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हैलो दोस्तो मै आपका राज शर्मा,,
ये कहानी मेरी है मै एक ऐसी फैमिली से हु जिसके लिए रुतबा ही सब कुछ है मेरे घर में मै (18), मेरी माँ (35),पापा(45)बुआ(30) दादी(50) नॉकरानी माया (32) और उसका पति थे। हमारे गाँव मै हमारे परिवार का रोब रुतबा सबसे बड़ा था, गाँव मै जब भी कोई बात होती या कोई फैसला मेरी माँ ही करती, उनका गुस्सा और निर्णय का सब सम्मान करते, कोई भी हो वो सज़ा सबको बराबर देती, उनके लिए उनका रुतबा ही सब कुछ था, मेरे पापा जब जवान थे तब वो शिकार पर निकले थे, मेरी माँ उंन दिनों एक कमसीन कली थी, उनका शरीर पर कच्चे आम की तरह उनकी चूचियाँ और बाहर निकली गांड को देखकर सब पागल हो जाते थे, मेरे नाना बहुत गरीब थे, माँ और मौसी दो ही औलाद थी,बेटा था नही इसलिए वो दुखी रहते की कैसे इनकी शादी होगी,, पापा शिकार के लिए बंदूक लिए घोड़े पर बैठकर जा रहे थे,मेरी माँ और मौसी दोनो शौच के लिए पास ही के जंगल मे गयी हुई थी, मेरी माँ और मौसी की कमसीन जवानी किसी को भी पागल कर सकती थी,पास मे ही तालाब था जहाँ सब शौच के बाद अपनी गांड साफ करते थे, मेरी माँ और मौसी ने चारो तरफ देखा की कोई नही है दोनो कुछ दूरी अलग अलग होकर शौच के लिए बैठ गयी, दोनो की भरी जवानी मे भरी गांड देख कर कोई भी पागल हो सकता था,,, उनका मोटे मोटे भरे चुतर और कसे हुए चुचे जवानी का रस उन दोनो के अंगो मे भरा पड़ा था, मेरे पापा भी घोड़े को पानी पिलाने के लिए तालाब के पास जा रहे थे,अचानक पापा की नज़र माँ की फूली हुई गोरी गोरी दो कच्चे तरबूज हो रसभरे, पापा के मुह मे पानी आ गया था, पापा के लंड ने हलचल करनी शुरू कर दी थी, पापा ने घोड़े को पेड़ से बांध वही बंदूक रख दी, और अपना काला लंड निकाल कर मसलने लगे, ओहो आज तो यही शिकार करूँगा कसम से पुरा खून खराबा करूँगा, हल्की मुस्कान और हाथ में लंड लिए पापा चुपके से माँ के पीछे चले गये,.. Next पार्ट
ये कहानी मेरी है मै एक ऐसी फैमिली से हु जिसके लिए रुतबा ही सब कुछ है मेरे घर में मै (18), मेरी माँ (35),पापा(45)बुआ(30) दादी(50) नॉकरानी माया (32) और उसका पति थे। हमारे गाँव मै हमारे परिवार का रोब रुतबा सबसे बड़ा था, गाँव मै जब भी कोई बात होती या कोई फैसला मेरी माँ ही करती, उनका गुस्सा और निर्णय का सब सम्मान करते, कोई भी हो वो सज़ा सबको बराबर देती, उनके लिए उनका रुतबा ही सब कुछ था, मेरे पापा जब जवान थे तब वो शिकार पर निकले थे, मेरी माँ उंन दिनों एक कमसीन कली थी, उनका शरीर पर कच्चे आम की तरह उनकी चूचियाँ और बाहर निकली गांड को देखकर सब पागल हो जाते थे, मेरे नाना बहुत गरीब थे, माँ और मौसी दो ही औलाद थी,बेटा था नही इसलिए वो दुखी रहते की कैसे इनकी शादी होगी,, पापा शिकार के लिए बंदूक लिए घोड़े पर बैठकर जा रहे थे,मेरी माँ और मौसी दोनो शौच के लिए पास ही के जंगल मे गयी हुई थी, मेरी माँ और मौसी की कमसीन जवानी किसी को भी पागल कर सकती थी,पास मे ही तालाब था जहाँ सब शौच के बाद अपनी गांड साफ करते थे, मेरी माँ और मौसी ने चारो तरफ देखा की कोई नही है दोनो कुछ दूरी अलग अलग होकर शौच के लिए बैठ गयी, दोनो की भरी जवानी मे भरी गांड देख कर कोई भी पागल हो सकता था,,, उनका मोटे मोटे भरे चुतर और कसे हुए चुचे जवानी का रस उन दोनो के अंगो मे भरा पड़ा था, मेरे पापा भी घोड़े को पानी पिलाने के लिए तालाब के पास जा रहे थे,अचानक पापा की नज़र माँ की फूली हुई गोरी गोरी दो कच्चे तरबूज हो रसभरे, पापा के मुह मे पानी आ गया था, पापा के लंड ने हलचल करनी शुरू कर दी थी, पापा ने घोड़े को पेड़ से बांध वही बंदूक रख दी, और अपना काला लंड निकाल कर मसलने लगे, ओहो आज तो यही शिकार करूँगा कसम से पुरा खून खराबा करूँगा, हल्की मुस्कान और हाथ में लंड लिए पापा चुपके से माँ के पीछे चले गये,.. Next पार्ट