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सिमरन - सही कहा यार, जो लड़का अपने लंड से तेरी मोम जैसे मस्त घोड़ी की चूत शांत कर दे उसका लंड पक्का बड़ा ही तगड़ा होगा,

आरू - क्यूँ कमीनी, लगता है तेरा भी मन कर रहा है कुशल का लंड खाने का

सिमरन - हाँ यार, प्लीज़ कोई जुगाड़ कर ना

आरू - पहले मेरा तो होने दे, फिर तेरा भी करा दूंगी

सिमरन - चल फिर ठीक है, तू जल्द से जल्द तेरे पापा की तरह ही कुशल को अपने जाल में फंसा कर अपने हुस्न का दीदार करा दे, फिर मैं भी थोडा हाथ साफ कर ही लुंगी,...हा हा हा ...

आरू भी सिमरन की बात सुनकर हंसने लगी....

कुछ देर और दोनों सहेलियाँ ऐसे ही बात करती रही... फिर सिमरन अपने घर चली गई... और आरू ये सोचने लगी कि अब कुशल को कैसे अपने जाल में फंसाया जाए....

.......................

आरू - अरे हाँ, याद आया, तुझे पता है? आज रात कुशल प्रीती की मस्त वाली चुदाई करने वाला है,

सिमरन - तुझे कैसे पता???

आरू - अरे आज जब हम सब दोपहर को लंच कर रहे थे ना तो प्रीती और कुशल आपस में चैटिंग कर रहे थे मोबाइल पर, और उस टाइम प्रीती कुशल को बहुत ज्यादा चिड़ा रही थी, कुशल को भी बहुत गुस्सा आ गया था, और उसने मेसेज किया कि आज रात वो प्रीती की चूत बुरी तरह चोदेगा,

सिमरन - ओह माय गॉड, तब तो प्रीती की मौज है आज रात को...

आरू - हम्म्म्म यार....

सिमरन - काश मैं उन दोनों की चुदाई देख पाती

आरू - यार इच्छा तो मेरी भी है.....

सिमरन - चल कोई नही फिर कभी देखा जाएगा

आरू - वैसे एक तरीका है मेरे पास, जिससे हम दोनों कुशल और प्रीती की चुदाई देख सकते है...

सिमरन - सच्ची... बता ना जल्दी से क्या तरीका है..

आरू - देख पहले तो तू आज रात यहीं रुक जा, अपने भैया को फ़ोन कर देना कि आज रात हमारे यहाँ ही रुकेगी...

सिमरन - हम्म... वो तो कोई प्रॉब्लम नही.... आगे बता

आरू - देख, मेरा और प्रीती का रूम बिलकुल आजू बाजू है, यानी कि एक ही दिवार है, और हमारा बाथरूम भी कॉमन है, कुशल का रूम हमारे सामने है,

सिमरन - हाँ वो तो मुझे पता ही है, पर इससे क्या फायदा

आरू - सुन तो सही पूरी बात, हम चुपके से प्रीती के रूम की तरफ जो दरवाज़ा है ना बाथरूम का, उसमे छेद कर देते है.... और फिर रात को मजे से पूरा शो देख सकते है, क्यों क्या बोलती है...

सिमरन - वाह, आईडिया तो तेरा मस्त है, पर रात को हमे दिखेगा कैसा?

आरू - इसकी फ़िक्र तू ना कर, मैं प्रीती को बोल दूंगी कि रात को कमरे की लाइट बंद ना करे....

सिमरन - ह्म्म्म.... यार आईडिया तो तेरा एकदम धांसू है, चल फिर अभी से छेद के जुगाड़ में लग जाते है....

आरू - हाँ चल....

उसके बाद वो दोनों सहेलियाँ बाथरूम के अंदर गई, और किसी तरह प्रीती की तरफ वाले दरवाज़े में छेद करने लगी........

खटपट की आवाज़ से दूसरी तरफ सोयी हुई प्रीती की नींद खुल गयी, वो उठकर बाथरूम की तरफ गयी और इससे पहले कि वो दरवाज़ा खोले, अंदर से आराधना ने पहले ही दरवाज़ा खोल दिया

प्रीती, आरू और सिमरन को एक साथ देखकर थोड़ी हैरान हुई, पर फिर बोली

प्रीती - आरू दीदी, ये आवाज़ कहाँ से आ रही थी, और आप दोनों बाथरूम के अंदर क्या कर रहे हो??

आरू - प्रीती, मैंने सिमरन को तेरे और मेरे बारे में सब कुछ बता दिया है, और कुशल के बारे में भी, अब हम तीनो एक दुसरे के राजदार है,

प्रीती - सच में ...." प्रीती को ये सुनकर बड़ी ख़ुशी हुई......

सिमरन - हाँ मेरी प्यारी गुड़िया..... अब हम तीनो के बिच कुछ नही छुपा... और हमे ये भी पता है कि आज रात तू कुशल के साथ मस्त सुहागरात मनाने वाली है

सिमरन की बात सुनकर प्रीती बिलकुल शरमा गई..

प्रीती - स्टॉप इट ना दीदी, कुछ भी बोलते हो आप,

सिमरन - देखो तो सही, कैसे सुहागरात के नाम से शर्मा गई बेचारी,,,

प्रीती को शर्माता देख आरू और सिमरन हंसने लगे

प्रीती - पर आप दोनों यहाँ बाथरूम में क्या कर रही हो???

आरू - एक्चुअली हम दोनों तेरी और कुशल की चुदाई देखना चाहते है आज रात, सिमरन भी आज रात मेरे साथ ही रुकेगी... इसीलिए हम इस दरवाजे में छोटा सा छेद कर रहे है.... ताकि तुम दोनों की चुदाई देख सके.....

प्रीती - ओह तो ये बात है.... बड़ी इच्छा हो रही है आपको मेरी चुदाई देखने की बात क्या है... कहीं कुशल का लंड लेने की इच्छा तो नही हो रही ना... हा हा हा

प्रीती की बात सुनकर तीनो हंसने लगी....

उसके बाद तीनो लोग दरवाजे में किसी तरह छेद करने में लग गये, और कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने दो छोटे छोटे छेद बाथरूम के दरवाजे में कर दिए..... बाहर से वो छेद आसानी से नज़र नही आते,

अपनी मेहनत सफल होते देख तीनो सहेलियां बहुत खुश हो गयी.... इस बिच सिमरन ने फ़ोन करके अपने भाई को भी बता दिया कि आज रात वो आराधना के पास रुकेगी.....

...........................................................

अब कहानी को वापस कुशल की तरफ ले आते है......और वहीं से शुरू करते है जहाँ छोड़ा था.......

कुशल और स्मृति स्विमिंग पूल में मस्त चुदाई करने के बाद वापस अपनी कार में बैठकर घर की तरफ रवाना हो गये, शाम का समय हो चूका था.. इसलिए थोडा अँधेरा भी हो चूका था......सडक थोड़ी सुनसान सी ही लग रही थी.... पर स्मृति के चेहरे पर पूर्ण संतुस्टी के भाव झलक रहे थे, और कुशल भी बहुत ही खुश नज़र आ रहा था

कुशल - मोम, आज तो सच में मजा आ गया, आपकी टाइट चूत मारकर

स्मृति - हाँ सच में यार, मुझे भी बहुत मजा आया आज तो, तेरे उसमे कोई जादू है,

कुशल - उसमे किसमे??

स्मृति - "अरे तेरे इसमें..." स्मृति ने एक हाथ कुशल के लंड पर पेंट के उपर से ही फेरते हुए कहा

कुशल - प्लीज़ नाम लेकर बोलो ना मोम

स्मृति - लगता है तू मुझे अपने जैसा ही बना कर रहेगा??

कुशल - प्लीज़ मोम बोलो ना एक बार... मेरे किसमे जादू है....

स्मृति - अच्छा बाबा बोलती हूँ.... तेरे लंड में जादू है... जब भी अंदर जाता है... रोम रोम रोमांचित हो उठता है मेरा तो....

कुशल - कसम से मोम, मैंने आज तक जितनी भी चूत मारी है, आपकी चूत बेस्ट है, और आपकी चुत मारने में सबसे ज्यादा मजा आता है,

कुशल का इतना बोलना था कि स्मृति ने जोर से ब्रेक मार दिया...और गाड़ी की स्टीअरिंग का बैलेंस थोडा बिगड़ गया.... कार सड़क से उतर गयी.... और सडक से थोडा दूर आकर रुकी.....अब सुनसान सी जगह पर कार में स्मृति और कुशल बैठे थे.....

स्मृति - क्या कहा तुमने...

कुशल - मैंने क्या कहा

स्मृति - अभी अभी जो कहा था,

कुशल - यही की आपकी चुत मारने में सबसे ज्यादा मजा आता है

स्मृति - नही उससे पहले

कुशल - "यहीं कि मैंने आज तक जितनी भी चुत मारी है, उसमे से आपकी चूत....."

"ओह तेरी बहन दी....ये क्या बोल दिया मैंने" कुशल के दिमाग में आवाज आई......

स्मृति - इसका मतलब तूने किसी और की भी चूत मारी है... है ना

कुशल - न....न......वो...वो...मोम.........मैं......

स्मृति - सच सच बता कुशल.... मेरे अलावा और किस किस की चूत मारी है तूने..........

कुशल - नही तो मोम... मैं तो बस......

स्मृति - "तुझे मेरी कसम, सच सच बता" स्मृति ने कुशल को बिच में टोक दिया

अब स्मृति ने अपनी कसम दे दी थी, अब बेचारा कुशल बुरी तरह फंस चूका था, झूट बोल नही सकता था, और सच वो बताना नही चाहता था.....

स्मृति - सोच क्या रहा है, जवाब दे मेरी बात का

कुशल - पर आप नाराज़ तो नही होगी ना मोम....

स्मृति - वो बाद की बात है, पहले तू मुझे सच सच बता कि तूने मेरे अलावा और किस किस की चूत मारी है... और सच सच बताना बिलकुल....

कुशल - मोम..... वो मैंने...... आपके अलावा...दो... दो और लडकियों की चुत मारी है

कुशल की बात सुनकर स्मृति के चेहरे पर नाराजगी के भाव साफ देखे जा सकते थे, शायद उसके मन में जलन की भावना थी,

स्मृति - कौन है वो दो लड़कियां

कुशल - मोम, एक तो वो .....वो..

स्मृति - वो वो क्या लगा रखा है.... साफ साफ बोल ना

कुशल - मोम, एक तो वो मेरी टीचर है ना, प्रिया मेम.... करण की माँ

स्मृति - क्या, तूने अपनी टीचर के साथ ही चुदाई कर ली....

कुशल - मोम वो सब कुछ इतने जल्दी में हो गया कि मुझे पता ही नही चला

स्मृति - तो तू मना भी तो कर सकता था ना

कुशल - मैं सच में नही करना चाहता था मोम, पर ...

स्मृति - "पर यही ना, कि तुझसे कण्ट्रोल नही हुआ, शायद तेरा मुझसे जी भर गया है तभी बाहर मुंह मारता है...." स्मृति सच में कुशल की बात से थोड़ी दुखी हो गयी थी, उसे बहुत जलन हो रही थी....... वो कुशल को सिर्फ अपने लिए चाहती थी ..और शायद इसी वजह से उसे इतना बुरा फील हो रहा था...

कुशल - नही मोम, ये आप क्या बोल रही हो, आप बिलकुल गलत सोच रही हो, मैं तो आपको सब से ज्यादा प्यार करता हूँ, आप ये सोच भी कैसे सकती हैं कि मेरा आपसे जी भर गया है, मैं तो आपके बिना रहने का सोच भी नही सकता

स्मृति - तू ये सब मुझे बहलाने के लिए बोल रहा है, सच तो ये है कि तू मुझसे प्यार ही नही करता, तुझे सिर्फ और सिर्फ चुत चाहिए, जहाँ भी तुझे चुत मिलेगी तू वहीं लार टपकाते हुए चल............

इससे पहले कि स्मृति कुछ भी और बोलती उसके गा्ल पर एक जोरदार तमाचा आकर पड़ा, वो तो वहीं सुन्न हो गयी....

कुशल - खबरदार जो ऐसा फिर कहा.... आपको पाने के लिए मैंने ना जाने क्या क्या किया है, और आप कह रही हो कि मैं आपसे प्यार नही करता... मैंने आपसे ज्यादा प्यार आज तक किसी से नही किया .... आपके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ.... आपके बिना तो मैं एक पल भी नही रह सकता......... पर अगर आपको अब मुझसे प्यार नही है तो मैं आपकी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जाऊंगा....

कुशल अभी बोल ही रहा था कि उसके गा्ल पर भी एक जोरदार चांटा आकर पड़ा...

स्मृति - ख़बरदार जो मुझसे दूर जाने की बात भी की तो.... बड़ी मुस्किल से जिंदगी में कुछ खुशियाँ आई हैं और तू चाहता है कि वो भी मुझसे छीन जाए....

स्मृति और कुशल दोनों की आँखों से आंसू बहने लगे... अब कुशल से रहा नही गया और उसने झट से आगे बढ़कर स्मृति के होठों को अपने होठों की कैद में ले लिया...... और जोर जोर से उसके होठों को चूसने लगा... स्मृति भी अब कुशल का पूरा साथ दे रही थी....... कुशल ने एक झटके में स्मृति के बूब्स को अपने हाथों की कैद में ले लिया..... और जोर जोर से दबाने लगा.... स्मृति ने भी अपना एक हाथ बढ़ाकर कुशल के लोअर में घुसा दिया और उसके लंड को मसलने लगी.... कुशल का लंड अपने आकार में आने लगा... दोनों के चेहरे पर हवस पूरी तरह से हावी हो चुकी थी....

स्मृति ने झट से कार में एक बटन दबाया जिससे आगे वाली दोनों सीटें अनफोल्ड होकर बिलकुल निचे हो गयी.... अब ऐसा लग रहा था जैसे गाड़ी में कोई छोटा सा बेड बन गया हो...

इधर कुशल जोर जोर से स्मृति के बूब्स दबाये जा रहा था.... स्मृति से अब बर्दास्त नही हो रहा था ...उसने खुद ही अपनी साडी का पल्लू गिरा दिया.... और फटाफट अपनी साडी खोलने लगी.....कुशल भी जल्दी से अपने कपडे उतारने लगा.... कुछ ही पलो में स्मृति और कुशल बिलकुल नंगे हो चुके थे.........

कुशल ने स्मृति को उस सीट पर लेटाया और उसकी चूत में अपनी एक ऊँगली पेल दी......

स्मृति - हाऽऽऽऽऽऽय्यय ऽऽऽऽऽ डाल...इइइइइइइइ, उइओओओओओओ,

कुशल की उँगलियाँ अब अपनी मोम की बुर के अंदर बाहर हो रही थी,

स्मृति- आऽऽहहह अब रुका नहीं जा रहा कुशल , चल फाड़ दे मेरी बुर अभी के अभी ,

कुशल- मोम, आज तो पूरी तरह आपकी बुर फाड़ूँगा

स्मृति- हाय्य्य्य्य जो करना है कर ले, मगर अब और ना तरसा,

अब कुशल ने अपनी भरे बदन की मोम को सीट पर लेटाया...और अपने होठों को स्मृति की गर्दन पर घुमाने लगा...

अब कुशल ने स्मृति को उलटा करके पेट के बल लिटा दिया, और उसकी गर्दन का पिछला हिस्सा चूमते हुए नीचे पीठ को चूमने लगा, फिर नीचे आकर उसने बड़े बड़े चूतरों को चाटने लगा....फिर नीचे जाकर उसकी जाँघों और पिंडलियों को चूमते हुए उसके पैर के पंजे को चूमने और चाटने लगा, स्मृति की आऽऽहहह निकलने लगी,

स्मृति- आऽऽह क्या कर रहा है? ह्म्म्म्म्म्म.... डाल ना... क्यों तडपा रहा है......

पर कुशल तो फिर से उसके पावों को चाटते हुए ऊपर आया और उसकी चूतरों की दरार को खोल कर उसने अपना मुँह डालकर वहाँ भी चाटने लगा,

स्मृति- आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बेटाआऽऽऽऽऽ उइइओइइइइइ

कुशल अब उसकी गाँड़ के छेद पर जीभ फिराने लगा,

स्मृति- उइइइइओओओ

कुशल- मोम, थोड़ा चूतर ऊपर उठाओ ना,

स्मृति ने अपना पिछवाड़ा उठा लिया....

कुशल थोड़ी देर तक तो उसके पिछवाड़े की सुंदरता को निहारता रहा

"हाय....क्या गोरे गोल मांसल चूतड हैं मोम आपके... भूरी सिकुड़ी सी गाँड़ तो बिलकुल मक्खन जैसी चिकनी लग रही है....और ये रेशम जैसी मुलायम बुर तो पूछो ही मत... जितना चुसो उतना और चूसने की इच्छा होती है..... अब कुशल स्मृति की बुर भी चाटने लगा,

स्मृति- हाऽऽऽय्य्य्य्य बेटाआऽऽऽऽ आऽऽऽऽज माऽऽऽर डाऽऽऽऽऽऽलेगा क्याआऽऽऽऽ,

कुशल फिर अपना लौड़ा उसकी बुर में रखा और उसने कहा- मोम, डालूँ?

स्मृति- आऽऽहहह क्या पंडित बुलाऊँ और मुहूर्त निकलवाऊँ, अरे नालायक डाऽऽऽऽऽऽल नाआऽऽऽऽऽऽ,

कुशल- पर पहले आप मुझसे मेरे लंड की भीख मांगो तभी डालूँगा...

स्मृति- आऽऽऽहहह क्यों तंग कर रहा है? डाल दे ना, वह अपनी कमर को पीछे की ओर हिलाकर बोली,

कुशल- पहले बोलो तब डालूँगा, ये कहते हुए उसने उसकी बुर में अपना सुपाड़ा रगड़ा ,

स्मृति- आऽऽऽऽहहह डाऽऽऽऽल्लल्ल कमीने साले मादरचोद ,

कुशल हँसते हुए बोला- क्या डालूँ मोम , बोल ना,

स्मृति- मादरचोद, अपना मोटा लौड़ा और क्या डालेगा, हाय्य्य्य्य्य अब ड़ाऽऽऽऽल दे ना मेरा राजा बेटा,

कुशल ने अपना लौड़ा उसकी बुर में ठेला और बोला- लो मेरा लौड़ा अपनी बुर में , और उसने ज़ोर से धक्का मार कर अपना लौड़ा पूरा पेल दिया, जड़ तक, उसके बड़े बॉल्ज़ उसकी गाँड़ के छेद से रगड़ने लगे,

अब उसने चुदायी चालू की और धक्कों की स्पीड भी बढ़ाता चला गया, अब वह स्मृति की चूचियाँ भी दबाने लगा और उसके अंगूर जैसे बड़े निपल्ज़ को भी मसलने लगा,

स्मृति - आऽऽऽऽहहहह बहुत अच्छाआऽऽऽऽऽऽ लग रहाआऽऽऽऽऽऽ है बेटाआऽऽऽऽऽऽऽ, और जोओओओओओओओओओर्रर्र से चोओओओओओओओओदो आऽऽऽहहह फ़ाऽऽऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओओ , उइइइइइओइइइइइइइ मैं तो गयी , कहते हुए वह ज़ोर ज़ोर से पीछे को धक्का लगाने लगी और उसके लौड़े को अपनी बुर में ज़ोर से भींच लिया,

कुशल भी स्वर्गिक सूख का आनंद लेते हुए बोला- ले और ले , ह्म्म्म्म्म्म ले, आऽऽहहहह और ले साऽऽऽऽली क़ुतियाआऽऽऽऽऽऽऽऽ,

स्मृति उसके मुँह से ये शब्द सुनकर थोड़ी देर के लिए हैरान हुई पर फिर अपनी वासना की आँधी में बहते हुए मजा लेने लगी,

स्मृति - और जोर से चोद साले मादरचोद...फाड़ दे मेरी बुर को आज...

कुशल - साली कुतिया...आज तो तुझे ऐसा चोदुंगा कि कई दिनों तक लंगड़ा कर चलेगी लोडी साली.....

कुशल और स्मृति दोनों ही इस जंगली चुदाई का मजा ले रहे थे.....गाली गलोच ने तो माहोल को और भी ज्यादा गरमा दिया था, और अब दोनों को बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था......

अब कुशल ने उसकी कमर को पकड़कर एक ज़बरदस्त धक्का दिया और स्मृति की चीख़ निकल गयी- हाऽऽऽऽऽऽऽयय्यय माआऽऽऽऽऽऽऽर्रर्र डाआऽऽऽऽऽऽऽऽला रेएएएएएएएएए,
कुशल- मोम बस पूरा चला गया, अब नहीं दुखेगा,

स्मृति- आऽऽहहह फट गयी मेरीइइइइइइइ, आह्ह्ह्ह्ह अब चूचि दबा बेटा और बुर भी मसल दे बेटा,

अब कुशल उसकी चूचि दबाकर उसकी बुर के दाने को भी सहलाने लगा, जल्दी ही वह गरम हो गयी और बोली- आऽऽहहहह अब मज़ाआऽऽऽ आऽऽऽय्यय्या ना, हाय्यय्यूय चल अब चोद मेरा राजा बेटा अपनी मोम की चूत को, हाय्य्य्य्य्य्य्य्य,

अब स्मृति की चुदायी सही माने में चालू हुई, कुशल के धक्कों से पूरा कार ठप ठप और चूँ चूँ की आवाज़ कर रहा था, कुशल की मर्दाना जाँघें स्मृति के चूतरों से टकराकर मस्ती वाली ठप ठप की आवाज़ निकाल रही थी,
स्मृति भी हाऽऽऽयय्यय बेएएएएएएएएएटा कहते हुए अपने चूतरों को पीछे की ओर दबाकर चुदायी का पूरा मज़ा ले रही थी,
कुशल के जवान जिस्म की पूरी ताक़त का अन्दाज़ अब स्मृति को हो रहा था और हर धक्के के साथ वह सुख के गहरे सागर में गोते लगा रही थी, कुशल के हाथ उसकी चूत और चूचि पर थे

वह चिल्लायी- आऽऽऽऽहहह बेटा फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽड़ दे मेरीइइइइइइइइ गाँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽड़ ,

कुशल भी आह्ह्ह्भ्ह्ह्ह्ह्ह क्याआऽऽऽऽऽऽऽ मस्त चिकनी चूत है मोमआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ, हाऽऽऽयय्यय ,

लगभग 15 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद कुशल को लगा मानो उसका पानी निकलने वाला है....

कुशल - हाय.....मोम.... मेरा पानी निकलने वाला है कहाँ निकलूं....

स्मृति - हाययय...बेटा.... अंदर ही निकाल दे......मैं तेरे पानी को अपनी चुत में महसूस करना चाहती हूँ....निकाल दे अंदर ही....

और तभी कुशल को ऐसा लगा मानो उसकी सारी सख्ती उसके लंड की नसों में इकठ्ठा हो गयी और जोर जोर से उसके लंड से उसके वीर्य की बड़ी बड़ी पिचकारियाँ स्मृति की गरम चूत में जाने लगी... स्मृति इन पिचकारियों को अपनी चूत की दीवारों पर महसूस करके मानो मदहोश सी हो गयी और उसका लावा भी साथ साथ फुट पड़ा......

कुशल और स्मृति दोनों ही आज बुरी तरह झड़े थे....इतना पानी आज तक दोनों का ही नही निकला था,,,, शायद गाली गलोच की वजह से दोनों ही कुछ ज्यादा ही गरम हो गये थे....

थोड़ी देर बाद दोनों ने अपनी सांसो को दुरुस्त किया, और अपने कपडे पहने ...

स्मृति और कुशल ने दोबारा एक बार किस किया और फिर स्मृति ने सीट को सही करके कार स्टार्ट की....और कार को घर की तरफ मोड़ दिया.....

स्मृति - वाह... आज तो सच में मजा आ गया बेटा....

कुशल - मोम, सोरी मैंने आप पर हाथ उठाया और आपको गाली दी...

स्मृति - नही बेटा, तेरा मुझे थप्पड़ मारना मुझे बिलकुल भी बुरा नही लगा, बल्कि ये तो इस बात का सबूत था कि तू मुझसे प्यार करता है.... थैंक्यू कुशल...

कुशल - थँक्स मोम.....

स्मृति - पर हाँ तूने ये तो बताया ही नही कि तूने दूसरी किस लडकी की चूत मारी....

कुशल - नही मोम, अगर मैंने आपको बताया तो आप मुझसे दोबारा गुस्सा हो जाओगी...

स्मृति - मैं प्रॉमिस करती हूँ कि गुस्सा नही करूंगी... तू बता...

कुशल - मोम.. वो वो दूसरी लडकी....

स्मृति - बोल ना कौन है वो दूसरी लडकी...

कुशल - मोम वो दूसरी लडकी प्रीती है.....

स्मृति पर तो जैसे बम फूटा.......उसने दोबारा जोर से ब्रेक लगाया..

स्मृति - क्या... तूने प्रीती को भी चोद दिया....कब हुआ ये...

कुशल - मोम... आपने प्रॉमिस किया था कि आप गुस्सा नही होगी....

स्मृति - पर तूने ऐसा क्यूँ किया....

कुशल - मोम.. मुझसे गलती हो गयी... पर मैं आपसे वादा करता हूँ कि आज के बाद आपके सिवा मैं किसी भी लडकी की तरफ देखूंगा भी नही... मुझे बस आप और आपकी ये प्यारी सी चूत चाहिए.....मैं आज के बाद किसी भी और लडकी को नही चोदुंगा......प्रॉमिस...

स्मृति - ठीक है तो.... अगर तू मुझसे प्यार करता है ना... तो मेरे से छुप कर कभी किसी दूसरी लड़की को नही चोदेगा...ठीक है ना..

कुशल - ठीक है मोम.......

अब स्मृति के चेहरे पर मुस्कान दोबारा आ चुकी थी.... उसे भरोसा हो चूका था कि उसका बेटा अब सिर्फ और सिर्फ उसे ही चोदेगा....भले ही स्मृति प्रीति की मोम थी पर थी तो ओरत ही.. और ओरत के मन में जलन की भावना आ ही जाती है... यहाँ भी स्मृति प्रीती और प्रिया मेम से जल रही थी.... उसे डर था कि उसका बेटा उसे छोड़ ना दे... पर अब उसका डर दूर हो चूका था.....

अब स्मृति और कुशल वापस घर की तरफ चल पड़े.....

..................

दोस्तों आपको क्या लगता है अब क्या होगा... एक तरफ तो प्रीति, आराधना और सिमरन बड़ी बेसब्री से रात को होने वाली चुदाई का इंतज़ार कर रहे है और इधर दूसरी तरफ कुशल ने अपनी मोम से वादा कर लिया है कि वो उसके अलावा और किसी को नही चोदेगा..... मामला बड़ा गड़बड़ होता जा रहा है........
 
पंकज को अपनी चूत के सपने दिखाकर सिमरन सीधा उपर आराधना के कमरे में चली गई, आराधना उस समय अपने मोबाइल में कुछ काम कर रही थी, जैसे ही उसने सिमरन को देखा वो भागकर उसके गले लग गई,

सिमरन - क्या बात है आरू मैडम, आज बड़ा प्यार आ रहा है मुझ पर
आराधना - क्या यार, एक तो इतने दिनों बाद तुझे देखा है, और तू बोलती है.........

सिमरन - अच्छा नाराज़ क्यों होती है, मैं तो मजाक कर रही थी,

आराधना - चल ठीक है, आजा बेड पर बैठ कर बात करते है,

आराधना ने सिमरन को अंदर लिया और दरवाजे को अंदर से लॉक कर लिया और दोनों सहेलियाँ आकर बिस्तर पर बैठ गइ

सिमरन - अच्छा अब बता ना, क्या रहा दिल्ली में, जो काम करने गई थी, वो किया या खाली हाथ ही वापस आ गई...

आराधना - क्यूँ कमीनी, तुझे बड़ी जल्दी है जानने की... क्या करेगी जानकर

सिमरन - अरे आरू बता ना प्लीज़.... जब से प्रीती ने मुझे फ़ोन पर बताया है कि तू वापस आ गई है तब से मेरे दिल में बैचैनी सी हो रही है जानने की

आरू - अरे वाह, आजकल प्रीती से जयादा ही नजदीकियां बढ़ गयी है तेरी.... क्या चक्कर है???

आराधना जानना चाहती थी कि उसकी बेस्ट फ्रेंड उससे सच बोलती है या झूट, पर सिमरन ने भी उसे निराश नही किया

सिमरन - देख आरू, अब तुझसे क्या छुपाना, सच तो ये है कि प्रीती भी अब जवान हो चुकी है, बेचारी को जवानी के मजे लेने थे, सो मैंने भी उसे जवानी का अलग मजा चखा दिया

आरू - "कैसा मजा???" आराधना अनजान बनती हुई बोली

सिमरन - वो ही मजा जो दो लडकियाँ आपस में लेती है... समझी

आरू - मतलब... तुम दोनों ने लेस्बियन रिलेशन बनाये...???

सिमरन - और नही तो क्या.... पर तू प्लीज़ गुस्सा मत होना उस पर ... और मुझ पर भी....

सिमरन की बात सुनकर आरू हंसने लगी.....

सिमरन - अरे तू हंस क्यों रही है.... मैंने तो सोचा था तू मुझसे गुस्सा हो जाएगी... उस दिन वो कंडोम वाली बात के लिए कितनी नाराज़ हुई थी...

आरू - पर अब मैं वो आरू नही रही,, अब मैं तुझसे गुस्सा हो ही नही सकती... दरअसल बात ये है कि.....

सिमरन - क्या बात है.. बता ना.......

आरू - दरअसल बात ये है कि मैंने भी प्रीती के साथ.....

सिमरन - प्रीती के साथ क्या....????

आरू - तुझे पता है क्या......

सिमरन - OMG.... मतलब तूने भी प्रीती की चूत का स्वाद चख लिया

आरू - ह्म्म्म.......

सिमरन - वाह... तू तो बड़ी ही तेज़ निकली... ये सब कब हुआ....

आरू - कल हम दिल्ली से वापस आये थे ना, उसके बाद ही ये सब कुछ हो गया.. अब तो प्रीती तेरी तरह ही मेरी बेस्ट फ्रेंड बन चुकी है... पर वो मुझे सब कुछ बताती है... तेरी तरह कुछ छुपाती नही...

सिमरन - क्यों, मैंने क्या छुपाया तुझसे????

आरू - यही कि तेरा बॉयफ्रेंड कोन है... कौन है वो जिसके साथ तू हमारे घर में मस्त रंगरेलिया मना कर गयी थी.....

सिमरन - मतलब... तुझे प्रीती ने सब कुछ बता दिया.......

आरू - हम्म्म्म......... पर मुझे लगा था कि तू मुझे बताएगी... खास कर जब मैंने तुझे अपने और पापा के बारे में इतना कुछ बता दिया...." आरू थोड़ी नाराज़गी से बोली....

सिमरन - सोरी यार आरू... मेरा मन तो था कि मैं तुझे बता दूँ कि मैं अपने भाई के साथ ही चुदाई करती हूँ... पर फिर मुझे डर था कि कहीं तू गुस्सा ना हो जाये...

आरू - चल ठीक है इस बार तो मैं तुझे माफ़ करती हूँ, पर आगे से तू मुझसे कुछ नही छुपाएगी, ठीक है ना

सिमरन - प्रॉमिस, पक्का कुछ नही छुपाऊगी , पर एक मिनट, तूने बोला कि प्रीति ने तुझसे कुछ नही छुपाया, इसका मतलब उसने तुझे ये भी बताया क्या कि वो भी किसी के साथ चुदाई करती है

आरू - ह्म्म्म... ये भी बताया

सिमरन - सच में.....

आरू - हाँ सच में...

सिमरन - मुझे बिलीव नही हो रहा, पहले तू मुझे बता कि उसने तुझे क्या बताया... कि वो किससे अपनी चूत मराती है

आरू - तू ऐसे नही मानेगी, तो सुन, उसने मुझे बताया कि वो कुशल के साथ ही चुदाई करती है...अब खुश

सिमरन - ये प्रीती तो बड़ी कमाल की निकली यार, अच्छा इसका मतलब तूने भी उससे कुछ नही छुपाया

आरू - नही यार, अगर वो मुझे इतना कुछ बता सकती है, तो मेरा भी फ़र्ज़ बनता है ना कि मैं भी उससे कुछ ना छुपाऊ

सिमरन - मतलब तूने उसे अपने और अपने पापा के बारे में सब कुछ बता दिया

आरू - हाँ यार, बता दिया.... और ये भी बता दिया कि दिल्ली में किस तरह मैंने और पापा ने सुहागरात मनाई... और कैसे उन्होंने प्यार से मेरी इस चूत को चूसा था... सब कुछ बताया

सिमरन - इसका मतलब तूने आखिर तीर निशाने पर मार ही दिया... हा हा हा

आरू - ह्म्म्मम्म.....................हा हा हा

सिमरन - काश मेरी भी प्रीती जैसी ही कोई बहन होती

आरू - तो क्या मैं और प्रीती तेरी बहनों से कम है क्या

सिमरन - हम्म... सच यार अब तो तुम दोनों मुझे अपनी सगी बहनों जैसे ही लगती हो... पर क्या तुझे पता है कि कुशल प्रीती के अलावा और किसकी फुद्दी लेता है

आरू - हम्म्म्म...... मोम की ना....

सिमरन - यार तुझे तो सब पता है

आरू - हाँ, प्रीती ने मुझसे कुछ नही छुपाया...

सिमरन - वैसे तूने कुशल का लंड देखा है क्या.....

आरू - नही यार, वैसे प्रीती कह रही थी कि उसका लंड कम से कम 8 इंच लम्बा और 3.5 इंच मोटा है, यानि पापा से भी बहुत बड़ा और मोटा

सिमरन - लगता है तेरी भी इच्छा हो रही है कुशल का लंड अपनी चूत में लेने की

आरू - अब तुझसे क्या छुपाऊ यार, पर हाँ सच में मैं एक बार कुशल का लंड भी अपनी चूत में लेना चाहती हूँ...

सिमरन - सही कहा यार, जो लड़का अपने लंड से तेरी मोम जैसे मस्त घोड़ी की चूत शांत कर दे उसका लंड पक्का बड़ा ही तगड़ा होगा,

आरू - क्यूँ कमीनी, लगता है तेरा भी मन कर रहा है कुशल का लंड खाने का

सिमरन - हाँ यार, प्लीज़ कोई जुगाड़ कर ना

आरू - पहले मेरा तो होने दे, फिर तेरा भी करा दूंगी

सिमरन - चल फिर ठीक है, तू जल्द से जल्द तेरे पापा की तरह ही कुशल को अपने जाल में फंसा कर अपने हुस्न का दीदार करा दे, फिर मैं भी थोडा हाथ साफ कर ही लुंगी,...हा हा हा ...

आरू भी सिमरन की बात सुनकर हंसने लगी....

कुछ देर और दोनों सहेलियाँ ऐसे ही बात करती रही... फिर सिमरन अपने घर चली गई... और आरू ये सोचने लगी कि अब कुशल को कैसे अपने जाल में फंसाया जाए....
 
अब कहानी को वापस घर की तरफ ले चलते है, इस बिच वहां काफी कुछ बदल चूका था, पर हम वहीं से शुरू करते है जहाँ छोड़ा था, यानि कि जब शाम को स्मृति ने सबको उनके कमरों में जाकर चाय दी,

स्मृति ने सबसे पहले पंकज को चाय दी, और उसे बता दिया कि वो अभी कुशल के साथ स्विमिंग क्लास जा रही है, पंकज ने भी कोई ऐतराज़ नही किया, पंकज को चाय देने के बाद स्मृति उपर गई, उपर बाई तरफ कुशल का रूम था, और दाहिनी तरफ दो रूम प्रीती और आराधना के थे, स्मृति सबसे पहले कुशल के कमरे में गई, और उसे जगाकर चाय पीने को कहा और ये भी बता दिया कि अभी बस 10 मिनट में ही उन दोनों को स्विमिंग क्लास के लिए निकलना है,

कुशल को जगाने के बाद स्मृति प्रीती के कमरे में गई, पर प्रीती तो शायद घोड़े बेचकर सो रही थी, उसने नींद में ही मोम को मना कर दिया कि उसे चाय नही पीनी और अभी कुछ देर और सोना है, स्मृति ने भी उसे डिस्टर्ब करना सही नही समझा और आराधना के कमरे का दरवाज़ा खटखटाने लगी,

थोड़ी ही देर में आराधना ने दरवाज़ा खोल दिया, स्मृति ने उसे चाय दे दी और सीधा निचे की तरफ चल दी, आराधना ने भी दोबारा अपने रूम को बंद किया और बिस्तर में आकर चाय की चुस्कियां लेने लगी,

अभी बस उसने जस्ट चाय खत्म की ही थी कि उसे निचे हॉल में कुछ हलचल की आवाज़ सुनाई दी, वो खड़ी होकर बाहर आई तो उसने देखा कि निचे हॉल में मोम और कुशल रेडी होकर कहीं जाने के लिए तैयार खड़े थे

स्मृति को समझ नही आया कि इस वक्त वो लोग कहाँ जा रहे है, इसलिए उसने खुद ही उनसे पूछ लिया

आराधना -"मोम, आप लोग कहीं बाहर जा रहे है क्या?"

'स्मृति -"हाँ आरू, वो कुशल मुझे स्विमिंग क्लास में छोड़ने जा रहा है"

आराधना -"ओके मोम" ये कहकर आरू वापस अपने कमरे में आ गयी और स्मृति कुशल बाहर चले गये

आराधना को ऐसे लग रहा था जैसे स्विमिंग क्लास के नाम से मोम कुछ ज्यादा ही एक्साइट नज़र आ रही थी, तभी उसे प्रीती की बात याद आ गयी कि कुशल और मोम आपस में चुदाई करते है, ये बात दिमाग में आते ही उसका माथा ठनका

"जरुर मोम, स्विमिंग क्लास के बहाने कुशल के साथ मस्ती करके आएगी, सच में कितनी बड़ी रंडी है मोम, अपने बेटे का लंड भी अपनी चुत में ले लिया, पर इसमें उनकी भी क्या गलती, प्रीती बोल रही थी कि कुशल का लंड बहुत ही ज्यादा लम्बा और मोटा है, तभी शायद मोम की चूत पिघल गयी उसे देखकर, पर क्या सच में कुशल का लंड इतना मस्त है" कुशल के लंड के बारे में सोचते सोचते ही आरू की चूत से पानी की दो बुँदे छलक सी पड़ी, अपनी चुत में गीलेपन को महसूस करते ही आराधना के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गयी

"कमबख्त ये फुद्दी भी ना, जब देखो टेसुए बहाती रहती है, आज प्रीती और पापा से इस निगोड़ी की मालिश करा चुकी हूँ पर ये है कि मानती ही नही" आराधना अपनी चुत पर हाथ रखते हुए सोचने लगी
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इधर स्मृति कुशल के जाने के बाद पंकज अपने रूम से बाहर आ गया, आज पुरे दिन रेस्ट करने की वजह से उसकी पूरी थकान उतर चुकी थी, हालांकि उसकी नींद तो तब ही उड़ चुकी थी जब आज दोपहर को आरू ने उसे अपनी मस्त चुत का पानी चखाया था, वो उस हसीं पल को याद करते हुए बाहर हॉल में आकर सोफे पर बैठ गया, और अख़बार के पन्ने पलटने लगा

वो अभी बस अख़बार पढ़ ही रहा था, कि तभी किसी ने डोर बेल बजा थी

"इस वक्त कौन आया होगा" सोचते सोचते पंकज ने दरवाज़ा खोला, और दरवाज़ा खोलते ही उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी क्यूंकि उसके सामने उसकी बेटी की फ्रेंड सिमरन खड़ी थी,

सिमरन को देखते ही पंकज के लंड में एक सुरसुरी सी दौड़ गयी, पंकज तो बस उसे खड़ा खड़ा घुर ही रहा था, उसको इस तरह घूरते देखकर सिमरन के चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी

सिमरन -"घुरना खतम हो गया हो तो क्या मैं अंदर आ सकती हूँ" सिमरन ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा

पंकज -"हाँ हाँ बेटी आओ" पंकज थोडा सकपका गया

सिमरन -"आज तो बड़े दिनों बाद दिखाई दिए आप, कहाँ गुल खिला रहे थे" सिमरन तो पहले से ही जानती थी कि पंकज तो दिल्ली में अपनी बेटी के साथ मस्तियाँ करके आया है,

पंकज -"अरे बेटी, मैं क्या गुल खिलाऊंगा, मैं तो दिल्ली में था बिज़नस के सिलसिले में, पर अब वापस यहाँ आकर थोड़े गुल खिलाने की इच्छा हो रही है"

सिमरन -"अच्छा जी, हम भी तो जाने कौन है वो खुसनसीब"

पंकज -"है एक लडकी, मेरी बेटी की फ्रेंड है, पता है कुछ दिन पहले ही उसने मेरा बहुत ही मस्ती से चूसा है कसम से"

सिमरन -"क्या चूसा है"

पंकज -"मेरा लंड, और क्या, अब तो बस एक बार वो अपनी फुद्दी चूसा दे, फिर तो मोज़े ही मोज़े हैं"

सिमरन -"ह्म्म्म.... तो आपको अब उसकी बुर देखनी है, पर मिस्टर, इतना आसान नही है उसकी चूत देखना"

पंकज -"हय्य... इतना तो जुल्म ना करो ......एक बार अपनी फुद्दी का वो अनमोल खूबसूरत सुराख़ दिखा दो बस...... कसम से मजा आ जायेगा"

सिमरन -"क्यूँ आंटी नही दिखाती क्या अपना सुराख़"

पंकज -"दिखाती है, पर एक चीज़ को इतनी बार देखने पर इंटरेस्ट खत्म हो जाता है, अब कुछ नया देखने का मन करता है"

सिमरन -"तो आपको मेरी जरूरत क्या, आपके तो घर में ही एक बड़ा ही मस्त सुराख़ है, देख लीजिये"

पंकज -"अरे नही, अभी तो तो आरू बच्ची है, उसमे वो मजा कहा" पंकज ने ऐसे दिखाने की कोशिश की जैसे मानो वो तो आरू को कभी उस नज़र से देखता ही नही है

सिमरन -"अरे कहाँ बच्ची,अब तो वो पूरी माल बन चुकी है, एक बार ध्यान से देखिये तो सही" सिमरन पंकज को उकसाने की कोशिश कर रही थी ताकि वो उसे कुछ तो बताये अपने और आराधना के बारे में, पर पंकज अभी अपने और आरू के बारे में किसी को भी बताना नही चाहता था

पंकज -"अरे छोडो ना यार उसको, तुम अपना बताओ, प्लीज़ जल्दी से एक बार मेरे पप्पू को चूस दो ना, देखो ना तुम्हे देखकर कैसे तन गया है बेचारा" पंकज ने अपने लोअर के उपर से अपने तने हुए लंड की ओर इशारा करके कहा

सिमरन -" अरे आपका हथियार तो सच में अभी से खड़ा होकर सलामी दे रहा है मुझे, पर इसे समझादो अभी सही टाइम नही है"

पंकज -"तो सही टाइम कब आएगा, अब और इंतज़ार नही होता सच में"

सिमरन -"चिंता मत करिये, जल्द ही वो टाइम आएगा, और तब जी भर कर अपने पप्पू की मालिश करवा लेना मुझसे"

पंकज उसकी बात सुनकर बड़ा खुश हुआ,

पंकज -"अच्छा ठीक है, अब तुम आरू से जाकर मिल लो, पर अपना वादा याद रखना"

सिमरन -"जरुर अंकल" ये कहते हुए सिमरन उपर की ओर जाने लगी और उपर जाते हुए उसने पंकज की और एक किस हवा में दे दिया

पंकज सिमरन की अदाएं देखकर समझ गया कि पक्का ये लडकी जल्दी ही उसकी टांगो के निचे होंगी
 
खाना खाकर सब लोग अपने अपने कमरों में चले गये, आराधना भी काफी थक चुकी थी इसलिए उसने भी अब थोडा रेस्ट करना ही बेहतर समझा, प्रीती आज रात के सपने सजो रही थी, पंकज और स्मृति भी जाकर थोडा रेस्ट करने लगे, कुशल तो आज स्विमिंग क्लास में क्या क्या होने वाला है ये सोचकर ही उत्तेजित हुए जा रहा था

शाम के लगभग 4.30 बजने वाले थे, स्मृति की नींद खुल चुकी थी, उसने बाकि सब के लिए चाय बनाई और एक एक करके सबके कमरे में जाकर उनकी चाय रख दी,

अब वो कुशल की कमरे में गई, कुशल बेड पर आँख बंद किये लेटा था, स्मृति उसके बेड के पास गयी और चाय साइड में टेबल पर रख दी

सोते हुए कुशल उसे बहुत ही प्यारा लग रहा था, उसने झुककर उसके माथे पर एक किस कर लिया, जैसे ही हटने को हुई , कुशल ने तुरन्त उसे पकड़ा और दोबारा झुकाकर उसके होठों को चूसने लगा,

स्मृति को ये किस बहुत ही अच्छा लग रहा था, पर उसे पता था कि अभी सही वक्त नही है, इसलिए उसने कुशल को थोडा जोर लगाकर अपने से दूर किया और फिर बोली

स्मृति -"रुक जा, इतना बेसब्रा मत हो, वैसे भी अभी तुम्हे मुझे स्विमिंग क्लास ले जाना है, चल फटाफट चाय पीकर तैयार हो जा"

कुशल -"ओके मोम"

ये कहकर कुशल फटाफट बाथरूम में घुस गया, हाथ मुंह धोने के लिए, स्मृति भी उसके कमरे से बाहर आ गयी, वो पहले से ही तैयार हो चुकी थी, उसने पंकज को बताया कि वो कुशल के साथ स्विमिंग क्लास जा रही है,

थोड़ी देर बाद ही स्मृति और कुशल अपनी कार में निकल गये, रस्ते भर कुशल अपनी मोम के साथ हलकी फुलकी मस्ती करता रहा

जब वो लोग स्विमिंग क्लास पहुंचे तो देखा वहां तो आज कोई दिखाई ही नही दे रहा था, कुशल ने कार पार्क की और वो दोनों वह खड़े एक गार्ड के पास पहुंचे

कुशल -"अरे भाई, आज यहाँ इतना सूना सूना क्यूँ है"

गार्ड -"सर, आज तो क्लासेज की छुट्टी है ना, आपको पता नही था क्या"

कुशल स्मृति की और देख कर -"मोम, आज तो छुट्टी है, अब क्या करे"

स्मृति गार्ड से -"पर भैया हम तो बहुत दूर से आये है, प्लीज़ थोड़ी देर प्रैक्टिस करके चले जायेंगे"

गार्ड -"पर मैम्म...." इससे पहले कि वो कुछ और बोलता स्मृति ने अपनी पर्स में निकालकर एक 500 का नोट उसकी तरफ लहरा दिया, अब भला गार्ड क्या बोलता,

गार्ड -"ठीक है मैडम, पर 1 घंटे से ज्यादा नही प्लीज़, मेरा नोकरी का सवाल है"

स्मृति -"ओके"

कुशल समझ नही पा रहा था कि मोम ने गार्ड को पैसे क्यूँ दिए, अगर छुट्टी थी तो वो घर वापस जा सकते थे, एक दिन नही तैरने से क्या फरक पड जायेगा, पर जब उसे कुछ नही समझ आया तो उसने सोचा जो होता ह होने दो

कुशल और स्मृति जब अंदर पहुंचे तो वाकई वहां आज कोई नही था, आज स्विमिंग पूल की सफाई करके बिलकुल फ्रेश पानी भरा गया था, इस वजह से स्विमिंग पूल और भी ज्यादा आकर्षक दिखाई दे रहा था, कुशल भी स्विमिंग पूल की खूबसूरती देखकर दंग सा रह गया,

स्मृति - "आज तो काफी अच्छा लग रहा है पूल बाकि दिनों से"

कुशल - " हाँ मोम, वाकई ये तो काफी खूबसूरत है"

स्मृति - "तो फिर एक काम कर ना, तू भी नहा ले आज"

कुशल -"पर मोम, ये तो लेडीज के लिए है ना, अगर किसी ने देख लिया तो?"

स्मृति -"अरे यहाँ कौन देखेगा, बाहर गार्ड ने कहा नही था कि आज कोई नही आएगा, तो तू टेंशन क्यूँ लेता है

कुशल -"चलो ठीक है मोम, मैं भी नहा ही लेता हूँ आज तो, पता नही फिर कभी आपके साथ नहाने का मोका मिले ना मिले

स्मृति -"चल फिर अपने कपडे उतार"

कुशल -"आप भी नहाओगी न मोम" कुशल अपनी टी शर्ट उतारते हुए बोला

स्मृति -"हाँ क्यूँ नही"

कुशल ने अपनी टीशर्ट और पेंट उतार दी, चड्डी में उसका शांत लौड़ा भी काफी बड़ा लग रहा था, स्मृति ने जब तिरछी नजर से कुशल की चड्डी के उभार को देखा तो उसने अपने होठों पर अपनी जीभ फेर दी

कुशल -"मोम, आप भी तो अपनी साड़ी उतारो न, आपका स्विमसूट कहाँ है"

स्मृति -"वो तो मैंने अंदर ही पहन रखा है"

कुशल -"तो फिर जल्दी से अपनी साड़ी उतरिये और स्विम सूट बिकिनी में मुझे अपनी बॉडी के दर्शन कराइए ना मोम, देखो ना मेरा लंड भी कैसे उतावला हुआ जा रहा है आपको बिकिनी में देखने के लिए" कुशल ने अपने लंड की ओर इशारा करते हुए कहा

स्मृति ने जब दोबारा कुशल के लंड की और देखा तो अब सच में कुशल का लंड धीरे धीरे बड़ा होने लगा था,

स्मृति -"अच्छा ठीक है, मैं उतारती हूँ अपनी साड़ी, पहले तू अपनी अंडर वियर उतार और पूल में कूद जा"

कुशल -"पर मोम, चड्डी उतारने में तो रिस्क है ना"

स्मृति -"क्यूँ इतने से रिस्क से ही डर गया, ऐसे तो बड़ा लायन बना फिरता है" स्मृति जान बुझकर कुशल को उकसा रही थी,

कुशल -"अच्छा तो ये बात, अब तो आपको लायन की हिम्मत दिखानी ही होगी"

ये कहते हुए कुशल ने अपनी चड्डी को तुरंत अपने पैरो की कैद से आजाद कर दिया, चड्डी उतरते ही उसका लंड स्प्रिंग की तरह उछलकर स्मृति की आँखों के सामने आ गया, भले ही कुशल का लंड अभी पूरा तना हुआ नही था, पर अब भी उसका लंड कम से कम 6 इंच के आसपास नजर आ रहा था,

स्मृति -"ये हुई ना बात लायन, अच्छा अब पूल में कूद जा"

स्मृति का इतना कहना ही था कि कुशल फटाक से पूल में कूद गया

कुशल -"अब आप भी तो अपने कपडे उतारो ना मोम"

स्मृति -"क्यूँ नही, अभी ले"

ये कहकर स्मृति अपनी साड़ी को धीरे धीरे उतारने लगी, कुशल तो ये नजारा देखकर बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गया, क्यूंकि स्मृति गांड मटका मटका कर अपनी साड़ी उतार रही थी, अब स्मृति सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में ही थी,

कुशल -"जल्दी करो ना मोम, अपना ब्लाउज और पेटीकोट भी उतार दो, मुझे आपको टू पिस बिकिनी में देखना है"

स्मृति ने भी कुशल को और तडपाना सही नही समझा, और तुरन्त अपना ब्लाउज और पेटीकोट भी उतारकर साइड में रख दिया, कुशल ने जब स्मृति को सिर्फ ब्रा पेंटी में देखा तो जैसे उसके दिमाग का फ्यूज़ ही उड़ चूका था,

कुशल अपनी मोम की मस्त मोटी मोटी चुचियों का उभार उनकी ब्रा में से साफ साफ देख पा रहा था, स्मृति का
उठा हुआ गदराया लगभग नंगा पेट और उस पर एक बड़ी सी गहरी नाभि की झलक सी देख कर कुशल का तो कलेजा ही मुंह को आ गया, आज से पहले उसने अपनी मोम को बिकिनी अवतार में इस तरह नही देखा था, उनके पेट का उठाव और नीचे फैली हुई मस्त गदराई कमर को देख कर ही कुशल को अपनी मोम के फूले हुए गदराए भोसड़े का एहसास होने लगा था

स्मृति की मोटी-मोटी जांघे इतनी गदराई नज़र आ रही थी कि कुशल को लग रहा था कि बस अभी मोम अपनी ब्रा पेंटी भी उतार दे और वो जाकर ताबड़तोड़ तरीके से उनकी जबरदस्त चूत मारे

शायद स्मृति भी कुशल के मन की बात को जान गयी इसलिए उसने बड़े ही मस्ताने अंदाज़ में अपनी ब्रा और पेंटी भी उतार दी और भरपूर तरीके से कुशल को अपना बदन दिखाने लगी, कुशल का हाल अब और भी बुरा हो चूका था,

फिर स्मृति भी पूल के बिलकुल पास आकर झुककर पानी को छूती हुई बोली "वाह, पानी तो आज बहुत ही ताज़ा ताज़ा है, सच में बड़ा मजा आएगा आज तो" और ये कहते हुए स्मृति पूल में लगी सीढियों के सहारे पूल में उतरने लगी, स्मृति की गांड अब कुशल की तरफ थी

कुशल ने जब अपनी मोम के बड़ी सी गांड और बिच में एक मस्त चूत के चीरे को देखा तो अब उससे और बर्दास्त करना बहुत मुश्किल हो गया, उसने आगे बढकर उसी अवस्था में अपनी मोम को जकड़ लिया, अपने बेटे की मजबूत बाँहों की जकड़ में आते ही स्मृति के बदन में भी एक टिस उभर गयी, स्मृति को अपनी गांड पर अपने बेटे के अब पूरी तरह तने 8.5 इंच के लोडे का अहसास होने लगा था, लंड के एहसास मात्र से ही स्मृति बुरी तरह सिहर उठी

इधर कुशल ने अपने दोनों हाथो से अपनी मोम के मस्त खरबूजों को दबोच लिया और पीछे से अपने लंड को स्मृति की गांड से सटाकर मस्ती से रगड़ने लगा

स्मृति की बुर अब बुरी तरह पनिया चुकी थी, इधर कुशल ने अब अपनी मोम को पलट दिया और उसका चेहरा अपनी तरफ कर लिया,

कुशल स्मृति के होठों को अब बुरी तरह चूस रहा था, स्मृति भी अपने बेटे के इस चुम्बन में भरपूर साथ दे रही थी, कुशल का खड़ा लंड स्मृति की चूत के दरवाजे पर बार बार ठोकर मार रहा था, अब कुशल ने अपने दोनों हाथ स्मृति के पीछे किये और निचे लेजाकर उसके विशाल चुतरो को सहलाने लगा, स्मृति ने भी अपना एक हाथ आगे बढाकर पानी के अंदर खड़े कुशल के लौड़े पर लगा दिए,

अब कुशल झुका और अपनी मोम की भारी चुचियों का रस पीने लगा, कुशल ने अपने एक हाथ अब स्मृति की गांड से हटाया और आगे लाकर उसकी मस्त चुत पर रख दिया,

कुशल -"आह्ह्ह्ह.....मोम.....आपकी चुत कितनी गरम है" कुशल ने जोर से स्मृति की चूत को मसलते हुए कहा

स्मृति - " आऽऽहहह बेटाआऽऽऽ..............." स्मृति की आहें निकल रही थी

कुशल - " मोम अच्छा लग रहा है ना?" ये कहते ही कुशल ने स्मृति की चुत में अपनी दो उंगलिया घुसा दी, उसे तो ऐसा लग रहा था मानो उसने अपनी उंगलिया किसी गरम भट्टी में डाल दी हों

स्मृति - " आऽऽहहह............... हाँ बेटा, सच में बहुत अच्छा लग रहा है"

कुशल 5 मिनट तक स्मृति की चूत में अपनी अंगुलियों को अंदर बाहर करता रहा, साथ साथ अपने मुंह से उसकी चुचियों का रसपान भी करता रहा, इस दो तरफे हमले के सामने स्मृति ज्यादा देर तक टिक नही पाई और वो भालभला कर झड़ गयी

स्मृति -"अह्ह्ह्हह.....बेटा ....सच में तू कमाल है......5 मिनट में ही मेरा पानी निकाल दिया"

कुशल -"मोम आपकी सेवा करना तो मेरा फ़र्ज़ है"

स्मृति -"चल अब थोड़ी सेवा मैं तेरी कर देती हूँ, चल अब इस दिवार पर बैठ"

कुशल एक आज्ञाकारी बालक की तरह स्विमिंग पूल की साइड में आकर उपर चढ़कर बैठ गया, उसका मस्त लोडा अब भी आसमान की तरफ मुंह किये खड़ा था

स्मृति पूल में रहते हुए ही उसकी दोनों टांगो के बिच में आ गयी, और फिर स्मृति ने धीरे से कुशल के उस विकराल लंड को अपने हाथो में ले लिया और बड़े प्यार से उसे चूमने लगी, वो अपनी पूरी जीभ से लोडे को चाट रही थी और फिर कुशल के बॉल्स भी चूसने लगी.

अपने लंड पर अपनी मोम के गरम होठों के एहसास से कुशल तो जैसे स्वर्ग में आ गया था,

इधर अब स्मृति ने झट से अब लंड को अपने मुंह में लिया और जोर जोर से उसके सुपाडे को चूसने लगी,

कुशल मजे से भरकर स्मृति के मम्मे दबाने लगा, स्मृति भी उसका लौड़ा चूसते हुए उसके बॉल्ज़ को पंजे में लेकर सहला रही थी

अचानक कुशल बोला -" आह्ह्ह्ह्ह.... मोम अब रुको, मैं नीचे आता हूँ" ये कहकर वो भी पानी में कूद गया

स्मृति -"क्या हुआ, तू निचे क्यूँ आ गया, मजा नही आ रहा था क्या"

कुशल -"मजा तो बहुत आ रहा था मोम, पर अगर 2 मिनट और आप मेरा लंड चूसती तो पक्का मेरा पानी निकल जाता और फिर आप प्यासी रह जाती, अब अब आप बाहर जाओ और यहाँ बैठो" ये कहते हुए उसने स्मृति को अपनी गोद में उठाया और उसे दिवार पर बैठा दिया और खुद आकर अब उसकी टांगो के बिच खड़ा हो गया

कुशल -"मोम, अपनी टाँगे फैलाइए ना थोड़ी सी"

कुशल का बस कहना था और स्मृति ने अपने पैरो को जितना हो सकता था उतना चौड़ा कर लिया

कुशल की आँखों के सामने अब स्मृति की चूत एकदम मस्त चमक रही थी, उससे रहा नही गया और उसने झट से अपना मुंह स्मृति की बुर में घुसा दिया और उसकी फाँकों को चाटने लगा

स्मृति के मुंह से अब जोर जोर से आहें निकल रही थी, उसने अपनी बाहँ पीछे करके अपनी जाँघों को उठाकर कुशल के कंधों पर रख दिया, कुशल भी मस्ती में आकर अपनी मोम की बुर चुसे जा रहा था, स्मृति भी अपनी कमर उछाल उछाल कर अपनी चूत को उसके मुँह से रगड़े जा रही थी

स्मृति - " आऽऽऽऽह बस कर नाआऽऽऽऽऽ नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी आऽऽह्ह्ह्ह्ह"

कुशल अपना मुँह हटा कर बोला- "मोम, मुझे अब आपको चोदना है"

स्मृति -"तो चोद ले ना, मैंने कब मना किया है"

स्मृति के कहते ही कुशल ने उसे पकडकर दोबारा पूल में खड़ा कर लिया और उसकी चुचिया दबाने लगा, स्मृति के पीठ कुशल के साइन से रगड़ खा रही थी, और उसकी चुत उसके लोडे को छु रही थी,

कुशल का लौड़ा इतना कड़ा हो गया था कि उसे अब दर्द सा होने लगा था, वो मस्ती में आकर अब अपने लंड का सुपाडा स्मृति की बुर पर रगड़ने लगा था, लंड की छुअन से ही स्मृति की सिसकारी निकल गयी,

अब कुशल बोला- " मोम आप ख़ुद ही मेरे लौड़ा अपनी बुर पर रखो ना"

स्मृति ने मुस्कुरा कर अपने एक हाथ से अपनी बुर फैलायी और दूसरे हाथ को पीछे ले जाकर कुशल का लोडा पानी में ही पकड़ कर उसे अपनी चूत के छेद पर सेट कर लिया और फिर बोली -"ले बेटा, अब धक्का मार और अंदर डाल"

कुशल शरारत से मुस्कुराया और बोला- " मोम क्या डालूँ? और कहाँ डालूँ?"

स्मृति भी प्यार से मुस्कुराती हुई बोली- " आऽऽह बदमाश , अपना लौड़ा डाल अपनी मोम की बुर में, आह्ह्ह्ह्ह....." कुशल ने बिच में ही एक दमदार शॉट लगाते हुए सर्रर्र से अपना लोडा पूरा स्मृति की चूत में घुसा दिया

स्मृति -"हाय्य्य्य्य्य्य धीरेएएएएएए से बेटाआऽऽऽऽऽ.. तेरा बहुत बड़ा है रे...."

कुशल - " आऽऽह मोम आपकी बुर कितनी टाइट है, आऽऽहहह मज़ा आ गया"

कुशल ने फिर से धक्का लगाया और इस बार पूरा लौड़ा उसने जड़ तक अंदर कर दिया

स्मृति की सिसकारियाँ गूँजने लगी।

कुशल - " आऽऽहहह मोम बहुत मज़ा आ रहा है आपको चोदने में आऽऽह क्या मक्खन सी बुर है आऽऽहहह"

अब कुशल उसकी चूचियाँ दबाते हुए धक्के मारने लगा, स्मृति भी गरम होकर अपनी कमर उछाल उछाल कर चुदवाने लगी

स्मृति - " आऽऽऽह बेटा तू बहुत अच्छा चोदता है रे..... हाय्य्य्य्य मेरी प्यास ऐसे ही बुझाते रहना आऽऽऽऽऽहहह.."

कुशल के पावरफुल धक्कों से स्मृति मस्ती से भर गयी और उसकी बुर से फ़च फ़च की आवाज़ आने लगी,

20 मिनट की धांसू चुदाई के बाद स्मृति को लगा कि वह अब और नहीं रुक सकती तो वह कुशल के चूतरों को अपनी तरफ़ दबाने लगी जैसे उसके आँड भी अंदर घुसा लेगी,

वो चिल्लायी- " आऽऽऽऽहहह चोद हाऽऽऽऽयहय फाड़ दे मेरीइइइइइइइइइ बुर, मरीइइइइइइइइइइ मैं तो ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म उइइइइइइइइ मैं गयीइइइइइइइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ.."

कुशल भी उसकी आवाज़ों से गरम हो गया और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाकर झड़ने लगा, और अपना सारा पानी अपनी मोम की चूत के अंदर ही उड़ेल दिया

स्मृति और कुशल का पानी स्मृति के चूत से रिसते हुए स्विमिंग पूल के पानी में मिलने लगा,

स्मृति और कुशल दोनों की ही आँखों में अब संतुष्टि साफ झलक रही थी, कुशल ने आखिरी बार अपनी मोम को किस किया और फिर दोनों ने फटाफट कपडे पहन लिए, और फिर बाहर आकर गाड़ी में बैठकर घर की तरफ रवाना हो गये,
 
पंकज और आराधना ने फटाफट अपने कपड़ो को ठीक किया और फिर बाहर आकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया जहाँ प्रीती पहले से उनका इंतज़ार कर रही थी

सब लोग अब डाइनिंग टेबल पर आकर बैठ गये, स्मृति सभी को खाना सर्व करने लगी कि तभी बेल बजी

स्मृति ने जाकर गेट खोला तो सामने कुशल खड़ा था,

स्मृति -"आज तो बड़ी देर लगा दी बेटा"

कुशल -"वो मोम, कई दिनों बाद मिला था ना फ्रेंड से, इसलिए टाइम लग गया"

स्मृति -"अच्छा चल जल्दी से हाथ मुंह धो ले, फिर आकर खाना खा ले"

कुशल -"ओके मोम"

कुशल ने जल्दी से हाथ मुंह धोया और आकर बाकि लोगो के साथ ही डाइनिंग टेबल पर बैठ गया, स्मृति ने जल्द ही सबके और खुद के लिए भी खाना सर्वे किया, और फिर सब लोग खाना खाने लगे

तभी अचानक कुशल का ध्यान प्रीती की तरफ गया, कुशल ने जब प्रीती की और ध्यान से देखा तो बस देखता ही रह गया, प्रीती आज वाकई बहुत ही क्यूट सी लग रही थी, उसने एक पता सा क्रीम कलर का टॉप और ब्लैक कलर का बरमुडा पहना हुआ था,

प्रीती और कुशल टेबल पर जस्ट एक दुसरे के सामने बैठे हुए थे, आराधना प्रीती के बगल में बैठी थी, कुशल की तरफ बाजु में स्मृति और हेड चेयर पर पंकज खुद बैठा हुआ था,

कुशल तो खाना खाते खाते बस प्रीती को ही देख रहा था, वैसे भी काफी दिन हो गये थे प्रीती की लिए हुए, इसलिए आज उसे प्रीती पर कुछ ज्यादा ही प्यार आ रहा था, प्रीती भी कुशल की आँखों को अपने बदन पर चुभती हुई महसूस कर रही थी, और सच पूछो तो उसे तो बड़ा मजा आ रहा था क्यूंकि कुशल ने कई दिनों से उसकी तरफ ध्यान से देखा भी नही था,

इधर कुशल को अचानक एक शरारत सूझी, उसने चुपके से जेब में से अपना मोबाइल निकाला और प्रीती को एक मेसेज कर दिया "क्या बात है प्रीती, आज तो बड़ी ही सेक्सी लग रही है, बिलकुल माल लग रही है कसम से, बता तो जरा अंदर कौनसी ब्रा पेंटी पहनी हुई है"

थोड़ी देर बाद ही प्रीती का रिप्लाई आ गया "क्या बता है, आज मुझ पर ध्यान कैसे दे लिया, वैसे तो मेरी तरफ देखता ही नही और आज तुझे मैं सेक्सी लग रही हूँ"

प्रीती का मेसेज पढकर कुशल को समझ आ गया कि शायद उस दिन वाली बात से ये आज भी खफा है जब उसने प्रीती को कमरे में बंद कर दिया था और निचे आकर अपनी मोम के साथ चुदाई की थी, कुशल ने सोचा की प्रीती के गुस्से को कम करना जरूरी है वरना बैठे बिठाये एक मस्त माल हाथ से निकल जायेगा

कुशल ने झटपट मेसेज किया "ऐसा तो कुछ नही है, मैं तो हमेशा ही तेरी देखता हूँ, तेरे सिवा है ही कौन मेरा और मेरे पप्पू का ख्याल रखने वाला......."

कुशल का जवाब पढकर प्रीती के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी पर उसने उसे ज़ाहिर नही होने दिया, उसने दोबारा रिप्लाई दिया "मुझे क्या पता तूने कहाँ कहाँ अकाउंट खुला रखा है, तेरा पप्पू का क्या भरोसा, पता नही किस किस के अकाउंट में जमा करवाता है"

कुशल ने भी जवाब दिया "नही यार, मेरा पप्पू तो बस तेरे अकाउंट में ही पैसे जमा कराना चाहता है, सच में"
कुशल का मेसेज पढकर इस बार प्रीती की हंसी कण्ट्रोल नही हुई और गले का निवाला हंसी के कारण अटक सा गया, और उसे खांसी आने लगी

स्मृति -"आराम से खा प्रीती, ऐसे क्या खा रही है, ले पानी पी" स्मृति ने पानी का गिलास प्रीती की और बढ़ाया जिसे प्रीती ने पी लिया

आराधना ने आँखों के इशारे में ही प्रीती से पूछा कि क्या हुआ
प्रीती ने भी झट से टेबल के निचे से ही आराधना को अपना मोबाइल दिखाकर इशारा किया, आराधना एक पल में ही समझ गयी कि जरुर प्रीती और कुशल की बाते चल रही है, आराधना ने टेबल के निचे से प्रीती की जांघों को हल्के से दबा दिया मानो कह रही हो कि मुझे भी पढ़ा ना
इधर कुशल ने दोबारा प्रीती को मेसेज किया -"क्या कर रही है प्रीती, आराम से निवाला मुंह में ले, इसके बाद तो पता नही क्या क्या मुंह में लेने वाली है, अगर ऐसे खान्सेगी तो वो कैसे मुंह में लेगी"

प्रीती ने चुपके से दोबारा कुशल का मेसेज पढ़ा और झट से उसे आराधना के मोबाइल पर भी फॉरवर्ड कर दिया, आराधना तो कुशल का मेसेज पढकर गरम सी हो गयी, और मन ही मन सोचने लगी कि सच में उसका छोटा भाई अब छोटा नही रहा

इधर प्रीती ने भी दोबारा रिप्लाई किया "मैं कुछ नही लेने वाली मुंह में"

कुशल : "तो तू ही बता दे फिर कहाँ लेगी हा हा हा"

प्रीती : "कहीं नही लेना मुझे तो"

कुशल : "ऐसे कैसे नही लेना, मैं जबरदस्ती दे दूंगा"

प्रीती : "क्या दे दोगे" प्रीती भी फुल मजे के मूड में आ गयी थी, इस बिच वो सारे मेसेज आराधना को भी फॉरवर्ड कर रही थी, और आराधना भी इन दोनों की इस मस्त चैटिंग को पढकर गरम हुए जा रही थी

कुशल : "क्यूँ तुझे नही पता कि क्या दूंगा"

प्रीती : "नही मुझे तो नही पता"

कुशल : "नाटक करती है ज्यादा"

प्रीती : "इसमें नाटक क्या है, मुझे तो नही पता सच में क्या दे दोगे, और कहाँ दे दोगे, तुम ही बता दो"

कुशल : "लगता है मुझे खुलकर ही समझाना होगा तुझे"

प्रीती : "हाँ तो बताओ ना"

कुशल : "तो सुन, मैं मेरा लंड तेरे मुंह में दे दूंगा, और ज्यादा नाटक किया तो पहले तेरी चूत मारूंगा और बाद में तेरी गांड में भी घुसेड दूंगा"

प्रीती और आराधना ने जब ये मेसेज पढ़ा तो उन दोनों की ही उत्तेजना चरम पर पहुंच गयी

प्रीती : "ओह्ह्ह्ह........मैं तुझे घुसाने ही नही दूंगी, फिर"

कुशल : "तो मैं जबरदस्ती घुसा दूंगा"

प्रीती : "इतनी हिम्मत तुझमे नही है"

कुशल : "रुक आज रात को ही मैं तुझे अपनी हिम्मत दिखा दूंगा, साली की वो चुदाई करूंगा कि जिंदगी भर याद रखेगी"

प्रीती : "क्यूँ ऐसा क्या करेगा तू"

कुशल : "साली आज रात को ही बताऊंगा वो तो, तेरी चूत फाड़ कर ना रख दी तो बताना"

प्रीती : "रहने दे, तुझमे उतना दम नही" प्रीती कुशल को और ज्यादा भड़का रही थी ताकि वो सच में उसकी जबरदस्त चुदाई करे रात को

कुशल : "कुतिया साली, लगता है तू पहली चुदाई भूल गयी, याद नही कैसे चिल्लाई थी तू, कई दिनों तक दोबारा चोदने भी नही दिया था तूने, पर आज रात को तो उससे भी भयानक तरीके से चोदुंगा तुझे"

प्रीती : "कहीं उस दिन की तरह दरवाज़ा बंद करके भाग तो नही जायेगा"

कुशल : "नही, आज तो पूरी रात तुझे अच्छे से मसलुंगा, और आज तो तेरी गांड का भी उद्घाटन करूंगा"

प्रीती : "देखते है, कितना दम है तुझमे, या फिर बस फेंकता ही रहता है"

इधर आराधना को उन दोनों की चैट पढ़कर बहुत मजा आ रहा था और उसकी चूत में हल्की हल्की चीटियाँ भी रेंगने लगी थी,

प्रीती और आराधना अभी हल्के हल्के मुस्कुरा ही रही थी इस बात पर कि उसने कुशल को भड़का दिया कि तभी अचानक प्रीती को अपने पैर पर किसी के पैर का अहसास हुआ, उसे समझते देर ना लगी कि ये कुशल ही है पक्का

कुशल ने प्रीती के पैर पर अपना पैर रखा और धीरे धीरे सहलाने लगा, प्रीती अपना पैर हटाने की कोशिश कर रही थी पर तभी कुशल धीरे धीरे पैर को और उपर ले जाने लगा

आज प्रीती ने बरमूडा पेहेन रखा था तो कुशल उसकी मस्त मुलायम चिकनी टांगों को मस्ती से सहला रहा था, और फिर धीरे धीरे वो अब उसकी जांघ पर भी अपने पांव को सहलाने लगा

प्रीती भी अब धीरे धीरे गरम होने लगी, कुशल ने अपने पैर को थोडा सा और उपर ले जाने की कोशिश की और प्रीती ने भी अपने आप अपनी टांगों को थोडा सा चौड़ा कर लिया,

अब कुशल ने पैर के अंगूठे को प्रीती के बरमूडा ट्राई एंगल पर टिका दिया, यानि कि अब वो अपने पैर के अंगूठे से प्रीती की चूत को उसके बरमुडा के उपर से ही दबाने लगा,

प्रीती को तो इसमें बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था, और तभी अचानक कुशल अपने पैर के अंगूठे को प्रीती की चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा, और जोर लगाकर उसकी चूत पर धक्के देने लगा, प्रीती की चूत तो कुशल की इस हरकत की वजह से पानी छोड़ने लगी, और कुशल भी चूत के उस गीलेपन को महसूस कर पा रहा था,

इधर प्रीती ने उत्तेजना के मारे आराधना की जांघ को दबा दिया, आराधना ने उसकी और आँखों के इशारे से पूछा कि क्या हुआ, तो प्रीती ने आराधना को टेबल के निचे की और इशारा किया,

आराधना ने सबसे बचके चुपके से जब टेबल के थोडा निचे की और देखा तो वो तो सन्न सी रह गयी, क्यूंकि कुशल का पैर का अंगूठा प्रीती की चुत में बरमूडा के उपर से ही धंसा हुआ था, और प्रीती का फेस भी अब थोडा लाल होने लगा था,

आराधना को लगा कि ऐसे तो मोम या डैड को शक हो सकता है, कुशल को रोकना जरूरी है, इसलिए आराधना ने बहाने से अपनी चम्मच निचे गिरा दी, चम्मच की आवाज़ सुनकर जैसे कुशल और प्रीती दोनों को होश आया, कुशल ने झट से अपना पैर हटा लिया, इधर मोका पाकर प्रीती भी तुरंत उठ गयी

प्रीती - "मेरा खाना तो हो गया, मैं अपने रूम में जा रही हूँ मोम"

स्मृति - "ओके बेटा"

प्रीती ने जल्दी से अपने हाथ धोये और फटाफट उपर अपने रूम में चली गयी, जल्द ही बाकि लोगो ने भी खाना खा लिया, आराधना अपने रूम की तरफ चल दी, कुशल भी अभी जा ही रहा था कि स्मृति ने उसे रोक लिया

स्मृति -"कुशल बेटा, मुझे शाम को स्विमिंग क्लास जाना है, तो मुझे छोड़ देना वहां"

कुशल -"ओके मोम" कुशल कुछ ज्यादा नही बोला क्यूंकि पंकज अभी व्ही पर था, पर उसके मन में तो लड्डू फुट रहे थे, उसे पता था कि जरुर आज कुछ न कुछ होना है मोम के साथ" यहीं सोचते सोचते वो उपर अपने रूम में आ गया
 
तभी पंकज ने आराधना को रोका और ऊपर उठाया

आराधना -"क्या हुआ पापा, आपने मुझे रोका क्यों"

पंकज -"आरू अगर मेरा पानी निकल गया तो तुम प्यासी रह जाओगी, इसलिए पहले मैं तुम्हारी प्यास बुझा देता हूँ"

आराधना -"आपको मेरी कितनी परवाह है पापा" ये कहकर आरू हौले हौले मुस्कुराने लगी,

पंकज ने बड़े प्यार से उसे दोबारा लेटाया और और फिर अपना मुंह आरू की चूत से सटा दिया, आराधना की चूत तो गरम भट्टी की तरह सुलग रही थी, फिर पंकज ने उसकी गरम चूत पर किस करना शुरू कर दिया,

पंकज के मुंह से निकलती गरम सांसे जब आराधना की चूत पर महसूस होती तो आराधना की उत्तेजना और भी ज्यादा भड़क जाती, अब पंकज ने अपने होठो से आरू की चूत के होठों को दबोच लिया और उन्हें बड़ी ही बेसब्री से चूसने लगा, आराधना आँखें बंद करके लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी, और अपने पापा के बालो में हाथ फेरे जा रही थी,

फिर पंकज ने अपनी जीभ का इस्तेमाल करते हुए आरू की चूत की दोनों स्किनो को अलग किया और बड़े ही प्यार से अपनी जीभ चूत के अंदर घुसा दी, आरू को तो जैसे जोर का झटका लगा, उसे ऐसा महसूस हो रहा था मानो उसके पापा अपनी जीभ से ही उसकी चुदाई कर रहे हो,
इधर पंकज अपनी जीभ को चूत के अंदर गोल गोल घुमाने लगा, और दुसरे हाथ से आराधना के नंगे मम्मो को बुरी तरह मसलने लगा,

इस दोगुने हमले से आराधना तो मजे के मारे पस्त हुए जा रही थी, पंकज अपनी जीभ को चूत के और अंदर तक घुसाने की कोशिश कर रहा था, तकरीबन 5 मिनट बाद ही आराधना की सिसकियाँ जोर पकड़ने लगी, पंकज समझ गया कि आरू झड़ने वाली है, इसलिए पंकज भी आराधना की चूत में अपनी जीभ जल्दी जल्दी ऊपर नीचे करने लगा और उसकी पूरी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा और जल्दी जल्दी उसके बोबे दबाने लगा उन्हें मसलने लगा

तभी अचानक आराधना ने पंकज के बालो को कस कर पकड़ लिया और उसके मुंह से एक तेज़ लम्बी सिसकारी फुट पड़ी
"आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह्ह...............पापा............." और साथ ही आराधना की चूत से बहुत सारा पानी निकल पडा जो उसकी जांघों से होते हुए बेडशीट पर गिरने लगा,

पंकजने अपनी जीभ से उसका लगभग सारा पानी चाट कर साफ कर दिया और उसकी झांग और चूत भी चाट के साफ़ कर दी,

आराधना -"मजा आ गया यार पापा......आप सच में कितना अच्छा चूसते हो.....अब मेरी बारी..."

ये कहकर आरू ने पंकज को अब लेटा दिया और खुद उनके टांगो के बिच बैठ गयी, और फिर उनका पूरा तना हुआ लंड अपने मुंह में भर लिया और उसे चूसने लगी, वो उसे पूरा अपने मुह में लेके चूसने लगी, कभी वो अपनी जीभ पूरे लंड पर फेरती, उसे चाटती, कभी लंड के टोपे को जल्दी जल्दी अपने होंठो से अंदर बाहर करती, कभी अपने मुह से लंड निकाल के अपने हाथों से उसे जल्दी जल्दी ऊपर नीचे करती

पंकज को तो इन सबमे बहुत मजा आ रहा था, आरू पूरी तल्लीनता से अपने पापा का लंड चूसने में लगी हुई थी, और उसकी मेहनत ने जल्द ही रंग दिखाना शुरू कर दिया, और पंकज के लंड ने बहुत सारा माल उगल दिया, जिसे आरू चटकारे लेकर चाट गयी,

पंकज -"वाह बेटी, सच में तू कमाल है"

आराधना -"वो तो मैं हूँ ही पापा, अच्छा चलो अब फटाफट हाथ मुंह धो लो, मोम और प्रीती बाहर वेट कर रहे होंगे" हमे 15 मिनट से भी उपर हो गये है यहाँ

पंकज -"हाँ सही कहा तुमने बिलकुल"

और पंकज और आराधना ने फटाफट अपने कपड़ो को ठीक किया और फिर बाहर आकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया जहाँ प्रीती पहले से उनका इंतज़ार कर रही थी
 
कुशल से अब बर्दास्त करना बिलकुल नामुमकिन हो चूका था, वो चुपके से उठा और बेड के बिलकुल करीब आ गया जहाँ उसकी माँ और छोटी बहन अपनी आँखें बंद किये अपनी बिखरी सांसो को समेटने की कोशिश कर रही थी,

कुशल को तो यकीन नही हो रहा था कि उसके पास ही उसकी मोम और छोटी सी बहन बिलकुल नंगी पड़ी है, बाजू में बिखरी हुई जुल्फ़े और अस्तव्यस्त कपड़ों में रसीले होंठ वाली अप्सरायें सोई हुई हो तो उसका लंड भला कैसे सोता रहेगा? इसी वजह से कुशल का लंड अब तनकर छत की तरफ सर किये खड़ा था,

कुशल का मन कर रहा था कि बस वो जी भर कर उन दोनों के बदन का चक्षु मर्दन करता रहे, उनकी सुन्दरता को आँखों में समालें, उनकी आँखे होंठ, गोरे गोरे गाल, कोमल उँगलियाँ, छत की ओर ताकते हुए मम्मे, और मम्मो पर एक दुसरे के काटने के निशान, एक भरी और एक बिलकुल सांचे में ढली हुई पतली कमर, एक की मांसल भरी जांघे और दूसरी की केले के तने जैसी चिकनी टाँगे, और फिर टांगो के जोड़ में उन दोनों की बेहद ही कामुक और मतवाली चूतें , जिन्हें देखकर कुशल की सांसे तक उपर निचे होने लगी.....

कुशल अपने चेहरे को उन दोनों की चुतो के और करीब ले गया ताकि उनकी खुशबू को अपनी सांसो में भर सके, जैसे ही वो थोडा सा करीब हुआ उनकी मस्त चूत की सुगंध उसके नथुनों में समा गयी....

उसने ध्यान से उन दोनों की चुतो को देखा, उसकी मोम की चूत ऐसी लग रही थी जैसे कोई गुलाब का फुल हो, और उसकी बहन की चूत तो की कली जैसी लग रही थी, जैसे कि गुलाब की कोई दो पंखुडियां आपस में चिपकी हुई हो....

अब कुशल और ज्यादा रुक ना सका और उसने धीरे से अपने होठ अपनी बहन की चूत से सटा दिए, कुशल के अधरों के स्पर्श मात्र और बेड की हलचल से प्रीती और स्मृति दोनों ही जग गये....

स्मृति - तू यहाँ क्यूँ आया, मैंने बोला था ना कि जब तक मैं ना बुलाऊ तब तक आना नही..

कुशल - मोम, प्लीज़ अब और बर्दास्त नही हो रहा, चूसने दो ना आप दोनों की चूत प्लीज़....

प्रीती - हाँ मोंम, अब और कितनी सजा दोगी भाई को....

स्मृति - ह्म्म्म....चल ठीक है तू कहती है तो इसे माफ़ करती हूँ....

कुशल - ओह थैंक्स मोम....अब तो मैं रात भर आप दोनों की चूत चूस चूस कर लाल कर दूंगा...और फिर प्यार से आप दोनों को चोदुंगा....

स्मृति - रुक रुक अभी इतनी जल्दी क्या है...

कुशल - क्या मतलब..

स्मृति - देखो मैं सोच रही हूँ कि अब आरू और सिमरन भी सब कुछ जानती है, तो उन दोनों बेचारियो को क्यों तडपाया जाये....

स्मृति की बात सुनते ही प्रीती की चेहरे पर जैसे खुसी की लहर आ गयी...

प्रीती - ओह...वाओ...ग्रेट आईडिया मोम....

पर कुशल के चेहरे पर थोड़ी सी शिकन भी आ गयी थी...जिसे स्मृति ने भांप लिया था...

स्मृति - क्यूँ कुशल, तू खुस नही है क्या...आरू पसंद नही क्या...

कुशल- ये बात नही मोम मैं तो खुद आरू दीदी को कब से चोदना चाह रहा हूँ पर ....

प्रीती - पर क्या कुशल

कुशल - मैं उनके सामने कैसे...मतलब हमने अब तक कभी कुछ किया भी नही है फिर कैसे हो पायेगा....

प्रीती - अरे तू चिंता मत कर, वो तो खुद तेरे लंड के निचे लेंटने के लिए मरी जा रही है.....

कुशल - सच में ??

प्रीती - और नही तो क्या....

कुशल - तो फिर ठीक है...बुला लो उनको निचे...

स्मृति - भई ये काम तो हमारी प्रीती बिटिया ही कर सकती है...

प्रीती - जरुर मोम...

और ये कहकर प्रीती ने अपना मोबाइल निकाला और आरू दीदी का नंबर घुमा दिया...

आरू - हेल्लो प्रीती...

प्रीती - हाँ दीदी....मैं ही हूँ..

आरू - अरे तुम दोनों निचे गये थे ना...अभी तक आये क्यों नही...हम यहाँ कब से तुम दोनों का इंतज़ार कर रहे है...

प्रीती - नही दीदी ...अब हम उपर नही आ रहे...

आरू - तो??

प्रीती - आप दोनों निचे आ जाओ मोम के कमरे में...

आरू - पर मोम के सामने कैसे करेंगे..

प्रीती - दीदी आप चिंता मत करो मोम खुद आपको बुला रही है.....

आरू - सच में???

प्रीती - हाँ दीदी..और सिमरन दीदी को भी ले आओ जल्दी से...आज तो मोम अपने हाथो से कुशल का लंड आपकी चूत में फिट करेगी देखना...

आरू - पर ये सब हुआ कैसे??

प्रीती - वो सब बाद में बताउंगी...अभी आप दोनों जल्दी से सेक्सी ड्रेस पहनकर निचे आ जाओ..हम लोग आपका वेट कर रहे है..

और ये कहकर प्रीती ने फ़ोन काट दिया...

इधर आरू और सिमरन, प्रीती की बात सुनकर खुश भी थे और हैरान भी...आखिर ये सब कैसे हो गया.... पर अब तो उनका ध्यान आने वाली चुदाई पर था... क्यूंकि प्रीती ने जिस तरह से कहा था कि उसकी मोम खुद कुशल का लंड पकडकर उसकी फुद्दी में घुसएगी... वो सुनकर आरू बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गयी.....

कुछ ही देर में आरू और सिमरन तैयार होकर बिलकुल सेक्सी ड्रेस पहन चुके थे और अब वो दोनों निचे चल दिए.....

...........................................................

स्मृति - हाँ कुशल, चल अब दोबारा जाकर सोफे पर बैठ जा

प्रीती और कुशल ने आश्चर्य से मोम की ओर देखा

प्रीती - पर अभी तो आपने कहा था ना कि आप भाई को और ज्यादा सजा नही दोगी

स्मृति - हाँ कहा था

प्रीती - तो फिर अब आप दोबारा भाई को क्यों सोफे पर बैठा रही हो

कुशल भी बिच में बोल पड़ा

कुशल - हाँ मोम अब प्लीज़ और सजा मत दो ना

स्मृति - अरे उल्लू सजा नही दे रही... कुछ अलग करने का सोच रही हूँ

कुशल - अलग पर क्या

स्मृति - तू पहले जाकर बैठ तो सही...

कुशल भी मन मारता हुआ जाकर दोबारा सोफे पर बैठ गया....

अब बारी स्मृति की थी... कुशल और प्रीती दोनों ही देखना चाहते थे कि आखिर उनकी मोम क्या अलग करना चाहती है.... कुशल का लंड तो बुरी तरह फुंकार रहा था.... वो तो बस चाहता था कि दोनों में से किसी की चूत में वो लंड घुसा दे....

स्मृति अब धीरे से बेड से उतरी और बड़ी ही स्टाइल से चलती हुई कुशल की तरफ जाने लगी... स्मृति की चाल किसी मॉडल से कम नही लग रही थी बस स्मृति पूरी तरह नंगी थी..... कुशल स्मृति को इस तरह चलकर अपने करीब आता देख बुरी तरह उत्तेजित हो गया....

अब स्मृति सोफे के बिलकुल करीब आ गयी... और वो सोफे पर चढ़ गयी. अपने दोनो पैर सोफे के दोनों बाजू रख कर खड़ी हो गई. नीचे देख कर उसने कुशल के लंड की ऊंचाई नाप ली और कुशल के कंधे का सहारा लेकर अपने चुतड को निचे लाई. जैसे ही उसकी चूत कुशल के सुपाडे के बराबर ऊपर आई तो एक हाथ की पहेली दो उँगलियों से उसने अपनी चूत खोली. जितनी हो सके उतनी चूत को चौड़ी करके उसने सुपाडे के ऊपर रख दिया और धीरे से सुपाडे को चूत में समा लिया. सुपाड़े को निगलने के बाद उसकी आँख मूंद गयी और मुंह से "आ....आ......आ.......आ....ह..." निकल गयी.

वो कुछ क्षण रुकी और धीरे धीरे बड़ी सावधानी से वो कुशल के लंड पर बैठ गयी. उसकी चूत ने कुशल का पूरा लंड समा लिया था जैसे अजगर अपने शिकार को निगलता हो. इतना लम्बा और तगड़ा लंड उसकी छोटी सी चुत मे कैसे समता होगा. पक्का उसकी नाभि के पार निकल चूका होगा. इस तरफ कुशल का पूरा लंड अपनी चूत में समाये स्मृति कुशल के कंधे पर सर रख कर ढल गयी और थकी हुई आवाज़ में बोली "अभी कुछ मत करना....कुछ देर मुझे थकान उतारने दो.....". और वो ऐसे ही पड़ी रही.

कुशल और प्रीती तो अपनी मोम के इस अंदाज़ को देखकर बिलकुल गरमा गए...... कुशल ने अब झट से अपनी मोम के बूब्स को अपने हाथो में दबोच लिया और उन्हें जोर जोर से दबाने लगा.... इधर प्रीती भी बेड से नंगी उठी...और जल्दी से चलकर कुशल और स्मृति की रासलीला में शामिल हो गयी.... प्रीती ने भी अपनी मोम के एक मम्मे को पकडकर अपने मुंह में ले लिया और झट से उसे चूसने लगी..... स्मृति तो इस दोहरे वार से अधमरी सी होती जा रही थी

तभी अचानक डोर पर किसी ने दस्तक दी.... स्मृति और प्रीती के साथ साथ कुशल के चेहरे पर भी एक हलकी सी मुश्कान आ गयी क्यूंकि उन्हें पता था कि बाहर आरू और सिमरन खड़े है.....

प्रीती खड़ी होकर दरवाज़ा खोलने की और बढ़ी पर स्मृति ने उसका हाथ पकड लिया

स्मृति - रुक प्रीती मुझे खोलने दे...और एक बात सुन

प्रीती - हाँ बोलिए मोम

स्मृति - तू मुझे उनके सामने मेरे नाम से ही बुलाएगी....और कुशल तू भी..

प्रीती - पर क्यों..

स्मृति - देख इससे उनकी झिझक बहुत ही जल्दी खत्म हो जाएगी.....समझी

प्रीती - ओके ठीक है मोम....

और ये कहकर स्मृति कुशल के लंड से खड़ी हुई... जैसे ही कुशल का लंड स्मृति की चूत से बाहर निकला एक पक्क्क की आवाज़ उन तीनो के कानो में पड़ी जिसे सुनकर उनके चेहरे पर हंसी आ गयी....

स्मृति अब तुरंत सोफे पर खड़ी हो गयी अपनी चूत में से कुशल के लंड को निकालने के बाद उसने लंड को छुपाने के लिए उसके ऊपर एक तकिया रख दिया. और अपना नाईट गाउन झट से पहनकर डोर की तरफ बढ़ गयी....

जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला सामने आरू और सिमरन खड़ी थी...जो इतनी ज्यादा सेक्सी लग रही थी जैसे कही किसी पार्टी में जा रही हो बस यहाँ वो चुदाई पार्टी में आई हुई थी....

स्मृति ने डोर पूरी तरह नही खोला था जिसकी वजह से आरू और सिमरन प्रीती और कुशल को नही देख पा रही थी....

स्मृति - वाव... गर्ल्स... तुम दोनों तो बहुत ही सुंदर और सेक्सी लग रही हो...

आरू - थ...थ...थैंक्स मोम.....

स्मृति - इतनी घबरा क्यों रही हो आरू बेटी.... अब तो हम सब एक दुसरे के राजदार है...अब तो हमे बिलकुल भी एक दुसरे से शर्मना नही चाहिए....

सिमरन - हाँ आरू.... आंटी सही कह रही है... अब तो हम सब दोस्त है.....क्यों आंटी..

स्मृति - भई ये गलत बात है ..

सिमरन - क्या..

स्मृति - एक तो तुम मुझे अपना दोस्त कह रही हो और उपर से आंटी भी कह रही हो....

सिमरन - तो मैं क्या कहूँ

स्मृति - तुम मुझे मेरे नाम से पुकारो

सिमरन - पर आंटी... ओके ठीक है मैं आपको आज से स्मृति बुलाऊगी

स्मृति - दट्स माय गर्ल....

सिमरन - थैंक यू स्मृति

स्मृति - और आरू मैं चाहती हूँ कि तुम भी मुझे मेरे नाम से बुलाओगी...

आरू - पर मोम मैं कैसे आपको नाम से बुला सकती हूँ.....,...

स्मृति - वैसे ही जैसे प्रीती और कुशल बुलाते है....

आरू - सच में????

स्मृति - तुम्हे यकीं नही अभी रुको...

स्मृति ने प्रीती को आवाज़ लगी...

स्मृति - प्रीती ................

प्रीती - हाँ.......स्मृति....

प्रीती भी अब बिलकुल नंगी जाकर दरवाजे पर पहुंच गयी..उसे इस तरह नंगा देखकर एक बार तो आरू और सिमरन थोड़े से झिझक सी गयी....

आरू को इस तरह झिझकता देख स्मृति बोली...

स्मृति - आरू, देख मैंने कहा था ना कि अब प्रीती और मैं बिलकुल पक्की सहेलिया बन गयी है.... इसलिए अब वो भी मुझे अपने नाम से बुलाती है... और हम तो अब एक दुसरे को गाली भी देते है...

आरू और सिमरन आश्चर्य से नंगी खड़ी प्रीती और अजीब अजीब बाते करती स्मृति को देख रहे थे....

स्मृति - देख आरू तू तभी इस कमरे में आ सकती है जब तू मुझे अपनी दोस्त समझने लगेगी और मुझे मेरे नाम से ही पुकारेगी...वरना तेरी एंट्री इस कमरे में नही होगी..

सिमरन - आरू यार सोच क्या रही है...अब इतना भी क्या शर्माना... चल आजा...ना...

आरू - चलो ठीक है मोम..आज से मैं आपको स्मृति ही कहकर बुलाऊगी...

स्मृति - ये हुई ना बात.. अब दोनों अंदर आ सकती हो...

स्मृति की बात सुनकर आरू और सिमरन अंदर आ गयी... पर जैसे ही वो दोनों अंदर आई.. सामने का नज़ारा देखकर उनकी चुतो से पानी की बुँदे निकलने लगी... क्यूंकि सामने सोफे पर कुशल बिलकुल नंगा लेटा था..और उसका लंड बिलकुल सांप की तरफ फुंकार रहा था...सिमरन और आरू ने अपनी जिन्दगी में कभी भी इतना मोटा और लम्बा लंड नही देखा था... दोनों के गले के थूक जैसे गले में ही अटक गया था..पर आँखों में एक चमक भी आ गयी थी कि आज की रात उन्हें इस लोडे की सवारी करने को मिलेगी...

वो दोनों अभी खड़े खड़े कुशल का लंड देख ही रही थी कि तभी स्मृति आगे बढ़ी, अपना नाईट गाउन उतारा और एक झटके में सोफे पर चढ़कर कुशल के लंड को अपनी चूत में सर्रररर से गाड दिया....

आरू और सिमरन को ये देखकर जोर का झटका लगा. उन दोनों का मुंह और आँखे फटी की फटी रह गई. एक तो इतना तगडा और लम्बा लंड था और स्मृति ने पलक झपकते ही अपनी चूत में ले लिया और ऊपर बैठ गयी जैसे कुछ हुआ ही न हो!!!.

स्मृति ने कुशल के लंड पर बैठे बैठे सब को कहा "इसमे हैरान होने की कोई बात नहीं है... तुम दोनों शांत हो जाओ... और आकर बेड पर बैठ जाओ.."

स्मृति की आवाज़ सुनते ही आरू और सिमरन जैसे किसी स्वपन से बाहर आई हो,

स्मृति - तुम दोनों अब शर्माना छोड़ भी दो और मजे लो जैसे मैं और प्रीती ले रही है

प्रीती ने भी अपनी मोम की हाँ में हाँ मिलायी और बोली

प्रीती - हाँ दीदी, स्मृति सही कह रही है, अब चलो आप दोनों भी झट से अपने कपडे उतार दो, ताकि कुशल भी तो आपके जवान बदनो को देख सके, बेचारा कब से आप दोनों को नंगा देखने के लिए मरा जा रहा है... अब और मत तडपाओ उसे...

अब आराधना और सिमरन के लिए भी बर्दास्त करना बहुत ही मुश्किल हो रहा था, क्यूंकि सामने स्मृति अपने बेटे का मोटा तगड़ा लंड सटासट अपनी चूत में अंदर बाहर करे जा रही थी..... इसलिए दोनों सहेलियों ने शर्म त्यागने में ही अपनी भलाई समझी...

कुछ ही पलो में आरू का सलवार खुल कर उसके पैरों में था. उसकी पैंटी उतरकर घुटनों में आ चुकी थी. सिमरन ने भी अपनी टाईट पेंट उतार कर बाजु में रख दी थी और उसकी पैंटी भी उसके पैरों में गिरी पड़ी थी, प्रीती तो पहले से बिलकुल बेड पर लेटी थी और अपने पैरो को फैला कर अपनी नंगी चूत को हाथों से रगड़ रही थी और उसमे उंगलियाँ डाल रही थी.

तभी अचानक स्मृति बोल उठी -

स्मृति - आरू, कुशल का लंड लेगी क्या????

स्मृति का सवाल सुनते ही जैसे वो सब होश में आये, दरअसल कुशल के इस तगड़े लंड को पाने की इच्छा तो अब सबमे थी...और इसीलिए उसे पाने के लिए सब के होंठ और गला सुख गया था.

इधर बेचारे कुशल का क्या हाल हो रहा होगा ये आप लोग अच्छे से समझ सकते है....बेचारे के सामने चार चार रस टपकाती चुते थी जो कुछ ही देर में उसके लंड को अपने अंदर गटकने वाली थी....

अब आरू और सिमरन भी बेड पर बैठ गयी और अपने पैरो को फैलाना शुरू किया

क्या गज़ब का सिन था यारो... कुशल का लंड उसकी मोम की चूत में फंसा था.. और उसकी आँखों के सामने तीन तीन जवान फुद्दियाँ नज़र आ रही थी... कुशल तो ख़ुशी के मारे पागल हुआ जा रहा था......

इधर तीनो लडकियाँ अब बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी...उनकी वासना उनकी बुद्धि पर सवार हो चुकी थी. वो दिमाग का कुछ सुनना नहीं चाहती थी. उन सब की वासना की आग भड़क उठी थी..

पहले प्रीती ने, फिर आरू ने, फिर सिमरन ने एक के बाद एक शर्म को छोड़ कर सब ने अपने पैर फैलाये. पैर फैलाते ही सबकी चूत में से वो दबा हुआ रस निकल कर बाहर छलक गया

स्मृति बोली "देखो आरू तुम्हारी चूत तुम्हारा हाल बयां कर रही है.. मैं तो कहती हूँ...ऐसा मोका फिर कभी नहीं मिलेगा. कुशल का लंड भी कितना तगड़ा है....अभी सही मोका है बिलकुल ...लेलो इसे अपनी इस खूबसूरत सी चूत में वर्ना बाद में जिंदगी भर अफ़सोस करती रहोगी..."

प्रीती - पर स्मृति ..पहले तू तो मजा ले ले पूरा.....

स्मृति -"मैं तो पहले भी कई बार ले चुकी हूँ और आगे भी लेती रहूंगी....पर तुम लोगो का ये पहला मोका है.....इसलिए आज की रात तुम सब कुशल के लंड की सवारी करो और अच्छे से उसके लंड से निकली एक एक बूंद निचोड़ लो........"

ये बोलकर स्मृति अब धीरे धीरे खड़ी होकर अपनी चूत में से कुशल का लंड निकालने लगी...सबकी नजरे स्मृति की चूत पर थी. स्मृति उठती गयी उठती गयी पर कुशल का लंड था कि ख़तम होने का नाम नहीं ले रहा था. सब यही सोच रहे थे की अभी लंड का सूपाड़ा निकलेगा पर जब स्मृति काफी ऊपर तक उठी तब जाके सूपड़ा स्मृति की चूत के रस में नहाया हुआ दिखा. सबका मुंह और आँखे खुली की खुली रह गयी.

स्मृति उठकर कुशल के पास बैठ गयी, कुशल अब राह देख रहा था कि कि कोई तो चुदाई के लिए उठेगी. पर कोई हिम्मत नहीं कर रहा था, आरू अपनी उंगलियाँ चूत की गहराईयों में डालने के लिए बड़ी मचल रही थी.

जब कोई पास नही आया तो आखिर कुशल खुद उठकर आरू के पास गया और उसके फैले हुए पैरों के बिच में अपने घुटनों के बल बैठ गया. बैठते ही कुशल का लंड उसकी चूत में गडी हुई उँगलियों को छु गया. लंड के छूते ही उसकी साँसे तेज हो गयी और उसने अपनी कमर को ऊपर उठा कर, चूत में से उंगलियाँ निकाल कर लंड को अपने हाथों से चूत पर दबा दिया. आरू अब कुशल के लंड को बड़े प्यार से सहलाने लगी, उसकी आँखे बंद हो गयी जैसे गहरी नींद में चली गयी हो. उसकी चूत उछल-उछल कर कुशल के लंड को टकरा रही थी. पर वो कुछ बोल नहीं पा रही थी. सबको आरू की ये हालत देखकर तरस आ रहा था...

इसलिए अब सब आरू की मदद के लिए उसके पास गए.

सिमरन ने आरू को पूछा "क्या हुआ आरू??ले ले ना अंदर?"

आरू कांपते हुए बोली "यार डर लग रहा है...इतना बड़ा कभी लिया नही"

प्रीती बोल पड़ी "दीदी...चिंता मत करो..बस एक बार दर्द होगा..फिर देखना आप मजे से सरोबार हो जाओगी...और आप तो पहले ही पापा से चुद चुकी हो...तो लंड लेने में थोड़ी आसानी भी होगी...मुझे देखो मैंने तो अपनी चूत की सिल भी इसी मोटे लंड से तुडवाई थी....."

आरू किसी का जवाब देने की हालत मैं नहीं थी. वो तो उछल-उछल कर अपनी चूत को लंड से टकरा रही थी और अपनी चूत को कुशल के लंड पर रगड़ रही थी. "

स्मृति बोली "आरू , ओ आरू ....होश मैं आओ.."

प्रीती बोली "आरू .. डाल दे.."

आरू ने सर हिला कर मना किया.

प्रीती बोली "जिद मत करो ना दीदी...कुछ नही होगा..आप डालो तो सही..."

अब बेचारे कुशल का धैर्य भी जवाब दे गया और वो बोला

कुशल - "आरू दीदी डालने दो ना प्लीज़... आपकी चूत बहुत सुन्दर है....."

आरू ने ये सुनते ही कुशल को अपनी बाहों में भर लिया और कुशल के लंड के सुपाडे को अपनी चूत में समाने के लिए तड़पने लगी. कुशल ने भी उसकी चूत में डालने की कोशीश की पर कुशल का लंड सरक कर यहाँ वहां चला जाता था. आरू की चूत काफी कड़क हो चुकी थी और खुलने का नाम नहीं ले रही थी. इसीलिए कुशल का लंड उसके अन्दर नहीं जा रहा था.

सबको लगा कि शायद उन्हें ही अब मामला सम्भालना पड़ेगा...

सिमरन ने कुशल को आरू के ऊपर से उठाने को कहा. कुशल के उठने पर आरू भी शरमा कर बैठ गयी... बिना देर किये प्रीती ने उसके ब्रा के हुक खोल कर आरू के स्तन को आज़ाद किया. आज़ाद होते ही दोनों स्तन अपनी अपनी जगह झूलने लगे. प्रीती ने आरू को वापस बेड पर सुला दिया और आरू के स्तन को सहलाने लागी. आरू अब अपने आपे में नहीं रही. प्रीती ने आरू के बाल खुले कर दिए. सबने आरू को कमर से जकड दिया ताकि वो उछलना बंद करे. आरू की कमर कंट्रोल में आते ही कुशल ने उसके पैर फैलाए और अपना सुपाडा फिर से उसकी चूत पर रखा. कुशल का लंड उसकी चूत में इतनी आसानी से जाने वाला नहीं था वो खुद भी ये बात जानता था..

इसलिए कुशल ने अपने दोनों हाथों से आरू की चूत को खोला और सुपाडे को उसकी चूत के कोने पर दबाया. अब सुपाडे की इधर-उधर जाने की कोई गुंजाइश नहीं थी. कुशल का सुपाडा गरम था पर आरू की चूत उससे कई गुना गरम थी. उसको कुशल का लंड ठंडा लग रहा था. उसकी चूत को कुछ ठंडा छुते ही आरू कमर से उछल पड़ी और कुशल का लंड फिर से बहार निकल गया.

अब कुशल का धैर्य जवाब दे गया..उसने फिर से आरू की कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और लंड को उसके काने ऊपर रख कर एक जोर का धक्का मारा और आरू के ऊपर गिर पड़ा. कुशल का मुंह उसके दोनों स्तन की गहराई के बिच दब गया और लंड उसकी चूत को चिर कर उसकी गहराई को नाप रहा था. आरू जोर से चीखी..आरू को काफी दर्द हो रहा था...क्यूंकि उसने सिर्फ पंकज का लंड ही अपनी चूत में लिया था पहले वो भी सिर्फ 2 -3 बार...और पंकज का लंड कुशल के मुकाबले तो काफी छोटा ही था....

आरू हिलने की हालत में नहीं थी और उसने कुशल को भी हिलने से रोक दिया... आरू की साँसे फूली हुई थी. उसका गला सुख रहा था. कुछ देर बाद वो शांत हुई और अपनी आँखे खोल कर आसपास देखा. उसने सिमरन को अपने पास खिंचा और उसके होठों को चूमने लगी. अपने हाथों से अपने स्तन को सहलाने लगी. उसके साथ प्रीती और स्मृति भी जुड़ गयी. आरू के हाथों को हटाकर दोनो ने एक-एक स्तन पर कब्ज़ा कर लिया. उसे सहलाने लगे, चूमने लगे, चूसने लगे.

प्रीती और स्मृति के के नंगे गोरे और मांसल चुतड कुशल की तरफ थे...उसने दोनों के चुतड पर हाथ रखा और उसे सहलाने लगा. कुशल उनके चुतडो पर हलकी हलकी थप्पड़ सी मारने लगा...फिर उसने प्रीती के चुतड को अपनी मुट्ठी में भरना शुरू किया ...उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी मखमल के कपडे को छु रहा हो...

इधर थप्पड़ पड़ते ही उनकी चुतड पर लहू उभर आया. दो चार और चमाट लगाने पर उनकी चुतड लाल हो गयी. वो द्रश्य बेहद खुबसूरत था. गोरी दूध जैसी चुतड पर लाल रंग और बिच में हल्के से काले बालों में घिरी चूत और उसके बराबर बिच में लाल चूत की पतली सी की दरार. दरार में से निकला हुआ चूत का रस उनके चूत के बालों में यहाँ वहां चिपका हुआ था. एक अदभुत नजारा था.

कुशल ने अब प्रीती की चूत की तरफ ध्यान लगाना शुरू किया...

कुशल ने अपनी पहली दो उंगलिओं को उसकी चूत पर रगडा और चूत का रस उसकी पूरी चूत पर और उसकी चुतड पर मल दिया. उसकी चूत बेहद मुलायम थी. उसमे अंगूठा डालते ही दबा हुआ रस निकल कर उसकी जांघो पर गिरा. स्मृति और प्रीती की चूतें सहलाते हुए कुशल ने अब धीरे धीरे अपने लंड को आरू की चूत से बाहर निकाला. उसकी चूत कुशल के लंड पर बड़ी मजबूती से चिपकी हुई थी. लंड निकालते हुए एसा लग रहा था की उसकी चूत कुशल के लंड को चूस रही हो. लंड निकालते ही मालुम पड़ा की उसकी चूत खुल चुकी थी और हलकी सी फट गयी थी और थोडा खून निकल आया था.

बिना कुछ देर किये कुशल ने फिर से अपना लंड उसकी चूत में गाड़ दिया. अब आरू को कुछ संतोष की अनुभूति हो रही थी. लंड का उसकी गहराईयों को छूते ही उसने कुशल की सहूलियत के लिए अपने पैर और फैलाए. कुशल ने भी लंड को फिरसे निकाला और देखा तो आरू की चूत अपना मुंह फाड़े बैठी है. अब वो भी उसकी चुदाई के लिए उतावला था और अब उसने उसकी चुदाई शुरू की.

हर एक धक्के पर वो कुशल को और जोर से करने के लिए उकसा रही थी और कुशल का लंड भी हर बार नयी गहराई को छू रहा था. एक लय से आरू चुदे जा रही थी और सिमरन के होंठ और जोर से चूस रही थी.

इस तरफ सिमरन अब आरू की चूत के पास बैठ गयी और कुशल की गोटीयों से खेलने लगी. करीब पांच मिनट में ही आरू उछल पड़ी. सब लोग बाजु हट गए और कुशल उसके ऊपर चढ़ गया. वो झडने लगी थी उसकी चूतने कुशल के लंड के ऊपर जोर की पकड़ जमा ली थी पर कुशल अभी भी उसी लय से उसकी चुदाई करता रहा.

और तभी अचानक आरू की चूत से पानी की मस्त धारा बहने लगी... एक के बाद एक सतत कई बार झड़ने से वो संतोष की सभी सीमाए पार कर चुकी थी. उसके चहरे पर एक परम शांति और परम सुख का भाव था. सबने आरू का हाथ पकड़ कर रखा था नहीं तो वो कुशल की पीठ को जरुर नोंच लेती....

अब कुशल ने आरू की चूत में से लंड को निकाल दिया. आरू अपना पूरा शरीर ढीला छोड़ कर बेड पर आँख बंद करके सो गयी. स्मृति आरू के मम्मे मसल रही थी....और उसे हवा दे रही थी....आखिर इतना बड़ा लंड जो लिया है उसने

कुशल -मोम अब आप आ जाओ

स्मृति - अरे नही...मैं तो पहले भी कर चुकी...आज इन बच्चियों की बारी है.....

सिमरन जैसे उसी पल की राह देख रही थी. उसने कुशल के लंड को पकड़ कर अपने मुंह में ले लिया. बड़ी बेताबी से वो पुरे लंडको चूसने लगी उसने कुशल का लंड पर से आरू का रस पूरी तरह से साफ़ कर दिया. पर शायद कुशल लंड चुसवाने के मुड में नहीं था.

कुशल - सिमरन दीदी... चुसो मत...हाँ अगर चुदवाना है तो आ जाओ निचे...

सिमरन के चेहरे का भाव कुशल का सवाल सुनकर तुरंत बदल गए. उसकी आँखों मैं मस्ती छा गयी और मुस्कुराते हुए बोली "जरुर मेरे राजा ..अब तो तेरे लंड को देखकर खुजली और भी ज्यादा बढ़ चुकी है ?"

प्रीती बोली "पर मेरा नंबर कब आएगा..."

सिमरन - तू चिंता क्यों करती है मेरी जान...आजा और मेरे उपर पेट के बल लेट जा......

प्रीती अब सिमरन के ऊपर पेट के बल सो गयी. कुशल के सामने एक के ऊपर चूत अपने पैर फैलाए लबलबाती पड़ी थी.

सिमरन बोली "चल अब सोचता क्या है? डाल न? तुझे इन्विटेशन देना पडेगा क्या?"

प्रीती बिच में ही बोली - अरे कुशल अब देखता क्या है...आज चढ़ जा आज हम दोनों के उपर...
पर कुशल शायद ये सोच रहा था कि पहले किसको चोदुं...

सिमरन से अब सहा नहीं गया. उसने कुशल को उसके लंड से पकड़ कर खिंचा और लंड के सुपाडे को अपनी चूत के दाने पर रख दिया. "चल न... टाइम पास मत कर".

अब कुशल ने प्रीती को उसकी पतली कमर से पकड़ा और सिमरन की चूत पर सुपाडा दबाया. सुपाडे के आगे नन्ही सी चूत थी. थोडा ज्यादा जोर लगाने पर सुपाडा लपक कर अन्दर घुस गया. लंड घुसते ही उसका चेहरा, जैसे पानी में देर तक डूबे रहने के बाद कोई पानी के बाहर सर निकालता है और सांस लेनेके लिए बेताब हो, वैसा था.

वो एकदम हडबडा गयी थी. उसने कुशल को थोड़ी देर रुकने को कहा. उसकी जोर जोर से सांसे चल रही थी और यहाँ प्रीती ऊपर नीचे हो रही थी. कुछ देर बाद उसकी साँसे शांत हुई और कहा "ओह प्रीती...... क्या लंड है साले का !!...जिंदगीभर का अफ़सोस रह जाता अगर....

"आ...ह...."

"कुशल थोडा धीरे....."

"oh my god.... "

"आह... रुक...... रुक जा रे.... "

"पूरा डाल दिया क्या?"

कुशल कुछ बोलता इससे पहले स्मृति ही बोल पड़ी - सिमरन ..अभी तो आधा ही अंदर गया है....हा हा हा

सिमरन बोली "चल झूठी...."

स्मृति बोली "ठीक है कुशल ... उसे पूरा डाल कर दिखा..."

दुसरे ही पल कुशल ने एक धक्का मारा और पूरा लंड सिमरन की चूत में समा गया. सिमरन एक जोर के झटके के साथ उछली. उसका भी गला सुखा गया और कुछ भी बोलने की हालत में न रही.

इधर कुशल ने अब सिमरन की चूत से लंड निकाला और झट से प्रीती की चूत पर रगड़ने लगा...प्रीती तो पहले से ही तैयार थी. उसे मालुम था की कितना दर्द होगा और दर्द के बाद कितना आनंद होगा. लंड का स्पर्श होते ही प्रीती को जैसे करंट लगा. वो लंड के सुपाडे को अपने हाथों से अपनी चूत पर रगड़ने लगी और सुपाडे को पूरा गिला कर अपने अन्दर डाल दिया. सुपाडा अन्दर जाते ही उसके फैले हुए पैर कुशल की कमर के आसपास लिपट गए.

"आ...ह....."

"माँ......"

"मर गयी....."

"ओ.....ह..."

"आ.............इ.."

आखिर में प्रीती पुरे लंड को निगल कर बोली...."तू अब हिलना मत... मैं जब बोलूंगी तब ही हिलना...."

प्रीती की चूत अन्दर से लबालब हो रही थी. लंड को अन्दर से कभी जकड रही थी तो कभी छोड़ रही थी. उसका बदन जैसे मोम की कोई मूरत हो. उसके पुरे बदन को कुशल महसुस करने लगा. जैसे ये सब कुशल के लंड के लिए मर रहे थे वैसे ही कुशल भी ये सब बेहद खुबसूरत बदन को पा कर धन्य हो रहा था. अपने आप को कह रहा था की ये वक्त बस ऐसे ही थम जाए

यही सोचते हुए कुशल ने प्रीती के रुई जैसे स्तन पर हाथ रखा. प्रीती ने भी कुशल के हाथ पर अपने हाथ रख दिए और वो खुद ही कुशल के हाथों से अपने स्तन दबोच रही थी.

थोड़ी देर बाद प्रीती ने सर हिलाकर कुशल को आगे बढ़ने को कहा...कुशल ने भी अब दनादन धक्के मारने शुरू कर दिए...एक के बाद एक ताबड़तोड़ धक्को से प्रीती का बदन सिहर गया और साथ ही उसके निचे लेती सिमरन का बदन भी झकझोर गया....

लगभग १० मिनट में ही प्रीती की चूत का फुवारा फुट पड़ा....जैसे ही प्रीती की चूत का पानी छुटा, कुशल ने अपना लंड तुरंत निकाला और सटाक से बिना किसी वार्निंग के सिमरन की चूत में घुसेड दिया...

सिमरन के मुंह से आह निकल गयी.....

पर अब कुशल दे दना दन धक्के मारते जा रहा था और कुछ ही मिनटों में में सिमरन का भी पानी छुट गया...

अब कुशल को भी लगने लगा कि उसका पानी निकलने वाला है....इसलिए वो जोर से बोला- मेरा निकलने वाला है मोम..." और कुशल जोर जोर से मुठ मारने लगा...

कुशल की बात सुनते ही चारो कुशल के लंड के पास आकर बैठ गयी...कुशल खड़ा होकर मुठ मारने लगा...

चारो लडकियो ने अपनी अपनी जीभ बाहर निकाल ली जैसे कुशल के वीर्य को वो चखना चाह रही हों....

और अगले ही पल कुशल के लंड से वीर्य की मोटी मोटी धाराएँ निकलने लगी....और यहाँ वहां जाने लगी...

चारो लडकियों ने मिलकर कुशल के वीर्य की एक एक बूंद चट कर डाली....

आखिर में थक कर चारो वहीं लेट गये....

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इस प्रकार इस परिवार की ये चुदाई का खेल ऐसे ही चलता रहा...जल्द ही इन सबमे पंकज भी शामिल हो गया.... अब तो ये सब लोग रात को एक ही जगह सोते है...जिसके मन में जो आया वो उसके साथ चुदाई कर लेता है......

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[color=rgb(184,]THE END[/color]
 
Part - 2

Jaise ki main aapko apni pichhli part mein bataya k mein bachpan se hi mummy papa ka sex dekh kar hi bada hua hoo. Pichhli story mein (part_1) mein main aapko bataya ki kaise main bachpan se hi apne mummy papa ki

chudayee dekhte dekhte huye bada huya aur kitna seksi ho gaya. Kaise mera ek dost bana jo ki mujhe apne ladkiyon aur aurton ke saath chudayee ki baatein karta rehta thaaa. Main pata nahi kitni baar mummy ke mummey ke bare mein aur jab

papa mummey ki choot aur baki holes mein yani k mooh mein aur gaand mein lund dal kar maja lete the. Ab mera lund b roz roz sarson ke teil ya malai ke maalish karne se aur kitni kitni der tak muthi marne se bilkul papa k lund k tarha se ho gaya tha.

Mera shreer papa k tarah se lagta thaa.Ek nazar mein agar mummy b dekh le toh usse b pata na chale ki ye papa ka lund hai ya unke bete ka.. main mummy ko chodne ka plan bnaney laga. Jaise maine aapko bataya tha ki hamarey ghar mein sirf

do hi kamre the. Ek mein mein aur mummy rehte the aur dusre mein papa akele hi rehte the. Mein mummy ke saath ek h bed par sota thaaa. Maine aaj tak kabhi himmat nahi k thee k mummy ko sote sote touch b kiya ho.. jabki kai baar main jab

paishab karne ke liye raath ko uth_jata thaa aur mummy need mein besudh ho kar soyee huyee hoti thee, unka gown upar (Jahan par painty hoti hai) utha hota thaa.. aur unki gori gori tangent dekh kar mein apne hosh kho baith_tha aur mera lund

tan_tana kar khara ho jata thaa. Phir sari raath mujhe need nahi aati thee aur mujhe muthi maar kar apne lund ko shant karma padta thaa. Phir main muthi marne kay baad mummy ke khyalon mein kho kar so jaata thaa aur meethe meethe sapno mein kho jata thaa. ek din mere lund par kuch

jyada hi saroor chada huya thaa mera lund tha ki lohe ki tarah se tight ho gaya thaa, maine kitni der tak bathroom mein jaakar muthi b mari parantu kuch fark nahi pada balki muthi marne se who aur b tight ho gaya thaa.. mera haath, muthi marte marte thak gaya tha a. main apne kamre main aa

mummy ke side par lait gaya. Main us wqt night suit dala tha..yani k T-shirt aur half paint, kyonki main garmiyon mein half pant aur t-short hi dalta thaa aur neeche kuch nahi sirf do hi kapde hote the. Aur mummy be gown ke neeche bra nahi dalti thee aur raat ke time unke gaown ke

neeche panty b nahi hoti thee...us din mummy ka gown kafi upar tak utha huya tha mummy ki peeth meri taraf thee aur tangen toh bilkul nangi ho gayee thee.. maine himmat kar ke unke paas ja kar baith gaya aur dhyan se dekhne laga lekin mujhe unko choot nahi dikhai dee, gown ke \/ type

neck se unke bhari bhari mummey jude huye dikhaee de rahe thee jo \/ shape se bahar aane ko baitab ho rahe thee aur aadhe se zyada dikhai de rahe the. Aaj mere mann main shaitan ghus chukka thaa aur main soch chukka thaa ki mummy ko touch toh kar ke hi rahunga...main sochne laga

ki kis tarah se mummy ke choot ke darshan karoon... mummy ke mummey dekhne ke baad toh mera lund aur b tight hone lag gaya thaa mere lund mein sakhti ki vajah se dard hone laga thaa. lund thaa ki neeche hone kaa naam nahi le rahaa thaa. mere shaitani dimag mein ek plan aaya, maine

farsh se ek keedi (ant) ko bade pyar se uthaya aur mummy ke choot ke paas chood diyar aur main mummy ke side mein aa kar leit gaya.. thori der baad keedi jab mummy kee choot ke paas chalne lagi toh mummy ko kuch sursurahat (khujli) jaise mehsoos huyee, mummy ne neend mein hi

khujli kee, jis vajah se mummy tangent khul gayee thee aur mummy ki choot ke aaspass ke jhante (hair) dikhne lage the... aur choot ke thore thore darshan hone lage the.. mera lund yeh seen dekhkar aur b tight ho gaya thaa. mummy kharish kar ke plhir se so chuki thee,

ab mummy peeth ke bal so rahi thee aur mummy ki dono tangent khuli thee, gown hat jane ki vajah se choot aur aaspaas ke jhante dikhaee dene lage the, choot ke dono lips b thore se khul chuke the, mummy ke choot ke lips bade bade the, main eek book me pada tha ki in lips ko 'labia'

kehte hain, woh kisi santre ki fank jaise lagte thee, bilkul bhare bhare huye. Un santre ki fanko ko dekh kar mere honth sookhne lage, lekin unko choone ki himmat abhi b mere mein nahi thee. Mujhe ek aur plan soojha. Maine chupke se uth kar ek aur ant farsh se uthaee aur usse utha kar

mummy ke choot ke honth par rakh diya aur mein mummy ke paas aa kar peeth ke bal leit gaya aur apna lohe jaisa tight lund ko half pant se nikal diya (jo ki mummy ki taraf tha) mera lund bilkul right ho kar chhat ki taraf teer ki tarah se seedha ho kar khara tha. Main apni aakhon par apni baaju

rakh lee aur baju ke niche se dekhne laga ki ab kya hota hai, lagbagh 1-2 mint hi beete honge ki mummy ke choot mein keedi ne katna shuru kar diya aur mummy ko jor se khujli huyee.. mummee ne ekdum se apna dayan haath apni choot par mara aur apni choot kee fankon ko masalne

lagi, who uth kar baith gayee thee. Keedi ko unhone shayad masal kar marr diya thaa, unki neend khul chuki thee, kamre mein zero watt ka balb jal raha thaa. jiski roshni main mujhe sab kuchh dikhai de raha thaa. maine dekha ki mummy ne uthne ke baad apni aankhen masal kar pehle

apni choot ki taraf dekha aur phir apnee choot ke upar haath dal kar keedi ko utha kar dekha aur usse ek taraf dal diya. Keede dalne ke baad mummy ne meri taraf dekha mera lund lohe ki tarah se tight ho kar chhat ki taraf khara huya thaa, maine apna ek haath apni aankhon par rakha

thaa aur dusra haath aise faila rakha tha, k jaise main gehri neend main so raha hoon...achanak mummy ki nazar mere lund par gayee aur mummey ka mooh aur aankhen dono khuli ki khuli reh gayee. Mummy thora aur aage aa gayee aur mere lund ko paas aa kar dekhne lagee ke

ye sachmuch mein asli hai ki nakli lund toh nahi dekh rahi hai. mummy ne meri taraf dekha aur socha ki main so raha hoo, mummy ne apna haath dheere dheere se bada kar mere lund ke suparey par rakh diya, mummy ka garam garam haath mere lund par padte hee mere lund ne salam

karma shuru kar diya aur upar neeche hone laga, mummy ko aise laga k jaise kisi ghore ya gadhe ka lund upar neeche ho raha ho. Who peeth ke bal mere paas leit gayee aur aur apna ek haath mere jaise hi apni aankhon par rakh liya aur apna doosra haath mere lund par rakh kar mere

lund ko muthi main le kar upar neeche karne lagi... mera lund mummy ke chhoone se aur b right ho kar fatne faise ho gaya thaa, mere lund ki nasso mein bahut khoon bhar chukka tha, jaise kisi gubbare ko bhar kar ek taraf se dabaya jaye aur dusri taraf ka gubbara hawa ke dabav se aur b tight ho

jata hai, mera b yahi haal ho raha thaa,. mein aise show kar raha tha jaise main gehri neend mein hoo, mummey jab mere lund ki chamdi ko upar neeche karti thee toh mere mooh se anayas hi uuuuuhhhhhh, ooommmmhh, aaaahhhhh ki awazein nikalne lagti thee, kuch der kane ka

baad mummey ne apne dono haathon ko mere lund par lapet diya, jaisse kisi dande ko apni muthi mein dabaya huya ho. Aur dono hathon se upar neeche karne lagi. Aur mere lund tha ki chootne ka naam ni nahi le raha tha,....mummey thori thori der baad meri taraf dekh leti thee ki kahni main

jag na jaaoon... achanak mummy ne uth kar apna mooh mere lund ke paas kar liya aur mere lund ke supade ko chuymmi de di, lund ke supade par chummi lene par mera lund aur b jor jor se salami dene laga,
 
Part - 3

mummey thori thori der baad meri taraf dekh leti thee ki kahni main

jag na jaaoon... achanak mummy ne uth kar apna mooh mere lund ke paas kar liya aur mere lund ke supade ko chuymmi de di, lund ke supade par chummi lene par mera lund aur b jor jor se salami dene laga,

AB AAGY....

jaise who khush ho raha ho. ..mujhe dar tha ki kahin mere lund se garam pani

ka fowarra na choot jaye.. main apne lund ko akda kar aur b tight kar liya taki garam pani na nikal sake. ... achanak mummy ne chummi lene ka baad mere lund ke supade ko apne mooh mein bhar liya... mummy ke hontho ka dabav mere lund par upar neleche ho raha thaa. aur mujhe

apne lund par lislisa lislisa b lag raha thaa aur bahut maja b aa raha tha... main khud ko rok nahi saka aur apne chootron ko upar neleche karne laga.. mummy mere lund ko apne mooh mein last tak le rahi thee yani ke who deep-throating kara rahee thee, unke mooh se gooo...gooo ki

awazein b aa rahi thee...aakhir kuchh der baad mere lund ne apna garam garam virya chhor hi diya jisse k mummy jhat se apne gale ke neech gatak liya.virya gatakne ke baad mummy kuch der aur b lund ko pyar se choosti rahi aur phir jab lund sikudne laga toh who lund ko pyar se dekhte

huya ek last chumma diya aur meri taraf peeth kar ke soo gayee. Main apne haath ko apni aankhon par se hataya. Mere hontho par smile thee. Main samajh gaya ki mummy ko mera lund pasand aa gaya thaa aur ab agle lplan mein mein mummey ko chodne wala thaa.

main be vaise ka vaisa leta raha aur pata nahi kab mujhe neend aa gayee.subah jab main utha toh maine dekha k mummy uth chuki thee aur mera lund b murjha chukka thaa aur abhi b mera lund meri half pant se bahar thaa, murjha chukne ke baad b mere lund ka size 7 inch ka thaa.

last night ki baat soch kar mere lips par smile aa gayee. Main ab aage pa plan sochne laga. Mein uth kar kichan mein gaya mummey meri taraf dekh kar muskrat di aur poocha,

uth gaya ravi... aur neend kaise aayee raat ko.. (unke hontho par abhi b muskarahat thee)..

main serious ho kar bola.. haa mummy neend toh theek aayee, lekin mera shreer toot raha hai aur bahut thakawat ho rahi hai... aur dil karta hai ki abhi jakar soo jayoon....

mummy boli... achha achha jakar haath mooh dho le aur nashta kar le..dekh aaj main tumhare pasand ka nashta banaya hai... aur kheer b banayee hai...

mein: waah kheer, mummy aaaj toh maja aa jayega.

Mummy: haa beta, aat toh tumhe bahut majaa aaayega.

Mein haath mooh dhone chala gaya aur main samajh gaya ki mummy ke man main kya kheer pak rahi hai.

Main jakar kitchen mein neeche baith gaya. Mummy mere liye nashtra lagane lagi. Mummy ne ghar mein dalne wali maxi dali huyee thee jo who aam taur par ghar main night ko dalti thee. Mummy ne aaj maxi(gown) ke neeche kale rang ki bra dali huyee thee aur who bra bahut hi tight thee,

mummy ke mummey usme bahut hi tight lag rahe they aur teer ki tarah se bilkul seedhe khare huye the. Mummy ne aaj panti nahi dali huyee thee jis se mummy ke chutar (jab who chalti thee toh) upar neeche hil rahe the aur mummy ke hilte huye chootron ko dekh kar mere man mein anaar foot

rahe they. Mummy ke lehratey huye chootron ko dekh kar mere lund me khusar--pusar honi shuru ho gayee thee. Maine mummy k taraf dekha, mummy ke hontho par muskarahat thee aur who smile bahut he seksy thee. Mummy ne mujhe khana prosna shuru kiya toh who jaan-boojh kar

apni tangon ko seedhey rakh kar pura ka pura hi jhuk jatti thee, jis se unke bra ke ander tight mummon ka pura ka pura darshan mujhe ho raha tha. Mummy ke big big mummey apas main jud kar ek drar si bna rahe the jaise dono mummey apas main jaffi dal rahe ho.

Mummy jab khana serv ker ke vapas jatti thee tho, who janboojh kar matak matak kar chalti thee, shayad voh janti thee ke main unko dekh raha hoo. Mummy ki hilte huye chooter dekh kar mera lund pathar ki tarah se tight ho chukka tha aur main lund ko ek haath se daba kar dusre haath

se nashta kar raha thaa. mummy jab phir se nashta dene ke liye aayee toh main tabhi b apne ek haath se apne lund ko daba rakha tha . .. mummy mujhe iss halat main dekh kar muskarayee, parantoo kuch boli nahi.

Main jaldi jaldi se khana khaya aur jab mummy ke peeth meri taraf thee toh main chupke se uth gaya, taki mummy mere ubhre huye tight lund ko na dekh sake. Is baat ko mummy b bhamp chuki thee ki mera lund pathar ki tarah se tight ho chukka thaa.

Main raat ka besabri se intezar kar raha thaa. raat ko main aakar bistar par peeth ke bal lait kar ke so gaya. Aur apni aankhon par ek baaju rakh dee jo haath mummy ki taraf thaa who haath main apne pait par rakha rehne diya. Thori der baad mummy aaye aur mujhe awaz dee, Ravi beta Ravi.. lekin mein chupchaap soya raha.. mummy ne light band kar di. Mujhe phir khatar-patar ki awazein aati rahi,

pata nahi mummy kaya kar rahi thee. Thori der baad mujhe mehsoos hua k mummy bed par let gayee hai becoz bed par char_marahat huyee thee. Phir mujhe aisa mehsoos huya k mummy pehle toh chupchap bed par padi rahi aur phir dheere-dheere hilne lagi aur aur phir mujhe achanak

mehsooos huya ki mummy ka shreer mere shreer ke saath touch huya hai aur mujhe yeh b behsoos huye ki unka night gown bahut upar tak utha huya thaa ya shayad unhone kapde hi nahi dale huye thee. Main vaise hi saans roke chupchaap pada raha, k dekhta hoon k mummy kya karti hain.

Achanak mujhe aisa laga ki mummy ne apna ek haath mere pait par dal diya jaise unka haath achanak yani k need main hi mere upar aa gaya ho. Kuchh pal k liye unka haath aise hi pada raha. Kuch der baad mummy ka

haath mere pait se sarak kar mere kapdon ke upar se mere lund ko touch karne laga. Mera lund pehle hi mummy ke bare mein soch soch kar pathar jaise sakht ho chukka tha. Mummy ke haath ko touch karte hi who saamp k tarah se upar neeche jhatke maarne laga. Mummy dheere dheere mere

kapdon ke upar se me mere lund ko pyar se sehlane lagi.akhir kuch der ke sehlane ke baad mummy ne mere pajama ke ander haath dal diya aur bina mere pajama ka nada khole hi mere lund ko ander se pakad liya aur pyar se sehlane lagi. Mere lohe jaise sakht lund ko pakad kar mummy ke

mooh se siski nikal gayee thee...aur dheere se boli haaye kitna lumba aur mota land hai...kaash main isse apni choot mein le sakti... mummy ne beshak ye baat bahut dheere -2 se kahi thee lekin raat ke sannate main

mujhe yeh baat sunayee de gayee thee. Phir mummy ne meri taraf dekha aur meri eyes mere haath se dhakki huyee thee lekin main sab kuch dekh raha thaa. mummy ne dheere dheere se mere pajama ka naada khol diya aur mere pajama ko khulla kar diya taki who mere lund ko pura apne

haath me le sakein aur upar neeche kar sake. Pajama ko neeche karne ke baad mummy uthkar baith gayee thee aur mummy ne mere lohe jaise

sakht lund ko apne dono hatho mein bhar liya mera lund unko haatho se bahar nikal raha thaa. mummy ne lund ko pyar se upar neeche karma shuru kar diya aur achanak mujhe mehsoos huya ke mere lund ke charo taraf kuchh lislisa jaisa lag raha tha. Maine dhyan se dekha ke mummy ne

mere lund ko apne mooh mein bhar liya thaa aur who apne mooh mein bhar kar upar neelche kar rahi thee. Achanak mummy ne mere lund par apne hontho ko tight kar ke jor jor se choosna shuru kar diya mere lund mummy ke choosne se aur b tight hona shuru ho gaya thaa. ab mera lund

mummy ke gale tak ander tak jaa ra thaa. mere hontho se siskari nikalna chahti thee par main badi mushkil se apni siskari ko rok rakha thaa. kyonki main nahi chahta thaa k mummy ko pata chale ki main jag ratha

thaa. laghbagh 15 minutes mere lund choosne ke baad mere lund ne mummy ke mooh main garam garam virya ki pichkari chood dee laghbagh 5-6 baar pichkari chhodne ke baad mummy ne mere lund ko choosna jari rakha aur puri tarah se virya-rus peen eke baad jab mere lund ne sikudna

shuru kiya toh mummy ne mere lund ko chhod diya. Mujhe aise laga jaise mere shreer se jaan hi nikal gayee ho. Kuch der mere lund ko apne haathon se sehlane ke baad mummy phir meri taraf peeth kar ke so gayee.

Dosto.. aapko ye story kaise lagi ...

Baki agle part_4 mein likhunga...
 
Part - 4

Jaise ki main aapko apni pichhli stories (Part 1 Part 2 and 3) mein bataya k mein bachpan se hi mummy papa ka sex dekh kar hi bada hua hoo. Pichhli story mein (part_3) main mummy ne mujhe soya jankar mere lund ko pura mooh mein dal kar mera lund choosa aur mera sara gada gada pani pee

liya jis se mujhe b atam-santushti mili.

Ab mujh se se sehan nahi ho raha thaa. main mummy ko chodna chahata thaa lekin mein chahta thaa ki mummy ko mein kuchh na kahu, balki mummy khud he apne

aap ko chodne ke liya kahe. Main is ke liye plan bananey laga. Agle din papa ko kuch rishtedaar key yahan kuch dino ke liye kaam thaa iss liye who subah jaldi se tayyar ho kar train

pakad kar chale gaye. Ab hum dono ghar mein akele thee. Us din mummy ne b kaam se chhuti le lee aur kaam par nahi gayee. Main samajh gaya ki mummy ka dil dol raha hai aur mere lumbe mote lund ko pana chahti hai. main subah jaanboojh kar leit tak soya raha aur jab mujhe andaja ho gaya ki mummy mujhe uthane ke liye

aa rahi hai toh main peeth ke bal let gaya aur apne lund ko tight kar ke so gaya. Mere lund aise ho gaya jaise koi tent bana huya ho


Mummy bahar se mujhe awazein maar rahi thee.. ravi .. o ..ravi.. uth jaaa ab toh.. bahut subah ho gayee

hai... bahut kaam hai ghar mein,... maine kapde b dhone hai... ravi... uth ja beta ...

mujhe mummy k awazein aa rathi thee par main unko ansuna kar raha tha... taki

mumy room mein aa kar mere lund ko dekhe aur unka mood kuchh seksy ho jaye.. aakhi kuch der baad mummy mujhe pukarti huyee kamre mein aaye aur jaise hi ander aayee unki nazar seedhe mere tight lund par gayee jo chadar ke ander se
tent bana kar khara thaa
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main chader ke ander se ek hole se sab dekh raha thaa.. mummy mere tent bane huye lund ko door se nihar rahi thee. Is time mmummy ne ek purani se sari dali huyee thi

Unka blouse bahut he tight thaa, mummy ke mummy aise lag rahe the jaise big-big bhare huye gubbare hon.

mummy ne ek pal ke liye idhar udhar deha aur phir dheerey se chupke se mere paas aa gayee aur apna ek haath aagey kar ke mere lund ke supare ko chander ke upar se hi apni muthi mein le liya aur pyar se sehlane lagi
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mummy ki saansey
bhari bhari ho rahi thee... phir mummy ne apna dusra haath aagey bada diya aur mere lund ko dono haatho mein le kar sehlane lagi.. mera lund puri tarah se tight ho kar pathar jaise sakht ho ratha tha.. mummy ke dono haatho se mere supara bahar

ho raha tha... mummy ke mooh se siskari nikli .. pata nahi mummy kya soch rahi

thee.. aakhir mummy se raha nahi gaya aur unhone chadar utar kar mere lund ko pakad liya jo k abi b pajama ke ander tha
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mujhe mummy ke haatho ka ahsaas ho

raha thaa... mummy se raha nahi gaya.. unhone mera pajama ka nada b khol diya..aur lund ko apne dono haatho main le kar mere suparey ko upar neeche karne

lagi.. mere lund pathar ki tarah se sakht ho raha thaa. Mere bistar ke paas

baithi huye mere lund ko pyar se sehla rahi thee

Aur mere lund se khel rahi thee. Mummy ne mere lund ke supare ko apne hontho se laga liya aur supare ko jor jor se choosne
lagi
aur phir mere pure lund ko he apne mooh mein bhar liya.. adha lund
unke mooh mein aur adhe lund ko apne hathon main bhara huya thaa mummy ne
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akhir mummy se raha nahi gaya aur who bol hi padi..uth rave bete .. uth... naa dekho tumhari mummy ka kya haal hai.. kyon tarpa rahe ho... utho naa.. dekho tum,ravi mummy kaise tarap rahi hai...utho aur apni mummy ki bhookh shant karo..

akhir mujh se b raha nahi gaya aur maine chadar ek taraf dal dee
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Kya baat hai mummy.. kehte huye mere hontho par muskarahat thee aur main muskura raha thaa. Mere mooh k taraf dekh kar mummy ne kaha... jaise too kuch nahi janta..kyon

tarpa raha hai.. maine kaha .. main kahan tarpa raha hoo.. mmmy .. tarpa toh aap hi

rahe ho..kitne dino se.. pata nahi kitno dino se aapke naam ki muth mar raha hooo. Ye kehkar main apni mummy ko neeche se utha kar apni bahon mein bhar liya

aur bistar par apne sath bitha liya.. mummy mere seene se lagkar rone lagi.. maine mummy ko chup karaya aur bola..bus karo mummy ab main aapko aur preshan nahi

karunmga...aap jo kahogi main apka kehna manuga..aap bus rona bas karo.. yeh

kehkar maine b mummy ko apni bahon mein jor jor ka bhar ke dabane laga.. mummy ke mummey meri chhati mein dabne lage thee. Mummy ke hatthon main mera tight huya lund abhi b thaa aur mummy mere lund ko jor jor se daba rahi thee.

Maine apni mummy se poocha mummy tume mera lund pasand hai... ha beta.. tumhara lund toh kisi ghore ya gadhe ke lund ke saman hai..(mummy sharmate huye boli)..tumhara lund to tumhare papa se b lumba or mota hai...maine jab iss lund ko pehli bar dekha thaa. .. tabhi soch liya tha..ki iss lund se main apni choot ke

tukde tukde karwaungi.

sun kar apne aap par biswas nahee kar pa raha tha aur ma se lipat gaya aur unko chumte hue bola, "ooh, ma. Mera sapna pora honewala hai, mujhko eh biswash nai

horaha hai." ma ab bistar par se uth kar kharee ho gayee aur apni blouse kholne lagee
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Jaise hi ma ne apni blouse utaree to mai ma ki kharee kharee chunchee bra



me dekh kar garam ho gaya aur mera lund upar neeche hone laga. Phir ma ne

dheere-2 se apni saree utarnee shuru kia aur saree utar kar apni petticoat bhi utar diya. Ab ma mere samne sirf bra aur panty me khari thee aur isse ma ki nangee sbadan saf saf dikh raha tha. Mai iske pahale kabhi apni ma ko nangee nahee

dekha tha aur is samay unko sirf panty aur bra


me dekh kar mera matha ghum gaya. Mujhe ehsas hua ki meri ma bahut hi sundar aurat hai. Unka ha rang bilkul sudol sahi nap ki hai. Meri ma kareeb 5'5" lambee hai aur unka wajan kareeb 60 kg hoga. Unke nange mummey bahut hi khubsurat hai aur unki kamar to lazabab, bilkul

patlee si. Unka chutar ka kuch na pucho, gol gol thora phaila hua. Meri ma ki tange bahut hi sundar aur sath me unki janghe bilkul tarashi huyee murti ke jaise lambi lambi aur attrective. Meri ma ke shareer par bal kuch jyada hi hai jo ki badan ke

neechle hisse me aur bhi jyada hai. Lekin unke bal jyada hone se kuch pharak

nahee parta, kyonkee jyada se wo aur bhi sexy lag rahee thee. "tume apni mummy ka nanga shreer pasand hai?" ( ab mein mummy ko maa likhunga) maa ne mujhse

pucha. Thora ruk kar maa ne phir pucha, "kya tumhe is badan se maza mikaga, kya tumhe hamari eh nanga badan pasand hai?" mai ma ko hairani se dekhta raha.

Mujhe eh samajh me nahee aa raha tha ki kahin ma mujhse mazak to nahee kar

rahee hai? Mai jab ki ankhon me dekha to paya ki ma bahut serios hai. Meri ma bahut ghabra bhi rahee thee. Lekin ma ko eh pata nahee tha ki mai unkee baton par kya kahunga aur isiliye who ghabra rahee thee.

Maine apni maa ko unki chutar ko pakar kar apne pas kheench liya aur apna sir unke pet se ne sata diya aur unke pet ko chumne laga. Mai maa ki pet par apna sir rakh kar unke badan ki khusbu sungh raha tha. Maa ki badan ki khusbu sunghte hi

mera khoon khaolne laga aur mai pagal hota jar aha tha mere lund tan-tana kar

upar neleche salami de raha thaa.. Thori der ke bad ma ne mujhe apna kurta utarne me sahayog diya aur mai apna kurta utar diya. Phir ma ane mere paijama ka nara

bhi kheench diya aur mera paijama mere pairon ke neeche khisaka diya. Maine apne chutar upar kar ke pajama ko nikalne mein maddad kar di. Paijama neeche

girte hi mera khara lund bahar aakar hawa me jhulne laga. Is samay mera lund

khara ho kar kareeb 8" lumba ho gaya tha aur puri tarah se tana hua tha apni motai ki darshan kara raha thaa. Mera supara hamesha ki tarah se tight hone ki vajah se lal ho raha thaa. Mera khara lund ko dekh kar meri ma muskura di aur sirf
Aaj k liye itna he
 
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