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Guest
ठीक है चाची चलता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही जाते जाते राजू ब्लाउज के ऊपर से ही कमला चाची की चूची को जोर से दबा कर भी हंसने लगा और हंसते हुए घर से बाहर निकल गया कमला चाची भी उसे घर से बाहर जाते हुए देख कर मुस्कुराती रहें क्योंकि इस उम्र में उसके जीवन में बहार आ गई थी,,,, वह पूरी तरह से संतुष्ट थी,,,,इस बात से अनजान की उन दोनों की संभोग लीला को उनकी बहू अपनी आंखों से देख चुकी है,,,.)
अपनी आंखों से अपनी सास की कामलीला देखने के बावजूद भी कमला चाची की बहू रमा बेहद खुश थी उसकी खुशी के पीछे एक राज छिपा हुआ था जो कि उसके मन में एक युक्ति को आकार दे रहा था,,,,भले ही वह राजू के नेट के दर्शन नहीं कर पाई थी लेकिन उसकी अद्भुत जबरदस्त भक्तों को देखकर और अपनी सास की बड़ी-बड़ी कहानी को देखकर जिस तरह से वह बड़े आराम से अपने लंड को उसकी गांड के बीचोबीच उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर कर रहा था उसे देख कर रमा को इस बात का एहसास हो गया था कि राजू के पास जबरदस्त अौजार है अगर वह अपनी बुर में ले ली तो एकदम मस्त हो जाएगी,,,,,, रमा चाहती तो अपनी सास और राजू के खेल को बिगाड़ सकती थी लेकिन वह ऐसा जानबूझकर नहीं की,,,, जिसमें उसका खुद का स्वार्थ छिपा हुआ था,,,।
औरत अपनी काम भावना क्या दिन होकर एकदम मजबूर हो जाती है फिर वह चाहे कोई भी हो बड़े घर की औरत हो या झोपड़े की,,,, फिर वह ऊंच-नीच छोटा बड़ा अमीर गरीब किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं देखती बस अपनी प्यास बुझाने में लग जाती है जिस तरह से कमला चाची कर रही थी अपनी उम्र का भी ख्याल नहीं था उन्हें नाती पोते वाली हो चुकी थी लेकिन बदन की गर्मी शांत करने के लिए उसे हमेशा एक मोटे और लंबे लंड की आवश्यकता थी जो कि आप उसे राजू से पूरी होने लगी थी,,,।
इस बात का आभास अच्छी तरह से होने के बावजूद भी कि उसकी बहू किसी भी वक्त घर पर आ सकती है फिर भी वह अपनी बहू के घर आने के बीच के समय का पूरा का पूरा फायदा उठाते हुए राजू के साथ संभोग जिला में मस्त हो गई चुनरी के अद्भुत सुख को प्राप्त करके वह पूरी तरह से संतुष्ट तो हो चुकी थी लेकिन वह इस बात से अनजान थी की खिड़की पर खड़ी होकर उसकी बहू उन दोनों की कामलीला को अपनी आंखों से देख चुकी है,,,, राजू के हर एक धक्के से कमला चाची इस उमर में भी मस्त हो जा रही थी पहली बार किसी का लंड वह अपने बच्चेदानी के ऊपर महसूस कर पा रही थी,,,राजू की एक बात कमला चाची को बहुत अच्छी लगती थी कि वह चाहे जितनी भी तेजी से जितनी देर तक धक्के लगा ले लेकिन थकता नहीं था,,, बल्कि वाह खुद उसके ही पसीने छुड़ा दे रहा था राजू से चुदवाते समय कमला चाची पसीने से तरबतर हो चुकी थी और पसीना उनके बदन के हर एक अंग से मोती के दाने की तरह टपक रहा था,,,, जोर-जोर से चपत लगाकर कमला चाची की गोरी गांड को टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,,,,,
राजू के जाने के बाद थोड़ी देर बाद रमा घर के अंदर प्रवेश की तो देखी के सामने हेड पंप के नीचे बैठ कर उसकी सास नहा रही थी,,,, रमा को देखते ही वह बोली,,,।
अरे बहु आज बहुत देर लगा दी,,,, कहां रह गई थी,,,
कहीं नहीं माजी घास काटने में देर हो गई,,,,
(अपनी सास को देखकर अपने होठों पर मंद मुस्कान लाते हुए वह बोली अपने मन में बोल रही थी कि आई तो मैं ठीक समय पर ही थी तुम दोनों की कामलीला देखकर वापस चली गई थी,,,,, बड़ी मासूमियत के साथ हेड पंप के पास बैठ कर नहा रही अपनी सास को देखकर रमा अपने मन में यही सोचने लगी थी इस उमर में पहुंचने के बावजूद भी उसकी सास का जोस एकदम कायम है,,,, और मन में इस बात से इर्षया करने लगी की,,, इस उम्र में भी उसे जवान लंड नसीब हो रहा है,,,, और एक वह है कि शादी के 2 साल में ही उसका पति एकदम से थका थका रहने लगा है,,,,अपनी सांस पर उसे करो भी हो रहा था कि राजू के जबरदस्त धक्कों को भी वह बड़े आराम से झेल रही थी,,,,,।)
दूसरी तरफ राजू दोपहर के समय अपने घर पहुंचा तो उसे बड़े जोरों की भूख लगी हुई थी,,,,,,,घर पर उसकी मां और बुआ दोनों थी उसकी मां अपने कमरे में आराम कर रही थी,,, और उसकी बुआ खाना खा रही थी,,, अपनी बुआ को खाना खाते हुए देखकर राजू बोला,,,)
क्या बुआ अकेले अकेले खा रही हो मुझे तो बुला ली होती,,,,,,
अब खाना खाने के लिए भी तुझे निमंत्रण देना पड़ेगा जा जल्दी से हाथ मुंह धो कर आ जा मैं खाना निकाल देती हूं,,,,(अपनी बुआ को देखकर और उसकी बातों को सुनकर राजू के दिमाग में कुछ और चलने लगा है और वह धीरे से आगे बढ़कर उसके कान में बोला)
मां घर पर नहीं है क्या,,,,(राजू के कहने का मतलब को गुलाबी अच्छी तरह से समझ गए इसलिए उसे बोली,,)
धत्,,,,, भाभी अपने कमरे में ही है,,,,, और इस समय जैसा तू सोच रहा है वैसा कुछ भी होने वाला नहीं है इसलिए उस बारे में सोचना बंद कर दें,,,
क्या बुआ तुम भी,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर कुर्ती के ऊपर से ही अपनी बुआ की चूची को दबा दिया और मुस्कुराने लगा,,,)
आहहह क्या कर रहा है कुछ तो लिहाज कर तेरी मां बगल में आराम कर रही है,,,
तो क्या हुआ बुआ,,रात में भी तो वह बगल वाले कमरे में ही रहती है ना फिर भी तो हम दोनों चुदाई करते हैं,,,
चल भाग यहां से जल्दी से हाथ मुंह धोकर आजा,,,,
(अपनी बुआ की बात सुनकर,,,राजू समझ गया था कि इस समय उसकी दाल गलने वाली नहीं है इसलिए वह हाथ धोने चला गया था, ऐसा नहीं था कि इस समय गुलाबी का मन नहीं कर रहा था राजू की हरकत और उसकी बात को सुनकर उसका भी मन करने लगा था लेकिन वह किसी भी प्रकार का खतरा मोल लेना नहीं चाहती थी क्योंकि बगल में ही उसकी भाभी आराम कर रही थी अगर जरा सा भी भनक लग जाती तो और दोनों का खेल यहीं समाप्त हो जाता और ऐसा वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी वह इस मामले में बेहद सतर्कता से आगे बढ़ना चाहती थी,,,, जिस तरह से राजू ने जाते-जाते कुर्ती के ऊपर से उसकी चूची को दबाया था उसे से गुलाबी के बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी,,, लेकिन दोपहर के समय वह भी मजबूर भी चाह कर भी कुछ कर सकने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,,, थोड़ी देर में राजू हाथ धोकर आ गया और वहीं पास में बैठ कर खाना खाने लगा,,,, गुलाबी तो जैसे तैसे अपने आप को संभाल लेती थी लेकिन राजु से रहा नहीं जाता था खाना खाते समय भी वह गुलाबी के अंगों से छेड़खानी कर रहा था जिससे बार-बार गुलाबी उसका हाथ झटक देती थी लेकिन राजू कि वे छेड़खानी उसके बदन में उत्तेजना जगा रही थी उसे भी राजु की यह छेड़खानी अच्छी लग रही थी,,,,,,, राजू की उत्सुकता और उत्तेजना उम्र के इस दौर में एकदम लाजीमी थी,,, उसके जीवन की संभोग गाथा की अभी तो शुरुआत हुई थी,,, ऐसे में बदन की गर्मी शांत हो जाए ऐसा हो ही नहीं सकता अगर ऐसा शुरुआती दौर में हो जाए तो समझ लो कि वह मर्द किसी काम का नहीं,,, है,,,।
इसीलिए तो वह मुंह में निवाला डालते डालते हैं बार-बार उसकी चूची को दबा दे रहा था और गुलाबी उसे रोकने की कोशिश कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि बगल में ही उसकी भाभी सो रही है जो कि सो नहीं रही थी आराम ही कर रही थी,,,, ।
रहने दे तेरी मां का पता चल गया ना तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,
अरे बुआ कुछ भी पता नहीं चलेगा,,, चलो ना अंदर चलते हैं,,,
(राजू की हिम्मत और उसका उतावलापन देखकर गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी एक तरफ उसका मन अंदर जाने के लिए कर भी रहा था लेकिन उसे डर भी लग रहा था,,,,)
नहीं पागल हो गया क्या अभी कुछ भी नहीं वैसे भी तो रात अपनी ही है,,,
लेकिन बुआ मेरा तो खड़ा हो गया है,,,
खड़ा हो गया है तो इसे बिठा ले ,,, लेकिन अभी कुछ भी नहीं,,,,(गुलाबी उसकी दोनों टांगों के बीच उठे हुए भाग को देखते हुए बोली,,,)
क्या हुआ बुआ तुम डरती बहुत हो,,,
डरना पड़ता है क्योंकि आगे भी मजा लेना है इसलिए अगर अभी पकड़े गए तो सब कुछ बंद हो जाएगा बदनामी अलग से होगी,,,,।
अच्छा एक बार दिखा तो दो,,,,(गुलाबी की चूची को जोर से मसलते हुए बोला,,)
धत् पागल हो गया क्या तू,,,,,(फिर से राजू का हांथ हटाते हुए बोली,,,)
बुआ एकबार कुर्ती उपर करके दिखा दो ना,,,,
सच में तो बहुत शैतान है मैं कभी सोच नहीं थी कि तू ईतना बड़ा हारामी होगा,,,,
अब जो भी हूं जैसा भी हूं तुम्हारा ही हूं बुआ,,, मैं तो तुम्हारा दीवाना हो गया हुं,,,,
(राजू की बात पर गुलाबी मुस्कुराने लगी और चारों तरफ देखते हुए बोली,,,)
चल ठीक है एक बार दिखा देती हो लेकिन इस से ज्यादा कुछ भी नहीं जो कुछ भी करना है रात को करना,,,
ठीक है बुआ कुछ नहीं तो देख कर ही काम चला लूंगा,,,
(राजू मुंह में निवाला डालते हुए बोला,,, राजू की हरकतों ने गुलाबी का भी मन मचल ने को मजबूर कर दिया था उसके तन बदन में गर्माहट जाने लगी थी एक बार तो उसका मन किया कि कमरे में जाकर एक बार दोपहर के समय ही चुदाई का मजा ले लिया जाए लेकिन दूसरा मन उसे ऐसा करने से रोक रहा था,,,, फिर भी ज्यादा कुछ नहीं वह राजू की बात मानते हुए उसे अपनी चूची दिखाने के लिए राजी हो गई थी,,,,, और एक बार फिर से घर के चारों तरफ नजर डालकर धीरे से अपनी कुर्ती को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,, यह देखकर राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह उसी तरह से बैठा रह गया और अपनी बुआ को देखता रह गया धीरे-धीरे उसकी अपनी कुश्ती को अपनी छाती के ऊपर तक उठा दी और उसकी दोनों चूंचियां खुली हवा में सांस लेने लगी,,,,
अपनी आंखों से अपनी सास की कामलीला देखने के बावजूद भी कमला चाची की बहू रमा बेहद खुश थी उसकी खुशी के पीछे एक राज छिपा हुआ था जो कि उसके मन में एक युक्ति को आकार दे रहा था,,,,भले ही वह राजू के नेट के दर्शन नहीं कर पाई थी लेकिन उसकी अद्भुत जबरदस्त भक्तों को देखकर और अपनी सास की बड़ी-बड़ी कहानी को देखकर जिस तरह से वह बड़े आराम से अपने लंड को उसकी गांड के बीचोबीच उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर कर रहा था उसे देख कर रमा को इस बात का एहसास हो गया था कि राजू के पास जबरदस्त अौजार है अगर वह अपनी बुर में ले ली तो एकदम मस्त हो जाएगी,,,,,, रमा चाहती तो अपनी सास और राजू के खेल को बिगाड़ सकती थी लेकिन वह ऐसा जानबूझकर नहीं की,,,, जिसमें उसका खुद का स्वार्थ छिपा हुआ था,,,।
औरत अपनी काम भावना क्या दिन होकर एकदम मजबूर हो जाती है फिर वह चाहे कोई भी हो बड़े घर की औरत हो या झोपड़े की,,,, फिर वह ऊंच-नीच छोटा बड़ा अमीर गरीब किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं देखती बस अपनी प्यास बुझाने में लग जाती है जिस तरह से कमला चाची कर रही थी अपनी उम्र का भी ख्याल नहीं था उन्हें नाती पोते वाली हो चुकी थी लेकिन बदन की गर्मी शांत करने के लिए उसे हमेशा एक मोटे और लंबे लंड की आवश्यकता थी जो कि आप उसे राजू से पूरी होने लगी थी,,,।
इस बात का आभास अच्छी तरह से होने के बावजूद भी कि उसकी बहू किसी भी वक्त घर पर आ सकती है फिर भी वह अपनी बहू के घर आने के बीच के समय का पूरा का पूरा फायदा उठाते हुए राजू के साथ संभोग जिला में मस्त हो गई चुनरी के अद्भुत सुख को प्राप्त करके वह पूरी तरह से संतुष्ट तो हो चुकी थी लेकिन वह इस बात से अनजान थी की खिड़की पर खड़ी होकर उसकी बहू उन दोनों की कामलीला को अपनी आंखों से देख चुकी है,,,, राजू के हर एक धक्के से कमला चाची इस उमर में भी मस्त हो जा रही थी पहली बार किसी का लंड वह अपने बच्चेदानी के ऊपर महसूस कर पा रही थी,,,राजू की एक बात कमला चाची को बहुत अच्छी लगती थी कि वह चाहे जितनी भी तेजी से जितनी देर तक धक्के लगा ले लेकिन थकता नहीं था,,, बल्कि वाह खुद उसके ही पसीने छुड़ा दे रहा था राजू से चुदवाते समय कमला चाची पसीने से तरबतर हो चुकी थी और पसीना उनके बदन के हर एक अंग से मोती के दाने की तरह टपक रहा था,,,, जोर-जोर से चपत लगाकर कमला चाची की गोरी गांड को टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,,,,,
राजू के जाने के बाद थोड़ी देर बाद रमा घर के अंदर प्रवेश की तो देखी के सामने हेड पंप के नीचे बैठ कर उसकी सास नहा रही थी,,,, रमा को देखते ही वह बोली,,,।
अरे बहु आज बहुत देर लगा दी,,,, कहां रह गई थी,,,
कहीं नहीं माजी घास काटने में देर हो गई,,,,
(अपनी सास को देखकर अपने होठों पर मंद मुस्कान लाते हुए वह बोली अपने मन में बोल रही थी कि आई तो मैं ठीक समय पर ही थी तुम दोनों की कामलीला देखकर वापस चली गई थी,,,,, बड़ी मासूमियत के साथ हेड पंप के पास बैठ कर नहा रही अपनी सास को देखकर रमा अपने मन में यही सोचने लगी थी इस उमर में पहुंचने के बावजूद भी उसकी सास का जोस एकदम कायम है,,,, और मन में इस बात से इर्षया करने लगी की,,, इस उम्र में भी उसे जवान लंड नसीब हो रहा है,,,, और एक वह है कि शादी के 2 साल में ही उसका पति एकदम से थका थका रहने लगा है,,,,अपनी सांस पर उसे करो भी हो रहा था कि राजू के जबरदस्त धक्कों को भी वह बड़े आराम से झेल रही थी,,,,,।)
दूसरी तरफ राजू दोपहर के समय अपने घर पहुंचा तो उसे बड़े जोरों की भूख लगी हुई थी,,,,,,,घर पर उसकी मां और बुआ दोनों थी उसकी मां अपने कमरे में आराम कर रही थी,,, और उसकी बुआ खाना खा रही थी,,, अपनी बुआ को खाना खाते हुए देखकर राजू बोला,,,)
क्या बुआ अकेले अकेले खा रही हो मुझे तो बुला ली होती,,,,,,
अब खाना खाने के लिए भी तुझे निमंत्रण देना पड़ेगा जा जल्दी से हाथ मुंह धो कर आ जा मैं खाना निकाल देती हूं,,,,(अपनी बुआ को देखकर और उसकी बातों को सुनकर राजू के दिमाग में कुछ और चलने लगा है और वह धीरे से आगे बढ़कर उसके कान में बोला)
मां घर पर नहीं है क्या,,,,(राजू के कहने का मतलब को गुलाबी अच्छी तरह से समझ गए इसलिए उसे बोली,,)
धत्,,,,, भाभी अपने कमरे में ही है,,,,, और इस समय जैसा तू सोच रहा है वैसा कुछ भी होने वाला नहीं है इसलिए उस बारे में सोचना बंद कर दें,,,
क्या बुआ तुम भी,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर कुर्ती के ऊपर से ही अपनी बुआ की चूची को दबा दिया और मुस्कुराने लगा,,,)
आहहह क्या कर रहा है कुछ तो लिहाज कर तेरी मां बगल में आराम कर रही है,,,
तो क्या हुआ बुआ,,रात में भी तो वह बगल वाले कमरे में ही रहती है ना फिर भी तो हम दोनों चुदाई करते हैं,,,
चल भाग यहां से जल्दी से हाथ मुंह धोकर आजा,,,,
(अपनी बुआ की बात सुनकर,,,राजू समझ गया था कि इस समय उसकी दाल गलने वाली नहीं है इसलिए वह हाथ धोने चला गया था, ऐसा नहीं था कि इस समय गुलाबी का मन नहीं कर रहा था राजू की हरकत और उसकी बात को सुनकर उसका भी मन करने लगा था लेकिन वह किसी भी प्रकार का खतरा मोल लेना नहीं चाहती थी क्योंकि बगल में ही उसकी भाभी आराम कर रही थी अगर जरा सा भी भनक लग जाती तो और दोनों का खेल यहीं समाप्त हो जाता और ऐसा वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी वह इस मामले में बेहद सतर्कता से आगे बढ़ना चाहती थी,,,, जिस तरह से राजू ने जाते-जाते कुर्ती के ऊपर से उसकी चूची को दबाया था उसे से गुलाबी के बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी,,, लेकिन दोपहर के समय वह भी मजबूर भी चाह कर भी कुछ कर सकने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,,, थोड़ी देर में राजू हाथ धोकर आ गया और वहीं पास में बैठ कर खाना खाने लगा,,,, गुलाबी तो जैसे तैसे अपने आप को संभाल लेती थी लेकिन राजु से रहा नहीं जाता था खाना खाते समय भी वह गुलाबी के अंगों से छेड़खानी कर रहा था जिससे बार-बार गुलाबी उसका हाथ झटक देती थी लेकिन राजू कि वे छेड़खानी उसके बदन में उत्तेजना जगा रही थी उसे भी राजु की यह छेड़खानी अच्छी लग रही थी,,,,,,, राजू की उत्सुकता और उत्तेजना उम्र के इस दौर में एकदम लाजीमी थी,,, उसके जीवन की संभोग गाथा की अभी तो शुरुआत हुई थी,,, ऐसे में बदन की गर्मी शांत हो जाए ऐसा हो ही नहीं सकता अगर ऐसा शुरुआती दौर में हो जाए तो समझ लो कि वह मर्द किसी काम का नहीं,,, है,,,।
इसीलिए तो वह मुंह में निवाला डालते डालते हैं बार-बार उसकी चूची को दबा दे रहा था और गुलाबी उसे रोकने की कोशिश कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि बगल में ही उसकी भाभी सो रही है जो कि सो नहीं रही थी आराम ही कर रही थी,,,, ।
रहने दे तेरी मां का पता चल गया ना तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,
अरे बुआ कुछ भी पता नहीं चलेगा,,, चलो ना अंदर चलते हैं,,,
(राजू की हिम्मत और उसका उतावलापन देखकर गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी एक तरफ उसका मन अंदर जाने के लिए कर भी रहा था लेकिन उसे डर भी लग रहा था,,,,)
नहीं पागल हो गया क्या अभी कुछ भी नहीं वैसे भी तो रात अपनी ही है,,,
लेकिन बुआ मेरा तो खड़ा हो गया है,,,
खड़ा हो गया है तो इसे बिठा ले ,,, लेकिन अभी कुछ भी नहीं,,,,(गुलाबी उसकी दोनों टांगों के बीच उठे हुए भाग को देखते हुए बोली,,,)
क्या हुआ बुआ तुम डरती बहुत हो,,,
डरना पड़ता है क्योंकि आगे भी मजा लेना है इसलिए अगर अभी पकड़े गए तो सब कुछ बंद हो जाएगा बदनामी अलग से होगी,,,,।
अच्छा एक बार दिखा तो दो,,,,(गुलाबी की चूची को जोर से मसलते हुए बोला,,)
धत् पागल हो गया क्या तू,,,,,(फिर से राजू का हांथ हटाते हुए बोली,,,)
बुआ एकबार कुर्ती उपर करके दिखा दो ना,,,,
सच में तो बहुत शैतान है मैं कभी सोच नहीं थी कि तू ईतना बड़ा हारामी होगा,,,,
अब जो भी हूं जैसा भी हूं तुम्हारा ही हूं बुआ,,, मैं तो तुम्हारा दीवाना हो गया हुं,,,,
(राजू की बात पर गुलाबी मुस्कुराने लगी और चारों तरफ देखते हुए बोली,,,)
चल ठीक है एक बार दिखा देती हो लेकिन इस से ज्यादा कुछ भी नहीं जो कुछ भी करना है रात को करना,,,
ठीक है बुआ कुछ नहीं तो देख कर ही काम चला लूंगा,,,
(राजू मुंह में निवाला डालते हुए बोला,,, राजू की हरकतों ने गुलाबी का भी मन मचल ने को मजबूर कर दिया था उसके तन बदन में गर्माहट जाने लगी थी एक बार तो उसका मन किया कि कमरे में जाकर एक बार दोपहर के समय ही चुदाई का मजा ले लिया जाए लेकिन दूसरा मन उसे ऐसा करने से रोक रहा था,,,, फिर भी ज्यादा कुछ नहीं वह राजू की बात मानते हुए उसे अपनी चूची दिखाने के लिए राजी हो गई थी,,,,, और एक बार फिर से घर के चारों तरफ नजर डालकर धीरे से अपनी कुर्ती को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,, यह देखकर राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह उसी तरह से बैठा रह गया और अपनी बुआ को देखता रह गया धीरे-धीरे उसकी अपनी कुश्ती को अपनी छाती के ऊपर तक उठा दी और उसकी दोनों चूंचियां खुली हवा में सांस लेने लगी,,,,