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Hindi Desi Sex Freinds Forever (ek daastaan)


[color=rgb(51,]Update 49

Next day tapan's house [/color]
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समय शाम के 6 बजे ।

तपन घर पर नहीं था और उसके पापा भी जतिन मार्केट में गए थे । घर पर सिर्फ शीतल , तानिया और दीपाली थी । दरासल दीपाली की आईडिया थी वो तीनो मिले अकेले में और जो कांड हुआ हे उसके बारे में और जाने और दोनों को सहेली की तोर पर उनकी मार सके ।

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[color=rgb(51,]Kitchen room[/color]
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दीपाली बॉस बनी हुई थी और वो दोनो सूई मुई सी भीगी बिल्ली बनी हुई थी । दोनो दीपाली से बचने की कशिश कर रही थी । लेकिन दीपाली कहा दोनों आज ऐसे ही छोड़ने वाली थी गांड में मिर्ची जरूर डालेगी आज दोनो की ।

तानिया ,,, क्या ऐसे क्यू घूर रही हे ,,

दीपाली उसकी बाल पकड़ती हे पीछे से और पीठ पे मुक्का मारने लगती है ,, कुलक्षणी नाचपीति बैरागढ़ कमीनी ये सब कर रही थी ,,,

तानिया मुस्कुराती हुई उससे बचने की कशिश कर रही थी ,,, शीतल बचाओ मुझे मार डालेगी भूतनी आज ,,,

शीतल पतली गली से निकलना चाहती थी लेकिन दीपाली ने उसे भी आड़े हाथों लिया और उसको स्लैप पर झुका के बेलन उठा के उसकी गांड पर मारने लगी । शीतल को थोड़ी लग रही थी ,,, आ नही बहन नही । आह्ह्ह्ह लग रही है । प्लीज छोर दे ना ,,,

दीपाली दोनो को पहले कूटती है जब तक उसका गुस्सा ठंडा नेहि हो जाती तब तक दोनो को लाठर लथर के पिटती हे ।

दीपाली ,, मुझे विश्वास नहीं हो रहा हे तुम दोनो ने एक दूसरे के बेटे के साथ ही । ऊपर से शादी भी सच मच के । उन बच्चो के नाम पर सिंदूर लगाती हो मंगलसूत्र पहनती हो ,,,

तानिया उसे शांत करने की कशिश करती हे और उसको पीछे बाहों में पकड़ के शीतल को भी इशारा करती है दीपाली की गुस्से को शांत करने की और बोली ,,, मेरी प्यारी बहन माफ कर दे । क्या करे कुछ समझ ही नही आया बस हो गया सबकुछ ,,,

शीतल भी दीपाली की साइड से गले लग जाती है और अपनी रूठी हुई सहेली को मनाने लगती है ,,, कान पकड़ के जितना मारना है मार ले पर हमे माफ कर दीपू उम्म्म मेरी प्यारी बहन । अपनी दो बहनें की एक गलती माफ नही कर सकती क्या ,,,

दीपाली दोनो के गाल पे हल्के हल्के थप्पड़ मारती है ,, मन तो कर रहा है दोनो की खून पी जाऊं लेकिन कैसे अपनी बहन जैसी सहेली की खून पीऊं । क्या तराली को पता है ,,,

तानिया ,, तेरी ही गुस्सा हम झेल नही पा रहे और उसकी । वो तो और गुस्से वाली है मार डालेगी हमे । प्लीज तुम भी अभी मत बताना अच्छा समय देख के उसे बाद में बता देंगे,,,

दीपाली ,,, मुझे भी कहा बताने वाली थी तुम दोनो वो तो चेतन ने बता दिया ,,,

शीतल ,, क्या करे बात ही ऐसी है । अब गुस्सा थूक दो तुम्हारे लिए घी का तड़का लगा के हलवा बना देती हूं ,,

दीपाली ,,, रहने दे में हलवा खाने नही आई हूं तुम दोनो की हलवा बनाने आई हूं ,,,

तानिया अपनी हाथ दीपाली की मखमली पेट पर मसलने लगती हे और शरारत से उसकी कान की लौ को काट लेती है । शीतल भी शैतानी मुस्कान दे के दीपाली की चूचियां ब्लाउज के ऊपर से हल्का हल्का दबाने लगती हे ।

दीपाली आनंद आती है और ना चाहते हुए भी मुस्कुराती है ,, अच्छा तो तुम दोनो का यह तरीका है मनाने का ,,

शीतल ,, कितने दिन हुए ना हमने अपनी वाली मजे नहीं किए ,,,

तानिया ,,, दो महीने हो गए । वक्त ही नही मिलती न ही मौका मिलती है ,,,

दीपाली पीछे हाथ ले जा कर बाल खींचती है और साथ में साइड से शीतल की भी बाल खींचती है ,,, अच्छा दोनो बच्चो के साथ रोज रोज करने पर वक्त ही वक्त और मौका ही मौका मिलता हे ना कामिनी काहिकी ,,

तानिया और शीतल हास पड़ती है ।

तानिया मुस्कुरा के ,,, क्या करे वो दोनो सुपर हीरो जो है झट से आते है पट्ट से हमारी ले के चले जाते हे ,,,,

दीपाली ,,, सुपर हीरो ?,,,

शितल ,,, तुमको वरदान के बारे में नही पता ,,,

दीपाली ,,, वरदान किस वरदान की बात कर रहे हो ,,,

तानिया (इसे वरदान के बारे में चेतन ने नही बताया उफ्फ शीतल ने तो सच उगल ही दी अब फिर एक सच बता के इसे मानना होगा ),, कुछ नही बस ,,

दीपाली दोनो को अलग करती है और सख्ती से पूछती है ,,, क्या छुपाने की कशिश रहे हो । सच सच बता नही तो दोनों के हलक से सच बाहर निकाल लूंगी ,,,

तानिया और शीतल एक दूसरे को देखती है और उलझन में पर जाती है । अब तो दीपाली को बताना ही पड़ेगा ।

शीतल और तानिया दोनो मिल के चारो की वरदान वाली बात बताती है और अच्छे से समझती है । दीपाली को एक झटका लगता है लेकिन उसे विश्वास हो जाता हे कुछ वीडियो क्लिप्स देख कर जो उसको तानिया अपने मोबाइल में चारो के कुछ कारनामा दिखाती है और एक पुरानी याद से ।

दीपाली दिमाग पर जोड़ डालते हुए ,,, अच्छा तो उस दिन चेतन इसलिए मैथ्स की कैकुलेशन चुटकियों में जवाब दे रहा था । बदमाश ने मुझे बताया ही नही । लेकिन क्या सच में एक सपने में ऐसी वरदान मिल सकता है । मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है मुझे लगता है कोई sceince का मिरेकल होगा किसी बायो कैमिकल का रिएक्शन हो गया होगा ,,,

तानिया ,, देख डॉक्टर साहिबा बे सक हो सकता है ऐसा । लेकिन उनको सपना भी आया था । हो सकता तेरी बात सच हो और उन लोगो को अभी तक नही पता हो इसके बारे में पर चारो में दैविक आलौकिक शक्तियां जरूर हे इसे तुझे विश्वास करना ही होगा ,,,

दीपाली ,,, विश्वास हुआ । (मजाक में) क्या सच में उन लोगो का सामान बोहोत बड़ा बड़ा हो गया है ,,,

तानिया और शीतल हास्ती है और तानिया तपन के लंड का फोटो दीपाली को दिखाती है जिसे शीतल भी देख लेती है एक नजर और अपने बेटे का लंड देख के जिस्म पर अजीब सी हलचल मेहसूस करती है ।

दीपाली की आंखे बाहर आ जाती है और मोबाइल अपने हाथों में ले के देखने लगती है zoom कर के ,,,, आउच मम्मी इतना बड़ा । तू कैसे लेती है मर गई बाबा,,,

तानिया शर्मा जाती है और उसको कस के पकड़ कर उसकी कंधे पे काट लेती है ,,,, बोहोत तकलीफ होती है शुरू में पर मजा । क्या बताऊं में बता नही सकती ,,,

दीपाली सरारत से ,,, शीतल तू भी दिखा ना ,,,

शीतल मुस्कुराती हुई अपने मोबाइल से जिशू का लंड की फोटो दिखाती है । तानिया भी देख लेती है अपने बेटे का लंड और उसकी जिस्म पर भी वोही हलचल होती हे एक गुदगुदी जिससे रोम रोम खड़ी हो गई उसकी ।

दीपाली की मन बुरी तरह ललचा जाती है दो बड़े लंड देख के और ना चाहते हुए भी जिशु और तपन को नंगा होते हुए कल्पना करती है एक पल के लिए ।

दीपाली ,,, तुम दोनो के तो मजे ही मजे है (मजाक में) अब तक तो तुम दोनो की मुनिया कुवा बन गई होगी ,,,

तानिया ,,, और नही तो क्या ,,,

तीनो हास पड़ती है ।

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[color=rgb(51,]Update 50

Raaz & masti [/color]
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दीपाली आगे से शीतल को बाहों में भर के सीधा किस करने लगती है और शीतल भी पूरा साथ देते हुए दीपाली लचीला होंठ चूसने लगती है ।

तानिया पीछे से पकड़ी हुई थी दीपाली की उसकी हाथ दोनो के मोटे मोटे चुचियों के बीच दब गई थी और वो बस दीपाली की मोटी चूचियां कस के दबाने लगी और उसकी कंधे चूमती हुई और उसकी जिस्म की खुसबू लेती हुई बोली ,, दीपाली में तेरी बदन की खुशबू लेने के लिए कबसे तड़प रही थी ,,,

दीपाली शीतल की होंठ से होंठ अलग कर के गर्दन पीछे कर के गर्म गर्म सांसें छोड़ के बोली ,,, आग भड़का ही दिया ना । अब पहले मुझे शांत करा दे फिर तुम दोनो को में कर दूंगी ,,,,

शीतल उसकी गाल चूम के ,, नेही ज्यादा वक्त नहीं हे तपन के पापा आने ही वाला है । आज तुझे खुस करा देंगे हम हमारा तो रात में एक घंटे के लिए आता ही है और स्पेशल ट्रीटमेंट दे के चले भी जाते है ,,, शीतल ने आंख मार दी ।

दीपाली मुस्कुराई ,,, तानिया शीतल आज काल बोहोत बेशरम हो गई है ,,,

तानिया उसकी चूची की निपल उंगली में दबाते हुए ,,, जिशू ने इसे पूरी पूरी बेशर्म बना दिया है ,,

दीपाली अपनी निपल पर दर्द मेहसूस करती है लेकिन उसे आनंद आती है उस दर्दे में और भी ज्यादा वो गर्म हो जाती है । दीपाली अपनी सारी कमर तक उठा कर किचन की स्लैप पर बैठ जाती है ,,, बोलो कौन चाटेगा मेरी आज ,,,

शीतल कामुक अदा से दीपाली के सामने खड़ी हो जाती है और मुस्कुराती हुई नीचे घुटनों पर खड़ी हो के दीपाली टांगे फैला के ऊपर उठा देती है और उसकी बिना बालों वाली चिकनी सुंजी हुई दिखने वाली चूत पर जीव फिराटी है ।

दीपाली तड़प उठती है ,,,, उपचचच मेरी जान । आह्ह्ह्ह जीव की नुकीली हिस्से भी डाल के चाट शीतल यूफफ्फ बोहोत दिन बाद वोहा का दरवाजा खुला है । दो महीने से उंगली भी नही की मैने ,,

शीतल ,,, सायेद धोती भी नहीं हो ,, फिर भी लप लप कर के चाटने लगी अपनी सहेली को मजा देने ।

दीपाली की आनंद में आंखे बंद हो रही थी और सिसकारियां भर रही रही थी वो बोहोत दिनों के बाद गर्म हुई थी इसलिए भट्टी की तरह गर्म थी जिससे चुने से ही तड़प उठती थी ,, ओन्ह्छ आज पिसाब करते वक्त धोना भूल गई थी । अह्ह्ह्ह कोई ना चाट ले मेरी बहना आह्ह्ह्ह्ह उफफ्फ आइसससस मर गई में ,,,

तानिया शीतल के पीछे खड़ी हो के सामने से ही दीपाली की चूचियां मसलने लगी और उसके होंठ पे होंठ मिला दी । दीपाली भी उसके चेहरे को पकड़ कर किस करने लगी ।

भले एक लंड और एक मर्द का एहसास नेही मिल रही थी दीपाली को लेकिन चूत चटवाने का चुचिया मसलवाने का किस करने का तीनों मजे एक साथ पा कर वो भरपूर कामसुख लाव कर रही थी ।

उसकी चूत से पानी रिच रही थी जो शीतल को कच्चा अजीब सा स्वाद आ रही थी लेकिन उसे चाटने में मजा आ रही थी और वो एक उंगली डाल कर के हिलाने लगी और चूत के क्लिटोरिस को चूसने लगी ।

दीपाली को और ज्यादा मजा आने लगा और हिनहिनाने लगी तानिया की होंठ सबा के खाने लगी उम्मम्म उन्ह्ह्ह कर के

कुछ देर में थिरक थिरक पानी छोड़ दी शीतल की चेहरे पर कुछ पानी शीतल की आंखों पर भी चली गई तो शीतल खड़ी हो गई और आंख पे आसल से पोछने लगी ,,, बाप रे कितनी गर्म है ये । बोहोत गर्मी जम गई है ,,,

दीपाली मुस्कुराती हुई संतुष हो कर ,,, हेन्हह्ह मजा आ गया आज ,,,

तानिया,,,,, नही इसकी अभी ठंडी नही हुई है ,,

तानिया बेलन उठा लेती है ये देख कर दीपाली कहती है ,, नही मत करो और में ठीक हू बाबा ,,,

लेकिन तानिया कहा सुनने वाली थी उसने दीपाली की चूत में बेलन का 4 इंच वाली हैंडल घुसा के अंदर बाहर करने लगी और दीपाली की एक हाथ से चूची मसलने लगी ,,, शीतल दूसरी चूची भी दबा इसकी लाल कर दे हमे आते ही पिता इसने ,,

शीतल दूसरी चूची कस कस के मसलने लगी और गाल पे कंधे पे चूमने लगी । तानिया धीरे धीरे तेजी से उसकी चूत में बेलन अंडर बाहर करने लगी थी । दीपाली फिर एक बार आनंद में सिसकारियां लेने लगी जिस्म थरथराने लगी नाश नश में कामसुख अनुभव करने लगी

तानिया तेज तेज हाथ चलती हुई ,,, मजा आ रहा है दीपाली ,,,

दीपाली ,,, हा मेरी बहन आन्ह्ह्ह्ह बोहोत उफफफ आग्हह्ह्ह यासस्स आह्ह्ह शीतल कस के दावा आग्घ्ह मेरी चूत । उह्ह्ह् मेरी चूत अह्ह्ह्ह मेरी चूत निकलने वाली है आह्ह्ह्ह्ह ,,,,

तानिया और तेज़ी से हाथ चलती है और शीतल दोनो हाथो से चूची मसलती है जोर से जिससे थोड़ा दर्द दीपाली को होती है और उसे एक मजा लगती हे

थोरी देर बाद दीपाली फिर पानी छोड़ती है । और दोनो को बाहों में भर लेती है तीनो एक दूसरे को प्यार जताती है ।[/color]

ऐसी अपडेट सुबाह को ही क्यू आन पड़ती है यार । खेर
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[color=rgb(51,]Update 51

Collage Campus[/color]
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समय सुबह के 10 बजे ।

चारो मित्र कॉलेज कैंटीन को मिस कर रहे थे तो तशरीफ उठा के आ गए । कॉलेज कैंटीन में समोसे खाते हुए गप्पे मारना एक अलग ही मजा होता है । जो चारो मिस कर रहे थे उस मजे को । लेकिन विशू अभी तक नही आया था वो किसी काम में फंस गया था और वो बस आने ही वाला है ऐसा वो बार बार फोन पे बोल रहा था ।

जिशू ,, तो मिया दीपाली आंटी को सब बता दिया ,,,

चेतन ,, सोचा मम्मी का दिल बहला दूं तो में भी भावुक था उस समय और मैंने बोल दिया लेकिन वरदान वाली बात छुपा लिया ,,,

तपन समोसा खाते हुए ,,, वो भी पता है ,,

विशु सोक जाता हे ,,, क्या सच में । पर कैसे ऐसा कैसे हो सकता है ,,

तपन ,,, काल शाम को फुल स्पीड में घर में घुसा था सोचा था मम्मी को डराऊं लेकिन मैने देखा किचन में तानिया आंटी , दीपाली आंटी और मम्मी तीनो थी और दीपाली आंटी को दोनो ने तब तक बता रही थी हमारी वरदान के बारे में । मैने सब सुना दीपाली आंटी को अब सब पाता है और उसे विश्वास भी है मोबाइल में हमारे प्रैक्टिस के कारनामे सब दिखाया गया दीपाली आंटी को ,,,

चेतन ,,, पर मम्मी ने रात को मुझे इस बारे में कुछ नही बताया ,,,

तपन पूरा समोसा मुंह में ठूंस के उंगलियां नचवाते हुए मुस्कुरा के बोला ,,,, अबे और भी कुछ के साथ साथ बोहोत कुछ बताया नही और कभी बताने वाली भी नही है ,,,

तभी विशु वाहा पोहोच जाता है और अधूरी बात सुन के उनके साथ बैठते हुए ,, कौन क्या नहीं बताया भाई ,,, ।

चेतन उत्सुक हो के ,, क्या बोहोत कुछ नही बताया भाई । क्या देखा तूने वाहा बता ना ,,,

जिशू भी उत्सुक हो गया ,, बोल ना क्या नही बताया ,,,

विशु ,,, अरे भाई वो छोड़ मुझे पेड़ो में मोश आ गया है ,,

चेतन चिढ़ते हुए ,,, अबे तू चुप ना साले ,,

विशु ,,, अरे सच में । में मजाक नहीं कर रहा ये देखो ,, वो अपना पेड़ो में लगे बैंडेज को दिखाता है सबको ।

सब कुछ समय के लिए मुद्दे से हट जाता है ।

जिशु ,,, क्या हुआ कैसे लगी चोट ,,

विशु ,,, यार में सुबाह प्रैक्टिस कर रहा था एक पेड़ की छोटी से कूदा और मोश आ गया ज्यादा लगी नही पर दर्द कर रहा है यार ,,,

तपन ,, पेड़ कितनी ऊंची थी ,,,

विशु ,,, 100 फीट लगभग ,,,

जिशू ,,, 100 फीट से कूदेगा तो चोट तो लगेगी ही ना ,,

विशु परेशान हो कर ,, यार रोज कूदता हूं कभी खरोच भी नही आया कभी और आज ये हो गया मुझे लगता है हमारा वरदान काम करना बंद कर रहा है वरदान को पेट्रोल पिलाना पड़ेगा सायेद ,,,

तपन ,, अबे चुप कर वे क्या अनाब सनाब बक रहा है । हो जाता है हम भी इंसान हे भूल गया क्या हमे कितनी चोट लगी थी (अपने और जिशु की बात कर रहा था ) भले ही वरदान मिला है लेकिन हमारा शरीर पत्थर का नही बना हे समझे । बच्चो की तरह रो रहा है ,,,

तीनों विशु के मुद्दे से हट के असली मुद्दे पे आते है और विशु भी खुद उसपे इंट्रेस्ट लेता है ।

चेतन ,,, अबे इतना काहे उतावला हो रहा है बे दिल थाम के सुनो । आराम से बताता हूं ना जारा कुर्सी की पेटी बांध लो जो झटका लगने वाला हे सायेद ही गिरने से बचो ,,,

चेतन ,,, अबे अब तू भी पकाने लग गया सीधे सीधे बोल ना बात क्या है ,,

विशु ,,, हा भाई बता ना बात क्या है क्यूं भेजा खा रहा हे एक तो दर्द से मर रहा हू ऊपर से तू भाई मेंटली टॉर्चर कर रहा है ,,,

जिशु एक सोमोसा उठा के विशू के मुंह में ठूंस दिया ,,, ले खा ले ,, बच्चे के मुंह निपल रख दिया ऐसी सकल बन गई विशू की और तीनो हस पड़े ।

जिशू ,,, अब ये चुप हो गया है अब बता ,,

तपन विशू की सकल देख के फिर एक हंसता है और फिर गला साफ करते हुए बोलने लगा ,, तुम लोगो को सायेद बिश्वाश नहीं होगा पर हमारी मम्मीया जो है वो चारो बाइसैक्सुअल भी है ,,,

तीनो को झटका लगता हे ,, क्या बक रहा है ,,,

तपन मुस्कुराने लगा ,, देखा में जानता था तुम तीनो का यही फटीसर वाला रिएक्शंस होगा इसलिए में बताना नही चाहता था ,,,

जिशु ,,, तुझे कैसे पता हमारी मम्मीया वो हे ,,

चेतन ,, तूने कुछ देखा क्या ,,,

चेतन ,, हा बे में भला क्यू जुठ बोलने लगा । काल शाम वोही सब तो देखा । तीनों मम्मी एक साथ लेस्बियन सेक्स किया और पाता हे मम्मी ने दीपाली आंटी पुसी लिक किया और तो और तानिया आंटी (अकेले में तानिया तुम तू तारक बेबी) ने दीपाली आंटी की पुसी में बेलन भी डाल के फॉक किया ,,,

तीनों के कान से धुआं निकल गए ये सुन के । तीनों को बात हज़म नहीं हो रहा था बस आंखे तुक तुकाय तपन को देखते रह गए ।

लेकिन विशु की दिमाग की बत्ती जली और सवाल किया उसने ,,, लेकिन इसमें मेरी मम्मी तो नेही थी तो तू क्यू कह रहा है मेरी मम्मी भी ,,

जिशु ,, तूने तीनो को वो सब करते देखा ,,

तपन ,, हा अपनी आखों से तीनों की कामलीला देखा मैने और वो लोग कह रहे थे दो महीने बाद वो लोग काल शाम के को वो सब कर रहे थे और तराली आंटी की भी जिक्र कर रही थी इसका मतलब हमारी चारो मम्मीया पहले से ग्रुप लेस्बिसंस कर के आ रहे है भाईयो ,,,

चेतन अजीब सी नज़रों से तपन को देखने लगा । तपन उसकी नजर को भाप लिया और बोला ,, ब्रो ब्रो तू गलत सोच रहा है । भले ही मैंने दीपाली आंटी को उस हालत में देखा हे पर मेरे मन ऐसा वैसा कुछ नही था बस नॉर्मल नजरो से जानकारी के लिए देखा और कुछ नेही शादी शुदा आदमी बन गया हूं पत्नी का वफादार हूं और मेरी मम्मी भी थी वाहा (सॉरी दोस्त दीपाली आंटी की क्या हसीन चूत थी मेरे मुंह में पानी आ गया था और मम्मी भी ओह नही दिमाग से निकल दे तपन ये गलत सोच )

चेतन कुछ नही बोलता और नजर नीचे कर लेता है । विशू और जिशु भी बात को गहराई से सोच रहा था ।

तपन ,, क्या हुआ मुझपे भरोसा नही हो रहा है तो ठीक है घर जा के अपनी अपनी मम्मी से पूछ ले ,,

विशु ,, लेकिन में कैसे पूछ सकता हूं । तुम लोग तो फ्री हो गए अपनी अपनी मम्मी से ,,

तपन ,, मेरी मम्मी से या फिर तानिया आंटी से पूछ लेना उनके साथ तो तू फ्री है ना । और तुम लोग मेरी बातो पे विश्वास नही हो रहा है किसे दोस्त हो यार ,,,

चेतन ,, विश्वास है यार । बस मम्मी को मतलब वो लोग लेस्बिबांस इतनी मॉडर्न हो गई है उसके बारे में कभी एक्सपेक्ट नही किया था ,,

जिशु ,,, हा मेरी मम्मी और दीपाली आंटी की बात अलग है वो दोनो पड़ी लिखी है सोच आधुनिक है मगर तेरी मम्मी पिंजरे में रहने वाली सोच की है हमे कोई दिक्कत नही है बस ऐसे ही सोच रहे है ,,,

विशु शिर पर मुंह पर हाथ रख कर जैसे अजूबा देख या सुन लिया हो ऐसा रिएक्शन दे कर ,,, है ऊपर वाले और क्या क्या रहस्य दिखाएगा । दया कर रहम करो ऊपरवाले नाजाने कितने कांड हुए इन एक देर साल में । रिश्ते बदल गए हमारी दुनिया बदल गए । कभी कभी ये सब सोचता हूं मेरे शिर सत्यानाश हो जाता है ऐसा लगता है भेजो को कीड़े मोकोरों ने रेंगना शुरू कर दिया ,,

उसकी मजाकिया बातो पर तीनों हंस ने लगते है ।

चेतन ,,, अच्छा काल में और मम्मी तपन और शीतल आंटी हम चारो मेरे ताऊ के बड़े बेटे के शादी पे जा रहे है । परसो शादी हे ,,,

जिशु ,,, क्या पर हम यहां क्या करेंगे ,,

विशु ,,, कमीनो मुझे भी ले चल ना फ्री का खाना खाना मुझे कितना अच्छा लगता हे पाता तो है । और तपन तेरा क्या रिश्ता है चेतन की ताऊ के बेटे से ,,,

चेतन हास कर ,,, मेरी ताई हे ना उसकी दूर के रिश्तेदार लगते है जतिन अंकल इसलिए । अच्छा एक काम करते है हम सभी एक ग्रुप बना के जाते है तीन दिन में बापच लोट भी आयेंगे । ,,

जिशू ,, ऐसे कैसे मुंह उठा के हम चले जायेंगे तेरी पहचान है हमारी थोड़ी हे ,,

चेतन ,, अरे दूल्हे का भाई हूं में बाप दादा से खून का रिश्ता है मेरी पावर है ।तो आज रात तक हो सब प्लानिंग कर लेते है । ठीक है कॉल हम रतपुर जायेंगे सुबह की ट्रेन से या फिर कार भी उठा सकते हे दो ढाई घंटे की सफर है ,,[/color]
 

[color=rgb(51,]Update 52

Next day in Ratpur [/color]
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समय दोपहर के 2 बजे ।

शादी का घर था वो चारो तरफ भीड़ भाड़ हल्ला । शादी से एक दिन पहले का दिन था रतपुर की रीति रिवाज की अनुसार शाम को संगीत होने वाला था और सुबह को दूल्हे की हल्दी वाला रसम पहले ही मनाया जा चुका था । कुछ औरते काम कर रहे थे और कुछ औरते जो अपनी सारी या ज्वैलरी की चमक धमक दिखाने के लिए कभी उदार कभी इधर गप्पे लड़ा रहे थे और एक बात प्रसलित थी की उसकी पहनवा कैसी है किसी को जलन तो किसी को खुशी अपनी तारीफ सुन के किसी की पीठ पीछे चुगली । ये सब एक आम बात थी शादी के माहोल में ......

चेतन के ताऊ वोहा के Tehsildar/Naib Tehsildar थे तो काफी नाम रुतबा था उस एरिया का बड़ा हस्ती था धन सम्मति भी काफी मालामाल आदमी था ।

एक बंग्लो में रहते है अपने दो बेटे और एक बेटी और अपनी धर्म पत्नी के साथ । उसके बड़े बेटे की शादी हो रही थी । ये लोग सुबह निकले थे और करीब एक बजे के आस पास पोहोच गए । घर पर पहले से पास के दूर के बोहोत रिश्ते दार आए हुए थे घर के हर कोने पे मेहमान था । मेहमान नवाजी के लिए स्वागत की थाली काम पड़ रहे थे ।

चेतन अपने चचेरे भाई बहनों से अपने दोस्तो से मुलाकाद करवाता हे और दीपाली अपनी सहेलियों को अपनें रिश्तेदार से मिलवाती है जान पहचान करवाती हे ।

बाकी रिश्तेदार से ये लोग कुछ काम हाथ बताते हे तो गप्पे लड़ने में मस्त हो जाते । शाम होने से पहले संगीत की रसम शुरू हो गई जहां मर्दों एक तरफ किनारा दिखाया गया और औरते ढलक ले के बैठ गए हॉल पर ही ।

बंगलो दो मंजिले का था नीचे एक ग्राउंड फ्लोर पे बड़ा सा हॉल एक स्टोर रूम और दो मंजिले थे जिसमे कुल आठ कमरे थे और सबसे ऊपर एक खुली चट्ट और और पानी की टंकी के साथ ही एक और पुराने सामान रखने का स्टोर रूम ।

शाम की संगीत की रसम पूरी हो चुकी थी मेहमानो को 10 बजे खाना दिया गया और सोने के लिए कमरे कुछ हॉल में प्रबंध किया गया पूरा घर मेहमानों से घसाघस भर गया था जहा भी जाओ वाहा किसी की ठहाके की हसी तो किसी की शादी को लेकर विचार आलोचना । जो इन चारो दोस्तो जारा भी पसंद नहीं आया था लेकिन झेलना तो था ही । इन चारो को भी बाकी मर्दों के साथ नीचे हॉल की एक कोने मे सोने के लिए जगह दी गई थी ।

जब से आया जिशु तबसे अपनी बीवी से ठीक से मिल भी नही पा रहा था । तपन की बात थोड़ी पुरानी थी लेकिन जिशू की तलब ज्यादा थी अपनी बीवी को बाहों में भर कर प्यार करने की बड़ा दिल कर रहा था उसका लेकिन शाम से शीतल को मैसेज और कॉल कर रहा था पर शीतल से कोई रिप्लाई नहीं मिला (शीतल अपना फोन बेग रख कर भूल गई थी उसे वैसे फोन से कोई लगाव नहीं थी ) । जिशू बेचैन हो गया था ।

जब वो लोग सो रहे थे तब दीपाली ने उन चारों के लिए गर्म दूध ले आ गई थी । और जिशु के दिमाग में कुछ प्लान बना और उसके चेहरे पे चमक आ गया था ।

दीपाली ,, लो तुम लोग दूध पी लो । कुछ भी चाहिए तुम लोगो को तो मुझे कहना ,,,

सबने दूध ले के पीने लगे ।

विशु , , आंटी आप कितनी अच्छी हो थैंक्स ,,,

दीपाली ,,, में कैसे अपने बच्चो भूल सकती हू मुझे पता है तुम लोगो को यहां खाना पीना अच्छा नही लगा है । बस काल का दिन फिर हम परसो निकल जायेंगे ,,,,

तभी जिशु दीपाली की कान में बोला ,, आंटी शीतल आंटी को थोड़ा स्टोर रूम में जाने को बोलो ना,,,

दीपाली की सैतानी मुस्कान निकल जाती है और जिशु का कान पकड़ कर ,,, बदमाश ठीक है में कर दूंगी तेरा काम ,,

चेतन ,,, मम्मी इसने क्या बोला ,,

दीपाली ,, में क्यू बोलूं । वैसे भी ये बात तुम लोगो को सुनाने की बात नेही हे ,,,

विशू मुस्कुरा कर ,,, आंटी आप जानते नहीं हम चारो दोस्त एक दूसरे की दिल की बाते बिना कहे ही समझ जाते है । ,,

दीपाली खाली ग्लास उठा कर ,,, बदमाश हो तुम लोग । ओके गुड नाइट मेरे बच्चो ,,,,

दीपाली वाहा से निकलती है { कितना उतावला है जिशु इस माहौल में भी गर्मी उतारने के मन कर रहा है उसका (उसके दिमाग में जिशु के लंड की तस्वीर छपी हुई थी उसे याद कर के) उफ्फ बाबा उस खंबे से शीतल को स्टोर रूम में चोदेगा अभी } ये सब बाते सोचते ही उसकी जिस्म पर सिहरन दौड़ जाती है कामुकता कीड़े नस नस में मेहसूस होती है उसे ।

दीपाली कमरे में जाती है और शीतल को एक कोने में ले जा के फुसफुस करती है ।

दीपाली ,,, तेरा सैयां तुझे स्टोर रूम में बुला रही है अभी ,,,

शीतल शर्मा जाती है ।

दीपाली मुस्कुरा के ,, जा अभी जा फटाफट काम निपटा के आना । अच्छी नींद भी आएगी ,,,

शीतल शर्मा कर ,, स्टोर रूम कहा हे ,,

दीपाली ,,, ग्राउंड फ्लोर पर ,,

शीतल ,, तुम यहां संभाल लेना ,,

दीपाली मुस्कुराती है और शीतल को कमरे से धक्के दे के निकल देती हे ।

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[color=rgb(51,]Ground floor[/color]
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शीतल नीचे जाती है उसने देखा स्टोर रूम के बाहर जिशु खड़ा है । लोग भी हे इस लिए शीतल सावधानी से जिशू के पास जाती ही और दोनो इधर उधर देखते हुए धीरे धीरे बात करती है जैसे वो लोग ऐसे ही खड़े है एक दूसरे को जानते तक नहीं ।

जिशु ,, अंदर चेतन की टाई है । ,,,

शीतल ,,, वो क्या कर रही है स्टोर रूम में इतनी रात को ,,,

जिशु ,,, पता नही पास मिनट पहले घुसते देखा अभी तक नहीं निकली ,,

शीतल ,, ठीक है रहने दो में जाती हू ,,

जिशु ,,, नेही पार्किंग में चलो कोई नही हे ,,,

शीतल ,, नहीं पकड़े गए ना मेरी इतज्जत गई ।,,

जिशु ,,, नेही पकड़े जाएंगे थोरी टाइम की बात है चलो ,,,

जिशू उसे बहला फुसला के घर के पीछे ले जाता है जहां मेहमानों की गाड़ियां लाइन में थी और वाहा पेड़ पौधो की एक बाग था ।

चलिए इनको प्यार की फूल खिलने देते हे और अन्य तरफ चलते है जहा अलग ही मोड़ आने वाला था ।

Kuch naya aane wala he mitra uske kiye raat ka intezar karen aur comment de
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[color=rgb(51,]Update 53

Confusion[/color]
[color=rgb(51,]

समय 3 बज कर 28 मिनट । कुछ घंटे के पहले का दृश्य ।

चारो दोस्त बंगलो की सैर कर रहे जिसके साथ चेतन के कुछ कॉयजिन भी थे । वो लोग तीसरी मंजिल पे थे तभी एक कमरे की दरवाजे पे एक औरत खड़ी थी और आवाज दी ,, चेतन जरा इधर आना बेटा ,,,

चेतन अपने दोस्त और बाकी केजेंस से ,, यार तुम लोग घूमो में बाद में मिलता हूं ,,,

चेतन उस औरत के पास जाता हे और वो औरत उसे कमरे के अंदर लेती हे और दरवाजे को बिना लॉक लगाए बंद कर देती ही ऐसे ही ।

औरत की परिशय """" चेतन की टाई नाम रिधिमा , पढ़ी लिखी और काफी सोसियेल बिंदास खूबसूरत गदराई हुई महिला थी"""

चेतन ,, क्या हुआ ताई ,,,

रिधिमा ,,, बाप रे तुम तो बोहोत बड़े हो गए हो बॉडी भी बनाई है खूब जिम करते होगे ना ,,

चेतन शर्मा कर ,,, अरे नहीं ताई जिम नही जाता घर पर ही वर्कआउट कर लेता हूं ,,,

रिधिमा ,,, अच्छा है सेहद बनानी चाहिए । अच्छा बेटा उस स्लैप पर वो बड़ा बैग दिख रहा है उसमे से मेरी कुर्ता निकाल दो इस सारी मुझे अनकंफर्टेबल हो रही हे ,,, उसने दीवार पर लगे 7 फीट ऊंची स्लैप की तरफ इशारा कर के बताई।

चेतन भले ही 6 फीट का था पर वो ऊपर बेग खोल के देख तो नही सकता था की कौनसा चीज निकालना है तो उसने कुछ सोच कर बोला ,,, ताई में इतनी ऊपर कैसे देख पाऊंगा और कैसे आपकी कुर्ता निकलूंगा । एक काम करता हूं बैग ही उतार देता हूं ना ,,,

रिधिमा ,,, नही नहीं बेग बोहोत भारी है उतार कर बपाच ऊपर रखने में मुस्किल होगी । बेग पर बोहोत भारी सामान है ,,,

चेतन ,,, एक काम करो आप ही स्टूल पर चढ़ कर कौनसा कुर्ता पहना हे निकाल लो ना ,,

रिधिमा , , स्टूल पे चढ़ कर पहले ही एक पेड़ तुड़वा चुकी हूं । ठीक है तुम पकड़े रहना मुझे पीछे से गिरने मत देना ,,,

चेतन मुस्कुरा कर ,, ओके ताई शिंता मत करो में बचा लूंगा आप गिरी भी तो ,,,

रिधिमा बस मुस्कुराई और उसने एक ढाई फीट की स्टूल ले के आई और चढ़ गई चेतन की मदत से । चेतन ने उसे नंगी कमर पर पकड़ कर रखा था ।

वोही तो एक मसला हो गया । चेतन था तो नेक ईमानदार लेकिन अपनी ताई की कामुक योवन देख कर उसका ईमान डोल गया । ऊपर से उसके दो दोस्त ने पहले से नजरिया बदल रखा था । रिधिमा की बेक साइड उसके सामने थी ।

रिधिमा की चौड़ी गोरी चिकनी बैकलेस ब्लाउज पहना हुई पीठ उसके नीचे थोड़ी सरबी जमी हुई मंगसल पतली चिकनी कमर जो अपने हाथो से पकड़ रखा था दोनो तरफ और रिधिमा की जिस्म के तापमान मोदहोश कर रहा था । पतली कमर के नीचे फैली हुई मोती गांड जिसे देख कर चेतन उसकी योवन की भाप ले रहा था ।

रिधिमा को अपनी मंद पसंद कुर्ता मिल नही रही थी ,,, कहा गई मेरी नीली वाली कुर्ता कोई पहने ना इसलिए बेग में रखी थी फिर भी यहां से गायब । लगता है किसी ने यहां से निकल लिया है ,,,

चेतन को कोई जवाब ना देख कर वो गर्दन पीछे कर के नीचे चेतन को देखने लगी और उसकी पेड़ो की स्थिति बदल गई जिस वजह से पेड़ लड़खड़ाए और उसकी संतुलन बिगड़ गई उसको एहसास हो गया की वो गिरने वाली है ,,,, बेटा पकड़ो पकड़ो ,,,

लेकिन स्टूल पलट रही थी और चेतन भी तो उसकी काम में खोया हुआ था । स्टूल पलट गई और रिधिमा पीछे की तरफ गिरने लगी चेतन को जब होश आया तब तक वो भी पीछे गिर रहा था । दोनो बेड पे गिर गए चेतन पीठ के बल और रिधिमा उसके ऊपर पीठ के बोल ।

चेतन ,, सॉरी सॉरी ताई वो में में में ,,,

रिधिमा खिलखिला कर हास रही थी उसे एक फानी घटना लग रही थी ,,, कोई बात नही बेटा । सायेद में अब भारी हो गई हू ,,,,

रिधिमा उठ गई और चेतन भी उठ गया और उसने देखा कि उसकी ताई की ब्लाउज के डोरी टूट चुके थे और ब्रा की हुक भी खुल चुके है । सायेद रिधिमा को टाइट फिटिंग पहनना पसंद थी । चेतन भी बिना कुछ सोचे बोल दिया फटक से ,,,, टाई आपकी ब्लाउज की डोरी टूट गई है ,,,

रिधिमा अपनी पीठ पीछे हाथ लगा कर एहसास किया ,, ओह ब्रा की हुक भी खुल गई है ,,

चेतन अब शरीफ दिखाते हुए ,,, ताई मे बाहर रुकता हूं आप चेंज कर के मुझे बुलाना ,,,

रिधिमा बिंदास हो कर ,,, अरे नेही तेरी पैदाईश देखी हे मैंने तुझ से क्या शर्माना रुको यही ,,,

चेतन भी रुक जाता है । रिधिमा वॉर्डरोब से अपनी एक ब्लाउज निकलती है । और चेतन से पीठ बल खड़ी हो कर बिंदास अपनी ब्लाउज अपने बदन से निकल देती है । अब वो सिर्फ ब्लाक ब्रा भी थी जिसकी पीठ खुली थी । रिधिमा की गद्दी हुई चिकनी बदन देख कर चेतन का लंड चड्डी में ही फुक्कर मारने लगा ।

रिधिमा फिर बिंदास हो कर बोली ,,,, जारा ब्रा की हुक लगा देना ,,, वो ऐसे कह रही थी जैसे अपने पति को कह रही है ।

चेतन भी हेरान था अपनी ताई की बिंदास स्वभाव को देख कर लेकिन उसे एक लालच भी आ गया और हिम्मत भी ।

चेतन अपनी ताई की करीब गया और ब्रा की दोनो तरफ की डोरी पकड़ा । रिधिमा उससे एक लगभग एक फीट चोटी थी जिसकी वजह से चेतन को उसकी मोटी मोटी ठोस आकर्षक गोरी चिकनी चूचियां टीम चौथाई हिस्सा दिख रही थी चेतन को । चेतन के मुंह में पानी आ गया । उसका कामित्तेजना लंड पर ही नही पूरे जिस्म पर चढ़ कर दिमाग तक पोहोच चुका था वो अपना ईमान भूल गया अपनी रिश्ते भूल गया और अंजाम तक भी भूल गया ।

चेतन को सैतानी की करने की मन किया और कुटिल मुस्कान से वो कोमजोर तरीके से ब्रा की हुक लगाने की सेस्था दिखाते हुए बोला कामुक मदहोश आवाज में बोला ,,, ताईं हूक लग नहीं रहा क्या करू ,,,

रिधिमा की मुस्कान निकल गई ,,,, एक हुक नहीं लगा पा रहा है जब शादी होगी तब बीवी की सेवा कैसे करेगा रे तू पाता हे बीवी की सेवा करने में कितनी मेहनत लगती है ।,,,

रिधिमा की डबल मीनिंग बाते सुन कर चेतन को और हिम्मत मिला और वो अपनी ताई की पीठ पर उंगली फिराने लगा ।

रिधिमा की मुस्कान में एक चमक थी ,,, क्या कर रहे हो तेरी मम्मी जैसी हूं ,,,

चेतन मुस्कुरा कर ,,, पर मम्मी तो नही हो ना ,,,

और आओ देखा ना ताओ अपनी हाथ रिधिमा की बगल से घुसा कर ब्रा के ऊपर से ही कस के दोनो चूचियां मसल के पकड़ा । गर्म तेल पर पानी की बूंद चिटकने की तरह रिधिमा वैसे ही आइस्सस्स कर के आंख बंद कर शिर पीछे की तरफ चेतन के छाती पे लगा दी ।

चेतन खुश हो कर ,, क्या हुआ आपको अच्छा नही लगा । बुरा लगा तो सॉरी ताई ,,,

रिधिमा मोधोशी कि आलम में आंखे ऊपर कर के चेतन को देखती हुई ,,, आईएसएसएसएस आह्ह्ह्ह जब मैंने देखा तू मेरी पीठ को घूर रहा है तभी में समझ गया था मेरा भी तुझे देख कर कुछ कुछ हो रहा था । इस लिए तो तुझे बाहर नेही भेजा और तूने मौके पे अच्छा सिक्सर मारा ,,,

चेतन वासना में अंधा हो कर रिधमा की गोरी कंधे चाटने लगा गर्दन चूमने लगा और ब्रा निकाल के चूचियां मोड़ोड़ के दबाने लगा । रिधिमा को बोहोत आनंद आ रहा था चूचियां मसलवाने में और वे परवा हो कर आह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह उन्ह्ह्ह्ह कर सिसकारियां ले रही थी ।

चेतन तो नया नया जवान हुआ लौंडा था उसकी हवास चढ़ पे चढ़ा हुआ था लेकिन रिधिमा तो खेली खाई औरत थी फिर भी बोहोत ज्यादा गर्म हो गई थी वो लगता हे बोहोत दिनों की प्यासी थी

रिधिमा के घुंडी कड़क और मोटे हो गए थे चेतन दोनो घुंडी उंगली से और अंगूठे से दबा के मसलते हुए चूचियां मसलने का आनंद ले रहा था

कुछ मिनट बाद रिधिमा बोली ,,, बेटा अभी समय सही नही है रात को 10 बजे के बाद स्टोर रूम पर आना (वो मजे में भूल गई कि ऊपर चट्ट वाले स्टोर रूम में या नीचे ग्राउंड फ्लोर वाले स्टोर रूम) तब जो मन करे कर लेना ,,,

चेतन उसकी गाल चूस कर ,, बस 5 मिनट के लिए चूसने दो टाई ,,,

रिधिमा मुस्कुरा कर ,,, जा दरवाजा लॉक कर दे ,,,

चेतन तुरंत दरवाजे के पास कर लॉक लगा देता है और रिधिमा के पास आ कर बेड पे बैठ जाता है रिधिमा उसके सामने अपनी ठोस मोटी मोटी चूचियां ले कर खड़ी हो जाती हे

चेतन उसकी गोरे चिकने चूंची छू कर देखने लगता है । तब जा के रिधिमा थोड़ी शरमाई । उसकी चूचियां यूनिक थे मोटे चूचों पर जो भूरे रंग की धब्बे(arola) फैली हुई थी । बोहोत खूबसूरत थी दिखने पर

चेतन ,,, आपकी दूध बोहोत सुंदर हे ,,

रिधिमा शरमाई और उसका शिर पकड़ कर घुंडी मुंह में देते हुऐ बोली ,,, पि फिर दूध ,,,

चेतन गाय के बचरे की तरह पीने लगा । और हाथो से मसलने भी लगा चुचकी मार कर आवाज करते हुऐ पीने लगा । रिधिमा की जमीन पे पेड़ टीका के रखना मुस्किल हो गई । और आनंद में चेतन के रेशमी बालों से खेल रही थी उसकी आंखे उलट खा रही थी और मुंह से कामुक आवाज इस प्रकार निकल रही थी धीरे धीरे ,,, इससस्ससस बेटा अच्छ आह्ह्ह्ह्ह पि जा ताई की उम्न्ह्ह दूदू अह्ह्ह्ह ,,,

5 मिनिट की जगह 15 मिनट तक चेतन ने अपनी ताई की चूचियां चूसा और मसला । जब रिधिमा को घुंडी पर दर्द मेहसूस होने लगा तब चेतन को अलग कर के अपनी हालत देख कर बोली ,,, अपनी ताई दूदू लाल लाल कर दी उंगलियों की निसान चाप दी तूने तो बेटा । अच्छा अभी तू जा रात को मिलना ,,, और होंठ पर छोटा सा चुम्मा दे दी

चेतन का मन तो नही था पर उठ गया और जाते समय अपनी ताई बाहों में कस कर गाल पे चूम कर "आप बोहोत अच्छी हो और बोहोत सुंदर हो ,,, बोल कर निकल गया ।

वर्तमान समय 10 बज कर 28 मिनिट ।

जिशू तो जा चुका था । अब तीनों सोने के लिए बिस्तर लगा रहे थे खुद । चेतन कब से इसी पल का इंतजार कर रहा था और उसने दोनो से बोला ,,,,, में जारा इंपोर्टेंट कॉल कर के आ रहा हूं ,,,

चेतन दोनो के जवाब सुने ही वाहा से निकल गया ।

विशू ,,, यार ऐसा क्या जरूरी कॉल था जो हमसे छुपा के करना पड़ रहा है इसे ,,

तपन ,,,, यार होगी कोई जरूरी । तू भी ना चल गेम में इन्वाइट कर मुझे आज ड्यू खेलेंगे ,,,

चेतन चिढ़िया चढ़ कर सीधे चट्ट पर गया (दिन में वो ऊपर वाले स्टोर रूम को देख रखा था उसे नही पता था कि नीचे भी एक स्टोर रूम है) उसने चारों तरफ नजर किया की वाहा कोई भी नही है लेकिन स्टोर रूम की खुली खिड़की से अंदर एक औरत दिखाई दी पीछे से जिसकी बाल खुले थे अंधेरे में वो एक छोटी सी टॉर्च लाइट जला कर कुछ ढूंढ रही थी । चेतन के होंठों पर मुस्कान आ गया और वो दबे पाओ स्टोर रूम के अंदर गया और औरत की हाथ से टॉर्च लाइट चीन के नीचे फेक दिया जिससे टॉर्च लाइट गिर के बंद हो गई (टॉर्च लाइट का सत्यानाश हो गया था) । और घुमा के एक हाथ से कस के कमर पकड़ा और एक हाथ से उसकी शिर के पीछे बाल पकड़ा कस के और बेताशा उसकी होंठ चूसने लगा ।

Note : ridhima tai to niche wale store room me thi to yeha upar wale ye koun aurat thi ........ Ise jaanne ke liye agle update ka intezaar karna padega aur agla update tabhi aayega jab koi achcha review aayega thanks .........[/color]
 

[color=rgb(51,]Update 54

Twist[/color]
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समय दस मिनट पहले ।

दीपाली , तानिया और तराली सोने के लिए बिस्तर लगा रही थी कमरे में दो और औरत भी थी ।

तानिया नाक सिकुड़ कर बोली ,,, ये बेडसीट बोहोत गंदा है बु आ रही है ,,,

तराली ,, हा में नही सोने वाली इस बिस्तर पर में नीचे ही बेड लगा लूंगी ,,

दीपाली ,,, रुको में दूसरी बेड शीट लाती हूं ,,,

दीपाली कमरे से निकल कर ऊपर चट्ट पर गई (दीपाली को रिधिमा पहले से बता रखी थी की बेड शीट गद्दे वगैरा कुछ भी चाहिए तो ऊपर वाले स्टोर रूम ले के आए) दीपाली स्टोर रूम गई और टॉर्च जला कर बेडशीट ढूंढने लगी ।

वर्तमान समय

दीपाली को एक झटका लगा एक पल के लिए उसे कुछ समझ नहीं आया उसके साथ क्या हो रहा है । पर जब परिस्थिति की आभाष हुई तब उसने सोचा (लगता है जिशु गलत स्टोर रूम आया है और मुझे ही शीतल समझ रही हे) और वो जिशू समझ कर अपने बेटे के छाती पे हाथ रख पीछे की तरह पुश कर रही थी और मुंह हटाने की कशिश कर रही थी ताकि वो बोल सके की वो शीतल नहीं दीपाली आंटी हे उसकी ।

लेकिन आचार्य की बात थी चेतन को अपनी मम्मी भी अपनी ताई रिधिमा जैसी लग रही थी कारण था दोनो को बदन की धंसा एक जैसा होना काठ काठी एक जैसी जो थी । और दीपाली को भी सूक हो गई की उसका बेटा जैसा बेटे का दोस्त नहीं अपना ही खुद का बेटा है कारण था चेतन और जिशू की काठ काठी एक जैसा ही होना और दोनो थोड़े लंबे बाल रखने की एक जैसा ही स्टाइल करता था ।

चेतन मेहसूस हुआ की उसकी ताई (दीपाली) उसे धकेल रही है । लेकिन वो वासना में लिप्त था और उसे लगा औरतों की नखरा करना स्वाभिक है । उसने फिर चूमते चूमते अंधेरे में एक कोने में गिरा दिया और उसके ऊपर चढ़ गए लेकिन चेतन ने उसकी निचली होंठ दातों में ही दबा के रखा जिससे दीपाली खुल कर बोल भी नहीं पा रही थी बस उम्मम्म उम्मम्म नेईईई उम्मम्म कर पाई थी । दोनों एक कोने में पुराने डॉनलॉप वाले सोफे की पीछे थे गिर गए थे या लेते थे ।

भले ही दीपाली ताकतवर थी लेकिन एक मर्द की ताकत और औरत की ताकत में बोहोत फर्क होता है चेतन ने उसे गले में माला डाल कस पकड़ रखा और उसका भारी शरीर के नीचे दीपाली की शरीर पीच गई वो चाह कर भी कुछ नही कर पा रही थी बस हाथ मारने की अलावा पर चेतन पर उसका कोई असर नही हो रहा था वो बस वाइल्ड किस किए जा रहा था ।

दीपाली को उसका वाइल्ड किस एक नई एहसास लगी । दिमाग में जिशू के लंड की छवि आई । और वो सायेद उसकी कोमजोरी बन गई ना चाहते हुए वो जिशू समझ कर अपने बेटे वाइल्ड किस अच्छा लगने लगी । उसका भारी गठीले बदन का एहसास जकड़ रखे मजबूत बाहों का एहसास कही न कही दीपाली की मन खुशनुमा बना गई और और कामुक एहसास जाग उठी उसकी मन में । दिमाग कह रही थी वो जिशू (चेतन) को रोके लेकिन उसकी शरीर अब साथ नहीं दे रही थी । वो भले ही किस का जवाब नही दे रही थी पर उसकी हाथ कि पंजों का जोर कमजोर पड़ गई थी और जिशू (चेतन)के पीठ पर नाजुक पड़ गई उंगलियां हरकत देनी छोड़ दी ।

सासें फूलने लगी उसकी और चेतन के भी । चेतन धीरे धीरे बड़े आराम से ताई (अपनी मम्मी) की होंठ चूसने लगे कभी ऊपर तो कभी नीचे वाले लब को । दीपाली की और सोचने समझने की शक्ति नही बची थी नियति को अपना ली उसने उस वक्त गलत नही लगा उसकी भी मन बेईमान हो उठी मोह से ।

दोनो की गर्म सांसें एक दूसरे से टकरा रही थी और एक दूसरे को मेहसूस हो रहे थे सासें । अंधेरे में तो कुछ दिख नहीं रहे थे दोनो को बस एहसास कर रहे थे । जिशू हल्के करवट ले के चुम्बन तोड़े बिना अपनी ताई (ममी)की चूची पकड़ लिया ब्लाउज के ऊपर से ही ।

एक मर्दाना एहसास पा कर चूची पे आनंद की लहर मेहसूस हुई दीपाली को और तड़प कर जिशू (चेतन) हाथ पर हाथ रख कर हाथ को कस के दबा दी । चेतन एक चूची धीरे धीरे मसलने लगा ।

दीपाली तब तक जिशु समझ कर अपने बेटे साथ अपनी जिस्म शॉप दी । दीपाली खुद जिशु (चेतन) की होठ पीने लगी । चेतन को अपनी ताई (मम्मी) की नारी लुभावना मेहैक पा कर जोश दुगना हो गया और वोही दीपाली को जिशू (बेटे) की मर्दाना गंध जेहन में उतर कर काफी गर्म हुई जा रही थी । दोनो के जिस्म के तापमान हादसे बढ़ गए थे एक दूसरे की जिस्म को मेहसूस कर रहे थे खेल रहे थे हाथो की मेहसूस से । और दोनो फिर भी नही पता चल रहे थे दोनो मां बेटे कामक्रीड़ा में मगन हो गए थे।

चेतन मोरसा संभाल रहा था वो एक खिलाड़ी की तरह आगे बढ़ रहा था । दीपाली की गर्दन से चूमना शुरू किया दीपाली धीमी धीमी सासों के साथ आह्ह्ह्ह लेने लगी । और फिर धीरे धीरे उसकी कंधे से चूमने लगे कभी जीव से चाट भी लेता था चेतन और दीपाली को गीला एहसास और आनंद दे रही थी ।

फिर चेतन ने दीपाली की ब्लाउज की हुक खोल के निकलने का इशारा किया और दीपाली ने भी खुद को ऊपर उठा कर उसे ब्लाउज निकलने में मदत की और चेतन ने ब्लाउज को नाक में ले के सूंघा गहरी सांस के साथ दीपाली की बदन की खुशबू से वो और मोधोश हो गया और उसने ब्रा भी उतार दी ।

चेतन दोनो तरफ पेड़ फैला के दीपाली की छाती पर चढ़ गया और दोनो हाथो से एक एक चूची दबोचा और एक एक कर के चूसने लगा । दीपाली आनंद में उफ्फ इस्सस आह्ह्ह्ह हल्की हल्की सिसकारियां लेने लगी ।

चेतन चुप्पी लगाने लगा और दीपाली उसकी लंबे बालों के साथ खेलने लगी । चेतन मन भर की दीपाली की चूची चूस के धीरे धीरे नीचे हो रहा था और मखमली समतल पेट चाटने लगा दीपाली की थोरी पेट उभरी हुई एक 40 + औरत की हिसाब से सही मात्रा में थी चर्बी और उसकी हुस्न की शोभा भी बढ़ाती थी ।

चेतन उसकी पेट चाट चाट कर उसकी गहरी नाभी पे जीव कुरेदने लगा दीपाली तड़प उठी और दोनों हाथो से नीचे बचे पुराने गड्डे को कस ली और लंबी सिसकी ली आईससस कर के चूत पानी पानी हो रही थी उसकी जिस्म पर अकड़ मेहसूस हुई

चेतन फिर चाटने का लुफ्त उठा कर दीपाली की सारी और पेटीकोट की गांठ पर हाथ दिया तो दीपाली ने उसे हाथ पकड़ कर रोक दिया । एक औरत शर्म के कारण आखरी बार रोकती है लेकिन वो सेफ़्टी के लिए था ।

दीपाली कहना चाहती की दरवाजा बंद कर लो लेकिन शर्म उसे संबंधित करने नही दे रही थी लेकिन वैसे उसे लगा अब इतनी रात को कौन यहां स्टोर रूम में आएगा फिर भी एक संका तो थी इसलिए उसने सारी पहने रखा सही समझा और अपनी टांग मोड़ कर फैला दी ।

चेतन भी समाज गया और उसकी सारी पेटीकोट के साथ साथ कमर तक उठा दिया और उसकी पैंटी निकाल दिया । चेतन मुंह ले के दीपाली की टांगो के बीच झुक गया और मोटी जांघें पकड़ कर जीव लगा दिया दीपाली की चूत पर ।दीपाली तड़प उठी अःह्ह्ह अअह्ह्ह्ह आह्ह्ह आईस उफ्फ करने लगी । उसकी चूत सफसत थी हाइजिन का बोहोत ध्यान रखती थी चूत ज्यादा गीली या फिर सुखी ना हो जाए उसके लिए मेडिसिन भी लगती रहती थी आखिर एक डॉक्टर जो थी और उसकी चूत की होठ भी फिरंगी या फिर कश्मीरी मौसम में रहने वाली औरत की तरह गुलाबी चूत थी । जो बदकिस्मती से चेतन उसकी छूट नेही देख पा रहा था वरना खा ही जाता सायेद ।

काफी देर तक चूत की हर हिस्से को जीव से चाट के अपने कपरे उतारने लगते है और सिर्फ चड्डी को नीचे सड़का के अपने लंड पर ठुक मल के वो चोदने जा रहा है ये सोच कर उसका दिल दिल धक धक करने लगता हे ।

चेतन दीपाली के टांगो के बीच घुटने मोड़ कर आगे हो कर एक हाथ से अंदाजे से चूत पर लंड रख के धक्का देता है लेकिन लंड पिछल जाता है फिर चूत की रगड़ दीपाली की मुंह से आह्ह्ह्ह निकल देती है । चेतन फिर ट्राय करता है और इस बार सुपाड़ा घुस जाता हे ।

दीपाली चेतन के कंधे पर हाथ रख कर चीखती हे आउंफफ्फ । चेतन और धीरे से धक्का देता लंड पिछल कर आधे से ज्यादा घुसते चला जाता है दीपाली अपने मुंह से आवाज करती है उन्ह्ह्ह्हहुऊऊ हुह्ह्ह्ह्ह यूईईईआ और सोचती है (कितना मोटा हे रे इसका शीतल कैसे लेती है इस गाढ़े का)

चेतन उसे बाहों में भर लेता है दीपाली उसे गले लगा लेती हे और चेतन धक्का देके पूरा लन्ड घुसा देता है और दीपाली की चीख आहहाहा उह्ह्ह उफ्फफ्फ (उई मम्मी कितना लंबा हे ये तो अपनी बीवी की गर्भाशय ही खराब कर देगा ठोकर मार मार कर कितनी तकलीफ हो रही है)

चेतन आराम आराम से थोड़ा लंड बाहर करता है और घुसा देता है चेतन का पहली अनुभव था बेहद ही उसे आनंद होता हे बस फिर क्या आनंद प्राप्त करते ही रहना चाहता है । दीपाली को तकलीफ हो रही थी पर आनंद भी उतना ही आ रही थी और उसके लिए भी एक नया अनुभव था ।

सबसे ज्यादा उसे जिशु (चेतन) पर गर्व हो रहा था की उसका मर्दाना ताकत मेहसूस कर और खुद को इस पल की भाग्यशाली समझ रही थी उसे अच्छा लगा की जिशू (चेतन) ने शुरुआत में ही जोर आजमाना शुरू नहीं किया महीन तरीके से धक्के लगाना महीन तरीके से उसकी होंठ चूसते रहने गाल चूमने रहने कंधे पे चूमते रहना चोदते टाइम । प्यारी हरकत पर उसे भी प्यार उमंग आई और चेतन के होंठ चूम कर उसकी बाल सेहलाने लगी पीठ सहलाने लगी और मुंह से आनन्द की प्रतीत को जताने लगी आह्ह्ह अअह्ह्ह्ह उन्ह्ह्ह्ह अअआझह उफफ्फ्फ ना अअह्ह्ह्ह ह्विसस्स हिस्स्स इससस आह्ह्ह्ह्ह ।

चूत दिवारे रगड़ खा खा के पानी छोड़ रही थी जिससे लंड महीन तरीके से अंदर बाहर हो रहे थे । दीपाली को भी आदत हो गई और सुखद एहसास से जीव निकाल कर चेतन के मुंह में दे दी और चेतन उसकी जीव पीने लगा ।

तभी दरवाजे की कुंडी हिलने की आवाज गूंजी और दोनो सोक गए दर से लेकिन दोनो कुछ कर पाते स्टोर रूम में कदमों की आहट हुई और लाइट जल उठी । दोनो की किस्मत अच्छी थी या फिर नियति यही थी कि सोफे के आड़ और उसके ऊपर कुछ सामान रखने की वजह एक दीवार बनी हुई थी । लाइट काम वॉट की जिसके कारण हल्की रोशनी हो रही थी ।

लेकिन वाहा एक बॉम्ब फूटा । दीपाली और चेतन दोनो एक दूसरे की चेहरे को देख कर जहा सोक गए जैसे दुनिया से उठ गए दोनो वोही शर्म से पानी पानी हो गए । दीपाली की जिस्म ठंडी पड़ गई और चेतन का लंड अपने आप सिकुड़ कर चूत में सो गया ।

शर्मनाक दर्शन से एक दूसरे से मुंह फेर लिया और पछतावे में खुद से घृणा कर बैठे दोनो । लेकिन दोनो जारा सी आहट नहीं कर सकते थे नेही पकड़े जाएंगे और लोगो को पता चला कि दोनो मां बेटे ही । इस दर से कांप उठे दोनो अब शर्म से ज्यादा दर लगने लगे थे ।

कमरे पर तीन औरतों की आवाज थी जो बात कर रहे थे ।

" ठीक से गद्दे लगा रीता ,,,

,,, लगा दिया अब बोतल खोल,,,

,,, ये ले पी इंजॉय कर ,,,

,,, में इसलिए लोकेलिटी शादी फंक्शन पर नही जाती देखो कैसे पीना पड़ रहा हे ,,,

,, अरे सीमा इसमें भी एक मजा है चुप के पीने में ,,,,

कुछ तीन मॉडर्न शराबी औरते शराब पीने आई थी और गप्पे लड़ा रही थी चुगली कर रही थी ।

दीपाली को थोरी राहत मिली इस बात से की तीनों औरते थी । अगर मर्द होते तो कैसे लगती उससे एक कमरे में तीन शराबी मर्द और अपने बेटे के नीचे लेती हुई हालाकि अनजाने में लेकिन अब तो जान गई थी ।

दोनो मां बेटे एक दूसरे से नज़रे तक नहीं मिला पा रहे थे पर अलग भी नही हो सकते थे एक दूसरे की नंगे बदन को मेहसूस कर के अब शर्म आ रहे थे । सांस भी धीरे धीरे आ रहे थे ताकि तीन औरतों को सुनाई ना दे सासों की आवाज ।वो तीन औरतों को भी पता नही चली की उनके बगल में सोफे के पीछे ही कांड हो रहा है जो इस वक्त विराम लग चुका हे ।

,,,, यार वो पुलिस वाला मुझे घूर रहा ,,,

,, कौन वो मुसवाला ,,,

,,, जा वोही रीता ,,,

,, मस्त है लाइन दे दे काल शादी की रात किसी रूम में मेज ले पाएगी और पोलिस वाला हे तो आगे भी काम आएगा पावर बड़ेगी ,,,,

ये तीन औरते गंदी गंदी बाते कर रही थी । दोनो मां बेटे को बोहोत शर्म आ रही थी ।

वो दोनो सोच रहे थे की ये तीन औरते पी कर चले जायेंगे लेकिन 5 मिनट 10 मिनिट कर कर के 50 मिनिट से ज्यादा हो गए थे । दीपाली और चेतन का भी एक वक्त तक दर थोड़ा कम हो गए थे । दीपाली मन में तीनो औरतों को गालियां दे रही थी कोच रही थी ।

लेकिन चेतन का हल कुछ अलग था । उसकी नजर अपनी मम्मी की बंद आखों की चेहरे पे टिकी हुई थी चाह कर भी अपनी खूबसूरत मम्मी की चेहरे से नजर नही हटा पाया । एक तुक देखे जा रहा था अपनी मम्मी की नंगे बदन को बाहों में भर रखा था और चूत पे लंड डाल रखा था फिर एक उत्तेजना मेहसूस होने लगा उसे काम शक्ति शक्ति ऐसी थी मर्दो की अपने बस में नही कर सकता था कामक्रीड़ा की वजह से कितने लूट गए कितने बरबाद हो गए ।

चेतन का लंड अचानक सख्त होने लगा और दीपाली को मेहसूस हुई (हे ****** ये क्या इसकी फिर से । कैसे) चेतन आराम से अपनी ममी की कंधे पर मुंह छुपा लिया और हल्के हल्के एक दम धीरे से धक्का मारने लगा बिना आहट किए जैसे इंजिन आइडियल पर चल रहा हो ।

दीपाली गुस्से में (असभ्य इसे तो में । सिखाती हूं सबक । लेकिन ये यहां क्यों आया था । इसकी भी किसके साथ । और उसे समझ कर मेरे साथ ही । और में समझ रही थी जिशु । उफ्फ तब क्यूं में बेहेक गई उफ्फ अब क्या करू ये बेशर्म मेरा ही बेटा है उफ्फ रूको ऐसा मत करो)

चेटन पूरे 15 - 20 से लगातार होले होले से धक्के लगा रखा था । लंड की सुपाड़े को जन चूत की रगड़ का मजा अनुभव हो रहा हो तो कोई भी बेलाग हो ही जाता है काम आनंद में भूल गया की अपनी मम्मी को चूत नही चोदनी चाहिए पर वो चोद रहा था उसे मम्मी की ही चूत की आनंद चाहिए अब जान बूझ कर ही ।

तीन औरते अभी भी बात कर रहे थे उनको काफी नशा भी हो रही थी आवाज से ऐसा ही लग रही थी ।

दीपाली की गुस्सा धीरे धीरे शांत हो गई उसे भी धीरे धीरे अच्छा लगने लगा आनंद मिलने लगी थोड़ी ही सही चूत में हलचल हो तो रही लंड का रगड़ हो तो रही थी लेकिन अभी भी आंख खोल कर अपने बेटे की नजरो में देखने की हिम्मत नेही हुई और वो छुपाना चाहती थी अपने बेटे से की अब उसे भी आनंद आ रही है ।

और दस मिनट बाद वो तीन औरत वोहा से चली जाती है । फिर क्या था चेतन जोश में लंड बाहर निकाल के पूरा घुसा के दो कस के धक्के मारते है । दीपाली की आंख खुल जाती है और अन्छझ अन्ह्ह्ह्ह कर के सीधा अपने बेटे के आंखों में आंखे डाल के देखती है दोनो के चेहरे के करीब बस नाक रहड़ खाने की फासले थे ।

चेतन को अपनी मम्मी पर एक अलग सा प्यार भी आता हे और एक हवास भी जाग जाता है उसके मानसिक पर और जोर से खींच के धक्के मारता है । दीपाली दात पीच के छटपटाती है । चेतन को क्या मजा आता है और एक खींच के फिर एक और खींच के ऐसे तीन चार बार धक्के मारता हे और दीपाली चीखती है आईया मम्मी आआआ नही । और अपने बेटे के ऊपर हाथ उठा देती है उसके गाल पर थप्पड़ मार देती है । चेतन शर्म से मुंह छुपा लेता है ।

दो मिनट तक शांति शायी हुई थी जब दीपाली को कंधे पर गिला गीला मेहसूस होती हे तो उसका दिल भी पिघल जाती है और बेटे के चेहरे को हाथो पे उठा के देखती है । यूं तो पैदा होने से ले के कोई सौ बार रोते हुए देखा हे लेकिन आज चेहरे पे एक अलग दर्द था ।

दीपाली प्यार से बोली ,,, अब क्यूं रो रहे हो ,,,

चेतन रो रो कर बोला ,,,,,, आईएम सॉरी में रोक नही पाया खुद को अच्छा लग रहा था सॉरी माफ कर दो ,,,,,

ऐसे रोने पर की मां की ममता नहीं रोएगी और चेतन की हाथ चूम कर आसू पॉच कर प्यार से बोली ,,,,, मैंने माना थोड़ी किया है वो तो तुमने ऐसे जानवर जैसे किया तो गुस्से में । अच्छा चलो माफ कर दो अब रो मत वरना में भी रो दूंगा ,,,,

चेतन चुबकते हुए ,,, सॉरी गलती हो गई ,,

और उठ गया एक झटके में और अपने कपरे उठाने लगे । दीपाली भी उठ गई और वो अपने बेटे का रोना बर्दास्त नही कर पा रही थी । और वो कमरे की दरवाजे खिड़की बंद कर के लाइट भी बंद कर दी ।

चेतन के पास आई कमरे में अंधेरा था दोनो को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था अब पहले की तरह । दीपाली उसकी बाहों में समा गई ,,, तुम्हारी कोई गलती नही थी में जानती हूं किसी और के लिए आए थे और में भी वेहेक गई थी ।,,,

चेतन ,,, पर किया तो गलत ना मम्मी । मुझे घिन आना चाहिए खुद पर ।

दीपाली प्यार से समझती हुई ,,,, हिस्सस्स चुप बिलकुल चुप । तुझे मेरि कसम अब सिर्फ और सिर्फ मम्मी की बात मान । जो हो गया वो पूरा ही होने से । आजा मुझे प्यार कर ,,,

दीपाली उसका हाथ पकड़ सोफे पे बैठा दिया और खुद टांगे फैला के बेटे के लंड पर बैठ जाती है और आईसस आह्ह्ह कितना बड़ा है उफ्फफ्फ और अपनी चूची में बेटे के शिर को छुपा लेती हे फिर धीरे धीरे आगे पीछे होने लगती है कमर लचकाती हुई ।

दोनो को फिर एक बार आनंद आना शुरू हुए सांस गर्म होने लगे रोगों में बस कामसुख डोरने लगे दोनो के बदन में दीपाली की सिसकियां पूरे कमरे गूंज उठी ।

कुछ देर बाद चेतन अपनी मम्मी को सोफे पे लिटा के बाहों में भर कर चोदने लगता है और रफ्तार बढ़ा देता हे इस बीच दो तीन बार दीपाली की कमर नाचने लगती है स्खलन की वजह से पूरी तृप्ति से वो शर्मसुख पर एहसास की

,,, मम्मी मजा आ रहा है ,,,

,,, आह्ह्ह्ह हाआआ बेटा आअह्ह्ह बोहोत ,,,,

,,, आपको मौखिक सेक्स पसंद है हैं हल्ह्ह्ह,,,

,,, हुन्ह्ह्ह ,,,

,, अब दर्द हो रहा हे क्या ,,,,

,, नहीं बेटा आह्ह्ह बड़ा है तो क्या आह्ह्ह्ह हर वक्त दर्द ही होगा क्या उन्ह्ह्ह्ह ,,,,

,,,, नही वो मतलब नही था ,,,

,,,, जोर से करू ,,,,

,,,,, हा जैसी उन्ह्ह्ह तेरी मर्जी पर खींच के आघ्ह उस तरीके से मत करना आआह्ह्हह्ह जान निकल जाती है उफफ्फ बोहोत मजा आ रहा है ,,,,

चेतन तेजी से कमर आगे पीछे आगे पीछे करने लगता है दीपाली सहन नही कर पाती और एक बार फिर झड़ जाती है । चेतन भी कुछ देर बाद झड़ जाता है ।

दोनो एक दूसरे को चुम्मा चाटी कर के प्यार जताते है फिर एक आखरी चुम्बन के साथ स्टोर रूम से बाहर निकल जाते है ।

Note: next update me ridhima tai ki kya huya uske baare me jaanne ke liye dher saare review dalo mitra
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[color=rgb(51,]Update 55

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[color=rgb(51,]Ground floor store room[/color]
[color=rgb(51,]

रिधिमा स्टोर रूम की लाइट बंद कर के इंतजार कर रही थी पिछले दस मिनट से अपने भांजे चेतन का ।

उधर ये दोनो गेम खेल रहे थे । तपन गेम खेलने के साथ तानिया से चैटिंग भीं कर रहा था और उसने भी एक मौका ढूंढ लिया ।

तपन ,,, भाई में कुछ देर में आता हूं ,,,

विशू ,,,,, साले सब मुझे अकेले छोड़ कर जा रहे हो ना । ठीक जा जा एक दिन मेरा भी दिन आएगा ,,,

तपन हस कर ,,, यार समझा कर ना । में बस दस मिनट में आया तू एक मैच खेल ले तब तक ,,,

तपन वोहा से चला गया । विशू अकेला पर गया उसे बिल्कुल भी अच्छा नही लग रहा था । उन चारों में से वो सबसे ज्यादा मस्ती खोर मजाकिया किस्म का था तो उसके दिमाग में सैतानी करने की आइडिया आया ।

और वो चारो तरफ देखा की कुछ लोग चुके थे और कुछ सोने की तयारी कर रहे थे । वो सबकी नजर बचा के नीचे वाले स्टोर रूम में गया होंठो पे मुस्कान ले के और सुने देखा स्टोर रूम की दरवाजा थोड़ा खुला (देखो इन लोगो की कांड दरवाजा भी बंद नही किया अंदर से रुको मजा चखता हूं )वो जिशु और शीतल को डराने की इरादे से दबे पाओ स्टोर रूम में घुसा ।

कमरे में अंधेरा था उसके पास मोबाइल था लेकिन उसने फ्लैश लाइट जलाया नही । कमरे में साख सब्जी रखे हुए बड़े बड़े बस्ते में आलू टमाटर जैसे और भी सब्जियों के अनाज के बोड़ी रखी हुई थी । और हाथ से चीजों को छू कर कदम रखने लगा अचानक किसी से वो टकरा गया । वो जिशु या शीतल आंटी समझ कर डराने ही वाला था

लेकिन उससे पहले ही रिधिमा उसकी बाहों में समा गई और बोलने लगी ,,, अब आए हो कबसे तुम्हारा इंतजार कर रहा था ,,,

विशु हैरान हो गया (ये कौन है ये तो शीतल आंटी नहीं हे । वो दोनो कहा हे फिर और ये औरत कौन है फिर । क्या गुगली हे ये)

रिधिमा ,,,,चेतन तुमने दरवाजा बंद किया ,,,

विशु बस ,,, हुंह,,, और दिमाग पे जोर दे कर (ओह तेरी ये तो तो चेतन की ताई है । ये यहां क्या कर रही है और चेतन समझ के मुझे क्यू बाहों में भर रखी हे । ओह तेरी चेतन अपनी ताई को ही पता रखा हे । साला कितना हरामी है),,,, विशू उसे बताना चाहता था की वो चेतन नहीं हे पर

रिधिमा उसकी छाती के दो बॉटम खोल के चूमने लगी । विशू को उसकी होठों की कोमोल एहसास पा कर पूरे बदन में सिहरन दौड़ गया । ये एहसास उसकी लुभावना भाव को जगाने के लिए काफी था लेकिन फिर भी वो बताना चाहता था और रिधोमा की कान में बोला ,,, में चेतन का दोस्त हूं ,,,

रिधिमा की कान में जैसे ही ये बात घुसी उसकी अंतर आत्मा कांप उठी और सोक के दो कदम पीछे हुई । विशु ने जैप से मोबाइल निकाला और फ्लैश लाइट जला दी ।

रिधिमा की चेहरे पे 12 बजी हुई थी । विशू मुस्कुरा के ,,, डरिए मत में किसी को नही बताऊंगा ,,,

रिधिमा ,,,, तू तू तुम यहां क्या कर रहे हो ,,,,

विशु जूठ बोलते हुए ,,,, में तो आंटी यहां सिगरेट पीने आया था ,,, और फिर सैतानी मुस्कान दे के ,,, लेकिन में समझ गया आप यहां क्यू है । चेतन और आप उम्म्म,,,

विशू की सैतानी मुस्कान देख के रिधिमा बात को छिपा ना सकी और उसकी भी मुस्कान निकल गई ,,,, देखो ऐसा कुछ नही है ,,,

विशु ,,,, आंटी आप मूस्कुराती हुई बोहोत हसीन लगती है जूठ बोलेंगी तो आपकी मुस्कान फीका लगेगा और वैसे भी मुझे पाता चल ही गया है तो अब क्या शर्माना ,,,

रिधिमा मुस्कुराती हुई नजर इधर उधर करने लगी । विशू उसके ऊपर हस के बोला ...." लगता है आपका भांजा गलत पाते पर पोहोच गया है ।,,,,

रिधिमा,,,,, किसी को बोलना मत ,,,

रिधिमा मुड़ कर जाने लगी तो विशू उसका पीछे से हाथ पकड़ कर बोला ,,,, आंटी आज काल घुस का करोवार चलता है और ऐसे ही पतली गली पकड़ रही है ,,,

रिधिमा अपनी हाथ चुराने की कशिश भी नही करी और मुस्कुरा कर बोली , , ,,, क्या चाहिए बोलो,,,,

विशू फ्लैश लाइट बंद कर के मोबाइल जैप में डालता है और रिधिमा को अपनी तरफ घुमा कर प्यार से बोला ,,, चेतन जो प्यार देने वाली थी वोही प्यार मुझे भी दीजिए थोड़ा ,,,

रिधिमा अंधेरे में ही मुस्कुराई (भांजा नही तो दोस्त ही सही ये भी खूबसूरत नौजवान है) वो कुछ नही बोली ।

विशु उसकी हा समझ कर उसे बाहों में भर लिया और सीधा होंठ पे होंठ सता कर चूसने लगा । रिधिमा भी उसके चेहरे को पकड़ कर चूमने लगी ।

धोरे धीरे दोनो गर्म हो रहे थे आनंद ले रहे थे एक दूसरे की हाथ एक दूसरे की बदन पर चलने लगे ।

रिधिमा उस वक्त एक सिल्की वान पिच स्लीबल्स नाइटी पहनी हुई थी वो तैयारी के साथ आई थी नीचे अंडरगार्मेंट भी नही पहनी थी वो । उंगली की अंगूठी तक उतार कर आई थी खुशबूदार परफ्यूम लगा कर ।

विशू इतना अच्छा मौका गवाना नही चाहता था उसकी सोच ये थी कि जब चेतन अपनी ताई के साथ कर सकता हे तो मेरे करने से क्या बुरा होगा और वो भी लालच में आ गया था ।

विशु रिधिमा की मांसल बाजू पकड़ के चेहरे को चूमने लगा और तेज सांसें लेते हुए बोला ,, आंटी आप बोहोत सॉफ्ट हो ,,,,

रिधिमा मुस्कुराई और उसका कमर पकड़ कर बोली ,,, तो क्या सख्त होना चाहिए ,,,

विशू ,,, अरे नेही मेरा मतलब नही था ,,,

और उसकी गर्दन चूमने लगा कंधा चूमने लगा लंबी केश पकड़ कर शिर ऊपर कर के मजे से चाटने लगा विशु रिधिमा को । दोनो ऐसे आगे बढ़ रहे थे जैसे दोनो में किसी को भी नयापन या कोई चंका नहीं है बस एक दूसरे की बाहों में समा जाना चाहता था दैहिक मिलन करने के लिए बेकरार हो रहे थे दोनो ।

विधु पास ही में पड़ा बस्ते के उपर रिधिमा को लिटा दिया और बोला ,,,, आंटी नाइटी ऊपर दो ना ,,,

रिधिमा की सांस चढ़ी हुई थी ,,, हाहह तू भी उतार दे सब ज्यादा टाइम देर नहीं कर सकते हे हम ,,,

फिर क्या था दोनो ही अपने अपने कपरे उतार कर नंगे हो गए । विशु रिधिमा के ऊपर लेट गया रिधिमा की चूत जल रही थी इतनी गर्म हो गई थी वो और उसने पहले से ही टांगे फैला के रखा । विशु का लंड उसकी चूत पर जा टकड़ा । विशु रिधिमा की गड़ताई हुई बदन को बाहों में भर कर आनंद से गड गड हो रहा था ।

रिधिमा नीचे हाथ ले जा कर विशु लंड को तोतले लगी और बोली ,,,, इतना मोटा बाप रे,,,

विशू ,,,, आपको पसंद आया ,,,,

विशु को अपने लंड पर कोमोल हाथो को एहसास पा कर मन किया बस चूत में डाल दे । रिधिमा भी वक्त की नजाकत देख कर लंड को अपनी चूत पर लगा दी और विशू ये एहसास पा कर ही व्याकुल हो कर धक्का मारा लंड भले ही सुखा था लेकिन रिधिमा की चूत गीली थी कबसे और चूत की दीवारों से पिचलता हुआ अंदर घुसते चला गया । विशु का था पहली बार वो आनंद विभोर हो कर धकेलता गया और लंड जड़ तक घुसा दिया ।

रिधिमा कोई सती सावित्री औरत नहीं थी जीवन में पहली बार उसे इतने बड़े लंड का एहसास हुई और पहली बार में ऐसे घुसा की उसे भी काफी तकलीफ हुई और दबी हुई आवाज में चिल्लाई ,,,मार दिया आन्ह्ह्ह बेटा ,,,,

विशू उसकी पेशानी पे हाथ फेरने लगा प्यार से और छोटी छोटी चुम्मिया दे कर प्यार जताने लगा ,, कोई ना आंटी अभी ठीक हो जायेगा ,,,,

रिधिमा दर्द बर्दास्त करती हुई बोली ,,,, कोई ना आंटी आह्हह फाड़ दी पहले ही ऐसा करता है क्या । आन्ह्ह्ह अब धीरे धीरे करो ,,,,

विशू उसकी बगल से हाथ निकाल ले फैबिकल की तरह रिधिमा को गुड़िया की तरह चिपका लिया और धीरे धीरे चोदने लगा ।

कुछ समय विशु एहसास ले कर चोदता रहा स्टोर रूम पर हल्की हल्की आवाज़ें गूंजने लगी आह्ह्ह्ह बेटा उन्ह्ह्ह धीरे ओंझझ आह्ह्ह उन्ह्ह्ह

विशु ,,, आंटी मजा आ रहा हे (आज पाता चला चुदाई में इतना मजा आता हे ये आंटी भी कमाल की है बढ़िया माल हे आंटी । चेतन के साथ मिल कर दोनो एक साथ चोदेंगे किसी दिन बोहोत चालू आंटी हे तो कोई परवा नहीं है)

रिधिमा विशु का बाल पकड़ कर और बाजू कस कर आनंद ले रही थी ,,,,, हा इसलिए तो आह्ह्हह्ह चोदने दे रही हूं,,,,

विशू को और जोश मिला उसकी गंदी शब्द सुन के और वो भी फ्री हो गया और उसकी गाल पर डाट गाढ़ा के बोला ,,, हेन्हह आप एक दम बोल्ड बिंदास टाइप की हो मन कर रहा है आपको खा जाऊं,,,

विशू के धक्के तेज हो गए रिधिमा की लचीला बदन हर धक्के पर हिलने लगी और आऊऊऊआई आह्ह्ह चोद बेटा चोद आह्ह्ह्ह बोहोत मजा आ दे रहा है तू उन्ह्ह्ह्ह

दोनो कुस्ती की तरह लड़ पड़े रिधिमा उसको जोश दिलाती जा रही थी और विशू पूरी मेहनत करते हुए धक्के लगाए जा रहे थे रिधिमा हर मानने को तैयार नही थी बार बार पानी निकलवाने में खूब मजा आ रही थी और विशू जैसे नौजवान की ताकत उसे भाव गई थी ।

ये रात तो चारो पैंतरों की निकल पड़ी सोने पे सुहागा हो गया ।[/color]
 
[color=rgb(51,]Update 56

Next day

सुबाह 10 बजे

शादी की रसम था । सुबाह से कार्यकर्ता लोग भाग दौर कर रहे थे । माहोल और जगमगा हो उठा दीपाली गुमसुम थी सुबह से ही किसी पे मन नहीं लग रहा था उसकी हर वक्त एंब्रसिंग पछतावा मेहसूस कर रही थी उसे इस बात का अफसोस नही थी की उसने पति से अलग अन्य मर्द के साथ सेक्स किया बात उसकी थी वो उसका सगा बेटा था । चाहे कुछ भी हो हर गुनाह माफ कर मां बेटे के शारीरिक संबंध बना लेना कोई समाज माफ़ ना करे ।

दीपाली लोगो से अलग कोने में गुमसुम बैठी पाई जा रही थी । कोई कोई बात भी करता तो बस हा ना में जवाब दे रही थी । शीतल केयरिंग नेचर की थी वो दीपाली को गुमसुम देख कर खुद परेशान हो गई और उसने फैसला किया दीपाली की गुमसुम होने की वजह जान कर उसका साथ दे ।

शीतल दीपाली को एक कोने से उठा कर घर के पीछे बाग में ले के गई ।

दीपाली ,,,, ये कहा ले के आ गई बात क्या है,,,

शीतल,,,, वो तो तू बताएगी ना बात क्या है,,,

दीपाली ,,, में । में क्या बताऊंगी ,,,

शीतल ,,,, तू जो छुपा रही है ,,,

दीपाली हरबरा गई एक पल के लिए ,,, में क्या क्या छुपा रही हूं,,,

शीतल ,,,, एक कान के नीचे लगाऊंगी समझी अब बता क्या बात है जो सुबाह से परेशान है तू चेहरा देख अपना बिल्कुल काली पड़ गई है ,,,

दीपाली फिर भी छुपाना चाहती थी ,,, ऐसा कुछ नही है बस तबियत ठीक नहीं लग रही हे । चोर बोहोत है ना ,,,

शीतल उसकी बाजू पकड़ के उसकी आखों में आंखे डाले प्यार से बोली ,,,, मुझे नहीं बताएगी तो किसे बताएगी हा । और हे ही कौन हमारे एलावा तेरी जो तेरी हर परेशानी समझ सके ,,,,

दीपाली कमजोर पड़ गई और शीतल से गले लग गई । शीतल उसको इतनी कोमजोर देख कर समझ गई बात बोहोत गंभीर हे । उसको प्यार झटा के बोली ,,, में हूं ना बोलो ना क्या बात है ,,,

तभी वाहा तानिया भी आ गई ,,, क्या बात है दोनो अकेले अकेले ही ,,,,

लेकिन शीतल और दीपाली की चेहरे का भाव देख कर वो भी समझ गई और सीरियस हो कर बोली ,,, क्या हुआ ,,,

शीतल ,,, ये बताए तब ना बता नहीं रही है ,,,

तानिया दीपाली की चेहरे पे प्यार झटा कर बोली,,, क्या हुआ दीपू । बोल ना हम हे ना तू बता बात क्या है हम सॉल्व करने के लिए है ना यहां,,,

दीपाली ,,, तराली कहा हे ,,,

तानिया ,,, वो कुछ औरतों के साथ बाजार गई है क्यो कुछ हुआ है उसके साथ ,,,

दीपाली ,,, नही ,,

शीतल ,,, तो फिर ,,,

दीपाली ,,,, बताती हूं लेकिन उसे मत बताना वो निगेटिवली लेगी बात को समझेगी नही बात को ,,,

शीतल ,,, ठीक है हम वादा करते है उसे नहीं बताएंगे अब बोल ,,,

दीपाली ,,, वो वो ,,,। दीपाली शर्म से बोल ही नहीं पा रही थी ।,,,, वो काल रात मैने किसी के साथ सेक्स किया ,,,

तानिया मुस्कुराई ,,, तो क्या हुआ वैसे भी तेरे हसबैंड के साथ अब सबकुछ खतम ही हो गया हे ना ,,

शीतल तानिया को दांत कर ,,, तू भी ना इसे अब्सोस हो रहा है और तू मजे ले रही हे ,,,

तानिया ,,, ओके ओके सॉरी । तो क्या तुम्हे अच्छा नही लगा और पछतावा हो रहा हे क्या ,,,

दीपाली ,,, बात वो नहीं हे पर ,,,।।

शीतल ,,, पर क्या दीपू,,,,,

दीपाली ,,,, वो चेतन था और अनजाने में ,,,

बस इतना ही कह पाई और तानिया की कंधे पे मुंह छुपा ली शर्म से ।

तानिया और शीतल 440 v का झटका लगा ,,, क्या चेतन । अपना चेतन,,,, ।

दोनो की चेहरे की हवाइयां उड़ गई थी ये सुन के की दीपाली ने अपने बेटे के साथ ही सेक्स कर लिया । बोलती बंद हो गई थी उस मंजर दोनो की क्या प्रतिक्रिया दे कुछ समझ नहीं पा रही थी दोनो ।

जब दिमाग ब्लैंक हो जाता है तब हवा की झोंक एहसास होती है और उस वक्त ऐसा ही हो रही थी वक्त जैसे रूक रूक के चल रही हे ।

तानिया ,,,, ये हुए कैसे ,,

दीपाली की आंखे नीची थी उसकी हिम्मत नही हो रही थी नजरे उठाने की । शीतल बोली ,,, कैसे हुआ ये ,,,,

दीपाली फिर रात की चारी कहानी बताती है । जिसे सुन कर तानिया और शीतल के पास कोई ठोस जवाब नही थी वो लोग क्या बोले जो भी हुई थी सब अनजाने में ही हुई थी । हालाकि बाद में दोनों को पता चल गया था मगर शुरुआत तो अनजाने में ही हुई थी ।

तानिया समझदारी से काम लेते हुए ,,, ओके ओके मेरी बात सुन अब दुखी होने का वक्त नहीं है । वो होना था तो हो गया सुनो ना दीपू प्लीज ये माइंड में मत ले इतना कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ा ,,,,

लेकिन शीतल बात को दिल पे ले ,,, तुमने जिशु को समझ कर यानी जिशू के साथ करना ,,,,

दीपाली ,,, नहीं नहीं प्लीज गलत मत समझ । में उसे बताना चाहती थी पर उसने मौका ही नही दिया और में भी बेहक गई थी और उकसा नतीजा में अब भुगत रही हूं । प्लीज शीतल मुझे गलत मत समझो ,,, दीपाली अब रोने लगी ।

तानिया ,,, शीतल तू भी ना । कभी कभी तेरी ये गवारों जैसी हरकत बिल्कुल पसंद नहीं आती मुझे दिख नहीं रही इसकी हालत ये तो कमसेकम सरवाइव कर रही है तू होती तो अब तक कुंए में कूद गई होती । कितने दिनों से इसे सेक्स नहीं मिला था बेचारी बहक गई थी और उसके साथ हुआ तो नहीं ना इस बात खुश तो हो । ,,,

शीतल को एहसास हो गया की वो सेलफिश हो रही हे जब की उसकी सहेली को उसकी जरूरत है इस वक्त । शीतल दीपाली को गले लगा के समझने लगती है ,,, सॉरी कोई बात नही जो हो गया सो हो गया अब बस रो मत नियति थी तो हो गया ,,,,

तानिया ,,, देख तू भी एक डॉक्टर है समझदार है में भी टेक्निकल फिल्ड से हूं । लोग सेक्स को गंदी चीज समझते हैं गलत नजर से देखते है जब की खुद भी उस चीज का इंजॉय करते हे । कमसे हम समझदार लोग तो उसको अच्छा चीज मान सकते है ना तु समझ ले तूने अपने बेटे के साथ अच्छी चीज की हे । हालाकि तेरी परेशानी पूरी खतम नही हो सकती दुनिया की दस्तूर जो हे पर थोड़ी तो बैटर फील देगी इस बात से । प्लीज बात को समझ बस एक ही बार हुआ है ,,,

दीपाली ,,, पर वो मुझसे । और में कैसे अब । कई बार हम दोनो एक दूसरे को अनदेखा कर चुके हे । बोहोत शर्म आ रही है । कुछ भी अच्छा नही लग रहा है । ,,,,

तानिया ,,,, तू शिंता मत कर हम उससे बात करेंगे ,,,,

दीपाली दर गई ,,,, नहीं नहीं रहने दे बात अपने बच्चो पे फैल गई तो ,,,,

शीतल ,,, दीपू हम एक परिवार हे और उससे भी अच्छा हमारा एक दिल का रिश्ता है । तू टेंशन मत ले ,,,,

दीपाली ना में शीर हिलाने लगी । लेकिन तानिया उसको हंसाने के लिए उसकी कमर पर गुदगुदी करने लगी ,,,, मुझे पता हे तेरा वो फोटो देख तभी से मन में कुछ कुछ हुआ था ना इसलिए बहक गई थी । लेकिन ये नाइंसाफी हे मेरे पति का तुझे बुरा लगा ,,,,

दीपाली थोड़ी हांसी मन थोड़ा शांत हुई थी बोझ थोड़ा हल्का लग रही थी ,,,, ऐसा नही है उसका तो लाल टॉमेटर जैसा है मुंह में पानी आ जाए । ,,

शीतल मजाक में ,,, हाय तू कहे तो दिलवा सकती हूं तेरे मुंह में ,,,

तानिया ,,, वैसे कैसा था तेरे बेटे का चिढ़ तो दी ही होगा उसने तेरी ,,,

दीपाली शर्म से मुस्कुराने लगी और शीतल की कंधे पे मुंह छुपाने लगी । तानिया उसे और बैटर फिल करवाना चाहती थी इसलिए दोनो को झाड़ के अंदर ले गई और दीपाली को चूमने लगी शीतल भी उसका साथ देने लगी वो दीपाली की बदन को सहलाने लगी ।

तानिया दीपाली की सारी के अंदर हाथ कर पैंटी के ऊपर से ही चूत भींच दी ,,,, बोल कैसा लगा था मजा आया था ना बेटे के साथ,,,,

दीपाली मुस्कुराई ,,,, इसलिए तो बाद में खुद गोद में उछली थी । बाई गॉड कितना बड़ा था उसका एक दम फैला देता था । अब प्लीज वो सब याद मत दिलाओ ,,,

तानिया और शीतल हसने लगी दिपाली भी मुस्कुराने लगी तानिया बोली ,,,, एक काम कर विशु को पता ले तू भी तेरे भी मजे हो जायेंगे यार कब तक दहकती रहेगी ,,,,

दीपाली ,, फट नही तुम लोगो की बात अलग है । ,,,

शीतल मुस्कुरा के ,,, मतलब ना नहीं हे । अगर वो पटाने चाहे तो ,,,,

दीपाली ,,,, ऐसे बात नहीं है । और तुम दोनो को पहले ही बता दूं कि उसे मत कहना कोई चालाकी नहीं । अगर मेरी किस्मत में कोई लिखा होगा तो वो मुझे वैसे भी मिल जायेगा ,,,,

तीनों हल्की फुल्की मजा करते है ।[/color]
 
[color=rgb(51,]Update 57

friend's atmosphere

समय दोपहर 2 बजे ।

सभी लोग भोजनालय प्रबंध जगह पे खाना खा रहे थे । विशु सुबह से सेहेक रहा था और मौका देख कर चेतन को चट्ट पर ले गया उसके पीछे पीछे तपन और जिशू भी आ गया ।

विशु ,,, यार तुम दोनो क्यूं आ गए मुझे चेतन से कुछ इंपोटेंट बात करनी है ,,,,

तपन ,, हम भी चेतन से कुछ जरूरी बाते करनी है ,,,

जिशू ,,, हा तू निकल ले ,,,,

पता नही चेतन को बड़ा गुस्सा आया अपने दोस्तो की तू तू में में हरकत पर और जोर से चिल्लाया ,,,, बहनचोद चोद चुप रहो । साला मुझे पता हे तुम लोगो को क्या बात करनी है ,,,

तीनों चुप हो गए और एक दूसरे को देखने लगे ।

चेतन चुप नहीं हुआ ।,,,, मुझे पता है (आइडिया लगा कर) मम्मी ने तानिया आंटी या शीतल आंटी या फिर दोनों को बता दिया होगा ना कैसे मेने और मम्मी ने अनाजने में सेक्स किया । और तू बिशु तू ये बताने आ गया ना की तूने मेरी जगह मेरी ताई के साथ सेक्स किया रात को नीचे वाले स्टोर रूम पर । ताई ने बताया मुझे सुबह । जान कर खुशी होगी तुझे वो बता रही थी की तेरे साथ बोहोत मजा आया और मुझे नल्ला बोला तालिया (चेतन क्लैपिंग करने लगा) । बोहोत खूब । और साला में मदरचोद ऊपर वाले स्टोर रूम में गया सोचा था जिंदगी की पहली सेक्स का मजे से लूंगा । अपनी किस्मत पर बड़ा खुश हो रहा था नाच रहा था अपनी किस्मत पर । साला अंधा सिपाही कानी घोड़ी, विधि ने खूब मिलाई वाली बात हो गई । मुझे क्या पता था मम्मी स्टोर रूम पर होगी मुझे लगा ताई है जिसकी मैंने दोपहर को ही पता लिया था सोचा था अपनी ताई को चोदूंगा । हथियार को धार दे के सीमा पे जाने वाली सैनिक की तरह छाती फूला के गया था । लेकिन ताई की जगह अपनी ही सगी मम्मी थी वाहा साला किस्मत । अंधेरे में एक झलक भी नहीं दिखाई दिया धर दबोच लिया अपनी मम्मी को ताई समझकर । वो मना कर रही थी चटपटा रही थी लेकिन में तो बब्बर शेर बन कर गया था आज शिकार कर के ही रहेंगे । जबरदस्ती कर के शिकार करने पर भीड़ गया । बस अब खुश यही जानना था ना तुम लोगो को । अब मजाक उड़ाओ हसो रो कुछ भी करो जो करना है करो । (और फिर एक बार क्लैपिंग)

तीनो की बोलती बंद हो जाती है । तीनो चट्ट पर घूमने लगे इधर उधर । तीनो को पूरी बात नही मालूम थीं अब तीनो को मालुम हो गया अपने दोस्त का हाल समझ रहे थे तीनों ।

चेतन फिर बोला लेकिन इस बार गुत्थी सुलझाने की अंदाज में ,,,, यार मम्मी भी मान गई थी पता चलने से पहले मुझे ऐसा क्यू लगता है की वो भी किसी का इंतजार कर रही थी ,,,

तपन ,,, किसी का इंतजार नही कर रही थी । दीपाली आंटी को लगा की जिशु हे जो मेरी मम्मी को यानी अपनी बीवी शीतल समझ कर उसे पकड़ लिया जिशु ने ऐसा वो समझ रही थी । वो माना कर रही थी बोलना चाहती थी लेकिन तू सच में बब्बर शेर बन कर गया था उसकी लिप ऐसे लोक किया की कोई साबी नहीं खुल सकता था । और मजे की बात ये थी दीपाली आंटी जिशु से अट्रैक्ट थी वो बताया था ना मम्मी और तानिया आंटी ने हम दोनो के बंदूक की फोटो दिखाए थे उसीकी प्रभाव थी शीर पर । फिर क्या था दीपाली आंटी बहक गई ,,,,

विशू हस कर ,,,, और चेतन की जगह हेंडपम में चला रहा ताई की हा हा ,,,,

तीनों को हसी निकल जाता है । चेतन पहले जिशु को घूरता हे और फिर विशू का गला पकड़ कर ,,, साले मेरी ताई हे इत्ज्जत दे कर बात कर ,,,,

विशू झट से एक ऊंची छलांग मार कर कुछ दूर कूद पड़ा और बोला ,, ,अरे भाई गुस्सा क्यों करते हो दिल से थोरी किसी भी औरत को हम बुरी नजर से देखते हे क्या कभी कभी दिल बहल जाता है वो अलग बात है । यार तुम लोगो की कांड ही ऐसे हे क्या करू बोहोत हांसी आ रहा है ,,,,

तपन और जिशू भी हसने लगा । जिशु बोला ,,,, यार तूने तो दुनिया ही पलट दी । अपनी ही मम्मी के साथ हां हां हां ,,,,

चेतन शर्मा गया लेकिन वो भी क्या करे उसे भी हसीं आ गया ,,,, यार अब तुम लोग ही बता में क्या करू यार मम्मी से नज़रे कैसे मिलाऊं वो मेरे बारे में क्या सोच रही होगी ,,,

चेतन शिर पकड़ कर बैठ गया । तीनों दोस्त उसके कंधे से कंधा मिला के बैठ गया और उसे समझने लगा ।

तपन ,,,, देख यार ये कोई इतनी बड़ी बात नही हे । हमको देख हम भी तेरे जैसे ही हे देखा जाय तो । इतना मत सोच आज काल ऐसा होता है यार ,,,

चेतन ।,,, क्या । लोग अपनी मम्मी के साथ ,,,

विशू ,,,, यार क्या पता जैसे तू और आंटी क्लोज आए थे ऐसे ही कोई ना कोई तो क्लोज आता ही होगा और वो हो भी हो ही गया होगा । बताता नहीं कोई भाई ये सब नॉर्मल है । गलती से एक बार हो गया इसमें क्या । ,,,

जिशु ,,,,, देख उल्लू के पट्ठे इस मॉडर्न जमाने में रीति रिवाज पालने लग गया न हो गया तेरा कभी अपनी मन की नही कर पायेगा ,,,,

चेतन ,,,, तुम लोग समझ नही रहे हो यार । ,,,

जिशू ,,, तू नहीं समझ रहा यार ,,,

चेतन ,,,, यार भाड़ में जाओ तुम लोग । तुमलोगो का दिमाग खराब हो गया हे । कोई काम के नही हो ,,,,

चेतन वाहा से उठ कर चला गया । उसको पीछे से ये लोग बुलाता रहा लेकिन वो मुड़ कर नहीं देखा ।

तपन ,,,, जाने दे यार कुछ वक्त दे अपने आप ठीक हो जायेगा ,,,,

जिशू विशू की पीठ थपथपा के ,,, और बता दोस्त की ताई की ले के मजा आया ,,,

विशु मुस्कुराया ,,, यार एक बताऊं तुम लोगो को चेतन की ताई है बड़ी मस्त हे बोहोत बिंदास है यार ,,,,

तपन ,,, अच्छा तो ,,,

विशू ,,, सुन ना में क्या सोच रहा हूं । क्यूं ना हम चार मिल कर उसके साथ एक गंगबंग करे ,,,,

तपन,,,, भले ही हम चोदू है ,,, अपने दिल पर हाथ रख कर ,,,, पर इसकी ईमानदार है हम तू कर जो करना चाहता है ,,,

तपन वाहा से जाने लगा । विशु जिशू की तरफ देख कर ,,, तू क्या कहता है ,,,

जिशु भी उसे चिढ़ाने के लिए ,,, आक्क थू साले पापी ,,,, और वो भी वाहा से चला गया।

विशु खुद से बात करता है ,,, सालो एक थाई काम वाली बाई के लिए पागल था और आज जब मौका मिल रहा है तो ईमानदारी दिखा रहा है । घंटे की ईमानदारी एक ने तो मां चोद दी । सालो मर ,,, विशु घंटाबल हो कर बैठ गया अकेला ही ।[/color]
 
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Last day [/color]
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शादी की रात ।

बैंड बज रहे थे मंच पर कभी कभी एक तरफ लड़के लोक डीजे भी बजाने लगते बुजुर्ग और लड़को में इस बात को ले कर तू तू मैं हो रहा था । कोई नाच रहा था कोई घर के लोग शादी की किसी बात पे परेशान था तो कोई खुश था ।
रात 8 बजे बारात ले के निकले दुलहन के घर शादी रसाने ।

औरते एक बस में और मर्द एक बस में । दूल्हे को एक कार में ले के गया । और बारात दुलहन के घर पोहोचा बारात ले के । बारातियों धूम धाम से स्वागत किया गया फूलो की माला से । आप तौर पर शादियों में नजवान अपने लिए गिरफ्रेंड धुनते रहते हे लेकिन जिशू और तपन तो अपनी बीबी को ढूंढ रहा था । चेतन तो था ही सुबह से मायूस लेकिन विशू लड़कियों को ताड़ रहा था पर इन तीनों की वजह से वो भी चांच नहीं मार पा रहा था ।

विशु,,,, यार तुम तीनो की वजह से मेरी शादी बरबाद हो रही है । चेतन तू चल ना मेरे साथ लड़की पटाते है इन दोनो का यौवन का सत्यानाश हो गया । हमारी तो बची है ,,,

जिशु,,,, साले हमारी नहीं तेरी यौवन दुर्गति पे हे हमारी तो बिबिया हे ।,,,

तपन ,,,, हा भाई बिल्कुल सही कहा हम जिस स्वर्ग में हे तुम क्या जानो विशू बाबू ।,,,

विशु ,,, हा हा बड़ा आया एक चुटकी सिंदूर में खुश रहने वाले । चल चेतन इन दोनो को छोड़ हम मजे करते है ,,,

चेतन ,,, यार तू जा मेरा मन नही है ,,,

विशु का मुंह उतर जाता है उसका पपोत होता देख जिशु और तपन हंसने लगता हे । विचु चिढ़ जाता हे ,,, धेत्त यार तू भी उसी बात को ले के उदास बैठा हे अब तक । भूल जा उस बात नहीं तो कभी उभर नहीं पायेगा उस बात से ,,,

चेतन ,,, तू जा मेरा दिमाग खराब मत कर ,,,

विशु और चिढ़ जाता है ,,, हद हे यार । ठीक हे मरो यही में चला ,,, विशू उन तीनो से दूर अकेला चले जाते हे ।

दुलहन भी अमीर रईस जादे घराने की थी । एक हवेली पे शादी हो रही थी ।

चेतन अपने मोबाइल में कुछ मैसेज भेजता है ,,, में आता हू ,,,

तपन ,,कहा जा रहा है चलो हवेली का शक्कर लगाते हे,,,

चेतन ,,, नहीं तुम लोग जाओ मुझे अकेला छोड़ दो ,,,

जिशु ,,जाने दे इसे अकेला कुछ सोच पाएगा ,,,

चेतन उन दोनों को अकेला छोड़ कर बारातियों के बैठने के हल से निकल के जाता है ।

तपन ,,, हम दोनो अब क्या करे ,,,

जिशू ,,, क्या करे मुझे तो बिलकुल भी मजा नहीं आ रहा है ,,,,

तपन ,,, हा यार मुझे भी बैठे रहते है कुछ देर बाद मंडप पे शादी हो जायेगी ,,,,

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[color=rgb(51,]Haveli[/color]
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चेतन अकेला हवेली के ऊपरी मंजिल पर टहल रहा था वो हर एक कमरे को चेक कर रहा था । ऊपर के कमरे लगभग खाली है । लोग नीचे मंडप पे जो थे लेकिन वो जिसको धुंध रहा था वो उसे मिल नही रहा था । उसे लगने लगा की अब वो उसे नहीं मिल पाएगा जिसे ढूंढ रहा है ।

मगर किस्मत की हवा उसके तरफ ही रुख ले रही थी । एक आखरी कमरे पे वो दिखाई दी और चेतन को खुशी हुई वाहा उसे शर्म भी आने लगा । वो गर्दन झुकाए कमरे पे गया और दरवाजा बंद कर दिया ।

चेतन धीमी आवाज में ,,,, मम्मी ,,,

दीपाली जान बूझ कर उसकी तरफ पीठ कर के खड़ी थी और बस ,,हम्मम,, कर के जवाब दी।

चेतन ,,, आप मुझे माफ नही करेगी ,,,

दीपाली ,,, तुमने माफी कब मांगी ,,,

चेतन निरुत्तर हो गया । कुछ पल कमरे में सन्नता चाह गया । दीपाली मुड़ी और अपने बेटे के करीब आई ,,, मुझे नहीं मालूम इस वक्त मुझे क्या रिएक्शन देना चाहिए ,,,

चेतन कुछ पल रूक कर ,,, आपने शीतल आंटी और तानिया आंटी को क्यू बताया ।,,,

दीपाली ,,, सॉरी वो में अकेली पड़ गई थी ,,,

चेतन ,, कोई बात नहीं बस में थोड़ा शर्मीदा था,,,

दीपाली ,,,, तुम्हे पता करना चाहिए था तेरी ताई कौनसे स्टोर रूम पर हे । और कमसे कम मुझे तो बोलने देना था ,,,

चेतन चौक कर ,, क्या आपको कैसे पता ,,,

दीपाली ,,, हम जो एक मंडली बन गए हे उसमे अब कोई भी बात चिपटा नही है ,,,

चेतन (साला कमीना तपन और जिशु ने बताया होगा),,, सॉरी ,,,

दीपाली ,,, अब खाली सॉरी ही बोलता रहेगा या बोलेगा भी क्यू बुलाया है यहां । नीचे लोग हमे ढूंढ रहे होंगे ,,,

चेतन ,,, वो वो वो में पापा के साथ जा रहा हूं ,,,

दीपाली आचार्यजनक हो कर ,,, क्या ,,,,

इस बार दोनो की नजरे टकराई । दीपाली का दिल भर आया ये सुन कर । वोही चेतन जनता था वो अपनी मम्मी को दुख दे रहा हे पर मजबूर था । दीपाली उसकी बाजू पकड़ के जकड़ा ।

दीपाली ,,, क्या बोला तूने ,,,।

चेतन ,,,, हमारे लिए अच्छा होगा आप और में उस बात को दोनों भूल जायेंगे । ,,,

दीपाली चेतन के गाल पर चाटा मार के बोली ,,, खबरदार जो दुबारा ऐसा बोला तो । में तुझे अपने से दूर कभी नही जाने दूंगी समझा । ,,,

चेतन दुखी हो कर ,,, तो क्या करू आप मुझसे नजरे नही मिला रही है । मुझे भी अजीब लग रहा है । ,,,

दीपाली की आखों से आसू बेहने लगी अपने बेटे को बड़ी आस से देखने लगी ,,,, में तेरे बगैर नही रह पाऊंगी । ठीक है हम उस बात को भूल जाते हे एक गलती ही तो थी ,,

चेतन बेद पर बैठ जाता है उसके पास कोई जवाब नही था क्या करे उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था । दीपाली उसके बगल बैठ गई और उसे गले लगा ली ।

चेतन ,,, आपको सच में लगता है ये एक गलती थी ,,,

दीपाली ,,, हा मेरा बच्चा । भूल जा गलती समझ कर हमने जान बूझ के थोड़ी ,,,,,,

चेतन ,,,, मम्मी अजीब लग रहा है ।,,,,

दीपाली ,,, वो नॉर्मल हे सब ठीक हो जायेगा ,,,,

दोनो मां बेटे एक दूसरे की बाहों में सकून महसूस करते है लग रहा था जैसे अब बैटर फील हो रहा है । और कुछ देर बाद दोनो अलग हो जाते हे ।

दीपाली अपने बेटे को मुस्कुराते हुए देखना चाहती थी इसलिए खुद पहल कर के मजाक करती है ,,,, वो तीनो कहा हे नमूने तीनों ,,,

चेतन हल्का मुस्कुराता है ,,,, दो तो अपनी बीवी के पीछे पड़ा हुआ है और एक लाइन मार रहा है ,,,,

दीपाली मुस्कुराई ,,,, और तुम किसके पीछे ,,,,

चेतन के मुंह से फट से निकल जाता है ,,,, आपके पीछे ,,,,

चेतन को एहसास हो जाता है की वो क्या कह गया । दीपाली को भी ये सुन के बदन पर एक अजीब सी गुदगुदी महसूस होती है और एक शर्म भी । दोनो एक दूसरे की आखों में देखने लगते और खो जाता है कुछ पल जैसे दोनो बिछड़ रहे हो और एक तड़प मेहसूस कर रहा है दोनो ।

चेतन अपनी मम्मी की गहरी आंखों में खो के बस फिर एक बार डूबने का मन करता है और बेझिझक हो कर अपनी मम्मी की चेहरे को दोनो हाथो से पकड़ कर होंठ चूमने लगता है । इस बार दीपाली की भी सांस एक क्षण में चढ़ जाती है और आंखे बंद कर के अपने बेटे की कमर पर हाथ रख कर बेटे की होंठ चूसने लगती है ।

दोनो इतने आक्रामक हो जाते है वासना की आग में दोनो को कोई होश ही नहीं रहता और होंठो को रसपान करने में दोनो को आनंद आता है बस एक दूसरे लालिमा चूसने लग जाते है । इस दौरान दोनों बिस्तर पर लौट पोट हो जाता है ।

दीपाली चढ़ती सांसों के साथ कहती है ,,, क्या कर रहे हो ,,,,

चेतन उसकी आखों में देख कर ,,, नही पाता ,,,,

दीपाली ,,, आज नही रुके तो जिंदगी में कभी नहीं रोक पाओगे ,,,

चेतन अपनी मम्मी को कस के बाहों में भर कर कान में बोला ,,,, आप अपने दिल से पूछिए आपका दिल क्या कहता है । क्या सेक्स एक प्यार का हिस्सा नेही है ,,,,

दीपाली (क्या कर दिए तूने बेटा । हा मेरा भी मन कर रहा है क्या हो गया है मुझे अपने ही बेटे के साथ सेक्स करने को उतावली हो रही हूं) ,,,, जो तेरा मन करे ,,,,,

चेतन जवान पा कर उसकी गर्दन पे चूमने लगता है और एक हाथ से उसकी चूची दबाने लगता हे । दीपाली तड़प उठती है सिसकारियां मारने लगती है ।

दीपाली ,,, मेरी सारी खराब हो जायेगी ,,,

चेतन मुस्कुरा कर ,,, तो उतार दू,,,

दीपाली उसके गाल पर चिकुटी काट कर ,,,, थोड़ी देर पहले तक मुझसे नजरे भी नही मिला पा रहा था और अब मेरी इत्ज्जत उतारना चाहता है ,,,

चेतन मुस्कुराया बस । फिर दोनो एक दूसरे की बदन से खेलते हुए अपने अपने कपरे उतार कर मादरजात नंगे हो जाता है । जिशू वासना भरी नजरो से अपनी मम्मी की गदराई हुई भरा जिस्म को कच्चा चबा जाने वाली नजरो से देखता है । और उसकी नजर दीपाली को ऐसा चुभती है कि दीपाली पानी पानी हो जाती है चूत इतनी गीली हो जाती है जैसे नदी बन गई हो ।

चेतन हवास में इतना अंधा हो गया था की उसे बस चोदना था और अपनी मम्मी की टांगे खोल के अपना लन्ड चूत में टीका के आगे झुकने लगता है दीपाली को बाहों में लेने के लिए और उसका लन्ड सरसरता हुआ पूरा घुस जाता है आनंद से उसका चेहरा खिल उठता हे ।

लेकिन दीपाली हिनहिना के उठती है भैंस की तरह ठंडी ऊपर कर के चीख उठती है इस तरह ईईहह्ह मर गई ।

चेतन उसके चेहरे को चूम कर ,,,, अच्छा नहीं लगा मम्मी ,,,,,

दीपाली जोश में बोली ,,,, बोहोत अच्छा लगा लेकिन फाड़ दी मेरी तूने ,,,,

चेतन को जोश आ जाता है अपनी मम्मी की कामुक कामसुख से भरी चेहरे की आओ भाव देख कर कुछ पल बस एक दूसरे की आंखो में खो जाते है और फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगता है चेतन । दीपाली को बोहोत आनन्द आती है उसकी हल्की हल्की सिसकारी कमरे में गूंज उठती है एक दूसरे की बदन को रगड़ कर खूब आनंद लेने लगते हे ।

दीपाली कुछ देर बाद बोली ,,,,आन्न्ह्ह रुको ,,,

चेतन रुक जाता हे ,,,, क्यू क्या हुआ ,,,,

दीपाली उसे समझती है ,,, ऐसा करो पूरा मत डालना पर तेजी से करना । मतलब जोर से करना पर पूरा मत डालना मेरी पानी निकल दे मुझसे बर्दास्त नही हो रहा हे ,,,,

चेतन ,, पूरा क्यू नही डालू मुझे मजा आता है ,,,,

दीपाली ,,, समझा कर ना । औरत की चूत रबर की तरह होती है जितना मोटा डालोगे उतनी फेल जाएगी उसपे कोई दिक्कत नही है लेकिन तुम्हारा बोहोत लंबा भी है उसके लिए चूत नहीं बनी है स्पीड में करोगे तो अंदर इन्फेक्शन भी हो सकता है समझ रहे हो ना,,,,

चेतन ,, हा ,,,

और दीपाली की कमर के नीचे एक तकिया रख देता है और अच्छे से पोजिशन बना कर अपनी मम्मी को बाहों में भर कर के तेजी से कमर हिलाने लगता है और लंड पिस्टन की तरह आधा हिस्सा घुस के बाहर निकल कर फिर घुसने लगता है चेतन का लंड आधा लंड भी एक नॉर्मल लंड की लंबाई थी ।

दीपाली बस झड़ना चाहती थी और उछल उछल कर थिरक थिरक कर झाड़ रही थी ,,,, आन्न्ह्ह्ह आन्ह्ह्ह आअम्ह्ह्ह आन्ह्ह्ह हा ऐसे ही ऐसे ही ऐसे ही चोदो आह्ह्ह्ह्ह मे गई मम्मी मुईम्म उम्म्ह्ह्ह नहीं आआह्ह्ह्ह्ह ,,,,,

दीपाली जोर जोर से हाफने लगती है । चेतन भी थक गया था चोदते चोदते वो भी रुक जाता है । दीपाली शर्मसुख पा कर बेशर्म और खुल जाती है अपने बेटे को बेतासह प्यार करने लगती है ,,,, उम्म्हा उम्ह्हहा मेरा बच्चा तू तो मदरचोद बन गया ,,,

चेतन भी हांफ रहा था ,,,, बस आपकी कृपा से ,,,

दोनो को हांसी आ जाता है ।

दीपाली ,,,, तपन और जिशू की तरह अब तेरी भी लॉटरी लग गई ,,

चेतन मुस्कुराता है ,, उन दोनो ने तो एक दूसरे की मम्मी की टिकट ली लेकिन मैने तो अपनी मम्मी की टिकट ली ,,,,

और खीच के झटका मारता है । दीपाली आउक्कक कर के होंठ गोल कर के चुस्की लेती है । चेतन अपनी मर्जी से एक रफ्तार में चोदने लगता हे दीपाली बस टांगे फैला कर अच्छ आह्ह्ह्ह आआअह्ह उन्ह्ह्ह उन्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह उह्ह्ह बेटा ओन्ह्छ बेटा आराम से आराम से आह्ह्ह्ह्ह बेटा धीरे उह्ह्ह्ह बेटा आराम से आह्ह्ह्ह ।

चेतन पूरे मजे से अपनी मम्मी को चोदता है चूसता है और चाट चाट के खाता है सरहरी जिस्म को । और अंत में दहाड़ कर वीर्य अंदर ही निजात कर देता है ।
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