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Incest विधवा माँ के अनौखे लाल

इधर अनीस रजनी को ले कर एक रेस्टोरेंट में गया जहा इन्होने खाना खाया और फिर वहां से ये लोग मोटरसाइकिल पे सवार हो कर अपने होटल की तरफ चल दिया जहा इनका रूम बुक्ड था ....होटल पहुच कर कमरे में पहुचते ही अनीस रजनी को बाहों में जकड लिया ...रजनी उसके इस उतावलेपन को देख कर बोली की अनीस मै कही भागी नहीं जा रही हु मै तुम्हारी ही हु.....

अनीस - जाना अब बस भी करो आज मत रोको मुझे ...आज मुझे तुम्हारे इस हुस्न को पि लेने दो जिसके लिए मैंने और तुमने इतना इन्तेजार किया है आज वो पल हमारे सामने है ....और वो रजनी के होठो पे अपने होठ जमा देता है

...आज दोनों में से कोई रुकने को तैयार नहीं था अब दोनों हवस के दरिया में गोते लगाने लगे थे ...कुछ ही देर में रजनी की समीज के चेन पे अनीस ने उसको उसके बदन से अलग कर दिया और साथ ही साथ उसके सलवार को भी अब वो उसके सामने केवल एक लाल रंग की ब्रा पैंटी में थी .....और यही हाल अनीस का भी था वो भी एक अंडर वेयर में खड़ा था ......और उसका तम्बू साफ़ साफ़ दिख रहा था जिसे देख कर रजनी की सासे अटकने लगी थी ....

अनीस ने उसे कहा की जान घबराओ मत मै तुम्हे ज्यादा दर्द नहीं दूंगा .......

रजनी उसे अपने ऊपर खीच कर कहा की भरोसा है तुमपे और वैसे भी इस दर्द को झेलने के लिए ही इतने दिन इन्तेजार किया है .....

अनीस - वाह जान दिल खुश कर दिया.....और वो उसे ले कर कम्बल में घुस जाता है...और फिर शुरू होती है घमासान लड़ाई....अगले कुछ ही देर में अनीस ने रजनी के ब्रा के हुक को खोल कर उसके बदन से अलग कर दिया और वो उसकी गोल गोल सुडौल मुलायम चुचियो पे टूट पड़ा और रजनी की सिसकियाँ तेज होती जा रही थी

आज उसके जीवन में पहली बार किसी ने इस्पे मुह लगाया था और वो इस आनदं को पूरी तरह से जीना चाहती थी तभी अनीस झुकते हुए नीचे आया और उसके कमर पे अपने दातो से उसकी पैंटी में फसाते हुए उसे नीचे खीचना शुरू किया और अब रजनी उसके सामने पूरी तरह से नंगी लेटी हुयी थी ....

अनीस भी अपने बदन के एकमात्र कपडे को उतार कर नंगो हो गया और उसके ऊपर आ गया और फिर से उसके होठो को चूसने लगा.....फिर धीरे धीरे वो नीचे आता गया और उसकी अनछुई बिना बालो की एकदम चिकनी चूत पे मुह लगा दिया जिससे रजनी चीख उठी ...ऊओह्ह्ह्ह रर्र्र्राआव्व्वी आःह्ह्ह

अब अनीस ने उसकी टांगो को फैला कर उसकी चूत में लपालप अपनी जीभ से हमला करना शुरू किया और तुरत ही रजनी झड गयी और उसका सारा पानी अनीस के चेहरे पे आ गया उसके जीवन का ये पहला चरम सुख था......

रजनी और अनीस दोनों को अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था अनीस ने अब अपना लंड पे अपना ही थूक लगा कर उसके चूत के मुहाने पे टिकाया ...

इस स्पर्श को पाते ही रजनी फिर से चिहुक गयी और वो एक बार फिर से झड गयी .....

अनीस झुक कर उसके होठो को चूसने लगा और इधर एक करारे झटके के साथ उसने अपना लंड का टोपा उसकी चूत में घुसा दिया ...जिससे रजनी की चूत की झिल्ली फट गयी और रजनी की आँखे बाहर आने लगी मगर अनीस उसके होठो को चुसे जा रहा था और उसने कुछ देर रुक कर उसके चूत में एक और करारा झटका मारा और अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया ......

जिससे रजनी बुरी तरह छटपटाने लगी रजनी ने उसके पीठ पे नाख़ून गढ़ा दिए मगर अनीस के बलिष्ठ बाहों के शिकंजे में वो एकदम सिकुड़ कर रह गयी ....अनीस ने कुछ देर रुक कर रजनी को शांत होने दिया और इस दरमियाँ वो उसके होठो को चूसता रहा ...

.रजनी के शांत होने पे उसने उसके होठो को छोड़ा तो रजनी ने उसे कहा की कितना हब्शी लंड है उसका उसकी चूत एकदम फट गयी होगी आह माँ मै मरी माँ....... और सुबकने लगती है साथ ही साथ अनीस के पीठ पे मुक्के मारने लगती है की उसने उसपे जरा भी दया नहीं दिखाई .....उफ़ मेरी तो जान हलक में आ गयी थी....

अनीस - कोई बात नहीं जान आखिर में मैंने तुम्हे पूरी तरह से अपनी बना ही लिया

रजनी - अभी कहाँ जनाब पहले शादी की रसम निभाइए फिर ये बात कहियेगा.....

अनीस - जरुर मेरी जान... और वो उसके होठो पे फिर से अपने होठ जमा देता है ......और फिर दोनों अपने आलिंगन में चुदाई का भरपूर मजा लेने लगते है और कमरा रजनी की सिसकियो से गूंजने लगता है.......

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अब शाम के 7 बज रहे थे इतने देर में ये तीनो ने काफी कुछ कर लिया था ....

जीशान वसीम और शाज़िया ने मॉल में खरीद दारी करने के बाद खाना भी खा लिया था और अब वे मूवी के लिए हॉल जा रहे थे रास्ते में उन्होंने कहा की अगर मूवी की टिकेट नहीं मिली तो हम पास के मैदान में लगे गरम कपड़ो के मेले में हो आयेंगे और वह भी कुछ न कुछ खरीद लेंगे और फिर जीशान के कहे मुताबिक उसके अंकल की दूकान पे जाएँगे ....वसीम ने भी हां में हां मिलाई.....

हॉल पहुच कर उन्हें मालुम चला की शो में टिकट्स तो है मगर कार्नर की सीट्स नहीं है.......वे तीनो मायूस हो गये मगर फिर जीशान ने कहा की कोइबात नहीं मूवी अगले सन्डे को चली जाएगी वैसे भी अभी ऐसे ठंड के मौसम में माँ के साथ जूली 2 देखने जाना जरुर चाहिए ......उफ़ माँ और वो सब की नजरे बचा कर शाज़िया की गांड को बीच सड़क पे ही मसल देता है ....

वैसे भी शाज़िया जब भी बाजार आती थी तो उसकी चूत चूची और गांड मसली जरुर जाती थी जिससे शाज़िया की चूत रास्ते भर गीली रहती थी और नतीजतन घर आते ही शाज़िया नंगी हो कर खुद से जीशान ,अनीस और वसीम के लंड से खेलने लगती थी ....

आज भी वैसा ही हो रहा था जबकि अभी अंकल के दूकान में जाना बाकी ही था .......

खैर मेले में खरीद दारी करते करते रात के साढ़े नौ बज गये थे....

इधर अनीस रजनी को घर ड्राप कर कर अपने घर की और चल दिया था तभी उसे याद आया की क्या पता वे लोग घर पे हो या नहीं जीशान से बात कर लेता हु......अनीस जीशान को फ़ोन लगाता है और पूछता है की वे लोग कहाँ है .....

जीशान कहता है की वो भी थोड़ी देर में घर पहुचेंगे तुम घर पे ही मिलो.....अनीस उससे ये पूछता है की वे लोग है कहाँ ...जीशान उसे बता देता है तो अनीस कहता है की मैं भी आऊँ मगर जीशान मना कर देता है...तो अनीस वहा से सीधे घर चला जाता है वो सोचता है की कुछ देर रजनी से फ़ोन पे विडियो कॉल पे बाते करेगा ......

इधर जीशान शाज़िया और वसीम उन् अंकल की दूकान पे पहुचते है ....वो अंकल की दूकान एक कॉलोनी के अंत में थी जिसका दूसरा सिरा एक मार्किट की तरफ खुलता था ....और जीशान शाज़िया को ले कर कॉलोनी की तरफ से गया था जिससे मार्किट के लोग उन लोगों को देख ना पाए.....

जीशान दुकान में घुसता है साथ ही साथ शाज़िया और वसीम भी ....इस वक़्त दूकान में केवल अंकल ही थे और वो गल्ले में रखे पैसो का हिसाब कर रहे थे ....मेन शटर लॉक हो चूका था इसका मतलब अब दुकान बंद थी .....शाज़िया और बाकी तीनो को देखते ही अंकल ने पैसे गिनना बंद कर दिया था ...और जीशान ने कहा की नमस्ते अंकल जी कैसे है .....

अंकल - मै ठीक हु तुम अपनी बताओ आज इधर कैसे आना हुआ ये लोग कौन हुए.....

जीशान - अंकल के पास आता है और कहता है अंकल अब आपसे क्या छुपाना ये अपनी सेटिंग है.....

अंकल - और ये बुढऊ कौन है ????

जीशान - ये भी अपनी ही बिरादरी से सम्बन्ध रखते है ....और कहते हुए वो एक गन्दी मुस्कान देता है जिससे अंकल सारा माजरा समझ जाते है ......

वो जीशान से कहते है वाह बेटा क्या सेटिंग भिडाई है खूब मजा देती होगी ये जरा हमे भी चखाओ इनका स्वाद...

जीशान - अंकल जी इनसे क्या है न अपना जरा सेंटीमेंटल अटैचमेंट है तो इनको छोड़ ही दीजिए कोई और होगी तो चखाऊंगा नहीं सौप दूंगा .....वो भी कमसिन जवानी .....

अंकल कहते है कोई बात नहीं बेटा चलो तुम्हारी बात का भी भरोसा करते है अपनी तो पुरानी पहचान है ......

जीशान - जी अंकल....

अंकल - और बोलो कैसे आना हुआ....

जीशान - इनके लिए कुछ अंतर्वस्त्र और नायटी लेनी थी एकदम फिटिंग साइज़ की चाहिए ..... ट्रायल ये यही लेंगी ...कमरे में ...और जीशान ने आँख मार दी अंकल को की वो ना कह दे .....

अंकल - बाकी सब तो ठीक है मगर बेटा ट्राइल रूम में तो अभी अभी कुछ माल को शिफ्ट कर दिया है वह तो मुश्किल होगी इनको अगर तुम कहो तो ये यही पे देख लेंगी मैं कपडे निकाल देता हु....कोई दिक्कत तो नहीं है न बेटा ....

जीशान - जी नही बिलकुल नहीं अंकल....आप दिखाइए कपडे ....

और वो शाज़िया की तरफ देख कर मुस्कुरा देता है .....

अंकल - बेटा साइज़ क्या बताया....

जीशान - अंकल आप 34 बी साइज़ की निकाल दो....और नाइटी तो फ्री साइज़ ही रहेगी मगर जरा जालीदार वाली और छोटी छोटी निकालना ....

अंकल - वाह बेटा ....बहुत बढ़िया चॉइस है तुम्हारी....

इस बीच शाज़िया और वसीम वही पे खड़े थे जीशान उनके पास गया और बोला माँ तुम निश्चिंत रहो बिलकुल मत घबराओ इनसे कोई खतरा नहीं है और हां ये तुम्हे छुएंगे तक नहीं.......अंकल जब कपडे निकाल लिए तो उसने कहा की लो बेटा

जीशान - आइये और पसंद करिए.....शाज़िया को अब कोई झिझक नहीं थी क्योकि जीशान वहां पे था और वह कोई खतरा नहीं था....

शाज़िया जीशान के पास आई तब जीशान ने कहा की अंकल जरा अपना cctv ऑफ कर देंगे नहीं तो इनके लिए मुसीबत हो जाएगी और हमारे लिए भी.....

तब अंकल ने cctv ऑफ कर दिया ....और शाज़िया ने एक एक कर उन ब्रा और नाइटी को उठा उठा कर देखना शुरू किया...उन् सब में से उसने कुछ ब्रा और नाइटी निकाल कर अलग कर ली इस काम में वसीम और जीशान ने भी उसकी मदद करी जबकि अंकल शाज़िया की ब्लाउज से झाक रही चुचिया की दरार पे नजर गडाए हुए थे ......

तभी जीशान अंकल से कहता है की अंकल अभी इतने ही है बाकी आप साइड कर दीजिए ...अब शाज़िया ने उन्हें चेक करना था तो उसे अपने सीने पे रख रख कर देखने लगी..जबकि वसीम और जीशान उसे देखने लगे....

तभी जीशान बोला की अरे इनको अच्छे से चेक कर लो न यहाँ कोई नहीं है हमारे सिवा ..और ये अंकल अपने ही है......

शाज़िया - फिर भी मैं इन्हें ऐसे ही देख लेती हु कोई दिक्कत होगी तो तुम यहाँ से बदल कर ला देना....

जीशान के कहने से पहले अंकल बोले...जी नहीं माफ़ कीजियेगा बीके हुए कपड़ो को हम वापिस नहीं करते.....ये है तो अंडरगारमेंट्स ही ना सो आप इन्हें यही चेक कर लीजिए आराम से कोई दिक्कत नही है.......

शाज़िया की झिझक को दूर करने के लिए जीशान आगे बढ़ कर शाज़िया की शाल को उतारता है और फिर साडी का पल्लू खुद नीचे गिरा देता है और उस साडी के पल्लू को वसीम शाज़िया के बदन के इर्द गिर्द लपेट कर साडी को उतारने लगता है और कुछ ही पलो में शाज़िया उस दूकान में पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी और तभी जीशान शाज़िया के ब्लाउज के हुक खोलने लगता है ....

वसीम का लंड अब खड़ा होने लगा था वही हाल अंकल का भी था ....अब शाज़िया का ब्लाउज पूरा खुल चूका था .....और उसकी दोनों चुचिया लटक रही थी जिसे तीनो मर्द साफ़ साफ़ देख सकते थे जीशान ने बिना देर किये ब्लाउज उसके बदन से अलग कर दिया........

तभी शाज़िया ने खुद से अपने पेटीकोट का नाडा खीच दिया और पेटीकोट सरसराता हुआ उसकी टांगो के बीच आ गिरा....अब शाज़िया एक दूकान में पूरी तरह नंगी खड़ी थी .....तीनो मर्दों की हालत ख़राब हो चुकी थी जबकि अंकल की तो कुछ ज्यादा ही.....

वसीम ने आगे बढ़ कर शाज़िया को अंकल की तरफ घुमाया और उसके बालो को समेट कर एक जुड़ा सा बना दिया था ...शाज़िया सामने से नंगी खड़ी थी अंकल का मन बहुत खराब हो चूका था मगर वो कण्ट्रोल करना जानते थे....

अब शाज़िया ने एक एक कर ब्रा पहननी शुरू की ....एक से एक मॉडल की ब्रा थी ..और जीशान और वसीम दोनों मिल कर उसकी चुचियो को ब्रा में सेट करने में मदद कर रहे थे ....

अंकल अपनी साँस रोके उन लोगों को देख रहे थे....कुछ देर में उसने आखिरी ब्रा पहन कर उतारी और अब बारी थी नाइटी की....वो नाइटी पहनने लगी तो इसमें भी वसीम और जीशान उसकी मदद कर रहे थे......जब सारे कपडे उसने ट्राइ कर लिए तो वो आखिरी नाइटी भी उसने उतार कर नंगी खड़ी हो कर अंकल से मुखातिब हो कर बोली की आप सारे पैक कर दीजिये हम सारे लेंगे.....

अंकल ने झुक कर ड्रावर से एक बहुत ही ज्यादा सेक्सी सी ब्रा निकाली और कहा की ये मेरी तरफ से आपके लिए....और उसने उसे शाज़िया के हाथो में देते हुए उसकी एक चूची को दबा दिया और कहा की आप पे ये खूब फबेगी और आपके ये अंगूर के दाने बहुत ही मस्त दिखेंगे इसमें....पहन कर दिखाइए ना जरा....

शाज़िया थोड़ी मुस्कुराई और उसने अंकल की तरफ मुह किए ही पहन कर दिखाया तभी अंकल ने उसकी चुचियो को सेट करने के लिए हाथ बढ़ाया तो जीशान ने उसे रोक कर खुद उसकी चुचिया एडजस्ट की....और वसीम ने ब्रा की हुक को लगाया ......

अंकल बोले वाह बहुत ही सुंदर ....और हस दिया .......जब तक बिलिंग न हुयी शाज़िया वैसे ही नंगी खड़ी रही....और जीशान ने उसकी गांड पे हाथ रखे सारा पेमेंट किया जबकि वसीम पॉलिथीन में सारे कपडे समेटने लगा.....सारे काम होने के बाद शाज़िया को कपडे जीशान और वसीम ने मिल कर पहनाया ....और वो अंकल को फिर आयेंगे कह कर निकल गए ....

इन् सब कामो में उनको डेढ़ घंटे लग गये अब रात के 11 बज रहे थे....वहां से वे लोग तेज तेज कदमो से चलते हुए घर को निकले..रस्ते में शाज़िया बोली की आखिर तूने मुझे नंगी कर ही दिया....वो आदमी क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में और तो और उसने मेरी चूची भी दबा दी ..

जीशान बोला की माँ तुम उसके सामने नंगी हो कर कपडे बदल रही थी बिचारे की जान हलक में आ गयी होगी तो जाने दो वैसे भी उसने तुम्हारी चूची ही दबाई है और जब दूसरी बार उसने हाथ लगाया तो देखा नहीं कैसे मैंने उसे रोक दिया .....शाज़िया बोली की अच्छा अच्छा ठीक है मगर आगे से ऐसी हरकत मत करवाना मुझसे मै खुद को रोक नहीं पाती...तीनो हस पड़े और इसी बीच वे घर पहुक गये.....

इधर अनीस ने रजनी से फ़ोन पे ही विडियो कॉल किया और एक बार फिर उसे नंगी कर के उसको झाड दिया और खुद भी झड़ा....घर पहुच कर शाज़िया सीधे किचन में गयी और पूरा एक बोतल पानी गटक गयी .....वापिस कमरे में जब आई तो जीशान वसीम और अनीस सब के सब अंडर वेयर में बैठे थे....

शाज़िया अभी भी पुरे कपड़ो में थी.....आते ही उसने अपने आप को बिलकुल नंगी कर लिया और बिस्तर पे चढ़ बैठी .....और अनीस से बोली की मिल गयी फुर्सत तुझे .....किस्से मिलने गया था तू....

अनीस इस सवाल से हडबडा गया मगर अगले ही पल शाज़िया हस दी और बोली गया कहाँ था सुबह से....आज पता है इस शैतान ने क्या क्या किया है ....

अनीस सवालिया नजरो से उन् दोनों की तरफ देखने लगा ....जीशान हँसते हुए कहता है ....पता है भाई आज माँ को हमने एक दूकान में पूरी नंगी कर दिया और उनके सारे कपडे एकदम फिटिंग साइज़ के लिए.....

अनीस बोला क्या बात कर रहा है तू....अनीस शाज़िया की तरफ देखते हुए पुछा की और तुम हो भी गयी माँ वाह....

शाज़िया - हां इस शैतान ने मुझे करवा के ही दम लिया ......और दादू अनीस ने पूछा ...

.शाज़िया बोली की ये भी जनाब आज मेरी साडी उतारने का काम किये है....अनीस का ये सीन का मन में सोच कर ही खड़ा हो गया और वो नंगा हो गया और उसने शाज़िया को बोला की माँ जरा इसे आराम दो तभी जीशान भी नंगा हो गया और वसीम भी नंगा हो कर बिस्तर पे आ गया ...और अब चारो नंगे थे और ठंड में गरमा गरम चुदाई शुरू हो गयी थी......

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अनीस इस सवाल से हडबडा गया मगर अगले ही पल शाज़िया हस दी और बोली गया कहाँ था सुबह से....आज पता है इस शैतान ने क्या क्या किया है ....

अनीस सवालिया नजरो से उन् दोनों की तरफ देखने लगा ....जीशान हँसते हुए कहता है ....पता है भाई आज माँ को हमने एक दूकान में पूरी नंगी कर दिया और उनके सारे कपडे एकदम फिटिंग साइज़ के लिए.....

अनीस बोला क्या बात कर रहा है तू....अनीस शाज़िया की तरफ देखते हुए पुछा की और तुम हो भी गयी माँ वाह....

शाज़िया - हां इस शैतान ने मुझे करवा के ही दम लिया ......और दादू अनीस ने पूछा ...

.शाज़िया बोली की ये भी जनाब आज मेरी साडी उतारने का काम किये है....अनीस का ये सीन का मन में सोच कर ही खड़ा हो गया और वो नंगा हो गया और उसने शाज़िया को बोला की माँ जरा इसे आराम दो तभी जीशान भी नंगा हो गया और वसीम भी नंगा हो कर बिस्तर पे आ गया ...और अब चारो नंगे थे और ठंड में गरमा गरम चुदाई शुरू हो गयी थी......

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अगली सुबह शाज़िया जब जागी तो वो नंगी सोयी हुयी थी अपने बेटो और ससुर के बीच में जब वो उठ कर बैठी तो उसका सर भारी हो रखा था और तबियत सही नहीं लग रही थी ....उसने बाकिओ को जगाया और कहा की उसकी तबियत सही नहीं लग रही है .....

जीशान ने उसका गले के पास हाथ लगाया और उसे बुखार का अहसास हुआ वो बोला माँ तुम्हे तो तेज बुखार है....

वसीम भी आया और उसकी एक हथेली को पकड़ कर बोला हां बहु मगर ये हुआ कैसे ......

अनीस शाज़िया के बदन को खुद से चिपकाते हुए बोला कल तुमलोगों ने इनको उस दूकान में नंगी कर दिया था ना शायद इसी वजह से हुआ है इनको ठंडी लग गयी है शायद ...और करो नंगी इनको तुमलोगों को तो कुछ समझ ही नही आता की कौन सा काम कहा करना है बस शुरू हो गए कही भी जरा भी ख्याल नहीं आया माँ का .....

शाज़िया अनीस को रोकते हुए बोली की बस न अनीस हो गया न जाने भी दो और इनके इस काम में मै भी बराबर की जिम्मेदार हु तू केवल इनको क्यों डाट रहा है ...और अभी मुझे मेरी तबियत सही करने में मदद करों ऐसे लड़ो मत.....

अनीस उठा और हॉल में जा कर दराज से थर्मामीटर ले आया और इधर वसीम और जीशान ने शाज़िया को लिटा दिया और वसीम कपडे पहनते हुए बोला की मै मेरे डॉक्टर दोस्त को बुला लाता हु....

इधर अनीस कहता है रुकिए दादू मिया पहले माँ का बुखार देख लू फिर आप जाना .....अनीस ने नंगी पड़ी शाज़िया जो की अब रजाई से ढकी थी उसको वापिस से नंगी कर दिया और थर्मामीटर सीधा उसके मुह में घुसा दिया .....

कुछ देर बाद अनीस थर्मामीटर बाहर निकाल कर देखता है और वसीम की तरफ मुखातिब हो कर कहता है की दादू इनका बुखार 102 है काफी ज्यादा है ....आप डॉक्टर साहब को सीधे यही ले आइयेगा .....

इतना सुनते ही वसीम झटके से कमरे से बाहर निकल पड़ता है और रास्ते में ही डॉक्टर बाबू को खबर कर देता है ताकि वो उसे रास्ते में ही मिल जाए....

इधर अनीस और जीशान शाज़िया को उसी नंगी हालत में रजाई ओढा कर लिटाये रखते है और अनीस जीशान को ये बताने में लगा था की शाज़िया का ख्याल कैसे रखना और वही शाज़िया रजाई में लेटी उनकी बाते सुन और मुस्कुरा रही थी ..,.

उन सब को इसका ज़रा भी ख्याल नहीं था की शाज़िया नंगी है और डॉक्टर आने वाले है......इसी बीच वसीम डॉक्टर को ले कर घर में आ जाता है मगर अगले ही पल वसीम को याद आता है कि शाज़िया नंगी होगी पता नहीं उन दोनों ने उसे कपडे पहनाये भी है या नहीं .....लेकिन अब वो डॉक्टर को क्या बोल कर रोकता उसके पास कोई चारा नहीं था ...इसलिए वो रूम में घुसा जहा बाकी तीनो पहले से मौजूद थे और शाज़िया रजाई में लेटी थी ......

डॉक्टर - अरे भाई बहुरानी क्या हो गया है तबियत कैसे ख़राब कर लिये ....

शाज़िया तो कुछ नहीं बोली पर अनीस बोला ....वो अंकल कल शायद माँ ने छोटे भाई के साथ बाजार में आइस क्रीम खा ली थी और ठंड भी काफी है और घर का भी काम यही देखती है तो ......

तभी अचानक से उसे भी इस बात का अहसास हुआ की माँ तो नंगी है अब क्या करेंगे वसीम को तो कुछ बोलते नहीं बन रहा था वही जीशान अपनी खुराफाती दिमाग को जोर दे कर सोच रहा था की क्या किया जाये मगर अब तक बहुत देर हो चुकी थी ....

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डॉक्टर साहब ने उसको कहा की रजाई हटा दो बेटा मैं चेकअप कर लू .....और वो हाथ आगे बढ़ा कर शाज़िया के रजाई को......

बिस्तर में शाज़िया नंगी थी और डॉक्टर बाबु उसकी तरफ बढ़ रहे थे तभी जीशान ने डॉक्टर बाबु को जोर से आवाज देते हुए कहा ....जीशान - अंकल जी आपने अपना आला का बक्सा तो लिया ही नहीं तो जाँच कैसे कीजियेगा पहले वो तो ले आइये .....

डॉक्टर बाबु उसकी इस बात पे थोड़े शर्मिंदा हुए और बोले ठीक कह रहे हो बेटा मै वो हड़बड़ी में भूल आया वो तुम्हारे दादू जान जरा ज्यादा ही परेशान थे इसलिए ऐसे ही चला आया ....मै अभी ले आता हु और वो घूम जाता है ....और कमरे में मौजूद सभी लोगो ने राहत की साँस ली ...

डॉक्टर बाबू कमरे से ये बोल के निकल गये की वो अभी गए और अभी आये .....उनके और वसीम के जाते ही अनीस और जीशान शाज़िया को बिस्तर में से उठाते है और नंगी हालत में खड़ी कर के उसके बदन पे जल्दबाजी में एक नायटी पहना देते है जबकि उसके नीचे कुछ भी नहीं पहनाते ....और उसे उसी तरह बिस्तर में वापिस लिटा देते है .....इस दरमियाँ तीनो में कोई बात नही होती..

कुछ ही देर में डॉक्टर साहब वापिस आ जाते है और अपना आला निकाल कर गर्दन में टांगते हुए जीशान से कहते है.....- बेटा अब तो सब है न ....

जीशान - जी अंकल ....वो वापिस अपने बक्से की ओर घूमते है और थर्मामीटर निकाल कर शाज़िया के पास पहुचते है और सीधा उसके बदन से रजाई हटा देते है और सामने शाज़िया की मंझि हुयी जवानी देख कर लार टपकाने लगते है और शाज़िया की चुचियो की गहराई पे उनकी आँखे जम जाती है ....
 
तभी वसीम कहता है क्या हुआ देख ना भाई....डॉक्टर हडबडा कर शाज़िया को कहते है की बहु जरा अपनी एक बाह उठाना मुझे थर्मामीटर लगाना है शाज़िया अपना हाथ उठाती है मगर उसके जबान से एक कराह निकल जाती है और शाज़िया अपनी एक बाह पूरी की पूरी उठा देती है जिससे शाज़िया की कांख नंगी हो जाती है और उसकी चुचिया बहुत ही नुमयिन्दा होने लगती है जिसको देख कर डॉक्टर अपना कण्ट्रोल खोने लगता हैऔर थर्मामीटर लगाने के बहाने उसकी चूची से हाथ सटा देता है और उसके बाद वो शाज़िया से कहता है की अभी कुछ देर तक बाह नीचे कर लो और उसकी बाह को पकड़ कर नीचे करता है और उसकी मुलायम बाहों का भी मजा ले लिया ....और बाकी तीनो वही खड़े थे .....

शाज़िया की चुचियो की गहराई देख कर तीनो मर्दों की वासना की घंटी जोरो से बज रही थी .....पांच मिनट बाद शाज़िया कहती है की उसकी बाह दुखने लगी है आप इसे निकालिए न और खुद से आना हाथ उठा देती है और डॉक्टर साहब उसकी चूची की फिर से छु लेते है और शाज़िया और बाकी सब इस हरकत को देख कर भी कुछ नहीं बोलते .....

इधर डक्टर साहब ने थर्मामीटर देखते हुए कहा की इनका बुखार तो काफी है जल्द आराम के लिए एक दिन तीनो पहर इंजेक्शन लेना होगा और मै कुछ दवायिया लिख दूंगा उनको मगा कर समय समय पे देते रहना ....और वो पर्ची निकाल कर लिखने लगते है .....

शाज़िया कहती है की वो इंजेक्शन नहीं लगवायेगी ....

डॉक्टर - बहु ज्यादा डरने की जरुरत नहीं है कुछ नहीं महसूस होगा और जब तक महसूस होगा तब तक इंजेक्शन खाली हो चूका होगा.....चलो ज्यादा मत सोचो अगर इतना लग ही रहा है तो हाथो की जगह पीछे ले लो वहा तो बिलकुल भी दर्द नहीं होगा तुम्हे ....बहुत ही बेशर्मी से वो ये बात कह गया क्युकी शाज़िया का बदन काफी भरा हुआ था और सुडौल भी.....बात में छुपी शरारत को समझते हुए जीशान बोला

जीशान हां माँ अंकल सही कह रहे है ...साथ में अनीस ने कहा की मगर अंकल माँ को वहा कैसे देंगे इंजेक्शन .....

डॉक्टर - तुम चिंता मत करो बेटा यहां सब घर के ही लोग है और डॉक्टर से कैसा शर्माना

वसीम - नहीं भाई बहु को तुम इंजेक्शन हाथ में ही लगा दो वहा कुछ ठीक नही रहेगा

डॉक्टर - अरे भाई डॉक्टर तुम हो या मै मुझे ही करने दो जो करना है वरना ले जाओ किसी और डॉक्टर के पास वो शायद सही से इलाज कर दे....

इसके बाद वसीम और अनीस कुछ नहीं बोल पाए और अब डॉक्टर इंजेक्शन तैयार करने में लगा था..........

डॉक्टर साहब इंजेक्शन लिए शाज़िया की तरफ बढ़ रहे इथे और अंततः उसके पास पहुच कर उन्होंने झटके से रजाई को हटाते हुए उससे कहा की बहु जरा उलटी दिशा में लेट जाओ मगर ये क्या शाज़िया अपने ससुर और दो जवान बेटो के सामने इस हालत में लेटी हुयी है और उन्होंने शाज़िया को अभी तक आधा ही देखा था मगर जितना भी देखा उनको समझते देर न लगी की शाज़िया ने इस वक़्त इस नायटी के अलावा अपने बदन पे कुछ नहीं डाला है और वो शायद मेरे आने से पहले पूरी नंगी थी और इसी वजह से इन् सब ने मुझे यहां से भगाया था ताकि इसको कुछ पहना सके.....

तभी जीशान और अनीस एक साथ बोल पड़ते है की क्या हुआ अंकल मम्मी को उलटी लिटा दिया है आप इंजेक्शन लगा दीजिये........कहा खो गये ...क्या हुआ .....

डॉक्टर साहब - कुछ नहीं बेटा तुम्हारी माँ की तबियत खराब है और वो इस तरह से लेटी हुयी है वो भी ऐसी कडाके की ठंड में .....उन्होंने सीधा वार किया ताकि कुछ बोलती बंद हो और मेरा काम निकले मगर जीशान बहुत चालाक था उसने भी फटाक से कहा की माँ को गैस की प्रॉब्लम भी हो रही थी इस्ल्सिए उन्होंने कपडे बदल लिए और रजाई में लेट गयी वैसे भी अभी मम्मी को कोई काम तो करना था नहीं उनकी सेवा के लिए हम दोनों है ना.....

पीछे से वसीम की आवाज आई की भाई अब इंजेक्शन दे भी दे कब से बेचारी उलटी घूमी पड़ी है....

ये सुन कर डॉक्टर साहब जैसे होश में आये और उन्होंने थोड़ी जल्दबाजी में शाज़िया की नायटी उठा दी जो की थोड़ी ज्यादा ही उठ गयी थी और अब हाल ये था की शाज़िया को गांड की दोनों भारी भरकम फाके कटे हुए तरबूजो की तरह नुमायिन्दा हो रही थी अब कमरे का माहोल काफी गर्म होने लगा था और वसीम के हथियार ने तो सर उठाना भी शुरू कर दिया था ....

डॉक्टर साहब की हरकत पे अनीस को बहुत तेज गुस्सा आया मगर तभी शाज़िया ने अनीस के हाथ को डर के मारे जोड़ से पकड़ लिया ...और अनीस का सारा ध्यान अपनी माँ की और चला गया ......

उधर जीशान इस मौके को एक अलग ही तरीके से सोच रहा था ......और उसने इस हाल की सारी तस्वीर अपने मोबाइल में कैद करनी शुरू कर दी .....इसके लिए उसने कुछ और ही सोच रखा था.....

डॉक्टर की इस हरकत पे वसीम कुछ क्षण बाद बोल पड़ा की यार ज़रा देख समझ कर करो ....कपडा कुछ ज्यादा ही नहीं उठा दिया है तुमने .....

डॉक्टर जो की शाज़िया की गांड पे रगड़ने के लिए रुई को स्पिरिट में भीगा रहा था वो वसीम की तरफ मुखातिब होते हुए बोला....तो तुम इस कमरे में अभी तक क्यों खड़े हो बाहर चले जाते ......डॉक्टर से क्या शर्माना और अभी तुम यहा खड़े रहो या बाहर जाओ वसीम ये तुम्हारे मन के ऊपर है मुझे मेरा काम करने दो अभी.....और वो शाज़िया की तरफ घूमता है जहा शाज़िया अपने आधी पीठ से ले कर पैर के तालुओ तक पूरी नंगी थी ......और अपना सर तकिये में घुसाए उलटी पड़ी थी.....उसने रुई को उसके चुतड़ों पे रगड़ने से पहले उसके पैरो को थोडा सा फैला दिया जिससे उसकी गुलाबी चूत के भी लब थोड़े खुल गये और उसकी कामुकता अब डॉक्टर साहब से नियंत्रण नहीं हो पा रही थी.......

इन् सब हरकतों से सभी वाकिफ हो रहे थे और साथ ही साथ ये भी जान गए थे की डॉक्टर अंकल को पूरा शक हो गया है मगर वे लोग भी डॉक्टर की अगली चाल के अनुसार ही चलने वाले थे ...इसलिए कोई कुछ नहीं बोल रहा था ......
 
तभी शाज़िया की चुतड़ों की दरार के पास डॉक्टर ने रुई को रगडा और रुई को इस तरह से रगड़ते हुए नीचे की ओर लाया की शाज़िया की चूत से डॉक्टर की उंगलिया स्पर्श कर गयी और शाज़िया की एक दबी सी सिसकी निकल गयी जिसे डॉक्टर ने सुना और मन ही मन बोला की साली कितनी गरम हो गयी है...काश ये मेरे हाथो में आ जाये पूरी की पूरी मसल दूंगा...और रुई का फांका फेकते हुए उन्होंने टेबल से सुई उठायी और शाज़िया की चूतड़ में घुसेड दिया

इस हमले के लिए शाज़िया तैयार तो थी मगर पूरी तरह नहीं और नतीजतन अनीस के हाथ वाला हाथ उसने और जोर से दबा दिया और दुसरा हाथ उसकी चूतड़ पे आने को हुआ और वो अपना हाथ पीछे घुमा दी जिससे वो अपने चूतड़ को सहला सके मगर डॉक्टर ने उसका हाथ झटक दिया और इंजेक्शन खाली करने के बाद बड़ी ही ताक़त से उसके चुतड़ों पे हाथ मलने लगे इन् कुछ सेकंडो में शाज़िया के चुतड़ों का पूरा मजा लिया डॉक्टर साहब ने .......

जीशान डॉक्टर की आँखों का पीछा करते हुए बोला की अंकल अब कब इंजेक्शन देना होगा आपको इनको..

तभी डॉक्टर जो की शाज़िया की अधनंगी जवानी को देख कर गरम हो रहा था वो निद्रा से बाहर आया और बोला की बेटा अभी दोपहर तक देख लो आराम हुआ तो शाम को दे देंगे वरना दोपहर में भी दूंगा एक इंजेक्शन....और हां बेटा तुम वो दवाईया ले आओ और इनको जल्दी से दो...ताकि इनको आराम मिले.....इतनी बाते करने तक शाज़िया की चुतड़ों पे डॉक्टर का ही हाथ था ...

तभी वसीम जो की कमरे में ही खड़ा था वो जल्दी से शाज़िया के पास आया और डॉक्टर का हाथ हटाते हुए उसके चुतड़ों पे उसने कब्जा जमा लिया जबकि शाज़िया की आँखों से आसुओ की धरा बह निकली थी......

तभी डॉक्टर को एक और मौका मिल गया वो बोला की अरे अभी तो कैसे कह रहे थे की कपडा कुछ ज्यादा ही उठ गया है और अभी आ गए बहु की इस हालत में भी उसके पास.....और हस दिया....इससे पहले की कोई कुछ बोलता डॉक्टर ही बोले की मै जानता हु की जब घर की औरते बीमार पड़ती है तो सबसे ज्यादा तकलीफ घर के मर्दों को ही होती है और इतना कह कर वो कमरे से निकल गए और जाते जाते कहते गये की बहु की हालत मुझसे छुपाना मत समय समय पे बताते रहना और एक सबसे जरुरी बात कपडे पहनने के लिए बहु को बोलो.........

डॉक्टर की बातो का द्विआर्थी मतलब सब समझ रहे थे...और शाज़िया भी बेचारी सुबूकते हुए अनीस के हाथ में अपना हाथ दिए चुतड मलवा रही थी ...और साथ ही साथ सब समझ भी रही थी........की डॉक्टर बाबु को शक बैठ गया है और जल्दी ही इसका कुछ करना पड़ेगा वरना बात बिगड़ सकती है

तभी जीशान ने कमरे के सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा की वो बाजार से दवाई ले कर आता है....और कुछ नाश्ता भी ले आएगा .......

मगर इन् सब में सबसे ज्यादा परेशान वसीम था क्युकी ये डॉक्टर किस प्रविर्ती का व्यक्ति था उसे भली भाँती पता था और अब उसे ये चिंता खाए जा रही थी की अगर ये बात उसके ग्रुप में फैली तो क्या होगा......

इधर रजनी अनीस को शादी के लिए कह रही थी और बेचारा अनीस को कोई मौका नहीं मिल रहा था जिससे वो रजनी की बात सभी को बता सके ...इधर वसीम बहु के पास ही बैठ गया और अनीस ये कहते हुए कमरे से बहर चला गया की माँ तुम आराम करो मै चाय बना के लाता हु....शाज़िया अभी तक सामान्य हो चुकी थी मगर उसका बदन अभी भी वैसे ही नंगा था ...और उसे ढकने की कोशिश ना तो वसीम ने की ना ही शाज़िया ने उसे ढका.....

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जीशान ने कमरे के सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा की वो बाजार से दवाई ले कर आता है....और कुछ नाश्ता भी ले आएगा .......

मगर इन् सब में सबसे ज्यादा परेशान वसीम था क्युकी ये डॉक्टर किस प्रविर्ती का व्यक्ति था उसे भली भाँती पता था और अब उसे ये चिंता खाए जा रही थी की अगर ये बात उसके ग्रुप में फैली तो क्या होगा......

इधर रजनी अनीस को शादी के लिए कह रही थी और बेचारा अनीस को कोई मौका नहीं मिल रहा था जिससे वो रजनी की बात सभी को बता सके ...इधर वसीम बहु के पास ही बैठ गया और अनीस ये कहते हुए कमरे से बहर चला गया की माँ तुम आराम करो मै चाय बना के लाता हु....शाज़िया अभी तक सामान्य हो चुकी थी मगर उसका बदन अभी भी वैसे ही नंगा था ...और उसे ढकने की कोशिश ना तो वसीम ने की ना ही शाज़िया ने उसे ढका.....

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अपने फ्लैट पे पहुच कर डॉक्टर साहब ये सोचने लगे की साला ये वसीम कितना बड़ा भोसड़ीवाला निकला कही ना कही इसके अपनी बहु से नाजायज़ सम्बन्ध है ...और मै इसका पता लगा कर रहूँगा और क्या पता इसी बहाने मुझे इस बिल्डिंग में ही अपनी सेटिंग भिडाने का मौका मिल जाए .....वो ये सोच कर ही उत्तेजित हो गया की शाज़िया जैसे गदराये जिस्म की मालकिन उसको भोगने को मिलेगी......मगर ये उसकी गलत फ़हमी थी ....क्युकी शाज़िया को जब उसके ससुर ने नहीं भोगा तो वो क्या भोगेगा.....

इधर शाज़िया के यहा सब वापिस आ गये थे और शाज़िया की आव भगत में लगे थे क्युकी उन् सब की जान की तबियत बिगड़ी हुयी थी और जीशान ने दवाईया ला कर शाज़िया को दी थी जिसको खाने के बाद शाज़िया ने सोने की इच्छा जताई और वो सो गयी बाकिओ ने भी यही उचित समझा और बाहर हॉल में बैठ गए और बैठते ही वसीम बोल पड़ा अपने मन की बात और ये सुनने के बाद अनीस बोला की दादू आप क्यों फिकर करते है हम सब मिल कर इससे निपटने का कोई न कोई तरीका जरुर निकाल लेंगे...शक तो उन्हें हो ही गया है ...मगर बात सिर्फ शक तक ही है.....

तभी जीशान ने अपने मोबाइल में की हुयी सारी रिकॉर्डिंग वाली बाते बता दी और दिखा भी दी ...और साथ ही साथ उसने ये भी समझा दिया की कैसे इस हालत से निपटना है.....उसकी बात सुन कर सभी निश्चिंत हो गए ....आखिर शाज़िया का सच्चा और पहला प्रेमी था तो जीशान ही न......

दोपहर को बहु की हालत जाचने के लिए वसीम कमरे में आया ज़हा शाज़िया उसी नायटी में सो रही थी .....वसीम ने उसको थोडा सा हिलाया और शाज़िया ने आध्खुली आखो से वसीम की तरफ देखा और वसीम बोला अब हालत कैसी है बहु बुखार में कुछ कमी आई और ऐसा कहते हुए वो शाज़िया के गर्दन पे हाथ फेरता है जो की बुखार से तप रहा था और तभी शाज़िया कहती है बाबूजी मेरा पूरा शारीर दुःख रहा है ...और जहा डॉक्टर ने इंजेक्शन दिया है वह पे बहुत तेज दर्द है और वो पलट जाती है और वसीम शाज़िया की नायटी को थोडा सा ऊपर की ओर उठा कर उसकी गांड को देखता है और उसे वो जगह दिखाती है जहा इंजेक्शन लगा था वो जगह थोड़ी सी लाल हो रखी थी.....वसीम उस जगह को हल्के से दबा देता है जिससे शाज़िया हल्के से चीख देती है......

वसीम - बहु तुम आराम करो और हां कपडे भी पहन लो डॉक्टर को बुलाना ही होगा और अबकी बार मै नहीं चाहता की वो तुम्हे वैसे देखे...तभी जीशान कमरे में आता है और कहता है माँ पहले तुम कपडे बदल लो उसके बाद दादू डॉक्टर को बुला लायेंगे.....

शाज़िया - बिस्तर से उतर कर खड़ी हो गयी और वसीम ने उसके बदन से नायटी उतार दी और उसे पूर्णतः नंगी कर दिया तभी जीशान ने वसीम की तरफ एक साडी और ब्लाउज पेटीकोट के साथ फेक देता है.....

शाज़िया - मुझे इतने कपडे क्यों दे रहा है केवल ब्लाउज और साडी से ही काम हो जायेगा ना...

अनीस - वाह मोरी मैया तुम्हे भी अब कम कपड़ो की आदत हो गयी है .....कहो तो ऐसे ही रहने देते है क्यों दादू.....

शाज़िया उसकी इस बात पे शर्मा जाती है और कहती है जिस माँ के तुम जैसे शैतान बच्चे हो उस माँ को ऐसी ऐसी आदते लगनी लाजमी है.....

वसीम - बहु अभी ऐसा कुछ भी नहीं करना है तुम अभी पुरे कपडे पहन के रहो.....डॉक्टर भाई को पहले से ही शक हो गया है और वैसे भी मैं नहीं चाहता की कोई रायता फैले...वो भी तुम्हे ले कर.....और इस कमीने की नियत सही नहीं है....और ये मुझसे ज्यादा अच्छी तरह कोई नहीं जानता.....

अभी तक शाज़िया नंग धडंग खड़ी थी.....उसे ठंड महसूस हुयी तो वो बोल पड़ी.......

शाज़िया - अच्छा भाई अब मुझे मेरे कपडे दो मैं पहन लू वैसे भी मेरी सुई वाली जगह में काफी दर्द हो रहा है और मुझसे ऐसे खड़े नहीं रहा जा रहा....

जीशान फटाक से शाज़िया के पास आता है और उसे ब्लाउज पहनाने लगता है और वसीम उसे पेटीकोट .....उन् दोनों के बाद अनीस शाज़िया को साडी पहनाता है...और वो वापिस से कम्बल में घुस जाती है....जबकि जीशान और अनीस खाने का इन्तेजाम के लिए रसोई में चले जाते है और वसीम डॉक्टर को बुलाने के लिए जाता है...कमरे में किसी को ना देख कर शाज़िया जीशान को कहती है की ऐसे कैसे मुझे सब छोड़ कर चले गए हो मेरी कोई फिकर ही नहीं करता है ....तभी जीशान रसोई से कहता है कैसी बाते करती ही माँ ...तुम हम सब की जान हो ....रुको मैं आया और वो शाज़िया के पास आता है....जबकि अनीस कुछ देर बाद शाज़िया क के लिए गरमा गरम सूप ले कर आता है .....

अभी शाज़िया उसे पि ही रही होती है की कमरे में वसीम डॉक्टर के साथ दाखिल होता है....

डॉक्टर - कैसी हो बहु तबियत में कोई सुधार आया.....

शाज़िया - कुछ नहीं बोलती...

अनीस - जी नहीं डॉक्टर साहब कहा कोई सुधार आया माँ का बुखार तो कम होने का नाम ही नाह ले रहा है....आपके इंजेक्शन से भी कोई असर नहीं हुआ ...अब ऐसी कोई दवा दीजिए की हमारी माँ ठीक हो जाए....

जीशान - जी अंकल हमे हमारी माँ ऐसे बीमार सी अच्छी नहीं लगती....

डॉक्टर - हां भाई मै तो अपनी पूरी कोशिश कर ही रहा हु....वो शाज़िया के पास आता है और उसकी कटोरी को ले कर साइड में रख कर उसकी हथेली को पकड कर कुछ पलो के बाद कहता है मुझे नहीं लगता की बुखार में कोई कमी आई है..खैर अभी मै चेक किये लेता हु....और वो तुरत शाज़िया को कहता है बहु ज़रा अपने ब्लाउज को ढीला कर दो मुझे थर्मामीटर लगाना है तुम्हारे काख में....अब शाज़िया कैसे करती मगर करना तो था ही.....तभी डॉक्टर हालात की चुटकी लेते हुए वसीम को कहता है की अरे भाई क्या देख रहा है बहु की मदद कर.....

वसीम - अरे पगले मैं ऐसे कैसे बहु को हाथ लगा दू....कुछ भी बोलता है....

डॉक्टर भी कम तेज नहीं था वो तुरत बोला अरे इसमें शर्माने की क्या बात है जब तू बहु के कुल्हे सहला कर उसका दर्द कम कर सकता है तो ब्लाउज के कुछ बटन्स नहीं खोल सकता....और हलके से हस देता है...वसीम बिचारा बुरी तरह झेप जाता है मगर वो आगे नहीं बढ़ता है...

जीशान और अनीस अपनी अपनी जगह पे खड़े रहते है क्युकी अभी उनका कोई भी कदम डॉक्टर के शक को यकीं में परिवर्तित कर सकता था....

डॉक्टर किसी को ना बढ़ता देख.....अरे भाई अगर तुम लोग नहीं करोगे तो मै ही कर देता हु...और अपना हाथ आगे बढाता है...तभी शाज़िया उसके हाथ को रोकते हुए कहती है की रुकिये रुकिये मै ही खोलती हु......

ऐसे कह कर वो अपने साडी के पल्लू को नीचे गिरा देती है जिससे उसके भारी भरकम चुचियो की दरार दिखने लगती है और फिर वो अपने ब्लाउज के दो बटन्स खोल देती है....ये देख कर डॉक्टर तुरत बोला बहु एक और....शाज़िया अब असमंजस में पड़ गयी थी क्युकी एक और बटन खोलने का मतलब था की उसकी एक चूची का निप्पल दिखने लगता और डॉक्टर तो यही चाह रहा था...खैर अब जब उन्होंने कह ही दिया था तो करना तो था ही सो उसने अपना ब्लाउज का एक और बटन खोल दिया नतीजतन उसकी एक चूची का आधे से ज्यादा हिस्सा दिखने लगा और डॉक्टर के लंड ने झटके खाना शुरू कर दिया....

शाज़िया अपने बिस्त्तर पे बैठी थी.....उसका ब्लाउज लटका हुआ दिखाई पड़ रहा था चुचियो के भार के कारण और इस कारण उसकी दोनों की दोनों चुचियो के निप्पल दिखाई पड रहे थे तभी डॉक्टर ने उसके एक चूची से हाथ रगड़ते हुए उसके काख में थर्मामीटर घुसाया और जब वो हाथ बाहर ला रहा था तो शाज़िया की चूची से वो कुछ ज्यादा ही रगड़ दिया जिस कारण शाज़िया की एक चूची पूरी की पूरी बाहर लटक गयी...अपनी चूची पे हुए इस हमले से शाज़िया थोड़ी उत्तेजित महुसू कर रही थी और उसका निप्पल फूलने लगा था और अब जब उसकी एक चूची पूरी की पूरी लटक गयी तो वो घबरा सी गयी मगर फिर भी उसने चूची को अन्दर नहीं किया और इधर वसीम कुछ भी करने में संकोचित महसूस कर रहा था और साथ ही साथ ये भी सोच सोच कर खुद को कोस रहा था की उसने बहु को साडी क्यों पहनाई....
 
कमोबेश यही हाल अनीस और जीशान का भी था....तभी अनीस खुद को रोक नहीं पाया और उसने जीशान को हल्के से धक्का देते हुए बोला की वो कुछ करे वरना वो इस डॉक्टर को मार बैठेगा....

जीशान - अंकल आप भी ना कैसे करते है....माँ तुम ब्लाउज सही कर लो अपना...अंकल जब थर्मामीटर का वक़्त पूरा हो जायेगा तो आप नहीं मा खुद निकाल कर दे देगी....शाज़िया अपनी चूची को अंदर करने लगी मगर उसे हाथ हिलाने में बन नहीं रहा था

तभी डॉक्टर बोला की अरे बहु रहने दो कोई दिक्कत नहीं है कुछ ही मिनटों की बात है...फिर पूरा का पूरा ब्लाउज पहन लेना न....और हँसते हुए कहता है की ये दोनों ने तो तुम्हारे इनको कई बार देखा ही है....उसका इशारा जीशान और अनीस की तरफ था.....और रही बात वसीम की तो ये तुम्हारे पिता समान है इनसे कैसा घबराना या शर्माना और जबरदस्ती करने से थर्मामीटर अगर टूट गया तो वो तुम्हे लग जाएगी और फिर ब्लाउज उतार कर ही रहना पडेगा....उससे बेहतर तो यही है.....

डॉक्टर के इस तर्क पे कोई कुछ नहीं बोल पाया.....शाज़िया की लटकी हुयी चूची को डॉक्टर ने पूरी तरह मजे ले ले कर देखा और शाज़िया को ये आभास उत्तेजना से परिपूर्ण कर रहा था जिस कारण उसकी चुचियो में तनाव आने लगा था......

.....

खैर कुछ देर बाद शाज़िया की तरफ डॉक्टर बाबु बढे और उसकी चूची का दुबारा से मर्दन करते हुए वो उसके काख से थर्मामीटर निकाले और देखने लगे इस बीच शाज़िया ने अपनी लटकती चूची को ब्लाउज के अंदर कर लिया था मगर बटन्स नहीं लगाए थे ...और ना ही अपना पल्लू सही किया था...थर्मामीटर देख कर डॉक्टर बोला की बहु के बुखार में कोई कमी नहीं आई है उलटे बुखार दो डिग्री बढ़ ही गया है......इनकी दवाईया जो मैंने लिखी थी वो समय पे देते रहना और उसमें कुछ दवाईया और भी जोड़ देता हु वो भी ले आना और अभी मिया एक और इंजेक्शन दे देता हु अगला इंजेक्शन रात को देने आऊंगा .....इतना कह कर वो शाज़िया से बोला...बहु लेट जाओ और साडी कमर तक ऊपर चढ़ा लो....

तभी वसीम बोला की यार इंजेक्शन जरुरी है क्या...वो क्या है न की इससे बहु की तकलीफ बढ़ जाती है ....इसका वैकल्पिक इलाज नहीं है क्या ....

डॉक्टर - मेरे भाई अगर होता तो मै वो ना देता..क्यों मै इसको इतनी तकलीफ में डालता....मगर भाई समझा कर इंजेक्शन से जल्दी आराम मिलता है....और बाकी तो दवाईया मैंने लिख ही दी है.....

जीशान - माँ लेट जाओ इंजेक्शन ले लो.....कुछ भी नहीं हगा तुरंत हो जायेगा यु चुटकी बजाते....

शाज़िया - अंकल प्लीज कोई और दवाई लिख दीजिए मै सब खा लुंगी पर ये इंजेक्शन नहीं...बहुत दर्द होता है...

डॉक्टर - अरे बहु क्या बच्चो जैसी हरकते करती हो ...चलो लेटो आराम से और तुम्हे तो कुछ महसूस भी नहीं होता होगा.....उसका इशारा साफ़ तौर पे उसके भारी भरकम चुतड़ों की तरफ था....अंत में शाज़िया को लेटना ही पडा और अबकी बार वसीम ने भी डॉक्टर की बात को साथ में लिया .......जब शाज़िया लेटने लगी तो डॉक्टर बोला की अरे बहु अपनी साडी कमर तक उठाओगी या इसे उतारोगी...मेरे हिसाब से उतारना ही सही रहेगा और इससे देने में भी आसानी होगी.....

जीशान की तरफ देखते हुए शाज़िया..उससे इशारों में पूछती है और जीशान हां कहता है...तब शाज़िया उठने लगती है तो वसीम जीशान से कहता है कि बेटा जाओ अपनी माँ की मदद करो.....उसे कमजोरी सी आ गई है.....जीशान और अनीस दोनों आगे आते है......जबकि डॉक्टर वही साइड में खड़ा हो जाता है.....

शाज़िया को सहारा दे कर जीशान खड़ी करता है और अनीस उसकी साडी की गाँठ जो की उसने पेटीकोट में फसा रखी थी वो निकाल देता है....और अगले कुछ पलो में शाज़िया अपने ब्लाउज के तीन बटन्स खुले और अधनंगी चुचियो को लिए केवल एक पेटीकोट में खड़ी थी....

तभी शाज़िया को वापिस से बिस्तर पे चढाने लगते है तो डॉक्टर कहता है की बेटा पेटीकोट का नाडा भी ढीला कर लेना......

शाज़िया खुद से पेटीकोट का नाडा ढीला कर लेती है...और अपने पेटीकोट की डोरियो को अप्पने हाथो में थामे वो वापिस से बिस्तर पे लेट जाती है...लेकिन सीधी.....जब शाज़िया लेटी तो उसने अपनी डोरियो को छोड़ दिया था जिससे शाज़िया का पेटीकोट हल्का सा खिसक गया था और उसकी चूत का उभरा हुआ हिस्सा दिखने लगा था...जिसे अनीस ने देखा और जीशान ने भी मगर जीशान के पहले अनीस ने आगे बढ़ कर शाज़िया के पेटीकोट को सही कर दिया..और वापिस अपनी जगह पे आ कर खडा हो गया...और जीशान वही बिस्तर के किनारे शाज़िया के साथ लग कर खड़ा हो गया..और शाज़िया ने उसका हाथ पकड़ लिया...

डॉक्टर ने आगे बढ़ कर शाज़िया को बोला बेटा सीधे क्यों लेट गयी आगे लेने का इरादा है क्या.....मगर बेटा बहुत तकलीफ होगी आगे...और हस देता है...

अनीस को बहुत गुस्सा आता है और वो बोल पड़ता है ये क्या बोल रहे है अंकल आप.....

डॉक्टर उसकी तेज आवाज से थोडा घबरा गया मगर वो तुरत ही माहोल को हल्का करते हुए बोला की बेटा मैंने तो तुम्हारी माँ को थोड़ा हसाने का प्रयास किया....don't be serious about it...i know my limitations..as i am a doctor...this much is normal among paitents..son..be calm....

ऐसे बात करते देख अनीस को लगा की उसका ये व्यवहार शायद गलत था....तभी डॉक्टर शाज़िया को बोलता है की बेटा पलट जाओ....और वो शाज़िया को पलटने में मदद करता है और इस बार किसी के मन में कोई भी बात नहीं आई मगर डॉक्टर तो अपना काम करने में लगा था ..उसने शाज़िया को पलटने के बहाने से उसके बदन को अच्छे से छुआ...सहलाया और नापा भी और साथ ही साथ शाज़िया को इस तरह से पलटा की पलटते वक़्त उसको शाज़िया की चूत की दरार की शुरुवाती भाग पर नजर पड़ गयी और शाज़िया की एक चूची ब्लाउज से छलक कर बाहर की ओर आ गयी .......

अब शाज़िया उलटी हो चुकी थी और डॉक्टर ने उसकी पेटीकोट को नीचे खिसकाना शुरू किया और धीरे धीरे शाज़िया के गोरे गोरे चूतड़ कमरे की दुधिया रौशनी में चमक उठे....मगर एक जगह पे आ कर उसका पेटीकोट जांघो के नीचे अटक गया.....डॉक्टर ने शाज़िया को बोला की बहु ज़रा उठो ...और शाज़िया उठी और डॉक्टर ने फटाफट उसकी पेटीकोट को घुटनों तक खीच दिया....और अब शाज़िया अपनी एक चूची को बिस्तर पे बाहर की ओर डॉक्टर की नजरो की सामने किये हुए अपने चुतड़ों को नंगा किये घुटनों तक लेटी थी......

डॉक्टर साहब ऊपर आते वक़्त शाज़िया की एक चूतड़ को सहलाते हुए पूछे की बहु उस वक़्त से दर्द कम है ना ......शाज़िया कुछ नहीं बोल पायी बस अपनी गर्दन हल्के से ना में हिला दी.....

अब डॉक्टर ने अपने बैग से इंजेक्शन तैयार करना शुरू किया जबतक शाज़िया वैसे ही नंगी लेटी रही....इंजेक्शन तैयार करने के बाद ...डॉक्टर ने शाज़िया के चुतड़ों को सहलाया और उसके चुतड़ों की दरार के एकदम पास रुई को रगडा और उसके चुतड़ों पे इंजेक्शन को सटाते हुए कहा बहु आराम से रहना कुछ महसूस नहीं होगा...बिलकुल आराम से हो जायेगा और इतना कहते हुए उसने शाज़िया की चुतड़ों में इंजेक्शन घुसेड दिया इस बार शाज़िया सहन नहीं कर पायी उसने जीशान के हाथो को भी बहुत जोर से दबा दिया और साथ ही साथ चीख भी पड़ी.....और इस बार शाज़िया को इंजेक्शन देने में डॉक्टर ने कुछ ज्यादा ही वक़्त लगाया ..इंजेक्शन देने के बाद डॉक्टर ने शाज़िया के चुतड़ों में रुई को दबाया और अनीस ने फटाक से बढ़ कर उस फाक को रगड़ना चालु किया ..
 
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इधर डॉक्टर ने शाज़िया को कहा की बहु क्या तुम भी कैसे चीखी ...और हस देता है और अब वो इंजेक्शन नीचे रखता हुआ कहता है की मै चलता हु अब इसके बुखार में कमी आएगी .....चिंता मत करो ठीक हो जाएगी.....और कहते हुए निकल गया...जबकि बाकी तीनो मर्द दर्द में अधनन्गी पड़ी हुयी शाज़िया को संभाल रहे थे.........

दोपहर को जब शाज़िया को इंजेक्शन दिया गया था उसका असर भी दिखा और शाम तक शाज़िया का बुखार उतर चुका था मगर उसके बदन में कमजोरी अभी भी बरकरार थी.......दोपहर के बाद वो उठी और पास में ही जीशान लेटा हुआ था और बाकी दोनों भी वही थे...... वो अभी भी अधनंगी हालत में थी डॉक्टर के जाने के बाद उन्होंने शाज़िया की बहुत सेवा की ताकि उसे आराम मिले ........और कुछ ही देर में शाज़िया नींद की आगोश में समा गयी थी...

अभी शाम के 7:30 बज रहे थे....शाज़िया कराहते हुए उठती है और उसकी कराह सुन कर बाकी भी होश में आ जाते है और सब एक साथ पूछते है की अब तबियत कैसी है .....

शाज़िया - मुझे लगता है बुखार उतर गया है मगर मुझे काफी कमजोरी महसूस हो रही है और भूख भी बहुत जोरो की लगी है ....

जीशान - माँ क्या खाना पसंद करोगी अभी लाये देता हु....तुम बस हुकुम करो.....

शाज़िया - मुझे अभी एक कप चाय और कुछ हल्का ही दो खाने को फिर थोड़ी देर बाद देखते है क्या मंगवाना है......

वसीम शाज़िया के करीब आता है और उसकी बाह को पकड़ कर देखता है और कहता है की बहु तुम्हारा बुखार उतर गया है ......अब थोड़ा सा आराम कर लो ठीक हो जाओगी कल तक....

अनीस - दादू क्या अभी भी उन् डॉक्टर अंकल को बुलाने की जरुरत है ....

वसीम - देखते है बेटा फिलहाल तो कोई जरुरत नहीं है...बहु तुम आराम करो मैं अभी आता हु उसके यहाँ से.....

वसीम कही जाता इससे पहले शाज़िया बोली...बाबूजी कम से कम मुझे सही से कपडे तो पहना दीजिये फिर कही जाईएगा.........और वो अपने बदन को सब के सामने अधनंगी हालत में उजागर कर देती है..जहा उसका चुतड़ों वाला हिस्सा और उसके ब्लाउज से लटकती एक चूची सब के सामने हाजिर थी.....

जीशान ने तुरत माँ को अपने आलिंगन में भर कर कहा माँ तुम जितना इन् अदाओं से हमे रिझाती हो उतना ही हमे तुमपे प्यार आता है......

शाज़िया हल्के से मुस्कुरा कर कहती है की सब तेरा ही किया धरा है......

जीशान और अनीस साथ में वसीम भी हस देता है .......

तभी शाज़िया कहती है की उसे पिशाब करने जाना है.....

अनीस चलो माँ मै ले चलता हु...

तभी वसीम कहता है अनीस बेटे तुम रहने दो मै ले जाता हु इसे ...

और शाज़िया जो बिस्तर से उतर कर खड़ी होती है और तभी उसका पेटीकोट पूरा का पूरा नीचे गिर जाता है अब शाज़िया लगभग नंगी थी क्युकी उसका ब्लाउज भी अस्तव्यस्त हालत में था और तो और उसकी एक चूची पहले से ही लटक रही थी.....वसीम उसे इसी हालत में बाथरूम ले जाता है जबकि अनीस उसके बिस्तर और कपड़ो को सही से करने लगता है जबकि जीशान किचन में सब के लिए चाय बनाने जाता है.....

...

....अभी वसीम शाज़िया को बाथरूम में ले कर गया ही था की दरवाजे पे दस्तक होती है जिसे अनीस और जीशान सुनते है.....और जीशान धडाक से दरवाजा खोलने पहुच जाता है.....दरवाजे के उस पार डॉक्टर खड़ा था......अब डॉक्टर हॉल में दाखिल हो चुका था

...और तभी शाज़िया को लगभग नंगी हालत में लिए उसे सहारा दे कर कमरे में ले जाते हुए वसीम हॉल में दाखिल होता है......

हॉल में अधनंगी शाज़िया वसीम के बाहों का सहारा लिए खड़ी डॉक्टर की तरफ भौचक्की सी देख रही थी........कमोबेश यही हाल अनीस और जीशान का भी था और वसीम को तो जैसे काटो तो खून नहीं .........उसे सबसे ज्यादा जिस बात डर था वहीं हुआ था......

कमरे की खामोशी को डॉक्टर ने तोड़ा और बोला.......

डॉक्टर - घबराने की कोई बात नहीं है वसीम भाई मुझे जिस बात का शक था वो अभी अभी यकीन मे बदल गया ......

और इतना बोल कर वो कमरे में दाखिल हो गया.....

उसके पीछे पीछे बाकी चारों भी कमरे में आए शाज़िया अभी भी उसी हाल मे थी ब्लाउज के बटन्स खुले हुए और नीचे से पूर्ण रूप से नंगी अपनी चिकनी चूत लिए उन सब मर्दों के बीच खड़ी थी......

सब के कमरे में पहुंचते ही डॉक्टर बोला की वसीम घबराओ मत मै ये बात बाहर नहीं ले जाऊंगा अब जो मजे तुमलोग शाज़िया बहू के लेते हो वहीं जरा हमें भी चखा दो क्युकी शाज़िया बहू जैसी माल बहुत नसीब से मिलती है......और अब मना कर के मेरा दिल मत तोड़ना .....

सब बात सुन कर जीशान को गुस्सा तो बहुत आ रहा था मगर मामले की गंभीरता को वो भली भांति समझ रहा था इसलिए वो चुप चाप खड़ा था मगर अब उसके सब्र का बांध टूट रहा था और अंततः वो बोल पड़ा.....

जीशान - अंकल आप जो समझ रहे है वैसा कुछ भी नहीं है .....

जीशान की बात को बीच मे काटते हुए डॉक्टर बोला

मै बिल्कुल सही समझ रहा हूं बेटा और अब बात को घुमाने की कोशिश करना बेकार है.....शाज़िया अभी तक नंगी ही खड़ी थी वसीम उसके पास आया और उसे उसका पेटीकोट देते हुए वो डॉक्टर की बातो को रोकते हुए बोला कि यार देख मेरा बहू से कोई संबंध नहीं है आज तक मै तो बस उसके सहायता कर रहा था उसकी बीमारी में उसका ख्याल रख रहा था और यही काम ये दोनों बच्चे भी कर रहे थे.....और बहू इस हालत में इसलिए है क्योंकि उसको तुम्हारे दिए इंजेक्शन से दर्द हो रहा था

डॉक्टर मुस्कुराता हुआ खड़ा हुआ और शाज़िया को अपने तरफ खींच कर उसे बाहों में भरते हुए उसके इंजेक्शन लिए हुए चूतड़ों पर रख कर मसल दिया शाज़िया और बाकी सब अचानक से हुए इस हमले से सब सकते में थे और शाज़िया तो मारे दर्द के उछल पड़ी और उसकी जोरदार चीख निकल गई इतने में जीशान ने आव देखा ना ताव एक घुसा जड़ दिया डॉक्टर के मुंह पे ......

अगले ही पल डॉक्टर बिस्तर पे था और सब जीशान के इस कदम से भौचक्के थे.....
 
कुछ देर के बाद डॉक्टर को होश आता है और उसके सामने शाज़िया जीशान वसीम और अनीस तीनो बैठे थे और वसीम के चेहरे से साफ़ साफ़ पता चल रहा था की उसकी फटी पड़ी है....हो भी क्यों न आखिर जीशान ने डॉक्टर को इतने जोर से घुसा मारा था की वो बेहोश हो गया था और साथ ही साथ उसके नाक से खून भी बहने लगा था तक़रीबन आधे घंटे बाद डॉक्टर होश में आया और उसको होश में आता दख जीशान फिर से उसके सामने आ खड़ा हुआ जिसको देख डॉक्टर कुछ भी बोल नहीं पाया हालाकि वो उठा था की अभी ग़दर मचा देगा मगर जीशान का घुसा उसे उसका चेहरा देखते ही याद आ गया और वो शांत बैठ गया.......

जीशान - देखिये अंकल हम आपको कुछ नहीं करते मगर आपकी हिम्मत कैसे हुयी मेरी माँ को इस तरह से छूने की...और कुछ भी बोलने से पहले मेरी बात आप ध्यान से सुनिए उसके बाद आप जो भी करो हमे कोई फर्क नहीं पड़ेगा ज्यादा से ज्यादा हमे ये अपार्टमेंट छोड़ कर जाना होगा मगर उसके बाद तो मै आपका वो हाल करूँगा की आप सोच भी नहीं सकते आपकी नर्स के साथ जो सम्बन्ध है और जितनी औरतो को आपने भोग लगाया है वो सब हमे पता है तो ज्यादा शातिर बनने की कोई कोशिश मत करना.....

डॉक्टर को अपनी नर्स वाली बात सुन कर झटका लगा था इसलिए वो अभी कुछ नहीं बोला ....

जीशान - अब आप जा सकते है और बेहतर होगा की इस बारे में आगे कोई चर्चा ना ही हो.......

डॉक्टर - बेटा मुझे गलत मत समझना मै बस थोडा बहक गया था.......लेकिन तुम्हारी माँ है ही ऐसी की ...

इससे आगे कुछ बोलता की जीशान ने उसे हाथ दिखा कर रोकते हुए कहा ....बस आप जा सकते है ..

डॉक्टर - तुम्हारी माँ का इलाज ...

जीशान - वो हम बाहर से करा लेंगे आप ज्यादा न सोचिए...

शाज़िया जो अभी अपने पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी उसको डॉक्टर ने एक नजर देखा और वहां से अपने नाक से बहे खून को पोछते हुए अपना बैग उठा कर वहा से निकल गया इस दरमियाँ वसीम और अनीस कुछ नहीं बोले मगर जीशान डॉक्टर के जाने के बाद दरवाजा बंद कर के आया और कमरे में आते ही शाज़िया उससे लिपट कर रोने लगी

जीशान - माँ कुछ नहीं हुआ है बेफिजूल में आसू मत बहाओ हम है न ....

अनीस - हां भाई तु ही तो है वरना डॉक्टर अंकल के सामने मेरा दिमाग एकदम सुन्न पड़ गया था ....

वसीम - आखिर तूने शाज़िया बहु के सच्चे आशिक होने का प्रमाण दे ही दिया...

शाज़िया जो अभी तक रो रही थी वो मुस्कुराते हुए भरी आँखों से वसीम को देखि और शर्मा सी गयी......

जीशान - चलो चलो अब ज्यादा नहीं भूख भी लगी है और माँ को बाहर किसी अच्छे से डॉक्टर से दिखा आते है....

शाज़िया - मुझे अब कुछ नहीं हुआ है मेरा बुखार जो बाबूजी उस डॉक्टर के कहने पे लाये थे उसी से ठीक हो जाउंगी ......

वसीम - हां बहु ठीक कह रही है ..

अनीस - ठीक है फिर मै और जीशान बाजार से खाने का कुछ सामान और एक थर्मामीटर ले आते है.....दादू जान आप माँ का ख्याल रखियेगा हम अभी आते है ....

जीशान- आते है माँ ज्यादा सोचो मत एक बुरा सपना समझ के भूल जाओ .......

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इधर डॉक्टर अपने फ्लैट में बैठा था और अपने नाक की मरहम पट्टी कर रहा था और साथ ही साथ ये भी सोच रहा था की वो शाज़िया को चोद के ही रहेगा चाहे जैसे भी हो ...

इधर अनीस और जीशान अपार्टमेंट के नीचे थे सड़क पे निकले ही थे की रजनी सामने से आती दिखी और रजनी काफी परेशान सी लग रही थी ...हो भी क्यों न उसकी बात जो अनीस से नहीं हुयी थी ना ही वो ऑफिस आया था ......

रजनी सीधे सीधे अनीस के सामने आ खड़ी हुयी और उसने जीशान की तरफ बिना ध्यान दिए अनीस के गले लग गयी ...इस कदम से जीशान और अनीस शॉक में थे क्युकी रजनी का ऐसे अचानक मिलना और गले लगना दोनों भाइयो के गले नहीं उतर रहा था.....

अनीस से अलग होते हुए रजनी ने बोलना चालू किया....

रजनी - कहाँ हो तुम पिछले दो दिनों से...हां ....पता भी है की मै कितनी परेशान हु तुम्हारे लिए न कोई फोने न कोई मेसेज न कुछ.... और वो रोने लगती है सड़क पे इस तरह से एक लड़की रोने लगे तो लोग देखने लग जाते है ...वही हाल यहाँ भी था....

तभी जीशान बोलता है की भाई आप वापिस घर जाओ मै हो आता हु बाजार से .......इधर जीशान बाजार निकल लेता है और अनीस रजनी को ले कर अपार्टमेंट ना जा कर पास के ही एक पार्क में ले जाता है....पुरे रास्ते रजनी कुछ नहीं बोलती है बस अनीस का हाथ पकडे रहती है......

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इधर वसीम शाज़िया से कहता है की बहु लगता है तुम्हारा बुखार उतरा हुआ है तभी तुम्हे पसीने आ रहे है...ऐसा करो मुह हाथ धो लो और कपडे बदल लो लाओ मै बदल देता हु...और ऐसा कह कर वो बिस्तर पे बैठी हुयी शाज़िया के पास जाता है और उसे उठा कर फर्श पे खड़ा करता है....

शाज़िया अभी तक ब्लाउज और पेटीकोट में थी .....शाज़िया कहती है बाबूजी आप भी मेरा कितना ख्याल करते है और मैं इस बात के लिए शर्मिंदा हु की मैं आपको वो सब के होते हुए भी वो सुख नहीं दे पाती जो आप मुझसे उम्मीद रखते है...और उसका गला रुवासी हो जाता है

इतने समय में वसीम शाज़िया का पेटीकोट खोल चुका था......और वो नीचे से नंगी हो जाती है.....वसीम अभी भी कुछ नहीं बोल रहा था मगर उसका साँप धोती में सर उठा चूका था और शाज़िया उस तम्बू को देख भी चुकी थी ......और अब वसीम शाज़िया का ब्लाउज खोलने लगता है ....धीरे धीरे वो शाज़िया का ब्लाउज उसके बदन से भी अलग कर देता है.....और वो पूर्ण रूप से नंगी हो जाती है......

शाज़िया कहती है बाबूजी आप भले ही मेरी बातो का कोई जवाब ना दे मगर अब मैंने आपके लिए भी कुछ सोचा है......वक़्त आने पे बताउंगी.........वसीम उसकी इस बात से थोडा खुश जरुर था मगर अभी वो ज्यादा खुश हो कर अपने आप को दुःख नहीं पहुचाना चाहता था इसलिए उसने अपने भावनाओं पे काबू रखा और शाज़िया को बोला की बहु अगर कहो तो तुम्हारे पीछे गरम पानी से सेक दू....

शाज़िया बिना कुछ बोले उलटी लेट जाती है और साथ ही साथ अपने चुतड़ों को थोडा फैला भी लेती है जिससे उसका भूरा छेद नजर आने लगता है और वसीम बिचारा ये नजारा देख कर गला सूखने लगता है उसका और वो अपनी धोती उतार देता है .....और चड्डी में आ जाता है.....शाज़िया बोलती है बाबूजी जरा आराम आराम से सेकियेगा....वसीम थर्मस में से गरम पानी एक कटोरे में उडेलता है आर एक कपडे से उसके चुतड़ों पे सकने लगता है...साथ ही साथ उसके भूरे छेद पे भी जिससे शाज़िया की हलकी हलकी आह निकल रही थी और वसीम का तम्बू और भी बड़ा होटा जा रहा था....

कुछ समय बाद शाज़िया बोली आआह्ह्ह बाबूजी बस अब आगे भी जरा सेक दीजिये... ऐसा बोल कर वो घूम जाती है और वसीम के सामने उसकी चिकनी चूत उभर आती है और वसीम शाज़िया की टांगो को एक दुसरे से अलग कर देता है और उसकी चूत की गुलाबी भाग को वो एक बार के लिए देख कर और ज्यादा गरम हो जाता है ठीक यही हाल शाज़िया का भी था उसकी भी चूत बह रही थी .........और उसका बहता हुआ रस साफ़ साफ़ वसीम देख पा रहा था .......अब उसने कपडे और पानी को अलग रखा और बिस्तर पे चढ़ कर उसकी खुली हुयी चूत पे अपना मुह लगा देता है....और शाज़िया की जोर की सिसकारी निकल जाती है क्युकी उसे अभी दोहरा दर्द और मजा मिल रहा था...एक तो इंजेक्शन का दर्द और वसीम की चूत चटाई का मजा....

तभी वसीम के मन में ना जाने क्या आता है वो शाज़िया की चूत के अंदरूनी हिस्सों को मुह में भर कर चुभलाने लगता है जिससे शाज़िया को अधिक दर्द और अत्यधिक मजा आने लगता है और इसी क्रम में उसके टाँगे आपस में बंद होने लगती है.....लेकिन वसीम अपनी पकड़ बनाये रखता है और वो उसकी चूत को लगातार चाटे जा रहा था और इससे शाज़िया अब झड़ने के करीब आ रही थी और वसीम के लंड में अब दर्द होने लगा था और अगले ही पल शाज़िया झड जाती है और वसीम अब बिस्तर से उतर कर अपनी धोती उठाने लगता है क्योकि वो जानता था इससे आगे वो कुछ कर नहीं सकता था.....ना ही शाज़िया इससे आगे बढती....

उधर शाज़िया बेचारे वसीम को धोती पहनता देख रही थी मगर वो चाह कर भी कुछ नहीं बोल पायी ....धोती पहनने के बाद वसीम शाज़िया से मुखातिब होता हुआ बोला की बहु बच्चे आते होंगे चलो मुह हाथ धो लो और कपडे पहन लो ....शाज़िया नंगी उठती है और उसकी लटकती हुयी चुचियो को देख कर वसीम के लंड में दर्द होने लगता है क्युकी उसका लंड अभी भी खड़ा था.....

शाज़िया कहती है की बाबूजी अगर आप कहे तो............उसके मन में ये बात आई थी की आप कहे तो मेरी चूत में अपना लंड डाल कर खुद को शांत कर ले मगर वो बात दबा ली.......बस इतना ही बोल कर वो रुक गयी.......

उसके मन की बात वसीम भी थोड़ी थोड़ी समझ रहा था मगर वो देखना चाहता था की बहु के मन में आखिर है क्या ......वसीम शाज़िया को कहता है बहु वो सब छोड़ो कपडे पहनने है चलो जल्दी से हाथ मुह धो लो.....ऐसा कहते ही शाज़िया नंगी ही बाथरूम में चली जाती है...और इधर वसीम अपने लंड को बाहर निकाल कर मुठीयाने लगता है.....क्युकी उसका लंड बहुत दर्द कर रहा था

इधर वसीम मुठ मारने में लगा था तभी शाज़िया नंगी बाहर आती है और वसीम को देख कर हस देती है...तभी वसीम का माल निकलने को होता है और वो जोर से आवाज निकालता है और शाज़िया दौड़ कर उसके लंड को मुह में ले लेती है और अन्दर बाहर करने लगती है और अगले ही पल शाज़िया के मुह में वसीम का माल बहने लगता है और वसीम को अत्यधिक आनंद आता है......

शाज़िया उठती है और वसीम से कहती है की ये देखिये बाबूजी आपने मेरे चेहरे को फिर से गंदा कर दिया अब दुबारा मुझे मुँह धोना पड़ेगा....और ये कहते हुए वो उठ कर जल्दी से बाथरूम में जाती है और मुह धो कर बाहर आती है तब तक वसीम भी अपने सही हाल में आ चूका था और शाज़िया को अब वो कपडे पहनाने में मदद करता है.....

इधर पार्क में अनीस ने दो दिनों में हुए काण्ड का ब्यौरा रजनी को सूना डाला डॉक्टर वाला ब्यौरा उसने थोडा बदल कर सुनाया ....ये सब जानने के बाद् रजनी भी बोली की तो कम से कम मुझे बता तो दे देते ...खैर छोड़ो समझ सकते है .....

अनीस - वो सब तो ठीक है मगर अब ये बताओ की तुम्हे मालूम है क्या की वो जो लड़का मेरे साथ उस वक़्त था वो कौन था,......

रजनी - नहीं क्यों कौन था वो....

अनीस - वो मेरा छोटा भाई था अब मुझे तुम्हारे बारे में सब बताना ही होगा घर में वरना बात बिगड़ सकती है लेकिन मै सब संभाल लूँगा

रजनी - ओह्ह शीट मै बिलकुल भी नहीं जानती थी वरना....

अनीस - कोई बात नहीं जान जाने दो जो हो गया सो हो गया अब वैसे भी कभी न कभी ये बात सब को बतानी ही थी....कल से भला आज ही सही ....और हसने लगता है और रजनी से कहता है की चलो अब तुम्हे घर के लिए निकलना चाहिए मै तुमसे कल मिलता हु ऑफिस में .....और वो उसे वहां से ऑटो में बिठा कर घर निकलता है और इधर जीशान घर आ चुका था और वो मुस्कुराते हुए खाना निकाल रहा था वसीम ने उससे पूछा भी तो उसने बोला अनीस भईया को आने दो फिर बताता हु.....और माँ ये लो थर्मामीटर तुम्हारा बुखार नाप दू पहले...

वो आ ही रहां था की वसीम बोल पड़ा ला मै नाप देता हु.....और वो शाज़िया की और घूमता है इतने देर में शाज़िया ने अपना ब्लाउज के सारे बटन्स खोल दिए थे और उसकी दोनों चुचिया लटकती हुयी दिख रही थी जिसे देख वसीम के लंड ने एक झटका खाया और पीछे से जीशान बोला वाह माँ क्या कहर ढा रही हो उफ़ और वो भी पीछे से आता है तभी दरवाजे पे दस्तक होता है......

दरवाजे पे अनीस था वसीम ने दरवाजा खोला और वो भी अन्दर हॉल में आ गया.....

शाज़िया की खुली चुचियो को देख कर वो बोला ....

अनीस - मा तुम तो ऐसे अपनी छाती खोले खड़ी हो जैसे अभी हम आये और उनको चूस चूस कर लाल कर दे....और वो आगे बढ़ता है और वसीम उसके पीछे था जबकि जीशान नाश्ता निकाल रहा था सब की बाते सुनते हुए....

अनीस और वसीम को अपने तरफ आते देख शाज़िया बोली - लाल करो या कुछ भी करो है तो तुम सब के ही और तुम तीनो का बराबर का हक़ है इसपे चाहे जो करो मसलो चुसो या लाल करो....और वो इतना बोल कर हस देती हैं......

उसके कहने का साफ साफ मतलब था कि अब उसकी चूत और गांड और मुह उसकी चुचिया उसका पूरा बदन अब उसके बेटो के साथ साथ वसीम का भी है अब वसीम भी शाज़िया का भोग लगाएगा.... और वसीम तो बिचारा कब से इसके ताक में था....औऱ तभी अनीस शाज़िया के खुले ब्लाउज को पूरी तरह से उतार देता है...और वसीम उसकी पेटीकोट के नाड़े को खोलते देर नहीं करता शाज़िया एक बार फिर हॉल में पूरी नंगी खड़ी थी.....

अनीस शाज़िया को गले लगा कर उसकी चुचियो का मर्दन करने लगता है जबकि वसीम नीचे बैठ कर उसकी चुत की दरार पे जीभ फेरने लगता है साथ ही साथ उसके चुतड़ों को भी दबाने लगता है....और इस दो तरफा हमले से शाज़िया की सिसकिया निकलने लगती है....

तभी जीशान पीछे से बोलता हुए आता है कि ओफ्फो अब चलो उठो दोनो सेवकराम और अनीस भइया क्या तुम भी मा का बुखार नापने बोला था नाकि बुखार बढ़ाने को....शाज़िया की सिसकिया बन्द हो जाती है मगर उसके बेचैनी से साफ साफ पता चल रहा था कि इससे वक़्त वो कितनी गरम और चुदासी महसूस कर रही है.....

जीशान शाज़िया के इस भावना को समझ लेता है और कहता है घबराओ मत मा अभी बुखार का लोचा खत्म हो जाने दो फिर बराबर तुम्हारी बेचैनी का भी इलाज करेंगे...
 
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