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Incest रुतबा या वारिस

आगे..

तभी दादी उठी पैसाब करने चुनरी तो वीर्य से थी साइड मे पड़ी थी वो ब्लाउस और पेटिकोट मे पैसाब करके वापस आई तो सर्दी चड गयी दादी को, क्यु की वो तेज तो चल नही सकती, फिर मै उठा मे भी पैसाब करने गया बाहर बहुत सर्दी थी, मै भागकर जल्दी से पैसाब कर आया, दादी जग रही थी बोली बेटा कुछ लेकर जाता बाहर बहुत सर्दी है, मै बोला दादी जोर से लगी थी इसलिए जल्दी भागकर चला गया, दादी बोली जल्दी से रज़ाई मे घुस जा, me जल्दी से रज़ाई मे घुस गया, दादी की पीठ मेरी साइड थी बालों की काली चोटी नागिन सी पड़ी हुई थी, सर्दी चढ़ने के कारण मै दादी के पीछे चिपक गया और एक हाथ दादी के पेट पर डाल दिया बोला दादी बाहर बहुत सर्दी है, मेरा लंड लुंगी मे से ही दादी के मांस दार चूतडो से टच हो गया और हाथ मुलायम पेट पर था, दादी बोली कोई बात नही बेटा अभी रज़ाई मे गर्म हो जाएगा, अब दादी को कोन बताये की गर्म तो आपको टच करके होना है, खेर थोड़ी देर मे मैने थोड़ा और जोर देकर टच हो गया और दादी के पेट को जोर से दबा दिया, दादी अपने चूतडो पर लंड जो की खडा हो रहा था दादी के चूतडो पर रेंगने लगा, दादी के मुह से आह निकल गयी, मै बोला दादी क्या हुआ, दादी कुछ नही बेटा घुटनों मे थोड़ा दर्द हुआ इसलिए, दादी आज मस्त हो रखी थी पहले ही मेरा लंड देखकर और अब उनके चूतडो पर था दादी कोई बात नहीं कल मे मसाज कर दूंगा तेल से,दादी बोली ठीक है बेटा अब सोजा, दादी का शरीर गर्म होने लगा अब, तभी मैने हाथ को मुलायम पेट से थोड़ा नीचे किया और सोने का नाटक करने लगा और अपने एक ऊँगली को दादी की कुए से भी गहरी नाभि मे डाल दी, दादी अचानक से हिचकी और अपनी कमर को पीछे किया, क्यों की कई सालों बाद दादी की नाभि को किसी ने टच किया था, दादी की कमर पीछे होने से दादी के चुतड भी पीछे हो गये, और दोनो चूतडो के बीच मेरा तना हुआ लंड पेटिकोट पर से सेट हो गया, मैने दादी को थोड़ा कसकर पकडा था, मै निंद मे हिलने के बहाने दादी कि नाभि मे भी ऊँगली हिला देता, दादी की साँसे तेज होने लगी और और उनकी चुन्चिया और पेट दोनो उपर नीचे होने लगा, जिससे मेरी ऊँगली अब आराम से नाभि मै गोता लगा रही थी,,
 
आगे..

मै समझ गया दादी को आज अपनी जवानी की याद आ गयी गई, दादी अपने चूतडो के बीच खडा लण्ड महसूस कर रही थी, मैने चड्डी तो पहन नही रखी तो लंड पुरा घोड़े के लंड जैसा खडा था जो दादी के चूतडो की खाई से भी मोटा था, मेरी भी हालत बहुत खराब हो रही थी, तभी मैने नींद के बहाने पीछे हुआ और हिला, जिससे दादी को नींद मे लंगु, और मैने एक ही झटके मे अपनी लुंगी की गांठ खोल दी और फिर से दादी से चिपक गया, अब दादी के चुतड और लंड के बीच पेटिकोट ही था जिससे अब दादी लंड को आराम से महसूस कर रही थी, दादी की साँसे और तेज हो गयी, मेरी ऊँगली उनकी नाभि की सेर कर रही थी, तभी दादी की हल्की सी आह निकल गयी और दादी झटके मारकर हिलने लगी, और कई दिन बाद ऐसा होने पर दादी को पैसाब भी साथ मे निकल गया, मै समझ गया की दादी झर रही है और पैसाब की झर झर की आवाज से मै समझ गया की दादी से कैंट्रोल नही हुआ इसलिए पैसाब भी निकल गया, उनके झटके मेरे लंड से लग रहे थे, मेरा लंड चूतडो को आराम से दबा रहा था, दादी की चूत से आज कई दिन बाद पानी आया दादी कि चूत बहुत ज्यादा गीली हो गयी पानी और पैसाब से और पैंटी भी पूरी गीली हो गयी थी जिससे उनका हल्का सा पेटिकोट भी गिला महसूस हो रहा था, दादी की जवानी जैसे लोट आई हो ऐसा लग रहा था, थोड़ी देर बाद दादी ने धीरे से देखा तो मै सो रहा रहा, मे तो नाटक कर रहा था, दादी ने धीरे से रज़ाई मै ही लेटे लेते पेटिकोट को आगे से उपर कर गीली पैंटी को निकाल कर तकिये के नीचे छुपा दिया, और पटिकोट को नीचे कर वापिस सो गयी, मेरा लंड तो अब भी खडा था, पैंटी निकलने से दादी के चुतड पेटिकोट मे ही खिल रहे थे अब चूतडो की दरार थोड़ी पैंटी नही होने से खुल गयी, मैने जोर लगा रखा था तो सीधा पेटिकोट को साथ लिए लंड के जोर से लंड और पेटिकोट दोनो चूतडो मे थोड़ा सा घुस गया, मुझसे अब सहन होना मुश्किल हो रहा था, ऐसा देख दादी ने करवट ली और उनका मुह मेरी तरफ हो गया, मेरा मुह सीधा दादी के चुन्चो की घाटी पर लगा, और लंड का सुपाडा सीधा दादी की नाभि से लगा, मेरा हाथ दादी की कमर से पीछे से पकड़ रखा था, दादी की साँसे फिर से तेज हो गयी मेरा लंड का सुपाडा और मेरा मुह चुन्चो की घाटी पर लगते ही, दादी की आँखे खुली थी, मैने नींद मे ही दादी को और कस लिया, जिससे मेरे होठ सीधे चुन्चो की घाटी से लग गयी, और लंड का सुपाडा नाभि मे जोर देने लगा, तभी दादी ने अपना हाथ मेरे सर पर रखा, दादी की साँसे तेज होने से चुन्चो की घाटी को मे बार बार होठ लगा रहा, रसभरे चुन्चो से मेरा रुकना मुश्किल हो गया , मेरा पहला स्पर्श था किसी के साथ ऐसा, तभी मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी निकली जो सीधी दादी की नाभि मे लगी, और मेरी मस्ती से होठ खुल गये और दांत दादी के चुन्चो की घाटी से लगे, दादी की नाभि मे मेरा पानी निकलने लगा, दादी का हाथ भी मेरे सिर को जोर से चुन्चो मे दबा दिया और आह आह आह करती हुई झटके मारने लगी, मै समझ गया की दादी नाभि मे वीर्य और चुन्चो पर दांत को सहन नही कर पायी, दादी की नाभि वीर्य से भर गयी दादी की पकड़ सिर से कमज़ोर हो गयी और मेरा लंड भी तनाव कम हो गया, बेड पुरा गिला हो गया, दादी ने मुझे देखा की मै सो रहा हु दादी ने मेरा माथा चूमा और हल्की सी मुस्करा दी, मुझे पता नही कब नींद आई आज अच्छे से पानी निकला था, तो अच्छी नींद आई, मेरी सुबह हल्की सी आँखे खुली,,
 
माया दादी को चाय दे रही थी, तभी दादी बोली की ला मेरे लाल को मे चाय दे दूंगी तु जा घर की सफाई कर, माया दादी को चाय देके चली गयी, और दादी मेरी तरफ धीरे धीरे चलती हुई चाय ला रही, मै बेड पर बैठा था बेड अब भी वीर्य से गिला था, दादी ले चाय पीले, और दर्द कैसा है अब बेटा, दादी अब कम है पहले से, आपका दर्द कैसा है, दादी बोली बेटा थोड़ा हो रहा है, दादी की नजरो मे प्यार और जवानी और मस्ती नज़र आ रही थी, दादी आज दिन मे करेंगे और चाय पीने लगा, दादी ने चुनरी जो वीर्य से भरी थी उठाई और चल दी, मे मै चाय पी ही थी की मुझे याद आया की दादी ने रात को चूत का पानी और पैसाब से भरी पैंटी तकिये के नीचे रखी थी, मैने जल्दी से तकिया उठाया तो पैंटी वही थी, मैने जल्दी से उठाया और देखा उस पर चूत के पानी से एक पपड़ी आ रही थी, पैंटी अभी भी कुछ गीली थी मैने तुरंत पैंटी को नाक के पास लाया और सुघने लगा, चूत का पानी और पैसाब की महक से मेरा लंड फिर से खडा हो गया, और मै मस्त हो गया, तभी मैने जहा से पैंटी गीली थी अपने मुह मे ले ली, कसम से नशा सा हो रहा था, इतने मे दादी ने आवाज दी की चाय पीली अब बाहर आजा,, और दादी कमरे की तरफ आती हुई दिखाई दी, मैने जल्दी से पैंटी को फिर से तकिये के नीचे लगा दी, दादी आई बोली जा नहा ले, मैने बैठे बैठे ही लुंगी बांधी और खडा होके बाहर चला गया, इतने मे दादी ने तकिये से पैंटी निकली और चली गयी,, next
 
आगे जाती हुई दादी को देखा तो आज और भी ज्यादा मस्त लग रही और चेहरे पर ताजगी महसूस हो रही थी, मै रात वाली बात के बारे मे सोच कर मस्ता रहा था, मै उठा और नहा कर बिना चड्डी के लुंगी पहन आया तो दादी ने खाना लगा रखा था दादी मुझे देख बोली, मेरे लाल बिल्कुल अपने दादा पर गया है तूझे देख तेरी दादा की याद आती है, कहकर खाना खाने को साथ बोली. दादी बोली पहले खाना खा लेते है फिर मालिश करते है, दादी की आँखो मे आज खुशी और वासना झलक रही थी, दादी रात से जवानी की यादों मे खो गयी इतने सालों बाद जो ऐसा हुआ, हम दोनो ने खाना खाया माया ने बर्तन साफ किये और चली गयी, दादी बोली चल अब मालिश करते है दादी इस बहाने मेरे घोड़े जैसे लंड को देखना था, मै लुंगी मे था ही, दादी बोली बेटा पहले मेरे घुटनों की मालिश कर दे मुझसे रात को अच्छी नही हुई, मेरा दिल खुशी के मारे नाचने लगा की आज दादी की मस्त गोरी गोरी टांग को हाथ लगाउँगा, दादी बेड पर लेते गयी, मैने तेल की शीशी उठाई और दादी के परो के साइड मे आकर बैठ गया, दादी ने हाथ बढाकर पेटिकोट को पकड़ उपर करने लगी और अपने घुटनों से थोड़ा सा उपर तक कर दिया, दादी नागिन सी पड़ी हुई, फुला हुआ ब्लाउस, कुए जैसी नाभि और गोरी टांग देख लुंगी मे ही मेरा लंड तनने लगा, मैने बिना देर किये हतेली पर तेल डाला और जैसे ही दादी के घुटनों पर हाथ रखा मै और दादी सहम से गये, दादी की मुलायम खाल को टच करते ही लंड फड़ फड़ाने लगा, मैने धीरे धीरे घुटनों की मालिश करने लगा,दादी मेरी तरफ देख रही और बोली बिल्कुल अपने दादा पर गया है, दादी को दादा की याद आ रही थी उनके साथ

जो मस्ती भरे पल जिये थे,दादी के चेहरे से जवानी झलक रही थी, तभी मैने थोड़ा जोर से दबाया, दादी की आह निकल गयी दादी बोली बेटा आराम से, कुछ देर मालिश करता रहा तभी दादी बोली बेटा थोड़ी जाँघ पर भी दर्द सा है उस पर भी लगा दे और दादी ने पेटिकोट को पकड़ एक पेर से उपर थोड़ा किया, दादी की मुलायम और गोरी सी मांस से भरी देख मेरा लंड पुरा तन गया और एक ही झटके में लुंगी से बाहर आ गया, दादी की नज़र तुरन्त मेरे लौडे पर गयी और उनकी आँखे चोड़ी हो गयी और साँसे लंबी हो गयी, मै समझ गया की दादी मस्ती मे हो गयी, दादी भी समझ गयी की मेरा लोडा उनकी गोरी जाँघ देख कर खडा हो गया है, हम दोनो जान बूझकर अंजान बने हुए थे, तभी मैने देखा की दादी की जाँघ एक जगह से लाल हो रखी थी, मैने थोड़ा सा तेल हाथ पर लिया और जल्दी से दादी की जाँघ पर हाथ रख दिया, उनका स्पर्श पाकर मेरी भी साँसे तेज हो गयी, और लोंडा एक दम टाइट हो गया, दादी मेरे हाथ लगने से एक दम से आह निकल दी, मै समझ गया दादी कई सालों बाद ऐसा हुआ है इसलिए ऐसा हुआ है, मै अंजान बनते हुए दादी क्या हुआ, दादी झुठ बोलते हुए बेटा कुछ नहीं थोड़ा दर्द हुआ है, हम दोनो की साँसे गर्म और तेज हो रही थी, दादी की नज़र मेरे घोड़े जैसे लंड पर थी, मै धीरे धीरे जाँघ को मालिश कर सहला रहा था, दादी बोली बेटा तुझे भी दर्द है ना, मै बोला हा दादी, दादी मेरे लौडे को छुना चाहती थी, बोली बेटा एक काम कर, तु मेरी साइड पैर करके लेट जा, तु मेरी मालिश कर दे मै तेरी कर देती हु.. Next..
 
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मैने तुरन्त अपने पैर सीधे कर दिये और लेट गया दादी सीधी लेटी मेरा खड़ा लण्ड देख रही थी, दादी बोली बेटा ला तेल डाल हाथ पर मै भी तेरी मालिश कर देती हु, दादी की आवाज मै मस्ती लग रही थी, तभी मैने दादी के हाथ पर तेल डाल दिया, और अपने पैर दूसरे को मोड दिया, एक पैर से पेटिकोट उपर था और दूसरे पैर के घुटनों तक आ गया, दादी ने अपनी हतेली को सीधा मेरे लंड के सुपाडे पर रख दिया, मेरा सुपाडा दादी के हाथ लगते ही एक दम लाल सा हो गया, दादी की नज़र मेरे लंड पर थी और हाथ को लंड से नीचे उपर करने लगी, मुझे बड़ा असीम आनंद आ रहा था, मेरे पैर दादी की तरफ और दादी के पैर मेरी तरफ थे, दादी का हाथ लंबी दूरी तय कर मेरे लंड की मालिश करते हुए उपर नीचे कर रही थी, दादी अपने वारिश और कई दिनों के बाद लगी आग मे सब भूल रखी थी , उसने ऐसा लंड कभी ज़िंदगी मे भी नही देखा था, तभी दादी का दूसरे पर जो मुड़ रखा था घुटनों से पेटिकोट नीचे जाँघ पर गिरा, दादी की दोनो नंगी जाँघ देख मेरा लंड साँप की तरह हो गया, दादी मेरे लंड मे देख रही और उसी मे खो रही थी, मुझसे अब रहा नही जा रहा रहा, मैने देखा दादी लंड मे खोई हुई मालिश कर रही हैं, मैने मालिश के बहाने जाँघ से पेटिकोट को उपर करना शुरू कर दिया, दादी की एक जाँघ तो पहले ही नंगी हो गयी थी दूसरी को मैने धीरे धीरे कर दिया, दादी के दोनो नंगे पैर देख लोंडा आग उगल रहा दादी अपनी कलाई को घुमा घुमा लंड की मालिश कर रही थी, next.
 
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दादी की साँसे बहुत तेज हो गयी थी अचानक से मेरी साइड करवट लेली, उनका हाथ लंड पर चल रहा था, दादी का मुह मेरी तरफ कर रखा था, मैने भी अपनी पीठ उठाकर थोड़ा सा दादी की साइड करवट ली और अपने एक हाथ की कुहनी मोड उस पर सारा वजन डाल लेट गया, दादी के करवट लेने से उनकी जांघो से पेटिकोट पुरा उपर हो गया और दादी की सफ़ेद पैंटी की झलक मुझे दिखनी लगी, दादी मेरे लंड मे खोई हुई थी, जैसे ही दादी कि पैंटी की झलक दिखी लंड साँप की तरह फुहार मारने लगा, मैने दादी की मालिश करते करते पेटिकोट को थोड़ा और उपर करना शुरू कर दिया, दादी के दोनो पैरो के बीच उनकी चूत की फान्के ढकी हुई मोटी मोटी फान्के चूत से झलक रही थी, उनकी चूत मे पानी आने से पैंटी थोड़ी जगह से गीली हो चुकी थी, पहली बार किसी की चूत पर पैंटी देख मेरा लंड सुना हो गया था, तभी दादी की वासना भरी आवाज से बोली मेरा बेटा पुरा घोड़ा है, मे समझ गया दादी लंड को देख कर बोली है, मै बोला दादी घोड़ा कैसे मै तो आदमी हु, दादी की नज़र लौडे पर थी बोली हा बेटा तु तो लड़का है लेकिन तेरा हथियार घोड़े जैसा है दादी हथियार कोनसा है दादी के हल्की सी हंसी बेटा तेरा लंड घोड़े जैसा है बिल्कुल, और उसके जितना ही पानी निकलता है और उतनी दूर फेंकता है, दादी बोली बेटा हम दोनो की मालिश वाली बात किसी को बताना मत तुझे दादी की कसम है मै हा दादी किसी को नही बताऊंगा, आपकी कसम, मै रोमांचित हो गया था पुरा, दादी दादा भी घोड़े थे क्या सब घोड़े होते है क्या, दादी को दादा की बात सुन उनकी याद करते हुए, नही बेटा ऐसा हथियार भगवान हर किसी को नही देता, नसीब वालो को देता है तेरे दादा का हथियार तो तेरे से आधा और पतला था, मै समझ गया तभी दादी ऐसी नज़र से मेरे सुने लंड का दीदार कर रही है, दादी क्या सबका पानी इतनी दूर नही जाता और इतना पानी नही निकलता, दादी नही बेटा तु घोड़ा है इसलिए इतना पानी निकलता है और इतनी दूर जाता है, मेरा बेटा पुरा मर्द है , तभी मैने मालिश करते हुए अपनी हाथ की ऊँगली को दादी के जांघो को सहलाते हुए उनकी मोटी चूत की एक फांक को ऊँगली लगाई, मेरे सुने लंड जैसे अभी कट कर हाथ मे ले लू लगा, पैंटी के उपर से ही गर्म हो रखी थी फान्के, पैंटी थोड़ी और गीली होने लगी और दोनो की साँसे तेज हो गयी, जैसे ही मैने दुबारा मालिश करते हुए चूत की फांकों को ऊँगली लगाई, दादी की आह निकल गयी और दादी की पकड़ लंड पर कस ली, और तेजी से लंड पर हाथ चलन लगी, लंड इतना मोटा था की दादी के पूरे हाथो मे नही आ रहा था, दादी मेरी ऊँगली का स्पर्श पाते ही आह आह आह करती हुई झटके खाने लगी और मस्ती मे उनके चूत से पानी और पैसाब की बौछार निकल पड़ी जो पैंटी मे से नदी की तरफ निकल रही, ऐसा नज़ारा देख मेरे लंड ने हिम्मत छोड़ डी, और दादी की तरफ मुह किया लंड से वीर्य की पिचकारी निकल पड़ी जो दादी के गले, ब्लाउस और पेट पर गिर रहा था, तभी दादी ने लंड पर रफ्तार कम कर दी, लंड से बहुत सारा वीर्य दादी और बेड पर पड़ा था, अब लंड शांत होने लगा, दादी, मेरे बच्चे दर्द कम हुआ क्या, मै बोला हा दादी और थक कर पीछे लेट गया, दादी बोली मस्ती से मेरे बेटे ने मेरी भी अच्छी मालिश की मेरा दर्द भी दूर हो गया, दादी ने मेरे उपर लुंगी डाली, और खुद को चुनरी खोल साफ करने लगी, बोली मेरे लाल ने मुझे पुरा भर दिया, दादी माफ करना, मुझसे रुका नही गया, दादी बोली कोई बात नही मेरे लाल, आखिर इस घर का वारिश जो है पुरा मर्द बन गया है, मै समझ गया की दादी अब लंड की दीवानी हो चुकी है और जवानी मे मस्ताने लगी है, मुझे नींद आ गयी, शाम के 4 बजे थे की माँ घर पर आ गयी, मै दादी माँ के पास चले गये, दादी बोली जमाई जी की तबियत अब कैसे है, माँ बोली हालत बहुत खराब है आप दोनो भी मिल आओ अभी चले जाओ उनका कोई भरोसा नही, दादी बोली शुभ शुभ बोल बहु, दादी घबरा गयी बोली मेरे लाल चल त्यार हो जा हम अभी चलेंगे, माँ बोली हा सही है अभी चले जाओ, बुआ को भी अच्छा लगेगा,, Next...
 
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मै और दादी तैयार हो रहे थे, तभी मैने पूछ लिया दादी तेल भी लेना है है क्या दादी जमाई की तबियत के बारे मे सुनकर उदास लग रही थी, बोली बेटा वहा समय नही होगा इतना तु रख ले खुद की मालिश कर लेना, मैने तेल की शीशी रख ली और दोनो गाड़ी मे बैठ कर बुआ के घर की तरफ निकल पड़े, हम बुआ के घर पर पहुंचे थे की एक कमरे मे फूफा जी बेड पर लेटे हुए है बुआ जी उनके पास बैठी हुई थी, पास मे वैध जी बैठे थे, बुआ ने दादी और हम दोनो कि तरफ देखा और भागकर आई और दादी के गले लग गयी, रोती हुई माँ.... कहने लगी, दादी का गला भी भर गया और बुआ को गले लगाती हुई रो मत मेरी बच्ची, सब ठीक हो जाएगा, बुआ को गले से दूर कर जमाई जी अब कैसे है आपकी तबियत, फूफा जी माँ जी पहले से तो ठीक है लेकिन पुरा आराम नही है दादी बोली आ जाएगा आराम वैध जी, जो दवा दे रहे है उनको समय पर लेते रहना, दादी वैध जी को बाहर लेकर जाती है और फूफा के बारे में पूछती है वैध जी बोले उनका शरीर पहले से ही कमज़ोर है और बीमार होने से और कमज़ोर हो गया है, थोड़ा समय लगेगा ठीक होने मे, दादी कुछ ज्यादा तकलीफ है तो शहर लेकर जाए, वैध जी नही ऐसी कोई ज्यादा खास बात नही है बस कमज़ोरी से सब हो रहा है दादी वैध जी से बात कि तो थोड़ी तस्सली हुई, और फूफा के पास बैठ गयी, इधर बुआ ने मेरी तरफ देख मेरा बेटा आ गया हमसे मिलने, मेरी नज़र बुआ की बड़ी बड़ी चुन्चिया, उनका पेट और उस पर छोटी सी नाभि मस्त सी कमर देख मस्त हो रहा , बुआ ने मुझे गले लगा लिया और बोली बेटा कैसा है बुआ मै ठीक हु फूफा के बारे मे सुना तो चला आया, बुआ मेरा बेटा बहुत ख्याल रखता है, बुआ भी मुझे अपना बेटा ही मानती थी, बुआ एकदम जवान थी और दादी थोड़ी गद्रायी हुई मदमस्त थी, बुआ एक पतिवृता नारी थी, बड़ी सी माँग और बड़ी सी बिंदी लगाती थी लेकिन बच्चा नही होने के कारण उनका बदन वैसा का वैसा ही था, इतने मे शाम होने चली, दादी को भी फूफा जी से बात कर तस्सली हुई, मैने भी फूफा जी से बात की, तभी बुआ बोली मै खाना बना लेती हु, आप लोग बाते करो, दादी बोली बेटा तु भी जा अपनी बुआ के साथ कुछ मदद करवा देना, बुआ बोली नही मेरा बेटा पहली बार घर आया है आराम कर, मै बोला बुआ मै आपका बेटा हु ना तो मेरा फर्ज़ नही बनता क्या अपनी बुआ की मदद करू, बुआ हंसी और बोली कितना ख्याल रखता है मेरा बेटा, बोली चल तो आजा मेरे साथ, मै बुआ के साथ रसोई घर की ओर चल पड़ा, बुआ आगे मै पीछे था, बुआ की मटक ती हुई कमर और उस पर जवानी से भरे चुतड चुनरी मे मटक रहे थे, मेरे लंड पेंट से ही मचलने लगा,बुआ बोली बेटा तु पास मे खडा रह मै अपने आप सब काम कर लुंगी, मौसी रसोई मे खाना तैयार करने लगी, मेरी नज़र कभी बुआ के बड़े बड़े टाईट चुन्चियो पर कभी उनके कसे हुए चौड़े चुतड पर थी, मेरा लंड अपनी बुआ को देख फड़ फड़ा रहा था, मुझे किसी और महिला का दीदार नही होने के कारण मै अपनी घर की महिलाओं को देख कर ही मस्ती मार रहा था, खाना तैयार हो गया फूफा के लिए दलिया बनाया, हम सबने खाना खाया, सर्दी जोर पे थी, बुआ बोली माँ आप दोनो पास मे ही कमरा था उसमे सो जाना, मै उनके पास रहूँगी उनको रात को दवा पानी देनी होती है, बुआ बोली आप दोनो चलो मै उनको दवा देकर आती हु, मै और दादी कमरे मै आ गये वहा बड़ा सा बेड था और एक कंबल थी, मै दादी जल्दी से कंबल मे घुस गये और बैठे थे, मै दादी से फूफा की तबियत के बारे मै पूछने लगा,.. Next..
 
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तभी बुआ फूफा जी को दवा देकर आ गई, और कंबल मे पैर डालकर बैठ गयी, हम तीनों बैठकर बाते करने लगे, दादी बोली बेटी चिंता मत कर जमाई जल्दी ठीक हो जाएंगे,

बुआ--माँ आप दोनो कुछ दिन यही रुक जाओ, मुझे अच्छा लगेगा, मेरी तरफ देखती हुई मै अपने बेटे से भी अच्छी तरह मिल लुंगी, और थोड़ी सी हंसी

दादी- ठीक है बेटी हम कुछ दिन तेरे पास ही रहेंगे, तभी मेरे दिल मे खुशी की लहर उठी, मै बुआ को दिल भर कर देखूंगा, मेरे सामने बुआ माँग मे सिंदूर बड़ी सी बिंदी, और ब्लाउस मे तने हुए चुन्चे, एकदम अप्सरा लग रही थी,

हम तीनो कुछ देर बाते करते रहे, तभी मै बोला दादी मुझे नींद आ रही हैं मै सो जाता हु, दादी - ठीक है बेटा सोजा लेकिन कपड़े तो बदल ले, मै बोला दादी मे लुंगी नही लाया तभी, दादी ने बुआ की तरफ देखती हुई बोली इसको लुंगी मे सोने की आदत है

बुआ- कोई बात नही, बेटा मै तेरे फूफा की लुंगी लेकर आती हु वो पहन कर सो जाना, कहती हुई बेड से खड़ी होकर लुंगी लाने चली गयी,

दादी बेटा आज चड्डी मत निकालना तेरी बुआ देखेंगी तो अच्छा नही लगेगा, मै बोला दादी चड्डी तो मैने पहनी नही आपने ही तो मना किया हुआ है, दादी बोली कोई बात नही बेटा तु साइड मे होकर कपड़े बदलना तेरी बुआ को ना पता चले, दादी को डर था की मै बिना चड्डी दादी के साथ सोता हु बुआ को पता नही चल जाए,..

इतने मे बुआ लुंगी लाई,

बुआ- ले बेटा ये पहन ले और सोजा कहती हुई कंबल मे पैर डाल लिए,

मै खड़ा हुआ लुंगी उठाई और साइड मे जाके लुंगी को लपेट और हाथ डाल पेंट खोल दी पेंट निकाल रख लुंगी पहन जल्दी से कंबल मे घुस गया, और लेट गया और सोने की कोशिश करने लगा और आँखे बन्द कर ली, कुछ देर ऐसे ही लेटा हुआ था, दादी ने मेरी तरफ देखा कि मै सोया या नही, मेरी बन्द आँखो को देख, मै कोई हलचल नही कर रहा सोचा की मै सो गया हु, धीरे से बुआ से बोली बेटी एक बात तो बताओ, तुम पेट से हूई या नही,

बुआ- नही माँ, बहुत कोशिश कर रही हु लेकिन उनकी कमज़ोरी के कारण कभी कभी होता है, वो भी सही नही होता कहा से पेट से होऊ कहकर थोड़ा दुखी सी हो गयी, मै नींद के बहाने सब बात सुन रहा था, दादी- बेटी जल्दी कोशिश कर मुझे बहुत डर लगता है कही कुछ अनहोनी ना हो जाए

बुआ- माँ कोशिश तो बहुत कर रही हु लेकिन इनकी कमज़ोरी मे बहुत कम हो पाता है, पता नही मेरे नसीब मे ओलाद का सुख है या नही.

दादी - बेटी चिंता मत कर भगवान सब देख रहा है वो जरूर तेरी सुनेगा,

मे सोच रहा तभी बुआ के बच्चे नही हो रहे, तभी ये जवान दिख रही है, फूफा तो इनकी जवानी का मज़ा लेते नही, बुआ और दादी कुछ देर बाते करती रही फिर दादी बोली बेटी अब सोजा हम कल दिन मे बात करेंगे, बुआ बोली ठीक है माँ, कहती हुई उठी और बोली माँ रात को कुछ चाहिए तो मै पास वाले कमरे मे हु आवाज लगा देना उस तरफ टॉयलेट है कहकर फूफा के कमरे मे चली गयी, दादी ने कहकर चुनरी खोल लेट गयी, कुछ देर मे ऐसे ही लेटा रहा उठा और बोला दादी मै पैसाब करके आता हु दादी बोली ठीक हैं बेटा कर आ, मै पैसाब कर आया और कंबल मे सो गया, दादी जग रही थी कि मै बोला दादी सो क्यु नही रही आप,

दादी- बेटा आज ना दारू पी ना हुक्का लगाया, इसलिए बैचेनी सी हो रही है तू सोजा मेरे लाल, मैने दादी से चिपते हुए नही मै कैसे सो जाऊ मै तो दादी के साथ मे ही सोऊंगा, और एक हाथ दादी के पेट पर से डालते हुए साइड मे कमर पर रख दिया, और दादी से चिपक गया, दादी की जाँघ की साइड पर मेरा लुंगी में पड़ा लंड टच कर दिया, दादी का कोमल स्पर्श पाके लंड मे तनाव आने लगा, दादी बोली मेरा लाल मेरा कितना ख्याल रखता है, दादी बोली कल बेटी को कहूंगी दारू और हुक्का के लिए, तभी मैने दादी आपका दर्द कैसा है अब दर्द है तो मालिश कर दु मै तेल लाया हु, दादी थोड़ी सी हस्ती हुई, मेरा लाल मेरा बहुत ध्यान रखता है, जब ले ही आया है तो जा कमरा बन्द कर दे कूंडी लगा दे और मालिश कर दे, मै जल्दी से उठा कूंडी लगाई और बेग से तेल की शीशी निकाली और बेड पर आ गया, दादी ने अपने पेरो से कंबल निकाल दी, मैने देखा दादी मदमस्त नागिन कि तरह लेटी थी, बड़ी बड़ी चुन्चिया ब्लाउस को उभार रही थी, मोटी सी नाभि, और पेटिकोट, तभी बोली बेटा तेरा दर्द कैसा है मै बोला दादी अब ज्यादा नही है, दादी बोली कोई नही जब तेल पास मे है तो लगा देती हु, कल की तरह, दादी को मेरे लंड पसंद आ गया था वो उसको किसी भी बहाने से छूना चाहती थी बस, दादी बोली बेटा घुटनों मे दर्द नही है जाँघ पर दर्द है मै समझ गया दादी मालिश के बहाने खूद को शांत करना चाहती है, झर कर, दादी जवानी कि याद मे आना चाहती है तभी दादी ने पेटिकोट को पकड़कर उपर जाँघ तक कर दिया, आज पुरा पेटिकोट उपर किया तो दोनो जाँघ दूध कि तरह चमक रही थी, मांस से भरी गोरी गोरी, जाँघ देखते ही मेरे लंड मे हलचल हो गयी और खडा हो गया और जहां से लुंगी बांधते है वहा से नीचे तक पुरा ऐसे ही जुड़ा रहता है उस जगह से बाहर आके खडा हो गया, दादी ने जैसे ही लंड निकलता देखा वो समझ गयी की उनकी गोरी गोरी जाँघ को देखकर मेरा लंड खड़ा हुआ है, दादी ने एक लंबी साँसे ली, दादी से रहा नही जा रहा था दादी बोली बेटा जैसे कल लेटा था वैसे लेट जा मै भी तेरी कर देती हु, और दादी ने करवट मेरी तरफ ली और अपना एक पैर जिस पर लगी नही थी उसको घुटनों से मोड दिया और एक पैर सीधा था, दादी के ऐसे लेटने और पैर मोड़ने से दादी का पेटिकोट थोड़ा और उपर सरक गया और दादी की लाल पैंटी कि झलक दिखी, मैने बिना देरी करते हुए दादी के हाथ पर तेल डाला और खुद कि हतेली पर तेल डालकर कल की तरह लेट गया, दादी ने बिना देर करते हुए झट से लंड के सुपाडे पर तेल भरा हाथ रखा, जो बहुत ही गर्म था और हाथ को लंड पर दबाती हुई नीचे ले जाने लगी, और कभी उपर करती, दादी के हाथ के साथ लंड के सुपाडे पर कभी लंड की खाल आती और कभी नीचे चली जाती, दादी के ऐसे करने पर लंड पूरी तरह तन गया, मैने भी बिना देर के दादी की जाँघ पर तेल भरा हाथ रख दिया, क्या ही कोमल और मस्त जाँघ थी, मज़ा आ गया, और मालिश करने लगा, दोनो अपनी मस्ती मे मालिश कर रहे थे, तभी मैने पूछ लिया दादी एक बात पूछूँ दादी समझ गयी कोई मस्त ही बात पूछेगा पक्का, हा बेटा पूछ, मै तुझे सब बताऊंगी, मै बोला दादी मै जब मालिश कर रहा था कल तब आपने झटके खाकर पैसाब क्यु कर दिया, आप बोल देती और पैसाब कर आती बाहर, दादी हंसी और बोली मेरा लाल कितना भोला है, मै दादी बताओ ना, दादी अब मेरे साथ खुलकर बात करती थी, बेटा जैसे तेरा पानी निकलता है और मज़ा सा आता है वैसे ही हम औरतो का भी होता है, मै बोला दादी आपने तो मेरा लंड की मालिश की तब निकला मैने तो आपके लंड की मालिश नही की और मेरे तो पैसाब नही निकला दादी, मै भोला बनकर दादी से यह सब पूछ रहा था, दादी फिर से हंसी पागल हम औरतो के लंड नही होता है, मै दादी तो फिर क्या होता है जिससे आपका पैसाब निकल गया, दादी मेरी बातो से मस्त हो रही थी और लंड को दबा दबा कर मालिश कर रही थी, पागल हम औरतो के जहा से पैसाब निकलता है उसको चूत कहते है, और पागल सबको पैसाब नही आता, अब मै इतनी जवान नही हु ना तो जब मज़ा आता सा आता है तो पैसाब रोक नही पाती इसलिए निकल गया, मै बोला दादी लेकिन आपको मज़ा सा क्यु आया मैने तो आपकी चूत पर मालिश नही की, दादी मेरी बात सुनकर जोर जोर से साँसे लेने लगी, पहली बार मैने दादी की चूत की बात की भोला बनकर, दादी ने लंड पर स्पीड बड़ा दी थोड़ी, और मै भी जाँघ को थोड़ा दबा दबा कर मालिश दे रहा, दादी बोली बेटा औरत एक नाजुक सी होती है उसका हर अंग नाजुक होता है जब कोई उसको हाथ लगाता है तो वो मस्ती मे हो जाती है, तूने भी ऐसा किया इसलिए मुझे अच्छा लगा, मैने देखा की दादी ने अपने पेरो को थोड़ा चौड़ा कर दिया, जिससे उनकी पैंटी आराम से दिख रही, लाल पैंटी दोनो पेरो के बीच चूत के दोनो फांकों को ढकी हुई थी और बीच मे से गीली हो रही थी, मै समझ गया दादी पूरी गर्म है, मै बोला दादी कोनसा कोनसा अंग नाजुक होता है दादी बोली बेटा जो औरत ढक कर रखती है वो सब नाजुक होते है, मै बोला दादी पेट नही होता क्या, दादी बोली हा बेटा पेट भी होता है, नाभि भी, लगभग सभी होते है, अच्छा दादी मैने आपकी जाँघ की मालिश की तभी आपको अच्छा लगा, दादी बोली हा बेटा, मेरा लाल समझदार हो गया है, जीता रह, हम दोनो मालिश से मस्त हो चुके थे लंड तेल से चमक रहा था, मैने धीरे से मालिश करते हुए दादी की पैंटी जहा से गिला था ऊँगली लहरा दी, दादी अचानक से अपनी कमर का उठाई, दादी की चूत के छेद पर जो लगी, दादी की पैंटी और गीली होने लगी, दादी लंबी साँसे लेने लगी,तभी मैने दुबारा से वही ऊँगली लगाई मालिश के बहाने, दादी से रहा नही गया और, हें राम मर गयी कहती हुई झटके के साथ झरने लगी, और पैसाब की झल झल आवाज के साथ करने लगी, दादी दादी ने अपने दोनो पेरो को दबा लिया जोर से, मेरा हाथ दादी के दोनो जाँघ के बीच फसा हुआ था, दादी के दोनो जाँघ की गर्मी से मै भी पिंघल गया, और लंड ने पानी छोड़ दिया, आज दादी ने जब पानी निकलने वाला था लंड को दूसरी साइड कर दिया, मेरा लंड दीवार के सामने था, और दीवार पर वीर्य की पिचकारी जाने लगी, बहुत सारा वीर्य दीवार पर गिरा और कुछ फर्श पर, मै अब शांत हुआ, दादी बोली क्या खाता है मेरा लाल, कितना बीज निकलता है, पूरी दीवार भर दी, सुबह जल्दी साफ करनी पड़ेगी नही तेरी बुआ क्या सोचेगी,, next
 
मै और दादी, दोनो थोड़ा खुल गये थे, तभी दादी बोली ab सोजा और खुद खड़ी होकर दूसरी साइड मुह कर अपना पेटिकोट मे हाथ डाल गीली पैंटी को निकाल दिया बोला बेटा गिले मे नींद नही आती, और हम दोनो लेट कर कंबल ओड़ ली, दादी बेटा तुझे अच्छा लगता है क्या मेरे हाथ से मालिश दादी ने मस्ती भरी आवाज मे बोली, मै बोला हा दादी, और आपको दादी, दादी बोली बेटा मुझे तु अच्छा लगता है तो सब अच्छा लगता है और मुस्करा दी, मै लुंगी मे सो रहा था, हम दोनो सोने लगे आधी रात को सर्दी के कारण मे दादी से टच हो गया, मेरे लंड मे फिर से हलचल होने लगी, मैने जान बुजकर अपनी लुंगी खोल दी जिससे लंड दादी की जाँघ से लगा, शायद दादी भी सोने का बहाना कर रही थी, उनकी जवानी जो भड़क रही थी, दादी ने इतने मे दूसरी साइड मुह कर लिया, और पीछे होती हुई मुझसे टच हो गयी, मेरा पेट दादी के कमर पर था और लंड उनके चूतडो पर, मेरा लंड पूरी तरह खडा हो गया और मे उसको चूतडो पर दबा दिया, दादी धीरे धीरे मुझसे टच थी पीछे लंड पर जोर दे रही, उनको मेरा लंड पसंद आ गया, मैने धीरे से एक हाथ से दादी का पेटिकोट उपर करने लगा , मुझमे दादी को चोदने की इच्छा होने लगी, दादी का बदन मुझे पागल कर रहा था, मै सब रिश्ते भूल कर दादी को चोदने की सोचने लगा, और मैने पेटिकोट उपर सरकाकर उनकी जांघ तक कर दिया, दादी और मेरी दोनो की साँसे तेज होने लगी और हम दोनो सोने का बहाना करने लगे, तभी दादी को पता नही क्या हुआ उसने करवट बदल ली और सीधी हो गयी, और पेटिकोट को हाथ से नीचे कर दिया और मुझसे दूर होकर सोने लगी, मै डर सा गया मेरा लंड फिर शांत सा हो गया, हम दोनो सो गये, दोनो थके हुए थे, तभी मेरी आँख खुली तो सुबह हो चुकी थी, बुआ चाय लेके कमरे का दरवाजा बजा रही थी, तभी दादी की आँख खुली, दादी ने जल्दी से उठ कर अपनी चुनरी लगाई और दरवाजा खोली सामने बुआ चाय लेके खड़ी थी, बोली माँ उठी नही आज लो चाय पिलो कहती हुई कमरे मे आई और मुझे चाय देकर बोली मेरे बच्चे को अच्छी नींद आई क्या, मैने चाय लेते हुए हा बुआ अच्छी नींद आई मुझे और दादी को, तभी बुआ की नज़र दीवार पर पड़ी, दीवार पर पानी की सी लेकिन थी और फर्श पर पानी सा गिरा पड़ा बहुत सारा, मेरा वीर्य पिंघल कर पानी हो गया था, तभी बुआ बोली ये क्या है, रात को तो नही था, इतना सुनते ही दादी का डर के मारे चेहरा लाल हो गया, दादी सोच रही अब क्या जवाब दु, तभी मैने बात को संभालते हुए बुआ वो रात को मुझे जोर से पैसाब लगी तो मैने यहा कर दिया, मुझे बाहर डर सा लग रहा था, और पैसाब जोर से लगी थी तो,, बुआ हंसी बोली मेरे लाल को डर लगता ही अभी भी बच्चा है तु, दादी ने चैन की साँसे लेते हुए, बेटी कोई कपड़ा लादे मै साफ कर दूंगी, बुआ बोली माँ आप क्यु करोगी मै कर दूंगी, दादी को डर था की बुआ साफ करेगी तो पता चल जाएगा की पैसाब नही है, और बेड भी गिला था लेकिन उस पर कंबल थी, बुआ बोली मै कर दूंगी आप दोनो जंगल जा आओ मतलब शौच हो आओ, बुआ के वहा पास मै ही छोटा सा जंगल सा था, बुआ साफ करने का कपड़ा लाने गयी तभी दादी बोली बेटा तूने बच्चा लिया मेरी तो जान ही निकल गयी, मै बोला दादी आपकी जान नही निकलने दूंगा, मै हु ना सब संभाल लूंगा, दादी पास आके मेरे माथे पर किस किया, और बोली जल्दी से कपड़े पहन ले, तेरी बुआ आती ही होगी, मैने जल्दी से कपड़े पहन लिए तभी बुआ आ गयी मै बोला बुआ वो मैने रात को बिस्तर भी गिला कर दिया पैसाब से, उनको भी बदल देना, बुआ हस्ती हुई कितना पैसाब करता है पागल,, कोई नही आप दोनो जाओ और जल्दी से आकर नहा लो, दादी मेरी तरफ देख मुस्करा दी, मै दादी बाहर आये दोनो ने एक एक लोटा पानी का भर जंगल की तरफ़ चल दिये, तभी दादी बोली मेरा लाल अब समझदार हो गया है फिर से मेरा काम अपने सर ले लिया, मै बोला दादी आपके लिए मै कुछ भी कर सकता हु, दादी सुन मुस्करा दी इतना प्यार करता है दादी से, हा दादी आपने मुझे इतना कुछ बताया है मेरी भी जिम्मेदारी बनती है की आपका साथ हु, दादी तु तो पागल ही रहेगा, और बोली तु उस साइड उस पेड़ के पीछे चला जा मै इस साइड मे कर लेती हु, हम दोनो ने शौच पुरा कर घर को आ गये, अब दादी का पुरा विश्वास हो गया की दादी और मेरी हर बात हम दोनो तक ही रहेगी आज मैने बुआ से झुठ जो बोला, मै दादी फूफा के पास बैठ गए उनका हाल चाल पूछने लगे, फूफा बोले ठीक सा लग रहा है कुछ, कुछ देर बाते करते रहे तभी बुआ बोली कि मै खाना बनादेती हु, आप लोग नहा लो, पानी गर्म कर दिया है, मै बोला दादी पहले आप नहा आओ मै बाद में नहा लूंगा, बुआ और दादी नहा चुकी थी अब मै भी चला गया.. Next
 
मै बाथरूम मे घुस्सा, बुआ ने दादी को आवाज दी की गर्म पानी डाल आओ बच्चे को, दादी गर्म पानी की बाल्टी लेकर आ गयी, मैने तब तक अपने कपड़े खोल दिये थे और एकदम नंगा खडा था, जैसे ही दादी बाल्टी लेकर आई मुझे नंगा देखा, मेरा लंड लटक रहा घोड़े के लंड जैसा, दादी की नज़र मेरे लंड पर गयी और मुस्करा दी, पागल जल्दी से नहा लो वरना सर्दी लग जायेगी, और बाल्टी रख चली गयी, मैने दरवाजा बन्द किया, देखा वहा दादी और बुआ की ब्रा पैंटी टंगी हुई है नहाने के बाद यही रखती है, दोनो की बड़ी ब्रा और बड़ी पैंटी देख मैने उनको उठाकर सुघने लगा, ब्रा से बुआ और दादी के चुन्चियो की और पैंटी से दोनो के चूतडो और गांड कि खुशबु आ रही थी, मै आँख बन्द कर उनको सूंघ कर मस्त हो रहा था, सर्दी ज्यादा थी तो मुझे सर्दी सी लगने लगी, मै सोच रहा की दोनो इनमे कैसे दिखती होंगी और सपने लेने लगा और मेरे लंड मे हलचल हो गयी, सर्दी के कारण मुझे कंपन होने लगा, मैने अपना सपना तोड़ वापिस ब्रा पैंटी को रख दिया और नहाकर कमरे मै आ गया, बुआ और दादी खाना लगा के बैठी थी बोली आजा बेटा तेरा ही इंतज़ार कर रही है खाना खा लो, हमने साथ खाना खाया, बुआ बोली माँ बेटे को खेत घुमा लाओ, मै दादी खेत की तरफ निकल गये दादी मुझे फसलों के बारे मे बता रही थी, सर्दी मे धुप का भी अलग ही मज़ा है, हम घूमते हुए खेत पर पहुंचे, और वहा आराम से खड़े हो गये, कुछ देर हमने बाते कि तभी वहा का नज़ारा देख दादी की आँखो मै मस्ती भर गयी, एक कुत्ता और कुत्ती दोनो की गांड आपस में जुड़ी हुई थी दोनो का मुह उल्टी दिशा मे हो रखा था, कुत्ते का लंड कुत्ती की चूत मे फसा पड़ा था, दादी देख मुस्करा रही थी, तभी मै बोला दादी ये ऐसे क्या कर रहे है, दादी हस्ते हुए बेटा ये मिलन कर रहे है मै बोला दादी ऐसे मिलन भी होता है क्या, दादी नही बेटे ये सिर्फ कुत्तो मे ही होता है, कुत्ते का लंड इसमे फंस जाता है कुछ देर के लिए , दोनो अलग होने की कोशिश मे उल्ट पुल्टी हो जाते है इसलिए ऐसा होता है अच्छा दादी, मै दादी खुल कर बात करते थे क्यों की सिर्फ हम दोनो तक ही बात रहती थी, पुरा दिन खेत मे ही रहे जैसे ही शाम होने को आई हम घर की और चल पड़े, जैसे ही घर पहुंचे बुआ बाल्टी लेकर गाय के पास जा रही थी, मै और दादी वहा आग जल रही थी, खड़े हो गये, और मे बुआ की मटकती गांड को देख रहा था, बुआ ने बाल्टी रख पहले बछड़े को खोला जो भागकर गाय के थनो को चूसने लगा थोड़ी देर मे गाय के थन दूध से भर गये, बुआ ने कुछ देर दूध चूसने के बाद बछड़े को पकड़ कर बाँध दिया, और बाल्टी लेकर गाय के नीचे बैठ थनो को खिच खिच कर दूध निकालने लगी, मै दादी आग के पास बैठे थे मै बोला दादी बुआ ने इतना सब क्यु किया, दादी हंसी और धीरे से बोली मेरे लाल जब नयी नयी माँ बनती है कोई तो उसका बच्चा जब दूध पीने के लिए निप्पल मुह लेता है तो माँ का दूध उतर आता है अपने आप, इसलिए तेरी बुआ ने पहले बछड़े को गाय के पास भेजा जब दूध से थन भर गए तो वापिस बांध दिया, तभी बुआ ने उस गाय का दूध निकाल दूसरी गाय के पास गयी और उसके नीचे बैठ थनो को खीचने लगी, थोड़ी देर खीचने के बाद उसके थनो मे भी दूध आ गया और बुआ निकालने लगी, तभी मैने दादी को बोला दादी इसका तो बछडा भी नही था अब बुआ ने क्या किया, दादी फिर हल्की सी हंसी और बोली बेटा जब माँ कुछ दिन तो अपने बच्चे को देखकर दूध देती है और फ़िर कई दिन बाद जब बच्चा बड़ा हो जाता है तब हाथ से खीचते है तो दूध आने लगता है, मै नादान बनते हुए बोला दादी फिर तो माँ और आपको भी दूध आता होगा, दादी के चेहरे पर मस्ती सी छा गयी, हट पागल अब हमे कैसे आयेगा हमे कई साल हो गये है अब नही आयेगा वो तो माँ बनने के कुछ साल तक आता है तभी बुआ दूध से भरी बाल्टी लेकर आ गयी और गिलास भर कर देती हुई ले बेटा दूध पिलो और ताकत बढ़ाओ, दादी बोली हा बेटा पीले अच्छा है ताकत बढ़ेगी तुझे, मे बोला दादी फिर तो सबको पीना चाहिए बुआ आप और फूफा को भी, दोनो माँ बेटी हसने लगी, बुआ बोली चलो खाना बनाती हु खाना खाते है, हम फूफा के पास आकर बैठ गये, और बाते करने लगे, बुआ ने खाना बनाया और बोली आजाओ खाना खाते है हमने खाना खाया, बुआ बोली आप दोनो कमरे मे चलो मै अभी आती हु मे दादी कंबल मे घुस गये, और बाते करने लगे, तभी बुआ आ गयी हम तीनो बाते करने लगे, कुछ देर बाद बुआ चली गयी, आज ज्यादा घूमने के कारण दादी की कमर और पैर मे दर्द होने लगा, बुआ बोली बेटा तेरा दर्द कैसा है अब मै बोला दादी ठीक है मे चाहता था दादी इसको हाथ मे लेने के लिए तड़पे, दादी बोली बेटा मेरे पैर और कमर दर्द कर रहे है थोड़ी मालिश कर देगा, मै बोला दादी आपके लिए कुछ भी कर सकता हु, दादी को मैने मना कर दिया आज की मेरे लंड मे दर्द नही है, आज वो तड़पेगी, मैने अपनी लुंगी पहनी और तेल की शीशी लेकर दादी के पास आया, दादी ने चुनरी निकाल दी और पेट के बल लेट गयी, दादी के चौड़े और बडे चुतड पेटिकोट से भरे हुए थे, दादी ऐसे लेटी थी जैसे मस्ती मै नागिन लेटी हो, मैने दादी के पेरो की तरफ गया next...
 
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