उन्हे ऐसे चूमा चाटी करते देखकर उसे भी कुछ-2 हो रहा था...
वो सोच ही रही थी की क्या करे की लाला का हाथ उसके सिर पर आ लगा और उसे एक बार फिर से अपने खड़े हुए लंड की तरफ खींच कर वो बोला : "चल...शुरू हो जा फिर से...''
बेचारी करती भी क्या....
लाला के लंड को एक बार फिर से पकड़ा और अपने मुँह में डालकर पहले की भाँति फिर से उसे चूसने लगी..
नाज़िया की मचल रही चूत उसके चेहरे से थोड़ी ही दूर थी...
उसमें से आ रही महक भी उसे काफ़ी उत्तेजित कर रही थी....
पर वो अपनी तरफ से कुछ करना नही चाहती थी.
पर लाला तो कर सकता था ना...
और उसने किया भी.
उसने शबाना के मुँह से अपना लंड निकाला और उसे थोड़ा उपर खींचकर नाज़िया की चूत पर उसका मुँह रखकर ज़ोर से दबा दिया...
शबाना के तो दिल की धड़कन ही रुकने को हो गयी...
उसने तो शायद आज से पहले सपने में भी नही सोचा था की उसे अपनी ही बेटी की चूत चाटनी पड़ेगी...
पर जो भी था, उसे नाज़िया की जवानी से लबालब चूत को चाटने में मज़ा बहुत मिल रहा था...
ऐसा लग रहा था जैसे कच्चा नारियल खोलकर उसमे से ठंडा पानी पी रही है वो
इस उम्र में जो रस निकलता है ना चूत से, उसके स्वाद का तो कोई मुकालबला ही नही है...
एकदम गन्ने के रस जैसी मीठास थी उसकी चूत के रस की...
आख़िर बेटी किसकी थी.
और इसी बात पर इतराती हुई शबाना ने पूरे ज़ोर से नाज़िया के निचले होंठो को कुरेदकर उनका रस निकालना शुरू कर दिया...
उपर से लाला ने उसके नन्हे बूब्स को अपने होंठो से जकड़ रखा था...
ऐसे में नाज़िया के पास सिर्फ़ ज़ोर से चिल्लाने के सिवा कुछ और काम रह ही नही गया था..
''आआआआआआआआआआआआआहह...... उफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ लालाजी ....... धीरेरए...... ये मेरे बूब्स है..... आपकी दुकान पर रखी ब्रेड नही जो ऐसे चबा रहे हो..... ओह्ह्ह ..... ओह अम्म्मी...... आप तो कमाल का चूसती हो..... उम्म्म्ममममममममममम..... अब तो रोज रात को सोने से पहले.... अहह ...आपसे चुसवाऊँगी ..... उम्म्म्ममममम.....''
अपनी बेटी के मुँह से ये बात सुनकर शबाना की चूत में भी हरारत सी होने लगी...
अब उसकी आने वाली रातें अपनी चूत मसलते हुए नही निकला करेगी...
वो ये सोचकर नाज़िया की चूत चूस ही रही थी की लाला ने उसके मुँह से नाज़िया की चूत को खींच लिया...
बुरा तो उसे बहुत लगा क्योंकि उसे वो सब करने में काफ़ी मज़ा मिल रहा था..
और अचानक उसने देखा की लाला ने अपने रामलाल को नाज़िया की चूत से निकले रस से पूरी तरह से चोपड़ दिया...
और फिर नाज़िया को थोड़ा उपर उठा कर अपने लंड की मिनार पर बिठा लिया...
और ये सब शबाना के चेहरे से सिर्फ़ 5 इंच की दूरी पर हो रहा था...
अभी कुछ देर पहले ही वो लाला को उसकी नन्ही चूत ना फाड़ने की दुहाई दे रही थी
और अभी ही उसे वो सब देखने को भी मिल रहा था...
और जैसा की उसने सोचा था, वैसा कुछ भी नही हुआ...
लाला के लंड ने बड़ी शालीनता से उसकी चूत में प्रवेश किया और उतनी ही सहजता के साथ नाज़िया का शरीर थरथराता हुआ सा नीचे आता चला गया और लाला के 9 इंची लंड को एक ही बार में पूरा का पूरा निगल गया..
और साथ में उसे सुनाई दी नाज़िया की सिसकारिया
जो इतनी मीठी थी की उन्हे सुनकर ही वो अंदाज़ा लगा सकती थी की उसे इस वक़्त कितना मज़ा मिल रहा था..
''आआआआआआआआआआअहह.....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... ओह.... लालाआआआआजी......... उम्म्म्मममममममममम........ अब सही में मज़ा मिला है.... कल जो दर्द था अब वो मज़ा बन चुका है....अहह....... उम्म्म्मममममममम..... चोदो मुझे लालाजी.... चोदो ..... ज़ोर से चोदो ... जैसे मेरी अम्मी को चोदा करते हो.... ठीक वैसे ही.......''
बस...
फिर क्या था...
लाला ने उसके कूल्हे पकड़े और खड़ा हो गया
फिर उसे हवा में उपर नीचे करते हुए उसने ऐसी -2 पटकनियाँ दी अपने लंड पर की उसकी गांड पर लाल-2 निशान पड़ने लग गये...
हर बार जब वो नीचे आती तो उसे ऐसा लगता की एक लंबा सा बंबू उसके शरीर के अंदर जा रहा है और उसे उत्तेजना के शिखर की तरफ धकेल रहा है...
और थोड़ी देर उसे ऐसे ही चोदने के बाद लाला ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया...
उसकी टांगे हवा में उठाई और अपना पठानी लंड उसके अंदर पेलकर एक बार फिर से किसी मशीने की भाँति उसे चोदने लगा..
लाला के हर झटके से नाज़िया को ऐसा लग रहा था की उसके उपर नीचे हो रहे मुम्मे उसका साथ छोड़कर बाहर निकल जाएँगे...
इसलिए उन्हे अपने हाथो से थाम लिया उसने...
पर लाला ने उसके हाथ हटा दिए..
चुदाई करते वक़्त उसे हिलते हुए मुम्मे देखने में काफ़ी मज़ा मिलता था..
और इस मज़े को ये जवान लड़किया और भी बड़ा देती थी..
वरना ढीले मुम्मे तो नीचे ढलके रहते थे उनका उपर नीचे होना तो बहुत कम ही हो पता था..
लाला ने नीचे झुककर उन अनार दानो को चूम लिया और उन्हे चूसते -2 वो चुदाई करने लगा...
और जल्द ही वो अपने मुकाम पर भी जा पहुँचा...
और आख़िर में उसने अपने लंड को बाहर निकाला और अपने लंड के पानी का छिड़काव नाज़िया के गर्म जिस्म पर करके उसे ठंडा कर दिया...
''आआआआआआअहह ले साली....... ये रहा मेरा माआल..... अहह...... खा जा इसे........... मज़ा ले.....''
उसने तो नही पर शबाना ने उपर उठकर अपनी बेटी के पसीने से भीगे बदन पर गिरी मलाई को चाटना शुरू कर दिया...
और उसे चाटकार ऐसे चमका दिया जैसे अभी नहा धोकर निकली हो वो...
लाला की हालत ऐसी हो चुकी थी जैसे उसके अंदर की सारी शक्ति निकाल ली हो इन माँ बेटी ने...
कुछ देर तक लेटे रहने के बाद वो उठा और चुपचाप अपने कपड़े पहन कर बाहर निकल गया...
और पीछे छोड़ गया उन नंगी माँ बेटी को, जिनका दिन तो अभी शुरू ही हुआ था.
लाला के जाने के बाद नाज़िया ऐसे ही नंगी उठकर बाहर तक गयी और दरवाजा बंद करके वापिस आ गयी.
वापिस आकर देखा तो उसने पाया की उसकी माँ शबाना अब उस पलंग पर टांगे पसार कर नंगी लेटी हुई है, जहां कुछ देर पहले तक वो खुद चुद रही थी..
नाज़िया को उसने इशारे से अपने पास बुलाया और बेड पर बिठा लिया
और बोली : "देख बेटी..आज जो कुछ भी हुआ है, वो बात हमारे बीच ही रहनी चाहिए.. क्योंकि ये बात अगर गाँव में किसी को भी पता चल गयी तो हमे ये गाँव छोड़कर कही और जाना पड़ेगा, जो अब मेरे बस का नही है...समझी...और वैसे भी अब तो तू समझदार हो गयी है...इतनी बात तो तेरी समझ में आ ही रही होगी..''
वो सोच ही रही थी की क्या करे की लाला का हाथ उसके सिर पर आ लगा और उसे एक बार फिर से अपने खड़े हुए लंड की तरफ खींच कर वो बोला : "चल...शुरू हो जा फिर से...''
बेचारी करती भी क्या....
लाला के लंड को एक बार फिर से पकड़ा और अपने मुँह में डालकर पहले की भाँति फिर से उसे चूसने लगी..
नाज़िया की मचल रही चूत उसके चेहरे से थोड़ी ही दूर थी...
उसमें से आ रही महक भी उसे काफ़ी उत्तेजित कर रही थी....
पर वो अपनी तरफ से कुछ करना नही चाहती थी.
पर लाला तो कर सकता था ना...
और उसने किया भी.
उसने शबाना के मुँह से अपना लंड निकाला और उसे थोड़ा उपर खींचकर नाज़िया की चूत पर उसका मुँह रखकर ज़ोर से दबा दिया...
शबाना के तो दिल की धड़कन ही रुकने को हो गयी...
उसने तो शायद आज से पहले सपने में भी नही सोचा था की उसे अपनी ही बेटी की चूत चाटनी पड़ेगी...
पर जो भी था, उसे नाज़िया की जवानी से लबालब चूत को चाटने में मज़ा बहुत मिल रहा था...
ऐसा लग रहा था जैसे कच्चा नारियल खोलकर उसमे से ठंडा पानी पी रही है वो
इस उम्र में जो रस निकलता है ना चूत से, उसके स्वाद का तो कोई मुकालबला ही नही है...
एकदम गन्ने के रस जैसी मीठास थी उसकी चूत के रस की...
आख़िर बेटी किसकी थी.
और इसी बात पर इतराती हुई शबाना ने पूरे ज़ोर से नाज़िया के निचले होंठो को कुरेदकर उनका रस निकालना शुरू कर दिया...
उपर से लाला ने उसके नन्हे बूब्स को अपने होंठो से जकड़ रखा था...
ऐसे में नाज़िया के पास सिर्फ़ ज़ोर से चिल्लाने के सिवा कुछ और काम रह ही नही गया था..
''आआआआआआआआआआआआआहह...... उफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ लालाजी ....... धीरेरए...... ये मेरे बूब्स है..... आपकी दुकान पर रखी ब्रेड नही जो ऐसे चबा रहे हो..... ओह्ह्ह ..... ओह अम्म्मी...... आप तो कमाल का चूसती हो..... उम्म्म्ममममममममममम..... अब तो रोज रात को सोने से पहले.... अहह ...आपसे चुसवाऊँगी ..... उम्म्म्ममममम.....''
अपनी बेटी के मुँह से ये बात सुनकर शबाना की चूत में भी हरारत सी होने लगी...
अब उसकी आने वाली रातें अपनी चूत मसलते हुए नही निकला करेगी...
वो ये सोचकर नाज़िया की चूत चूस ही रही थी की लाला ने उसके मुँह से नाज़िया की चूत को खींच लिया...
बुरा तो उसे बहुत लगा क्योंकि उसे वो सब करने में काफ़ी मज़ा मिल रहा था..
और अचानक उसने देखा की लाला ने अपने रामलाल को नाज़िया की चूत से निकले रस से पूरी तरह से चोपड़ दिया...
और फिर नाज़िया को थोड़ा उपर उठा कर अपने लंड की मिनार पर बिठा लिया...
और ये सब शबाना के चेहरे से सिर्फ़ 5 इंच की दूरी पर हो रहा था...
अभी कुछ देर पहले ही वो लाला को उसकी नन्ही चूत ना फाड़ने की दुहाई दे रही थी
और अभी ही उसे वो सब देखने को भी मिल रहा था...
और जैसा की उसने सोचा था, वैसा कुछ भी नही हुआ...
लाला के लंड ने बड़ी शालीनता से उसकी चूत में प्रवेश किया और उतनी ही सहजता के साथ नाज़िया का शरीर थरथराता हुआ सा नीचे आता चला गया और लाला के 9 इंची लंड को एक ही बार में पूरा का पूरा निगल गया..
और साथ में उसे सुनाई दी नाज़िया की सिसकारिया
जो इतनी मीठी थी की उन्हे सुनकर ही वो अंदाज़ा लगा सकती थी की उसे इस वक़्त कितना मज़ा मिल रहा था..
''आआआआआआआआआआअहह.....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... ओह.... लालाआआआआजी......... उम्म्म्मममममममममम........ अब सही में मज़ा मिला है.... कल जो दर्द था अब वो मज़ा बन चुका है....अहह....... उम्म्म्मममममममम..... चोदो मुझे लालाजी.... चोदो ..... ज़ोर से चोदो ... जैसे मेरी अम्मी को चोदा करते हो.... ठीक वैसे ही.......''
बस...
फिर क्या था...
लाला ने उसके कूल्हे पकड़े और खड़ा हो गया
फिर उसे हवा में उपर नीचे करते हुए उसने ऐसी -2 पटकनियाँ दी अपने लंड पर की उसकी गांड पर लाल-2 निशान पड़ने लग गये...
हर बार जब वो नीचे आती तो उसे ऐसा लगता की एक लंबा सा बंबू उसके शरीर के अंदर जा रहा है और उसे उत्तेजना के शिखर की तरफ धकेल रहा है...
और थोड़ी देर उसे ऐसे ही चोदने के बाद लाला ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया...
उसकी टांगे हवा में उठाई और अपना पठानी लंड उसके अंदर पेलकर एक बार फिर से किसी मशीने की भाँति उसे चोदने लगा..
लाला के हर झटके से नाज़िया को ऐसा लग रहा था की उसके उपर नीचे हो रहे मुम्मे उसका साथ छोड़कर बाहर निकल जाएँगे...
इसलिए उन्हे अपने हाथो से थाम लिया उसने...
पर लाला ने उसके हाथ हटा दिए..
चुदाई करते वक़्त उसे हिलते हुए मुम्मे देखने में काफ़ी मज़ा मिलता था..
और इस मज़े को ये जवान लड़किया और भी बड़ा देती थी..
वरना ढीले मुम्मे तो नीचे ढलके रहते थे उनका उपर नीचे होना तो बहुत कम ही हो पता था..
लाला ने नीचे झुककर उन अनार दानो को चूम लिया और उन्हे चूसते -2 वो चुदाई करने लगा...
और जल्द ही वो अपने मुकाम पर भी जा पहुँचा...
और आख़िर में उसने अपने लंड को बाहर निकाला और अपने लंड के पानी का छिड़काव नाज़िया के गर्म जिस्म पर करके उसे ठंडा कर दिया...
''आआआआआआअहह ले साली....... ये रहा मेरा माआल..... अहह...... खा जा इसे........... मज़ा ले.....''
उसने तो नही पर शबाना ने उपर उठकर अपनी बेटी के पसीने से भीगे बदन पर गिरी मलाई को चाटना शुरू कर दिया...
और उसे चाटकार ऐसे चमका दिया जैसे अभी नहा धोकर निकली हो वो...
लाला की हालत ऐसी हो चुकी थी जैसे उसके अंदर की सारी शक्ति निकाल ली हो इन माँ बेटी ने...
कुछ देर तक लेटे रहने के बाद वो उठा और चुपचाप अपने कपड़े पहन कर बाहर निकल गया...
और पीछे छोड़ गया उन नंगी माँ बेटी को, जिनका दिन तो अभी शुरू ही हुआ था.
लाला के जाने के बाद नाज़िया ऐसे ही नंगी उठकर बाहर तक गयी और दरवाजा बंद करके वापिस आ गयी.
वापिस आकर देखा तो उसने पाया की उसकी माँ शबाना अब उस पलंग पर टांगे पसार कर नंगी लेटी हुई है, जहां कुछ देर पहले तक वो खुद चुद रही थी..
नाज़िया को उसने इशारे से अपने पास बुलाया और बेड पर बिठा लिया
और बोली : "देख बेटी..आज जो कुछ भी हुआ है, वो बात हमारे बीच ही रहनी चाहिए.. क्योंकि ये बात अगर गाँव में किसी को भी पता चल गयी तो हमे ये गाँव छोड़कर कही और जाना पड़ेगा, जो अब मेरे बस का नही है...समझी...और वैसे भी अब तो तू समझदार हो गयी है...इतनी बात तो तेरी समझ में आ ही रही होगी..''