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अंकित एक सीधा साधा और सुलझा हुआ लड़का था,,, वह खुद से औरतों के आकर्षण में पडना नहीं चाहता था लेकिन उसे ऐसा लगने लगा था कि जैसे सब कुछ अपने आप ही होते जा रहा है,,, औरतों को देखने का नजरिया उसका बिल्कुल भी गलत नहीं था लेकिन कुछ दिनों से जिस तरह के हालात उसके सामने पैदा हो रहे थे उसे देखते हुए उसका आकर्षण औरतों की तरफ जवान लड़कियों की तरफ उनके उभरते हुए अंगों की तरफ बढ़ने लगे थे,,,। जिसकी शुरुआत अंकित के लिए अपनी खुद की सगी मां से ही हुई थी,,,,।
अंकित बेचैन रहने लगा था वह पहले की तरह बिंदास होकर गली मोहल्ले में सड़क पर नहीं घूम पता था क्योंकि अब उसकी नजर जाने अनजाने में राह चलती औरतों और जवान लड़कियों के अंगों पर चली ही जाती थी अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि औरतों के पास बड़ी-बड़ी चूचियां होती है जिसे देखकर उसके जैसे जवान लड़के पागल हो जाते हैं उनकी बड़ी-बड़ी गांड कैसी हुई साड़ी में और ज्यादा ऊपरी हुई नजर आती है जिसे देखने हर मर्द की चाहत होती है और उसे देखकर अपने मन में न जाने कैसे-कैसे कल्पना करते हैं जाने अनजाने में ही सही लेकिन अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि,,, क्यों उसके सभी दोस्त हमेशा लड़की और औरतों की ही बातें करते रहते हैं गली मोहल्ले की औरतों के बारे में गंदी-गंदी बातें कहते रहते हैं रोज उन लोगों के बातचीत का जरिया गली मोहल्ले की एक अलग ही औरत होती थी,,, पहले अंकित को अपने दोस्तों की तरह की बातें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती थी इस तरह की बातें शुरू होने पर ही वह या तो वहां से उठकर चला जाता था या फिर उन्हें इस तरह की बातें ना करने के लिए बोलता था,,,, लेकिन आप हालात बदल चुके थे उसकी सोचने का रवैया बदल चुका था,,, और यह तब हुआ था जब सुमन के बारे में उसके दोस्त गंदी गंदी बातें कर रहे थे पहले तो उसे इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ था लेकिन अचार देने के लिए जब वह उसके घर गया था और जिस तरह का वाक्या उसकी आंखों के सामने पेश आया था उसे देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था हालांकि अभी भी अंकित को इस बात पर पूरा विश्वास नहीं हुआ था कि सुमन का तीन चार लड़कों के साथ शारीरिक संबंध है वह तो उसके साथ कुछ आनंददायक हादसा हो गया था जिसके बारे में सोच सोच कर ही उसका लंड कब खड़ा हो जाता था उसे पता ही नहीं चलता था,,,,,,,
ऐसे ही एक दिन अंकित नुक्कड़ पर अपने दोस्तों के साथ बैठकर चाय पी रहा था और तभी उनमें से एक लड़का जो कि उनके ही ग्रुप का था वह गाली देते हुए बोला,,,।
अरे यार रमेश एक नंबर का मादरचोद है,,,
(उसकी बात सुनकर दूसरा बोला)
क्यों क्या हुआ,,,?
अरे यार रमेश के घर उसकी बुआ आई है देखने पर एकदम पटाखा लगती है दो बच्चों की मां है लेकिन कम से उसका कसा हुआ पसंद देख कर तो मेरा खुद का लंड खड़ा हो गया था,,,।
क्या बात कर रहा है यार,,,,
हां मैं सच कह रहा हूं,,,,
(उन दोनों की बात सुनकर बाकी लोगों के साथ-साथ अंकित के भी कान खड़े हो गए थे वह भले ही चाय की चुस्की ले रहा था लेकिन उसका पूरा ध्यान उन दोनों की बातें सुनने में लगा हुआ था तभी वह पहले वाला बोला,,,)
कल मैं यार उसे बुलाने के लिए उसके घर गया था दोपहर के समय था उसके घर पहुंचा तो दरवाजा खिड़की संबंध जबकि गर्मी का दिन है लोग दरवाजा ना सही लेकिन खिड़की तो खोल कर ही रखते हैं बाहर से दरवाजा लॉक नहीं था इसलिए मैं समझ गया कि अंदर कोई ना कोई तो होगा ही मुझे लगा आवाज देने पर जरूर कोई बोलेगा लेकिन जब मैं दरवाजे पर दस्तक देने लगा तो अंदर से बिल्कुल भी आवाज नहीं आ रही थी,,,,
फिर क्या हुआ,,,?(दूसरे वाले ने आश्चर्यचक जताते हुए बोला,,,)
अरे फिर क्या मुझे उससे जरुरी किताबें लेनी थी होमवर्क पूरा करने के लिए इसलिए मैं पूरी कोशिश करने लगा कि कोई दरवाजा खोल दे या कोई अंदर से जवाब ही दे दे लेकिन कोई आवाज ही नहीं अंदर से आ रही थी इसलिए मैं दरवाजे को छोड़कर खिड़की के पास गया कि मुझे लगा कि शायद खिड़की तो पूरी होगी लेकिन देखा तो खिड़की भी बंद थी लेकिन अंदर इतना तो महसूस हो ही रहा था कि कोई ना कोई तो जरूर है और जब मैं खिड़की से जो की थोड़ी सी खिड़की में दरार थी उसमें से नजर गडाकर अंदर की तरफ देखा तो मेरा होश उड़ गया,,,
अरे ऐसा क्या देख लिया जो तेरा होश उड़ गया,,,(उनमें से तीसरे वाले ने बोला सबके कान खड़े थे उसकी बात सुनने के लिए सब अंदर से बेचैन हो रहे थे कि वह क्या बताता है और यही हाल अंकित का भी था हालांकि अभी पूरी बात वह सुन नहीं पाया था लेकिन फिर भी उत्सुकता के कारण उसका लंड हरकत में आना शुरू हो गया था,,,,)
अरे यार क्या बताऊं जब मैं खिड़की से अंदर देखने की कोशिश करने लगा तो अंदर तो ज्यादा उजाला नहीं था लेकिन फिर भी दोपहर का समय होने से इधर-उधर से अंदर उजाला थोड़ा बहुत नजर आ ही रहा था और मैंने देखा कि बिस्तर पर से एक औरत उठकर दूसरी तरफ जाने लगी या का को की अंदर बाथरूम की तरफ जाने लगी मुझे तो ज्यादा कुछ दिखाई नहीं दिया बस उसकी बड़ी-बड़ी गांड दिखाई दी एकदम नंगी वह पूरी तरह से नंगी थी मेरे तो होश उड़ गए और सही बताऊं तो मेरा तो लंड भी खड़ा हो गया सच कहूं तो पहली बार किसी औरत को मैं एकदम नंगी देख रहा था ,,,,,
(वह जिस तरह से बता रहा था बताते हुए उसकी हालत खराब हुई जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और सुनने वाले की तो हालात और ज्यादा खराब हो गई थी अंकित ने सभी दोस्तों के पेट की तरफ देखा तो वह हैरान हो गया क्योंकि सबकी पेट के आगे तंबू बना हुआ था उसकी बात सुनकर सब की हालत खराब थी सबका लंड खड़ा हो गया था उसकआ खुद का भी लंड खड़ा था,,, उसकी बात सुनकर एक आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)
क्या कह रहा है यार क्या सच में तूने इस तरह का नजारा देखा,,,
हां यार कसम खा कर कहता हूं मैं बिल्कुल भी झूठ नहीं कह रहा हूं मुझे तो ऐसा लगा कि शायद रमेश की मम्मी पापा है लेकिन जब मैं बिस्तर पर नजर दौड़ी तो मैं हैरान रह गया क्योंकि बिस्तर पर तो खुद रमेश भाई का नंगा उसका लंड पानी छोड़ चुका था,,,,।
क्या,,,,(एक साथ दो तीन लड़के बोल पड़े क्योंकि सबको हैरानी हुई थी)
हां यार बिस्तर पर रमेश था एकदम नंगा मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था और मुझे झटका तो इस बात का लगा की कहानी वह औरत उसकी मां तो नहीं थी मैं तो एकदम हैरान हो गया मैंने तो सिर्फ सुना था मुझे लगा कि मैं आज अपनी आंखों से देख लिया कि एक बेटा कैसे अपनी मां की चुदाई करता है,,,,,, (इस बात को सुनते ही अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी आंखों के सामने उसकी मां का खूबसूरत चेहरा नजर आने लगा,,, उसकी मां की साड़ी में कसी हुई गांड नजर आने लगी उसका भरा हुआ स्तन नजर आने लगा जिसे वह नजर भर कर कई बार देख चुका था वह लड़का अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
सच कह रहा हूं यार मेरी तो हालत खराब हो गई थी मेरा लंड सच में पानी छोड़ने वाला था किसी तरह से मैं अपने आप को संभाल कर रखा था,,, मैं तो खिड़की से नजर हटा ही नहीं रहा था मैं देख पा रहा था कि रमेश उसी औरत के पेटीकोट से अपने लंड को साफ कर रहा था,,, और अंदर से पानी गिरने की आवाज आ रही थी मैं समझ गया कि वह अपनी बुर धोने के लिए गई है,,,।
बाप रे क्या सच में रमेश अपनी मां को चोदता है और उसकी मां उससे चुदवा भी लेती है,,,
हां यार चुदवा लेती होगी देखा नहीं है उसका बाप कितना बीमार रहता है मरियल सा है और उसकी मां अभी भी पूरी जवानी से भरी हुई है बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूची मुझे मिल जाए तो मैं खुद ही रात भर उसकी बुर में लंड डालकर पड़ा रहुं,,,(उनमें से एक लड़के ने अपने मन की भड़ास निकलते हुए बोला,,,)
कसम से जैसा तू सोच रहा है मेरा भी ख्याल बिलकुल ऐसा ही है उसकी मां को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है काश मैं भी रमेश की जगह होता तो मजा आ जाता,,,(उनमें से दूसरे लड़के ने भी उसे लड़के के सुर में सुर मिलाते हुए बोला तो तभी उसकी बात सुनकर तीसरा लड़का बोला)
तो बन जाना तू भी रमेश तेरी मां कौन सी कम है लाली पाउडर लगाकर कितनी गजब लगती है,,, तेरी मां को भी देख कर मेरा खडा हो जाता है,,,।(इनमें से उसका ही दोस्त चुटकी लेते हुए बोला तो वह भी मजे लेते हुए बोला,,,)
लेकिन मुझे तो तेरी मां बहुत अच्छी लगती है,,,
तो कोई बात नहीं अदला बदली कर लेते हैं तो मेरी मां को मैं तेरी मां को,,,,।
(अंकित हैरान था क्योंकि पहले दूसरों की मां के बारे में बातें होती थी लेकिन आज यह दोनों अपनी ही मन के बारे में गंदी बातें कर रहे थे और वह भी एकदम खुश होकर दोनों के चेहरे पर बिल्कुल भी गुस्सा नहीं था जहां पहले अंकित इस तरह की बातें शुरू होने पर वहां से चला जाता था या इस तरह की बातें करने से मना कर देता था वही आज अंकित वहीं बैठकर चाय की चुस्की के साथ-साथ उन लोगों की बातों का आनंद भी ले रहा था और उसे मजा भी आ रहा था वह अपने मन में उसे दिन की बात सोचने लगा जब क्रिकेट में हर जाने के बाद उसका दोस्त उसे गंदी-गंदी गालियां दे रहा था उसकी मां के बारे में उसकी मां को चोदने के लिए बोल रहा था ना जाने क्यों ना चाहते हुए भी उसकी आंखों के सामने उसे तरह का दृश्य अपने आप नजर आने लगा जैसा कि वह अंकित को गाली दे रहा था कि तेरी मां को चोद दूंगा,,, और उसकी आंखों के सामने कल्पना चित्र उभरने लगा कि कैसे उसका दोस्त उसकी मां की साड़ी उठाकर पीछे से उसकी चुदाई कर रहा है इस तरह की दृश्य के बारे में सोचते ही अंकित एकदम से अपने आप पर ही गुस्सा होने लगा कि यह क्या सोच रहा है मैं ना चोद दूं उसकी मां को,,,, सभी की बातों को सुनने के बाद वह लड़का बोला,,,,)
यार मैं भी यही सोच रहा था अगर बिस्तर पर से उठकर जो औरत बाथरूम की तरफ गई है अगर सच में उसकी मां होगी तो मैं भी ट्राई करूंगा उसकी मां को चोदने को क्योंकि मैं तो सब कुछ देख चुका था बड़े आराम से उसकी मां मुझे दे देती,,,, लेकिन अंदर कमरे में उसकी मां नहीं बल्कि उसकी बुआ थी जो कुछ दिनों के लिए उसके घर आई थी अगर मैं उसकी मां को सामने से आई हुई ना देखा तो मुझे ऐसा ही लगता कि रमेश अपनी मां को चोद रहा था,,,।
धत् ,,, सारा मजा किरकिरा कर दिया,,, मुझे तो लग रहा था कि रमेश अपनी मां को ही चोद रहा था,,,,(उनमें से एक लड़का थोड़ा सा निराशा दिखाकर के बोला,,,)
मुझे भी तो ऐसा ही लग रहा था लेकिन जरा यह तो सोचो हम लोग जहां देख भी नहीं पाते हैं बुर को वही रमेश अपनी बुआ की जमकर चुदाई कर रहा है सोचो अपने और रमेश में कितना फर्क है उसकी किस्मत कितनी बुलंदियों पर है और हम लोग अभी भी सिर्फ याद करके हिला के काम चलाते हैं,,,,
हां यार बात तो सही कह रहा है हम लोगों से अच्छा तो रमेश ही है जो बुर का आनंद उठा रहा है,,,।
अंकित बेचैन रहने लगा था वह पहले की तरह बिंदास होकर गली मोहल्ले में सड़क पर नहीं घूम पता था क्योंकि अब उसकी नजर जाने अनजाने में राह चलती औरतों और जवान लड़कियों के अंगों पर चली ही जाती थी अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि औरतों के पास बड़ी-बड़ी चूचियां होती है जिसे देखकर उसके जैसे जवान लड़के पागल हो जाते हैं उनकी बड़ी-बड़ी गांड कैसी हुई साड़ी में और ज्यादा ऊपरी हुई नजर आती है जिसे देखने हर मर्द की चाहत होती है और उसे देखकर अपने मन में न जाने कैसे-कैसे कल्पना करते हैं जाने अनजाने में ही सही लेकिन अब उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि,,, क्यों उसके सभी दोस्त हमेशा लड़की और औरतों की ही बातें करते रहते हैं गली मोहल्ले की औरतों के बारे में गंदी-गंदी बातें कहते रहते हैं रोज उन लोगों के बातचीत का जरिया गली मोहल्ले की एक अलग ही औरत होती थी,,, पहले अंकित को अपने दोस्तों की तरह की बातें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती थी इस तरह की बातें शुरू होने पर ही वह या तो वहां से उठकर चला जाता था या फिर उन्हें इस तरह की बातें ना करने के लिए बोलता था,,,, लेकिन आप हालात बदल चुके थे उसकी सोचने का रवैया बदल चुका था,,, और यह तब हुआ था जब सुमन के बारे में उसके दोस्त गंदी गंदी बातें कर रहे थे पहले तो उसे इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ था लेकिन अचार देने के लिए जब वह उसके घर गया था और जिस तरह का वाक्या उसकी आंखों के सामने पेश आया था उसे देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था हालांकि अभी भी अंकित को इस बात पर पूरा विश्वास नहीं हुआ था कि सुमन का तीन चार लड़कों के साथ शारीरिक संबंध है वह तो उसके साथ कुछ आनंददायक हादसा हो गया था जिसके बारे में सोच सोच कर ही उसका लंड कब खड़ा हो जाता था उसे पता ही नहीं चलता था,,,,,,,
ऐसे ही एक दिन अंकित नुक्कड़ पर अपने दोस्तों के साथ बैठकर चाय पी रहा था और तभी उनमें से एक लड़का जो कि उनके ही ग्रुप का था वह गाली देते हुए बोला,,,।
अरे यार रमेश एक नंबर का मादरचोद है,,,
(उसकी बात सुनकर दूसरा बोला)
क्यों क्या हुआ,,,?
अरे यार रमेश के घर उसकी बुआ आई है देखने पर एकदम पटाखा लगती है दो बच्चों की मां है लेकिन कम से उसका कसा हुआ पसंद देख कर तो मेरा खुद का लंड खड़ा हो गया था,,,।
क्या बात कर रहा है यार,,,,
हां मैं सच कह रहा हूं,,,,
(उन दोनों की बात सुनकर बाकी लोगों के साथ-साथ अंकित के भी कान खड़े हो गए थे वह भले ही चाय की चुस्की ले रहा था लेकिन उसका पूरा ध्यान उन दोनों की बातें सुनने में लगा हुआ था तभी वह पहले वाला बोला,,,)
कल मैं यार उसे बुलाने के लिए उसके घर गया था दोपहर के समय था उसके घर पहुंचा तो दरवाजा खिड़की संबंध जबकि गर्मी का दिन है लोग दरवाजा ना सही लेकिन खिड़की तो खोल कर ही रखते हैं बाहर से दरवाजा लॉक नहीं था इसलिए मैं समझ गया कि अंदर कोई ना कोई तो होगा ही मुझे लगा आवाज देने पर जरूर कोई बोलेगा लेकिन जब मैं दरवाजे पर दस्तक देने लगा तो अंदर से बिल्कुल भी आवाज नहीं आ रही थी,,,,
फिर क्या हुआ,,,?(दूसरे वाले ने आश्चर्यचक जताते हुए बोला,,,)
अरे फिर क्या मुझे उससे जरुरी किताबें लेनी थी होमवर्क पूरा करने के लिए इसलिए मैं पूरी कोशिश करने लगा कि कोई दरवाजा खोल दे या कोई अंदर से जवाब ही दे दे लेकिन कोई आवाज ही नहीं अंदर से आ रही थी इसलिए मैं दरवाजे को छोड़कर खिड़की के पास गया कि मुझे लगा कि शायद खिड़की तो पूरी होगी लेकिन देखा तो खिड़की भी बंद थी लेकिन अंदर इतना तो महसूस हो ही रहा था कि कोई ना कोई तो जरूर है और जब मैं खिड़की से जो की थोड़ी सी खिड़की में दरार थी उसमें से नजर गडाकर अंदर की तरफ देखा तो मेरा होश उड़ गया,,,
अरे ऐसा क्या देख लिया जो तेरा होश उड़ गया,,,(उनमें से तीसरे वाले ने बोला सबके कान खड़े थे उसकी बात सुनने के लिए सब अंदर से बेचैन हो रहे थे कि वह क्या बताता है और यही हाल अंकित का भी था हालांकि अभी पूरी बात वह सुन नहीं पाया था लेकिन फिर भी उत्सुकता के कारण उसका लंड हरकत में आना शुरू हो गया था,,,,)
अरे यार क्या बताऊं जब मैं खिड़की से अंदर देखने की कोशिश करने लगा तो अंदर तो ज्यादा उजाला नहीं था लेकिन फिर भी दोपहर का समय होने से इधर-उधर से अंदर उजाला थोड़ा बहुत नजर आ ही रहा था और मैंने देखा कि बिस्तर पर से एक औरत उठकर दूसरी तरफ जाने लगी या का को की अंदर बाथरूम की तरफ जाने लगी मुझे तो ज्यादा कुछ दिखाई नहीं दिया बस उसकी बड़ी-बड़ी गांड दिखाई दी एकदम नंगी वह पूरी तरह से नंगी थी मेरे तो होश उड़ गए और सही बताऊं तो मेरा तो लंड भी खड़ा हो गया सच कहूं तो पहली बार किसी औरत को मैं एकदम नंगी देख रहा था ,,,,,
(वह जिस तरह से बता रहा था बताते हुए उसकी हालत खराब हुई जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और सुनने वाले की तो हालात और ज्यादा खराब हो गई थी अंकित ने सभी दोस्तों के पेट की तरफ देखा तो वह हैरान हो गया क्योंकि सबकी पेट के आगे तंबू बना हुआ था उसकी बात सुनकर सब की हालत खराब थी सबका लंड खड़ा हो गया था उसकआ खुद का भी लंड खड़ा था,,, उसकी बात सुनकर एक आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)
क्या कह रहा है यार क्या सच में तूने इस तरह का नजारा देखा,,,
हां यार कसम खा कर कहता हूं मैं बिल्कुल भी झूठ नहीं कह रहा हूं मुझे तो ऐसा लगा कि शायद रमेश की मम्मी पापा है लेकिन जब मैं बिस्तर पर नजर दौड़ी तो मैं हैरान रह गया क्योंकि बिस्तर पर तो खुद रमेश भाई का नंगा उसका लंड पानी छोड़ चुका था,,,,।
क्या,,,,(एक साथ दो तीन लड़के बोल पड़े क्योंकि सबको हैरानी हुई थी)
हां यार बिस्तर पर रमेश था एकदम नंगा मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था और मुझे झटका तो इस बात का लगा की कहानी वह औरत उसकी मां तो नहीं थी मैं तो एकदम हैरान हो गया मैंने तो सिर्फ सुना था मुझे लगा कि मैं आज अपनी आंखों से देख लिया कि एक बेटा कैसे अपनी मां की चुदाई करता है,,,,,, (इस बात को सुनते ही अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी आंखों के सामने उसकी मां का खूबसूरत चेहरा नजर आने लगा,,, उसकी मां की साड़ी में कसी हुई गांड नजर आने लगी उसका भरा हुआ स्तन नजर आने लगा जिसे वह नजर भर कर कई बार देख चुका था वह लड़का अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
सच कह रहा हूं यार मेरी तो हालत खराब हो गई थी मेरा लंड सच में पानी छोड़ने वाला था किसी तरह से मैं अपने आप को संभाल कर रखा था,,, मैं तो खिड़की से नजर हटा ही नहीं रहा था मैं देख पा रहा था कि रमेश उसी औरत के पेटीकोट से अपने लंड को साफ कर रहा था,,, और अंदर से पानी गिरने की आवाज आ रही थी मैं समझ गया कि वह अपनी बुर धोने के लिए गई है,,,।
बाप रे क्या सच में रमेश अपनी मां को चोदता है और उसकी मां उससे चुदवा भी लेती है,,,
हां यार चुदवा लेती होगी देखा नहीं है उसका बाप कितना बीमार रहता है मरियल सा है और उसकी मां अभी भी पूरी जवानी से भरी हुई है बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूची मुझे मिल जाए तो मैं खुद ही रात भर उसकी बुर में लंड डालकर पड़ा रहुं,,,(उनमें से एक लड़के ने अपने मन की भड़ास निकलते हुए बोला,,,)
कसम से जैसा तू सोच रहा है मेरा भी ख्याल बिलकुल ऐसा ही है उसकी मां को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है काश मैं भी रमेश की जगह होता तो मजा आ जाता,,,(उनमें से दूसरे लड़के ने भी उसे लड़के के सुर में सुर मिलाते हुए बोला तो तभी उसकी बात सुनकर तीसरा लड़का बोला)
तो बन जाना तू भी रमेश तेरी मां कौन सी कम है लाली पाउडर लगाकर कितनी गजब लगती है,,, तेरी मां को भी देख कर मेरा खडा हो जाता है,,,।(इनमें से उसका ही दोस्त चुटकी लेते हुए बोला तो वह भी मजे लेते हुए बोला,,,)
लेकिन मुझे तो तेरी मां बहुत अच्छी लगती है,,,
तो कोई बात नहीं अदला बदली कर लेते हैं तो मेरी मां को मैं तेरी मां को,,,,।
(अंकित हैरान था क्योंकि पहले दूसरों की मां के बारे में बातें होती थी लेकिन आज यह दोनों अपनी ही मन के बारे में गंदी बातें कर रहे थे और वह भी एकदम खुश होकर दोनों के चेहरे पर बिल्कुल भी गुस्सा नहीं था जहां पहले अंकित इस तरह की बातें शुरू होने पर वहां से चला जाता था या इस तरह की बातें करने से मना कर देता था वही आज अंकित वहीं बैठकर चाय की चुस्की के साथ-साथ उन लोगों की बातों का आनंद भी ले रहा था और उसे मजा भी आ रहा था वह अपने मन में उसे दिन की बात सोचने लगा जब क्रिकेट में हर जाने के बाद उसका दोस्त उसे गंदी-गंदी गालियां दे रहा था उसकी मां के बारे में उसकी मां को चोदने के लिए बोल रहा था ना जाने क्यों ना चाहते हुए भी उसकी आंखों के सामने उसे तरह का दृश्य अपने आप नजर आने लगा जैसा कि वह अंकित को गाली दे रहा था कि तेरी मां को चोद दूंगा,,, और उसकी आंखों के सामने कल्पना चित्र उभरने लगा कि कैसे उसका दोस्त उसकी मां की साड़ी उठाकर पीछे से उसकी चुदाई कर रहा है इस तरह की दृश्य के बारे में सोचते ही अंकित एकदम से अपने आप पर ही गुस्सा होने लगा कि यह क्या सोच रहा है मैं ना चोद दूं उसकी मां को,,,, सभी की बातों को सुनने के बाद वह लड़का बोला,,,,)
यार मैं भी यही सोच रहा था अगर बिस्तर पर से उठकर जो औरत बाथरूम की तरफ गई है अगर सच में उसकी मां होगी तो मैं भी ट्राई करूंगा उसकी मां को चोदने को क्योंकि मैं तो सब कुछ देख चुका था बड़े आराम से उसकी मां मुझे दे देती,,,, लेकिन अंदर कमरे में उसकी मां नहीं बल्कि उसकी बुआ थी जो कुछ दिनों के लिए उसके घर आई थी अगर मैं उसकी मां को सामने से आई हुई ना देखा तो मुझे ऐसा ही लगता कि रमेश अपनी मां को चोद रहा था,,,।
धत् ,,, सारा मजा किरकिरा कर दिया,,, मुझे तो लग रहा था कि रमेश अपनी मां को ही चोद रहा था,,,,(उनमें से एक लड़का थोड़ा सा निराशा दिखाकर के बोला,,,)
मुझे भी तो ऐसा ही लग रहा था लेकिन जरा यह तो सोचो हम लोग जहां देख भी नहीं पाते हैं बुर को वही रमेश अपनी बुआ की जमकर चुदाई कर रहा है सोचो अपने और रमेश में कितना फर्क है उसकी किस्मत कितनी बुलंदियों पर है और हम लोग अभी भी सिर्फ याद करके हिला के काम चलाते हैं,,,,
हां यार बात तो सही कह रहा है हम लोगों से अच्छा तो रमेश ही है जो बुर का आनंद उठा रहा है,,,।