वो तड़प उठी...और तड़पकर उसने पास लेटी निशा को पकड़कर अपने उपर खींच लिया...और उसके मम्मों को जोरों से चूसने लगी...
''आआआआआआआआआहह माय बैबी...''
निशा को अपनी छोटी बहन अपनी बच्ची जैसी लग रही थी...जो अभी पैदा हुई थी...वो उसे माँ बनकर अपना दूध पिलाने लगी...नीचे से जगदीश राय उसकी चूत चूस रहा था और उपर से वो निशा के मम्मे चूसकर अपना सारा मज़ा आगे ट्रान्स्फर कर रही थी...
कुछ देर बाद जगदीश राय फिर से निशा की चूत पर आ लगा...और ऐसा उसने करीब 3-4 बार किया....कभी आशा तो कभी निशा की चूत चाटता...
अब निशा भी उठकर आ गई और अपने पापा के साथ साथ आशा की चूत चाटने लगी।जल्दी ही आशा की चूत ने जवाब दे दिया।आशा काफ़ी देर से बिलख रही थी...और आख़िरकार उसकी चूत ने पानी छोड़ ही दिया...
वो भरभराकर झड़ने लगी....जगदीश राय और निशा ने मिलकर उसकी चूत का पानी पी डाला..
अब जगदीश राय की बारी थी...निशा ने उन्हें बेड पर लिटा कर पीछे पिल्लो लगा दिया और खुद उनकी टाँगो के बीच पहुँच गयी...दूसरी तरफ से आशा भी आ गयी...फिर दोनो ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे को देखा और मिलकर जगदीश राय के लंड पर टूट पड़ी...जगदीश राय का लंड जिसमे अभी भी निशा की चूत का पानी और वीर्य लगा हुवा था।लेकिन दोनों बहनें रंडियों की तरह अपने पापा का लंड चूसने चाटने लगी।
जगदीश राय ने तो बेड की चादर को ज़ोर से पकड़ लिया जब उसपर ये हमला हुआ तो...निशा ने उसके लण्ड को निगल लिया था और आशा ने उसकी गोटियों को....
ऐसा लग रहा था जैसे भूखे इंसानों को 1 महीने बाद कुछ खाने को मिला है...
जगदीश राय के लंड को चूस चूस करके दोनों खाने लगी...उनकी गर्म जीभे , तेज दाँत और नर्म होंठों के मिश्रण से उसे बहुत गुदगुदी भी हो रही थी...पर उससे ज़्यादा मज़ा भी बहुत आ रहा था...
जगदीश राय ने हाथ आगे करके दोनों के मुम्मे सहलाने शुरू कर दिए...दोनो के निप्पल एकदम कड़क हो चुके थे...उन्हे मसलने में उसे बहुत मज़ा आ रहा था...जगदीश राय दोनों के निप्पलों को दोनों हाथों से नोंच रहा था।
दोनों जगदीश राय के लंड को बुरी तरह से चूस रहे थे, एक गोटियां चूस रही थी तो दूसरी लंड.
दोनों बहने नंगी जगदीश राय के सामने थी..जगदीश राय के मुँह में पानी आ गया उन गोरी-2 छातियों को देखकर ।
और उसने आशा को अपनी तरफ खींचकर अपने होंठ लगा दिए उसके मुम्मों पर और जोरों से चूसने लगा..
आशा ने जगदीश राय के सिर को पकड़कर और ज़ोर से अपनी छाती में घुसा लिया और चिल्लाई : "ओह पापा........ ज़ोर से सक्क्क करो..... बहुत परेशान करते है ये.... दबाओ इन्हे..... चूसो.... काट लो दांतो से..... अहह ...ओह पापा ...... सस्सस्स ..''
जगदीश राय ने उसके बूब्स पर दांतो से काटना शुरू कर दिए...
कुछ देर तक अपनी ब्रेस्ट चुसवाने के बाद वो बड़े ही प्यार से बोली : "पापा..... मुझे भी चूसना है...''
जगदीश राय मुस्कुरा दिया उसके भोलेपन को देखकर...
कितनी मासूमियत से वो खुद ही उसके लंड को चूसने के लिए बोल रही थी...
इससे उसके उतावलेपन का सॉफ पता चल रहा था...
जगदीश राय जानता था की वो ज़्यादा देर तक तो इस खेल को बड़ा नही पाएगा,क्योंकि 5 दिन से वो झड़ा नहीं था। पर जितने मज़े वो ले सकता है उतने वो ले लेना चाहता था.
जगदीश राय ने हामी भर दी..
''आआआआआआआआआहह माय बैबी...''
निशा को अपनी छोटी बहन अपनी बच्ची जैसी लग रही थी...जो अभी पैदा हुई थी...वो उसे माँ बनकर अपना दूध पिलाने लगी...नीचे से जगदीश राय उसकी चूत चूस रहा था और उपर से वो निशा के मम्मे चूसकर अपना सारा मज़ा आगे ट्रान्स्फर कर रही थी...
कुछ देर बाद जगदीश राय फिर से निशा की चूत पर आ लगा...और ऐसा उसने करीब 3-4 बार किया....कभी आशा तो कभी निशा की चूत चाटता...
अब निशा भी उठकर आ गई और अपने पापा के साथ साथ आशा की चूत चाटने लगी।जल्दी ही आशा की चूत ने जवाब दे दिया।आशा काफ़ी देर से बिलख रही थी...और आख़िरकार उसकी चूत ने पानी छोड़ ही दिया...
वो भरभराकर झड़ने लगी....जगदीश राय और निशा ने मिलकर उसकी चूत का पानी पी डाला..
अब जगदीश राय की बारी थी...निशा ने उन्हें बेड पर लिटा कर पीछे पिल्लो लगा दिया और खुद उनकी टाँगो के बीच पहुँच गयी...दूसरी तरफ से आशा भी आ गयी...फिर दोनो ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे को देखा और मिलकर जगदीश राय के लंड पर टूट पड़ी...जगदीश राय का लंड जिसमे अभी भी निशा की चूत का पानी और वीर्य लगा हुवा था।लेकिन दोनों बहनें रंडियों की तरह अपने पापा का लंड चूसने चाटने लगी।
जगदीश राय ने तो बेड की चादर को ज़ोर से पकड़ लिया जब उसपर ये हमला हुआ तो...निशा ने उसके लण्ड को निगल लिया था और आशा ने उसकी गोटियों को....
ऐसा लग रहा था जैसे भूखे इंसानों को 1 महीने बाद कुछ खाने को मिला है...
जगदीश राय के लंड को चूस चूस करके दोनों खाने लगी...उनकी गर्म जीभे , तेज दाँत और नर्म होंठों के मिश्रण से उसे बहुत गुदगुदी भी हो रही थी...पर उससे ज़्यादा मज़ा भी बहुत आ रहा था...
जगदीश राय ने हाथ आगे करके दोनों के मुम्मे सहलाने शुरू कर दिए...दोनो के निप्पल एकदम कड़क हो चुके थे...उन्हे मसलने में उसे बहुत मज़ा आ रहा था...जगदीश राय दोनों के निप्पलों को दोनों हाथों से नोंच रहा था।
दोनों जगदीश राय के लंड को बुरी तरह से चूस रहे थे, एक गोटियां चूस रही थी तो दूसरी लंड.
दोनों बहने नंगी जगदीश राय के सामने थी..जगदीश राय के मुँह में पानी आ गया उन गोरी-2 छातियों को देखकर ।
और उसने आशा को अपनी तरफ खींचकर अपने होंठ लगा दिए उसके मुम्मों पर और जोरों से चूसने लगा..
आशा ने जगदीश राय के सिर को पकड़कर और ज़ोर से अपनी छाती में घुसा लिया और चिल्लाई : "ओह पापा........ ज़ोर से सक्क्क करो..... बहुत परेशान करते है ये.... दबाओ इन्हे..... चूसो.... काट लो दांतो से..... अहह ...ओह पापा ...... सस्सस्स ..''
जगदीश राय ने उसके बूब्स पर दांतो से काटना शुरू कर दिए...
कुछ देर तक अपनी ब्रेस्ट चुसवाने के बाद वो बड़े ही प्यार से बोली : "पापा..... मुझे भी चूसना है...''
जगदीश राय मुस्कुरा दिया उसके भोलेपन को देखकर...
कितनी मासूमियत से वो खुद ही उसके लंड को चूसने के लिए बोल रही थी...
इससे उसके उतावलेपन का सॉफ पता चल रहा था...
जगदीश राय जानता था की वो ज़्यादा देर तक तो इस खेल को बड़ा नही पाएगा,क्योंकि 5 दिन से वो झड़ा नहीं था। पर जितने मज़े वो ले सकता है उतने वो ले लेना चाहता था.
जगदीश राय ने हामी भर दी..