आगे,,,
मै घर पर आ गया, माँ बाहर धूप मे बैठी थी, पास मे पापा भी थे,
मै पास मे गया, पापा बेटा तु अब बड़ा हो गया है, घर के सारे काम अच्छे से देख लिया करो,
मै-- माँ की तरफ देखते हुए, हा पापा मै घर की सब चीज़ो का बहुत ध्यान रखता हु,
माँ अपनी नज़र दूसरी तरफ कर ली,
पापा आप लोग बाते करो, मे तो चला अब आराम करने,
पापा को मैने वहा से उठाया और बेडरूम मे लेकर आ गया, और वापिस माँ के पास चला गया,
मै-- माँ नाराज हो क्या, मुझसे
माँ-- गुस्से से, हा, नाराज हु, तुम पागल हो गए क्या, कोई एक साथ दोनो को देख लेता तो बाथरूम मे,
मै-- माँ माफ करना, लेकिन कई दिन हो गए मुझसे रुका नही जा रहा था,
माँ-- राज, देखो अब तीन महीने की होने को हु मै, मै जब तक आपके बच्चे की माँ नही बन जाती तब तक मै नही करूँगी,
मै-- नही माँ ऐसा मत कहो, मेरा क्या होगा,
माँ-- राज क्या तुझे अपना बच्चा नही चाहिए क्या,
मै- माँ ऐसी बात क्यु कर रही हो, ये तो हम दोनो के प्यार की निशानी है,
माँ-- तो फिर ठीक है राज, अब हम बच्चा होने के बाद ही मिलेंगे,
मै-- माँ एक काम करो आज अंतिम बार चोदने दो, फिर मै कभी आपको नही कहूंगा, वादा रहा
माँ-- ठीक है राज, मै मौका देखूंगी, वैसे भी होली आने वाली है अब, घर की सफाई मे हाथ बताना माया का,
मै- हा माँ, जरूर, लेकिन आज आना जरूर
माँ-- रात को नही, शाम को देखती हु,,
मै-- हा माँ, लेकिन आज जरूर,,
माँ- ठीक है बेटा, अब तु भी आराम कर लो,
,,,,,,,शाम होने को आई,,,,,,
माया भी आ गयी, मै अपने कमरे मे बैठ कर लंड पर तेल की मालिश कर रहा था, लंड को एकदम खड़ा कर चिकना कर रहा था, इतने मे माँ कमरे मे घुस गयी,
माँ ने देखा की मैं लंड को चिकना कर रखा है
माँ-- बेटा, ये क्या कर रहा है,
मै--माँ आपके लिए ही चिकना कर रहा हु, आपको परेशानी नही हो, कहता हुआ, माँ के दोनो हाथ अपने हाथ मे ले लिए, मेरा लंड माँ की नाभि से टकरा रहा था,
माँ-- राज जो भी करना है जल्दी करलो, माया अभी खाना बना रही है,
मै-- हा माँ, जरूर,
माँ ने मुझसे हाथ छुड़ाती ही अपनी साडी और पेटीकोट को नीचे से पकड़ कर उपर किया, और एक ही झटके मे पैंटी को नीचे कर बेड पर झुक कर घोड़ी बन गयी,
माँ की चूत और फैले हुए चूतड़ और गांड का छेद देख मे पागल सा हो गया,
मैं-- हाय माँ, क्या ही हो आप, कहता हुआ, माँ की चूत पर अपना मुंह लगा दिया,
माँ-- आह,, राज, आ।........
मै-- माँ आपकी चूत को गीली हो रखी है पहले से ही,
माँ-- हा राज, आज दिन मे तुझसे चुदने की बात से मे भी गर्म थी, अब देर मत कर जल्दी से चोद लो, ना
मै- माँ आपकी चूत का पानी का तो मज़ा लेने दो ना,
माँ-- आह, राज,, आ, मान जाओ ना, जल्दी से चोद दो ना,
मै-- ठीक है माँ, आप परेशान मत हो,
मै कहता हुआ खड़ा हुआ, और अपना तना हुआ लंड को पकड़ माँ की गीली चूत पर रख धका दिया, चिकना लंड चूत से घिसता हुआ एक साथ ही पूरा लंड माँ की चूत मे समा गया,
माँ---- उई, माँ,,, आ, मर गयी, आह, राज बड़ा मज़ेदार है लंड,
मै माँ की कमर को पकड़ माँ की चूत मे लंड से चुदाई करने लगा, माँ की आँखे बंद और मस्ती मे हो गयी
माँ-- आह राज, आह, आ, आ,,
माँ की चुदाई अच्छे से कर रहा था, तभी मैने मैने अपने एक हाथ का अंगूठा माँ की गांड मे डाल दिया,
माँ उचक पड़ी, आउ,, आ,,..... राज, क्या कर दिया
माँ की चूत और गांड दोनो की चुदाई हो रही थी,
मै-- माँ आपकी गांड भी मज़ेदार है, बच्चा होने के बाद इसकी भी चुदाई करूँगा,
माँ-- आउ,, आ,, पागल हु क्या, मरना थोड़ी है मुझे, आह, आह
माँ पूरी तरह से मस्ती से चुद रही थी, तभी माँ बोली राज जोर जोर से चोदो, आह राज चोदो, जोर से चोदो
मैने भी अपने झटके तेज कर दिये, माँ पागलो की तरह मचल रही थी, मेरा उबाल जोर पर आ गया,
और मैने माँ की कमर पकड़ ली और जोर का झटका लगा कर चूत चोदने लगा, तभी माँ-- आई, ई...... ई... गयी...
कहती हुई माँ झड़ने लगी, और माँ की झड़ती चूत के पानी से मेरे लंड से वीर्य की धार निकल कर माँ की चूत मे समाने लगा, कुछ देर मे दोनो शांत हुए, मैने अपना लंड चूत से बाहर निकाला, बहुत सारा वीर्य फर्श पर गिरने लगा,, माँ ने जल्दी से पैंटी उठाई और चूत को साफ कर,
माँ-- राज मैने अपना वादा पूरा किया, अब तुम भी वादा निभाना, जब तक हमे प्यार की निशानी नही मिल जाती,
मै-- हा माँ जरूर, मै आपके साथ हु,
माँ जल्दी से मुझे किस किया और जल्दी से बाहर चली गयी,,
माँ बाहर निकली ही थी की माया की आवाज आई, भैया खाना खा लो,,
मैने झट से कपड़े पहने, और खाना खाने चला गया,
हम सबने साथ मे खाना खाया, और मै अपने कमरे मे आ गया, क्यु की आज दादी भी नही थी, कुछ देर मैं बेड पर लेट गया,
तभी माया आती हुई अरे भैया हुक्का लगा दु क्या,
मै- है दीदी, जरूर,
माया जैसे हुक्का भर कर बेड के पास आती है, वहा मेरा माँ की चुदाई से निकला वीर्य बहुत सारा पड़ा हुआ था,
माया वीर्य की तरफ देखती हुई, सोचने लगी,
मैने अपनी नज़र अलग कर ली, और बहाना बनाता हुआ, दीदी बैठो ना, हुक्का पीते है
माया समझ गयी थी की ये वीर्य है, लेकिन इस वक़्त यहा कैसे, क्या भैया ने शाम को मुठ मारी, अगर मारी तो साफ क्यु नही किया,
माया मेरे पास बैठ हुक्का पीने बैठ गयी, माया-- भैया, ये क्या है, और यहा किसने डाला है,
मै-- पता नही दीदी क्या है, भोला बनता हुआ बोला
माया-- पता नही, मुझे कई बार आपके कमरे मे ये सब देखा है, कही भैया आप गलत काम तो नही कर रहे ना,
मै समझ गया माया सब जानती है बस वो बात लेना चाहती है
मै-- न.... नही दीदी, भला मै ऐसा वैसा क्या करूँगा,
माया-- भैया, मुझे आप पर पूरा भरोशा है आप गलत काम मत करना, आपको सही रास्ता मै दिखाने के लिए हु, कोई भी बात हो अपनी दीदी से पूछ लेना, मै अपने भैया के साथ हमेशा तैयार हु,
मै समझ गया, माया आज मेरे लंड को देख मस्ती मे है
हम दोनो ने हुक्का पिया, माया ठीक है भैया आप सो जाओ, मै सुबह आती हु, कहती हुई चली गयी,
आज मै अकेला था, मुझे कहा नींद आने वाली थी,,
पूरी रात करवट बदल बदल कर काटी,
सुबह देर से उठा तो देखा घर मे आज पकवान बन रहे है, तभी दादी दिखाई दी,
मै--- दादी आ गई आप
दादी-- हा बेटा, वो मंदिर मे जागरण था तो वही रुकना पड़ा,
मै-- अच्छा है दादी, लेकिन आज इतनी रोनक कैसे है घर पर
दादी--बेटा आज फागुन माह लग गया है, ये महिना खुशियो भरा होता है, इसलिए आज इतनी खुशिया है घर पर,
और हा इस मौसम मे मस्ती बहुत ज्यादा चढ़ती है, इसलिए अपनी दादी का ध्यान रखना, ठीक है
मै-- हा दादी आपका तो रखूँगा ही, लेकिन वो बुआ वाला मामला ठीक करो ना,
दादी-- चिंता मत करो, बेटा, मैने सब सोच लिया है, अभी तुम नहा धो लो, फिर बताती हु,