S
StoryPublisher
Guest
गुलाबी अरे वो गुलाबी अभी तक सो रही है,,, देख नहीं रही है सूरज सर पर चढ़ आया है,,,, उठ जल्दी उठ,,,,।
(मधु दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोली,,,)
हां ,,,,, आई भाभी आज जरा आंख लग गई थी,,,, तुम चलो मैं आती हूं,,,,
ठीक है मैं आंगन में झाड़ू लगा देती हूं तु अंदर झाड़ू लगा दे,,,
खूबसूरत गांड की मालकिन मधु
ठीक है भाभी,,,,(मधु झाड़ू लेकर घर के आंगन में झाड़ू लगाने लगी और गुलाबी तुरंत खटिए पर ऊठ कर बैठ गई,,,।)
बापरे आज तो बहुत देर हो गई,,,,
रात भर चुदवाई हो तो देर तो होगी ही,,,(राजू अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर,, गुलाबी के फूल आते हुए कबूतर को दबाते हुए बोला,,,,)
आहहहह क्या कर रहा है,,,, रात भर में तेरा मन भरा नहीं क्या,,,! (राजू के हाथ को अपनी चूची पर से हटाते हुए बोली,,,)
तुमको लगता है बुआ एक बार में मन भर जाएगा,,,,
हां तु सच कह रहा है,,, अगर ऐसा होता तो भैया तेरी मां की रोज चुदाई ना करते,,,,
(एक बार फिर से बातों ही बातों में अपनी मां का जिक्र होते ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, अपनी मां का जिक्र होते ही राजू फिर से गुलाबी की चूची को पकड़ते हुए बोला,,)
बुआ तुम रोज दीवार के छेद से मां और पिताजी की चुदाई देखती थी ना,,,,(गुलाबी की चूची को जोर से दबाते हुए बोला,,,)
खटिया पर लेटी हुई गुलाबी
उन्हीं दोनों से तो सब कुछ सीखी हूं देख देख कर ही मैंने यह सब सीख गई तभी तो रात को इतना मजा आया,,,
बुआ फिर से मजा लेना चाहती हो,,,(इतना कह कर राजू अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगा जहां पर उत्तेजना के मारे फिर से उसका लंड खड़ा होने लगा था,, राजू के दोनों टांगों के बीच गुलाबी की भी नजर गई तो वह एक बार फिर से शर्म से पानी पानी होने लगी उसकी बुर में पानी इकट्ठा होने लगा,,,, एक बार फिर से गुलाबी का भी मन मचल उठा था उसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए,,,, राजू गुलाबी कई उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा यह देखकर गुलाबी की हालत और खराब होने लगी,,,)
क्या कहती हो बुआ एक बार फिर से लेट जाओ,,, मजा आ जाएगा,,,,
(गुलाबी का मन मचल उठा था,,, वह एकटक राजू के लंड को देखे जा रही थी लेकिन इस समय उसके पास समय का अभाव था क्योंकि उठने में वैसे भी देरी हो चुकी थी,,, अभी अभी उसकी भाभी भी उसे उठाकर गई थी,,, इसलिए मन होते हुए भी अपने मन को मार कर वह खटिया पर से उठने को हुई तो तुरंत राजू अपनी बाहों को उसकी कमर में डालकर अपनी तरफ खींच लिया जिसकी वजह से गुलाबी उसके ऊपर लुढ़क गई गुलाबी ऊपर थी और राजू नीचे गुलाबी की पीठ राजू की छाती से सटी हुई थी उसके गोलाकार नितंब सीधे-सीधे एकदम सटीक तरीके से राजू के लंड पर टिके हुए थे,,,,,,एक ही रात में राजू इतना खुल जाएगा गुलाबी को इसकी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी राजू की हरकत की वजह से उसके तन बदन में एक बार फिर से आग लगने लगी थी,,,,वैसे भी सुबह-सुबह बदन में उत्तेजना का असर कुछ ज्यादा ही होता है,,,।
बस बुआ एक बार,,, एक बार डाल लेने दो,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को पकड़ कर,,, अपनी बुआ की बुर से सटा दिया और उसमें डालने की कोशिश करने लगा,,, राजू की इस हरकत की वजह से गुलाबी के तन बदन कामोत्तेजना की लहर उठने लगी,,, उसका भी मन करने लगा कि वह एक बार फिर से राजु से चुदवा ले,,,लेकिन वह मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि देर होने पर किसी भी समय उसकी भाभी फिर से आ जाएगी,,,,,, गुलाबी का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि राजू के लंड का सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर के छेद से रगड़ खा रहा था जिसे राजू अंदर डालने की कोशिश कर रहा था,,, राजू के हाथों में एक बार फिर से गुलाबी का गुलाबी बदन था,, उसके गोलाकार नितंब उसके लंड से सटा हुआ था जो कि उसकी उत्तेजना में निरंतर वृद्धि कर रहा था,,, राजू एक बार फिर से अपनी बुआ को चोदना चाहता था और इसीलिए वह फिर से प्रयास करते हुए अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गुलाबी बुर के छेद में डालने की कोशिश कर रहा था लेकिन गुलाबी जानती थी कि चुदाई का यह समय ठीक नहीं है,,,, वह दोनों पकड़े जा सकते थे,,,, संभोग के असीम सुख की भावना मे वह खुद बहने लगी थी एक बार तो उसका मन हुआ कि खुद अपनी दोनों टांगें खोलकर उसके लंड पर सवार हो जाए और यह भावना मन में आता ही वह अपनी दोनों टांगों को खोल भी दी थी लेकिन तभी उसे भान हुआ की ऐसी हालत में वह पकड़ी जा सकती थी,,,, इसलिए वह अपने भतीजे के ऊपर से उठने की कोशिश करने लगी लेकिन उसका भतीजा अपना जौर दिखाते हुए उसकी कमर में दोनों हाथ डालकर उसे नीचे दबाए हुए था भले ही उसको लैंडस्की दूर में प्रवेश नहीं कर पा रहा था लेकिन इस स्थिति में भी उसे स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था धर्म धर्म गोल-गोल कांड को अपने ऊपर महसूस कर के वह असीम आनंद की अनुभूति कर रहा था,,,।
राजू गुलाबी की चूत में डालने की कोशिश करते हुए
छोड़ राजू मुझे जाने दे देर हो रही है,,,,
नहीं बुआ एक बार और देखो ना मेरा खड़ा हो गया है,,,
तो क्या करूं अभी समय उचित नहीं है,,,
अरे क्यों उचित नहीं है बस एक बार डालना ही तो है,,,
तुझे क्या लगता है कि तू डाल कर निकाल लेगा,,, कितनी देर तक चुदाई करता है तू तेरी मां आ गई तो हम दोनों पकड़े जाएंगे और अगर एक बार पकड़े गए तो यह सब खेल यहीं रुक जाएगा,,,, क्या तू हमेशा मजा लेना नहीं चाहता,,,
चाहता हूं ना बुआ,,,
तो फिर अभी जाने दे तेरी मां भी तो गजब हो जाएगा और वैसे भी हम दोनों साथ में सोते हैं जब चाहे तब इस खेल को खेल सकते हैं,,,।
(अपनी बुआ की बात सुनकर राजू अपने मन में सोचने लगा कि उसकी बुआ ठीक ही कह रही है,,, अगर दोनों पकड़े गए थे इस खेल पर। लग जाएगा और वह ऐसा नहीं चाहता था क्योंकि अभी अभी तो यह खेल शुरू हुआ था इसलिए वह अपना मन मार कर बोला,,)
तुम ठीक कह रही हो बुआ लेकिन रात को करने देना,,,
बिल्कुल तुझे मजा आ रहा है तो क्या मुझे नहीं आ रहा है मुझे कि बहुत मजा आ रहा है मैं भी एक गेम खेलना चाहती हूं लेकिन अभी तू जानता ही नहीं कि तेरी मां किसी भी वक्त आ जाएगी,,,,(इतना कहते हुए वह राजू के ऊपर से उठने लगी गुलाबी की पीठ राजू की तरफ थी राजू पीठ के बल खटिया पर लेटा हुआ था पीछे से गुलाबी की गांड कहर ढा रही थी राजू का मन रुकने को बिल्कुल भी नहीं कर रहा था अपने मन को मार करवा एक बार गुलाबी को जाने दे रहा था लेकिन उसकी गांड को देखकर उसका मन मचल उठा रहा था लेकिन फिर भी वह जानता था की मनमानी करना ठीक नहीं है इसलिए अपने मन को मनाते हुए अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बुआ की गांड पर अपना हाथ फेरने लगा,,, और बोला)
बुआ तुम्हारी गांड कितनी मस्त है,,,
(मधु दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोली,,,)
हां ,,,,, आई भाभी आज जरा आंख लग गई थी,,,, तुम चलो मैं आती हूं,,,,
ठीक है मैं आंगन में झाड़ू लगा देती हूं तु अंदर झाड़ू लगा दे,,,
खूबसूरत गांड की मालकिन मधु
ठीक है भाभी,,,,(मधु झाड़ू लेकर घर के आंगन में झाड़ू लगाने लगी और गुलाबी तुरंत खटिए पर ऊठ कर बैठ गई,,,।)
बापरे आज तो बहुत देर हो गई,,,,
रात भर चुदवाई हो तो देर तो होगी ही,,,(राजू अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर,, गुलाबी के फूल आते हुए कबूतर को दबाते हुए बोला,,,,)
आहहहह क्या कर रहा है,,,, रात भर में तेरा मन भरा नहीं क्या,,,! (राजू के हाथ को अपनी चूची पर से हटाते हुए बोली,,,)
तुमको लगता है बुआ एक बार में मन भर जाएगा,,,,
हां तु सच कह रहा है,,, अगर ऐसा होता तो भैया तेरी मां की रोज चुदाई ना करते,,,,
(एक बार फिर से बातों ही बातों में अपनी मां का जिक्र होते ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, अपनी मां का जिक्र होते ही राजू फिर से गुलाबी की चूची को पकड़ते हुए बोला,,)
बुआ तुम रोज दीवार के छेद से मां और पिताजी की चुदाई देखती थी ना,,,,(गुलाबी की चूची को जोर से दबाते हुए बोला,,,)
खटिया पर लेटी हुई गुलाबी
उन्हीं दोनों से तो सब कुछ सीखी हूं देख देख कर ही मैंने यह सब सीख गई तभी तो रात को इतना मजा आया,,,
बुआ फिर से मजा लेना चाहती हो,,,(इतना कह कर राजू अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगा जहां पर उत्तेजना के मारे फिर से उसका लंड खड़ा होने लगा था,, राजू के दोनों टांगों के बीच गुलाबी की भी नजर गई तो वह एक बार फिर से शर्म से पानी पानी होने लगी उसकी बुर में पानी इकट्ठा होने लगा,,,, एक बार फिर से गुलाबी का भी मन मचल उठा था उसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए,,,, राजू गुलाबी कई उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा यह देखकर गुलाबी की हालत और खराब होने लगी,,,)
क्या कहती हो बुआ एक बार फिर से लेट जाओ,,, मजा आ जाएगा,,,,
(गुलाबी का मन मचल उठा था,,, वह एकटक राजू के लंड को देखे जा रही थी लेकिन इस समय उसके पास समय का अभाव था क्योंकि उठने में वैसे भी देरी हो चुकी थी,,, अभी अभी उसकी भाभी भी उसे उठाकर गई थी,,, इसलिए मन होते हुए भी अपने मन को मार कर वह खटिया पर से उठने को हुई तो तुरंत राजू अपनी बाहों को उसकी कमर में डालकर अपनी तरफ खींच लिया जिसकी वजह से गुलाबी उसके ऊपर लुढ़क गई गुलाबी ऊपर थी और राजू नीचे गुलाबी की पीठ राजू की छाती से सटी हुई थी उसके गोलाकार नितंब सीधे-सीधे एकदम सटीक तरीके से राजू के लंड पर टिके हुए थे,,,,,,एक ही रात में राजू इतना खुल जाएगा गुलाबी को इसकी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी राजू की हरकत की वजह से उसके तन बदन में एक बार फिर से आग लगने लगी थी,,,,वैसे भी सुबह-सुबह बदन में उत्तेजना का असर कुछ ज्यादा ही होता है,,,।
बस बुआ एक बार,,, एक बार डाल लेने दो,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को पकड़ कर,,, अपनी बुआ की बुर से सटा दिया और उसमें डालने की कोशिश करने लगा,,, राजू की इस हरकत की वजह से गुलाबी के तन बदन कामोत्तेजना की लहर उठने लगी,,, उसका भी मन करने लगा कि वह एक बार फिर से राजु से चुदवा ले,,,लेकिन वह मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि देर होने पर किसी भी समय उसकी भाभी फिर से आ जाएगी,,,,,, गुलाबी का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि राजू के लंड का सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर के छेद से रगड़ खा रहा था जिसे राजू अंदर डालने की कोशिश कर रहा था,,, राजू के हाथों में एक बार फिर से गुलाबी का गुलाबी बदन था,, उसके गोलाकार नितंब उसके लंड से सटा हुआ था जो कि उसकी उत्तेजना में निरंतर वृद्धि कर रहा था,,, राजू एक बार फिर से अपनी बुआ को चोदना चाहता था और इसीलिए वह फिर से प्रयास करते हुए अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गुलाबी बुर के छेद में डालने की कोशिश कर रहा था लेकिन गुलाबी जानती थी कि चुदाई का यह समय ठीक नहीं है,,,, वह दोनों पकड़े जा सकते थे,,,, संभोग के असीम सुख की भावना मे वह खुद बहने लगी थी एक बार तो उसका मन हुआ कि खुद अपनी दोनों टांगें खोलकर उसके लंड पर सवार हो जाए और यह भावना मन में आता ही वह अपनी दोनों टांगों को खोल भी दी थी लेकिन तभी उसे भान हुआ की ऐसी हालत में वह पकड़ी जा सकती थी,,,, इसलिए वह अपने भतीजे के ऊपर से उठने की कोशिश करने लगी लेकिन उसका भतीजा अपना जौर दिखाते हुए उसकी कमर में दोनों हाथ डालकर उसे नीचे दबाए हुए था भले ही उसको लैंडस्की दूर में प्रवेश नहीं कर पा रहा था लेकिन इस स्थिति में भी उसे स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था धर्म धर्म गोल-गोल कांड को अपने ऊपर महसूस कर के वह असीम आनंद की अनुभूति कर रहा था,,,।
राजू गुलाबी की चूत में डालने की कोशिश करते हुए
छोड़ राजू मुझे जाने दे देर हो रही है,,,,
नहीं बुआ एक बार और देखो ना मेरा खड़ा हो गया है,,,
तो क्या करूं अभी समय उचित नहीं है,,,
अरे क्यों उचित नहीं है बस एक बार डालना ही तो है,,,
तुझे क्या लगता है कि तू डाल कर निकाल लेगा,,, कितनी देर तक चुदाई करता है तू तेरी मां आ गई तो हम दोनों पकड़े जाएंगे और अगर एक बार पकड़े गए तो यह सब खेल यहीं रुक जाएगा,,,, क्या तू हमेशा मजा लेना नहीं चाहता,,,
चाहता हूं ना बुआ,,,
तो फिर अभी जाने दे तेरी मां भी तो गजब हो जाएगा और वैसे भी हम दोनों साथ में सोते हैं जब चाहे तब इस खेल को खेल सकते हैं,,,।
(अपनी बुआ की बात सुनकर राजू अपने मन में सोचने लगा कि उसकी बुआ ठीक ही कह रही है,,, अगर दोनों पकड़े गए थे इस खेल पर। लग जाएगा और वह ऐसा नहीं चाहता था क्योंकि अभी अभी तो यह खेल शुरू हुआ था इसलिए वह अपना मन मार कर बोला,,)
तुम ठीक कह रही हो बुआ लेकिन रात को करने देना,,,
बिल्कुल तुझे मजा आ रहा है तो क्या मुझे नहीं आ रहा है मुझे कि बहुत मजा आ रहा है मैं भी एक गेम खेलना चाहती हूं लेकिन अभी तू जानता ही नहीं कि तेरी मां किसी भी वक्त आ जाएगी,,,,(इतना कहते हुए वह राजू के ऊपर से उठने लगी गुलाबी की पीठ राजू की तरफ थी राजू पीठ के बल खटिया पर लेटा हुआ था पीछे से गुलाबी की गांड कहर ढा रही थी राजू का मन रुकने को बिल्कुल भी नहीं कर रहा था अपने मन को मार करवा एक बार गुलाबी को जाने दे रहा था लेकिन उसकी गांड को देखकर उसका मन मचल उठा रहा था लेकिन फिर भी वह जानता था की मनमानी करना ठीक नहीं है इसलिए अपने मन को मनाते हुए अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बुआ की गांड पर अपना हाथ फेरने लगा,,, और बोला)
बुआ तुम्हारी गांड कितनी मस्त है,,,