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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना
अपडेट 152ब
दिलीप- मैं एक टूल पे बैठ गया
[काव्या और करुणा जब सोच में गुम थी तब तक कामिनी पूरे होश में आचुकी थी
और वो काव्या और करुणा को देख कर फूले नही समा रही थी
तभी काव्या की नज़र कामिनी पे पड़ी
कामिनी के आँसू देख कर काव्या समझी कि कामिनी मगरमच्छ के आँसू बहा रही है
और इसी गुस्से में काव्या पहला बेल्ट कामिनी के पेट पे मार दी
कामिनी की दबी चीख निकल गयी
कामिनी की चीख सुनते ही करुणा भी अपने ख्यालो से बाहर आई
और वो कामिनी को घूर्ने लगी
कामिनी कुछ बोलना चाहती थी
लेकिन जब ग़लतफहमी नफ़रत का रूप ले लेती है तो तकलीफ़ की इंतेहा हो जाती है
करुणा भी एक बेल्ट कामिनी के पेट पे मार दी
दर्द कामिनी को हो रहा था और आँसू काव्या और करुणा के निकल रहे थे
काव्या- क्या बिगाड़ा था हमने आपका जो आपने हमारे साथ यह सब किया
क्या आप इतनी गिर गयी की सब रिश्ते भूल गयी
करुणा- गिर गयी क्या यह तो पहले से ही गिरी हुई है
रंडी कुतिया छिनाल
[यह सुनके कामिनी की आँखें फटी की फटी रह गयी]
रंडी भी इससे अच्छी होती है लेकिन भोसड़ी कुत्ति उससे भी गिरी हुई है
काव्या- क्यूँ रंडी अब मज़ा आ रहा है तुझे कि और मज़ा चाहिए
बोल ना छिनाल कुछ याद आया कि और सुनेगी
वैसे एक बात मेरी समझ में आज तक नही आई
कि तू अभी तक शादी क्यूँ नही की कहीं चुदवा चुदवा कर तेरी चूत का भोसड़ा तो नही बन गया
या फिर लंड की इतनी दीवानी हो चुकी है कि शादी करके एक लंड से तेरी चूत की आग नही बुझेगी
करुणा- इसकी आग ऐसे थोड़ी बुझेगी
यह रंडी और रंडिया हमेशा नंगी रहती है
[करुणा कामिनी के पास गयी और उसे एक थप्पड़ मार दी
काव्या भी कहाँ पीछे रहने वाली थी
वो भी कामिनी के गाल लाल कर दी
फिर काव्या कामिनी का टॉप पकड़ी और एक झटके में फाड़ दी
कामिनी छटपटाने लगी कुछ बोलना चाहती थी
करुणा बिना सोचे समझे कामिनी की ब्रा भी फाडी
लेकिन काव्या तुरंत कामिनी को पेट के बल लेटा दी
कामिनी कमर से उपर पूरी नंगी हो चुकी थी
कामिनी का दूध से ज़्यादा गोरा जिस्म आज लाल होने वाला था
करुणा कामिनी के पीठ पे बेल्ट मारने लगी
लगातार कामिनी की पीठ छिल गयी
कामिनी की पीठ में कम और दिल में ज़्यादा दर्द हो रहा था
कामिनी खून के आँसू रो रही थी
काव्या- क्यूँ रंडी कुछ याद आ रहा है
या भूल गयी
तू भी इसी तरह से मेरी माँ की पीठ पे बेल्ट बरसाती थी याद आया
वो इस लिए कि तू अपने भाई के मौत की ज़िम्मेदार हमारी माँ को मानती है
लेकिन तू यह भूल गयी कि तुझसे ज़्यादा तेरे भाई को हमारी माँ प्यार करती थी
तू कितनी बड़ी रंडी भोसड़ी निकली
कि जिसने तुझे पाल पोस्के इतना बड़ा किया उसी के जिस्म पे तू बेल्ट बरसाती रही
तुझे पता नही है क्या कि हमारी माँ एक राज कुमारी और तू सिर्फ़ एक हरामी जिसकी माँ बिन ब्याही माँ बन गयी
[बस यही बात कामिनी का दिल चीरने के लिए काफ़ी थी कामिनी का घमंड कामिनी की नफ़रत यहाँ तक कि कामिनी का वजूद सब इस एक बात से मिट गया]
तू तो मेरी माँ की कोई लगती भी नही थी फिर भी मेरी माँ आज तक तुझे मनाने के लिए तेरी बेल्ट अपनी पीठ पे और तेरी गाली अपने दिल पे खाती है और तू छिनाल रंडी यह समझ ही नही पाई कि तुझसे हमारा खून का रिश्ता भी नही है
तू एक पाप है जो हमारे दादा ने किया था
[यह कहके काव्या रोने लगी...
अपडेट 153
करुणा- तुम क्यूँ रो रही हो रोना तो इस रंडी को चाहिए
[कामिनी का चेहरा देख कर लग रहा था कि वो कितना तड़प रही है]
काव्या- आप सही कह रही हैं अब इस छिनाल को पूरी तरह से बर्बाद करना है
अभी बुलाती हूँ उसे आज इस रंडी की सारी खुजली मिट जाएगी
[काव्या रूम से बाहर मेरे पास आई]
काव्या- चलो वक़्त आ गया है
दिलीप- इसको पहले नंगा करो तबतक मैं आता हूँ
[काव्या मेरी बात सुनके वापस रूम में चली गयी]
कामिनी के रूम का गेट बाहर से लॉक किया
अब वक़्त आ गया था मैने मास्क उतार दिया और किरण मौसी के रूम में पहुँचा
गेट खोलके अंदर गया
किरण मौसी बैठी हुई थी
मैने किरण मौसी का हाथ पकड़ा
किरण मौसी- क्या हुआ दिलीप
दिलीप- चलके खुद देख लीजिए
[मैं किरण मौसी का हाथ पकड़े हुए कामिनी के रूम पे पहुँचा
[रूम में से काव्या और करुणा की गालियाँ सुनाई दे रही थी]
किरण मौसी- यह यह दोनो किसे गाली दे रही हैं
दिलीप- कामिनी को
किरण मौसी- दिलीप [और किरण मौसी मुझे थप्पड़ मार दी]
[मुझे थप्पड़ मारके किरण मौसी गेट खोलके अंदर चली गयी
अंदर का नज़ारा देख कर किरण मौसी बुत बन गई
उनकी आँखो से लगातार आँसू बहने लगे
हुआ यह जब किरण मौसी अंदर गयी तो देखी
कि कामिनी बिस्तर पे पूरी नंगी पेट के बल लेटी है
और करुणा उसकी पीठ पे बेल्ट बरसा रही है
काव्या उसके गालो पे थप्पड़ मार रही है
कामिनी की पीठ खून से लाल थी]
किरण मौसी दौड़ते हुए कामिनी के पास गयी
करुणा और काव्या कुछ समझ पाती उससे पहले ही किरण मौसी दोनो को खींचके थप्पड़ मार दी
साइड में पड़ी हुई चादर कामिनी के जिस्म पे लपेट दी
और कामिनी को गले लगाके रोने लगी
किरण मौसी- बेहया बेशरम तुम दोनो मर क्यूँ नही गयी यह सब करने से पहले
काव्या- मरना तो इसे चाहिए तड़प तड़प कर
किरण मौसी- तुम दोनो के मुँह से एक शब्द भी निकला तो मैं तुम दोनो की ज़ुबान काट दूँगी
करुणा- उससे पहले हमे इसकी ज़ुबान काटनी है
किरण मौसी- यह क्या हो गया है तुम दोनो को
काव्या- नफ़रत इस कामिनी से
करुणा- हां हमे इससे नफ़रत हो गई है
किरण मौसी- लेकिन क्यूँ
काव्या- इसी से पूछिए पिताजी की मौत एक हादसा थी
यह आपको उसका ज़िम्मेदार मानके पिच्छले 5 सालो से आपको बेल्ट से मार रही है
आपको गाली दे रही है
किरण मौसी- यह मेरे और कामिनी के बीच की बात है तुम दोनो को ऐसा करने का कोई हक़ नही है
काव्या- है क्यूंकी आप हमारी माँ हैं
किरण मौसी-[चीखके] और यह तुम दोनो की बड़ी बहेन
जब मैं इस घर में शादी करके आई थी तब इस घर में मेरा अकेलापन दूर करने के लिए मेरी कामिनी थी
मेरे पति जब काम से बाहर जाते थे तो मेरे साथ कौन थी
मेरी बड़ी बेटी कामिनी
और आज अचानक क्या हो गया तुम दोनो को
कल तक तो इसके साथ थी
काव्या- जबसे हमे पता चला कि यह आपको जान से मारके यह घर अपने नाम करना चाहती है
किरण मौसी- कौनसा घर यह घर मैं पहले ही कामिनी के नाम कर चुकी हूँ
और कामिनी मुझे क्यूँ मारेगी मैं जानती हूँ
यह मुझसे जितनी नफ़रत करती है उससे कयि ज़्यादा प्यार करती है
काव्या- प्यार करती है माँ अब आपको डरने की ज़रूरत नही है यह अब हमारे कब्ज़े में है
किरण मौसी- क्या मतलब
करुणा- मतलब यह कि हमे पता चल गया है कि यह आपको ब्लॅकमेल कर रही थी
कि इसके पास हमारा वीडियो है जिसमें हम बिना कपड़ो के हैं
और इसी लिए आप इसकी गालियाँ और इसकी मार पिच्छले 5 सालो से खा रही हैं...
अपडेट 153ए
किरण मौसी- [दाँत पीस कर] और भी कुछ है बोलने को
काव्या- हाँ है यह आज हमे हमारे ही रूम में किडनॅप कर रखे हुई थी
वो तो इसका साथी लालची था इसी लिए हम और आप बच गयी
वरना यह आपको जान से मारती देती और आपके बाद हमे मारके विदेश भाग जाती
[कामिनी उस वक़्त से सिर्फ़ किरण मौसी को देखे जा रही थी लेकिन यह बात सुनके वो पूरी तरह से टूट गयी जिसके लिए वो अपनी सारी प्रॉपर्टी अपनी इज़्ज़त तक लुटाने को तय्यार थी वोही दोनो आज कह रही थी कि यह हमे मारके विदेश भागना चाहती थी]
किरण मौसी- यह सब झूठ है ग़लत फहमी हुई है तुम दोनो को
[तभी किरण मौसी की नज़र कामिनी पे पड़ी जिसके मुँह पे टेप लगा हुआ था
किरण मौसी कामिनी के मुँह से टेप हटा दी]
कामिनी- [अधमरी आवाज़ में]
भाभी मेरा गला घोंट दीजिए मैं अब जीना नही चाहती हूँ प्लीज़ भाभी अगर आप मुझसे प्यार करती हैं तो मेरी जान ले लीजिए
काव्या- देखा अभी भी चाल चल रही है
करुणा- नागिन जो है
कामिनी- भाभी आप एक ब्लॅंकपेपर दीजिए मैं उसपे साइन कर देती हूँ आप जो चाहे उसपे लिख लेना
किरण मौसी- [रोते हुए] कामिनी ऐसा मत बोलो यह सब ग़लतफहमी है
करुणा- माँ आप समझती क्यूँ नही है यह आपको बेवकूफ़ बना रही है हमे कोई ग़लतफहमी नही हुई है
[अब वक़्त था मेरे अंदर जाने का
मैं अंदर गया]
दिलीप- जी नही 20 साल की खूबसूरत लड़की यह ग़लतफहमी ही है तुम दोनो से मैने झूठ बोला है
[मुझे देखते ही काव्या और करुणा शॉक हो गई
काव्या- तुम
दिलीप- हाँ मैं
करुणा- तुम ही हो मास्क वाले
दिलीप- हाँ
काव्या- इसका मतलब
दिलीप- जी हां मेरी कही हर बात झूठ है सिवाय इसके कि तुम्हारी बुआ तुम्हारी माँ को रोज़ ज़लील करती है
[यह सुनके काव्या और करुणा के पैरो तले ज़मीन खिसक गयी]
और कामिनी जी आपसे आज यह दर्द यह तकलीफ़ यह दुख सहेन नही हो रहा है
देखिए इस औरत की तरफ यह आपकी भाभी नही आपकी माँ है आपको पालने वाली
और तुम दोनो भी देखो इस औरत की तरफ यह तुम्हारी माँ है
तुम्हे जन्म देने वाली कुछ याद आया
कामिनी जी 1825 दिन 5 साल से आप इस औरत को ज़लील कर रही हैं
और तुम दोनो इससे नफ़रत कर रही हो
कामिनी जी आज एक ग़लतफहमी ने आपसे आपकी दोनो गुड़िया छीन ली
और तुम दोनो से तुम्हारी बुआ बहेन दोस्त सब
कल मेरी किरण मौसी ने अपनी तीनो बेटियाँ खो दी थी
आज आप अपना सबकुछ खो दी
कामिनी जी आप एक ग़लतफहमी की वजह से अपनी भाभी से नफ़रत करती हैं ना
आज उसी ग़लतफहमी की वजह से यह दोनो आपसे नफ़रत करती हैं
और तुम्हार माँ और तुम्हारी बुआ तुम दोनो से
[मेरी बात सुनके तीनो अपना सर नीचे झुका ली
किरण मौसी उठके मेरे पास आई]
किरण मौसी- कल तक यह मुझसे नफ़रत करती थी
आज यह एक दूसरे से नफ़रत करती हैं
मैं तो पूरी तरह बर्बाद हो गयी
यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है
दिलीप- तो यह लीजिए
[मैं किरण मौसी के हाथ में एक लकड़ी दे दिया]
किरण मौसी उस लकड़ी से मुझे मारने लगी
किरण मौसी- तुम्हे क्या ज़रूरत थी यह सब करने की
आज देखो कामिनी मुझसे और नफ़रत करेगी
मेरी दोनो बेटी कामिनी से नफ़रत करेगी और मैं तुमसे
[मुझे मारते मारते किरण मौसी थक गयी
फिर अचानक वो रूम से बाहर चली गयी और गेट लॉक कर दी
मेरी तो कुछ समझ में नही आया
मैने खिड़की से देखा किरण मौसी अपने बदन पे मिट्टी का तेल डाल रही थी...
अपडेट 154
दिलीप- [चीखते हुए] मासी प्लीज़ रुक जाइए यह आप क्या कर रही हैं
ऐसा मत कीजिए
किरण मौसी- [रोते हुए] अब जीके क्या करूँ तुम यह मत समझना कि मैं तुम्हारी वजह से अपनी जान दे रही हूँ
तुमसे ही अगर बड़ी माँ तुमसे नफ़रत करने लगे तो क्या तुम जी पाओगे वैसे ही कामिनी भी अब काव्या और करुणा से नफ़रत करती है मैं नफ़रत सह सकती हूँ
लेकिन अपनी ही बेटियो को एक दूसरे से नफ़रत करते हुए नही देख सकती
[मासी की बात सुनके मुझे एहसास हुआ कि यह मैने क्या कर दिया
मासी थोड़ा वक़्त इंतेज़ार कर लेती]
मासी आप मेरी बात सुनिए रुक जाइए
कामिनी- दिलीप
[कामिनी मुझे बेड पे लेटके ही आवाज़ दे रही थी]
[मैं कामिनी के पास गया]
कामिनी- मुझे वहाँ पे ले चलो
[मैने आव देखा ना ताव कामिनी को अपनी गोद में उठा लिया और खिड़की पे ले गया]
कामिनी अब मेरा सहारा लेके खड़ी हो चुकी थी
कामिनी- भाभी मुझे माफ़ करदो
किरण मौसी- मैं कौन होती हूँ तुम्हे माफ़ करने वाली
कामिनी- भाभी आप मेरी माँ हो
किरण मौसी- मैं तुम्हे माफ़ भी कर दूँ तो क्या बदल जाएगा
कामिनी- बदलेगा ना तुम मुझे माफ़ कर दोगि तो मैं हमेशा तुम्हारा ख्याल रखूँगी तुम्हे छोड़के कभी नही जाउन्गी
तुम्हारे लिए खाना पकाउंगी
तुम्हे अपने हाथो से खिलाउंगी
किरण मौसी- कामिनी तुमने बहुत देर कर दी
देख रही हो एक ग़लतफहमी तुम्हे मुझसे दूर ले गयी
और आज दूसरी ग़लतफहमी काव्या और करुणा को तुमसे दूर ले गयी
कामिनी- नही भाभी मुझे इन्दोनो से कोई शिकायत नही है
आज मैं जान गयी हूँ मुझे मेरे किए की सज़ा मिली है
मैं आप पे पिच्छले 5 सालो से अत्याचार कर रही हूँ
अगर आप मुझे उसके लिए माफ़ कर सकती हैं
तो मैं क्या 1 दिन के लिए इन्हे माफ़ नही कर सकती
और इन्होने बिल्कुल सही किया
अगर मैं इनकी माँ पे इतना अत्याचार कर रही हूँ
तो यह इनका हक़ है
भाभी आप प्लीज़ गेट खोल दो बहुत तकलीफ़ हो रही है
आपके बिना मैं मर जाउन्गी क्या आप अपनी बड़ी बेटी को मरने देंगी
भाभी [कहते हुए कामिनी बेहोश हो गयी
किरण मौसी दौड़ी हुई गेट खोलके अंदर आई
और कामिनी को अपने गले लगा ली
मैं वहाँ से अपने रूम में आया
और पॅकेट में मेडिसिन थी वो ले जाके किरण मौसी को दिया और रूम के बाहर इंतेज़ार करने लगा
किरण मौसी पॅकेट खोलके उसमें से ट्यूब कामिनी पीठ पे लगाने लगी
और पेनकिलर भी दे दी
[काव्या और करुणा उस वक़्त से एक साइड में चुप चाप खड़ी थी]
उधर किरण मौसी कामिनी को के साथ ही बेड पे बैठी थी
काव्या और करुणा रूम से बाहर आ गई
और मेरे सामने खड़ी हो गयी
काव्या- अब हम क्या करे
करुणा- वो दोनो तो मिल गई लेकिन अब हम क्या करे
एक तरफ हमे लगता है कि माँ के साथ जैसा कामिनी ने किया
हमने भी कामिनी बुआ के साथ वैसा ही किया
काव्या- तुम तो बहुत बड़े प्लॅनर हो ना तो बताओ हम क्या करे
दिलीप- तुमने कभी मासी को गाली दी
काव्या- नही
दिलीप- कभी मासी के साथ कुछ ग़लत की
करुणा- नही
दिलीप- तो बस कामिनी जो मासी के साथ इतना ग़लत की और मासी उसे माफ़ भी करदी
तो तुम भी कामिनी से माफी माँग लो
क्यूंकी कामिनी ने जो किया ग़लत लेकिन तुम दोनो तो कामिनी से ज़्यादा ग़लत की हो
जब कामिनी इतना सबकुछ करके माफी माँग सकती है तो तुम दोनो क्यूँ नही
अभी रूम में जाओ मासी के गले लगो और कामिनी के पैर पकडो
सब कुछ ठीक हो जाएगा
[दोनो आई थी मुझे ताना मारनेलेकिन जब रूम में घुसी तो किरण मौसी का परिवार पूरा हो चुका था
रात भर करुणा और काव्या कामिनी के पैर के पास बैठी रही
और किरण मौसी कामिनी के सर के पास
जिसकी वजह किरण मौसी का परिवार टूटा था
उसी की वजह से आज किरण मौसी का परिवार एक हो गया
वैसे तो मैं जोश में था
लेकिन किरण मौसी ने जो पिटाई की थी
मैं अपने रूम में आया बेड पे लेट ते ही नींद आ गई..,
अपडेट 154अ
दिलीप- सुबह में जब आँख खुली तो 7 बजा था
मैं उठके नहाया धोया फ्रेश होके अपना समान बाँधा और नीचे आ गया
किचन में जाके चाइ बनाया सबके लिए और पहुँचा कामिनी के रूम में
चारो हंस हंस कर बाते कर रही थी
किरण मौसी आज सच मे बहुत खुश लग रही थी
मैं टेबल पे चाइ रखके मासी के पास बैठ गया
दिलीप- मासी मैं वापस गाओं जा रहा हूँ
किरण मौसी- क्यूँ
दिलीप- बस ऐसे ही
किरण मौसी- तुम मेरा दुख दूर करने आए थे करके जा रहे हो
तुम तो ज़बरदस्ती मेरे साथ आए थे ना
दिलीप- मासी
किरण मौसी- कामिनी तुम मेरे भानजे से नाराज़ हो
कामिनी- नही भाभी मैं तो बहुत खुश हूँ
अगर यह आपके साथ ज़बरदस्ती नही आता तो मुझे मेरी माँ कैसे मिलती
किरण मौसी- क्या तुम मेरी बेटी से नाराज़ हो
कामिनी- नही मैं तो सोच रही हूँ अगर दिलीप पहले यहाँ आजाता तो मैं कबका सुधर चुकी होती
किरण मौसी- काव्या और करुणा क्या तुम कामिनी से नाराज़ हो
एक साथ- नही
किरण मौसी- दिलीप क्या तुम मुझसे नाराज़ हो
दिलीप- नही
किरण मौसी- तो फिर जा क्यूँ रहे हो
दिलीप- बस ऐसे ही
किरण मौसी- अगर जाना है तो जाओ लेकिन दोबारा मेरे पास कभी मत आना
दिलीप- मासी
किरण मौसी- क्या मासी 4कप चाइ लेके आए हो
कामिनी तो हल्दी वाला दूध पी चुकी है
अब एक कप चाइ पीयो
[मासी की बात सुनके मैं चाइ पीने लगा]
तभी मुझे याद आया कि लखन कालिए ने कहा था कसरत करना
मैं चाइ पीके छत पे आया
शर्ट फेंका बाजू में और लगा कसरत करने
[करुणा का रूम]
काव्या- दीदी कल जो दिलीप हमारे साथ बात कर रहा था
क्या वो सच में हमारे साथ ऐसा करता
करुणा- क्या वोही एक रात वाला हो भी सकता है
और दीदी मत बोला कीजिए आप मुझसे बड़ी हैं
काव्या- लेकिन बुआ के साथ करने का तो उसे पूरा मौका था
करुणा- हाँ था तो एक काम क्यूँ नही करती तुम
सॉरी आप जाके उससे पूछ लीजिए कि वो आपके साथ रात बिताएगा कि नही
काव्या- तू जाके पूछ
मैं क्या इतनी बेशरम हूँ
करुणा- तो मैं हूँ
काव्या- वैसे दिलीप का आइडिया काम कर गया
कामिनी बुआ होश में आते ही हमारे गले लग गयी
काव्या- मैं तो यह समझ नही पा रही हूँ
कि वो हमे तुम क्यूँ कहता है
करुणा- चलो आपकी वजह से मैं अपने आपको आपसे बड़ी समझने लगी हूँ
चलिए उसी से जाके पूछते हैं
दिलीप- इधर मैं कसरत किए जा रहा था आधा घंटा और करना था
तभी करुणा और काव्या छत पे आ गई
मैने कसरत करना बंद कर दिया
काव्या- तुमसे एक बात पूछनी है
दिलीप- क्या
काव्या- तुम मेरे क्या लगते हो
दिलीप- भाई
करुणा- तो फिर हमे दीदी क्यूँ नही कहते
दिलीप- वो क्या है कि पहली नज़र में मैं पहचान लेता हूँ
काव्या- क्या मतलब
दिलीप- छोड़िए
[मैं वापस कसरत करने लगा
अब क्या करूँ कल ऐसी ऐसी बात किया था
कि अब बात करने का मन नही कर रहा था
वैसे जब कामिनी की गाली फोन पे सुना था
और अगर कामिनी मेरे सामने होती तो पता नही मैं क्या कर बैठता
मैं यह सब सोच रहा था कि मेरे कसरत करने का टाइम ऑफ हो गया
मैं नीचे आया और हॉल में बैठ गया
पूरा बोर हो चुका था
सोचा एरिया घूम लेता हूँ
मैं किरण मौसी को जाके बोल दिया कि मैं घूम कर आता हूँ
और मैं घर से बाहर आ गया
जैसे ही मैं बाहर आया तो मुझे रिमी दिखी जो अपनी जीप पे बैठी हुई थी...
अपडेट 155
दिलीप- [मैं रिमी के पास गया]
आप गयी नही अभी तक
रिमी- मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ
दिलीप- कही प्यार तो नही हो गया आपको मुझसे
रिमी- [रिमी मेरी बात पे मुस्कुरा दी] नही बस तुम्हे सॉरी कहना चाहती हूँ
सॉरी
दिलीप- किस लिए
[रिमी बिना मुझे जवाब दिए अपनी जीप आगे बढ़ा दी
मैं एरिया घूमने लगा
बहुत ही अच्छा माहौल था
फिर मैं पार्क में जाके बैठ गया
थोड़ी देर बाद मैं घर आ गया
दिन भी ऐसे बीता और रात भी
अगली सुबह करुणा और काव्या मेरे रूम में आई
मैं मोबाइल चला रहा था या यूँ कहूँ तो अपनी विदू को फोटो देख रहा था
दोनो के आते ही मैं उठके बैठ गया]
काव्या- हमारे साथ शॉपिंग करने चलोगे
दिलीप- कितनी देर में चलना है
करुणा- 1 घंटे बाद
दिलीप- कामिनी जी कैसी हैं
काव्या- ठीक हैं
तुम्हे पूछ रही थी
[फिर दोनो चली गयी
मैं गया कामिनी के रूम में
कामिनी लेटके कोई मॅगज़ीन पढ़ रही थी
मुझे देख कर वो बोली मेरे पास बैठो
दिलीप- कैसी तबीयत है आपकी
कामिनी- तुमसे एक बात पुछु सच सच बताना
दिलीप- जी पूछिए
कामिनी- जब मैं भाभी को फोन की थी तब फोन पे तुम थे
मेरी बात सुनके तुम्हारे दिमाग़ में पहली कोन्सि बात आई थी
दिलीप- रहने दीजिए आप गुस्सा हो जाएँगी
कामिनी- जब मैं इतना सबकुछ सह सकती हूँ तो तुम्हारी बात भी सह लूँगी
दिलीप- उस वक़्त मैं इतने गुस्से में था कि कुछ सोच भी नही पा रहा था
कामिनी- अगर मैं उस वक़्त तुम्हारे सामने होती तो क्या करते
दिलीप- आप यह सब पूछ क्यूँ रही हैं
कामिनी- तुम्हे भाभी की कसम बताओ
दिलीप- [यार जिसको देखो कसम देने लगता है अब तो बताना ही पड़ेगा मैं अपना गाल तय्यार कर लिया]
आप अगर उस वक़्त मेरे सामने होती तो मैं आपकी गान्ड मार लेता
[यह कहके मैं अपनी नज़र नीची कर लिया]
कामिनी- तो फिर मुझे बाँधने के बाद तो अच्छा मौका था रुक क्यूँ गये उस वक़्त
दिलीप- कोई औरत कितना भी घटिया काम कर ले
उसे दर्द तभी होता है जब उसकी आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है
आप के लिए सबसे बड़ी सज़ा वोही थी
जो आपको मिली
कामिनी- मैं पूछ रही हूँ कि तुम क्यूँ रुक गये
दिलीप- क्यूंकी किरण मौसी आपसे बहुत प्यार करती है
मैं अगर आपके साथ वैसा करता तो वो पता नही क्या कर बैठती
कामिनी- मतलब अगर मैं कोई पराई होती तो तुम मेरा सबकुछ लूट लेते
दिलीप- क्या है आपको
कामिनी- पहले जो पूछ रही हूँ उसका जवाब दो
दिलीप- हाँ लूट लेता
[मेरी बात सुनके कामिनी हँसने लगी मैने सोचा ज़रूर सदमा लग गया है]
कामिनी- ऐसे मत देखो मुझे कुछ कुछ होता है वैसे तुम कुंवारे हो
दिलीप- क्या मतलब
कामिनी- मतलब यह कि मेरे साथ जो करने की सोच रहे थे वो किसी के साथ किए हो
दिलीप- [ या तो यह पागल हो गयी है या तो यह लाइन दे रही है]
हाँ
कामिनी- सो सॅड
दिलीप- [पक्का लाइन दे रही है लेकिन पकडून्गा नही मासी को पता चल गया तो]
ठीक है अब मैं चलता हूँ
कामिनी- भाभी भी मेरे गले लगी करुणा और कविता भी मेरे गले लगी लेकिन तुम नही लगे
[कामिनी की बात सुनके मेरा दिमाग़ तो पहले ही से ही घुमा हुआ था
लेकिन मैं कोई बच्चा थोड़े ही हूँ कि शर्मा जाऊ
मैं आगे बढ़के कामिनी के गले लग गया
लेकिन कामिनी आज पूरे मूड में थी
कामिनी ज़ोर से मुझे अपनी बाहो में भींच ली
एक तो कामिनी ब्रा नही पहने हुई थी
पीठ जो छिली हुई थी
उसके बूब्स मेरी छाती में धँस गये थे
मैं अपने आपको कंट्रोल किया
और कामिनी से अलग हुआ
और रूम से बाहर आ गया....
अपडेट 155अ
दिलीप- सच कहूँ तो मैं डर नही रहा था कि मासी को पता चलेगा तो वो नाराज़ होंगी
मैं कामिनी पे विश्वास नही कर पा रहा था
भले ही कामिनी सबके साथ खुश थी
लेकिन वो मेरी कोई नही थी
मेरा और उसका दूर दूर का रिश्ता नही था
क्या करूँ कामिनी की बात मैं भूल ही नही पाता हूँ
एक बार और कामिनी अगर लाइन दी तो मैं डाइरेक्ट बात करूँगा
इसी सोच में गुम होके मैं नीचे आ गया
करुणा मुझे आवाज़ देने लगी
जब मैं नही सुना तो वो मेरे पास आ गई और मुझे हिलाने लगी
मैं होश में आया
काव्या- कहाँ खोए हो चलना नही है
[मैं बिना कुछ बोले कार में जाके बैठ गया
मेरे बगल में करुणा बैठी थी और काव्या कार चला रही थी
करुणा और काव्या बोले जा रही थी
पर मैं चुप था
थोड़ी देर बाद हम माल पहुँचे
मैं काव्या और करुणा के साथ शॉप में घूमने लगा
तभी एक लड़की आके करुणा के गले लग गयी
करुणा की फ्रेंड- करुणा तू तो मुझे भूल ही गयी हमने प्रॉमिस किया था कि हम हर सनडे मिलेंगे
मैं काव्या के पास काउंटर के दूसरे साइड खड़ा था
काव्या- करुणा कहाँ हैं
[मैं उंगली से इशारा किया उधर है]
बुला कर लाओ ना उसे
[मैं करुणा के पास गया]
दिलीप- तुम्हे बुला रही है
करुणा की फ्रेंड- वाउ सो हॅंडसम कौन है
करुणा- माइ बॉयफ्रेंड दिलीप
[यह सुनके मैं खांसने लगा
करुणा की फ्रेंड- देखो तुमसे भी गोरा है अगर यह सिंगल होता तो मैं इसे बाय्फ्रेंड नही बनाती
सीधे शादी कर लेती
करुणा- चुप कर
करुणा की फ्रेंड- मुझे इसके साथ सेल्फी लेनी है
करुणा- क्यूँ नही
[मैं करुणा को आँख दिखाने लगा]
[लेकिन कोई फ़ायदा नही हुआ
करुणा की फ़्रेंड मेरे साथ सेल्फी ले ही ली]
[मैं करुणा को गुस्से से देखता हुआ माल से बाहर आ गया
थोड़ी देर बाद दोनो हँसते हुए माल से बाहर निकली
मैं गाड़ी में बैठ गया
[करुणा गाड़ी चलाने लगी
काव्या- इतना नाराज़ क्यूँ हो रहे हो यहाँ यह सब चलता है
[मैं अपनी गर्दन हाँ में हिला दिया
थोड़ी देर बाद हम घर पहुँचे
मैं सीधा किरण मौसी के पास गया
मासी से थोड़ी देर बात करके अपने रूम में आ गया
शाम में करुणा और काव्या मेरे रूम में आ गई पता नही क्यूँ
करुणा- यह लो तुम्हारे लिए गिफ्ट हमारे जाने के बाद खोलना
काव्या- हमारा गिफ्ट कहाँ है
[मैं अपनी जेब से दो चॉक्लेट निकाला और दोनो के हाथ में रख दिया
फिर मैं बाथरूम में आ गया
थोड़ी देर बाद जब मैं बाथरूम से बाहर आया तो दोनो में से कोई नही थी
फिर मैं खाना खाने नीचे गया
खाना ख़ाके जैसे ही उठा किरण मौसी- दिलीप कामिनी को हल्दी वाला दूध पिला दे
दिलीप- मैं
किरण मौसी- क्या करूँ यह भी दूध पीने में नाटक करती है
[बुझे मन से मैं कामिनी के रूम में दूध लेके पहुँचा
कामिनी भी नही थी
शायद बाथरूम में थी
थोड़ी देर बाद कामिनी बाथरूम से बाहर निकली
मैने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया
क्यूँ कि कामिनी जाली वाला नाइटी पहने हुई थी जिसमें उसके बूब्स सॉफ दिख रहे थे
पेट भी और तो और जांघे भी
एक झटके में कामिनी बिल्कुल मेरे सामने आ गई
दिलीप- आप दूध पी लीजिएगा
कामिनी- तुम ही पिला दो
भाभी कहती है तुम दूध अपने हाथो से पिलाते हो
तो बहुत अच्छा लगता है
[मरता क्या ना करता मैं कामिनी के मुँह में दूध का ग्लास लगा दिया
कामिनी भी ऐसे दूध पी रही थी कि दूध उसकी ठुड्डी से होते हुए उसके बूब्स पे आके रुक रहा था
शूकर है कामिनी पूरा दूध पी ली
फिर कामिनी मुझे ज़ोर से गले लगा ली
एक तो इतने दिन से मेरे लंड को खाना नही मिला था
उपर से यह कामिनी
मैं कामिनी को अपने से अलग अपने रूम में आया गते लॉक किया
पॅंट और अंडरवेर दोनो उतारके फेंका
आज मेरा लंड इतना दर्द कर रहा था
एक तो ऐसी ऐसी बाते उपर से कामिनी का जिस्म
मैं बातरूम में आया और अपने लंड पे पानी डालने लगा
फिर आके बेड पे लेट गया..
अपडेट 156
दिलीप- आज नींद भी नही अराही थी अब किरण मौसी के पास जाता तो पूछती क्या बात है
क्यूँ नींद नही अराही है
क्या बताता आपकी ननद मुझपे लाइन मार रही है
ऐसे सोचते हुए पता नही कितना टाइम बीत गया
फिर मैं रूम से बाहर हॉल में आ गया
और सोफे पे ही लेट गया
सुबह कोई मुझे हिलाने लगा
यह कामिनी थी
मैं उठके बैठ गया
कामिनी- दिलीप यहाँ क्यूँ सोए हो
दिलीप- कितना टाइम हुआ है
कामिनी- रात के 2 तुम यहाँ क्यूँ सो रहे हो
दिलीप- आपकी वजह से सुबह फालतू का मुझे परेशान कर रही है नींद कैसे आएगी
कामिनी- अच्छा चलो मेरे रूम में सो जाओ
दिलीप- और आप कहाँ सोएंगी
कामिनी- उसकी चिंता तुम मत करो
[आधी नींद तो वैसे ही सवार थी
मैं कामिनी के रूम में आ गया और बेड पे लेट गया
उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो सुबह हो चुकी थी
मैं देखा मेरा सर कामिनी की गोद में है
मैं कामिनी को देखने लगा
एक 25 साल की लड़की जो क्या क्या कर दी
और अब क्या कर रही है
कभी मुझपे डोरे डालती है और अब यह
मैं बिना आहट किए रूम से बाहर आके अपने रूम में आ गया
फ्रेश होके जब बाहर आया
तो टेबल पे दोनो का गिफ्ट दिखा
मैं दोनो को खोला एक में जीन्स था और एक में टीशर्ट
एक और गिफ्ट था जब मैं उसे खोला तो मेरा दिमाग़ खराब हो गया
कॉंडम दोनो इतनी बेशरम हो गयी कि कॉंडम गिफ्ट में देती है
इतना गुस्सा आने लगा मन किया अभी दोनो के पास दोनो को दूं खींचके
मैं छत पे आ गया और कसरत करने लगा
फिर भी एक बार बात करूँगा
आधा ज्ञान दिमाग़ का दही
फिर मैं नीचे गया नाश्ता करने
किरण मौसी किचन में थी मैं भी किचन में गया
दिलीप- किरण मौसी मैं देख रहा हूँ आप दिन भर काम कर रही हैं
नौकर क्यूँ नही रख लेती हैं
किरण मौसी- कामिनी को बोल जाके
दिलीप- क्यूँ आप घर की मालकिन हो
किरण मौसी- अरे आज ही आजाएँगे सारे नौकर मैं सिर्फ़ खाना बना रही हूँ
दिलीप- और मैं खाउन्गा
किरण मौसी- कामिनी को दूध दे आओगे
[फिर से नही वो फिर परेशान करेगी
मैं रोनी सूरत लेके पहुँचा कामिनी के रूम में
आज भी नाटक करेगी
कामिनी पीठ के बल लेटी हुई थी
मैं उसके पास गया
दूध टेबल पे रक्खा
दिलीप- दूध पी लीजिए
कामिनी- रख दो मैं पी लूँगी
दिलीप- मेरे सामने पियो
[ कामिनी एक झटके में उठके बैठ गयी
मैं शॉक हो गया क्यूंकी कामिनी सिसक के रो रही थी]
क्या हुआ आप रो क्यूँ रही हैं
कामिनी- जिनके साथ मैं इतना ग़लत की वो मुझे माफ़ कर चुकी हैं और तुम हो कि मुझे माफ़ ही नही कर रहे हो
दिलीप- हाँ तो आप नॉर्मल रहिए ना मैं भी आपके साथ नॉर्मल रहूँगा
कामिनी- लेकिन तुम मुझपे भरोसा क्यूँ नही कर रहे हो
दिलीप- अब आपके पास आपकी पूरी फॅमिली है यह ज़रूरी है ना कि मैं
कामिनी- मतलब तुम हमारी फॅमिली का हिस्सा नही हो
दिलीप- बिल्कुल हूँ आप सब मेरी फॅमिली हैं
कामिनी- तो मुझसे दूर क्यूँ भाग रहे हो
दिलीप- क्यूंकी मैं आपसे डरता हूँ
अगर आप मेरी साथ कोई गेम खेलेंगी तो मेरा नुकसान होगा
या फिर किरण मौसी का मैं तो अपने आपको शायद संभाल भी लूँ
लेकिन किरण मौसी अपने आपको कैसे संभालेंगी
अभी उनको सब कुछ मिल गया है
आपकी एक नादानी की वजह से या तो मैं अपना सबकुछ खो दूँगा
या फिर वो आपको खो देंगी
[कामिनी मेरी बात सुनती रही लेकिन जैसे ही मैं चुप हुआ
एक झटके में खड़ी हो गयी
और इतनी ज़ोर से मेरे गाल को चूमि कि मैं पूरा हिल गया]
कामिनी- तुम सच मे बहुत अच्छे हो
दिलीप- आपका कुछ नही हो सकता
[ आगे कुछ बोलता उससे पहले दूसरे गाल को भी चूम ली]
मैं गुस्से में दूध का ग्लास कामिनी के मुँह में लगाया कामिनी पूरा दूध पी ली मैं पैर पटकते हुए रूम से बाहर आ गया
कामिनी ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी...