दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक ओर नई कहानी लेकर हाजिर हूँ ये कहानी पढ़ कर आप ज़रूर मस्ती में आ जाएँगे ये मेरा वादा है पर दोस्तो आपसे थोड़ी सी गुज़ारिश है की आप अपने विचार ज़रूर देते रहे . दोस्तो ये आपका प्यार ही है जिसने मुझे राजशर्मा स्टॉरीज नाम की साइट बनानी पड़ी जो काफ़ी हद तक आप सब को पसंद आ रही है दोस्तो पुरानी कहानियाँ काफ़ी हद तक पोस्ट हो चुकी हैं अब बारी है नई कहानियो की . दोस्तो अगर आप भी अपनी कहानियाँ पोस्ट करना चाहते हैं तो आपका इस साइट पर स्वागत है
मैं जहाँ काम करता हू वहाँ मेरा एक दोस्त है सफ्दर काफ़ी चलता पुर्ज़ा किसम का आदमी है
मेरी और उस की उमर मे काफ़ी ज़्यादा फरक है वो 38 का है शादी शुदा 2 बच्चे हैं उस के
बड़ा बेटा11 का है
बेटी 7 साल की है
मुझे जब बी टाइम मिलता मैं सीधा सफ्दर के पास चला जाता जहाँ हम ज़माने भर की बाते भी करते और 3 4 बार एक औरत की फुदी भी हम ने एक साथ ली है
लेकिन उस औरत ने हम से कभी पैसे नही लिए मैने कहा कि यार ये पैसे क्यो नही लेती तो वो कहता कि यार मज़े करो बस तुम्हे फुददी चाहिए वो मिल जाती है हाँ ये तो अच्छी बात है कि तुम्हे पैसे नही देने पड़ते
मैने कहा कि यार ये तो है
एक दिन मैं घर से निकल कर बाहर घूमने के लिए गया क्योकि ईद की छुट्टियाँ थी तो मैं यों ही घूमता फिरता सफ्दर के घर चला गया
वहाँ जा के मैने कहा कि सफ्दर भाई चले क्या सफ्दर ने कहा कि नही यार उस का शोहार घर पे है
मैने कहा कि यार सफ्दर कुछ कर ना यार बड़ा दिल कर रहा है
उस ने कहा कि चल आजा शराब पीते हैं मैने कहा कि नही भाई घर भी जाना है
तो उस ने कहा कि छोड़ ना यार आ जा मैने भी ज़्यादा मना नही किया और उस के साथ बैठ गया
हम शराब पीने लगे मैने 2 से ज़ियादा पेग नही लिए क्योकि मुझे घर भी जाना था
लेकिन सफ्दर भाई पेग पे पेग लगा रहा था थोड़ी देर के बाद वो उठ कर चला गया और थोड़ी देर के बाद आया और कहने लगा कि यार पी ना पीता क्यो नही
उस की आवाज़ लड़खड़ा रही थी मैने कहा कि सफ्दर भाई और नही मैने घर भी जाना है उस ने कहा कि यहाँ ही सो जाओ ना
मैने सोचा कि नशे मे है निकलना चाहिए कि तभी उस ने कहा कि रात को यहाँ पर ही रहो फुददी मिल जाएगी
मैं खुश हो गया
फिर रात का खाना खाने के बाद हम अभी बैठे ही थे कि भाबी सफ्दर की बीवी साइमा ने कहा कि आप की बेहन आई है
उस ने कहा कि ठीक है और उठ कर अंदर चला गया
और मुझे कहा कि जाना नही रात को तुम्हारी भाबी के सोने के बाद वो आ जाएगी मैने कहा कि ठीक है
रात को 11 के करीब दरवाज़ा खुला घर की साइड वाला और आवाज़ आई कि भाई क्योकि अंधेरा था इस लिए कुछ नज़र नही आ रहा था सफ्दर ने कहा कि आ जाओ और वो औरत अंदर आ गई
बाहर से आने वाली हल्की रोशनी मे जब मैने देखा तो वो वोही औरत थी जिसे मैं और सफ्दर पहले भी चोद चुके हैं
मुझे समझ नही आ रहा था कि ये सफदार को भाई क्यो कह रही है
मैने कहा कि सफ्दर ये आप की बेहन है
तो उस ने कहा कि हां सग़ी बेहन है मैने कहा कि क्या उस ने कहा हां हम बेहन भाई हैं
मैने कहा कि यार तुम अपनी बेहन के साथ खुद भी और मुझे भी
तो उस ने कहा कि छोड़ ना यार अगर मैं नही चोदुन्गा तो किसी और से चुदवा ले गी
जब इस ने चुदवाना ही है तो मैं ही क्यो ना इसे चोदू
मैने कहा कि क्या मतलब् तो उस ने कहा कि देख यार लड़की जब जवान हो जाती है ना तो उस की फुददी सिरफ़ लंड मांगती है चाहे वो बाप का हो या भाई का
और मैं उस की बाते सुन कर चुप हो गया और फिर हम ने मिल के उस को बाकी की रात खूब चोदा और मज़े लिए
घर आते ही अप्पी ने कहा कि भाई रात कहाँ थे मैने कहा कि अप्पी वो मैं अपने दोस्त के साथ ही रहा उस के घर पे
अप्पी ने कहा कि भाई कुछ दिन की तो छुट्टी है हमारे पास घर पे ही रहो बाद मे तो सुबह जाना और रात को आना होता है .
मैं अप्पी से बात ही कर रहा था कि मुझे सफ्दर की बात याद आ गई कि लड़की जब जवान हो जाती है तो उस की फुद्दि सिर्फ़ लंड मांगती है
चाहे वो बाप का हो या भाई का मेरे ज़हन मैं ये बात आई ही थी कि अप्पी ने कहा कि भाई नाश्ता लाऊ मैने कहा कि नही
और अपने रूम मे चला गया और सोचने लगा कि क्या मेरी बेहन भी ऐसी ही है तो मैने कहा कि नही वो एक शरीफ लड़की है
मेरे घर मे 3 रूम 1 हॉल किचॅन और 1 ही वॉशरूम है जिसे सब इस्तीमल करते हैं 1रूम अम्मी अबू का 1 मेरी बहनों का और 1 मे हम सब भाई
मैं अभी ये ही सोच रहा था क़ि अप्पी आ गई और कहा कि भाई आप थोड़ी देर बाहर बैठो मैं सफ़ाई कर लू मैने कहा कि तुम करो मैं ठीक हू और वो झुक कर सफाइ करने लगी जिस से उस की गंद बाहर को निकल आई मैं अपनी बेहन की गांद को ही घूरता रहा पता नही क्या हो गया था मुझे
बाजी सफाइ करते हुए मूडी तो उन की नज़र मुझ पे पड़ी और अप्पी ने कहा कि नसीर क्या देख रहे हो
मैं घबरा सा गया और फॉरन कहा कि अप्पी मैं देख रहा हू कि आप कितना काम करती हो
अप्पी ने कहा कि भाई सब लड़कियाँ करती हैं मैं कोई अनोखा तो नही कर रही
मैने कहा हां ये तो है लेकिन मुझे अच्छा नही लगता अप्पी ने कहा कि क्या तो मैने कहा कि अपी आप का यों सारा दिन काम करना
अपी ने कहा तो फिर कौन करे गा
मैने कहा कि अपी अम्मी को भी तो करना चाहिए ना वो तो सारा दिन इधर उधर घूमती ही रहती हैं
अपी ने कहा कि भाई अम्मी ही सारी ज़िंदगी करती रही हैं
और मैं चुप हो गया अपी भी काम ख़तम कर के बाहर चली गईं
मैं जितनी भी देर अपी रूम मे सफाइ करती रही उन की गंद को ही घूरता रहा
अपी के जाने के बाद मैने सोचा कि क्या अपी भी लंड के लिए तरस रही है अगर हां तो मुझे क्या करना चाहिए मैं ये सोचता हुआ ही सो गया
दोपहर मे अपी ने मुझे उठाया और कहा कि भाई खाना खा लो फिर सो जाना
मैने उठ के हाथ मुँह धोया और खाना खाने लगा कि तभी नीलम वहाँ आ गई और कहने लगी भाई क्या बात है बड़ी नींद आ रही है
अपी ने कहा कि नेलु उस को प्यार से कहते हैं मस्ती नही ओके
मैने कहा छोड़ो ना अपी आप भी क्या करती हो बच्ची है अभी खेलने खाने के दिन हैं इस के
अपी ने कहा बड़ा प्यार आ रहा है आज तो मैने कहा कि क्या अपी मैं कब आप से और नेलु से प्यार नही करता
और खाना खा के बाहर निकल गया दिन इसी तरहा ही गुज़रते रहे छुट्टियाँ ख़तम हो गई फिर घर से काम पे और काम से घर
कभी कभी सफ्दर के साथ उस की बेहन के घर जा के उस की चुदाई भी करते
और घर पे अपी से भी फ्री होने की कोशिश करता लेकिन अपी ज़्यादा फ्री नही हो रही थी
लेकिन मैं भी लगा रहा क्योकि सफ्दर और उस की बेहन को देख के मेरा भी बड़ा दिल करता कि मैं भी अपनी बेहन के साथ प्यार करू
लेकिन कोई बात नही बन रही थी इसी दौरान बड़ी ईद की छुट्टियाँ भी आ गई 1 दिन मैं अपने दोस्त के साथ बाज़ार से वापिस आ रहा था कि मैने अम्मी को एक गली मे जाते हुए देखा मैं बड़ा हेरान हुआ कि अम्मी यहाँ किस को मिलने आई हैं
मैने अपने दोस्त से कहा कि यार तू चल मैं बाद मे आता हू उस ने कहा कि क्या बात है ख़ैरियत तो है
मैने कहा कि हां यार मैने किसी से मिलना है तू चल
उस ने कहा ठीक है फिर मैं चलता हू और निकल गया उस के जाते ही मैं तेज़ी से उस गली की तरफ भागा और देखा कि अम्मी किसी से बात कर रही हैं और तभी वो आदमी जिस से अम्मी बात कर रही थीं उस ने अपनी पॉकेट मे से कुछ निकाल के दिया मैं क्यो कि दूर था इस लिए देख नही सका कि उस ने अम्मी को क्या दिया था और फिर अम्मी एक तरफ चल पड़ी और मैं उन के पीछे अम्मी ने थोड़ी दूर ही एक मकान का ताला खोला और अंदर चली गईं
मैं समझ गया कि उस आदमी ने अम्मी को घर की चाबी ही दी हो गी लेकिन समझ नही आ रहा था कि अम्मी और उस आदमी का क्या चक्कर है और वो आदमी अम्मी को चाबी दे के गया कहाँ है
मैं ये सब ही सोच रहा था कि वो आदमी किसी और आदमी को अपने साथ ले के आ गया और सीधा अंदर चला गया और डोर बंद कर दिया मैने सोचा कि देखना चाहिए कि अंदर क्या हो रहा है. मैं तेज़ी से मकान की तरफ गया लेकिन वहाँ कोई ऐसी जगह नही थी कि मैं अंदर देख सकू क्योकि वो जगह आबादी मे ही थी इस लिए मैं वहाँ से हट के खड़ा हो गया
कोई 2 घंटे के बाद वो 2नो आदमी निकले और वहाँ से चल पड़े पता नही मेरे दिल मे क्या आई कि मैं भी उन के पीछे चल पड़ा वो बाते करते जा रहे थे .
बाद मैं आने वाला कह रहा था कि साले पता नही तेरे पास कोन सी गीदड़सिन्घी है कि औरते तेरे पास भागी आती हैं
पहले वाले ने कहा कि छोड़ इस बात को ये बता कि मज़ा आया कि नही दूसरे ने कहा कि क्या बताऊ यार क्या लंड चूसति है मज़ा आ गया.
मैं तो उन की बाते सुन के हक्का बक्का रह गया कि अम्मी ये सब भी करती हैं और तभी पहले वाले ने कहा कि यार कब तक है ये यहाँ उस ने कहा कि अभी कालू को लेने जा रहा हू कालू इस को चोद ले फिर चली जाएगी .
पता नही मेरे दिल मे क्या आया कि मैं वापिस उसी घर की तरफ चल पड़ा मुझे ये सब सुन के बहुत गुस्सा आ रहा था
मैं जैसे ही उस घर के दरवाजे पे पहुचा तो एक बार सोचा कि क्या मुझे अंदर जाना चाहिए और फिर मैने डोर को एक धक्का दिया और अंदर घुस गया.
अम्मी वहाँ नही थीं अम्मी ने वॉशरूम मे से कहा कि कालू रुक मैं आ रही हू मैं वहीं खड़ा हो गया और तभी वॉशरूम का डोर खुला और अम्मी पूरी की पूरी नंगी बाहर आ गई. जैसे ही अम्मी बाहर आई अम्मी की मुझ पे नज़र पड़ी अम्मी को चक्कर सा आ गया अम्मी के मुँह से बस इतना ही निकल सका कि तूमम्म्मममम
दोस्तो कहानी अगर आपको अच्छी लग रही हो तो इसे आगे बढ़ाया जाय या.................................... अपने विचार ज़रूर दें
main jahan kaam karta hon wahan mera ek dost hai safdar kafi chalta purza kisam k admi hai
meri aur us ki umar main kafi se ziyada farak hai wo 38 ka hai shadi shuda 2 bache hain us k
bada beta11 ka hai
beti 7 sall ki hai
mujhe jub bi time milta main sidha safdar k pass chala jata jahan hum zamane bhar ki batain bi karte aur 3 4 bar ek aurat ki phudi bi hum ne ek sath li hai
lakin us aurat ne hum se kabi paise nai liye maine kaha k yar ye paise kion nai lati toh wo kehta k yar maze karo bus tumhain phudi chahiye wo mil jati hai han ye toh achi baat hai k tumhain paise nai dene padte
maine kaha k yaar ye toh hai
ek din main ghar se nikal k bahir ghomne k liye gya kion k eid ki chutiyan thi toh main yonhi ghumta phirta safdar k ghar chalagya
wahan ja k maine kaha k safdar bhai chalin kia safdr ne kaha k nai yar us k shohar ghar pe hai
maine kaha k yar vsafdar kuch kar na yar bada dil kar raha hai
us ne kaha k chal aja sharab pite hain maine kaha k nai bhai ghar bi jana hai
toh us ne kaha k chode na yaar a ja maine bi ziyada mana nai kia aur us k sath beth gya
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us ki awaz ladkhda rahi thi maine kaha k safdar bhai aur nai maine ghar bi jana hai us ne kaha k yahan hi so jao na
maine socha k nashe main hai niklna chahiye k tabi us ne kaha k raat ko yahan pr hi raho phudi mil jay gi
main khush ho gya
phir raat ka khana khane k baad hum abi bethe hi the k bhabi safdar ki biwi saima ne kaha k app ki behan aai hai
us ne kaha k theek hai aur uth k andar chala gya
aur mujhe kaha k jana nai raat ko tumhari bhabi k sone k baad wo a jay gi maine kaha k theek hai
raat ko 11 k kareeb darwaza khula ghar ki side wala aur awaz aai k bhai kion k andhera tha is liye kuch nazar nai a raha tha safdar ne kaha k a jao aur wo aurat andar a gai
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mujhe samajh nai a rahi thi k ye safdar ko bhai kion keh rahi hai
maine kaha k safdar ye app ki behan haiiiiiii
toh us ne kaha k haan sagi behan hai maine kaha k kia us ne kaha k haan hum behan bhai hain
maine kaha k yar tum apni behan k sath khud bhi aur mujhe bi
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aur subah main apne ghar ko nikal gya
ghar ate hi appi ne kaha k bhai rat kaha the maine kaha k appi wo main apne dost k sath hi raha us k ghar pe
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मैं अम्मी को इस तरह नंगा अपने सामने देख के भूल ही गया कि मैं कहाँ हू और क्यो आया हू
अम्मी ने जब देखा कि मैं सिर्फ़ उन को घुरे ही जा रहा हू तो उन को एहसास हुआ कि वो अपने बेटे के सामने नंगी खड़ी हैं और वो फॉरन वॉशरूम की तरफ भागी भागते हुए उन की बड़ी गान्ड का नज़ारा देखने के काबिल था क्या बताऊ
अम्मी के वॉशरूम मे जाते ही मैं भी वहाँ से वापिस निकल कर घर को चल दिया मेरे दिमाग़ मे आँधी चल रही थी
और मैं ये सोचता हुआ चला जा रहा था कि मैने ये जो भी देखा है क्या वो सच था . क्या मेरी मा इस हद तक भी गिर सकती है लेकिन कोई भी जबाब नही था मेरे पास समझ नही रहा था कि मैं क्या करू .
यही सोचते हुए मैं घर के नज़दीक बने एक पार्क मे बैठ गया . मेरा घर जाने को दिल नही कर रहा था शाम तक वहाँ ही बैठा रहा और फिर उठ कर सफ्दर के घर चला गया और 2 दिन तक उस के घर मे ही रहा . वहाँ टाइम निकाल के उस की बेहन भी आ जाती जिसे हम दोनो मिल के चोदा करते.
2 दिन के बाद सफ्दर ने कहा कि यार क्या बात है 2 दिन हो गये हैं तू अपने घर नही गया मैने कहा कि आज जाउन्गा
कह तो दिया था कि आज जाउन्गा लेकिन घर जाने को दिल नही कर रहा था. फिर शाम को मैं उठा और हिम्मत कर के घर चला गया घर जाते ही अपी ने कहा कि भाई कहाँ थे तुम 2 दिन से हम सब कितना परेशान थे और मुझे अपने सीने से लगा लिया . अपी के सीने से लग के मुझे एक अजीब सा मज़ा आने लगा दिल कर रहा था कि मैं अपी को यों ही अपने साथ लिपटाये रखू कि तभी वहाँ अम्मी आ गईं मुझे देखते ही आगे बढ़ी और कहा कि बेटा कहाँ चला गया था मैने कोई जबाब नही दिया . और अम्मी को घूरते हुए रूम मे चला गया मैने रात का खाना भी नही खाया और लेटा रहा अली भी आ गया था रूम मे और हम सोने ही लगे थे कि अम्मी ने अली को बुलाया .
अली आया अम्मी कहता हुआ चला गया लेकिन वापिस नही आया और मैं सो गया रात को 2 बजे के करीब मेरी आँख खुली तो अम्मी मुझे उठा रही थी . मेरे उठते ही अम्मी ने कहा बेटा मुझे माफ़ कर दो .
मैने कहा कि अम्मी किस बात के लिए माफ़ करू मैं आप को
अम्मी ने कहा प्लज़्ज़्ज़ बेटा माफ़ कर दो
मैने कहा कि अगर माफी माँगनी ही है तो अब्बू से माँगो जिन को आप धोका दे रही हो
अम्मी की आँखों से आँसू निकलने लगे और कहने लगी बेटा तुम तो माफ़ कर दोप्लज़्ज़्ज़्ज़
मैने कहा सॉरी अम्मी सुबह अब्बू को सब बता के फिर बात हो गी
अम्मी मेरे पावं मे बैठ गईं और कहने लगी कि अगर तुम ने अपने अब्बू को कुछ भी बताया तो मैं कहीं की नही रहूंगी गीपल्ज़्ज़्ज़्ज़ मुझे माफ़ कर दो मैं दोबारा ऐसी कोई ग़लती नही करूँगी.
अम्मी को मेरे पैर पकड़े देख के मुझे अच्छा नही लगा तो मैने कहा कि अम्मी आप अभी जाओ मैं सोचता हू कि क्या करू
अम्मी ने कहा कि बेटा अगर तुम मुझे माफ़ कर दो और अपने अबू को कुछ नही बताओ तो मैं तुम्हारी हर बात माना करूँगी.
मैने कहा ओके अभी आप जाओ बाद मे बाते करेंगे और अम्मी अपने आँसू साफ करती हुई चली गईं
अम्मी के जाने के बाद मैं काफ़ी देर सोचता रहा कि क्या करू क्योकि अगर मैं अब्बू को बता देता तो वो शायद अम्मी को तलाक़ दे देते और हमारी हर जगह बदनामी ही होती इसी लिए मैने अब्बू को ना बताने का फ़ैसला किया और सो गया
सुबह मुझे अपी ने उठाया और मैं उठ के नहाने चला गया जब नहा के वापिस लौटा तो अपी डोगी स्टाइल मे बेड के नीचे से सफाइ कर रही थी और मैं वहीं खड़ा हो के अपी की खूबसूरत और बाहर को निकली हुई गांद को देखने लगा जिसे देख मेरा लंड खड़ा हो गया. कि तभी अपी ने सफाइ ख़तम कर के उठी तो उन की नज़र मेरी नज़र से मिली तो अपी ने कहा कि तुम कब आए .
मैने कहा कि अपी अभी आया ही हू तभी बाजी ने मेरी सिलवार मे बने तंबू को देखा और फिर मेरी तरफ देख के बाहर चली गई . मैने दिल मे सोचा कि ये क्या अपी तो लगता है नाराज़ हो के चली गई हैं . फिर नेलु मेरे रूम मे आई और कहा कि भाई अम्मी कह रही हैं कि नाश्ता कर लो मैने कहा कि अच्छा तुम चलो मैं आता हू
मैं जब किचॅन मे गया तो वहाँ अम्मी ही थीं मैं बैठ के नाश्ता करने लगा तो अम्मी ने कहा कि क्या सोचा
मेरे मुँह से अचानक निकल गया कि आप मेरे लिए क्या कर सकती हो तो अम्मी का बुझा हुआ चेहरा एक दम खिल गया
अम्मी ने कहा कि तुम जो कहो गे मैं करूँगी बस किसी को बताना नही प्लज़्ज़्ज़्ज़
मैने कहा कि ठीक है जब कोई घर मैं ना हो तब बात करेंगे. और मैं नाश्ता कर के उठ गया दोपहेर के खाने के बाद हम सोने लगे तो अम्मी आ गई और कहा कि अली तुम जाओ अपी के पास सो जाओ अम्मी की बात सुन के अली चला गया
अली के जाते ही अम्मी ने कहा नसीर सोना नही मैं बाद मे आउन्गि फिर बताना कि तुम क्या चाहते हो .
अम्मी के जाने के बाद मैं सोचने लगा कि अम्मी से क्या कहू कि वो क्या करें मेरे लिए लेकिन कुछ भी समझ नही आ रहा था फिर मैं आराम से लेट गया कि जब अम्मी आएगी तब देखा जाएगा .
3 बजे के करीब अम्मी आ गई और मैं उठ के बैठ गया
अम्मी भी मेरे पास आ के बैठ गई मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा था कि मैं अम्मी से क्या बात करू
फिर अम्मी ने कहा कि नसीर बताओ तुम क्या चाहते हो लेकिन मैं चुप रहा
अम्मी ने फिर पूछा तो मैने कहा कि अम्मी आप ये सब क्यो करती हो तो अम्मी ने कहा कि नसीर तुम इन बातों को छोड़ो और ये बताओ कि तुम क्या चाहते हो
मैने कहा कि मैं ये ही चाहता हूँ कि आप ये सब छोड़े दो
अम्मी ने मेरी बात का कोई जबाब नही दिया और चुप चाप बैठी रहीं
मैने कहा कि अम्मी क्या हुआ तो अम्मी ने कहा कि नसीर तुम इस नशे को नही जानते ये बहुत बुरा नशा है
मैने कहा कि अम्मी आप कोशिस तो करो मैं आप का साथ दूँगा .
मेरी बात पे अम्मी कुछ देर मुझे देखती रही और ये कहते हुए कि क्या तुम ने कभी किसी के साथ किया है
तो मैने अपना सर झुका लिया लेकिन कहा कुछ नही
अम्मी ने कहा कि ठीक है मैं चलती हूँ और अम्मी चली गई
अम्मी के जाने के बाद दिल मे आया कि अगर अम्मी बाहर जा के ये सब करना नही छोड़ेंगी तो लोगों को जैसे जैसे पता चले गा वैसे ही हमारी बदनामी हो गी . ये सब सोचते हुए मेरे दिमाग़ मे सफ्दर की कही हुई बात याद कि फुददी और लंड का कोई रिश्ता नही होता वो अंधे होते हैं . लंड की कोई बेहन या मा नही होती वो सिर्फ़ फुद्दि माँगता है ये ही हाल फुद्दि का भी है . मैने सोचा कि अगर मैं घर मे ही अम्मी को संतुष्ट कर दूँ तो वो बाहर नही जाएँगी . मैं ये सब सोच के मुझे सकून आ गया और फिर ये बात कि अम्मी को कैसे मनाया जाय इस काम के लिए.
शाम 6 के करीब मैं रूम से निकला देखा तो अली खेलने जा चुका था और नैइला और नेलु साथ वाली आंटी के घर थी मैने किचॅन मे देखा तो अम्मी वहाँ अकेली थीं. मैं जा के अम्मी के पीछे खड़ा हो गया और अम्मी की गान्ड को घूर्ने लगा इस काम मे मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. कि तभी अम्मी ने कहा नसीर क्या चाहिए तो मैं कुछ नही बोला और सीधा अम्मी को पीछे से लिपट गया और कहा कि अम्मी आप बाहर ये काम ना किया करो .
अम्मी ने कहा कि तुम्हारे अब्बू को छोटी उमर की लड़कियाँ पसंद हैं वो तो मेरी तरफ देखते नही तो फिर मुझे बताओ कि मैं क्या करूँ.
मेरे पीछे से लिपटने की वजह से अम्मी की गांद मे मेरा लंड चुभने लगा लेकिन अम्मी ने ऐसे शो किया कि उन्हे कुछ भी पता ना लगा हो.
मैने कहा कि अम्मी फिर भी आप को बदनामी से डर नही लगता और साथ ही अपने खड़े लंड को अम्मी की गान्ड पे दबा दिया
अम्मी ने कहा कि बेटा क्या करूँ मुझे भी अच्छा नही लगता लेकिन मजबूरी है
मैने कहा कि अम्मी अगर आप को घर मे सकून मिल जाय तो क्या आप फिर भी बाहर जाओ गी
अम्मी ने कहा कि क्या मतलब
इस से पहले कि मैं कुछ कहता बाहर से किसी के चलने की आवाज़ आई
और फिर मैं जल्दी से पीछे हो गया और अपने लंड को सेट किया ता कि किसी को पता ना लगे
बाहर अपी थी वो आंटी के घर से आ गई थी
मैं घर से बाहर निकल आया और घर के नज़दीक ही पार्क मे बैठ गया
और सोचने लगा कि अगर अम्मी रात को मेरे पास आई तो मैं उन से बात करूँगा
लेकिन अम्मी रात को नही आई सुबह नाश्ते के बाद अली अपने दोस्तों के साथ निकल गया और अबू भी कहीं निकल गये अम्मी अपी और नेलु भी आंटी के घर के लिए निकल गईं. और मैं घर मे अकेला ही रह गया कि कुछ देर के बाद बाहर के डोर को किसी ने खट खटाया मैने जा के देखा तो वहाँ ज़ारा खड़ी थी आंटी मुक़दास की बेटी जिन के घर अम्मी और मेरी बहने गईं थी
मैने उसे देखते ही कहा कि ज़ारा अम्मी और बहने तो चली गईं आप के घर
तो उस ने मुझे एक अजीब सी स्माइल देते हुए कहा कि मुझे पता है
मैने कहा तो फिर
ज़रा ने कहा कि नसीर भाई क्या मैं आप से मिलने नही आ सकती
मैने कहा हां क्यो नही लेकिन तुम्हारे घर मे तो मिलाद हो रहा है ना
ज़ारा ने कहा कि हां लेकिन मैं अम्मी को ये बता के आई हूँ कि मैं अपनी सहेली के घर जा रही हूँ
मैने कहा लेकिन क्यो तो वो बोली कि नसीर भाई अंदर तो आने दो फिर बताती हूँ
मैने कहा कि अच्छा आ जाओ
वो अंदर आते ही बोली कि नसीर घर मे और कॉन है
मैने कहा कोई नही
तो उस ने कहा कि फिर मुझे अंदर क्यो नही आने दे रहे थे
मैने कहा कि मैने तुम्हे अंदर आने से कब मना किया है
तो वो बोली अच्छा छोड़ो और सूनाओ क्या हो रहा था अकेले बैठ कर
मैने कहा कुछ नही बोर हो रहा था अभी बाहर ही निकलने वाला था कि तुम आ गई
ज़ारा ने कहा नसीर क्या तुम अपनी गर्ल फ्रेंड से मिलने जा रहे थे
मुझे एक झटका लगा ज़ारा की बात पे मैने कहा कि ज़ारा ये तुम क्या कह रही हो
ज़ारा ने कहा मैं तुम्हारी गर्ल फ्रेंड का ही तो पूछ रही हूँ इतना घबरा क्यो रहे हो
मैने कहा मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नही है तो उस ने कहा कि मुझे बनाओगे
मैं तो एक लम्हे के लिए हड़बड़ा सा गया कि ये क्या कह रही है मैने कहा कि ज़रा तुम्हे कोई शरम भी है कि नही तुम्हे पता है तुम क्या कह रही हो .
ज़ारा ने कहा कि हां मुझे पता है कि मैं क्या कह रही हूँ
मैने कहा लेकिन ज़ारा ने कहा कि लेकिन वेकीन कुछ नही बस इतना बताओ कि क्या मुझे अपनी गर्ल फ्रेंड बनाओगे
मैं जब चुप रहा तो वो मेरे पास आ के बोली क्या मैं खूबसूरत नही हूँ
मैने कहा कि नही ऐसी कोई बात नही है ज़ारा ने कहा कि फिर क्या बात है मैने कहा कि मैने कभी कोई गर्ल फ्रेंड नही बनाई
तो ज़रा ने कहा कि फिर मुझे बना लो
मैने कहा कि गर्ल फ्रेंड बना के क्या करूँगा तो ज़ारा ने कहा कि ये भी मुझे ही बताना पड़े गा क्या .
मैं अब सिर्फ़ ज़ारा से मस्ती कर रहा था कि ज़ारा जो कि मेरे पास ही खड़ी थी एक दम से मुझे पकड़ लिया और किस करने लगी.
मैं ज़ारा की इस हरकत से बोखला गया था
लेकिन फिर भी पीछे नही हटा और उस की किस के जबाब मे अपनी ज़ुबान उस के मुँह मे डॉल दी
कुछ देर यों ही किस करने के बाद ज़ारा पीछे हटी और मुझे देखने लगी
लेकिन मैने फिर से ज़ारा को पकड़ लिया और किस करने लगा किस करने के बाद ज़ारा को कहा कि रूम मे चलें
तो उस ने कहा क्या बात है भोलू राम तुम तो बड़े तेज़ जा रहे हो
मैने कहा कि ये तुम्हारी हो वजह से है जान और वो हँसती हुई मेरे रूम मे आ गई.
रूम मे आते ही मैं उस पे टूट पड़ा क्योकि लाइफ मे पहली बार कोई 21 साल की लड़की चोदने को मिल रही थी मेरा लंड तो इतना टाइट हो गया था कि लगता था अभी फॅट ही जाएगा .
फिर मैने अपने और ज़ारा के कपड़े भी उतार दिए और ज़ारा को बेड पे गिरा दिया और उस के बूब्स पे टूट पड़ा मैं उस के बूब्स को चूस और दबा रहा था.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था ज़ारा मेरे सर को अपने बूब्स पे दबा रही थी और यही कह रही थी कि हान्न्न्न्न इसी तरहााअ प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ चूसूऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ नाआआआआआअ बहुत्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त खुजलीईईईईईईईईईईईइ होतीईईईईई हाइईईईईईईईईईईईई मेरे राज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्जा
कुछ देर के बाद मैं उठा और उस की टाँगे उठा लीं और खुद उन के सैंटर मे आ गया और अपने लंड को थूक लगा के उस की फुद्दि पे रखा और एक ज़ोर का झटका दिया मेरा लंड बड़ी आसानी से ज़ारा की फुद्दि मे चला गया तो मुझे बड़ी हैरानी हुई.
मैने ज़ारा की तरफ देखा तो उस ने कहा कि टेंशन ना लो और अपना काम करो मैने सोचा कि जो लड़की यों ही चुदने के लिए तैयार हो वो कुँवारी तो नही हो सकती. लेकिन एक बात थी मुझे ज़ारा की फुदी मे मज़ा भी आ रहा था
मैने सारी सोचों को एक तरफ रखा और ज़ारा की फुद्दि को पूरी ताक़त लगा के मारने लगा जिस से ज़ारा की सिसकियाँ निकलने लगीं.
अहह उनम्म्ममम हाईईईईईईईईई नसीर्र्र्र्ररर मज़ा आ रहा हाईईईईई चोदूऊऊऊऊऊऊऊऊओ मज्ज्जाआआआआआआआआआ हाइईईईईईईईईईईईई तेजज़्ज़्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज चोदूऊऊऊऊऊऊऊऊओ
मैने अपनी स्पीड मे कोई कमी नही आने दी और इसी तरह तेज़ तेज़ झटके लगाता रहा कि तभी ज़ारा मुझ से लीपटने लगी और कहने लगी कि नसीर्र्र्ररर तुम्हारा बहुत शानदार हाईईईईईईईईईई मैं गैिईईईईईईई अहह और इस के साथ ही वो फारिघ् हो गई. और सीधी लेट गई मैं भी कुछ देर के बाद फारिघ् हो गया उस की फुदी मे और उठ के वॉशरूम चला गया वापिस आया तो ज़ारा चली गई.
जब ज़ारा वॉशरूम से बाहर आई तो उस ने कहा कि नसीर मैं चलती हू इस से पहले कि कोई आ जाय और वो निकल गई
उस के जाने के 15 मिंट के बाद अम्मी भी आ गई और मुझे देखते ही मुस्कुराने लगी और कहा कि हां नसीर सकूँ मिला
तो मैं अम्मी की बात सुन के कुछ भी नही बोल पाया. मैं समझ गया था कि ज़ारा को अम्मी ने ही भेजा था
मैने मोके का फ़ायदा उठाने की सोची अभी घर मे कोई नही है अम्मी के अलावा और मैं मुस्कुराते हुए अम्मी के सीने से लग गया और अम्मी को एक किस भी कर दी छोटी सी होंटो पे. इस से पहले क अम्मी कुछ कहतीं या मैं कुछ और करता कि तभी मेन दरवाज़ा किसी ने खटखटा दिया .
main ammi ko is tarha nanga apne samny dekh k bhul hi gya k main kahan hon aur kion aya ho
ammi ne jub dekha k main sirf un ko ghure hi ja raha hon toh un ko ehsas howa k wo apne bete k samne nangi khdi hain aur wo foran washroom ki taraf bhagi bhagte howe un k badi gaand ka nazara dekhne k kabil tha k kia btaon
ammi k washroom main jate hi main bi wahan se wapis nikal k ghar ko chal diya mere dimagh main andhi chal rahi thi
aur main ye sochta howa chala ja raha tha k maine ye jo bi dekha hai kia wo sach tha
kia meri maa is had tak bi gir sakti hai lakin koi bi jwab nai tha mere pass samjh nai raha tha k main kia karon
yahi sochte howe main ghar k nazdeek bane ek park main beth dya
mera ghar jne ko dil nai kar raha tha shaam tak wahan hi betha raha aur phir uth k safdar k ghar chala gya aur 2 din tak us k ghar main hi raha
wahan time nikal k us ki behan bi a jati jise hum dono mil k choda karte
2 din k baad safdar ne kaha k yar kia baat hai 2 din ho gay hain toh apne ghar nai gya maine kaha k ajj jaon ga
keh toh diya tha k ajj jaon ga lakin ghar jane ko dil nai kar raha tha
phir shaam ko main utha aur himmat kar k ghar chala gya ghar jate hi appi ne kaha k bhai kahan the tum 2 din se hum sub kitna pareshan the
aur mujhe apne sine se liga liyaappi k sine se lag k mujhe ek ajeeb sa maza ane laga dil kar raha tha k main appi ko yon hi apne sath liptai rakhon
k tabi wahan ammi a gain mujhe dekhte hi age badin aur kaha k beta kahan chala gya tha maine koi jwab nai diya
aur ammi ko ghurte howe room main chala gya maine raat ka khana bi nai khaya aur laita raha ali bi a gya tha room main aur hum sone hi lage the k ammi ne ali ko bulaya
ali aya ammi kehti howa chala gya lakin wapis nai aya aur main so gya raat ko 2 k kareeb meri ankh khuli toh ammi mujhe utha rahi thi
mere uthte hi ammi ne kaha beta mujhe maff kar do
maine kaha k ammi kiss baat k liye maff karon main app ko
ammi ne kaha plzzz beta maff kar do
maine kaha k agar mafii mangni hi hai toh abu se mango jis ko app dhoka de rahi ho
ammi ki ankhon se ansoo njkalne lage aur kehne lagi beta tum toh maaf kar doplzzzz
maine kaha sory ammi subah abu ko sub bta k phir baat ho gi
ammi mere paon main beth gai aur kehne lagi k agar tum ne apne abu ko kuch bi btaya toah main kahin ki nai rahon giplzzzz mujhe maf kar do main dobara aisi koi ghalti nai karon gi
ammi ko mere pair pakde dekh k mujhe acha nai laga toh maine kaha k ammi app abi jao main sochta hon k kia karon
ammi ne kaha k beta agar tum mujhe maaf kar do aur apne abu ko kuch nai btao toh main tumhari har baat mana karon gi
maine kaha ok abi app jao baad main batt karain ge aur ammi apne ansoo saff karti hoi chali gain
ammi k jane k baad main kafi der sochta raha k kia karon kion k agar main abu ko bta deta toh wo shaid ammi ko talak de dete
aur humari har jaga badnami hi hoti isi liye maine abu ko na btane ka faisla kia aur so gya
subah mujhe appi ne uthaya aur main uth k nahane chala gya jub naha k wapis lota toh appi dogy style main bed k niche se sfaii kar rahi thi aur main wahin khada ho k appi ki khubsoorat aur bahir ko nikli hoi gaand ko dekhne laga jis mera lund khada ho gya
k tabi appi ne sfaii khatam kar k uthi toh un ki nazar meri nazar se mili toh appi ne kaha k tum kab aye
maine kaha k appi abi aya hi hon tabi baji ne meri shilwar main bane tambo ko dekha aur phir meri taraf dekh k bahir chali gai
maine dil main socha k ye kia appi toh lagta hai naraz ho k chali gai hain
phir nelu mere room main aai aur kaha k bhai ammi keh rahi hain k nashta kar lo maine kaha k acha tum chalo main ata hon
main jub kitchan main gya toh wahan ammi hi theen main brth k nashta karne laga toh ammi ne kaha k kia socha
k mere moun se achanak nikal gya k app mere liye kia kar skti ho toh ammi ka bujha howa chahra ek dam khil gya
ammi ne kaha k tum jo kaho ge main karon gi bus kisi ko btana nai plzzzz
maine kaha k theek hai jub koi ghar main na ho tub baat karain ge
aur main nashta kar k uth gya dopaher k khane k baad hum sone lage toh ammi a gai aur kaha k ali tum jao appi k pass so jao ammi ki baat sun k ali chala gya
ali k jate hi ammi ne kaha nasir sona nai main baad main aon gi phir btana k tum kia chahte ho
ammi k jane k baad main sochne laga k ammi se kia kahaon k wo kia karain
lakin kuch bi samajh nai a raha tha phir main aram se laite gya k jub ammi aain gi tub dekha jay ga
3 baje k kreeb ammi a gai aur main uth k beth gya
ammi bi mere pass a k beth gai mujhe kuch bi samjh nai a raha tha k main ammi se kia baat karon
phir ammi ne kaha k nasir btao tum kia chahte ho lakin main chup raha
ammi ne phir pucha toh maine kaha k ammi app ye sub kion karti ho toh ammi ne kaha k nasir tum in baton ko chodo aur ye btao k tum kia chahte ho
maine kaha k main ye hi chahta hon k app ye sub chode do
ammi ne meri baat ka koi jwab nai diya aur chup chap bathi rahin
maine kaha k ammi kia howa toh ammi ne kaha k nasir tum is nashe ko nai jante ye bauhat bura nasha hai
maine kaha k ammi app koshsh toh karo main app ka sath don ga
meri baat pe ammi kuch dair mujhe dekhti rahi aur ye kehte howe k kia tum ne kabi kisi k sath kia hai
toh maine apna sar jhuka liya lakin kaha kuch nai
ammi ne kaha k theek hai main chalti hon aur ammi chali gai
ammi k jane k baad dil main aai k agar ammi bahir ja k ye sub karna nai chorain gi toh logon ko jaise jaise pata chale ga wasie hi humari badnami ho gi
ye sub sochte howe mere dimagh main safdar ki kahi howi baat aai k phudi aur lun ka koi rishta nai hota wo andhe hote hain
lun ki koi behan ya maa nai hoti wo sirf phudi mangta hai ye hi haal phudi ka bi hai
maine socha k agar main ghar main hi ammi ko mutmain kar don toh wo bahir nai jain gi
main ye sub soch k pursakon ho gya aur phir ye baat k ammi ko kaise mnaya jay is kaam k liye
shaam 6 k kareeb main room se nikla dekha toh ali khelne ja chuka tha aur naila aur nelu sath wali anty k ghar thi maine kitchan main dekha toh ammi wahan akili theen
main ja k ammi k piche khada ho gya aur ammi ki gaand ko ghurne laga is kaam main mujhe bada maza a raha tha
k tabi ammi ne kaha nasir kia chahiye toh main kuch nai bola aur sidha ammi ko piche se lipat gya aur kaha k ammi app bahir ye kaam na kia karo
ammi ne kaha k tumhare abu ko choti umar ki ladkian pasand hain wo toh meri taraf dekhte nai toh phir mujhe btao k main kia karon
mujhe piche se lipatne ki waja se ammi ki gaand main mera lun chubhne laga lakin ammi ne aise show kia k unhain kuch bi pata na laga ho
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maine kaha k ammi agar app ko ghar main skon mil gai toh kia app phir bi bahir jao gi
ammi ne kaha k kia matlb
is se pehle k main kuch kehta bahir se kisi k chalne ki awaz aai
aur phir main jaldi se piche ho gya aur apne lun ko set kia k kisi ko pata na lage
bahir appi thi wo anty k ghar se a gai thi
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lakin ammi raat ko nai aai subah nashte k baad ali apne doston k sath nikal gya aur abu bi kahin nikal gay ammi appi aur nelu bi melad k liye nikal gain
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maine use dekhte hi kaha k zara ammi aur behnain toh chali gain app k ghar
toh us ne mujhe ek ejeeb si smile dete howe kaha k mujhe pata hai
maine kaha toh phir
zara ne kaha k nasir bhai kia main app se milne nai a sakti
maine kaha haan kion nai lakin tumhare ghar main toh milad ho raha hai na
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ahhhhhhh unmmmmm haiiiiiiiiii nasirrrrrrr maza a raha haiiiiii
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is se pehle k ammi kuch kehtin ya main kuch aur karta k tabi main darwaza kisi ne khatkhta diya
दरवाज़ा खोला तो सामने अपी और नेलु खड़ी थीं मैने उन को देख के दिल मे कहा कि क्या थोड़ी देर के बाद नही आ सकती थी
लेकिन मुँह पे तो नही कह सकता था ना
इसी लिए चुप चाप अपने रूम मे चला गया और जा के अभी कुछ देर पहले मैने अम्मी को जो किस की थी उस के बारे मे सोचने लगा
दुपेहर क खाने के बादमैने अम्मी से अली का पूछा तो अम्मी ने कहा कि वो नही आया
और मैं जा के रूम मे लेट गया और अम्मी का इंतज़ार करने लगा पता नही मुझे क्यो यक़ीन सा था कि अम्मी ज़रूर आएँगी
अम्मी कोई 3 बजे के करीब आ गई और मेरे पास बैठ कर कहने लगी कि नसीर अब बताओ तुम क्या चाहते हो पहले तो मैं चुप रहा लेकिन फिर मैने दिल बड़ा कर के कह ही दिया कि अम्मी आप मेरे लिए क्या कर सकती हो और अपने लंड जो कि उस वक़्त खड़ा हो रहा था को अम्मी के करीब हो के गांद पे लगा दिया किओं कि मैं उस वक़्त लेटा हुआ था और अम्मी बैठी थीं
मेरी इस हरक़त पे भी जब अम्मी ने कुछ नही कहा तो मेरा होसला बढ़ गया
कुछ देर के बाद अम्मी ने कहा कि बताओ ना बेटा कि तुम्हे क्या चाहिए तो मैने अम्मी को ये कहते हुए कि मैं क्या बताऊ अम्मी और ज़ियादा लिपट गया जिस मेरा लंड जो कि फुल खड़ा हो गया था उस टाइम अम्मी की गांद मे चुभने लगा
अम्मी मेरी इस हरक़त पे मेरी तरफ देखने लगीं लेकिन ना तो कुछ कहा और ना ही उठी
फिर अम्मी ने कहा कि नही नसीर ये ठीक नही है
मैने कहा कि अम्मी क्या ठीक नही है
अम्मी ने कहा कि नसीर जो तुम करना चाहते हो वो ठीक नही है
मैने कहा कि अम्मी मैं तो कुछ भी नही करना चाहता
अम्मी ने कहा तो फिर ये सब क्या कर रहे हो
उस वक़्त नज़ाने मुझे क्या हुआ कि मैने अम्मी से कह दिया कि अम्मी आप बाहर भी तो ये सब ही करती हो ना अगर मैं आप को घर मे ही ये मज़ा दे दू तो क्या बुराई है
अम्मी एक दम से खड़ी हो गई और कहने लगी कि नही नसीर ये ठीक नही है मैं ये नही कर सकती
और ये कह कर वो चली गई मैं अम्मी को जाते हुए देखता ही रहा और कुछ भी नही कर सका
मेरी समझ मे नही आ रहा था कि मैं क्या करू और अम्मी को अपने लिए कैसे मनाऊ
अम्मी के जाने के बाद मैं ये सब सोचता हुआ ही सो गया जब सो के उठा तो उस वक़्त अली भी आ गया था अपी ने पूछा कि भाई आप के लिए कोन से कपड़े निकाल दू
मैने कहा ये ही ठीक हैं तो अपी ने कहा कि भाई क्या आप इसी ड्रेस मे फ़ुपो के घर जाओ गे तो अचानक मेरे दिमाग़ मे आया कि अम्मी और फुफो की आपस मे नही बनती जिस का मतलब है कि अम्मी नही जाएँगी तो मैने कहा कि मैं नही जा रहा
अपी ने कहा भाई अब आप को क्या हुआ
मैने कहा कुछ नही मेरी बहना मेरी तबीयत कुछ खराब है इस लिए नही जा रहा और तुम लोग कब वापिस आ रहे हो
अपी ने कहा भाई हम सुबह वापिस आ जाएँगे
मैने कहा अच्छा ठीक है तुम लोग जाओ
अपी के जाते ही मैं फॉरन अपने रूम मे आ गया और आ के बेड पे लेट गया कि तभी अम्मी आ गई और कहा कि तुम्हे क्या हुआ
मैने कहा कि अम्मी पता नही क्या हुआ है मुझ से तो हिला भी नही जा रहा है
अम्मी मेरी बात सुन के परेशान हो गईं और कहने लगी अच्छा तुम आराम करो और किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो आवाज़ दे देना
मैने कहा जी अम्मी मैं बता दूँगा आप परेशान मत हों मेरी बात सुन कर अम्मी चली गई
अभी मैं सोच ही रहा था कि मैं वॉशरूम तो हो आऊ कि तभी अबू मेरे रूम मे आ गये
अबू ने आते ही कहा नसीर क्या हुआ मैने सुना है तुम्हारी तबीत ठीक नही है
मैने कहा जी अबू हिला नही जा रहा जिस्म मे दर्द हो रहा है
अबू ने कहा ठीक है तुम आराम करो मैने तुम्हारी मा को कह दिया है वो तुम्हारा ख्याल करे गी और वहाँ से चले गये