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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 106

घर पहुँचके मैं बड़ी नानी से मिला

फिर वँया के रूम में किताब लेके गया

वँया पढ़ाई कर रही थी मैं जैसे बेड पे बैठा

वँया- दो मेरा गिफ्ट

दिलीप- शाम तक दे दूँगा

वँया- बाहर घूमना था तो सीधा बोल देते गिफ्ट का बहाना बनाने की क्या ज़रूरत थी

दिलीप- वँया मैं झूठ नही बोल रहा हूँ शाम तक अगर तुम्हारा गिफ्ट ना आए तो मेरा गाल होगा और तुम्हारा हाथ

उसके बाद हम दोनो पढ़ाई करने लगे फिर खाने का टाइम हो गया हम दोनो खाना ख़ाके अपने रूम में आगये

मुझे पता था कि अब वँया 1 घंटा आराम करेगी

यही सही मौका था नयी मामी से बात करने का

मैं अपनी एक किताब लेके नीचे गया बड़े मामा तो बाहर गये थे

मैं नई मामी के रूम मे गया

गेट नॉक किया

नई मामी ने गेट खोला मुझे देखके पता नही क्या हुआ

दिलीप- आपसे बात करनी है

नई मामी- अंदर आ जाओ

दिलीप- मैं अंदर जाके बेड पे बैठ गया ...बुक खोलके जी मुझे यह चॅप्टर पढ़ा दीजिए

[वैसे मुझे पता था कि नई मामी 10थ तक पढ़ी है बात तो करनी ही थी यह थोड़ी बोलता कि आप अकेली हैं इसीलिए आप से बात करना चाहता हूँ]

यह सुनके नई मामी मुझे घूर्ने लगी

दिलीप-क्या हुआ

नई मामी- कुछ नही

दिलीप- [फिर नई मामी मुझे वो चॅप्टर पढ़ाने लगी ऐसे ही 1 घंटा बीत गया हमारी थोड़ी बहुत बात भी हुई]

दिलीप- थॅंक यू मामी जी

नई मामी- कोई बात नही

फिर मैं वहाँ से भागके अपने रूम में आया

[वँया को जब पता चलेगा कि नई मामी से बात करता हूँ तो पता नही वो क्या करेगी]

मैं वँया के रूम में आगया वँया पढ़ाई कर रही थी मैं बैठके पढ़ने लगा

दिलीप- वँया विद्या दी तुम्हे फोन नही करती क्या

वँया- नही रोज़ मुझसे और माँ से बात करती हैं

दिलीप- कब

वँया- जब तुम अखाड़े में जाते हो तब

दिलीप- [फिर मैं कुछ नही बोला पढ़ाई करने लगा पढ़ाई करते हुए शाम हो गयी तभी बाहर से बड़ी नानी की आवाज़ आई मैं भागके नीचे आया]

जी बड़ी नानी

बड़ी नानी- शहर से कुछ आया है तेरे लिए

दिलीप- मैं बाहर गया साइन करके वँया का गिफ्ट ले लिया और बॉक्स को अपने कंधे पे उठा लिया जैसे अंदर गया

बड़ी नानी- दिलीप यह क्या कर रहा है रहने दे नौकर सब रख आएँगे

दिलीप- क्या बड़ी नानी आप भी यह तो बहुत हल्का है

बड़ी नानी- लेकिन इसमें है क्या

दिलीप- गिफ्ट है वँया के लिए फिर मैं वो गिफ्ट लेके वँया के रूम पहुँचा

और वो गिफ्ट साइड में रख दिया

वँया- यह क्या है

दिलीप- तुम्हारा गिफ्ट यह सुनके वँया धीमे कदमो से मेरे पास आके मेरे गले लग गयी

पहले अपना गिफ्ट खोलके देखो

वँया- देखती हूँ

फिर वँया गिफ्ट पास गयी और जैसे ही बॉक्स खोली वो खुशी से उछलने लगी

मैं उसके पास गया

दिलीप- बस और मत कूदो वरना कहीं मोच ना आ जाए

वँया- तुम्हे कैसे पता कि मुझे टेडी पसंद है वो भी बड़ा वाला

दिलीप- हम सब जब मूवी देखने गये थे तो मोविए के एक सीन में हेरोयिन को टेडी गिफ्ट में मिलता है

उस वक़्त मैने तुम्हे देख लिया था कि तुम्हे टेडी बहुत पसंद है

वँया- थॅंक यू दिलीप थॅंक यू थॅंक यू

दिलीप- बस बस पेट भर गया अब तुम अपने टेडी के साथ खेलो मैं बाहर घूम के आता हूँ

वँया- ठीक है बैल

दिलीप- क्या बोली

वँया- कुछ नही

दिलीप- अब गिफ्ट नही मिलेगा

वँया- [मासूम बनते हुए]मैं तो प्यार से बोलती हूँ

दिलीप- ठीक है मेरी चुहिया यह कहके मैं भागके नीचे आया

सोचा कि सुधा से मिल लेता हूँ मैं बाइक पे बैठके पहुँचा पुराने घर

पुराने घर की रखवाली सुधा और उसका पति कर रहे थे

सुधा के क्वॉर्टर पे पहुँचा गेट नॉक किया

सुधा ने गेट खोला

सुधा- छोटे मालिक आप अंदर आइए

[सुधा बहुत ज़्यादा खुश लग रही थी उसका चेहरा पहले से ज़्यादा खिल गया था]

मैं कुर्सी पे बैठ गया

सुधा- आप बैठिए मैं पानी लेके आती हूँ

दिलीप- रहने दो कैसी हो तुम

सुधा- ठीक हूँ

दिलीप- सॉरी मैं तो तुम्हारे बारे में भूल ही गया था

सुधा- कोई बात नही

दिलीप- एक मेरे एग्ज़ॅम्स ख़तम हो जाएँ फिर मैं तुम्हारी कहानी भी सुन लूँगा

सुधा- अब उसकी कोई ज़रूरत नही है

दिलीप- क्यूँ

सुधा- क्यूंकी अब मेरा बदला पूरा हो चुका है

दिलीप- चलो अच्छा हुआ मैं तो बच गया

सुधा- आप पहले से काफ़ी हॅंडसम दिख रहे हैं और आप की बॉडी भी टाइट हो गयी है

दिलीप- और बताओ मेरे बाद किसिका लिया

सुधा- नही आपके बाद किसिके साथ करने का मन ही नही होता

दिलीप- अच्छा एक बात बताओ अगर मैं तुम्हारा बदला नही लेता तो तुम क्या करती

सुधा- तो मैं आपसे कहती कि मैं आपकी जिंदगी भरके लिए रखैल बनके रहूंगी बस मेरा बदला ले लीजिए

दिलीप- [यह सुनके मैं अपने आप में खो गया क्यूंकी सुधा की आँखों में मुझे वो दर्द दिखा जो मेरे मन में था]

क्या तुम मुझे अपनी कहानी सूनाओगी

सुधा- नही छोटे मालिक अब मैं उसी को बताउन्गी जिसने उससे बदला लिया है जिसको मैं तडपा तडपा कर मारना चाहती थी

दिलीप- अच्छा सिर्फ़ यह बता दो जिससे तुम बदला लेना चाहती थी उसकी वजह से तुमने किसे खोया

सुधा- माँ को

दिलीप- माँ

सुधा- अच्छा वो सब छोड़िए आप कैसे हैं मैने सुना था कि आप ज़ख्मी हो गये थे

दिलीप- वो तो बहुत पुरानी बात है

[वो बात पूछ ही लेता हूँ]

सुधा तुमने मुझमे ऐसा क्या देख लिया कि तुम यह समझ बैठी कि मैं तुम्हारा बदला ज़रूर लूँगा

सुधा- आप अपनी भावनाओ को कंट्रोल कर सकते हैं जैसे कि आप अभी माँ सुनके अपने आप को रोक रहे हैं

आप अकेले में जाके इतना रोएंगे जिसे देखके कोई भी पत्थर दिल इंसान भी रो पड़ेगा.....

 
अपडेट 107

दिलीप- था तो मैं 18साल का लड़का ही सुधा की बात सीधा मेरे दिल पे लगी मैं वही इंसान हूँ जिसे दौरा पड़ता है

और उस वक़्त चीख चीखके रोते हुए मैं माँ को पुकारता हूँ लेकिन वो नही आती हैं यह सब सोचते हुए मुझे पता ही नही चला कि कब मेरी आँखो से आँसू बहने लगे

मैने अपने आँसू पोछे

दिलीप- अच्छा सुधा अब मैं चलता हूँ तुम अपना ध्यान रखना मैं जैसे ही मुड़ा मेरा ध्यान दीवार पे गया

दीवार पे न्यूसपेपर सब चिपका हुआ था जिसमें एमएलए की लाश जिसको एसपी ने मारा था फोटो सब था

मुझे ज़्यादा कुछ तो समझ में नही आया लेकिन इतना ज़रूर समझ गया कि एमएलए ही वो है जिससे सुधा बदला लेना चाहती थी

मैं अपनी बाइक पे बैठ गया और घर की तरफ जाने लगा तभी रास्ते में मुझे दीपा दिखी

उसके हाथ में दो बॅग्स थे शायद वो बाज़ार से आरहि थी मैने उसके पास बाइक रोक दी

दीपा मुझे घूर्ने लगी

दिलीप- घूर क्या रही हो बैठो मैं तुम्हे छोड़ दूँगा

दीपा- कोई ज़रूरत नही है तुम जाओ

दिलीप- क्या तुम अभी तक गुस्सा हो मुझसे

दीपा- नही मैं चली जाउन्गी

दिलीप- अरे पैदल जाओगी तो 30 मिनिट में पहुँचोगी गाओं

दीपा- गाओं वाले बाते बनाएँगे

दिलीप- देखो दीपा फालतू का टाइम पास मत करो बैठना है तो बैठो

दीपा सोचने लगी

अब मुझे गुस्सा आने लगा था मैं बाइक से उतरा आस पास मुँह घुमा कर देखा जब मुझे यकीन हो गया कि कोई नही है

मैं दीपा के सर को पकड़ लिया दीपा सकपका गयी वो कुछ कर पाती उससे पहले ही मैं उसके होंठ पे अपने होंठ रखके चूसने लगा थोड़ी देर तक वो विरोध करती रही फिर वो भी मेरे होंटो को चूसने लगी 10 मिनिट तक हम दोनो एक दूसरे के होंठ चूस्ते रहे फिर मैने किस तोड़ दिया और हाँफने लगा

दिलीप- अब बैठो

दीपा मेरे पीछे बैठ गयी फिर मैने गाओं से थोड़ा पहले दीपा को उतार दिया और पहुँचा घर

हॉल में बड़ी नानी बड़ी मामी और वँया बाते कर रही थी मेरी नज़र नई मामी के रूम पे पड़ी

नई मामी गेट के पीछे से सबको बाते करते देख रही थी मैं जाके बड़ी नानी की गोद में सर रखके लेट गया

बड़ी नानी मेरे सर में उंगली फिरने लगी

वँया- बड़ी दादी आपने कभी बैल को देखा है

दिलीप- बड़ी मामी आपने कभी चुहिया देखी है एक दम छोटी सी होती है

वँया- बैल बहुत गंदा होता है

दिलीप- चुहिया के तो दाँत ही नही दिखते हैं

वँया- बैल एक नंबर का गधा होता है

दिलीप- और चुहिया एक नंबर की चुड़ैल होती है

वँया- बड़ी दादी देखिए ना यह मुझे चुड़ैल बोल रहा है

दिलीप- बड़ी नानी मुझे देखने लगी मैने बड़ी मामी की तरफ देखा हम तीनो एक साथ हँसने लगे

वँया की शकल देखने लायक थी

वँया- बड़ी दादी माँ आप दोनो भी जाइए मैं आपसे बात नही करती

मैं और ज़ोर से हँसने लगा

बड़ी नानी- अब बस कर कितना हँसेगा

दिलीप- मैने हँसना बंद कर दिया और अपने रूम में आगया

थोड़ी देर बाद बड़ी मामी मेरे रूम में आगयि वो भी दूध लेके अब दूध भी पीना पड़ेगा

मैने दूध पी लिया फिर बड़ी नानी चली गयी

अब वक़्त था विदू को फोन करने का मैं फोन लगाया एक ही रिंग में विदू फोन उठा ली

विद्या- कैसे हैं आप

दिलीप- मेरी प्यार विदू आपकी मीठी आवाज़ मेरे कानो में पढ़ते ऐसा लगता है शहद घोल दिया हो

विद्या- लेकिन मैं आपसे नाराज़ हूँ

दिलीप- आज कल आप कुछ ज़्यादा ही आप नही कर रही हैं

विद्या- क्यूँ आपको अच्छा नही लगता है

दिलीप- नही थोड़ा अजीब लगता है

विद्या- लेकिन मुझे तो अच्छा लगता है बात मत बदलिए

दिलीप- हाँ तो बताइए कि आप क्यूँ नाराज़ हैं मुझसे और हाँ मैं भी नाराज़ हूँ आपसे

विद्या- मुझे माफ़ कर दीजिए मैं कभी दोबारा ऐसा नही करूँगी

[यह कहके विदू रोने लगी मैं अपने आप को कोसने लगा विदू जो यह भी नही जानती कि मैं उससे क्यूँ नाराज़ हूँ

इस वक़्त विदू के प्यार के सामने मैं बहुत छोटा महसूस कर रहा था क्या ऐसी लड़की की किस्मत में मेरे जैसा आवारा इंसान लिखा था क्या दे रहा हूँ मैं विदू को मैं अपनी ही सोच में डूबा हुआ था]

विद्या- आप मुझे माफ़ करदेंगे ना

दिलीप- यह आप कैसी बात कर रही हैं मैं आपसे बिल्कुल नाराज़ नही हूँ वो तो मैं देखना चाहता था कि अगर मैं आपसे नाराज़ हो गया तो आप क्या करेंगी

विद्या- आप झूठ बोल रहे हैं

दिलीप- बाहुबली की कसम

विद्या- कौन बाहुबली

दिलीप- आप बाहुबली को नही जानती पूरा इंडिया यह जानना चाहता है कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यूँ मारा

[यह सुनके विदू हँसने लगी मेरी जान में जान आई]

दिलीप- बस बस अब बताइए कि मेरी जान कैसी है

विद्या- आपकी जान बिल्कुल ठीक है

दिलीप- आपकी पढ़ाई तो अगले साल ख़तम हो जाएगी

विद्या- आपको कैसे पता

दिलीप- मैं तो आपकी छोटी से छोटी पसंद भी बता सकता हूँ

[जोश जोश में कह तो दिया लेकिन अगर पूछ लिया तो]

विद्या- मेरा पसंदीदा रंग कौनसा है

दिलीप- [मैं अपना माथा पीटने लगा अब क्या बोलू अपनी पसंद बता देता हूँ शायद तुक्का लग जाए]

लाल रंग

विद्या- आपको कैसे पता

दिलीप- आपसे प्यार जो करता हूँ तभी कोई गेट नॉक करने लगा

विद्या- अब आप खाना ख़ाके आराम से सो जाइए उउम्म्म्मम्मूऊऊुउउन्ह

मैने जाके गेट खोला

बड़ी मामी थी खाने का टाइम हो गया था मैने नीचे जाके खाना खाया

और गार्डन में घूमने लगा

विदू के बारे में सोचके डर लग रहा था कि अभी तो प्यार की शुरुआत है आगे क्या होगा

बड़े मामा जिनसे मैं नज़रे नही मिला पाता उनको कैसे मनाउन्गा

शायद वो मुझे मार ही डाले मैं अपने रूम में आके लेट गया

रात 2 बजे आँख लगी.,

 
अपडेट 108

दिलीप- सुबह में एक घंटा लेट उठा

नाहया धोया रेडी होके नीचे गया

सब लोग डाइनिंग टेबल पे बैठे थे मैं भी जाके बैठ गया

बड़ी मामी नाश्ता परोसने लगी

आज भी बड़ी मामी मेरे प्लेट में डबल नाश्ता डाल दी

मैं चुप चाप ख़ाता रहा

बड़े मामा और नई मामी अपने रूम में चले गये

बड़ी नानी मेरे बगल में बैठी थी

दिलीप- [धीरे से] बड़ी नानी आप बड़ी मामी को बोलिए ना इतना ना डाला करे मेरे प्लेट में

खाया नही जाता

बड़ी नानी- अब मैं क्या बोलू तू अब बहू की ज़िम्मेदारी है शायद वो तुझे बेटा मानने लगी है

दिलीप- [इसके बाद मेरे कुछ बोलने का कोई मतलब ही नही था]

मैं चुप करके नाश्ता किया और बाहर आगया

लखन के साथ अखाड़े में गया कसरत करके बिमला के घर पहुँचा

सीधा अंदर गया

बिमला खाट पे बैठी थी

मैं गेट लॉक करके बिमला के साथ बैठ गया

बिमला- यह क्या हो गया तुमको

[मैं पसीने-2 था]

दिलीप- कसरत करके आरहा हूँ

शांति नही आई अभी तक

बिमला- तुझे तो मेरी फ़िक़र ही नही है एक काम कर तू गोली ख़ाके मेरी चुदाई कर फिर शांति की

दिलीप- [मुझे बिमला से ऐसी उम्मीद नही थी उसे पता है कि मैं शांति के लिए यह सब कर रहा हूँ]

बिमला- अरे मैं मज़ाक कर रही थी शांति कमरे में है

दिलीप- आप थोड़ा सब्र करो आपकी सारी खुजली मिटा दूँगा फिर मैं रूम में गया

शांति बेड पे बैठी हुई थी शांति मुझे देखके मुस्कुराने लगी मैं शांति के पास जाके बैठ गया

दिलीप- आप परेशान लग रही हैं

शांति- नही मैं बस सोच रही हूँ क्यूँ मैं अपने पति के साथ ग़लत कर रही हूँ

दिलीप- आप एक फ़ैसले से आपकी आपके पति की आपके भाई आपकी माँ की ज़िंदगी बर्बाद होने से बच जाएगी

आप 4 ज़िंदगी बचा रही हैं और हम सिर्फ़ 2 हफ्ते के लिए चुदाई करेंगे

शांति- तुम बड़े बेशरम हो

दिलीप- मैं बेशरम हूँ

शांति- हाँ

दिलीप- मैं खड़ा हो गया और एक झटके में नंगा हो गया

शांति आज भी मेरे लंड को देखती रह गयी

दिलीप- आज बेशरम बनके चुदाई करेंगे

मैने शांति को भी अपनी तरह नंगा कर दिया

शांति के बदन को देखके मेरा लंड खड़ा होने लगा

मैने शांति का हाथ पकड़के अपने लंड पे रख दिया

शांति मेरे लंड को आगे पीछे करने लगी मैं शांति के होंठ चूसने लगा

शांति के होंठ चूस्ते हुए शांति के बूब्स दबाने लगा

शांति आआहए भरने लगी मैने शांति को लिटा दिया

और शांति के उपर आके शांति के होंठ चूसने लगा

शांति अभी भी मेरे लंड को आगे पीछे कर रही थी

शांति भी आज मेरे होंठ चूस रही थी

इससे हम दोनो को जोश आने लगा

शांति ने अपना मुँह खोल दिया

मैने शांति के मुँह में अपनी ज़ुबान डाल दी

शांति मेरी ज़ुबान चूसने लगी

शांति की एक बात मुझे पता चली कि शांति सब कुछ आराम से करती है

मैं शांति के निपल को अपनी उंगली में पकड़के खींचने लगा

शांति और ज़ोर्से मेरी ज़ुबान चूसने लगी

मैने अपना एक हाथ शांति की चूत पे रख दिया

शांति का जिस काँप उठा

मैं शांति की चूत सहलाते हुए शांति के बूब्स दबा रहा था

शांति मेरी ज़ुबान चूस्ते हुए मेरे लंड को सहला रही थी

फिर मैने किस तोड़ दिया और शांति के बूब्स चूसने लगा

शांति के निपल को दांतो फँसके खींचने लगा

शांति की हल्की चीख निकलने लगी

फिर मैं शांति के निपल पे अपनी ज़ुबान फिराने लगा

थोड़ी देर तक बूब्स चूस्ता रहा फिर मैं शांति की चूत को देखने लगा

शांति की चूत आज पूरी सॉफ और चमक रही थी

मैं शांति की चूत पे अपना मुँह रखके चूसने लगा

शांति सिसकी लेने लगी

मैं शांति की चूत के अंदर तक अपनी ज़ुबान डालके चूसने लगा

शांति मेरे सर को अपनी चूत पे दबाने लगी

मैने शांति की चूत में अपनी दो उंगली डाल दिया

और तेज़ी से आगे पीछे करने लगा

शांति अया ऊवू करने लगी

थोड़ी देर बाद शांति की चूत ने पानी छोड़ दिया

मैं सारा पानी पी गया

मैं उपर आया और शांति के होंठ चूसने लगा

10 मिनिट तक हम किस करते रहे

फिर मैं लेट गया शांति मेरे पैरो के बीच आगयि

और मेरे लंड को अपनी दोनो मुट्ठी पकड़के नापने लगी

फिर शांति धीरे से अपना मुँह मेरे लंड के सुपाडे के पास लेके आई

और अपनी ज़ुबान निकालके मेरे सुपाडे अपने जीभ फिराने लगी

मेरे मुँह से आह निकल गयी

थोड़ी देर तक शांति मेरे सुपाडे पे अपनी जीभ फिराती रही

अब शांति मेरे पूरे लंड को अपनी जीभ से चाट रही थी

शांति का प्लान मुझे तरसाने का था

लेकिन मैं भी मज़े ले रहा था

अब शांति अपना मुँह खोलके मेरे लंड को अंदर लेने लगी

शांति मेरे आधे लंड को अपने मुँह में अंदर बाहर करके चूसने लगी

मैं शांति के लंड चूसने से मदहोश हो गया

शांति मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे वो आइस्क्रीम खा रही हो

मैने शांति का सर पकड़ लिया शांति मेरे लंड अपने मुँह में लिए मुझे देखने लगी

मैं अपनी कमर उपर नीचे करके शांति के मुँह को चोदने लगा

लेकिन धीरे शांति भी मेरे आंडो को सहलाने लगी

फिर मैं रुक गया शांति मेरे आंडो को मुँह में लेके चूसने लगी

और मेरे लंड को सहलाने लगी फिर मैं बेड से उतरके खड़ा हो गया

शांति समझ गयी शांति बेड पे लेटके ही मेरा लंड चूसने लगी

मैं शांति का सर पकड़के शांति के मुँह को चोदने लगा

मैने अपना लंड सुपाडे तक निकाला और धीरे से अपना पूरा लंड शांति के मुँह में डाल दिया

कुछ देर तक शांति के मुँह मैं पूरा लंड डाले रहा फिर निकाल लिया शांति खांसने लगी

मैने शांति को लेटा दिया शांति की गान्ड बेड के किनारे पर थी..,

 
अपडेट 109

दिलीप- आज मैं अलग तरह से शांति को चोदना चाहता था

मैने शांति के दोनो पैरो को फैला दिया

और चूत पे लंड सेट करके एक झटका मारा

मेरा आधा लंड शांति की चूत में चला गया

शांति की हल्की चीख निकल गयी

मैने एक और झटका मारके अपना पूरा लंड शांति की चूत में पेल दिया

शांति अपने मुँह पे हाथ रख दी

मैं शांति के बूब्स दबाने लगा

मुझे पता था शांति को दर्द हो रहा होगा

थोड़ी देर बाद मैं हल्के धक्को से शांति को चोदने लगा

शांति को दर्द के साथ मज़ा भी मिल रहा था

मैं शांति के बूब्स दबाते हुए शांति को चोद रहा था

आज फिर बिमला रंडी खाट पे लेटके अपनी चूत सहला रही थी

थोड़ी देर बाद शांति की चूत ने पानी छोड़ दिया

अब वक़्त था असली चुदाई का

मैने अपना पूरा लंड निकाला और शांति की चूत में पूरा पेल दिया शांति की चीख निकल गयी

मैं तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा

मेरे हर धक्के के साथ शांति पूरा हिल जाती

थोड़ी देर तक मैं शांति को चोदता रहा

फिर मैने शांति को घोड़ी बना दिया

शांति के पीछे आके एक ही बार में अपना पूरा लंड शांति की चूत में पेल दिया

मैं शांति की पीठ चूमते हुए शांति को चोदने लगा

शांति- अया अया और ज़ोर से चोदो दिलीप फाड़ दो मेरी चूत अयाया उमाआ माअर डाअला दिलीप ने

दिलीप- शांति की बात सुनके मैं कुछ ज़्यादा जोश में आगया

और पूरी ताक़त से धक्के लगाने लगा

शांति गान्ड मसल्ते हुए मैं शांति को चोद रहा था

शांति मदहोश होने लगी थी

मैने अपना लंड शांति चूत से निकाल लिया

शांति कुछ बोल पाती उससे पहले ही मैने अपना लंड शांति की चूत में डाल दिया

शांति की अया निकल गयी

थोड़ी देर तक शांति को चोदता रहा फिर शांति का बदन अकड़ने लगा

मैं पूरी ताक़त से धक्के लगाने लगाने लगा

एक अया के साथ शांति की चूत ने पानी छोड़ दिया

शांति निढाल होके बेड पे गिर गयी

मैं बेड पे लेट गया

शांति मेरा लंड चूसने लगी

मैं शांति के बूब्स दबाने लगा

फिर शांति मेरे लंड पे अपनी चूत सेट करके बैठने लगी

धीरे धीरे मेरा पूरा लंड शांति की चूत में समा गया

दिलीप- शांति कैसा लग रहा है मेरा लंड अपनी चूत में लेके

शांति- इतना मज़ा आरहा है कि पूछो मत अया ऊवू सीयी

शांति मेरे लंड पे कूदने लगी

दिलीप- जब तक आपकी चूत पानी नही छोड़े रुकना मत

शांति- अया ठीक उम्म्म माआ

शांति मेरे लंड पे कुद्ति रही

मैं शांति के बूब्स मसल्ने लगा

तभी मुझे एक आइडिया आया

दिलीप- आप मेरे गले लग्के अपनी गान्ड उपर नीचे करो इससे आप ज़्यादा देर तक कर सकती हो

शांति मेरे गले लग्के अपनी गान्ड उपर नीचे करने लगी

दिलीप- आप अपने दोनो हाथ अपनी कमर पे रक्खो

शांति अपने हाथ पीछे अपनी कमर पे रख ली

मैने शांति के दोनो हाथ पकड़ा अपना लंड शांति की चूत से निकालके पूरा एक ही बार में पेल दिया

शांति की आह निकल गयी

शांति- अयाया तुम ऐसे भी कह सकते थे

दिलीप- क्या करू आपकी चूत इतनी टाइट है चोदने में बड़ा मज़ा आता है मैं बिना रुके शांति की चूत फाड़ने लगा

आज शांति खुलके चुदाई कर रही थी

मैं शांति को अपनी गोद में उठाके अपना लंड शांति की चूत में पेलने लगा

बिमला खाट पे नही थी

एक बार फिर शांति की चूत ने पानी छोड़ दिया मैं शांति को अपनी गोद से उतार दिया और शांति को पेट के बल लिटा दिया शांति थोड़ी घबराई हुई लग रही थी उसको लग रहा होगा कि मैं कहीं उसकी गान्ड ना मार लूँ मैने पीछे से शांति की चूत पे अपना लंड सेट किया . इस पोज़िशन में शांति की चूत ज़्यादा टाइट लग रही थी मैने एक झटका मारा

मेरा आधा लंड शांति की चूत में चला गया मैं एक और धक्का मारा

शांति की दबी चीख के साथ मेरा पूरा लंड शांति की चूत में समा गया

शांति अपना मुँह तकिये में दबाए हुई थी

मैं पूरे जोश के साथ शांति को चोदे जा रहा था

मैं शांति को वैसे ही अपनी गोद में उठाके लेट गया

अब शांति मेरे लंड की सवारी कर रही थी

मैं अपना हाथ शांति की चूत पे लेगया और चूत के दाने को मसल्ने लगा

मेरी तो आदत बन चुकी थी एक साथ कयि हमले करने की

इधर मेरा लंड शांति की चूत फाड़ रहा था

एक हाथ से शांति के बूब्स मसल रहा था

दूसरे हाथ से चूत के दाने को मसल रहा था

एक बार फिर शांति चीखते हुए झड़ने लगी

अब तो शांति की टंकी पूरी खाली हो चुकी थी

मैं शांति की चूत से अपना लंड निकाल लिया

लंड शांति की चूत से निकलते ही शांति मेरे उपर से लूड़क गयी

मैं शांति के बूब्स उपर नीचे होते हुए देखके मेरा लंड झटके खाने लगा

अब आखरी राउंड की बारी थी मैं शांति की टाँगो के बीच आगया

अपना लंड शांति की चूत पे सेट किया और शांति के होंठो पे अपने होंठ रखे

अपना लंड पूरी ताक़त से पेल दिया उसके बाद तो मैं रुका ही नही

पूरी ताक़त से अपना लंड शांति की चूत में पेलने लगा

अब तो मेरा भी निकलने वाला था

पूरे रूम में फॅक-2 की आवाज़ आराही थी

हमारे जिस्म एक दूसरे को रगड़ रहे थे

कुछ ही धक्को मैं अपना वीर्य शांति की चूत में डाल दिया

साला आज तो कुछ ज़्यादा ही हो गया

थोड़ी देर तक मैं अपना लंड शांति की चूत में डाले रहा

मैने शांति के माथे पे किस किया

फिर मैं उठके नंगा ही रूम से बाहर निकलके बाथरूम मे नहा कर अपने कपड़े पहेन लिए

बिमला मेरे लिए चाइ लेके आगयि शांति सो चुकी थी

मैं चाइ पी लिया

बिमला आज कुछ रूठी लग रही थी

मैं बिमला को अपने गोद में बिठा कर किस करने लगा

फिर मैं अपने घर पहुँचा,,.

 
अपडेट 110

दिलीप- घर पहुँचके मैं वँया के रूम में गया

वँया पढ़ाई कर रही थी

मैं भी पढ़ाई करने लगा

पढ़ाई करते हुए दोपेहेर हो गयी

मैं और वँया खाना खाने नीचे गये

फिर हम सब खाना खाने लगे

मैं खाना ख़ाके अपने रूम में आगया

ठीक 10 मिनिट बाद मैं नई मामी के रूम पहुँचा

गेट नॉक किया

नई मामी ने गेट खोला

नई मामी- दिलीप अंदर आओ

मैं अंदर जाके बेड पे बैठ गया कल जो चॅप्टर पढ़ा था उसका अगला चॅप्टर पढ़ने लगा

बीच में मैं जानबूझके नई मामी से पूछ लेता इसी तराहा 1 घंटा बीत गया

फिर मैं वँया के रूम में आगया जैसे ही वँया के रूम में देखा मुझे झटका लगा

क्यूंकी वँया बड़े से टेडी को प्यार कर रही थी मैं धीमे कदमो से वँया के पास पहुँचा

वँया टेडी को प्यार करने में लगी थी

दिलीप- वँया क्या कर रही हो

वँया सकपका गयी

दिलीप-आराम से घबरा क्यूँ रही हो

वँया- पीछे से आके डरा दिया

दिलीप- चलो किताब लेके बैठो

वँया- आज तुम जाओ कल पढ़ाई करेंगे

दिलीप- तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना

वँया- हाँ तबीयत ठीक है बस आज पढ़ने का मन नही है

दिलीप- वँया तो मुझे झटके पे झटके दे रही है

चुप करके किताब लाओ टेडी से बाद में खेलना

[वँया की रॉनी सूरत देखके मुझे एक और झटका लगा]

अच्छा ठीक आज रहने देते हैं तुम अपने टेडी के साथ खेलो

फिर मैं अपने रूम में आगया और पढ़ाई करने लगा

पढ़ाई करते हुए शाम हो गयी तभी बड़ी मामी मेरे रूम में आगयि

मेरे लिए दूध लेके

मैं दूध पी लिया फिर मैं नीचे गया

बड़ी नानी को बता दिया कि गाओं घुमके आता हूँ

मैं घर से बाहर आया और गाओं घूमने लगा

चौक पे गया छाई पीने सब लोग मुझे देखते रह गये

फिर मैं पहुँचा विनय के घर विनय से मिले तो काफ़ी दिन हो गये थे

बाहर से ही विनय को आवाज़ दिया

विनय की माँ बाहर आई

मैने काकी को नमस्ते किया

विनय की माँ- छोटे मालिक आप अंदर आइए

दिलीप- मैने आपको कितनी बार बोला मुझे छोटे मालिक मत बोला कीजिए

अब अगर आपने मुझे छोटे मालिक कहा है तो मैं आपसे कभी बात नही करूँगा

विनय की माँ- ठीक है अब नही बोलूँगी

दिलीप- विनय का घर ज़्यादा बड़ा नही था 2 रूम्स एक किचन एक बातरूम और बीच में आँगन था]

विनय कहाँ है

विनय की माँ- वो सो रहा काम करके बहुत थक जाता है

दिलीप- ठीक है मैं उसके रूम में जाता हूँ

[विनय की माँ मुझे देखने लगी]

आप चिंता मत करो मैं सिर्फ़ उसको देखके आ जाउन्गा

विनय की माँ- आप कल आके देख लीजिएगा अभी वो बहुत थका हुआ है उसकी नींद ज़रा सी आहट से टूट जाती है

दिलीप- [मुझे विनय की माँ की बात सही लगी]

ठीक है मैं कल आउन्गा

फिर मैं घर आगया रात के खाने का टाइम हो गया

आज वँया कुछ ज़्यादा ही खुश लग रही थी

लेकिन बड़े मामा मुझे आज उदास दिखे

शायद इसलिए कि कयि दिनो से वँया ने उनसे बात नही की थी

अब मैं भी क्या करू वँया को यह भी नही कह सकता कि तुम्हारे पिता की कोई ग़लती नही थी

हालात ही कुछ ऐसे थे

हाँ लेकिन विदू को कह सकता हूँ कि वो बड़े मामा से बात करे

वो बेचारी तो मुझपे अपना सब कुछ कुर्बान कर चुकी है मैं सोच में डूबा हुआ था

बड़ी मामी- दिलीप क्या हुआ

दिलीप- कुछ नही

फिर हम सब खाना ख़ाके अपने अपने रूम में आगये

रात को बड़ी मामी मेरे लिए दूध लेके आगयि

मैने दूध पी लिया

अब वक़्त था मेरी प्यारी विदू से बात करने का

मैं विदू को फोन लगाया

एक रिंग में ही विदू फोन उठा ली

विदू- मेरे पतिदेव जी कैसे हैं

दिलीप- मेरी जान कैसी हैं

विदू- अच्छी नही हूँ

दिलीप- क्यूँ क्या हुआ

विदू- आपको देखने का बहुत मन कर रहा है

दिलीप- [मैं सोचने लगा कि कितना टाइम लगेगा]

विदू- क्या सोच रहे हैं

दिलीप- कुछ नही मैं क्या सोच सकता हूँ मैं तो आपको ही सोचता हूँ

विदू- आप मेरे बारे में ही तो सोच रहे हैं कि अभी बाइक से कितना टाइम लगेगा यहाँ मेरे पास पहुँचने मे

दिलीप- नही नही मैं यह थोड़ी सोच रहा था

विदू- झूठ मत बोलिए मैं अगर बोलूँगी कि आप मेरे लिए तारे तोड़के ला दीजिए तो आप ला देंगे बड़े आए कि अभी बाइक से 3 घंटे में विदू के पास पहुँच जाउन्गा 1 घंटा विदू के पास रुकुंगा फिर 3 घंटे में गाओं पहुँच जाउन्गा

दिलीप- [विदू की कही हर एक बात मेरे कानो में गूंजने लगी मेरा दिल दुगनी तेज़ी के साथ धड़कने लगा

कि विदू मुझसे इतना ज़्यादा प्यार करती है कि वो मेरे मन की बात जान गयी और विदू जो बात बोली मैं बिल्कुल वैसा ही सोच रहा था

विदू- क्या हुआ आप मुझसे नाराज़ हो गये शायद मैं कुछ ज़्यादा ही बोल गयी

दिलीप- मैं आपसे कभी नाराज़ नही रह सकता हूँ वो तो मैं आपका प्यार महसूस कर रहा हूँ

मैं आपसे जितना प्यार कर रहा हूँ उससे कयि ज़्यादा आप मुझे प्यार करती हैं

विद्या- इतनी तारीफ़ मत कीजिए कहीं मैं खुशी के मारे मर ना जाउ

दिलीप- विदू की बात सुनके मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं फोन सीधा दीवार पे दे मारा फोन के टुकड़े यहाँ वहाँ फैल गये

आज पहली बार मुझे इतना ज़्यादा गुस्सा आरहा था विदू की कही बात मेरे दिल को चीरती हुई निकल रही थी मुझे कुछ समझ ही नही आरहा था कि मैं क्या करू मेरा दिमाग़ काम ही नही कर रहा था मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था कि विदू ने मरने की बात कह दी भले ही मैं अय्याश हूँ लेकिन मैं प्यार तो विदू से करता हूँ ना विदू अगर कहती कि मैं उसके लिए सब कुछ छोड़ दूं तो मैं उसके लिए सब कुछ छोड़ देता

मेरा सर फटा जा रहा था मैने बाथरूम का गेट खोला

शवर के नीचे खड़ा हो गया.....

 
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