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Incest विधवा माँ के अनौखे लाल

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Guest
विधवा माँ के अनौखे लाल

इन तीनो को पटना आये 2 साल हो गए थे। शाज़िया एक भरे जिस्म की औरत थी 2 बच्चो की माँ होने के बावजूद उसका बदन भरा हुआ था अच्छे खान पान ओर सुकून भारी जिंदगी उसके सौंदर्य को बनाये हुए थे ।उसके दोनो बेटे बड़ा बेटा अनीस छोटा बेटा जीशान दोनो जवानी की दहलीज को पार कर चुके थे।फिलहाल शादी की कोइ चर्चा नही थी।

बड़ा बेटा घर की जिम्मेदारियो को सही से संभाल रहा था वही छोटा बेटा घर की छोटी मोटी खर्चो के साथ साथ अपना जेबखर्च भी निकाल लेता था।

अब चलते है कहानी की ओर......

अनीस के आफिस जाने से पहले उसके लिए नास्ता तैयार करने के बाद रोज की तरह नहाने के लिए बाथरूम की तरफ जाने को थी। अभी सुबह के 6 ही बज रहे थे इसलिए वो बेफिक्र हो कर अपने काम मे मशगुल थी। दूसरी ओर जीशान की नींद अचानक बर्तनों की खटपट से टूट गयी जो उसकी माँ धो कर किचन के स्लैब पर रख रही थी ।

इस वक़्त शाज़िया ने केवल एक ब्लाउज और पेटीकोट पहन रखा था जिसमे से उसके जवानी के पूरे कटाव अच्छे से दिख रहे थे बर्तन धोने के बाद वो बाथरूम की तरफ चल पड़ी.... इधर सौरभ उठा और बॉथरूम की तरफ जाने को हुआ वो इस बात से अनजान था कि उधर उसकी माँ नहाने के लिए बाथरूम में गयी हुई है

इधर शाज़िया बाथरूम आ कर अपने बदन पे बचे हुए आखिरी दो कपड़ों को भी धोने के लिए नीचे फर्श पर फेंक दिया और उकड़ू बैठ कर अपने कपड़ो को साफ करने में लग गयी थी। और वो मस्त नंगी ही बिना दरवाजा बंद किए नहा रही थी तभी अनीस बाथरूम में अपनी नींद की अधखुली मदहोशी और सुबह सुबह का लंड का तनाव अलग ही कहर ढा रहा था। अचानक वो बाथरूम की तरफ गया जहाँ अपनी माँ को नंगी हालत में देख कर उसकी सारी नींद काफूर हो गयी और उसके लंड ने झटका मारा उधर शाज़िया अपने काम में व्यस्त थी।जीशान इस नजारे को देख कर पूरी तरह से शॉक में खड़ा था

अचानक उसे ये मंजर भाने लगा और वो वही छुप कर अपने माँ के नंगे बदन का नजारा लेने लगा उधर उसकी माँ जो इससे बात से अनजान थी कि उसका सागा छोटा बेटा उसकी जवानी को आंखे फाडे देखे जा रहा था वो नहा रही थी....अब जीशान के दिनचर्या में शामिल हो गया था उसका अपनी माँ के प्रति नजरिया बदल चुका था।

एक दिन जब जीशान शाज़िया को देख रहा था तो शाज़िया को एहसास हुआ कि कोई उसे देख रहा है और वो पीछे मुड़ कर देखती है मगर वहां कोई नही था वो उसे एक वहम समझ कर वपिस नहाने लगी उधर जीशान की सास अटक गयी थी क्योकि उसे डर था कि कही उसकी माँ उसे देख ना ले मगर वो अभी बच गया था और वापिस अपने आंखों को सेकने में लग गया अब वो अक्सर अपनी माँ के नाम की मुठ मारता और अक्सर शाज़िया को किसी ना किसी बहाने छूता प्यार दिखाने के बहाने ही सही मगर छूता और शाज़िया को भी ये एहसास हो चला था कि जीशान के व्यवहार में कुछ बदलाव आया है।

अब देखना आगे है कि ये कहानी कौन सा मोड़ लेती है

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अगले दिन सुबह में शाज़िया जब नहाने के लिए जा रही थी तो उसने पहले से ही अपना ध्यान जीशान की तरफ लगा रखा था।

उधर जीशान अपने रोज की तरह अपनी माँ की नंगी देखने के लिए दरवाजे की तरफ जाने को आतुर था । जब शाज़िया नहाने के लिए गयी तो उसने दरवाजा को पूरा खुला ना छोड़ कर थोड़ा सा खुला छोड़ा था ताकि वो अपने वहम को यकीन में बदल सके और हुआ भी ऐसा ही जब शाज़िया अपने बदन के सारे कपड़े उतार कर नहाने के लिए बैठी तो जीशान वहां आ गया मगर आज दरवाजा को बंद देख कर कुछ मायूसी सी हुयी लेकिन अगले ही पल वो दरवाजे की ओट से देखने लगा और उधर शाज़िया का वहम यकीन में बदल चुका था कि उसका खुद का सगा छोटा बेटा उसे नंगी हलात में देखता था । इससे कारण से वो परेशान हो उठी की आखिर ऐसा क्यों कर रहा है उसने सोचा कि अभी के अभी जा कर उसको 2 थप्पड़ लगा कर पुछु की वो ऐसा क्यों कर रहा मगर उसके मन के एक कोने से आवाज आई कि अभी ये सही समय नही है बात करने का।

अनीस के आफिस जाने के बाद वो उससे इसका कारण पूछेगी उधर जीशान इस बात से अनजान था कि उसकी माँ को उसके हरकत का पता चल चुका था।

नास्ते के टेबल पर :-

अनीस - मा आज मुझे आफिस के कुछ काम से कोलकाता जाना होगा एक हफ्ते के लिए काल रात मैं बता नही पाया उसके लिए सॉरी

शाज़िया - बेटा तुम्हे ऐसे अचानक से क्यों जाना है पहले से बता देते तो मैं कुछ तैयार कर के दे देती वैसे भी तू आजकल हमे भूल ही गया है हर वक़्त काम काम काम संडे को भी तू घर पे नही रहता ऐसा भी क्या बिजी है बेटा अब इतनी जल्दी मैं कैसे कैसे क्या तैयारी कर के दु ।

जीशान - बीच मे टोकते हुए कोई बात नही मा भैया ट्रैन में ही कुछ खा लेंगे और हा भैया कोलकाता से हमारे लिए कुछ अच्छी चीज लेते आना ।

शाज़िया - जीशान तू तो चुप ही रह तुझे क्या पता बाहर का खाने से सेहत बिगड़ सकती है और वो कोलकाता आफिस के काम से जा रहा है घूमने या टूर पे नही और तुम अनीस इधर ज्यादातर तुम बाहर का ही खाना खाते हो । इसका ध्यान रखो वरना सेहत खराब हो जाएगी बेटा।

अनीस - सॉरी मा बस ये हफ्ता निकाल लू फिर एक महीने की छुट्टी लूंगा प्रॉमिस।

जीशान - भैया कुछ लाना मत भूलना प्लीज।

अनीस - अच्छा मेरे भाई ।

नास्ता खत्म करने के बाद अनीस अपने जाने की तैयारी करने में लग जाता है ओर शाज़िया उसकी थोड़ी मदद कर देती है उधर जीशान अपने कमरे में पढ़ने बैठ जाता है मगर उसके मन मे ये बात भी आ रही थी आनेवाला हफ्ता कैसा रहेगा और नास्ते के टेबल पर शाज़िया की बेरुखी को देख कर उसे भी कुछ अजीब महसूस हुआ था मगर अब आगे देखना है कि शाज़िया कैसे जीशान से बात करती है और वो बात उनके जीवन मे कौन सा मोड़ लाती है ।

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अनीस के जाने के बाद शाज़िया सीधे जीशान के कमरे में जाती है जहा जीशान कोतबा खोले आपने मा के नंगे बदन को सोच सोच कर वासन से भरे खयालो में खोया हुआ था।

शाज़िया - जीशान वो चिल्ला कर बोलती है जीशान पलट कर देखता है तो शाज़िया गुस्से से भरी उसके सामने खड़ी थी ऐसे रूप देख कर जीशान को भी यकीन हो गया था कि उसकी करामात उसकी माँ को पता चल गयी है ।

शाज़िया - तू आज सुबह बाथरूम के दरवाजे के पास खड़े हो कर क्या कर रहा था ।

अपनी माँ के इससे सवाल से जीशान बहुत ज्यादा घबरा जाता है उसे जवाब देते नही बन रहा था कि वो क्या बोले....

शाज़िया के बार बार पूछने पर भी जब जीशान ने जवाब नही दिया तो शाज़िया रोते रोते उसके बेड के पास जमीन पे ही बैठ गयी और रोने लगी ।

जीशान - बेड से उतर कर मा के पास गया और बोला

जीशान - मुझे माफ़ कर दो मा मैं बहक गया था आई एम सॉरी मा मैं अब से ऐसा नही करूँगा मा मुझे माफ़ कर दो मा मैं आपका दिल नही दुखाना चाहता था और वो भी सुबकने लगा

शाज़िया - मेरी परवरिश में कहा कौन सी गलती हो गयी जो तू ऐसी ओछी हरकत वो भी मेरे ही साथ कर रहा था....और रोने लगती है

जीशान - नही मा ऐसा मत बोलो मा तुम इससे संसार की सबसे अच्छी मा हो अब्बू के बाद तुमने ही तो हमे सारा कुछ दिया है प्यार दुलार सिख सब कुछ मा हमदोनो भाइयो का सब कुछ तुम ही तो हो माँ

माँ मुझसे ग़लती हो गयी मा मुझे माफ़ कर दो माँ

और शाज़िया बिना कुछ बोले वहां से उठ कर चली जाती है और जीशान मा मा ही करता रह जाता है

इधर शाज़िया खुद को कमरे में बंद कर लेती है और रोते हुए ये सोचने लगती है कि आखिर ऐसा क्यों किया जीशान ने

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शाम को 6 बज चुके थे मगर अभी भी शाज़िया कमरे से बाहर नही आई थी इधर जीशान अपने कमरे में ये सोचते सोचते सो गया था कि वो अपनी मा को कैसे मनाएगा अचानक फ़ोन की घंटी से उसकी नींद टूटती है फ़ोन अनीस का था

अनीस - भाई मैं कोलकाता के लिए निकल रहा हु तुम अपना ओर मा का ध्यान रखना

जीशान - जी भाई।

अनीस - मा से बात करा दे थोड़ा।

जीशान - माँ अभी अपने कमरे में कुछ काम कर रही है बाद में बात कर दूंगा

अनीस - अच्छा ठीक है बाय

जीशान - हैप्पी जर्नी भईया

और फोन कट गया।

अब जीशान उठ कर शाज़िया के कमरे के तरफ बढ़ता है और उसके कमरे के सामने पहुच कर दरवाज़े के पास खड़े हो कर आवाज लगता है माँ माँ माँ दरवाजा खोलो मा शाम होने को आई मा भैया का फ़ोन आया था वो जा रहे है उनसे बात कर लो माँ।

तब शाज़िया दरवाजा खोलती है और बिना जीशान की तरफ देखे बाथरूम की ओर चली जाती है वहां जा कर अपना चेहरा धो कर कुछ देर वैसे ही खड़ी रहती है और फिर बाहर आती है उसने मन ही मन ये सोच रखा था कि वो जीशान से कोई बात नही करेगी जब तक उसको उसकी गलती का एहसास नही हो जाता। इधर जीशान व्याकुल सा परेशानी में सोच रहा था कि आगे पता नही क्या होगा

रात को खाने के टेबल पर भी शाज़िया जीशान से बात नही करती मगर जीशान अपनी माँ से बात करना चाह रहा था मगर चाह लेने से कुछ नही होता । जीशान किसी न किसी बहाने से शाज़िया से कुछ न कुछ बात कर रहा था कभी रोटी मांगने के बहाने कभी सब्जी कभी पानी शाज़िया चुप चाप उसकी बातों के अनुसार उसको उसकी मांगी हुई चीज दे देती थी। मगर बोल नही रही थी। अंततः जीशान के सबर का बांध टूट गया और वो शाज़िया के बाह को पकड़ कर बोलता है।

जीशान - मा तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रही मुझसे गलती हो गई मा मुझे माफ़ कर दो

शाज़िया - ठीक है माफ़ किया मगर मेरा जब तक मन नही होगा तुझसे बात करने का तबतक तू मुझे टोकेगा नही नाही कोई बात करने की कोशिस करेगा ।

जीशान कुछ नही बोलता ओर शाज़िया उसकी हाँ समझ कर वह से किचन में चली जाती है।और जीशान अपने कमरे में

लेकिन जीशान भी अपने मन मे ये ठान लेता है कि वो अपनी माँ को पाकर रहेगा और इसके लिए उसे क्या करना है वो अच्छी तरह से जानता था।

अगली सुबह शाज़िया जब नहाने गयी तो दरवाजा पूरा बंद कर के गयी थी।इधर जीशान ने अपनी योजना के तहत काम करना शुरू कर दिया था वो अपनी माँ को शीशी में उतारना चाहता था और इसका सबसे बढ़िया जरिया था अपनी माँ की सोई हुई कामाग्नि को भड़काना

जब शाज़िया नहा कर अपने काम मे व्यस्त थी तो जीशान अपने कमरे से निकल कर बाथरूम में गया जहाँ उसने अपने माँ के बदन के बारे में सोच सोच कर अपना लंड फुल टाइट कर लिया और अपने लंड को अपने हाफ पैंट में डाल अपने कमरे की तरफ जाने लगा और किचन के पास पहुच कर फ्रीज में से बोतल निकालने के लिए घूमा और सामने शाज़िया से आंखे मिलती है मगर अगले ही पल शाज़िया की आंखे उसके पैंट को फाड़ कर बाहर आने को आतुर लंड की तरफ जाती है और वो मन ही मन बाप रे बाप कर बैठती है मगर अपने चेहरे पे जाहिर नही होने देती मगर जीशान समझ जाता है कि तीर निशाने पे लगा है। उस पूरे दिन जीशान शाज़िया को अपने लंड के दर्शन दिलवाता रहा और शाज़िया सोच सोच के परेशान होती रही कि आखिर जीशान ऐसा क्यों कर रहा है।

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अगले दिन जीशान देर तक सोया रहा और उधर शाज़िया अपने सारे काम को निपटाने के बाद जब देखती है कि जीशान अपने कमरे से बाहर नही आया तो वो पहले सोचती है कि खुद आएगा जब आना होगा और वो हॉल में बैठ कर टीवी देखने लगती है।

सुबह खत्म दोपहर चढ़ने को आई 12:30 हो रहे थे और जीशान अभी भी नही आया था तो अंत में थक हार कर शाज़िया ही उसके कमरे में जाने का सोचती है कितना भी गुस्सा क्यों न हो आखिर थी तो वो एक माँ ही ना और अपने बच्चे को वो ऐसे नही देख सकती थी खैर वो उसके कमरे की तरफ बढ़ी जहा जीशान अपने योजना के अगले कड़ी को अंजाम देने वाला था उसने आने की आहट सुन कर अपने लंड को टाइट कर लिया वैसे भी वो अपने माँ के नंगे बदन के बारे में सोच सोच कर तुरंत गरम हो जाता था और उधर शाज़िया जब उसके कमरे में दाखिल हुयी तो उसके आंखे चौड़ी हो गयी क्योंकि उसका बेटा बेड पर अपना लंड निकाले सोया हुआ था और वो भी पूरा अकड़ा हुआ जो कम से कम 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था।

शाज़िया के पैर जहा थे वही के वही जम गए मानो काटो तो खून नही वो कुछ सेकण्ड्स तक उसको ऐसे ही नीहारती रही इससे दृश्य ने उसके अंदर एक तूफान खड़ा कर दिया था और जब वो सोची की नही ये गलत है और वो पलटने को हुई तो जीशान ने अपना अगला चाल चला और वो बेड पर पलट गया और सोने की एक्टिंग करते हुए चादर को अपने कमर तक खींच लिया तभी शाज़िया ने उसे उठाने की सोची औऱ उसे आवाज लगाई जीशान उठने की एक्टिंग करता हुआ उठा और शाज़िया की ओर देख कर मुस्कुराते हुए बोला गुड मोर्निग मा सॉरी वो रात को देर से सोया था।तुरंत उसने बात को पलटते हुए कहा मा प्लीज अब तो माफ कर दो मुझे।।।

शाज़िया भी उसके इस सवाल का जवाब दे कर जल्दी से जल्दी वह से निकलना चाहती थी क्योंकि उसके बेटे का लन्ड ने उसे व्याकुल कर दिया था अंदर ही अंदर उसके वर्षो के सोये हुए योवन को जगा दिया था मगर वो अभी इसके भाव अपने चेहरे पे लाना नही चाहती थी इसलिए उसने जवाब दिया ..... ठीक है बेटा माफ किया तुझे चल अब हाथ मुह धो कर नहा ले फिर खाना देती हु।

इधर जीशान समझ जाता है कि उसका काम जल्दी ही बनने वाला है और अब वो अपनी माँ के तरफ से होने वाले हरकतों को बड़े ही ध्यान से देख रहा था और देखे भी क्यों ना आखिर उसने मा की सोई हुयी काम की ज्वाला में आग लगानी शुरूआत जो कर दी थीं।

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इधर शाज़िया की बेचैनी बढ़ी हुई थीं आखिर उसे हुआ क्या है वो अपने बेटे के प्रति आकर्षित हो रही थी जो वो करना नही चाह रही थी मगर इस काम मे उसका शरीर उसका साथ नही दे रहा था।उस दिन भी जीशान ने कोई भी मौका नही छोड़ा अपनी माँ को अपना लन्ड दिखाने में और नतीजा ये हुआ कि शाज़िया की बेचैनी उसके चेहरे पे जाहिर होने लगी थी मगर जीशान भी जानबूझ कर इस खेल का मजा ले रहा था। अनीस को गए हुए आज तीसरा दिन था शाज़िया नहा कर किचन का काम निपटा कर हॉल में बैठ कर टीवी देख रही थी मगर उसका ध्यान उसके बेटे के लन्ड पर लगा हुआ था।इधर जीशान को कॉलेज जाना था नही क्योकि उसके आखिरी साल के इम्तिहान आने को थे और उनके डेट्स फाइनल हो चुके थे तो वो चैप्टर्स के रीविशन में लगा हुआ था। और साथ साथ ये भी ध्यान लगाए हुए था कि उसकी माँ की हालत कैसी है

अब शाज़िया की हालात बहुत ही ज्यादा खराब हो चली थी और वो मन ही मन इस बात को स्वीकार कर चुकी थी कि आज नही तो कल उसकी ये बेचैनी उसे मरवा देगी।उसी दिन दोपहर में जीशान अपने कमरे से निकल कर हॉल में आया जहा शाज़िया भी मौजूद थी और वो बिना अंडअनीसयर के हाफ पैंट में आ कर बैठ गया और माँ को बोला

जीशान -क्या कर रही हो मा अकेले

शाज़िया -कुछ नही बस टीवी देख रही थी

तभी जीशान अनीस की बात निकालता है और कहता है की माँ भइया को आने में अभी 4 दिन है उनसे मेरी बात हुई थी अभी वो काम से गये है शाम को कहा है तुमसे बात करवा दु

शाज़िया - ठिक है करा देना बात और बता तेरी तैयारी कैसी चल रही है

जीशान - अच्छी चल रही है माँ मैं पास हो जाऊंगा मा तुम देखना तुम्हे निराश नही करूँगा बस एक मौका तो दो

शाज़िया उसकी बात पे उसकी तरफ देखती है सवालिया नजरो से तभी जीशान कहता है मेरा मतलब की एग्जाम तो देने दो एक बार और मुस्कुरा देता है।

लेकिन शाज़िया समझ जाती है कि उसका ईशारा किस तरफ था और वो भी सिर नीचे कर के हल्के से मुस्कुरा देती है । अब बस इन्तेजार था तो आगाज होने का।।

और इसकी शुरुआत शाज़िया खुद ही करती है क्योकि वो जानती थी कि जीशान उसे किस नजरो से देखने लगा था और इधर की हुई घटनाओ के बाद ये साफ हो गया था उनके बीच जल्दी ही एक नए रिश्ते का जन्म होने वाला था ।

शाज़िया ने खुद को बहुत समझाने की कोसिस की मगर सब बेकार क्योकि जीशान लगातार उसको अपने लन्ड के दर्शन दिलवा रहा था कभी नंगा लन्ड तो कभी पैंट के भीतर से।

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उसी दिन रात को खाना खाने के बाद शाज़िया हॉल में बैठी होती है और टीवी पे सीरियल देख रही थी और जीशान वही फ़ोन में कुछ कर रहा होता है तभी अनीस का फोन आता है।

जीशान - हा भइया कैसे हो कोलकाता कैसा लगा

अनीस - अच्छा शहर है भाई और बता खाना पीना हो गया मा कहाँ है उससे बात करा दे तभी वो शाज़िया को फोन देता है और माँ बेटे कुछ देर तक बात करते है और फिर फोन कट जाता है और वो फोन जीशान की तरफ बढा देती है।

तभी शाज़िया कराहती हुई सोफे से उठती है और कमरे की तरफ जाने लगती है तो जीशान उसे टोकता है

जीशान -माँ।।क्या हुआ मा कराह क्यू रही हो कही चोट लगी है क्या।

शाज़िया - नही बेटे बदन में दर्द है काम करते करते थक जाती हु ना कोई बात नही काल सुबह तक ठीक हो जाएगी।

तभी जीशान बोलता है माँ चलो मैं मालिश कर देता हूं इससे आराम भी मिलेगा और नींद भी अच्छी आएगी औऱ शाज़िया कुछ ऐसा ही सोच रही थी मगर फिर भी वो बोलती है

शाज़िया - नही बेटा रहने दे अपने आप ठीक हो जाएगी तू टेंशन मत ले

जीशान - नही मा मैं मालिश कर देता हूं न ओर इसमें टेंशन कैसी अपनी माँ की मालिश कर देना उसके दर्द से निजात दिलाने में कही किसी बेटे को टेँशन होती है भला तुम भी मा कैसी कैसी बाते करती हो चलो कमरे में मैं मालिश कर देता हूं

वो अपनी माँ को कमरे में जाने का बोल कर खुद अपने कमरे में आता है और फटाफट अपने सारे कपड़े उतार देता है सिवाय हाफ पैंट के और तेल की शीशी के साथ वापिस मा के कमरे में जाता हैं और बोलता है।

जीशान - मा तुम बेड पे लेट जाओ मैं तुम्हारी मालिश किये देता हूं ।

शाज़िया जब उसे इस हालत में देखती है तो पूछती है कि तूने कपड़े क्यों उतार दिए तो जीशान कहता है कि मालिश करने के दौरान उसके कपड़ो में तेल न लग जाये इसलिए उसे उतार दिये।इस जवाब पर शाज़िया कुछ नही कहती और घूम जाती है।

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इधर शाज़िया के मन मे भी हजारों तरह की तरंगें उठ रही थी ये सोच सोच कर की अगला पल क्या लाने वाला है उसकी जिंदगी में इसी उधेड़बुन में वो बेड पे लेट जाती है और जीशान एक कुटिल मुस्कान के साथ तेल की शीशी ले कर बेड के किनारे खड़ा हो जाता है और कहता है।

जीशान - मा, तुम अपनी साड़ी को घुटनो तक ऊपर कर लो ताकि मैं तेल से तुम्हारे पैरो की मालिश कर सकू।

शाज़िया बिना कुछ बोले अपनी साड़ी ऊपर कर लेती आई हैं मगर घुटनो से नीचे ही रखती है क्योकि अभी भी उसे शर्म औऱ मर्यादा उसे ये करने की इजाजत नही दे रहा था मगर वो अपने शरीर के हाथों मजबूर हो चली थी तभी ,,,,

जीशान - मा घुटनो तक बोला है क्या तुम भी ,,,,,,ऐसे में मालिश कैसे करूँगा और वो खुद ही उसकी साड़ी को घुटनो के थोड़ा ऊपर तक उठा देता है जिससे शाज़िया की जाँघे भी थोड़ी बहुत दिखाई देने लगी थी और जीशान मन ही मन अपनी जीत पर गौरवान्वित हो रहा था होता भी क्यों ना आखिर वो अपने मंशा को पूरा करने के करीब आ गया था

वो अपनी माँ को कमरे में जाने का बोल कर खुद अपने कमरे में आता है और फटाफट अपने सारे कपड़े उतार देता है सिवाय हाफ पैंट के और तेल की शीशी के साथ वापिस मा के कमरे में जाता हैं और बोलता है।

जीशान - मा तुम बेड पे लेट जाओ मैं तुम्हारी मालिश किये देता हूं ।

शाज़िया जब उसे इस हालत में देखती है तो पूछती है कि तूने कपड़े क्यों उतार दिए तो जीशान कहता है कि मालिश करने के दौरान उसके कपड़ो में तेल न लग जाये इसलिए उसे उतार दिये।इस जवाब पर शाज़िया कुछ नही कहती और घूम जाती है।

इधर शाज़िया के मन मे भी हजारों तरह की तरंगें उठ रही थी ये सोच सोच कर की अगला पल क्या लाने वाला है उसकी जिंदगी में इसी उधेड़बुन में वो बेड पे लेट जाती है और जीशान एक कुटिल मुस्कान के साथ तेल की शीशी ले कर बेड के किनारे खड़ा हो जाता है और कहता है।

जीशान - मा, तुम अपनी साड़ी को घुटनो तक ऊपर कर लो ताकि मैं तेल से तुम्हारे पैरो की मालिश कर सकू। शाज़िया बिना कुछ बोले अपनी साड़ी ऊपर कर लेती आई हैं मगर घुटनो से नीचे ही रखती है क्योकि अभी भी उसे शर्म औऱ मर्यादा उसे ये करने की इजाजत नही दे रहा था मगर वो अपने शरीर के हाथों मजबूर हो चली थी तभी

जीशान - मा घुटनो तक बोला है क्या तुम भी ऐसे में मालिश कैसे करूँगा और वो खुद ही उसकी साड़ी को घुटनो के थोड़ा ऊपर तक उठा देता है जिससे शाज़िया की जाँघे भी थोड़ी बहुत दिखाई देने लगी थी और जीशान मन ही मन अपनी जीत पर गौरवान्वित हो रहा था होता भी क्यों ना आखिर वो अपने मंशा को पूरा करने के करीब आ गया था
 
जीशान अब हाथो में तेल ले कर शाज़िया के पैरों की मालिश करना शुरू कर देता है और वो अभी बेड के किनारे ही था और मालिश पूरे जोरो से कर रहा था उधर शाज़िया को उसके बेटे का स्पर्श अच्छा लग रहा था कई सालों के बाद आज किसी मर्द ने उसे इस तरह से छुआ था तो उसके योवन में लहरे उठ रही थी दूसरी तरफ जीशान अब अपने अगले हमले के लिए तैयार था और उसने अपना हमला कर दिया और उसका लन्ड फूल कर पैंट में तंबू बना चुका था और जीशान ने उसे छुपाने की बिल्कुल भी कोशिस नही करी बल्कि वो और उसे लहरा लहरा कर दिखाने की कोसिस में लगा था

तभी शाज़िया की नजर उसके पैंट में बने तंबू पर गयी और वो अंदर तक कॉप गयी क्योंकि ये पहला मौका था जब जीशान के लन्ड के दर्शन वो इतने करीब से कर रही थी और तभी उसने दूसरी तरफ अपना सिर घूमा लिया । जीशान भली भांति अपने माँ के नजरो का पीछा कर रहा था तभी वो मा से कहता है।

जीशान - मा अब लाओ मैं तुम्हारे कमर की भी मालिश कर देता हूं पलटो।

शाज़िया - नही बेटा हो गया रहने दे अब तू जा अब आराम कर मुझे अब काफी आराम मिल गया है

जीशान - नही मा मैं तुम्हारी कमर की मालिश कर देता हूं लाओ इधर सारा दिन काम काम करती रहती हो अभी थोड़ा सा आराम करने का मौका मिल रहा है तो उसमे भी तुमको चैन नही है लाओ इधर और शाज़िया पलट जाती है तभी जीशान कहता है माँ अपनी साड़ी निकाल दो तभी तो मालिश कर पाऊंगा ऐसे तो तुम्हारी साड़ी गंदी भी हो जाएगी और कमर के चारो तरफ लपेटी हुई है कैसे मालिश करूँगा

ये सुन कर शाज़िया घबरा जाती है कि वो कैसे अपनी साड़ी उतारेगी

तभी जीशान बोलता है माँ उतारो ना और शाज़िया घबराई हुई सी उठती है और जीशान बोलता है माँ मैं आता हूं पानी पी कर प्यास लगी है ।

वो ऐसा इसलिए करता है ताकि वो अपनी माँ के झिझक को खत्म कर सके और वह कमरे से निकल कर वही साइड में छुप कर देखने लगता है

शाज़िया जो खड़ी थी उसकी साँसे बुरी तरह से फूल रही थी क्योंकि वो उत्तेजना में काफी गरम हो गयी थी और जीशान ये नजारा देख कर बार ही खुश हो रहा था उधर शाज़िया की चुचिया ब्लाउज में ऊपर नीचे हो रही थी और तभी शाज़िया ने अपनी साड़ी उतार फेकि ओर पेट के बल लेट कर जीशान के आने का इंतजार करने लगी तभी जीशान कमरे में दाखिल होता है और अपनी माँ को ऐसे हालात में देख कर बुरी तरह से उसका लन्ड झटका खाता है और वो इस बार सीधा बेड पे चढ़ के बैठ जाता है और बोलता है

जीशान -ये ठीक किया मा अब आराम से मालिश कर सकूंगा तुम्हारी

शाज़िया - हा बेटा कर दे और वो अपना चेहरा तकिये में दबा लेती है क्योंकि उसके बेटे का जादुई स्पर्श उसे पागल बनाए जा रहा था और जीशान भी अपने उंगलियों को शाज़िया के कमर पर इस तरह से घुमा रहा था कि उसकी कामाग्नि भड़के और वो खुद पलट कर उसके सामने समर्पण कर दे।

तभी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
तभी जीशान वो करता है जिसकी शायद शाज़िया को उम्मीद नही थी जीशान अपने तेल से गिले हाथो की उंगलियों को उसके पेटीकोट के नाडे के सहारे अंदर घुसाने लगा जो उसके चुतड़ों के दरार के पास छूने लगी जिससे शाज़िया और जीशान दोनो को एक झटका लगता है।

लेकिन शाज़िया की तरफ से कोई विरोध ना पा कर जीशान अपने उंगलियो को जोर जोर से उसकी चुतड़ों के दरार में ले जाने लगा नतीजतन शाज़िया के पेटिकोट का नाडा अब ढीला हो गया था जो सरक कर इतना नीचे आ गया था जहाँ से उसके चुतड़ों की दरार की शुरुआत देखी जा सकती थी तभी जीशान अपने दोनों पैर अपनी माँ के जिस्म के दोनों तरफ कर लेता है और मालिश करने लगता है इस वजह से उसका लन्ड मा के जांघो से होता हुआ उसके चुतड़ों के नीचे टक्कर खाने लगा जिसका एहसास शाज़िया को अच्छे से हो रहा था और उसका पागलपन उसपे हावी होता जा रहा था तभी जीशान ने अपने हाथ इतने जोरो से उसके पेटिकोट के नाडे के पास से रगड़ा की उसके आधे से ज्यादा चुटर नुमायिन्दा हो गये।

और जीशान के लन्ड ने अपनी माँ के चुतड़ों के इस दृश्य से एक जबरदस्त झटका खाया उसकी नसे फटने पे आमादा थी तभी जीशान कहता है।।

जीशान - मा तुम अब आगे की ओर घूम जाओ मैं जांघो की भी मालिश कर देता हूं और वो अपनी के ऊपर से उतर जाता है और शाज़िया घूम जाती है और वो अपनी आंखें मारे आनंद के बंद किये लेटी रहती है और जीशान फिर से अपनी माँ के जिस्म के दोनों तरफ पैर कर के अपनी माँ के पेटिकोट को उठाता है मगर उसका पेटिकोट घुटनो के पास आ कर अटक जाता है तब जीशान कहता है

जीशान - मा तुम अपनी पेटिकोट को ऊपर खिंच लो ताकि तुम्हारी जांघो की मालिश कर सकू

शाज़िया बिना कुछ बोले अपने पेटिकोट को उपर खिंच लेती है जांघो तक और जीशान अपने हाथों के जादूगरी को अंजाम देने में जुट जाता है और मालिश के दरमियान अब उसका वार उसकी माँ की चूत के तरफ था जो कुछ ही देर में उसके आंखों के सामने आने वाली थी।

वो मालिश के दौरान उसके पेटिकोट को इस तरह से छू रहा था कि हर छुअन के साथ उसका पेटिकोट कुछ ऊपर सरक रहा था औऱ शाज़िया पागल हुए जा रही थी अब जीशान खुलकर अपने लन्ड का एहसास अपनी माँ को करवा रहा था।

तभी जीशान कहता है।

जीशान - माँ तुम अपनी पेटिकोट उतार दो ये मालिश में दिक्कत दे रही है और इसमें तेल भी लग रहा है और वो शाज़िया का जवाब सुने बगैर उसके पेटिकोट का नाडा जो केवल नाम के लिए बंधा हुआ था उसे एक झटके में ही खोल कर उसले बदन से नीचे खिंच देता है और अब उसकी माँ उसके सामने नीचे से बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी।

तभी शाज़िया अपनी आँखें खोल कर अचम्भे से जीशान को देखती है जो अभी भी मालिश में व्यस्त था और उसके हाथ अपनी माँ के चूत के चारो ओर औऱ कभी कभी चूत को भी भीच दे रहा था जिससे कि शाज़िया की साँसे अटक जा रही थी तभी वो अचानक उठती है और जीशान इस बात से अनजान था जो अपनी माँ के पैरों के इर्द गिर्द अपनी टांगे फैला रखा था वो मा के अचानक उठने से बेड पे गिर जाता है और शाज़िया अचानक से अपनी पेटिकोट उठा कर बाथरूम में भाग जाती है और जीशान हैरान सा देखता रह जाता है।

बाथरूम में जा कर शाज़िया अभी भी नंगी हालात में पेटिकोट को अपने हाथों में पकड़े अपनी साँसों को काबू में करने की कोशिस में लगी होती है। और मन ही मन सोचती है कि अभी ये क्या हुआ आखिर वो ऐसे कैसे कर गयी है भगवान ये क्या हुआ मुझसे।

तभी जीशान बाहर से आवाज लगाता है....

मा मा ओ मा क्या हुआ मा कुछ बोलो मा

शाज़िया कोई जवाब नही देती जीशान काफी देर तक दरवाजा पे दस्तक देते रहता है मगर शाज़िया कोई जवाब नही देती टैब जीशान वहां से हट कर सोफे पे जा बैठता है
 
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