और वो गाड़ और नुनी छिपाते हुए बाथरूम मे घुस गया । वही राहुल उन लोगो से बच कर हमारी तरफ स्टॉल मे अपने पापा के पास बैठ गया ।

फिर इधर वापस मम्मी और विमला का फर्श पर लोटन चलता रहा और च्ररर चरररर की आवाजे आई और फिर मा खड़ी हुई तो उनकी सिफान साडी आधी फट चुकी थी और वही विमला की कुर्ती एक साइड से आधी मा ने खोल दी । एक तो बेचारी ने ब्रा नही पहने उपर से साइड से कुर्ती फट गयी ।

विमला के चुचे और खडे दाने का निप्प्ल साफ दिख रहा था

मा ह्स्ते हुए उठी और अपनी आधी बची हुई भीगी साडी भी कमर से निकाल कर उसको गारते हुए फर्श पर लेटी विमला के उपर रंग गिराने के बाद साडी उसके उपर ही फेक कर स्टॉल मे आई जहा मा के हल्के अनुरि रंग पेटिकोट मे उनकी गाड़ की उभार चाचा के ठीक सामने थी , वही पेटिकोट भी काफी हद तक भीग कर गाड़ से चिपक चूकी थी और उसको देख कर चाचा ने एक बार थूक भी गटका ।

वही विमला भी उठ कर साइड से अपनी कुर्ती बान्ध ली फिर उसकी नंगी कमर एक साइड से दिखने लगी और अब कुर्ती उपर होने से उसकी लेगी मे कसी जान्घे और पैंटी का सेप भी दिख रहा था ।
 
इधर मै धीरे से राहुल के पीछे गया और कररररर से उसके शर्त का साइड फाड कर भागा जहा चाची ने मुझे दबोच लिया और मुझे पकड कर राहुल को आवाज दी तो वो भी ह्स्ते हुए मेरे पास आया और मेरी टीशर्ट को उसमे बने छेद मे उंगलिया डाल कर फाड दिया ।

मा की नजर जब चाची पर गयी तो बोली - अच्छा जी मेरे बेटे को मिल कर सता रहे हो ,,

मा पापा से - पकड़ीये जरा शालिनी को राज के पापा

चाची एक बार फिर मुझे छोड कर बाथरुम की तरफ भागी और उन्के पीछे पापा और मा भागे और तीनो बाथरूम के बगल के खाली जगह मे घुस गये

इधर हम भाई बहन लोग वापस मस्ती मे आ गये और विमला अप्ना दुपट्टा लपेटकर चाचा के साथ बैठ कर बाते करते हुए हस रही थी

और थोडी देर बाद मा आवाज दी मुझे

मा चिल्लाते हुए - राज बेटा जरा रंग लाना तो

मै खुस हुआ और एक बालती रंग और झिल्ली भर अबीर लेके भागता हुआ बाथरूम के बगल के खाली जगह पर गया

जैसे ही मै बाथरूम के बगल मे पहुचा तो देखा की चाची की हालत बुरी थी

पापा के उनको पीछे से पकड हुआ था । चाची की कुर्ती उठी हुई थी और पापा का हाथ उनकी मुलायम नाभि पर था और वो छ्टपटा रही थी , वही मा ने उनकी कुर्ती सामने गले पर बीच से फाड दी थी थोडी जिससे चाची के ब्रा और गहरी घाटी दिख रही थी

मा ने झट से मेरे हाथ से बाल्टी ली और सारा रंग पापा और चाची के चुचियो पर फेका और मेरे हाथ से अबीर लेके दोनो मुथ्थीयो मे भर कर उनकी चुचियो के उपर पापा के सामने मल दिया और फिर ब्रा मे हाथ घुसाते हुए निप्ल्ल को मरोडते हुए बोली - कितनी कसी हुई ब्रा पहनती है रे तू तभी तेरे ये गुलगले सख्त है

चाची गुदगुदी से पापा की बाहो के कसमसा रही थी लेकिन उनके हाथ को पापा ने अपनो जांघो मे पीछे की तरफ दबा कर रखा था और मैने गौर किया तो पापा का भी कुर्ता उपर से फट गया था ।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था तीनो की मस्ती देख कर और लण्ड तो लोवर मे पूरा तन कर खड़ा था

इधर जैसे ही मा ने अबीर लगा दिया कि पापा ने अपनी पकड ढीली की और चाची झटक अलग हुई और अपनी कुर्ती का उपरी हिस्सा जो मा ने फाड दिया था उसको पकड कर स्टॉल पे चली गयी ।

और मै वही खड़ा मुस्करा रहा था कि पापा की एक कसमसाहत भरी आवाज आई - अह्ह्ह खड़ा कर दिया सालि ने

मा पापा को छेडते हुए उन्के पजामे के उपर से उनका लण्ड सहलाते हुए बोली - कहो तो मै बैठा दू

पापा मा के हाथो से अबीर लेते हुए - अभी नही जान रात मे , अभी तो मुझे तुम्हे लाल कर लेने दो

फिर पापा मा को दीवाल से लगा कर उनकी चुचियो पे अबीर मलने लगे और मा बिना उन्के रोके मदहोश होने लगी

मै उनको देख कर समझ गया यहा थोडी देर मस्ती होगी इनलोगो की

चलो मै भी किसी को पकडता हू

मै वापस स्टॉल पर आया तो देखा सभी थक कर बैठे हुए हैं

मै ह्स्ते हुए - क्यू भाई अभी से थक गये और ये अनुज कहा है

निशा हस्ते हुए - वो अभी भी बाथरूम मे नंगा है

हम सब हस कर बाते कर रहे थे और थोडी देर बाद बाथरूम का दरवाजा खुला और अनुज गरदन निकाल कर इधर उधर देख रहा था तो मैने उस्का जीन्स उठाया और लेके बाथरूम के पास गया और उसे देके बोला की वापस आ ,,,तभी मुझे सिसिकियो की आवाज आई और मै बाथरूम के बगल मे देखा तो पापा ने मा के ब्लाउज खोल दिये थे और एक चुची को मुह मे लेके चुस रहे थे

मै ये नजारा देख ही रहा था की चाची भरी बाल्टी रंग लेके आई और मुझे नहला दिया वापस से और उनकी भी नजर मा और पापा के हरकत पर गयी

इधर अनुज झट से बाहर आया और बिना हमारी तरफ देखे निकल गया स्टॉल की तरफ

वही मै किनारे हुआ तो चाची ने मा को चिढाने के अंदाज मे बोली - ओहो दीदी रात तक तो रुक जाती हिहिहिहिही

चाची के बोलने पर मै छिप था थोडा वही पापा चौक कर घूम कर चाची को देख्ते हुए

मा ने एक मदहोश भरी नजर चाची को देखा और अपने निचले होठो को उपरी दाँतो से भिचते हुए लपक कर चाची को अपने पास खिच लिया जिससे चाची सिधा मा के दुसरे खुले चुचे पे गिरी और मा ने उन्का सर अपनी दुसरी चुची पर दरने लगी

पापा तो थे ही ठरकी और बेशर्म तो वो चाची की आंखे मे देख्ते हुए मा के निप्प्ल पर जीभ घुमाने लगे जिस्से मा उत्तेजित होकर चाची का मुह और तेज चुचियो पर दबा रही थी ।

और आखिरकार बूदबुदाते हुए चाची मे मा की चुची को मुह मे भर ही लिया जिससे मा सिस्किया लेने लगी ।

यहा मेरा हाल और भी खराब होने लगा ।

वही पापा और चाची मुझे इग्नोर कर एक दुसरे की आँखो मे देखते हुए मुस्कुराते हुए मा के निप्प्ल चुस रहे थे ।

रंगो की होली मे धीरे धीरे हवस ने अपनी जगह बना ली थी, ना जाने आगे क्या होना था।

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इधर ये तीनो ने ऐसा मादक भरा सीन बना रखा था कि मेरा लण्ड बैठने का नाम नही ले रहा था ।

तभी एक नजर मैने स्टॉल की तरफ मारी तो देखा चाचा भी इसी तरफ आ रहे है

मुझे अब घबडाहट और भी ज्यादा होने लगी कि मै क्या करु ,,, अगर इन लोगो को नही रोकूँगा और चाचा यहा आ गये तो शायद त्योहार के दिन ही कच बड़ा बवाल न हो जाये और अगर इनलोगो को आवाज दी तो ये लोग होश मे आने के बाद किसका कैसे सामने करेगे

लेकिन फिलहाल मुझे यही सही लगा की इस्से पहले चाचा आये इनको अलग करना ही पडेगा बाद मे मै देख समझ लूंगा

तो मै एक बार फिर स्टॉल की तरफ नजर मारी और थोडा फुसफुसाया लेकिन किसी को मेरी आवाज नही आई

तो मजबूरन मुझे आगे जाकर पापा के पास बोलना पडा - पापा चाचा इधर ही आ रहे है

और फिर गला खसखसा कर सबको सतर्क किया

पापा तो पहले मुझे अपने बगल ने खड़ा देख के चौके लेकिन जब मैने वापस बोला की चाचा इधर आ रहे है तो वो जल्दी से खुद को ठीक किये और मा भी हडब्ड़ी मे अपना ब्लाउज बंद करके चाची के साथ स्टॉल की तरफ जाने लगी कि रास्ते मे ही चाचा मिले

फिर मै भी उधर से निकल गया गाना गुनगुनाते हुए

फिर पापा भी थोडा घूमते हुए आस पास की घरो मे देखने का नाटक करते हुए स्टॉल की तरफ आये ।

वही चाचा बाथरूम मे चले गये ।

फिर हम सब स्टॉल के पास जाकर बैठ गये

पापा भी आकर मेरे पास बैठे जो की काफी चुप थे ।

हम बैठे ही थे कि तब तक निशा दो दुपटटे लेके छ्त पर आई। जिसमे से एक मा ने और एक चाची ने ओढ़ लिया । वही विमला अपना दुपट्टा चादर के जैसे चढाये हुए थी।

अनुज और राहुल छज्जे के पास खडे बाते कर रहे थे , डीजे बंद हो चूका था । थकावट के शर्म भी सभी के चेहरे पर दिख रही थी क्योकि पिछ्ले 3 घंटो मे जो होली खेली गयी उसमे सबके हवस और अन्दर के काले शरारतो को सामने ला दिया था । और सभी एक दूसरे से नज़र चुरा के हस के बाते कर रहे थे

दोपहर के दो बज रहे थे और भूख भी सबको लगी थी ।

मा - सुनिये जी खाना बनाने की हिम्मत है नही, तो ऐसा करिये कुछ मगा लिजीये , बच्चे भी भूखे है कबसे ।

पापा मानो किसी सोच से उभरे हो और बोले - अब ब ब हा रागिनी ठीक कह रही हो ,,, राज बेटा जरा कल्लु को फोन लगाना आज वो समोसे छानता है ।

फिर मैने डीजे के पास गया और अपना मोबाईल ऑन किया और कल्लु काका के पास फोन लगाया और पापा को दे दिया

पापा फोन पर - हा कल्लु मै बोल रहा हू रंगी ,,,,हा भाई वही ,, हा भाई तुझको भी होली मुबारक हो ,,अच्छा सुन जरा गरमा गरम समोसे और रसवाली गुजिया तैयार करवा कर किसी नौकर के हाथ ह्मारे नये घर भेज्वा दे ,, हा वो जो चौराहे पर बना है ,, हा हा वही भाई , कितने करू ???

पापा मा से - कितने मगाऊ रागिनी

मा - अरे अब 25 समोसे और 20गुजिया करवा लिजीये बचचे है खा लेंगे पेट भर जायेगा

पापा फोन पर - हा कल्लु 25 समोसे और 20 22 गुजिया कर देना ,,,हा जल्दी भेजना थोडा , हा ठीक है

फिर पापा ने फोन रखा और बोले - लो जी हो गया अब क्या करना है

मा - मै तो बहुत थक गयी हू और धूप भी तेज चलिये ना नीचे हाल मे चलते है फिर नासट करके नहा धो लेंगे

विमला - हा रागिनी सच मे पैर बहुत दर्द कर रहे है

पापा ह्स्ते हुए - अरे कोई बात नही आज यही आराम करिये सब

चाची - अरे लेकिन घर भी तो जाना है

मा - क्या करोगी घर जाकर ,,यहा रहो खा पी कर यही सो जाना और कल तक चले जाना क्यू जी

पापा - हा भाई कोई कही नही जायेगा और छोटे तुम भी शाम तक घूम टहल कर वापस आ जाना

चाचा ह्स्ते हुए - शालिनी भैया ठीक ही तो कह रहे है , यहा सब थके है और यही रात के लिए कुछ बन जायेगा और साथ मे खा कर आराम कर लेंगे कौन सा आज दुकान खोलना है हमे हिहिहिही

फिर सब तय हुआ और हम सब 1st फ्लोर पर के हाल मे आ गये ।

मा ने जाते ही सोफा पकड लिया पैर पसारे फैल गयी ,,उन्के बगल मे चाची फिर विमला फिर पापा और फिर चाचा बैथ गये

चुकी सोफ़ा L टाइप का है तो ज्यादा से ज्यादा 6 लोग ही बैठ सकते थे तो अनुज जाकर मा के सिने पर लग कर बैठ गया ।

वही मै और राहुल हाल मे उतरती सीढ़ी पर बैठ गये । सोनल और निशा बेडरूम मे चले गये ।

मा सोनल से - बेटा एक एक करके सारे लोग नहा लेते जाओ

नही तो रंग नही छूटेगा

सोनल - हा मा हम दोनो नहाने ही जा रहे है ।

पापा - ऐसा करते है हम सारे जेन्स नीचे जाकर नहा लेते है और आप लोग यही उपर नहा लो

मा - अरे बारी बारी से यहा का एक बाथरूम खाली है और उपर का है नहा लो ,,,नीचे कोई गन्दगी लेके नही जायेगा हा

पापा हस के - अच्छा ठीक है भई

फिर चाचा पहल करते हुए बोले - ठीक है भैया आप लोग आराम करिये मै जरा नहा लू तब तक , शालिनी बैग से मेरे कपडे निकाल दो जरा ।

फिर चाची नीचे गयी और अपना बैग लेके आई फिर चाची और चाचा दुसरे वाले खाली बेडरूम मे चले गये ।

अनुज और राहुल भी छत पर चले गये तौलिया लेके ।

मै उठा और मा के बगल मे आकर बैठ गया और उन्के उन्के चुचो पर लद कर उनको हग कर लिया और मा ने भी मुस्कुरा कर मेरे बालो मे हाथ फेरने लगी ।

इधर मै और मा एक दुसरे मे लगे थे लेकिन मेरी आंखे पूरी बंद नही थी हल्की आंखे खोले मै सब देख समझ रहा था कि पापा उठ कर विमला के बगल मे आ गये और बोले - और बताईए बहन जी मज़ा आया की नही

विमला ह्स्ते हुए - जी भाईसाहब बहुत ही ज्यादा और रागिनी तो आज कुछ ज्यादा ही मस्ती कर दी थी

पापा हस कर - अच्छा जी वो कैसे

विमला - अरे आज ये मेरे कपडे पुरे फाड ही देती ह्हिहिहिही कमीनी कही की

मा ह्स्ते हुए - चल चल स्ब्से पहले तुने मेरी साडी फाडी फिर मै क्या करती

विमला ह्स्ते हुए - मुझे तेरी साडी पहनने ना पहनने का कोई मतलब न्ही दिख रहा था सारा माल खुला रखा था तुने हाहाह्हाहा

मा थोडी शर्मायी और विमला को छेड़ते हुए बोली - हा देखा मैने तुने आज रंग लगवाने के चक्कर मे ब्रा ही निकाल दी

इधर पापा हस भी रहे थे और बार बार मेरी तरफ देख कर खुद को शांत भी रखें हुए थे

विमला शर्माते हूए - चुप कर पागल कुछ भी बक रही है

और पापा की तरफ इशारा करती है ।

मा ह्स्ते हुए - उनको क्या बोल रही है आज उन्होने भी अपनी भयोह के साथ बहुत मज़े लिये

मा की बात से पापा झेप गये और मेरी हसी छूट गयी तो मा मेरे गालो पर चपट लगाते हुए बोली - तू बड़ा हस रहा है हा ,,, दो बार क्छ्छे मे रंग डलवा लिया लेकिन शर्म नही आ रही है हम्म्म्म

मै हस कर मा के चुचियो मे सर दबाते हुए उनकी नंगी पेट को सहलाते हुए शर्माने की ऐक्टिंग करने लगा जिस्से मा मुझे बाहो मे भर मेरे माथे को चूम कर हस्ने लगी

ऐसे ही हमारी मस्ती भरी बाते चलती रही कुछ देर फिर चाचा और चाची दोनो नहा कर साथ मे बाहर आये ।

उधर निशा और सोनल भी नहा चुकी थी फिर 5 मिंट के अंतर पर राहुल और अनुज भी नहा कर हाल मे एक्क्था हुए

थोडी देर बाद कल्लु काका ने अपने नौकर से समोसा और गुजिया भेज्वाये ।

फिर मैने दोने मे ही सबके लिये समोसा गुजिया लगा दिया और फिर मा ने सबको एक एक दोना उठाने को बोला

फिर सारे लोगो ने नासता किया थोडे गप्पें हाके और थोडी देर पहले हुई चटपटि बातो और घटनाओं की पुनरावृति करते हुए सबने सबके मजे लिये ।

फिर चाचा चाची नीचे कमरे मे सोने चले गये । सोनल और निशा अपने बाल सुखाने बालकीनि मे चली गयी ।

अनुज और राहुल दोनो नीचे हाल मे जाकर मोबाइल पर मूवी देखने का प्लान कर लिये ।

फिर वापस उपर के हाल मे मा पापा विमल और मै बच गये ।

मा उठते हुए - चल विमला तू भी नहा ले आ ,,,और आप भी बैठे ना रहिये नहा लिजीये जाकर ।

पापा - नही नही अभी मेरा मन नही है ,,आप लोग नहा लो मै यही आराम करता हू

मै - मै तो जा रहा हू उपर नहाने

मा - अच्छा ठीक है बेता वो जरा गेस्टरूम मे मेरा और विमला का बैग है वो लेते आओ

मै झट से नीचे गया और फट से दोनो बैग लेके आ गया ।

मा - विमला तू उस वाले कमरे के बाथरूम ने चली जा और मै इसमे चली जाती हू ।

फिर दोनो अलग अलग कमरो मे गये और मै भी सिर्फ तौलिया लेके छत पर चला गया ।

छत पर जाने के बाद एक नजर मैने स्टॉल पर डाली

मै मन मे - अबे यार , मस्ती तो बहुत कर ली लेकिन ये सब समान बटोरेगा कौन ,, ऐसा करता हू पहले सारा सामान जो काम लायक है वो नीचे रख देता हू फिर बाकी का कचरा एक किनारे कर दूँगा। नही तो नहाने के बाद ये काम करके सब चौपट ही रहेगा ।

फिर मैने रंग अबीर को अच्छे से वापस पैकेट मे डाला और सारी पिचकारीया बाल्टी एक साथ रख कर उसमे पानी भरा। फिर गलास के पैकेट, मिठाइया और रंग सब एक बडे झोले मे भर कर ,, उठाया और नीचे चल दिया ।

मै वापस हाल मे आया तो पापा वहा नही थे तो मै सोचा क्यू ना सारा सामान यही मम्मी जिस कमरे मे है वही रख दू और कमरे का दरवाजा ही हल्का खुला हुआ था

तो मै सारा सामान लेके दरवाजे को धक्का देकर मम्मी को आवाज लगाते हुए कमरे मे घूस्ता हू - मम्म्यीईईईईई

सामने देखा तो मेरी आंखे फटी की फटी रह गयी क्योकि पापा कमरे मे बाथरूम के पास अपना पैजामा नीचे किये खडे थे और मा पूरी नंगी होकर पापा का मोटा लण्ड नीचे बैठ कर चुस रही थी ।

पापा की नजर वापस मुझसे मिली और मा भी लण्ड निकाल कर मेरे तरफ आंखे फाडे देखने लगी । दोनो हैरत भरी नजरो से मुझे देख रहे थे और मेरी आवाज नही निकल रही थी ।

मै हडबड़ा कर नजरे चुराते हुए - अब ब ब वो वो मै ये ये समान रखने आया था ,,,

और मै झट से सामान रखा और बिना उनलोगो की तरफ देखे - सॉरी पापा

फिर कमरे के बाहर आ गया और एक गहरी सांस ली

भले ही मेरा बाप कितना ठरकी हो और मै कितना चोदू रहू लेकिन एक बाप के सामने ऐसे सीन के बाद सामना करने की हिम्मत करना आसान नही होता है । मै अपनी सांसे बराबर कर रहा था कि अन्दर से पापा की आवाज आई

पापा - अरेरे याररर , धत्त

मा - क्या हुआ जी

पापा - आज दुसरी दफा उसने हमे ऐसे हालत मे देखा ,,क्या सोच रहा होगा वो

मा - अरे वो अब बड़ा हो गया है देखा नही सॉरी बोल कर गया है । सब समझता है मेरा बेटा आप चिन्ता ना करिये

पापा परेशान लहजे मे - हा वो ठीक है रागिनी लेकिन क्या उपर छ्त पर शालिनी भी थी ना ,,मुझे उस बात की चिन्ता है कही वो हमारे बारे मे कोई गलत राय बना ले

मा तो पहले ही मुझे जानती थी तो वो पापा को सत्तावना देते हुए - ऐसा करिये आप एक बार उससे बात करिये,

पापा हिचक कर - क क क्या आ , कह रही हो रागिनी ,मै कैसे बात करूँगा अपने ही बेटे से , वो भी ऐसे मुद्दो पर

मा झिझक कर - हा तो फिर जिन्द्गी भर नजरे चुराते रहना एक दूसरे से आप लोग ,, आगे जाकर मेरे बेटे की जिन्दगी तबाह होगी । ना वो आपसे कुछ बात करेगा ना ही आपको अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओ के बारे मे बतायेगा

पापा परेशान लहजे मे - नही नही रागिनी ऐसा नही होगा ,,,,मै कोसिस करता हू उससे बात करने की

यहा मेरी हालत और पतली हो गयी कि अब पापा मुझसे ऐसी क्या बात करेंगे , क्या समझाएंगे

पता नही आगे क्या होने वाला था और कैसे मै पापा का और पापा मेरा सामना करने वाले थे ।
 
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