• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 70

दिलीप- मैं उसे अपनी बाहो में खींच लिया

और उसके होंठो पे अपने होंठ रखके चूसने लगा

तभी एक थप्पड़ मेरे गाल पे पड़ा

मैं होश में आया

मेरे सामने अरुणा दी खड़ी थी

मन किया कि अपना सर दीवार में दे मारु

वो इतने ही पे नही रुकी..

मुझे थप्पड़ मारती गयी

मैं थप्पड़ खाता रहा

जैसे ही अरुणा दी ने मुझे अगला थप्पड़ मारा उनका हाथ मेरी आँखो को छु कर निकल गया

सच में बहुत दर्द होने लगा

मैं अरुणा दी को गेट पर से हाथ पकड़के खींचा

और जल्दी से गेट बंद किया

गेट बंद करते ही मेरी चीख निकल गयी

मेरी आँख खुल ही नही रही थी

लगातार मेरी आँख से पानी बह रहा था

तभी अरुणा दी दौड़के मेरे पास आई

और अपने दुपट्टे में फूँक मारके मेरी आँख पे लगाने लगी

थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद मेरी आँख खुली

मैं देखा कि अरुणा दी रो रही थी

मैने अरुणा दी को गले लगा लिया

दिलीप- आप क्यूँ रो रही हैं ग़लती तो मेरी थी मुझे ऐसा नही करना चाहिए था

आप मुझे कभी माफ़ मत करना मैने ग़लती ही ऐसी की है आप चाहो तो और मार लो

अरुणा- हाँ हाँ मैं तुझे कभी माफ़ नही करूँगी

अरुणा दी गेट खोलके बाहर चली गयी

मैं अपने कपड़े बदला

और नीचे हॉल में गया बड़ी नानी के पास

बड़ी नानी- दिलीप यह क्या हुआ तेरी आँख को

दिलीप- कुछ नही मुँह पे पानी मार रहा था तो हाथ लग गया मैं विनय के घर जा रहा हूँ बहुत दिन हो गये उससे मिला नही

बड़ी नानी- शाम तक आ जाना

फिर मैं पैदल ही चल दिया गाओं की ओर

थोड़ी देर बाद पहुँचा विनय के घर

मैने बाहर से आवाज़ दिया

कोई बाहर नही आया

मैं अंदर गया आँगन में कोई नही था

फिर मैं किचेन में गया वहाँ भी कोई नही था

बेडरूम और बाथरूम में मैं जा नही सकता था

सोचा बिम्ला के यहाँ जाता हूँ

मैने बिम्ला के घर का गेट नॉक किया

बिम्ला ने गेट खोला

मैं अंदर गया

दिलीप- कैसी हो काकी

बिम्ला- कैसी रहूंगी आप बताइए आप कैसे हैं

और यह आप की आँख को क्या हुआ

दिलीप- कुछ नही एक कप चाइ पिला दो

बिंला- आप मेरे घर की चाइ पिएँगे

दिलीप- नही पिलाना है तो सॉफ मना करदो

बिम्ला- मैं तो कब से तय्यार पिलाने को आप ही नही पीते हैं

दिलीप- पिलाओगी तब तो पियुंगा

बिम्ला- अभी बनाके लाती हूँ

बिम्ला किचन की तरफ जाने लगी

मैं उसकी गान्ड को घूर्ने लगा

वैसे मेरी नज़र ऐसी नही है

पर मेरे लंड को कौन समझाए

मैं अगर बिम्ला को कहूँ कि मुझे तुम्हे चोदना है तो वो मना नही करेगी

क्यूंकी उसके चूत में आग लगी हुई

पर मैं कोई सेक्स का भूखा भेड़िया तो हूँ नही

ऐसी आग लगाउन्गा कि खुद मुझसे आके कहेगी

बिम्ला- [ज़ोर्से] छोटे मालिक

दिलीप- मैं किचन में गया

बिम्ला- वो चीनी का डब्बा उपर है आप उतार देंगे

दिलीप- [जहाँ पे बिम्ला खड़ी थी ठीक वही उपर में डब्बा रखा हुआ था]

मैं बिम्ला के पीछे खड़ा हो गया

और डब्बा उतारने लगा

मैं थोड़ा और आगे बढ़ा

जिससे मेरा लंड बिम्ला की गान्ड को टच हो गया

बिम्ला- आह

दिलीप- क्या हुआ

बिम्ला- कक्कुच्छ नही

दिलीप- कितना उपर रखा है यह कहते हुए मैं बिम्ला से पूरा सटके खड़ा हो गया अब मेरा लंड पूरी तरह बिम्ला की गान्ड पे घिस रहा था मैं अपने जिस्म को इधर उधर करने लगा जिससे मेरा लंड बिम्ला की गान्ड पे आगे पीछे होने लगा

दिलीप- बिम्ला आप थोड़ा सा झुको मेरा हाथ नही पहुँच रहा है

बिम्ला बिना देरी किए झुक गयी

मैं डब्बा उतारते हुए बिम्ला की गान्ड पे धक्के लगाने लगा

दिलीप- आप थोड़ा और झुको

अब बिम्ला पूरी झुक चुकी थी

मेरे हाथ में डब्बा आ गया

मैने डब्बा को आगे धकेल दिया

अब मैने अपने धक्के लगाने की गति को तेज़ कर दिया

बिम्ला- अयाया ऊवू आआआः

दिलीप- क्या काकी आपने डब्बा कितना उपर रक्खा है

यह कहके मैने थोड़ा ज़ोर से धक्का मार दिया

बिम्ला- म्मैइन क्या क्क्हु अया

दिलीप- 10 मिनट तक मैं अपना लंड बिम्ला की गान्ड पे घिसता रहा

बिंला- अयाया ऊवू उम्म्म्मम

दिलीप- मैं समझ गया कि काकी झड गयी हैं

मैने डब्बा उतार दिया

और किचन से बाहर आ गया

थोड़ी देर बाद बिम्ला चाइ बनाके ले आई मैने चाइ पिया और बिम्ला के घर से बाहर आ गया

फिर चल दिया अपने घर.,.

 
अपडेट 70

घर.............

वँया विद्या के रूम पे जाके गेट नॉक करती है

विद्या गेट खोलती है

विद्या- वानु अंदर आना

वँया अंदर गयी और बेड पे बैठ गयी

वँया- दी आपसे एक बात पुच्छू आप बुरा मत मानना

विद्या- पूछ मैं अपनी वानु की बात का बुरा क्यूँ मानूँगी

वँया- आप सब पहले दिलीप से इतनी नफ़रत करती थी पर आज आप सब उसको इतना प्यार करती हैं ऐसा क्यूँ

विद्या- हम ने दिलीप से कभी भी नफ़रत नही की किसी से बात ना करने का यह मतलब थोड़ी होता है कि हम उससे नफ़रत करते हैं

वँया- लेकिन फिर भी

विद्या- मेरी बात ध्यान से सुन मुझे नही पता कि पिताजी और चाची जी दिलीप से क्यूँ नफ़रत करते हैं हम ने बचपन से ही इनकी नफ़रत देखी है दिलीप के लिए बचपन से हम जो अपने माता पिता को करते हुए देखते हैं वोही हमे सही लगता है उपर से चाची जी कहती थी कि उसी की वजह से बड़ी दादी ने हमे छोड़ दिया तो हमारे दिल में भी दिलीप के नाराज़गी पैदा हो गयी लेकिन नफ़रत कभी नही पर दिल के एक कोने से हमेशा यहाँ आवाज़ आती कि वो हमारा भाई है वो भी एक लौता हम उससे नाराज़ क्यूँ हैं उसने हमारे साथ क्या बुरा किया है

जब दिलीप पहली बार चाचा जी के यहाँ आया तो उसकी गोद में एक बेहोश लड़की थी उसके लिए हम सबने उसको कितना सुनाया पर जब वो लड़की हमारी मेघा निकली तो हम अपनी ही नज़रो में गिर गये फिर हम सबके दिल में दिलीप के लिए जितनी भी नाराज़गी थी वो कम हो गयी फिर हम सब ने दिलीप से माफी माँगने की कितनी कोशिश की और माफी इस वजह से नही माँग रहे थे कि दिलीप ने मेघा की जान बचाई है

हम दिलीप से माफी माँगना चाहते थे कि हम ने आजतक उसको कितना दुख दिया उसके बाद तूने हमे वो रेकॉर्डिंग सुनाई

जिसके बाद हम अपने आप को रोक नही पाए और हम ने दिलीप को दिल से अपना भाई मान लिया और दिलीप को मना भी लिया हमें दिलीप को भाई माने कितना वक़्त हुआ था जब चाचा जी मेघा की तरफ बढ़ रहे थे तब दिलीप कैसे बीच में आ गया चाचा जी से इतनी मार खाई

फिर मेघा के लिए अपनी जान पे खेल गया यहाँ तक कि अपने आपको गोली भी मार ली सिर्फ़ एक दिन में दिलीप ने अपने भाई होने का फ़र्ज़ पूरा कर दिया उसके इतना करने के बाद अगर हम दिलीप को अपनी पूरी जिंदगी दे दें तो भी वो कम ही होगा

वँया- पर अरुणा दी कुछ ज़्यादा ही नही बोल रही थी उस दिन

विद्या- वो इसलिए कि अरुणा सब से ज़्यादा चाची जी से प्यार करती है चाची जी की हर बात उसे सही लगती है तू मुझे एक बात बता तुझे रेकॉर्डिंग का आइडिया कब आया

वँया- वो जब मैं और दिलीप अवन्तिका के लिए गुलदस्ता लाने मार्केट गये थे तब एक दुकान में टीवी पे न्यूज़ वाले दिखा रहे थे कि एक गुनेहगार को वकील ने उकसाया और उसे सच बोलने पे मजबूर किया वो सब बाते वकील ने अपने फोन में रेकॉर्ड करलिया तभी मुझे यह आइडिया आया

फिर जब आप सब बात करने में बिज़ी थे तो मैने चुपके से आपका मोबाइल उठा ली

लेकिन दी आपने यह क्यूँ कहा कि हम सब ,,,,,,,,,आपको कैसे पता की अरुणा दी अवन्तिका मेघा और सुनीता भी ऐसा ही सोचती हैं

विद्या- क्यूंकी हम सब एक दूसरे से अपनी फीलिंग्स शेर करती हैं अगर तुझे मेरी बात पे यकीन ना हो तो अरुणा से अवन्तिका से मेघा और सुनीता किसी से भी जाके पूछ सकती है

वँया- दी आपको पता है मेरा वो मतलब नही था

विद्या- अच्छा वो सब छोड़

चल बाते करते हैं.,.,

[अब इनकी फालतू गॉसिप स्टार्ट]

 
अपडेट 71

दिलीप- थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा घर और सीधा विद्या दी के रूम मे गया जैसी ही मैने गेट नॉक किया गेट खुल गया

अंदर विद्या दी और वँया बेड पे बैठके बाते कर रही थी दोनो में से किसी का भी ध्यान मुझपे नही गया

[हे भगवान यह लड़कियो को ज़ुबान दी तो दी पर इतनी लंबी देने की क्या ज़रूरत थी]

मैं खिसक गया वहाँ से और अपने रूम में आके बेड पे लेट गया

तभी मुझे याद आया

मैने अपना मोबाइल निकाला और वीडियो प्ले कर दिया

यह क्या यह तो सरपंच की बेटी मुखिया के बेटे से चुदवा रही है साला आजकल क्या हो रहा है बाप तो बाप बेटी उससे भी एक कदम आगे निकली मैने दूसरा मेमोरीकार्ड अपने फोन में डालके कॉपी किया थोड़ी देर बाद नींद आ गई

कोई मुझे हिलाने लगा मैं आँख खोलके देखा .......यह अवनी थी

दिलीप- अवनी

अवन्तिका- हाँ बाबू

दिलीप- अवनी ने इतना ही कहा था मैने अवनी का हाथ पकड़ा और अपने उपर गिरा लिया अपने दोनो पैर अवनी की कमर पे लपेट लिया और अवनी के होंठो पे अपने होंठ रखके चूसने लगा और एक हाथ अवनी के दूध पे रखके दबाने लगा अवनी अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी मैं किस तोड़ दिया

दिलीप- क्या हुआ

अवन्तिका- गेट खुला है

यह सुनके मेरी फट गई मैं जल्दी से उठा और गेट लॉक किया पीछे मुड़ा तो अवनी मुस्कुरा रही थी

मैं अवनी का पास पहुँचा

तभी किसीने डोर नॉक किया

मैं जल्दी से अपना रुमाल निकाला और अवनी के मुँह पे लिपस्टिक फैला हुआ था

उसे सॉफ करके बाथरूम भागा

अवनी ने गेट खोला

वँया- गेट क्यूँ बंद था

अवन्तिका- वो ऐसे ही बाबू ने बोला था

वँया- अच्छा अब तू जा मुझे दिलीप के साथ पढ़ाई करनी है

अवनी चली गयी]

दिलीप- मैं बाहर आया तो वँया बेड पे बैठी थी मैं वँया के पास गया

दिलीप- वँया तुम यहाँ कुछ काम था क्या

वँया- पढ़ाई नही करनी है

दिलीप- आज रहने देते हैं

वँया- चुप चाप बैठके पढ़ाई करो

दिलीप- डाँट क्यूँ रही हो

वँया- तो क्या तुम्हारी आरती उतारू जब देखो तब घूमते रहते हो

[उसके बाद 2 घंटे तक वँया के साथ पढ़ाई किया]

फिर वँया और मैं नीचे गये

डाइनिंग टेबल पे बैठ गये सब खाने में बिज़ी थे मैं अरुणा दी को देख रहा था

अरुणा दी बहुत उदास लग रही थी

मैं खाना ख़ाके अपने रूम में आ गया और कपड़े बदलके सो गया..

[विद्या रूम]

विद्या- आज अरुणा बहुत उदास दिख रही थी क्या बात होगी अभी उससे जाके पूछती हूँ

विद्या अरुणा के रूम मे पहुँची

विद्या ने गेट नॉक किक्या

अरुणा ने गेट खोला

अरुणा- दी आप आइए ना

विद्या और अरुणा बेड पे जाके बैठ गयी

विद्या- क्या बात है आज तू बहुत उदास लग रही है

अरुणा- नही दी ऐसी कोई बात नही है

विद्या- देख मैं तुझे अच्छि तरह जानती हूँ बता ना क्या बात है

अरुणा- मैने कहा ना ऐसी कोई बात नही है

विद्या- ठीक है अगर तू नही बताना चाहती तो मैं नही पूछूंगी शायद तू मुझे इस लायक नही समझती..

विद्या उठके जाने लगी

अरुणा ने विद्या का हाथ पकड़ते हुए बोली

अरुणा- मैं बताती हूँ.. फिर अरुणा ने सारी बात विद्या को बताई और फुट फुट के रोने लगी

विद्या- [अब मैं क्या करूँ शायद बाबू ने मुझे समझके अरुणा के साथ यह सब कर दिया अगर मैं झूठ भी बोल दूँ कि बाबू को किस करने का कॉंप्लेक्स हो गया है फिर अरुणा को मुझे सब बताना पड़ेगा और कही अरुणा ने मुझे ग़लत समझ लिया तो

भले ही हमारी नज़र में यह प्यार हो पर जिसने किसी से भी प्यार ना किया हो वो कभी हमारे प्यार को नही समझेगा]

एक काम करती हूँ बाबू सब संभाल लेगा] अरुणा मैं तेरी तकलीफ़ समझती हूँ पर तुझे एक बार बाबू से बात करनी चाहिए क्या पता कुछ और बात हो यह मैं तेरी बड़ी बहेन होने के नाते नही बल्कि तेरी बेस्ट फ़्रेंड होने के नाते कह रही हूँ..

विद्या अरुणा के रूम से बाहर चली गयी

और अरुणा सोचने लगी

[अब क्या होगा दिलीप का वो बेचारा तो इश्स सबसे बेख़बर अपने रूम में घोड़े बेचके सो रहा है..,

 


अपडेट 72

दिलीप- रात को कोई गेट नॉक करने लगा

मैं टाइम देखा 11 बजे थे

मैने उठके गेट खोला सामने अरुणा दी खड़ी थी

दिलीप- दी आप यहाँ

अरुणा- तुझसे कुछ बात करनी है

दिलीप- [दी अंदर आगयि]

मैने गेट लॉक किया

अरुणा- तू मुझे सच-2 बता तूने मेरे साथ ऐसा क्यूँ किया

दिलीप- [ यह क्या हो रहा है मेरे साथ अब क्या जवाब दूं मैने तो कुछ सोचा भी नही था ]

मुझे किस करने का कॉंप्लेक्स है

अरुणा- तू झूठ बोल रहा है

दिलीप- मैं झूठ नही बोल रहा हूँ

अरुणा- तो फिर तू मेरी आँखो में देखके यह बात कह

दिलीप- [मैने अरुणा दी की आँखों में देखके कहा]

मुझे किस करने का कॉंप्लेक्स है

फिर अरुणा दी चली गयी

बच गया

वैसे भी यह बात तो सच ही थी कि मुझे किस करने का कॉंप्लेक्स है

फिर मैं सो गया

सुबह 6आम मैं उठके नहाया धोया तय्यार होके नीचे गया नाश्ता किया फिर लखन के साथ अखाड़े में गया आज कालिए ने और बुरी तरह कसरत करवाया फिर वोही लस्सी टाइप गिलास में जो आज और ज़्यादा कड़वा था पीके स्कूल पहुँचा वँया के क्लास में गया वँया से अपना बॅग लिया आज भी सब लड़कियाँ मुझे ही घूर रही थी

मैं अपने क्लास में आके अपनी बेंच पे बैठ गया

रवि- और भाई क्या चल रहा है

दिलीप- हमारे यहाँ तो फॉग चल रहा है

रवि मुझे घूर्ने लगा

फिर हम दोनों एक साथ हँसने लगे

रवि- वैसे आज तू कसरत करके नही आया

दिलीप- अरे आज तो ज़्यादा कसरत किया है

रवि- तेरी शकल देखके तो नही लग रहा है

[अब मैं इसे क्या बोलू कि कालिया मुझे ऐसी ज़हरीली चीज़ पिलाता है कि मेरा सारा दर्द छु मंतर हो जाता है]

तभी दीपा मेरे पास आई

दीपा- कैसे हो दिलीप

दिलीप- ठीक हूँ तुम कैसी हो

दीपा- मैं भी ठीक हूँ

दिलीप- मैने दीपा के नोट्स अपनी बॅग में से निकालके उसको दे दिया

थॅंक यू दीपा तुमने मुझे फैल होने से बचा लिया

दीपा- कोई बात नही अब तो हम फ्रेंड्स हैईना

दिलीप- हाँ अब हम फ़्रेंड है

फिर दीपा चली गयी

रवि- इतनी जल्दी कोई लड़का भी दोस्त नही बनता

दिलीप- तू चुप रह यार हर वक़्त बोर करता रहता है फिर लंच टाइम हो गया मैने सोचा बाथरूम होके आता हूँ

मैं जैसे ही बाथरूम पहुँचा सरपंच की बेटी आज किसी और लड़के के साथ बाहर निकली यह तो कपड़े की तरह लड़के बदल रही है लगता है पूरी बोल्ड है इसकी तो लेनी पड़ेगी मैं वही पे छुप गया

फिर बाथरूम गया और अपने क्लास में आ गया

तभी वँया मुझे बुलाने आई मैं वँया के साथ उसके क्लास में गया फिर हम ने साथ मिलके खाना खाया

वँया- दिलीप कल से दो दिन की छुट्टी है

दिलीप- तुम्हे कैसे पता

वँया- पापा ने बोला है

दिलीप- पर क्यूँ

वँया- अरे एग्ज़ॅम्स आने वाले हैं ना तो हम स्टूडेंट्स का माइंड फ्रेश हो इसलिए

दिलीप- फिर मैं अपने क्लास में आ गया छुट्टी होने से पहले टीचर ने वही बासी खबर सुनाया मैं सोचा कल का टाइम सही है

विनय की बहन का चेक अप करवाने के लिए

मैं विनय के घर गया

[ज़ोर से] विनय

विनय की बहन बाहर आई

विनय की बहन- छ्होटे मालिक आप अंदर आइए

दिलीप- मैं अंदर गया

विनय कहाँ है

विनय की बहन- वो और माँ खेत गये हैं

दिलीप- आप तो मुझसे नाराज़ होंगी कि मैं 2 दिन का कहके 10 दिन बाद आया हूँ

विनय की बहन- नही मुझे पता है आप के सर में चोट लगी थी

दिलीप- कल मेरे स्कूल की छुट्टी है तो क्यूना हम कल ही डॉक्टर से आपका चेकप करवा लें

विनय की बहन- ठीक है पर

दिलीप- क्या

विनय की बहन- मैं आपके साथ अकेले कैसे जा सकती हूँ और माँ को क्या कहूँगी

दिलीप- मैने कब कहा कि सिर्फ़ हम दोनो जाएँगे

बिम्ला काकी भी हमारे साथ जाएगी

विनय की बहन- आपने उसे सब बता दिया

दिलीप- नही

[फिर मैं विनय की बहन को सब समझा कर बिम्ला के घर गया]

बिम्ला ने गेट खोला

बिम्ला- आप अंदर आइए

दिलीप- काकी तुमसे कुछ मांगू तो दोगि

बिम्ला- सब कुछ तो आप ही का है

दिलीप- [इसकी चूत में हर वक़्त आग ही लगी रहती]

आपको विनय की माँ को जाके बोलना कि आप की तबीयत खराब है आपको शहेर जाना है डॉक्टर के पास

तो आप शांति को अपने साथ ले जाना चाहती हैं वो भी कल

[बिम्ला मुझे घूर्ने लगी]

ऐसे क्या घूर रही हो

[फिर मैं बिम्ला को बताया कि शांति को बच्चा नही हो रहा है उसके लिए वो अपना चेकप करवाना चाहती है उसका पति उसका इलाज नही कराना चाहता है बाकी सब बात नही बताया]

बिम्ला- ठीक है मैं बात कर लूँगी पर इसके बदले मुझे क्या मिलेगा

दिलीप- (लवडा) मैं तुमको क्या दे सकता हूँ और यह तुम्हारी बेटी कहाँ हैं

बिम्ला- अपने मामा के यहाँ गयी है

दिलीप- गयी है या भेजी गयी है

बिम्ला हँसने लगी

बिम्ला- आज चाइ नही पिएँगे

दिलीप- ना अब मैं चलता हूँ फिर मैं अपने घर चल दिया.'.,,,..

 


अपडेट 73

[अरुणा का रूम]

विद्या अरुणा के साथ बैठी हुई थी

विद्या- तूने बात की बाबू से

अरुणा- उसने कहा कि उसे किस करने का कॉंप्लेक्स हो गया है

विद्या- तुझे क्या लगता है

अरुणा- पता नही मुझे नही लगता है कि बाबू झूठ बोल रहा है

दिलीप- थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा घर मैं सीधा किचन में गया किचन में बड़ी मामी थी

दिलीप- बड़ी नानी कहाँ हैं

बड़ी मामी- बाहर गयी हैं कुछ काम से तुम्हे कुछ चाहिए

दिलीप- नही बस उनसे बात करनी थी यह कहके मैं अपने रूम में आ गया कपड़े बदलके लेट गया

थोड़ी देर बाद वँया आगयि

उसके साथ 2 घंटे पढ़ाई किया

जैसे ही वँया रूम से बाहर गयी

अवनी अंदर आगयि

मैने देखा खाने के टाइम को अभी 2 घंटा था मैं जल्दी से उठा गेट लॉक किया 2 मिनट में पूरा नंगा हो गया अवनी मुझे आँखें फाड़ के देखने लगी मैं अवनी के पास पहुँचा बिना उससे पूछे अवनी की शलवार कमीज़ ब्रा पैंटी सब एक साथ निकालके साइड में रख दिया और अवनी को अपनी बाहो में ले लिया

अवनी- अया दिलीप अभी कोई आजाएगा

दिलीप- आने दो आज हम खुलके प्यार करेंगे

मैं अवनी के होंठ चूसने लगा और एक हाथ से दूध दबाने लगा मैने अवनी का हाथ अपने लंड पे रख दिया अवनी मेरे लंड को आगे पीछे करने लगी अब मैने अपनी ज़ुबान को अवनी के मुँह में डाल दिया अवनी पूरे जोश में मेरी ज़ुबान चूसने लगी मैने अवनी को गोद में उठाके बेड पे लेटा दिया और अवनी का दूध चूसने लगा दूसरे दूध को अपने हाथ में भर के दबाने लगा

अवनी आह आह किए जा रही थी मैने अवनी के दोनो दूध को चुस्के लाल कर दिया फिर मैं अवनी को पलटा दिया अब अवनी पेट के बल लेटी हुई थी मैं अवनी के दोनो नितंबो पे अपना हाथ रखके मसल्ने लगा अवनी आहे भरने लगी और अवनी की पीठ को अपनी ज़ुबान से चाटने लगा अवनी की पीठ मेरे थूक से गीली हो चुकी थी मैं अवनी को पलट दिया और अवनी की चूत पे अपना मुँह रखके चूसने लगा मैं 2 उंगली अवनी की चूत में डालके आगे पीछे करने लगा और मैं चूत के दाने को अपने होंठो में पकड़के चूसने लगा

थोड़ी देर बाद अवनी ने पानी छोड़ दिया मैने अवनी की चूत चाटके पूरा सॉफ कर दिया औ फिर मैने अपने लंड पे ढेर सारा थूक लगाया और जैसे ही अवनी की चूत पे लगाया अवनी खड़ी हो गयी और मुझे बेड पे धकेल दिया मैं बेड पे गिर गया

अवनी मेरे दोनो टाँगो के बीच आगयि और मेरे लंड को पकड़के उपर नीचे करने लगी

अवनी- बाबू कितना बड़ा लंड है तेरा कल तो मैं इसे ठीक से देख ही नही पाई

अवनी ने धीरे से अपना मुँह खोला और अपनी ज़ुबान से मेरे लंड को चाटने लगी और मेरे आंडो को सहलाने लगी

मैं तो पागल हुए जा रहा था

अब अवनी मेरे लंड के सुपाडे को अपने होंठो में पकड़के चूसने लगी मेरे लंड के सुपाडे को चूसने के बाद अवनी मेरे लंड को आधा मुँह में लेके चूसने लगी थोड़ी देर बाद अवनी मेरे लंड को पकड़के मूठ मारने लगी और मेरा आंडो को अपने मुँह में लेके चूसने लगी फिर अवनी मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में लेके चूसने लगी अवनी तो मेरे लंड को छोड़ ही नही रही थी

मैने अपना लंड अवनी के मुँह से निकाला और अवनी को लेटा दिया अवनी की गान्ड के नीचे एक तकिया रखके अवनी की चूत के होंठो में अपना लंड फँसा दिया और वेट करने लगा

जब अवनी को बर्दाश्त नही हुआ तो

अवन्तिका- बाबू क्यूँ तडपा रहा है अपनी अवनी को

दिलीप- मैने कहा था कि आज हम खुलके प्यार करेंगे फिर आप शरमा क्यूँ रही है

अवन्तिका- बाबू चोद ना अपनी अवनी को

अवनी के इतना कहते ही मैने एक झटके में अपना आधा लंड अवनी की चूत में डाल दिया

अवनी की चीख निकल गयी

मैं अवनी के दोनो दूध दबाने लगा थोड़ी देर बाद जब अवनी शांत हुई

तो मैं एक और झटका मारके अपना लंड अवनी की चूत की गहराई में डाल दिया

अवनी रोने लगी मैं अवनी के होंठ चूस्ते हुए अवनी के दूध दबाने लगा थोड़ी देर बाद अवनी अपनी गान्ड गोल गोल हिलाने लगी मैं अपने लंड को आगे पीछे करने लगा फिर तो मैं रुका ही नही ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा

अवनी कैसा लग रहा है

अवन्तिका- अया बहुत अच्च्छा लग रहा है बाबू अयाया और ज़ोर से चोद अपनी अवनी को ओह यआः फक मी फक मी हार्डर यह बेबी ऊवू ईआ फक मी बाबू फक मी हार्दर ओह ईआ अयाया

दिलीप- हिन्दी में बोलो ना मैने अवनी की चूत में लंड अपना पेलते हुए बोला

अवन्तिका- बाबू मैं झड़ने वाली हूँ और ज़ोर से चोद मुझको फाड़ दे आज मेरी चूत को

मैं अवनी की चूत में ज़ोर ज़ोर से अपना लंड पेले जा रहा था थोड़ी देर बाद अवनी झड़ने लगी

मैने अपना लंड अवनी की चूत के मुँह तक निकाला और एक बार में ही पूरा पेल दिया

अवनी की चीख निकल गयी मैं तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा अवनी दूसरी बार झड गयी

मैने अवनी को घोड़ी बनाया और अवनी की चूत में अपना लंड पेलने लगा

आज मैं भी हैरान था कि आज 30 मिनट से ज़्यादा हो गया है मेरी पानी निकलने का नाम ही नही ले रहा है

अवनी एक बार फिर से झड गयी

अवन्तिका- बाबू अब और नही बहुत जलन हो रही है

दिलीप- मैने अपना लंड अवनी की चूत से निकाल लिया

अवनी मेरे लंड को मुँह में लेके चूसने लगी 10 मिनट तक अवनी मेरे लंड को चुस्ती रही

दिलीप -अवनी मेरा पानी निकलने वाला है

अवनी और ज़ोर्से मेरे लंड को चूसने लगी थोड़ी देर बाद मैं अवनी के मुँह में ही झड़ने लगा अवनी मेरा सारा कम पी गयी

फिर हम बाथरूम में गये एक साथ नहा कर बाहर आए फिर मैने और अवनी ने अपने कप्डे पहने और मैने गेट का लॉक खोल दिया..?.,..,

 
अपडेट 74

दिलीप- हम दोनो बेड पे बैठे हुए थे

अवनी तुम बहुत खूबसूरत हो

अवन्तिका- अच्छा और क्या खूबसूरत है मेरा

दिलीप- तुम्हारे दूध जब भी देखता हूँ मन करता है चूस्ता ही रहूं

और तुम्हारी गान्ड जब तुम मटक के चलती हो तो मन करता है अभी

अवन्तिका- क्या अभी

दिलीप- रहने दो तुम नाराज़ हो जाओगी

अवन्तिका- तूने ही कहा था कि हमारे बीच कोई शरम नही होनी चाहिए

दिलीप- मन करता है अभी आपकी गान्ड में अपना डालके आप की गान्ड मार लूँ

हर वक़्त तुमको चोदता रहूं

अब मैने तो बता दिया

आप को मुझमे क्या अच्छा लगता है

अवन्तिका- तेरी हर बात जब तू मुझे चोदता है तो मुझे कभी नही लगता कि तेरे आँखो में हवस है

तेरा लंड जो की पोर्न्स्टार के जितना बड़ा है

देखा नही आज मेरी चूत भी तेरे लंड को नही हरा पाई

दिलीप- यह पोर्न्स्टार क्या होता है

अवन्तिका- तेरे पास तो मोबाइल है तो मैं तुझे एक साइट बताती हूँ जिससे सेक्स

दिलीप- हिन्दी में बोलो ना

अवन्तिका- [मुस्कुरा के]

चुदाई से जुड़ी हर चीज़ तुझे पता चल जाएगी

दिलीप तुझे पता है ना कि हमारा रिश्ता इससे आगे नही बढ़ सकता

दिलीप- हाँ पता है

अवन्तिका- मैं चाहती थी कि जिससे मैं प्यार करूँ वही मुझे औरत बनाए

दिलीप- अभी यह सब बात क्यूँ कर रही हो

अवन्तिका- क्यूँ कि मैं डरती हूँ तू कहीं मुझे ग़लत ना समझे

कि मैने सिर्फ़ तेरे साथ चुदाई करने के लिए तुझे अपना बाय्फ्रेंड बनाई हूँ

दिलीप- आपको पता है मेरे लिए एक पल का प्यार ही काफ़ी है किसी को अपना मानने के लिए

अब अपने आँसू पोछो

फिर मैने दोनो गोलियों को अवनी को खिला दिया

अवन्तिका- तुझे यह सब का ध्यान कैसे रहता है

तभी किसी ने गेट नॉक किया

मैने जाके गेट खोला

मैं बड़ी नानी के गले लग गया

मेरे सर पे हाथ फिराने लगी

बड़ी नानी- बहू ने बताया कि तुझे मुझसे कुछ बात करनी है

दिलीप- पहले अंदर तो आओ

फिर बड़ी नानी अंदर आके मेरे साथ बेड पे बैठ गयी

अवन्तिका- बड़ी दादी मैं जाती हूँ

बड़ी नानी- तू कहाँ जा रही है बैठ यही पे

दिलीप- हाँ यह कोई प्राइवेट बात नही हैवो विनय की बहेन की तबीयत खराब है

तो मैं आपसे पूछ रहा था कि वो मुझे कह रही थी कि वो और उसकी पड़ोसन बिम्ला शहर जा रही हैं

डॉक्टर को दिखाने तो मैं भी उनके साथ चला जाऊं

बड़ी नानी- विनय भी तो जा सकता है

दिलीप- नही जा सकता है वो चला जाएगा तो उसका खेत कौन देखेगा

[बड़ी नानी कुछ देर तक सोचती रही]

बड़ी नानी- ठीक है पर अपना ख्याल रखना

[फिर हम सब खाना खाने नीचे गये

हम सब ने एक साथ खाना खाया

बड़ी नानी ने मुझे पैसे दिए

फिर मैं अपने कमरे में आ गया

थोड़ी देर बाद जब मुझे यक़ीन होगया कि सब सो गये हैं

तो मैं चीख चीख के रोने लगा

मुझे तो समझ ही नही आरहा था कि मैं क्या करूँ

अब मैं कर भी क्या सकता हूँ

फिर मैं नहा कर विद्या दी के रूम पे पहुँचा

गेट नॉक किया

जब गेट नही खुला तो मैं मास्टर की से गेट खोलके अंदर गया

फिर गेट लॉक किया

और विद्या दी के बेड पे जाके बैठ गया

विद्या दी सोई हुई थी

मैं विद्या दी से सट के लेट गया

पता ही नही चला कब आँख लग गयी

कोई मुझे हिलाने लगा

मैं आँख खोलके देखा

विद्या दी थी

मैं उठके बैठ गया

विद्या- बाबू तू कब आया

दिलीप- जब आप सोई हुई थी

विद्या- पर क्यूँ

दिलीप- बस आप को देखने का मन हुआ

यह कहके मैं विद्या दी के गले लग गया

विद्या- मेरा प्यारा बाबू अब तू जा सुबह होने वाली है

दिलीप- पहले एक किस दो

विद्या दी ने मेरे गाल पे किस किया

दिलीप-यह क्या था

विद्या- किस

दिलीप- यह तो चीटिंग है मैने होंठो पे कहा था

विद्या- तूने किस कहा था अब जल्दी जा

दिलीप- मैने विद्या दी के गाल पे किस किया और अपने रूम में आया

किसीने सच ही कहा है एक प्यार में गम मिला एक प्यार में खुशी

हर पल क़ीमती है खुलके जी ले जिंदगी फिर मैं अलार्म लगाके सो गया...

 
अपडेट 75

ठीक 6आम मैं उठके मुँह धोके नीचे गया

डाइनिंग टेबल पे बैठ गया

आज मन किया कि सबका आशीर्वाद लूँ

बड़ी नानी बड़े मामा बड़ी मामी छोटे मामा छोटी मामी सबका मैने पैर छुए

सब ने एक ही बात कही हमेशा खुश रहो फिर हम सबने नाश्ता किया

बड़ी नानी- तेरे साथ लखन भी जाएगा

दिलीप- बड़ी नानी उसे जाने की कोई ज़रूरत नही है मैं वहाँ डॉक्टर के यहाँ जा रहा हूँ किसी से लड़ने नही

बड़े मामा- बड़ी माँ ने जो कहा वो तुमने सुना कि नही हा या ना

दिलीप- [हकलाते हुए]हाा

बड़े मामा- तो बात ख़तम अब तुम जाओ

दिलीप- फिर मैं लखन के साथ अखाड़े में गया कसरत करके पूरा बदन टूट गया फिर कालिए ने ज़हर पिलाया

ज़हर पीके मैं लखन के साथ बस स्टॅंड पे गया

[मेरी भी समझ में यह बात नही आई कि लखन को मेरे साथ भेज दिया गया पर गाड़ी साथ नही भेजा खैर मुझे क्या मुझे तो अपने प्लान से मतलब है]

बस स्टॅंड पे बिम्ला और शांति हमारा इंतजार कर रही थी शांति लखन को देखके मुझे घूर्ने लगी

पहले से ही हमारे लिए 4 सीट्स बुक थी 2 सीट्स आगे 2 सीट्स पीछे पिछली सीट्स पे लखन और बिम्ला

अगली सीट्स पे मैं और शांति बैठ गये शांति अभी भी मुझे घूर रही थी

दिलीप- इस तरह मुझे घूर्ने की ज़रूरत नही है

बड़ी नानी ने इसे मेरे साथ भेजा है

शांति- आप ने यह बात किसिको बताई तो नही है

दिलीप- नही

शांति- अब क्या करेंगे

दिलीप- क्या करेंगे शहर पहुँचके किसी अच्छे से प्राइवेट हॉस्पिटल में आपका चेकप करवाएँगे

1 घंटे बाद हम शहेर पहुँचे

लखन ने एक टॅक्सी रुकाई

हम सब उसमें बैठ गये

डॉक्टर- कहाँ चलूं साहब

दिलीप- किसी अच्छे से प्राइवेट हॉस्पिटल ले चलो

डॉक्टर- साहब यहाँ तो बहुत से अच्छे हॉस्पिटल हैं

दिलीप- एक काम करो जहा सिर्फ़ लॅडीस का इलाज होता है वही ले चलो

30 मिनट बाद हम हॉस्पिटल पहुँचे मैं डॉक्टर को पैसे दिया

हम हॉस्पिटल के अंदर गये मैने सब को बोला बैठने के लिए

फिर मैं जाके नर्स से बात किया

नर्स ने 2 घंटे बाद का आपपॉइंटमें दिया

इंतेज़ार करते 2 घंटे ऐसे ही बीत गये फिर नर्स आई

नर्स- आप में से एक पेशेंट के साथ जा सकता है मैं और शांति अंदर गये

डॉक्टर खूबसूरत थी नाम था रिया

डॉक्टर रिया- बैठ जाइए

[शांति बैठ गयी]

डॉक्टर-कहिए क्या प्राब्लम है

शांति- [शर्माके]

जी वो मेरी शादी को 2 साल हो गये हैं मुझे अभी तक बच्चा नही हुआ है

डॉक्टर रिया- आप कौन हैं

दिलीप- मैं इनका देवर हूँ

डॉक्टर रिया- ओके आप बाहर बैठिए मुझे इनका चेकप करना है

दिलीप- मैं बाहर आके बैठ गया

[एक घंटे बाद]

नर्स- आपको अंदर बुलाया है

दिलीप- मैं अंदर गया

डॉक्टर रिया- मैने इनका चेकप कर लिया है आपको 1 हफ्ते बाद रिपोर्ट मिल जाएगी अब आप जा सकते हैं

हम दोनो बाहर आए

दिलीप- [शांति से कहा] आप रूको मैं एक मिनट में आता हूँ फिर मैं अंदर गया

डॉक्टर क्या रिपोर्ट लेने के लिए भाभी का आना ज़रूरी है

[डॉक्टर रिया मुझे घूर्ने लगी]

डॉक्टर रिया- आप या पेशेंट में से कोई भी आसकता है

दिलीप- [फिर हम सब हॉस्पिटल से बाहर आए]

पहले कुछ खा लेते हैं

हॉस्पिटल के साथ ही एक होटेल था हम उसमें गये थोड़ा बहुत खाया

फिर बस स्टॅंड में आए बस में बैठे थोड़ी देर बाद बस चलने लगी

शांति मेरे साथ ही बैठी हुई थीवो कुछ बोल ही नही रही थी

मैं भी आँख बंद करके बैठ गया

1 घंटे बाद हम गाओं पहुँचे

बिम्ला और शांति अपने घर चले गये

मैं और लखन हवेली पहुँचे....

 
Back
Top