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freesexkahani PAAP PUNYA (INCEST + ADULTERY)

रिक्की चुपचाप टीवी देखने लगी. मैंने अब अगला स्टेप लिया.

मोनू: वैसे मैं रिशू से तुम्हारे बारे में ही बात करने आया था.

रिक्की: मेरे बारे में?

मोनू: हाँ तुम्हारे और तुम्हारे दोस्तों अंकुर और जय के बारे में.

रिक्की मेरी तरफ देखते हुए बोली "सॉरी भैया पर मैं इन दोनों लडको को सिर्फ जानती हूँ, ये मेरे दोस्त नहीं है."

रिक्की की चूचियों को ललचाई नज़रों से देखते हुए मैं बोला, "तूम झूठ बोल रही हो रिक्की... मुझे तुम्हारे बारे में सब पता है इसलिए मैं रिशू से आज सब बात बता कर ही जाऊँगा."

रिक्की को मुझ पर बहुत गुस्सा आया और रिक्की ने देखा कि मेरी आँखें उसकी चूचियों पे टिकी थीं.

रिक्की मोनू की और देखते हुए बोली, "क्या... क्या पता है भैया? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है."

मोनू रिक्की को वासना भरी नज़रों से देखते हुए बोला, "रिक्की तेरा चाल-चलन दिन-ब-दिन खराब हो रहा है, तू अवारा लड़कों के साथ घूमती है... तेरी कम्पनी भी अच्छे लड़के लड़कियों से नहीं है... इसलिए मुझे ये सब बाते रिशू और कामिनी आंटी को बतानी होंगी."
रिक्की चौंक के मुझे देखते हुए सोचने लगी मोनू भैया को यह सब कैसे पता चला?

वो डरते हुए मोनू से बोली, "माना मैं लेक्चर बँक करती हूँ पर मेरा चाल-चलन क्या खराब है? सहेलियों के साथ कैन्टीन में होती हूँ मैं... कहीं घूमने नहीं जाती. प्लीज़ भैया... इतनी छोटी सी बात के लिए रिशू को क्यों बोल रहे हो?"

मोनू ने अब ज़रा गुस्से से रिक्की को देखा और रिक्की का हाथ पकड़के उसे खींचते हुए अपने पास बिठाते हुआ बोला, "इधर बैठ मेरे पास... रिक्की मैं तेरे बारे में सब जानता हूँ, मेरे मुँह से सुनेगी अपनी कहानी?"

अचानक खिसकने से रिक्की का स्कर्ट उठ गया. उसने जल्दी से अपना स्कर्ट ठीक किया पर तब तक मुझे रिक्की की गोरी जाँघों का दर्शन हो गया.

रिक्की ने अब घबराते हुए उठने की कोशिश करने लगी लेकिन मैंने उसे उठने नहीं दिया.

रिक्की अब ज़रा ऊँची आवाज़ में बोली, "वो अंकुर और जय की बात कर रहे हैं आप? यह अंकुर और जय की बहनें मेरी सहेलियाँ हैं... इसलिए कई बार उनसे मुलाकात होती है, बाकी जैसा आप सोच रहे हैं वैसा कुछ नहीं है.

मोनू रिक्की की कमर सहलाते हुए बोला, "अच्छा तो उन दोनों लड़कों की बहनें तेरी दोस्त हैं? अगर उनकी बहनें तेरी दोस्त हैं तो तू उन लड़कों के साथ कॉलेज कैन्टीन के पीछे हर दिन अकेली क्यों बैठी रहती है? तेरी सहेलियाँ क्यों नहीं होती तेरे साथ? क्योंकि अंकुर या जय की बहनें है ही नहीं. तू तो अंकुर और जय के साथ जाकर अपनी जवानी लुटाती है. क्यों रिक्की मैं सच कह रहा हूँ ना?
 
उधर रिक्की ने मन में सोचा था मम्मी के जाने के बाद वो अंकुर या जय को घर पे ही बुला लेगी पर उसे लगा की रिशू कहीं वापस न आ जाये तो उसने सोचा की वो खुद ही अंकुर के पास चली जाये और वो कपडे बदलने चली गयी.

उसने नीली स्कर्ट और लाल टी-शर्ट पहनी. टी-शर्ट के नीचे उसने ब्रा नहीं पहनी ताकि लोग ललचायी आँखों से उसकी चूचियाँ और निप्पलों का उभार देख के आहें भरे. स्कर्ट के नीचे उसने लाल रंग की पैंटी पहनी जो उसके गोरे बदन पे खूब खिलती थी. बाल उसने खुले ही रखे और हाई हील के सैंडल पहन कर वो बाहर जाने के लिए तैयार हो गयी.

तभी मैंने घंटी बजा दी. रिक्की ने खीझते हुए दरवाज़ा खोला तो सामने मुझे देख कर बोली

रिक्की: ओह मोनू भैया, रिशू तो अभी अभी कही बाहर चले गए.

मोनू: हाँ वो मुझे मिला था. उसने बोला की वो आंटी को चोद कर जल्दी वापस आ जायेगा और मैं यही उसका वेट करू.

रिक्की ने मन मार कर मुझे अंदर बुला कर दरवाजा बँद किया और मुझे बैठने के लिए कहा.

मोनू: कहीं बाहर जा रही थी क्या?

रिक्की: हाँ भैय्या. वो एक दोस्त के पास जाना था. कोई नहीं रिशू के आने के बाद चली जाऊंगी.

और उसने अपनी निगाहे टीवी पर गडा दी. टीवी पर ममता कुलकर्णी की कोई फिल्म आ रही थी. मैंने उसके शरीर पे अपनी हवस भरी नज़रें गड़ाते हुए बोला "बहुत सेक्सी लग रही है"

रिक्की को यह सुन कर झटका सा लगा और वो बोली "क्या बोला भैया आपने"

"अरे मैंने कहा ममता कुलकर्णी इस गाने में बहुत सेक्सी लग रही है, तुम्हे नहीं पसंद क्या ममता कुलकर्णी" मैंने रिक्की के बदन पे नज़रें गड़ाये हुए बोला.

रिक्की समझ गयी मेरी निगाहे कही पर है और निशाना कही पर.

रिक्की: मुझे तो ये बिलकुल नहीं पसंद

मोनू: किसी ने सही कहा है की एक खुबसूरत लड़की दूसरी खूबसूरत लड़की की तारीफ नहीं कर सकती

रिक्की के साथ कभी मोनू ने ऐसी बात नहीं की थी. उसे थोडा मज़ा आने लगा.

रिक्की: अच्छा तो मैं आपको सुन्दर लगती हूँ.

मोनू: सुन्दर. अरे तुम अगर फिल्मो में होती तो ये ममता वमता तुम्हारे सामने पानी भरती. तुमसे ज्यादा सेक्सी तो कोई हिरोइन नहीं होती रिक्की.

रिक्की: अब आप ज्यादा ही मजाक कर रहे है.

रिक्की की सैक्सी टाँगों को देखते हुए मैं बोला, "मजाक नहीं कर रहा तुम्हारी कसम" और मैंने अपना हाथ रिक्की की जांघ पर रख दिया. मेरी इस हरकत से रिक्की को एक पल के लिए झटका सा लगा तो मैंने अपना हाथ वापस हटा लिया.
 
फिर मैं और रश्मि दीदी नंगे ही एक दुसरे से चिपक के सो गए. अगले दिन सुबह जब मेरी नींद खुली तो दीदी कमरे में नहीं थी. मैंने कपडे पहने और नीचे चला गया. दीदी नाश्ता कर रही थी और पापा फ़ोन पर किसी से बात कर रहे थे. पापा ने फ़ोन रख कर मम्मी को किचेन में आवाज़ दी और बोला

पापा: मयंक के पापा ने परसों हम दोनों को अपने घर पर बुलाया है. अरे मोनू तू बहुत देर सोता रहा आज. जा जल्दी से नहा कर तैयार हो जा.

दीदी के चेहरे पर पापा की बात सुन कर मुस्कान आ गयी. मैंने मन में सोचा वाकई दीदी शादी के लिए तो मरी जा रही है. मैंने तय कर लिया की सन्डे को दीदी की विदाई की बात पक्की हो न हो पर रिक्की की चुदाई पक्का होगी और मैं बिना कुछ बोले बाथरूम में नहाने चला गया.
आखिर सन्डे आ ही गया. मम्मी और पापा दीदी की शादी की बात करने मयंक के घर चले गए और मैं रिशू के घर की तरफ निकल पड़ा. हमने तय कर लिया था की कामिनी और रिशू कुछ देर के लिए रिक्की को घर पर अकेला छोड़ देंगे.

उधर रिशू के घर रिशू और रिक्की टीवी देख रहे थे तभी कामिनी आंटी बाहर आ गयी और रिशू से बोली

कामिनी: जल्दी से कपडे बदल लो रिशू. मुझे जरा मेरी फ्रेंड के घर छोड़ दो.

रिक्की: कहा जा रही हो मम्मी? मुझे भी अपनी फ्रेंड की घर जाना था.

कामिनी: मुझे कुछ जरूरी काम है. रिशू मुझे छोड़ कर १ घंटे में लौट आयेगा तब ये तुम्हे तुम्हारी फ्रेंड के घर छोड़ आयेगा.

रिक्की: मम्मी आप घर की चाभी ले जाना. मैं अपने आप चली जाऊंगी.

कामिनी: जैसे तुम चाहो.

रिशू और कामिनी तैयार हो कर जैसे ही बाहर निकले उसी वक्त मैं वहां पहुच गया.

रिशू: अरे मोनू आओ आओ. मैं जरा मम्मी को तुम्हारे घर छोड़ के आता हूँ. तुम १० मिनट रुक कर अन्दर चले जाना. तुम्हारा घर भी तो खाली होगा न.

ये कह कर रिशू ने मुझे आँख मारी और कामिनी आंटी के साथ बाहर निकल गया.
 
मैंने लगभग १५ मिनट तक दीदी को ऐसे ही चोदा और उसके बाद दीदी के चूत से अपना लण्ड बाहर निकाल लिया फिर मैं दीदी की गाण्ड के पास आ गया और उनके छेद को फैला दिया और अपना लण्ड दीदी की गाण्ड के छेद पर रख दिया..

दीदी एक काम करो. हाथ पीछे करके अपने चूतड़ को फैला लो. मैंने दीदी को बोला

दीदी ने अपने दोनों हाथ पीछे कर दिए और चूतड़ को फैला लिया..

उनकी गाण्ड का छेद पूरा खुल गया..

अब मैंने बोला: छेद को ढीला छोड़ दो दीदी

फिर मैं ने दीदी के गाण्ड के छेद पर लण्ड सेट करके, हल्का झटका दिया और उनका टोपा दीदी की गाण्ड के छेद में "भच" से चला गया..

दीदी: इश्ह्ह स स स स स स स स स स.. . इयाः ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह.. . आ आ आआ आहह.. . प्लीज़ नही स स स स स स स स स..

और मैंने फिर से एक और धक्का मारा..

दीदी के मुँह से निकला: अआह बहन आह्ह चोद स स स आराम से इश्श स स स स स स स.. .

मैं हंस पड़ा और बोला: दीदी चुदती हुई औरत के मुँह से गालियाँ खाने में भी कितना मज़ा आता है.

मैंने कस के एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लण्ड दीदी की गाण्ड में चला गया..

मैंने अब दीदी से कहा: आह दीदी...अभी भी एक दम फ्रेश माल हो तुम अआह साला लग ही नहीं रहा की इतने लंड ले चुकी हो आह्ह्ह

दीदी: अहह माँह ह ह ह ह ह ह ह ह ह मार डाला तूने... हरामी...आराम से कर अब आअक आःह्ह

ठप ठप ठप ठप ठप.. . पट पट पट पट पट पट.. . से पूरा कमरा गूँज रहा था..

मैं ज़ोर ज़ोर से बड़ी बेरहमी से दीदी की गाण्ड मार रहा था.

कुछ आधे घंटे के बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और आ आ आ आ आ आ आ अहह... करते हुए दीदी की गाण्ड के अंदर ही अपना सारा माल निकाल दिया..
 
मैंने रश्मि दीदी को अपनी बाँहों में भर लिया और उनकी चूंची दबाते हुए बोला, कहा जा रही हो दीदी. जब तक तुम्हारी शादी नहीं हो जाती रोज चोदुंगा पर जब तुम चली जाओगी तब पता नहीं मैं क्या करूंगा.

दीदी ने हँसते हुए मेरा लंड पकड़ लिया और बोली, अरे तब के लिए रिक्की है न. अभी ५-६ साल उसकी शादी नहीं होने वाली. तू उससे काम चला लेना. अब जल्दी स मुझे चोद फिर सन्डे जाकर रिक्की की चूत फाड़ देना. समझा. और दीदी अपने कपडे उतारने लगी. मैंने भी अपने कपडे उतारे और दीदी के ऊपर टूट पड़ा

मैं बिस्तर पर आकर घुटनों के बल बैठ गया और दीदी के बालों को पकड़ते हुए अपना लण्ड उनके मुंह में दे दिया..

दीदी ने भी लण्ड को हाथ से रगड़ते हुए चूसना शुरू कर दिया..

आअहह अहह अहह अहह अहह और ज़ोर से दीदी. आ आ आ आ आ पूरा अंदर लो.. . उफ़फ्फ़.. कहते हुए मैं दीदी के मुंह मे अपना लण्ड आगे पीछे करने लगा और बीच बीच में अपना हाथ पीछे करते हुए दीदी की पीठ सहलाने लगा.

फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपना लण्ड बाहर कर दिया.. लण्ड पर दीदी का पूरा थूक लगा हुआ था और चमक रहा था.. मैंने दीदी को घुटनों के बल बैठा दिया और दीदी के पीछे खुद घुटनों के बल बैठ गये और दीदी की चूत में लण्ड रगड़ने लगे..

दीदी आ आ आहह आह आह आ ह ह आ ह ह ह आअ ह ह आ आ आ आ आ आ आ की आवाजे करने लगीं..

मैंने एकदम से दीदी की कमर पकड़ते हुए एक ज़ोर का धक्का दिया..

दीदी के मुह से सिस्कारिया निकलने लगी आ आ ह ह आ ह आह आअ माह ह ह ह ह ह.. . मर र र र र र गई स स स स स स स स.. . नही ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई.. . आइया आ ह आहह आह आ.. .

मेरा पूरा लण्ड एक ही बार में मेरी दीदी की चूत के अंदर चला गया था.. मैंने लण्ड को बाहर निकाला और फिर से धक्का मारा.. फिर मैं धीरे धीरे लण्ड अंदर बाहर करने लगे और अपने लण्ड को मेरी दीदी की चूत में पेलने लगा..

दीदी: आ अहह आ अहह अ ह अहह औह मोनू आह ह ओई ई ईई ई ई ह माआ अ ए या या माआ आ औहह ओफफ फफ फफ्फ़ ओफ फफ फफ्फ़ मा आआ..

मैंने धक्का मारते हुए दीदी से पुछा: क्यों दीदी मज़ा आ रहा है ना.. .

दीदी ने कहा: हाँ स स स स.. . बहुत मज़ाआआ आ रहा है स स स... आ ह हह आ आ.. और जोर से कर न

मैंने कहा: दीदी तुम इतना चुद चुकी हो फिर भी तुम्हारी चूत बहुत टाइट है... मज़ा आ जाता है जब भी तुम्हारी लेता हूँ. मेरी जान अब जब तक तेरी शादी नहीं होती तेरी हर रात को मैं तेरी सुहागरात बना दूंगा...

फिर मैं रफ़्तार बड़ा कर दीदी को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. बीच बीच में मैं एक दो थप्पड़ मेरी दीदी के चूतड़ पर मारता जा रहा था.. उनके चूतड़ पर मेरे हाथ का निशान छप गया था.. दीदी की गाण्ड एक दम लाल हो चुकी थी..

मेरे हर धक्के से दीदी की चून्चिया आगे पीछे हो रही थी...
 
रिक्की मेरे लंड के दोनों तरफ़ पैर करके खड़ी हो गयी और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी और एक हाथ से मेरा तन्नाया हुआ लंड पकड़ा और एक हाथ की उंगलियों से अपनी चूत के लिप्स खोले. जब मेरा लंड उसकी चूत से टकराया तो थोड़ा सा वोह घबरायी पर मैंने उसकी घबराहट देख कर उसके चूत्तड़ कमर के पास से कस कर पकड़ लिये और इससे पहले वो कुछ समझ पाती मैंने नीचे से अपने चूत्तड़ एक झटके से उछाले और पूरा लंड गप से उसकी चूत में उतार दिया. रिक्की बहुत छटपटाई पर मैंने भी उसकी कमर कस कर पकड़ी हुई थी.

दो तीन मिनट बाद जब उसक दर्द कम हुआ तो मैंने उसको अपने ऊपर झुका लिया और बोला, "रिक्की अब तू अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल कर ऊपर नीचे कर और लंड सवारी का मज़ा लें."

इतना कह कर मैंने उसका सिर दबा कर उसके होंठ अपने होंठों में ले लिये और चूसते हुए अपने दोनो हाथों से उसके पीछे से फैले हुए चूत्तड़ पकड़ लिये और मसलने लगा. रिक्की भी बड़े प्यार से उछलते हुए मुझे चोद रही थी, और दूसरी बार काफी देर तक हमने इसी पोज़ में चूदाई करी और मैंने अपने लंड का माल उसकी चूत में गिरा दिया और रिक्की को दबोच कर अपने ऊपर ही लिटा कर रखा और लगातार दो बार चुदाई करने के कारण हम थोड़ा सुस्ताने लगे और मेरी आँख लग गयी.

करीब एक घण्टे बाद मेरी जब आँख खूली तो देखा रिक्की मेरे लंड से खेल रही थी. जब मुझे उसने अपनी और घूरते पाया तो थोड़ा शरमा उठी.
मैंने भी कहा, "मेरी जान चूस इसे. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है."

इस समय मेर गन्ना पूरी तरह से तन्नाया हुआ था. मैंने रिक्की से कहा, "रिक्की जब भी मैं या रिशू तुझे चुदाई का मज़ा देंगे तो ये हमेशा याद रखना की तुझे ये मज़ा मिलने में कामिनी आंटी का बहुत बड़ा हाथ है समझी."

रिक्की तपाक से बोली, "यू आर राइट भैया, ऑल थैंक्स टू मम्मी. पर वैसे भी मैं अब ज्यादा इंतज़ार नहीं करने वाली थी, अंकुर या जय लाटरी कभी भी लगने वाली थी पर अब बेचारे हाथ मलते रह जायेंगे."

मैंने कहा कोई नहीं उनकी भी लाटरी लगवा देना. क्या दिक्कत है.

रिक्की बोली जब भूख घर में ही मिट गयी तो बाहर का खाने का रिस्क क्यों लूं.

अब मेरा लंड फिर से रिक्की की चूत फाड़ने के लिए तैनात हो गया था. मैंने रिक्की से कहा की तू तैयार हो जा तब तक मैं पानी पीकर आता हूँ.
 
मैंने रिक्की की दोनों जाँघें चौड़ी कर दीं और अपने हाथों से उसके पैरो के पंजे पकड़ लिए और खुद घूटने के बल बैठ कर अपनी गाँड के दनादन धक्के मारने लगा. रिक्की को अब भी तकलीफ हो रही थी पर वो भी अब चुदाई में पूरा साथ दे रही थी. वो ज्यादा मस्ती सहन नहीं कर पायी और सितकारी भरती हुए अपनी चूत का पानी मेरे लंड पर गिराने लगी और बड़बड़ा रही थी, "आह आँह मोनू मज़ा आ गया. मुझे क्या मालूम था अआह इतना मजा आएगा आःह्ह. इसके लिये तो मैं अपनी चूत बार-बार तुमसे फड़वाऊँगी."

मैंने भी लगातार आठ-दस शॉट लगाये और उसकी चूत में जड़ तक अपना लंड उतार के झड़ गया. मैं रिक्की की चूत को चोद कर मस्त हो गया था और आराम से उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को चूस रहा था. थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हटा और और उसका मुँह पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया और कहा, "बहन की लौड़ी रिक्की जब तक मैं न कहूँ मेरा लंड चूसती रहना नहीं तो गाँड मार मार के लाल कर दूँगा!" और आराम से अपनी पीठ टिका कर बैठ लगा.

रिक्की ने भी पूरी हिम्मत दिखायी और बिना वक्त बर्बाद करे मेरा लंड चूसना चालू कर दिया. करीब दस- पँद्रह मिनट की लगातार चूसाई से मेरा लंड फ़िर से तन्ना गया पर मैंने अपने आप पर पूरा कंट्रोल रख कर रिक्की के मुँह में अपना लंड तबियत से चूसवाता रहा. आज मैंने जितना रिशू से सीखा था सब उसकी सगी बहन पर अजमाना चाहता था.

करीब दस मिनट बाद मैंने रिक्की को बोला, "चलो आज तुझे घोड़े की सवारी करना भी सिखा दूँ. मेरी प्यारी रिक्की. करेगी ना मेरे लंड पर घोड़े की सवारी?"

रिक्की ने बड़े आश्चर्य से पूछा, "मोनू भैया तुम्हारा मतलब है कि मैं तुम्हारे लौड़े पर बैठ और उसे अपनी चूत में अंदर लूँ और अपने चूत्तड़ ऊपर-नीचे उछाल-उछाल कर लंड को अपनी चूत में लूं, जैसा ब्लू फिल्मों में होता है.?"

मैंने कहा, "हाँ मेरी कुतिया. लगता है बहुत ब्लू फिल्मे देखी है तूने. अरे जो ब्लू फिल्मों में होता है वो सब असलियत में भी होता है समझी. पर ध्यान रहे लंड बाहर नहीं निकलना चाहिए."
 
फिर मैं घूटने के बल रिक्की के सामने बैठ गया और बूरी तरह अकड़ा हुआ अपना लंड उसके सामने कर दिया और रिक्की की गर्दन में हाथ डाल कर उसका मुँह अपने लंड के पास लाया और बोला, "रिक्की, मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर अपनी चूत बजाने के लिये तो इनवाइट करो."

रिक्की ने तपाक से अपना मुँह खोला और मेरा सुपाड़ा अपने होंठों के बीच ले लिया और जीभ फेरने लगी. मेरे लंड पर रिक्की के जीभ फेरने ने वो काम किया जो आग में घी करता है. मुझसे रहा नहीं गया और दोनों हाथों से रिक्की का सर पकड़ कर उसके मुँह में ही मैंने आठ-दस शॉट लगा दिये. लौड़े का तो मारे गुस्से के बूरा हाल था. उसके सामने ऐसी मलाईदार चूत थी और मैं उसकी भूख मिटाने की बजाये चुम्मा चाटी कर रहा था.

अपना लंड रिक्की के मुँह से बाहर निकाल कर के मैंने रिक्की की जाँघों को अपने हाथों से पूरा फैला दिया और एक हाथ से लंड पकड़ कर दूसरे हाथ से रिक्की की चूत के लिप्स खोल कर अपना गुस्साया हुआ लाल सुपड़ा उसकी गुलाबी चूत से सटा दिया और बहुत हल्के-हल्के घिसते हुए बोला, "देख लो मेरी जान. अपने लंड की तेरी चूत से मुलाकात करा रहा हूँ."

रिक्की को भी अपनी चूत पर लंड घिसाई बहुत अच्छी लग रही थी. वोह सिर्फ़ मस्ती में "ऊँमम ऊँमम" कर सकी. एक दो मिनट बाद मैंने देखा कि रिक्की पर मस्ती पूरी तरह से सवार हो चूकी है तो मैंने अपने लंड का एक हल्का सा शॉट दिया जिससे मेरा लंड रिक्की की चूत बहुत ज्यादा कसी होने के कारण से फिसल कर बाहर आ गया. इससे पहले कि रिक्की कुछ समझ पाती, मैंने एक हाथ से अपना लंड रिक्की के चूत के लिप्स खोल के उसके छेद पर रखा और अपने चूत्तड़ों से कस के धक्का दिया जिससे मेरा लंड रिक्की की चूत में घुस गया.

वो जोर से चीखी, "हाय मोनू ओह मार डाला" मैंने लंड थोडा बाहर निकाल कर एक शॉट और लगाया और अब मेरा लंड जड़ तक रिक्की की चूत में समा गया. ऐसा लग रहा था जैसे किसी बोत्तल के छोटे छेद में अपना लंड घुसा दिया हो और बोत्तल के मुँह ने कस कर मेरे लंड को पकड़ लिया हो. मैंने रिक्की से पूछा, "रिक्की कैसा लग रहा है?"

रिक्की बोली, "आह्ह भैया इस्स्स्सस लगता है मैं ज़न्नत में हूँ. मेरे बदन से ऐसी मस्ती छूट रही है कि क्या बताऊँ. मोनू भैया बहुत मज़ा आआआ आ रहा है. अब तुम जी भर के मुझे चोदोऊऊऊऊ ."
 
थोड़ी देर की चूसाई के बाद मैंने कहा, "रिक्की, अब तो आप तैयार हो जा दुबारा मेरा लंड लेने के लिये."

मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और पलंग पर लिटा दिया. काले रंग की पैंटी से ढका रिक्की का गोरा बदन ऐसा लग रहा था जैसे कोई अपसरा अपने कपड़े उतार के सो रही हो और काला भँवरा उसकी ताज़ी चूत का रस चूस रहा हो. मैं करीब पाँच मिनट तक रिक्की के नंगे बदन की शराब अपनी आँखों से पीता रहा, और फिर बिस्तर पर चढ़ कर मैंने रिक्की की कमर चूसनी चालू किया और चूसते हुए अपना मुँह उसकी पैंटी पर लाया और पैंटी का इलास्टिक अपने दाँतों में दबा कर अपने मुँह से उसकी पैंटी उतारने लगा.

रिक्की ने भी अपने चूत्तड़ हवा में उठा दिये थे ताकि पैंटी उतारने में परेशानी ना हो. पर उसने इतनी टाइट पैंटी पहनी थी कि मुझे अपने हाथ भी लगाने ही पड़े. पैंटी उतार के मैंने देखा की जो हलके रोयें रिक्की की चूत पर थे अब वो भी उसने साफ़ कर लिए थे. रिक्की चूत चुदने के लिये इतनी बेकरार थी कि चूत से पानी टपक रहा था.

मैंने कहा रिक्की तूने अपनी चूत शेव कर ली मेरी जान.

रिक्की बोली, "भैया मम्मी ने मेरी चूत को क्रीम से साफ किया है मैंने नहीं."

मेरा लंड तो रिक्की की चिकनी नंगी मस्ताई हुई, चुदने के लिये तैयार चूत को देख कर ही मेरी अंडरवियर को फाड़ कर बाहर आने के लिये बेकरार था और उछल-कूद मचा रहा था. मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी अंडरवियर उतार दी और अपना मुँह मेरे सामने लेटी हुई नशे की बोतल के खज़ाने के मुँह पर लगा दिया. रिक्की तो मस्त हो गयी और मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी. मैं भी चाहता था कि रिक्की थोड़ा पानी और छोड दे ताकि उसकी चूत थोड़ी चिकनी हो जाये. मैंने उसकी चूत का दाना चूसते हुए अपनी जीभ से उसकी चुदाई चालू कर दी और करीब पाँच मिनट बाद ही रिक्की ने मेरा सिर अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और कस कर अपनी पूरी ताकत से मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा लिया और जोश में काँपते हुए चूत्तड़ों के धक्के देती हुई मेरे मुँह में अपना रस देने लगी. मैंने भी मन से उसकी जवान चूत चूसी और चूत के लाल होंठों को अपने होंठों से चूसा.
 
१५ मिनट बाद जब मैं कमरे में गया तो मज़ा आ गया, अंदर रिक्की बहुत ही सैक्सी टॉप-स्कर्ट में तैयार हो कर बैठी थी. रिक्की ने टॉप के उपर के चार बटन खोल कर नीचे से गाँठ बन्धी हुई थी और गज़ब का मेक-अप करा हुआ था. मुझे देख कर रिक्की खड़ी हो गयी और अपने चूत्तड़ हिलाने लगी. मैंने चुपचाप पीछे से जा कर उसकी मचलती हुई चूचियों को पकड़ लिया और रिक्की को घूमा लिया. फिर सीधा कर के हमने एक दूसरे को बाहों में कस लिया और तड़ातड़ एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे. रिक्की बहुत ही सैक्सी लग रही थी और अगर वो ऐसे रूप में कहीं सड़क पर चली जाती तो जरूर उसकी चूत का भोंसड़ा बन जाता.

मैंने पीछे से रिक्की की स्कर्ट नीचे खिस्का दी और झुक कर कुत्ते कि तरह उसके चूत्तड़ों में अपना मुँह लगा दिया और चाटने लगा. रिक्की ने काले रंग की नेट की बहुत ही टाईट रेशमी पैंटी पहनी थी जिससे वो उसकी गाँड की दरार में घुस गयी थी और उसके गोरे फूले हुए छोटे-छोटे मस्त चूत्तड़ों को और मादक बना रही थी.

रिक्की ने मेरी गर्दन में अपनी बाहें डाल कर बोली, "मोनू. मोनू. आज जी भर के अपने दोस्त की बहन को चोद लो!" और मुझे बिस्तर पर बिठाकर मेरी अंडरवियर में तन्नाए हुए लंड पर अपने चूत्तड़ घिसने लगी. मैंने उसकी टॉप के बटन और बंधी हुई गाँठ को खोल कर उतार दिया. रिक्की ने एक मस्त काले रंग की रेशमी ब्रा पहनी थी. एकदम पतले स्ट्रैप थे और ब्रा के कप सिर्फ़ उसके आधे निप्पल और नीचे की गोलाइयाँ छुपाये हुए थे. रेशमी नेट के अंदर से उसकी दूधिया चूचियों की साफ झलक मिल रही थी. मैंने उसे खड़ा होने को कहा और कुर्सी पर टाँगें फैला कर बैठ गया और रिक्की को बोला कि वो अपनी टाँगें मेरी टाँगों के दोनों तरफ करके अपनी पैंटी में कसी हुई चूत मेरे लंड पर रखे और आराम से बैठ जाये. तब तक मैं उसकी कसी हुई मस्त जवानी जम कर चूसना और दबाना चाहता था.

रिक्की बड़े ही कायदे से मेरे लंड के उठान पर बैठ गयी और बहुत हल्के-हल्के ढँग से अपनी पैंटी मेरे लंड से उठी हुई मेरी अंडरवियर पर घिसते हुए मेरी गर्दन में बाहें डाल कर बोली, "मोनू भैया मसल डालो मेरी इन जवानियों को. देखो तो सही कैसे तन कर खड़ी है तुमसे चुस्वाने के लिये."

मैं भी अपने हाथ उसकी पीठ पर ले गया और उसकी ब्रा के हूक खोल दिये और बड़े प्यार से उसकी चूचियाँ नंगी करी. उसकी चूचिया मेरे सामने तन कर खड़ी हुई थीं और मैंने भी बिना वक्त गँवाये दोनों चूचियों पर अपना मुँह मारना शूरू कर दिया. मैं बहुत ही बेसब्रा हो कर उसकी चूचियाँ मसल और चूस रहा था जिससे उसको थोड़ा सा दर्द हो रहा था. पर फिर भी मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाते हुए कह रही थी, "भैया आराम से मज़ा लो, इतने उतावले क्यों हो रहे हो. आज तो हमारा हनीमून है. कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ. जम के चूसवाऊँगी और मसलवाऊँगी. इनको इतना मसलो कि कॉलेज में मेरी चूचियाँ सबसे बड़ी हो जायें."
 
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