• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest रुतबा या वारिस

माँ वापिस आई पहली बार माँ को इतना सज़ा हुआ देखा, मांग मे सिंदूर बड़ी सी बिंदिया, अप्सरा की राजकुमारी जैसे हो वैसे लग रही थी,

मै-- माँ बहुत ही सुंदर लग रही है आज आप

माँ - बेटे सब तूने ही किया है मेरे लाल

मै- माँ एक कमी है बस,

माया और माँ देखती हुई क्या है बेटा, हमे तो कुछ नही दिख रहा,,

माँ मंगलसूत्र तो पहनो,

माँ-- अरे..... हा मंगलसूत्र, मेरे पास तो ह ही नही, कभी जरूरत नहीं पड़ी. अब कहा से लाऊँ,

मै- कोई बात नहीं माँ, आप ऐसे भी बहुत अच्छी लग रही हैं, और हम कभी शहर चेलेँगे तब ले आयेंगे,

माया-- हा मालकिन, भैया सही बोल रहे है

मै, - क्या दीदी, माँ को मालकिन क्यु बोल रही हो, जब मै भाई हुआ तो माँ को माँ कहो मालकिन क्यु बोल रही हो,

माँ-- मेरे लाल बहुत अच्छी बात बोली तुने माया आज से हम सब एक परिवार है, मुझे मालकिन नही बोलना, माँ बोल देना, तू भी इतनी सेवा करती है तू भी तो बेटी जैसे है,

माया -- आँखो मे आँसु लिए हुए, माँ के गले लग जाती है माँ आप सब बहुत अच्छे हों,

तभी मै भी माँ के पास जाकर एक तरफ से गले मिलता हु, मेरा एक हाथ माया की पीठ पर और दूसरा हाथ माँ की पीठ पर था, बड़ा मस्त लग रहा था माँ और माया दोनों को मै अपनी बातो मे ले चुका था, दादी तो पहले से ही तैयार थी, धीरे धीरे सब को अपना बनाना है

माया -- माँ अब मे चलती हु,आज बहुत अच्छा लग रहा है, सब एक हो गये.

माँ- ठीक है बेटी आप जाओ,

माया चली गयी, अब मेरे सामने माँ ही थी,

मै-- माँ आप बहुत खुबशुरत लग रही हैं आज, आप हमेशा ऐसे ही रहना, माँ भी आज बहुत खुश लग रही थी, तभी मै माँ आपके पास साड़ी नही है क्या, वो पहनों ना उसमे और भी खूबशूरत लगोगी,

माँ पहली बार अपनी तारीफ सुन मन ही मन में मुस्करा रही,

माँ- बेटा ये सब तूने ही किया है, तूने मेरी आँखे खोल दी, मै पहली बार अपनी बड़ाई सुन रही हूँ आज तक किसी ने भी मुझे ऐसा नही बोला, क्या बेटा मे सुंदर हु

माँ-- आज तक आप गुस्सा करती थी तो सब डरते थे, लेकिन वैसे आप बहुत खूबशूरत है माँ, यकीन ना हो तो पापा से ही पूछ लेना,

माँ- बेटा जब तुझे अच्छी लगी तो सबको लगूगी,

मै समझ गया तीर निसाने पर लग चुका है तभी मै माँ अब आप पापा के पास जाओ, आओ मे साथ चलता हु, मै और माँ पापा के पास पहुँचते है, पापा माँ को देखते ही आँखो मे आँसु लिए हुए

पापा-- आज ऐसा रूप देख मै धन्य हो गया, आज मै बहुत खुश हु,

माँ-- आज तक मै अपने गुस्से पर थी, लेकिन हमारे बेटे ने मुझे बदल दिया, अब मै आपको कोई शिकायत का मौका नही दूंगी,आपकी खूब सेवा करूँगी और आपको ठीक भी करके रहूँगी, मै मन ही मन ही मन मे मुस्करा रहा, तभी पापा बोले,

पापा--मेरे लाल मेरे बच्चे, मै तो कुछ नही कर सकता लेकिन तू अपनी माँ का ख्याल रखना, इसे कभी अकेला मत छोड़ना,

मै-- पापा मै आप दोनो का बहुत अच्छे से ख्याल रखूँगा, आपको बड़े शहर में लेकर जायेंगे.. माँ और पापा दोनो खुश होते हुए, बहुत अच्छा है हमारा लाल..

पापा-- अब आप दोनो जाओ, आराम करलो सर्दी बहुत है वैसे भी, हम कल दिन मे बात कर लेंगे, वैध जी भी आते होंगे, माँ- मै आपके पास रुक जाती हु ना,

पापा-- अरे नही अभी जब तक ईलाज चल रहा है तब तक वैध जी ही ठीक है,

मै और माँ दोनो अपने कमरे मे आ गये, माँ बहुत खुश लग रही थी,..

कुछ दिन ऐसे ही बीत गये घर मे खुशहाली हो गई, लेकिन मेरा रुकना मुश्किल हो रहा,

ना मै लुंगी पहन कर सोता ना दादी पास मे थी,

मै-- माँ आप इतनी खूबसूरत क्यु हो,

माँ, -- अब अपनी बड़ाई सुन माँ को भी अच्छा लगता, नही बेटा मै कहा अच्छी हु,

मै-- हा माँ आप बहुत खूबसूरत हो ऐसा तो शहर मे भी नही है,

माँ सरमा रही, मुझे तो ऐसा कुछ नही लगता, तभी मैने माँ को पकडा और कांच के सामने लेकर आया, ये देखो माँ खुद को, आप ही बताओ, क्या आप सुंदर नही है, माँ आपके काले बाल, मांग मे सिंदूर, बिंदिया, ऐसे लग रही हो जैसे अभी ही शादी हुई है

मै माँ को मस्का लगा रहा था, माँ भी मेरे मुंह से बड़ाई सुन मन ही मन मुस्करा रही, और बोली

माँ- ठीक है बेटा, जब तू कहता है तो मान लेती हु, मेरे बच्चे को अच्छी लगनी चाहिए बस,

मै-- हा माँ आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो,

माँ भी पहली बार तारीफ सुन और खुद को इतना सज़ा देख माँ की जवानी मे हलचल मचने लगी,

माँ जब भी कोई नये कपड़े पहनती तो मुझसे जरूर पूछती, की बेटा कैसी लग रही हूँ, और मै माँ को बड़ाई करने से पीछे नही हटता.

एक दिन मै बोला माँ हम शहर चलेंगे, पापा का ईलाज वहा से लेंगे,

माँ-- तेरी दादी को आने दे फिर एक दिन जरूर चलेंगे,
 
दादी से भी रुका नही जा रहा था,

दादी ने बुआ को कहा की कुछ दिन घर हो आती हु दुबारा यही आ जाऊंगी

बुआ-- ठीक है माँ जा आओ और साथ मे मुझे (मै) को लेती आना,

दादी वहा से गाड़ी मे बैठ चली और यहा घर पे शाम को आई, माँ अपना पलु सर पर रख दादी के पास दोड़ती हुई गयी, दादी अचानक से डर गयी, उन्हे तो यहा का कुछ पता नही था की कितना बदल गया है, माँ ने नीचे होकर दादी के पर छु लिए, दादी तो हकी बकी रह गयी, ये क्या पहली बार माँ ने ऐसा किया, माँ खड़ी हुई माँ की मांग मे सिंदूर और बिंदिया देख दादी को कुछ समझ नही आ रहा, मै और माया देख रहे, तभी माँ ने दादी को पूरी बात बता दी , दादी की आँखो मे आँसु आ जी गये और जल्दी से माँ को गले लगा लिया, दोनो की चुन्चिया आपस मे टच हो गयी दोनो गले मिल रही,

दादी-- मैने आज तक तुझे बहू नही माना लेकिन आज से तुझे अपनी बहु मानती हु, मेरी तरफ देखती हुई दादी बोली मेरे बच्चे तूने इस घर को फिर से स्वर्ग बना दिया,

मै मन ही मन में हा ये स्वर्ग ही तो है और आप सब यहा की अप्सरा हो,

तभी माया बोली दादी माँ अब खाना खा लो मैने लगा रख दिया है,

माँ पापा को खाना खिलाने जाती है और वापिस आकर हम साथ मे खाना खाते है आज मै खुश था दादी के पास सोऊंगा, तभी मै बोला

मै-- माँ आज दादी के पास सो जाऊ,

माँ-- हल्के दिल से, जैसा तुझे ठीक लगे

मै समझ गया की माँ अब मुझसे दूर नही रहना चाहती, माया और दादी के कमरे मे चली गयी, दादी ने इशारा किया की हुक्का लगेगा आ जाना जल्दी,

मै और माँ वहा बैठे थे, माँ कुछ नाराज सी लग रही, माँ क्या हुआ,

माँ-- कुछ नही बेटा

मै- नही माँ कुछ तो है आप छुपा रही है,

माँ-- बेटा मे तुझसे दूर नही रह सकती मेरे लाल, इसलिए थोड़ा दिल दुखी हो गया,

मै- माँ दादी कुछ दिन बाद वापिस बुआ के पास चली जायेगी, थोड़ा उनको भी खुशी मिल जाए बस, इसलिए उनके पास सो रहा हु,

माँ-- रहने दे, अब दादी आ गयी है अब उनके ही पास रहेगा, वही अच्छी लगेगी,

मै-- माँ को देखता हुआ, माँ आप एक राजकुमारी जैसे हो भला आपसे अच्छा और कोन होगा, माँ दुनिया मे सबसे ज्यादा मुझे आप ही खूबसूरत लगती है आप तो नई लड़कियों से भी खूबसूरत हो,

माँ मन ही मन शर्म से लाल हो रही, अच्छा, बेटा तू लड़कियों की तरफ मत देखा कर, तू अभी बच्चा है,

मै-- ठीक है माँ , जब माँ ही उनसे ज्यादा खूबसूरत है तो मे और कही क्यु देखु,.

माँ आप इतनी खूबसूरत क्यु हो,

माँ-- शर्मा रही थी

मै-- माँ आपको शहर से नये कपड़े और गहने लेकर दूंगा, तब देखना आप और खूबसूरत हो जाओगे,

अब जा दादी के पास,

मै वहा से दादी के कमरे मे गया दादी हुक्का पी रही

दादी-- आजा मेरे लाल, तेरे बिना मेरा तो मन ही नही लगा.

मै- क्यु दादी

दादी-- बेटा तूने मेरी सेवा ही ऐसी की.

दादी झुठ बोल रही, जब की उनको मेरे लंड याद आ रहा था,

दादी मैने भी आपको बहुत याद किया ठीक से सो भी नही पाया, आपके पास तो लुंगी पहन कर सोता था, माँ से डर लगता तो लुंगी नही पहन पाया,

दादी-- कोई बात नहीं बेटा, अब मै आ गयी हु, ले हुक्का ले और लुंगी पहन ले,

मै हुक्का पिया और लुंगी पहन ली

दादी चड्डी भी निकाल दु क्या आराम से सो लूँगा, दादी खुद चाहती थी की मै चड्डी नही पहनू,

दादी-- हा बेटा, निकाल दे, आराम से सो जाना,

मै दादी जल्दी से कंबल मे घुस गये, दादी सीधी लेट रही थी,

मैने करवट ले एक पेर दादी के पेरो पर चडा दिया, मेरा लंड दादी की जांघ से टच हो गया, जो की दादी को महसूस हा रहा,

कुछ देर बाद दादी ने करवट ली और मुंह दूसरी साइड कर लिया, दादी के चुतड पर मेरा लंड आ गया, दादी सब महसूस कर रही, लेकिन कुछ बोल नही रही, वो तो खुद चाहती थी मेरे लंड को, तभी मैने एक हाथ दादी के कमर से होते हुए पेट पर रखा जहा नाभि होती है, रुका तो मुझसे भी नही जा रहा था, मैने एक उंगली दादी की नाभि मे डाल दी और, धीरे धीरे नाभि मे घुमाने लगा, मैने नीचे से लंड जो की दोनो चुतडो के बीच था, अपनी कमर को हिलाकर जोर से चिपका दिया, हम दोनो की साँसे तेज हो रही थी, तभी दादी आज सर्दी बहुत है बेटा, कहती हुई और पीछे हो गयी, मै दादी के पीछे पुरा टच हो गया था, लंड खड़ा हो गया पुरा, तभी मैने चुपके से लुंगी की गांठ खोल दी, अब लंड दादी के पेटिकोट के उपर से उनके चुतडो पर लग रहा था, मै दादी की कोमल और मुलायम, मोटी नाभि को सहला रहा था, मेरी गर्म साँसे दादी की पीठ पर लग रही,,

दादी सोने का नाटक करने लगी, आज कई दिनों से,आग लगी थी,

मै भी अपना लंड चुतडो पर जोर से दबा रहा, घोड़े जैसा लंड दादी को और भी मस्त बना रहा था, मैने कमर हिला हिला कर लंड को चुतडो पर रगड़ने लगा, दादी भी चुपचाप सोने का नाटक कर रही, दादी अचानक से उठी, और बोली बेटा आजा पैसाब कर आते है, मेरी तो लुंगी खुली थी और लंड तन हुआ था, मैने मना कर दिया, दादी पैसाब कर आ वापिस लेट गयी,

हम दोनो आग मे जल रहे, लेकिन पहल कोई नही कर रहा, मैने भी सोच लिया आज तो लंड का पानी निकालना ही है,

दादी मेरी तरफ मुंह कर लिया, मैने भी धीरे धीरे आगे सरक कर दादी के मुंह के पास चला गया, लंड तो पहले ही तना हुआ था,अब की बार दादी ने अपना एक पेर उठा कर मेरे पेर पर डाल दिया, उनका पेर मेरे लंड से टच था, तभी दादी बोली क्या हुआ बेटा सो नही रहा आज,

मै-- दादी नींद नही आ रही आज बेड पर,

दादी-- क्या हुआ लाल

मै-- पता नही दादी

दादी - आजा यहा आजा दादी सीधी होती हुई, आजा अपना सिर यहा रख दे, ब्लाउस की तरफ इशारा करती हुई,

मैने भी बिना देर करते हुए...
 
दादी के बड़े बड़े चुन्चियो जो ब्लाउस से ढकी हुई थी उन पर मेरा सर रखा और मैने एक पर दादी के पेरो पर रखा, और अपना एक हाथ दादी की दूसरी साइड से कमर पर रखा,

दादी मेरे बालो मे हाथ फेर रही, मेरा लंड दादी की जांघ से लगा हुआ था, लंड तना हुआ था जो दादी की जांघ से कमर तक दादी को महसूस हो रहा था, दादी की बड़ी बड़ी चुन्चियो पर सर ऐसे लग रहा जैसे किसी गद्देदार सोफ़ा हो, मेरा हाथ दादी की कमर को सहला रहा था, दादी की तेज साँसों से मेरा हाल भी बुरा हो रहा था,

मेरी लुंगी तो थी नही लंड दादी की कमर पर टच हो रहा था, दोनो आगे बढ़ना चाहते थे लेकिन पहल कोन करे, दादी आँखे बन्द किये थी, मैने कमर को सहलाते सहलाते दादी के पेटिकोट का नाडा होता है वहा तक हाथ ले जाने लगा, कुछ देर ऐसे ही सहलाता रहा, मेरी हिम्मत धीरे धीरे बढ़ रही थी, मेरे हाथ कमर से नीचे चुतड के साइड तक सहलाने लगे, दादी बिल्कुल चुप थी, ना मुझे मना कर रही थी,

जहा पेटिकोट बांधते है वहा से कुछ थोड़ा सा खुला सा होता है, मेरे लंड मे पुरा तनाव आ गया था, जो दादी की कमर पर गर्मी दे रहा था, मैने पेटिकोट के छेद मे अपनी एक उंगली डाल दी, दादी अब भी चुप थी, मैने उंगली थोड़ी देर हिलाई तब दादी की पैंटी पर पर लगी, दादी कुछ नहीं बोल रही, मैने ऊँगली बाहर निकाली और धीरे से दादी के पेटिकोट का नाडा पकडा, और धीरे धीरे डोरी को खीचने लगा थोड़ी देर मे दादी का नाडा पुरा खोल दिया, हम दोनो की साँसे तेज थी,

इतने मे दादी थोड़ी सी हिली और बोली बेटा सर्दी मे पैसाब बहुत आता है मै पैसाब करके आती हु, जैसे ही दादी खड़ी हुई, दादी का पेटिकोट नीचे गिर गया, अंधेरे मे कुछ दिखा तो नही, लेकिन दादी कुछ नही बोली, दादी पैसाब करके वापिस आ गयी, दादी ने अंधेरे मे अपनी पैंटी निकाल कर पेटिकोट को जांघ तक कर वापिस लेट गयी और फिर से मेरा सर को ब्लाउस पर रख लिया, और आँखे बन्द कर सोने का नाटक करने लगी,

मेरी नंगी टांग को दादी की नंगी टांग और गर्मी दे रही, मै समझ गया दादी ने जान बूझकर पेटिकोट उपर किया है मैने धीरे से हाथ नीचे पेटिकोट को पकडा, और धीरे धीरे उपर करने लगा मैने शांत होकर धीरे से पेटिकोट पूरा उपर कर दिया पेट तक, मैने अपना हाथ जैसे ही थोड़ा नीचे किया दादी के झांट के रेशमी बाल लगे, मै समझ गया दादी ने पैंटी निकाल दी है पहले तो पहनी थी, लेकिन अब पैसाब के बहाने निकाल दी है, तभी

दादी ने अचानक मेरी तरफ मुंह किया, मै दादी के साइड मे आ गया, दोनो एक दूसरे के सामने थे, दादी ने नींद के बहाने से मेरे सर पर हाथ रख अपनी चुन्चियो की खाई पर रखा, दादी के झांट मेरे लंड पर लग रहे थे, मैने धीरे से अपने होठों को दादी की खाई पर लगाया, दादी का हाथ मेरे सर पर और कस गया, दोनो अंजान बनते हुए मज़ा ले रहे थे, मैने अपनी धीरे से अपनी जीभ चुन्चियो की खाई पर लगा दी, दादी की साँसे तेज हो गयी बहुत, चुन्चियो जैसे ब्लाउस को फाड़ देगी, हो रही थी, अब मैने धीरे से अपने लंड को पकड़ कमर को पीछे कर दादी के झांटो पर जहा चूत होती है रख दिया, लंड भी टुटने को हो रहा, लंड बालो से फिसलता हुआ चूत के उपर से दोनो जांघो के बीच आ गया, दादी की झांटे चूत के पानी से गीली हो रखी थी, रेशमी झांटे मुझे और मस्त बना रही थी,

तभी मैने एक हाथ दादी के एक चुतड पर डाला, बड़े और मुलायम चुतड हाथ मे नही आ रहे, दादी ने भी सोने का नाटक करती हुई उस पर को मेरे पेरो पर डाल दिया, मै और दादी नीचे से पूरे नंगे थे, मैने चुतड से हाथ नीचे जांघ पे ले गया, और जांघ को पकड़ कर उनके पेर को और उपर कर दिया, दादी का एक पेर सीधा और एक मेरे टांगो पर था, मेरा लंड उनकी चूत को छूता हुआ सीधे वाले जांघ से लग रहा, चूत की फाँकों पर लगा मेरे लंड दादी की चूत के पानी से गिला हो गया, दादी की साँसे जोरों पर थी, मैने भी धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाया, और एक हाथ से दादी का एक चुतड पकड़ लिया, और धीरे धीरे दबाने लगा, दादी चुपचाप सोने का बहाना कर मजे ले रही, दादी की चूत से बहुत सारा पानी मेरे लंड को गिला कर रही थी, मेरा लंड दादी की चूत की फांकों पर कसकर रगड़ रहा, मेरे लंबा और मोटा लंड दादी की दोनो जांघो मे मजे ले रहा , मैने अपने हाथ को दादी के चुतड से नीचे कर चुतड की खाई तक ले गया अब एक चुतड पुरा मेरे हाथो की गिरफ्त मे था , हालत मेरी भी खराब हो रही थी, अचानक मेरी उंगली दादी की गांड के छेद पर लगी, दादी की साँसों की गति और तेज हो गयी, मै उंगली से गांड के छेद पर सहलाने लगा, दादी की गांड का छेद थोड़ा अंदर बाहर हो रहा, मै समझ गया दादी मजे मे ऐसा कर रही है मैने छेद से नीचे की उंगली तो दादी की चूत के फांकों जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी, उस पर लगी, आगे से लंड की रगड़ और पीछे से चूत पर उंगली, दादी का मुंह खुल गया और मुंह से साँसे लेने लगी, मेरी हिम्मत बढ़ने लगी, मैने लंड की रगड़ तेज करदी, और उंगली को गीली चूत का अंतिम छोर सहलाने लगा, दादी की हिम्मत जवाब दे गयी, दादी ने मेरे लंड को दोनो जांघो के बीच जोरों से दबा लिया, और आह...आह...आह ......करती हुई झड़ने लगी, मुझसे रहा नही गया, मैने धीरे से दादी के गाल पर हाथ रखा, और बोला

मै-- दादी आपको अच्छा लगा ना,

दादी के पास कोई और चारा नही था, हम दोनो नीचे से नंगे थे, और मेरा हाथ उनकी गांड पर था,

दादी बोलो ना, मै जानता हु आप जाग रहे हो,

दादी,-- धीरे से आँखे खोली और बोली हा बेटा अच्छा लगा, जब तु मेरे पास होता है तब तेरे दादा की याद आती है बेटा, .

मै-- दादा भी ऐसा करते थे दादी,

दादी-- नही बेटा, वो कुछ और करते थे

मै-- मै भी करू क्या ऐसा

दादी-- नही बेटा, ऐसे ही ठीक है, मुझे आराम मिल जाता है, मेरा लाल मुझे ऐसे ही खुश कर देता है कई दिन हो गये थे, कल तेरी बुआ के पास चली जाऊंगी, आज तूने खुश कर दिया,

मै-- दादी मुझे भी आराम दो ना, देखो ना दादी कैसे खडा है,

हम दोनो पूरी तरह से खुल गये थे, दादी ने मेरे लंड को हाथ से पकड़ लिया, जो चूत के पानी से गिला हो रखा था, अभी देती हु मेरे लाल को आराम, दादी ने घोड़े जैसे लंड को पकड़ कर हिलाने लगी, लंड को दादी का स्पर्श पाकर एकदम टाइट हो गया था, दादी ने अपने झांटो पर लंड का सुपाडा लगाने लगी, मेरी आह निकलने लगी,

मै- दादी अच्छा लग रहा है, तभी दादी

दादी- एक काम करो बेटा मेरे पेरो के बीच आओ,

मै जल्दी से दादी के पेरो मे आ गया,

नीचे से दोनो नग्न थे, दादी ने लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर लंड का सुपाडा लगा लंड को उपर नीचे कर चूत पर रगड़ने लगी, दादी की चूत की फांकों के बीच से रगड़ रही थी, लंड का सुपाडा पुरा चूत से गिला हो गया था, दोनो की आह.. निकल रही, दादी फिर से मस्ती मे आ गयी, दादी जल्दी जल्दी लंड को चूत पर रगड़ने लगी,थोड़ी देर मे दादी की चूत का पानी से मेरे लंड भी जवाब दे गया, आह.... आह... दादी, दादी समझ गयी की मेरा वीर्य निकलने वाला है, दादी ने लंड को झांटो पर कर लिया, मेरा पानी निकलने लगा, दादी का पेट और झांट पर पानी ही पानी हो गया, और पानी चूत के रास्ते नीचे गिरने लगा, तभी दादी भी आह .....आह.... आह... बेटा, करती हुई फिर से झड़ने लगी, दादी -- बेटा तूने तो मुझे फिर से आराम दे दिया,

मै-- दादी मुझे भी आपने आराम और मज़ा दे दिया,

दादी- हा मेरे लाल हम दोनो ऐसे ही मजे करेंगे, बस तेरी माँ को पता नही चलना चाहिए,

मै साइड मे लेट गया, दादी ने कुर्ती से खुद को साफ किया, और मेरा सर चूमती हुई मेरा लाल सबसे प्यारा है, अपनी दादी की खूब सेवा करता है, अब सो जाओ बेटा, कल सुबह फिर तेरी बुआ के पास जाना है पता नही तेरे बिना वहा कैसे दिल लगेगा,

मै-- दादी कुछ दिन बाद मै वहा आ जाऊंगा, फिर से मजे करेंगे,

ठीक है बेटा अब सोते है,.......

सुबह उठते है दादी जल्दी से तैयार होती है, और गाड़ी मे बैठती हुई बेटा जल्दी आना कहा, और चली गयी,

तभी माँ,,

मेरा बच्चा कैसा है, रात भर नींद नही आई मेरे लाल, अब सही है माँ जी गयी, अब मेरे साथ सोना बेटा,

मै-- हा माँ आज आपके साथ ही सोऊंगा,,

माँ आप नहा लो, और तैयार हो जाओ हम अभी शहर चेलेँगे, पापा को अच्छे डॉक्टर के पास लेकर जायेंगे, तभी माया,

भैया आप भी जल्दी तैयार हो जाओ, मै खाना लगा देती हु,,

हम दोनो नहा कर तैयार हो गये, पापा के कमरे मे गये, पापा को मै और माँ ने कंधो के सहारे बाहर लाये, और गाड़ी मे पीछे वाली सीट पर लिटा दिया,

माँ बोली बेटा गाड़ी कैसे चलेगी मुझे तो आती नही, मै-- माँ मैने शहर मे गाड़ी चलाना सीख लिया है गाड़ी मै चला लूंगा, आप आगे बैठ जाओ, माँ आप आज भी बहुत खूबसूरत लग रही है, हम शहर से और समान लेकर आयेंगे फिर देखना आप और ज्यादा खूबसूरत बन जाओगी,,.. हम गाड़ी मै बैठे और चल पडे.. Next
 
आगे..

हम सीधे एक बढिया से डॉक्टर के क्लिनिक में गये, वहा डॉक्टर को दिखाया पापा को,

डॉक्टर ने कहा की ईलाज कुछ लम्बा चल सकता है, जिससे कुछ हद तक पापा ठीक हो सकते है, लेकिन ईलाज सिर्फ क्लिनिक पर ही हो सकता है, क्यों की गाँव में इतनी व्यवस्था नही हो सकती, 5/6 महीने तक पापा को यही रखना होगा,

माँ-- डॉक्टर जी इतने दिन तो हम यहा रुक नही सकते, हम तो गाँव में रहते है, कुछ और बताये ना,

डॉक्टर- मैडम और तो कुछ नही हो सकता, इनको हमारे पास रख ही ईलाज कर सकते है,

माँ मेरी तरफ देखती है

मै- डॉक्टर सर, यहा पापा का ध्यान रखने मे दिक्कत होगी,

डॉक्टर- नही सर, सारा काम हम देख लेंगे,

आप गाँव सकते है, बीच बीच मे आप आकर देख सकते है,

माँ-- नही डॉक्टर, हम इनको अकेले नही छोड़ सकते,

मैने माँ का हाथ पकड़ लिया,

माँ डॉक्टर जैसे कह रहे है हम करेंगे तभी तो पापा ठीक होंगे,

माँ- लेकिन बेटा उनको अकेला यहा

मै-- यहा इनका पुरा स्टाफ रहेगा, और हम भी तो आते रहेंगे, इनको देखने, इतने दिन इतने दूर रहे है कुछ महीने और सही,

माँ-- कूछ सोचती हुई, ठीक है बेटा, जैसा तुझे अच्छा लगे,

हमने डॉक्टर से सारे कागजी काम पुरे किये और पापा को सब बताया, पापा भी खुश थे हम लोग इनके लिए इतना कर रहे है,

माँ और मै दोनो पापा से मिल क्लिनिक से बाहर आ गये, माँ चिंता मे लग रही थी, तभी मै

मै-- माँ आप चिंता ना करो, सब ठीक हो जायेगा, आप ऐसे चिंता में बिल्कुल अच्छी नही लगती, मेरी माँ, मेरे लिए थोड़ा मुस्कराओ ना,

माँ मेरी तरफ देखती है और हल्का सा मुस्करा देती है,

मै-- ये हुई ना बात, एकदम परी जैसे हंस रही हो,

माँ अपनी बड़ाई सुन सरमा जाती थी,

मै-- अब हम आपके लिए कुछ सामान लेते है,

माँ-- क्या करेगा बेटा, मै ऐसे ही ठीक हु

मै, -- नही माँ आप देखना, आप और भी खूबसूरत हो जाओगी, मेरी प्यारी माँ,

माँ- मेरी तरफ देखती हुई, ठीक है बेटा जैसे तुझको ठीक लगे, अपनी माँ का कितना ख्याल रखता है,

मै भी माँ की बड़ाई करने में कोई कसर नही छोड़ता,

माँ की कसी हुई जवानी, लंबा बदन, बड़ी सी कसी हुई चुन्चिया, कैसे हुए चुतड, छोटी सी नाभि, बड़ी ही मस्त लगती थी,

मै और माँ दोनो बाहर बाजार मे आ गये, यहा देखा लड़कियां और लड़के हाथ मे हाथ डाल घूम रहे है, कोई लड़की बिल्कुल छोटे कपड़े मे घूम रही,

कई औरते साड़ी मे घूम रही, बाल खुले, मैक उप किया हुआ, मस्त लग रही थी, तभी माँ

माँ-- बेटा यहा कहा ले आया, इनको बिल्कुल शर्म नही है सब कैसे घूम रहे है

मै-- माँ ये शहर है यहा ये सब ऐसा नॉर्मल है,

माँ-- नही बेटा मुझे यहा ठीक सा नही लग रहा, यहा से चलते है

मै-- क्या माँ, आप भी ना, रुको उस दुकान मे चलते है,

एक बड़ा सा शॉपिंग माल था लेडीज का,

मै और माँ दोनो अंदर जाते है,

सामने एक सुंदर सी लड़की आती है, सर मै आपकी क्या सहायता कर सकती हु,

मै-- मैडम मुझे अपनी माँ के लिए साड़ी लेनी है, और थोड़ा सा साज सज़ा का समान भी,

मैडम-- जी जरूर सर, आप उपर के फ्लोर पर चले जाए, वहा आपको सब सामान मिल जायेगा,

माँ चुपचाप खड़ी थी

मै और माँ दोनो उपर आये, हमने बहुत सारी साड़ी देखी और ली भी, एक जोड़ी मस्त पायल की जोड़ी, लिपस्टिक, छोटी बिंदिया, झुमके, सब मैक उप का सामान लिया,

हम माल से बाहर आ गये, सारा सामान गाड़ी मे रखा, फिर सामने ही सुनार की दुकान थी, मैने माँ का हाथ पकडा और दुकान की तरफ चल दिये, मैने सुनार को बड़ीया सा मंगल सूत्र दिखाने को बोला, सुनार ने बहुत सारे मंगल सूत्र दिखाये, मैने एक अच्छा सा मंगलसूत्र लिया,

माँ ने शहर मे कभी शॉपिंग नही की थी वो बिल्कुल चुप थी,

मैने माँ से कहा माँ और कुछ लेना है क्या,

माँ- बेटा तूने इतना सारा समान ले लिया, मुझे तो ये सब करना भी नही आता,

मै-- माँ मै हु ना सब सिखा दूंगा, मेरी माँ, प्यारी माँ के लिए सब करूँगा माँ मै,

माँ हल्की सी मुस्करा दी, चल अब शाम हो रही है, घर चलते है, हम दोनो गाड़ी मे बैठ घर की तरफ चल दिये,

माँ अब पूरी तरह से बदल चुकी थी, वो अब शांत रहती गुस्सा नही करती, उनको एक औरत होने का अहसास होने लगा, माँ अपनी बड़ाई सुन शरमा जाती थी,

शाम हो गयी मै और माँ दोनो घर पहुंचे माया हमारा इंतज़ार कर रही थी,

माया को हमने सब बाते बताई, माया भी खुश हो गयी थी,

माया ने खाना लगा दिया था, माँ आज थक गई थी, खाना खाते ही माँ बोली बेटा अब सोती हु, आज खूब घूम ली हु, नींद आ रही है, चल तु भी थक गया होगा, सोजा

मै और माँ दोनो कमरे मे आ गये, तभी मै

मै-- माँ कपड़े पहनके देखो ना,

माँ-- बेटा सुबह पहनुगी, अब थक सी गयी हु,

मै-- कोई बात नहीं माँ सुबह पहन लेना.

माँ ने अपनी चुनरी निकाली और जल्दी से कंबल मे घुस गयी, मै भी जल्दी से लेट गया,

माँ कुछ सोचती हुई, बेटा

शहर में लोग ऐसे रहते हैं क्या,

मै-- माँ समझा नही, ऐसे मतलब क्या हुआ

माँ-- बेटा उनको बिल्कुल सरम नही, देखा कैसे घूम रहे थे, इतने छोटे कपड़ो मे, घर वाले कुछ नही बोलते इनको,

मै-- माँ ये फैसन है आज कल, वो कोई गाँव नही है, वहा ये सब नॉर्मल है,

माँ- बेटा कही तु भी ऐसे नही रहा ना,

मै-- नही माँ बिल्कुल नही, मुझे सिर्फ मेरी माँ अच्छी लगती हैं मै तो किसी और को देखता भी नही,

माँ-- हा बेटा, मुझे पता है मेरा बेटा कभी कोई गलत काम नही कर सकता,

तु तो बस अपनी माँ की झूठी बड़ाई करता रहता है,

माँ अपनी बड़ाई से खुश थी, वो मेरे मुंह से और बड़ाई सुनना चाहती थी,

मैं-- नही माँ आप सच मे बहुत सुंदर है, मै झूठ नही बोल रहा,

माँ अब मेरी बातो मे आने लगी थी,

नही बेटा, मै कहा से सुंदर हु,

मै-- अरे माँ आप पूरी सुंदर हो,

माँ-- मुझे तो नही लगता ऐसा बेटा,

मै-- माँ देखो एक तो आप इतनी लंबी है और काले बाल, गोरी हो, आपका चेहरा जैसे चाँद हो,

माँ-- हट पागल मै ऐसी कहा हु, झूठ बोलता है थोड़ी सी मुस्करा गई,

मै समझ गया माँ को अपनी जवानी का अहसास होने लगा है तभी बार बार अपनी बड़ाई सुनती है,

मै- माँ मे झुठ क्यु बोलूँगा, माँ आपकी कसम आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो,

आप देखना पापा जब ठीक हो जायेंगे तब पापा भी ऐसी ही बड़ाई करेंगे,

माँ सोचती हुई, ठीक है बेटा, तु कहता है तो मान लिया, अब सोजा,

मै और माँ दोनो आराम से सो गये, सुबह उठा....
 
आगे..

सुबह उठा रोज़ की तरह सब काम किये, माँ नहा ली थी मुझे बोली बेटा तू भी नहा ले, मै भी जल्दी से नहा लिया क्यु की आज माँ को सजाना था,

मै नहा कर जैसे ही कमरे मै गया माँ कांच के आगे बैठी हुई थी, उनके बालो से पानी की कुछ बुँदे उनके ब्लाउस को भिगो रही, माँ ब्लाउस और पेटिकोट मे छोटी सी टेबल पर बैठी हुई, माँ का लंबा चौडा बदन एकदम फिट, आगे निकली चुन्चिया और टेबल से बहार निकले चुतड, एकदम मस्तानी लग रही थी, माँ ने मुझे दरवाजे पर देख

माँ-- नहा लिया बेटा,

मै-- हा माँ, नहा लिया, माँ आप बहुत अच्छी लग रही है,

माँ-- अरे अभी से, मैने तो पूरे कपड़े भी नही पहने, तु भी ना झुठ बोलता रहता है

मै-- नही माँ, सच में आप बहुत सुंदर है,

माँ अपने आप को कांच मे देखती हुई हल्की से मुस्करा दी, माँ अब योवन मे आने लगी थी,

बेटा सच मे बहुत सुंदर हु

मै-- हा माँ आप बहुत सुंदर हो,आपकी कसम ,

माँ के बदन मे सर्सरी सी उठने लगी, खुद को कांच मे देख रही

माँ-- बेटा मुझे आजतक किसी ने नही बताया मै सुंदर हु, एक तूने ही कहा है,

माँ आओ सुंदर हो और मुझे बहुत अच्छी लगती हो, माँ मुस्कुराती हुई

माँ-- चलो अच्छा है किसी को तो अच्छी लगी, ये तो तूने बता दिया नही तो मैने आजतक खुद को देखा तक नही,

मै-- अब मै हु ना, मै देखूंगा मेरी माँ को,

माँ-- ठीक है बेटा, तू खुश रहा कर बस,

मै - माँ कल जो साड़ी लेकर आये उनको पहनो ना, और समान भी लगा कर देखो,

माँ-- बेटा मुझे नही आता उस बारे मे, मै तो केवल चुनरी पहनती हु,

मैं-- मै हु ना मां, मै सिखा दूंगा,

माँ-- हस्ती हुई, तुझे ही तो करना होगा और तो किसी को आता भी नही,

माँ ने सारा सामान अलमारी से निकाल कर बेड पर डाल दिया,

माँ मेरे सामने खड़ी हो गयी, आज पहली बार उनका ऐसा रूप देख मै तो पागल हो रहा था, ब्लाउस और पेटिकोट चिपका हुआ पेट, मस्त सी नाभि, गिले बाल, माँ भी सरमा रही थी,

माँ ने अपने हाथ आगे कर सीधे पेट को ढक लिए,

माँ- बेटा मुझे अच्छा सा नही लग रहा,

क्यों की माँ आज तक किसी के सामने ऐसे खड़ी नही हुई थी,
 
आगे..

माँ ऐसे कभी किसी के सामने खड़ी नही हुई थी,

मै-- माँ आप सरमाती हुई बहुत अच्छी लगती हो,

माँ-- बेटा तुम भी ना, बस माँ की झूठी बड़ाई करते रहते हो, यहा मुझे सरम आ रही है,

मै-- माँ मुझसे कैसी सरम, मै तो आपका बेटा ही हु,

माँ-- हा मेरे लाल, तु मेरा बेटा है, लेकिन मै इन सब से अंजान हु, में किसी के सामने ऐसे नही आई हु,

मै-- माँ अपने बेटे से क्या सरमाना, अगर आपको अच्छा नही लग रहा हो तो कोई बात नही फिर कभी, बस आप खुश रहो,

माँ-- हा बेटा अभी अच्छा सा नही लग रहा, मै बाद मे बोल दूंगी जब दिल होगा तो,

माँ ने चुनरी निकाल पहन ली, मै माँ को देख रहा था, माँ कांच के सामने बैठ गयी, और अपने बाल बनाने लग गयी, माँ के बाल ब्लाउस से चुन्चिया को उपर से ढके हुए थे,

माँ- बेटा तेरे पापा को देखने चले क्या,

मै-- हा माँ, मै अभी गाड़ी निकालता हु, आप जल्दी से नीचे आ जाओ,

माँ जल्दी से बाहर आई हम दोनो गाड़ी मे बैठ चल पड़े,

हम पापा के पास गये उनसे मिले उनकी हालत पूछी,

मै और माँ बाहर आये तभी,

माँ-- बेटा हम रोज़ घर से आना जाना होगा, हम यहा शहर मे कही रुक जाए तो अच्छा रहेगा, जब तक उनका ईलाज चले,

मै -- हा माँ सही बोली आप, मै कोई इंतजाम करता हु, मेरा यहा एक दोस्त है उनसे पूछता हु, आप पापा के पास रुको मे जाके आता हु,

मै चाहता था की कोई ऐसा घर मिले जहा मै माँ के साथ खुल कर रह सकु हमे कोई भी परेसानी नही हो, काफी घूमने के बाद मुझे एक घर मिल ही गया, जो एक बुढी सी औरत थी, उसके पास ही एक घर खाली था, उनसे पूछा तो मैने सब बताया की पापा का ईलाज चल रहा है, मै और माँ ही रहेंगे, कुछ महीने, घर बहुत ही अच्छा था, उस औरत का घर पास ही का था, उसने किराया ज्यादा बताया, लेकिन मुझे माँ के साथ रहना था तो सब मान लिया, मै जल्दी से होस्पिटल गया, वहा जाके माँ और पापा को सब बताया, पापा भी खुश हुए की हम उनकी देखभाल के लिए यहा रुक रहे है, पापा बोले अब आप जाओ और आराम करो, समय मिले तभी आना, मै और माँ दोनो गाड़ी मे बैठ चल पड़े,

हम दोनो कमरे पर गये माँ बोली बेटा थक सी गयी हु नहा लेती हु, फिर तु भी नहा लेना फिर खाना भी खाना है उसका भी देखना है अपने पास यहा समान भी नही है,

मैं-- माँ मैने यहा खाने का टिफिन लगा दिया है आप चिंता ना करो,

माँ-- क्या बात है मेरा बेटा तो बहुत तेज है अपनी माँ का बहुत ख्याल रखता है,

मै-- माँ एक आप ही तो है जिससे मै इतना प्यार करता हु, आपका ख्याल नही रखूँगा तो और किसका रखूँगा,

माँ सरमाती हुई, थोड़ा अपना भी ध्यान रखा कर बेटा, बस अपनी माँ की सोचता रहता है पागल,

मै-- माँ आप खुश तो मैं भी खुश हु, बस आपको दिल भर के खुशी देनी है,

माँ-- मेरा बेटा खुश है तो मै भी खुश हु मेरे लाल, अब नहा लेती हु,

माँ और मै नहा कर बेड पर बैठ गये,

तभी

मै-- माँ कल करवा चौथ का व्रत भी है, आप करोगी क्या,

माँ -- बेटा मैने कभी किया नही ये सब, इन सब के बारे मे मे नही जानती कैसे होता है,

मै-- माँ मै हु ना सब बता दूंगा, ये व्रत पापा के लिए करना है आप को, अभी जो खाना है खा लेना, कल दिन मे कुछ नही खाना है, चाँद को देख कर ही खाना होगा रात को,

माँ-- ठीक है बेटा, फिर तो करूँगी जरूर,

मै-- माँ लेकिन कल नये कपड़े पहनना होगा, आप लेकर भी नही आई एक काम करते है हम अभी बाजार से लेकर आयेंगे,

माँ- इस वक़्त बाजार मे मिल जायेंगे क्या बेटा,

मै-- ये शहर है यहा लेट रात तक बाजार खुले रहते है,

माँ- ठीक है बेटा, अभी चलते है, फिर खाना खायेंगे, रात मे बाजार का माहौल और ही होता है, मस्त मस्त लड़किया और औरतो को देख कर मज़ा आ रहा था, कई लड़किया को बिल्कुल ही छोटे छोटे कपड़े पहन रखी थी, कई लड़किया मेरी तरफ मस्ती भरी नजरो से देख रही थी, माँ को ये सब देख गुस्सा आ रहा था,

मै और माँ उसी माल से फिर से समान लिया बहुत सारा और घर की तरफ आ गये,

इतने में टिफिन भी आ गया, हम दोनो भूखे थे जल्दी से खाना खाया, और बेड पर चल दिये, एक ही बेड था उस पर कंबल थी दोनो जल्दी से कंबल मे घुस गये

माँ-- बेटा यहा का माहौल बहुत खराब है, इनको बिल्कुल भी शर्म नही है, छोटे छोटे कपड़े पहनती है लड़को के साथ कैसे कैसे चल रही थी, और तुझे भी कैसे देख रही थी, मुझे ये सब पसंद नही बेटा,.

मै समझ गया माँ को जलन हो रही थी,

मै-- माँ ये यहा का फैशन है, और वो लड़के और लड़किया दोस्त होते है इसलिए साथ रहते है,

माँ-- और वो लड़किया तुझे देखा कैसे कैसे घूर रही थी,, मेरा लाल सुंदर है इसका मतलब ये तो नही की कोई तुझको घूरे, माँ थोड़ा नाराज सी होती हुई

मै-- इसमे मेरी तो कोई गलती नही, आप सुंदर हो तो मै आप पर गया हु ना,

माँ- तु फिर से शुरू हो गया ना, कही तु भी इन लड़को की तरह तो यहा ऐसे नही रहा ना,

मै-- नही माँ, मैने ऐसा कोई काम नही किया, मेरी कोई दोस्त नही है माँ, मै सिर्फ आपको ही सब बाते बताता हु, और आप ही सिर्फ मुझे अच्छी लगती है,

माँ- हा बेटा, मै तुझे कही नही जाने दूंगी, मेरे बच्चे को बिगड़ने नही दूंगी,

मै-- हा माँ आप ही मेरी अच्छी माँ भी हो मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी,

माँ-- सरमाती हुई, अच्छा अब माँ के साथ साथ दोस्त भी मान लिया, चलो अच्छा है मेरा बच्चा बिगड़ेगा नही
 
आगे,,

अब सोते है बेटा,

माँ धीरे धीरे मेरी बातो मे आने लगी थी, हम दोनो ने कंबल ओड सो गये, सुबह उठे माँ बोली बेटा उठ जाओ आज व्रत करना है बताओ क्या क्या करू,

मै भी उठ गया, मै बोला माँ आप नहा लो तब तक मै दुध और फल ले आता हु कुछ,

मै बाजार मे गया और समान लेकर आया,

माँ भी नहा कर ही निकली थी,

माँ बोली बेटा आज व्रत है वो नई साड़ी मुझे तो पहननी भी नही आती, क्या करू,

मै-- माँ अगर आप आपको अच्छा लगे तो मै पहना दूंगा, और आपकी मर्ज़ी,

माँ-- बेटा मै पूरी कोशिश करूँगी, आज व्रत भी है, करना ही होगा,

ठीक है माँ आप एक काम करो वो सारा सामान यहा लाओ मै बताता हु कैसे करना है,

माँ सारा सामान लाकर बेड पर रख दिया, और सोल ओड कर खड़ी हो गयी,

मै बहुत खुश था क्यु की आज एक कुवारी माँ को बिल्कुल पास से टच करूँगा,

ऐसा बदन जिसको किसी ने भी हाथ तक नही लगाया हो, माँ भी कभी अपने आप को जवानी मे नही रख पायी, लेकिन मैने उनकी सोई हुई जवानी को जगा दिया था, जैसे एक लड़की अपना सोलव्हा साल मे आई हो, ...

खेर मैने जल्दी से दूसरे ब्लाउस और पेटिकोट निकाल माँ को दिये,

माँ आप ये पहन लो, ये साड़ी के साथ है,

माँ-- बेटा मैने तो पहले से ही पहन रखे है

मै-- नही माँ, ये दूसरे है, ये साड़ी के साथ वाले पहनो आप..

माँ-- ठीक है बेटा, ला मै पहन कर आती हु

माँ दूसरे कमरे मे चली गयी, मै सोच रहा था की माँ आज जब सजेगी तब कैसी लगेगी, सोच सोच मेरे लंड मे भी हलचल होने लगी थी, कुछ देर मे माँ ब्लाउस पेटिकोट पहन और सोल ओड कर आ गयी, सॉल् होने के कारण माँ ढकी हुई थी,

माँ खुले बाल और शर्माती हुई दरवाजे पर खड़ी हो गयी, मैने माँ की तरफ देख

मै-- माँ वहा क्यु खड़ी हो गयी, यहा आओ ना बेड के पास.

माँ-- शर्माती हुई, बेटा मुझे शर्म आ रही हैं

मै-- माँ मुझसे कैसी शर्म,माँ यहा मेरे अलावा और कौन है

माँ-- हा बेटा, एक तु ही है लेकिन मैने ऐसे कभी किसी के सामने नही आती हु,

लेकिन मै अब धीरे धीरे सब कर लुंगी, वैसे भी तू तो मेरा लाडला है,

मै-- ठीक है माँ, यहा बहुत ठंड है, एक काम करते है, हम छत पर चलते है, वहा पहले आपके बालों की तेल से मालिश कर बाल बना दूंगा, फिर आपको साड़ी पहना दूंगा,

माँ-- पागल हो क्या बेटा छत पर सब को दिखेगा, नही मै छत पर नही जाऊंगी, यही सही है

मै-- ठीक है माँ जैसे आप चाहो, आओ पास आओ,

माँ, एकदम बेड के पास खड़ी हो गयी,

मेरा दिल भी आज जोर से धड़क रहा था, और खुश माँ भी थी अपने जीवन मे पहली बार वो सजेगी,
 
आगे..

मै माँ के पास खडा हो गया, माँ सोल् ओडे हुए नीचे नज़र किये हुए थी, एक कुवारी लड़की की तरह शर्मा रही थी,

मै-- माँ सोल् तो उतारो,

माँ ने धीरे से सोल् को उतार दिया और अपने दोनो हाथो से अपने पेट को ढ़क लिया,

माँ का ऐसा रूप देख मेरी आँखे मस्ती में हो गयी, लंड मे उबाल आने लगा, लाल रंग का ब्लाउस और पेटिकोट खुले बाल जैसे कोई अप्सरा चुदने के लिए तैयार खड़ी हो,

मै- माँ आप बहुत ज्यादा खूबसूरत हो,

माँ-- शर्माती हुई, तु तो बस मुझे ही खूबसूरत कहता रहता है, और नही है क्या इस दुनिया में,

मै-- माँ मैने दुनिया नही देखी, बस आप ही दुनिया हो मेरी,

मै और माँ ऐसे खड़े थे जैसे कोई नये जवान लड़का लड़की खड़े हो, जिनका पहला मिलन हो,

माँ भी मेरी बातो से जवानी को पा रही थी,

मैने बोला माँ अब साड़ी पहनाता हु,

मैने साड़ी उठाई माँ को बोला माँ आप हाथो को उपर करलो, माँ ने जैसे ही हाथ उपर किये उनका गोरा पेट और छोटी सी नाभि देख मुझे पागलपन छाने लगा,. जैसे कोई 16 साल की लड़की का पेट हो, एकदम वैसा,

मैने साड़ी का एक छोर पकडा, और नाभि के पास से माँ को बोला की माँ इसको पेटिकोट मे थोड़ा सा अंदर डाल लो,

माँ तो शर्मा रही थी, बोली बेटा तु ही कर सब मै कुछ भी नहीं जानती,

मै तो खुद माँ को टच करना चाहता था,

ठीक है माँ, मै कर देता हु सब,

जैसे ही मैने साड़ी का छोर को नाभि के पास पकड़कर अंदर डाला, मेरी और माँ की दोनो की हालत खराब हो गयी,

मैने पहली बार ऐसा गर्म पेट के हाथ लगाया था, बहुत ही मुलायम और बिना चर्बी के,

माँ भी जोर से साँसे लेने लगी, पहली बार किसी मर्द ने पेट को हाथ लगाया है

माँ ने दोनो हाथ ब्लाउस पर से चुन्चियो पर लगा रखे थे, उनकी आँखे बन्द हो गयी थी,

मैने धीरे धीरे पेटिकोट के चारो तरफ से साड़ी घुसा थी फिर साड़ी को एक साथ कुछ एक जगह कर माँ की नाभि पर से पेटिकोट में घुस्सा दी, जिससे मेरी ऊँगली माँ की पैंटी के इलास्टिक से लगी,माँ के बदन में सरहन सी दोड गयी, माँ के बदन की गर्मी वाकई मस्त थी, मैने साड़ी को माँ पर डाल माँ को पकड़ कांच के सामने बिठा दिया, माँ लाल रंग में एकदम दुल्हन जैसे ही लग रही थी,

मै-- माँ देखो कितनी खूबसूरत लग रही हो,

माँ ने जैसे ही कांच मे देखा, उनका चेहरा खुशी से मस्त हो गया, माँ आप बहुत खूबसूरत हो अब देखो कांच मे, माँ खुद को देख शर्मा रही थी,

माँ ने माँग उठाई और अपने सर मे लगा ली, मैने बेड पर पड़े मंगलसूत्र को उठाया और बैठी माँ के पीछे से हाथ डाल माँ के गले मे लगा दिया,

मै- माँ आप आज एकदम दुल्हन के जैसे लग रही हो ना,

माँ - शर्माती हुई, रहने दे अब बड़ाई करना

मैने धीरे से मंगलसूत्र बांध दिया, माँ अपने बाल बनाने लगी, होठों पर लिपस्टिक, आँखों मे काजल, कुछ ही देर में माँ दुल्हन के जैसे तैयार हो गयी,,

माँ ने अपना ऐसा रूप देख आँखों मे आँसू आ गये, वो खड़ी हुई और मेरे गले लग रोने लगी,

मै-- माँ क्या हुआ माँ, आप रो क्यु रही है माँ बताओ ना

माँ-- मेरे लाल तूने मुझे एक पत्नी होने का अहसास दिलाया है, मुझे एक औरत होने का आभास करवाया है मेरे बच्चे तूने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी,

मै -- माँ आप भी ना, अब चुप हो जाओ, मेरी माँ रोती हुई बिल्कुल अच्छी नही लगती, आज तो वैसे ही व्रत है अभी आराम करलो शाम को व्रत खोलना भी है

माँ बार बार अपना रूप देख रही और दिल मे ही खुश हो रही थी,

पुरा दिन यूही बीत गया, शाम का खाना मंगवा लिया, बस चाँद का दीदार करने छत पर मै और माँ घूम रहे थे, माँ के लाल साड़ी लिपटी हुई थी, एकदम चंचल हसीना लग रही थी,

पास ही छत पर एक जोड़ और खडा था, उनकी नई नई शादी हुई थी, हल्का हल्का अंधेरा होने लगा माँ भी भुखी थी, तभी चाँद का दीदार हो गया, माँ ने भी चाँद को देख व्रत तोड़ लिया, मै और माँ दोनो छत पर खड़े थे, पास वाले छत पर जो नया जोड़ी थी वो चाँद की रोशनी मे अपनी पत्नी को किस कर रहा था, उसके हाथ अपनी पत्नी की गांड को साड़ी के ऊपर से ही दबा रहे, और दोनो होंठ से होंठ किस कर रहे थे, तभी माँ की नज़र उन पर गयी, माँ इन बातो से अंजान थी, माँ को नही पता था की किस क्या होता है,

माँ-- बेटा ये लोग क्या कर रहे है

मेरे पास कोई जवाब नही था

मै-- कुछ नही माँ वो ऐसे ही,

चलो पहले खाना खा लो, फिर आराम कर लो

हम नीचे आये दोनो ने खाना खाया, और बेड पर आकर लेट गये,

मै चाहता था की बात आगे बढ़े क्यु की माँ अब तैयार हो गयी थी धीरे धीरे

मै-- माँ आप बहुत अच्छी लग रही थी आज, हमेशा ऐसे ही रहना
 
आगे..

माँ और मै दोनो बेड पर आराम से लेटे थे चुपचाप, तभी

माँ-- बेटा एक बात सच कहु तो मेरी ज़िंदगी मे भगवान ने दुख भी बहुत लिखा और सुख भी,.

मै-- माँ मै समझा नही, माँ बताओ ना आपके साथ क्या क्या हुआ,

माँ अपना अतीत याद कर रही थी

बेटा पहले बहुत अकेली थी मै, मुझे ज़िंदगी जीने का सही तरीका नही मिला था, लेकिन तूने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी, मेरे गुस्से और रुतबे को बदल दिया तूने,

मै-- माँ मै आपसे बहुत प्यार करता हु, मै चाहता हूँ कि मेरी माँ हमेशा खुश रहे, आप भी एक अच्छी ज़िंदगी जियो,

माँ-- हा बेटा सही बोला तु, मै तुझसे सब सीखूँगी, बेटा तु भी अब मेरे साथ रहना हम मिलकर सब ठीक कर देंगे,

बेटा एक बात बताओ, जब हम छत पर थे तब वो लोग क्या कर रहे थे, माँ उन जोड़ो के किस के बारे मे बात कर रही थी, माँ ने आज तक किसी के साथ ऐसा नही किया, ना ही माँ को इन सब बातो का कुछ पता भी नहीं था,

मेरी समझ मे नही आ रहा की माँ को कैसे समझाऊ, की वो दोनो क्या कर रहे थे,

मै-- माँ वो लोग आपस मे बहुत प्यार करते है तो ऐसे कर रहे थे,

माँ-- बेटा अच्छा जो प्यार करते है वो ऐसा करते है

मै -- हा माँ

माँ-- प्यार तो सब करते है, तु भी करता है मै भी करती हु सब करते है, क्या वो सभी ये सब करते है, मुझे तो कुछ पता भी नहीं है

मै-- हा माँ सब करते है,

माँ ठीक है बेटा अब सोते है कल सुबह घर चलेंगे, फिर आकर तेरे पापा से मिलेंगे,

माँ तो सो गयी, मै आज उनका मस्त रूप देख कर मस्ता गया था, मुझे दादी की याद आने लगी, काश दादी आज पास होती तो आज उसको पक्का चोद देता...

उधर दादी बुआ के घर पर थी,, बुआ को माँ बनाने के चक्कर मे रोज़ बुआ से पूछती रहती की कुछ हुआ या नही,

दादी मेरे लंड को देखकर खुद अपनी जवानी मे आ गयी थी, जब भी मुझे याद करती, उनकी चुन्चिया कस जाती, चूत गीली हो जाती,

आज दादी अपने कमरे मे अकेली लेटी हुई थी, आज बुआ भी करवा चौथ पर खूब सजी थी,

दादी को मेरी बहुत याद आ रही थी, दादी आँखे बन्द किये की मुझे याद कर रही थी की उनकी चूत गीली होने लगी, दादी के पेर अपने आप चोड़े हो गये दादी का हाथ अपने आप पेटिकोट पर चला गया, चूत जो पैंटी से ढकी थी,

दादी सोच रही की मेरे लंड के टच से ही वो झड़ जाती है जब लंड उसकी चूत फाड़ कर चुदाई करेगा तब कितना मज़ा आयेगा, ये सोच रही की दादी को जोर से पैसाब लगी, दादी उठी और कमरे से बहार निकली थी की उसको बुआ के कमरे से कुछ आवाज आती सुनाई दी, दादी पहले से ही गर्म थी सोचा आज देखती हु, बेटी क्या क्या करती है, क्यु बच्चा नही लग रहा,

दादी धीरे से कमरे के पास गयी, दरवाजा तो बन्द था, लेकिन खिड़की हल्की सी खुली थी, दादी ने ऊँगली से हल्का सा और खिड़की खोल दी, देखा तो, फूफा बेड पर लेटे हुए है

बुआ ब्लाउस और पेटिकोट मे बेड पर फूफा के पेरो के बीच बैठी उनकी लुंगी खोल रही,

फूफा-- तुम इतने दिनों से कोशिश कर रही हो, कुछ नही हो सकता, तुम मेरे साथ अपने जीवन को क्यु बरबाद कर रही हो, तुम दूसरी शादी करलो,.

बुआ-- चुप रहो आप ऐसा मत कहो भगवान पर मुझे पुरा भरोसा है एक दिन सब ठीक हो जायेगा, बुआ लुंगी खोल फूफा का सोया हुआ लंड हाथ मे लेने लगी, दादी सब चुपचाप देख रही थी,

फूफा का शरीर बहुत कमज़ोर हो गया था, बुआ लंड को पकड़कर हिलाने लगी, फूफा का लंड थोड़ा सा ही खडा हुआ की फूफा ने थोड़ा सा वीर्य छोड़ दिया, बुआ ने जल्दी से थोड़े से वीर्य को हथेली पर ले लिया, और ऊँगली पर लगा लगा चूत मे डालने लगी, ताकि वीर्य बचेदानी तक पहुंचे, बुआ सारा वीर्य अंदर डाल कर हाथ साफ किया और फूफा के पास सो गयी,.

ये सब दादी देख दादी की आँखो मे आँसू आ गये, दादी जल्दी से अपने कमरे मे रोती हुई आई और बेड पर लेट कर सो गयी,

और भगवान से दुआ करने लगी कि हे भगवान रहम करो मेरी बेटी का दुख दूर करो, उंसकी कोख भरदो भगवान, उसके जीवन मे भी खुशिया देदो भगवान,

दादी सोचती सोचती सो गयी,

इधर मै और माँ भी सो गये..
 
आगे..

सुबह जल्दी उठ कर गाँव की तरफ चल पड़े,, माँ ने रात वाली ही साड़ी पहनी हुई थी, एकदम हसीना लग रही थी,,

जैसे ही घर पहुंचे माया दोड़ती हुई आई, आ गयी माँ जी आप, भैया कैसे है आप,

माया को देख लंड मे हलचल होने लगी, बहुत ही कमसिन कली जैसी थी माया,

माया ने माँ का साड़ी वाला रूप देखा तो हकी बकि रह गयी,

माया-- माँ जी आप इन कपड़ो में बहुत खूबसूरत लग रही हो, किसी को आपकी नज़र ना लगे,

माँ-- शर्माती हुई, अच्छा इन कपड़ो मे अच्छी लग रही हु,

माया- हा माँ जी बहुत ज्यादा खूबसूरत

माँ-- सब मेरे बेटे का कमाल है इसी ने मुझे जीना सिखा दिया,

इधर मै दादी के बारे में सोच रहा आज दादी होती तो अपने लंड का पानी निकाल लेता, लेकिन क्या करू..

तभी गाँव के कुछ लोग आते है एक तरफ लड़की वाले एक तरफ लड़के वाले,,

मालकिन गजब हो गया आजकल के बच्चे कुछ भी होश नही है, एक आदमी बोल रहा,

माँ क्या हुआ साफ साफ बताओ, माँ ने सब लोगो के लिए बैठने की व्यवस्ता की और एक तरफ मै और माँ बैठ गये, तभी

मालकिन इस लड़के ने मेरी बच्ची के साथ गंदा काम किया, मेरी बेटी की ज़िंदगी खराब कर दी, लड़की का बाप बोल रहा,,

इतने मे लड़के का बाप बोला, मालकिन बच्चा नादान है इसको इस बारे मे ज्यादा नही पता, गलती हो गयी मालकिन,,

लड़की का पिता मालकिन मेरी बच्ची 3 महीने की पेट से है वो भी कुवारी, कैसे में समाज मे मुह दिखाऊँगा, माँ को गुस्सा आने ही वाला था की मै बोल पड़ा,,

रुको सब सही होगा सबके साथ न्याय होगा,,

मैने लड़की और लड़के को पास बुलाया, माँ मेरी तरफ गौर से देख रही की कैसे ये सब करेगा,,

मैने लड़की और लड़के से पूछा, क्या तुम दोनो ने आपसी सहमति से सब किया है, या कोई जोर जबरदस्ती से हुआ, लड़का-- साहब मै इसको प्यार करता हु ये भी मुझसे प्यार करती है, इसलिए ये सब हो गया,

मैने लड़की से पूछा क्या ये सब तुम्हारी मर्ज़ी से हुआ है लड़के ने कोई जोर जबरदस्ती तो नही की, डरो नही खुल कर बोलो,

लड़की भी धीरे से हा साहब जी हम दोनो ने सब अपनी मर्ज़ी से किया है, हम अलग नही रह सकते, नही तो हम मर जायेंगे, लड़की रोने लगी,, तभी

मै-- देखो ये सब इन दोनो की मर्ज़ी से हुआ है कोई दबाव नही हुआ है, भलाई इसी मे है इन दोनो कि आज ही शादी करदो, लड़की 3 महीने पेट से है देरी ठीक नही,,

सब मेरी तरफ देखने लगे, सबको मेरी बात पसंद आई सब मेरी तारीफ करने लगे, माँ भी हल्की सी मुस्करा कर सबको देख रही,,

माँ ने अंदर से सिंदूर मंगाया और मांग भरने को बोला, लड़के ने सबके सामने लड़की की मांग भर दी, सब तालियां बजाने लगे, सब कह रहे लड़का अपनी माँ पर गया है सही फैसला करता है, हमने सबको विदा किया, और बैठ गये तभी माया चाय लेती हुई आई,और चाय देती हुई

माया-- देखा माँ जी भैया अब समझदार हो गये है, बिल्कुल आप पर गये है

माँ- हा माया, आज दिल खुश हो गया है अब ज़िंदगी मे कोई गम नही है, मेरा बेटा अब बड़ा हो गया है

तभी माया माँ जी आप इन कपड़ो मै बिल्कुल नई दुल्हन जैसे लग रही हो, आप हमेशा ऐसे ही कपड़े पहन कर रहना,

माया के मुह से ऐसी बात सुनकर माँ खुद को देखने लगी, सोच रही मेरा बेटा हमेशा सही बोलता था, आज सब मुझे खूबसूरत बोल रहे है, तभी माँ को फ्रेश होना था उनको चाय से टॉयलेट लगी जोर से, माया ने चाय के कप लिए और बोली भैया मै पानी गर्म कर देती हु आप नहा लेना फिर कहती हुई चली गयी, माँ वहा से टॉयलेट की तरफ जा रही, माया भी चली गयी,.मै वहा खडा था, माँ जल्दी से टॉयलेट मे घुस गयी, मैने चारो तरफ देखा कोई नही है, मै भी टॉयलेट की तरफ चल दिया चुपचाप,

माँ तब तक टॉयलेट करने बैठ गयी थी, मैने अपने कान दरवाजे के पास लगा दिये, माँ की चूत से पैसाब की धार की आवाज मुझे सुनाई दे रही थी, माँ बीच बीच मे अपना पाद मार रही थी, उनके पाद की खुशबु मुझ तक आ रही थी,मै बड़े प्यार और मस्ती सी पाद को सूंघ रहा था, तभी मुझे पानी की आवाज सुनाई दी, मै समझ गया माँ अपनी गांड धो रही है, मै तुरन्त वहा से निकल गया

तभी माँ मेरे पास आई बोली बेटा चल अब शहर चलते है वही नहायेंगे और खाना खायेंगे, तभी माया आती हुई माँ जी पानी गर्म है नहा कर चले जाओ,

माँ-- नही माया देर हो जायेगी, वही नहा लेंगे,

माँ मुझसे बोली बेटा जल्दी चलो क्या सोच रहे हो,

मैने गाड़ी निकाली मै और माँ बैठ होस्पिटल में पहुंचे..
 
Back
Top