दिलीप- ठंडा पानी मेरे सर पे पड़ते ही मेरा गुस्सा कम होने लगा
मैं नहा कर बाथरूम से बाहर आया और बेड पे लेट गया
सुबह मेरी आँख खुली तो मैं रेडी होके नीचे गया सब लोग डाइनिंग पे बैठे नाश्ता कर रहे थे
मैं भी बैठके नाश्ता करने लगा नाश्ता ज़बरदस्ती कर रहा था खाने का बिल्कुल मन नही था
दिलीप- बड़ी नानी आज मैं अखाड़े में नही जाउन्गा मुझे आज ज़्यादा पढ़ाई करनी है
बड़ी नानी- ठीक है बेटा मत जाना
दिलीप- जैसे तैसे करके नाश्ता किया फिर वापस अपने रूम में आगया
आज शांति के पास जाने का बिल्कुल भी मन नही हो रहा था
फिर मुझे रवि का ख्याल आया मैं बिमला के घर गया बिमला से भी बात नही किया
सीधा शांति के रूम में गया शांति बेड पे बैठी हुई थी मैने जल्दी से अपने कपड़े उतार दिए
शांति की पास जाके शांति के कपड़े भी उतार दिए
शांति को लेटके अपना लंड शांति की चूत पे सेट करके रगड़ने लगा
लंड छूट पे रगड़ने से मेरा लंड खड़ा होने लगा
2 झटको में अपना लंड शांति की चूत में डालके धक्के लगाने लगा
आज ना ही शांति के जिस्म को चूमा और ना ही शांति की चूत चूसा
शांति को दर्द हो रहा था पर मैं क्या करूँ
किसी चीज़ में मन नही लग रहा था
40 मिनिट तक शांति उसी पोज़ीशन में चोदता रहा
फिर अपना वीर्य शांति की चूत में डाल दिया
इस बीच शांति की चूत 4 बार पानी छोड़ी
आज बिमला भी खाट पे नही थी
मैने शांति की तरफ देखा तो शांति आज उदास लग रही थी
दिलीप- सॉरी मुझे पता है कि आज आपको मज़ा नही आया आज मैने आपको सिर्फ़ दर्द दिया है मुझे माफ़ कर दीजिए मैं बहुत शर्मिंदा हूँ
शांति- कोई बात नही दिलीप मैं तुम्हारी आँखे देखके ही समझ गयी कि आज तुम बड़ी तकलीफ़ में हो देखो ना तुम्हारी आँखो से अभी भी आँसू बह रहे हैं
दिलीप- मैं शांति के माथे को चूम्के बाहर आगया और नहा कर अपने कपड़े पहेन लिया
बिमला से थोड़ी देर बात करके घर आगया फिर अपने ही रूम में पढ़ाई करने लगा
थोड़ी देर बाद कोई मेरे रूम का गेट ज़ोर ज़ोर से नॉक करने लगा
मैं जाके गेट खोला वँया हाथो में फोन लिए काँप रही थी
दिलीप- वँया क्या हुआ वँया कुछ नही बोली
वँया बताओ क्या हुआ तुम काँप क्यूँ रही हो
वँया कुछ बोल ही नही रही थी
अब मुझे घबराहट महसूस होने लगी
तभी फोन दोबारा बजने लगा मैं वँया के हाथ से फोन ले लिया
जैसे ही कान में लगाया अरुणा दी के रोने की आवाज़ सुनाई दी
दिलीप- दी क्या हुआ आप रो क्यूँ रही हो
अरुणा- [रोतहुए] दिलीप वो वो
दिलीप- दी बताइए ना क्या हुआ है
इधर वँया भी कुछ बोल नही रही है
अरुणा- वो विद्या दी
दिलीप- विद्या दी क्या हुआ विद्या दी को
अरुणा- विद्या दी हॉस्पिटल में हैं उन्होने अपने हाथ की नसे काट ली हैं
दिलीप- क्याअ अरुणा दी मज़ाक मत कीजिए
अरुणा- मज़ाक नही कर रही हूँ तू जल्दी से सबको लेके **** हॉस्पिटल आजा
दिलीप- अरुणा दी मैं कह रहा हूँ ना मज़ाक मत कीजिए
अरुणा- [चीखते हुए] बेवकूफ़ ईडियट तुझे यह मज़ाक लग रहा है जल्दी से सबको लेके आ
अरुणा दी ने फोन कट कर दिया
दिलीप- मैं यह मानने के लिए तय्यार ही नही था कि मेरी विदू ऐसा कर सकती है मैने अपने आप को संभाला क्यूंकी मैं यह मान ही नही सकता था कि मेरी प्यारी विदू मुझे छोड़ने के जाने का सोच भी सकती है
दिलीप- वँया रोना बंद करो विद्या दी को कुछ नही हुआ है
वँया- अरुणा दी तो
दिलीप- बोला ना चुप करो मैने वँया को अपने आपसे अलग किया चलो नीचे हम सब शहर जाने वाले हैं
मैं और वँया नीचे आए
वँया के रोने की आवाज़ सुनके बड़ी मामी बड़ी नानी और बड़े मामा हमारे पास आगये
बड़ी नानी- क्या हुआ दिलीप वँया क्यूँ रो रही है
बड़ी मामी- वानु क्या हुआ बेटा क्यूँ रो रही है
वँया बड़ी मामी के गले लग्के रोने लगी
बड़े मामा- दिलीप
दिलीप- मैने कुछ नही किया है अरुणा दी का फोन आया था वो कह रही थी कि विद्या दी ने अपने हाथ की नस काट ली है
और वो हॉस्पिटल में है
यह सुनके सबके पैरो तले ज़मीन खिसक गयी वँया के साथ बड़ी मामी भी रोने लगी और बड़े मामा ने मुझे थप्पड़ मार दिया थप्पड़ इतना ज़ोर का था कि मेरे होंठ फॅट गये
बड़े मामा- तुम यह बात इतने आराम से बोल रहे हो
[चीखके] लखन
लखन दौड़ता हुआ अंदर आया
लखन- जी मालिक
बड़े मामा- लखन गाड़ी निकालो हम जतिन के शहेर जा रहे हैं जल्दी
लखन गाड़ी लेके बाहर में आगया सब लोग गाड़ी में जाके बैठ गये
बड़ी नानी मेरा हाथ पकड़के मुझे दूसरी गाड़ी के पास ले गयी
फिर मुझे अंदर लेके बैठ गयी
गाड़ी में नई मामी भी बैठी थी
फिर दोनो गाड़ी चल पड़ी
मेरे साथ सिर्फ़ बड़ी नानी और नई मामी थी गाड़ी में
बड़ी नानी अपने आँचल से मेरे होंठ पे जो खून जम गया था वो सॉफ करने लगी
दिलीप- बड़ी नानी मामा ने मुझे क्यूँ मारा अरुणा दी तो मज़ाक कर रही थी
बड़ी नानी- बेटा तेरी तबीयत ठीक नही है तू सो जा
दिलीप- [मुस्कुरा कर] बड़ी नानी मुझे क्या हुआ है आप लोग ही बिना मतलब के परेशान हो रही हैं
बड़ी नानी- तुझे मेरी कसम तू सो जा
मैने बड़ी नानी के गोद में अपना सर रख दिया नींद तो नही आई 3 घंटे में हम लोग हॉस्पिटल पहुँचे
बड़े मामा और बड़ी मामी वँया सब दौड़ते हुए हॉस्पिटल के अंदर गये मैं आराम से अंदर गया
सब बहने रो रही थी
बड़ी मामी सी मामी के गले लग्के रोने लगी
बड़े मामा की आँखों से आँसू बहने लगे
थोड़ी देर बाद डॉक्टर आइसीयू से बाहर आया
बड़े मामा- डॉक्टर साहब कैसी है हमारी बेटी
डॉक्टर- हम लोग पूरी कोशिश कर रहे हैं पेशेंट का बहुत खून बह चुका है बाकी जो भगवान की मर्ज़ी होगी वोही होगा
यह सुनके बड़े मामा ने डॉक्टर का कॉलर पकड़ लिया
बड़े मामा- डॉक्टर मेरे खून की एक एक बूँद मेरी बेटी को दे दोलेकिन अगर मेरी बेटी को कुछ हो गया तो इस हॉस्पिटल को शमशान भूमि में बदल दूँगा
तभी छोटे मामा आगये
छोटे मामा- भाई साहब छोड़िए इनको
कितनी कोशिश करने के बाद बड़े मामा ने डॉक्टर का कॉलर छोड़ दिया
छोटे मामा- सॉरी डॉक्टर वेरी सॉरी
डॉक्टर- इट्स ओके ठाकुर साहब मुझे पता हैं यह काफ़ी परेशान हैं और यह हॉस्पिटल आपका ही है
आप समझ सकते हैं कि हम अपनी जी जान से कोशिश कर रहे हैं यह कहके डॉक्टर आइसीयू में चला गया
शाम हो गई लेकिन ओपरेशन अभी तक चल रहा था सबकी आँखो से आँसू निकल रहे थे लेकिन मैं मानने को तय्यार ही नही था कि विदू अपनी जिंदगी के लिए मौत से लड़ रही है
तभी डॉक्टर और नर्सस आइसीयू से बाहर आगये
बड़े मामा- डॉक्टर साहब मेरी बेटी तो ठीक है ना
डॉक्टर- सॉरी हम ने बहुत कोशिश की लेकिन ऐसा लगता है कि पेशेंट जीना ही नही चाहती थी शी ईज़ डेड
दिलीप- यह सुनते ही बड़े मामा दौड़के आइसीयू में गये
बड़े मामा के पीछे बड़ी मामी बड़ी नानी और वँया भी दौड़ कर अंदर चली गयी
छोटे मामा और किसी को भी अंदर नही जाने दे रहे थे
फिर बड़ी मामी बेहोश हो गयी
उनको दूसरे रूम में शिफ्ट किया गया
थोड़ी देर बाद सब बहने एक एक करके अंदर चली गयी
मैं आइसीयू के बाहर एक साइड में खड़ा होके यह सब देख रहा था
थोड़ी देर बाद छोटे मामा मेरे पास आए
छोटे मामा- दिलीप तुम भी चलके विद्या को देख लो विद्या तुम्हारी भी तो बहेन थी
दिलीप- आप क्या बोल रहे है मेरी कुछ भी समझ में नही आरहा है
छोटे मामा- दिलीप विद्या मर चुकी है
दिलीप- ठीक है मैं आता हूँ
छोटे मामा चले गये
मैं हॉस्पिटल से बाहर आया और लखन के पास गया
दिलीप- लखन मुझे लग रहा है कि कुछ गड़बड़ है
लखन- क्या गड़बड़ है छोटे मालिक
दिलीप- कुछ लोगो के पास मैने गन्स देखी हैं
लखन- क्या आज तो हमारे पास आदमी भी नही हैं कितने लोग हैं
दिलीप- 7 8 लोग होंगे
लखन कुछ सोचने लगा
लखन अपने पीछे से एक गन निकालके मुझे दे दिया
लखन- आप यह बड़े मालिक को दे दीजिए मैं देखता हूँ वो कौन लोग हैं
लखन चला गया
मैं गन अपने पीछे पैंट में घुसा लिया
और पहुँचा आइसीयू के बाहर धीमे कदमो से अंदर गया
बड़े मामा एक लाश के सर के पास बैठे थे
वँया उसके पैरो के पास बैठी थी
अब मुझे तो यकीन था कि यह मेरी विदू नही है
फिर भी मैं उस लाश के पास गया
लाश को सफेद कपड़े में ढका हुआ था
मैं लाश के पास गया
और अपने हाथ से कपड़े को नीचे करने लगा
जैसे ही मैं उस लाश का चेहरा देखा
मेरी आँखो से मेरे आँसू सैलाब बनके बहने लगे
मेरी दुनिया उजड़ चुकी थी क्यूंकी वो लाश नही थी वो मेरी विदू थी
जो मुझसे किए हर वादे को तोड़ के इस दुनिया से जा चुकी थी
अगर विदू मुझे छोड़ देती तो मैं जी भी लेता
लेकिन सिर्फ़ मेरी वजह से मेरी विदू इस दुनिया में नही थी
दिलीप- विद्या दी उठिए ना
मैं विद्या दी को आवाज़ देता रहा
लेकिन विद्या दी नही उठी
तभी बड़ी नानी मेरे कंधे पे हाथ रख दी
दिलीप-बड़ी नानी विद्या दी उठ क्यूँ नही रही हैं
बड़ी नानी- बेटा अब वो कभी नही उठेगी
दिलीप- अरे हां मैं भी कितना पागल हूँ यह तो मेरी प्यारी विदू है
सब सोचने लगे की मैं प्यार से विद्या दी को विदू कह रहा हूँ
मैने विदू का हाथ पकड़ लिया
आपको याद है आप मुझसे कितना प्यार करती थी
थी नही हैं
देखिए ना आपका दिलीप आपके पास है
आपका हाथ पकड़े हुए
अपनी आँखें खोलिए ना
आप मेरे साथ मज़ाक कर रही हैं ना
लगता है कल की बात से आप मुझसे नाराज़ हैं
होना भी चाहिए मैने काम ही ऐसा किया है
[सब लोग आँखें फाड़के मुझे देख रहे थे किसी को भी मेरी बाते समझ में नही आरहि थी]
अरे हां मैं तो भूल ही गया कि आप तो मुझे प्यार से पतिदेव जी कहती हैं
[यह सुनके वहाँ के हर शख्स के पैरो तले ज़मीन खिसक जाती है]
मैं विदू का हाथ पकड़े हुए बोला --देखिए ना आपके पतिदेव जी आपके सामने खड़े हैं
[बड़े मामा को तो समझ ही नही आरहा था कि वो अपनी बेटी के लिए दुखी हो या मुझपे गुस्सा]
बड़े मामा- [चीखके]दिलीप
दिलीप- मैं बिना देखे बड़े मामा की तरफ हाथ कर दिया] मैं अपनी विदू से बात कर रहा हूँ
एक बार मेरी विदू मुझे देखले फिर आप मुझे जान से मार दीजिएगा मेरे साथ जो करना हो कीजिएगा
[किसी को भी यह उम्मीद नही थी कि मैं जो बड़े मामा के नाम से काँपने लगता था वो आज बड़े मामा को चुप रहने को कह रहा है उसके बाद बड़े मामा कुछ नही बोले बड़ी नानी तो मुझे देखती रह गयी]...
आपको पता है कल मैं कितना रोया आज फिर आप मुझे रुला रही हैं
मुझे पता है कि मैने कल फोन तोड़के ग़लत किया मुझे आपसे पूरी बात करनी चाहिए थी
आप तो कहती थी यह मैं थी क्यूँ बोलता हूँ
कहती हैं कि आप मुझसे बहुत प्यार करती हैं
उठिए ना आप मेरी बात नही मानेंगी आप तो मुझसे रूठ गयी
मुझे आपको मनाना पड़ेगा
अच्छा मेरे लिए नही उठना चाहती हैं आप
आप वँया के लिए उठ जाइए
देखिए ना वँया कितना रो रही है
उठिए ना आप उठ जाइए आपके बदले मैं अपनी जान दे दूँगा
बड़ी नानी मेरे पास आगयि और मेरे सर पे हाथ रखके
बड़ी नानी- बेटा वो अब नही उठेगी वो जा चुकी है
दिलीप- ऐसा मत बोलिए वो यही पे है यह मुझे प्यार करती हैं यह मेरी बात ज़रूर मानेंगी
बड़ी नानी- बेटा संभाल अपने आपको अब वो नही उठेगी
बड़े मामा- बहुत हो गया तुम्हारा नाटक अब जाके साइड में खड़े हो जाओ दिमाग़ तो नही खराब हो गया है तुम्हारा
यह क्या विदू विदू लगा रखा है
दिलीप- आप लोग ऐसे नही मानेंगे
[मैने अपने पीछे से गन निकालके अपनी कनपटी पे लगा दिया सब की चीख निकल गयी]
अब अगर आप में से कोई कुछ बोला तो मैं अपने आप को गोली मार लूँगा
[मैने अपनी बहनो की तरफ देखा सब रो रही थी]
आप सब रोना बंद कीजिए कोई मरा नही है यहाँ पे
[सब बहनो ने रोना बंद कर दिया सिर्फ़ हिचकिया ले रही थी]
मैं वापस विदू के चेहरे को देखने लगा
आपको मुझसे बात नही करनी है मत कीजिए लेकिन एक बार अपनी आँखें खोलके अपने पतिदेव जी को देख तो लीजिए
कही ऐसा ना हो कि आप आँखें खोले और मेरी लाश आपके सामने पड़ी हो
मैं थोड़ी देर तक वैसे ही विदू के पास अपनी कनपटी पे गन लगाए बैठा रहा
तभी गेट खोलके एक डॉक्टर अंदर आया मुझे देखके वो घबरा गया
बड़े मामा ने उस डॉक्टर को बाहर जाने का इशारा किया
मैं अपनी भीगी आँखो से आस लगाए विदू को देखता रहा लेकिन विदू उठ ही नही रही थी मैं अपने हाथ से विदू के गाल सहलाने लगा शायद ऐसा करने से विदू अपनी आँखें खोलके मुझे देख ले थोड़ी देर तक मैं विदू के गाल सहलाता रहा लेकिन विदू वैसे ही लेटी रही अब मेरी हिम्मत टूटने लगी थी इतना दर्द तो तब भी नही हुआ था जब माँ को आवाज़ देता और वो नही आती]
ठीक है आपको नही उठना है तो मत उठिए मुझे क्या लेकिन मैं आपके बिना जी नही सकूँगा
मैं 10 तक गिनूंगा
1
बड़ी नानी- दिलीप तू अपनी बड़ी नानी को छोड़ कर चला जाएगा मैं कैसे जीऊंगी तेरे बिना क्या यही सिला देगा तू मेरी ममता का
दिलीप- बड़ी नानी मैं तो शायद जी भी लेता लेकिन विदू के बिना कैसे जीऊं मुझे याद है मैने किसिको बोला था कि अगर आपका प्यार आपसे दूर हो जाए तो आप अपने परिवार के लिए ज़िंदा रहो और अगर परिवार नही है तो इस उम्मीद में जिंदा रहो कि शायद आपको कभी प्यार और परिवार मिल जाए आज पता चला कि प्यार क्या होता है और परिवार क्या होता है
प्यार तो भूल भी जाता लेकिन यहाँ तो परिवार में ही प्यार हो गया
2
3
4
सब बहने रोने लगी बिलखने लगी
5
6
बड़ी नानी- बेटा दिलीप रुक जा
7
8
[मैं अपना हाथ विदू के हाथ में टाइट पकड़ लिया मैने वँया की तरफ देखा वँया मुझे डबडबाइ आँखो से देख रही थी]
वँया बड़ी नानी का ख्याल रखना उन्हे कभी कोई तकलीफ़ नही होनी चाहिए मुझे माफ़ कर दीजिए बड़ी नानी मैने आपको सिर्फ़ तकलीफ़ दिया है
9
मेरी प्यारी विदू आप मुझसे एक बात कही थी कि मैं आपसे नाराज़ ना होऊ मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ
और आपसे नाराज़ होके जा रहा हूँ
10
सबकी चीख निकल गयी
मैं ट्रिग्गर पे अपनी उंगली दबाने लगा
तभी मेरे हाथ में विदू का जो हाथ था मुझे हिलता हुआ महसूस होने लगा
मैने विदू की तरफ देखा विदू की आँखें बंद थी मैं मुस्कुरा दिया
आपके प्यार ने पागल कर दिया है मुझे मैने अपनी आँखें बंद कर लिया
बड़े मामा को देखके लगा कि वो भी रात भर नही सोए हैं
एक तो यह डॉक्टर इतना बड़ा था कि मुझे मिलने ही नही दे रहा था विदू से
थोड़ी देर बाद विदू बाहर आई स्ट्रेचर पे
विदू शायद सोई हुई थी
डॉक्टर बड़े मामा को साइड में लेके गये
डॉक्टर- ठाकुर साहब यह चमत्कार से कम नही है कि आपकी बेटी मर के भी जिंदा हो गयी शायद हम से कोई ग़लती हो गयी हो लेकिन हम यह नही भूल सकते कि 8 घंटे तक आपकी बेटी के हाथ से खून बहता रहा आप एक और बात का ध्यान रखें
कि आपकी बेटी उस लड़के के साथ एमोशनली जुड़ चुकी है उस लड़के को अगर एक भी खरॉच आई तो आपकी बेटी शायद फिर उसी हालत में वापस चली जाए
दिलीप- वॉर्ड बॉय स्ट्रेचर को आंब्युलेन्स में डाल दो मैं जल्दी से आंब्युलेन्स में बैठ गया फिर बड़े मामा और वँया आके बैठ गयी बड़े मामा जब आंब्युलेन्स में बैठने आए वो मुझे देखके दूसरी गाड़ी में बैठ गये फिर आंब्युलेन्स चल पड़ी सी मामा के घर . मैने विदू का हाथ अपने दोनो हाथ में थाम लिया
वैसे बड़ी मामी के सामने यह करने में शरम आराही थी लेकिन क्या करू मैने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया
थोड़ी देर बाद हम सब छोटे मामा के घर पहुँचे विदू अभी भी सोई हुई थी वॉर्ड बॉय सब स्ट्रेचर को नीचे उतारने लगे
दिलीप- आप रहने दो मैं करता हूँ
मैने विदू को अपनी गोद में उठा लिया और विदू के रूम में पहुँचा
विदू को बेड पे लिटा दिया जैसे ही मैं पीछे मुड़ा
मेरी फट गई मेरे सामने मेरा पूरा परिवार खड़ा होके मुझे घूर रहा था
मैने सोचा कि इतनी बारिश कहाँ से हो रही है
मैने अपने माथे पे हाथ लगाके देखा तो मुझे पता चला कि मैं पसीने से भीग गया हूँ
तभी बड़े मामा मेरे पास आए
बड़े मामा- हमे तुमसे बात करनी है आओ हमारे साथ
दिलीप- बड़े मामा मेरा हाथ पकड़के मुझे अपने साथ दूसरे रूम में लेके गये
बड़ी नानी कुछ बोलना चाहती थी लेकिन बोल नही पाई
बड़े मामा ने मेरा हाथ छोड़ कर गेट लॉक कर दिया फिर एक कुर्सी पे बैठ गये
बड़े मामा- बैठ जाओ
[मैं बड़े मामा के सामने वाली कुर्सी पे बैठ गया अंदर से तो पूरी फटी पड़ी थी]
बड़े मामा- यह तो हम देख चुके हैं कि कल तुमने क्या किया और क्या नही किया अब हम यह जानना चाहते हैं कि तुम आगे क्या करना चाहते हो
दिलीप- आअप आप जो कहेंगे क्क्करुन्गा
बड़े मामा- [आँख दिखाते] हम ने पूछा कि क्या करोगे
दिलीप- [मैने सोचा बेटा दिलीप अब अगर शहीद होना है तो एक कोशिश करने में क्या जाता है शायद बड़े मामा मान जाए]
[मैं एक लंबी साँस लिया]
अपनी पढ़ाई पूरी करके विदू से शादी करूँगा
बड़े मामा मुझे देखते रह गये थोड़ी देर तक बड़े मामा कुछ सोचते रहे
बड़े मामा- ठीक है हमे तुम पर विश्वाश है हमारा भरोसा टूटने मत देना तुम समझ रहे हो ना हम क्या कहना चाहते हैं
दिलीप- [मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगे मैने तो सोचा था कि बड़े मामा मुझे जान से मार देंगे]
दिलीप-जी मैं आपका विश्वाश कभी टूटने नही दूँगा मैं आपसे वादा करता हूँ
बड़े मामा- ठीक है अब जाओ
दिलीप- मैं रूम से बाहर आगया और सीधा विदू के रूम में गया अभी भी सब रूम में खड़े थे
मेरे पास मेरी सब बहने आगयि वँया को छोड़ कर
अरुणा- तू ठीक तो है ना
अवन्तिका- तुझे कुछ हुआ तो नही
दिलीप- ज़्यादा कुछ नही बस बड़े मामा ने बहुत मारा
[यह सुनके सब रोने लगी]
आप सब फिर रोने लगी पता है ना
अरुणा- हाँ पता है तेरी विदू को दुख होगा हमे रोते हुए देखके
दिलीप- मैं तो मज़ाक कर रहा था
[यह सुनके चारो बहने मेरी पीठ पे ढोल बजाने लगी]
बड़ी नानी- बस भी करो और जाओ अपने रूम में
अरुणा बहू को भी अपने साथ ले जा
अरुणा दी नई मामी को अपने साथ लेगयि
बड़ी मामी छोटी मामी के साथ उनके रूम में चली गयी
छोटे मामा तो फॅमिली ड्रामा में दिखते ही नही हैं
बड़ी नानी मेरे पास आई
बड़ी नानी- मेरा प्यारा दिलीप कितना बड़ा हो गया है अब बता क्या बोला तेरा मामा ने
[मैने बड़ी मामी को सारी बात बता दी]
दिलीप- बड़ी नानी मुझे माफ़ कर दीजिए मैने आपका दिल दुखाया है
बड़ी नानी- दिलीप मैं तेरी माँ नही हूँ लेकिन तू मेरा बेटा है और माँ कभी भी अपने बच्चो से नाराज़ नही होती है
विदू का मासूम खूबसूरत चेहरा देखके मेरा दिल नाचने लगा
पता नही कितनी देर तक मैं अपनी विदू को देखता रहा
अब तो बड़े मामा भी हमारी शादी के लिए मान गये हैं
यह बात बहुत अजीब है
लेकिन मैं इस बारे में सोचके अपनी खुशी कम करना नही चाहता था
तभी विदू अपनी पलके झपकाने लगी
मैने झुक के अपनी विदू की पॅल्को को अपने होंटो से चूम लिया
विदू मुस्कुराने लगी
लेकिन विदू की मुस्कुराहट के पीछे वो दर्द था जिसकी वजह मैं था
पता नही आज कल मुझे क्या होता जा रहा है
विदू के सामने मैं अपने आँसू रोक ही नही पाता हूँ
मेरी आँखो से आँसू बहते देख विदू उठने की कोशिश करने लगी
दिलीप- आप लेटके ही रहिए
विदू- आप रो क्यूँ रहे हैं प्लीज़ मत रोओ
दिलीप- यह सब मेरी वजह से हुआ है अगर मैं कल फोन नही तोड़ता तो आप ऐसा कुछ नही करती
विदू- आप ऐसा मत बोलिए ग़लती तो मेरी थी कि मैने मरने की बात कह दी जब आपने फोन काट दिया
दिलीप- मुझे माफ़ कर दीजिए
विदू- मैं 2 घंटे तक आप को फोन लगाती रही लेकिन आपका फोन लग ही नही रहा था
मैं डर गयी कि आप कुछ ग़लत ना कर बैठे मैं सोची कि आप को अगर कुछ हो गया
तो मैं आपके बिना कैसे जीऊंगी आप ही मेरे सब कुछ हैं
इसीलिए मैने अपने आप को सज़ा देने के लिए अपने हाथ की नस काट ली
मैं सोची कि अगर आप मुझसे नाराज़ होंगे तो आप मुझे माफ़ करदेंगे
दिलीप- मैं आपसे कभी भी नाराज़ नही रहूँगा
मैं विदू के सर पे अपना सर रखके रोने लगा
विदू भी मेरे साथ रोने लगी
फिर मैने अपने आप को संभाला और विदू के आँसू पोछा
दिलीप- आप मुझसे वादा कीजिए आप दोबारा कभी भी ऐसा नही करेंगी
विदू- आप भी मुझसे कभी नाराज़ मत होना
दिलीप- पहले आप कीजिए
विदू- नही पहले आप
दिलीप- ठीक है मैं आपसे कभी नाराज़ नही रहूँगा
विदू- मैं भी हमेशा आपके साथ रहूंगी
दिलीप- अब आप मुझे पूरी बात बताएँगी
विदू- मैं कुछ समझी नही
दिलीप- विदू
विदू- [रोते हुए]आप फिर मुझपे गुस्सा होंगे
दिलीप- नही होऊँगा
मैं विदू के दोनो गाल चूम लिया
विदू- [रोते हुए] जब मैने अपने हाथ की नस काट ली तब मैं सोची कि आप को अगर कुछ हो गया होगा तो इसीलिए मैं चाकू अपने गले पे रखके काटने ही वाली थी कि मैं बेहोश हो गयी
दिलीप- [विदू की यह बात सुनके मेरे होश उड़ गये एक बार फिर मेरी आँखो से आँसू बहने लगे अगर विदू को कुछ हो जाता तो मेरी एक ग़लती मेरी ज़िंदगी मेरी प्यारी विदू मेरी प्यारी विदू
[मैं बार बार अपने आपको कोसने लगा]
तभी विदू ने मेरा हाथ पकड़ लिया मैने विदू की तरफ देखा
विदू- आप मुझसे नाराज़ हैं
दिलीप- नही ---यह कहके मैं विदू के गले लग्के रोने लगा
विदू मेरे सर में अपनी उंगली फिराने लगी मैं काफ़ी देर तक रोता रहा
तभी मुझे ख्याल आया कि मैं रो रहा हूँ तो मेरी विदू भी रो रही होगी
मैने विदू की आँखो को चूम लिया
दिलीप- कितना रोती हो आप
विदू- आप मुझे रुलाते हैं
दिलीप- अब नही रुलाउन्गा
फिर मैं विदू का हाथ पकड़के बैठ गया फिर हम एक दूसरे की आँखो में खो गये मैं विदू की आँखो को पढ़ने लगा विदू मेरी आँखो को पढ़ने लगी बीच-2 में हम मुस्कुरा भी देते विदू अभी इस हालत में ज़्यादा बाते नही कर सकती थी
लेकिन इस जिस्म को क्या पता जब दिल एक हो तो लफ़ज़ो की ज़रूरत नही पड़ती...