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Incest आनंद और तड़प (तन में उत्तेजना की हलचल )

गुलाबी अरे वो गुलाबी अभी तक सो रही है,,, देख नहीं रही है सूरज सर पर चढ़ आया है,,,, उठ जल्दी उठ,,,,।

(मधु दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोली,,,)

हां ,,,,, आई भाभी आज जरा आंख लग गई थी,,,, तुम चलो मैं आती हूं,,,,

ठीक है मैं आंगन में झाड़ू लगा देती हूं तु अंदर झाड़ू लगा दे,,,

खूबसूरत गांड की मालकिन मधु

ठीक है भाभी,,,,(मधु झाड़ू लेकर घर के आंगन में झाड़ू लगाने लगी और गुलाबी तुरंत खटिए पर ऊठ कर बैठ गई,,,।)

बापरे आज तो बहुत देर हो गई,,,,

रात भर चुदवाई हो तो देर तो होगी ही,,,(राजू अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर,, गुलाबी के फूल आते हुए कबूतर को दबाते हुए बोला,,,,)

आहहहह क्या कर रहा है,,,, रात भर में तेरा मन भरा नहीं क्या,,,! (राजू के हाथ को अपनी चूची पर से हटाते हुए बोली,,,)

तुमको लगता है बुआ एक बार में मन भर जाएगा,,,,

हां तु सच कह रहा है,,, अगर ऐसा होता तो भैया तेरी मां की रोज चुदाई ना करते,,,,

(एक बार फिर से बातों ही बातों में अपनी मां का जिक्र होते ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, अपनी मां का जिक्र होते ही राजू फिर से गुलाबी की चूची को पकड़ते हुए बोला,,)

बुआ तुम रोज दीवार के छेद से मां और पिताजी की चुदाई देखती थी ना,,,,(गुलाबी की चूची को जोर से दबाते हुए बोला,,,)

खटिया पर लेटी हुई गुलाबी

उन्हीं दोनों से तो सब कुछ सीखी हूं देख देख कर ही मैंने यह सब सीख गई तभी तो रात को इतना मजा आया,,,

बुआ फिर से मजा लेना चाहती हो,,,(इतना कह कर राजू अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगा जहां पर उत्तेजना के मारे फिर से उसका लंड खड़ा होने लगा था,, राजू के दोनों टांगों के बीच गुलाबी की भी नजर गई तो वह एक बार फिर से शर्म से पानी पानी होने लगी उसकी बुर में पानी इकट्ठा होने लगा,,,, एक बार फिर से गुलाबी का भी मन मचल उठा था उसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए,,,, राजू गुलाबी कई उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा यह देखकर गुलाबी की हालत और खराब होने लगी,,,)

क्या कहती हो बुआ एक बार फिर से लेट जाओ,,, मजा आ जाएगा,,,,

(गुलाबी का मन मचल उठा था,,, वह एकटक राजू के लंड को देखे जा रही थी लेकिन इस समय उसके पास समय का अभाव था क्योंकि उठने में वैसे भी देरी हो चुकी थी,,, अभी अभी उसकी भाभी भी उसे उठाकर गई थी,,, इसलिए मन होते हुए भी अपने मन को मार कर वह खटिया पर से उठने को हुई तो तुरंत राजू अपनी बाहों को उसकी कमर में डालकर अपनी तरफ खींच लिया जिसकी वजह से गुलाबी उसके ऊपर लुढ़क गई गुलाबी ऊपर थी और राजू नीचे गुलाबी की पीठ राजू की छाती से सटी हुई थी उसके गोलाकार नितंब सीधे-सीधे एकदम सटीक तरीके से राजू के लंड पर टिके हुए थे,,,,,,एक ही रात में राजू इतना खुल जाएगा गुलाबी को इसकी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी राजू की हरकत की वजह से उसके तन बदन में एक बार फिर से आग लगने लगी थी,,,,वैसे भी सुबह-सुबह बदन में उत्तेजना का असर कुछ ज्यादा ही होता है,,,।

बस बुआ एक बार,,, एक बार डाल लेने दो,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को पकड़ कर,,, अपनी बुआ की बुर से सटा दिया और उसमें डालने की कोशिश करने लगा,,, राजू की इस हरकत की वजह से गुलाबी के तन बदन कामोत्तेजना की लहर उठने लगी,,, उसका भी मन करने लगा कि वह एक बार फिर से राजु से चुदवा ले,,,लेकिन वह मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि देर होने पर किसी भी समय उसकी भाभी फिर से आ जाएगी,,,,,, गुलाबी का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि राजू के लंड का सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर के छेद से रगड़ खा रहा था जिसे राजू अंदर डालने की कोशिश कर रहा था,,, राजू के हाथों में एक बार फिर से गुलाबी का गुलाबी बदन था,, उसके गोलाकार नितंब उसके लंड से सटा हुआ था जो कि उसकी उत्तेजना में निरंतर वृद्धि कर रहा था,,, राजू एक बार फिर से अपनी बुआ को चोदना चाहता था और इसीलिए वह फिर से प्रयास करते हुए अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गुलाबी बुर के छेद में डालने की कोशिश कर रहा था लेकिन गुलाबी जानती थी कि चुदाई का यह समय ठीक नहीं है,,,, वह दोनों पकड़े जा सकते थे,,,, संभोग के असीम सुख की भावना मे वह खुद बहने लगी थी एक बार तो उसका मन हुआ कि खुद अपनी दोनों टांगें खोलकर उसके लंड पर सवार हो जाए और यह भावना मन में आता ही वह अपनी दोनों टांगों को खोल भी दी थी लेकिन तभी उसे भान हुआ की ऐसी हालत में वह पकड़ी जा सकती थी,,,, इसलिए वह अपने भतीजे के ऊपर से उठने की कोशिश करने लगी लेकिन उसका भतीजा अपना जौर दिखाते हुए उसकी कमर में दोनों हाथ डालकर उसे नीचे दबाए हुए था भले ही उसको लैंडस्की दूर में प्रवेश नहीं कर पा रहा था लेकिन इस स्थिति में भी उसे स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था धर्म धर्म गोल-गोल कांड को अपने ऊपर महसूस कर के वह असीम आनंद की अनुभूति कर रहा था,,,।

राजू गुलाबी की चूत में डालने की कोशिश करते हुए

छोड़ राजू मुझे जाने दे देर हो रही है,,,,

नहीं बुआ एक बार और देखो ना मेरा खड़ा हो गया है,,,

तो क्या करूं अभी समय उचित नहीं है,,,

अरे क्यों उचित नहीं है बस एक बार डालना ही तो है,,,

तुझे क्या लगता है कि तू डाल कर निकाल लेगा,,, कितनी देर तक चुदाई करता है तू तेरी मां आ गई तो हम दोनों पकड़े जाएंगे और अगर एक बार पकड़े गए तो यह सब खेल यहीं रुक जाएगा,,,, क्या तू हमेशा मजा लेना नहीं चाहता,,,

चाहता हूं ना बुआ,,,

तो फिर अभी जाने दे तेरी मां भी तो गजब हो जाएगा और वैसे भी हम दोनों साथ में सोते हैं जब चाहे तब इस खेल को खेल सकते हैं,,,।

(अपनी बुआ की बात सुनकर राजू अपने मन में सोचने लगा कि उसकी बुआ ठीक ही कह रही है,,, अगर दोनों पकड़े गए थे इस खेल पर। लग जाएगा और वह ऐसा नहीं चाहता था क्योंकि अभी अभी तो यह खेल शुरू हुआ था इसलिए वह अपना मन मार कर बोला,,)

तुम ठीक कह रही हो बुआ लेकिन रात को करने देना,,,

बिल्कुल तुझे मजा आ रहा है तो क्या मुझे नहीं आ रहा है मुझे कि बहुत मजा आ रहा है मैं भी एक गेम खेलना चाहती हूं लेकिन अभी तू जानता ही नहीं कि तेरी मां किसी भी वक्त आ जाएगी,,,,(इतना कहते हुए वह राजू के ऊपर से उठने लगी गुलाबी की पीठ राजू की तरफ थी राजू पीठ के बल खटिया पर लेटा हुआ था पीछे से गुलाबी की गांड कहर ढा रही थी राजू का मन रुकने को बिल्कुल भी नहीं कर रहा था अपने मन को मार करवा एक बार गुलाबी को जाने दे रहा था लेकिन उसकी गांड को देखकर उसका मन मचल उठा रहा था लेकिन फिर भी वह जानता था की मनमानी करना ठीक नहीं है इसलिए अपने मन को मनाते हुए अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बुआ की गांड पर अपना हाथ फेरने लगा,,, और बोला)

बुआ तुम्हारी गांड कितनी मस्त है,,,
 
मेरे से भी अच्छी तो तेरी मां की देखा नहीं नंगी होने के बाद कितनी खूबसूरत लगती है,,,

(अपनी बुआ की बातें सुनकर राजू कुछ बोला नहीं लेकिन उसकी कहीं बात वाकई में सच थी,,,,अपनी बुआ की बात से एक बार फिर से उसकी आंखों के सामने उसकी मां का नंगा बदन नाचने लगा,,,, गुलाबी खटिए पर से उठ कर अपने कपड़ों को ढूंढने लगी जो कि नीचे जमीन पर बिखरे पड़े थे,,,, राजू उसी तरह से लेटा रहा उसका लंड आसमान की तरफ सर उठाए खड़ा था,,,, गुलाबी राजू की लंड को देखकर पूरी तरह से मोहित हो चुकी थी क्योंकि बिना सहारे वह पूरी तरह से एकदम से हटाना के डंडे की तरह खड़ा था,,,, गुलाबी अपने मन में सोच रही थी कि अगली बार उसकी भाभी जिस तरह से उसकी भईया के लंड पर उठक बैठक करती है उसी तरह से वह भी करेगी,,,।

गुलाबी अपने मन में यह सोचते हुए अपनी कुर्ती उठा ली और उसे कहने लगी ऊपर से अपने गले में डालकर वह कुर्ती को पहन रही थी और राजू उसे बड़े गौर से देख रहा था क्योंकि आज तक उसने अपनी बुआ को कपड़े पहनते भी नहीं देखा था हां रात को कपड़े उतारते हुए जरूर देखा था,,, औरतों का कपड़ा पहनना और उसे उतारना भी एक अद्भुत कला के साथ-साथ मादकता भरा एहसास है जो कि देखने वालों के होश उड़ा देता है ,,, राजू भी अपनी बुआ को बड़े मजे ले कर देख रहा था देखते ही देखते उसकी बुआ कुर्ती को पहन लेंगे और नीचे चुप कर सलवार उठाने लगी,,,, ऐसा करते हुए उसकी गांड राजू की तरफ थी ,,, जोकि झुकने की वजह से उसकी गोल गोल गांड कुछ ज्यादा ही भरकर सामने नजर आने लगी जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आने लगा,,,,,

गुलाबी सलवार उठा कर खड़ी हो गई और उसे सीधा करके अपने पैर में डालकर पहनने लगी,,, और अगले ही पल खूबसूरत मादकता भरे नजारे पर पर्दा पड़ गया,,,,,, पहली बार में ही मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर में लेने की वजह से गुलाबी को अपनी बुर में मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था,,,,,, लेकिन यह मीठा मीठा दर्द भी उसे आनंद ही दे रहा था,,,। अपने कपड़े पहन लेने के बाद वह राजु से बोली,,,।

तू भी उठ कर कपड़े पहन ले नहीं तो मैं दरवाजा खोलने जा रही हूं,,,

नहीं रुको मैं पहनता हूं ,,,(इतना कहने के साथ ही वह भी खटिया पर से खड़ा हो गया और अपना पजामा ढूंढने लगा,,, उसे पहचाना ढुढते हुए देखकर गुलाबी बोली,,,)

उतारते समय नहीं पता था कि कहां उतार रहा है,,,।

क्या करूं बुआ,,, तुम्हें चोदने की लालच में कुछ पता ही नहीं चला कि क्या कर रहा हूं,,,,(अपने पजामे को इधर-उधर ढूंढते हुए बोला,,,)

वो रही खटिया के नीचे,,,,(गुलाबी उंगली के इशारे से दिखाते हुए बोली,,,)

बाप रे रात को पता ही नहीं चला कि कपड़ा उतार के कहां फेंका,,,,।

हां रात को मजा लेने के लिए तो आनन-फानन में सब निकाल कर फेंक दिया,,,,

क्या करूं बुआ तुम चीज ही कुछ ऐसी हो,,,(ऐसा कहते हुए राजू खटिया के नीचे से अपने पजामे को उठाया और पहनने लगा,,,, अपने पजामे को जैसे ही वह ऊपर तक लाया तो,,अभी भी पूरी तरह से खड़ा होने की वजह से पजामे को ठीक से वह और उपर नहीं चढ़ा पा रहा था,,, राजू के खड़े लंड को देखकर गुलाबी बोली,,,)

तेरा तो अभी तक खड़ा है,,,,

क्या करूं बुआ तुम्हारी वजह से एक बार अंदर डाल लेने दीए होती तो यह भी शांत हो जाता,,,,।

रुक मैं अंदर डाल देती हुं,,,(इतना कहने के साथ ही गुलाबी आगे बढ़ी हो तुरंत चला चुके हैं उनको अपनी मुट्ठी में दबा कर उसे पजामे के अंदर करने लगी,,,, राजू को अपनी बुआ की हरकत एकदम मस्त कर गई,,,)

देख रही हो बुआ कितना गर्म है,,,

हारे बहुत गर्म है,,,

इससे भी ज्यादा गरम तुम्हारी बुर है,,,, अंदर जाते ही ऐसा लगता है कि मानो अभी मेरा लंड पिघल जाएगा,,,,(राजू की बात सुनकर गुलाबी मंद मंद मुस्कुराते हुए बोली)

तुझे देखकर लगता नहीं था कि तू इतना हरामी किस्म का लड़का है देखने में कितना शरीफ रखते हैं रात को ही पता चला कि तू कितना हरामि है,,,

मुझे भी तो रात को ही पता चला कि तुम कितनी मस्त हो,,,

चल अब जल्दी कर मैं बाहर जा रही हुं,,, (पजामे के अंदर राजू के खड़े लंड को व्यवस्थित करते हुए बोली,,,)

ठीक है बुआ,,,,(इतना कहकर राजू गुलाबी के गुलाबी होंठ पर अपने होंठ रख कर चुंबन कर लिया,,,)

बहुत तेज है तू,,,(पर इतना क्या कर मुस्कुराते हुए दरवाजा खोलकर बाहर चली गई,,, राजू अपनी बुआ को जाते को देखता रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि रात को जो कुछ भी हुआ था वह हकीकत है उसे सब कुछ सपना समझ रहा था क्योंकि उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी सीधी-सादी हुआ इतनी बड़ी छिनार होगी जो खुद चुदवाने के लिए तड़प रही थी,,,। लेकिन जो कुछ भी हुआ था उसे से ऐसा ही लग रहा था कि राजू की दसों उंगलिया अब घी में थी,,, रात को जो कुछ भी होगा वह सब कुछ राजू की आंखों के सामने एक एक करके घूमने लगा था,,,, उसकी बुआ इतनी खूबसूरत और मस्त हो गई ईस बारे में उसे कभी अंदाजा भी नहीं था,,,अपनी बुआ की कसी हुई बुर में लंड डालकर जिस तरह का आना तो उसने प्राप्त किया था वह उसके लिए अतुल्य और अमूल्य था,,,,रात की गर्माहट भरी चुदाई का एहसास अभी भी उसके तन बदन को गर्माहट दे रहा था,,, रात को फिर अपनी बुआ की चुदाई करेगा यह एहसास उसके तन बदन मे उत्तेजना की लहर को और ज्यादा बढ़ा रहा था,,,। थोड़ी देर तक होगा अपने लैंड को शांत करने के लिए वहीं बैठा रहा जब सब कुछ सामान्य हो गया कमरे से बाहर निकला,,,।

गुलाबी झाड़ू लगाते लगाते अपनी भाभी के पास पहुंच गई तो उसकी भाभी उसे देख कर बोली,,,।

रात भर राजू से चुदवा रही थी क्या जो सुबह आंख नहीं खुली,,,,,,,(मधु झाड़ू लगाते हुए बोली,,, गुलाबी तो अपनी भाभी की बात सुनते ही एकदम सन्न रह गई एक पल को तो लगा कि जैसे वह रात वाली बात को जानती हो लेकिन तभी गुलाबी का एहसास हुआ कि उसकी भाभी को मजाक करने का आदत था लेकिन फिर भी आज का मजाक गुलाबी के लिए तो जानलेवा ही था क्योंकि आज वहां अपने बेटे को लगाकर उसे मजाक की थी जो कि गुलाबी कभी सोची नहीं थी,,,)

क्या भाभी तुम भी इस तरह का मजाक करती हो शर्म नहीं आती अपने ही बेटे के बारे में इस तरह की बात करते हुए,,,

(गुलाबी जानबूझकर गुस्सा दिखाते हुए बोली,,)

अरे तू तो नाराज हो गई मैं तो यूं ही मजाक की थी देखती नहीं है कि अब वह बड़ा हो गया है,,,, लेकिन है एकदम बुद्धू,,,, दुनियादारी की तो खबर ही नहीं है उसको,,,

( मधु यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा बड़ा हो गया है,,, और जिस उम्र से वो पूछ रहा था मधु भली-भांति जानती थी कि इस उम्र में लड़की चुदाई करना शुरू कर देते हैं तो उसका बेटा भी चोदने लायक हो गया था,,,,,,और गुलाबी अपनी भाभी की बात सुनकर मन ही मन में सोचने लगी कि वह भी तो नहीं है अब वह जवान हो गया है पूरा मर्द हो गया है,,, रात भर उसकी चुदाई करके उसकी बुर कौ दर्द दे गया है,,,, गुलाबी अपने मन में ही बोलने लगी कि अब वह बच्चा नहीं रहा मौका मिलेगा तो वह तुम्हारी भी चुदाई कर देगा,,,)

अरे हो जाएगी दुनियादारी की खबर भाभी अभी ज्यादा बड़ा थोड़ी हुआ है,,,,,,, अब चलो जल्दी से खाना बना लो भैया इंतजार कर रहे होंगे,,,,

हां तेरे भैया को तो काम ही क्या है खाना और पेलना,,,,

क्या कहा भाभी,,,

ककक ,,, कुछ नहीं मे जल्दी खाना बना देती हु,,,

ठीक है भाभी मैं तब तक दूसरे काम कर लेती हूं,,,,

(और वह दोनों काम में व्यस्त हो गए,,, दूसरी तरफ सोनी आज गांव में जाने का फैसला कर ली थी खास करके राजू के लिए,,, वह अपनी एक सहेली शांति को तैयार की और गांव के लिए निकल पड़ी उसकी मंजिल राजू था वह राजू को किसी तरह से पढ़ाने के लिए मनाना चाहती थी ताकि पढ़ाने के बहाने वह,,, अपनी प्यास बुझा सके,,,,,,,, गांव में पहुंचने से पहले एक बड़ा तालाब पड़ता है जहां पर गांव के जानवर घास चारा करते थे और तालाब का पानी पिया करते थे,,,, तालाब पर पहुंचते ही सोनी को बड़े जोरों की दोपहर का समय था इसलिए चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,,,)

शांति मुझे जोरो की पिशाब लगी है तु यहीं रुक मे कर के आती हूं,,,,(इतना कहकर वह पगडंडी वाले रास्ते को छोड़कर झाड़ियों के अंदर जाने लगी तो पीछे से शांति आवाज लगाते हुए बोली,,,)

रुको मालकिन मै भी आती हूं मुझे भी जोरों की लगी है,,,

(इतना कहकर वह भी झाड़ियों के अंदर जाने लगी,, सूरज एकदम सर के ऊपर तक रहा था चारों तरफ दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था,,,,ऐसे में सोनिया और उसकी सहेली शांति दोनों झाड़ियों के अंदर पेशाब करने के लिए जा रही थी क्योंकि मैंने इस बात का डर था कि कहीं कोई उन्हें पेशाब करते हुए देख ना ले,,,)

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सोनी बला की खूबसूरत औरत थी,,, कामुकता उसके बदन के हर एक अंग से टपकती रहती थी,,, एकदम गोरी चिकनी मांसल देह वाली वतन का हर एक कटाव मर्दों के टांगों के बीच की हालत खराब कर दे इस तरह से बनी हुई थी,,, नितंबों का घेराव गजब का आकर्षण बांधा हुआ था,,, कसी हुई साड़ी में उसके गोलाकार नितंब बेहद आकर्षक लगते थे मानो के जैसे बड़े-बड़े तरबूज साड़ी के अंदर छुपा दिए गए हो,,,,,,,,,

लाला अपनी बहन की खूबसूरती को अच्छी तरह से जानता था इसलिए तो उसके मजबूरी का पूरा फायदा उठा रहा था और सोनी भी संस्कार वाली औरत नहीं थी,,,, उसके चरित्र में भी कामुकता झलकती थी मर्दों का आकर्षण उसे शुरू से रहा था,,,।,,,अब उसकी नजर राजू पर थी उसके मर्दाना अनु को देखकर वह पूरी तरह से उससे मिलने के लिए व्याकुल हो चुकी थी उसकी अनुभवी आंखें राजू के मर्दाना अंग को देखकर पहचान गई थी कि उसमें बहुत दम है और वह उस‌दम को अपनी बुर के अंदर महसूस करना चाहती थी,,, कौन सी प्रयास में लगी हुई थी कि उसे जोरों की पेशाब लग गई थी,,, पेशाब करने के लिए झाड़ियों के अंदर जाने लगी थी क्योंकि वह जानती थी कि सड़क पर पेशाब करने से किसी की भी नजर उस पर पड सकती थी,,,, उसकी सहेली शांति भी उसके साथ हो चली थी,,,।

झाड़ियों के बीच पहुंचकर एक अच्छी सी जगह देख कर सोनी पेशाब करने के लिए रुक गई अपने चारों तरफ नजर दौड़ा कर देखने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है भले ही वह मर्दों के प्रति आकर्षित हो जाती थी संभोग सुख प्राप्त करने के लिए कुछ भी कर सकती थी लेकिन फिर भी उसकी एक मर्यादा थी,,,,वह जो कुछ भी करती थी दुनिया की नजर से बचकर करती थी किसी को कानों कान खबर नहीं होने देती थी,,,,,,, यही वजह थी कि आज तक किसी को कानों कान इस बात की भनक तक नहीं थी कि लाला की बहन चरित्र की गिरी हुई औरत है,,,,।

अच्छी सी जगह देखकर सोनी खड़ी हो गई थी वह पेशाब करने की तैयारी में थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी होती वास्तव में सोनी को इस हाल में देख पाना कि शायद मर्दों की किस्मत की बात थी लेकिन अब तक उसे पेशाब करते हुए किसी ने नहीं देखा था,,,, लेकिन आज शायद जो अभी तक नहीं हुआ था आज होने वाला था,,,,,,,

क्या हुआ मालकिन रुकी में कर लो ना यहां कौन देखने वाला है,,,,

हां यही तो देख रही हूं पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद ही औरतों को बैठ कर पेशाब करना चाहिए नहीं तो तू मर्दों की नजर को तो जानती ही है,,,,

हां मालकिन आप सच कह रही हो,,, मर्दों को तो बस मौका मिलना चाहिए तांक झांक करने का,,,,मैं भी जा अपने घर के पीछे पेशाब करने के लिए जाती हूं तो सामने वाले घर का जवान लड़का हमेशा घूरते रहता है,,,, मुझे तो बहुत शर्म आती है लेकिन क्या करूं मजबूरी रहती है,,,।

हां यही तो किसी को पता भी नहीं सकती ना ही कुछ कह सकती हो अगर बोलोगी तो बोलोगी भी गोल-गोल बात को घुमा देंगे,,,

हां मालकिन,,,, सच कह रही हूं एक दो बार बोलने की कोशिश भी की,,, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि वह तो यह कह कर मेरा मुंह बंद कर दिया कि वह सबको बता देगा कि जानबूझकर मैं जब खड़ा रहता हूं तभी आ कर के पेशाब करती है,,, और मुझे गंदे गंदे इशारे करके अपने पास बुलाती है,,,, सच कहूं तो यह सुनकर मेरी तो बोलती ही बंद हो गई,,,, दुनिया वालों को तो आप जानती ही हो,,,, घुमा फिरा कर इसमें मेरा ही दोष देते,,,,,

अच्छा की तूने की बात को आगे नहीं बढ़ाई वरना गांव वाले तेरा ही दोष देते,,,, औरतों की गांड को इस हाल में देखना मर्दों को कुछ ज्यादा ही अच्छा लगता है तू जानती है मर्द को औरत की गांड सबसे ज्यादा अच्छी लगती है खास करके बड़ी बड़ी गोरी गांड,,,, ईसी के पीछे लट्टु होकर घूमते रहते हैं,,,,।

(सोनी और उसकी सहेली शांति दोनों आपस में बातें कर रहे थे कि हम दोनों की फुसफुसाहट राजू के कानों तक पहुंच गई,,, वह बकरियां चराने आया थाऔर उसे की पेशाब लग गई थी इसलिए वहां झाड़ियों के अंदर चला आया था क्योंकि यहां पर ठंडक थी और बाहर खड़ी थी आने की वजह से गर्मी लग रही थी,,,, उन दोनों औरतों को झाड़ियों के बीच खड़ा देखकर उन दोनों को बातें करते हुए देखकर राजू एक पेड़ के पीछे छुप गया और उन दोनों को चोर नजरों से देखने लगा सोनी पर नजर पड़ते ही उसके होशो हवास उड़ने लगे थे क्योंकि सोनी बेहद खूबसूरती भरा हुआ बदन राजू के होश उड़ा रहा था,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इस समय यह दोनों झाड़ियों के बीच क्या कर रही थी,,,, इसलिए एकदम चोर कदमों से पेड़ के पीछे छुप कर उन दोनों की क्रियाकलापों को और उनकी बातों को सुनने लगा,,, अभी तक राजू इस बात का अंदाजा भी नहीं लगा पाया था कि वह दोनों झाड़ियों के अंदर करने क्या है और वह भी इतनी खड़ी दुपहरी में,,,)

इसीलिए शांति मैं जितना हो सकता है उतना अपने आप को बचाकर रखती हूं कहीं भी आते जाते रास्ते में कहीं के साथ लगती तो मैं ऐसी जगह को तलाश करती हूं जहां पर कोई नहीं होता झाड़ियों के पीछे छुप कर ही मौके साफ करती हूं क्योंकि मैं चाहती हूं कि कोई मर्द मेरी गांड को देख ना पाए,,,, क्योंकि मर्दों को औरतों की क्या पसंद होती है,,,,(शांति की तरफ प्रश्नवाचक दृष्टि से देखते हुए बोली,,,)

गांड,,,,,,(शांति हंसते हुए बोली)

हां,,,,,, अब जाकर तुझे समझ में आया है,,,,

(गांड शब्द सुनकर और उन दोनों का हंसना देकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी क्योंकि उसे लगने लगा कि कुछ ना कुछ जरूर होने वाला है,,,, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा,,,,,)

जल्दी से पेशाब कर लेती हूं वैसे ही देर हो चुकी है,,,,।

(यह सुनकर तो राजू की सांसे अटक गई खूबसूरत औरत के मुंह से वह पेशाब करने की बात सुन रहा था,,, और उसके हाव-भाव से राजू को ऐसा ही लग रहा था कि वह उसकी आंखों के सामने ही पेशाब करने वाली है,,,, यह एहसास राजू के लंड में हरकत करने को मजबूर कर दिया और पल भर में ही राजू का लंड अपनी औकात में आ गया,,,, राजू को दूसरी वाली जिसका नाम शांति था ठीक-ठाक लग रही थी लेकिन गोरे बदन वाली हुस्न की मल्लिका सुडोल देह वाली सोनी राजू के तन बदन में आग लगा रही थी उसका गोरा बदन गठीला तराशा हुआ जिस्म राजू के लंड की अकड़ को बढ़ा रही थी,,,, वह अपने सांसो को दुरुस्त किए हुए उस नजारे को देख रहा था जहां पर सोनी खड़ी होकर अभी भी चारों तरफ देख रही थी जहां पर वह खड़ी थी वह जगह थोड़ी सी खुली हुई थी बाकी झाड़ियों से गिरी हुई थी,,,,।जब वह चारों तरफ तसल्ली भरी नजर से घूम कर देख रही थी तभी राजू कि मुझे उसकी गोलाकार गांड पर पड़ी थी तभी से वह उसकी गांड का दीवाना हो गया था,,,, अच्छी तरह से समझ गया था कि साड़ी के अंदर उसका बदन किसी बेश कीमती खजाने से कम नहीं है,,,, राजु उसकी गांड देखने के लिए लालायित हो गया,,,,

अरे मालकिन अब करोगी भी या चक्रर पकर देखती ही रहोगी,,,।

हां हां कर रही हैं मुझे भी जोरों की ही लगी है,,,,

(इतना कहकर वह धीरे-धीरे की साड़ी को उठाना शुरू कर दिया देखकर राजू के तन बदन में आग लगने लगी उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी सोनी पेशाब करने के लिए पूरी तरह से तैयार थी और देखती देते उसकी साड़ी घुटनों तक आ गई राजू की किस्मत बड़े जोरों पर थी क्योंकि उसकी पीठ ठीक राजू के सामने थे मतलब की राजू उसकी गांड के प्रति पूरी तरह से मोहित था और थोड़ी देर में उसने उसकी नंगी गांड दिखने वाली थी पेशाब तो राजू कभी-कभी थी लेकिन इस समय अपनी सांसो को भी रोक कर खड़ा था कि उसकी आहट का उन दोनों को पता ना चल जाए वरना एक खूबसूरत दृश्य पर परदा पड़ जाएगा,,,। सोनी की मांसल पिंडलिया बहुत खूबसूरत लग रही थी सोनी की साड़ी घुटनों तक आ चुकी थी,,,, शांति भी खड़ी होकर सोनी को ही देख रही थी क्योंकि सोनी को भी पता था की खूबसूरती में वह सबसे आगे थी,,, गोरा रंग होने के कारण उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहता था,,, राजू से भी रहा नहीं जा रहा था मुठ मारने के लिए उसकी आंखों के सामने बेहद कामुकता भरा दृश्य नजर आ रहा था इसलिए वह इस दृश्य का पूरा फायदा उठाते हुए अपने पजामे को नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाल लिया और सोनी की कामुक अदाओं को देखकर धीरे-धीरे अपने लंड को हीलाना शुरू कर दिया,,,।

कैसा लग रहा था कि मानो सोनी को सब कुछ पता हो और वह धीरे-धीरे अपनी खूबसूरत बदन को दिखाकर राजू को तड़पा रही हो,,,, वह उसी अदा से धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी शांति को भी मजा आ रहा था एक औरत होने के नाते एक औरत की खूबसूरती से उसे अपने अंदर जलन भी महसूस हो रही थी लेकिन कर भी क्या सकती थी आखिरकार वह उसकी मालकिन जो थी और उसे सहेली की तरह रखती थी,,, जैसे-जैसे सोनी की दूधिया मोटी मोटी जांघें नजर आने लगी वैसे वैसे सोनू का हाथ अपने लंड पर बड़ी तेजी से चलने लगा,,, केले के तने की तरह एकदम चिकनी जांघों को देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था वह उसकी गोरी चिकनी जानू को अपने होठ लगाकर चूमना चाहता था अपनी जीभ से चाटना चाहता था,,,,,पहले उसके मन में इस तरह के ख्याल कभी भी नहीं आती थी उसकी आंखों के सामने बने कितनी खूबसूरत औरत क्यों ना खडी हो लेकिन जब सेबुर्के नमकीन रस का स्वाद उसके मुंह लग गया तब से औरतों को देखने का नजरिया उसका बदल गया था और उन्हें देख कर वो अपने मन में गंदे विचारों को जन्म देने लगा था,,, इसीलिए इस तरह के गंदे ख्याल सोनी को देखकर उसके मन में उम्र रहे थे देखते देखते सोनी की साड़ी कमर तक आ गई,,, यह नजारा देखकर राजू को लगने लगा कि कहीं उसकी सांसे ना अटक जाए,,,,,,

कुदरत का बनाया हुआ बेहद खूबसूरत अंग उसकी आंखों के सामने एकदम नंगा था जिसे देखकर राजू की संभोग की इच्छा तीव्र हो रही थी वह उस औरत की चुदाई करने की अभिलाषा रखने लगा,,,, उसका बस चलता तो अभी उसे यही पकड़ कर पटक कर चोदने लगता लेकिन राजू का चरित्र अभी इतना गिरा नहीं था कितनी घिनौनी हरकत करता वह रजामंदी होने पर ही चुदाई करता अपनी मनमानी कभी नहीं करता क्योंकि इतना तो उसे ज्ञात हो ही चुका था की मर्जी के बिना मजा भी नहीं आता,,,,

सोनी अपनी साड़ी को कमर तक उठाए खड़ी थी उसकी गोरी गोरी उभरी हुई गदराई गांड सुनहरी धूप में चमक रही थी,,,। एक अजीब सा मादकता भरा आकर्षण सोनी की गांड में था जिसे देखकर राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,, शांति भी इसके आकर्षण से बच नहीं पाई थी वह भी अपनी तिरछी नजर से सोनी की गांड को देख रही थी यह देख कर सोनी बोली,,,,,।

तुम ऐसे क्यों देख रही हो तुम्हारे पास भी तो ऐसे ही है,,,

तुम्हारी बहुत खूबसूरत है एकदम गोरी गोरी और उभरी हुई,,,, सच कहूं तो मर्दों को तुम्हारी जैसी ही गांड अच्छी लगती है,,,

तुम्हें कैसे मालूम ,,,(सोनी मुस्कुराते हुए बोली)

मैं किसी लड़के के मुंह से सुनी थी कि उन लोगों को औरत की बड़ी-बड़ी गाड़ी हई पसंद आती है,,,

तुम्हारी भी तो है,,,,

लेकिन तुम्हारी तरह नहीं है मालकिन,,,, काश मेरी भी तुम्हारी जैसी होती तो अब तक ना जाने कितनों को अपने पीछे पीछे घुमाते होती,,,,।

चल बड़ी आई मर्दों को पीछे पीछे घुमाने वाली अगर कोई पीछे पड़ गया ना तो उस दिन समझ में आएगा,,,, की कितनी बड़ी मुसीबत मोल ले ली है,,,,।

(राजू उन दोनों की बातों को सुनकर पूरी तरह से उत्तेजित बजा रहा था क्योंकि वह दोनों गार्ड की खूबसूरती के बारे में ही बातें कर रही थी और अपने मुंह से ही बता रही थी कि औरतों की बड़ी-बड़ी गाड़ी मर्दों को ज्यादा पसंद आती हो और उन दोनों का कहना भी सही था क्योंकि राजू खुद यह अब हंस कर चुका था कि उसे भी औरतों की बड़ी-बड़ी गांड ही पसंद आती है,,,, राजू जोर-जोर से मुट्ठ मार रहा था,,,, राजू के पास चुदाई करने के लिए दे दो बुर का जुगाड़ थालेकिन इस समय यहां पर उन दोनों दोनों में से कोई भी बुर उपस्थित नहीं थी और इसलिए लंड की गर्मी को शांत करने के लिए बस यही एक तरीका रह गया था,,,, जिसे वह बखूबी निभा रहा था,,,)

चलो बहुत देर हो गई है भैया को पता चलेगा कि मैं इतनी देर गांव में लगा दी तो गुस्सा करेंगे,,,,

(और इतना कहने के साथ ही सोनी अपनी बड़ी बड़ी गांड लेकर वहीं बैठ गई ठीक राजू की आंखों के सामने और अगले ही पल पेशाब करने लगी,,,, क्षण भर में ही मुतने की मधुर धुन बांसुरी की ध्वनि की तरह राजू के कानों में सुनाई देने लगी राजू एकदम बावला हो गया या मधुर धुन सुनकर उसके होश उड़ गए और वह जोर-जोर से अपना लंड हिलाना शुरू कर दिया पीछे से सोनी का पिछवाड़ा देखकर राजू की हालत खराब होने लगी,,,,,, सोनी का पिछवाड़ा राजू को इतना खूबसूरत लग रहा था मानो कि जैसे खेतों में दो खूबसूरत बड़े-बड़े तरबूज रख दिए गए हो,,,, राजू का मन इस समय उसकी गांड चाटने को कर रहा था हालांकि अभी तक राजू में ना तो कमला चाची की और ना ही अपनी बुआ गुलाबी की गांड को चाटा था,,, लेकिन इस समय सोने की खूबसूरती और उसकी खूबसूरत गांव को देखकर उसके मन में यह इच्छा तीव्र हो रही थी,,,,
 
बुर से निकल रही सीटी की आवाज बांसुरी की मधुर धुन की तरह उसे मोहित कर रही थी,,,, सोनी बड़ी आनंदित होकर मूत्र विसर्जन कर रही थी,,,, बड़े जोरों की पेशाब लगने की वजह से उसे राहत महसूस होने लगी थी,,,, अपने पैरों के आगे की घास को वह पूरी तरह से अपने पेशाब से भिगो डाली थी मानो कि जैसे घास में पानी दिया गया हो,,,राजू जानता था कि थोड़ी देर में पेशाब करके वह उठ जाएगी और एक खूबसूरत नजारे पर पर्दा डाल देगी इसलिए वह उसकी खूबसूरत गांड की आकर्षण मैं जोर-जोर से मुठ मार कर अपना पानी निकाल देना चाहता था इसलिए उसकी हथेली बड़ी जोरों से चल रही थी,,,,, और थोड़ी ही देर में जैसे ही हो पेशाब करके खड़ी हुई अपनी साड़ी को वह नीचे करती इससे पहले ही राजू के लंड से गर्म पानी की पिचकारी फुट पड़ी,,,राजू के लिए पहला मौका था जब वह बाहर किसी औरत को नग्न अवस्था में देखकर अपना लंड हिला कर पानी निकाला था उसे बहुत ही मजा आया था लेकिन उस औरत को चोदने के ख्याल से यह मजा कम ही था,,,,

राजू की आंखों के सामने ही वह अपनी साड़ी को नीचे करके फिर से बेश कीमती खजाने को छुपा ली,,,,राजू अपने क्यों जाने को ऊपर करके हम खड़ा रहा मैं देखना चाहता था कि वह दोनों जाती कहां है,,,, तभी सोनी बोली,,।

चल जल्दी कर गांव से लौटना भी है,,,,

(इतना कहने के साथ ही वह दोनों झाड़ियों से बाहर निकल गई और राजू भी अपनी बकरी को लेकर गांव की तरफ जाने लगा क्योंकि वह दोनों उसी तरफ जा रही थी)

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सोनी के अरमान मचल रहे हैं उसे अपनी जवानी पर अपनी खूबसूरती पर अपनी खूबसूरत बदन पर पूरा विश्वास था कि वह अपनी खूबसूरती जोबन के जाल मे रघु को पूरी तरह से फंसा लेगी ,,वह रघु को अपनी हुस्न का जादू दिखा कर उसे अपने आकर्षण में बांध लेना चाहती थी और उसे पूरी तरह से विश्वास था कि वह जैसा चाहती है वैसा ही होगा,,, क्योंकि वह पूरी तरह से जवान थी एकदम गोरी चिट्टी खूबसूरत अंगो की मालकीन ,,, बड़ी बड़ी चुचीयों के साथ साथ बड़ी बड़ी गांड भी आकर्षण का केंद्र बिंदु थी,,, मर्दों को औरतों का जो भी अंग पसंद होता है वह सब कुछ बेहतरीन उम्दा किस्म का सोनी के पास था,,,,,,,

सोनी यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि अगर राजू के सामने वह अपने साड़ी का पल्लू भी नीचे गिरा देगी तो उसकी लाजवाब बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चुचियों का घेराव देखकर वह घुटने टेक देगा,,,,, इसी आत्मविश्वास के साथ वह आगे पढ़ रही थी,,,, और दूसरी तरफ राजू जो अनजाने में ही सोनी की खूबसूरत गदराई गांड के दर्शन कर चुका था पर उसे देख कर मुट्ठ भी मार चुका था,,, उसके गोलाकार नितंबों के घेराव के आकर्षण में पूरी तरह से बंध कर वह भी अपनी बकरियों को लेकर पीछे पीछे हो चला था वह देखना चाहता था कि वह कहां जाती है,,,,,,,

गांव में पहुंचते ही सोनी,, राजू को ढूंढने का अभियान शुरू कर दी थी क्योंकि वह नहीं जानती थी कि राजू का घर किधर है और वह सीधे-सीधे राजू को ही पढ़ने के लिए नहीं बोल सकती थी दूसरे लड़कों को भी बोलना जरूरी था क्योंकि ताकि किसी को ऐसा न लगे कि जरूर दाल में कुछ काला है,,, समझा-बुझाकर सोनी ने तीन चार लड़कों को पढ़ने के लिए तैयार कर दिया जिसमें से श्याम भी था हालांकि वह पढ़नानहीं चाहता था लेकिन सोने की खूबसूरती देखकर वहां उस पर मोहित हो गया था और इसीलिए वह हामी भर दिया था,,,,, अब उसे राजू की तलाश थी,,,, वह राजू को ढुंढ रही थी साथ में दूसरे लड़के भी थे,,,,,,

सोनी के लिए पढ़ाई तो एक बहाना था राजू को अपने जाल में फंसाने के लिए उसके साथ अपनी मनमानी करने के लिए उसके मोटे तगड़े लंड के दर्शन करके उसे अपनी बुर में लेने के लिए,,,,, इसी चक्कर में वह अपनी हवेली छोड़कर गांव में आई थी,,,,,,दो तीन लड़कों को वह तैयार कर चुकी थी पढ़ाने के लिए बस उसे इंतजार और तलाश थी राजू के जो कि राजू भी सोनी के चक्कर में गांव में पीछे पीछे आ गया था लेकिन उसे नहीं मालूम था कि वह गांव में क्या करने के लिए आई है उसे अगर इस बात का अंदाजा होता कि वह गांव में उसी को ढूंढते हुए आई है तो वह कब से उसकी आंखों के सामने आकर खड़ा हो जाता,,,,,,, उसको गांव में चक्कर लगाता है वह देखता राजु घर में चला गया था और खाना खाने लगा,,,,।

सोनी उसे ढूंढ ढूंढ कर परेशान हो रही थी उसे नाम भी तो नहीं मालूम था कि उसका नाम क्या है,,,, पर जिन लड़कों को तैयार की थी उनसे ही पूछ रही थी कि कोई और लड़का हो तो उन्हें भी बोल दो पढ़ने के लिए,,,,, श्याम के साथ जो था वह बार-बार श्याम को राजू को भी पढ़ने के लिए बोलने को कह रहा था लेकिन वह उसे इशारों में चुप रहने को कह रहा था क्योंकि श्याम यह अच्छी बात अच्छी तरह से जानता था कि अगर राजू भी साथ चलेगा तो जरूर,,,, यह भी राजू के ऊपर डोरे डालने के लिए और राजु उसकी खूबसूरत जवानी को देखकर पानी पानी हो जाएगा,,,, और ऐसा वह बिल्कुल भी नहीं चाहता था और वैसे भी श्याम ने भी खेल के मैदान में राजू के मोटे तगड़े लंड को देख लिया था,,,और एक मर्द होने के नाते उसे इस बात का अच्छी तरह से आभास था की औरतों को सबसे ज्यादा क्या पसंद है होता है,,,,इसीलिए वह राजू का नाम पता नहीं रहा था और मैं उसका घर बता रहा था और ना ही अपने साथियों को बताने दे रहा था,,,,,

सोनी परेशान हो गई थी कड़ी धूप की वजह से उसके माथे से पसीना टपक रहा था उसकी खूबसूरती कड़ी धूप में सोने की तरह चमक रही थी,,,, उसकी मतवाली गांड देखकर श्याम पागल हुआ जा रहा था,,, उसकी मदमस्त चूचियों के उभार को देखकर,,, श्याम के मुंह में पानी आ रहा था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था,,,,,,,,

सोनी परेशान होकर अपने मन में सोचने लगी कि वह भी कितनी बुद्धू है ना नाम ना पता ऐसे कैसे उसको ढूंढ रही है उसका मन उदास हो गया था उसे लगने लगा था कि शायद वह लड़का इस गांव का था ही नहीं,,,, क्योंकि लगभग लगभग उसी सभी घर पर जाकर उसे ढूंढने की पूरी कोशिश की थी,,,,, वह अपनी इस निराशा के बारे में अपनी सहेली शांति को भी बता नहीं सकती थी क्योंकि उसकी कामलीला के बारे में उसकी सहेली शांति को भी कुछ भी नहीं पता था और ना ही वह चाहती थी कि किसी को कानों कान पता चले,,,,,, वह बहुत उदास हो गई थी ,,उसके चेहरे पर उदासी और निराशा दोनों साफ झलक रही थी लेकिन खूबसूरती में जरा भी कमी नहीं आई थी,,,,,, बस दो-चार घर ही बचे हुए थे और सोनी ना उम्मीद हो चुकी थी,,,,,, उसे लगने लगा था कि उसके सपनों का राजकुमार इधर नहीं मिलने वाला उसका गांव में आना बेकार साबित हो रहा था खामखा हुआ दो चार लड़कों को और पढ़ने के लिए बोलती थी अपने सर की मुसीबत मोल ले ली थी,,,,,कर भी क्या सकती थी अपने बड़े भाई को यही बहाना करके तो वह गांव में आई थी,,,,,।

मालकिन अब दो चार ही घर बचे हैं,,,,,, जल्दी से अपना काम खत्म कर दे घर चलते हैं तो बहुत तेज लग रही है,,,

हां तु ठीक कह रही हैं,,,, यहां कोई है पढ़ने वाला,,,(साथ में चल रहे हैं वह शयाम को संबोधित करते हुए बोली,,)

नहीं नहीं मेम साहब यहां कोई नहीं है,,,,,(श्याम जानबूझकर बोला क्योंकि वह जानता था कि यहां राजू रहता है और वह नहीं चाहता था कि राजू भी साथ में गोरी मेम साहब के पास पढ़ने जाए,,, शाम की बात सुनकर सोनी और ज्यादा निराश हो गई रही सही उम्मीद जवाब दे गई,,, अब कर भी क्या सकते हैं मन मसोसकर वह ,,, श्याम से बोली,,,,)

ठीक है तुम तीनों परसों से,,, आम वाले बगीचे में आ जाना मैं वहीं पर पढ़ाती हूं,,,,

ठीक है मैम साहब,,,,,(श्याम एकदम से खुश होता हुआ बोला लेकिन उसकी निगाह सोनी की छातियों पर टिकी हुई थी जिसका आभास सोनी को हो गया था,,, इसलिए वह अपना पल्लू ठीक करते हुए बोली,,,,)

ठीक है अब आम के बगीचे में मुलाकात होगी,,,।

(श्याम की नजरों को सोनी भांप गई थी उसे श्याम पर गुस्सा भी आ रहा था भले ही सोनी एक प्यासी औरत थी लेकिन वह किसी को भी अपना तन मन यूं ही नहीं सौंप देती थी जिस पर दिल आता था उसी पर वह पूरी तरह से निछावर हो जाती थी,,,,, इतना कहकर वह चलने लगी और श्याम इस बात से खुश था कि अच्छा हुआ राजू से मुलाकात नहीं हुई क्योंकि वह नहीं चाहता था कि इतनी खूबसूरत औरत और उसके बीच राजू आए,,,, क्योंकि पलभर में ही पहली मुलाकात में ही श्याम सोनी को लेकर सपने बुनने लगा था,,,,वह वहीं खड़ा सोनी को जाते हुए देखता रह गया उसकी मटकती गांड श्याम की हालत को खराब कर रही थी,,,, वैसे भी सोनी कमर के नीचे कसी हुई साड़ी पहनती थी जिसकी वजह से उसकी गांड कुछ ज्यादा ही ‌ऊभर कर बाहर नजर आती थी,,,,।

सोनी पूरी तरह से निराश हो चुकी थीउसके मन में तो आ रहा था किन-किन लड़कों को भी ना बोल दे पढ़ने के लिए,,, लेकिन इसी तरह से पढ़ाने की उम्मीद बची हुई थी जो कि राजू से फिर मिला सकती थी इसी उम्मीद के साथ वह,,, आगे बढ़ने लगी की तभी,,, पीछे से उसे पानी के गिरने की आवाज आई तो वह पीछे नजर घुमा कर देखने लगी,,,, खुशी से देखते ही इसकी आंखों में चमक आ गई उसकी बांछें खिल गई उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,,आखिर खुश क्यों ना होती जिसे ढूंढते हुए वह यहां आई थी वह उसकी आंखों के सामने था,,,, राजू खाना खाकर बाहर हाथ धो रहा था,,,, राजू सोनी को देखने लगा तो दोनों की नजरें आपस में टकरा गई सोनी को देखते ही राजू की आंखों के सामने सोनी की नंगी गांड नाचने लगी,,, राजु को उसकी आंखों के सामने सोनी अपनी साड़ी उठाकर पेशाब करते हुए नजर आने लगी सोनी से नजरें मिलते ही राजू के पजामे में हलचल होने लगी कुछ देर तक तो राजू उसे देखता ही रहेगा थोड़ी ही दूर पर श्याम अपने साथियों के साथ खड़ा होकर यह सब देख रहा था दोनों को इस तरह से आपस में देखा हुआ पाकर श्याम जल भुन गया,,,, सोनी एकदम से हक्की बक्की होकर वहीं खड़ी रह गई,,,,।

कुछ देर बाद सोनी बोली,,,।

ऐ लड़के यहां आओ,,,,

(सोनी एकदम से मुस्कुराते हुए बोली,,,, सोनी को इस तरह से अपने आप को बुलाते हुए पाकर राजू को यकीन नहीं हो रहा था कि जिस खूबसूरत औरत को रहा है कुछ देर पहले झाड़ियों में पेशाब करते हुए देखा था उसकी तरफ आकर्षित हो गया था उसकी गांड को देखकर मदहोश हो गया था वह औरत खुद उसे बुला रही थी,,,,ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे वह कोई सपना देख रहा है कुछ देर तक राजू उसी तरह से खड़ा रहा तो सोनी फिर से बोली,,,)

ऐ लड़के सुनाई नहीं दे रहा है क्या,,,? मैं तुम ही से कह रही हूं,,,, इधर आओ,,,

कौन मै,,,?

हां तुम्ही,,,,,

(राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, वह लौटे को वहीं पास में रखकर उसके पास आगे बढ़ने लगा और उसके पास पहुंच कर बोला)

बोलिए क्या हुआ मुझे क्यों बुला रही हो,,,?

पढ़ना चाहते हो,,,,,

नहीं नहीं मैं नहीं पढ़ना चाहता,,,,

(पढ़ाई के नाम परराजू एकदम से घबराते हुए बोला क्योंकि वह पढ़ना नहीं चाहता था पढ़ाई के नाम पर उसे सांप सूंघ जाता था गांव के बाहर सरकारी स्कूल थी जिसमें कुछ बच्चे पढ़ने जाया करते थे लेकिन राजू नहीं जाता था और ना ही उसके साथ ही जाया करते थे,,,,,)

क्यों नहीं पढ़ना चाहते पढ़ने में क्या हर्ज है पढ़े-लिखे लोगे तो तुम्हारे काम आएगा हिसाब-किताब समझ पाओगे,,,।

नहीं मुझे नहीं समझना है,,,,

(राजू इतना कहकर घर में जाने ही वाला था कि अंदर से उसकी मां बाहर निकलते हुए बोली)

क्या रे किससे बातें कर रहा है,,,,(इतना कहने के साथ ही उसकी नजर सोनी पर पड़ी तो उसकी खूबसूरती उसकी चमक देखकर मधु समझ गई कि यह कोई बड़े घर की औरत है,,, इसलिए हाथ जोड़ते हुए बोली,,,)

नमस्ते आप कौन हैं मैं पहचानी नहीं,,,,

जी मैं लाला साहब की छोटी बहन हुंंं और बच्चों को पढ़ाने का काम करती हूं,,, इससे मेरा मन भी लग जाता है और बच्चों को कुछ सीखने को भी मिल जाता है,,,,।,,,

अरे अरे आप मालिक की छोटी बहन है,,,, आइए आइए बैठिए,,,, राजू जा अंदर से जाकर खटिया बाहर लेकर आ,,,,, आइए छोटी मालकिन,,,,,

(लाला की छोटी बहन उसके घर आई है यह जानकर मधु बहुत खुश हो रही थी,,, और सोनी अपनी आवभगत देख कर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और उस लड़के का नाम राजू है यह जानकर उसे अच्छा भी लग रहा था,,,, मधु की तकल्लुफ को देखकर सोनी बोली,,,)

अरे रहने दीजिए तकलीफ करने की कोई जरूरत नहीं है,,,

नही नही छोटी मालकिन,,, इसमें तकलीफ वाली कौन सी बात है आप तो हमारी मेहमान है,,,,

(तभी खटिया उठाएं राजू घर से बाहर आ गया उसके मोहक मासूम चेहरे को देखकर सोनी के दिल की धड़कन बढ़ने लगी उसका गठीला बदन उसकी तरफ उसे आकर्षित किए जा रहा था,,, उसके मासूम मोहक चेहरे को देखकर सोनी अपने मन में बोलने लगी कि वाकई में जो खुद इतना खूबसूरत करीला दिखता है तो उसका औजार भी उतना ही दमदार ही होना चाहिए जैसा कि वह देखी थी,,,, राजू वही पर खटिया बिछा दिया,,,, मधु राजू से बोली,,,)

जा जाकर गुड वाला शरबत लेकर आ,,,

नहीं नहीं रहने दीजिए आप खामखा तकलीफ कर रही है,,,,

नहीं नहीं मेहमान नवाजी हमारी औकात के मुताबिक करने दीजिए आखिरकार आप मालिक की छोटी बहन जो है,,,, एक तरह से वह तो हमारे माई बाप है,,,

(मधु की बातें सुनकर सोनी बहुत खुश हो रही थी,,,,, सोनी के मन में पिक्चर बहुत कुछ चल रहा था तो एक तरफ सॉरी की खूबसूरती को देखकर एक अजीब सा आकर्षण भी होता जा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि गांव मैं कोई औरत इतनी खूबसूरत भी होगी सोनी बातें करते हुए आंखों से ही मधु के देह लालित्य को नाप रही थी,,, मधु की गोल गोल कठोर चूचियां सोने की अनुभवी आंखों से बच नहीं पाई वह अंदाजा लगा ले कि ब्लाउज के अंदर बवाल छिपा हुआ है,,,, सुडौल बदन देखकर सोनी को मन में अजीब सी हलचल होने लगी,,,, सोनी को इस बात का आभास हो गया कि राजू की मां उससे भी ज्यादा खूबसूरत है,,,, बस उससे रंग थोड़ा सा दबा हुआ है,,,, थोड़ी ही देर में राजू गुड वाला शरबत लेकर आ गया खटिया पर सोनी और शांति दोनों बैठ गई थी,,,दो ग्लास में गुड़ वाला शरबत लाकर राजू उन दोनों को थमाने लगा,,,,

गुड़ के शरबत वाला गिलास को थाम ते हुए सोनी को इस बात का आभास हो गया था कि जिस तरह से राजू खड़ा है अगर वह साड़ी का पल्लू थोड़ा सा नीचे गिरा देगी तो उसकी गोल-गोल चूचियो की गहरी लंबी लकीर राजू को साफ नजर आने लगेगी,,, और ऐसा ही हुआ एक बहाने से गर्मी का बहाना करते हुए सोनी थोड़ा सा अपना साड़ी का पल्लू अपनी चूचियों पर से सरका दी जिसकी वजह से उसकी गोल-गोल सूचना एकदम साफ नजर आने लगी,,, राजू की नजर जैसे ही सोनी की छातियों पर पड़ी तो उसके होश उड़ गए उसके मुंह में पानी आ गया,,, पल भर में ही राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा राजू को साफ नजर आ रहा था कि ब्लाउज के साइज से कहीं ज्यादा बड़ी उसकी चूचियां थी जो कि उसके ब्लाउज में से बाहर आने के लिए तड़प रही थी,,,,,
 
शरबत का ग्लास थमाते हुए राजू उसकी चुचियों को ही घूर रहा था,,,,,, इस बात का आभास होने को हो गया था और वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी और खुश भी हो रही थी तिरछी नजरों से उसकी घूमती हुई निगाहों को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि मानो वह अपना दोनों हाथों के बढा कर उसकी चूचियों को जोर से पकड़ लेगा उसे दबाना शुरू कर देगा,,,, राजू खा जाने वाली निगाहों से उसकी चूचियों को घूर रहा था और यह एहसास सोनी के तन बदन में आग लगा रहा था क्योंकि जैसा वह चाह रही थी वैसा ही हो रहा था राजू के मन का कबूतर अपने पंख फड़फड़ाने लगा ,,,, अपने मन में यहीं सोचने लगा कि,,, उसकी किस्मत कितनी तेज है कि कुछ देर पहले ही सी हो रात को वापस आप करते हुए देखा था इसकी नंगी बड़ी बड़ी गांड को देखकर वह मुठ्ठ भी मारा था और इस समय उसके ब्लाउज में कैद उसकी दोनों चूचियों को देखकर उसके होश उड़ जा रहे थे उसका मन कर रहा था कि,,, अभी इसी समय उसके ब्लाउज का बटन खोल कर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां को बाहर निकाल देना और उसे मुंह में लेकर जोर-जोर से पिए जैसा कि वह अपनी बुआ की चुचियों को पी रहा था,,,, सोनी पूरी तरह से गदराई जवानी की मालकिन थी और उसकी गदराई जवानी देख कर राजू का मन डोल रहा था राजू का मन उसे चोदने को कर रहा था,,,,,, मधु राजू की निगाहों से बिल्कुल अनजान थी,,,

शरबत पीकर ग्लास को राजू को थमा ते हुए बोली,,,

पढ़ने आओगे ना राजू,,,,(सोनी की आवाज में एक अजीब सी कशिश थी एक आकर्षण था उसके शब्दों में एक आमंत्रण था जो उसे अपनी तरफ खींच रहा था बुला रहा था जिसे शायद राजू इंकार नहीं कर पा रहा था क्योंकि अब राजू उसके देह लालित्य,,, उसके बदन के आकर्षण में ब"धता चला जा रहा था,,,, वह कुछ बोला नहीं तो मधु ही बोल पड़ी,,,)

जी मालकिन जरूर आएगा पढ़े लिखेगा नहीं तो क्या करेगा,,, दिनभर आवारा की तरह घूमता रहता है शब्दों को पहचानेगा तभी तो कुछ कर पाएगा,,,,

(मधु की बातें सुनकर सोनी खड़ी हो गई और बोली)

तो परसों उन लड़कों के साथ चले जाना,,,(उंगली के इशारे से श्याम और उसके दोस्तों की तरफ इशारा करते हुए,,, जोकि उनमें से श्याम गुस्सा रहा था,,, क्योंकि जिस बात का डर उसे था वही उसकी आंखों के सामने हो रहा था,,, पढ़ाई के नाम पर जिसे डर लगता था वह सोनी के आकर्षण में कुछ बोल नहीं पाया,,, और हां में सिर हिला दिया,,,, इजाजत लेकर सोनी अपने घर की तरफ जाने लगी राजू उसे जाते हुए देखता रह गया उसकी नजर उसकी कमर के नीचे गोलाकार नितंबों पर टिकी हुई थी जिसे कुछ देर पहले व झाड़ियों में एकदम नंगी देख चुका था उसकी नंगी गांड को देखकर जो हाल उसका हुआ था इस समय भी कुछ ऐसा ही वह अपने अंदर महसूस कर रहा था,,,,, मधु भी बहुत खुश थी क्योंकि उसके घर पर लाला की बहन जो आई थी,,,,

धीरे-धीरे रात गहराने लगी खाना खाकर मधु और उसका पति हरिया अपने कमरे में चले गए,,, गुलाबी और राजु दोनों बाहर बैठे हुए थे,,,, दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि अभी दोनों की प्यास बुझी नहीं थी अभी तो सिर्फ एक ही रात बीती थी अभी तो शुरुआत थी राजु को मालूम था कि आज भी उसे बुआ की बुर चोदने को मिलेगी जो कि उसका लंड पूरी तरह से मचल रहा था और खड़ा भी हो चुका था,,,, वह अपनी बुआ गुलाबी से बोला,,,)

चलो ना बुआ कमरे में अब यहां क्यों बैठी हो,,,,

क्यों तुझसे रहा नहीं जा रहा है क्या,,,,

नहीं बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा है,,,

नहीं बुआ देखो ना कितना तड़प रहा है,,,(इतना कहने के साथ ही राजू एकदम बेशर्म बनता हुआ अपनी बुआ का हांथ पकड़ कर उसे अपने लंड पर रख दिया,,, जिसके कड़क पन का एहसास गुलाबी को अपने हथेली पर होते ही उसकी बुर फुदकने लगी,,, उसका मन तो पहले से ही कर रहा था लेकिन वो थोड़ा अपने भतीजे को तड़पाना चाहती थी,,, लेकिन उसके भतीजे की हरकत ने उसके तन बदन में एक बार फिर से काम ज्वाला को भड़का दिया था,,, अब उससे भी रहा नहीं जा रहा था,,, इसलिए वह बोली,,,)

ठीक है तु कमरे में चल मैं थोड़ी देर में आती हूं,,,,

अब कहां जा रही हो,,,?

अरे आ रही हूं तु चल तो सही,,,,

(इतना कहकर वह खटिया से खड़ी हो गई और राजु भी पजामे के ऊपर से अपने खड़े लंड को सहलाते हुए कमरे के अंदर चला गया,,,, और गुलाबी घर के बाहर पेशाब करने को चली गई उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,, थोड़ी देर में पेशाब करके वह कमरे के अंदर आ गई,,, जहां पर राजू खटिया के ऊपर लेटा हुआ था और पैजामा नीचे सरका कर अपने खड़े लंड को हिला रहा था,,, जिसे देखते हीगुलाबी की बुर फुदकने लगी और उसके मुंह में पानी आ गया,,,)

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गुलाबी पेशाब करके वापस कमरे में आ चुकी थी उसे जोरों की पेशाब तो नहीं लगी थी लेकिन वो जानती थी कि एक बार लंड लड़की बुर में जाएगा तो उसे अपने आप ही के साथ लग जाएगी और वह बाहर आकर अपना मजा किरकिरा नहीं करना चाहती थी क्योंकि पहली चुदाई का अनुभव उसे यह सब एक नई सीख दे रहा था,,,, वैसे तो गुलाबी को पेशाब करते हुए देखना अपने एक अपना अलग ही रोमांच का अनुभव था लेकिन राजू इस अद्भुत रोमांच से चूक गया था क्योंकि उसे तो गुलाबी को चोदने की प्यास थी इसलिए वह कमरे में जाते ही अपने पजामे को घुटनों तक सरका कर,,, अपने खड़े लंड को हिला हिला कर अपनी बुआ की बुर में डालने के लिए तैयार कर रहा था वैसे तो राजू हट्टा कट्टा जवान लड़का था उसे चोदने से पहले तैयारी करने की जरूरत नहीं थी क्योंकि चोदने के ख्याल मात्र से ही उसका नंबर लोहे के रोड की तरह एकदम टाइट हो जाता था,,,,,।

पेशाब करके कमरे में जाकर होते हीवह दरवाजा बंद करके सीट के लिए भी नहीं लगाई थी कि उसकी नजर खटिया पर पड़ी और खटिया पर के नजारे को देखते ही उसकी पुर में खुजली होने लगी क्योंकि राजू अपने खड़े लंड को हिला रहा था और यह नजारे जवान लड़की के लिए कामुकता और वासना से भरा होता है जिसे देखते ही गुलाबी की गुलाबी बुर फुदकने लगी थी,,,, वह सिटकनी लगाकर दरवाजे पर खड़ी होकर राजू के लंड को देख रही थी,,,, एक गजब का आकर्षण था उसके लंड में जिससे गुलाबी भलीभांति परिचित हो चुकी थी,,,, वह अभी तक अपने बड़े भैया के ही लंड को देखते आ रही थी,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके भैया से भी बड़े बड़े लंड होते हैं और उसकी धारणा अपने भतीजे के लंड को देखकर टूट गई,,, जिसे वह अपनी बुर में भी लेकर चुदवा चुकी थी,,,,

इस समय उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,,,, वह धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए राजु से बोली,,,।

तू तो एकदम तैयारी में लगा है,,

क्या करूं बुआ रहा नहीं जा रहा है एक बार फिर से तुम्हें नंगी देखने का मन कर रहा है,,,,

बड़े जल्दी में हैं,,,,

क्या करूं,,,, मन कर रहा है कि कब तुम नंगी हो और मैं तुम्हारी बुर में अपना लंड डालकर चोद दु,,,,(राजू जोर-जोर से अपने लंड को हीलाते हुए बोला,,,)

और फिर इसके बाद,,, पानी निकल जाता और काम खत्म,,, ऐसा तो तू हाथ से हिला कर भी कर सकता है,,,,,,,,, लेकिन वह मजा नहीं आएगा जैसे कि आना चाहिए,,,,,,,

क्या करूं बुआ मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,,

मैं जानती हूं तड़प ही ऐसी है,,,,लेकिन अपने आप को संभाल कर अपने आप पर काबू करके इस खेल में आगे बढ़ा जाता है तभी तो मजा आता है मैंने यह सब तेरी मां और तेरे पिताजी से सीखी हुं,,,, इस समय भी दोनो चुदाई कर रहे होंगे,,,,,(धीरे-धीरे गुलाबी खटिया के करीब पहुंच गई लालटेन की की की रोशनी रघु का संपूर्ण वजूद एकदम साफ नजर आ रहा था जिसे देखकर गुलाबी की आंखों में वासना की चमक बढ़ती जा रही थी उसकी दोनों टांगों के बीच कंपन हो रहा था,,,, जिस तरह का उतावलापन राजू दिखा रहा था वह चाहती तो वह भी इसी उतावले पानी के चक्कर में सीधे सीधे उसके लंड पर चढ जाती और अपनी गर्मी शांत कर लेती,,, लेकिन गुलाबी तेरे से काम ले रही थी क्योंकि वह रोज रोज छोटे से छेद में से यही सब तो देखती थी उसके भैया और भाभी का धैर्य उन दोनों के बीच पारस्परिक समझदारी और बिल्कुल भी उतावलापन ना दिखाने की जल्दबाजी इसीलिए तो वह दोनों आज भी पहली रात की तरह ही हर रात सुहागरात मना रहे थे,,,,

गुलाबी तेरी देखते हैं खटिया के नीचे घुटनों के बल बैठ गई,,, राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड का आकर्षण उसकी आंखों की चमक और ज्यादा बढ़ा रहा था,,, उसकी बुर लगातार पानी छोड़ रही थी,, इसके बावजूद भी उसे अपने अंदर ले लेने की जल्दबाजी वह नहीं दिखा रही थी,,,क्योंकि अपने भैया भाभी को देखकर वह इतना तो समझ गई थी कि इस खेल को धीरे-धीरे खेला जाता है तभी इस खेल में मजा आता है,,,। राजू की सांसें उपर नीचे हो रही थी,,,। उसे लगा था कि उसकी बुआ अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जाएगी लेकिन वह ऐसा कुछ भी नहीं की थी,,,,, क्योंकि उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था,,,, वो धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाकर,, राजू के लंड को थाम ली,,,, एक अजीब सी कशक की आवाज के साथ राजू एकदम मस्त हो गया और गुलाबी धीरे-धीरे अपने प्यासे होठों को उसके लंड के सुपाड़े की तरफ आगे बढ़ाने लगी,,,, और देखते ही देखते अपने प्यासे होठों को उसके लंड के सुपाड़े पर रख दी,,,,,,।
 
आहहहह बुआ,,,,,,(राजू गरम सिसकारी की आवाज के साथ ही अपनी कमर को उत्तेजना के मारे ऊपर की तरफ उठा दिया और उसका छुपाना गुलाबी के लाल-लाल होठों के बीच प्रवेश कर गया जिसे गुलाबी खुद ही अपने मुंह में लेकर अपने प्यासे होठों के बीच कस ली,,,,।

सहहहहह,,,,,,बुआ,,,,,(एक बार फिर से राजू एकदम से मस्त हो गया और धीरे-धीरे गुलाबी अपनी भाभी की तरह ही अपने भतीजे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, यह क्रिया गुलाबी बड़ी मध्यम गति से कर रही थी बहुत ही धीरे-धीरे राजू की मस्ती और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,। धीरे धीरे गुलाबी राजू के डंडे जैसे लंड को समुचा अपने गले के नीचे तक उतार ले रही थी,,,,यह बेहद अविश्वसनीय कार्य था जिस पर राजू को भी यकीन नहीं हो रहा था इसलिए तो वह अपने हाथों की कोहनी का सहारा देकर अपना सिर उठाकर अपनी दोनों टांगों के बीच देख रहा था,,,,,,, क्योंकि उसके लिए यकीन कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था,,,,,,जो अच्छी तरह से जानता था कि उसके लंड की मोटाई और लंबाई दूसरों से कुछ ज्यादा ही थी,,,,लेकिन जो उसकी आंखों ने देखा था उस पर यकीन कर पाना मुश्किल था गुलाबी बड़े आराम से उसके मोटे तगड़े लंबे मुसल को अपने गले तक उतार कर चूस रही थी हालांकि रह-रहकर उसकी सांसे अटक जाती थी लेकिन फिर भी वह इस मजे को छोड़ना नहीं चाहती थी क्योंकि गले तक ले जाकर उसे चूसने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,,,,

गुलाबी की अविश्वसनीय कार्य क्षमता को देखकर राजू अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगा उसके तन बदन में आग लगने लगी और वह हल्के रंग के नीचे से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाने लगा मानो कि जैसे वह नीचे से ही उसके मुंह को चोद रहा हो,,,, मदहोशी के आनंद के सागर में डूबते हुए राजू की आंखें मुंदने लगी थी उसे असीम सुख की प्राप्ति हो रही थी,,, ऐसा सुख वह कभी नहीं प्राप्त किया था,,,, अद्भुत आनंद के सागर में राजु और गुलाबी दोनों डुबते चले जा रहे थे,,,, गुलाबी को यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी वह अपनी आंखों से देखती आ रही थी वही क्रिया को वह खुद करेगी,,,, लेकिन यह सपना नहीं हकीकत ही था उसकी सोच से भी कहीं ज्यादा उत्तेजक और मनमोहक,,,, गुलाबी अपने ख्यालों को अंजाम दे रही थी अपनी भैया और भाभी की,,, अद्भुत संभोग लीला को देखकर वह अक्सर कल्पना की दुनिया में खो जाती थी और उसकी कल्पना की दुनिया का राजकुमार कोई और ही होता था लेकिन वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके जीवन में आने वाला पहला मर्द पहला राजकुमार उसका सगा भतीजा होगा जो उसे इस अद्भुत शुक्र की दुनिया में ले जाकर आनंद के सागर में डुबकी लगवाएगा,,,,।

राजू मस्ती से बंद आंखों को खोल कर बार-बार अपनी दोनों टांगों के बीच देख ले रहा था जहां पर गुलाबी अपनी पूरी जवानी बिखेर कर उस पर छाई हुई थी,,,,ऐसा लग रहा था कि मानो आज गुलाबी सावन की घटा बन गई थी और उसके ऊपर बरस रही थी,,, गुलाबी रुपी सावन की बौछार में,,, राजीव का पूरा वजूद भीग रहा था डूब रहा था और उसे ढूंढने में भी मजा आ रहा था भला ऐसा कौन सा दर्द होगा जो खूबसूरत जवानी के सागर में डूब ना ना चाहता हो,,,

सपर ,,,सपर,,,,की आवाज के साथ गुलाबी बड़े मजे लेकर राजू के लंड कै सुपाडे को चाट रही थी,,,, ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे कोई उसकी पसंदीदा चीज उसके हाथ लग गई हो,,,, और उसे जी जान से प्यार करने में लगी हो,,,,,,

ओहहहह ,,,, बुआ तुम कितना अच्छा कर रही हो मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि ऐसा भी किया जाता है,,,,

कल भी तो मुंह में ली थी,,,,(गुलाबी अपनी मुंह में से राजु के लंड को बाहर निकाल कर बोली,,, और इतना बोलने के साथ ही वापस फिर से मुंह के अंदर गटक ली,,,)

हां बुआ,,, लेकिन कल से ज्यादा आज मजा आ रहा है,,,ओहहहह बुआ बहुत अच्छे हैं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी हथेली को अपनी बुआ के सर पर रख दिया और उसे हल्के -हल्के अपने लंड पर दबाने लगा,,,,,,) सहहहहह ,,,,आहहहहहहह,,,,,ऊफफफ,,,,,ऊमममममममम,,,,

(राजू को बहुत मजा आ रहा था उसके मुंह से सिसकारी की आवाज फूट नहीं थी जो कि बयां कर रही थी कि उसे कितना मजा आ रहा है गुलाबी थी कि राजू के लंड को छोड़ने का नाम नहीं ले रही थी उसे लंड चूसने में बहुत मजा आ रहा था,,,,, राजू को इस बात का डर था कि कहीं उसका पानी ना निकल जाए क्योंकि गुलाबी की नरम नरम जीभ लंड को और ज्यादा गर्म कर रही थी,,,, पर इसीलिए उसे इस बात का डर था कि गर्माहट पाकर कहीं उसका लंड पिघल ना जाए,,,, राजू का समूचा गुलाबी कि थुक और लार से पूरी तरह से सन गया था,,,,,,,

अत्यधिक उत्तेजना का असर राजू और गुलाबी दोनों के बदन पर दिखाई दे रहा था वैसे भी गर्मी का महीना था और ऐसे गर्मी के महीने में गुलाबी की गर्म जवानी और ज्यादा भौकाल मार रही थी,,,, राजीव के माथे पर पसीने की बूंदें उपसने लगी थी,,,,,लालटेन की पीली रोशनी में पूरा कमरा जगमगा रहा था सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,, बुआ और भतीजा पहली बार में ही इतनी ज्यादा खुल जाएंगे यह दोनों के लिएगजब ही था क्योंकि वह दोनों कभी सपने में भी नहीं सोचे थे कि इस तरह से पवित्र रिश्ता के बीच उन दोनों को संभोग सुख का आनंद मिलेगा,,,,

गुलाबी अपने लाल-लाल होठों को राजू के लंड की गोलाई पर कसी हुई थी जिसे राजू को अपना लंड उसके मुंह में अंदर बाहर करने में बुर का ही मजा मिल रहा था,,,। बड़े आराम से मध्यम गति से राजू अपनी कमर को ऊपर नीचे कर रहा था उसे ऐसा करने का बहुत मजा आ रहा था,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रहे गुलाबी की बुर पानी पानी हो रही थी,,,,,,, उसकी बुर कुल बुला रही थी वह चाहती थी कि राजू भी जिस तरह से उसने उसके लंड की सेवा करी है उसी तरह से वह भी उसकी बुर की सेवा करें उसकी खातिरदारी करें ताकि बुर उसे अद्भुत सुख दे,,,,।

यही सोचकर वह राजू के लंड को मुंह में से बाहर निकाल दी,,, और राजू का लंड पूरी तरह से थुक में सना हुआ पकक की आवाज के साथ बाहर आ गया,,,, गुलाबी की जीभ और मुंह की गर्माहट भाप बनकर राजू के लंड से उठ रही थी,,,, गुलाबी के साथ खड़ी हुई थी इसलिए वह वहीं बैठे बैठे अपनी सांसो को दुरुस्त करते हुए राजू की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी दोनों के बीच विवाह और भतीजे वाला पवित्र रिश्ता बिल्कुल भी नहीं रह गया था यह रिश्ता पूरी तरह से खत्म हो चुका था और वह दोनों अब केवल एक मर्द औरत ही थे जिनके बीच केवल संभोग का ही रिश्ता रहता है,,, और वह दोनों इस रिश्ते से खुश भी दे।

गुलाबी अपने होठों पर लगे थुक को अपने दुपट्टे से साफ करते हुए बोली,,,,।

कैसा लगा राजू,,,,

पूछो मत बुआ बहुत मजा आया,,,,ईतना मजा कि मैं बता नहीं सकता कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतना मजा आएगा,,,,(गहरी गहरी सांस लेते हुए राजू बोला और उसकी बातें सुनकर गुलाबी को भी संतुष्टि हुई वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, )

अब तो एक जो मैं तेरे साथ की हूं तुझे भी वही मेरे साथ करना होगा मेरी बुर चाट ना होगा और वह भी एक दम मजे लेकर,,,,

ठीक है दुआ मैं भी वही करूंगा जो तुम मेरे साथ की थी,,,

बहुत समझदार है,,,(इतना कहकर वह मुस्कुराने लगी और उठ कर खड़ी हो गई तभी बगल वाले कमरे से आवाज आई,,,)

आहहहहहह,,,,

इस कराहने की आवाज को सुनते ही,,, गुलाबी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए राजू से बोली,,,,।

लगता है तेरी मां की बुर में भैया का लंड घुस गया है,,,।

(यह बात सुनकर राजू भी मुस्कुरा दिया क्योंकि उसे भी अपनी मां की कराहने की आवाज साफ सुनाई दी थी,,, और जिस तरह की आवाज उसके कानों में पड़ी थी उसे भी एहसास था कि जरूर उसके पिताजी का लंड उसकी मां की बुर में घुस गया होगा,,,, लेकिन आप छोटे से छेद से उन दोनों की दुनिया को झांकने का कोई मतलब नहीं था क्योंकि उन दोनों ने खुद अपनी दुनिया में ही उस तरह की मस्ती का इंतजाम कर लिया था,,,,अपनी आंखों के सामने मदहोश कर देने वाली जवानी से भरपुर गुलाबी खड़ी थी जो कि उसके साथ सब कुछ कर रही थी फिर भी पल भर में ही आहहहह की आवाज के साथ ही उसके जेहन में उसकी मां का नंगा बदन नाचने लगा वह सबकुछ नजर आने लगा तो उसने छोटे से छेद से देखा था,,,उसकी मां की मदमस्त कर देने वाली अंगड़ाई उसकी छेड़खानी अपने हाथों से अपने कपड़े उतार कर नंगी होना उसकी बड़ी बड़ी गांड,,, उसकी रसीली बुर और बुर में अंदर बाहर होता हुआ उसके पिताजी का लंड,,,, यह सब याद करते हैं राजू का लंड और ज्यादा कड़क हो गया ना जाने क्यों उसे इस बात का एहसास नहीं होता था कि जब जब वह अपनी मां के बारे में कल्पना करता था उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर कुछ ज्यादा ही उफान मारने लगती थी,,,,,

इसीलिए वह अपने लंड को पकड़ कर हीलाना शुरू कर दिया था और पास में खड़ी गुलाबी राजू की तरफ देखते हुए अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी थी यह राजू के लिए अद्भुत था,,,, कुछ ही दिनों में वह यह समझ गया था कि औरतों का इस तरह से अपने हाथ से कपड़े उतारते हुए देखने में कितना मजा आता है इसलिए गुलाबी का इस तरह से अपनी सलवार की डोरी खोलते हुए देखने में उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,,, अगले ही पल गुलाबी अपनी नाजुक उंगलियों का कमाल दिखाते हुए अपने सलवार की डोरी को उसकी गिठान को खोल दी और उसे उसी स्थिति में अपने हाथ से छोड़ दी और उसकी सलवार भरभरा कर नीचे उसके कदमों में जा गिरी और उसकी घटना से नीचे उसकी नजर आने लगी हालांकि साल बाद फ्री होने की वजह से अभी तक उसका बेशकीमती खजाना नजर नही आया था,,,। राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था अपनी बुआ की बुर अपनी आंखों से देखने के बावजूद उसे प्यार करने के बावजूद उसने अपना लंड डालकर चुदाई करने के बावजूद भी उसे एक बार फिर से नंगी देखने के लिए उसका मन तड़प रहा था,,,,,
 
गुलाबी उसकी तड़प को खत्म करते हुए अपनी कुर्ती को पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,जैसे-जैसे अपनी कुर्ती के ऊपर की तरफ उठा रही थी वैसे कैसे राजू के डिप्टी घर के अंदर की जा रही थी और वह अपनी धड़कन को संभालना पाने की स्थिति में खटिया पर उठ कर बैठ गया और गुलाबी की गुलाबी हरकतों को देखने लगा उसका बदन एक अंतर आशा हुआ था चर्बी का नामोनिशान नहीं था बेहद खूबसूरत गोरा रंग पतली कमर सुडोल चिकनी चाहे जिसे देखकर किसी का भी इमान फिसल जाए,,,,, देखते-देखते गुलाबी कुर्ती को अपनी छातियों तक उठा दी जिससे उसकी दोनों नारंगीया एकदम साफ नजर आने लगी जिसे देखते ही राजू के मुंह में पानी आ गया और गुलाबी अपनी कुर्ती को अपने सिर से बाहर निकाल पाती इससे पहले ही राजू खटिया पर से उठ कर खड़ा हो गया और तुरंत उसकी कमर को अपने दोनों हाथों से काम कर अपने प्यासे होठों को उसकी चूची पर रख कर उसकी निप्पल को चुसना शुरु कर दिया,,,,,,, जिस आवेश और उत्तेजनात्मक स्थिति से राजू जल्दी से उठ कर उसकी कमर पकड़कर उसकी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरु किया था उसी से गुलाबी के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,,, आनंद की अद्भुत अनुभूति में वह पूरी तरह से देखने लगी और वह तुरंत अपनी कुर्सी को उतार कर नीचे फेंक दी और अपने भतीजे की आंखों के सामने एकदम मादरजात नंगी हो गई,,,,,, राजू के घुटनों में अभी तक उसका पैजामा फंसा हुआ था,,, जिसे निकालने तक की सुध उसके अंदर नहीं थी,,,,पागलों की तरह गुलाबी की दोनों चुचियों का मजा लेते हुए उसे बारी-बारी से पी रहा था और गुलाबी उसे रोक नहीं रही थी क्योंकि उसे भी बहुत मजा आ रहा था,,,, रह रहकर राजू इतनी जोर से उसकी चूचियों को दबाता की गुलाबी के मुंह से कराहने की आवाज निकल जाती थीलेकिन फिर भी वह उसे रोक नहीं रही थी क्योंकि उसे इस तरह से और ज्यादा मजा आ रहा था,,,,राजू पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगाते हुए अपने लोगों की सूची से खेल रहा था हालांकि उसकी चुची बड़ी-बड़ी तो बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन इतने व्यस्त थी नारंगी के आकार की जो कि अभी अभी किसी दूसरों के हाथ में जाना शुरू हुई थी और वह भी उसके खुद के सगे भतीजे के हाथों में और उसके भतीजे के हाथों में उसके बदन में दम बहुत था और वह पूरा दम ऐसा लग रहा था कि जैसे अपनी बुआ की चुचियों पर ही उतार देना चाहता हो,,, वह बड़ी बेरहमी के साथ अपनी बुआ की चूचियों को मसलते हुए आनंद ले रहा था,,,,,

आहहहहह,,,,सईईईईईईईईई,,,,ऊमममममममम,,,राजु,,,,,आहहहहहह,,, दांत से नहीं,,,,, दर्द होता है,,,,,आहहहहहह फिर से काटा,,,,,

क्या करू बुआ तुम्हारी चुचियों के साथ खेलने में बहुत मजा आ रहा है,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह वापस उसे अपने मुंह में भर लिया,,,, तो फिर से चूसना शुरू कर दिया गुलाबी इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि खड़े-खड़े ही उसकी बुर से पानी नीचे जमीन पर चु रहा था,,, बार-बार उसकी बुर की कटोरी पानी से डुब जा रही थी जो कि उसकी पत्नी दरार से बाहर निकल कर जमीन को गिला कर रही थी,,,,, राजू के दोनों हाथ गुलाबी की चूचियों पर व्यस्त थे और गुलाबी अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर हल्के हल्के दबा रही थी जिस तरह के दर्द का अनुभव गुलाबी अपनी चुचियों पर करके मस्त हो रही थी उसी तरह के दर्द का अनुभव राजू अपने लंड पर करके मस्त हुआ जा रहा था दोनों किसी भी तरह से कम नहीं थे दोनों एक दूसरे के अंगों से बराबर मजा ले रहे थे,,,,,पल-पल दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो चुका था,,,,,

हरिया और मधु को तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि उनके पीठ पीछे उनके बगल वाले कमरे में उनका बेटा अपनी ही बुआ के खूबसूरत बदन से खेल रहा है और उसकी बुआ भी मजे ले कर अपने भतीजे को इस लीला में शामिल करके मदहोशी के सागर में डूबोए लेकर चली जा रही हैं,,,,,, बुआ और भतीजा के बीच का पवित्र रिश्ता तार-तार हो रहा था लेकिन इस रिश्ते के तार तार होने में ना तो बुआ को कोई अफसोस था और ना ही राजू को ऐतराज,,,, दोनों अपनी अपनी रजामंदी सहमति और जिस्म की जरूरत के हिसाब से आगे बढ़ रहे थे,,,,,

जिस तरह से गुलाबी की बुर पानी छोड़ रही थी गुलाबी का मन मचल रहा था उसे राजू के होठों पर लगाने के लिए वह चाहती थी कि राजू अपनी जीभ अंदर तक डालकर उसकी मलाई को चाटे,,, लेकिन वह कुछ बोलती से पहले ही राजू उसकी दोनों कबूतरों को छोड़कर खटिया के पाटी पर बैठ गया और अपने दोनों हथेली को उसकी गांड पर पीछे की तरफ रखकर उसे जोर से दबाते हुए उसकी बुर को अपने होठों से लगा दिया यह अंदाज राजू का इतना कामरूप था कि इसकी मादकता में गुलाबी अपने आप को संभाल नहीं पाई और राजू का होठ बुर पर लगते ही भला भला कर वह झढ़ने लगी,,,,, यह एहसास गुलाबी के लिए बहुत ही खास था उसे अंदाजा नहीं था कि वह पल भर में ही झड़ जाएगी,

राजू की कामुक हरकत उसे पूरी तरह से मदहोश कर गई थी,,, गुलाबी की गुलाबी बुर की पतली दरार में से मदनरस का सैलाब बह रहा था,,, लेकिन राजू अपने होठों को पीछे नहीं हटाया था वह कार्यरत होते हुए अपनी जीभ को उसके गुलाबी जीभ के अंदर डाल कर चाटना शुरू कर दिया,,,, यह कार्य उसने अपने ही पिता जी से सीखा था उसके पिताजी भी इसी तरह से खटिया के पाटी पर बैठकर उसकी मां की बुर चाट रहे थे,,,। और इसी क्रिया को वह अपनी बुआ गुलाबी के साथ दोहरा रहा था,,,, पल भर में भी गुलाबी दोनों से गर्म सिसकारी की आवाज फुटने लगी लेकिन गुलाबी मधु की तरह बे परवाह नहीं थी वह सतरकर थी वह जानती थी कि अगर वह जोर से आवाज करेगी तो बगल वाले कमरे में उसकी आवाज सुनाई देगी और उसके भैया और भाभी इस तरह की आवाज से भलीभांति परिचित है और वह नहीं चाहती थी कि इस तरह की आवाज इन दोनों के कानों में पड़े इसलिए वह अपनी उत्तेजना के शोर को दबाने की पूरी कोशिश कर रही थी,,,, लगभग लगभग कामयाब भी होती नजर आ रही थी वह अपनी उत्तेजना को दबाने के लिए राजू के सर पर दोनों हाथ रख कर उसके बालों को अपनी मुट्ठी में भिंचते हुए जोर-जोर से उसकी होंठों पर अपनी बुर को रगड़ रही थी,,,और राजू भी पागलों की तरह जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ अंदर डालकर उसकी मनाई को चाट रहा था कसैला स्वाद भी उसे दशहरी आम के रस की तरह मधुर लग रहा था,,,।

ओहहहहह राजू मेरे राजा,,,,सईईईईईईई,,,,आहहहहहह,,,, बहुत मजा आ रहा है,,,,,ऊफफफ तेरी जीभ तो पूरा कमाल दिखा रही है,,,, तेरी जीभ में जादू है,,,आहहहहहहह,,, ऐसे ही जोर जोर से पूरा अंदर डाल कर चाट,,,,,,(गुलाबी गरम सिसकारी की आवाज के साथ ऐसा बोलते हैं अपनी मत मस्त गांड को अपनी कमर को गांड को घुमा रही थी और राजू उसके नितंबों की दोनों फांकों को जोर से अपनी दोनों मुट्ठी में दबाए हुए था,,, जोर मसलते हुए उसकी बुर चाटने का मजा ले रहा था,,,,, गुलाबी की हालत खराब होती जा रही थी,,,, जब-जब राजू पूरा जोर लगा कर अपनी जीभ को गुलाबी की गुलाबी बुर के अंदर उतारता तब तक गुलाबी का पूरा बदन कांप उठता था,,,,गुलाबी को भी करने लगा था कि उसकी ही तरह उसका भतीजा भी धीरे-धीरे सब कुछ सीख रहा है आज वह बड़े अच्छे से उसकी बुर की चटाई कर रहा था,,,, गुलाबी उन्माद भरी सांसे ले रही थी साथ ही उसकी छोटी-छोटी नारंगिया ऊपर नीचे हो रही थी जिसे वह खुद ही रह रह कर अपने हाथ से दबा देती थी,,,, गुलाबी अपने बदन में अतिथि को तहसीना कंट्रोल कर रही थी क्योंकि राजू की हरकत की वजह से उसकी दोनों टांगों के बीच बेहद कंपन हो रही थी उस ऐसा लग रहा था कि वह कभी भी गिर जाएगी,,, वह तो अच्छा था कि राजू ने पूरी ताकत के साथ उसे अपनी हथेली से जकड़ रखा था उसकी नरम नरम गांड से खेलते हुए राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,, राजू का लंड उबाल मार रहा था

गुलाबी की हथेली की गर्माहट पाकर वह और ज्यादा गर्म हुआ जा रहा था,,,,।

आहहहहह राजु,,,, मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा मेरी बुर में खुजली हो रही है,,,,(वह इतना कह ही रही थी कि राजू अपनी बीच वाली उंगली धीरे से उसकी बुर के अंदर प्रवेश करा दिया जिसकी वजह से गुलाबी के सब्र का बांध अब टूटने लगा,,,, राजू को तो उसकी बुर चाटने का बहुत मजा आ रहा था ,,,उसका भी मन अपने लंड को उसकी बुर में डालने को कर रहा था लेकिन इस समय उसका इरादा कुछ और था वह गुलाबी कि बुर में पूरी तरह से जुट चुका था,,,,,) आहहहहह राजू तुम्हारे बदन में आग लगा रखा है उंगली नहीं बेटा अपना लंड डाल मुझे तेरे मोटे लंड की जरूरत है उंगली से मेरी प्यास बुझने वाली नहीं है,,,, डाल दें,,, अपने लंड को मेरी बुर में ओहहहहह मेरे राजा क्यों तड़पा रहा है मुझे,,,,आहहहहहहह,,,,(उसके कहते-कहते राजू बार-बार अपनी जीभ को उसकी दिल की गहराई में डालकर तोहार निकाल ले रहा था जिसकी वजह से उसके बदन की आग और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,, अब उससे सहन कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था,,,, वह राजू के कंधों को पकड़कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,,।

राजू का मन बिल्कुल भी नहीं था वह तो ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी आंखों के सामने खीर से भरी हुई कटोरी रखी हुई है,,, और वह उसे झपट जाना चाहता है इसलिए वह बुर रुपी खीर की कटोरी छोड़ना नहीं चाहता था,,,, फिर भी अपनी बुआ की जरूरत का सम्मान करते हुए उसे उठना ही पड़ा,,, दोनों के तन बदन में आग लगी हुई थी और यह आग दोनों के अंगों से निकले मदन रस से ही बुझने वाली थी,,,, इसलिए राजू वासना और खुमारी भरी नजरों से अपनी बुआ के खूबसूरत चेहरे को देखने लगा गुलाबी भी उसकी आंखों में डूबने लगी,,, राजू अपने प्यासे होठों को आगे बढ़ाने लगा गुलाबी भी अपने तपते हुए होठों को आगे कर दी और देखते ही देखते दोनों एक दूसरे को प्रधान चुंबन करने लगे और राजू अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर उसकी गांड को जोर से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया गांड दबाने का सुख उसे पूरी तरह से सम्मोहित किया जा रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजना के साथ में डूबते तो नहीं जा रहा था और उसकी यादों को और ज्यादा बढ़ाते हुए गुलाबी अपना एक हाथ नीचे की तरफ लाकरउसके लंड को पकड़ लिया और उसके सुपाड़े को अपनी गुलाबी बुर की दरार में रगड़ने लगी यह हरकत राजू की तन बदन में आग लगाने लगा,,,, गुलाबी की प्यास और ज्यादा बढ़ने लगी थी वह बार-बार खड़े-खड़े ही राजू के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर ही अपनी बुर में डालने की कोशिश कर रही थी लेकिन इस तरह से खड़े खड़े शायद अंदर घुस पाना संभव नहीं था,,,, और राजू अपनी बुआ को इस तरह से तड़पता हुआ नहीं देख सकता था,,,,।

राजू की भुजाएं बलिष्ठ थी उसका बदन ताकत से भरा हुआ था इसलिए वह अपनी बुआ की गांड को जोर-जोर से दबाते हुए उसे अपनी गोद में उठा लिया उसका पैजामा अभी भी घुटनों में टिका हुआ था इसलिए वह पैर के ही सहारे से उसे बाहर निकाल कर फेंक दिया,,,, अब दोनों कमरे में एकदम नंगे थे गुलाबी के बदन पर कपड़े का रेशा भी नहीं था और यही हाल राजू का भी था,,, संभोग के खेल को खेलने के लिए शायद यही अवस्था ठीक रहती है,,,, गुलाबी एकदम हैरान थी क्योंकि उसका भतीजा उसे गोद में उठा लिया था उसकी ताकत को उसकी बलिष्ठ भुजाओं को देखकर वह पूरी तरह से अपने भतीजे पर मोहित हो गई अपनी जवानी को उसके पैरों में समर्पित कर दी थी जिस का सही उपयोग करते हुए राजु गोद में उठाए हुए ही,,,, एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को थाम कर अपने लंड कै सुपाडे को गुलाबी छेद में डालने की कोशिश करने लगा और जल्द ही उसे गुलाबी का गुलाबी छेद मिल गया जो की पूरी तरह से गिला था,,,, अब देर करना नामुमकिन था राजू के बदन में उत्तेजना बढ़ती जा रही थी पर वह धीरे-धीरे अपने लंड को अपनी ‌बुआ की बुर में डालना शुरू कर दिया,,,।

राजु अपनी बुआ को गोद में उठा कर चुदाई करता हुआ

गुलाबी को तो यकीन नहीं हो रहा था जिस आसान में वह उसकी चुदाई करने जा रहा था इस आसन के बारे में वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी,,,,,, और ना ही कभी अपने भैया भाभी को इस अवस्था में देखी थी,,,इसलिए यह आसन उसके समझ के बिल्कुल पर ही था वैसे तो यह आसन के बारे में राजू भी नहीं जानता था लेकिन उत्तेजना के मारे उसे रहा नहीं जा रहा था और अपनी बुआ को गोद में उठा दिया था तब अचानक ही उसके मन में ख्याल आया था कि इस तरह से भी उसका लंड उसकी बुर में डाला जा सकता है,,,,और वहां प्रयास करना शुरू कर दिया था जिसमें उसे कामयाबी प्राप्त हो चुकी थी देखते ही देखते अपनी बुआ को अपनी भुजाओं के बल पर गोद में उठाए हुए वह अपने संपूर्ण लंड को अपनी बुआ की बुर की गहराई में डाल चुका था,,,,, गुलाबी की उत्तेजना के मारे सांस अटक रही थी उसके लिए यह सब आश्चर्यजनक था वह तो खटिया पर लेट कर चुदवाना चाहती थी लेकिन इस समय वह अपने भतीजे के गोद में थी जो कि बिना परेशानी के बड़े आराम से उसे अपनी गोद में उठाए हुए था और धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,,।

आहहहहह ,,,,, राजू मुझे गिरा मत देना,,,, तु जिस तरह से मुझे चोद रहा है मुझे डर लग रहा है,,,

चिंता मत करो बुआ,,,मैं तुम्हें गिरने नहीं दूंगा लेकिन देखो कितना मजा आ रहा है,,,,आहहहहह आहहहहह दुआ,,,(राजू होने वाली अपनी कमर आगे पीछे करते हुए सिसकारी लेते हुए बोल रहा था,,,)

मुझे भी बहुत मजा आ रहा है बस थोड़ा डर लग रहा है,,,,,

डर लग रहा है,,,,,बुआ,,,,(इतना कहने के साथ ही अपने होठों को उसके लाल-लाल होठों पर रखकर चूसना शुरू कर दिया ऐसा करके,,, वह अपनी बुआ के मुंह को और उसके प्यार को खत्म करना चाहता था और उसकी बुआ को भी मजा आने लगा है गुलाबी अपनी बुर की गहराई में अपने भतीजे के लंड को महसूस कर रही थी यह आसन में उसे ज्यादा ही मजा आ रहा था,,,,, राजू गुलाबी को झूला झूलाते हुए चोद रहा था,,,,।

अद्भुत संभोग की कामलीला दोनों बुआ और भतीजे खेल रहे थे दोनों को अत्यधिक मजा आ रहा था दोनों ने कभी सपने में नहीं सोचा था कि उन दोनों के बीच इस तरह से शारीरिक संबंध बन जाएगा जिसका आनंद लूटते हुए वह दुनिया को भूल जाएंगे,,,, राजू की रफ्तार बढ़ने लगी थी उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही थी भले ही उसकी बुआ मोटी नहीं थी लेकिन फिर भी वजनदार तो थी ही लेकिन बड़े आराम से वहां उसे अपनी भुजाओं के सहारे उठाए हुए अपनी कमर हिला रहा था,,,, गुलाबी राजू के दम को मान गई थी वह अपने भतीजे के आगे घुटने टेक दी थी,,, फच फच की आवाज से कमरा गूंजने लगा था गुलाबी को इस बात का डर था कि कहीं हम आज बगल वाले कमरे में ना पहुंच जाए,,,,।

दोनों के बीच अभी भी प्रगाढ चुंबन चालू था जिसका दोनों ही आनंद ले रहे थे,,,, गुलाबी की दोनों नारंगीया राजू की छाती से दबी जा रही थी,,,, जिससे राजू का मजा और बढ़ जा रहा था,,,,,राजू अपनी बुआ को और तेजी से चोदना चाह रहा था लेकिन इस आसन में संभव नहीं हो पा रहा था वह कितना भी कोशिश करता था 15,,,,,,,,20 धक्कों के बाद शांत हो जाता था,,,,, वह समझ गया था कि जबरदस्त चुदाई करने के लिए उसे उसकी बुआ को खटिया पर ले जाना ही होगा,,,,लेकिन वहां अपनी दूंगा को अपने से अलग नहीं होने देना चाहता था क्योंकि उसका लैंड बार-बार उसकी बुर की गहराई नाप रहा था बार-बार उसकी बुर की गहराई को चूम ले रहा था उसके बच्चेदानी का चुंबन पाते ही उसकी ताकत और ज्यादा बढ़ जा रही थी इसलिए वह अपनी गोदी में उठा धीरे-धीरे खटीए तरफ बढ़ने लगा,,,

अब तो गुलाबी और ज्यादा हैरान होने लगी क्योंकि वह उसे गोद में उठाए हुए चल रहा था और बड़े आराम से चल रहा था जरा सा भी झुक नहीं रहा था बल्कि उसे खुद डर लग रहा था,,,, लेकिन जवानी के जोश में बहुत ताकत होती है यही राजू को जब उसकी मां आलू से भरे हुए बोरे उठा कर घर ले जाने के लिए कहती थी तो उसे उठता नहीं था,,, और उसे हमेशा पूरा उठाने के लिए अपनी बुआ का सहारा लेना पड़ता था लेकिन आज बिना सहारे के खुद ही वह अपनी बुआ को उठाकर उसकी चुदाई कर रहा था,,,।

देखते ही देखते वह अपनी बुआ की बुर में लंड डाले हुए ही उसे खटिया पर लेटा दिया,,,और उसकी दोनों टांगों को थोड़ा सा खिला कर अपने लिए और अच्छे से जगह बनाकर अपनी कमर लेना शुरू कर दिया देखते ही देखते उसकी कमर की रफ्तार बढ़ने लगी उसका मोटा तगड़ा लंड गुलाबी कि बुर,,, में बड़ी तेजी से अंदर बाहर होने लगा ,,, राजू ताबड़तोड़ अपनी बुआ की चुदाई करना शुरू कर दिया गुलाबी की बुर से फच फच की आवाज के साथ खटिया की चरर मरर कर रही थी,,,,, जिसकी आवाज को सुनकर गुलाबी बोली,,,,।

ओहहहहहह,,,, तेरे धक्कों से कहीं खटिया टूट न जाए थोड़ा आराम से धक्का मार,,,,

नहीं पूरा धीरे-धीरे चोदने का मजा नहीं आता मजा तो जोर जोर से चोदने में आता है और मुझे भी पूरा विश्वास है कि तुम्हें भी जोर-जोर से चुदवाने में हीं मजा आता, है,,,।

हारे तो ठीक कह रहा है जब-जब तू तेजी से अपने लंड को अंदर बाहर करते हैं मुझे कुछ कुछ होने लगता है बहुत मजा आता है,,,।

फिर क्या हुआ टूट जाने दो खटिया,,,, लेकिन यह मजा कम नहीं होना चाहिए,,,,(इतना कहने के साथ ही राजूगुलाबी की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और अपनी कमर को जोर-जोर से ही लाना शुरू कर दिया,,,, गुलाबी पूरी तरह से ध्वस्त हुए जा रही थी,,,गुलाबी अपने भतीजे के अद्भुत पर आकर मैं को देख कर हैरान हो जा रही थी वह पूरी तरह से उसके आकर्षक में खुद ही चली जा रही थी उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि कोई इतनी देर भी चुराई कर सकता है क्योंकि वह अपने भैया को अपनी भाभी की चुदाई करते हुए रोज देखा करती थी लेकिन इतनी देर तक उसका भाई टिकता नहीं था लेकिन राजु बिना थके बिना हारे ढका हुआ था,,,, इस अद्भुत चुदाई से वह खुद दो बार झड़ चुकी थी,,,,

फच फच की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था,,,, अंधेरी रात में कमरे के अंदर लालटेन अपनी रोशनी बिखेरे हुए था,,,, और उसकी पीली रोशनी में गुलाबी अपने भतीजे के साथ काम क्रीड़ा कर रही थी,,,।

ओहहहह ,,, बुआ तुम्हारी बुर कितनी गरम है मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,

मुझे भी बहुत मजा आ रहा है,,,, और जोर से धक्के लगा चोद मुझे,,, फाड़ दे मेरी बुर,,, आहहहहह राजू मेरे राजा,,,,(इतना कहने के साथ गुलाबी अपनी दोनों हथेली को राजू की गांड पर रखकर उसे जोर जोर से दबाने लगी वह काफी उत्तेजित थी और उसकी उत्तेजना को देखकर राजू की भी उत्तेजना बढ़ने लगी थी और वह जोर जोर से धक्के लगाते हुए बोला,,,)

और बुआ मेरी रानी आज तो तुम्हें मस्त कर दूंगा आज तुम्हारी जुदाई करके तुम्हें जन्नत का मज़ा दूंगा आज देखना कितना मजा आता है तुम्हें,,,,ओहहहह बुआ,,,।

(फिर क्या था अब राजीव को रोक पाना किसी के बस में नहीं था राजू बड़ी जोर से बड़ी तेजी से अपनी कमर हिला रहा था उसका लंड बार-बार उसके बच्चेदानी से टकरा जा रहा था जिससे उसका मजा दुगुना होता जा रहा था,,,,, देखते ही देखते कुछ देर बाद दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगे दोनों अपने अपने मंजिल के करीब थे दोनों अपनी मंजिल पर पहुंचने वाली थी चरम सुख की तरफ बढ़ते हुए दोनों एक दूसरे को संपूर्ण सुख देने की भरपूर कोशिश कर रहे थे राजू बार-बार तभी उसके होंठों को चूसना तो कभी उसकी दोनों चूचियों को दबाने लगता है तो कभी दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पीना शुरु कर देता राजू किसी भी तरह से गुलाबी को छोड़ नहीं रहा था वह हर तरह से एक गुलाबी को मजा देना चाहता था और खुद भी आनंद के सागर में डूब ना चाहता,,, था,,, गुलाबी को राजू की चुदाई अविश्वसनीय लग रही थी किसी भी तरह से राजू हार मानने वाला नहीं था,,,,,,गुलाबी को भी ऐसे ही योद्धा की जरूरत थी जो किसी के भी सामने हार ना माने बस मैदान में डटा रहे,,,,,

और देखते ही देखते दोनों का बदन अकड़ ने लगा,,,राजू तुरंत अपना दोनों हाथ उसके पीछे ले जाकर उसे कसके अपनी बाहों में भर लिया,,,और जोर जोर से धक्के लगाने लगा और अगले ही पल ,,,गुलाबी के नाजुक अंग से और राज्यों के कड़क अंग्रेजों की एक दूसरे में समाने की पूरी कोशिश कर रहे थे दोनों से गर्म लावा फूट पड़ा दोनों चढ़ चुके थे राजू के लंड से निकली पिचकारी गुलाबी के बच्चेदानी को पूरी तरह से भिगो रही थी जिसका अनुभव उसे किसी और ही दुनिया में लिए जा रहा था,,,

दोनों एक दूसरे की बाहों में हांफने लगे,,,,,राजू अपनी बुआ को कुछ करते हुए उसके गाल पर उसके माथे पर उसके होठों पर चुंबन करने लगा और गुलाबी उसे सांत्वना देते हुए उसकी ताकत को सम्मान देते हुए उसकी पीठ को सहला रही थी,,,, दोनों गहरी गहरी सांसे ले रहे थे,,,,
 
दोनों एक दूसरे की बाहों में हांफने लगे,,,,,राजू अपनी बुआ को कुछ करते हुए उसके गाल पर उसके माथे पर उसके होठों पर चुंबन करने लगा और गुलाबी उसे सांत्वना देते हुए उसकी ताकत को सम्मान देते हुए उसकी पीठ को सहला रही थी,,,, दोनों गहरी गहरी सांसे ले रहे थे,,,,

दोनों की यह संभोग लीला अद्भुत थी अविश्वसनीय अतुलनीय,,, जिसकी तुलना कर पाना शायद नामुमकिन था,,,, दोनों तृप्त होकर एक दूसरे की बाहों में गहरी नींद में सो गए सुबह जब नींद खुली तो राजू का लंड,, गुलाबी की गांड के बीचो बीच फंसा हुआ था जिसमें सामान्य तौर पर सुबह के समय कड़क पन बहुत ज्यादा था गुलाबी अपनी आंखों को मलते हुए उठी तोअपने भतीजे के कड़क लंड को अपनी गांड के बीचो बीच महसूस करके एक बार फिर से उत्तेजित हो गई,,,, राजू की आंखों में अभी भी नींद छाई हुई थी,,,, वह ऊठने की कोशिश कर रहा था लेकिन नींद नहीं उसे अपनी आगोश में जकड़े हुई थी,,,, गुलाबी जानती थी कि अभी सुबह होने में कुछ समय बाकी है उसके भैया भाभी भी अभी सो रहे होंगे इसलिए वह इस मौके का फायदा उठाना चाहती थी और राजू को भी नजर आए उसे पीठ के बल कर दी और उसके खड़े लंड पर अपनी दोनों टांगों को उसके कमर के इर्द-गिर्द रखकर,,, अपना हाथ नीचे की तरफ ले गई औरउसके लंड को पकड़ कर उसके सुपाडे को अपनी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर टिका दी,,,,

एक बार फिर से गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो गई और वह धीरे-धीरे अपनी गांड का दबाव,,, राजु के लंड पर बढ़ाने लगी गुलाबी की बुर अभी भी पनीयाई हुई थी इसलिए राजू का लंड बड़े आराम से सरकता हुआ अंदर की तरफ जाने लगा,,, अभी तक राजू की नींद पूरी नहीं थी और देखते ही देखते गुलाबी उसके लंड पर बैठकर पूरी तरह से उसके लंड को अपनी बुर के छेद में छुपा ली,,,, गुलाबी को अपनी हरकत पर बेहद उत्तेजना का अनुभव हो रहा था सुबह होने वाली थी उसके भैया भाभी जगने वाले और ऐसे में वह बगल वाले कमरे में अपने भैया के बेटे के साथ रंगरेलियां मना रही थी उसके लंड पर बैठ कर उसकी चुदाई कर‌ रही थी देखते ही देखते गुलाबी राजू के लैंड पर उठक बैठक करने लगी उसे मजा आने लगा और जैसे ही वह आगे की तरफ झुक करअपने भतीजे के कंधों को पकड़ कर अपनी गांड को हिलाना शुरू की वैसे ही राजू की नींद उड़ गई और अपने ऊपर अपनी बुआ को सवार हुआ देखकर वह भी पूरी तरह से जोश में आ गया और अपने हाथ को आगे बढ़ा कर उसकी चूचियों को पकड़ लिया और जोर-जोर से लगाते हुए जितना हो सकता था नीचे से भी धक्के लगाने की कोशिश करने लगा उसकी बुआ जोर-जोर से उसके लंड पर उछालना शुरू कर दी एक बार फिर से दोनों के बीच अद्भुत संभोग देना शुरू हो गई थी राजू नीचे से तो गुलाबी ऊपर से पूरी तरह से छाई हुई थी,,,, देखते ही देखते एक बार फिर से दोनों चरम सुख को प्राप्त करते हुए झड़ गए,,,।

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गुलाबी के दिन गुलाबी और रात रंगीन होने लगी थी । वह कभी सपने में भी नहीं सोचते कि उसकी जिंदगी में इस तरह से बहार आएगी,,,,,,,रात को जिस तरह से राजू ने उस की चुदाई किया था वह उसे जिंदगी भर याद रहने वाला था उसकी बुर की अंदरूनी नसे अभी भी मीठा मीठा दर्द कर रही थी जिसकी वजह से वह काम करते समय थोड़ा सा लंगड़ा कर चल रही थी,,,,,,, गुलाबी को अपने भतीजे और उसके लंड पर गर्व महसूस हो रहा था क्योंकि आज तक वह अपने भैया और भाभी की चुदाई देखते आ रही थी लेकिन जिस तरह की चुदाई राजे ने इसकी किया था उस तरह से उसके भैया कभी भी उसकी भाभी की चुदाई नहीं करते थे भले ही उसकी भाभी संतुष्ट हो जाती थी लेकिन जिस तरह की संतुष्टि का अहसास राजू ने घंटों तक चुदाई करके उसे कराया था शायद उसे सुख से उसकी भाभी अभी भी वंचित थी,,,,

गुलाबी को राजू का लंड की रगड़ अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर साफ महसूस होती थी,,, उसके लंड की मोटाई का एहसास गुलाबी के साथ-साथ उसकी कोमल बुर को भी अच्छी तरह से हो गया,, था,,,। एक तरह से गुलाबी की बुर में राजू के लंड का सांचा बन गया था जो कि उसे बड़े आराम से अंदर बाहर कर लेती थी पहली बार जब गुलाबी ने अपने भतीजे के लैंड के दर्शन किए थे तब उसकी लंबाई और मोटाई को देखकर सिहर उठी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसकी गुलाबी गुलाबी छेद उसके लंड की मोटाई के मामले बहुत छोटा था,,,, खास करके उसके सुपाड़े के मुताबिक तो उसके गुलाबी बुर का छेद बिल्कुल भी नहीं था,,, जिसके बारे में सोच सोच कर ही कुल्हाड़ी घबरा जाती थी हालांकि वह कभी नहीं सोची थी कि वह कभी अपने भतीजे से शुरू आएगी लेकिन फिर भी उसके लंड के सुपाड़े की मोटाई को लेकर उसके मन में हमेशा से आशंका बनी रहती थी लेकिन सारी शंकाओं पर पुणविराम लग चुका था,,,, क्योंकि वह अब बड़े आराम से अपने भतीजे के वही बमपिलाट लंड को अपनी बुर के अंदर गहराई तक ले लेती थी,,,,।

गुलाबी का मादक अंदाज राजू के साथ

रात भर की जबरदस्त घमासान चुदाई के बाद संभोग के प्रकरण के शुरुआती दौर से गुजर रहीगुलाबी अपने भतीजे के लिए उनके जबरजस्त प्रहार को तो जेल गई थी लेकिन उसकी चाल में बदलाव आ गया था वह हल्के हल्के लंगड़ा कर चल रही थी झाड़ू लगाते समय,,,, वह धीरे-धीरे अपना पांव रख रही थी यह देख कर उसकी भाभी बोली,,,।

क्या हुआ गुलाबी रानी आज तुम्हारी चाल बदली बदली क्यों लग रही है,,,,(मधु अपनी कमर पर हाथ रखते हुए बोली मधु का यह रूप औपचारिक रूप से एकदम सरल था लेकिन कामुकता से भरा हुआ था कि ऐसा करने पर उसकी कमर की गहरी लकीर और ज्यादा गहरा जाती थी,,,, उसकी उन्नति चुचीया किसी पहाड़ी की चोटी की तरह आसमान को छूने के लिए लालायित नजर आती थी,,,,अपनी भाभी का यह सवाल सुनकर पहले तो गुलाबी को कुछ समझ में नहीं आया तो वह बोली,,,)

मेरी चाल को क्या हुआ भाभी मेरी तो चाल वैसे ही है जैसे पहले थी,,,,,(झाड़ू लगाते लगाते खड़ी होकर बोली)

लंगड़ा कर चल रही हो इसलिए कह रही हूं,,,,इस तरह से लड़की का तो तभी चलती है जब शादी के बाद उनकी सुहागरात होती है सुहागरात के दूसरे दिन से इसी तरह से चलने लगती हैं,,,,

(गुलाबी को अपनी भाभी की बात समझ में आते ही वह एकदम शर्म से पानी पानी होने लगी क्योंकि जिस राखी उसकी भाभी बात कर रही थी एक तरह से राज्यों के साथ उसकी सुहागरात ही थी क्योंकि रात भर राजू ने जबरदस्ती चुदाई किया था मानो कि जैसे वह उसकी बुआ ना हो करके उसकी बीवी हो,,,, गुलाबी को समझ नहीं आ रहा था कि अपनी भाभी के सवाल का क्या जवाब दें,,,, फिर भी अनजान बनते हुए बोली,,,,)

क्या भाभी सुहागरात के दूसरे दिन लड़किया इसी तरह से चलती है,,,,।

हां जैसा कि तू चल रही है,,,,

मैं माफी चाहती हूं भाभी लेकिन तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं अभी पूरी कुंवारी हूं मेरी शादी नहीं हुई है,,,,।

मैं जानती हूं मेरी गुलाबी रानी लेकिन जिस तरह से तुम लंगड़ा कर चल रही हो मुझे तो ऐसा ही लग रहा है,,,,,,

क्या भाभी सुहागरात से और लंगड़ा का चलने के बीच क्या रिश्ता है,,,(गुलाबी सब कुछ जानती थी फिर भी अनजान बनते हुए बोली,,,क्योंकि वह ऐसा कुछ भी नहीं बोलना चाहती थी जिससे उसकी भाभी को थोड़ा भी शक हो क्योंकि एक जवान लड़का उसके साथ सोता था,,,,)

मेरी गुलाबी रानी,,,, सुहागरात वाली रात को लड़की अपने आदमी से चुदवाती है लड़के का मोटा लंड उसकी बुर में जाकर खलबली मचा देता है,,,, और इसी वजह से पहली बार की चुदाई के बाद लड़की लगड़ा कर चलती है,,,,।

ओहहह यह बात है,,,, लेकिन मेरे मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,(गुलाबी इतराते हुए बोली और वापस झाड़ू लगाने लगी क्योंकि वह अपनी भाभी से नजर मिलाने में शर्म आ रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं जो बात नहीं उसकी जुबान पर लाने से वह डर रही है कि उसकी आंखें बयां ना कर दे,,,,,,,,,)

क्यों तेरे पास बुर नहीं है क्या,,,, खूबसूरत है जवानी किसी का भी दिल मचल जाएगा,,,,

क्या भाभी आप भी कैसी बातें करती हो,,,, मै कभी सोच भी नहीं सकती कि तुम इतनी गंदी-गंदी बातें करती हो,,,,,,

शर्मा रही है मेरी गुलाबी रानी,,,,, लंगड़ा कर चल रही है इसलिए बोल रही हूं,,,,, वैसे भी तु एक जवान लड़के के साथ सोती है,,,,,,, कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम दोनों के बीच

चुदाई का खेल शुरू हो गया हो,,,,(मधु हंसते हुए बोली और गुलाबी की तो हालत खराब हो गई क्योंकि जिस बात का अंदाजा जो कि वह मजाक में ही लगा रही थी लेकिन फिर भी यह मजाक गुलाबी के लिए जानलेवा था उसे कभी भी इस बात की उम्मीद नहीं थी किसकी भाभी राजू को लेकर उसके साथ इस तरह की मजाक करेगी और यह मजाक उसके साथ दूसरी बार हो चुकी थी,,,किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी भाभी के इस सवाल का क्या जवाब दें क्योंकि जिस तरह का अंदाजा लगा रही थी वह सच ही था,,,,,गुलाबी को अपने आप पर गुस्सा आने लगा था क्योंकि वह लग रहा था चल रही थी लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं दी थी,,,, फिर भी जानबूझकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए वह अपनी भाभी से बोली,,,)

क्या भाभी फिर तुम शुरु पड़ गई अपने ही बेटे कोलगाकर इस तरह का मजाक किया अच्छा लगता है तुम क्या राजू को नहीं जानती कितना सीधा साधा है और वह मेरा भतीजा है इस तरह का मजाक के समय भी थोड़ा सोच लिया करिए,,,, ऐसी बातें करके तुम,, गुस्सा दिलाती हो,,, अगर ऐसी बात है तो आज रात से मैं अकेले ही सोऊंगी उसे अपने पास सुला लेना,,,,

(गुलाबी की बात सुनते ही मधु एक दम से हड़बड़ा गई और झट से बोली,,,)

अरे मेरी गुलाबो रानी नाराज हो गई अरे मैं तो मजाक कर रही थी भला मैं अपने ही बेटे को लगाकर इस तरह की मजाक क्यों करूंगी ,,, और वैसे भी मैं कहां किसी और से मजाक कर पाती हूं,,,, एक तू ही तो है ,,,,, मुझे नहीं मालूम था कि तुझे बुरा लग जाएगा वह तो तू लंगड़ा कर चल रही थी इसलिए तुझसे मजाक की,,,,(मधु अपनी कही बात को संभालते हुए बोली क्योंकि वह जानती थी अगर खुदा की गुस्सा जाएगी तो राजु को उसके कमरे में सोने के लिए भेज देगी और ऐसा वह कभी नहीं चाहती थी क्योंकि रात को अपने पति का लंड अपनी बुर में लिए बिना उसे भी नींद नहीं आती थी,,,, ,, और अगर राजू उसके कमरे में आ गया तो उसकी यह इच्छा और उसकी प्यास अधूरी रह जाएगी और ऐसा कभी भी नहीं चाहती थी इसीलिए अपनी बात को संभाल ले गई थी अपनी भाभी की बातें सुनकर गुलाबी को भी थोड़ी राहत हुई और वह अपने लंगडाने का कारण बताते हुए बोली,,,।)
 
कल रात को जब मैं बाहर गई थी,,, तब मेरे पैर में कांटा लग गया था इसीलिए चलने में दिक्कत हो रही है और तुम हो कि बात का बतंगड़ बना रही हो,,,।

अरे यार मैं तो मजाक कर रही थी और वैसे भी रात को बाहर जाने की क्या जरूरत है,,,

पेशाब करने गई थी घूमने नहीं गई थी,,,

अच्छा ठीक है जल्दी से झाडू लगा दे अभी और भी काम बाकी है,,,,।(इतना कहकर मधुर रसोई में चली गई और गुलाबी राहत की सांस लेते में बाकी का काम करने लगी रोटी पकाते समय मधु के मन में एक ही सवाल उठा था कि जिस तरह से उसकी ननद गुलाबी बता रही थी कि राजू कितना मासूम है,,, सीधा-साधा है तो कुएं में से बाल्टी खींचते समय जिस तरह की हरकत उसने किया था,,, वह उसने क्यों किया और उस समय उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था,,,, मधु एकदम खेली खाली औरत थी इसलिए उस समय अपने बेटे के खड़े लंड कि सिहरन को अच्छी तरह से पहचान लेती हो और समझ गई थी कि उसके पजामे के अंदर एक संपूर्ण मर्द का औजार,,,, उस दिन वाली घटना को याद करके मधु को ना जाने क्यों अपनी दोनों टांगों के बीच सिहरन सी महसूस होने लगी और पल भर में ही उसकी बुर में पानी भर गया,,,,जानबूझकर अपना ध्यान खाना बनाने में लगाने लगी ताकि उस दिन की बात उसे और याद ना आए ,,,,क्योंकि कुछ भी हो वह उसका बेटा था और ना जाने क्यों उसके मन में उसके लंड को लेकर ना जाने कैसे-कैसे ख्याल आने लगते थे,,,,,,,, और मधु का मन बहकने लगा था इसीलिए अपने मन को दूसरी तरफ केंद्रित करने लगी,,,।

राजु रात भर चुदाई करती हुई और सुबह में खुद गुलाबी ने जिस तरह से गुलाबी बुर का मजा उसे दी उस अनुभव से राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था,,, और वह सुबह-सुबह खेतों की तरफ जा रहा था,,,, कि उसे कमला चाची नजर आ गई वह अपने घर के बाहर पेड़ पकड़ कर खड़ी होकर नीम का दातुन कर रही थी और उसकी पीठ राजू की तरफ थी जैसे-जैसे दातुन करते समय अपना हाथ हटा रही थी उसके हाथ के साथ-साथ उसकी भारी-भरकम गांड भी हील रही थी जिसे देखकर राजू का मन फिर से डोलने लगा,,, कमला चाची अपनी मस्ती में दातुन कर रही थी इस बात का ज्ञात भी होता कि उसकी गांड भी बड़े जोर जोर से हो रही है तो वह भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था,,, लेकिन उसकी बीवी कांड तो कर ना जाने कितनों का लैंड खड़ा हो जाता था भले ही कमला चाची उम्र के इस पड़ाव पर क्यों ना हो लेकिन फिर भी उनकी जवानी इस उम्र में भी बरकरार थी बड़ी बड़ी गांड के साथ-साथ खरबूजे जैसी चूचियां उसकी जवानी में चार चांद लगा रहे थे,,,,,,।

और चाची नमस्कार,,,,

(राजू की आवाज कानों में पड़ते ही कमला चाची की बुर काम रस बहाने लगीतुरंत पलट कर पीछे की तरफ देखिए तो राजू खड़ा था राजू को देखते ही उसे खेत वाला दृश्य याद आने लगा जिस तरह से हो जोर-जोर से भी मर के धक्के लगा रहा था उस पल को याद करके कमला चाची की बुर आज भी काम रस बहा देती थी,,,,)

अरे राजु तु,,,उस दिन के बाद से तो यहां आना ही बंद कर दिया मन भर गया क्या तेरा,,,

चाची मन भर गया होता तो इधर आता क्या,,,,(पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को सहलाते हुए राजु बोला,,, राजू की इस हरकत पर कमला चाची पूरी तरह से फिदा हो गई,,, वह समझ गई थी कि उसके साथ चुदाई करके राजू खुल गया है,,,, उसका मन गया कि नहीं लगा था वह अपनी भारी-भरकम गांव खटिया पर रखकर बैठ गई और लोटे के पानी से मुंह धो कर इधर-उधर देखने लगी चारों तरफ देखने के बाद वह बोली,,,)

राजू बहु गई है घास काटने घर में कोई नहीं है,,,,(यह कहते हुए कमला चाची के चेहरे पर चमक आ गई थी और राजू भी खुश हो गया था,,, इसलिए वो खुश होता हुआ बोला,,,)

तो चाची इरादा क्या है,,,!

चल अंदर,,,,,(घर के दरवाजे की तरफ आंख से इशारा करते हुए वह बोली,,,)

भाभी आ गई तो

वह भी नहीं आएगी उसे समय लग जाएगा तब तक तो अपना काम हो जाएगा,,,,

(कमला चाची की कामुकता और उसकी व्याकुलता को इस उम्र में भी देखकर राजू का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था उसे लगने लगा था कि औरत हो या मर्द उनकी जिंदगी में चुदाई का एक किरदार है जिसे वह अपने तरीके से जीना चाहते हैं,,,)

चलो फिर,,,,(राजू आनंदित होता हुआ बोला,,, कमला चाची खटिए पर से उठी और अंदर कमरे की तरफ चल दी पीछे-पीछे राजू भी घर के अंदर प्रवेश कर गया,,,, कमला चाची आंगन में नहीं बल्कि सीधे अपने कमरे में घुस गई और पीछे पीछे राजू भी चला गया अपने दो बाकी रात भर चुदाई करने के बाद भी उसका जोश बरकरार था उसकी उत्तेजना बरकरार थी उसके में काम की भावना बहुत ही ज्यादा तीव्र थी,,,,,इसलिए कमरे में प्रवेश करते ही वह कमला चाची को पीछे से पकड़ लिया उसकी बड़ी बड़ी गांड पर पजामे के ऊपर से ही धक्के लगाने लगा,,,,)

आहहहहह,,, एक ही बार में बहुत कुछ सीख गया है तू,,,,

हां चाची तुमसे मैंने बहुत कुछ सीख गया हूं,,,(इतना कहने के साथ ही वह कमला चाची की गर्दन पर चुंबनो का बौछार कर दिया,,,, कमला चाची के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, कमला चाची को लग रहा था कि यह सब कुछ नहीं सीखा है जबकि वह अपनी बुआ से सब कुछ सीख चुका था कमला चाची से केवल बुर में लंड डालना ही सीखा था बाकी सब संभोग कि क्रीडा को वह अपनी बुआ से सीखा था,,,। कमला चाची कमरे में आते समय मन में यही सोच कर आई थी कि सिर्फ अपनी सारी को कमर तक उठा देगी और चुदवा लेगी,,, लेकिन राजू के मन में कुछ और चल रहा था जो कुछ भी वह अपनी बुआ से सीखा था वह सब कुछ कमला चाची पर आजमाना चाहता था इसलिए वह पीछे से ही अपने हाथ को आगे बढ़ाकर ब्लाउज के ऊपर से ही कमला चाची के बड़े-बड़े खरबूजे को हाथ में लेकर दबाना शुरू कर दिया था,,,,तो इतनी जोर जोर से दबा रहा था कि कमला चाची के मुंह से कराहने के साथ-साथ गरम सिसकारी की आवाज फूट पड़ रही थी,,,, लेकिन आज राजू किसी भी हाल में कमला चाची को छोड़ना नहीं चाहता था,,,, कमला चाची कुछ बोल पाती इससे पहले ही वह कमला चाची के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा,,,।

अरे मत खोल राजू अपने पास समय नहीं है तेरी भाभी किसी भी वक्त आ जाएगी,,,,(यह कहते हुए कमला चाची उसे रोकने की कोशिश करती रही लेकिन रांची नहीं माना और अपनी ताकत दिखाते हुए कमला चाची के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया और ब्लाउज के बटन खुले थे कमला चाची की चूचियां एकदम नंगी हो गई जिसे वह अपने दोनों हाथ में लेकर दबाना शुरू कर दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके हाथों में बाजार का सबसे कीमती आम आदमी आ गया और वह किसी भी कीमत में उसे छोड़ना नहीं चाहता है ,,,,जोर जोर से दबाते हुए और कमला चाची की चूचियों से सारा रस निचोड़ लेना चाहता था,,,।)

आहहहहह राजू बड़ी ताकत आ गई है तेरे में,,,

चाची तुम्हारी चुचियों को देखकर मेरी ताकत बढ़ गई है,,,,

लेकिन जल्दी कर बहू आ गई तो गजब हो जाएगा,,,

कुछ नहीं होगा चाची,,,( इतना कहते हुए वहां जोर-जोर से चुचियों को दबाते हुए कमला चाची की साड़ी को एक हाथ से खोलने लगा था,,,कमला चाची को इस बात का क्या था अच्छी तरह से ताकि राजू क्या कर रहा है वह उसे रोकना चाहती थी लेकिन ना जाने क्यों उसे रोक नहीं पा रही थी क्योंकि वह जानती भी थी कि उसके पास वक्त कम है किसी भी वक्त उसकी बहू घर में आ सकती थी लेकिन फिर भी वह ना जाने क्यों मजबूर हो गई थी और देखते ही देखते था जो अपनी ताकत को दिखाते हुए उसकी चूचियों को दबा दें इसके साड़ी को उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दिया था,,, राजू को कमला चाची की चूचियां दबाने बहुत मजा आ रहा था वह अभी तक उसके पीछे का लेकिन अगले ही पल उसके आगे आकर उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया राजू की इस हरकत पर कमला चाची को भी तरह से न्योछावर हो गई थी वह पूरी तरह से मस्त हो गई थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि राजू अपनी तरफ से यह सब हरकत कर रहा है वह बहुत कुछ सीख चुका था उसे यकीन भी नहीं हो रहा था कि मात्र दो ही बार की चुदाई में वह उससे इतना ज्यादा खुल गया है,,,।

ओहहहहहह,,, राजू,,,,आहहहहहह कितना मजा आ रहा है बहुत अच्छे से पीता है तू,,,,,

(कमला चाची का मजा भी आ रहा था और इस बात का डर भी था कि कहीं उसकी बहु ना आ जाए और राजू आज अपनी मनमानी करने पर पूरी तरह से तुल चुका था,,,, राजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,, अगर राजू अपनी बुआ के साथ संभोग क्रिया को ना सीखा होता तो शायद आज भी वह वही करता जो उस दिन कमला चाची के कहने पर खेत में कर रहा था,,, सिर्फ चुदाई और कुछ नहीं,,,, कमला चाची पूरी तरह से मदहोश हो गई थी वह भी इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहती थी इसलिए अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पजामे के ऊपर से ही राजू के लंड को टटोलने लगी जो कि अपने भीषण आकार में आ चुका था,,,।

कमला चाची से रहा नहीं गया और वह उसके पजाम के अंदर हाथ डाल दी,,, लंड की गर्माहट पाते ही कमला चाची की बुर कामरस से भीग गई,,,,,, राजु भी उतावला हो चुका था लेकिन फिर भी अपनी बुआ से सीखा हुआ सब कुछ आज मैं देखना चाहता था इसलिए कमला चाची की चूचियों को पीते हुए बाय काट नीचे की तरफ लाकर कमला चाची की पेटीकोट की डोरी को खोलने लगा हालांकि पेटीकोट की डोरी को खोलने का उसको कोई भी अनुभव नहीं था लेकिन फिर भी वह जान हीं गया थाऔरतों के कपड़े को कैसे उतारते हैं अगले ही पल पेटिकोट की डोरी को खींचने लगा और कमला चाची उसे रोकना चाहती थी पेटिकोट की डोरी पर हाथ पडते हैं कमला चाची के मन में हुआ कि वह उसे रोक देंवह अंदर ही अंदर खबर दी गई थी क्योंकि वह जानती थी कि राजू उसे धीरे-धीरे पूरी तरह से नंगी कर देगा और अगर वह पूरी तरह से नंगी हो गई और इस हाल में अगर उसकी बहू आ गई तो कपड़े पहनने तक का उसके पास समय नहीं बचेगा लेकिन फिर भी ना जाने कैसा आकर्षण था मदहोशी थे कि वह राजू को रोक नहीं पाए और अब यहीं पर पेटीकोट की डोरी एकदम से राजू ने खींच दिया जिसकी वजह से चाची की पेटीकोट भरभरा कर उसके कदमों में गिर गई,,,,

पल भर में ही कमला चाची एकदम नंगी होगी राजू के लिए यह पहला मौका थाजब वह कमला चाची को पूरी तरह से नंगी देख रहा था भले ही वह कमला चाची की चुदाई दो बार कर चुका था लेकिन पूरी तरह से नंगी करके नहीं वह सिर्फ साड़ी उठाकर ही उनकी बड़ी बड़ी गांड को देखकर उसकी बुर में लंड डाला था,,,, लेकिन आज का दिन कुछ और था करना चाहती के सामने अनुभवहीन कच्चा खिलाड़ी राजू नहीं बल्कि इस खेल में धीरे-धीरे होशियार होता हुआ राजू खड़ा था जो कि अपनी हरकतों से औरतों को अपने बस में कर लेने की कला सीख गया था,,,,कमला चाची पूरी तरह से नंगी हो गई थी और इस बात का अहसास होते ही कमला चाची एकदम से शरमा गई भले ही वो राजु से दो बार चुदवा चुकी थी लेकिन इस बात से हो शर्मसार होने जा रही थी कि राजू उनके बेटे की उम्र से भी छोटा था और इस उम्र का लड़का उसे अपने हाथों से पूरी तरह से नंगी कर दिया था और वह भी चोदने के लिए इस बात का एहसास से वह पूरी तरह से गर्म भी हो चुकी थी और शर्म से गड़ी भी जा रही थी,,,।

यह क्या कर दिया राजू तुमने तो मुझे पूरी तरह से नंगी कर दिया अगर बहू आ गई तो,,,

कुछ नहीं होगा चाची तुम्हारी बहू को कुछ पता नहीं चलेगा और अपना काम भी हो जाएगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह भी फुर्ती दिखाता हुआ तुरंत कमला चाची के सामने घुटनों के बल बैठ गया और अपने हाथ को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसकी बुर को अपने होठों की तरफ खींच लिया,,,, कमला चाची को समझ पाती इससे पहले ही उसकी काम रस से भीगी हुई बुर राजू के होठों पर थी जिसे वह जीभ निकाल कर चाटना भी शुरू कर दिया था,,,कमला चाची की तो हालत खराब हो गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है वह हकीकत है या कोई सपना है क्योंकि वह सपने में भी कभी नहीं सोची थी कि कोई जवान लड़का उसकी बुर के साथ इस तरह से खेलेगा,,,,

कमला चाची उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी थी जुदाई का बहुत मजा दी थी लेकिन किसी ने भी आज तक कमला चाची के बुर पर अपने होंठ रख कर उसे चांटा नहीं था राजू पहला जवान लड़का था जिसने कमला चाची चाची के साथ इस तरह की हरकत किया था,,,,कमला चाची उसे रोक पाते इससे पहले ही कमला चाची को पूरी तरह से मदहोश इसमें मिलेगी क्योंकि राजू अपनी जीत का कमाल दिखाते हुए कमला चाची की बुर के अंदर अपनी जीभ डाल कर चाटना शुरू कर दिया था,,,

कमला चाची का पूरा बदल कंपनी रंगा उत्तेजना की परम शिखर पर पहुंचते ही वह पूरी तरह से मदहोश हो गई,,, अपनी मदहोशी पर कमला चाची को खुद यकीन नहीं हो रहा था,,,, राजू इतना कुछ जानता है इस बारे में कमला चाची को विश्वास ही नहीं हो रहा था अगर यह सब जानता है तो क्या तो मैं अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया क्यों नहीं किया था लेकिन जो भी हो कमला चाची को इस समय स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था कमला चाची अपने कमरे के बीचो-बीच एकदम नंगी खड़ी थी और उसकी दोनों टांगों के बीच बैठकर कमला चाची को बुर चटाई का मजा दे रहा था,,,, कमला चाची राजू की हरकत से तुरंत झड़ गई,,, वह हांफने लगी,,,,

राजू ने अपना काम कर दिया था आप कमला चाची से अपना काम करवाना था इसलिए वह कमला चाची की दोनों टांगों के बीच से खड़ा हो गया और कमला चाची के कंधे को पकड़कर उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ दबाने लगा कमला चाची को तो पहले समझ में नहीं आया कि क्या करना है लेकिन जैसे ही कमला चाची के होठ राजू के टनटनाते हुए लंड की करीब पहुंचे तो कमला चाची समझ गई कि उसे क्या करना है क्योंकि यह क्रिया को वह पहले भी बहुत बार कर चुकी थी,,, और अगले ही पल राजू के लंड को गप्प से अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,
 
पल भर में राजू एकदम मस्त हो गया और अपनी आंखों को बंद करके मजा लेने लगा कमला चाची पूरी तरह से खेली खाई हो रहे थे इसलिए वह जानती थी कि क्या करना है राजीव को स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था पूरी तरह से मस्त होकर वापस कि उनकी अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था,,, एक तरह से वह कमला चाची के मुंह को भी चोदना शुरू कर दिया था,,,, कमला चाची पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी सुबह-सुबह इस तरह से शुरुआत होगी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा हुआ कि आज सही समय पर राजू घर पर आ गया और उसकी बहु घर पर नहीं है इसी का फायदा उठाते हुए कमला चाची स्वर्ग का सुख भोग रही थी,,,।मदहोश होकर कमला चाची भी अपनी कमर हिला रही थी और जोर-जोर से अपनी बुर को राजू के चेहरे पर रगड रही थी उम्र के इस पड़ाव पर कमला चाची की यह हरकत बेहद कामुक लग रही थी,,,।

कुछ देर तक राजु इसी तरह से अपनी जीभ का कमाल दिखाते हुए कमला चाची को पूरी तरह से मस्त करता रहा लेकिन कमला चाची की सिसकारी की आवाज बढ़ने लगी थी उन्हें मोटा लंड चाहिए था इसलिए मौके की नजाकत को समझते हुए खड़ा हो गया और तुरंत अपने पैजामा को उतार कर नंगा हो गया,,,,कमला चाची के कमरे में कमला और राजू दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे दोनों संभोग सुख प्राप्त करने के लिए मचल रहे थे आज राजू कमला चाची की पीछे से लेना चाहता था जैसे कि उस दिन खेत में लिया था,,,

बिस्तर पर झुक जाओ चाची,,,,

पीछे से करेगा क्या,,,,

हां तुम्हारी गांड देख कर आज फिर से पीछे से करने का मन कर रहा है,,,,(राजू अपने लैंड को हिलाते हुए बोला और कमला चाची है उसके लंड को देखकर पूरी तरह से व्याकुल हो गई मदहोश हो गई यह जानते हुए भी कि किसी भी वक्त उसकी बहू आ सकती है फिर भी राजू के कहे अनुसार बिस्तर पर झुकने के लिए आगे बढ़ गई ऐसा लग रहा था कि जैसे कमला चाची को अब किसी भी चीज का डर नहीं है किसी के भी आने का भय बिल्कुल भी नहीं है,,,, मैं तुरंत जाकर बिस्तर पर हाथ से ठेका लेकर झुक गई पर अभी भी बिस्तर के नीचे ही थे हां तो उसके बिस्तर पर एक और वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में उछलकर नीचे की तरफ हाथ की कोहनी का सहारा लेकर झुक गई,,,,।

इस स्थिति में कमला चाची की बड़ी बड़ी गांड देखकर राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और वह तुरंत कमला चाची की गांड के पीछे पहुंच गया कमला चाची की गांड बहुत बड़ी-बड़ी थी जिससे छोटे लंड वाला कभी भी पीछे से कमला चाची को चोदा नहीं पाता था लेकिन राजू का लंड लंबा बड़े आराम से वह कमला चाची को पीछे चोद सकता था,,,।राजू को अपने लंड कै सुपाडे पर थूक लगाने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थे क्योंकि पहले से ही कमला चाची की बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,, इसलिए वह कमला चाची की गांड पर जोर जोर से चपत लगाते हुए कमला चाची की गांड को एकदम लाल कर दिया कमला चाची को दर्द हो रहा था लेकिन ना जाने क्यों मजा भी आ रहा था इसलिए वह रोक नहीं पाई,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे कमला चाची की जवानी वापस आ गई हो,,,, बहु बच्चे वाली होने के बावजूद भी कमला चाची में कामुकता बरकरार थी ,,,,।

राजू अपने हाथ में लंड पकड़ कर नीचे की तरफ नजर करके वहां कमला चाची की गुलाबी बुर को देखने लगा जो कि काम रस से भीगी हुई थी,,, राजू को अपनी मंजिल मिल चुकी थी और वह अपने लैंड की सुपारी को कमला चाची की बुर की गुलाबी छेद पर लगा दिया और हल्के से धक्का मारा पहली बार में ही लंड का मोटा सुपाड़ा बुर के अंदर प्रवेश कर गया,,,, कमला चाची की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि वह पहली बार बहू आने के बाद अपने कमरे में किसी गैर से लड़के के साथ चुदाई का सुख भोग रही थी और राजू के लिए भी यह पहला मौका था जब वह किसी के घर जाकर उसकी चुदाई कर रहा था राजू अपने दोनों हाथों से कमला चाची की कर लिया और जोर से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला इस बार राजू का पूरा लंड एक बार में ही पूरा का पूरा कमला चाची की बुर में धंस गया,,,,।

आहहहहहहहह,,,राजु,,,

कमला चाची एकदम से मस्त होते हुए बोली,,,, और एक मर्द के लिए औरतों की यही गरम सिसकारी उनके कराने की आवाज ही उनके कर्म का फल होता है,,, राजू भी कमला चाची की गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर संतुष्ट हो गया कि कमला चाची को मजा आया है और वह धक्के लगाना शुरू कर दिया,,,, कमला चाची को पीछे से चोद पाना किसी के बस में नहीं था कारण था कमला चाची की बड़ी बड़ी गांड,,, लेकिन इसी बड़ी बड़ी गांड को देखकर राजू की उत्तेजना और विश्वास और ज्यादा बढ़ गया था तभी तो वह कमला चाची को पीछे से चोदने का मन बना लिया था और यह पराक्रम दिखाते हुए वह सफल भी हो रहा था कमला चाची को बहुत मजा आ‌ रहआ था क्योंकि इस स्थिति में,,, राजू का लंड कमला चाची को अपनी बुर की गहराई में जाता हुआ महसूस होता था,,,।

राजू धड़ाधड़ धक्के लगा रहा था कमला चाची हवा में उड़ रही थी बहुत मजा आ रहा था राजू अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर कमला चाची के दशहरी आम को पकड़कर जोर-जोर से दबाते हुए उसकी चुदाई कर रहा था जिससे कमला चाची का मजा दोगुना होता जा रहा था,,, दोनों इस बात को पूरी तरह से भुल चुके थे कि वह दोनों घर में चोरी छुपे चुदाई का खेल खेल रहे हैं इस बात को जानते हुए भी कि उसकी बहू किसी भी वक्त घर पर आ सकती है लेकिन चुदाई के सुख के आगे वह दोनों सब कुछ भूल चुके थे दोनों संभोग क्रीडा में पूरी तरह से मुक्त हो चुके थे और बाहर रमा घास काट कर वापस आ चुकी थी,,,, घर पर पहुंचते ही देखी थी घर का दरवाजा खुला हुआ है उसे लगा कि उसकी सांस अंदर होंगे इसलिए वह बिना आवाज किए वह घर में प्रवेश कर गई,,, उसे तो इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि उसके पीठ पीछे उसकी सास जुदाई का असीम सुख भोग रही है,,,,वह घर के अंदर प्रवेश करते ही दर-दर देखने तो की लेकिन उसे कहीं भी उसके सास नजर नहीं आई तो वह सोचने लगी कि घर खुला छोड़ कर उसकी सास आखिर कहां चली गई,,,, वह खड़ी होकर कुछ सोच ही रही थी कि उसे अपनी सास की कमरे से हल्की हल्की आवाज आने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसी आवाज है क्योंकि आवाज पूरी तरह से साफ नहीं थी इसलिए धीरे-धीरे उस आवाज की तरफ कदम बढ़ाने लगे जैसे जैसे वह आगे कदम बढ़ा रही थी वैसे वैसे वह आज उसके कानों में और भी साफ सुनाई दे रही थी मुझे समझते देर नहीं लगी कि वह आवाज किस तरह की है,,,

उस गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर उसका दिल जोरो से धड़कने लगा उसे समझ में आ गया कि जरूर दाल में कुछ काला है धीरे-धीरे आगे बढ़ी तो कमरा बंद था लेकिन खिड़की हम किसी को नहीं हुई थी और खिड़की में से कमरे के अंदर का नजारा देखी तो देखती रह गई एकदम दंग रह गई कमरे के अंदर उसके साथ पूरी तरह से नंगी होकर बिस्तर पर झुकी हुई थी और पीछे वही लड़का राजू अपना लंड उसकी बुर में डालकर उसकी जबरदस्त चुदाई कर रहा था,,,,,।

कमला चाची की बहू के तो होश उड़ गए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्य करें कमरे के अंदर जिस तरह का दृश्य देख रही थी उस बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी लेकिन अंदर का गरमा गरम नजारा देखकर खुद उसकी हालत खराब होने लगी,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र में भी उसके साथ इस तरह से चुदाई का मजा लेती है,,, कमरे के अंदर के गरमा-गरम दृश्य को देखकर कमला चाची की बहू को समझते देर नहीं लगी कि,,,उस दिन खेत में काम कराने के बहाने उसके साथ राजू को खेत पर ले गई थी और वह ना हो उस दिन भी वह दोनों यही कर रहे थे,,,यह ख्याल मन में आते ही कमला चाची की बहू की सांसे ऊपर नीचे होने लगी वह बड़े गौर से अंदर के दृश्य को देख रही थी और धीरे-धीरे गर्म भी होने लगी थी अंदर का दृश्य ही कुछ इतना ज्यादा कामुकता से बना हुआ था कि वह उन्हें रोकने के लिए कुछ कर नहीं पाई बल्कि खुद भी पूरी तरह से मस्त होने लगी दोनों पूरी तरह से नंगी थे अपनी सास के बदन से तो अच्छी तरह से वाकिफ थी लेकिन बिना कपड़ों के वाह राजू को पहली बार देख रही थी जब गठीला बदन दमदार शरीर लेकिन अभी तक उसके लंड के दर्शन हुए थे उसके मन में यही ख्वाहिश थी कि उसके लंड को देख पाती क्योंकि जिस तरह से उसकी सास को चोद रहा था किसी के बस में नहीं था कि इस तरह से पीछे से उसकी सास को चोद पाएक्योंकि भारत होने के नाते वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि बड़ी बड़ी गांड वाली औरत को पीछे से चोदने में दम निकल जाता है,,,।

और राजू के जबरदस्त धक्कों को देखकर कमला चाची की बहू समझ गई कि राजू का लंडएक दम दमदार होगा तभी तो वह इस चुनौती पर खरा उतर रहा था,,,,कमला चाची की गरम सिसकारियां की आवाज उसकी बहू एकदम साफ तौर पर सुन रही थी जिसे सुनकर उसकी खुद की बुर गीली होने लगी थी,,,,।

कमला चाची की बहू के मन में पहले तो आया कि वह जोर से आवाज लगाकर दोनों की कामलीला को रोक दें और उन्हें डराया धमकाया लेकिन तभी उसके दिमाग में युक्ति आने लगी कि जिस तरह से उसकी सांस इस उम्र में भी इतना मजा लूट रही है तब तो वह भी पूरी तरह से जवान है वह क्यों ना एक जवान लड़के का मजा ले,,, इसलिए उसके मन में नहीं विचारों का जन्म हो रहा था और वह युक्ति लगाने लगी और बहुत ही जल्द उसे इस काम के लिए जा से पूरी तरह से फायदा उठा लेने की युक्ति नजर आने लगी उन्हें रोकने के बजाय वह वही खड़ी होकर हम दोनों की कामलीला को पूरी तरह से देखने लगी,,,,।

आहहहहह,,,आहहहहह राजू और जोर से जोर जोर से धक्के लगा चोद मुझे मेरे राजा,,, मेरा निकलने वाला है मैं झड़ रही हूं बहुत मजा आ रहा है राजू,,,,

(कमला चाची की बहू अपनी सास की इस तरह की बातें सुनकर एकदम हैरान हो गई थी क्योंकि वह राजू की उम्र से पूरी तरह से वाकिफ थी वह उसके लड़के की उम्र से भी छोटा था लेकिन दमदार गठीला बदन का मालिक था जोकि उस की जबरदस्त चुदाई करते हुए पानी पानी कर रहा था,,,,)

मैं भी झड़ने वाला हूं चाची,,,, बहुत मजा देती हो तुम,,,,आहहहह आहहहहह आहहहहहहह,,,, नहीं गया मैं गया,,,,,,,आहहहहहहहहह,,,,(और इतना कहने के साथ ही अपना पानी निकाल कर कमला चाची को पीछे से पकड़ कर उनके ऊपर लेट गया कमला चाची का भी पानी निकल गया था दोनों एक साथ संतुष्ट हुए थे और कमला चाची की बहू वहां और देर खड़ी नहीं रहना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उन दोनों को पता चले कि उसने देख लिया है,,, वह अपने तरीके से मजा लेना चाहती थी इसलिए वह तुरंत उस जगह को छोड़ कर घर से बाहर निकल गई और थोड़ा दूर चली गई ताकि उसकी सास को बिल्कुल भी शक ना हो कि उसने देख लिया है,,,।

चुदाई का भरपूर मजा लूट कर दोनों अपने अपने कपड़े पहनने लगे और कपड़ों को पहनते हुए राजू मस्ती करते हैं कमला चाची की गांड पर जोर से चपत लगाते हुए बोला,,,।

तुम्हारी गांड में बहुत दम है चाची,,,,

और तेरे लंड मे भी बहुत दम है,,, नहीं तो पीछे से मेरी चुदाई कर पाना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन है,,(कमला चाची अपनी पेटीकोट की डोरी को बांधते हुए मुस्कुरा कर बोली,,,)

मैं बोला था ना चाचीकि तुम्हारी बहू इतनी जल्दी नहीं आ पाएगी और अपना काम भी हो जाएगा,,,,

अच्छा हुआ कि वह नहीं आई नहीं तो तो जिस तरह से मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगी किया था अगर वह आ जाती तो कपड़े भी नहीं पहन पाती और आज हम दोनों पकड़े जाते,,,।

ऐसा कभी नहीं होगा चाची,,,,(राजू अपने कपड़े पहनते हुए बोला)

ठीक है अब काम हो गया है अब तु जा किसी भी वक्त बहू आ जाएगी,,,,

ठीक है चाची चलता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही जाते जाते राजू ब्लाउज के ऊपर से ही कमला चाची की चूची को जोर से दबा कर भी हंसने लगा और हंसते हुए घर से बाहर निकल गया कमला चाची भी उसे घर से बाहर जाते हुए देख कर मुस्कुराती रहें क्योंकि इस उम्र में उसके जीवन में बहार आ गई थी,,,, वह पूरी तरह से संतुष्ट थी,,,,इस बात से अनजान की उन दोनों की संभोग लीला को उनकी बहू अपनी आंखों से देख चुकी है,,,.)
 
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