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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना



अपडेट 82

घर पहुँचते पहुँचते हमे शाम हो चुकी थी जैसे ही मैं घर में एंटर हुआ

सामने मुझे सोफे पे सिमिता मासी प्रिया और प्रीति बैठे दिखे

सब बहने सिमिता मासी के पास गयी

4 साल पहले एक कार आक्सिडेंट में सिमिता मासी के पति की मौत हो गयी

वैसे बड़ी नानी मुझे हर साल मेरे पूरे ख़ानदान वालो की फोटो दिखाती थी

पता नही क्यूँ इसीलिए मैने प्रीति को पहचान लिया वरना प्रीति को तो मैं आज तक नही देखा था

मैं सिमिता मासी के पास गया

वो मुझे देखने लगी

मैने उनके पैर छुए

समिता मासी- हमेशा खुश रहो बेटा

तभी बड़ी नानी आ गई मैं बड़ी नानी के गले लग गया

बड़ी नानी- आ गया मेरा बेटा चल बैठ

मैं बड़ी नानी के साथ सोफे पे बैठ गया

वैसे प्रीति को देखके लग रहा था वो अभी बच्ची ही है

विद्या- बुआ आप हमे तो भूल ही गयी

समिता मासी- मैं अपनी बेटी को कैसे भूल सकती हूँ

अरुणा- मुझे तो भूल ही गयी

समिता मासी- तुम सब मेरी बेटियाँ हो मैं तुम सबको कैसे भूल सकती हूँ

दिलीप- मेरे मुँह से अपने आप निकल गया

एक अनार 100 बीमार यह सुनके सब बहनें मुझे घूर्ने लगी

मैने वहाँ से हटने में ही अपनी भलाई समझी

जैसे ही मैं उठा सुनीता दी और मेघा दी ने मेरा हाथ पकड़ लिया

और अरुणा दी मुझे गुदगुदी करने लगी

अरुणा- हमें बीमार बोलता है बोल अब बोलेगा कभी

दिलीप- नही अब नही बोलूँगा प्लीज़ माफ़ करदो अया पेट में दर्द हो रहा है

तभी विदयादि ने आके मुझे बचाया

मैं अपने रूम में आके बेड पे लेट गया

थोड़ी देर बाद खाने का टाइम हुआ हम सबने खाना खाया

मैं तो वेट कर रहा था मैने सब चीज़े टेबल पे रख दी

ठीक 11 बजे मैं अवनी के रूम पे पहुँचा

मास्टर की से गेट खोलके अंदर गया अवनी मोबाइल चला रही थी

मैं धीमे कदमो से अवनी के पास पहुँचा मेरी नज़र मोबाइल पे पड़ी

मेरा तो लंड खड़ा हो गया अवनी पॉर्न देख रही थी

मैने लाइट ऑन कर दी अवनी सकपका गयी

अवनी- तूने तो मुझे डरा ही दिया

दिलीप- वैसे आज कल आप कुछ ज़्यादा ही ऐसी वैसी हरकत कर रही हैं

अवनी- यह सब तेरी वजह से हुआ है

दिलीप- मेरी वजह से

अवनी- सुनना मैने सुना है पीछे से करने में बहुत दर्द होता है

दिलीप- अगर आप नही चाहती है तो नही करता हूँ

अवनी- मैं तो यह कह रही थी कि आराम से करना

दिलीप- क्या

अवनी- वोही

दिलीप- क्या वोही

अवनी- हट बेशरम

मैने आगे बढ़के अवनी को अपनी गोद में उठाके अपने रूम मे पहुँचा

फिर अवनी के रूम मे गया एक ड्रेस लेके वापस अपने रूम में आया

और गेट लॉक किया मैं अवनी के पास पहुँचा अवनी मुस्कुरा रही थी

मैं झट से नंगा हो गया मेरा लंड आधा खड़ा था

अवनी भी अपने कपड़े उतार के नंगी हो गयी

वैसे आज मुझे अवनी कुछ ज़्यादा ही हॉट लग रही थी

मैं अवनी के होंठ चूसने लगा अवनी भी मेरे होंठ चूसने लगी

मैं किस करते हुए अवनी की चूत में दो उंगली डालके अंदर बाहर करने लगा

अवनी आहे भरने लगी मैने अवनी को बेड पे लेटा दिया

और अवनी के दूध चूसने लगा

अवनी मेरे लंड को पकड़के आगे पीछे करने लगी

मैं दूध को चूस्ते हुए नीचे आया और अवनी की नाभि में ज़ुबान डालके चूसने लगा

मैं अपना मुँह नीचे लेक आया और अवनी की चूत पे रख दिया

अवनी मेरे सर पे हाथ रखके दबाने लगी थोड़ी देर तक मैं अवनी की चूत को चूस्ता रहा

फिर मैं खड़ा हो गया मेरा लंड अवनी को सलामी देने लगा...

 
अपडेट 83

अवनी मेरे पास आके घुटनो के बल ज़मीन पे बैठ गई और मेरे लंड के टोपे को ज़ुबान से चाटने लगी

मस्ती में मेरी आँखें बंद हो गयी अवनी मेरे आधे लंड को अपने मुँह में भर के चूसने लगी

मैने अवनी के मुँह से अपना लंड निकाला और बेड पे लेट गया

अवनी अपनी गान्ड मेरे मुँह पे रखके मेरे लंड को चूसने लगी मैं भी अवनी की चूत चूसने लगा

थोड़ी देर बाद अवनी झड़ने लगी मैं अवनी का सारा पानी पी गया

फिर मैने अवनी को लेटाके उसकी गान्ड के नीचे एक तकिया रख दिया

और अपने लंड को अवनी की चूत पे सेट करके एक धक्का मार दिया

मेरा आधा लंड अवनी की चूत में अंदर बाहर होने लगा

मैं तेल अपनी उंगली में लेके अवनी की गान्ड में डालने लगा

अवनी छटपटाने लगी और मैं अवनी की चूत में पूरा लंड डालके धक्के मारने लगा

अवनी- अया माइ बेबी फक मी हार्डर यस अया

मैं अपनी एक उंगली अवनी की गान्ड में डालके आगे पीछे करने लगा अवनी भी डबल मज़े ले रही थी

अब मैं अपनी दो उंगली अवनी की गान्ड में डालने लगा अवनी की गान्ड बहुत टाइट थी

थोड़ा ज़ोर लगाने के बाद मैं अपनी दोनो उंगली अवनी की गान्ड में डालके आगे पीछे करने लगा

थोड़ी देर बाद अवनी झाड़ गयी मैने अवनी को घोड़ी बनाया

खूब सारा तेल अपने लंड पे लगाके अवनी की गान्ड पे सेट किया

हल्का सा धाक्का मारा लंड फिसल गया मैने अपने लंड को पकड़के अवनी की गान्ड पे रखके हल्का धक्का मारा

मेरा टोपा अवनी की गान्ड में फँस गया अवनी की चीख निकल गयी अवनी रोने लगी

मैं अवनी की चूत सहलाने लगा जैसे ही मुझे लगा अवनी झड़ने वाली है

मैं एक और धक्का मारा मेरा 3 इंच लंड अवनी की गांद में चला गया

अवनी झड़ने लगी

अवनी- और दर्द नही सह सकती प्लीज़ निकाल ले

मैं उतना ही लंड आगे पीछे करने लगा

मैने अवनी की कमर पकड़के आहिस्ते से धक्का मारा

मेरा आधा लंड अवनी की गान्ड को फाड़ता हुआ अंदर चला गया

अवनी की गान्ड से खून की धार निकली अवनी तड़पने लगी

मैं अवनी की चूत सहलाने लगा थोड़ी देर बाद अवनी शांत हुई

मैं अपना आधा लंड अवनी की गान्ड में अंदर बाहर करने लगा

अवनी दर्द से रो रही थी मैं तेल की कटोरी लिया और अपने लंड पे डालने लगा

मेरा आधा लंड अवनी गान्ड में जा रहा था थोड़ी देर बाद अवनी झड़ने लगी

मैने अपनी पूरी ताक़त लगाके धक्का मारा अवनी की जोरदार चीख निकल गयी

अब मेरा पूरा लंड अवनी की गान्ड में समा चुका था अवनी लंड बाहर निकालने को कह रही थी

मैने अपना आधा लंड निकाला और उसपर तेल डालके फिर अंदर डाल दिया

थोड़ी देर बाद अवनी शांत हुई अब मेरा लंड अवनी की गान्ड में आराम से अंदर बाहर हो रहा था मैं अवनी की कमर पकड़के ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा अब अवनी को भी गान्ड मरवाने में मज़ा आरहा था मैने अवनी को बेड पे लेटा दिया और जोरदार धक्के मारने लगा इस पोज़िशन में अवनी की गान्ड बहुत ज़्यादा टाइट हो गई अब मेरा भी पानी निकलने वाला था

मैं पूरी ताक़त से धक्के मारने लगा अवनी तो पूरी हिल गयी थोड़ी देर बाद मेरा सारा वीर्य अवनी की गान्ड में निकल गया

आधे घंटे तक मैं वैसे ही लेटा रहा जब मैं उठा तो देखा अवनी की गान्ड से खून और मेरा वीर्य दोनो निकल रहा था

मैने अवनी को गोद में उठाया और बाथरूम में गया

फिर मैं खुदको और अवनी को अच्छे से सॉफ किया अवनी अपनी गान्ड सेकने लगी

तबतक मैने सब कुछ सेट करके कपड़े पहेन लिए फिर मैने अवनी को उठाके बेड पे लेटा दिया

दोनो गोली खिला कर अवनी की गान्ड पे क्रीम लगाई फिर अवनी को कपड़े पहनाए

उसके बाद मैने अवनी को गोद में उठाके उसके रूम में लेजाके लेटा दिया

दिलीप- ज़्यादा दर्द हो तो एक गोली खा लेना

अवनी- ठीक है

फिर मैं अवनी के माथे पे किस करके अपने रूम में आके सोगया,,.,,

 
अपडेट 84

दिलीप- सुबह मैं उठके नहा धोके तय्यार हुआ

नीचे डाइनिंग टेबल पे जाके बैठ गया

प्रिया मुझे घूर रही थी

मैं नाश्ता किया

लखन के साथ अखाड़े में गया

कसरत करके स्कूल पहुँचा

वँया के क्लास में जाके अपना बॅग लेके अपने क्लास में आगया

मेरे बगल में रवि बैठा था

दिलीप- रवि मुझे देखके तेरा मन मुझे घूर्ने को करता है क्या

रवि- नही

दिलीप- तो फिर वँया के क्लास में जब मैं जाता हूँ तो लड़किया मुझे घूर्ने क्यूँ लगती हैं

रवि- तू अपनी हालत देख पूरा पसीने पसीने रहता है

शायद इसी लिए

दिलीप- हो सकता है

मैं देखा दीपा मेरी तरफ आ रही है

[वैसे एक बात तो मुझे भी खटक रही है कि यह दीपा मेरे पीछे क्यूँ पड़ गई है]

दीपा- कैसे हो दिलीप

दिलीप- मैं ठीक हूँ तुम कैसी हो

दीपा- देखलो तुम्हारे सामने खड़ी हूँ

दिलीप- [मैं दीपा को उपर से नीचे तक देखा सच कहता हूँ उपर से ही इतनी गदराई दिखती है तो अंदर से कैसी होगी]

मुझे तो अच्छी ही लगती हो

दीपा- [मुस्कुरा कर]ठीक है अब मैं जाती हूँ

दिलीप- अब तू चुप क्यूँ है बोल

रवि- मुझे कुछ नही बोलना तू मेरी बात सुनेगा ही नही

दिलीप- फिर टीचर आते गये पढ़ाते गये इसी बीच मेरी प्यारी मेडम आई मतलब रीना मेडम कसम से कितनी खूबसूरत लग रही थी वो भी बाकी टीचर्स की तरह एग्ज़ॅम्स प्रवचन देने लगी

मेडम ने तो मुझे देखा भी नही

मैने देखा रवि मेडम को घूर रहा है

मैने उसके सर पे चपत लगा दिया

फिर लंच टाइम हो गया

मैं सोचा मेडम से मिल लेता हूँ

मैं प्रिन्सिपल ऑफीस पहुँचा

गेट नॉक किया

र्म- अंदर आजाओ

दिलीप- मैं अंदर गया

र्म मुझे देखके मुस्कुराने लगी

मैं जाके सीधा रीना के गले लग गया

रीना को झटका लगा

अरे रीना को क्या मुझे भी झटका लगा

कि यह मैने क्या कर दिया

वैसे इसमें कोई हवस नही था

यह तो अपनापन था

रीना ने मुझे अलग किया

रीना- दिलीप यह क्या कर रहे हो

यह स्कूल है प्लीज़

दिलीप- अरे तो हम अपनी मेडम के गले लग रहे हैं किसी के बाप का क्या जाता है

रीना- बैठो

दिलीप- [मैं बैठ गया और मेडम को देखने लगा

रीना- ऐसे क्या देख रहे हो

दिलीप- देख रहा हूँ आपके गाल पहले से मोटे हो गये हैं

रीना- पढ़ाई कर रहे हॉकी नही

दिलीप- आपको क्या लगता है

रीना- किसी काम से आए हो

दिलीप- आप सवाल का जवाब ही नही देती

रीना- मुझे जो कहना था वो मैं तुम्हे बता चुकी हूँ

दिलीप- आपका मतलब है कि 24 घंटे के अलावा मैं आपसे बात नही कर सकता मैं आपसे हँसी मज़ाक नही कर सकता

रीना- मैने ऐसा तो नही कहा तुम मुझसे कभी भी बात कर सकते हो

दिलीप- मेडम आपके पति कैसे हैं

रीना- वो ठीक हैं

दिलीप- ठीक है अब मैं चलता हूँ

फिर मैं अपने क्लास में आगया

वँया मेरे बेंच पे बैठी हुई थी

मैं भी जाके बैठ गया

फिर मैने और वँया ने खाना खाया

वँया अपने क्लास में चली गयी

फिर टीचर पढ़ा ही रहे थे

कि एक लड़की आई

लड़की- क्या मैं अंदर आ सकती हूँ सर

टीचर- अंदर आजाओ स्टूडेंट्स यह है आपकी नयी दोस्त अदिति

[ऐसा बोलना तो नही चाहिए लेकिन इसे देखके तो मेरा लौडा खड़ा हो गया]

अदिति ने एक टाइट जीन्स पहनी हुई थी

ऐसा लग रहा था कि यह अपनी गान्ड पे खूब तेल मलके ज़बरदस्ती जीन्स चढ़ा कर आई है

टीचर ने उसे मेरे आगे वाली सीट्स पे बैठने को कहा

जब वो हमारी तरफ आ रही थी

तो टीचर उसकी गान्ड को घूर रहा था

थोड़ी देर बाद स्कूल की छुट्टी हो गयी

मैं और वँया एक साथ घर चल दिए

थोड़ी देर बाद हम घर पहुँचे

जैसे ही हम दोनो घर में एंटर हुए

मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी

मेरा दिमाग़ सुन्न हो गया

यह मेरे लिए आज तक का सबसे बड़ा झटका था

वोही वँया की आँखो से लगातार आँसू बह रहे थे

मुझे यक़ीन नही हो रहा था कि यह सपना है या सच

बड़े मामा ठाकुर वीर प्रताप सिंग मेरी ही एज की एक लड़की से दूसरी शादी कर चुके थे.'.,..,..,.

 
अपडेट 85

दिलीप- बड़े मामा और उनकी दूसरी बीवी सोफे पे बैठी थी...बड़े मामा कुछ बोल ही नही रहे थी...मेरी सब बहने भी नही दिख रही थी...मैं वैसे ही खड़ा था...कि बड़ी मामी के रोने की आवाज़ आई...बड़ी मामी अपने रूम में थी..मैं होश में आया...और बड़े मामा के रूम में गया...अंदर का नज़ारा देखके मैं दंग रह गया...बड़ी मामी की हालत ऐसी थी...जैसे वो बहुत बीमार हैं...छोटी मामी और मेरी सब बहने रो रही थी...

बड़ी नानी- तू अपने रूम में जा...और वँया को भी ले जा...

दिलीप- बड़ी नानी की बात मैं कैसे टाल सकता था...मैं वँया का हाथ पकड़ा और सीढ़िया चढ़ने लगा...जैसे ही मैं उपर पहुँचा...बड़ी मामी और ज़ोर्से रोने लगी...तभी वँया होश में आई...और दौड़के नीचे गयी...मैं भी दौड़के नीचे गया...वँया रूम में गयी...और अपनी माँ के गले लग्के रोने लगी...मैं इधर उधर देखा विदू मुझे नही दिख रही थी...मेरे दिल की धड़कने तेज़ हो गयी...अजीब अजीब ख्याल आने लगे...मैं बाहर आया और विदू को ढूँढने लगा...सब रूम में ढूँढ लिया नही मिली...मैं दौड़के अपने रूम में गया...और मास्टर की लेके विदू के रूम पे पहुँचा...मैं जल्दी से रूम का लॉक खोला...और अंदर गया

विदू बेड पे लेटी हुई थी...मैं दौड़के विदू के पास गया...मैं विदू को हिलाने लगा...विदू उठ ही नही रही थी...मेरी आँखो से बहने लगे...मैं टेबल से पानी लिया...और विदू के चेहरे पे छिड़कने लगा...विदू होश में ही नही आरहि थी...आज पहली बार मैं अपना आपा खो दिया...मैं दौड़के नीचे मामी के रूम में गया...

दिलीप- अरुणा दी विद्या दी को क्या हुआ है वो उठ ही नही रही हैं

बड़ी मामी- क्या हुआ मेरी बेटी को

बड़ी नानी- अरुणा डॉक्टर को बुला के लाओ...बड़ी मामी दौड़के उपर जाने लगी...बड़े मामा ने बड़ी मामी को दौड़ते हुए देखके डर गये...

बड़े मामा- बड़ी माँ क्या हुआ...

बड़ी नानी- विद्या बेहोश हो गयी है...[यह सुनके बड़े मामा उपर जाने लगे]

धर्मेश तुम यही बैठो...तुम्हारा वहाँ जाना ठीक नही है

[बड़े मामा वापस वही पे बैठ गये]

बड़े मामा- हम आप सबको सारी सच्चाई बता चुके हैं फिर भी यह सब हो रहा है

बड़ी नानी- धर्मेश तुम्हे क्या लगता है तुम्हारा सच सुनके तुम्हारी पत्नी और बच्चे खुश होंगे

बड़े मामा- बड़ी माँ हम मजबूर थे

हमारा दोस्त हमारी बाहो में दम तोड़ रहा था और उसकी आखरी ख्वाहिश यह थी कि हम उसकी एक लौति बेटी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर ले इससे पहले हम कुछ कह पाते हमारा दोस्त दम तोड़ चुका था अब हमारे अलावा इसका इस दुनिया में कोई नही है

बड़ी नानी- मैं जानती हूँ पर एक पत्नी का दुख तुम नही समझ सकते तुम अपनी पत्नी को उसके कमरे में ले जाओ

[बड़े मामा अपनी दूसरी बीवी को उसके रूम में ले गया]

अब मुझे सच पता चल चुका था तबतक डॉक्टर भी आगया

मैं डॉक्टर को लेके विदू के रूम पहुँचा

डॉक्टर विदू को चेक करने लगा

फिर डॉक्टर ने विदू को इंजेक्षन लगाया

बड़े मामा- डॉक्टर साहब मेरी बेटी को क्या होगया है

डॉक्टर- बच्ची ने नींद की गोलिया खा ली थी मैने इंजेक्षन दे दिया है थोड़ी देर में होश अजाएगा

फिर डॉक्टर चला गया

तभी बड़ी नानी रूम में आई

बड़ी नानी- बहू संभाल अपने आप को अगर तुम ऐसा करोगी तो तुम्हारी दोनो बेटिओं को कॉन संभालेगा अगर इनको कुछ हो गया तो क्या तुम अपने आप को माफ़ कर पाओगी

बड़ी मामी- नही मैं अपनी बच्चियो को कुछ नही होने दूँगी मेरा पति तो मुझसे दूर हो चुका है अब मैं अपनी विद्या और वानु को कुछ नही होने दूँगी

दिलीप- मैं अपने रूम में आगया..,दोनो अपनी जगह सही हैं...पर यह छोटे मामा मासी कहाँ चले गये...तभी मेरे सर में तेज़ भयानक दर्द होने लगा...और मैं बेहोश हो गया....,

 
अपडेट 86

दिलीप- पता नही मैं कितनी देर तक बेहोश रहा

जब मुझे होश आया

तो मैं जल्दी से उठके फ्रेश हुआ

रात के खाने का टाइम हो गया था

मैं नीचे गया

पूरा सन्नाटा था

मैं किचन में गया

दोपेहेर वाला खाना गरम करके तीन प्लेट में डाला

और तीनो प्लेट लेके विदू के रूम पे गया

गेट खुला ही था

मेरा अंदाज़ा सही निकला

बड़ी मामी वँया और विदू एक साथ ही बैठी थी

मैं अंदर गया और खाना टेबल पे रख दिया

अभी भी तीनो रो नही रही थी

तीनो प्लेट तीनो के सामने रखके मैं विदू के सामने बैठ गया

[ब मामी मुझे ही देख रही थी]

विद्या- मुझे नही खाना है तू यह सब लेके जा यहाँ से

दिलीप- मैने कब कहा कि आप अपने हाथ से खाना खाओ

विद्या- दिलीप प्लीज़

दिलीप- मैने एक नीवाला बनाके विदू के मुँह पे लगा दिया

विदू अपनी गर्दन ना में हिलाने लगी]

मेरे हाथ से भी नही

विद्या- गले से नही उतरेगा

दिलीप- ज़रूर उतरेगा बोलो कि आपके दिलीप के हाथ का खाना है

विदू ने अपना मुँह खोल दिया

फिर क्या था मेरी प्यारी विदू मेरे हाथ से खाना खाने लगी

खा कम रही थी रो ज़्यादा रही थी

मैं विदू के आँसू पोछा]

अब आप मामी को खिलाओ

मामी वँया को खिलाएगी

तबतक मैं यही पे बैठा हूँ

तीनो मुझे आँखे फाड़के देखने लगी

फिर मेरी प्यारी विदू ने मामी को खिलाया

मामी ने वँया को

[बड़ी नानी छोटी मामी और सब बहने यह सब होते हुए देख रही थी]

फिर मैं रूम से बाहर आगया

और अपने रूम में आके बैठ गया

थोड़ी देर बाद किसीने गेट नॉक किया

मैने गेट खोला

सामने बड़ी नानी मेरे लिए खाना लेके खड़ी थी

मैं साइड हो गया

बड़ी नानी अंदर आके बेड पे बैठ गयी

मैं भी बैठ गया

बड़ी नानी- तू तो बड़ा समझदार हो गया है क्या आइडिया लगाया तूने

दिलीप- सब कुछ आपके आशीर्वाद से हुआ है

फिर बड़ी नानी मुझे खाना खिलाने लगी

मैने भी चुप करके खा लिया]

आपसे एक बात पुच्छू

बड़ी नानी- पूछ

दिलीप- यह कैसा दोस्त था बड़े मामा का जो मरते वक़्त अपनी बेटी का हाथ अपने दोस्त के हाथ में देके मर गया

मतलब यह तो मेरे ही उमर की होगी

बड़ी नानी- सबसे पहले अब वो तेरी मामी है तुझे पता है वो दोस्त कौन था

दिलीप- कौन था

बड़ी नानी- एक ग़रीब किसान और उसकी और तेरे मामा की दोस्ती आज की नही है बरसो पुरानी है

दिलीप- लेकिन यह हुआ कैसे बड़े मामा जिनसे कोई आँख मिलाके बात नही करता उससे उस आदमी की दोस्ती थी

बड़ी नानी- ऐसे नही बोलते एक दिन धर्मेश शिकार करने जंगल गया था जंगल से आते हुए रात हो गयी तभी धर्मेश के दुश्मनो ने उसपे हमला कर दिया दुश्मनो को लगा कि धर्मेश मर चुका है पर धर्मेश जिंदा था तब इसी आदमी ने धर्मेश की जान बचाई थी तबसे धर्मेश का वोही एकलौता दोस्त था और धर्मेश ने उससे दोस्ती इसलिए नही किया था कि उसने उसकी जान बचाई है उसे तो पता ही नही था कि जिसकी वो जान बचा रहा है वो पूरे 150 गाओं का ठाकुर है फिर उसकी शादी हुई

उसकी बीवी उसकी बेटी को जनम देते ही मर गयी जब तक वो जिंदा था तबतक उसने धर्मेश से एक रुपया भी नही माँगा

लेकिन कुछ दिन पहले धर्मेश को पता चला कि वो बहुत बीमार है तो वो उससे मिलने गया उसके मना करने के बाद भी वो उसे हॉस्पिटल ले गया वहाँ पता चला कि अब उसके पास कुछ ही दिन बचे हैं अब तू बता उसके सिवा उसकी बेटी का कोई नही था वो धर्मेश को यह भी कह सकता था कि धर्मेश उसकी बेटी की शादी किसी अच्छी जगह करा दे शायद उसके लिए उसकी नज़र में धर्मेश से ज़्यादा भरोसेमंद आदमी ना हो

दिलीप- अच्छा

बड़ी नानी- अब तू आराम कर मैं जाती हूँ फिर बड़ी नानी चली गयी.,.,..

 
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