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Incest आनंद और तड़प (तन में उत्तेजना की हलचल )

ठीक है चाची चलता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही जाते जाते राजू ब्लाउज के ऊपर से ही कमला चाची की चूची को जोर से दबा कर भी हंसने लगा और हंसते हुए घर से बाहर निकल गया कमला चाची भी उसे घर से बाहर जाते हुए देख कर मुस्कुराती रहें क्योंकि इस उम्र में उसके जीवन में बहार आ गई थी,,,, वह पूरी तरह से संतुष्ट थी,,,,इस बात से अनजान की उन दोनों की संभोग लीला को उनकी बहू अपनी आंखों से देख चुकी है,,,.)

अपनी आंखों से अपनी सास की कामलीला देखने के बावजूद भी कमला चाची की बहू रमा बेहद खुश थी उसकी खुशी के पीछे एक राज छिपा हुआ था जो कि उसके मन में एक युक्ति को आकार दे रहा था,,,,भले ही वह राजू के नेट के दर्शन नहीं कर पाई थी लेकिन उसकी अद्भुत जबरदस्त भक्तों को देखकर और अपनी सास की बड़ी-बड़ी कहानी को देखकर जिस तरह से वह बड़े आराम से अपने लंड को उसकी गांड के बीचोबीच उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर कर रहा था उसे देख कर रमा को इस बात का एहसास हो गया था कि राजू के पास जबरदस्त अौजार है अगर वह अपनी बुर में ले ली तो एकदम मस्त हो जाएगी,,,,,, रमा चाहती तो अपनी सास और राजू के खेल को बिगाड़ सकती थी लेकिन वह ऐसा जानबूझकर नहीं की,,,, जिसमें उसका खुद का स्वार्थ छिपा हुआ था,,,।

औरत अपनी काम भावना क्या दिन होकर एकदम मजबूर हो जाती है फिर वह चाहे कोई भी हो बड़े घर की औरत हो या झोपड़े की,,,, फिर वह ऊंच-नीच छोटा बड़ा अमीर गरीब किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं देखती बस अपनी प्यास बुझाने में लग जाती है जिस तरह से कमला चाची कर रही थी अपनी उम्र का भी ख्याल नहीं था उन्हें नाती पोते वाली हो चुकी थी लेकिन बदन की गर्मी शांत करने के लिए उसे हमेशा एक मोटे और लंबे लंड की आवश्यकता थी जो कि आप उसे राजू से पूरी होने लगी थी,,,।

इस बात का आभास अच्छी तरह से होने के बावजूद भी कि उसकी बहू किसी भी वक्त घर पर आ सकती है फिर भी वह अपनी बहू के घर आने के बीच के समय का पूरा का पूरा फायदा उठाते हुए राजू के साथ संभोग जिला में मस्त हो गई चुनरी के अद्भुत सुख को प्राप्त करके वह पूरी तरह से संतुष्ट तो हो चुकी थी लेकिन वह इस बात से अनजान थी की खिड़की पर खड़ी होकर उसकी बहू उन दोनों की कामलीला को अपनी आंखों से देख चुकी है,,,, राजू के हर एक धक्के से कमला चाची इस उमर में भी मस्त हो जा रही थी पहली बार किसी का लंड वह अपने बच्चेदानी के ऊपर महसूस कर पा रही थी,,,राजू की एक बात कमला चाची को बहुत अच्छी लगती थी कि वह चाहे जितनी भी तेजी से जितनी देर तक धक्के लगा ले लेकिन थकता नहीं था,,, बल्कि वाह खुद उसके ही पसीने छुड़ा दे रहा था राजू से चुदवाते समय कमला चाची पसीने से तरबतर हो चुकी थी और पसीना उनके बदन के हर एक अंग से मोती के दाने की तरह टपक रहा था,,,, जोर-जोर से चपत लगाकर कमला चाची की गोरी गांड को टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,,,,,

राजू के जाने के बाद थोड़ी देर बाद रमा घर के अंदर प्रवेश की तो देखी के सामने हेड पंप के नीचे बैठ कर उसकी सास नहा रही थी,,,, रमा को देखते ही वह बोली,,,।

अरे बहु आज बहुत देर लगा दी,,,, कहां रह गई थी,,,

कहीं नहीं माजी घास काटने में देर हो गई,,,,

(अपनी सास को देखकर अपने होठों पर मंद मुस्कान लाते हुए वह बोली अपने मन में बोल रही थी कि आई तो मैं ठीक समय पर ही थी तुम दोनों की कामलीला देखकर वापस चली गई थी,,,,, बड़ी मासूमियत के साथ हेड पंप के पास बैठ कर नहा रही अपनी सास को देखकर रमा अपने मन में यही सोचने लगी थी इस उमर में पहुंचने के बावजूद भी उसकी सास का जोस एकदम कायम है,,,, और मन में इस बात से इर्षया करने लगी की,,, इस उम्र में भी उसे जवान लंड नसीब हो रहा है,,,, और एक वह है कि शादी के 2 साल में ही उसका पति एकदम से थका थका रहने लगा है,,,,अपनी सांस पर उसे करो भी हो रहा था कि राजू के जबरदस्त धक्कों को भी वह बड़े आराम से झेल रही थी,,,,,।)

दूसरी तरफ राजू दोपहर के समय अपने घर पहुंचा तो उसे बड़े जोरों की भूख लगी हुई थी,,,,,,,घर पर उसकी मां और बुआ दोनों थी उसकी मां अपने कमरे में आराम कर रही थी,,, और उसकी बुआ खाना खा रही थी,,, अपनी बुआ को खाना खाते हुए देखकर राजू बोला,,,)

क्या बुआ अकेले अकेले खा रही हो मुझे तो बुला ली होती,,,,,,

अब खाना खाने के लिए भी तुझे निमंत्रण देना पड़ेगा जा जल्दी से हाथ मुंह धो कर आ जा मैं खाना निकाल देती हूं,,,,(अपनी बुआ को देखकर और उसकी बातों को सुनकर राजू के दिमाग में कुछ और चलने लगा है और वह धीरे से आगे बढ़कर उसके कान में बोला)

मां घर पर नहीं है क्या,,,,(राजू के कहने का मतलब को गुलाबी अच्छी तरह से समझ गए इसलिए उसे बोली,,)

धत्,,,,, भाभी अपने कमरे में ही है,,,,, और इस समय जैसा तू सोच रहा है वैसा कुछ भी होने वाला नहीं है इसलिए उस बारे में सोचना बंद कर दें,,,

क्या बुआ तुम भी,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर कुर्ती के ऊपर से ही अपनी बुआ की चूची को दबा दिया और मुस्कुराने लगा,,,)

आहहह क्या कर रहा है कुछ तो लिहाज कर तेरी मां बगल में आराम कर रही है,,,

तो क्या हुआ बुआ,,रात में भी तो वह बगल वाले कमरे में ही रहती है ना फिर भी तो हम दोनों चुदाई करते हैं,,,

चल भाग यहां से जल्दी से हाथ मुंह धोकर आजा,,,,

(अपनी बुआ की बात सुनकर,,,राजू समझ गया था कि इस समय उसकी दाल गलने वाली नहीं है इसलिए वह हाथ धोने चला गया था, ऐसा नहीं था कि इस समय गुलाबी का मन नहीं कर रहा था राजू की हरकत और उसकी बात को सुनकर उसका भी मन करने लगा था लेकिन वह किसी भी प्रकार का खतरा मोल लेना नहीं चाहती थी क्योंकि बगल में ही उसकी भाभी आराम कर रही थी अगर जरा सा भी भनक लग जाती तो और दोनों का खेल यहीं समाप्त हो जाता और ऐसा वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी वह इस मामले में बेहद सतर्कता से आगे बढ़ना चाहती थी,,,, जिस तरह से राजू ने जाते-जाते कुर्ती के ऊपर से उसकी चूची को दबाया था उसे से गुलाबी के बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी,,, लेकिन दोपहर के समय वह भी मजबूर भी चाह कर भी कुछ कर सकने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,,, थोड़ी देर में राजू हाथ धोकर आ गया और वहीं पास में बैठ कर खाना खाने लगा,,,, गुलाबी तो जैसे तैसे अपने आप को संभाल लेती थी लेकिन राजु से रहा नहीं जाता था खाना खाते समय भी वह गुलाबी के अंगों से छेड़खानी कर रहा था जिससे बार-बार गुलाबी उसका हाथ झटक देती थी लेकिन राजू कि वे छेड़खानी उसके बदन में उत्तेजना जगा रही थी उसे भी राजु की यह छेड़खानी अच्छी लग रही थी,,,,,,, राजू की उत्सुकता और उत्तेजना उम्र के इस दौर में एकदम लाजीमी थी,,, उसके जीवन की संभोग गाथा की अभी तो शुरुआत हुई थी,,, ऐसे में बदन की गर्मी शांत हो जाए ऐसा हो ही नहीं सकता अगर ऐसा शुरुआती दौर में हो जाए तो समझ लो कि वह मर्द किसी काम का नहीं,,, है,,,।

इसीलिए तो वह मुंह में निवाला डालते डालते हैं बार-बार उसकी चूची को दबा दे रहा था और गुलाबी उसे रोकने की कोशिश कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि बगल में ही उसकी भाभी सो रही है जो कि सो नहीं रही थी आराम ही कर रही थी,,,, ।

रहने दे तेरी मां का पता चल गया ना तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,

अरे बुआ कुछ भी पता नहीं चलेगा,,, चलो ना अंदर चलते हैं,,,

(राजू की हिम्मत और उसका उतावलापन देखकर गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी एक तरफ उसका मन अंदर जाने के लिए कर भी रहा था लेकिन उसे डर भी लग रहा था,,,,)

नहीं पागल हो गया क्या अभी कुछ भी नहीं वैसे भी तो रात अपनी ही है,,,

लेकिन बुआ मेरा तो खड़ा हो गया है,,,

खड़ा हो गया है तो इसे बिठा ले ,,, लेकिन अभी कुछ भी नहीं,,,,(गुलाबी उसकी दोनों टांगों के बीच उठे हुए भाग को देखते हुए बोली,,,)

क्या हुआ बुआ तुम डरती बहुत हो,,,

डरना पड़ता है क्योंकि आगे भी मजा लेना है इसलिए अगर अभी पकड़े गए तो सब कुछ बंद हो जाएगा बदनामी अलग से होगी,,,,।

अच्छा एक बार दिखा तो दो,,,,(गुलाबी की चूची को जोर से मसलते हुए बोला,,)

धत् पागल हो गया क्या तू,,,,,(फिर से राजू का हांथ हटाते हुए बोली,,,)

बुआ एकबार कुर्ती उपर करके दिखा दो ना,,,,

सच में तो बहुत शैतान है मैं कभी सोच नहीं थी कि तू ईतना बड़ा हारामी होगा,,,,

अब जो भी हूं जैसा भी हूं तुम्हारा ही हूं बुआ,,, मैं तो तुम्हारा दीवाना हो गया हुं,,,,

(राजू की बात पर गुलाबी मुस्कुराने लगी और चारों तरफ देखते हुए बोली,,,)

चल ठीक है एक बार दिखा देती हो लेकिन इस से ज्यादा कुछ भी नहीं जो कुछ भी करना है रात को करना,,,

ठीक है बुआ कुछ नहीं तो देख कर ही काम चला लूंगा,,,

(राजू मुंह में निवाला डालते हुए बोला,,, राजू की हरकतों ने गुलाबी का भी मन मचल ने को मजबूर कर दिया था उसके तन बदन में गर्माहट जाने लगी थी एक बार तो उसका मन किया कि कमरे में जाकर एक बार दोपहर के समय ही चुदाई का मजा ले लिया जाए लेकिन दूसरा मन उसे ऐसा करने से रोक रहा था,,,, फिर भी ज्यादा कुछ नहीं वह राजू की बात मानते हुए उसे अपनी चूची दिखाने के लिए राजी हो गई थी,,,,, और एक बार फिर से घर के चारों तरफ नजर डालकर धीरे से अपनी कुर्ती को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,, यह देखकर राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह उसी तरह से बैठा रह गया और अपनी बुआ को देखता रह गया धीरे-धीरे उसकी अपनी कुश्ती को अपनी छाती के ऊपर तक उठा दी और उसकी दोनों चूंचियां खुली हवा में सांस लेने लगी,,,,
 
अपनी बुआ की मदमस्त चूचियों को देखकर राजू के मुंह में पानी आ गया और लंड की अकड़न बढ़ने लगी,,,वह अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर अपनी बुआ की चूची को पकड़ लिया और उसे दबाना शुरू कर दिया गुलाबी भी उत्तेजित हो रही थी इसके लिए उसकी चूची की निप्पल अंगूर के दाने की तरह एकदम कड़क हो गई थी,,,।

सहहहहह आहहहहहह,,, धीरे से तू तो बहुत जोर जोर से दबाता है,,,,।

धीरे-धीरे दबाने वाली चीज नहीं है बुआ,,, जितना जोर जोर से दबाऊंगा उतना मजा आएगा,,,,

दर्द भी बहुत करता है,,,,,

तो क्या हुआ मजा भी तो आता होगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही भोजन की थाली को एक तरफ करके घुटने के बल आगे बढ़ा और अपनी बुआ की चूची को मुंह में भर कर पीना शुरु कर दिया,,,,,)

आहहहह राजू क्या कर रहा है,,,,

पीने दो ना बुआ बहुत मजा आ रहा है,,,,

अरे हरामि रात को पी लेना,,,,

नहीं बुआ चोदने नहीं दे रही हो तो कम से कम पीने तो दो,,,,

तू बहुत शैतान हो गया है मानने वाला नहीं है,,,।

(इतना कहकर गुलाबी उसके सर पर हाथ रख दी और इधर-उधर देखने लगी कि कहीं कोई आ ना जाएवैसे किसी और के आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि बाहर दरवाजा बंद था और अंदर उसकी भाभी आराम कर रही थी अगर वह बाहर निकलती तो दरवाजा खुलने का आवाज साफ सुनाई दे देता,,,, लेकिन फिर भी गुलाबी पूरी तरह से सतर्क दी नानू कुछ करने के बावजूद भी राजू की मनमानी को देखते हुए उसे भी मजा आ रहा था जिस तरह से राजू ने उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से अपनी मुंह में लेकर पी रहा था गुलाबी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी उत्तेजना के मारे बीच-बीच में राजू उसकी चूचियों को दांतों से काट भी ले रहा था,,,,,)

बस कर अब बहुत हो गया,,,,,(राजू के मुंह को हटाने की कोशिश करते हुए बोली लेकिन राजू माना नहीं और थोड़ी देर बोल कर फिर से जुट गया मानो कि जैसे कोई छोटा बच्चा दूध पी रहा हो और उसका मन भरा ना हो,,,, राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था कृष की बुआ थोड़ा सा भी इजाजत देती तो इसी समय वह उसकी चुदाई कर देता,,, लेकिन वह भी जानता था कि समय ठीक नहीं है,,,, इसलिए थोड़ी देर और गुलाबी की चूची से मस्त होते हुए वह उसे छोड़ दिया और लंबी सांसे भरने लगा,,,, गुलाबी को भी बहुत मजा आ गया था उसकी बुर बहुत पानी छोड़ रही थी,,,। अपनी चूचियों की तरफ देखते हुए बोली,,,)

देख तूने कैसा लाल कर दिया है,,,,

चुसने से तो लाल हो ही जाएगा ना,,,,(अपनी तरफ से सफाई देते हुए बोला)

तू बहुत हारामी है,,,,(इतना कहकर अपनी कुर्ती को नीचे करके व्यवस्थित कर दी और खाना खाने लगी,,,, बगल वाले कमरे में सो रही मधु को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उसके पीठ पीछे उसका बेटा और उसकी ननद क्या गुल खिला रहे हैं,,,,, दिनभर की गरमा गरम मस्ती से गर्म होकर दोनों को रात का इंतजार था और रात को तेरी दोनों एक बार फिर से एक दूसरे में समाने की पूरी कोशिश करने लगे एक दूसरे को संतुष्ट करने के बाद एक दूसरे की बाहों में सो गए,,,, दूसरे दिन सुबह राजू की नींद खुली तो पहले उसे यही याद आया कि आज उसे पढ़ने के लिए जाना है उसका मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था लेकिन सोनी का गदराया बदन उसकी मादक खुशबू उसे बेचैन कर रही थी,,,, उसकी गोलाकार गांड को याद करके ही राजू उसकी तरफ आकर्षित हुआ जा रहा था,,,, ना चाहते हुए भी उसे जाना ही था भले पढ़ाई के लिए ना सही लेकिन उसके खूबसूरत बदन की खुशबू के लिए,,,,। उसे‌ बड़े चोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह तुरंत खटिया पर से उठ कर घर के पीछे की तरफ चला गया जहां पर उसकी गाय भैंस बकरीया बांधी हुई होती है ,,, वह तुरंत वहां पर गया और झाड़ियों के बीच जाकर खड़ा हो गया और तुरंत अपने पजामे को नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाल कर मुतना शुरू कर दिया,,,,,,सुबह का समय होने की वजह से प्राकृतिक रूप से उसका लंड पूरी तरह से टनटनाया हुआ था,,,,,, उसी समय मधु जानवरों को चारा देने के लिए झोपड़ी के अंदर गई हुई थी और बाहर की हलचल की आवाज को सुनकर बाहर देखने के लिए आई की बाहर कौन आया है,,,, और जैसे ही उसकी नजर राजू पर पड़ी तो पहले तो उसे सब कुछ सामान्य सही लगा लेकिन जैसे उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह खड़े होकर पेशाब कर रहा है तो अपने आप ही उसकी नजर उसकी दोनों टांगों के बीच चली गई और उस तरफ का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए,,,,राजू की पीठ मधुर की तरफ थी लेकिन वह थोड़ा सा भी चाहो पर पेशाब कर रहा था इसलिए मधु को सब कुछ साफ नजर आ रहा था मधुर ने अपनी आंखों से जो कुछ भी अभी देखी उसे देख कर उसे अपने आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था,,,,वह अपने मन में सोचने लगी कि लड्डू इतना बड़ा और मोटा भी हो सकता है वह तो कभी सपने में भी नहीं सोची थी क्योंकि उसने तो आज तक अपने पति के ही लंड को देखती आ रही थी और उसे अपनी बुर में लेती आ रही थी ,,,,,,, उसके बेटे का इतना बड़ा होगा वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी,,,, पल भर में ही मधु की सांसे तेज चलने लगी वह बड़े गौर से अपने बेटे के लंड को देख रही थी जिसमें से पेशाब की धार फुटकर बढ़े दूर तक गिर रही थी,,,, सुबह का समय होने की वजह से प्राकृतिक रूप से राजू के लंड का तनाव अपनी चरम सीमा पर था,,,,,,,,

पल-पल मधु की हालत खराब होती जा रही थी,,,, मधु को कोई बड़ी घटना याद आ गई कि किस तरह से कुएं में से बाल्टी खींचते समय राजू उसके पीछे खड़ा था और रस्सी को खींचते समय वह एकदम से उसके बदन से सटा हुआ था और उसे अपनी गांड के बीचो-बीच अपने बेटे के लंड की रगड़ और चुभन एकदम साफ महसूस हो रही थी,,, उस दिन ही मधु को ऐसा लगा था कि उसके बेटे का लंड दमदार है लेकिन इतना दमदार होगा वह आज अपनी आंखों से देख कर ही यकीन हो रहा था,,,,, पल भर में ही मधु एकदम उत्तेजित हो गई थी उत्तेजना के मारे सुबह-सुबह ही उसका गला सूखता जा रहा था,,,, जिसे वह अपने धूप से गिला करने की कोशिश कर रही थी,,,, राजू पेशाब करते हुएअपने लंड को अपनी उंगलियों का सहारा देकर पकड़े हुए था वैसे तो जिस तरह का उसका मोटा तगड़ा लंड था उसे उंगलियों से पकड़कर सहारा दे पाना मुश्किल हीं था उसे सहारा देने के लिए उसे पूरी तरह से अपनी हथेली में पकड़ कर रखना पड़ता लेकिन,,,, जिसकी बंदरिया उसी से नाचे इसीलिए तो राजू बड़े आराम से अपने मोटे तगड़े लंबे लंड को ऊंगलियों का सहारा देकर ही पकड़े हुए था और बीच-बीच में उसे झटके देकर ऊपर नीचे हिला दे रहा था,,, जिससे अपने बेटे के हिलते हुए लंड को देखकर मधु के दोनों टांगों के बीच अजीब सी सुरसुराहट पैदा हो रही थी,,,, अपने बदन की इस हलचल से मधु भी हैरान थी क्योंकि वह अपने बेटे के लिए लंड को देखकर अपने अंदर इस तरह की उत्तेजना का अनुभव कर रही थी जैसा कि कभी उसने सपने भी नहीं सोची थी और ना ही चाहती थी कि ऐसा कभी हो लेकिन यह सब ,, सब कुछ प्राकृतिक रूप से हो रहा था कि भले उसकी आंखों के सामने उसका बेटा खड़ा था लेकिन था तो वह एक मर्द ही और मधु उसकी मां होने के नाते ना सही लेकिन थी तो एक औरत ही इसलिए एक औरत का मन औरत की आंखें इस तरह का नजारा देखकर प्राकृतिक रूप से अपने अंदर उत्तेजना का अनुभव करने लगती है जैसा कि मधु कर रही थी,,,,,,।

राजू अपनी मस्ती में पेशाब कर रहा था उसे तो इस बात का आभास तक नहीं था कि पीछे झोपड़े में से उसकी मां उसकी हरकत को देख रही है वह अपनी मस्ती में ही अपने लंड को पकड़े जोर जोर से हिला रहा था,,,, यह उसके लिए प्राकृतिक रूप से औपचारिकता वश ही था,,,। लेकिन मधु के लिए यह उत्तेजना का भूचाल था जो उसके तन बदन उसके कोमल मन पर मदहोशी का हथोड़ा बरसा रहा था,,,। मधु का अपने मन पर बिल्कुल भी काबू नहीं रह गया एक मां होने के नाते उसे यह दृश्य देखना ही नहीं चाहिए था लेकिन उस दृश्य में अद्भुत आकर्षण था जोकि मधु को अपनी तरफ आकर्षित किए जा रहा था तभी तो वह एक मां होने के बावजूद भी अपने बेटे को ईस स्थिति में देखकर उत्तेजित हो रही थी,,,।उसे अपनी बुर की ली होती है मैं तो सो रही थी और इस बात से मैं तो एकदम से हैरान थी कि अपनी बेटी के लंड को देखकर वह इस तरह से अपने अंदर मदहोशी और उत्तेजना का अनुभव क्यों कर रही है,,,, ना चाहते हुए भी उसके कदम वहीं ठहर से गए थे जानवरों को चारा देना उनको पानी पिलाना वो एकदम से भूल चुकी थी,,,

मधु के लिए यह पहला मौका था जब वह अपने जवान बेटे के लंड को देख रही थी जो कि पूरी तरह से उसका लंड मर्दाना ताकत से भर चुका था जिसे देखकर मधु की अनुभवी आंखें भांप ली थी,,, इससे पहले वह बचपन में ही राजू के लंड को देखी थी तब वह छोटी सी नुनी ही था,,, लेकिन नुनी से कब लंड बन गया इस बात का एहसास मधु को अब जाकर हो रहा था,,,। मधु को अपनी बुर पूरी तरह से गिली होती हुई महसूस हो रही थी,,, एक अजब सी खुमारी उसके तन बदन को अपनी आगोश में लिए जा रही थी,,,और राजू ताकि अपनी मस्ती में पेशाब करना था सुबह का वक्त था इसीलिए बड़े जोर की पेशाब लगी थी और इसीलिए वह अभी तक पेशाब कर ही रहा था,,,, अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर अनजाने में ही अनायास उसके मन में यह ख्याल आ गया कि अगर उसका लंड उसकी बुर में जाएगा तो उसकी पूर्व में जाने में बड़ी मुश्किल होगी क्योंकि उसका लंड काफी मोटा है,,,, इस बात का ख्याल मन में आते ही वह अपने आप को अपने मन में झाड़ते हुए बोली,, हाय दैया यह क्या सोच रही है और वह भी अपने ही बेटे के बारे में छी छी,,,, ख्याल मन में आया कैसे,,,,,,,

ऐसा लग रहा था कि जैसे मन में आए इस ख्याल से मधु खुद ही शर्मिंदा हो गई थी लेकिन फिर भी वह अपनी नजरों को हटा नहीं रही थी उस नजारे को पूरी तरह से देख लेना चाहती थी जोकि धीरे-धीरे राजू पेशाब कर चुका था रात को अपनी बुआ की चुदाई करने के कारण उसकी बुर का काम रस और उसके खुद का काम रस लंड पर लगा हुआ था जो कि चिपचिपा महसूस हो रहा था,,,, अपने लंड पर लगे चिपचिपे पन से अपनी बुआ का ख्याल आते ही राजू अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर कर दो तीन बार उसे आगे पीछे करके मुट्ठ मारनेलगा और यह देख कर मुझे पूरी तरह से हैरान हो गई क्योंकि औरत होने के नाते वह मर्दों की हरकत से अच्छी तरह से वाकिफ थी वह अपने मन में सोचने लगी कि मर्द ऐसी हरकत एक औरत को चोदने के लिए और खुद ही अपना पानी निकालने के लिए करता है लेकिन आज यह हरकत क्यों कर रहा है यह बात उसे समझ में नहीं आ रही थी,,,,

वह सब सोच रही थी कि तभी राजू पेशाब कर लिया और अपने पर जाने को ऊपर करके वहां से चलता बना,,, तब जाकर मधु को राहत हुई क्योंकि उसे लगने लगा था कि शायद राजू भाई खड़े-खड़े अपना पानी निकाल लेगा और ना जाने क्यों यह देखने के लिए उसका मन मचल भी रहा था लेकिनउसके चले जाने के बाद मधु को इस बात से राहत थे कि उसका लड़का दूसरों की तरह बिल्कुल भी नहीं है,,, लेकिन आज इस तरह का नजारा उसने देखी थी उसके कोमल मन पर बहुत ज्यादा भारी पड़ रहा था,,,। जैसे तैसे करके वहां अपना मन काम में लगाने लगी,,,।

और राजू नहा धोकर नाश्ता करके तैयार हो गया था,,, जिंदगी में पहली बार वह पढ़ने के लिए जा रहा था,,,, घर से निकल ही रहा था कि तभी उसकी बुआ बोली,,,।

अरे अपनी मां का पांव छूकर आशीर्वाद तो ले लो पहली बार पढ़ने जो जा रहा है,,,

तुम ठीक कह रही हो बुआ,,,,(इतना कहकर वह तुरंत अपनी मां के पास गया जो की गुलाबी के पास ही खड़ी होकर मुस्कुरा रही थी क्योंकि उसका बेटा पहली बार पढ़ने से जा रहा था कुछ सीखने जा रहा था राजू अपनी मां के पास ऊपर आशीर्वाद लेने लगा उसकी मां भी उसे आशीर्वाद देते हुए बोली,,,)

तो खूब पढेगा लिखेगा,,,,

राजू अपनी मां का आशीर्वाद लेकर जाने ही वाला था कि उसे रोकते हुए मधु बोली,,,।

अरे कहां चला ,,, अपनी बुआ का तो पांव छू कर आशीर्वाद ले ले,,,,।

(अपनी मां की बातें सुनकर राजू एकटक गुलाबी की तरफ देखने लगा क्योंकि उसके पांव छूकर आशीर्वाद लेने में उसे हिचक से हो रही थी क्योंकि उन दोनों के बीच बुआ और भतीजा वाला रिश्ता बिल्कुल भी नहीं रह गया था रात भर वह अपनी बुआ की चुदाई करता था और सुबह कैसे उसके पांव छूकर आशीर्वाद ले ले,,, वह उसी तरह से खड़ा रह गया तो फिर से उसकी मां बोली,,,)

अरे देख क्या रहा है तुझसे बड़ी है तेरी बुआ है आशीर्वाद ले ले,,,,
 
चल मेरे भी पांव छूकर आशीर्वाद ले,,,, (गुलाबी जानबूझ कर उसे अपने पांव छूने के लिए बोली क्योंकि जिस तरह से वह खड़ा होकर उसको देख रहा था गुलाबी को डर था कि कहीं उसकी भाभी को शक ना हो जाए,,,, अपनी बुआ की बात सुनकर वह आगे बढ़ा और अपनी बुआ के पांव छूकर आशीर्वाद लेने लगा उसकी बुआ भी उसे आशीर्वाद देकर मुस्कुराते हुए उसे जाते हुए देखती रह गई,,,, राजु ,,,खुशी खुशी पढ़ने के लिए,,,, उसके जीवन का एक और अध्याय शुरू हो रहा था,,,।

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राजू पढ़ने जाने के लिए तैयार हो गया था,,,, उसके मन में भी बेहद उत्सुकता,, थी,,,, पढ़ने के लिए नहीं बल्कि सोनी से मिलने के लिए उसके बाद खुशबू को अपने अंदर महसूस करने के लिए,,,, उसका गोरा चिकना बदन राजू के मन भा गया था,,,,,,,, जब इतनी खूबसूरत मैम साब पढ़ाने वाली होंगी तो पढ़ने में मन किसका लगेगा,,,,,,,अच्छे से तैयार होकर बालों में तेल लगाकर कभी करके घर से निकल गया था और वह भी अपनी मां और अपनी डूबा का आशीर्वाद देकर अपनी मां का पैर छूकर आशीर्वाद लेकिन उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नजर नहीं आ रही थी लेकिन उसकी मां की कया अनुसार उसकी बुआ के पैर छूने में उसे शर्म महसूस हो रही थी क्योंकि उसकी बुआ के साथ उसके शारीरिक संबंध जो बन गए थे और वह उस औरत के पैर छूकर कैसे आशीर्वाद ले सकता है जिसकी रात भर चुदाई करता हो,,,,,,, पैर छूते वक्त भी राजू कैसा महसूस हो रहा था कि वह उसके पैर नहीं बल्कि उसकी बुर को हाथ लगा रहा हो,,,, राजू की असहजता को गुलाटी अच्छी तरह से पहचान गई थी इसलिए बात को संभालते हुए उस पर जोर देने लगी पैर छूने के लिए और वह पैर छु कर चला गया,, गुलाबी को भी अपने भतीजे को आशीर्वाद देने में असहजता महसूस हो रही थी लेकिन फिर भी वह उसे आशीर्वाद दे दि वह भी अपने मन में यही सोच रही थी कि जो लड़का रात भर अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालकर उसकी चुदाई करता हूं भला हुआ कैसे ऐसे लड़के को आशीर्वाद दे सकती है,,,, क्योंकि दोनों के बीच बुआ और भतीजा का रिश्ता तो खत्म हो चुका था एक औरत और मर्द का रिश्ता शुरू हो गया था,,,,।

दूसरे लड़के की पढ़ने के लिए तैयार हो चुके थे और रास्ते में सब इकट्ठा हो गए श्याम को राजू से पहले से ही जलन होती थी जब वह कमला चाची से बातें किया करता था और कमला चाची उसके ऊपर पूरी तरह से फिदा रहती थी अब तो छोटी मालकिन क्यों वहां पढ़ने जाना था और श्याम इसीलिए राजू से असहजता महसूस कर रहा था क्योंकि राजू उन सब में सबसे आकर्षक लड़का था और जब से हमने उसके मोटे तगड़े और लंबे लंड को देखा है तब से तो वह राजू से और ज्यादा जलने लगा है,,,, वह जानता था कि छोटी मालकिन भी उस पर ही फिदा हो जाएगी और उन लोगों की दाल गलने वाली नहीं है इसीलिए तो वहां छोटी मालकिन को राजू के बारे में बता ही नहीं रहा था वह तो अपने आप ही वह राजू का पता लगा ली थी,,,,,,

रास्ते में साथ साथ जाते हुए श्याम राजू को एक तरह से धमकाते हुए बोल रहा था,,,।

देख राजु वहां पर किसी भी प्रकार की चालाकी मत करना,,,,,, नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,,

क्या कर लेगा तू,,,, बोलना क्या कर लेगा तु,,, मैं वहां पर पढ़ने जा रहा हूं तेरी तरह ताका झांकी करने के लिए नहीं,,,,

इसीलिए कह रहा हूं कि वहां पर ज्यादा बनने की कोशिश मत करना,,,,(श्याम की बात सुनकर दूसरे लड़के उन दोनों को समझाते हुए अलग कर दिए,,, श्याम इस बात से हैरान था कि,,,वह कभी पलट कर जवाब नहीं देता था लेकिन अब उसकी बात का जवाब देने लगा था,,, यह बदलाव राजु में कैसे आया यह उसके समझ के बाहर था,,,, शायद यह बदलाव राजू मैं औरतों की संगत के कारण आया था वह बड़े अच्छे तरीके से औरतों को अपने लंड से संतुष्टि प्रदान कर रहा था,,,शायद औरतों को संतुष्टि प्रदान करने की ताकत की वजह से ही उसके व्यक्तित्व में बदलाव आने लगा था,,,,।

दूसरी तरफ सोनी बहुत खुश थी,,,,घर में बने गुसलखाने में वह अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर नहा रही थी,,, वैसे तो अगर वह ना भी ना आए तो कोई कह नहीं सकता था कि वह नहाई नहीं है एकदम गोरी चिट्टी होने के नाते वह हमेशा तरोताजा दिखाई देती थी लेकिन आज का दिन उसके लिए भी बहुत खास था आज वह अपने हुस्न का जादू पूरी तरह से राजू पर बिखेर देना चाहती थी,,,, इसलिए अपने बदन को रगड़ रगड़ कर नहा रही थी,,,,,,,

बड़े घराने की होने के नाते घर में ही सब सुख सुविधा मौजूद थीं,,, घर में बने गुशलखाने में आदम कद का आईना लगा हुआ थाजिसमें सोनी अपने प्रतिबिंब को देख रही थी और मन ही मन अपनी खूबसूरती पर गर्व कर रही थी,,,,,, एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतार कर वह नंगी हो चुकी थी,,,,। केवल उसके बदन पर मरून रंग की कच्छी थी,,,,,, वह जानती थी कि गांव में कोई भी औरत कच्छी नहीं पहनती थी,,, और वैसे भी गांव में किसी औरत को कच्छी के बारे में कुछ भी पता नहीं था,,, इसलिए तो गांव की औरतें साड़ी के अंदर और सलवार के अंदर नंगी ही रहती है,,, शायद सोनी भी दूसरी औरतों की तरह कभी कच्छी ना पहनती अगर वह,,, अपने पति के साथ कुछ दिन के लिए शहर रहने ना गई होती कौन से निकलकर शहर पहुंचने के बाद वहां की चकाचौंध भरी जिंदगी देकर सोनी पूरी तरह से पागल हो गई थी,,, जल्द ही वहां पर उसने एक सहेली बना ली थी और उसी के चलते उसे इस बात का ज्ञान हुआ कि,,, साड़ी के अंदर और ब्लाउज के अंदर औरतों के लिए पहनने के लिए एक और वस्त्र होता है जिसे ब्रा और पेंटी कहा जाता है,,, लेकिन सोनी ब्लाउज के अंदर पहनने वाले वस्त्र को बुरा तो कहती थी लेकिन साड़ी के अंदर पहनने वाली पैंटी को कच्छी कहती थी,,,, और अपने सहेली के द्वारा वह अपने लिए दर्जनों अंतर्वस्त्र खरीद कर रखी थी उसकी जिंदगी बड़े अच्छे से कट रही थी लेकिन दुर्भाग्यवश उसके पति का देहांत हो गया और वह फिर से गांव वापस आ गई और अपने बड़े भाई के घर रहने लगी,,,, यहां पर आकर वह ब्रा पहनना बंद कर दी क्योंकि उसके भाई ने उसकी चूचियों को दबा दबा कर एकदम खरबूजा जैसा कर दिया था और ब्रा का साइज छोटा था और कभी कबार वह किसी खास मौके पर कच्छी पहनी थी थी जिसमें उसे काफी उतेजना का अनुभव होता था,,,।

आईने के सामने खड़ी होकर,,, सोनी अपनी कच्छी को अपनी नाजुक उंगलियों में फंसाकर धीरे-धीरे उतारना शुरू कर दी,,,,, और देखते ही देखते अपनी मांसल चिकनी सुडोल जांघों से होते हुए वह अपनी लंबी टांग में से उस मारो नारंग की कच्छी को निकालकर वही नीचे रख‌दी,,, और बड़ी प्यार भरी नजरों से अपनी दोनों टांगों के बीच बस दो इंच की ऊभरी हुई दरार को देखने के लिए जो भी हल्के हल्के बालों से घीरी हुई थी,,,,, अपनी हथेली को उस पर रखकर हल्के से दबाते हुए अपने मन में सोचने लगी कि मर्दों की सबसे बड़ी कमजोरी यही है जिसके चलते और इस दुनिया में किसी को भी अपने वश में कर सकती हैं अपना मनचाहा काम करा सकती है,,,,,, जैसा कि वह अपनी बुरके बदोलत अपने भाई को पूरी तरह से अपने वश में की हुई थी,,, और उसका भाई भी अपनी छोटी बहन के रूप जाल में पूरी तरह से बंध सा गया था,,,।

सोनी अपनी बुर और हां तेरी रख कर उसे हल्के हल्के से सहला भी रही थी और उसे रगड़ कर गर्म भी कर रही थी,,, जिससे उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी,,,

उसे राजू याद आने लगा,,,, उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड हवा में लहराता हुआ नजर आने लगा जिसके बदौलत सोनी इतना तर कट रची थी,,,,यह सारा ताम झाम राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड के प्रति आकर्षण का ही नतीजा था,,,वह किसी भी कीमत पर राजु के मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर के अंदर लेना चाहती थी,,,,, उत्तेजना से भरी हुई सोनी वैसे भी पहले से ही कामुक औरत थी,,, और इस समय राजू टैलेंट को याद करके वह पूरी तरह मदहोश हो सो चुकी थी,,, उसकी बुर से काम रस टपक रहा था,,, ऊससे रहा नहीं जा रहा था और वह,,,, गुसलखाना का दरवाजा खोलकर गुसलखाने से बाहर निकल गई,, और वह भी एकदम नंगी,,, बेझिझक उसके चेहरे पर शर्म का कोई भाव नहीं था,,, वैसे भी वह जानती थी कि घर में कोई भी नहीं है और वह इस समय पूरी हवेली में एकदम अकेली थी इसलिए वह भी झिझक बिना कपड़ों के गुशल खाने से बाहर निकल गई थी और चहल कदमी करते हुए रसोई घर की तरफ जा रही थी,,,,

उसकी चाल एकदम मादक थी उसके नितंबों की थिरकन अद्भुत थी,,, कमर की बलखाहट,,, कयामत ढा रही थी छातियों की शोभा बढ़ा रही दोनों दशहरी आम सीना ताने किसी सरहद पर तैनात जवान कि तरह आगे बढ़ रही थी,,, दिन रात लाला मुंह में भरकर दबाती हुई अपनी बहन की चूची और कार आसान कर रहा था लेकिन फिर भी सोनी की चूचीयों की कडकपन बरकरार थी,,,, पतली कमर के नीचे मैं मदमस्त उभार ली हुई गांड,,, कि दोनों फांकें आपस में रगड़ खा रही थी जिससे पूरे बदन में और ज्यादा गर्मी पैदा हो रही थी,,, सोनी अपनी खूबसूरती और अपनी खूबसूरत बदन पर गर्व करते हुए और ज्यादा इतरा कर चल रही थी वह तो अच्छा था कि इस हार ने उसे देखने वाला इस समय कोई नहीं था अगर उसे हिसाब में कोई देख लेता तो शायद उसके साथ मनमानी करने पर उतारू हो जाता या तो देख भर पानी से ही उसका पानी निकल जाता वैसे भी सोने कीमत मस्त जवानी बेलगाम थी,,, और बेलगाम जवानी को काबू में करने के लिए हट्टा कट्टा नौजवान की जरूरत थी,,, जो अपने मदमस्त मोटे तगड़े लंबे लंड रुपी खूंटे में बांध सके,,,,

सोनी के लिए यह पहली बार नहीं था कि वह हवेली में इधर से उधर पूरे कपड़े उतार कर नंगी घूम रही हो ऐसा वह पहले भी कर चुकी थी,,,, खास करके लाला की मौजूदगी में क्योंकि वह खुद,,, अपनी छोटी बहन सोनी को घर में उसकी मौजूदगी में जब वह उस की चुदाई करके मस्त हो गया हो तब उसे बिना कपड़ों के हवेली में घूमने के लिए रहता था ताकि वह घर में इधर से उधर नंगी घूमती हुई अपनी बहन की नंगी बड़ी बड़ी गांड को देखकर और उसकी रबड़ के गेंद की तरह उछलती हुई चुचियों को देखकर फिर से जोश में आ सके और फिर से अपने लंड को खड़ा करके उसकी बुर में डालकर उसकी चुदाई कर सके और ऐसा होता भी था,,,,,

बिना कपड़ों के घर में इधर से उधर खूब मैंने सोनी को भी ज्यादा तेजना का अनुभव होता था और वैसे भी वह इस समय काफी उत्तेजित हो चुकी थी,,, रसोई घर में पहुंचते हैं अपने हाथों से तोड़ कर लाई हुई ताजी सब्जियों के बीच रखे हुए उस मोटे तगड़े लंबे बैगन को ढुंढने लगी जो कि वह आज सुबह-सुबह ही खेतों में जाकर सब्जियों के साथ तोड़कर अपने लिए लाई थी,,, उसे हाथ में लेते ही उसके गोरे गोरे गाल शर्म के मारे लाल हो गए ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके हाथों में बैगन नहीं राजू का लंड आ गया हो,,,

वह तुरंत उस बेगन को लेकर वापस गुसल खाने में आ गई,,,।

ऐसा लग रहा था कि जैसे वह गुसल खाने में बेगन नहीं बल्कि किसी जवान लड़की को लेकर आई हो इस तरह से वह काफी उत्साहित नजर आ रही थी,,, वह अपनी हथेली में उस बेगन की मोटाई को लेकर राजू के लंड के बारे में सोच रही थी,,, अपने मन में उस बैगन की तुलना राजू के लंड से कर रही थी,,,, उस पर ढेर सारा थूक लगाकर वह एक टांग उठा कर टेबल पर रख दी और उस बैगन के टॉप को अपनी गुलाबी दूर के छेद के मुहाने पर रखकर धीरे धीरे उसे अंदर की तरफ जाने लगी और अपनी आंखों को बंद कर ली,,, आंखों को बंद करके वह राजू के बारे में कल्पना कर रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे राजू उसकी पतली कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने मौटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डाल रहा हो,,,। इस ख्याल से सोनी पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी और एक ही बार में,, पूरे बैगन को अपनी बुर की गहराई में डाल दी,,, कुर्सी धीरे धीरे अंदर बाहर करते हो यह सोचने लगी कि राजू अपने लंड को उसकी बुर में डालकर धीरे-धीरे अपनी कमर हिला कर उसे चोद रहा है,,,,।

यह ख्याल उसके लिए पूरी तरह से मदहोश कर देने वाला था वह एकदम मस्त हुए जा रही थी,,,,ओहहह राजू और जोर से राजू और जोर से,,,, ऐसा कहते हुए सोनी पूरी तरह से बावली होकर बैगन से मजा ले रही थी,,,, और देखते ही देखते वह एकदम से झड़ गई,,, इतनी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव वह पहली बार कर रही थी,,,, शांत होने के बाद वह बैंगन का पानी से धोकर वही रख दीऔर नहाने के बाद उसे अपने साथ वापस लेकर आई और रसोई घर में रखकर अपने कमरे की तरफ चल दी और वह भी उसी तरह से एकदम नंगी,,,,।

थोड़ी ही देर में वो बड़े अच्छे से तैयार हो गई सोनी पहले से ही ज्यादा खूबसूरत थी लेकिन आज उसकी खूबसूरती निखर कर सामने आ रही थी और वह,,, आम के बगीचे की तरफ चल दी,,,।

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सोनी आज बहुत खुश नजर आ रही थी,,,, जिसे वह महीनों से ढूंढ रही थी आज वह उसके पास पढ़ने के लिए आ रहा था सोनी को यह पता नहीं था कि वह उसे वास्तव में शिक्षा का अभ्यास कराने के लिए बुला रही थी या,,, संभोग कला के अध्याय के हर एक पन्ने को बड़ी बारीकी से पढ़ाने के लिए,,,,,,, सोनी को अपनी मदमस्त जवानी पर पूरा भरोसा था कि वह राजू को अपनी दोनों टांगों के बीच लेकर आएगी,,, और अपनी प्यासी जवानी की प्यास बुझाएगी,,, राजू के जबरदस्त लंड की वजह से उसकी रातों की नींद हराम हो गई थी,,, दिन रात उसकी आंखों के सामने राजू का टनटनाया हुआ लंड ही नजर आता था,,। जिसे पाने के लिए उसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए उसका तन बदन मचल रहा था,,,,,।किसी भी हाल में वह राज्यों को अपने आगे घुटने टेक देने पर मजबूर करने के लिए पूरी तैयारी के साथ घर से निकली थी,,, अपने नितंबों पर साड़ी का कसाव कुछ ज्यादा ही बढ़ा कर उसने साड़ी को पहनी थी,,, ताकि उसकी गांड और ज्यादा बड़ी लगे क्योंकि वह अच्छी तरह से जानते थे कि मर्दों की निगाह औरतों के किस अंग पर सबसे पहले पडती है और सबसे ज्यादा आकर्षित करती है,,, औरतों की बड़ी बड़ी गांड देखकर ही मर्दों की उत्तेजना ज्यादा बढ़ जाती है इसीलिए वह किसी भी प्रकार की कसर छोड़ना नहीं चाहती थी वह चाहती थी कि उसकी बड़ी-बड़ी मटकती गांड देखकर राजू पूरी तरह से मदहोश हो जाए उसका ईमान डगमगा जाए,,,, और इसीलिए ब्लाउज भी अपनी चूचियों की साईज से छोटा ही पहनी थी,,, और उसकी चुचियों की बीच की गहरी लकीर काफी लंबी नजर आ रही थी,,,, और आधे से ज्यादा चुची ब्लाउज से बाहर जा रही थी,,,, और आज उसने साड़ी भी पारदर्शी पहनी हुई थी जिसमें से सब कुछ नजर आ रहा था,,, कुल मिलाकर यह सब सोनी ने राजू के लिए जाल बिछा कर रखी थी उसे एक पंछी की तरह अपनी जवानी के जाल में फंसाना चाहती थी,,,,और वैसे भी दुनिया का कौन सा मर्द होगा जो ऐसी खूबसूरत औरत की मदमस्त जवानी के जाल में फंसना चाहता हो,,,,,,

आम का बगीचा सोनी का ही था गांव से अलग होने की वजह से यहां पर कोई आता जाता नहीं था इसलिए शिक्षा और संभोग के लिए ये जगह बहुत अच्छी थी,,,,,,, सोनी ऊंची नीची पगडंडियों से होती हुई आगे बढ़ रही थी और ऊंची नीची पगडंडियों पर पैर रखने की वजह से उसकी गांड की थिरकन कुछ ज्यादा ही बढ़ जा रही थी,,, बेहद मादक और अद्भुत दृश्य था,,, सोनी को इस तरह से ऊंची नीची पगडंडियों पर चलते हुए देखना भी,,किस्मत की बात थी उसकी मदमस्त कर देने वाली गांड की चाल देखकर अच्छे अच्छों का लंड खड़ा हो जाता था और यह बात सोनी भी अच्छी तरह से जानती थी,,,, उसके लिए यह बात सबसे अच्छी थी कि वह काम से बाहर रहती थी और गांव और बगीचे के बीच का रास्ता हमेशा सुनसान रहता था,,,, इसलिए उसकी ऐसी मादक चाल देखने वाला वहां कोई नहीं था,,,।

थोड़ी देर में चलते-चलते सोनी अपने गंतव्य स्थल पर पहुंच गई,,, आम का बगीचा काफी बड़ा था,, और काफी खाना भी था उसे उसे बड़े-बड़े पेड़ और सभी पेड़ों पर आम लगे हुए थे,,,,, लदा लद आम लगे होने के कारण नजारा काफी खूबसूरत दिखाई दे रहा था,,,,,,, आम के बगीचे में एक झोपड़ी नुमा घर बना हुआ था,,,, जिसमें आम की रखवाली करने वाला माली रहता था लेकिन अभी वहां कोई नहीं रहता था,,,, पास में ही पानी पीने के लिए हेड पंप लगा हुआ था,,,,।

राजू श्याम और उसके दोस्त एक घने पेड़ के नीचे खड़े होकर सोनी का इंतजार कर रहे थे,,,,वह लोग आम के बगीचे को चकर पकर देख रहे थे क्योंकि उनमें से कोई भी यहां पर कभी भी नहीं आया था और इतने सारे आम लगे होने की वजह से वह लोगों के मुंह में पानी आ रहा था,,,, राजू को तो केवल सोनी का ही इंतजार था,,,, और सामने से आती हुई देखकर राजू का मन हर्षोल्लास से भर गया,,, उसके दिल की धड़कन तेज हो गई ऐसा लग रहा था कि जैसे आसमान से उतरकर कोई परी उसके सामने चलती हुई उसके पास आ रही हो,,,, अद्भुत मादस चाल देखकर राजू के साथ साथ बाकी लोगों का भी दिल मचलने लगा था,,,, सोनी बला की खूबसूरत थी,,,,। सभी के सभी आख फाड़े उसी को ही देख रहे थे,,,, उसका जलवा खूबसूरती अद्भुत थी,,,। पास में पहुंचते ही वह लोग शालीनता दिखाते हुए हाथ जोड़कर सोनी का अभिवादन किया जवाब में इतना भी मुस्कुरा कर उन लोगों का अभिवादन की,,,, खास करके उसकी नजर राजू पर ही टिकी हुई थी उसका भोला मासूम चेहरा देखकर सोनी को यकीन नहीं हो रहा था कि इतने मासूम भोले चेहरे वाले लड़के के पजामे में बलशाली औजार होगा,,,।

वह मादक मुस्कान बिखेरते हुए राजू से बोली,,,,

तुम जाओ पहले उसमें से टेबल लेकर के आओ,,,(उस घास फूस की झोपड़ी की तरफ उंगली से इशारा करते हुए बोली,,,आते ही राजू से बातचीत की शुरुआत होते ही राजू तो मन ही मन प्रसन्न होने लगा लेकिन श्याम अंदर ही अंदर क्रोधित होने लगा खुश होकर राजू तुरंत और छोकरी की तरफ गया और लकड़ी से बने दरवाजे को धीरे से खोलकर अंदर से टेबल लेकर बाहर आ गया,,,,।)

हां ठीक है इसे यहां पर रख दो,,,,(आपके घने पेड़ के नीचे छांव देखकर सोनी वही टेबल रखने के लिए बोली जिस पर बैठकर वह उन लोगों को पढ़ाने वाली थी,,, राजू अच्छे से साफ करके टेबल वही रख दिया,,,, खास करके टेबल के ऊपर वाले भाग को वह अच्छे से साफ करके धुल मिटटी साफ कर दिया था ताकि,,,उसकी साड़ी गंदी ना हो जाए क्योंकि टेबल पर ही वह अपनी खूबसूरत गांड रखकर बैठने वाली थी,,,,, राजू के हाऊ भगत को देखकर सोनी मन ही मन खुश होने लगी और मुस्कुराते हुए टेबल पर अपनी गांड रख कर बैठ गई,,,,)

अब तुम लोग बैठ जाओ,,,,

(सोनी की बात सुनते ही लड़की नीचे जमीन पर बैठ गए,,, और वह एक शिक्षिका के तौर पर उन लड़कों से बोली,,)

आज तुम लोगों का पहला दीन है,,,, इसलिए एक दूसरे का परिचय होना जरूरी है,,,, मेरा नाम सोनी है,,,, और तुम लोग अपना नाम एक-एक करके बताओ,,,,

(उसकी बात सुनकर सब लड़के बारी-बारी से अपना नाम बताने लगे,,, राजू की बारी है आते ही सोनी बोली)

तुम्हारा नाम क्या है,,,,

मेरा नाम राजू है,,,

बड़ा प्यारा नाम है,,,,

(इतना कहकर सोनी मुस्कुराने लगी राजू को भी सोने की बातें उसकी मुस्कुराहट बहुत अच्छी लग रही थी खास करके उसका ध्यान सोनी की छातियों पर जा रहा था,,, क्योंकि पारदर्शी साड़ी पहनी होने की वजह से उसकी भरपूर छातियां अपने संपूर्ण आभा बिखेर रही थी,,, राजू के मुंह में तो पानी आ रहा था ऐसा नहीं था की सिर्फ राजू की नजर उस पर थी,,, बाकी लड़कों की भी नजर उसकी गोलाकार छातियों पर जा रही थी ऐसा लग रहा था कि सभी के सभी पढ़ने नहीं करती उसे ताकने झांकने के लिए आए हैं,,, अपने नाम की तारीफ सुनकर राजू से भी रहा नहीं गया और वह भी जवाब में बोला,,,)

तुम्हारा नाम भी बहुत खूबसूरत है,,,सोनी,,, हम लोग आपको सोनी दीदी कह कर बुलायेंगे,,,

सोनी दीदी,,,,( राजू के मुंह से सोनी दीदी सुनकर वह अपने आप में ही बोलते हुए अपने मन में सोचने लगी कि सोनी दीदी,,,, अगर इन लड़कों के साथ राजू कि मुझे सोनी दीदी कहेगा तो मैं तो उसकी बड़ी बहन हो जाऊंगी तभी उसके मन में ख्याल आया कि वैसे तो वह अपने बड़े भाई की भी छोटी बहन है फिर भी तुम अपने बड़े भाई से चुदवाती है अगर राजू भी उसे चोदेगा तो कौन सी आफत आ जाएगी,,, मन में यह ख्याल आते ही उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुरा कर बोली,,,)

ठीक है तुम लोग मुझे सोनी दीदी कहना,,,, अच्छा यह तो हो गया हम लोगों का परिचय अब थोड़ी पढ़ाई कर लेते हैं इससे पहले तो तुम लोग कभी पढ़े नहीं होगे,,,

जी सोनी दीदी,,,,(श्याम एकदम से बोला क्योंकि वह भी सोनी से किसी भी तरह से बातचीत करना चाहता था)

ठीक है इसलिए तुम लोगों को शुरू से पढ़ाना होगा तभी जाकर कुछ सीख पाओगे वरना कुछ नहीं आएगा,,,,,, तुम लोग पहले थोड़ा थोड़ा दूरी बना कर बैठ जाओ क्योंकि तुम लोगों के पास लिखने के लिए पाटी नहीं है,,,कुछ दिन तक ऐसे ही पढ़ लो उसके बाद में तुम लोगों को पाटी लाकर दूंगी तब उस पर लिखना,,,।

ठीक है दीदी,,,,(उनमें से एक लड़का बोला और सभी लोग अपने से थोड़ी थोड़ी दूरी बना कर बैठ गए,,,)

हां अब ठीक है,,,,अब मैं तुम लोगों को क ख ग घ सिखाऊंगी,,,,(इतना कहते हुए वह टेबल पर से उठ कर खड़ी हो गई,,,जिस पेड़ के नीचे बैठी थी उस पेड़ की तरफ मुंह करके कुछ सोचने लगी ऐसा करने पर उसकी पीठ उन लड़कों की तरफ हो गई और सभी लड़कों की नजर उसकी कसी हुई गांड पर चली गई जो कि बेहद आकर्षक लग रही थी उसकी पतली चिकनी कमर देख कर ऊन लड़कों का ईमान फिसल रहा था,,, श्याम की भी हालत पतली हो रही थी राजू पूरी तरह से उसके रूप रंग का दीवाना हो गया था,,, राजू अच्छी तरह जानता था कि साड़ी के अंदर वह गजब का माल छुपा कर रखी है क्योंकि वह इकलौता सक्सेना उन लड़कों में जिसने अपनी आंखों से सोनी की नंगी गांड को देखा था उसे पेशाब करते हुए देखा था,,, और उसकी मदमस्त गोरी गोरी गोल गांड को देखकर उसका दीवाना हो गया था और साथ ही पेशाब करते समय उसकी बुर से निकल रही मधुर आवाज को सुनकर वह पूरी तरह से बावला हो गया था जिसके चलते वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाया था और उसी जगह पर उसे पेशाब करते हुए देख कर मुठ मारना शुरू कर दिया था और वहीं पर अपना पानी गिरा दिया था,,,,बाकी के लड़के तो सिर्फ उसके बारे में कल्पना भर कर सकते थे लेकिन राजू ने जो देखा था शायद इस बारे में उन लोगों को आभास तक नहीं था इसीलिए तो राजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी कसी हुई साड़ी के अंदर कैसा बवाल छुपा हुआ है जिसे देख कर राजू का लंड तुरंत खड़ा हो गया था,,,,। सोनी कुछ देर तक पेड़ की तरफ देखकर सोचती रही फिर वापस मुड़कर,,, राजू से बोली,,,।

राजू तुम मेरे साथ चलो झोपड़ी में से ब्लैक बोर्ड लाना है,,,(ऐसा कहते हुए वहां अपनी साड़ी की किनारी को अपनी कमर में खोसने लगी यह नजारा राजू के साथ सर बाकी लड़कों के लिए भी जान लेवा था मांसल चिकनी कमर देखकर सभी लड़कों के मन पर भारी असर हो रहा था सोनी की बात सुनकर,,, राजू आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)

क्या क्या-क्या लाना है दीदी,,,,

अरे तुम चलो तो सही,,,(सोनी अच्छी तरह से जानती थी कि ब्लैक बोर्ड के बारे में इन लोगों को कुछ भी पता नहीं है इसीलिए वह बताना नहीं बल्कि दिखाना चाहती थी,,,, और इतना कहकर वह आगे आगे चलने लगी,,,,राजू अपनी जगह पर खड़ा हो गया था और उसके पीछे-पीछे चलने लगा था उसके पीछे-पीछे चलने में भी राजू की हालत खराब हो रही थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने ही उसकी मतवाली मदमस्त बड़ी बड़ी गांड मटक रही थी उसे देखकर राजू का मन कर रहा था कि आगे बढ़ कर उसकी गांड को अपनी बाहों में भर लें और उस पर चुंबनों की बरसात कर दें,,, सोने की जवानी पूरी तरह से गदराई हुई थी उसकी जवानी को रोंदने वाला उसके रस को निचोड़ने वाला मर्द अभी तक उसे मिला नहीं था,,, इसलिए उसकी जवानी और ज्यादा उफान मार रही थी,,,, श्याम और उसके साथी उन दोनों को जाते हुए देखते रह गए उसकी मटकती हुई गांड को देखकर श्याम आपने साथी से बोला,,)

हाय क्या चीज है यार कसम से अगर ये अपनी आंखों के सामने कपड़े उतार कर नंगी हो जाए तो मुझे तो लगता है कि हम लोगों का खड़े-खड़े पानी निकल जाए,,,,

हां यार सच कह रहा है तू शायद इसकी जवानी को संभाल पाना अपने लोगों के बस की बात नहीं है,,, इसलिए तो राजू ही ठीक है,,,,,

(अपने साथी की इस तरह की बातें सुनकर श्याम उसे गुस्से से देखने लगा और बोला)

क्यों रे पागल हो गया क्या तू हम लोगों में कौन सी कमी है जो हम लोग इसकी जवानी को संभाल नहीं पाएंगे,,,

अरे यार तू नाराज मत हो लेकिन तो यह बात अच्छी तरह से जानता है कि औरतों को मोटे तगड़े लंबे लंड से ही मजा आता है और राजू का लंड देखा हा ना तु तेरी बोलती बंद हो गई थी,,,,

(राजू के लंड का जिक्र आते ही श्याम खामोश हो क्या क्योंकि वह अपनी आंखों से देख चुका था वाकई में उसका लंड एकदम मुसल कि तरह था,,, उन लोगों की बात सुन उनका एक साथी बीच में बोल पड़ा ,,,)

अरे तुम लोगों की शामत आई है क्या अपनी मौत को दावत दे रहे हो,,, उसके बारे में गंदी गंदी बातें कर रहे हो अगर पता है उसे भनक लग गई तो क्या होगा,,,,, साले मारे जाओगे पता भी नहीं चलेगा कहां चले गए लाला की बहन है,,,, और उसके पास हम लोगों की सब लोगों की जमीन गिरवी पड़ी है कुर्सी पता चल गया कि तुम लोग उसकी बहन के बारे में गंदी गंदी बातें करते हो तो तुम्हारी जुबान खींच लेगा,,,,

(उसकी बात सुनते ही सब खामोश हो गए क्योंकि जो कुछ भी वह कह रहा था वह सच था ,,, लाला बहुत हारामी था और उसके पास सभी लोगों की जमीन गिरवी पड़ी थी इसलिए कोई भी उससे जानबूझकर भी दुश्मनी मोल लेना नहीं चाहता था इसलिए वह लोग एकदम खामोश बैठे हैं और राजू और सोनी दोनों ऊस छोटे से झोपड़ी के करीब पहुंच गए,,,,।)

अब क्या करना है दीदी,,,,

दरवाजा खोलो,,,,,

(इतना सुनते ही राजू लकड़ी के दरवाजे को धीरे से खोल दिया पहले सोनी जोकि लंबाई में थोड़ी बड़ी होने के नाते अंदर प्रवेश करते समय थोड़ा सा झुककर अंदर की तरफ जाने लगी और इस तरह से झुकने में उसकी बड़ी बड़ी गांड बाहर की तरह उभर कर सामने आ गई है देखकर राजू का मन कर रहा था कि उसे पीछे से पकड़ ले उसके साड़ी कमर तक उठाकर उसकी चुदाई कर दें लेकिन ऐसा कर सकने की हिम्मत उसने बिल्कुल भी नहीं दी क्योंकि वह यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि वह लाला की बहन थी,,, सोनी के अंदर प्रवेश करते ही राजु भी पीछे पीछे हल्का सा झुककर अंदर घुस गया,,, अंदर पहुंचते ही बोला,,,)

अब क्या करना है दीदी,,,?

कहीं-कहीं ब्लैक बोर्ड रखा होगा,,, उसे ढूंढना है,,,(सोनी इधर-उधर चकर पकर देखते हुए बोली,,हालांकि वह झूठ तो रही थी ब्लैकबोर्ड लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा था वह किसी भी तरह से राजु को अपनी जवानी का जलवा दिखाना चाहती तो उसे अपनी जवानी का रस खिलाना चाहती थी उसे उत्तेजित करना चाहती थी इसीलिए उस बारे में युक्ति सोच रही थी,,,)

दीदी तुम जो कुछ भी कह रही हो इस बारे में मुझे बिल्कुल भी पता नहीं है,,,

मैं जानती हूं राजू,,,,(इतना कहते हुए उसे ब्लैक बोर्ड दिखाई दे क्या जो की झोपड़ी के अंदर थोड़ी ऊंचाई पर रखा हुआ था,,,, वह चाहती तो टेबल पर चढ़कर उसे उतार सकती थीलेकिन उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था क्योंकि झोपड़ी के अंदर आते ही उसकी नजर सीडी पर पड़ी थी जो कि तीन चार पट्टे की ही थी ज्यादा ऊंचाई उसकी नहीं थी और वह राजू को उत्तेजित करने के लिए उसी सीडी का उपयोग करना चाहती थी,,,)

राजू तुम वो सीढ़ी लेकर आओ,,,,(उंगली से कोने की तरफ इशारा करते हुए बोली और राजू तुरंत वह सीढी लेकर आ गया,,,)

लो दीदी,,,,(इतना कहते हुए वह सीडी को सोनी के एकदम करीब अपने हाथ का सहारा देकर रखते हुए बोला सोनी राजू की हर एक हरकत को देख रही थी उसे देखकर उत्तेजित होने जा रही थी बार-बार उसे उसके पजामे के अंदर उसका लंड झुलता हुआ नजर आ रहा था,,, सोने के मन में क्या चल रहा है राजू को इसका आभास तक नहीं था,,, अगर उसे पहले से ही सोने के मन का आभास हो जाता तो शायद यह सारा तिकडम रचाना ही नहीं पड़ता,,, अब तक तो वह सोनी की साड़ी उठाकर उसकी चुदाई कर दिया होता,,,,,,, सोनी उस छोटी सी सीढ़ी को बड़े गौर से देख रही थी नीचे से दूसरे नंबर की पाटी,, एकदम ढीली थी जो कि कभी भी टूट सकती थी,,, और उसी को देखकर उसके मन में युक्ति जन्म ले रही थी उसका दिमाग बड़ी जोरों से चल रहा था शायद ऐसे मामले में उसका दिमाग और ज्यादा तेज चलने लगता था,,, सोनी जानबूझकर सीढ़ी के नीचे वाले पाटी की मजबूती परखने के लिए नीचे की तरफ झुक गई जिसकी वजह से उसके साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया और उसकी मदमस्त कर देने वाली चुचियां,,,,जो कि जंगली कबूतर की तरह ब्लाउज के अंदर कैद अपने पंख फड़फड़ा रहे थे वह तुरंत बाहर आने के लिए बेकाबू हो गए,,,, सोने की भारी-भरकम छातियों को देखते हुए राजू की हालत खराब हो गई,,,, राजू का मन एकदम से ललच उठा,,,उसकी चुचियों को देखते ही राजु मन में ख्याल आने लगा कि एक एक चूची 1 लीटर दूध से भरी होगी,,,,जिसे मुंह में भर कर पीने में बहुत मजा आएगा,,,, चुचियों के साईज से छोटा ब्लाउज अपने छोटे-छोटे बटन के सहारे ना जाने कैसे उसकी भारी-भरकम चुचियों को सहारा देकर थामे हुए था,,,,,,अगर थोड़ा सा और झटका खाता तो शायद उसके ब्लाउज के बटन चरचरा कर टूट जाता है और उसकी मदमस्त कर देने वाली चूचियां एकदम से बाहर आकर राजू से गुफ्तगू करने लगती,,,,राजू अपने मन में यही सोच रहा था कि कहां से उसके ब्लाउज का बटन टूट जाता है तो उसे उसकी नंगी चूचियों को देखने का मौका मिल जाता नंगी गांड के दर्शन तो वह झाड़ियों में कर ही चुका था,,,

वह एकटक आंखें आंखें झुकी हुई सोनी की ब्लाउज में लटक रहे चुचियों को देख रहा थाइस बेहद कामोत्तेजक नजारे का असर राजू को अपनी दोनों टांगों के बीच होता हुआ महसूस हो रहा था,,, उसके लंड में तनाव आना शुरू हो गया था,,, और सोनी अपनी जाल फेंकने में कामयाब हो गई थी लेकिन वह तसल्ली कर लेना चाहती थी कि वह पूरी तरह से अपनी चाल में कामयाब हुई है कि नहीं क्योंकि वह जानबूझकर इस तरह से चुकी थी और अपनी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा ही थी यही देखने के लिए राजू की तरफ देखिए कि वह उसकी चूचियों की तरफ देख रहा है कि नहीं और उसे अपनी चूचियों की तरफ पागलों की तरह देखता पाकर वह मन ही मन खुश होने लगी,,,, जितना झलक दिखाना था उतना सोनी ने दिखा चुकी थी और मुस्कुरा कर अपने पल्लू को पकड़कर खड़ी होते हुए अपनी साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर रखकर दोनों हाथों से उसे अपनी छातियों पर खींचकर ढकते हुए बोली,,,

बाप रे मुझे तो शर्म आ रही है,,,
 
(राजू अभी भी उसकी भारी-भरकम छातियों की तरफ देख रहा था,,, राजू को इस तरह से ताकता हुआ देख कर सोनी को अपनी बुर में कुछ होता हुआ महसूस हो रहा था,,,, सोनी की बात सुनकर राजू बोला,,,)

किस बात के लिए दीदी,,,

इसीलिए कि मेरा साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिर गया,,,

अरे वह तो जानबूझकर थोड़ी ना गिरा है अनजाने में गिर गया,,,,,

हां कह तो तुम सच ही रहे हो,,,,(इतना क्या करूं मुस्कुराने लगी,,, और सीढ़ी को यह जगह लगाने के लिए बोल कर वह बोली,,,)

संभाल तो लोगे ना,,,

हां दीदी सामान तो लूंगा लेकिन मुझे कह दो मैं उतार दूंगा क्या उतारना है,,,

तुम्हें अगर मालूम होता तो तुम ही को बोलती लेकिन तुम्हें मालूम नहीं है इसलिए मुझे ही उतारना होगा,,,, तीन चार लकड़ियों के के बीच दबा हुआ है,,,,,,,

ठीक है दीदी तुम सीढ़ी पर चढ़ो मै संभाल लूंगा,,,

मेरा वजन ज्यादा है राजू,,,

कोई बात नहीं दीदी मैं भी हट्टा कट्टा जवान हूं आराम से संभाल लूंगा,,,

(राजू की बात सुनते ही सोनी मन ही मन मुस्कुराने लगी और अपने मन में ही बोली इसीलिए तो अपनी जवानी तुझे सोपने का इरादा कर लि हुं)

चलो तुम पर मुझे पूरा भरोसा है आराम से पकड़ना,,, दूसरे नंबर की पाटी एकदम कमजोर है,,,(सीढी को योग्य स्थान पर लगाते हुए वह बोली,,)

चिंता मत करो दीदी में गिरने नहीं दूंगा,,,(राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था सोनी के तन से उठा रही मादक खुशबू राजू को मदहोश कर रही थी वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था इतने करीब से वह सोनी के खूबसूरत बदन की गर्मी को अपने अंदर महसूस कर रहा था हालांकि वह पहले भीसाड़ियों के अंदर सोने की नंगी गांड को देख चुका है उस के नंगे पन के दर्शन कर चुका है लेकिन इस समय के हालात कुछ और थे,,, सोनी के द्वारा बिना कपड़े उतारे ही राजू पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, इसका असर उसे अपने दोनों टांग के बीच होता हुआ महसूस हो रहा था,,,, राजू की बात सुनकर वह तसल्ली के साथ सीढ़ी पर चढ़ने लगी पहली सीढ़ी पर पैर रखने से पहले वह अपनी साड़ी को थोड़ा सा उठा कर अपनी कमर में खोंश दी जिससे उसकी साड़ी उसके घुटने तक उठ गई और उसकी नंगी दूधिया चिकनी पिंडलिया नजर आने लगी,,,जिसे देखते ही राजू की आंखों में हमारी जाने लगी राजू का मन उसकी नंगी चिकनी टांगों को छूने का कर रहा था लेकिन ऐसा कर सकने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी,,,, झोपड़ी के अंदर क्या हो रहा है बाहर बैठे लड़कों को इसका अहसास तक नहीं था लाला की बहन होने के नाते वालों किसी भी प्रकार की गलती नहीं करना चाहते थे इसलिए वहीं बैठे रह गए ,,, हालांकि उन लोगों के मन में भी उत्तेजना का सैलाब रहा था लेकिन किसी तरह से वह लोग अपने आप पर काबू किए हुए थे,,,

राजू की किस्मत बड़े जोरों पर थी कुछ ही दिन में उसे एक-एक करके नई-नई औरतों का संगत प्राप्त होता जा रहा था पहले कमला चाची फिर उसकी खुद की जवान होगा और अब लाला की बहन सोनी जो अपनी जवानी के जलवे बिखेर रही थी,,,, सोनी का भी दिल जोरों से धड़क रहा था साड़ी को थोड़ा सा उठा कर कमर मैं खोसने की जगह वह अपने मन में सोच रही थी कि क्यों ना साड़ी को कमर तक उठाकर राजू को अपने नंगे पन का दर्शन करा दे अपनी बुर्का दर्शन करा दे जिसे देखकर वह पूरी तरह से बावला हो जाए और उसका गुलाम बन जाए,,, लेकिन ऐसा करना शायद उसके भी संस्कार में नहीं था खुले तौर पर वह इस तरह की हरकत नहीं करना चाहती थी भले ही वह अपनी कामुक अवस्था को संभालना पा रही हो लेकिन खुले तौर पर इस तरह की हरकत उसे भी मंजूर नहीं थी वह इस खेल में धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहती थी,,,, ताकि राजू को भी लगे कि सब कुछ अनजाने में हुआ है,,,सोनी अपनी जवानी का जलवा बिखेरने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी और वह अपनी एक टांग सीढ़ी पर रखकर चढना शुरु कर दी थी पहली सीढ़ी मजबूत थी इसलिए उसे दिक्कत नहीं हुई लेकिन वो जानती थी कि दूसरी सीढ़ी कमजोर है और उस पर धीरे से पैर रखकर वह आगे बढ़ने लगी दूसरी सीढ़ी पर पहुंचते ही टांग उठाने की वजह से उसकी गोलाकार गांड बड़े-बड़े तरबूज की तरह उभर कर सामने आ गई,,, मानो कि जैसे खेतों में झाड़ियों के बीच सबसे बड़ा तरबूज उठाए खड़ा हो,,,,गोल गोल गांड देख कर राजू की हालत खराब हो रही थी उसका मन कर रहा था कि अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसकी गांड को थाम ले उसकी गर्मी को अपने अंदर महसूस करें,,, लेकिन वह सिर्फ देखता ही रह गया,,, देखते ही देखते सोनी तीसरे सीढ़ी पर चढ़ चुकी थी और नीचे खड़ा राजू,,, नजर उठाए ऊपर की तरफ देख रहा था उसकी कोशिश पूरी थी कि उसकी नजर उसकी साड़ियों के बीच अंदर तक पहुंच जाएं लेकिन सोनी नहीं पीनी भी साड़ी ऊपर नहीं उठाई थी कि उसकी नजर उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच पाती अंदर बहुत अंधेरा था इसलिए उसे कुछ नजर नहीं आ रहा था,,, सोनी राजू को बराबर समय दे रही थी ताकि वह उसकी खूबसूरत जवानी के रस को अपनी आंखों से पी सके,,,,,,।

ठीक से पकड़े रहना राजू,,,, कहीं में गिर ना जाऊं,,,

नहीं गिरोगी दीदी मैं पकड़ा हूं,,,

अरे सीढ़ी नहीं मेरे पैर पकड़ मेरे पैरों में कंपन हो रहा है मेरा पैर कांप रहा है,,,, कहीं में गिर ना जाऊं,,,,

(फिर पकड़ने वाली बात सुनकर राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा एक तरह से उसके नंगे जिस्म को छुने का आमंत्रण था और वह ऐसा मौका भला कैसे अपने हाथ से जाने देता उसकी बात सुनते ही तुरंत सीढ़ीयों को छोड़कर वह सोने की टांग को पकड़ लिया और वही उसकी पिंडलियों को जिसे अपनी हथेली में दबाते ही उसका तन बदन जोश से भर गया,,,, और सोनी की भी हालत खराब हो गई राजू के प्रति को पूरी तरह से आकर्षित हो चुकी थी इसलिए कहा क्योंकि हथेली अपनी नंगी चिकनी टांग पर पढ़ते हैं उसकी बुर से मदन रस की बूंद टपक गई यह सोने की तरफ से राजू के चरणों में समर्पण का भाव था और पूरी तरह से राजू को समर्पित हो चुकी थी मन से लेकिन अभी तन से बाकी था,,,,)

अब ठीक है ना दीदी,,,

हां राजू संभालना,,,

(राजू का तो लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था पजामे में तंबू सा बन गया था,,,, सोनी ऊंचाई पर रखे हुए ब्लैक बोर्ड को उतारने लगी जो कि दो चार लकड़ियों के नीचे रखा हुआ था,,,,ब्लैक बोर्ड को उतारते समय उसके मन में गई हो रहा था कि राजू जिस तरह से नीचे खड़ा होकर ऊपर की तरफ देख रहा है अगर वह अपनी साड़ी को उठाकर थोड़ा और ऊपर कर दी होती तो उसे उसकी जवानी की दहलीज नजर आने लगती,,,और , राजू को वह पूरी तरह से अपना दीवाना बना देती,,,,लेकिन जितना भी व कर रही थी राजू के लिए काफी था राजू पूरी तरह से अपने अंदर उत्तेजना का अनुभव कर रहा था एक तो उसके बदन से उठ रही खुशबू उसके होश उड़ा रही थी,,, और ऊपर से वह उसकी नंगी पिंडलियों को पकड़े हुए था जिससे उसका जोश दुगुना होता जा रहा था,,,। उत्तेजना के मारे सोनी को भी अपनी कच्छी गीली होती महसूस हो रही थी,,।

जिस चीज को वह ढूंढ रही थी वह मिल चुका था वह उसके हाथों में था अब नीचे उतरना चाहती थी,,,, इसलिए मैं अपना एक पैर नीचे की तरफ लाकर पाटी,, पर रख दी,,,बार-बार राजू की नजर उसकी गोलाकार गांड पर चली जा रही थी जो कि ऊपर नीचे पैर करने की वजह से उसकी गांड कुछ ज्यादा ही उभरकर बड़ी हो जा रही थी जिसे अपने दोनों हाथों में थामने का मन कर रहा था,,,,, सोनी भी यही चाहती थी कि राजू अपने हाथों में उसकी दोनों गांड की फाको को थाम ले,,, और अपने मन में बस यही सोच ही रही थी वह सोच रही थी आखिरी सीढ़ी जब आएगी तो जरूर वह कुछ ऐसा करेगी जिससे राजू को उसकी गांड पकड़ना ही पड़ेगा,,,,। अंतिम दो सीढ़ी बाकी थी और दूसरे नंबर की सीढ़ी कमजोर थी वह तीसरी सीडी पर आराम से खड़ी थी,,,, राजू ठीक सीढ़ियों के इर्द गिर्द अपनी दोनों टांगों को रखकर बीचो-बीच खड़ा था,,, ताकि अगर सोनी गिरे तो वह उसे थाम ले,,,,वह दूसरी सीढ6 पर अपने पैर रखती ईससे पहले ही उत्तेजना के मारे वो एकदम से लड़खड़ा गई,,,,

अरे अरे राजू देखना,,,,( और उसका इतना कहना था कि उसका पैर फिसल गया तीसरी सीढ़ी से ही नीचे फिसल कर गिरने लगी,,,,, लेकिन राजू पूरी तरह सचेत था एकदम तैनात,,,, वह सोनी की टांगों को पकड़े रह गया और उसकी हथेली उसकी नंगी चिकनी टांग ऊपर फिसलते हुए जैसे-जैसे भी नीचे आ रही थी वैसे वैसे उसकी हथेली उपर की तरफ जा रही थी,,,,और उसके पैर नीचे जमीन को छूते इससे पहले ही राजू की हथेली उसकी कमर तक पहुंच गई थी और उसकी साड़ी कमर तक उठ गई थी क्योंकि राजू की हथेली उसकी कमर पर थी और उसकी सारी पूरी तरह से उसकी हथेली के ऊपर टिकी हुई थी,,, लेकिन राजू ने अपनी मजबूत हाथों का सहारा देकर उसे थाम लिया था उसे गिरने नहीं दिया था ना ही उसे चोट लगने दिया था,,,,।

जैसे ही सोनी के पैर जमीन पर पड़े उसकी सांसे तेजी से चलने लगी वो एकदम से घबरा गई थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह सीढ़ी पर से नीचे गिर गई है क्योंकि वह तो दूसरी सीढ़ी पर पैर रखकर सिर्फ नाटक करने वाली थी लेकिन वह हकीकत में ही गिर गई थी,,,,,, जब उसे इस बात का एहसास हुआ तब वह अपने आपको राजू की बाहों में पाई जैसा कि वह चाहती भी थी लेकिन यह सब अनजाने में हुआ था,,,, राजू की दोनों हथेली सोने की चिकनी मांसल कमर पर थी,,, जोकि राजु ने कभी ऐसा सपने में भी नहीं सोचा था,,,, सोनू का बदन राजू के बदन से एकदम चिपका हुआ था एक तरह से राजू ने उसे कमर पकड़कर अपनी बाहों में ले लिया था पजामे के अंदर राजू का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था जो कि तुरंत उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बड़ी बड़ी गांड के बीच धंसना शुरू कर दिया था,,।राजू कोचर इस बात का एहसास हुआ तो वह पूरी तरह से मस्त हो गया पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगाने लगा क्योंकि वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका लंड इस तरह से उसकी गांड को स्पर्श होगा,,, पल भर में राजू की सांसे तेजी से चलने लगी दूसरी तरफ सोनी की भी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,,,,

राजू ने उसे अपनी मजबूत बजाओ में पकड़ कर उसे गिरने से बचाया था इस बात की तसल्ली सोनी को अच्छी तरह से थी लेकिन जैसे ही उसे अपनी गांड के बीचों बीच कुछ कठोर चीज है जो भी महसूस हुई तो एकदम से दंग रह गई,,,तब जाकर उसे इस बात का अहसास हुआ कि वह राजू की बाहों में थी और राजू का लंड जोकि पजामे में होने के बावजूद भी उसकी गांड में धंशा जा रहा था,,, पल भर में सोनी की भी सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,,, जिस तरह से वह राजू के साथ उसे उत्तेजित करना चाहते थे अनजाने में ही वह होता जा रहा था,,,

राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड की ताकत को वह अपनी गांड पर महसूस कर रही थी,,,, उसे अंदाजा लग गया था कि राजू का लंड कितना दमदार है,,,वह अपनी स्थिति की तरफ ध्यान दे तो उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी साड़ी पूरी तरह से कमर तक उठ गई है और कमर के नीचे वह पूरी तरह से अपनी कच्छी को छोड़कर नंगी ही थी और उसका कच्छी के लिए सोनी को अपने आप पर गुस्सा आने लगा था अपने मन में सोचने लगी कि अगर कच्छी ना पहनी होती तो आज राजू के लंड को अपने गांड के बीचो बीच अपनी बुर पर महसूस कर ली होती,,,, राजू था कि उसे छोड़ने का नाम नहीं ले रहा था उसे तो मजा आ रहा था चिकनी कमर को अपने दोनों हाथों में थाम कर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सोनी को चोदने की तैयारी कर रहा हो,,, राजू अपने आपको किस्मत वाला समझने लगा था मौके का फायदा उठाते हुए अपनी कमर को वह आगे की तरफ फैल रहा था जिसका एहसास सोनी को बड़े अच्छे से हो रहा था और राजू की इस हरकत पर वह पूरी तरह से पानी पानी हुए जा रही थी,,,उसे उम्मीद नहीं थी कि अनजाने में ही उसकी साड़ी कमर तक उठ जाएगी और वह भी राजू के हांथो,,,,।

सोनी अपने मन में सोच रही थी कि अब राजू छोड़ेगा अब राजू छोड़ेगा लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था वह तो और मदहोशी के साथ उसे पकड़े हुए था और साथ ही पजामे में होने के बावजूद भी,,, अपने लंड को उसकी बड़ी बड़ी गांड के बीचो-बीच दे रहा था,,,, लेकिन उसे भी गांड के बीच कपड़ा सा महसूस हो रहा था इसलिए वह सोनी को ऊपर से नीचे की तरफ देख रहा था उसकी साड़ी पूरी तरह से कमर तक उठी हुई थी और इसीलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार साड़ी पूरी तरह से ऊपर की तरह टूट जाने के बावजूद भी कौन सा कपड़ा लगा हुआ है क्योंकि वह भी नहीं जानता था कि शहरी औरतें साड़ी के अंदर कच्छी पहनती हैं,,,,,, सोनी की बुर पूरी तरह से पानी छोड़ रही थी,,, अगर बाहर दूसरे लड़के ना होते तो उसी समय राजू के लंड को अपनी बुर में लेकर चुदवा ली होती,, लेकिन इस समय मजबूर थीलेकिन अपनी हरकत से भी राजू ने उसे पूरी तरह से उत्तेजना के महासागर में डुबो दिया था उसकी कच्ची पूरी तरह से काम रस से गीली हो चुकी थीउसे इस बात का डर था कि काफी समय हो गया था झोपड़ी के अंदर कहीं कोई लड़का यहां आ ना जाए इसलिए वह राजू से बोली,,,।

अच्छा हुआ राजू तूने मुझे संभाल लिया वरना आज तो मैं गिर गई होती,,,

मेरे होते हुए मैं तुम्हें गिरने नहीं दूंगा दीदी,,,

बस कर अब छोड़ो मुझे ब्लैकबोर्ड बाहर लेकर चलना है,,,

(राजू का छोड़ने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था सोने के बदन की गर्माहट उसे पूरी तरह से उत्तेजित किए हुए थी और उसकी बड़ी बड़ी गांड का स्पर्श पाकर उसका लंड लोहे के रोड की तरह हो गया था,,, लेकिन फिर भी उसकी बात मानते हुए वह उसे अपनी बाहों की कैद से आजाद कर दिया,,,, सोनी की सांसे अभी भी ऊपर नीचे हो रही थी,,,, राजू से अलग होते हैं सोनी अपनी साड़ी को व्यवस्थित करने लगी व्यवस्थित करते समय,,, राजू को उसकी कच्छी नजर आ गई जिसे देख कर उसे थोड़ा अचरज हुआ लेकिन समझ नहीं पाया,,,,सोनी बहुत खुश थी क्योंकि उसकी नजर राजू की पर जाने की तरफ चली गई थी जो की पूरी तरह से उठा हुआ था,, और वह यही चाहती भी थी,,, सोनी का दिल जोरों से धड़क रहा,,,अपनी साड़ी को व्यवस्थित करने के बाद वह मुस्कुराते हुए राजू के पजामे में बने तंबू को देख कर बोली,,।)

तो यही था जो मेरे पीछे चुभ रहा था,,, लगता है बहुत बड़ा है,,,।

(सोनी के मुंह से इतना सुनकर राजू पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गया उसे लगने लगा कि जैसे उसके लिए रास्ता साफ होता जा रहा है वह मन ही मन बहुत खुश होने लगा लेकिन अपने पजामे में बने तंबू को छुपाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं किया,,,, बस खड़ा मुस्कुरा रहा था और उसकी मुस्कुराहट को देखकर सोनी भी समझ गई थी कि यही वह लड़का है जो उसकी जवानी की गर्मी को शांत करेगा,,,,)

चलो जल्दी चलो काफी देर हो गई में हमें,,,(इतना सुनकर जैसे ही राजू चलने को हुआ राजू के तंबू की तरफ देखते हुए वह बोली,,,)

इस हाल में चलोगे,,(उंगली से राजू के तंबू की तरफ इशारा करते हुए) ऐसे चलोगे तो वह लोग क्या सोचेंगे मैं चलती हूं तुम इस ब्लैकबोर्ड को साफ करके लेते आना तब तक तुम्हारे पजामे का तूफान शांत हो जाएगा,,, और हां सबके साथ छूटने पर जाना जरूर लेकिन थोड़ी देर में वापस इधर ही आ जाना क्योंकि मैं तुम्हारा यही इंतजार करूंगी,,,(इतना कहकर वो मुस्कुरा कर बाहर निकल गई और राजू उसे देखता रह गया और फिर जल्दी-जल्दी ब्लैकबोर्ड को साफ करने लगा,,, इतनी देर में उसका लंड शांत भी हो गया और वह ब्लैकबोर्ड लेकर बाहर आ गया,,,।)

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झोपड़ी के अंदर जो कुछ भी हुआ था उसको लेकर राजू और सोनी दोनों बेहद उत्साहित थे,,, राजू को तो यकीन नहीं हो रहा था कि वह सोनी के खूबसूरत बदन को अपने हाथों से स्पर्श किया है,,,, लाजवाब बेमिसाल अद्भुत खूबसूरती की मालकिन सोनी के भरे हुए बदन को अपनी बाहों में लेकर वह पूरी तरह से गदगद हुआ जा रहा था,,, उसे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था,,,जिसे सिर्फ देख कर आहे भरा करता था उसे अपनी बाहों में लेकर वह अपने आप को सबसे ज्यादा खुश नसीब समझने लगा था,,,,,, नंगी चिकनी टांगो को पकड़कर वह चित्र की उत्तेजना का अनुभव अपने अंदर कर रहा था वह पूरी तरह से उसे अपने बस में कर लिया था लेकिन वह नहीं जानता था कि उसके हाथों से ही उस खूबसूरत औरत की साड़ी कमर तक उठ जाएगी,,,, यह शुभ काम अपने हाथों से होता हुआ देखकर वह ऊतेजना के परम शिखर पर विराजमान हो गया था,,,उसकी मानसिक चिकनी कमर पर अपनी हथेलियों की पकड़ को वह अभी तक अपने अंदर महसूस कर रहा था उसके बदन की गर्माहट को अपने अंदर महसूस करके उसे इस बात का डर था कि कहीं उसका लंड पिघल ना जाए,,,,,, उसकी नरम नरम गद्देदार बड़ी बड़ी गांड पर उसके लंड की ठोकर अनजाने में ही लगी थी लेकिन वह जानबूझकर अपनी तरफ से भी हरकत करते हुए अपने लंड का दावा उसकी गांड पर बराबर बनाए हुए था,,, दो दो औरतों का सुख भोग चुका राजू इतना तो समझ गया था कि सोनी को भी उसके लंड की रगड़ साफ महसूस हुई होगी,,,तभी तो वह मुस्कुरा रही थी और जाते समय उसके पहचाने मैंने तंबू की तरफ इशारा करके खुद बोल गई थी कि इसे शांत करके बाहर आ जाना,,,,,, उसकी इस हरकत पर राजू समझ गया था कि सोनी बहुत गरम औरत है वरना जिस तरह की हरकत हुई थी उससे वह क्रोधित हो जाती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था,,,,,। राजू के मन में अभी भी एक सवाल उठ रहा था कि वह साड़ी के अंदर क्या पहनी हुई थी जिसे देखकर उसका मन थोड़ा गया कुछ भेजा रहा था वह अपने मन में ही सोच रहा था कि इतनी बड़ी औरत होने के बावजूद भी अभी भी बच्चों की तरह चड्डी पहनती है,,, क्योंकि राजू को औरतों के अंग वस्त्र के बारे में बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था क्योंकि गांव की सभी औरतें,,,, साड़ी और सलवार के अंदर कुछ भी नहीं पहनती थी और उन्हें भी इस बारे में कुछ पता भी नहीं था,,,, इसीलिए राजू ने ना तो कमला चाची के साड़ी के अंदर कुछ पहना हुआ देखा था और ना ही अपनी बुआ गुलाबी की सलवार के अंदर,,, इसलिए सोनई की कच्छी को देख कर उसे आश्चर्य हो रहा था,,,।

अंदर से ब्लैकबोर्ड लेकर वह बाहर आ चुका था,,,। राजु को देखकर सोनी मंद मंद मुस्कुरा रही थी क्योंकि अंदर जो कुछ भी हुआ था वह सोनी की सोच से ज्यादा हो चुका था,,सोनी के मन में यही था कि झोपड़ी के अंदर ले जाकर क्यों वह किसी भी तरह से राजू को उत्साहित और उत्तेजित करेगी लेकिन अंदर उम्मीद से कुछ ज्यादा ही हो गया था और राजू की उत्तेजना वह अपनी आंखों से उसके पजामे में देख रही थी जिसे वह अपनी बड़ी बड़ी गांड पर महसूस भी कर चुकी थी,,,, उसकी रगड उसका दबाव बड़ी बड़ी गांड पर बेहद अद्भुत था,,, जिसे महसूस करके अभी भी वह पानी पानी हुए जा रही थी,,,,, सोनी को अपनी कच्छी पूरी तरह से गीलीहो चुकी महसूस हो रही थी जिसे वह बार-बार साड़ी के ऊपर से ही अपना हाथ लगा कर व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही थी और यह हरकत राजू को एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उसकी इस हरकत के कारण उसके तन बदन में काम ज्वाला भड़क रही थी,,,,। राजू समझ गया था कि उत्तेजना के मारे उसका काम रस टपक रहा होगा और वग अपने मन में यही सोचने लगा कि काश उसकी किस्मत में उसकी बुर पर मुंह लगाकर उसका काम रस पीना लिखा होता तो मजा आता ,,,,,,

यह जो खिला दिख रहा है ना पेड में घुसा हुआ इसी मे ब्लैक बोर्ड को टांग दो,,,।

(कोयल सी सुरीली आवाज सुनते ही राजु एकदम मंत्रमुग्ध हो गया और उसके के अनुसार ब्लैक बोर्ड को साफ करके उसी खिले में टांग दिया,,,)

अब ठीक है ना सोनी दीदी,,,,।

हां बिल्कुल ठीक है,,,(इतना कहते हुए वह अपने आप से ही बात करते हुए बोली सोनी दीदी साला मौका मिला होता तो कब से अपना लंड मेरी बुर में डालकर चुदाई कर दिया होता और दीदी कह रहा है,,, फिर वह अपने मन में ही सोचने लगी कि वैसे भी दीदी और भाई के रिश्ते की मर्यादा ही कहां रह गई है उसका बड़ा भाई खुद उसकी चुदाई करता हैं और उसे चोदने के लिए रखा भी है,,, कोई बात नहीं जिंदगी में मजा तो आ रहा है ना बस,,,,)

देखो अब मैं इस ब्लैक बोर्ड पर जो कुछ भी लिखूंगी तुम लोग जमीन पर लिखना कुछ दिन तक ऐसे ही चला लो उसके बाद में तुम लोगों के लिए पाटी लाकर दूंगी,,,,

ठीक है सोनी दीदी,,,(उसकी बात सुनते ही सभी लड़के एक साथ बोल पड़े,,,

सोनी ने क ख ग घ,,,, यह चार अक्षर ब्लैक बोर्ड पर लिख दि और उसे,,,,,,, जमीन पर लिखने के लिए बोली सभी लड़के ब्लैक बोर्ड में देखकर जमीन पर लिखने की कोशिश कर रहे थे,,,,बीच-बीच में सोनी उन लोगों का हौसला भी बढ़ा रही थी,,,।

हां ऐसे ही धीरे-धीरे सीख जाओगे पढ़ना लिखना जिंदगी में बहुत जरूरी है कभी हिसाब किताब करना पड़ जाएगा तो कैसे करोगे कोई तो मैं बेवकूफ बना कर चला जाएगा इसलिए पढ़ना लिखना सीखना ही होगा धीरे-धीरे सीख जाओगे,,,,(इतना कहते हुए बार आ चुके सर पर हाथ फिर भी उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दी राजू कि उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा दिया दोनों की नजरे आपस में टकराई,,, ना जाने क्यों राजू से नजर मिलते ही,,, सोनी की नजरों में शर्म उतर आई वह शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी,, क्योंकि कुछ देर पहले ही राजु ने अपने मर्दाना अंग की रगड़ उसकी गांड पर उसे महसूस करवाया था,,, जिसका एहसास उसकी बुर गीली, कर रहा था,,,, सोनी अपने मन में भाप ली थी कि राजू के साथ उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति होगी,,,,।

ब्लैक बोर्ड में लिखे हुए शब्दों को सभी लड़के लिखने की कोशिश कर रहे थे और धीरे-धीरे कामयाबी हो रहे थे श्याम भी वही कर रहा था लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा था वह अपनी मम्मी यही सोच रहा था कि यह लोग झोपड़ी के अंदर काफी देर से थे यह लोग अंदर कर क्या रहे थे,,,। उससे रहा नहीं गया तो,,, वह धीरे से राजू के कान में बोला,,,।

तुम दोनों इतनी देर से झोपड़ी में क्या कर रहे थे,,,

वही ढूंढरहे थे जिस पर सब कुछ लिखा हुआ है,,, ऊंचाई पर और सबसे नीचे दबा हुआ था इसलिए उसे निकालने में देर हो गई,,,।

कुछ और तो नहीं कर रहा था ना,,,

पागल हो गया क्या तू,,,, लाला की बहन इनके बारे में कुछ सोचना भी नहीं वरना शामत आ जाएगी समझा,,, आप अपना काम कर और मुझे भी करने दे,,,,(लाला का नाम लेकर वह एक तरह से श्याम को धमकाने की कोशिश कर रहा था क्योंकि राजू जानता था कि लाला का डर उसे ज्यादा कुछ सोचने नहीं देगा,,, सोनी और उसके बीच हुए उस वाक्ये के बारे में मैं नहीं चाहता था कि किसी को भी पता चले,,,, वह दूसरे लड़कों की तरह नहीं था कि किसी भी औरत के साथ संबंध बनाने पर वह अपने दोस्तों को बढ़ा चढ़ा कर बातें करते थे वह बल्कि इस तरह के रिश्ते को एकदम खास रखना चाहता था जिसकी किसी को भनक तक ना लगे,,,, सोनी उसी टेबल पर बैठकर आगे क्या करना है उसके बारे में सोच रही थी,,,, राजू को उसने इसी बगीचे में दोबारा बुलाई थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि जिस लंड को अपनी बड़ी-बड़ी गांड पर महसूस करके मस्त हो गई है उसे अपनी बुर में लेकर देखना चाहती है ,,वह देखना चाहती थी कि राजू का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसे कितना मजा देता है,,,। यही सब सोच सोच कर वह मस्त हुए जा रही थी और अपनी बुर को गीली कीए जा रही थी,,,, कुछ देर के बाद सोनी ने सब को छुट्टी दे दी और उन्हें अपने-अपने घर जाने के लिए बोल दी,,,,,

उन लोगों के साथ राजू भी जाने लगा,,,, सोनी वही टेबल पर बैठे उसे देखती रही वह उसका इंतजार कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि राजु जरूर आएगा,,,, राजू अपने दोस्तों को सिर्फ दिखाने के लिए उनके साथ जा रहा था,,, वह अंदर ही अंदर वापस बगीचे में जाने के लिए तड़प रहा था लेकिन इस तरह से सबके सामने जाने में डर था वह नहीं चाहता था कि वह लोग किसी भी तरह का शक करें,,, अपने मन में यही सोच रहा था कि सोने जैसी खूबसूरत औरत अगर उसे दोबारा बगीचे में बुलाई है तो जरूर कुछ ना कुछ होगा,,,,,,।

इसलिए वह सब लड़कों के साथ घर तो पहुंच गए लेकिन सबकी नजर बचाकर वापस बगीचे की तरफ चल दिया उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि बगीचे के अंदर जरूर उसका फायदा होने वाला है क्योंकि खूबसूरत औरतों से सबसे नजर बचाकर वहां बुलाई थी और ऐसे सबकी नजर बचाकर औरत तभी बुलाती है जब उसके मन में उसके लिए कुछ कुछ होता है,,,,,।

थोड़ी देर बाद राजू वापस बगीचे मैं पहुंच गया था चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था दोपहर का समय था कड़ी धूप होने के बावजूद भी घने पेड़ चारों तरफ होने की वजह से धूप नीचे जमीन तक नहीं पहुंच पा रही थी इसलिए हां पर ठंडक बनी हुई थी,,,, राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि पता नहीं क्या करने के लिए यहां बुलाई है यह सोचकर बार-बार उसकी आंखों के सामने वही दृश्य याद आ जा रहा था जब वह सीढ़ियों पर चढ़ी थी और उसका पैर फिसला था और वह उसकी बाहों में आ गीरी थी,,, राजू के मन में एक मलाल रह गया था कि मौका मिलने के बावजूद भी वह उसकी चूचियों पर हाथ नहीं रख पाया था जो कि किसी पहाड़ी की तरह सीना ताने खड़ी थी,,,,।

बगीचे में पहुंचकर वह सोनी को इधर-उधर ढूंढने लगा सोनी कहीं भी नजर नहीं आ रही थी तो वह झोपड़ी के अंदर जाकर देखने लगा उसे लगा कि शायद झोपड़ी के अंदर होगी,,, लेकिन झोपड़ी भी खाली थी,,,, राजू को बहुत गुस्सा आ रहा था उसे लगने लगा कि शायद वह मजाक कर रही थी वह कितने अरमान लेकर बगीचे में आया था उस ख्याल से ही बार-बार उसका लंड मुंह उठाकर खड़ा हो जाता था जिसे वह बार-बार अपने हाथों से बैठाने की कोशिश कर रहा था,,,,, कुछ देर तक वह झोपड़ी के अंदर ही खड़ा होकर सोचने लगा,,,, और बाहर आ गया इधर-उधर दूर-दूर तक देखने पर भी कोई नजर नहीं आ रहा था इसलिए वह हेड पंप के पास जाकर हेंडपंप चला कर पानी पीने लगा,,,,। उसका मन उदास हो चुका था,,,। वह वापस घर जाने वाला था कि तभी वह सोचा की झोपड़ी के पीछे जाकर देख लु,,,,।
 
और यह सोचकर वह झोपड़ी के पीछे जाने लगा,,,,,,, लेकिन यहां पर कोई नहीं था तो वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा थोड़ी ही दूरी पर बेर लगे हुए थे जिसमें बड़े-बड़े पेड़ उगे हुए थे वह सोचा कि चलो कुछ नहीं तो बैर ही लेकर खाया जाए,,,, और यह सोचकर वह बेर के पेड़ के पास पहुंच गया,,,,,, वही थोड़ी दूरी पर सोनी पेशाब करने के लिए आई थी और पेशाब करके वह भी बेर तोड़ रही थी राजू को उस तरफ आता देखकर वह पूरी तरह से सकते में आ गई थी वह सोच रही थी कि वह यहां क्या करने आ रहा है,,,, लेकिन तभी उसके दिमाग में खुराफाती चलने लगा,,,,। राजू बैर तोड़ता इससे पहले ही वह उसके सामने अपनी पीठ उसकी तरफ किए हुए जाकर खड़ी हो गई उसकी पायल और चूड़ियों की खनक की आवाज सुनते हैं राजू उस तरफ देखने लगा और ठीक थोड़ी ही दूरी पर अपने सामने सोनी को खड़ी देख कर वह खुश हो गया लेकिन वह कुछ बोल पाता इससे पहले ही सोनी अपना जलवा दिखाते हुए अपनी साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगी जैसा कि वह उस दिन झाड़ियों के अंदर छुप कर देखा था यह देखकर राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा वह समझ गया कि जिस तरह का दृश्य उसने उस दिन देखा था आज भी उसकी किस्मत तेज है आज भी उसे वही देखने को मिलेगा,,,, इसलिए बैर ना तोड़कर वह वहीं खड़ा रह गया और धड़कते दिल के साथ उस दृश्य का आनंद लेने लगा जोकी सोनी जानबूझकरउसे दिखा रही थी जबकि वह पेशाब कर चुकी थी लेकिन आज वह अपनी जवानी की झलक दिखा कर उसे पूरी तरह से अपने बस में कर लेना चाहती थी,,, और वह यह बात नहीं जानती थी कि इस तरह के नजारे को वह पहले भी देख चुका है,,, तभी तो उसके पीछे पीछे लट्टु की तरह घूम रहा था,,,,।

सोनी अपनी जवानी का जलवा बिखेरना शुरू कर दी थी वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी और देखते ही देखते राजु की आंखों के सामने उसने अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी थी ऐसा करने में उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,, क्योंकि वह जानती थी कि पीछे खड़ा एक नौजवान लड़का उसे अपनी साड़ी कमर तक उठाते हुए देख रहा है उसके नंगे पन को अपनी आंखों से देख कर मस्त हो रहा है और यह एहसास सोनी के तन बदन में आग लगा रहा था,,,,, देखते ही देखते सोनी अपनी साड़ी को कमर तक उठाती थी राजू की आंखें एक बार फिर से चौंधिया गई थी सोनी को चड्डी पहने हुए देखकर,,,, यह राजू के लिए अत्यधिक उत्तेजनात्मक स्थिति का निर्माण कर रहा था वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई औरत इस उमर में भी चड्डी पहनती होगी जबकि चड्डी तो बच्चे पहना करते थे,,,।

सोनी सब कुछ जानते हुए भी अपनी चड्डी को नीचे की तरफ खासकाने लगी और सोनी की यह हरकत राजू से सीने में छुरियां चला रही थी,,, देखते ही देखते सोनी ने अपनी बड़ी बड़ी गांड को उजागर करते हुए अपनी चड्डी को नीचे घुटनों तक सरका दी,,,राजू से तो कुछ भी बोला नहीं जा रहा था यहां तक कि सांस भी लेना मुश्किल हुआ जा रहा था और पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था ,, पजामे में एक बार फिर से तंबू बन चुका था,,,। गोल गोल गोरी गांड सुनहरी धूप में और ज्यादा चमक रही थी,,, सोनी के अंतर्मन में भी फुलझड़ियां झड़ने लगी थी,,, जवानी की आग में उसका तन जल रहा था,,,। राजू को पाने के लिए वो अपने होशो हवास खो बैठी थी,,,। वह अच्छी तरह से जानती थी कि पीछे खड़ा राजू उसकी नंगी गांड को देख रहा होगा और यही तसल्ली करने के लिए वह पीछे नहीं देखना चाहती थी क्योंकि वह राजू को पूरी तरह से तड़पाना चाहती थी,,,, राजू के लिए उसका नंगा बदन एक तरह से उसके लिए पुरस्कार था और उसे जीतने के लिए उसे खुद सोनी से स्पर्धा करना था जिसमें सोनी को भी मालूम था कि विजेता चाहे जो भी बने फायदा उसी का है,,,, इस खेल में बहुत मजा आने वाला था,,,,

सोनी के लिए पहला मौका था जब हुआ इस तरह से किस जवान लड़की को जानबूझकर अपनी गांड दिखा रही थी,,,। और राजु के लिए इस तरह के मौके बनते जा रहे थे,,, सोनी पेशाब कर चुकी थी इसलिए उसे पैसा बिल्कुल भी नहीं लगी थी लेकिन पेशाब करने की कलाकृति दिखाना जरूरी थी इसलिए वह वहीं पर बैठ गई क्योंकि वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि मर्दों की सबसे बड़ी ख्वाइश होती और खूबसूरत औरत को,,,, उनकी बड़ी-बड़ी कहां देख कर और खास करके उन्हें पेशाब करता हुआ देखकर मर्द एकदम से उत्तेजित हो जाते हैं,,,, और वह भी यही चाहती थी कि राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो जाए,,,,।

सोनी उसी तरह से बैठीरह गई गई सोने की जानकारी में उसे पेशाब करता हुआ आज तक किसी ने भी नहीं देखा था,,,, लेकिन यही उसकी भुल भी वह इस बात से अनजान थी कि राजू एक बार पहले भी से पेशाब करता हुआ देख चुका है और आज तो वह खुद जानबूझकर उसे दिखा रही थी,,, सोनी के खूबसूरत चेहरे की तरह उसकी गांड भी बहुत खूबसूरत थी वह भरी हुई गुदाज एकदम गदराई हुई,,,। जिसे देखकर राजू का मन कर रहा था किसी से में झाड़ियों में घुस जाए और पीछे से बैठकर उसकी गांड में पूरा लंड डाल दें,,,, लेकिन वह‌ ऐसा नहीं करना चाहता था भले ही वह उसके आकर्षण के जाल में पूरी तरह से बंधा हुआ था लेकिन इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि वह लाला की बहन थी,,,,।

सोनी अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर अपनी गांड की बड़ी-बड़ी फांकों को दोनों हाथों में लेकर हल्के हल्के सहला रही थी,,, और यह देखकर राजू के सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था वह पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को सहला रहा था,,,। जो की पूरी तरह से पजामें में अपनी अकड़ दिखा रहा था,,। सोनी पूरी तरह से राजु को मस्त कर देना चाहती थी,,, इसलिए अपनी बड़ी-बड़ी काम को दोनों हथेली में भरकर हल्के हल्के दबा भी रही थी,,,, कुछ समय तक वह उसी तरह से बैठी रह गई,,,, वो जानती थी कि उसका काम हो गया है जिस तरह का जादू चलाना था वह जादू चल चुका है,,, इसलिए वह धीरे से खड़ी हो गई,,, लेकिन अपने साड़ी को नीचे करने से पहले और अपनी कच्छी को पहनने से पहले,,,,वो पीछे मुड़कर देखना चाहती थी पर ऐसा जताना चाहती थी कि सब कुछ अनजाने में हुआ है,,,इसलिए थोड़ा सा नीचे झुकी और अपनी कच्छी को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर करनी चाही रही थी कि पीछे मुड़ कर देखने लगी और तुरंत राजु और सोनी दोनों की नजरें आपस में टकरा गई,,,,,, सोनी अगर गुस्सा करती तो राजू शर्मिंदा हो जाता लेकिन वह ऐसा नहीं चाहती थी क्योंकि वह इस खेल में आगे बढ़ना चाहते थे इसलिए वह राजू की तरफ देखते हूए बोली,,,।

तुम आ गए,,, तुम कब आए,,,,(और ऐसा कहते हुए जानबूझकर उसकी आंखों के सामने ही अपनी चड्डी को पहनने लगी,,,, राजू आंखें फाड़े उसी को देखे जा रहा था,, उसकी सांसों की गति बड़ी तेजी से चल रही थी,,,, राजू उसके छोटी सी चड्ढी को देख रहा था,,, उसे बड़ी ताजुब के साथ साथ उत्तेजना भी छा रही थी,,,, सोनी चड्डी पहन चुकी थी,,,साड़ी को कमर से नीचे गिराने से पहले वह एक बार उसकी तरफ एकदम से खून गई थी वह चड्डी में क्यों अपनी फोटो भी बुरा जी को दिखाना चाहती तुझे अपनी उसकी कच्ची से पूरी तरह से चिपकी हुई थी और उपसी हुई नजर आ रही थी,,,,। राजू की आंखों के सामने उसकी छोटी सी छोटी थी और वह भी आगे से फुली हुई बुर वाली जगह का उभार कुछ ज्यादा ही था,,,,कमला चाची और अपनी बुआ की चुदाई कर चुका राजू अच्छी तरह से जानता था कि दोनों टांगों के बीच औरतों की बुर कौन सी जगह पर होती है,, ईस लिए सोनी की चड्ढी में फूली हुई जगह को देखकर वह समझ गया था कि उसकी बुर कचोरी की तरह फूल गई है,,,।सोनी समझ गई थी कि जो कुछ भी उसमें दिखाई थी वह उसकी उत्तेजना के लिए काफी था क्योंकि उसकी नजर उसके पजामे में बने हुए तंबू पर चली गई थी,,, जिस पर नजर पड़ते ही उसके होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी,,, और आपने साड़ी को कमर से नीचे गिरा कर,,, वह एक बेहद कामुकता भरे नजारे पर पर्दा गिरा दी,,,,, ।

राजू के द्वारा पेशाब करता हुआ उसकी नंगी गांड देखने के बावजूद भी वह बिल्कुल सामान्य थी यह देखकर राजू को भी आश्चर्य हो रहा था उसमें किसी भी प्रकार की झिझक नहीं थी,,, वह बड़े आराम से झाड़ियों के बीच में से अपने साड़ी को दोनों हाथों से हल्के से पकड़ कर बाहर की तरफ आने लगी और बोली,,,)

मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही थी मुझे तो लगा तुम आओगे नहीं मुझे बडे जोरो की पिशाब लगी थी तो मैं इधर आ गई,,,,

(सोनी जैसी खूबसूरत औरत के मुंह से पेशाब शब्द सुनकर और अभी एकदम खुले शब्दों में राजू की तो हालत खराब हो गई उसे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था उसके मुंह से पेशाब शब्द सुन कर राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया,,,, और उसकी बात सुनकर हक लाते हुए बोला,,,)

ममममम,,, मैं तो कब से आ गया हूं तुम ही कहीं दिखाई नहीं दे रही थी तो पीछे चला आया,,,,।

कोई बात नहीं चलो आगे चलते हैं,,,,।

(इतना कहकर वो आगे आगे चलने लगी और पीछे-पीछे राजू राजू की बोलती बंद थी सांसो की गति तेज हो चुकी थी इतनी उत्तेजक और खूबसूरत औरत उसने आज तक नहीं देखा था उसकी बड़ी बड़ी गांड पर अपनी नजरों को गड़ाए वह उसके पीछे पीछे चलने लगा,,,)

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सोनी आगे चल रही थी,,, राजू पीछे-पीछे उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उसकी आंखों के सामने गांव की सबसे खूबसूरत औरत अपनी गांड मटका कर चल रही थीकसी हुई साड़ी में उसकी कार्रवाई ज्यादा बड़ी लग रही थी जिसे वह थोड़ी देर पहले,, वह नंगी देख चुका था उसकी नंगी नंगी गांड राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर को और ऊंची उठा रही थी,, पजामे में बवाल मचा हुआ था,,,। राजू को सोनी काउसे पेशाब करते हुए देख लेने के बावजूद भी राजू के प्रति साहजिक रहना खुद राजू को हैरान कर देने वाला लग रहा था,,,,,, उसे लगने लगा था की इस आम के बगीचे में आज जरूर गुल खिलने वाला है,,,।

दूसरी तरफ मधु और गुलाबी दोनों राजू का इंतजार कर रहे थे वह उससे पूछना चाहते थे कि आज छोटी मालकिन ने उसे क्या-क्या पढ़ाया,,,,,,,बाकी के सब लड़की आ गए थे इसलिए वह दोनों हैरान थे कि अभी तक वह आया क्यों नहीं एक लड़के से पूछे जाने पर उसने बताया कि वह तो साथ में ही आया था सकता है कहीं इधर उधर घूमने निकल गया हो,,,, उस लड़के की बात मधु और गुलाबी दोनों को सही लग रही थी क्योंकि राजू की आदत से वह दोनों भलीभांति परिचित थे,,,, मधु गुलाबी से बोली चल कोई बात नहीं जब आएगा तो पूछ लेंगे,,, उन दोनों को यही लग रहा था कि राजू वहां पढ़ने गया है हां बाकी के गांव के लड़के तो किताबों का ज्ञान लेने ही गए थे लेकिन सोनी राजीव को किताबों की ज्ञान के साथ-साथ दैहीक ज्ञान भी दे रही थी,,,, ।

सोनी झोपड़ी के आगे आ गई थी,,,, और हेड पंप के करीब खड़ी हो कर के उसे हेडफोन चलाने के लिए बोली,,, राजु उसकी बात सुनते ही तुरंत हेड पंप के पास पहुंच गया और उसे चलाना शुरु कर दिया,,,,। पंप में से पानी निकलते ही सॉरी नीचे की तरफ झुका कर अपने हाथ पैर धोने को हुई तो उसका साड़ी का पल्लू उसके कंधे पर से सरक कर नीचे गिर गया जिससे उसकी भारी भरकम छातियां राजू को एकदम साफ नजर आने लगी,,, राजू की आंखें फटी की फटी रह गई चुचियों की बीच की गहरी दरार ईतनी गहरी थी कि राजू को उसमें डूब जाने का मन कर रहा था,,, दोनों चूचियां आपस में सटकर एक छोटे से नितंब का निर्माण कर रही थी,,,, क्योंकि जिस तरह से नितंबों में दो फांके होती हैं उसी तरह से सूचियों के बीच की पत्नी करार भी नितंबों की तरह दोनों चूचियों की दो फांके बना रही थी,,,, जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,, साड़ी का पल्लू नीचे गिरते ही सोनी बोली,,,।

धत्,,, जब देखो तब नीचे गिर जाती है,,,,।

संभाल कर रखा करिए दीदी,,,,

अरे संभाल कर ही रखती हूं लेकिन संभाले नहीं संभलती,,, अब हाथ मुंह धोने के बाद ही उठाऊंगी,,,,(इतना कह कर वह हाथ मुंह धोने लगी,,,,वह जानबूझकर अपने साड़ी के पल्लू के ऊपर नहीं उठा रही थी वह राजू को पूरी तरह से अपनी दोनों चूचियों के बीच संभाल लेना चाहती थी वह चाहती थी कि राजू उसकी सूचियों की बीच की गहरी नहर में डूब जाए और ऐसा हो भी रहा था राजू की प्यासी नजरें उसकी दोनों चूचियों के बीच की गहरी दरार पर टिकी हुई थी,,,, राजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी पागल हेडफोन चला रहा था पजामे के अंदर बवंडर सा उठ रहा था जो कि सोनी की नजर से बच नहीं पा रहा था,,,।

सोनी अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बाद में तो जवानी देख कर राजू के तन बदन में तूफ़ान सा उठ रहा है,,, और वह उस तूफान में खो जाना चाहती थी,,,,,सोनी हाथ में पानी लेकर उसे अपने चेहरे पर मार रही थी और चेहरे से पानी की बूंदे गिर कर नीचे उसकी चूचियों के साथ-साथ उसके ब्लाउज को भीगो रही थी,,, और यह देख कर राजू की हालत खराब हो रही थी,,,,,,, हाथ मुंह धो लेने के बाद सोने खड़ी हुई और अपने साड़ी के पल्लू से अपने चेहरे को पोछने लगी और चेहरे को पोछते हुए बोली,,,।

राजू मैं देख रही हूं कि बार-बार तुम्हारे पजामे में तंबू बन जा रहा है ऐसा क्यों हो रहा है,,,,?

(सोनी की इस तरह की बातें सुनकर राज एकदम से सकपका उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या जवाब दें,,,, फिर भी बात को संभालते हुए बोला,,,)

नहीं-नहीं सोनी दीदी ऐसी कोई भी बात नहीं,,, है,,, यह तो ऐसे ही इसकी आदत है,,,(राजू कि इस तरह की मासूम बात सुनकर सोनी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

मुझसे झूठ नहीं बोल सकते बच्चु,,,,मुझे सब पता है बार-बार मुझे देखकर तुम्हारे पजामे में तंबू बन जा रहा है,,,, जब पढ़ने आए थे ब्लैकबोर्ड उतारने के लिए तब भी तुम्हारे पजामे में इसी तरह से उठा हुआ था,,,(उंगली से उसके पजामे के तंबू की तरफ इशारा करते हुए) और ईस समय भी मुझे पेशाब करते हुए देख कर उठा हुआ है,,,, इसका मतलब तुम भी अच्छी तरह से जानते होंगे जब किसी लड़के के मन में गंदे विचार आते हैं तो इसी तरह की हालत हो जाती है मुझे लग रहा है कि मुझे देखकर तुम्हारे मन में गंदे विचार आ रहे हैं मैं इसीलिए तुम्हें समझाने के लिए बुलाई थी लेकिन फिर से तुम्हारी यही हालत है,,,,

नहीं नहीं सोनी दीदी मेरा ऐसा कोई भी इरादा नहीं है,,,(राजू एकदम से घबराते हुए बोला,,,)

ऐसा कोई इरादा नहीं है,,, मुझे बुद्धू बना रहे हो ,,,झोपड़ी के अंदर तुम्हारी हरकत को मैं अच्छी तरह से समझ रही थी मेरी कमर को कैसे अपने दोनों हाथों से थाम कर नितंबों को मेरे पीछे सटा रहे थे,,,, मैं खूब समझती हूं,,,(सोनी जानबूझकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोल रही थी,,,और उसके चेहरे के बदलते हाव-भाव को देखकर राजू को भी डर लगने लगा इसलिए वह फिर से डरते हुए बोला,,,)

तुम क्या कहना चाह रही हो दीदी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,

समझ जाओगे अच्छी तरह से समझ जाओगे जब मैं यह बात अपने भैया से बताऊंगी ना तो सब कुछ समझ जाओगे,,,।(सोनी जानबूझकर अपने भैया का जिक्र कर रही थी ,,,, क्योंकि उसके भैया के बारे में सब लोग अच्छी तरह से जानते थे और उसके लिए राजू का डर और ज्यादा बढ़ गया था वह इस बात से डर रहा था कि कहीं सोनी ने अपने भैया को सब कुछ बता दी तो उसके भैया उसकी चमड़ी निकाल लेंगे,,, इसलिए घबराते हुए बोला,,,)

नहीं नहीं दीदी अपने भैया को कुछ मत बताना,,, जो कुछ भी हुआ था हम जाने में हुआ था इसमें मेरी कोई गलती नहीं है,,,, वह तो आपकी खूबसूरती और खुद मेरे बाहों में आ गई थी इसलिए इसका यह हाल हो गया था,,,,।

(राजू की बातें सुनकर सोनी अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी,,,, और बोली,,,)

फिर भी ऐसा नहीं होना चाहिए था तेरे मन में मेरे लिए गलत ख्याल आ गया तभी तेरा खड़ा हुआ,,,।

(सोनी के मुंह से खड़ा हुआ शब्द सुनते ही उसके मदमस्त एहसास से राजू पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था लेकिन उसे डर भी लग रहा था,,, सोनी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

देख कर जो तुम मुझे सच सच बता देगा तो मैं भैया से कुछ नहीं कहूंगी मैं सिर्फ जानना चाहती हूं कि तेरे मन में मुझे लेकर के गंदे ख्याल आए थे कि नहीं,,,

आए थे दीदी,,,(कुछ देर खामोश रहने के बाद नजरें नीचे झुकाए हुए ही वह बोला उसका जवाब सुनकर सोनी अंदर ही अंदर खुश हो रही थी)

अच्छा यह बता कि तेरे मन में यह ख्याल आया कैसे,,,?

वह दीदी जब तुम ऊपर से नीचे गिरी और सीधे मेरी बाहों में आ गई तुम्हारी साड़ी कमर तक उठ गई,,,, और तुम्हारी गांड मेरे से एकदम से सट गई और ना चाहते हुए भी मेरा खड़ा हो गया,,,,(इतना कहकर वह खामोश हो गया ,,, सोनी के कहे अनुसार वह सच सच बता दिया था और सोनी उसकी मासूमियत और उसके भोलेपन पर पूरी तरह से आकर्षित हो गई थी,,,, सोनी का दिमाग बड़ी तेजी से काम कर रहा था ,,,, वह आज राजू से पूरी तरह से मजा लेना चाहती थी,,,, इसलिए वह बोली )

मैं तुम्हारी सच्चाई से खुश हूं अगर तुम चाहते हो कि मैं अपने भैया से यग सब कुछ ना बताउंं तो,,, जैसा मैं कहूंगी वैसा तुमहे करना होगा,,,,,,,(होठों पर मादक मुस्कान लाते हुए वह बोली,,, राजू के पास कोई रास्ता नही था,,, कहीं ना कहीं राजू को लगने लगा था कि जो कुछ भी हो रहा है उसमें उसका फायदा ही है,,, इसलिए हां में सिर हिला दिया,,,,,,, उसकी हामी होते ही वह राजू से बोली,,,)

चल झोपड़ी में चलते हैं जहां पर मुझे देख कर तेरी हालत खराब हो गई थी,,,,

(राजू कुछ बोला नहीं और उसके पीछे पीछे चलने लगा,,, झोपड़ी के अंदर सोनी उसके साथ क्या करेगी यह सोचकर ही उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,, लेकिन थोड़ा-थोड़ा वह औरतों के मन की बात को समझने लगा था,,, उसे इतना तो समझ में आ ही गया था कि भले ही सोनी गुस्सा दिखा रही लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा है,,,, खूबसूरत औरत का एक जवान लड़की के साथ आम के बगीचे के सुनसान स्थल पर कीसी झोपड़ी में जाने के मतलब को राजू अच्छी तरह से समझ रहा था,, थोड़ी ही देर में सोनी और राजू दोनों झोपड़ी के अंदर थे,,, गांव से दूर आम के बगीचे में दोनों झोपड़ी के अंदर खड़े थे अगर इस बात का आभास गांव में किसी को भी हो जाता तो हड़कंप मच जाता बदनामी हो जाती अगर दोनों के बीच कुछ ना अभी हुआ हो तो भी लोग गलत ही समझते लेकिन यहां किसी को कहां खबर होने वाली थी यहां कोई आता जाता भी नहीं था,,, इसलिए सोनी को यही जगह ठीक लगी थी पढ़ाने के बहाने अपनी कामलीला रचाने के लिए,,,। सोनी की कच्छी काम रस से भीगी जा रही थी,,, तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी मदहोशी का मीठा मीठा दर्द पूरे शरीर में फैल रहा था,,,,। एक जवान मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर के अंदर महसूस करने के लिए सोनी पूरी तरह से तड़प रही थी,,,,,, सांसो की गति राजू की भी दुरुस्त नहीं थी,,, जानलेवा सामान जो उसकी आंखों के सामने था,,,,। सोनी खड़ी खड़ी मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली,,,।

राजू ब्लैकबोर्ड उतारते समय जो कुछ भी हुआ था क्या तुम्हें अच्छा लगा था,,,,

(राजू की मौके की नजाकत को समझने लगा था उसे अच्छी तरह से आभास हो गया था कि एक औरत तभी इस तरह की बातें करती है जब उसके मन में भी कुछ-कुछ हो रहा हो इसलिए अपने मन में सोचने लगा कि डरने वाली कोई भी बात नहीं है अगर ऐसी वैसी बात होती है तो पहले ही बहुत डांट कर भगा दी होती उसे इस तरह से चोरी छुपे आम के बगीचे में बुलाती नहीं इसलिए सोनी के सवाल का जवाब देते हुए राजू बोला हालांकि वह अपनी नजरों को जानबूझकर नीचे किए हुए था ताकि उसे ऐसा ही लगे कि वह अभी भी डरा हुआ है,,,।)

बहुत अच्छा लगा सोनी दीदी अच्छा नहीं लगता तो वह खड़ा होता क्या,,,

क्या खड़ा होता जरा खुल कर बोल,,,

वही दीदी जिसके बारे में तुम बोल रही थी,,,(राजू उसी तरह से नजरे नीचे किए हुए बोला,,,)

तो खुल कर बोलना किसके बारे में बोल रही थी शर्मा क्यों रहा है जवान लड़का होकर शर्माता है,,,।

(राजू को अब लगने लगा था कि उस के नसीब में बड़े घराने की बुर चोदना लिखा है,,, उसे सोनी के इरादे स्पष्ट होते मालूम हो रहे थे,,,,,,, जब सामने से पकवान की थाली आगे बढ़ाई जा रही हो तो भला खाने से इंकार किसको था,,, इसलिए राजू कि अपने मन में सोचने लगा कि जिस भाषा में वह सुनना चाहती हैं क्यों ना उसी भाषा में बात करु,,, इसलिए वह जवाब देते हुए बोला,,,)

वही दीदी आप जानती तो हैं,,,,

अरे मैं तो जानती हूं लेकिन तुम्हारे मुंह से सुनना चाहती हूं,,,,(सोनी की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी क्योंकि उसकी नजर उसकी पजामे पर ही टिकी हुई थी क्योंकि इस समय अपनी पूरी औकात में था,,,, दोनों तरफ उत्तेजना का सैलाब उठ रहा था,,,)

लललल,,,लंड के बारे में दीदी,,,(जानबूझकर राजू थोड़ा घबराते हुए बोला,,, राजू के मुंह से लंड शब्द सुनते ही सोनी की बुर गीली होने लगी,,,ऐसा नहीं था कि वह इन शब्दों को पहली बार सुन रही थी लेकिन आज राजू के मुंह से लंड शब्द सुनकर वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी,,,,को सामान उसके जीवन में आकर गुजर चुके थे लेकिन जैसे कि वह इसी सावन की चाह में थी ईसी सावन की फुहार के इंतजार में थी,,, जो कि बरस कर उसे पूरी तरह से अपनी आगोश में ले लेगा,,, सोनी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,, हालात काबू से बाहर जा रहे थे,,,उसे इस बात का आभास हो गया था कि इस झोपड़ी के अंदर तूफान आने वाला है,,,,राजू के मुंह से उसके मर्दाना अंग का नाम सुनते ही उसे देखने की तड़प उसके अंदर जागने लगी इसलिए वह व्याकुल होते हुए बोली,,,)

मुझे दिखाओ,,, कैसा है तुम्हारा जो तुम्हारे पजामे में इतना बवाल मचाए हुए हैं जो तुम्हें इतना परेशान कर रहा है,,,,

(सोनी एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोली उसके होंठों से निकल रहे एक एक शब्द कामुकता बरसा रहे थे मदहोशी भरे शब्द राजू के कानों में घूमते ही उत्तेजना का प्रसारण पूरे बदन में बड़ी तेजी से कर रहे थे,, राजू अपनी सांसो को दुरुस्त करते हुए बोला,,,)

यह क्या कह रही हो दीदी मैं भला कैसे,,,,?

शरमाओ मत राजु,,,, आखिर तुमएक मर्द हो पर एक औरत के सामने ही अपने अंग का उपयोग करोगे उसे दिखाओ गए किसी जानवर के सामने नहीं इसलिए घबराओ मत मैं जैसा कह रही हूं वैसा ही करो नहीं तो जानते हो ना भैया को बता दी तो तुम्हारी खैर नहीं,,,

(सोनी की अधीरता उसकी व्याकुलता उसके शब्दों में साफ झलक रही थी राजू उसके मन की मनसा को अच्छी तरह से समझ रहा था और उसके मनसा में अपनी खुशी भी देख रहा था लेकिन फिर भी वह जानबूझकर सिर्फ नाटक कर रहा था बल्कि वह तो खुद अपने लंड को उसे दिखाना चाहता था क्योंकि वह इतना तो समझ गया था कि दूसरों की अपेक्षा उसके लंड की ताकत कुछ ज्यादा ही है तभी तो उम्रदराज होने के बावजूद भी कमला चाची पानी पानी हो गई थी और उसकी खुद की शगी बुआ ,,, बुआ और भतीजे के बीच के रिश्ते को तार-तार करते हुए उसके लंड को अपनी बुर में लेकर मस्त हो गई,,,,,,, सोनी के एक-एक शब्द ऐसा लग रहा था कि उसके अंगों को सहला रहे हैं,,, पल-पल राजू उत्तेजना के समंदर में गोते लगाते हुए आगे बढ़ रहा था,,,,,, राजू सोनी की बात सुनकर बोला,,,)

नहीं नहीं दीदी ऐसा मत करना लेकिन मुझे शर्म आ रही है इसलिए मैं तुम से गुजारिश करता हूं कि अपने हाथ से ही देख लो,,,,(राजू शेर पर सवा सेर साबित हो रहा था वह अपने मन में ही सोच रहा था कि सोनी अपने हाथों से उसके पहचाने को नीचे करके उसके लंड को देखें इसमें भी एक अद्भुत सुविधा अपने हाथ से कपड़े उतारने में और औरतों के द्वारा कपड़े उतारने में जमीन आसमान का फर्क होता है जब एक मर्द खुद कपड़े उतारता है तो उसकी अधीरता और उतावलापन होता है लेकिन जब एक औरत मर्द के कपड़े उतारती है तो इसमें उस औरत की प्यास,,, उसकी वासना उसकी संभोग करने की कामेच्छा छुपी होती है इसीलिए वह सोनी को अपना पजामा उतारने के लिए कह रहा था,,, उसके इस आमंत्रण पर सोनी भला कैसे पीछे रह सकती थी,,, वैसे भी मर्दों के कपड़े उतारने के अनुभव से वह पूरी तरह से भरी हुई थी इसलिए राजू की बात सुनते ही मुस्कुराते आगे बढ़ी और तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गई उसके इस तरह से बैठने पर राजू के दिल की धड़कन बढ़ने लगी,,,, झोपड़ी के अंदर चारों तरफ घास फुस का ढेर लगा हुआ था इसलिए घुटने टेक कर बैठने में उसे बिल्कुल भी परेशानी नहीं हुई सोनी अपने दोनों हाथों से बढ़ाकर उसके पजामे के ऊपर रख दी ओर उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, राजू की हालत खराब हो रही थी साथ ही सोनी का दिल जोरों से धड़क रहा था महीनों पहले वह दूर से ही राजू के लंड के दर्शन करके पूरी तरह से काम उत्तेजित हो गई थी और उसे पाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो गई थी और आलम यह था कि आज उसी राजू के साथ वहां आम के बगीचे की झोपड़ी में एकांत में उसका ही पैजामा उतार रही थी,,,,,
 
अच्छा खासा भरा हुआ तंबू देखकर सोनी की बुर लप-लपाने लगी थी उसमें से काम रस झड़ रहा था,,, धीरे धीरे सोनी उसके पजामे को नीचे कर रही थी,,,, लंबा और मजबूत लंड होने की वजह से पजामा नीचे की तरफ नहीं आ रहा था तो सोनी पजामे में हाथ डालकर राजू के मोटे तगड़े लंड को हाथ से पकड़ ली और उसे बाहर की तरफ खींचने लगी,,,, लंड की गर्माहट पाते हैं सोनी की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पिघलने लगी जो कि पहले से ही पानीयाई हुई थी,,,। बरसों बाद सोनी को इस तरह का अनुभव हुआ था कि वह पहली बार किसी मर्द के लंड को पकड़ रही है,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी हालत खराब हो रही थी,,,, सोनी उसे पजामे से बाहर निकाल ली थी,,, और बाहर निकालते ही उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,,,,, उसका सुपाड़ा एकदम दमदार था आलू बुखारे की शक्ल का,,, कुछ पल के लिए तो सुपाड़े की गोलाई देखकर सोनी अंदर ही अंदर सिहर उठी उसे इस बात का शंका थी कि उसका सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर के छेद में घुस पाएगा कि नहीं,,,लेकिन एक औरत होने के नाते उसे इतना तो अंदाजा था कि वह किसी भी तरह से उसे अंदर लेगी लेगी यह ख्याल मन में आते ही उसके चेहरे पर चमक आ गई और घुटनों में फंसे पजामे को राजू खुद अपने आंखों का सहारा लेकर उसे अपनी टांग से बाहर निकाल दिया कमर से नीचे वह पूरी तरह से नंगा हो चुका था,,, और खूबसूरत औरत के हाथों में अपना दमदार लंड का एहसास उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था,,,।

तो यही था,,,, जो मुझे देख कर खड़ा हो गया था,,,

हां सोनी दीदी यही था इसमें मेरी कोई गलती नहीं है,,,

तुम सच कह रहे हो इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी,,, सारी गलती इसी की ही थी और इसे गलती की सजा जरूर मिलेगी,,,,।(राजू की तरफ नजर उठा कर देखते हुए,,) राजू इस झोपड़ी में मैं तुम्हारे साथ कुछ भी करूं उस बारे में खबर बाहर नहीं जानी चाहिए अगर इस बारे में किसी को भी भनक लगी तो याद रखना तुम्हारी खैर नहीं,,,,

जी जी ,,,, ज़ी दीदी किसी को कानों कान खबर नहीं होगी,,,

बहुत अच्छे काफी समझदार हो,,,(राजू के लंड को मुठीयाते हुए सोनी बोली,,, उसके मुंह में पानी आ रहा था साथ में बुर की हालत खराब होती जा रही थी उसने अब तक अपने पसंद के ना जाने कितने लंड़ कों अपने मुंह में ले कर चुस चुकी थी,,, लेकिन उसे इस बात का अहसास था कि मुझे का लंड मुंह में लेने का मजा ही कुछ और होगा,,, इसलिए सोनी बिना कुछ बोले अपने होठों को राखी के लंड पर रखकर उसे अपने होंठों के बीच अंतर ले ली और उसे जीप का सहारा देकर चाटना शुरू कर दी राजू के लिए यह जबरदस्त हमला था वह अपने आप को संभाल सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था उसे उम्मीद नहीं थी कि एक बड़े घर की औरत इस तरह की हरकत करेगी हालांकि उसे पता ही था कि सोनी आम के बगीचे में उसे वापस बुलाकर कुछ तो अलग करना चाहती है लेकिन इस तरह का कार्यक्रम का उसका मन होगा इस बारे में कभी सोचा नहीं था लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसे तो जैसे स्वर्ग का सुख प्राप्त हो गया था आज वह अपने आप को दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान समझ रहा था,,, और वैसे भी वह सबसे खुशनसीब था भी,,,।

राजू की मस्ती का कोई ठिकाना ना था सोनी पूरी तरह से उसे मस्त कर रही थी,,,, और खुद ही मस्त हुए जा रही थी,,, राजु के लंड से उसका पुरा मुंह भरा हुआ था,,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि किसी का लंड ईतना मोटा होता होगा,,,, वह पूरी तरह से मस्ती में आकर राजू के लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रहे थे और आज भी पूरी तरह से स्वर्ग का सुख प्राप्त करता हुआ अपने दोनों हाथों को उसके रेशमी बालों में उलझा कर हल्के हल्के अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया था,,,, अद्भुत नजारा था अतुल्य जिसकी किसी से तुलना नहीं कर सकते थे,,,सोनी से कुछ भी बोला नहीं जा रहा था वह जितना हो सकता था उतना अपने गले के अंदर तक लेकर राजू के लंड को खा जाने की इच्छा रख रही थी,,,, पूरा गले तक उतार लेने के बावजूद भी डेढ़ इंच जितना रह जाता था,,, यह देखकर सोनी की बुर में खलबली होने लगती थी,,,।

कुछ देर तक इसी तरह से सोनी राजू के लंड को मुंह में लेकर चुसती रही,,, राजू खड़े-खड़े अपना ऊपर का कपड़ा भी निकाल कर पूरी तरह से नंगा हो गया था,,,। थोड़ी देर बाद सोनी ने राजू के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल दि,,,, और हांफने लगी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी,,,, सोनी के चेहरे को देखकर आभास हो रहा था कि उसे बहुत मजा आ रहा था अपनी सांसों को दुरुस्त करके और आगे की तरफ देखते हुए बोली,,,।

बाप रे तुम्हारा तो बहुत मोटा और लंबा है,,,,

(सोने की बात सुनकर राजू खुश हो गया और अपने लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करके हीलाने लगा ,, राजु की हरकत को देखकर सोनी समझ गई थी कि यह उसका पहली बार नहीं है यह पहले भी मजा ले चुका है,,, इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

तुम अनाड़ी नहीं हो खिलाड़ी लग रहे हो तुम्हारी हरकत से लग रहा है कि मैं तुम्हारे लिए पहली बार नहीं है इससे पहले भी औरत की चुदाई कर चुके हो,,,।

(सोनी के मुंह से चुदाई जैसे शब्दों को सुनकर राजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और उसकी बात सुनकर हुआ है समझ गया था कि छुपाने से कोई फायदा नहीं है इसलिए वह बोला)

जी दीदी,,,, पहले भी मैंने चुदाई किया हूं,,, लेकिन अपनी मर्जी से नहीं गांव की एक चाची है वह हमेशा मेरे पीछे पड़ी रहती थी और एक दिन अपने घर बुलाकर जो तुम कर रही हो वह भी मेरे साथ सब कुछ करी,,,।

(राजू की बात सुनते ही सनी मुस्कुराते हुए बोली)

बहुत अच्छे तब तो मुझे सिखाना नहीं पड़ेगा,,,,(इतना कहते ही वह खड़ी हो गईऔर राजू की आंखों में छापने रवि राजू सोने की आंखों में डूबता चला जा रहा था दोनों के होंठ आपस में टकराए और सोनी पागलों की तरह उसके होंठों को काटना शुरु कर दी,,, राजू भी जवाबी कार्रवाई करते हुए सोनी के गुलाबी होंठों को अपने होंठों में भर कर,,, चूसना शुरू कर दिया काटना शुरू कर दिया दोनों उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुके थे,, राजू के हाथ उसकी चिकनी पीठ पर घूमना शुरू हो गई थी,,, मखमली चिकनी पीठ मक्खन की तरफ चल रही थी उत्तेजना के मारे राजू अपनी हथेलियों को कसके उसकी पीठ पर इधर से उधर घुमा रहा था जिससे दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी सोनी भी उसकी नंगी चिकनी पीठ पर अपनी हथेलियां घूम रही थी राजू अपनी दोनों हथेलियों को उसकी चिकनी पीट से होती उसकी कमर पर ले आया और उस पर दोनों हथेलियां रखकर जोर से दबोच लिया जिससे उत्तेजना के मारे सोनी उछल पड़ी लेकिन वह अपनी हथेली के दबाव में उसे दाबे हुए थाराजू की हरकतों से सोनू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी उसके बदन की गर्मी और ज्यादा अपना असर दिखा रही थी राजू का लंड उसकी दोनों टांगों के बीच से होता हुआ साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर ठोकर मार रहा था जिसकी वजह से सोनी की बुर उत्तेजना के मारे फुदक रही थी,,, एक बड़े घर की औरत को अपनी बाहों में लेकर राजू अपने आप को राजा समझने लगा था सोनी उसकी रानी थी इसकी जवानी के रस को अपने होठों से पीने के लिए व्याकुल था,,,,

सोनी अपनी कमर को अपनी गांड को गोल-गोल घुमा रही थी इस तरह से वह अपनी बुर को रांची का लंड पर रगड़ रही थी भले ही वह साड़ी के ऊपर से ही क्यों ना इस तरह की हरकत कर रही थी लेकिन मजा उसे बहुत आ रहा था,,,, राजू पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबता चला जा रहा था वह अपनी हथेलियों को उसके कमर से हटाकर नीचे के उभार की तरफ आगे बढ़ने लगा और अगले ही पल उसकी मद भरीबड़ी बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखकर उसे जोर-जोर से बताने लगा जिससे सोनी की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसके मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आना शुरू हो गई थी,,,, राजु पागलों की तरह उसके गुलाबी होठों को खा रहा था दोनों के मुंह से लार का आदान-प्रदान हो रहा था जिसे अपने गले के नीचे गटकने में दोनों को किसी भी प्रकार की बाधा महसूस नहीं हो रही थी,,,, सोनी खेली खाई थी तो राजू भी कम नहीं था अपनी दुआ के साथ-साथ एक उम्रदराज औरत की बुर का भी मजा ले चुका था इसलिए उसे अच्छी तरह से मालूम था कि औरत को कैसे संतुष्ट किया जाता है वह सोनी की साड़ी को अपने हाथ से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया था,,, और देखते ही देखते वह सोनी की साड़ी को एक बार फिर से उसकी कमर तक उठा दिया था,,,

सोनी को इसमें किसी भी प्रकार की आपत्ति महसूस नहीं हो रही थी उसे तो मजा आ रहा था उसे पहले लग रहा था कि राजू को सब को सिखाना पड़ेगा लेकिन वह अनाड़ी नहीं खिलाड़ी निकला था इसलिए सोनी मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि अनाड़ी के साथ इतना मजा नहीं आता जितना खिलाड़ी के साथ संभोग करने में आता है,,,, कमला चाची ने उसे औरतों के दोनों टांगों के बीच का रास्ता दिखाई थी और बाकी का कसर उसकी बुआ ने पूरी कर दी थी इसलिए वह अनाड़ी से खिलाड़ी हो गया, था,,,,राजू सोनी की साड़ी को कमर तक उठा लेने के बाद उसकी बड़ी-बड़ी गाने को अपने दोनों हाथों में लेकर दबोच रहा था लेकिन उसकी छोटी सी चड्डी की वजह से वह पूरी तरह से मस्ती कर लुत्फ नहीं उठा पा रहा था,,,लेकिन फिर भी बिना कुछ बोले हो आज चड्डी के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी गांड को रगड़ रहा था मैं कर रहा था और आगे से अपने लंड को उसकी बुर् पर बराबर दबाव बनाए हुए था,,,। राजू कि इन सभी हरकतों की वजह से सोनी चटनी बनी हुई थी जिसे वह पूरी तरह से पीसकर और भी ज्यादा स्वादिष्ट बना रहा था,,,, सोनू की बुर से लगातार काम रस झर रहा था,,, जिसे राजू को पिलाने के लिए सोनी व्याकुल हुए जा रही थी,,, ऊपर और नीचे से राजू पूरी तरह से सोनी के रस को निचोड़ रहा था सोनी की मस्ती को और ज्यादा बढ़ा रहा था सोनी चुदवाने के लिए व्याकुल हुए जा रही थी,,,,सोनी अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर छोटी सी चड्डी उसके बदन पर ना होती तो शायद राजू अपने लंड को अब तक उसकी बुर की गहराई में डाल दिया होता,,,,।

दोनों एक दूसरे के होंठों को छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं थे होंठों की मस्ती का असर नीचे देखने को मिल रहा था,,,। नीचे से दोनों का नाजुक और कड़क अंग पिघल रहा था,,,अपनी उत्तेजना को बर्दाश्त ना कर सकने की स्थिति में राजू अपने दोनों हाथों की उंगलियों का उसकी चड्डी के अंदर डाल कर जोर जोर से मसल रहा था,,,,।

ओहहहह,,, राजू बहुत मजा आ रहा है ऐसा मजा मुझे आज तक नहीं आया,,,।

मुझे भी दी दी बहुत मजा आ रहा है तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हारे अंग कितनी खूबसूरत है,,, खास करके तुम्हारी गांड कितनी मस्त है,,,,आहहहहहह,,,, जी करता है की तुम्हारी गांड में घुस जाउ,,,,

तो घुस जाओ राजू रोका किसने है,,,,( सोनी मद भरी आवाज में बोली,,)

घुस तो जाऊ सोनी दीदी,,, लेकिन तुम्हारी चड्डी बीच में आ रही है,,,, लेकिन एक बात मुझे समझ में नहीं आ रही है दीदी,,,

वह क्या राजू,,,

तुम इतनी बड़ी हो गई हो फिर भी अभी भी चड्डी पहनती हो,,,।

(राजू के मासूम सवाल पर सोनी अपने आप को रोक नहीं पाई और ठहाका मारकर हसने लगी ,,,,रो जोर जोर से हंसी जा रही थी और राजू उसे देख रहा था उसके होठों पर भी मुस्कान आने लगी थी,,,)

तुम हंस क्यों रही हो दीदी,,,

हंसु तो और क्या करूं,,,

ऐसी कौन सी बात हो गई जो जोर जोर से हंसे जा रही हो,,,

अरे तुम बात ही ऐसी कर रहे हैं यह चड्डी नहीं है जो औरतों को पहनने के लिए एक कच्छी है,,,

औरतों को पहहने के लिए,,,, लेकिन मैंने आज तक तो किसी को नहीं देखा पहनते हुए,,,,

हां मैं जानती हूं राजू,,,,गांव में कोई भी औरत से नहीं पहनती क्योंकि किसी को इसके बारे में पता ही नहीं है लेकिन शहर में सभी औरतें पहनते हैं और शहर में इसे पेंटी कहते हैं,,,

क्या पेपप,,,,

पेंटी,,,,,

(राजु और सोनी अभी भी एक दूसरे की बाहों में थे,, राजू अभी भी अपनी हथेली में भर भर कर उसकी गांड को दबा रहा था और सोनी अपनी बुर पर उसके लंड के ठोकर को बराबर महसूस कर रही थी और उसकी पीठ को सहला रही थी,,, राजू को अभी भी कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

लेकिन इसे पहनने से होता क्या है,,,
 
औरतों की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है,,,, देखना चाहते हो,,,,

(सोने की बातें सुनकर राजू बोला कुछ नहीं बस आने से भी ला दिया वह भी देखना चाहता था कि किसी खूबसूरत सोने की खूबसूरती छोटी सी चड्डी पहनने से और ज्यादा कैसे बढ़ जाती है सोनी राजू से अलग होकर उसकी आंखों के सामने अपने हाथों से अपनी साड़ी उतारने लगी,,,,और देखते ही देखते वह अपनी सारी उतार कर घास फूस के ढेर पर रख दी,,, राजू के लिए यह मौका पहली बार था जब उसकी आंखों के सामने कोई औरत अपने कपड़े उतार रही थी अपनी साड़ी उतार रही थी,,, हालांकि वह अपने हाथों से अपनी बुआ की सलवार और समीज उतार चुका था और कुछ-कुछ कमला चाची के साड़ी को उतारने का अनुभव से था लेकिन जो सुख उसे अपनी आंखों से एक औरत को अपनी साड़ी उतार कर नंगी होते हुए मिल रहा था वह उसके लिए बेहद अद्भुत था,,,। देखते ही देखते सोनी के बदन पर ब्लाउज और पेटीकोट रह गई,,,ऐसा नहीं था कि सोनी को मजा नहीं आ रहा था एक लड़के के सामने अपने कपड़े उतारने में उसे भी असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी खास करके उसे राजू को इस तरह से तड़पाने में मजा आ रहा था,,,, साड़ी उतर जाने के बाद राजू की नजर है उसकी घटादार छातियों पर टिकी हुई थी,,, जिसमें से बाहर आने के लिए उसके दोनों जंगली कबूतर अपने पंख फड़फड़ा रहे थे,,,चिकना पेट और उसके बीच की गहरी नाभि राजू को उसकी छोटी सी बुर से कम नहीं लग रही थी,,, उसकी नाभि को फोटो से चोदने का मन कर रहा था लेकिन अभी वह सोनी को केवल चड्डी में देखना चाहता था वह देखना चाहता था कि वाकई में चड्डी में औरतों की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है कि नहीं,,,।

सोनी राजू की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी और धीरे से एक हाथ से अपने पेटीकोट की डोरी को पकड़ ली और उसे खींच दी डोरी को खींचते ही नितंबों पर कैसी हुई पेटिकोट एकदम ढीली हो गई और डोरी को हाथ से छोड़ते ही उसकी पेटीकोट भरभरा कर उसके कदमों में जा गिरी,,,।

और जो नजारा राजू की आंखों के सामने नजर आने लगे उसकी तो कभी उसने कल्पना भी नहीं किया था,,, सोनी के कहे अनुसार वाकई में छोटी सी चड्डी में सोनी की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ गई थी जिसे देखकर राजू मदहोश हुआ जा रहा था उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी थी,,,। अपने आप पर काबू कर पाना उसके लिए मुश्किल हुआ जा रहा था,,, उसकी छातियों पर अभी भी ब्लाउज टंगा हुआ था जिसे वह दूर करने के लिए मुस्कुराते हुए अपने ब्लाउज के बटन खोल रही थी,,,, एक-एक करके सोनी ने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए और ब्लाउज को अपनी बाहों में से निकाल कर उसी घास फूस के ढेर पर रख दी,,

राजू की तो आंखें फटी की फटी रह गई सौंदर्य की देवी उसकी आंखों के सामने खड़ी थी और वह भी छोटी सी चड्डी में,,,, छातियों की शोभा बढ़ा रही उसकी दिनों खरबूजे को देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,, मदमस्त जवानी से भरपूर एक खूबसूरत औरत उसकी आंखों के सामने चड्डी को छोड़कर बाकी पूरी तरह से नंगी खड़ी थी उसके बदन पर केवल एक छोटी सी चड्डी थी जिसमें वाकई में वह सुंदरता की मूरत लग रही थी,,,।

राजू की तो जैसे साथ ही अटक गई थी एक तक उसकी भरपूर जवानी को ऊपर से लेकर नीचे तक अपनी आंखों से पी रहा था,,,, पल भर में ही राजू को 4 बोतलों का नशा होने लगा सोनी उसकी हालत को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,,राजू को लगने लगा कि शराब से ज्यादा नशा औरत की मदमस्त जवानी में होता है जिसे पीकर आदमी मस्त हो जाता है,,,। सोनी की चूचीयों में कसाव बरकरार था जोकि उसकी चूचियों पर कुछ ज्यादा ही मेहनत हुई थी लेकिन फिर भी वह अपनी रंगत और शानो शौकत को नहीं छोड़ी थी उसी तरह से पहाड़ की तरह सीना ताने,,,, भाले की नोक कि तरह अपनी जवानी का जलवा बिखेर रही थी,,,।

राजू की नजर कभी चूचियों पर तो कभी उसकी छोटी सी चड्डी पर चली जा रही थी जिसमें उसने अनमोल खजाना छुपा कर रखी थी जिसे पाने के लिए राजू तड़प रहा था,,,,राज अपने मन में सोचने लगा कि सुनने जो कुछ भी कह रही थी वाकई में वह एकदम सच कह रही थी इस हाल में उसने अभी तक किसी भी औरत को देखा नहीं था,,,,,,राजू की हालत को देखकर सोनी समझ गई थी कि उसकी जवानी का जादू उस पर पूरी तरह से छा चुका है एक तरह से वह उसकी अंगड़ाई लेती जवानी के आगे घुटने टेक दिया था,,,। राजू की हालत को देखकर सोनी बोली,,।

अब बताओ मैं सच कह रही थी या गलत,,,

तुम बिल्कुल सच कह रही थी छोटी सी चड्डी में तुम्हारी खूबसूरती और ज्यादा निखर रही है,,,।(राजू आपने लंड को पजामे के ऊपर से मसलते हुए बोलाराजू की हरकत सोने के लिए एक इशारा थी कि उसकी हालत खराब हो रही है जो कि सोनी राजू की इस हरकत से अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए वह बोली,,,)

इसलिए तुम्हारा और ज्यादा खड़ा हो गया है,,,

अब क्या करूं दीदी आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत एकदम नंगी खड़ी हो तो इंसान कर भी क्या सकता है,,,।

अभी नंगी कहा हुं,,,, अभी भी मेरे बदन पर यह छोटी सी चड्डी है,,,,

इसे भी उतार तो दीदी मैं तुम्हें पूरी तरह से नंगी देखना चाहता हूं,,,,(राजू एकदम से मदहोश होता हुआ बोला)

अब सब कुछ मैं हीं करूंगी,,,, यह शुभ काम तो अपने हाथों से कर बहुत अच्छा लगेगा,,,,।

क्या दीदी सच में यह शुभ काम में अपने हाथों से करु,,,

तो क्या अपने हाथों से उतारकर हीना देखेगा की चड्डी के अंदर कीतना अनमोल खजाना छुपा हुआ है,,,।

सच कह रही हो दीदी मैं भी देखने के लिए तड़प रहा हूं तुम्हारे खजाने को,,,,।

तो वहां क्यों खड़ा है आकर उतार दे इसे,,,।(आंखों के इशारे से उसे अपने पास बुलाते हुए बोली,,,,राजू आप कहां पीछे हटने वाला था उससे तो खुला आमंत्रण मिल रहा था उसका दिल जोरों से धड़क रहा था आज पहली बार किसी खूबसूरत बड़े घर की औरतें कि वह चड्डी अपने हाथों से उतारने जा रहा था,,,, और वैसे भी वह औरतों के इस मंत्र के बारे में वह कभी जानता ही नहीं था आज पहली बार किसी औरत को वापिस वस्त्र में देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था उसे अपने हाथों से उतारकर नंगी करने का सुख वह अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए सोने की बात सुनते ही वह धीरे-धीरे उसके करीब पहुंच गया और जिस तरह से सोनी उसके आगे घुटने टेक कर बैठ गई थी वैसे ही वह उसके सामने घुटने टेक कर नीचे बैठ गया,,,, राजु के साथ साथ सोनी का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, कईयो बार वहइस तरह के अनुभव से गुजर चुकी थी लेकिन आज की बात कुछ और थी आज ऐसा लग रहा था कि उसकी जिंदगी की यह पहेली घड़ी थी जिसने वह किसी की आंखों के सामने नंगी हो रही थी और किसी जवान लड़के के हाथों से अपनी चड्डी उतरवा रही थी,,, यह सब सोनी के लिए बेहद उत्तेजनात्मक पल था जिसमें वह पूरी तरह से डूब जाना चाहती थी,,,,।

राजू उसके बेहद करीब घुटने टेककर नीचे बैठा हुआ था उसकी आंखों के ठीक सामने उसकी चड्डी नजर आ रही थी जो कि उसके काम रस से गीली हो चुकी थी,,,। उत्तेजना के मारे सोनी का गला सूखता जा रहा था राजू के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी क्योंकि नहीं पलवा अपने हाथों से एक खूबसूरत औरत की चड्डी उतार कर उसे नंगी करने वाला था,,,,,, अपने दोनों हाथों के बढ़ाकर सोनी की चड्डी पर रख दिया,,,,, राजू की उंगलियों का स्पर्श अपनी चिकनी कमर पर होते हैं वह एकदम से उत्तेजना के मारे सिहर उठी,,, ऊपर नीचे हो रही सांसों के साथ साथ सोनी की चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर राजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,,, धीरे-धीरे राजू सोनी की चड्डी को नीचे की तरफ सरकाने लगा,,, राजू के लिए अनुभव बिल्कुल नया था और एकदम कामोत्तेजना से भरा हुआ जिसका वह पूरा फायदा और मजा ले रहा था धीरे-धीरे वह चड्डी को नीचे की तरफ करने लगा और जैसे-जैसे चड्डी नीचे की तरफ आ रही थी वैसे वैसे चड्डी के अंदर छुपा खजाना उजागर होता जा रहा था दोनों टांगों के बीच की हुआ वह जगह के ऊपरी भागकाफी उपसा हुआ नजर आ रहा था जिससे जाहिर हो रहा था कि सोनी कितनी उत्तेजित हो चुकी है,,,,,,,

देखते-देखते राजू सोनी की चड्डी को उसकी जांघों तक ले आया और उसकी रसीली मद भरी बेशकीमती बुर नंगी हो गई जिसे देखते ही राजू के तन बदन में वासना की लहर दौड़ने लगी उसकी आंखों की चमक बढ़ गई जवानी का नशा बढ़ने लगा,,,,अपने सूट के गले को अपने थूक से गीला करते हुए राजू ऊपर नजर करके सोनी की तरफ देखा तो सोनी भी उसी को ही देख रही थी आपस में दोनों की नजरें टकराई,,,, आंखों ही आंखों में इशारा हो गया था सोनी ने आंखों के इशारों में ही सोनी ने उसे अपनी चड्डी उतारने के लिए बोल दी थी,,,, राजू भी सोनी के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए उसकी चड्डी नीचे घुटनों तक ला दिया,,, लेकिन अब उसमें सब्र बिल्कुल भी नहीं था उसकी आंखों के सामने बेशकीमती खजाना पड़ा हुआ था जिसे लूटने के लिए वह ललाईत हुए जा रहा था,,,, सोनी कुछ कहती इससे पहले ही राजू अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी उंगलियों से सोनी की बुर को स्पर्श करने लगा,,, और एक दम मस्त होने लगा ऐसा लग रहा था कि जैसे वह वाकई में बेशकीमती खजाना पा गया हो और उस पर अपनी हथेली पर कर अपने आपको विश्वास दिला रहा हो कि अब यह सब तेरा है,,,।राजू की उंगलियों का स्पर्श पाकर सोनी की दूर से भी सब्र का बांध टूटता हुआ महसूस होने लगा था क्योंकि उसमें से मदन रस की बूंदे अमृतधारा बनकर चुने लगी थी,,, उस अमृतधारा को राजू जमीन पर गिर कर जाया नहीं होने देना चाहता था इसलिए तुरंत अपने होठों को आगे बढ़ा कर सोनी की तख्ती हुई बुर पर रख दिया,,, सोनी राजू के इस अद्भुत कार्य शैली को देखकर एकदम से सिहर उठी,,,, पर तुरंत अपने दोनों हाथों को उसके सर पर रख कर उसे अपनी बुर से चिपका दी,,,,, राजू मंत्रमुग्ध मदहोश हुआ जा रहा था,,, वह अपनी प्यासी जीभ निकालकर,,, तुरंत उसकी रसीली बुर के गुलाबी छेद में डाल दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया,,,, उसकी बुआ गुलाबी ने हीं उसे बुर चाटने की कला में से पारंगत कर दिया था,,, जिसका वो सोनी के साथ सही उपयोग कर रहा था,,,।

सोनी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी बरसों बाद कोई इस तरह से बुर चाट कर उसे मस्त कर रहा था वह पूरी तरह से मदहोश होकर अपनी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए अपनी बुर को उसके होंठों पर रगड़ रही थी,,, जिससे सोनी के साथ-साथ राजू की भी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,।

ओहह राजु पुरी जीभ अंदर डालकर चाट,,,, आहहहहह राजू बहुत मजा आ रहा है मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि तू कितना कुछ जानता होगा शक्ल से तो तु एकदम मासूम लगता है लेकिन बहुत शैतान है,,,,आहहहहहह,,,,,आहहहहहहह,,,(आंखों को बंद करके सोनी मस्ती की फुहार में नहा रही थी उसकी बुर बार-बार काम रस छोड़ रही थी,,, जिसका स्वाद वह अपनी जीभ से ले रहा था,,,। सोनी की गरम सिसकारियों की आवाज को सुनकर राजू पूरी मस्ती के साथ उसकी बुर की चटाई कर रहा था,,,। राजू को बड़े घराने की औरत की बुर का स्वाद बेहद मधुर लग रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था,,, राजू अपनी जीत के साथ साथ अपनी उंगलियों से उसकी गुलाबी बुर के छेद को कुरेद कुरेद कर उसकी मलाई को चाट रहा था,,, संभोग के असली सुख को प्राप्त करने के लिए सोनी ने बहुत कुछ की थी लेकिन अभी तक उसे उस अद्भुत सुख की प्राप्ति नहीं हुई थी लेकिन आज उसे लगने लगा था कि उसकी जिंदगी में सावन की बहार आने वाली है उसे संभोग का अद्भुत सुख प्राप्त होने वाला है क्योंकि राजू ने तो शुरुआती दौर में अपनी हरकतों से उसे पूरी तरह से मत कर दिया था और उसका पानी भी झाड़ चुका था,,,

सोनी को लगने लगा था कि जब शुरुआत इतनी जबरदस्त है तो चरम कितना आनंददायक होगा,,,,
 
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