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आगे...
हम पापा से मिले हालचाल पूछा कुछ देर बाते करते रहे, पापा बोले अब आप जाओ,
हमने पापा को नही बता रखा की हम यही शहर में कमरा लेकर रह रहे है, क्यु की हम पापा को परेसान नही करना चाहते थे,
मै और माँ दोनो अपने कमरे पर पहुंचे, माँ बोली मै नहा लेती हु फिर तु भी नहा लेना, मै-- ठीक है माँ
माँ बाथरूम मै गयी वहा गर्म पानी के लिए गीजर लगा था, माँ जल्दी से नहा कर आ गयी, मुझे बोली जा तु भी जल्दी नहा ले फिर खाना खाते है, मै भी जल्दी से बाथरूम मे घुस कपड़े निकाल दिया,
मैने देखा की बाथरूम के एक कोने मे माँ कि पैंटी ब्रा ब्लाउस पेटिकोट पड़े है, मैने अपने पुरे कपड़े निकाल दिये, और माँ के ब्लाउस को उठाया और सोचने लगा की माँ अपने चुन्चिया इनमे कैसे ढक कर रखती होगी, मैने देखा की माँ के बगल के पसीने से ब्लाउस कांख से गिला हो रखा था, मैने तुरन्त पसीने को नाक के पास ले जाके सुघने लगा, बड़ा ही मस्त खुशबु आ रही थी, मेरा लंड खडा होने लगा, मैने एक हाथ से लंड को सहलाने लगा, कभी पेटिकोट को सुंघता कभी ब्लाउस को, लंड पूरी तरह तन गया था और मेरे हाथ की गति भी तेज हो गयी, मैने ब्रा को मुह मे लेकर चूसने लगा जैसे माँ के चुन्चिया चूस रहा हूँ, जैसे ही माँ की पैंटी हाथ मे ली, मुझे पैंटी पर थोड़ा खून सा दिखा, मै समझ गया माँ को आज पेरियड आ गये है, मेरी खुशी दुगुनी हो गयी, माँ के अब भी माहवारी आती है, माँ तो बच्चे दे सकती हैं, मेरी गति और तेज हो गयी, इतने मे ही मेरे लंड से वीर्य निकलने लगा, मैने तुरंत पैंटी पर सारा माल गिरा दिया, वीर्य और माँ का खुन एक हो गये, मै ये सब हकीकत मे करना चाहता हु,
मै फिर जल्दी से नहा कर बाहर आया, माँ तब तक तैयार होकर बैठी थी, आज माहवारी आने से उनको थकान और दर्द भी था हल्का सा,
माँ उदास सी बैठी थी, मैने पूछा माँ क्या हुआ चुप क्यों बैठी हो,, माँ झुठ बोलते हुए, बेटा थक सी गयी हु इसलिए शायद,
माँ माहवारी में केवल एक कपड़ा लगाती थी, उनको पेड के बारे मे नही पता था, ना ही ये पता की माहवारी क्यु आती है,
मैने कहा माँ मै अभी आता हु तब तक आप खाना लगाओ टिफिन आ गया होगा,
माँ- पहले खाना तो खा ले, फिर चले जाना कहा जाना है
मै-- बस यू गया यू आया,
मै जल्दी से बाहर आया पास मे ही दवाई की दुकान थी उसमे से पेड का पकेट लिया और जल्दी से घर आ गया,
माँ खाना लगा रही थी, अरे आ भी गया, और ये क्या है हाथ मे, मै-- माँ पहले खाना लगाओ, खाते है फिर बताता हु
हम दोनो ने खाना खाया, और छत पर चले गये, मै साथ मे पेड का पकेट भी ले गया,
माँ-- क्या है बेटा बताया नही ये,
मै,-- माँ मै पढ़ा लिखा हु सब जानता हूँ आप इसके बारे मे नही जानती हो,
माँ-- तो तु ही बता दे क्या है
मै-- माँ मुझे पता है आपको माहवारी शुरू हो गयी है ये उसी के लिए है,
माँ ये सुन चोंक सी गयी,
ये क्या कह रहा है तु, और तुझे कैसे पता की मुझे माहवारी आ गयी गई,
मै-- माँ मै जब बाथरूम में नहा रहा था, तब अचानक मेरी नज़र आपके साइड में पड़े कपड़े पर चली गयी, उस पर खून दिखा तो मै समझ गया की आपको माहवारी शुरू हो गयी है,
माँ एकदम चुप हो गयी, बेटा मै जल्दी मे भूल आई, अभी उनको धो कर आती हु,
मै-- अरे माँ, रुको मैने धो दिये है आप चिंता ना करो,
माँ-- अरे क्या बेटा, ये गलत बात है माँ के कपड़े साफ नही करते, ना ही उन्हे देखते और छूते है, सब गलती मेरी ही है मै ही वहा भूल आई,
मै-- माँ आप भी ना, इसमे गलत क्या है, और मै समझदार हु सब पता है मुझे, मेरे भी तो आपने धोये है मैने धो दिये तो क्या गुनाह कर दिया,
माँ-- बेटा माँ तो बच्चे के धो सकती है लेकिन बेटा माँ के नही,
मै-- माँ मैने तो आपकी सहायता करनी सोची अगर आपको अच्छा नही लगा तो माफ करदो, मै जानबुझकर उदास सा हो गया,
माँ-- अरे नही बेटा, ऐसी बात नही है, मै आगे से ध्यान रखुंगी, तु उदास मत हो, तु ही तो मेरा एक सहारा है
ये तो बता ये लाया क्या है
मै-- माँ ये आपके लिए है
माँ-- मेरे लिए, ऐसा क्या है इसमे
मै-- माँ ये माहवारी मे काम आता है, जब खून शुरू होता है तब इसको लगाने से खुन ये सोख लेता है, ना तो कपड़े खराब होते है ना कोई बीमारी
माँ-- लेकिन मै तो कपड़ा लगाती हु, ये मुझे नही आता कैसे लगाते है,
मै-- माँ कपड़े से आपको समस्या हो सकती है वो सही नही है आप ये लगाना
माँ-- मै नही जानती बेटा, कैसे लगाते है,
मै-- माँ को समझाते हुए माँ इसको ऐसे पकड़ो और इसको ऐसे लगाना, आप ख़ुद देखना आप आराम दायक महसूस करोगी,
माँ एक पेड लेकर दूसरे कमरे मे चली जाती हैं, कुछ देर मे आती है, बेटा ये ठीक सा लग रहा है, इसमे आराम है बहुत, कहती हुई माँ धुप मे बैठ गयी, मै पास मै खडा रहा,..
हम पापा से मिले हालचाल पूछा कुछ देर बाते करते रहे, पापा बोले अब आप जाओ,
हमने पापा को नही बता रखा की हम यही शहर में कमरा लेकर रह रहे है, क्यु की हम पापा को परेसान नही करना चाहते थे,
मै और माँ दोनो अपने कमरे पर पहुंचे, माँ बोली मै नहा लेती हु फिर तु भी नहा लेना, मै-- ठीक है माँ
माँ बाथरूम मै गयी वहा गर्म पानी के लिए गीजर लगा था, माँ जल्दी से नहा कर आ गयी, मुझे बोली जा तु भी जल्दी नहा ले फिर खाना खाते है, मै भी जल्दी से बाथरूम मे घुस कपड़े निकाल दिया,
मैने देखा की बाथरूम के एक कोने मे माँ कि पैंटी ब्रा ब्लाउस पेटिकोट पड़े है, मैने अपने पुरे कपड़े निकाल दिये, और माँ के ब्लाउस को उठाया और सोचने लगा की माँ अपने चुन्चिया इनमे कैसे ढक कर रखती होगी, मैने देखा की माँ के बगल के पसीने से ब्लाउस कांख से गिला हो रखा था, मैने तुरन्त पसीने को नाक के पास ले जाके सुघने लगा, बड़ा ही मस्त खुशबु आ रही थी, मेरा लंड खडा होने लगा, मैने एक हाथ से लंड को सहलाने लगा, कभी पेटिकोट को सुंघता कभी ब्लाउस को, लंड पूरी तरह तन गया था और मेरे हाथ की गति भी तेज हो गयी, मैने ब्रा को मुह मे लेकर चूसने लगा जैसे माँ के चुन्चिया चूस रहा हूँ, जैसे ही माँ की पैंटी हाथ मे ली, मुझे पैंटी पर थोड़ा खून सा दिखा, मै समझ गया माँ को आज पेरियड आ गये है, मेरी खुशी दुगुनी हो गयी, माँ के अब भी माहवारी आती है, माँ तो बच्चे दे सकती हैं, मेरी गति और तेज हो गयी, इतने मे ही मेरे लंड से वीर्य निकलने लगा, मैने तुरंत पैंटी पर सारा माल गिरा दिया, वीर्य और माँ का खुन एक हो गये, मै ये सब हकीकत मे करना चाहता हु,
मै फिर जल्दी से नहा कर बाहर आया, माँ तब तक तैयार होकर बैठी थी, आज माहवारी आने से उनको थकान और दर्द भी था हल्का सा,
माँ उदास सी बैठी थी, मैने पूछा माँ क्या हुआ चुप क्यों बैठी हो,, माँ झुठ बोलते हुए, बेटा थक सी गयी हु इसलिए शायद,
माँ माहवारी में केवल एक कपड़ा लगाती थी, उनको पेड के बारे मे नही पता था, ना ही ये पता की माहवारी क्यु आती है,
मैने कहा माँ मै अभी आता हु तब तक आप खाना लगाओ टिफिन आ गया होगा,
माँ- पहले खाना तो खा ले, फिर चले जाना कहा जाना है
मै-- बस यू गया यू आया,
मै जल्दी से बाहर आया पास मे ही दवाई की दुकान थी उसमे से पेड का पकेट लिया और जल्दी से घर आ गया,
माँ खाना लगा रही थी, अरे आ भी गया, और ये क्या है हाथ मे, मै-- माँ पहले खाना लगाओ, खाते है फिर बताता हु
हम दोनो ने खाना खाया, और छत पर चले गये, मै साथ मे पेड का पकेट भी ले गया,
माँ-- क्या है बेटा बताया नही ये,
मै,-- माँ मै पढ़ा लिखा हु सब जानता हूँ आप इसके बारे मे नही जानती हो,
माँ-- तो तु ही बता दे क्या है
मै-- माँ मुझे पता है आपको माहवारी शुरू हो गयी है ये उसी के लिए है,
माँ ये सुन चोंक सी गयी,
ये क्या कह रहा है तु, और तुझे कैसे पता की मुझे माहवारी आ गयी गई,
मै-- माँ मै जब बाथरूम में नहा रहा था, तब अचानक मेरी नज़र आपके साइड में पड़े कपड़े पर चली गयी, उस पर खून दिखा तो मै समझ गया की आपको माहवारी शुरू हो गयी है,
माँ एकदम चुप हो गयी, बेटा मै जल्दी मे भूल आई, अभी उनको धो कर आती हु,
मै-- अरे माँ, रुको मैने धो दिये है आप चिंता ना करो,
माँ-- अरे क्या बेटा, ये गलत बात है माँ के कपड़े साफ नही करते, ना ही उन्हे देखते और छूते है, सब गलती मेरी ही है मै ही वहा भूल आई,
मै-- माँ आप भी ना, इसमे गलत क्या है, और मै समझदार हु सब पता है मुझे, मेरे भी तो आपने धोये है मैने धो दिये तो क्या गुनाह कर दिया,
माँ-- बेटा माँ तो बच्चे के धो सकती है लेकिन बेटा माँ के नही,
मै-- माँ मैने तो आपकी सहायता करनी सोची अगर आपको अच्छा नही लगा तो माफ करदो, मै जानबुझकर उदास सा हो गया,
माँ-- अरे नही बेटा, ऐसी बात नही है, मै आगे से ध्यान रखुंगी, तु उदास मत हो, तु ही तो मेरा एक सहारा है
ये तो बता ये लाया क्या है
मै-- माँ ये आपके लिए है
माँ-- मेरे लिए, ऐसा क्या है इसमे
मै-- माँ ये माहवारी मे काम आता है, जब खून शुरू होता है तब इसको लगाने से खुन ये सोख लेता है, ना तो कपड़े खराब होते है ना कोई बीमारी
माँ-- लेकिन मै तो कपड़ा लगाती हु, ये मुझे नही आता कैसे लगाते है,
मै-- माँ कपड़े से आपको समस्या हो सकती है वो सही नही है आप ये लगाना
माँ-- मै नही जानती बेटा, कैसे लगाते है,
मै-- माँ को समझाते हुए माँ इसको ऐसे पकड़ो और इसको ऐसे लगाना, आप ख़ुद देखना आप आराम दायक महसूस करोगी,
माँ एक पेड लेकर दूसरे कमरे मे चली जाती हैं, कुछ देर मे आती है, बेटा ये ठीक सा लग रहा है, इसमे आराम है बहुत, कहती हुई माँ धुप मे बैठ गयी, मै पास मै खडा रहा,..