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जब जब स्मृति अपनी नशीली आँखे उपर करके देखती तो कुशल और भी पागल हो जाता था. उसकी आँखे आज कुच्छ डिफरेंट ही लग रही थी.

सीने को अच्छे तरीके से किस करके वो नीचे लंड तक पहुँचती है, अब वो उसके शॉर्ट को उतारने के लिए उसे बेड से उठती है. कुशल तो जैसे रिमोट कंट्रोल से कंट्रोल हो रहा था. कुशल की आँखो मे देखते हुए स्मृति उसके शॉर्ट को उतारती है. इन सारे आक्षन्स से कुशल का एग्ज़ाइट्मेंट सातवे आसमर पर था और वो स्मृति के इस वाइल्ड रूप से इंप्रेस भी था.

कुशल का शॉर्ट उतारता है और उसका 8 इंच का मोटा लंड बाहर आ जाता है. स्मृति टाइम ना वेस्ट करते हुए अपने गीले और गुलाबी होंठ उसके लंड पर रख देती है.

" आहह.....मेरी जाआअंन्न...मेरी रातो की राणिीईईईईईईई..... आअज्जजज्ज्ज्ज चोद्द्द्द्द्द्द्द दूँगा तुझीए...उफफफफफफफ्फ़..सेक्शययययययययययी.........और चूस..ऐसे ही चूस......" कुशल आज उसके लंड चूसने के तरीके से भी इंप्रेस था. अपना पूरा मूँह खोल कर वो उसके लंड को चूस रही थी. चूस क्या रही थी लंड को मूँह के कोने कोने मे ले जा रही थी. इतना बड़ा लंड होने के बावजूद वो उसे अपने मूँह के पूरा अंदर ले जाना चाह रही थी.

कुशल के लिए एक अड्वेंचर था कि कैसे स्मृति आज उसके लंड को चूस रही थी. मूँह के साइड तक को जगह मे वो लंड को घुमा घुमा कर ले जा रही थी.

"ओह....डार्लिंग..तू गजब है...चूस...ऐसे ही चूस...आआहह" कुशल के हाथ अब स्मृति के बालो मे पहुँच गये थे और उसकी गर्दन को पकड़ पकड़ कर वो खुद ही आगे पीछे कर रहा था.

"उफफफफफफ्फ़...कितनी सेक्सी है तू डार्लिंग...म्*म्म्मह...ऐसे हीईीईईई.....इतना....मज़ा...तो पूरी लाइफ मे नही आया............" कुशल का एग्ज़ाइट्मेंट बढ़ता ही जा रहा था.

स्मृति यहीं नही रुकी, उसके लंड को अच्छे से गीला करने के बाद वो उसकी बॉल्स तक पहुचि. स्मृति उसके लंड को उपर करके और उसकी बॉल्स को किस करने लगती है. क्या सीन था, इंडियन एन्वाइरन्मेंट मे ऐसे हर्डली ही नसीब होता है.

कुशल तो जैसे होश मे नही था, लंड के साथ उसकी गर्दन भी उपर आसमान की तरफ हो चुकी थी. स्मृति अब उसके बॉल्स को चूस रही थी

कुशल को वैसे ही प्रीति ने बहुत गरम कर दिया था और वो नही चाहता था कि स्मृति की कोई भी ख्वाहिश आज अधूरी रह जाए नही तो वो उसे खा जाएगी. इसीलिए उसे अहसास हो रहा था कि अगर और थोड़ी देर स्मृति ने उसकी बॉल्स चूसी तो उसका सारा माल निकल जाएगा.

"उफफफफफफ्फ़..ग्रेट....यू आर आ रियल सकर......... आहह....नाउ इट ईज़ माइ तुर्न......" कुशल धीरे से अपने लंड को स्मृति के मूँह से हटाने लगता है.

स्मृति अपने आप को सेट करते हुए खड़ी होती है और धीरे धीरे चल कर सामने वाले सोफे पर दोनो हाथ टिका कर डॉगी स्टाइल मे खड़ी हो जाती है. पीछे से एक हाथ ले जाते हुए वो एक फिंगर अपनी चूत मे घुसा देती है -" लाइयन....आआआ..चूस ईसीईए.....खा जा मेरी चूत को...बहुत प्यार है ना तुझे इससे...." स्मृति कुशल की तरफ गर्दन करते हुए कहती है.

कुशल वाकई मे आज इस रूप से अंजान था. स्मृति के रूप मे उसके घर मे एक सेक्सी स्लट रह रही थी. कुशल आगे बढ़ता है और घुटनो के बल उसकी गान्ड के पीछे बैठ जाता है, टाइम बिना वेस्ट करे वो अपने मूह को उसकी चूत पर रख देता है -

"आआहह.....लाइयन....यू मदरफकर लिक्क माइ पूस्सयी...चाट मेरी चूत को....." स्मृति की इस सॉलिड आवाज़ से कुशल एक बार को दहल ही जाता है लेकिन उसकी पुसी को चाटना चालू रखता है. अपनी गान्ड को वो और भी ज़्यादा पीछे कर लेती है जिससे कि उसकी चूत और भी खुल कर कुशल के मूँह मे आ सके.

" उफफफफफफफफफफ्फ़.....लाइयन........घुसा अपनी जीभ अंदर........." कुशल पूरी ताक़त के साथ लगा हुआ था और उसकी चूत चाट रहा था. स्मृति भी अपनी कमर को धीरे धीरे हिला रही थी. उसकी चूत से निकलने वाला रस कुशल को और पागल कर रहा था.

स्मृति अपने हाथ को भी अपनी चूत पर ले जाती है और उपर के हिस्से को छेड़ने लगती है, पानी और भी ज़्यादा निकलने लगा था.

"म्*म्म्ममह..ग्रेट....यू फकर........आहह..." स्मृति अपनी गान्ड को और भी ज़्यादा हीला रही थी.

ऐसा बस कुच्छ मिनिट और लगा कि स्मृति और भी ज़्यादा वाइल्ड रूप मे आ गयी -

" फक मी लाइयन..फक मी बस्टर्ड....शो मी युवर पवर...आहह...यू मदरफकर.......फक मे......मार मेरी चूत को....फाड़ दे ईसीईई....." स्मृति अब चुदने को तैयार थी.

चुदने से पहले एक बार फिर से स्मृति पीछे मुड़ती है और उसके लंड को चूसने लगती है. कुशल की हालत खराब थी, वो चोदने के लिए तैयार था लेकिन स्मृति की एक्सपेक्टेशन्स आज कुच्छ ज़्यादा ही थी.

जैसे वो लंड को चूस्ते हुए उपर देख रही थी तो कुशल और भी ज़्यादा एग्ज़ाइटेड हो रहा था. उसके लंड को अच्छे चूसने के बाद वो फिर से डॉगी स्टाइल मे आती है और कुशल को इन्वाइट करती है आ और कर दे मेरमेरा काम.

कुशल आगे बढ़ता है और अपना लंड उसकी चूत पे टिकाता है " घुसा दे इसे पूरा...पहुँचा दे इसे एंड तक...फक मी हार्ड टुडे..." स्मृति की ये बात सुन कर वो एक जोरदार धक्का लगाता है और 8 इंच का मोटा लंड स्रर्र्ररर से अंदर घुस जाता है.

" लाइक तट....आआअहह" स्मृति आज जैसे रुकने का नाम ही नही ले रही थी. लेकिन कुशल भी अपने अंदर की पवर को जगा रहा था.

कुशल ने तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए थे और उधर स्मृति भी अपनी चूत को हीला हीला कर धक्के लगवा रही थी. चूत मे लंड के घुसने वाला साउंड, और उन दोनो के बॉडी के टकराने वाला साउंड दोनो ही ही रूम का टेंपरेचर बढ़ा रहे थे.

" आअहह.. फक मी.फक मी हार्ड..फक मी......खोल दे आज मेरी चूत को.....हार्ड...हार्ड...म्*म्म्ममह" स्मृति भी खूब उच्छल उच्छल कर धक्के लगा रही थी.

"आहह.....यू..माइ बिच......आइ विल फक यू...यू सो टेस्टी......." कुशल की भी आवाज़े निकालने लगी थी.

पूरा रूम फक्किंग साउंड से भर गया था. स्मृति अपने एक्सपीरियेन्स का पूरा फ़ायदा उठा रही थी और लंड को बार बार अंदर लेने मे सक्सेस्फुल हो रही थी.

स्मृति की चूत से निकलने वाला रस धीरे धीरे कुशल के बालो तक भी आ चुका था. गजब का घर्षण हो रहा था.

"ओूऊऊऊऊऊ....लाइयन...फाड़ दे मेरी चूत......मार इसको.......ग्रेट....."स्मृति के चिल्लाने से ही पता लग रहा था कि वो आज कितनी मस्त हो चुकी थी.

कुशल भी पूरी ताक़त के साथ धक्के लगा रहा था. स्मृति की पूरी बॉडी काँप रही थी और कुशल उस पर अपने मोटे और तगड़े लंड से दबा दबा के धक्के लगा रहा था. बहुत ही गजब सीन चल रहा था.

" लाइयन.....यू अमेज़िंग......और मार मेरी चूत को...ग्रेट...आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्व्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..यू आर माइ ड्रीम फकर...आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह...आअहह.आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह" और स्मृति के हाथ सोफे पर कस जाते है. उसका रस निकल गया था.

कुशल को प्रीति वाला इन्सिडेंट याद आ गया और वो और तेज तेज धक्के लगाने लगा. कुच्छ ही सेकेंड्स मे वो अपना लंड बाहर निकालता है और उसकी पिचकारी से स्मृति की पूरी पीठ भर जाती है.

स्मृति के चेहरे का तेज देखते ही बनता था.

"थॅंक्स फॉर मेकिंग मी सॅटिस्फाइड... लाइयन...अब तुम जब चाहो वो कर सकते हो जो तुम्हारी ख्वाहिश है." स्मृति का इशारा अपनी गान्ड की तरफ था. कुशल का अभी तो एंडिंग पॉइंट हुआ था और उसे थोड़ा टाइम चाहिए थे संभलने के लिए की तभी -

"कुशल....कुशल..कुशल...कुशल..." उपर से प्रीति की चिल्लाने की आवाज़ आती है. शायद वो जाग गयी थी.

दूसरी तरफ -

सिचुयेशन तो काफ़ी चेंज हो चुकी थी लेकिन वहीं से शुरू करते है जहाँ से छोड़ा था. जैसे की आप जानते है कि आराधना ने नयी ब्रा पैंटी पहन ली थी अपनी चुदाई के बाद और पंकज उसे घूरता है -

पंकज की निगाहे फिर से आग उगलने लगी थी और वैसे सीन भी कुच्छ ज़्यादा ही कामुक था "क्या अभी भी मन नही भरा जो ऐसे देख रहे है.???" आराधना अपनी पैंटी को पूरा उपर चढ़ाने के बाद और पंकज की तरफ देखते हुए बोलती है
पंकज का मूँह खुला का खुला था. उसने कभी आराधना को इतना सेक्सी नही देखा था, हाँ आइडिया लगता था कि वो सेक्सी है लेकिन आराधना के इन मोस्ट एरोटीक ब्रा आंड पैंटी ने पंकज के दिमाग़ की तारो को झकझोड़ दिया था.

जब आराधना ने पंकज से वो सवाल किया तो पंकज ने कोई जवाब नही दिया और मूँह खोल का ऐसे ही देखता रहा. पैंटी पूरा उपर चढ़ाने के बाद आराधना पंकज की तरफ बढ़ती है और एक चुटकी उसकी आँखो के सामने बजाते हुए स्माइल करती है.

" डॅड.. यू ओके?" बहुत प्यारी स्माइल के साथ वो अपने डॅड को जागती हुई नींद से जागती है. पंकज हड़बड़ा जाता है.

"ओह्ह्ह.. यस. यस" और ये बोल कर वो अपना चेहरा दूसरी साइड कर लेता है. पंकज को अहसास हो गया था कि आराधना ने उसे पकड़ लिया है. पंकज अब धीरे धीरे रूम के कॉर्नर मे चल कर चेर पर बैठ जाता है, ये वोही चेर है जिस पर बैठ कर और आराधना को अपने उपर बिठा कर उसके जवान जवान यौवन के तारो को छेड़ दिया था.

पंकज अब आराधना के सामने बैठा था और काफ़ी सीरीयस लग रहा था. वो अपने सिगरेट बॉक्स को उठाता है और एक सिगरेट को बाहर निकाल कर अपने लाइटर से जलाता है. आराधना अब खुद जाकर अपने बेग से एक ट्रॅन्स्परेंट शिफ्फॉन टॉप निकालती है और उसे पहन ने लगती है.

" डॅड.. . सीरीयस लग रहे हो.. सब ठीक तो है ना...?" आराधना उस टॉप को पहनते हुए बोलती है. वो टॉप बिल्कुल ट्रॅन्स्परेंट था, और आराधना ने अंदर की ब्रा पैंटी उसमे क्लियर दिखाई दे रही थी. आराधना का ये बोल्ड अंदाज़ बिल्कुल नया था.

" नही... बस ऐसे ही...." पंकज फिर से सीरीयस रहते हुए जवाब देता है. आराधना ये सुनकर धीरे धीरे उसके पास बढ़ती है. उसके पास पहुँच कर उसकी आँखो मे आँखे डालते हुए बोलती है -

" क्या...आप अपसेट है? बताओ ना कि क्या बात है.. क्या.आपको अच्छा नही लगा..?" आराधना थोड़ा हेज़िटेट हो होती है लेकिन फिर भी पंकज की आँखे मे देखते हुए बोल देती है.

पंकज खड़ा होता है और आराधना को हग करता है. "ऐसा कुच्छ नही है... तुम्हारे साथ बिताए आज के पल से तो मैं अपनी जवानी के बेस्ट टाइम भी भूल गया हू.. अच्छा मेनटेन किया है तुमने अपने को... काफ़ी टाइट हो..." और ये बोलते हुए वो आराधना की गान्ड पर एक चिकोटी काट देता है.

" ऊूउउ.." आराधना उसकी इस आक्टिविटी से चोंक जाती है क्यूंकी वो मेंटली प्रिपेर्ड नही थी इस सिचुयेशन के लिए लेकिन उसे अच्छा भी लगता है.

" कसम से आप बड़े नॉटी रहे होंगे..अपनी जवानी मे...." और ये बोलते हुए आराधना उसके कंधे पकड़ कर उसे फिर से चेर पर बिठा देती है.

" जवानी मे तो हर कोई नॉटी होता है.. देखो आज तुम भी कितनी नॉटी रही... तुम्हारी वाय्स तो तुम्हारी मोम से भी सेक्सी है.." पंकज थोड़े फन्नी वे मे आराधना से बोलता है.

" डॅडी.. आप बहुत वो हो..." और आराधना उसके सीने मे प्यार से दो मुक्के जमा देती है. और फिर उसी की गोद मे बैठ जाती है.

पंकज उसे अपने सीने से लगा . है. आराधना के ग्लोयिंग चीक्स बता रहे थे कि कैसे उसे लंड का इंजेक्षन लगा और कैसे उसकी बॉडी चेंज हो रही है.

" डॅड. आपने ये क्यू बोला कि जवानी का बेस्ट टाइम भूल गया.. क्या आपको मोम प्यार नही करती थी..." आराधना उसके सीने मे मूँह छुपाए बोलती है.

" मोम की कौन बात कर रहा था.. जवानी तो शादी से कई साल पहले शुरू हो जाती है...." पंकज उसे बिना झिझके ये बात बता देता है.

आराधना उसकी ये बात सुन कर चोंक जाती है और सीने से मूँह उठा कर उपर देखती है. " ओह माइ गॉड... तो इसका मतलब आप...आप शादी से पहले भी...शादी से पहले भी कुच्छ कर चुके थे...." आराधना को थोड़ी शरम तो आ रही थी ये बात पुच्छने मे लेकिन वो पुच्छ ही लेती है.

पंकज आराधना का एक हाथ पकड़ता है और उसकी चूत के सामने से ले जाते हुए अपने लंड पर रख देता है. " पता है जब ये बड़ा होता है ना तो सोने नही देता.. शादी तक कहाँ इंतेज़ार होता है. अगर शरीफ बन कर इंतेज़ार भी करो तो सर मे दर्द रहता है और कहीं मन नही लगता. उपर वाले ने हमे बनाया ही इस तरीके से है की टाइम बाइ टाइम नीड्स बदलने लगती है. इसकी नीड तो तुम जानती ही हो..." पंकज आराधना के हाथ को अपने लंड पर दबाते बोलता है.

आराधना के हाथ जैसे ही लंड पर पहुँचे उसको समझ आ गया कि वो फिर से तैयार होने वाला है. " तो इस जनाब का अभी पेट नही भरा.." आराधना पंकज की गोद से खड़ी होती हुई और उसके लंड की तरफ देखते हुए बोलती है.

" पेट ऐसे भर जाता तो बात ही क्या थी..." पंकज भी आराधना की तरफ देखते हुए रोमॅंटिक अंदाज़ मे बोलता है. आराधना ये बात देख कर समझ जाती है और वो स्माइल करके पंकज से दूर खड़ी हो जाती है.

" तो आप रसिया रहे हो जवानी मे... मोम से . पहले ही आप काम कर चुके थे... लेकिन अगर मोम को पता चल जाता तो.." आराधना सिचुयेशन को कॉनवर्ट करने के लिए ऐसा बोलती है.
 
पर प्रीती ने तुरंत अपनी पूरी ताकत लगाकर उसे अपने से अलग किया और बोली

प्रीती -"ओये स्टुपिड, यहाँ खुले में क्यों ऐसा कर रहा है, अगर मोम ने देख लिया तो ......पागल कहीं का" प्रीती ने उसे कहा पर उसकी बात में गुस्सा कम और चिंता ज्यादा थी कि कहीं कोई देख ना ले

कुशल -"पर मोम तो अभी किचन में है, करने दे ना यार किस....पूरी रात तेरे बिना तडपा हूँ......."

प्रीती -"वो तो मुझे पता है कि कितना तडपा है......जरुर पूरी रात मोम की जमकर ली होगी" प्रीति ने बड़े ही स्लो वौइस् में कहा ताकि कुशल को भी न सुनाई दे

कुशल -"क्या हुआ, दे न एक किस"

प्रीती -"नही कुशल समझा कर यार, अभी मोम है, अभी नही प्लीज़" प्रीती ने उसे समझाते हुए कहा

ये कहकर प्रीती ने कुशल को साइड हटाया और फिर अपने कमरे की तरफ जाने के लिए सीढियों की तरफ बढने लगी, तभी अचानक स्मृति भी किचन से बाहर आ गयी,

स्मृति - "अरे प्रीती बेटी, आ गयी तू, अच्छा तू हाथ मुंह धोकर आजा फिर साथ में नाश्ता करते है"

प्रीती -"मोम, आपने तो खा लिया होगा ना" प्रीती ने कहा, दरअसल वो तो ये कहना चाहती थी कि मोम आपने तो कुशल का लंड खा लिया होगा ना अपनी चूत में

स्मृति -"नही बेटा,हम भी तेरा ही वेट कर रहे थे"

प्रीती - "मुझे लगा कुशल यहाँ है तो आपने तो जी भरकर खा लिया होगा......नाश्ता"

स्मृति -"नही बेटी, हम दोनों ने ही नही खाया, अब तुम जल्दी से हाथ मुंह धोकर आ जाओ फिर हम साथ में मिलकर खाते है"

प्रीती तो आज डबल मीनिंग बाते कर रही थी, और जब स्मृति ने कहा कि साथ में खाते है तो उसे लगा कि उसकी मोम उसे कह रही है कि वो दोनों साथ में मिलकर कुशल का लंड अपनी चूत में ले, ये सोचकर ही उसका दिमाग भन्ना गया, और उसके गाल लाल होने लगे

पर उसने अपने दिमाग को झटका और बोली

प्रीती -"मोम आप नाश्ता लगाओ मैं बस 5 मिनट में आती हूँ"

ये कहकर प्रीती अपने कमरे में चली गयी, इधर कुशल ने एक बात नोटिस की कि प्रीती कल पहन कर कुछ और गयी थी और आज वापस कुछ और पहन कर आई है, पर कुशल ने सोचा की शायद बारिश की वजह से चेंज किया हो और उसने इस ओर ज्यादा ध्यान नही दिया

हकीकत में तो कल रात सिमरन और प्रीती की मस्ती के चक्कर में प्रीती के कपड़े पूरी तरह अस्त व्यस्त हो चुके थे, और उस पर पड़ी सलवटो से कोई भी अनुभवी इन्सान बता सकता था कि रात को उसने क्या गुल खिलाये होंगे, इसिलए सिमरन ने उसने अपने कपडे दे दिए

इधर पंकज और आराधना भी बस अब घर पहुचने ही वाले थे
 
अगली सुबह इन सब लोगो के जीवन में एक नया मोड़ लेकर आने वाली थी, आराधना और पंकज दिल्ली से वापस देहरादून अपने घर की तरफ रात को ही रवाना हो गये थे, पंकज ने घर पर फ़ोन भी नही किया था कि वो और आराधना वापस घर आने के लिए निकल चुके है, और लगभग सुबह 8 बजे के करीब वो दोनों घर पहुंच जायेंगे, इसलिए स्मृति और कुशल को इस बात की बिलकुल भी भनक नही थी कि अभी अभी शुरू हुआ उनका मिलन सिर्फ एक रात का ही है, क्यूंकि कल से तो पंकज फिर से स्मृति के साथ सोयेगा, इधर प्रीती भी इस खबर से बिलकुल अनजान थी, परन्तु फिलहाल तो सभी लोग अपनी अपनी मस्ती में लगे हुए थे

अब कहानी को वापस कुशल और स्मृति की तरफ मोडते है, सिचुएशन थोड़ी चेंज हो चुकी है पर हम वहीं से शुरू करते है जहाँ छोड़ा था, रात को मालिश के बहाने कुशल ने खतरनाक तरीके से अपनी मम्मी स्मृति की चूत और गांड मारी थी और स्मृति ने भी बड़े प्यार से कुशल के लंड को लिया था, चूँकि स्मृति ने पहली बार अपनी गांड मरवाई थी इसलिए उसने कुशल के साथ सिर्फ एक ही बार चुदाई की, हालाँकि कुशल दोबारा स्मृति को चोदना चाहता था परन्तु स्मृति के दर्द की परवाह उसे भी थी, इसलिए उसने चुपचाप स्मृति को अपनी बाँहों में कडल किया और आराम से अपना खड़ा लंड स्मृति की चुत में फंसाकर सो गया, स्मृति को भी कुशल की इस बात पर बहुत प्यार आया कि कुशल उसकी इतनी परवाह करता है, ये सोचकर उसका प्यार कुशल के प्रति एक प्रेमी के रूप में छलकने लगा, और वो भी आराम से कुशल का लंड अपनी चूत में फंसाकर सो गयी
सुबह के लगभग 7 बजने वाले थे, ठंडी हवा के झोंको से स्मृति की आँखे खुल गयी, उसके पुरे शरीर में एक अजीब सी मीठी मीठी खुमारी चढ़ी हुई थी, रोम रोम पुलकित हो रहा था, आँखों में वासना और संतुष्टि के मिले जुले भाव झलक रहे थे, स्मृति ने पीछे पलट कर कुशल की और देखा तो सोते हुए कुशल के मासूम चेहरे को देखकर उसे कुशल पर प्यार आ गया, उसने कुशल का माथा चूमने के लिए घूमना चाहा पर अचानक उसे महसूस हुआ कि उसकी चुत में कुछ फंसा हुआ है ,

उसने अपनी चूत की तरफ देखा तो उसके होठों पर एक कातिल मुस्कान आ गयी, उसकी चुत में अभी भी कुशल का आधा मुरझाया लंड घुसा हुआ था, स्मृति ने महसूस किया कि मुरझाने के बाद भी कुशल का लंड वाकई काफी बड़ा था,

"ये तो अपने बाप से भी आगे निकल गया" स्मृति ने मन ही मन मुस्कुरा कर सोचा, क्यूंकि कुशल का लंड वास्तव में पंकज के लंड से भी ज्यादा बड़ा और मोटा था,

स्मृति ने बड़े प्यार से कुशल के लंड को अपनी कोमल हथेलियों में जकड़ा और बड़े ही धीरे धीरे उसे अपनी चुत से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी, पर बहुत ही जल्दी उसे ये महसूस हो गया कि ऐसे तो बात बनने की बजाय बिगड़ जाएगी, क्यूंकि अर्द्ध निद्रा में भी जब कुशल को अपने मुरझाये से लंड को स्मृति की कोमल और गर्म हथेलियों का अहसास अपने लंड पर हुआ तो धीरे धीरे कुशल का लंड दोबारा स्मृति की चुत के अंदर ही फूलने लगा,

स्मृति को भी अपनी चूत में कुशल के धीरे धीरे मोटे होते लंड का अहसास होने लगा था, और उसकी चुत उस लंड को अपनी दीवारों के इर्द गिर्द कसना शुरू कर चुकी थी, स्मृति को ये अहसास बहुत ही ज्यादा उत्तेजित करने लगा था, और इसीलिए उसकी चुत में से अब कामरस की कुछ बुँदे पिघल कर कुशल के लंड को भिगोने लगी थी,
कामरस की ये अद्भुत बूंदों ने कुशल के लंड के लिए किसी टॉनिक का काम किया और कुशल का लंड अब बड़ी तेज़ी से होश में आने लगा, जल्द ही कुशल का लंड पूरी तरह तनकर स्मृति की चुत की नसों पर कस चूका था.
स्मृति को भी इस कसावट से बड़ी ही मीठी मीठी उत्तेजना महसूस होने लगी, और उसे पता ही नही चला कि कब उसने अपनी गांड को मटका कर अपनी चूत के अंदर कुशल के लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया, बेचारा कुशल तो अभी भी नींद में था और उसे लग रहा था कि ये कोई सपना चल रहा है,

स्मृति ने कुशल को नींद में चोदना शुरू कर दिया, स्मृति के लिए इस प्रकार का ये पहला सेक्स था और इसीलिए उसे बहुत ही ज्यादा उत्तेजना की अनुभूति हो रही थी, अब स्मृति ने तेज़ी से अपनी चुत को आगे पीछे करके कुशल का लंड घिसना शुरू कर दिया था,

स्मृति के मुंह से अब उत्तेजना पूर्वक आवाज़े निकलनी शुरू हो गयी थी,

"उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह श्ह्ह्ह्ह्ह गलपप्प्प्प्प्प गलपप्प्प्प्प्प गलपप्प्प्प्प्प्प आराम्म्म्ममममम सीईई अहह
उःन्ह्ंहंहंहंह्न बेटेयाआया नहियीईईईई अन्न्‍णणन् उःन्णणणन् ईई श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
उफफफफफफफ्फ़ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह फाड़ दो मेरी चुत ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरे लायन आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, हाऽऽऽऽऽऽऽयय्यय मजाऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ रहाऽऽऽऽऽ है" स्मृति की सिस्कारिया अब जोर पकड़ चुकी थी,

स्मृति के मुंह से आ रही आवाजो ने जल्द ही कुशल को उसकी नींद के आगोश से बाहर ला दिया और उसकी आँखे खुल गयी, पर जब उसने देखा कि उसकी मम्मी उसके लंड को बड़ी तेज़ी से अपनी चुत में आगे पीछे ले रही है तो बड़ा ही उत्तेजित हुआ और फिर उसने धीरे से अपनी मम्मी की नंगी कमर पर अपना हाथ रख दिया
स्मृति को जब अपनी कमर पर किसी के हाथ का स्पर्श महसूस हुआ तो उसने पीछे मुडकर देखा और जब उसने कुशल की ऑंखें खुली पायीं तो स्मृति ने एक बड़ी ही कातिल मुस्कान कुशल की और बिखेर दी,

स्मृति को यूँ मुस्कुराता देख कर कुशल और भी ज्यादा मदहोश और उत्तेजित हो गया और फिर उसने बड़े ही कस कस कर शॉट लगाने शुरू कर दिए स्मृति की चुत में, कुशल के इन आक्रामक धक्को से स्मृति तो निहाल ही हो गयी, कुशल बड़े ही जबरदस्त तरीके से अब स्मृति को चोदने लगा,

लगभग 20 मिनट की धुआंदार चुदाई के बाद कुशल को लगा कि उसका मुठ निकलने वाला है

"हय्य्य्य.......मम्मीईईइ.......मेरा निकलने वाला है........कहाँ निकलूं??????......." कुशल लगभग चिल्लाता हुआ बोला
"हय्य्य्य............लायन बेटा. ..........निकाल दे अपने वीर्य को अपनी मम्मी की प्यासी चुत में........मैं तेरे पानी को अपनी चुत में महसूस करना चाहती हूँ....निकाल दे बेटा निकाल दे हाय्य्यय्य्य्य........." स्मृति भी बोली

"हय्य्य....मैं गया..........मोम..........फचाक .....फ्चाक्क्कक्क्क्क.........करके कुशल ने ढेर सारा वीर्य अपनी मोम की चुत में उडेंल दिया और फिर धीरे धीरे उसका लंड मुरझा कर खुद ब खुद स्मृति की चूत से फिसलता हुआ बाहर आ गया

स्मृति ने अपनी चुत की ओर देखा, वहां अभी भी कुशल के लंड से निकला पानी उसकी चुत से होता हुआ बेडशीट को भिगोने की कोशिस कर रहा था पर इससे पहले की ये अनमोल खज़ाना बेडशीट पर गिरकर खराब होता, स्मृति ने झट से उसे अपनी ऊँगली में लपेटा और चटकारे लेकर उसे चाटने लगी

"थैंक यू मोम ..........आज आपने मुझे बहुत ख़ुशी दी है" कुशल बोला

"तुझे कितनी बार कहा है कि तू जब मेरे साथ अकेला होता है तो तू मेरा बेटा नही बल्कि लायन होता है ......" स्मृति ने कुशल के गाल पर एक हलकी सही चपत लगाते हुए बोला

"ठीक है मेरी रानी, अब से ध्यान रखूंगा, अब चलो हम तैयार हो जाते है, प्रीती का आने का भी वक्त हो चूका है" कुशल ने कहा

कुशल अब पूरी तरह संतुस्ट हो चूका था,

वो अब उठा और सीधा बाथरूम की और जाने लगा, वहां खड़े होकर पेशाब करने की कोशिश करने लगा, पर एक बार वीर्य निकलने के बाद पेशाब आने में थोडा वक्त और मेहनत दोनों ही लगती है, कुशल ने बाथरूम का दरवाज़ा अभी भी खोल रखा था,

कुछ ही पलो में स्मृति भी बिलकुल नंगी अपने कुलहो को मटकते हुए वहां आई और अपने चेहरे और चूत को पानी से धोने लगी. कुछ देर बाद ही कुशल ने भी पेशाब कर लिया और उसके बाद स्मृति भी उसके सामने ही नंगी कमोड पर बैठकर मुतने लगी, उसकी चुत से पेशाब के साथ निकलती सिटी की मधुर आवाज़ से कुशल फिर से उत्तेजित होने लगा, पर उसे पता था कि अब प्रीति किसी भी वक्त आ सकती है इसलिए अब कुछ भी करना खतरे से खाली नही होगा, क्यूंकि प्रीति पहले से उस पर थोडा शक करती थी

थोड़ी देर में ही कुशल और स्मृति ने अपने अपने कपड़े पहन लिए, कुशल हॉल में आकर बैठ गया और स्मृति एक भोली भाली घरेलू ओरत की तरह किचन में जाकर नाश्ता तैयार करने में जुट गयी, क्यूंकि उसे भी इस बात का पता था कि प्रीती के आने का वक्त हो चला है ऐसे में अब कुछ भी करना मुमकिन नही

कुशल ने देखा कि बाहर हल्की हल्की बारिश आ रही थी, उसने सोचा कि शायद बारिश की वजह से प्रीति देर से भी आ सकती है, और वो अपनी मोम के साथ कुछ देर और मजे ले सकता है, यही सोचकर कुशल बस अभी खड़ा होकर किचन की तरफ जाने ही वाला था कि तभी बहार की बेल बज गयी

कुशल और स्मृति दोनों को इस बात का अच्छी तरह पता था कि ये कौन है? कुशल के अरमानो पर पानी फिर चूका था

पर फिर भी कुशल ने बड़े ही रिलैक्स तरीके से जाकर दरवाज़ा खोला, सामने प्रीती ही थी, प्रीती ने कुशल को देखते ही मन में सोचा कि जरुर पूरी रात मोम की चूत मारी है इसने और अब देखो कितना भोला बनकर खड़ा है

प्रीती -"अरे बुद्धू अब हट तो सही, आने दे मुझे, क्या बारिश में पूरी भिगोने का इरादा है पागल" प्रीती लगभग कुशल को धकेलते हुए बोली,

कुशल ने हटकर प्रीती को आने के लिए जगह दी पर तभी अचानक प्रीती का पैर फिसल गया और वो सामने की तरफ गिरने ही वाली थी की कुशल ने बड़ी फुर्ती से उसे पकड़ लिया और गिरने से बचा लिया, प्रीती अब कुशल की बाँहों में थी, उसका टॉप थोडा गिला हो गया था, और वो थोड़ी झुकी हुई थी इस कारण उसके गीले टॉप का गला लटक गया और कुशल को प्रीती की ब्रा दिखाई दे गई, प्रीती ने वाइट कलर की ब्रा पेहेन रखी थी, कुशल बड़ी होशियारी से प्रीटी की ब्रा में से उसके खूबसूरत मोटे बोबे देखने की कोशिश करने लगा

थोड़े गीले बाल, थोडा सा गीला उसका स्लीव लेस टॉप, सामने से थोड़ी सी गीली ब्लैक जींस वाली केप्री, उसके कंधे पे कुछ पानी की बूंदे फिसल कर उसके चिकने गोरे गोरे हाथों पे आ गई थी, उसका गीला टॉप सामने से चिपक गया था जिस वजह से प्रीती के बोबे बाहर निकल रहे थे, उसके टॉप के गीले होने के कारण कुशल को उसकी ब्रा की स्ट्रैप्स का शेप साफ़ साफ दिख रहा था और उसे साफ पता चल रहा था कि उसने अंदर वाइट कलर की ब्रा पेहेन रखी है

प्रीती को इस तरह देखकर कुशल के दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया था, और वो बस प्रीती की सुन्दरता में ही मंत्र मुग्ध सा हो गया, और फिर अगले ही पल उसने तुरंत प्रीती के गुलाबी पतले होठों को अपने होठों की कैद में ले लिया और जोर जोर से चुसने लगा
 
पंकज -"अच्छा आरू, अब मुझे बताओ की आखिर तुमने पिक्चर देखने से क्यों मना किया?"

फिर आराधना अपने पापा को बताने लगी कि कैसे शेट्टी ने उसके पिछवाड़े पर दो बार हाथ फेरा था, और कैसे उसकी बीवी ने उसे वाइफ स्वैपिंग के बारे में बताया था, हालाँकि आराधना ने वो भाई और बाप वाली बात छुपा ली

पंकज-" ओह तो वो हरामी मेरी बेटी पर ही गन्दी नजरे जमाये हुए था, अगर तुम मुझे वहीँ बता देती तो उस कमीने का मुंह तोड़ देता"

आराधना -" पर पापा अब हमे होटल चेंज करना होगा"

पंकज-" पर आरू मेरा कॉन्ट्रैक्ट वाला काम तो हो गया, इसलिए मुझे घर जाना होगा, और वैसे भी ये शेट्टी शहर में दिन भर काम काज के सिलसिले में कई होटलों में घूमता रहता है, इसलिए अगर उसने कही मुझे देख लिया तो कॉन्ट्रैक्ट वापस ले लेगा, हालाँकि मुझे कॉन्ट्रैक्ट की कोई प्रवाह नही"

आराधना -"तो पापा अब क्या करे?"

पंकज -"अच्छा तुम्हारा वो कम्पटीशन कब से शुरू है, मैं तुम्हे वहां हॉस्टल में छोड़ दूंगा और फिर मैं घर निकल लूंगा, जब तुम्हारा कम्पटीशन 5 दिन बाद खत्म हो जाये तो मुझे कॉल कर लेना मैं तुम्हे लेने आ जाऊंग"

आराधना ये सुनकर घबरा गयी , क्यूंकि उसे तो पता ही था कि कोई कम्पटीशन नही है वो तो घर से बहाना बनाकर अपने पापा से मिलने यहाँ आई है, अब आराधना को भी लगा कि उसे अपने पापा को सब सच बता देना चाहिए

आराधना -"पापा मुझे आपसे एक बात कहनी है, आप गुस्सा तो नही करोगे ना?"

पंकज -"अरे पगली तू तो मेरी जान बन चुकी है अब, तुझपे तो मैं कभी भी गुस्सा नही कर सकता, बोल जो भी कहना है"

आराधना -" पापा वो ....वो मेरा ...कोई कम्पटीशन नही है यहाँ , मैं घर पर झूट बोल कर आई थी, दरअसल मैं आपसे मिलने आई थी यहाँ, क्यूंकि आपके बिना मेरा पल पल कटना भी मुश्किल हो गया था, इसलिए मैं यहाँ आ गयी" आराधना ने एक साँस में सब सच बता दिया

पंकज -"तुम मुझसे इतना प्यार करती हो मुझे तो पता ही नही था, ठीक है आरू , एक काम करते है हम दोनों घर ही चलते है, क्या कहती हो, घर पर बोल देंगे कि तुम्हारा कम्पटीशन कैंसिल हो गया, ठीक है ना"

आराधना -"ठीक है पापा...थंक्स.. आई रियली लव यू पापा...."

ये कहकर आराधना पंकज के गले लग गयी, कुछ ही देर में वो लोग होटल पहुंच गये, पंकज ने होटल वालो से कहकर एक गाड़ी सिनेमा हॉल में भिजवा दी, और फिर वो और आराधना अपने सामान की पैकिंग करने लगे, जल्द ही उन्होंने अपनी पैकिंग पूरी कर ली, और फिर रात को ही वो दोनों घर के लिए निकल गये, वो लगभग 7-8 बजे के आसपास घर पहुंचने वाले थे
 
अब कहानी को सबसे डिमांडिंग करैक्टर की तरफ मोड़ते है यानि कि आराधना की तरफ
जब आराधना , पंकज, दीप्ती और शेट्टी , ये सब सिनेमा देखने के लिए गाडी में बैठे, तभी अचानक शेट्टी ने हल्के से आराधना की गांड पर हाथ फिरा दिया, आराधना को शेट्टी की इस हरकत पर बहुत गुस्सा आया, वो सोचने लगी कि उसकी बाप की उमर का एक आदमी आखिर कैसे उसके पिछवाड़े पर अपना हाथ फिरा सकता है, परन्तु गुस्सा होने के बाद भी आराधना कुछ नही कर सकती थी,
क्यूंकि एक तो वो उन लोगो के सामने पंकज की वाइफ होने की एक्टिंग कर रही थी, और दूसरा उसे डर था कि कहीं उसने कुछ रियेक्ट कर दिया तो शेट्टी उसके पापा का प्रोजेक्ट ना रोक दे

इसलीये आराधना ना चाहते हुए भी बिलकुल चुप रही और चुपचाप गाड़ी में पीछे दीप्ती के साथ जाकर बैठ गयी, शेट्टी और पंकज गाडी में आगे की तरफ बैठे थे और गप्पे हांक रहे थे, और पीछे दीप्ती और आराधना बाते कर रही थी

तभी दीप्ती ने आराधना के बिलकुल करीब आकर हल्की आवाज़ में कहा

दीप्ती -"अच्छा आराधना, एक बात बताओ , आप दोनों की शादी कब हुई थी, मेरा मतलब है कि कितना टाइम हो चूका"

आराधना - "जी....जी....लगभग 6 महीने होने को आये"

दीप्ती - "एक बात कहूँ, बुरा तो नहीं मानोगी?"

आराधना - "जी, पूछिए........" आरधना थोड़ी घबरा भी रही थी कि कहीं दीप्ती कोई ऐसी बात ना पूछ ले जिससे कि उसका भांडा फूट जाये

दीप्ती - "आप दोनों की लव मैरिज हुई है न"

आराधना - "जी ....जी हाँ, पर आपको कैसे पता चला" आराधना झूट मूट ही बोली

दीप्ती - "दरअसल आप दोनों की उम्र में भी थोडा गैप है, और जब हम आपके कमरे में आये थे तब आपने जो सेक्सी सी नाईटी पहन रखी थी वो तो कोई लवर ही अपने आशिक को खुश करने के लिए पहनता है"

आराधना (शर्माते हुए )- "जी..... वो तो बस यूँ ही......... दरअसल मुझे बिल्कुल अंदाजा नही था कि आप लोग आने वाले हो वरना मैं वो ड्रेस नही पहनती"
दीप्ती - "अरे शर्माती क्यूँ हो तुम, हाययय ....कितनी सुंदर लग रही थी तुम, बला की खुबसूरत......तुम्हे देखकर तो मुझे मेरी जवानी याद आ गयी, मैं भी जवानी में तुम्हारे जैसी ही सुंदर थी"

आराधना - "अरे आप तो अभी भी बहुत सुंदर है, आपको देखकर कोई भी आप पर फ़िदा हो जायेगा, अच्छा मेन्टेन किया है आपने अपनी फिगर को"

दीप्ती -"कहाँ मेन्टेन कियां है ....ये देखो कैसे मेरा पिछवाडा फ़ैल गया है बुरी तरह से....."

दीप्ती की बात सुनकर आराधना थोड़ी झिझकी, पर फिर भी थोडा सम्भलते हुए बोली

आराधना -"नही नही, आपकी गलत वहमी है ये, आप तो अभी भी काफी ग्लैमरस दिखती है"

दीप्ती -" नही यार अब वो पहले जैसी बात नही रही, अब तो mr. शेट्टी भी ज्यादा ध्यान नही देते, जब देखो इधर उधर मुंह मरते रहते है, अब देखो न तुमको भी कैसे खा जाने वाली नजरो से देख रहे थे"

आराधना को समझ नही आ रहा था कि वो इस बात का क्या जवाब दे, बस उसने बेमन से थोडा सा मुस्कुरा दिया

दीप्ती -"तुम जानती हो जब उन्होंने तुम्हे उस सेक्सी नाईटी में देखा था ना तो कमरे में आते ही मेरी जमकर ली थी, बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गये थे तुम्हे देखकर...हा हा हा हा"

आराधना -"पर..आपको बुरा नही लगता कि आपके पति ऐसे दुसरो की बीवियों की तरफ देखते है?" आरधना ने कोतुहल से ये सवाल पूछा

दीप्ती -"अरे इसमें बुरा मानने वाली कोई बात नही, दरअसल इनकी सेक्स ड्राइव कुछ ज्यादा ही है, और जिन लोगो की सेक्स ड्राइव ज्यादा होती है न उनका एक से मन नही भरता, बुरा तो तब मानती जब ये मुझे संतुस्ट न करते पर ये हमेशा मुझे जरुर खुश कर देते है अपने मोटे तगड़े लंड से" अब दीप्ती पुरे खुलेपन पर उतर आई थी,

आराधना को ये सुनकर बड़ा ही आश्चर्य हुआ, पर तभी उसे ध्यान आया कि उसके पापा की सेक्स ड्राइव भी कितनी तगड़ी है, कैसे घंटे भर तक वो जमकर उसको चोदते है, और फिर भी दोबारा चोदने के लिए तैयार रहते है, उन्होंने तो सिमरन को भी पटाने की कोशिस की थी

दीप्ती -"अरे मेरी रानी कहाँ खो गयी?" दीप्ती ने आराधना को झटकते हुए कहा

आराधना -"जी...कुछ नही वो तो बस ऐसे ही............."

दीप्ती -"वैसे तुम्हे एक बात बताऊ, बुरा तो नही मानोगी?"

आराधना -"जी...बताइए" दरअसल अब आराधना को भी धीरे धीरे मजा आने लगा था दीप्ती की बातो में

दीप्ती - "वो ...वो ....मैंने भी कई बार इनके अलावा दुसरे मर्दों से चुदाई की है"

आराधना को ये सुनकर झटका सा लगा कि ये औरत जो उसे सिर्फ कुछ ही घंटो पहले मिली है वो उसे क्यों बता रही है कि वो अपने पति के अलावा भी किसी से चुदती है,

आराधना -"ओह माय गॉड ....क्या आपके पति जानते है?"

दीप्ती -"अरे जानते क्या, वो खुद ही कई बार अपने दोस्तों से मुझे चुदवाते है, और खुद अपने दोस्तों की बीवियों को चोदते है, इसे वाइफ स्वैपिंग कहते है, शुरू शुरू में तो मुझे बड़ा अजीब लगा था पर अब कसम से बड़ा मजा आता है चुदने में, कई बार तो मैं एक साथ दो दो लंडो से भी चुदी हूँ एकसाथ"

आराधना की आँखे तो दीप्ती की बाते सुनकर बिलकुल खुल सी गयी थी, वो तो आश्चर्य से उसकी बाते सूनी जा रही थी जैसे वो उसे कोई भारी ज्ञान दे रही हो

आराधना -"हे भगवान , कैसे कैसे काम होते है दुनिया में"

दीप्ती -"अरे मेरी बिल्लो रानी, ये तो कुछ भी नही है, आजकल तो भाई बहन, माँ बेटे, बाप बेटी भी आपस में चुदाई कर लेते है...."

दीप्ती की बात सुनकर एक बार तो आराधना थोड़ी सकपकाई, पर अगले ही पल उसने खुद को सम्भालते हुए कहा

आराधना- "नही ये आप कैसी बाते कर रही है, ऐसा थोड़े ही होता है?"

दीप्ती -"अरे होता है मेरी रानी,अच्छा अब मैं तुम्हे ऐसी बात बताती हूँ जो इनको भी नही पता"

आराधना -"जी बोलिए...." आराधना ने उत्सुकता वश पूछा

दीप्ती -"दरअसल जब मेरे पति और मैं वाइफ स्वैपिंग करने लगे तो धीरे धीरे मुझे चुदाई का नशा सा होने लगा था, और मुझे बस रोज़ ही चुदाई चाहिए होती थी, जब तक मैं दो मस्त लंडो से न चुद लेती मुझे चैन नही मिलता था, पर एक दिन मुझे अपने मायके जाना पड़ा,क्यूंकि मेरी मम्मी थोड़ी बीमार पड गयी थी, .....एक दो दिन तो किसी तरह गुजर गये पर फिर मुझे लंड की याद सताने लगी ....और उसी दोरान.....उसी दोरान...."

आराधना -"उसी दोरान क्या ....."

दीप्ती -" उसी दोरान मेरे और मेरे भाई के जिस्मानी ताल्लुकात बन गये, और मेरा भाई मुझे चोदने लगा, हमारी चुदाई बड़े मजे से चल रही थी कि तभी एक दिन मेरे पापा ने मुझे देख लिया.....मैं और मेरा भाई बुरी तरह से घबरा गये पर फिर जो हुआ वो मैंने सपने में भी नही सोचा था..."

आराधना -"क्या हुआ दीदी....बताओ ना" आरधना अब उत्तेजित होने लगी थी

दीप्ती -"मेरे पापा ने अपनी पेंट और अंडर वियर उतारी और अपना ६ इंच का खड़ा हुआ लंड सीधा लाकर मेरी चुत में पेल दिया, पहले तो मुझे कुछ समझ नही आया पर बाद में मुझे मजा आने लगा, तब से मैं जब भी अपने मायके जाती हूँ मेरे भाई और मेरे पापा जमकर मेरी चुत और गांड बजाते है, और मैं भी खुलकर मजे लेती हूँ"

आराधना का हाल तो अब बुरा हो चूका था, वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी, और बस अब वो किसी तरह अपने पापा का हलब्बी लंड अपनी चुत में लेना चाहती थी, पर वो अभी मुमकिन नही था इसलिए वो खुद को किसी तरह शांत करने में लगी थी कि तभी अचानक उसकी आँखों के सामने एक दृश्य आ गया कि उसके पापा और उसका भाई कुशल दोनों मिलकर उसकी चूत और गांड मार रहे है,आराधना बुरी तरह से गनगना गयी,

पर उसने तुरंत अपने माथे को झटका और फिर वो दोबारा दीप्ती से बाते करने में मशगुल हो गयी,

कुछ देर बाद वो लोग सिनेमा हॉल पहुंच गये, जब वो लोग उतरे तो शेट्टी ने दोबारा नजर बचाकर आराधना की गांड पर हाथ फेर दिया, और इस बार तो उसने पीछे से अपना हाथ ले जाकर हल्के से साडी के ऊपर से आराधना की चूत दबा दी, आराधना भले ही बहुत उत्तेजित थी परन्तु उसे शेट्टी की ये हरकत बिलकुल पसंद नही आई, उपर से शेट्टी दिखने में भी साउथ की मूवी का गुंडा सा लगता था,

"कहीं दीप्ती और शेट्टी हम लोगो के साथ वाइफ स्वैपिंग ......" आराधना के दिमाग की बत्ती सी जली शेट्टी की इस हरकत की वजह से

"नही नही मैं इस काले कलूटे आदमी के साथ...........नही नही ये बिलकुल नही हो सकता .........मैं अभी पापा को यहाँ से ले जाती हूँ........." आराधना ने मन में सोचा,

दीप्ती ने भले ही आराधना को गरम कर दिया था और उसके दिमाग में जाने अनजाने में कुशल के प्रति थोडा आकर्षण पैदा कर दिया था पर अभी भी उसके दिलो दिमाग में सिर्फ और सिर्फ उसके पापा ही बसे थे, वो किसी गैर मर्द के साथ चुदाई करने के बारे में सोच भी नही सकती थी,

शेट्टी -"आप सब लोग बैठिये, मैं अभी टिकेट लेने जाता हूँ" ये कहकर शेट्टी चला गया

दीप्ती -"आरधना, मुझे वाशरूम जाना है तुम भी चलोगी क्या?"

आराधना -"नही दीदी आप हो आइये मैं यहीं बैठूंगी"

दीप्ती भी वहां से चली गयी, आराधना को लगा की यही सही मोका है पंकज से बात करने का

आराधना -"पापा.......मुझे आपसे एक बात कहनी है "

पंकज - "हा आरू बोलो...."

आराधना -"पापा मुझे अभी इसी वक्त वापस होटल जाना है, मुझे इन लोगो के साथ पिक्चर नही देखनी"

पंकज -"पर बेटी, अचानक क्या हुआ"

आराधना -"वो सब मैं आपको बाद में बता दूंगी, पर आप बस किसी भी तरह बहाना बनाकर यहाँ से चलिए"

पंकज -"पर बेटी ऐसे तो वो लोग बुरा मान जायेंगे, और फिर हो सकता है वो शेट्टी मेरे प्रोजेक्ट को बिलकुल भी पास ना करे"

आराधना -"पापा आपको प्रोजेक्ट ज्यादा प्यारा है या मैं"

पंकज -"ऑफ़ कोर्स बेटी ...तुम ही मुझे सबसे ज्यादा प्यारी हो इस दुनिया में, तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ"

आराधना -"तो आप चलिए यहाँ से ......."

पंकज -"ठीक है आरू, अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो ये ही सही"

थोड़ी देर बाद दीप्ती आ जाती है और उसके तुरंत बाद शेट्टी भी हवा में टिकट्स लहराता हुआ उनकी और आ रहा था

पंकज -"शेट्टी जी, माफ़ कीजियेगा पर हम आप लोगो के साथ मूवी नही देख पाएंगे, हमे जाना होगा अभी"

शेट्टी -"अरे पर ग्रोवर साहब अचानक क्या हुआ" शेट्टी को अपने इरादों पर पानी फिरता हुआ दिखाई दिया, दरअसल उसने सोचा था कि किसी तरह वो उन दोनों को भी अपने वाइफ स्वैपिंग वाले ग्रुप में शामिल कर लेगा प्रोजेक्ट का दबाव बनाकर पर उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फिरता सा नजर आ रहा था उसे

पंकज -"दरअसल मुझे अभी घर से फ़ोन आया है कि हमारे रिश्ते दारी में किसी की डेथ हो गयी है और हमे तुरंत घर के लिए निकलना पड़ेगा, वैसे भी 6 -7 घंटे से ज्यादा लग जाते है पहुंचते पहुंचते तो हमे जल्द से जल्द निकलना होगा"

आराधना भी पंकज के सोच की दाद देने लगी कि क्या बेहतरीन बहाना ढूँढा है पापा ने अब तो शेट्टी उसे रोक ही नही सकता

शेट्टी -"पर ग्रोवर साहब आपके प्रोजेक्ट का क्या.." शेट्टी ने अपना आखिरी हथियार चलाते हुए कहा, इसी हथियार के दम पर ही वो पंकज को मजबूर करके आराधना की चुदाई करना चाहता था, पर पंकज ने जो जवाब दिया उससे शेट्टी के सारे अरमान धरे के धरे रह गये

पंकज - "शेट्टी जी, प्रोजेक्ट तो आते जाते रहते है, पर रिश्तेदारी निभानी ज्यादा जरूरी है.........और वैसे भी पैसे लेकर जाना कहाँ है, सब यही तो छुट जाना है"

आराधना तो पंकज का जवाब सुनकर उसे और भी ज्यादा चाहने लगी, उसे लगा कि उसके सिर्फ एक बार कहने पर ही उसके पापा ने उसके लिए करोडो के प्रोजेक्ट को भी ठुकरा दिया, आराधना के दिल में अपने पापा के लिए प्यार और भी ज्यादा गहरा हो गया था,

और इधर पंकज के जवाब ने शेट्टी की रही सही हिम्मत भी तोड़ दी, उसे समझ आ गया कि ये चिड़िया उसके हाथो से निकल चुकी है, और अब वो कुछ कर भी नही सकता था, इसलिए हताश होकर बोला

शेट्टी -"आप चिंता मत कीजिये ग्रोवर साहब, आपका प्रोजेक्ट का कम समझो हो गया, मैं आपके कॉन्ट्रैक्ट को साईंन कर दूंगा, आप मुझे ई मेल कर दीजियेगा" शेट्टी ने सोचा कि शायद भविष्य में कोई चांस बन जाये इसलिए ये कॉन्ट्रैक्ट देना भी जरूरी है

पंकज -" बहुत बहुत सुक्रिया शेट्टी जी, अच्छा अब हम दोनों निकलते है, आप लोग मूवी एन्जॉय कीजिय, मैं होटल जाकर मनेजमेंट से कहकर यहाँ एक गाड़ी भिजवा दूंगा, अच्छा बाय"

ये कहकर पंकज और आराधना पार्किंग की तरफ चल दिए और शेट्टी और दीप्ती हॉल के अंदर चले गये

"आई लव यू पापा.......उम्म्म्मम्म हाआआ" ये कहकर आराधना ने पंकज के गालो पर एक किस कर दी

पंकज भी आराधना को खुश देखकर खुश था, उसने गाड़ी स्टार्ट की और होटल की तरफ निकल पड़ा, रस्ते में पंकज बोला
 
सिमरन - "सुबह जब मैं उठी तो भइया कॉलेज चले गए थे मैं बहुत थकी हुई थी और मेरा बदन भी काफी दर्द कर रहा था खास कर से मेरी कमर। मैंने फ्रेश हो कर नाश्ता किया और फिर सो गई। मैं सीधे ३ बजे के करीब उठी तो काफी ठीक महसूस भी कर रही थी" सिमरन अपनी आप बीती प्रीती को सुना रही थी

सिमरन - "तो प्रीती, इस तरह से मेरे और मेरे भाई के बिच में फिजिकल रिलेशन बन गये और तब से लेकर आज तक हर रात हमारी सुहाग रात होती है, अब तो मैं और मेरा भाई मम्मी पापा के सोने के बाद एक ही रूम मे सो जाते है, मेरा भाई मेरी चूत और गांड रोज़ बुरी तरह चोदता है और मैं भी उससे मजे लेकर अपनी चुत चुदवाती हूँ"

प्रीती - " वाह दीदी, आप तो कमाल हो, अपने ही भाई के साथ सुहाग रात मनाती हो, कसम से आपकी तो घर में ही चांदी हो रखी है दीदी, सच में आपकी कहानी ने तो मेरे रोम रोम में हवस की आग लगा दी है, अब प्लीज़ आप ही इस आग को शांत कर दीजिये ना"

सिमरन - "तू चिंता क्यों करती है प्रीती, आज रात हम दोनों ही एक दुसरे की जरूरतों को पूरा कर लेंगे, पर अब तू भी तो बता कि आखिर तूने कुशल को कैसे पटा लिया और कैसे उसने तेरी इस चुत की ताबड़तोड़ चुदाई कर दी" सिमरन प्रीती की चुत को मुट्ठी में बंद करते हुए बोली

प्रीती -"हयय्य ......दीदी.....वो सब मैं आपको बाद में बताउंगी ....पर अभी तो आप मेरी इस चुत को ठंडी कर दो प्लीज़....निगोड़ी देखो कैसे टेसुए बहा रही है" प्रीती ने अपनी गीली चुत से निकलती पानी की बूंदों को देखकर कहा

अब सिमरन ने देखा कि प्रीती बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और अब अपनी बुर को खुजा रही थ, वो अपना हाथ उसके हाथ पर रखी और बोली: क्या हुआ प्रीती ,बहुत खुजा रही है?

प्रीती: आह दीदी, आपकी कहानी है ही इतनी सेक्सी, कोई भी पागल हो जाए,

सिमरन: थोड़ा आराम दे दूँ क्या इसको? वो उसकी बुर की तरफ़ इशारा करके बोली,

प्रीती हँसी और बोली - "हाँ दीदी अब और सब्र नही होता, काश इस वक्त कुशल यहाँ होता तो उसके हथियार से ही अपनी प्यास बुझा लेती

सिमरन: अरे हथियार नही तो क्या,ये तो है , ये कहकर उसने अपनी जीभ और एक ऊँगली दिखाई,

प्रीती - हाँ ये भी चलेगा इस वक्त तो

सिमरन - मैं बहुत अच्छा चाटती हूँ , और आज देखना सच में मैं बहुत अच्छा चूसूँगी तुम्हारी बुर, कुशल से भी अच्छा,

ये कहकर वो प्रीती की नंगी हो चुकी चुत पर अपनी कोमल उंगलिया घुमाने लगी,

सिमरन ने उसकी बुर को सहलाया और बोली: उफफफ ये तो बिलकुल गीली हो गयी है,

प्रीती शर्म से लाल होकर बोली: आपकी कहानी थी ही इतनी सेक्सी,

अब सिमरन बैठ कर उसकी पैंटी जो पैरो में फंसी थी वो भी निकाल दी, प्रीती ने शर्मा कर अपनी जाँघें भींच ली,
सिमरन उसकी जाँघों को सहलाकर बोली: दिखाओ ना अपनी मस्तानी बुर, अब हम दोनों में कैसी शर्म और वो उनको फैलाई, अब प्रीती की पनियायी हुई बुर उसकी आँखों के सामने थी, उसने वहाँ हाथ फेरा और फिर उसने उसको हल्के से मसला, प्रीती उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी ,
अब सिमरन ने अपना मुँह उसकी जाँघों के बीच डाला और उसकी बुर को चूमने और फिर चूसने लगी,

प्रीती: आऽऽऽऽऽऽऽऽहहह उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽ ,

सिमरन ने अब अपनी जीभ उसकी बुर में डाली और उसकी क्लिट को भी छेड़ने लगी, अब प्रीती अपनी गाँड़ उछालकर और उसका सिर अपनी बुर में दबाकर मस्ती से चिल्लाने लगी: आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह मैं मरीइइइइइइइइइइ, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ,

सिमरन : बोलो कुशल की जीभ से ज़्यादा मज़ा आता है या मेरी जीभ से ?

प्रीती: आऽऽहहह आपकी जीभ तो पागल कर देगी हाय्य्य्य्य्य,

अब सिमरन ने फिर से पूछा: अच्छा बताओ कुशल के लंड से ज़्यादा मज़ा आता यां मेरी जीभ से चुदाई में?

अब सिमरन का मुँह उसकी पानी से पूरा गीला हो चला था , वह अब तीन ऊँगली उसकी बुर में अंदर बाहर करने लगी और जीभ से उसके क्लिट को सहलाने लगी,

अब प्रीती: आऽऽऽह क्या कह रही हो, उफफफफ,

सिमरन अब जल्दी जल्दी ऊँगलियों से प्रीती चोद रही थी और उसकी क्लिट के साथ जीभ भी उसकी बुर में चला रही थी,

प्रीती: आऽऽऽह सच में मज़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽऽ है,

सिमरन: कुशल से भी ज़्यादा ?

प्रीती: आऽऽऽह उइइइइइइ है कुशल से भी ज्याआऽऽऽऽऽऽऽऽदा ,

सिमरन मुस्कुराई और अपनी स्पीड बढ़ा दी और प्रीती: आऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह हाऽऽऽऽय्य मैं गयीइइइइइइइइ कहकर अपना पानी सिमरन के मुँह में छोड़ दी और वो पूरा पानी पी गयी,

प्रीती -"दीदी बहुत मजा आया, लाओ अब मैं भी आपकी बुर चूस देती हूँ,

सिमरन -"हाँ मेरी बिल्लो, वैसे तेरी चुत सच में रस का खजाना है मुझे तो मजा ही आ गया एसी मस्त चुत का रसीला पानी पीकर

प्रीती - दीदी आप सच में बहुत अच्छा चुस्ती हो कुशल से भी अच्छा, पर दीदी लंड की कमी तो आप पूरी नही कर सकती ना

सिमरन - "अरे मेरी प्यारी गुडिया, तू कहे तो अभी तुझे एक दमदार लंड से चोद सकती हूँ, बोल चुदेगी लंड से"

प्रीती - "हाययय दीदी, इच्छा तो बहुत है पर आपके पास लंड थोड़े ही है, और अभी मैं आपके भाई से चुदने के लिए खुद को तैयार नही कर पाई हूँ, तो आप आज रात तो अपनी ऊँगली को ही लंड समझकर मेरी प्यास बुझा दीजिये

सिमरन-" अरे तू चिंता क्यूँ करती है, आज रात मैं एक लंड से ही तेरी प्यास बुझाउंगी ,ऊँगली से नहीं, मेरे पास लंड है,रुक तुझे अभी दिखाती हूँ"

सिमरन झट से खड़ी हुई और पास रखी आलमारी में से कुछ निकालने लगी, प्रीती को समझ नही आ रहा था कि वो क्या ढूंढ रही है, पर अगले ही पल प्रीती को उसके सवाल का जवाब मिल गया, क्यूंकि सिमरन के हाथो में एक लम्बा सा डिल्डो था,

प्रीती-"ओह माय गॉड दीदी यह तो लडको के लंड जैसा है, आप तो वाकई में बहुत कामुक रंडी हो दीदी"

सिमरन-" प्रीती क्या करू इस चूत में बड़ी आग है जिसे शांत करने के लिए रंडी बनना पड़ता है, देख इसे डिल्डो बोलते है, ये बायब्रेट करता है" सिमरन ने डिल्डो को चालु करके अपनी चूत में घुसा लिया, सिमरन के मुख से सिसकारी फूटने लगी, प्रीती यह नज़ारा देख कर कामुक सी हो गई थी, उसका भी मन कर रहा था की एक बार इसे अपनी चूत में घुसा कर देखे, ,
इधर सिमरन अपनी चूत में डिल्डो डालकर अंदर बाहर कर रही थी ,

सिमरन-" प्रीती देख क्या रही है , आजा आज तेरी चूत की भी प्यास बुझा देती हूँ, सिमरन प्रीती की जांघ पर हाँथ फेरते हुए बोली,

सिमरन ने प्रीती की चूत को मसल दिया, जो प्रीती को आग भड़काने के लिए इतना ही काफी था ,

प्रीती-" ओह्ह्ह्ह्ह दीदी आपने ये कैसी आग लगा दी है मेरे जिस्म में, " सीमरन प्रीती की चूत को जीभ से रगड़ती है , प्रीती भी सिमरन की चूत में तेजी से ऊँगली डालकर अंदर बहार करने लगती है, सिमरन की आग भड़क जाती है, सिमरन डिल्डो लेकर प्रीती की चूत में घुसाने लगती है, सिमरन प्रीती की चूत में थूक लगाती है ताकि गीलापन रहे ,
जैसे ही डिल्डो का अग्रभाग प्रीती की चूत में घुसता है प्रीती तड़पने लगती है ,

प्रीती-" आआह्ह्ह्ह्ह्ह् दीदी दर्द हो रहा है आराम से घुसाओ" सिमरन डिल्डो को निकाल कर पुनः तेजी के साथ चूत में घुसेड़ देती है, प्रीती की चीख निकलती है ,

सिमरन डिल्डो को अंदर बहार चलाने लगती है,
थोड़ी देर बाद प्रीती को मजा आने लगता है,

सिमरन-"अह्ह्ह्ह्ह प्रीती में अगर लड़का होती तो अपने लंड से तुझे रौज चोदती,तेरा जिस्म बहुत ही नसीला और कामुक है, तेरी गांड तो मेरी गांड से भी गठीली है,

प्रीती-" आप भी कुछ कम नहीं है दीदी,आपको तो देख कर ही लड़को का लंड खड़ा हो जाता होगा, काश आप लड़का ही होती तो आज तो में आपसे जी भर के चुदती दीदी"

प्रीती की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी, सिमरन भी उसकी चूत से बराबर खेल रही थी तभी प्रीती का जिस्म एक दम अकड़ गया और एक तेज पिचकारी के साथ झड़ गई, प्रीती भी सिमरन की चूत में तेजी से दो ऊँगली करने लगती है और दोनों सहेलियां एक साथ झड़ जाती हैं ,
दीदी और प्रीती दोनों एक दूसरे का पानी चाट कर पी जाती हैं ,
प्रीती का जिस्म एक दम शांत पड जाता है ऐसा महसूस हो रहा था जैसे पहली बार उसकी चुदाई हुई थी ,प्रीती की साँसे तेजी से चल रही थी ,कुछ ही देर में प्रीती और सिमरन को आराम सा मिल गया था और दोनों सखियाँ नंगी ही सो गई ,
 
मेरे भैया ने इतना बोलते ही मुझे टॉप दे दिया और फिटिंग रूम का डोर बंद कर दिया... बहुत ही अजीब मन से वो टॉप मैने पहना...... बॉडी के किसी भी पार्ट को वो टॉप सही से ढकने मे पासिबल नही था.... मेरा पेट, शोल्डर्स, ब्रा, बूब्स सब कुच्छ थोड़ा थोड़ा विज़िबल था...... शॉर्ट स्कर्ट और उपर से इतना शॉर्ट टॉप... अब तो लगभग मे आधी नंगी थी.. मिरर मे अपने आप को देखा तो पेट क्लियर दिखाई दे रहा था... पेट की नाभि भी क्लियर दिखाई दे रही थी... यही नही मेरी रेड ब्रा भी क्लियर दिख रही थी. मुझे यकीन था कि भैया मुझे देखे बिना नही मानेंगे.. तो मैने उस टॉप मे अपनी ब्रा को छुपाने की काफ़ी कोशिश की लेकिन नाकाम रही. इससे पहले की कुच्छ और सोचती कि डोर फिर से नॉक हुआ.. मैं समझ गयी कि टाइम ओवर..." सिमरन के चेहरे के भाव अभी भी बता रहे थे कि उस दौरान क्या सिचुयेशन रही होगी..

" क्या बात है दीदी.... आप को तो सूपर सेक्सी स्लट बनाने पे तुले हुए थे भैया....." खैर फिर क्या हुआ..

" मैने धीरे से दरवाजा खोला..... पहले मेरी आइज़, फिर मेरे लिप्स, फिर शोल्डर्स, फिर ब्रा, ब्रा के अंदर बूब्स, बूब्स के नीचे सपाट पेट, पेट की नाभि, नाभि के नीचे स्कर्ट, स्कर्ट के नीचे नंगी थाइस.... मेरे भाई ने अपनी आँखो से सब एक्सरे कर दिया... और मैं शरम से गढ़ी जा रही थी....."

सिमरन आगे बताती है.. " मेरे भैया आगे बढ़ते है.... मेरे बालो मे लगे क्लट्चर को हटाते है. मैं एक स्टॅच्यू बन कर सब होने दे रही थी. बालो को खोलने के बाद धीरे धीरे शोल्डर्स पर लाते है... उसके बाद जो उन्होने बोला उसे सुन कर तो मेरे पाँव काँप गये...."

" उफफफफफफफ्फ़.. ऐसा क्या बोल दिया आपके जालिम भाई ने... जल्दी बताओ ना......" प्रीति एग्ज़ाइटेड होते हुए बोलती है.

" उन्होने मेरे टॉप की स्ट्राइप को पकड़ कर सीधा करना शुरू किया.. उनकी फिंगर्स मेरे बूब्स पर भी अंजाने मे टच हो रही थी... पूरी बॉडी काँप रही थी मेरी.. वो धीरे से मेरे कानो के पास आए बोले -

माइ ब्रदर - फिटिंग अच्छी है टॉप की.... लेकिन इस टॉप को बिना ब्रा के पहना जाता है....

"मेरी हालत ऐसी थी कि क्या बताऊ.... एक जवान लड़के से अपनी ब्रा के बारे मे ऐसी बात सुन कर मैं हैरान भी थी और शरम भी आ रही थी. दिल मे 10 सवाल आ रहे थे कि बिना ब्रा के ये टॉप कैसे पहना जाएगा और पहना भी जाएगा तो बूब्स तो जैसे बाहर ही लटके रहेंगे..... मैं सोच ही रही थी कि भैया ने अपने बोल्ड अंदाज़ मे फिर से बोलना शुरू किया...."

माइ ब्रदर - " सिम्मी... थोड़ा बहुत चलता है....... तू टेन्षन ना ले... सच मे तू सूपर लग रही है. अब जल्दी से इन्हे चेंज कर ले..ये आउटफिट तो फिक्स है... अब तेरे लिए जीन्स देख लेते है......"

" बचपन मे डेली लड़ाई झगड़े होते थे..... पता नही मैं कितनी कोशिश करती थी कि डेली मेरे लिए कपड़े लिए जाए.. लेकिन मेरा भाई सबसे पहले मेरा दुश्मन बन कर खड़ा होता था.. और आज मेरा भाई ही था जो मेरे जवानी मे कदम रखते ही पता नही मुझे क्या क्या दिलाने को तैयार हो रहा था.. यही कीमत होती है हर लड़की की जवानी की... खैर मे फिटिंग रूम मे टॉप और स्कर्ट उतारने लगी और दूसरी तरफ भैया जीन्स लेने के लिए चले गये...."
" मॉल से खरीददारी करने के बाद हम घर की तरफ निकल लिए . मॉल से निकलते ही बारिस शुरू हो गई . बारिश से बचने की कोशिश करते भी जब हम गाड़ी तक पहुचे तो हम दोनो पूरे भीग चुके थे गीले कपड़ो मे मुझे ठंड लग रही थी , भीगने से मेरे कपड़े बदन से चिपक गए थे. घर आ कर भैया मेरे शरीर के उभारों को आनंद ले कर देखने लगा. मैं शरमा गई. मेरे मुंह से निकल गया.." भैया, मत देखो न ऐसे.मुझे शर्म आती है." भैया ने शरारत से आँख मार दी. और मैं शरमा कर मेरे रूम में अन्दर भाग गई.
हम दोनों नहा कर फ्रेश हो कर भैया के कमरे में बैठ गए. भैया अलमारी से व्हिस्की की बोतल निकाल लाया.
"यार ठण्ड लग रही है.एक पैग पी लेता हूँ.तुम भी थोडी सी ले लो.."
"नहीं..नहीं." मैं उसकी हरकते नोट कर रही थी. मुझे लग रहा था आज भैया मूड में हैं. मैंने सोचा आज अच्छा मौका है, पटाने का.
उसने धीरे धीरे पीना चालू कर दिया. कह रहा था - "सिमरन तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड है क्या."
"हाँ.था..अब नहीं है.."
"अच्छा, भैया तुम्हारे साथ कुछ करता था.."
" धत्त.भैया. मुझे शर्म आती है."
" मत बताओ.लो थोड़ा सा पी लो.अच्छा लगेगा."
मैंने सोचा अच्छा मौका है. भैया समझेगा मैं नशे में हूँ. और नशे में ऐसा कर रही हूँ.
"अच्छा भैया.थोड़ा ही देना.."
"वाह ये हुई न बात.ये लो " उसने एक पैग बना कर दिया.
मैंने पीने का नाटक किया. थोडी सी ड्रिंक पास में गिरा दी..और गिलास मुंह से लगा लिया..
कुछ ही देर में भैया को व्हिस्की चढने लगी. बोला- "यार सिमरन तू तो एकदम मस्त है."
भैया कुछ आगे बोलता उसके पहले ही मैंने उसके होंठों पर उंगली रख दी. मैंने भी नशे में होने का नाटक किया..
"मस्त आप है..भैया."
"नहीं.मस्त तो तू है. जरा देख अपने को.."
"क्या देखूं.मुझे तो तुम ही दिखाई दे रहे हो."
अब भैया मस्ती में आ गया था. उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ़ खींच लिया. मैं जान करके उसकी गोदी में गिर गई. उसने मुझे बाँहों में कस लिया.
मैंने कहा- "भैया.ये नीचे क्या लग रहा है.".
मैं थोड़ा कसमसाई. पर उसका लंड था की घुसता ही जा रहा था. मैं थोड़ा उठ गई. मैंने जान कर के ऐसे उठी की अपनी चूतड की गोल गोल फ़ांकें उसके सामने हो गई.
उसने मेरे दोनों चूतडों को दबा दिया.
मैं जैसे नशे में बोली- "हाय रे..भैया मर गई.क्या कर रहे हो."
भैया ने कहा - " सिमरन. मज़ा आया न..अब तुम बिस्तर पर लेट जाओ."
"नहीं..नहीं.तुम कुछ गड़बड़ करोगे."
ज्यादा नहीं.बस थोड़ा सा."
"अच्छा.. ठीक है.."
मेरा मन तो खुशी के मरे उछल रहा था.मैं धीरे से जा कर बिस्तर पर लेट गई.
" क्या बात है दीदी.... आप को तो चोदने पे तुले हुए थे भैया....." खैर फिर क्या हुआ..

सिमरन आगे बताती है.. " भैया ने कहा - "अब आँखे बंद कर लो.".
"हटो भैया.जरूर तुम. देखो छेड़ना मत."मैंने आँखें बंद कर ली. भैया पलंग पर पास आकर बैठ गए.और उनका हाथ हौले हौले से मेरे बदन को गुदगुदाने लगा. भैया मेरी दोनों टांगों को धीरे धीरे सहलाने लगे.और ऊपर की तरफ़ आने लगे. मेरे नितम्बों पर उनका हाथ घूमने लगा. मुझे सनसनी सी होने लगी. भैया जान करके अपना हाथ मेरी चूत पर भी टकरा देता था. तब जोर का करंट जैसा लग जाता था.
फिर धीरे धीरे उसने मेरी चूत पर कब्जा कर लिया. मैं सी सी कर सिस्कारियां भरने लगी. अब उसका हाथ मेरे बूब्स को सहला रहा था. एक हाथ चूत पर.और एक हाथ बूब्स पर. "सिमरन.कैसा लग रहा है."
मेरे मुंह से अचानक निकल गया - " भैया.तुम्हारे हाथो में तो कमाल है. अब कुछ कर दो न. कुछ भी करो.."
भैया ने मेरे बूब्स भींचने चालू कर दिए.दूसरा हाथ मेरी चूत की गहराई नापने लगा.उसकी बेताबी बढाने के लिए मैंने कहा - "भैया. बस अब नहीं. दूर हटो."
मैं बिस्तर से नीचे उतर गई. भैया भी मेरे पीछे आ गया था.उसने पीछे से हाथ डाल कर मेरे बूब्स पकड़ लिए. "सिमरन. प्लीज़ करने दो. तुम्हे देख कर मेरा मन कब से कर रहा था की बस एक बार तुम्हे दबा दूँ. तुम्हारे ये उभार.गोलाईयां देख कर मुझसे रहा नहीं जाता है अब."
भैया का लंड मेरे चूतड़ों में घुसा जा रहा था. मुझे उसके लंड का साइज़ तक चूतड़ों में महसूस हो रहा था.
मैंने मुस्करा कर भैया की तरफ़ देखा. और कहा " पहले अपना ये मेरे हाथ में दो.."
"क्या.हाथ में क्या दूँ ?"
"भैया. अपना मोटा सारा लंड."
लंड का नाम सुनते ही भैया तो जैसे पागल हो उठा." मेरा लंड. वऊऊ. अरे पकड़ लो न. पूरा लंड तुम्हारा ही है

" तो आख़िर गिरा ही दी बिजली... ग्रेट...." प्रीति सिमरन की बात सुनते हुए बोलती है.
मेरी तमन्ना पूरी होने लगी थी. मेरा मन आनंद से भर उठा. मुझे लगा अब चुदाई में ज्यादा देर नहीं है. मैंने नशे में होने का नाटक करते हुए कहा - "हाय रे भैया.मत करो न.मुझे गुदगुदी होती है. देखो न तुम्हारा नीचे का डंडा.मेरी गांड में लग रहा है."उसका लंड नीचे से गांड में घुसने के लिए जोर मार रहा था. उसके मोटे लंड का स्पर्श मुझे पूरा महसूस हो रहा था. मैंने अपने आप को उसके हवाले करते हुए कहा- "दूर हटो न.भैया. तुम्हारा लंड तो गांड में घुसा जा रहा है..".
लंड और गांड का नाम सुनते ही भैया बेकाबू हो गया और जोश में भर कर बोला - "सिमरन..तुम्हारी गांड ही इतनी प्यारी है..की उसे देखते ही लंड को घुसा देने का मन करता है.". भैया ने भी खुली भाषा का इस्तेमाल किया. देसी भाषा सुनते ही मैं तरंग में डूब गई.
अब उसने और कास के पकड़ लिया था. मेरे बूब्स मसलने लगा, चुन्चियों को खीचने लगा. और ऊपर से कमर हिला हिला कर लंड को गांड की दरारों में मारने लगा.
"भैया.बस भी करो.कोई आ जाएगा न."
"सिमरन.कोई नहीं आएगा. ". उसने अपना पजामा उतार दिया और कहा."देख ये कितना टन्ना रहा है.." फिर उसने अपना कुरता भी उतार दिया और पूरा नंगा हो गया.

मैंने कहा - "भैया.ये क्या करते हो. मुझे शर्म आ रही है."
उसने मेरी एक नहीं सुनी. और मुझे उठा लिया.और बिस्तर पर प्यार से लेटा दिया. उसका लंड कड़क हो गया था. बहुत ही टन्ना कर फुफकार रहा था.
मेरा पजामा और कुरता खींच कर उतार दिया.मैं तो यही चाह रही थी. कहा - "अरे क्या कर रहे हो. मैं तो नंगी हो जाऊँगी न."
बोला - "नंगे बदन आपस में रगड़ खायेंगे तो मज़ा भी तो आएगा "उसने मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया. मेरी चूत भी गीली हो गई थी. मैं बहुत खुश थी कि अब मैं चुद जाऊँगी. मैंने अपनी टांगे फैला दी और भैया को अपने ऊपर चढ़ने का न्योता दिया.
भैया मुस्करा कर पास आया और मेरी दोनों टांगो के बीच में आकर बैठ गया. उसने मेरी चूत सहलाई और चेहरा पास लाकर चूत को प्यार किया. मेरे चूत के दाने को जीभ से घुमा कर चाटना शुरू कर दिया. मैं झनझना उठी. मुंह से आह निकल गई. अब भैया मेरी चूत चाटने लगा. उसके हाथों ने मेरे बूब्स को मसलना चालू कर दिया. मुझे नशा सा आने लगा. कहने लगी - " मज़ा आ रहा है.भैया.आ ह.हाय रे.और चूसो.निकाल दो मेरा पानी.आह्ह्ह्ह."
" तो दीदी आपकी चुदाई होने वाली थी...." प्रीति उसकी स्टोरी मे बहुत इंट्रेस्टेड थी.
" अरे कहाँ भैया तो पहले गान्ड मारना चाहता था " सिमरन हँसते हुए कहती है
" तो क्या दीदी आपकी चुदाई नही गान्ड मरने वाली थी...." प्रीति जानने के लिए मरी जा रही थी.
सिमरन आगे बताती है---भैया ने मेरी टांगे और ऊपर कर दी अब मेरी गांड उसके सामने थी. टांगे थोडी और फ़ैलाकर उसने अपना मुह मेरी गांड के छेद पर लगा दिया और जीभ निकर कर छेद को चाटने लगा. मुझे गुदगुदी होने लगी. उसने अपनी जीभ मेरी गांड के छेद में घुसा दी. मैं आनंद के मारे मैंने आंखे बंद कर ली. मैं समझ गई थी कि भैया मेरी गांड मारने कि तय्यारी कर रहा है. भैया ने कहा - "तुमने तो पहले से ही गांड में चिकनाई लगा रखी है "
"हाँ भैया.मुझे आज लग रहा था कि तुम आज कुछ न कुछ ऐसा ही करने वाले हो.इसलिए मैंने तो पूरी तय्यारी कर ली थी. आह भैया. मज़ा आ रहा है.और करो.मैंने खुशबू वाली क्रीम लगाई है. आह रे.पूरी जीभ अन्दर डाल दो."
भैया उठा और तकिया मेरी कमर के नीचे रख दिया. मेरी गांड अब थोडी ऊपर हो गई थी. उसने अपना लंड छेद पर रख दिया.
"सिमरन. मेरी प्यारी सिमरन. गांड मराने को तैयार हो जाओ."
"हाँ मेरे राजा. घुसा दो अन्दर. मार लो गांड मेरी.". तो लो मेरी जान. " उसके लंड की सुपारी गांड में घुस गई. मेरी गांड की चुदाई शुरू हो गई थी. मैं मन ही मन झूम उठी.
"..हाय. घुस गया रे. राजा.लगाओ.जोर लगाओ भैया."
" येस.येस. ये लो. आह. आया.आह."
भैया का लंड अन्दर घुसा जा रहा था.मुझे अन्दर जाता हुआ महसूस हो रहा था.फिर उसने बाहर निकाला और जोर लगा कर एक ही झटके में पूरा ही घुसेड दिया.

"हाय भैया. मज़ा आ गया. धक्के लगाओ.हाँ.हाँ. थोड़ा जोर से. और जोर से."
"मेरी जान. तुम्हारी गांड तो बिल्कुल मक्खन मलाई है. इतनी चिकनी कि बहुत मज़ा आ रहा है. देखो लंड कैसे फटाफट चल रहा है."
गांड में लगाई हुयी चिकने से दर्द बिल्कुल नहीं हो रहा था. और अब तो मीठा मीठा मज़ा भी आ रहा था. मुझे लग रहा था भैया लम्बी रेस का घोड़ा है. भैया जोर जोर से धक्के मारने लगा.मैं तकिये के कारण ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही थी. पर उसके धक्को का पूरा मज़ा ले रही थी.
अचानक भैया रुक गया और धीरे से अपना पूरा लंड बाहर निकाल लिया. मुझे छेद के अंदर ठंडी सी हवा लगी.जैसे कुछ खाली हो गया हो. उसने नीचे से तकिया हटा दिया.
अब भैया मेरे ऊपर आकर धीरे से लेट गया और अपना बदन का पूरा भर मेरे पर डाल दिया. मेरे होटों को अपने होटों में दबा लिया. और चूसने लगा. उधर नीचे भी लंड अपना रास्ता दूंढ रहा था. मैं भी कसमसा कर लंड को निशाने पर लेने की कोशिश कर रही थी. मेरी चूत पानी से चिकनी हो गई थी. आखिर लंड ने रास्ता दूंढ ही लिया. उसके लंड की मोटी सुपारी मेरी चूत में सरक गई. मेरी आह निकाल गई.. मैंने नीचे से जोर लगाया तो लंड और अन्दर सरक गया. मैं तड़प गई. कहा - " भैया.आह.धक्का मरो ना. क्या कर रहे हो.हाय रे.चोदना शुरू करो ना.."
भैया ने अपना बॉडी अपनी दोनों कोहनियों पर उठा लिया. मेरा बदन अब फ्री हो गया था. उसने लंड को बाहर खींचा और जोर से अन्दर धक्का दे दिया. उसका पूरा लंड भीतर तक बैठ गया. मेरे मुंह से चीख निकल गई. चूत गीली होने से धक्के मारने पर फच फच की आवाजें गूंजने लगी.
" राजा और जोर से.लगाओ.हाय रे.पूरा घुसा दो.जड़ तक. घुसेड दो. हाँ.हाँ. चोद दो..राजा.जोर से.. चोद दो."
"हाँ मेरी रानी. तुम्हे देख कर ये लंड कब से तड़प रहा था. चोदूंगा रे. कस के चोदूंगा. ले. ले.और ले. फाड़ ही दूँगा..आज तो."
"आह रे.. मेरे भैया.सुच में..फाड़ मेरी चूत.लगा..जोर से.दे.दे.जोर दे दे..हाय.सी..सी.सी.चुद गई रे. मेरी माँ."
"हाँ..हाँ. मेरी जान.आज तो फाड़ डालूँगा.तेरी चूत को.ये ले.पूरा लंड..ले..ले..ये ले..और ले. मेरी जान. क्या चीज़ हो तुम."
उसके धक्के तेज होने लगे लगे. फच फच की आवाजे भी तेज होने लगी. मैं भी नीचे से चूत उछाल उछाल कर जोर से चुदवा रही थी. मेरी कमर भी तेजी के साथ चल रही थी. मुझे बहुत ही ज्यादा आनंद आ रहा था. मेरी सिसकियाँ भी बढ़ने लगी. मेरे मुंह से अपने आप निकलता जा रहा था - "मेरी चूचियां मसल डालो भैया. हाँ.जरा जोर से मसलो. मज़ा आ रहा है. हाय.मसलो डालो. झटके दे दे..के चोदो राजा..हाँ..हा.ऐसे ही.चोद डालो मेरे राजा."
मेरी सिस्कारियां बढती जा रही थी. मेरे चूतड अब तो अपने आप ही नीचे से उछल उछल कर उसके लंड को अन्दर बाहर कर रहे थे. भैया के धक्के भी जोरदार पड़ रहे थे. उसके मुंह से सिस्करिआं तेज होने लगी. अचानक ही उसके मुंह से निकला - "सिमरन. सिमरन. मैं तो गया. हाय..मैं गया.मुझे कस के पकड़ ले ना.अरे..रे..रे..गया.हा आया. हा आया. "

मैं भैया से जोर से चिपक गई मेरा भी निकलने ही वाला था. भैया अपना लंड जोर से चूत में दबाने लगा ने.और मैं. मैंने अपने दोनों टंगे ऊँची करके चूत को लंड पर गडा दिया. और पूरा जोर लंड पर लगा दिया.
ऊऊईई ए.हाय राम.मर गई ए. पानी निकल गया या.अरे.निकला रे.हाय.चोद दे.चोद दे..हाय रे आह.आह.आआह्ह्. गई ..गऽऽई.अआः.चुद गई.चुद गई.आह.आःह्छ " सिसकारी भर कर मैंने पानी छोड़ दिया. उधर भैया ने अपना लंड निकला और मेरे बूब्स पर अपना लावा उगलने लगा. रुक रुक कर उसका लंड रस उछाल रहा था.
मैंने तुंरत उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. और उसका चिकना चिकना रस चाटने लगी. लंड को पूरा साफ़ करके मैं आराम से लेट गई. भैया भी मेरी बगल में लेट गया. भैया हाँफ रहा था. मैं करवट लेकर उस से लिपट गई. हम वैसे ही नंगे पड़े रहें और हम दोनों कब सो गए हमें पता भी नहीं चला.
"वाउ... युवर ब्रो ईज़ सो रोमॅंटिक.. दीदी आपने तो सिक्शर मार दिया एनीवे फिर क्या हुआ....." प्रीति भी मुस्कुराते हुए कहती है.

"उस दिन मैं बहुत खुस थी, आख़िर लड़की होने का अहसास मुझे उस दिन ही हुआ था. ये भी अहसास हो गया था कि लड़की का मीनिंग क्या है. लड़की का मीनिंग बस घर की चार दीवारी मे रह कर बस काम करना नही है बल्कि लड़की उनका मन बहलाने के लिए बनी है जो घर के लिए काम करते है - फॉर मेन. उपर वाले का तहे दिल से शुक्रिया अदा करा उस दिन, कि उसने मुझे किसी लायक बनाया. मैं इस लायक थी कि किसी के लंड को खड़ा कर पाऊ, और यही तो लड़की की सबे बड़ी इज़्ज़त है.
भैया मेरे ऊपर ही पसर गए और हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बाहों में जकड़ लिया। कमरे में ए सी चल रहा था पर हम दोनों पसीने से लथपथ एक दूसरे से लिपटे हुए किस कर रहे थे। थोड़ी देर बाद हम अलग हुए और स्नानघर में जाने लगे तो देखा बिस्तर खून से भरा हुआ था। मैं घबरा गई और बोली," ये क्या .. अब क्या होगा?"

भैया बोले," इसमें डर कुछ नहीं, पहले पहले यही होता है"

मेरी कमर में दर्द होने लगा था। हम दोनों बाथरूम में एक साथ नहाने गए तो एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाया। मेरी चूत अब कुँवारी नहीं रही थी। भैया ने रगड़ कर मेरी चूत को धोया और मैंने उनके लण्ड को, जिससे हम दोनों गर्म हो गए। मैं थोड़ा शरमाई पर काफ़ी झिझक निकल चुकी थी। हम दोनों फ़व्वारे के नीचे खड़े थे। भैया नीचे बैठे तो मैंने कहा,"ये क्या करने जा रहे हो भैया !"

"मैं तो अपने होठों की मुहर लगाने जा रहा हूँ .. और अब तुम भी लगाना"

वो मेरी चूत में उँगली करने लगे थे और जीभ भी फ़िराने लगे। मैं पागल हो उठी। मैं अपने एक स्तन को मसलने लगी और भैया हाथ बढ़ा कर दूसरे को। भैया मेरी हालत समझ गए और फ़र्श पर ही लिटा लिया। मेरी चूत में उनकी जीभ तैर रही थी और मेरे हाथ उनके सर को पकड़ कर मेरी चूत को दबा रहे थे। मैं अपने होठों को काट रही थी और लम्बी लम्बी सिसकारियाँ ले रही थी। मेरी टांगें उनकी गरदन में लिपट गई थी।

"वाउ दीदी ग्रेट...बाथरूम मे चुदाई क्या जबरदस्त एनकाउंटर रहा होगा... आगे बताओ कि क्या हुआ...." प्रीति और भी मज़े लेते हुए बोलती है.

सिमरन ने प्रीति की चुचि मसल्ते हुए ----क्या तूने कुशल के साथ बाथरूम मे नही किया

दीदी आप कहानी की लय को मत बिगाड़ो मुझे जल्दी से सारी बातें बताओ
छोटी अब तो मानती है कि तू बड़ी हो गई है....."

" आपको क्यूँ लग रहा है..... ऐसा?" मैने बहुत ही शरमाते हुए कहा

" नही बस ऐसे ही.. अब जब तूने मुझे अपने दोनो छेदों मे अंदर ले लिया है...."

ओह्ह भैया..... मुझे शरम आती है...."
फ़िर वो मेरे ऊपर आ गए और मैंने अपनी टांगें उनकी कमर पे लपेट ली। मेरे दोनों हाथ उनकी गरदन में लिपट गए। उन्होंने फ़िर जोर का झटका मारा तो आऽऽऽह्हऽऽआ .॥अ.अह्.. जैसे मेरी जान ही निकल गई। फ़िर भैया मेरे बूब्स को दबाते और झटके मारते जाते। वो वहशी होते चले गए, मेरे बूब्स को निर्दयता से मसल रहे थे और दांतों से काट रहे थे, मेरी गरदन पर भी प्यार से काटा। वो जहाँ जहाँ अपने दाँत गड़ाते वहाँ खून सा जम जाता। मैं भी पागल हो जाती तो बदले में अपने नाखून उनकी पीठ में गड़ा देती और उनकी गरदन पर काट लेती। जंगलीपने से बाथरूम में मेरी प्यार भरी चीखें गूंज रही थी, जिससे भैया का जोश बढ़ता ही जा रहा था। यह सिलसिला आधे घण्टे तक चला और उतनी देर में मैं दो बार झड़ चुकी थी और भैया रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। फ़िर जब हम शांत हुए तो मैं तीसरी बार झड़ी थी। हम फ़्रेश हो कर कमरे में चले गए और थोड़ा आराम करके खाना खाया। फ़िर हम नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर बातें करने लगे।

मैंने कहा,"भैया . ओह सोरी . जान, अब मेरा क्या होगा, मैं क्या करूँ और अब आगे का क्या प्लान है, मेरा मतलब भविष्य का, क्योंकि अब मुझे घबराहट हो रही है, मैं आपके बिना नहीं रह सकती।"

वो बोले "चिंता मत करो मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ,

मैंने कहा "ठीक है , चलिए अब सो जाते हैं क्योंकि कल हमें कॉलेज भी जाना है"

वो बोले "चिंता क्यों करती हो जान, मैं तुम्हें तड़पता नहीं छोड़ सकता। आज ही हम एक हुए और क्या तुम मुझे तड़पता छोड़ दोगी गुड़िया?"

मैंने कहा "नहीं भाई .... प्लीज़ ऐसा मत बोलो। आज हम नहीं सोयेंगे। आज हम एक दूसरे को पूरा सुख देंगे। आप मेरे साथ जी भर कर और जम कर करो और अपनी बहन को रौंद डालो भैया."

फिर भइया ने मुझे रात में तीन बार और जम कर चोदा और वो भी आधे आधे घंटे तक। और तब तक मैं बेहोशी की हालत में आ चुकी थी। हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए। सुबह जब मैं उठी तो भइया कॉलेज चले गए थे मैं बहुत थकी हुई थी और मेरा बदन भी काफी दर्द कर रहा था खास कर से मेरी कमर। मैंने फ्रेश हो कर नाश्ता किया औरफिर सो गई। मैं सीधे ३ बजे के करीब उठी तो काफी ठीक महसूस भी कर रही थी और देखा कि भइया मेरे सर को अपनी गोद में लिए हुए थे
 
कुशल का लंड ऐसे होंठो के बीच था कि जो चाहे कितनी भी बार इस लंड को चूसे ये लंड बोर नही होने वाला था. और आज की रात तो जैसे ख़तम ही नही होने वाली थी क्यूंकी स्मृति भी फुल मूड मे थी और कुशल तो हमेशा ही एवरग्रीन रहा है.

स्मृति ऐसे ही उसका लंड चूसे जा रही थी और कुशल के मूँह से सिसकारियाँ निकलना शुरू हो गयी थी.

"उफफफफफ्फ़...... ओूऊऊऊऊओ.आआहहह..... " कुशल ऐसी ही सिसकारियो के साथ अपने हाथ स्मृति की पीठ की तरफ बढ़ाता है. स्मृति आधे से ज़्यादा लंड अपने मूँह मे ले चुकी थी. कुशल अपना हाथ पीठ से और नीचे ले जाना चाह रहा था जहाँ स्मृति की गान्ड थी लेकिन वो ऐसा कर नही पाया.

कुशल की हालत और भी खराब होती जा रही थी. जवान खून था और पूरी रात बाकी थी.

" आअहह... मेडम आज तो दिखा दो अपने उस छेद को.... जिसके लिए मैं दीवाना हू..... उफफफफफफफ्फ़ मेरी जाआअन्न्*नणणन्... ओह..." कुशल की हालत बहुत ही ज़्यादा खराब हो रही थी.

कुशल की ये बात सुन कर स्मृति अपने होंठ उसके लंड से हटा लेती है और बेड पे लेटने की तैयारी करने लगती है. कुशल को ये उम्मीद थी कि आज तो उसका सपना पूरा होने जा रहा है लेकिन स्मृति अपनी दोनो टांगे फैलाती है और अपनी चूत के छेद को खोल कर कुशल को दिखाती है. ये भी एक बेहद एरॉटिक सीन था लेकिन कुशल तो जैसे स्मृति की गान्ड का दीवाना था.

" आज तो कुच्छ स्पेशल हो जाए..." कुशल का इशारा शायद उसकी गान्ड की तरफ ही था.

" स्पेशल ही तो है ये......" स्मृति फिर से अपनी चूत पर हाथ लगाते हुए बोलती है.

" लेकिन आपने तो प्रॉमिस किया था कि मैं अपनी हर इच्छा पूरी कर सकता हू.." कुशल थोड़ा सा रूखे स्वर मे बोलता है.

" लाइयन... चिंता क्यू करता है... मैने तो उस रात भी पूरा मौका दिया था लेकिन तू ही नीचे नही आया. लेकिन आज फिर से वोही से सिचुयेशन है पहले मेरी टर्न और फिर तेरा टर्न....." स्मृति फिर से उसे खुला मौका देती है.

कुशल ये सुनते ही आगे बढ़ता है और झुक कर स्मृति की चूत पर एक स्ट्रॉंग किस करता है. ऐसे लगता है कि जैसे वो उसकी चूत खा जाने के मूड मे था. स्मृति उसकी इस मर्दानगी भरी स्टाइल से और भी इंप्रेस हो जाती है लेकिन फिर भी अपनी सिसकी को नही रोक पाती..

" उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़.... लाइयन.... कोई फॉर्मॅलेटीस नही.... प्लीज़ बुझा दे इसकी प्याआसस्स्स्स्सस्स....." स्मृति शायद उसका लंड अंदर जल्दी लेना चाहती थी.

कुशल भी वेट ना करते हुए लंड का मूँह चूत पर टिकाता है और धकककककक से अंदर घुसा देता है. स्मृति को तो जैसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी मिल जाती है.

" उफफफफ्फ़....ओह..आआहहह...आहहहहहः....." स्मृति अपनी चूत मे लगते हुए झटको के साथ और भी मस्त हो जा रही थी. जैसे जैसे झटके लग रहे थे वैसे वैसे स्मृति अपनी टांगे और फैलाती जा रही थी.

जब वो इतना बड़ा लंड बाहर आ रहा था और जिस स्पीड के साथ अंदर जा रहा था तो सीन देखने लायक था. जैसे कोई समुद्रा मंथन से खास चीज निकलना चाह रहा हो लेकिन यहाँ पर तो कुशल सिर्फ़ स्मृति की चूत से पानी ही पानी निकाल रहा था जिसे खुद कुशल भी देख कर पागल हो रहा था.

"उईईईईईईई..आआहहह... येस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स......फकक्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क........." स्मृति अपनी पूरी लाइफ जी रही थी. ऐसे स्ट्रॉंग स्ट्रोक्स जो कि किसी भी लड़की को स्वर्ग की सैर करा सकता था.

बेड रूम से फूच फुच्च के साउंड आने शुरू हो गये थे. कुशल की आँखे भी बंद हो गयी थी और वो मस्त होकर धक्के लगा रहा था. उसके मूँह से भी सिसकारियाँ निकल रही थी.

ऐसा करीबन कुच्छ मिनिट चला और तभी पता नही स्मृति को क्या सूझा कि वो डिफरेंट पोज़िशन मे आने की कोशिश करने लगी. कुशल को शुरू मे समझ नही आया लेकिन फिर वो समझ गया कि आख़िर स्मृति क्या चाहती है. अब स्मृति ऐसी पोज़िशन मे थी कि उसकी गान्ड का छेद भी कुशल को क्लियर दिखाई दे रहा था और लेकिन लंड अभी भी चूत मे ही था. स्मृति की गान्ड कुशल की बहुत बड़ी फॅंटेसी थी तो अब वो छेद उसके सामने था तो जैसे कुशल और भी पवरफुल सिचुयेशन मे था. कस कस के धक्के लगाने शुरू कर दिए थे और वहीं दूसरी तरफ स्मृति भी अपनी गान्ड अच्छे से उछाल रही थी. स्मृति एक एक्सपीरियेन्स्ड लेडी थी, किस मूव से कैसे लंड अंदर जाएगा उसको सब पता था और इसका वो पूरा फ़ायदा उठा रही थी.

कुशल पागल हुए जा रहा था और वहीं स्मृति भी पूरी मस्ती मे थी.

"उफफफफ्फ़...हीईीईई.....एसस्स्स्स्स्सस्स....फुक्कककककककक....आआहहह...म्ह" और कुच्छ ही देर मे स्मृति की गान्ड कुशल के लंड पर कसति चली गयी और वो मंज़िल तक पहुँच गयी थी. और इन नो टाइम कुशल भी अपनी पिचकारी उगल देता है. क्या मस्त सेक्स हुआ दोनो के बीच, दोनो उसी बेड पर लेट गये. और स्मृति कुशल के बालो मे हाथ फिराने लगी.... शायद उसे पूरा अहसास था कि ये मीटिंग पूरी रात चलेगी
सिमरन अपनी पास्ट स्टोरी प्रीति को सुना रही थी जिसमे सिमरन के भाई ने सिमरन को साड़ी मे देखा और वो रूम से बाहर चला गया क्यूंकी उसका लंड खड़ा हो गया था.

" फिर क्या हुआ दीदी... आगे बताओ ना..." प्रीति फिर से पूछती है.

"उस दिन मैं बहुत खुस थी, आख़िर लड़की होने का अहसास मुझे उस दिन ही हुआ था. ये भी अहसास हो गया था कि लड़की का मीनिंग क्या है. लड़की का मीनिंग बस घर की चार दीवारी मे रह कर बस काम करना नही है बल्कि लड़की उनका मन बहलाने के लिए बनी है जो घर के लिए काम करते है - फॉर मेन. उपर वाले का तहे दिल से शुक्रिया अदा करा उस दिन, कि उसने मुझे किसी लायक बनाया. मैं इस लायक थी कि किसी के लंड को खड़ा कर पाऊ, और यही तो लड़की की सबे बड़ी इज़्ज़त है. मैने सोच लिया था कि अपने भैया के दिल मे उतर कर रहूंगी और अपनी शराफ़त से भी नही हटूँगी. मुझे पता था कि भैया के पास अब उनकी गर्ल फ्रेंड कभी नही आने वाली क्यूंकी चुदाई हुई ही इतने भयंकर तरीके से थी. और मुझे ये भी पता था कि अब भैया के मूँह खून लग चुका है. वो कहीं ना कहीं भटकेंगे ज़रूर तो क्यू ना मैं उन्हे अपने कदमो मे ही झुका लू."

"वाउ दीदी ग्रेट... क्या जबरदस्त एनकाउंटर रहा होगा... आगे बताओ कि क्या हुआ...." प्रीति और भी मज़े लेते हुए बोलती है.

" अगले एक दिन भैया का मूड काफ़ी अपसेट रहा, सिर्फ़ अपने गर्ल फ्रेंड मॅटर की वजह से. मैं चाहती थी कि उनका मूड फ्रेश करू... तो उस दिन उसके रूम मे पहुँच गयी... और बात करनी शुरू करी -

"हेलो भैया... कैसे हो... क्या सोच रहे हो इतनी गौर से...." वो अपने बेड पर उल्टे लेटे हुए थे और मैने उनके पास बैठते हुए पुछा. वो मेरी आवाज़ सुन कर चोंक गये थे. वो एक मॉर्निंग थी तो मैने अच्छे से अपने आप को रेफ्रेश किया था. हल्का सा मेक अप भी किया था जोकि भैया को दिखाई नही दे सकता था, बस लिप्स थोड़े ग्लॉसी नज़र आ रहे थे. एक लूस सी स्लीवेलेस्स टी-शर्ट पहनी थी और बेलून पयज़ामा पहना था.

" बस मूड ऐसे ही ठीक नही है.." भैया ने थोड़ा अपसेट मन से जवाब दिया.

" ऐसा क्या हो गया भैया जो इतने उदास हो.. आ जाओ चेस खेलते है..." मैने अपने भैया का हाथ पकड़ कर उन्हे उठाते हुए कहा.

" सिम्मी मेरा मूड कुच्छ भी खेलने का नही है... तू जा यहाँ से.." उन्होने फिर से रूखे से सुर मे जवाब दिया.

" चेस नही तो क्या चेस्ट से खेलने का मन कर रहा है...." मैं अपने मन ही मन बड़बड़ाई

" क्या कहा तूने..?"

" मैने कहा कि प्लीज़ चलो ना...."

" नही मुझे ऐसे लगा कि तूने कुच्छ और कहा....." मेरे भैया को थोडा शक था कि मैने कुच्छ और कहा.

" अब ये सोचना छोड़ो और चलो मेरे साथ खेलने..." मैं भी भी उनका हाथ पकड़े ज़िद कर रही थी.

"उन्होने इस बार अपना हाथ ऐसे खींचा जैसे मुझसे छुड़ाना चाह रहे हो लेकिन उनके हाथ के साथ मैं भी खींचती हुई चली गयी और धदमम्म्मममममम...वही हुआ जिसका मुझे इंतेज़ार था. सीधा उनके सीने पर जाकर गिरी मैं... किसी मर्द की छाती से मेरे अनटच बूब्स की पहली टक्कर थी वो. उफ्फ क्या बताऊ प्रीति कि बदन मे कैसी आग सी लग गयी थी लेकिन कुच्छ कर नही सकती थी. फ़ायदा इतना मिला कि भैया को भी अहसास हो गया की कुच्छ तो है मेरे सीने मे. उनकी आवाज़ नही निकली लेकिन उनका चेहरा बता रहा था कि मेरी उभरती जवानी को वो अपने पूरे मन से देख रहे है."

" डीडीिईईईईईई.. बस बताती जाओ....." प्रीति अपने बूब्स अब खुद प्रेस करने लगी थी.

" मैं धीरे से उठी.. मेरे भैया वापिस अपने होश मे आए और मुझे सॉरी बोलने लगे.. मुझे पता था कि इसमे उनकी कोई ग़लती नही तो मैने भी उन्हे सॉरी बोलने के लिए मना किया. उठ कर बहुत ही सावधानी से अपनी टीशर्ट को सही किया और दोनो हाथो को उपर करके अपने बालो को सही किया.. मेरा टारगेट अब उन्हे अपनी आर्म्पाइट पे आए थोड़े बालो को दिखाना था. उन्होने उन बालो को गौर से देखा लेकिन कुच्छ बोले नही. मैं फिर से उनके साइड मे बैठ गयी और फिर से एक कॉन्वर्सेशन स्टार्ट हुई और पहले शुरू करने वाले वो ही थे -

" छोटी तुझे नही लगता कि तू बड़ी हो रही है....."

" आपको क्यूँ लग रहा है..... ऐसा?" मैने बहुत ही शरमाते हुए कहा

" नही बस ऐसे ही.. और बता.. स्कूल का क्या प्लान है...."

"क्या प्लान होता.. अब तो कल जाना है... ड्रेस धोने के लिए डाल दी है...."

" तू कब तक वो ड्रेस पहनती रहेगी..... बाकी लड़कियो की तरह कपड़े क्यूँ नही पहनती है..."

" बाकी लड़कियो की तरह?उनमे और मेरे कपड़ो मे क्या फ़र्क है...?" मैने भी अंजान बनते हुए कहा.

" पागल आज की लाइफ मे तुझे थोड़ा मॉडर्न होना चाहिए.. देख आज कल की लड़किया स्कर्ट पहनती है और तू है कि पढ़ने लिखने के बावजूद इतने कपड़ो के तले दबे रहती है....तुझे स्कर्ट पहन नी चाहिए और टीशर्ट... ज़्यादा कपड़े पहन ने से तेरी हाइट कम रह जाएगी. समझ आ रहा है या नही?"

"भैया समझ तो आ रहा है लेकिन मेरे पास स्कर्ट नही है और मुझे पता भी नही कि मैं स्कर्ट मे कैसी लगूंगी...?"

"पूरा स्कूल पागल हो जाएगा तुझे देख कर......" भैया के मूँह से ये बात एग्ज़ाइट्मेंट मे निकल गयी थी और ये सुनकर मैं शरमा गयी..

" लेकिन मैं स्कर्ट लेने किसके साथ जाउ.....?" मैने नादान बनते हुए बोला

" चल तो फिर तुझे शॉपिंग करा के आता हू.... चल तैयार होकर आ जा मैं तेरा नीचे वेट करूँगा..." एक ही दिन मे इतना सब हो रहा था तो यकीन नही हो रहा था. कल तक जो भाई घास भी नही डालता था, आज वो शॉपिंग करने ले जाने को तैयार था. यही होता है लड़की के हुश्न का जादू..."

"फिर आप गयी शॉपिंग करने..?" प्रीति सिमरन से पूछती है.

"फिर शॉपिंग करने के लिए मैं तैयार हो गयी और आख़िर नीचे चली गयी, मेरे दिल मे काफ़ी एग्ज़ाइट्मेंट था कि पता नही आख़िर मेरे लिए क्या शॉपिंग होने जा रही है. जो कुच्छ भी हो लेकिन सबसे ज़्यादा खुश मे इस बात के लिए थी कि मेरा भाई मुझ पर ध्यान दे रहा था और यही हर लड़की चाहती है कि उसको इग्नोर ना किया जाए और उसको हमेशा लोगो की अटेन्षन मिले. अपने भाई के साथ बाइक पर बैठने का उस दिन अलग ही एक्सपीरियेन्स था, बाइक जितनी तेज़ी के साथ चल रही थी उतनी ही तेज़ी के साथ हम दोनो एक दूसरे के और करीब आते जा रहे थे. ऐसा लग रहा था कि जैसे लाइफ मे कोई भी टेन्षन नही है और सब कुच्छ बहुत अच्छा चल रहा है. जब लड़की ऐसा सोचती है तो उसके चेहरे पर और भी निखार आ जाता है और वैसे भी उस टाइम तो मैं एक पूरी टीन थी."

"वाउ.. ग्रेट.. आगे बताओ....." प्रीति का एग्ज़ाइट्मेंट भी कम नही हो रहा था.

" फिर काफ़ी चलने के बाद हम एक माल मे पहुँचे.. मेरा कॉन्फिडेन्स इतना अच्छा नही था और माल मे बहुत घबरा कर चल रही थी मैं, पता नही क्यूँ एक अजीब सा डर लग रहा था. माल मे पता नही कितने सारे गर्ल फ्रेंड और बॉय फ्रेंड के जोड़े बैठे थे. गर्ल्स ने बेहद टाइट टाइट क्लोदिंग पहनी हुई थी जिसे देख कर मुझे अपने भाई की एक्स गर्ल फ्रेंड की और भी याद आ रही थी और समझ भी आ रहा था कि जमाना आज कल उन्ही लड़कियो का है जिनमे अपनी बॉडी दिखाने का टॅलेंट है. नही तो खूबसूरती किसी भी काम की नही. खैर मेरे दिल मे अभी तक यही बात चल रही थी कि पता नही भैया आज मुझे कैसी शॉपिंग कराने जा रहे है. थोड़ी ही देर मे हम एक डिपार्ट्मेनल शोरुम मे घुस गये... मुझे लगा कि भैया मेरी हेल्प करेंगे मेरी शॉपिंग मे क्यूंकी ये उन्ही का डिसिशन था कि मैं शॉपिंग करू..." सिमरन बस बताती जा रही थी.

" तो क्या उन्होने हेल्प नही की....?" प्रीति क्वेस्चन मार्क वाली निगाहो से देखती है.

"सबसे पहले तो उन्होने पूरे शोरुम मे नज़रे फिरा कर देखी और फिर मेरे पास आकर बोले -

माइ ब्रदर- सिम्मी आज तेरी चाय्स देखता हू. तुझे एक मॉडर्न और टाइम के साथ चलने वाली लड़की बन ना है. ले ले जो मर्ज़ी लेना है.

मे - भैया सच मे मुझे कुच्छ आइडिया नही है. वैसे भी जैसे सूट सलवार मे पहनती हू तो वो तो मुझे यहाँ दिखाई भी नही दे रहे है....

"और ये बात सच ही है कि मुझे आइडिया नही था कि मैं क्या लू... मुझे उसे खुले आसमान मे ऐसे छोड़ दिया गया कि मुझे आइडिया लगाना मुश्किल था कि मैं क्या लू... खैर फिर भैया आगे बोलते है.."

माइ ब्रदर - हा हा हा हा हा हा... तुझे आइडिया नही है. अरे पगली तू कोई बच्ची थोड़े ही ना है. आज कल 80% शोरुम गर्ल्स के लिए होते है क्यूंकी उनके पास पहन ने के ऑप्षन ज़्यादा होते है. तेरे जैसी लड़की के लिए काउंटलेस ऑप्षन है पहन ने के लिए.....

"भैया बताते जा रहे थे और मैं सब सुन कर शरमा भी रही थी और खुश भी हो रही थी... भैया खुल कर तो सब नही बोल सकते थे लेकिन मैं समझ रही थी कि वो बोलना चाहते थे कि मेरे जैसी सेक्सी लड़की के पास तो बहुत सारे ऑप्षन्स है ट्राइ करने के लिए. लेकिन फिर भी मुझे कुच्छ समझ नही आ रहा था तो मैने फिर से भैया से पुछा -

मे- भैया प्लीज़... मैं इतनी बड़ी नही हुई हू. आप ही ने तो शॉपिंग के लिए कहा था तो मैं आ गयी अब आप ही हेल्प करिए मेरी. नही तो सच मे मुझे कुच्छ समझ नही आ रहा है...

"भैया जैसे मेरी उस रिक्वेस्ट को सुन ने के लिए ही खड़े थे और मेरे मूँह से ऐसी बात सुनते ही वो शोरुम मे आ आगे की तरफ बढ़ते है. मैं उनके पीछे पीछे चल रही थी.. वो एक स्कर्ट सेक्षन मे पहुँचे.. प्रीति तुझे क्या बताऊ कि जो उन्होने स्कर्ट उठाई उसे देख कर मेरा दिल कैसे धक धक करने लगा था. वो स्कर्ट बहुत ही छोटी थी....."

"वाउ... युवर ब्रो ईज़ सो रोमॅंटिक.. वो आपको छोटे कपड़ो मे देखना चाहते थे.... एनीवे फिर क्या हुआ....." प्रीति भी मुस्कुराते हुए कहती है.

" वो स्कर्ट उठा कर मेरी तरफ टर्न हुए.. और मुझसे बोले -

माइ ब्रदर - सिम्मी ट्राइ दिस....

मे- भैया आर यू सीरीयस..... ये बहुत ही छोटी है

माइ ब्रदर - हा हा हा हा हा हा हा...

मे - आप हंस क्यू रहे है.. क्या मैने कोई जोक सुनाया है...

माइ ब्रदर - मैं हंस... इसलिए रहा हू कि पता नही मेरी बहन बड़ी कब होगी... मेरी ऐसी भी दोस्त है जिनके लिए ये स्कर्ट भी लोंग है... और मेरी बहन कहती है कि ये छोटी है.. हा हा हा हा हा

मे- वाह वाह... ये किसी के लिए लोंग स्कर्ट भी है. ये बहाने ना बनाइए...

माइ ब्रदर - देख सिम्मी, ये मेरी शॉप नही है. यहाँ पर वोही रखा है जो यहाँ बिकता है. और देख स्कर्ट सेक्षन मे सबसे पहले यही स्कर्ट रखी है क्यूंकी लड़कियो की पहली डिमॅंड ही यही है..... चल अब बाते बाद मे.. इसे पकड़ और फिटिंग रूम मे इसे ट्राइ कर के आ....

मे- यू श्योर भैया?????

माइ ब्रदर - अरे मेरी मा और कैसे बताऊ कि हाँ श्योर. अब जल्दी जा और ट्राइ करके बाहर आ.....

" मैने उस टाइम तक अपने पाँव किसी को भी नही दिखने दिए थे. घर मे और या स्कूल मे, हमेशा धकि रहती थी. अब हाथ मे एक छोटी सी स्कर्ट को पकड़ के चलना बड़ा भारी सा लग रहा था." सिमरन सीरीयस भाव बनाते हुए बोलती है.

" तो क्या आपने वो ट्राइ करी या नही करी...." प्रीति उसकी स्टोरी मे बहुत इंट्रेस्टेड थी.

" आख़िर मैं फिटिंग रूम मे घुस ही गयी... बॉटम उतारा और स्कर्ट ट्राइ की... प्रीति सच बता रही हू कि इतनी शरम आई कि बता नही सकती.... वो मिनी स्कर्ट थी. बचपन से कोई लड़की पहने तो बात नही लेकिन जब जवानी मे कोई लड़की पहली बार इसे पहनती है तो बड़ा अजीब लगता है. मेरी गोरी और टाइट जांघे पूरी विज़िबल हो गयी थी... स्कर्ट इतनी छोटी थी कि अगर थोड़ी भी हवा नीचे चली जाए तो बस सब कुच्छ दर्शन हो जाए.... स्कर्ट पहन ने के 5 मिनिट बाद तक भी मैं सोचती रही कि बाहर जाउ या नही. कन्फ्यूज़ थी ही कि इतने मे फिटिंग रूम का डोर नॉक हो गया.... मैं समझ गयी कि ये भैया ही है.... बहुत ही दबे पाँवो से.. बढ़ी हुई धड़कनो के साथ मैने फिटिंग रूम का डोर खोला और धीरे धीरे गेट के पीछे से मैं सामने आई.... मेरे भैया की निगाहे मुझ पर पड़ी.... उपर से नीचे तक उनकी निगाहे पहुँची.... मेरी थाइस पर रूकी और फिर और भी नीचे चली गयी... मैने क्लियर देखा कि उनका मूँह खुला का खुला रह गया था और और गले के अंदर अटका हुआ सब कुच्छ अंदर ले जा रहे थे..."

" तो आख़िर गिरा ही दी बिजली... ग्रेट...." प्रीति सिमरन की बात सुनते हुए बोलती है.

" कुच्छ सेकेंड्स तक भैया के मूँह से कोई शब्द नही निकले.... मुझे खुद भी टेन्षन हो रही थी कि कहीं उस स्कर्ट मे मैं जोकर तो नही लग रही थी. तभी भैया मे चुप्पी तोड़ी ....

माइ ब्रदर - ओह माइ गॉड... यू आर सो सो हॉट.......

"ये बात बोलते हुए भैया की आइज़ मेरी थाइस पर थी.. और चेहरा बिल्कुल लाल पड़ चुका था.. वो आगे बोलते है...

माइ ब्रदर - यू आर नोट आ चाइल्ड अनीमोर.... इतनी गजब दिख सकती है कि मुझे आइडिया भी नही था.. ज़रा पीछे घूम कर दिखा....

"अपने भाई के कहने पर मैं पीछे घूम गयी.... पीछे का हिस्सा तो मैं भी नही देखा था लेकिन मुझे इतना अहसास ज़रूर हो गया था कि पीछे से मेरे हिप्स पर वो स्कर्ट उठी हुई है...... तभी मुझे कुच्छ गिरने की आवाज़ आती है.. मैं पीछे मूड कर देखती हू तो भैया नीचे झुक कर कुच्छ उठा रहे है.. मैने कोई रिएक्ट नही किया लेकिन जैसे ही मुझे याद आया कि आज मैने क्या पहना हुआ है तो ये सोचते ही मैं उच्छल पड़ी और फिटिंग रूम के अंदर की साइड हो गयी.."

माइ ब्रदर - वो. वो.. मोबाइल गिर गया था....

" अपने भाई की इस बात पर मुझे हँसी आ गयी लेकिन मुझे ये भी डर था कि आज तो मेरी पैंटी देख ही ली शायद भैया ने... लेकिन मैं और कर भी क्या सकती थी...."

" हाई दीदी...उस स्कर्ट को थोड़ा सा और उठा देती तो क्या हो जाता... आपने तो भैया को तरसा ही दिया....." प्रीति भी खुलती जा रही थी.. उसे सिमरन की ये स्टोरी काफ़ी एरॉटिक लग रही थी.

" तू बाते ना बना और मेरी बात सुन... मेरे भैया ने मुझसे वहीं रुकने के लिए बोला और कहा कि वो एक टॉप लेकर आते जो उस टीशर्ट के साथ अच्छा लगेगा... मैने भी यही सोचा कि जब एक बात स्कर्ट पहन ही ली तो टॉप से क्या डरना.. मैने उन्हे हाँ बोल दिया और वो मेरे लिए टॉप लेने चले गये.. मैं बहुत हॅपी थी... मिरर मे चारो और घूम कर देख रही थी.. जैसे ही मैं घूमती तो मेरी स्कर्ट हवा मे उड़ती और मेरी रेड पैंटी खुद भी मुझे दिख जाती..." सिमरन रोमॅंटिक अंदाज़ मे सारी बात बताती जा रही थी.

" हाई मैं मर जावा दीदी.. पैंट पहनी भी तो रेड... अपने भैया को पूरा फ्लॅट करने की तैयारी कर रखी थी आपने तो...... खैर आगे बताइए आप...." प्रीति हर बार की तरह इस बार भी बहुत एग्ज़ाइटेड थी.

" मैं खुश हो ही रही थी कि इतने मे भैया फिर एक टॉप लेकर आए..... टॉप को देखते ही मेरी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी. वो एक छोटा सा स्लीवेलेस्स टॉप था जोकि लेंग्थ मे काफ़ी चौड़ा था. गला इतना डीप कि क्या बताऊ..... मुझे तो ऐसा लगा कि जैसे भैया दुश्मनी निभा रहे हो.....

माइ ब्रदर - ले सिम्मी इसे ट्राइ कर......

मे- ये कैसा टॉप है.....किसी बच्चे का तो नही है......

माइ ब्रदर - हा हा हा हा हा.. तू भी काफ़ी नॉटी है. अगर देखना चाहती है तो वहाँ देख उस मॅनिकिन पर यही टॉप है..

"भैया के इशारा करते ही मैने फिटिंग रूम से मूँह बाहर निकाला और उस डाइरेक्षन मे देखा जहाँ भैया ने इशारा किया था. मॅनिकिन को देखते ही मुझे चक्कर आ गये.. वो टॉप बस मॅनिकिन के बूब्स से बस थोड़ा ही नीचे था, यानी कि आधा पेट नंगा ही रहता उसमे... और यही नही.. इतना डीप नेक था कि मॅनिकिन के बूब्स जैसे बाहर आ जाने को तैयार थे.. मैं फिर से कन्फ्यूज़ थी कि क्या करू..इतने मे मेरे भैया ने फिर से मुझसे बात करनी शुरू की...

माइ ब्रदर - कम ऑन सिम्मी... इतना टाइम क्यू लगा रही हो..

मे- भैया ये टॉप तो... कैसे..यानी... ये तो....

माइ ब्रदर - अरे मेरी प्यारी बहना... ये मैं तुझे लड़को के टॉप थोड़े ही दे रहा हू.. तूने देखा ना कि मॅनिकिन पर भी यही टॉप है यानी कि यही फॅशन है.. अब टेन्षन ना ले और जल्दी जाकर ट्राइ करके आ......
 
स्मृति के चेहरे की ख़ुशी बता रही थी आज वो कितनी हैप्पी है. एक घर उसमे एक जवान लड़का और एक सेक्सी लेडी. ये मेटर नहीं कर रहा था की उनके बीच क्या रिलेशन है.आज प्रीती घर पर नहीं थी और आराधना भी दिल्ली में थी. पता नहीं कि स्मृति का क्या प्लान था लेकिन उसके ट्रांसपेरेंट कपडे बता रहे थे कि उसके विचार आज ठीक नहीं है.कुशल अभी भी स्माइल करते हुए स्मृति की तरफ देख रहा था.
" माँ..... आज प्रीती भी नहीं है तो मैं सोच रहा था की....." कुशल बोलते बोलते रूक जाता है.
" क्या सोच रहा था.....?" स्मृति उसकी आँखों में देखते हुए बोलती है.
" मैं सोच रहा था की क्यों न मैं आज नीचे ही सो जाऊ..... ऊपर डर लगता है न अकेले...." कुशल एक्टिंग करते हुए बोलता है.
" मर्जी है तेरी.... वैसे क्या तुझे हॉल में नींद आ जाएगी........?" स्मृति भी एक शैतानी स्माइल के साथ बोलती है.
" नहीं माँ... वो हॉल में नहीं मैंने सोचा की क्यों न मैं आपको कंपनी दे दू...... डैड नहीं है तो आपके साथ ही सो जाऊ......? क्यों क्या सोचती हो?" कुशल फिर से ड्रामा करते हुए बोलता है.
स्मृति हंसती रहती है लेकिन कुछ नहीं बोलती है. कुशल उसके रिप्लाई का वेट कर रहा था लेकिन वो कुछ नहीं बोलती.
" क्या हुआ माँ........ आपने कुछ रिप्लाई नहीं किया...." कुशल फिर से पूछता है.
" नहीं वो एक्चुअली मेरी तबियत सही नहीं है......." स्मृति स्माइल करते हुए बोलती है.
" क्या हुआ माँ.... सब सही तो है न......." कुशल टेंशन लेते हुए पूछता है.
" नहीं वो मेरे बैक में पैन है थोड़ा सा.... सोच रही हु की सुबह फ़िज़ियोथेरेपिस्ट के पास चली जाऊ...." स्मृति अभी भी स्माइल कर रही थी. कुशल ये सब समझ रहा था.
" क्यों न माँ..... मैं आपकी मसाज़ कर दू....... आपके रूम में..... आपके बेड पे...... पूरी रात...... हो सकता है की सुबह आपको आराम मिल जाए......" कुशल का इशारा कहीं और नहीं बस चुदाई की तरफ था.
"ह्म्म्मम्म्म्म....... चल ठीक है. ये ठीक रहेगा. किचेन में मसाज़ आयल रखा है उसे लेकर रूम में आ जा....." और स्मृति ये बोलकर अपने रूम की तरफ जाने लगती है.
कुशल की आँखों में तो ४४० वाल्ट की शाइन आ चुकी थी.
वो एक्ससिटेड होते हुए चिल्लाता है." यस माँ......" वो शायद कुछ ज्यादा ही एक्ससिटेड हो गया था.
स्मृति रूकती है और पीछे की तरफ मुड़ती है "मुझे मसाज़ कुशल से नहीं बल्कि लायन से चाहिए....."कुशल उसका इशारा समझ जाता है की वो क्या कहना चाहती है. और एक सेक्सी स्माइल के साथ किचन की तरफ तेज कदमो से चलने लगता है. और स्मृति भी सेक्सी चाल के साथ अपने बेड रूम की तरफ चल देती है.
कुशल किचन से मसाज़ आयल लेता है और तेज कदमो के साथ बेड रूम की तरफ बढ़ने लगता है. बेड रूम के अंदर एंटर होते ही कुशल और भी एक्ससिटेड हो जाता है
" धीमी लाइट एंड लाइट परफ्यूम फ्रेग्रेन्स वास there. रूम का माहौल बहुत ही ज्यादा रोमांटिक सा था वो अपनी नजरे घूमता है तो स्मृति बेड पर जाकर लेट चुकी थी और वो भी उल्टा होकर.कुशल आगे की तरफ बढ़ता है लेकिन कुशल को स्मृति की आवाज रोक देती है.
" क्या लायन ऊपर की लाइट और सारे ड़ोर बंद कर के आ जायेगा क्यूंकि आज वो पूरी रात मेरे साथ हो रहेगा और मेरी मसाज़ करेगा..... " स्मृति की आवाज में एक अलग ही कसक थी.
कुशल ये सुनते ही मसाज़ आयल की बोतल को बेड के करीब रखता है और भागता हुआ रूम से बहार चला जाता है. कुशल को जैसे कुछ होश ही नहीं था. वो रूम से बहार निकल कर सीधा ऊपर जाता है और कुछ ही सेकण्ड्स में नीचे आ जाता है.
बेड रूम में घुसते ही स्मृति उसे फिर से टोकती है-" कहीं ऐसा तो नहीं की लायन हॉल से ही वापिस आ गया....." स्मृति मजाक में ये बात कह रही थी
." अगर आप चाहे तो जाकर देख सकती है. मैं सारी लाइट्स और सारे ड़ोर बंद कर के आया हु....." कुशल मसाज़ आयल की बोतल उठाते हुए बोलता है.
" हे हे हे. मुझे लायन पर इतना तो यकीं है......" स्मृति अभी भी उल्टा ही लेते हुए थी.
कुशल उसके पास पहुँच जाता है.
" मैडम मसाज़ शुरू करें...." कुशल उसके पास बैठते हुए बोलता है.
" हाँ हाँ क्यों नहीं..... स्टार्ट करो प्लेसससससस" प्लीज कहने के तरीके पर ही कुशल का तो लंड स्टोन से भी स्ट्रांग हो गया.
" तो मैडम शुरू करें...." कुशल पता नहीं क्या पूछना चाह रहा था बार बार
" क्या राइटिंग में देना पड़ेगा क्या.... शुरू करो न...." स्मृति की बात में इस बार बनावटी गुस्सा था
" वो.... एक्चुअली मैडम..... मसाज़ अच्छी तभी होगी जब आप ये...... ये ड्रेस उतर देंगी...." कुशल झिझकते हुए बोल ही देता है. वो स्मृति को नंगा देखना चाहता था.
" ओह्ह्ह्ह..... तो ये बात है. तो मिस्टर आप मुझे न्यूड करके मसाज़ करना चाहते हो. एक मैरिड लेडी को न्यूड होने के लिए बोलते हुए आपको शर्म नहीं आती....." स्मृति झूठा गुस्सा करते हुए बोलती है.
" वो मैडम..... मसाज़ में शादी से क्या लेना. बच्चा पैदा होता है या इंजेक्शन लगाना होता है तो डॉक्टर भी तो देख लेते है लेडीज के बहुत सारे पार्ट्स को. तो मसाज़ करने वाला क्यों नहीं...?"
" ह्म्म्मम्म...... बात तो सही है. लेकिन मसाज़ बस पीठ की होनी है ओके."
" आप टेंशन न ले मैडम......." कुशल एक्ससिटेड होते हुए बोलता है.
" तो खुद ही अलग कर दो न मिस्टर मसाजर मेरी ड्रेस को....." स्मृति कुशल की तरफ देखते हुए बोलती है.
कुशल तो जैसे इसके इंतज़ार में ही था.उसके हाथ स्मृति की मैक्सी की तरफ बढ़ते है और उसका नीचे का हिस्सा पकड़ कर वो ऊपर की तरफ उठाने लगता है. जैसे जैसे मैक्सी ऊपर हो रही थी वैसे वैसे स्मृति का गोरा और टाइट बदन कुशल के सामने विज़िबल होता जा रहा था.कुछ ही सेकण्ड्स में वो ड्रेस स्मृति की बॉडी से अलग थी. कुशल को ही मालूम है की वो कैसे कण्ट्रोल कर रहा था. सेक्स की एक और रियलिटी है की लेडीज फोरप्ले चाहती है लेकिन बॉयज कण्ट्रोल नहीं कर पाते .लेकिन यहाँ कुशल को न चाहते हुए भी कण्ट्रोल करना पद रहा था.
" अब देखते ही रहोगे या मसाज़ शुरू भी करोगे.." स्मृति की ये आवाज कुशल को ख्यालो की दुनिया से बहार निकलती है.
स्मृति की आवाज सुन कर कुशल सकपका जाता है और जल्दी से आयल की बोतल अपने हाथ में उठता है. वो अपने सीधे हाथ पर थोड़ा सा आयल गिरा कर स्मृति की मुलायम पीठ की मसाज़ शुरू कर देता है.
"आआअह्हह्ह्ह्ह...." स्मृति सिसक जाती है जैसे ही उसकी गरम बॉडी पर ये आयल गिरता है और कुशल के मरदाना हाथ उसकी बॉडी को टच करते है.
कुशल अपना हाथ चलना शुरू करता है. उसका हाथ बस पीठ तक ही सिमित था लेकिन निगाहें बस स्मृति की नंगी गांड को देख रही थी. साइड से स्मृति के बूब्स भी विज़िबल थे.
" क्या बस पैन पीठ में ही है...?" कुशल स्मृति की तरफ देखते हुए बोलता है. मसाज़ चालू थी अभी भी.
" तुम्हे क्या लगता है की कहाँ होना चाहिए...." स्मृति फिर से कुशल से पूछती है.
ये सुनते ही कुशल अपना एक हाथ स्मृति की गांड पर रख देता है.
" मैं तो पूरी बॉडी मसाज़ कर सकता हु.. आप इस बन्दे को आर्डर तो दीजिये..." ये बोलते ही कुशल अपने हाथ की एक ऊँगली को स्मृति की गांड के छेड़ पर टिका देता है.
" सोचूंगी.. अभी बस तुम पीठ की मसाज़ करो..." स्मृति उसे रिप्लाई करती है.लेकिन कुशल यहीं नहीं रुकता और अपनी उस फिंगर को स्मृति की गांड के छेड़ में थोड़ा सा घुसा देता है.
" ोुछहहहह...." स्मृति चिहुँक जाती है.
" क्या हुआ मैडम..?" कुशल नादाँ बनते हुए स्मृति से पूछता है.
" उफ्फ्फ्फ़.. पता नहीं शायद कोई परेशानी है पीछे..." स्मृति भी सब जानती थी लेकिन नादाँ बन रही थी.
अभी भी कुशल की एक फिंगर उसकी गांड के छेड़ में थी और कुशल का दूसरा हाथ अभी भी मसाज़ करने में लगा हुआ था.
" मैडम... आज कल स्नैक्स बहुत हो गए है. आप केयरफुल रहिये....." कुशल फिर से डबल मीनिंग बात करता है.
स्मृति की पीठ आयल से चमक चुकी थी और कुशल का दूसरा हाथ अभी भी उसकी गांड के ऊपर ही था." लेडीज स्नेक से नहीं डरती लेकिन मुझे लग रहा है की पीछे कोई स्नेक का बच्चा है...." स्मृति भी कुशल की डबल मीनिंग बात का रिप्लाई करती है.
" रियल स्नेक देखना चाहोगी....." कुशल ये बोलते बोलते अपने मसाज़ वाले हाथ को थोड़ा नीचे ले जाता है और उसके एक बूब्स को पकड़ कर साइड से दबा देता है.
स्मृति उसकी इस एक्टिविटी पर कुछ नहीं बोलती है. बस वो उल्टा लेती रहती है. कुशल साइड से ही अपने हाथ को उसके बूब्स पर घूमता रहता है. स्मृति कुछ नहीं बोल रही थी.हिम्मत करके कुशल अपनी फिंगर को थोड़ा और ज्यादा अंदर तक घुसा देता है. अब लगभग कुशल की पूरी फिंगर स्मृति की गांड में घुस चुकी थी.
"आआह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह.. मसाज़ कर रहे हो या क्या कर रहे हो..." स्मृति थोड़ा सा चिहुंकते हुए बोलती यही.
" उफ्फ्फफ्फ्फ़.. दिल करता है की इस पूरी बॉडी की मसाज़ कर दू..." कुशल की फिंगर अब स्मृति की गर्मी से और ज्यादा गरम हो चुकी थी.
दूसरी तरफ कुशल अभी भी अपने दूसरे हाथ से उसके बूब्स को साइड से दबा रहा था. स्मृति बस इस पूरी सिचुएशन का मजा ले रही थी. शायद आज पूरी रात एन्जॉय करने ला मूड था उसका. उसके गुलाबी लिप्स बड़ी बड़ी आईज टाइट बूब्स बता रहे थे की वो कैसे तड़प रही है.कुशल को थोड़ा सा ग्रीन सिग्नल मिल रहा था तो वो अपना दूसरा हाथ बूब्स से हटा कर उसकी गांड के पास ही ले जाता है. और थोड़ा सा आयल लेकर उसकी मोटी गांड के ऊपरी हिस्से को मसाज़ करने लगता है.
"उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़... वहां क्या कर रहा है.. वहां तो कोई पैन भी नहीं है.." स्मृति सिसकते हुए बोलती है.

" क्या पता की कितना बड़ा स्नेक अंदर चला जाए तो फ्यूचर में पैन होगा न तो अभी मसाज़ किये देता हु. हे हे हे हे..." कुशल ये बात बोलते हंसने लगता है.
"तो बस स्नेक वहीँ घुसेगा जहाँ अभी तेरा हाथ है... चल अब तो पूरी बॉडी ही मसाज़ कर दे.." ये बोलते हुए स्मृति थोड़ा सा आगे से उठती है जिस वजह से उसके बूब्स थोड़े से उठ जाते है. कुशल उसके बूब्स की ये सिचुएशन देख कर और पागल हो जाता है और अपने मजबूत हाथ उसके बूब्स पर रख देता है. पहली बार में ही कुशल उन्हें बहुत जोर से प्रेस कर देता है.
" ोूउऊउउउउ.... इडियट क्या ऐसे कोई प्रेस करता है. मेरे हस्बैंड के आने तक शेप बिगड़ जायेगी इनकी...." स्मृति गुस्से में बोलती है.
ये सुनते ही कुशल बहुत सोफ़्टली पेश आने लगता है. एक्चुअली इसमें कुशल की कोई गलती नहीं थी बल्कि स्मृति लग ही इतनी सेक्सी रही थी.कुशल अब धीरे धीरे उसके बूब्स को प्रेस कर रहा था और नैचुरली स्मृति की आवाजे अब निकलने लगी थी.
" उफ्फफ्फ्फ़.. आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह...... लायन आराम से..... आअह्हह्हह्ह्ह्ह...." स्मृति धीरे धीरे मस्त होती जा रही थी.
" मसाज़ ऐसे देना अच्छा नहीं लग रहा.. क्यों न मैं भी कपडे उतर दू...." कुशल स्मृति से पूछता है.
" उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़.. जल्दी कर.... उतर दे सारे कपडे...." स्मृति की ये बात सुनते ही कुशल वेट न करते हुए अपनी टीशर्ट पहले उतर देता है और फिर अपनी जीन्स भी उतर देता है.उसके स्ट्रांग लंड को देख कर स्मृति कण्ट्रोल नहीं कर पाती और आगे बढ़ कर उसके लंड पर अपने जूसी लिप्स रख देती है. कुशल आज की पूरी रात स्मृति के खुले पैन का मजा लेना चाहता था
 
"उफ्फ्फ प्रीती आगे क्या बताऊ लेकिन तू बस आज ही रात है तो मैं बता देती हु......"
"एकता अपने दोनों हाथो से मेरे भाई के सर के बालो को जैसे उखाड़ने में लगी हुई थी, उसकी चुत पर मेरे भाई के जीभ का अहसास वो झेल नहीं पा रही थी और पुरे वाइल्ड रूप में सिसक रही थी, वो एक ऐसी सिचुएशन थी की वाकई में उस फ्लोर पर सोना बहुत मुश्किल था. बहुत देर तक ऐसा ही चला और फिर मेरा भाई हट गया उसकी चुत से, और अपनी जीन्स उतरने लगा. ये सबसे इंटरेस्टिंग मोमेंट था क्यूंकि उस दिन मैं पहली बार देखने जा रही थी की आखिर लंड कैसा होता है रियल में और क्यों लड़किया इसके लिए पागल होती है......" सिमरन अपनी बियर को पीते हुए इतना बोल जाती है.
" तो बताओ न की कैसा था आपके भाई का........." प्रीती भी उत्तेजना में पूछती है.
" उसके लंड को देखने से पहले ही मैं अपनी गीली चुत में उँगलियाँ घुमा रही थी, और पहले उसने जीन्स उतरी और फिर अपनी फ्रेंची और जो मैंने देखा तो उससे मेरी चुत में चल रही मेरी ऊँगली रूक गयी थी
माय गॉड....... क्या मोटा और लम्बा....... देख कर बॉडी कम्पनी लगी और ऐसा लगा की जैसे बॉडी में जान ही नहीं है.
मन मैं आ रहा था की अब ये एकता भागेगी यहाँ से. लकिन ऐसा नहीं हुआ एकता उसको देख कर और खुश हो गयी और बोलने लगी "that's why I like u" एकता यह भी बोली की मर्द की पहचान उसके लंड से होती है जो की मेरे भाई के पास था.
एकता का ये एक्ससिटेमेंट देख कर मैं शॉकेड रह गयी थी. उसकी बारीक सी चुत. कैसे वो मुसल जैसे लंड को लेगी. लकिन एकता अपने घुटनो के बल बैठे हुए ही उस लंड को हाथ में पकड़ती है और मुँह खोल कर उसे अपने मुँह में ले लेती है.
ऐसे इरोटिक सन देख कर मैं पिघलती जा रही थी, एकता के होंठ में शायद हवा की भी जगह नहीं थी क्यूंकि लंड इतना मोटा था. एकता ने मुँह को आगे पीछे करना शुरू किया और मेरा भाई सातवे आसमान पर पहुँच गया.
उसका मुँह आसमान की दिशा में टर्न हो गया और अपने एक हाथ से वो एकता के बालो को पकड़ कर आगे पीछे करने लगा..... मैं कैसे बताऊ प्रीती की आखिर क्या सिन था वो. दिल में एक डर और दिल में एक इच्छा भी ,
ऐसा लग रहा था की पता नहीं उपरवाले ने हमे किस तरह से बनाया है......" सिमरन फिर से मचल चुकी थी लकिन बियर उसके गले को शायद ठंडक पहुंचा रही थी.
" वाओ दीदी क्या सीन होगा..... मैं समझ सकती हु...... लकिन आगे बताओ प्लीज......"
"एकता मेरे भाई के लंड को चूस रही थी और हालत मेरी ख़राब हो रही थी, दिल में डर एक्ससिटेमेंट नर्वस्नेस और बहुत कुछ एक साथ ही हो रहा था. प्रीती तू तो जानती ही है की लड़कियों में कितनी ईर्ष्या होती है, एकता तो मुझे वैसे ही पसंद नहीं थी और ऊपर से वो ऐसे खुले आम मौज कर रही थी तो मेरा दिमाग और ख़राब हो गया.. लकिन मैं कर कुछ भी नहीं सकती की वो मेरे भाई के लंड को चुस्ती रही और मेरा भाई एक्ससिटेड पे एक्ससिटेड होता रहा. अब मेरा भाई भी भूल चुक्का था शायद की उसकी कोई बहन भी है जो उसी के साइड वाले रूम में है और तभी तो वो और तेज तेज सिसकने लगा. एकता भी अपना मुँह आगे पीछे ऐसे कर रही थी की जैसे पता नहीं कितनी स्किल्ड खिलाडी है. लकिन थोड़ी देर बाद उसने मुँह हटा लिया..."
सिमरन ऐसे एक्सप्लेन कर रही थी जैसे की अभी भी सब उसकी आँखों के सामने हो रहा हो..
" ओह्ह्ह्ह.. फिर क्या हुआ दीदी....??" प्रीती को खुद भी अब याद नहीं था की वो कौन से नंबर की बियर पी रही थी
" फिर क्या... अब एकता अपनी चुत चटवा चुकी थी और मेरे भाई का लंड चूस चुकी थी... अब अगला स्टेप तो बस चुदाई था. उस टाइम तक मुझे भी नहीं पता था की आखिर क्या होने जाना है लकिन थोड़ी ही देर में मुझे क्लियर हो गया की क्या होने जाना है क्यूंकि एकता अब डोगी स्टाइल में आ चुकी थी... वो पीछे मुड कर मेरे भाई की तरफ ऐसे देखती है जैसे की उससे कह रही हो की अब देर मत कर..... मेरा भाई अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ता है और उसकी चुत पर लगता है.. कसम से ऐसे लग रहा था जैसे की चुदाई एकता की नहीं बल्कि मेरी होने जा रही हो.... मैं सोचने में बिजी थी की एक कचाक की आवाज आती है और एकता की पूरी बॉडी जैसे अकड़ चुकी थी..." सिमरन की आँखे अब और भी लाल हो चुकी थी.
" तो क्या घुस गया अंदर...." प्रीती भी अब ओपन वर्ड्स ओपनली यूज़ कर रही की

"अबे वो मुसल तो कहीं भी घुस जाए लकिन बेचारी एकता की चुत सही में फट गयी..... उसके गले में बस गुण गुण हो रही थी लकिन वो सही से बोल नहीं प् रही थी. उसको कुछ सोचने का टाइम मिलता इससे पहले ही मेरे भाई ने कास कर एक और धक्का लगाया.... ऐसा लगा की जैसे चुत से होता हुआ लंड उसके मुँह से बहार आ जायेगा.... मैंने रीलीज़ किया की एकता ने पूरी विल पावर इकट्ठी करके पीछे मुड कर मेरे भाई का विरोध किया लकिन मेरा भाई पता नहीं मस्ती की कौन सी दुनिया में था और वो और कस कस के धक्के लगता रहा और लगता रहा. खचाक्क्क्क खाछक की ऐसी आवाजे आ रही थी की मानो की उसकी चुत में लंड नहीं कोई ट्री घुसाया जा रहा हो.... क्यूंकि अब उसका चेहरा मेरी साइड था तो मैं देख नहीं सकती थी कितना लंड अंदर जा चूका था..." सिमरन सुनती जा रही थी.
" क्या हुआ.. क्या हुआ.. बताओ न... की आगे क्या हुआ.." प्रीती भी एक्ससिटेड होती बोलती है.
" मेरा भाई ऐसा हो गया था जैसे की चुदाई के लिए कब से तरस रहा हो... धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था और एकता की पूरी बॉडी हिलती जा रही थी. एकता के मुँह से बस मुझे आह आह आह आह और बस आह ही सुनाई दे रही थी. जिस तरीके से मेरा भाई पीछे और आगे हो रहा था तो मैं आईडिया लगा सकती थी की कितना बड़ा लंड एकता की चुत में बार बार अंदर जार अहा था और फिर बहार आ रहा था. एकता का चेहरा देखने लायक था मैं खुद भी चाहती थी की उस बीच की ऐसे ही चुदाई हो. लकिन थोड़ी देर में उसके चेहरे पर सटिस्फैक्शन के भाव आ गए थे. मेरे भाई के धक्के भी बहुत स्मूथ हो गए थे.. फुछ्ह फुछ की आवाजे आनी शुरू हो गयी थी और मैं भी अपनी अपनी ऊँगली को तेजी के साथ अपनी चुत में घूमने लगी थी... मैं किस पोजीशन में थी उस दिन मैं बता नहीं सकती.. उधर मेरा भाई उसकी चुदाई कर रहा था और इधर मैं खुद भी अपनी चुदाई अपनी फिंगर कर रही थी..... और फिर एक टाइम ऐसा आया की मुझे ऐसा लगा की मैं हवा में हु... पूरी बॉडी हलकी हो गयी... सर दर्द सही हो गया.... प्रीती क्या बताऊ वो मेरा पहला मस्टरबैशन था. मैं अपने होश में आयी ही थी की तभी मेरी अंदर की आवाजों पर ध्यान गया.." सिमरन बताती जा रही थी.
" क्या हो गया था अंदर....." प्रीती हैरानी से पूछती है.
" मैं तो खुद अपने आप का मस्टरबैशन करके मस्ती में थी और दूसरी तरफ इस दौरान क्या हुआ मेरा ध्यान नहीं गया लकिन जब मैं अंदर देखा तो एकता और मेरे भाई के बीच कुछ गरमा गर्मी चल रही थी. एकता बेड पर लेट चुकी थी और मेरा भाई अभी भी घुटनो के बल बैठा था. उसका लंड एक दम तना हुआ था और ब्लड से सना हुआ था. मुझे समझते हुए देर नहीं लगी की वो ब्लड एकता की चुत से ही निकला है.. लकिन मेरा भाई मुझे अपसेट नजर आ रहा था और वो एकता से बात कर रहा था
मेरा भाई -" ये क्या हुआ.. अभी मैं तो बाकी हु और तुम हो की लेट गयी.."
एकता - यू आर मदरफकर ... ये कैसे जुंगलियो की तरह कर दिया मेरे साथ... अपने इस बड़े लंड का मिसयूज करते हुए तुम्हे शर्म नहीं आई... हेट यू...
मेरा भाई -"- साली भाषण मत दे मुझे..लंड को सहने की हिम्मत नहीं है तो क्यों इतना मचल रही थी. अब जल्दी से आ जा नहीं तो जबरदस्ती चोद दूंगा...
एकता - "डॉन'ट टच में यू बास्टर्ड... कर दिया न मेरी चुत का तो काम. सही कहती थी सहेलिया की पहली चुदाई किसी भोले भले लड़के से ही अच्छी लगती है न की तुम जैसे जंगली से....
मेरा भाई -एकता प्यार से मेरी बात सुन ले... नहीं तो कसम से आज तेरी चुत का बैंड बजा दूंगा....
एकता - इतनी ही मर्दानगी है तो जाकर अपनी बहन को चोद ले न जो बराबर में सो रही है... मुझे अब तुमसे कोई रिश्ता नहीं रखना.....
मेरा भाई - तुझसे हिम्मत वाली तो मेरी बहन ही होगी लकिन आज रात तू ही चुदेगी ....." और इतना बोल कर मेरे भाई ने उसकी दोनों टाँगे पकड़ कर फिर से अपना लंड उसकी चुत में घुसा दिया.. काफी देर तक मेरा भाई उसकी ऐसे ही चुदाई करता रहा और मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. मैं खुद भी चाहती थी की उसकी ऐसे ही चुदाई हो.... एकता भी पूरी कोशिश करती रही की वो छुट जाए लकिन मेरे भाई की मजबूत काठी के सामने वो अपना बस नहीं चला पायी और फाइनली दबा कर चुदाई हुई.
कुछ मिनट्स के बाद मेरे भाई ने अपना लावा उसके अंदर डाल दिया और वो शांत हो गया..... जैसे ही लंड एकता की चुत से निकला वो लड़खड़ते हुए खड़ी होती और अपने कपडे पहन ने लगती है.. मेरा भाई उससे पूछता है -
मेरा भाई - कहाँ जा रही हो

एकता - मैं अपने घर जा रही हु... मुझे तुमसे कोई रिश्ता नहीं रखना...
मेरा भाई - सिर्फ एक चुदाई से ही डर गयी... तुम जैसी झंडू बाम लड़कियों में दम तो होता नहीं तो बॉय फ्रेंड क्यों बनती हो...
एकता -" मुझे अपनी चुत की हालत ख़राब नहीं करनी..... जैसा पहले बताया की ज्यादा शोक है तो अपनी बहन के साथ करो.. मुझ पे जोर मत चलाओ...
मेरा भाई - साली भागना है तो भाग यहाँ से... मेरी बहन बच्ची है अभी.. अभी ठीक से बड़ी भी नहीं हुई है वो... ज्यादा मत बोल अब नहीं तो और भी बुरा हो जाएगा...
एकता - ठीक है वो छोटी है तो छोटी सही... मैं तो चली......" और ये बोल कर एकता बहार आने लगती है.. मेरी हालत ख़राब थी क्यूंकि मेरी जीन्स और पैंटी अभी भी फ्लोर पर ही पड़ी थी. डर के मरे मैंने जल्दी में जीन्स उठायी और अपने रूम में भाग गयी. अपने रूम की लाइट बंद करि और फिर से दरवाजे की झिर्री से झांक कर देखा तो देखा की मेरी पैंटी वहीँ रह गयी.... ओह्ह्ह्ह शिट .
एकता रूम से बहार निकली और सीधा भगति चली गयी... उसकी चाल में थोड़ी लड़खड़ाहट थी लकिन वो इधर उधर देखे बिना ही भाग गयी.. वो सीधा सीढ़ियों से उतेरी और नीचे जाकर बहार निकल गयी... मैंने थोड़ा राहत की सांस ली और सोचा की बहार निकलू लकिन तभी मेरा भाई नंगी ही हालत में बहार आता है और सीढ़ियों की तरफ देखता है. वो समझ जाता है की एकता जा चुकी है... वो फिर से अंदर जाने लगा और मैं चैन की सांस ले ही रही थी की तभी.. तभी उसकी नजर मेरी पैंटी पर पड़ी.. वो आगे बढ़ा... नीचे झुका और फिर मेरी पैंटी को उठता है. वो इधर उधर देखता है और फिर मेरी रूम की तरफ देखता है... मेरी तो सच में फट कर चार हो गयी. लकिन क्यूंकि मेरे रूम की लाइट बंद थी वो मुझे देख नहीं सकता था...' सिमरन विस्तार से बताती जा रही थी.
" तो फिर क्या हुआ.. भैया को पता चल गया की वो आपकी पैंटी थी.. वैसे आई कैन इमेजिन की आपके भाई के. एक्चुअली बड़े भाई के हाथ में आपकी पैंटी .. ओह्ह्ह सो हॉट... प्लीज आगे बताओ न..." प्रीती आगे पूछने के लिए रिक्वेस्ट करती है
" खैर प्रीती मुझे तब थोड़ी रहत की सांस मिली जब वो अंदर चला गया लकिन पता नहीं क्यों मेरी पैंटी भी अंदर ले गया..मुझे इस बात की कोई टेंशन नहीं थी. खैर वो रात आखिर कट ही गयी और मैं उस रात बहुत हैप्पी थी क्यूंकि उस एकता की मेरे भाई ने इतनी बुरी तरह चुदाई जो कर दी थी. लकिन मुझे थोड़ा अफ़सोस इसी बात का था की मेरे भाई को अभी तक मैं बच्ची नजर आ रही थी... मुझे पूरी रात नींद नहीं आयी क्यूंकि मुझे अपनी बॉडी पर शक हो रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे की मैं किसी को भी आकर्षित ही नहीं कर पाऊँगी. लकिन रात में ही मैंने फैसला कर लिया था की अब भाई को दिखाना ही पड़ेगा की आखिर मैं चीज क्या हु... जब तक भी मेरे दिल में कोई गलत ख्याल नहीं था..." सिमरन की ख़ुशी उसके चेहरे पर दिख रही थी.
" तो अगले दिन क्या प्लान बनाया आपने...." प्रीती एक्ससिटेमेंट में पूछती है.
" मैं ज्यादा कुछ किये बिना बस अपने भाई को ये बताना चाहती थी की एकता से कहीं बढ़ कर हु मैं... वो इसलिए छायी रहती है क्यूंकि वो छोटे कपडे पहनती है. पूरी रात सोचने के बाद अगले दिन के लिए मैं ीक प्लान बनाया..." सिमरन प्रीती को बताती है.

" क्या था वो प्लान मुझे भी बताओ न....." प्रीती फिर से पूछती है.
" मैं चाहती तो कोई शार्ट ड्रेस पहन सकती थी , अपने बूब्स दिखा सकती थी और जो आगे हुआ भी लकिन मैं नहीं चाहती थी की मेरे भाई को कोई गलत शक हो मैंने साड़ी पहनने का फैसला किया. साड़ी मैंने उससे पहले वाले टीचर्स डे पर पहनी थी और जाहिर सी बात है की अब मुझे बहुत टाइट आने वाली थी... साड़ी बहुत ही सिंपल थी जिसमे भाई को भी शक न हो. ब्लाउज थोड़ा सा डीप नैक था और पेटीकोट थोड़ा सा लौ वैस्ट था तो जाहिर सी बात है की वो ही चीज थी जिससे मैं अपने भाई को दिखा सकती थी की आखिर मैं क्या हु.... अगले दिन ऑफ था तो मैंने सुबह उठते ही तैयारी शुरू कर दी... "सिमरन हर बात विस्तार से बता रही थी.
" कैसी होगी साड़ी.. ज्यादा बताओ न.." प्रीती क्यूरियस होते हुए पूछती है.
" तो ये ले वो फोटो आज तक मेरे मोबाइल में है.." सिमरन मोबाइल में सर्च करते हुए फोटो दिखती है.
" ओह्ह दीदी यू लुक् damn हॉट.... आगे बताओ न की क्या हुआ...." प्रीती पूछती है.
"मैंने उस दिन पूरी रेडी होकर अपने रूम से ही भाई को आवाज देने लगी...... भैया ओह्ह्ह भैया.. मुझे पता था की वो उनके उठने का टाइम था तो वो उठ कर सीधा मेरे रूम की तरफ आये.... प्रीती मैं बता नहीं सकती की मेरे भैया की क्या हालत हुई मुझे देख कर लकिन मैंने ऐसा जाहिर नहीं होने दिया की मैं कुछ गौर दे रही हु... मैंने अपने भैया से बात करना शुरू किया -
सिमरन -" भैया बताओ तो मैं कैसी लग रही हूँ

मेरा भाई --" प्रीती.. वो.. तू.. ये.साड़ी......उनकी नजरे हट नहीं रही थी मुझसे और उनकी आवाज लड़खड़ा भी रही थी.
सिमरन -" वो एक्चुअली में न मैंने टीचर्स डे की प्रैक्टिस अभी से शुरू कर दी है तो सोचा की आज साड़ी try करू.. बताऊ न की कैसी लग रही हु..
मेरा भाई --" सिमरन.. तू तो बड़ी हो गयी है सच में.. गजब लग रही है सच में..... चल में एक बार फ्रेश हो जाऊ और फिर आता हु.. "मेरे भैया मुझे ऐसे ही छोड़ कर भाग गए... जबकि एक्चुअल रीज़न में समझ गयी थी और उनके शार्ट में दिख भी रहा था उनका लंड जो की फूल चुका था. मुझे न महसूस हो इसलिए वो चले गए.." सिमरन प्रीती को बताती है.

दूसरी तरफ -
आज रात प्रीती नहीं थी तो कुशल जनता था की ऐसा गोल्डन चांस उसको कभी नहीं मिल सकता. प्रीती के निकलते ही उसने अपने आपको रेडी करना शुरू किया बाथरूम में जाकर अपने कॉक के आस पास के बालो को क्लीन करना अंडर आर्म्स भी अच्छे से क्लीन की. कॉक पर आयल लगाया जिससे अच्छी सी शाइनिंग आ गयी थी उसमे.कुशल फिर एक अच्छा सा बाथ लेता है और स्टाइलिश सांडो बनियान और ब्रीफ पहन ने के बाद वो बढ़िया सी टी-शर्ट और जीन्स पहनता है. सेक्सी पेर्फुम लगाने के बाद आज वो पूरा कामदेव बन चूका था शायद वो आज रात के लिए कुछ अच्छी प्लानिंग किये हुए था.खैर अब वो एक स्टाइलिश हीरो बन कर रेडी था और धीरे धीरे नीचे उतर कर आने लगता है. नीचे आने पर पूरा सन्नाटा छाया हुआ था किसी भी चीज की कोई आवाज नहीं आ रही थी.
कुशल पहले गैलरी से हॉल में जाता है और फिर किचन की तरफ जाता है लकिन उसको कोई दिखाई नहीं देता. वो स्मृति को ढूंढ रहा था लकिन वो कहीं पर भी दिखाई नहीं दे रही थी.ग्राउंड फ्लोर के कोने कोने में जा जाकर देखा उसने लकिन कुछ वो कहीं भी दिखाई नहीं दी और वो परेशां हो रहा था. उसको ये भी डर है की अगर आज रात स्मृति कहीं चली गयी तो उसकी तो गूगली हो जायेगी क्यूंकि इसीलिए उसने प्रीती को भी भेजने में हेल्प करि.

वो परेशां होकर इधर उधर भाग ही रहा था की तभी उसे ऊपर से किसी के आने की आहट सुनाई देती है. वो ऊपर नजरे करता है और दिल एक बार के लिए थम ही जाता है क्यूंकि ऊपर से स्मृति ही आ रही थी. स्मृति ने आज गजब ही कर दिया था उसने एक पिंक मैक्सी पहनी थी जो की बहुत ट्रांसपेरेंट थी. सबसे कमल की बात ये थी की उसके नीचे स्मृति ने कुछ भी नहीं पहना था. स्मृति एक स्माइल के साथ ऊपर से नीचे आ रही थी और कुशल का तो मुँह खुला का खुला रह गया था.
"आप ऊपर कैसे पहुँच गयी... ऊपर से तो मैं आ रहा हु...." कुशल स्मृति की तरफ देखते हुए बोलता है
." जब मैं ऊपर पहुंची तो तू शायद नहा रहा था इसलिए मैं फिर प्रीती और आराधना के रूम को देख रही थी... जब दोबारा तेरे रूम में पहुंची तो तू नहीं था.. क्या कहीं जा रहा है..?" स्मृति अब सीढ़ियों से नीचे उतर चुकी थी.
" नहीं ऐसे ही आज सोचा की थोड़ा ज्यादा ही फ्रेश हो जाऊ.. यानि ज्यादा अच्छ बन ने का मन कर रहा था... तो पूरी क्लीनिंग करि.. अच्छे से नहाया... बॉयज वाला मेक उप किया और फिर नीचे आया -" कुशल स्माइल करते हुए बोलता है.
" पूरी क्लीनिंग करि.....?? तू कब से क्लीनिंग करने लगा....?" स्मृति उसकी तरफ सवालो भरी निगाहो से पूछती है.
" मैं घर की क्लीनिंग की बात नहीं कर रहा हु......" कुशल एक शैतानी मुस्कान के साथ अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए कहता है.
स्मृति को भी उसकी इस बात पर हंसी आ जाती है और वो किचन की तरफ चल देती है. कुशल उसकी गांड की तरफ देखता है जो की बिलकुल क्लियर दिखाई दे रही थी क्यूंकि मैक्सी बिलकुल ट्रांसपेरेंट थी और स्मृति ने नीचे कुछ नहीं पहना था.
" क्या बात है... पूरी आजादी दिख रही है आज तो..." कुशल पीछे से कमेंट करता है.
" क्यों तू मिसयूज करने की सोच रहा है इस आजादी का.. खैर छोड़ और ये बता की कॉफ़ी पियेगा...?" स्मृति आगे किचन की तरफ चलते हुए पीछे मुड कर बोलती है.
" मुझे लगा की आज तो पूरी रात मुझे दूध पीने को मिलेगा... और आप कॉफ़ी की बात कर रही है..." कुशल पीछे से बोलता है.
" दूध पीना है....??? हम्मम्मम्मम्म...सोचूंगी.. अभी ये बता की अगर कॉफ़ी पीनी है तो....?" स्मृति फिर से पीछे मुद कर बोलती है
" चलिए वो ही पीला दीजिये.... अभी तो.." कुशल अभी तो वाली बात पर जोर डालते हुए बोलता है.और एक बार फिर से कुशल सोफे पर आकर बैठ जाता है और थोड़ी देर बाद स्मृति कॉफ़ी लेकर आ जाती है. उसके चेहरे पर एक शैतानी और सेक्सी स्माइल थी
" ले कॉफ़ी उठा.." और कॉफ़ी देकर स्मृति सामने बैठ जाती है

स्मृति पता नहीं अपनी जवानी से कौन सी आग लगाने वाली थी क्यूंकि उसका बैठने का तरीका ऐसा था की उसकी चुत का छेद अच्छी तरह से विज़िबल था कुशल को.
" ओह्ह्ह्हह... काफी अच्छी है...." कुशल स्मृति की चुत की तरफ देखते हुए बोलता है. और साथ ही कॉफ़ी की सिप भी लेता है.
" क्या...?" स्मृति बहुत ही सेक्सी वौइस् में बोलती है
"कॉफ़ी....." कुशल स्माइल के साथ बोलता है.
" ओह्ह्ह्हह्हह...." एक गहरी सांस के साथ स्मृति बोलती है.
" क्यों आपने क्या सोचा की मैंने किसे अच्छा कहा है....?." कुशल एक शैतानी स्माइल के साथ बोलता है.
" ये तो तू ही जनता है की मैंने क्या सोचा..." स्मृति बिना हसे बोलती है , वो काफी सीरियस थी.
" क्या.. क्या सोचा आपने..." कुशल भी सीरियस हो जाता है.
" कॉफ़ी.... है है है है है है है..." स्मृति बहुत ही खुल कर हंसती है.कुशल का मुँह बन जाता है लकिन वो फिर झूठी हंसी के साथ हँसता रहता है.
 
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