दिलीप- हम दोनो एक दूसरे की आँखो में खोए थे कि बड़ी नानी अंदर आगयि
मैं विदू को देखे जा रहा था
बड़ी नानी ने मेरे सर पे चपत मार दी
मैं होश में आया और विदू का हाथ छोड़ दिया
विदू बुरी तरह से शर्मा गयी
बड़ी नानी- क्या कर रहा था तू अभी
दिलीप- क्कुच्छ नही
बड़ी नानी- चल तुझसे कोई मिलने आया है
दिलीप- आप यही पे बैठिए
[मैने विदू की तरफ देखा विदू ने आँखो से इशारा किया जल्दी आना]
बड़ी नानी- अब जाएगा भी
दिलीप- मैं रूम से बाहर आके नीचे गया
आइजी सर मतलब अरविंद राणा बैठे हुए थे साथ में छोटे मामा भी थे
मैने अरविंद से जाके हाथ मिलाया
अरविंद- तुमसे कुछ बात करनी है आओ ठाकुर साहब अगर आपकी अग्या हो तो
छोटे मामा- जी जी बिल्कुल
दिलीप- फिर मैं अरविंद के साथ बाहर आगया
दिलीप- जी कहिए
अरविंद- सबसे पहले तुम यह लो
[अरविंद ने मुझे एक कार्ड दिया]
इस कार्ड में तुम्हारे 1400 करोड़ रुपये हैं
दिलीप- इस कार्ड में मैं कुछ समझा नही
अरविंद- यह एक स्पेशल कार्ड है यह कार्ड तुम किसी बॅंक में लेके जाओगे
जितने पैसे चाहो निकाल सकते हो बस एक कोड बताना पड़ेगा
[फिर अरविंद ने मुझे वो कोड बता दिया]
दिलीप- बस यही बात करनी थी आपको
अरविंद- एक और बात है लेकिन तुम मानोगे नही
दिलीप- मदन के बारे में मैं कोई बात ही नही करना चाहता मदन एक ऐसा इंसान है जो जहन्नुम में जाने के लायक भी नही है आप को और कुछ पूछना है
अरविंद- अब मैं चलता हूँ
दिलीप- फिर अरविंद चला गया मैं जल्दी से विदू के रूम में आगया
बड़ी मामी विदू को अपने हाथो से खाना खिला रही थी
बड़ी मामी- आगये तुम लो अब अपनी विदू को खिलाओ देखो कैसे तुम्हे देख रही है
दिलीप- [विदू शर्मा गयी मैने बड़ी मामी के हाथ से प्लेट ले लिया फिर बड़ी मामी रूम से बाहर चली गयी]
फिर मैं विदू को अपने हाथ से खिलाने लगा विदू को खाना खिलाने के बाद जैसे ही मैं उठा विदू ने मेरा हाथ पकड़ लिया
मैने विदू के गाल सहलाते हुए कहा
क्या हुआ
विदू- कुछ नही बस आप यही मेरे पास रहिए
दिलीप- हाथ धोके आता हूँ
विदू- नही
दिलीप- अच्छा बाबा नही जाता
मैं विदू के पास बैठ गया
विदू- आप से कॉन मिलने आया था
दिलीप- एक दोस्त आप से एक बात पुच्छू
विदू- दो पूछिए
दिलीप- [मैं मुस्कुरा दिया]
आप शहेर वाले कपड़े क्यूँ नही पहन्ति हैं
विदू- आप कहेंगे तो मैं पहेन लूँगी
दिलीप- पहले बताइए आप क्यूँ नही पहनती हैं
विदू- आप के लिए नही पहनती हूँ
दिलीप- मेरे लिए क्यूँ
विदू- क्यूंकी आप मेरे पतिदेव जी हैं
दिलीप- [मुझे तो कुछ समझ ही नही अरहा था कि विदू शहेर वाले कपड़े जैसे जीन्स टॉप फ्रॉक और भी सब क्यूँ नही पहनती हैं जीन्स के बारे में याद आते ही मुझे अदिति याद आगयि अच्छा शायद इसीलिए विदू जीन्स नही पहनती हैं]
विदू- क्या सोच रहे हैं
दिलीप- [मैं अपनी सोच से बाहर आया]
अब आपका दवाई खाने का वक़्त हो गया
विदू- मैं नही खाउन्गी बहुत कड़वी होती है
दिलीप- [विदू किसी छोटी बच्ची की तरह मुँह बनाने लगी]
अगर आप दवाई खा लोगि तो आपका मुँह मीठा कर दूँगा
विदू- कैसे
दिलीप- मैं अपना मुँह विदू के मुँह के पास ले गया हम एक दूसरे की सांसो को महसूस करने लगे
मैने अपने होंठ विदू के होंठो पे रखके हल्का सा चूम लिया
विदू शरमाने लगी
मैने विदू को दवाई खिला दी
जैसे ही मैं विदू के होंटो को चूमने के लिए आगे बढ़ा
दिलीप- जब मैं उठा तो शाम हो चुकी थी विदू मेरे सीने से चिपकी हुई थी मैने विदू के माथे पे किस किया
विदू अपनी आँखें खोलके मुझे देखने लगी
मैं मुस्कुराते हुए बोला] आप कब उठी
विदू- जब आप सोए हुए थे तब
दिलीप- आपने मुझे जगाया क्यूँ नही
विदू- आप को सोते देख सब कुछ भूल गयी
दिलीप- विदू को मुस्कुराते देख मेरा मन झूम रहा था मैं अपने होंठ विदू के होन्ट के पास लेगया और हल्के से चूम लिया
विदू शर्मा गयी
जब से विदू शहर वापस आई थी वो बहुत ज़्यादा शरमाने लगी थी मैने फिर विदू के होंठो को हल्का सा चूम लिया
ऐसे ही मैने 10 12 बार विदू के होंठो को चूम लिया हर किस के बाद विदू बुरी तरह से शर्मा जाती
विदू के किस में मुझे सुकून मिलता था मैं ज़्यादा देर किस नही कर सकता था क्यूंकी विदू बहुत कमजोर थी
चेहरा बिल्कुल पीला पड़ गया था ऐसे में विदू को साँस लेने में तकलीफ़ हो रही थी]
मैं बेड पर से उतर गया विदू बेड पे बैठ गयी
विदू- आप कहाँ जा रहे हैं
दिलीप- आप भी ना बाथरूम जा रहा हूँ
विदू- तो उधर कहाँ जा रहे हैं बाथरूम तो इधर है
दिलीप- मैं अपने वाले रूम में जा रहा हूँ
विदू- क्यूँ
दिलीप- वो इसलिए मेरी प्यारी विदू उस रूम में मेरे कपड़े हैं कल से मैं वही कपड़े पहने हुआ हूँ इतनी बदबू आरहि है
विदू- कहाँ स्मेल आरहि है
दिलीप- मैं हाथ जोड़के विदू के सामने झुक गया] माते जाने की अग्या दे दीजिए
विदू- जाओ बालक जी लो अपनी जिंदगी
[विदू खिलखिला कर हंस पड़ी]
मैं रूम से बाहर आगया और अरुणा डी के रूम पे पहुँचा
मुझे पता था कि अभी मेरी चारो बहने साथ में होंगी
मैने गेट नॉक किया
अवनी गेट खोलके मुझे देखने लगी]
अरुणा- कौन है अवन्तिका
अवनी- हमारे जीजा जी हैं दीदी
अरुणा- तू बाहर क्यूँ खड़ा है अंदर आजा
दिलीप- मैं अंदर जाके बेड पे बैठ गया
अरुणा- हाँ तो जीजा जी बताइए आप अपनी सालियो के पास क्यूँ आए हैं
दिलीप- क्या दी आप भी वो मैं अपने रूम में जा रहा हूँ तो आप विदू के रूम में जाओगी
अरुणा- ज़रूर जाउन्गि मेरे जीजा जी का हुकुम जो है
दिलीप- और हां आप विदू को ज़्यादा परेशान मत करना
अरुणा- बड़ा आया विदू को ज़्यादा परेशान मत करना मेरी दी हैं मैं जो चाहे करू
दिलीप- [अब माहौल थोड़ा ज़्यादा गर्म होने वाला था इससे बचने का एक ही रास्ता था मेरी जुड़वा बहने]
मेरी जुड़वा दिदियो आप मेरी एक मदद करोगी
मेघा- ज़रूर करूँगी
सुनीता- तू हमे सिर्फ़ बोला कर कि क्या करना है
दिलीप- बस एक ही काम करना है अरुणा दी को गुदगुदी
यह सुनके अरुणा दी का मुँह खुला का खुला रह गया
हम चारो अरुणा दी की तरफ बढ़ने लगे
अरुणा- तू भूल गया विदू अकेली है मैं उसके पास जा रही हूँ यह बोलके अरुणा दी रूम से भाग गयी
उनके पीछे तीनो बहने भी भागी मैं अपने रूम में आगया नहा धोके तय्यार हुआ
और वोही गाओं वाले कपड़े पहेन लिए क्यूंकी मेरी यही पहचान है कि मैं गाओं का लड़का हूँ
और मेरा मानना यह है कि आपको जो अच्छा लगे वोही करो वरना कल आपको दुख होगा
कि आप ने ऐसा क्यूँ नही किया मैं यह सब सोचते हुए नीचे आगया बड़ी नानी किचन में थी
मैने बड़ी नानी से थोड़ी देर बात की फिर विदू के लिए खाना प्लेट में भरने लगा बड़ी मामी बड़ी खुश लग रही थी
छोटी मामी भी मुझे आज मुझे नफ़रत की निगाह से नही देख रही थी मेरी जिंदगी आज पूरी तरह से बदल गयी
मुझे और क्या चाहिए बड़े मामा मेरी और विदू की शादी के लिए मान गये बड़ी मामी मेरा ख्याल रखने लगी थी
वँया मेरी बहेन कम दोस्त ज़्यादा थी या कहे एक वँया ही थी जो बचपन से मेरे साथ खेलती थी मुझसे हमेशा रूठ के बात करती थी बड़ी नानी जैसी माँ जिनकी वजह से मुझे मेरा परिवार और प्यार मतलब मेरी विदू मुझे मिली
यह सब सोचते हुए मैं हाथ में खाने की प्लेट लेके विदू के रूम में आगया...
दिलीप- मैं भी तो मज़ाक कर रहा हूँ मेरी जुड़वा बहने हँसने लगी
अरुणा दी दोनो को पकड़ने के लिए उठी दोनो बहने हंसते हुए भागने लगी
दोनो के पीछे अरुणा दी भी भागी अब रूम में मैं और विदू ही थे
मैं विदू को अपने हाथ से खाना खिलाने लगा
थोड़ी देर बाद बड़ी नानी मेरे लिए खाना लेके आगयि
मैने भी खाना खा लिया फिर बड़ी नानी प्लेट लेके चली गयी
विदू- आप मेरी एक बात मानेंगे
दिलीप- क्या
विदू- आप कल गाओं चले जाइए
दिलीप- [विदू की बात सुनके मुझे झटका लगा]
यह आप क्या कह रही हैं मैं नही जाउन्गा
विदू- आप नही जाएँगे तो एग्ज़ॅम्स की . कैसे करेंगे
दिलीप- मैं नही जाउन्गा
विदू- आप फैल हो जाएँगे
दिलीप- मैं आपको इस हालत में आपको छोड़ कर कहीं नही जाउन्गा
विदू- आपको मेरी कसम
दिलीप- आप कुछ भी कर लीजिए मैं आपके पास ही रहूँगा
विदू- तो क्या आप मेरी बात नही मानेंगे
दिलीप- मैं आपकी हर बात मानूँगा लेकिन आपको अकेला नही छोड़ूँगा
विदू- क्यूँ
दिलीप- मैं यहाँ से जाउन्गा और फिर आप खुदको कुछ कर लेंगी
विदू- नही करूँगी आपसे वादा कर चुकी हूँ
दिलीप- नही जाउन्गा
विदू- अच्छा ठीक है लेकिन आप रो क्यूँ रहे हैं
दिलीप- आप भी तो रो रही हैं मैं विदू के गले लग गया
विदू मेरे सर में अपनी उंगलिया फिराने लगी
विदू- आपको पता है मुझे कितनी खुशी होगी जब आप अपने एग्ज़ॅम में फर्स्ट आएँगे लेकिन आप तो इस बार एग्ज़ॅम देंगे ही नही काश आप एग्ज़ॅम देते यह सब मेरी ग़लती है अगर मैं इतना ड्रामा नही करती तो यह सब नही होता
दिलीप- मैं जानता हूँ आप यह सब किसलिए बोल रही हैं ठीक है मैं चला जाउन्गा गाओं आप यह सब मत बोलिए
विदू- मेरे प्यार पतिदेव जी
दिलीप- और हां मेरे जाने के बाद रोना मत मुझे पता है मुझसे ज़्यादा आपको तकलीफ़ होगी
मैं विदू के गाल सहलाने लगा]
अब आप सो जाओ मैं जाता हूँ ठीक है विदू बेड पे लेट गयी फिर मैं अपने रूम में आगया
बड़े मामा हमारी शादी के लिए मान गये थे यही हमारे लिए काफ़ी था
लेकिन मेरे और विदू के बीच में लकीर थी बड़े मामा ने मुझपे भरोसा किया था मैं उनका भरोसा नही तोड़ सकता था
रात को विदू के पास रुकने का मतलब होता कि हम अपने परिवार से प्यार नही करते हैं
मुझे तो अब भी विश्वास नही हो रहा था कि यह सब इतनी आसानी से हो गया था
विदू का प्यार तो ऐसा है कि मैं कभी समझ ही नही पाता हूँ कभी बच्ची बन जाती है कभी मेरी माँ
जैसे अभी मुझे गाओं जाने के लिए मना ही लिया
मैं वँया के रूम में आगया आज वँया के रूम का गेट खुला ही हुआ था आज वँया कुछ ज़्यादा जल्दी ही सो गयी थी
फिर मैं अपने रूम में आगया नींद तो आ नही रही थी
मैं सोचा गार्डन में घूम लेता हूँ
छोटे मामा के घर में स्विम्मिंग पूल गार्डन सब था
मैं गार्डन में पहुँच तो देखा वँया बेंच पे बैठके रो रही थी मैं पहुँचा वँया के पास मुझे देखते ही वँया अपने आँसू पोछने लगी
मैं बेंच पे बैठ गया
दिलीप- [मैं बहुत डर गया कि इतनी रात को वँया क्यूँ रो रही है]
क्या हुआ वँया तुम रो क्यूँ रही हो
वँया- कुछ नही बस किसी की याद आगयि थी
दिलीप- किसकी
वँया- था कोई जिसे मैं बहुत चाहती थी
दिलीप- [वँया की बात सुनके तो मेरा दिमाग़ घूम गया आज एक दिन मेरे साथ क्या क्या हो रहा था]
वँया- तुम विद्या दी से बहुत प्यार करते हो ना
दिलीप- बिल्कुल करता हूँ
वँया- अगर विद्या दी को किसी और से प्यार हो जाए तो
दिलीप- ऐसा कभी नही होगा
वँया- अगर ऐसा हो गया तो क्या तुम विद्या दी को माफ़ कर दोगे
दिलीप- वँया यह तुम्हे आज हो क्या गया है कैसी बाते कर रही हो
वँया- पहले मेरी बात का जवाब दो
दिलीप- सच तो यह है कि मैं अपने आपको विदू के लायक समझता ही नही हूँ अगर ऐसा दिन कभी आया तो मैं विदू के लिए उसके रास्ते से हट जाउन्गा और उससे कभी नाराज़ भी नही रहूँगा क्यूंकी मैं विदू से प्यार करता हूँ और मैं हमेशा उनको खुश देखना चाहता हूँ
दिलीप- अब तुम बताओ कि तुम किसके लिए रो रही थी
[मेरी बात सुनके वँया हँसने लगी]
वँया- अरे बुद्धू मैं तो सिर्फ़ यह देखना चाहती थी कि तुम विद्या दी से कितना प्यार करते हो देखो ना कैसे तुम्हारी आँखो से गंगा जमुना बह रही है
दिलीप- वँया झूठ मत बोलो तुम्हारी आँखो में दिख रहा है कि तुम किसी के प्यार में रो रही थी
वँया- मैं क्यूँ झूठ बोलूँगी तुम्हारे सिवा मेरी जिंदगी में कोई लड़का आया ही नही है मैं तो सिर्फ़ तुम्हारी परीक्षा ले रही थी
अब तुम ही सोचो मैं इतनी जल्दी कभी सोती हूँ जब तुम मेरे रूम में आए तो मैं सोने का नाटक कर रही थी
दिलीप- अच्छा लेकिन तुम्हे कैसे पता चला कि मैं गार्डन में आउन्गा
[यह सुनके वँया सोचने लगी]
दिलीप-अब बताओ क्यूँ रो रही थी
वँया- मैं कब कह रही हूँ कि मैं अभी तुम्हारे लिए गार्डन में आई थी वो तो तुमको गार्डन में देखके मैं सोची कि तुम्हारी परीक्षा ले ही लेती हूँ और यह देखो विक्स मैने अपनी आँखो में लगाई हुई थी
दिलीप- अच्छा ठीक है अब जाके सो जाओ
वँया- तुम भी चलो
दिलीप- फिर मैं अपने रूम में आगया वँया अपने रूम में चली गयीलेकिन मुझे अभी भी लग रहा था कि वँया मुझसे झूठ बोल रही है और मैं पता करके रहूँगा कि वो लड़का कौन है यह सब सोचते हुए मैं सो गया.....
दिलीप- सुबह मैं उठके नाहया धोया तय्यार होके नीचे गया
बड़ी नानी डाइनिंग टेबल पे बैठी थी या यूँ कहे दोनो मामा और विदू को छोड़ के सब बैठे थे
बड़ी नानी- उठ गया मेरा बेटा
दिलीप- जी बड़ी नानी
बड़ी नानी- तू यहाँ पे क्या कर रहा है तेरी विदू तो अपने रूम में है
दिलीप- बड़ी मामी आप विदू को नाश्ता करा दो
[बड़ी मामी मुझे देखती रह गयी कल मैं विद्या को अकेला नही छोड़ रहा था और आज मैं उसके पास भी नही जाना चाहता हूँ]
बड़ी नानी- क्या हुआ तुम दोनो का झगड़ा हुआ है क्या
दिलीप- नही बड़ी नानी ऐसी कोई बात नही है
बड़ी नानी- बड़ी माँ रहने दीजिए मैं ही ले जाती हूँ नाश्ता
दिलीप- बड़ी मामी उठके किचन में गयी वहाँ से नाश्ता लेके विदू के रूम में चली गयी मैं अपनी नज़र नीची करके नाश्ता करने लगा
[विद्या का रूम]
बड़ी मामी लाल पीली हुई विद्या के रूम में पहुँची विद्या की शकल देखते ही बड़ी मामी का सारा गुस्सा हवा हो गया क्यूंकी विद्या बहुत उदास दिख रही थी बड़ी मामी बेड पे बैठ गयी और विद्या के सर पे हाथ फेरते हुए बोली- क्या हुआ बेटी तुम इतनी उदास क्यूँ हैं
विद्या- नही माँ बस ऐसे ही
बड़ी मामी- विद्या तुम अपनी माँ से झूठ बोलोगि
विद्या- आप दिलीप से नाराज़ हैं
[बड़ी मामी यह बात सुनके सोच में पड़ गयी]
विद्या- आप दिलीप से इसलिए नाराज़ हैं कि वो मुझसे मिलने नही आया
बड़ी मामी- ऐसी कोई बात नही है तुम नाश्ता कर लो
विद्या- नही माँ पहले आप मेरी बात सुनिए दिलीप मुझसे बहुत प्यार करते हैं आपको पता है जब आप सब गाओं के लिए चली जाएँगी तो मैं बहुत रोउंगी मैं उनको देखके अपने आँसू नही रोक पाउन्गी इसी लिए वो मुझसे मिलने नही आए आप उनसे नाराज़ मत होना
[बड़ी मामी अपनी बेटी को देखती रह गयी फिर बड़ी मामी विदू को नाश्ता खिला कर वापस नीचे आगयि]
मैने चुप चाप नाश्ता कर लिया फिर रूम में से बड़े मामा और छोटे मामा बाहर निकले मैं अपनी सब बहनो को बाइ बोलके गाड़ी में बैठ गया सब विदू से मिलके गाड़ी में बैठ गये फिर दोनो गाड़ी अपनी रफ़्तार से चल पड़ी
दोपहर तक हम घर पहुँचे
मैने सीधा अपने रूम में आके विदू को फोन लगाया फोन उठाते ही विदू रोने लगी
मैं भी उनके साथ रोने लगा फिर मैं उनको चुप कराया और बेड पे लेट गया
थोड़ी देर बाद वँया के रूम में गया
वँया पढ़ाई कर रही थी मैं भी पढ़ाई करने लगा
पढ़ाई करते हुए मैं वँया को देख रहा था
थोड़ी देर तक तो वँया चुप रही फिर वो भी मुझे घूर्ने लगी
दिलीप- घूर क्यूँ रही हो
वँया- तुम घूर रहे हो
दिलीप- वो तो तुम मुझसे नाराज़ हो इसलिए
वँया- मैं तुमसे क्यूँ नाराज़ होंगी
दिलीप- तो फिर मुझसे बात क्यूँ नही करती
वँया- सोच लो अगर बात करोगे तो बहुत पछताओगे
दिलीप- चुहिया कहीं की बड़ी आई पछताने वाली
वँया- तो यह लो किताब तुम क्वेस्चन पूछो मैं जवाब दूँगी
दिलीप- मर गया
वँया- ऐसा फिर कभी मत बोलना
दिलीप- नही बोलूँगा
फिर मैं सवाल करता गया वँया फटाफट जवाब देती गयी ऐसे ही रात हो गयी
वँया- अब जाके खाना खा लो
दिलीप- तुम भी चलो
फिर हम दोनो खाना खाने लगे उसके बाद मैं अपने रूम में आगया
बड़ी मामी मेरे लिए दूध लेके आगयि
मैं दूध पीके बेड पे लेट गया और सोचने लगा कि अब तो फर्स्ट आना ही पड़ेगा मेरी विदू का जो ऑर्डर है
मैं बाथरूम गया फिर वापस आके बेड पे लेट गया थोड़ी देर बाद नींद आगयि
रात को कोई मेरा रूम नॉक करने लगा
मैने जाके रूम खोला
सामने बड़े मामा खड़े थे बड़े मामा बिना कुछ बोले अंदर आगये
मैने गेट बंद कर दिया जैसे ही मैं पीछे मुड़ा बड़े मामा रूम में नही थे
दिलीप- मेरी तो पूरी तरह से फटी पड़ी थी कि बड़े मामा इतनी जल्दी कहाँ चले गये
मैं अपने गाल थपथपाने लगा कि कही मुझे दौरा तो नही पड़ने वाला है
मैने बाथरूम में जाके देखा बेड के नीचे देखा बड़े मामा कहीं नही थे
और तो और मैने कबाड़ में भी देख लिए
मतलब बड़े मामा जो पहलवानों की तरह दिखते हैं उनको मैं कबाड़ में ढूँडने लगा
मैं बेड पे बैठके लंबी लंबी साँसे लेने लगा
तभी मैने वो देखा जिसको देखके मुझे लगा कि सच में मैं सपना ही देख रहा हूँ
मेरे रूम में जो अलमारी थी वो साइड हो गयी और पीछे से बड़े मामा निकले
बड़े मामा मेरे पास बेड पे बैठ गये
बड़े मामा- यह ख़ुफ़िया रास्ता है जो सिर्फ़ तुम्हारे रूम में है और इस रास्ते से तुम इस हवेली के किसी भी रूम में जा सकते हो सिर्फ़ जा सकते हो वापस नही आसाकते इस रास्ते से तुम हवेली के बाहर भी जा सकते हो और इस रास्ते से जाने में तुम्हे एक रूम दिखेगा उस रूम में तुम्हे तुम्हार सारे सवालो के जवाब मिल जाएँगे
[फिर बड़े मामा मुझे देखने लगे]
हम जानते है कि यह बहुत अजीब है तुम बहुत कुछ सोच रहे हो
हमे भी अजीब लगा था जब पिताजी ने हमे यह सब बताया
यह बात जतिन भी नही जानता
एक और बात तुम विद्या की कसम खाओ
तुम अपनी पढ़ाई पूरी करोगे फिर उस रूम में जाओगे
दिलीप- [बड़े मामा की बात सुनके तो मेरा सर फटने लगा उपर से विदू की कसम
अरे हलवा है क्या कि जो बात मैं जानता नही हूँ उसके लिए मैं अपनी विदू की कसम खा लूँ
उपर से यह भी बोल रहे है कि मेरे हर सवाल का जवाब मुझे उस रूम में मिल जाएगा
तो फिर मैं कसम क्यूँ खाऊ मैं यह सब सोच ही रहा था कि बड़े मामा ने वो किया जो मैने सोचा भी नही था
बड़े मामा ने गन निकालके अपनी कनपटी पे लगा दी]
बड़े मामा- तुम कसम खाओगे कि नही
[यह तो मेरा अंदाज़ है इस वक़्त मेरे दिमाग़ में भूचाल आया हुआ था लेकिन इस वक्त बड़े मामा की आँखो में कोई कठोरता नही थी आज मैं उनसे बिल्कुल भी डर नही रहा था बड़े मामा जैसे भी थे मेरी विदू के पिता थे मैं उनको कैसे मरने देता]
दिलीप- मैं विदू की कसम ख़ाता हूँ कि पहले अपनी पढ़ाई पूरी करूँगा उसके बाद उस रूम में जाउन्गा
[मेरी बात सुनके बमामा खड़े हो गये और मेरे सर पे हाथ फेरते हुए बोले
बड़े मामा- हमेशा खुश रहना अपने परिवार को खुश रखना अपना और अपने परिवार का ख्याल रखना
[यह बोलके बड़े मामा मेरे रूम से बाहर चले गये]
मैं अपना बेड पे बैठा रहा नींद तो हराम हो गयी थीफिर भी लेट गया रात भर नींद ही नही आई
अपने टाइम पे ही उठा नहा धोके तय्यार हुआ नीचे गया बड़ी नानी का आशीर्वाद लिया
फिर नाश्ता करके लखन के साथ अखाड़े में गया जब मैं कसरत कर रहा था तो देखा सरपंच की बेटी अखाड़े के अंदर आरहि है मैने कसरत करना बंद कर दिया
लखन- क्या हुआ छोटे मालिक
दिलीप- लखन अखाड़े के बाहर तो लिखा है कि अखाड़े के अंदर औरत नही आ सकती तो यह क्यूँ आरहि है
लखन- वो सरपंच जी से मिलने आई होगी
दिलीप- सरपंच जी भी अखाड़े में आते हैं पर किस लिए
लखन- वो उनके पैर में तकलीफ़ है इसलिए वो मालिश करवाने आते हैं
दिलीप- [मन में] सरपंच जी को क्या पता सरपंच जी तो पैर की मालिश करवाते हैं उनकी बेटी तो रोज़ दिन रात अपनी चूत की मालिश करवाती है वो भी अलग अलग लंड से मैने सरपंच की बेटी को इग्नोर किया और दोबारा कसरत करने लगा
कसरत करके जूस पीया फिर पहुँचा बिमला के घर
बिमला के घर का गेट तो खुला ही रहता था मैं सीधा अंदर चला गया...
दिलीप- बिमला किचन में थी मैं धीमे कदमो से किचन में गया बिमला की पीठ मेरी तरफ थी मैने अपने दोनो हाथ बिमला की कमर पे हल्के से रख दिए और एक झटके में बिमला को अपनी तरफ खींच लिया बिमला चीखने ही वाली थी कि मैने उसका मुँह पे अपना एक हाथ रख दिया मैं अपने दूसरे हाथ से बिमला के बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा बिमला मुझसे छूटने के लिए छटपटाने लगी बिमला अभी तक मेरा चेहरा नही देखी थी मैं बिमला के बूब्स और ज़ोर से दबाने लगा तभी मैने देखा कि बिमला चाकू उठाने की कोशिश कर रही है
दिलीप- कैसी हो काकी
मेरी आवाज़ सुनते ही बिमला शांत हो गयी
मैने अपना हाथ बिमला के मुँह से हटा दिया
बिमला मुझे गुस्से से लाल पीली होके मुझे घूर्ने लगी
बिमला- कितना बड़ा गधा है तू अगर मैं चाकू मार देती तो
दिलीप- तो मैं रोक लेता
फिर मैने बिमला को पानी दिया बिमला पानी पी गयी फिर हम दोनो खाट पे बैठ गये
दिलीप- शांति नही आई अभी तक
बिमला- वो अब नही आएगी
दिलीप- क्यूँ
बिमला- कल दिन भर वो तेरा इंतेज़ार करती रही
शांति बोली कि अब तो तू उसके साथ सब कुछ कर चुका है तेरा मतलब निकल गया इसी लिए तू नही आया
और अब वो भी नही आएगी
दिलीप- शांति भी पूरी गँवार है
बिमला- गँवार नही है बस वो भावुक हो गयी है वो सिर्फ़ माँ बनने के लिए तेरे साथ चुदाई कर रही है
दिलीप- अच्छा आप उसको बुला कर लाओ
बिमला- वो नही आएगी
दिलीप- आप उसको बुला कर लाओ यह मत बोलना कि मैं आया हूँ बस उसको रूम में लेके आजना
बिमला- हमेशा अपने बारे में सोचता है
दिलीप- मैं साड़ी के उपर से ही बिमला की चूत सहलाने लगा
बिमला- ऐसा मत कर बहुत खुजली होती है
दिलीप- आप शांति को लेके आओ आपकी सारी खुजली आज मिटा दूँगा
मेरे इतना कहते ही बिम्ला झट से खड़ी हो गयी और घर से बाहर चली गयी
मैं रूम में आके गेट पीछे छुप गया थोड़ी देर बाद शांति और बिमला रूम में आ गई
मैने झट से गेट लॉक कर दिया शांति मुझे देखते ही बिमला को घूर्ने लगी
मैं शांति के पास पहुँचा
दिलीप- परसो मेरी बहेन हॉस्पिटल में थी हम सब शहर गये थे
बिमला- देखा मैं कह रही थी तुझसे कि यह ऐसा कभी नही कर सकता
दिलीप- अब आप बोलो मैं रुकु या जाउ
शांति- मुझे माफ़ कर दो
दिलीप- एक शर्त पे करूँगा आज मैं कुछ भी करू आप मुझे नही रोकोगि
शांति- ठीक है
दिलीप- तो फिर जल्दी से कपड़े उतारो
शांति मुँह खुला का खुला रह गया
दिलीप- क्या हुआ आप क्या खड़ी हो आप भी कपड़े उतारो
मैने अपनी शर्ट बनियान पैंट और अंडरवेर सब उतरके एक जगह रख दिया
मेरा लंड पूरा मुरझाया हुआ था बिमला अपने कपड़े उतारने लगी
पर शांति वैसे ही बिमला के पास खड़ी थी मैं शांति के पास गया
तभी बिमला की बेटी की आवाज़ आई
बिमला की बेटी- माँ आप कहाँ हो
बिमला की फॅट गयी शांति का तो बुरा हाल था
दिलीप- जल्दी कपड़े पहेन कर अपनी बेटी को संभालिए उसे कहीं पे काम से भेज दीजिए
आप मत जाना बिमला वैसे ही खड़ी थी मैने बिमला के निपल को पकड़के खींच दिया
बिमला जल्दी से अपने कपड़े पहन के रूम से बाहर चली गयी शांति अभी भी वैसे ही खड़ी थी