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Desi Sex Kahani हरामी साहूकार

नाज़िया जब उनके करीब आई तो सबसे पहले उसने पहले की गयी ग़लती की माफी माँगी ताकि अब उनके बीच में कोई दूरी ना रहे...
पिंकी तो पहले से ही वो सब बाते भूल चुकी थी इसलिए जल्द ही पुरानी बातो को दरकिनार करके तीनो सहेलियां खिलखिलाकर एक दूसरे से बाते करने लगी..

वो तीनो उठकर स्कूल के पीछे बने एक छोटे से बगीचे में जाकर बैठ गये...
घने झाड़ के पीछे छुपकर, जहाँ बैठकर अक्सर वो स्कूल के पीरियड्स गुल किया करते थे...

उनकी बातें वहां भी जारी रही...
और जैसा की पहले हुआ करता था, कुछ ही देर में पिंकी ने बातो का रुख़ सैक्स की तरफ मोड़ दिया...
और इस बार नाज़िया उन बातो को सुनकर भागी नही और ना ही शरमाई ...
बल्कि बड़े ही चाव से उसकी रसीली बातो को सुनकर उनका स्वाद लेने लगी..

पिंकी : "यार...ये साली जवानी जब से आई है ना, पूरे बदन में एक अजीब सी हरारत होती रहती है दिन भर...मन करता है की नंगी होकर बिस्तर पर लेट जाऊ और कोई जोशीला मर्द आकर मुझे उपर से नीचे तक मसल डाले...अपने सख़्त हाथो से मेरी छातिओ को...मेरी गांड को...मेरी जाँघो को और चूत को ज़ोर से दबाए और उनमें हो रहा मीठा दर्द बाहर खींच निकाले...''

निशि ने उसकी बात पर सहमति जताते हुए कहा : "हाँ यार.....मुझे भी आजकल ऐसी फीलिंग होती रहती है....कल तो क्लास में भी एकदम मेरी मुनिया में से अचानक ही गर्म पानी निकलने लगा... मैथ्स वाले टीचर के सामने ही, उनके बारे में ही सोचकर, और फिर उनकी आँखो से बचकर, मैने अपनी मुनिया को ज़ोर से रगड़ा...तब जाकर शांत हुई वो निगोडी...वरना मैं तो पागल सी हो रही थी...मन कर रहा था की भरी क्लास में सारे कपड़े निकाल कर नंगी हो जाऊँ और पूरी क्लास के लड़के लड़कियां मेरे नंगे शरीर से खेले...मेरी मुनिया को चूसे ...और अपने गरमा गरम पेशाब से मुझे नहला डाले...''

उन दोनो की ये गरम बातें नाज़िया के जवान जिस्म पर क्या प्रभाव डाल रही थी ये दोनो अच्छे से जानती थी....
और वो कहते है ना, एक दूसरे की बाते सुनकर अपने दिल की बाते भी निकल ही जाती है...
वही हो रहा था नाज़िया के साथ भी....

वो भी बेचैनी से अपनी छाती पर चमक रहे निप्पल को रगड़ती हुई बोली : "हाँ यार...तुम दोनो ठीक कह रही हो....परसो मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था....मैने किसी को चुदाई करते हुए देख लिया...और उन्हे देखकर मेरा पूरा शरीर जल सा रहा था....मेरी जाँघो के बीच अंगारे से जल रहे थे...उंगलिया डाली अंदर तो ऐसा लग रहा था जैसे झुलस जाएगी...पर वो नज़ारा था ही ऐसा की मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल सा हो रहा था...मैने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके और भरी दोपहरी में नंगी होकर अपनी चूत को ज़ोर-2 से मसला...और तब तक मसला जब तक वो नदी की तरह बह नही गयी...''

उसकी बाते सुनकर पिंकी और निशि के बदन तपकर लाल से हो गये...

पिंकी ने उसकी जांघो पर अपने हाथ रखे और उन्हे धीरे-2 मसलने लगी...
और बोली : "पूरी बात बता ना नाज़िया...किसे देखा तूने...अच्छे से बता ना...ऐसे मज़ा नही आता...''

नाज़िया सकुचा रही थी...
शायद अपनी माँ की बदनामी के डर से वो उन्हे बोल नही पा रही थी..

पिंकी ने उसे आँखे चुराते देखा तो वो निशि से बोली : "चल निशि ..ये तो आधी अधूरी बातें कर रही है...हम एक दूसरे से कोई बात नही छुपाते...और इसे देख, कितने नखरे कर रही है...जब छुपाना ही है तो बताया क्यों ..और ऐसा करना ही था तो हमारे पास आई ही क्यो...हमसे दूर ही रह अगर ये सब करना है तो...''

इतना कहकर उसने निशि का हाथ पकड़ा और दोनो उठकर चल दी..

''रूको.......मेरा वो मतलब नही था.....वो ...वो मुझे बस.....बदनामी का डर था....इस...इसलिए....नही बता रही थी...''

नाज़िया के मुँह से ये सब सुनकर दोनो की आँखे चमक उठी...
एक पल के लिए तो उन्हे लगा की वो खुद ही चुद चुकी है,
और किसी और की चुदाई को देखने का बहाना कर रही है...

वो दोनो तुरंत वापिस बैठ गयी और बोली : "किसकी बदनामी नाज़िया....हमसे छुपाने की कोई ज़रूरत नही है री...हम किसी को नही बताएँगे ...अपने माँ -बाप की कसम...हाँ ...''

दोनो सहेलियो ने तुरंत कसम खा डाली, ताकि नाज़िया को उनपर विश्वास हो जाए...
और वो हो भी गया.

वो बोली : "ठीक है....ये बात हम तीनो के बीच ही रहनी चाहिए....समझे...''

निशि : "हाँ ...हाँ ..समझ गये....अब बता...किसे देखा तूने....''

नाज़िया ने सकुचाते हुए कहा : "लाला को.....''

लाला का नाम सुनते ही दोनो की आँखे फटी की फटी रह गयी...
इस साले लाला ने इस नन्ही सी चूत को भी नही बख़्शा ....
साला हरामी कुत्ता...

वो दोनो अपनी ही अटकलें लगाकर लाला और नाज़िया की चुदाई के बारे में सोच रही थी की नाज़िया ने आगे कहा : "अपनी अम्मी के साथ....''

उसके ये शब्द एक बार फिर बॉम्ब बनकर दोनो के कानों में गिरे...

उसकी अम्मी तो उनकी नजरों में पहले से ही रंडी का खिताब पा चुकी थी.

यानी, लाला ने नाज़िया की अम्मी, शबाना को चोदा ...

और ये सब नाज़िया ने अपनी आँखो से देखा...

पिंकी : ''ओह्ह ....तो लाला ने तेरी अम्मी को चोदा ....मुझे लगा की उसने तुझे पेल दिया...''

उसकी बात पर निशि खिलखिलाकर हंस पड़ी...
और बोली : "हे हे....लाला का लंड देखा है ना तूने....इसकी मुनिया की तो धज्जिया उड़ा देगा वो अपने रामलाल से...''

नाज़िया दोनो के हंसते हुए चेहरे देखकर ये जानने की कोशिश कर रही थी की उन्होंने लाला का लंड कब देख लिया...
अभी तक तो वो खुद को ही खुशनसीब समझ रही थी पूरे गाँव में जिसने इतनी कम उम्र में लाला का हथियार देख लिया था...
पहले अपनी माँ की चूत में घुसते हुए..
और बाद में उसकी दूकान पर जाकर खुद भी मजे लेकर आयी थी वो.

पिंकी उसे देखकर बोली : "ऐसे फटी आँखो से क्यो देख रही है मुझे....लाला के बारे में तो आधा गाँव जानता है...और हम दोनो तो ख़ासकर...''

इतना कहकर दोनो एक दूसरे के हाथ पर ताली मारकर फिर से हँसने लगी...
नाज़िया इस वक़्त खुद को चूतिया सा बना महसूस कर रही थी...
उन दोनो के सामने अपने आप को बहुत छोटा सा फील किया उसने...
पर उसने अपनी और लाला के बीच वाली बात उन्हें तब भी नहीं बतायी।

फिर पिंकी बोली : "और मैने तो तेरी माँ को भी चुदते हुए देखा है....''

बेचारी नाज़िया का चेहरा देखने लायक था...
वो हकलाते हुए बोली : "कब....किसके साथ...लाला के..?''

पिंकी ने मुस्कुराते हुए ना में सिर हिलाया और धीरे से बोली : "किसी और के साथ....वो है ना नरेश, गाँव के बाहर जिसका खेत है...वही...कल ही तो देखा...मैं जब लाला के साथ दूसरे गाँव गयी थी...तो हम दोनो ने मिलकर देखा...छुपकर...''

और इतना कहकर उसने शुरू से अंत तक की सारी चुदाई गाथा उसे कह सुनाई...
जिसे सुनकर एक पल के लिए तो नाज़िया को विश्वास ही नही हुआ था...
पर ये विश्वास तो उसे तब भी नही हुआ था जब उसने अपनी अम्मी को लाला के सामने घोड़ी बनकर चूत मरवाते देखा था...

पर अंदर से वो भी जानती थी की ये सब वो उसके लिए ही तो कर रही है...
वरना और कौन है जो उसकी पढ़ाई और घर का खर्चा चलाएगा...

पिंकी और निशि ने अपने और लाला के बीच हुए मज़े के बारे कुछ नही बताया...

उसे सोच में डूबा देखकर पिंकी ने उसे समझाते हुए कहा : "अरे , अब तू किस सोच में पड़ गयी....ये सब तो होता रहता है....एक बात याद रखियो मेरी...एक बार इस चुदाई का चस्का लग जाए ना, तो इंसान किसी की फ़िक्र नही करता...फिर चाहे वो मर्द हो या औरत, ये खुजली दोनो को उठती है....हाँ , ये अलग बात है की हम लड़कियां इसे ज़्यादा दिखा नही पाती और ये मर्द साले ठरकी बनकर अपनी हवस दिखाते फिरते है....अगर अंधेरे कमरे में पूछा जाए तो लड़कियां बाजी मार लेंगी टाँगो के बीच होने वाली खुजली को लेकर...''

निशि ने भी उसकी हाँ में हाँ मिलाई और बोली : "पिंकी सही कह रही है....लाला और वो नरेश जैसे मर्द इसी वजह से तो इतने मज़े लेते रहते है...और तुम्हारी अम्मी और हम जैसी बेचारी लड़कियां छुपकर ये काम करती फिरती है...फिर भी बदनामी का डर बना रहता है...''

नाज़िया उन दोनो के चेहरे गोर से देख रही थी और ये जानने की कोशिश कर रही थी की वो आख़िर कहना क्या चाहती है...

पिंकी समझ गयी उसके दिल की उलझन को...
और वो बोली : "और इसलिए हमने फ़ैसला किया है की आज से हम अपनी लाइफ को पूरा एंजाय करके जियेंगे...शादी के बाद तो हमारी लाइफ वैसे भी एक खूँटे से बँधकर रहने वाली है...बाद में भी ये सब हो सकता है पर तब मामला रिस्की होता है , अभी के लिए कम से कम कोई ज़्यादा कहने वाला नही है...घर वालो को तो हम संभाल ही लेंगे...बोलो क्या कहती हो नाज़िया...अगर तुम हमारे इस गेंग में रहना चाहती हो तो आज से तुम्हे हमारी जैसी सोच ही रखनी पड़ेगी...यानी हमे सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने मज़े के बारे में ही सोचना है...वो कैसे मिलते है...किससे मिलते है, ये सोचकर हमे अपनी जवानी खराब नही करनी ....अगर तुम साथ हो तो बता दो...वरना अभी वापिस जाकर वही बोर सी जिंदगी जियो....''

दोनो दिल थामकर उसके चेहरे को देखने लगे...
नाज़िया ने अपनी हिरनी जैसी आँखे थोड़ी देर के लिए बंद की और फिर अपने गुलाबी होंठ खोलकर बोली : "अगर वो बोर लाइफ जीनी होती तो तुम्हारे साथ यहाँ आती ही क्यो....''

उसका ये कहना था की पिंकी और निशि का चेहरा खिल उठा और दोनो ने अपनी बाहें उसके इर्द गिर्द डालकर उसे हग कर लिया....
और अचानक पिंकी ने वो किया, जिसके बारे में नाज़िया तो क्या निशि ने भी नही सोचा था...

पिंकी ने नाज़िया के होंठो पर अपने होंठ रखे और उन्हे ज़ोर-2 से चूसने लगी....

एक लड़की से पहली बार किस्स करवा रही नाज़िया तो सकपका सी गयी...
पर उसे धीरे-2 उस किस्स में मज़ा आने लगा...

वो भी उसके चेहरे को पकड़कर उसका जवाब देने लगी...
और अचानक नाज़िया को अपने बूब्स पर निशि के हाथो का एहसास हुआ...
उसने जब देखा की पिंकी ये सब करे बिना नही मानेगी तो उसने भी इस खेल में उतरना सही समझा...
आज तक उसने पिंकी का हमेशा साथ दिया था...
आज भला पीछे कैसे रह जाती...

वहां ये सब करने में नाज़िया की गांड पहले तो फट रही थी...
पर अंदर से एक रोमांच भी मिल रहा था की ऐसे खुल्ले में वो इस तरह की गंदी वाली बात कर रही है......

उसे इन सबमे काफ़ी मज़ा मिल रहा था..
ख़ासकर पिंकी से किस्स करवाकर.

उसके होंठो से निकलकर एक मिठास उसके अंदर जा रही थी और उसे भी लग रहा था की वैसी ही मिठास पिंकी उसके मुँह से खींच भी रही है...
एक हाथ दे और एक हाथ ले...
इस लेन - देन में उसे बहुत मज़ा मिल रहा था.

इसी बीच निशि ने उसकी शर्ट के बटन खोल दिए और उसकी ब्रा में क़ैद मुम्मो को अंदर से पकड़ कर ज़ोर से दबा दिया...

एक आनंदमयी सिसकारी उसके मुँह से निकल पड़ी...
और वो उस आनंद को महसूस करते हुए घास पर लेट सी गयी...
घास में लेटने के बाद उसका सिर तो निशि की गोद में था...
और टाँगो के बीच पिंकी बैठी थी...
ऐसा लग रहा था जैसे आज दोनो मिलकर उसका रेप करने के चक्कर में है..

पिंकी ने अपनी 3 उंगलियाँ नाज़िया के मुँह मे डाली और जब वो अच्छी तरह से गीली हो गयी तो उन्हे नीचे लेजाकर उसकी स्कर्ट में घुसेड दिया...
और जो बात नाज़िया आज तक सबसे छुपाती आयी थी वो आज उन दोनो के सामने आ गयी...
वो बिना कच्छी के स्कूल आती थी हमेशा...

उसकी बिना कच्छी वाली चूत में पिंकी की उंगलिया घुसती चली गयी..

अपनी ही गर्म थूक में भीगी पिंकी की उंगली ने जब उसकी क्लिट को छुआ तो वो हुंकार सी उठी और उसका शरीर उपर हवा में उठने लगा...
जिसे निशि ने अपना मुँह उसके स्तनो पर लगाकर नीचे किया...
बटन खोलने के बाद कब उसकी ब्रा भी नीचे कर दी गयी थी बेचारी नाज़िया को इसका इल्म भी ना हुआ...

अपने शरीर को उन भूखी बिल्लियो से नुचवाती नाज़िया का ऑर्गॅज़म अपनी चरम सीमा पर जा पहुँचा...
और जल्द ही अपनी चूत की पिचकारी से उसने मीठे पानी के फव्वारे निकालने शुरू कर दिए...

''आआआआआआआआआआआअहह......ओह......उम्म्म्ममममममम....''

पिंकी ने बड़ी समझदारी से उसकी स्कर्ट को पहले से ही जाँघो से उपर तक चड़ा दिया था...
ताकि उसके रस में भीगकार स्कर्ट गीली ना हो...
पर जहाँ वो लेटी थी उसके नीचे की घांस चिपचिपी ज़रूर हो गयी.....
अब तो उसमे से जवानी के रस में डूबे फूल उगने वाले थे...

नाज़िया को प्यार का पाठ अच्छे से पढ़ाकर और उसे अपने गेंग मे मिलाकर दोनो काफ़ी खुश थी...

अब पिंकी को अपने इस गेंग की मदद से अपने मिलने वाले मज़े के बारे में सोचना था...
और वो तो पहले से ही डिसाईड था की वो मज़े लाला ही देगा...

इसलिए प्लानिंग करके उन्होने शाम को लाला की दुकान पर मिलने का निश्चय किया..

आज तो शायद लाला और उसके रामलाल को भी नही पता था की उसकी किस्मत में इतना बड़ा सर्प्राइज़ लिखा है.

हमेशा की तरह दोपहर के समय लाला का रामलाल अपना सिर निकाल कर पूरा खड़ा हुआ था...
और आज भी लाला अपना हाथ धोती में डालकर उसे रग़ड़ रहा था..

लाला के लिए तो वही सच्चा दोस्त था...जो उसकी खुशी में हमेशा खड़ा रहता था.

लाला बड़बड़ाता हुआ उससे बाते करने लगा : "अबे हरामखोर...कभी तो शर्म कर लिया कर...शाम होते होते तेरा सजना संवरना शुरू हो जाता है...आज तो सुबह से कोई तितली भी दिखाई नही दे रही....वो दोनो छोरियाँ भी अभी तक आई नही दुकान पर...पता नही कब तक इंतजार करना पड़ेगा...''

बेचारा रामलाल सिर्फ़ 2 बूँद मुँह से निकालने के अलावा कुछ और बोल ही नही पाया..
ऐसे ही लाला अगर उसे रगड़ता रहा तो जल्द ही उसने उल्टी कर देनी थी लाला की धोती में.

पर शायद लाला के दिल की पुकार पिंकी और निशि को सुनाई दे गयी थी....
दोनो अपनी-2 गांड मटकाती हुई उसकी दुकान की तरफ ही आ रही थी.

वो एक जोरदार रगड़ा मारकर रामलाल से बोला : "देख आ गयी वो दोनो हरी मिर्चे...अब तो दोनो को सुराही में उतार लिया है...आज तो तेरी मर्ज़ी चलेगी बेटा...जिसे चाहेगा वही तुझे चूसेगी...पर अब तो ये चूसम चुसाई बहुत हो गयी...जल्द ही इन्हे चुदाई का पाठ पढ़ाना पड़ेगा...''

वो ये बड़बड़ा ही रहा था की दोनो उसके सामने आकर खड़ी हो गयी..

पिंकी ने आते ही पूछा : "कैसे हो ??..''

उसके चेहरे से सॉफ पता चल रहा था की आज वो कैसी शैतानी करने के मूड में है..

लाला : "मैं तो ठीक हूँ ,,,तुम सुनाओ ...''

पिंकी खिलखिलाकर हंस दी और बोली : "अरे लालाजी...मैने आपने थोड़े ही पूछा....मैने तो रामलाल से पूछा...कैसे हो...''

और इस बात पर दोनो सहेलियां एक दूसरे के हाथ पर ताली मारकर हंस दी...
बेचारा लाला खिसियानी हँसी हंसता रह गया....

लाला समझ गया की दोनो ने एक दूसरे को लाला के साथ लिए मज़े के बारे में बता दिया है...
इसलिए अब इस बात को छुपाने का कोई फायदा नही था...
और ये बात लाला को और भी ज़्यादा उत्तेजित कर गयी की अब वो एक साथ दोनो से मज़े ले सकेगा...

कितनी बेशर्मी से पिंकी ने लाला के लंड के बारे में पूछकर उसे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर दिया था...
लाला के लिए पहले से ही उस शेर को अपनी धोती के पिंजरे में संभालना मुश्किल हो रहा था...
पिंकी की इस बात ने उसे और भी भड़का दिया...

लाला भी चालाक था...
उसने उतनी ही बेशर्मी से अपनी धोती को उपर उठाया और खड़े हुए रामलाल को बाहर निकाल कर दोनो के सामने पेश कर दिया

और बोला : "रामलाल के बारे में पूछ रहे हो तो सीधा उससे ही बात कर लो ना...''

दोनो के चेहरे एकदम से लाल पड़ गये....
हालाँकि दोनो को उसे देखने का अपना-2 एक्सपीरियेन्स पहले से ही था
पर एक बार फिर से लाला के लंड को ऐसे अपने सामने खड़ा देखकर दोनो की कच्छियां एकदम से भीग गयी...
निशि ने तो हाथ लगाकर अपनी चूत को रगड़ भी दिया
और सिसकारी मारकर बोली : "हाय लालाजी....ऐसे मत तरसाओ....हमने तो मज़ाक किया था...आप तो जान लेने पर उतारू हो गये...''
 
सच ही था....
लाला के रामलाल को देखकर जान देने का ही मन कर रहा था...
या तो उसे अंदर ले लो वरना ऐसे जीने का क्या फ़ायदा ।

लाला ने उनकी आँखो मे छिपी प्यास देखी तो फुसफुसा कर बोला : "अब ये रोज-2 के छोटे-मोटे खेल बहुत हो गये...असली खेल खेलोगे, तभी मज़ा मिलेगा...और तब तुम्हे पता चलेगा की रामलाल कैसे मज़े देता है...''

चाहती तो वो दोनो भी यही थी...
पर जैसा की उन तीनो ने डिसाईड किया था, अभी तो उसी के हिसाब से चलने का समय था...
क्योंकि उन्हे भी पता था की जितनी ज़रूरत उन तीनो को लाला की है, उतनी ही ज़रूरत लाला को उनकी भी है..

और अभी तो लाला को इस बात का भी पता नही था की नाज़िया भी उनके साथ मिल गयी है...

इधर लाला उन्हे रामलाल के गुण गिनवा रहा था, उधर से नाज़िया उसकी दुकान पर आती दिख गयी..

लाला के चेहरे पर परेशानी के भाव आ गये...
वैसे तो उसे किसी का डर नही था, पर अभी तक जो बात छुपी हुई थी,उसी में फायदा दिख रहा था लाला को...
क्योंकि वो भी जानता था की एक लड़की सब कुछ बर्दाश्त कर सकती है, पर अपनी चूत में जाने वाले लंड का बँटवारा नही..

यही वजह थी की लाला ने पिंकी और निशि को अलग-2 करके पटाया...
ये अलग बात थी की अब दोनो मिलकर उसके सामने खड़ी थी...
और लाला भी जानता था की उन दोनो को अलग रखना मुश्किल काम है...
इसलिए खुद ही अपनी धोती का पर्दाफाश करके उसने बेशर्मी से दोनो को एक ही बार में वो फिल्म दिखा दी जो आजतक एक साथ नही दिखा पाया था दोनो को..

पर नाज़िया के आ जाने के बाद उसके खेल में मुश्किल आ सकती थी...
क्योंकि इन दोनो सहेलियो की बात अलग थी और नाज़िया की अलग..

वो ये सब सोच ही रहा था की नाज़िया लाला के सामने आकर खड़ी हो गयी...

लाला ने झट्ट से धोती नीचे कर दी..
पर उसकी धोती में तंबू बनकर अड़ियल टट्टू की तरह खड़ा ही रहा वो हरामी रामलाल..

उन तीनो ने एक दूसरे को देखकर स्माइल पास की
पर लाला का चेहरा देखने लायक था...
जैसे अंदर ही अंदर उन तीनो के सामने खड़े होने की टाइमिंग को समझने की कोशिश कर रहा हो.

लाला की ये उलझन पिंकी ने आसान कर दी..

वो बोली : "लालाजी...आप घबराओ मत...ये भी अब हमारी दोस्त बन गयी है...इसलिए जो भी होगा, हम एक साथ करेंगे...''

लाला तो ये बात सुनकर भोचक्का रह गया...
कहां तो वो दोनो को एक साथ चोदने की बात सोचकर खुश हो रहा था,
और कहा ये एकदम से छप्पर फाड़कर नाज़िया भी उन्ही के साथ मिल गयी और चुदने को तैयार हो गयी...
3 कुँवारी चुतों के ग्रूप के साथ मज़े लेने वाला लाला शायद पहला इंसान था..
उसे तो खुली आँखों से ही तीनो के नंगे जिस्म सामने खड़े दिखाई देने लगे.

अब तो सभी के पत्ते खुल चुके थे...
सारे पर्दे गिर चुके थे और सभी की झिझक भी दूर हो गयी थी...

इसलिए लाला ने फिर से उतनी ही बेशर्मी से अपनी धोती को उपर उठाया और रामलाल के दर्शन तीनो को एक साथ करवा दिए..

एक बार फिर से पिंकी और निशि की साँसे रुकने जैसी हो गयी...
और इस बार नाज़िया भी उनके साथ थी...
उसका भी वही हाल था..

नाज़िया ने तो अपना चेहरा घुमा कर दूसरी तरफ ही कर लिया...

पिंकी : "नाज़िया, ऐसे शरमाने से तेरा ही घाटा है...क्योंकि लाला से अभी यही बात चल रही थी की आगे बढ़ना होगा ताकि असली मज़े मिल सके...''

असली मज़े यानी लंड का चूत से मिलन...
इस बात ने नाज़िया को अंदर तक गुदगुदा कर रख दिया.

उसने शरमाते हुए वापिस रामलाल को देखा...
और इस बार वो देखती ही रह गयी...
नज़ारा ही इतना सैक्सी था ...
रामलाल का चेहरा अपने ही अंदर से निकले पानी में भीगकर दमक रहा था...
मन तो कर रहा था की अभी काउंटर फांदकर अंदर जाए और उसे चूस डाले..

पर तब तक एक कस्टमर आ गया...
और लाला ने धोती नीचे करके उसका सौदा निपटना शुरू कर दिया..

इसी बीच पिंकी उन दोनो को लेकर एक कोने में जाकर बातें करने लगी..

पिंकी : "भई देखो, लाला ने तो अपने इरादे सॉफ कर दिए है...और शायद अंदर ही अंदर हम सभी भी शायद इसी का इंतजार कर रहे है की कब लाला अपने लंड से हमे जन्नत का एहसास करवाए...''

बाकी दोनो ने हाँ में सिर हिलाया..

पिंकी : "पर मुझे लगता है की उससे पहले हमे थोड़े मज़े और लेने चाहिए लाला से...क्योंकि बाद में तो ये सिर्फ एक ही तरह के मजे मिलेंगे....''

निशि और नाज़िया उसकी बात सुनकर कन्फ्यूज़ से हो गये...

निशि : "मैं समझी नही कुछ....इतने मज़े तो ले चुके है लाला से...अब और कौन से लेने बाकी है...''

पिंकी : "वो तो हमने अलग-2 लिए ना...एक साथ तो नही...हमे पहले लाला के साथ एक साथ मज़े लेने है...यानी चुदाई को छोड़कर सब कुछ...ताकि हम तीनो भी एक दूसरे के सामने खुल जाए और अगली बार जब चुदाई हो तो एक दूसरे का साथ अच्छे से दे सके..''

पिंकी की ये बात नाज़िया को सबसे ज़्यादा पसंद आई...
क्योंकि वही अभी तक अपने आपको असहज महसूस कर रही थी....
ऐसे एक दम से वो कैसे अपने आप को चुदाई के लिए पेश कर दे..
और वो भी उन दोनों के सामने ।

पहले उसकी वो झिझक मिटना भी ज़रूरी थी
जो पिंकी और निशि को देखकर उसे आ रही थी.

इसी बीच लाला भी फ्री हो गया और उन्हे पास बुला कर बोला : "तुम तीनो छोरियां वहां क्या ख़ुसर-फुसर कर रही हो...यहाँ लाला और उसका रामलाल खड़े है तुम्हारी हाँ सुनने के लिए...ताकि कोई अच्छा सा महुरत देखकर कार्यकर्म शुरू किया जा सके...''

लाला का बस चलता तो अभी के अभी तीनो को अंदर लेजाकर अपनी चीनी की बोरियो पर फेला कर लिटा देता और एक-एक करके तीनो की चूत में अपने लंड की गोलियां दाग देता..

पर शाम का वक़्त था
और दुकान पर ग्राहक आते ही रहते थे....
वैसे तो लाला ने कभी भी दुकानदारी को तवज्जु नही दी थी चूत के सामने...
पर उसके लिए लड़कियो की रजामंदी भी ज़रूरी थी ना..

पिंकी, जो अभी तक सब कुछ डिसाईड कर ही चुकी थी, वो बोली : "लालाजी ..यहाँ ये सब करना सही नही होगा...हमारी पहचान का कोई भी यहाँ आ सकता है...आप एक काम करो..अपना काम निपटा कर वही आ जाना...झरने के पास...हम वही मिलते है..''

इतना कहकर बिना कोई और बात किए वो तीनो वहां से निकल गयी...

लाला बेचारा उन्हे जाता हुआ देखकर बुदबुदाता रह गया : "अरे, बता तो देती, सभी आज ही चुदोगी या एक एक करके .... ''

वैसे लाला तो ऐसे बातें कर रहा था जैसे सुपरमैन हो, ऐसी उम्र में एक कुंवारी लड़की ने ही उसे दिन में तारे दिखा देने थे, तीनो एकसाथ आयी तो पता नहीं क्या होगा, पर जो भी था, लाला को एक बार ट्रायी जरूर करना था ।

झरने के पास पहुंकते-2 चार बज गये....
वैसे भी इस तरफ कोई आता नही था...और आये भी तो दूर से देखा भी जा सकता था, क्योंकि ये इलाका थोड़ी ऊंचाई पर था. इसलिए वहां खुलकर कुछ भी किया जा सकता था.

और पिंकी तो हमेशा से ही नेचर की दीवानी रही है....
उसका बस चले तो अपनी पहली और हर चुदाई भी वो इस तरह जंगल में , झरने में ..पहाड़ो में ही करवाए...
एक अलग ही तरह का रोमांच महसूस करती थी वो ऐसी जगहों में आकर.

झरने से गिरते पानी को देखते ही उसके अंदर का जंगलिपन फिर से बाहर आ गया और उसने आनन फानन में अपने सारे कपड़े निकाले और नंगी हो ली..

निशि के लिए तो ये आम बात थी पर नाज़िया उसे ऐसी हरकत करते देखकर हैरान रह गयी...
की कैसे एक जवान लड़की बिना किसी शर्म के अपने कपड़े उतार कर ऐसी जगह पर नंगी हो सकती है...

पर फिर उसे उसका ये करना अंदर ही अंदर अच्छा भी लगा...

लड़कियो को ऐसा ही होना चाहिए...
बिना डर के जीने की आज़ादी होनी चाहिए...
जो मन में आए वो कर देना चाहिए...
अपने अरमानो को कभी दबा कर नही रखना चाहिए...
पिंकी की देखा देखी निशि ने भी अपने कपड़े उतारे और पिंकी के साथ जाकर खड़ी हो गयी....
दोनो के नंगे शरीर देखकर नाज़िया को कुछ-2 हो रहा था.

पिंकी : "अरे नाज़िया, मैने कहा था ना,हमारे ग्रूप में रहना है तो ये शर्म-हया पीछे छोड़नी पड़ेगी...''

लाला के सामने तो उसे नंगा होने मे ज़्यादा टाइम नही लगा था...
पर इन दोनो के सामने वो सकुचा रही थी..

निशि : "रहने दे तू...अभी लाला आएगा ना , वही इसका चीरहरण करेगा अच्छे से...''

पिंकी ने फुसफुसा कर उसे कहा : "लाला तो जब आएगा , तब आएगा, उससे पहले तो मुझे इससे थोड़े मज़े लेने है...''

निशि तो शुरू से ही जानती थी की पिंकी का दिल आया हुआ है उस मुसलमाननी पर...
जब तक वो उसकी कुँवारी चूत नही चूस लेगी, उसे चैन नही मिलने वाला था..

और उसे अपने खेल में शामिल करने के लिए पिंकी के पास एक बहुत अच्छा प्लान था.

पिंकी नाज़िया के करीब गयी और अपने हाथ से उसके गालो को सहलाने लगी...

एक लड़की से मिल रहा इस तरह का स्पर्श उसे अंदर तक सुलगा रहा था..
हालाँकि उसने कभी इस तरह से मिलने वाले मज़े के बारे में नही सोचा था..
पर पिंकी का हाथ लगने मात्र से ही वो समझ गयी की ये इतना भी बुरा नही होने वाला.

और उपर से पिंकी के नंगे जिस्म को इतने करीब से देखकर उसे भी कुछ-2 हो रहा था...
भले ही आज से पहले ऐसा कुछ नही किया था पर आज ना जाने क्यो उसे उसके नंगे बूब्स को देखकर उन्हे चूसने का मन कर रहा था..

पिंकी की नज़रें जब उसकी नज़रो का पीछा करते हुए अपने बूब्स तक गयी तो वो मुस्कुरा दी और बोली : "अच्छे लग रहे है ना....?''

उसने बड़ी ही मासूमियत से हाँ में सिर हिला दिया..

पिंकी : "तुम्हे पता है...इन्हे जब होंठों और दांतो की मदद से चूसा जाता है तो इनमे से मीठा पानी निकलता है...और जिसका निकलता है उसे भी बहुत मज़ा मिलता है..और जो पीता है उसे भी...''

पिंकी की ये जानकारी ने उसकी चूत में खलबली सी मचा कर रख दी...

वो फुसफुसती हुई सी आवाज़ में बोली : "प..प...पर...ये तो....ये तो....जब ..कोई मर्द करे....तब अच्छा लगता है ना...''

अपनी छातियो को लाला से नुचवाने के बाद ये बात तो उसे भी पता थी की उन्हे चुसवाने में काफ़ी मज़ा मिलता है...
पर एक लड़की को दूसरी लड़की के मुम्मे चूसने में भी वही मज़ा मिलता है, ये बात शायद उसे हजम नही हो रही थी..
 
पिंकी ने उसकी शंका का समाधान करते हुए कहा : "अरी हाँ पगली...लड़कियो को तो पता रहता है की इन्हे कैसे चूसना है क्योंकि वो खुद भी तो मर्द से चुस्वाते वक़्त यही सोचती है की हाँ इतनी ज़ोर से ठीक है...इतना काटा जाए तो मज़ा है...पर मर्द तो साले कुत्ते होते है...उन्हे तो ये मुम्मे एक बार चूसने को मिल जाए तो ऐसा लगता है जैसे वो इन्हे फाड़कर खा ही जाएँगे...इसलिए लड़कियों को अंदाज़ा रहता है की कितनी तेज चूसना है और कैसे ....''

नाज़िया को उसकी बात सही लगी....
लाला ने जब उसके नन्हे कपोलो को चूसा था तो उन दांतो के निशान 3 दिन तक रहे थे उसकी छाती पर...
उस वक़्त तो उनका मर्दन करवाने में उसे भी काफ़ी मज़ा आया था...
पर बाद में जब रात भर दर्द होता रहा था तो बेचारी को नींद भी नही आई थी...

उसकी चुप्पी को हाँ मानकर पिंकी ने उसके सिर के पीछे अपना हाथ लगाया और उसे धीरे-2 अपनी छाती की तरफ खींचने लगी..

और वो भी उसके जादू में फंसकर खींचती चली गयी....
और अंत में जब उसका चेहरा उसके मुम्मे के बिल्कुल सामने आया तो पिंकी का गुलाबी निप्पल उसे गुलाब जामुन जैसा रसीला दिखाई देने लगा....

ऐसा लग रहा था जैसे उस पिंक दाने में से चाशनी निकल कर बाहर आ रही है...
और उसने अगर उसपर मुँह लगाकर उसे चूस नही लिया तो वो सारी चाशनी वेस्ट हो जाएगी...

बस , फिर क्या था, नाज़िया के रसीले होंठ अपने आप खुलते चले गये और उसने पिंकी के पिंक निप्पल को मुँह मे लेकर ज़ोर-2 से चूसना शुरू कर दिया...

और जैसा की पिंकी ने उसे बताया था..
उसमें से एक मीठा तरल पदार्थ निकल कर उसके मुँह में जाने लगा..

उसके हाथ में अपना दूसरा मुम्मा पकड़ा कर उसने उसे भींचने को कहा ताकि उसमे हो रहे मीठे दर्द को भी आराम मिले...

पिंकी : "देखा...मज़ा आ रहा है ना.....बस...अब ऐसे ही चूसती रहो...दबाव उतना ही रखना जितना तुम चाहती हो की तुम्हारे बूब्स पर हो, जब कोई तुम्हे इस तरह से प्यार करे...''

नाज़िया को उसकी बात अब अच्छे से समझ में आ चुकी थी....
वो अपने होंठो और दांतो से उसके निप्पल को उतना ही चुभला और दबा रही थी जितना उसे अपने साथ पसंद था...
और इसका असर साफ़ देखा जा सकता था पिंकी पर...
वो नंगी होकर किसी नागिन की तरह लहरा रही थी....
सिसकारिया मारकर उसे अपनी छाती पर कभी दांये और कभी बाए निप्पल पर घुमा रही थी...

और ऐसा करते-2 कब उसने उसकी टी शर्ट को पकड़ कर उतार दिया नाज़िया को पता भी नही चला....
और ब्रा को भी एक हल्के क्लिक से निकाल फेंका...
अब वो भी उपर से पूरी नंगी थी...

नाज़िया ने पिंकी के मुम्मे फिर से चूसने शुरू कर दिए..

नाज़िया के सुडोल मुम्मो को देखकर पिंकी के साथ-2 निशि के मुँह में भी पानी भर आया...

वो भी उनके करीब आ गयी और उसने अपना मुँह नाज़िया के कड़क मुम्मे पर लगाकर उसे चूसना शुरू कर दिया...

अपनी छाती पर किसी लड़की का पहला स्पर्श उसे अंदर तक गुदगुदा गया...
पर उसे मज़ा बहुत मिला...
और उस मज़े को पिंकी ने दुगना कर दिया जब उसने अपनी छाती से नाज़िया को पीछे हटाया और खुद उसकी छाती को चूसने लगी...

अब आलम ये था की नाज़िया भारी दोपहरी में अपनी स्कूल की सहेलियो से अपनी दोनो छातियो को चुस्वा रही थी और ज़ोर-2 से सिसकारिया मार रही थी...

''आअह ......हाय अल्लाह........मर गयी......उम्म्म्ममममममममम..............मज़ा आ रहा है बहुत........ अहह....... हाय अम्मी.......... मर जाउगि ....ऐसे ही चूसती रही तुम दोनो तो.....''

उन दोनो ने एक दूसरे की आँखो में देखा और मुस्कुरा दी....

पिंकी ने जैसा सोचा था, वैसा ही मीठास लिए था नाज़िया का नशीला बदन...

एकदम कच्ची शराब जैसा नशा था उसमें..

उसका हाथ खिसककर उसकी चूत पर गया और उसे भी भींच दिया पिंकी ने...

अपने गोडाउन पर हमला होते देखकर वो तो बदहवास सी हो गयी....
आज जितना पानी तो उसने आज तक नही निकाला था अपनी चूत से....
उसकी जीन्स भी गीली हो गयी थी उस रस में डूबकर...
उसे निकाल देना ही सही लगा पिंकी को...

और जब जंगल की ठंडी हवा उसके नंगे कुल्हो से टकराई तो वो अपने पंजो पर खड़ी होकर उस एहसास को महसूस करते हुए थरथरा सी उठी...

ऐसा नशा तो उसे आज तक महसूस नही हुआ था....
शायद शराबी भी इसी तरह के सुरूर में डूब कर मज़े लेते होंगे...
उसे तो बिना शराब के ऐसा मज़ा मिल रहा था...
सच में , इस सैक्स के खेल में उसे बहुत मज़ा मिल रहा था.

जब वो पूरी नंगी हो गयी तो पिंकी उसे लेकर झरने के नीचे आ गयी....
एक साथ तीनो पर ठंडे पानी की बौछारे पड़ने लगी...
उन तीनो के गर्म जिस्मो पर पानी भाप बनकर उड़ने लगा...

पानी की बूंदे तीनो के जवान और नशीले जिस्मो को चूमती हुई चूत को टच करके नीचे गिर रही थी...
वो पानी सीधा पास के खेतो में सिंचाई के लिए जाता था...
और एक बात तो पक्की थी आज, उस मिठास लिए हुए पानी से उगने वाली फसल के इस साल अच्छे भाव मिलने वाले थे किसानो को..

पिंकी ने नाज़िया को एक चट्टान पर लिटा दिया और खुद नीचे होकर उसकी नाभि वाली हिस्से को चूसने लगी...

नाज़िया ने उसके सिर को पकड़कर उपर खींचना चाहा पर वो अपनी जीभ से उसकी नाभि वाले हिस्से को कुरेदती रही....
बड़ी अजीब सी गुदगुदी हो रही थी उसके पेट में...
और लाख कोशिश के बाद भी जब पिंकी उपर आने को तैयार नही हुई तो उसने उसे नीचे की तरफ धकेल दिया...
और यही तो पिंकी भी चाहती थी....
उसे भी काफ़ी देर से नाज़िया की देसी चूत की महक अपनी तरफ खींच रही थी....
नाज़िया ने अपनी चूत के बाल सॉफ नही किए थे...
एक घने बालो का छत्ता सा था उसकी चूत पर...

आज तक उसने सिर्फ़ निशि की चूत ही चूसी थी, जो हमेशा सॉफ रहती थी....
इस तरह से बालो वाली चूत को चूसने का उसका पहला मौका था....
पर बालो की वजह से उसकी चूत थोड़ी और भी रसीली दिख रही थी..
कारण था उसकी चूत से निकल रहा रस और उपर से गिर रहा पानी, जो उन बालो में मोती की बूंदे बनकर अटक गया था...
और वो चमक रही बूंदे, काले बालो के अंदर ऐसी लग रही थी जैसे काले गगन पर तारे टिमटिमा रहे हो...

और उसने अपनी जीभ से उन तारो को समेटना शुरू कर दिया....
कुछ तो फीके तारे थे...यानी पानी की बूंदे
और कुछ मीठे तारे थे यानी उसकी चूत से निकले रस की बूंदे.

और एक बार जब उसे उन मीठी बूँदो का स्वाद चड़ा तो वो पागल सी होकर उन्हे चूसती चली गयी....
अपनी जीभ के फावड़े से खोद-खोदकर उसने उसकी चूत से हर वो बूँद निकाल ली जो उस मिठास में डूबी हुई थी...

इसी बीच निशि ने उसके होंठो पर अपने होंठ लगाकर उसे चीखने से रोक रखा था....
पिंकी की जीभ लगने से जितनी भी सिसकारिया वो ले रही थी या चीखने का प्रयास कर रही थी, निशि ने अपने होंठो से उसके होंठो को दबाकर वो सब रोक रखा था...

जंगल मे मंगल का प्रोग्राम अपने चरम पर था और अचानक थर -2 काँपते हुए नाज़िया की कुँवारी चूत से छम-2 करते हुए सुनहरा पानी निकलना शुरू हो गया...
जो सीधा उसकी चूत चूस रही पिंकी के चेहरे पर गिरा....
ठंडक मे गर्मी का एहसास मिल गया उसे...

और अपना चेहरा अच्छे से सॉफ करके वो उपर आई और निशि के साथ ही अंदर घुसकर वो भी उसके होंठो पर टूट पड़ी....
एक साथ तीनो एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे...
एक दूसरे के जिस्मो पर उनके हाथ फिसल रहे थे....

पिंकी ने नाज़िया के हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रख दिए...
नाज़िया समझ गयी की वो क्या चाहती है...
उसने अपनी उंगलिया उसकी चूत में डाल कर उन्हे मसलना शुरू कर दिया...
पिंकी तो सातवे आसमान पर जा पहुँची...
उसने नाज़िया के सिर को पकड़कर नीचे धकेलना शुरू कर दिया...
उसने भी मना नही किया...
कारण सॉफ था, पिंकी ने भी तो उसकी चूत चूसी थी और अब वो उससे अपनी चूत चुसवाना चाह रही थी..

और जैसे ही नाज़िया के गुलाबी होंठो ने पिंकी की चूत को टच किया....
उसकी चीख पूरे जंगल में गूँज गयी....

इसी पल के लिए तो वो ये सब पापड़ बेल रही थी....
नाज़िया से अपनी चूत चुसवाने के लिए वो कितने टाइम से तड़प रही थी...
आज उसके मन की इच्छा पूरी हुई थी.....
वो आँखे बंद करके अपनी चूत चुस्वाई का मज़ा लेने लगी.

''आआआआआआआआआहह....ओह नाज़िया..............मेरी ज़ाआाआआआं......यस्स........ ऐसे ही चूस इसे......साअली ने बहुत परेशान कर रखा है आजकल..... एक तो वो लाला....उपर से उसका वो रामलाल...... मेरी मुनिया को चैन से रहने ही नही देते...... हमेशा पनीयाती रहती है..... और जब से तुझे देखा है..... तेरे नाम से भी पनिया सी जाती थी..... आज इसे पूरा चाट ले.....मिटा दे इसकी प्यास......... ख़त्म कर दे इसके अंदर का पानी..... अहह...... मरररर गयी रे......... अहह''

और उसकी मुनिया ने तुरंत ही गाड़े और रंगहीन पानी से उसके मुँह को भर दिया......
ये स्वाद तो लाला के लंड से निकले पानी से भी अच्छा लगा नाज़िया को....
इसलिए चपर -2 करके वो सारा पानी पी गयी...

दोनो ने एक दूसरे जो झाड़कर एक दूसरे का पानी पिया और तृप्त भी हो गयी....
पर इन सबमे वो दोनो बेचारी निशि को भूल ही गयी थी...
जो अपनी तरफ से दोनो को संतुष्ट करने के लिए हर तरह की सर्विस बीच-2 में दे रही थी.

उन्होने एक दूसरे को देखा और फिर निशि को उस चट्टान पर लिटा दिया....
पिंकी ने उसकी एक टाँग अपने कंधे पर रखी और नाज़िया ने दूसरी टाँग को अपने कंधे पर रखा...
निशि की रस में डूबी चूत उन दोनो के चेहरे के सामने थी..

दोनो ने एक साथ अपनी जीभ उसकी उस रसीली चूत से छुआ दी....

आज तक एक जीभ से ही पागलो की तरहा चीख मारने का रिकॉर्ड था उसके नाम...
एक के साथ दूसरी जीभ ने तो उसके अंदर एक ज़लज़ला सा ला दिया...
वो गला फाड़कर चीख उठी...

और दोनो के रेशमी बालो को बेदर्दी से पकड़कर उसने अपनी चूत पर ज़ोर से रगड़ दिया....
रगड़ क्या दिया उसे मूली की तरह घिस्स सा दिया अपनी चूत पर...
और उनकी जीभ और दांतो के खुरदुरेपन के एहसास से उसकी बाहर निकली हुई क्लिट पर जो प्रभाव पढ़ रहा था, ये तो सिर्फ़ वही जानती थी....
और जैसा की नाज़िया की चूत से गोलडन पानी निकला था, उसकी चूत ने भी भरभराकर ढेर सारा सोना बाहर उगल दिया....
जिसने उन दोनो के चेहरों को सुनहरे रंग से ढक कर चमका सा दिया...

"आअह ....भेंन की लोड़ियों .......क्या चूसती हो यार तुम दोनो.....उम्म्म्ममममम......... मज़ा आ गया..........और ज़ोर से चूसो......अंदर तक.....''

उत्तेजना में भरकर निशि के नन्हे बूब्स एकदम पत्थर जैसे हो चुके थे

पिंकी जानती थी की उसे जल्द झाड़वाना आसान काम नही है....
उसका सिर्फ़ एक ही इलाज है...
और वो है उसकी बाहर निकली हुई क्लिट...
उसकी चूत से निकल रहा रसीला पानी उसे ललचा रहा था..

उसने उसकी चूत के दाने को मुँह मे भरा और उसे जोरो से चूसना शुरू कर दिया....
अपने दांतो से उसने उसके दाने को चुभलाया भी...
उसे चबाया भी....

ऐसा करते हुए नाज़िया बड़े गोर से उसे देख रही थी...

शायद ऐसी ट्रैनिंग उसे कही और नही मिलने वाली थी...

और जल्द ही उसकी चूत से वो तनाव उत्पान होने लगा जिसके लिए पिंकी इतनी मेहनत कर रही थी.....
और फिर उसने भी अपने अंदर संभाल कर रखा हुआ रज़ कराहते हुए पिंकी के चेहरे पर फेंकना शुरू कर दिया....
पिंकी ने नाज़िया को भी अपने करीब खींच लिया और उसे भी उस स्वादिष्ट और रसीले जूस का स्वाद चखाया...

एक से बढ़कर एक था उन दोनो की चूत का स्वाद...
तभी शायद दुनिया भर के मर्दो को चूत चूसना इतना पसंद है..

और जब थक हारकर वो पीछे हटी तो एकदम से अपने पीछे खड़े लाला को देखकर सहम सी गयी..

जो ना जाने कब से उनके पीछे आकर खड़ा हुआ था और उनकी रासलीला देखकर अपने रामलाल को मसल रहा था...

लाला की हालत इस वक़्त उस मछुवारे की तरह थी जिसके जाल में इस वक़्त 3-3 जलपरियां फंसी हुई थी...
और वो भी पूरी नंगी...
बस उसे ही डिसाईड करना था की अपना लंड वो किसकी चूत में पहले पेले.
 
लाला ने देखते ही देखते अपनी धोती को निकाल फेंका...
और जैसा की पूरा गाँव जानता था और अब तक ये लड़कियां भी समझ ही चुकी थी, उसने अंदर कुछ भी नही पहना हुआ था...

अंदर से सांड़ की भाँति हुंकारता हुआ रामलाल एकसाथ 3 नंगी जवानियां देखकर बेकाबू सा हो रहा था....
होता भी क्यो नही...
55 सालो में पहली बात उसने ऐसा नज़ारा देखा था, जहाँ 20 साल से भी कम उम्र की 3 कच्ची कलियाँ उसके सामने नंगी बैठी थी...

हर एक के अंगो को लाला वासना से भरी नज़रों से देख रहा था....
पिंकी के मुम्मो को देखता तो नज़रें फिसल कर नाज़िया की छाती पर चली जाती...
नाज़िआ को देखता तो निशि की फिसलन से भरी चूत उसे अपनी तरफ खींच लेती...
एक साथ 3 को मेनेज करना आसान काम नही होता किसी के लिए भी...

पर लाला जानता था की उनके साथ कैसे और क्या करना है..

उसने अपना कुर्ता भी उतार दिया ताकि अब उसके और उन जवानियो के बीच कोई अवरोध ना रहे.

लाला का बलिष्ट शरीर और लंड देखकर नाज़िया की रूह तक काँप उठी...
उसके जैसी कमसिन चूत को वो किस अंदाज से चोदेगा, ये सोचकर ही उसकी टांगे काँप रही थी...

लाला ने सबसे पहले उसी की तरफ रुख़ किया...
क्योंकि इस ग्रूप में वही थोड़ी डरी हुई सी लग रही थी.

लाला उसके करीब गया...
उसके कंधे को पकड़ कर उसे उपर उठाया और उसके नंगे बदन को अपने सीने से लगाकर चिपका लिया...

पानी मे भीगी नाज़िया का योवन जब लाला ने अपनी भुजाओ में दबाकर पीसा तो नाज़िया के हर अंग से चटकारे निकालने लगे..
दोनो के शरीर में फंसी हवा के बुलबुले निकलने लगे हर तरफ से...
लाला को तो ऐसा लगा जैसे कोई रेशम की रज़ाई लपेट ली है उसने...
ऐसा कोमल एहसास सिर्फ़ और सिर्फ़ कच्ची कली ही दे सकती है.

लाला ने उसके कूल्हे पकड़ कर मसलना और रामलाल ने उसकी चूत पर अपना चेहरा रगड़ना शुरू कर दिया.

नाज़िया के मुँह से और भी भयंकर वाली सिसकारियां निकलने लगी...
कुछ देर पहले उसकी चूत चाटकर जो मज़ा पिंकी ने दिया था, उससे अधिक मिल रहा था इस वक़्त नाज़िया को...
और लाला की बाँहों में सिसकते-2 उसने खुद ही अपने होंठो को लाला के मुँह में ठूस दिया और उनका गला पकड़ कर ऐसे झूल गयी जैसे लाला अपनी पोती को सैर पर ले जा रहा हो.

लाला ने उसके होंठो की सारी रसमलाई चूसनी शुरू कर दी....
एक-2 चुप्पे में लाला उसके मुँह से 10 एम् एल का रस निकाल कर निगल रहा था...
ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही उसने अंदर से खाली हो जाना था...
इसलिए उसने लाला का सिर पकड़ कर उसे नीचे धकेलना शुरू कर दिया...
अपनी छाती की तरफ.

लाला को और क्या चाहिए था...
इन नन्हे-2 अमरूदों को एक ही बार में मुँह मे भरकर चूसने का अपना ही मज़ा होता है...
लाला ने भी वही किया...
अपना विशाल मुँह खोलकर उसने जब नाज़िया के दाँये मुम्मे को अंदर निगला तो बेचारी उछलकर उसकी गोद में जा चढ़ी ...
पर अपनी लाख कोशिश के बावजूद वो लाला को अपनी छाती पूरी मुँह में लेने से नही रोक पाई...
और वो रोक इसलिए रही थी की ऐसा करवाने में उसे अजीब सी गुदगुदी हो रही थी...
अपने निप्पल को कटवाना अलग बात थी..
पर पूरा मुम्मा लाला के मुँह में घुस्वाना दूसरी बात.

''आअह्ह्ह अहह....... उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ लालाजी....... धीईरए....... थोड़ा थोड़ा ..... चूसो ना............. उम्म्म्ममममममममममम..... पूरा नही रे...... अहह...सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... काटो नही ना.......... उम्म्म्ममममममम''

और ये सब देखकर पिंकी और निशि का जो हाल हो रहा था , उसे बताने की ज़रूरत नही थी...

और पिंकी जानती थी की लाला को अगर ना रोका गया तो उनका नंबर ही नही आएगा...
इसलिए पिंकी ने आँखो का इशारा किया और निशि उसके साथ आगे बढ़कर लाला से लिपट गयी....
एक तरफ से पिंकी और दूसरी तरफ से निशि..
लाला के शरीर पर चारों तरफ से नंगी तितलियों ने हमला कर दिया था.

ऐसा लग रहा था जैसे पुराने बरगद के पेड़ पर नंगी अप्सराएं आकर लिपट गयी है....
तीनो एक से बढ़कर एक थी...
हर किसी की चूत में से गर्म हवा के भभके निकलकर लाला को झुलसा रहे थे...

और लाला जैसा खुशकिस्मत इंसान इस वक़्त पुर गाँव में तो क्या, पूरी दुनिया में नही हो सकता था..
वो कभी पिंकी को चूमता तो कभी निशि को....
एक हाथ से वो नाज़िया के मुम्मे मसलता तो दूसरे से पिंकी के...
और तीनो इस वक़्त अपने पुर शरीर को लाला के बदन से रगड़कर अपना इत्र उसके नाम लिखने में लगी थी...
आज के बाद लाला के बदन से महीनो तक उन तीनो के जिस्मो की खुश्बू आने वाली थी, बशर्ते लाला एक महीने तक नहाए नही...

लाला ने कल-2 बहते पानी के किनारे उन्हे एक बड़ी सी चट्टान पर बिठा दिया और उनकी टांगे खोल दी...
तीनो इतनी समझदार तो थी की एक ही पल में जान गयी की उनके साथ क्या होने वाला है...

लाला ने अपनी अजगर जैसी लपलपाती हुई जीभ से उनकी चुतों को एक-2 करके डसना शुरू कर दिया...
जिसकी चूत पर भी लाला की जीभ लगती वो सुलग उठती....
एक सिसकारी मारकर वो लाला के सर के बाल पकड़कर उसे अपनी चूत के अंदर खींच लेती.

पिंकी : "अहह...... उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ लालाजी....... क्या चूसते हो आप ......... मन करता है पूरी उम्र यही बैठी रहूं और आपसे अपनी चूत चुसवाती रहूं .....''

पर लाला का चंचल दिल जल्द ही वहां से निकलकर अगले शिकार की तरफ बढ़ जाता...
निशि की चूत का भी यही हाल हुआ जब लाला ने उसकी चूत के दाने को मुँह में भरकर चूसा ।

''उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ........ क्या तरीका है आपका लालाजी...... हेयययययय ....................अब तो सहन नही होता...... पूरा काम कर ही दो आज लालाजी...... कर ही दो....''

पर लाला ने उसकी गुहार पर भी गोर नही किया और नाज़िया की जाँघो मे अपना सिर घुसा कर वाहा की दारू पीने लगा
 
नाज़िया : "हाय ......या मेरे खुदा........ये लाला के मुँह में कैसा जादू है.... मैं तो मदमस्त हो रही हूँ ..... उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़....अम्म्मी......ये लाला तो मुझे मार ही डालेगा....''

ऐसा करते-2 लाला ने तीनो की चुतों से देसी शराब चखी ...
पर उन्हे झड़ने नही दिया....
वैसे भी लाला देख ही चुका था की वो तीनो उसके आने से पहले क्या कर रही थी.....
एक बार और उन्हे झाड़ दिया तो वो आगे के खेल के लिए तैयार नही रह पाएगी...

इसलिए तीनो की चूते थोड़ी-2 चाटकर वो उनके सामने खड़ा हो गया...
एक बार फिर से रामलाल को इतने करीब से देखकर तीनो के मुँह में पानी आ गया और वो एकसाथ ही उसपर टूट पड़ी...

किसी के हिस्से में लंड आया तो किसी के हिस्से में बॉल्स आयी
नाज़िआ सबसे छोटी थी, उसके हिस्से में लाला की गांड आयी .

लाला तो बदहवास सा हो गया..
ऐसा लगा जैसे 3 बड़ी मछलियो ने उसके दोस्त रामलाल पर हमला कर दिया है और अपने पैने दांतो से उसे कुतर रही है...
चूस रही है...
सक कर रही है...

पर फिर भी उसे मज़ा बहुत मिल रहा था..

वो तीनो के रेशमी बालो से उन्हे कंट्रोल करता हुआ अपना लंड चुसवा रहा था...

और चुस्वाते हुए वो ये भी सोच रहा था की आज वो इस खेल से आगे बढ़कर ही रहेगा...

जैसा की उसने हमेशा से सोच रखा था, की पिंकी और निशि को एक साथ फँसाकर उन्हे नंगा करके चोदेगा ...
पर ये वो भी जानता था की ऐसी उम्र में वो एक ही कच्ची कली को ढंग से चोद पाएगा..
और यहा तो अब दो नही तीन -2 कुँवारी चूते उसके सामने थी....
बस वो यही सोच रहा था की पहले वो किसे चोदे ।

और इस दुविधा को नाज़िया ने आसान कर दिया...

वो लाला के मोटे लंड को चूसती हुई बोली : "ओह्ह्ह लालाजी .....अब सब्र नही होता.....प्लीज़ इसे मेरी चूत में डाल दो....जैसे अम्मी को चोदा था, वैसे ही चोदो मुझे भी.....अहह''

नाज़िया के मुँह से ये बात सुनकर पिंकी और निशि भी हैरानी से उसकी तरफ देखने लगी...
जैसे कह रही हो की देखो तो ज़रा, ये कल की आई लोंड़िया हमसे पहले लाला के लंड से चुदना चाहती है..

पर अंदर ही अंदर उनके मन में जो लाला के लंड से चुदने से होने वाले दर्द का डर था, वो भी उन्हे ऐसा करने से रोक रहा था...
नाज़िया में पता नही कहां से इतनी हिम्मत आ गयी थी की वो खुद ही चुदने को बोल रही थी...

इसलिए नाज़िया की बात सुनकर उन्हे यही सही लगा की आज के लिए नाज़िया को ही चुदवा लेना चाहिए लाला से...
ताकि पता तो चल सके की लाला का लंड जब कुँवारी चूत के परख़च्चे उड़ाता है तो कितना दर्द होता है...
उसकी चुदाई देखकर कुछ सीखने को ही मिलेगा उन्हे..
ताकि अपनी चुदाई के वक़्त वो दोनो थोड़ी बहुत एहतियात बरत सके...

लाला ने पिंकी और निशि को देखा तो उन दोनो ने भी अपनी स्वीकृति देकर लाला को नाज़िया की चुदाई करने के लिए उकसा दिया...

बस , फिर क्या था...
लाला की आँखे चमक उठी....

उसने आव देखा ना ताव, नाज़िया को लेकर समतल ज़मीन पर आ गया और 2-4 बड़े से केले के पत्तो को बिछाकर उसपर लेट गया...
बिस्तर होता तो शायद लाला का आसन दूसरा होता..
पर यहा जंगल में यही सही लग रहा था लाला को...
वो ज़मीन पर लेट गया और नाज़िया को अपने उपर आने को कहा...

नाज़िया ने बोल तो दिया था चुदने को पर उसकी भी अंदर से फट्ट रही थी...
पर उसे भी पता था की आज नही तो कल उसे लाला के लंड को अंदर लेना ही है...
वरना वो मर जाएगी...

पर वो ये नही जानती थी की लाला के लंड को लेकर भी वो मरने जैसी ही होने वाली थी...

लाला के दोनो तरफ अपने पैर रखकर वो खड़ी हुई तो उसके घुटने तक तो रामलाल आ रहा था ...
जो इस बात को साबित कर रहा था की वो किसे अपने अंदर लेकर क्या हालत होने वाली है आज उसकी...

खैर, जब ओखली में सिर दिया तो मूसल से क्या डरना..
ये सोचकर नाज़िया ने उपर वाले का नाम लिया, अपनी अम्मी का चुदाई करवाते हुए मस्ती भरा चेहरा याद किया और एक ही झटके में लाला के लंड पर बैठ गयी...

उसे लगा था की वो बैठेगी और वो लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर घुस जाएगा एक ही बार में ...
पर वो नादान ये नही जानती थी की एक नन्ही सी चूत में जब इतना मोटा बाँस जैसा लंड जाता है तो क्या होता है...
वो उसकी चूत के मुहाने पर ही अटक गया...
बेचारी के चेहरे पर हल्का दर्द था पर वो समझ नही पा रही थी की अब करे तो क्या करे...

लाला ने उसकी परेशानी हल कर दी...
पहले तो लाला ने अपने लंड पर ढेर सारी थूक मली...
और फिर उसकी चूत को फेलाकर जब अपने लंड पर लगाया तो एक ही बार में लाला का सुपाड़ा अंदर घुस गया...
नाज़िया के लिए ये एहसास ऐसा था जैसे कार का गियर उसकी चूत में घुसा दिया हो किसी ने...
इतना मोटा सुपाड़ा था लाला के रामलाल का..

पर खेल तो अभी शुरू हुआ था....

लाला ने उसकी पतली कमर पर हाथ रखा और उसे एक ही झटके में नीचे खींच लिया...
रामलाल उसकी चूत की धज्जिया उड़ाता हुआ फक्क देनी से अंदर घुसता चला गया...

और बेचारी नाज़िया की चीख पूरे जंगल में ऐसी गूँजी जैसे किसी हिरनी को शेर ने उसकी गर्दन से पकड़कर दबोच लिया हो...

लहू की एक गर्म पिचकारी ने लाला के लंड का राज्याभिषेक कर दिया....
एक और कुँवारी चूत पर रामलाल के जुल्मो की कहानी लिखी जा चुकी थी...

उसके बाद तो ना ही लाला रुका और ना ही उसका रामलाल..

लाला ने उसे अपने उपर लिटा कर उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया और उसकी गांड पर अपने हाथ लगाकर उन्हे मसलते हुए जब उसने पीछे से धक्के मारने शुरू किए तो नाज़िया अपने होश खोती चली गयी...
दर्द की तेज लहरो ने उसका होश ही छीन लिया था...
वो बेजान सो होकर लाला के उपर निढाल सी हो गयी...
पर लाला के लिए तो ये आम बात थी...
 
मतलब, वो जानता था की उसके लंड का इतना तो आतंक है ही की पहली बार में लड़की का बेहोश होना आम बात थी उसके लिए...
और लड़की उसकी पोती की उम्र की हो तो ये होना तय ही है..

पर जल्द ही लाला के रेलगाड़ी जैसे धक्को ने उसे झंझोड़ कर फिर से होश में ला दिया....
इस बार नाज़िया को कुछ फील ही नही हो रहा था...
उसका पूरा जिस्म सुन्न सा हो गया था...
बस उसे लाला का हिलता हुआ शरीर ही दिख रहा था...
ना तो अपना दर्द महसूस हुआ और ना ही कोई मज़ा..

पर धीरे -2 जब वो सुंनपनं गया तो उसके शरीर में गुनगुनाहट सी होने लगी...
एक साथ हज़ारो चींटियां रेंगने लगी उसके बदन पर...
और मस्ती भरी चिंगारियां निकलने लगी उसकी चूत से....

और तब जाकर उसने अपना मुँह एक बार फिर से खोला...
पर इस बार चीख मारने के लिए नही, बल्कि सिसकारी मारने के लिए..

''आआआआआआआआआआअहह लालाजी...... उम्म्म्मममममममममममममममममममममममममम..... मज़ा आ गया........ उफफफफफफफ्फ़ तो ये होती है चुदाई...... हे........ तभी अम्मी को इतना चस्का लग गया है इसका...... म्*म्म्ममममममम...... अब तो मुझे भी लगेगा.... लालाजी....... रोज चोदना मुझे...... जहां मर्ज़ी.... जैसे मर्ज़ी..... पर चोदना ज़रूर........ अब तो ये मज़े रोज लेने है मुझे....... रोज......''

नाज़िया का ये वाला रूप देखकर पिंकी और निशि के चेहरों पर भी थोड़ी हँसी आई...
वो तो काफ़ी देर से उसकी चूत को फटता देखकर डर सी गयी थी...
पर बाद में मिलने वाले इस मज़े को देखकर वो समझ गयी की पहली बार में जो होना है , वो तो होकर ही रहेगा...
इसलिए जितनी जल्दी हो सके, वो पहली बार करवा लो और बाद में रोजाना मज़े लो...
जैसा की इस वक़्त नाज़िया बोल रही थी...

और फिर तो लाला ने उसे अलग-2 आसनो में चोदा ...
उसे घोड़ी बनाकर...
उसे गोद में लेकर....

और अंत मे जब वो झड़ने वाले थे तो उन्होने अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया...
और उसे पकड़कर उन्होने उसे गन की तरह तान लिया...
पिंकी और निशि भी लपककर लाला के सामने पहुँच गयी और लाला ने अपने रामलाल से निकली मलाई से तीनो के चेहरो को नहलाना शुरू कर दिया....
एक के बाद एक पिचकारी मारकर उन्होने तीनो के चेहरो को अपने माल से ढक दिया...

उसके बाद तीनो झरने के नीचे जाकर रगड़ - 2 कर नहाए....
ख़ासकर नाज़िया, जिसकी चूत से अभी तक खून रिस रहा था...

शाम घिरने को हो रही थी, इसलिए सभी ने जल्दी-2 अपने कपड़े पहने और वहां से निकल आए...

लाला के लंड पर कुँवारी चूत का खून लग चुका था अब...
इसलिए वो अब और भी ज़्यादा ख़तरनाक हो चुका था.आने वाली दिनों में और भी ज़्यादा धमाल होने वाला था अब तो.
 
अगले दिन लाला ने अपनी दुकान नही खोली...
उसके दिमाग़ में जो कैलकुलेशन चल रही थी वो उसके हिसाब से अपने आज के दिन को मौज मस्ती में बदल देना चाहता था.

लाला तो पूरी रात ढंग से सो भी नही पाया था...
3 कसी हुई चुतों में से एक को फाड़ने के बाद उसका हौसला और भी बुलंद हो चुका था...
अब वो बची हुई 2 चुतों को अपने हिसाब से मज़े लेकर मारना चाहता था..

पर उससे पहले उसे वो काम करना था, जिसके बारे में सोचकर उसे रात भर नींद नही आई थी.

इसलिए करीब 10 बजे वो अपने घर से निकला और राशन का कुछ सामान लेकर सीधा शबाना के घर पहुँच गया.

दरवाजा खोलते ही शबाना अपने सामने लाला को खड़े देखकर हैरान रह गयी

शबाना : "अर्रे, लालजी आप...और इतनी सुबह-2 ...''

लाला : "क्यों ...मेरा आना अच्छा नही लगा क्या तुझे....''

लाला ने सारा समान उसके सामने रख दिया, जिसे देखकर उसकी आँखो में चमक आ गयी....
ढेर सारे चावल और दालों के साथ उसमें रिफ़ाइंड का पेकेट भी था, जो कल रात ही ख़त्म हुआ था उसकी किचन में..

शबाना (झेंपते हुए ) : "अर्रे. नही लालाजी...आप भी भला कैसी बाते करते है.... मेरा घर और मेरा शरीर तो हमेशा से ही आपकी राह देखता रहता है...''

लाला ने करीब आकर उसे अपनी बाहो मे जकड़ लिया और उसके होंठो को अपनी जीभ से चाटकर बोला : "तभी तो इतनी सुबह तेरे पास आया हूँ ....कसम से...कल रात से मेरा रामलाल तेरी याद में तड़प रहा है....आज तो तेरी अच्छे से बजाकर रहूँगा...''

शबाना के चेहरे के भाव बदल से गये...
आज तक लाला कभी भी खुद से उसके घर नही आया था...
वही उसे बुला-बुलाकर थक जाती थी की वो आए और उसकी चूत के साथ-2 उसके पापी पेट का भी जुगाड़ कर जाए..
आज तो बिना बोले आ भी गये और समान भी खुद ही ले आए...

उसे लाला का ये रोमॅंटिकपन अच्छा तो लग रहा था पर वो खुलकर लाला के प्यार का जवाब नही दे पा रही थी..

लाला : "अरी क्या हुआ तुझे ? ....आज घर आए मेहमान की सेवा पानी नही करेगी क्या....''

इतना कहकर लाला ने बड़ी बेशर्मी से अपने रामलाल को उसके हाथ में पकड़ा दिया...
शबाना तो एक नंबर की चुदक़्कड़ औरत थी...
लाला को देखकर पहले से ही उसकी चूत में खुजली होनी शुरू हो चुकी थी और लाला ने जब अपना लंड पकड़ाया तो वो बहने ही लगी...

वो सिसकारी मारकर बोली : "उफ़फ्फ़....लाला......तेरे लंड को लेने के तो मैं भी दिन रात सपने देखा करती हूँ ...पर ...''

लाला : "पर ..पर क्या ?''

शबाना : "लाला...वो ...वो आज ...नाज़िया घर पर ही है....वो स्कूल नही गयी....उसकी तबीयत ठीक नही थी...कल शाम से उसका बदन और टांगे दर्द कर रहे है...और इसलिए वो अभी अंदर वाले कमरे में सो रही है बदन दर्द की गोली लेकर.....''

लाला की आँखे ये सुनकर चमक उठी...
क्योंकि लाला ये बात अच्छे से जानता था की आज नाज़िया घर पर ही होगी..

आख़िर लाला के लंड से चुदने के बाद इतनी हिम्मत कहाँ रहती उसमें की वो स्कूल जा पाती आज..

इसलिए बदन दर्द की गोली लेकर लेती हुई है साली अपने बिस्तर पर...

पर लाला ने ऐसा जताया जैसे उसने शबाना की बात सुनी ही नही...
और उसे चूमना और सहलाना शुरू कर दिया...
बेचारी शबाना ने बड़ी मुश्किल से बाहर का दरवाजा बंद किया...
पर दरवाजा बंद करते हुए भी लाला ने उसे पीछे से जकड़ रखा था...
अपना लंड उसकी गद्देदार गांड में धँसा कर उसके मोटे मुम्मो को निचोड़ रहा था...
उनका रस निकाल रहा था...
उसकी गर्दन पर होंठ अगाकर उसे ड्रॅक्यूला की तरह चूस रहा था..
लाला ने उसका गाउन उठाकर उसके कुल्हो पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया, ये बहुत था उसके अंदर की आग को भड़काने के लिए.

और लाला अच्छे से जानता था की इस रंडी का अपने बदन पर काबू नही रहता जब एक बार उसपर चुदासी चढ़ जाती है तो...

और वो हो भी रहा था...

वो सिसकारते हुए बोली : "ओह लालाजी......आज हो क्या गया है आपको.....उम्म्म्मममममम..... मैं बोल रही हू ना...बच्ची घर पर ही है ....... अहह...... ऐसा मत करो लालाजी....... अपने गोदाम पर चलो.... वहां जैसा कहोगे.... वैसे मज़े दूँगी..... अहह.... ओह लालाजी.....''

लाला ने मन में सोचा 'तेरी बच्ची को अपने इसी लंड से कल शाम को चोदा है मैने...अब वो कली से फूल बन चुकी है...बच्ची नही रही अब...'

और एक बार फिर से लाला ने उसकी बात अनसुनी करते हुए उसे चूमना और निचोड़ना चालू रखा..

वो भी कसमसाते हुए बोलती रही
और लाला ने जब देखा की वो ज्यादा ही गिटर पीटर कर रही है तो उसे घुमाकर उन्होने अपनी तरफ किया और धक्का देकर नीचे बिठा दिया और अपनी धोती में से अपना विशालकाय लंड निकालकर उसके मुँह में ठूस दिया

बेचारी घों-घों करती हुई लाला के लंड को धकेलने लगी..
पर लाला ने उसकी एक ना सुनी और अपना लंड ठूसकर ही माना उसके मुँह में : "चूस साली.....बढ़ बढ़ करने में लगी है हरामजादी ......तुझ जैसी रांड़ को चुप करवाना मुझे अच्छे से आता है...''

लाला के लंड की महक ही ऐसी नशीली थी की बेचारी कुछ बोल ही नही पाई फिर....
और चुपचाप, मज़े ले-लेकर उनके रामलाल को अपनी थूक से नहलाते हुए चूसने लगी...
 
पर उसकी नज़रें अंदर वाले कमरे की तरफ ही थी....
कही नाज़िया उठकर ना आ जाए बाहर...

आज तक उसने कभी भी नाज़िया के रहते हुए अपने घर पर इस तरह के काम नही किये थे...
वो अपनी बेटी पर अपने कर्मों की छाप नही छोड़ना चाहती थी..

लाला ने बड़ी बेबाकी से अपनी धोती और कुर्ता निकाल फेंका...
और शबाना के सामने पूरा नंगा होकर खड़ा हो गया...
शबाना का तो ये देखकर बुरा हाल हो गया....
ऐसे में कही उसकी बेटी बाहर निकल आई तो उसकी क्या इज़्ज़त रह जाएगी नाज़िया के सामने...
वो तो अपनी बेटी को कभी मुँह दिखाने के काबिल ही नही रहेगी...

ये सोचकर उसने लाला का लंड मुँह से बाहर निकाल दिया और आख़िरी बार उन्हे समझाने की कोशिश की : "लालाजी....प्लीज़ समझो ना.....मेरी बेटी अंदर ही है..... समझदार हो गयी है अब वो , उठ गयी तो अनर्थ हो जाएगा....''

लाला ने गुस्से में कहा : "अरे क्या बेटी अंदर है, अंदर है की रट लगा रखी है.... आज नही तो कल वो भी तो चुदेगी ही ना... लेगी ना किसी ना किसी का लंड वो भी.... तो लाला का क्यो नही.... चल बुला उसको भी.... देखता हूँ कितनी जवान हुई है वो''

इतना कहकर लाला मदमस्त हाथी की तरह नंगा ही अंदर वाले कमरे की तरफ चल दिया..

और पीछे अपनी आँखे फाड़े
लाला की बातो पर आश्चर्यचकित होकर अपना मुँह खोले
शबाना को ज़मीन पर बैठा छोड़ गया..
और जैसे ही उसे होश आया वो तुरंत भागकर अंदर की तरफ लपकी...

तब तक लाला बेड के करीब जाकर खड़ा हो चुका था...
और बिस्तर पर अस्त व्यस्त हालत में सो रही नाज़िया के जवान जिस्म को देखकर अपना नंगा लंड मसल रहा था..

उसने एक लांग टी शर्ट पहनी हुई थी...
और नीचे सिर्फ़ एक कच्छी...
और सोते वक़्त वो टी शर्ट उसके कूल्हों से भी ऊपर चढ़ी हुई थी
इसलिए उसकी मांसल जांघे सॉफ चमक रही थी..

हालाँकि कल शाम को ही लाला ने उसे नंगा देखा था...
उसे चोदा था...

पर ऐसी हालत में उसे एक बार फिर से देखकर उसका और रामलाल का बुरा हाल हो गया...
और उसका मन किया की अभी के अभी उसे फिर से नंगा करे और चोद डाले.

इसी बीच शबाना भागती हुई सी उसके करीब आई ....
एक नज़र अपनी अर्धनग्न बेटी को देखा और फिर अपना लंड मसल रहे लाला को देखकर बोली : "लाला....ओ लाला....इसके बारे में ऐसा मत सोच लाला.... ये अभी बच्ची है..... स्कूल में पड़ती है अभी तो....तू..तू बाहर चल ना....जो करना है मेरे साथ कर ले....चूत मार...गांड मार...अपना लंड चुसवा ..जो करना है कर ले...पर इसके बारे में अभी ऐसा मत सोच....''

लाला ने घूरते हुए उसकी तरफ देखा और बोला : "तू तो कह रही थी की ये समझदार हो गयी है ...और ये 'अभी' से क्या मतलब है तेरा...''

शबाना सकपका सी गयी उसकी नज़रों में गुस्सा देखकर ...
वो नज़रे नीचे करके बोली : "अभी...अभी मतलब....अभी रहने दो ...जब वक़्त आएगा तो...तो मैं खुद ही .... इसे लेकर तेरे पास आउंगी ....फिर जो करना हो...कर लेना...''

लाला ने हुंकार भरते हुए अपना लंड और ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया...शायद ये सोचकर की कैसे उसके डर ने एक माँ को अपनी ही बेटी का इस तरह से सौदा करने पर मजबूर कर दिया

लाला मन में बोला 'साली , तेरी परमिशन की ज़रूरत नही है लाला को ...और ना ही तेरी इस बच्ची को....कल ही चूत मरवा चुकी है ये अपनी...'

पर शबाना को ऐसे सब कुछ बताने से पहले वो कुछ और देर मज़े लेना चाहता था...

इसलिए उसकी बात को एक बार फिर से अनसुनी करता हुआ वो वही बेड पर बैठ गया और शबाना को अपने सामने बैठने को कहा...

अंदर से गुस्सा तो बहुत आ रहा था उसे, पर लाला के हरामीपन को वो भी अच्छे से जानती थी, उसने एक बार जो ठान ली वो करने से उसे कोई नही रोक सकता...
और उपर से उसे अपनी चिंता भी थी, लाला को इस 'छोटी सी बात' पर नाराज़ करके वो अपना 'राशन पानी' बंद नही करवाना चाहती थी उसकी दुकान से...

इसलिए उसका इशारा देखकर वो उसके करीब आई और नीचे बैठ कर उसका लंड चूसने लगी...

लाला ने उसका गाउन पकड़कर उपर की तरफ खींचना शुरू कर दिया...
उसने भी विरोध नही किया, और खड़ी होकर उसने वो गाउन भी निकाल फेंका, जिसने उसके मादक शरीर को ढक रखा था...

और नंगी होने के बाद जब उसका मदमस्त बदन लाला ने देखा तो उसके मुम्मो को पकड़कर चूसने से खुद को रोक नही पाया
और लाला ने शबाना को अपनी गोद में बिठा कर उसने उसके मुम्मो को ज़ोर से चूस डाला...

शबाना ने भी लाला के सिर पर हाथ रखकर उसे अपनी छाती मे दबाकर खींच लिया...

भले ही आदर्श माँ बनने की लाखों बाते चोद ले वो, अपनी चूत की खुजली के सामने वो सब बेकार थी...
इसलिए एक बार फिर से सब कुछ भूलकर वो मस्ती में आ गयी और सिसकारियां मारकर लाला का साथ देने लगी..

''उम्म्म्ममममममममममममम लाला.............. धीरे चूस इन्हे....... दर्द होता रहता है बाद में .... तेरे जाने के बाद.... अहह....... उम्म्म्ममममममममम...''

और लाला भी जानता था की औरत की मस्ती का दरवाजा उसकी चूत और मुम्मे के दानो को मसलने से ही खुलता है, इसलिए अपना मुँह उसके निप्पल पर और अपना हाथ उसकी चूत के दाने पर रखकर वो ज़ोर से दबाने लगा...

और उसके इस हमले ने शबाना को ये भी भुला दिया की नाज़िया वही सो रही है....
वो तो अपनी ही मस्ती मे डूबकर गला फाड़कर चिल्ला पड़ी : "आहहहहह हह..... ओहह्ह्हह्हह्ह्ह्ह लाला...... भेंन चोद .... लाला....... अहह........ क्या करके मानेगा रे तू आआज्जजज्ज....''

और उसकी वो चीख इतनी तेज थी की नाज़िया की नींद एकदम से खुल गयी....
और आँखे खोलते ही उसने जब अपने सामने ही अपनी माँ और लाला को एक दूसरे में घुसकर चूमा चाटी करते हुए देखा तो वो सन्न सी रह गयी...
 
पहले तो उसने सोचा की ये कोई सपना है....
पर अपने आप को कचोटी काटकर उसने इस बात का निश्चय किया की वो सच में हो रहा है...
टाइम देखा तो साढ़े दस ही बजे थे अभी...
आधा घंटा पहले ही तो गोली लेकर सोई थी वो...
और सपनो में भी लाला की चुदाई को ही एंजाय कर रही थी वो...
और अचानक उसकी माँ ने चीख मारकर उसकी नींद तोड़ दी...
पर आँख खुलने के बाद तो उसके सपने से भी अच्छी फिल्म चल रही थी उसके सामने...
पर उसकी समझ में ये नही आ रहा था की उसके होते हुए लाला और उसकी माँ ऐसे कैसे कर सकते है...

पर फिर मन ही मन ये सोचकर की 'ये हरामी लाला तो कुछ भी कर सकता है, तू बस सोने का नाटक कर और इनकी चुदाई के मज़े ले' .. वो अपनी आँखे आधी मूंद वैसे ही लेटी रही...और उनका प्रोग्राम देखने लगी.

इसी बीच शबाना की नज़रें नाज़िया को भी देख रही थी....
उसे तो वो बेसुध होकर सोती दिख रही थी...
शबाना ने सोचा की शायद गोली की वजह से गहरी नींद में है वो,
ये देखकर उसे थोड़ा चैन आया की चलो अब पकड़े जाने का ख़तरा थोड़ा कम है..

इसलिए वो पूरी मस्ती में भरकर लाला का साथ देने लगी...

लाला की गोद से फिसलकर वो नीचे आई और घुटनो पर बैठकर उसका लंड फिर से चूसने लगी...
इस बार दुगनी लगन से...
चुदासी में भरकर.

लाला भी एक जोरदार सिसकारी मारता हुआ पीछे हुआ और बिस्तर पर कमर लगाकर लेट गया...
उसका सिर सीधा सोई हुई नाज़िया की गोरी-2 पिंडलियों पर जाकर गिरा, जिन्हे वो बड़े मज़े से तकिया बनाकर लेट गया.

नाज़िया का तो शरीर ही सुलग उठा लाला के बदन को छूकर...
उसकी माँ इस वक़्त वहां ना होती तो उसने उछलकर लाला को वही दबोच लेना था...
और जो काम उसकी माँ कर रही थी, वो खुद ही कर लेना था उसने.

वो ये सोच ही रही थी की उसे अपनी चूत पर लाला की उंगली का एहसास हुआ...

हरामी लाला का हाथ सरकते हुए उसकी कच्छी में बंद चूत को रगड़ रहा था..

नाज़िया ने मन में सोचा 'ये बेटी चोद का लंड लाला आख़िर चाहता क्या है.... एक तरफ मेरे ही कमरे में आकर वो मेरी माँ से लंड चुस्वा रहा है...और उपर से मेरी चूत भी खरोंच रहा है....चल क्या रहा है इस बुड्ढे के दिमाग़ में ...'

पर लाला के मन की बात तो सिर्फ़ लाला ही जानता था..

वो शबाना से लंड चुसवाता हुआ, उसकी बेटी की चूत को रगड़ने में लगा रहा.

भले ही परिस्थति थोड़ी अलग सी थी इस वक़्त, पर लाला के हाथ से अपनी चूत मसलवाते हुए नाज़िया को मज़ा बहुत आ रहा था..

और अचानक लाला ने उसकी कच्छी को साइड में करते हुए अपनी बीच वाली उंगल उसकी चूत में घोंप दी...

दर्द की एक तेज लहर सी उठ गयी उसके बदन में , और काफ़ी मुश्किल से उसने अपनी चीख निकलने से बचाई..

और जैसे ही लाला की मोटी उंगली उसकी गर्म और गीली चूत में घुसी, लाला की आँखे चमक उठी..

उसे ये समझते एक भी पल ना लगा की वो जाग रही है और उनका खेल देखकर गर्म हो चुकी है वो...

और शायद यही लाला भी चाहता था.

उसने अपनी उंगली उसकी चूत में घुमानी शुरू कर दी और ना चाहते हुए भी नाज़िआ ने लाला का हाथ पकड़कर उसे ऐसा करने से रोका , क्योंकि लाला की ये हरकत उसके बदन में कोहराम मचा रही थी, वो चीखना चाहती थी, मचलना चाहती थी, पर अपनी माँ के डर से वो कुछ नहीं कर पा रही थी ,
लाला ने नाज़िया की तरफ देखा, तो उसे अपनी तरफ ही देखते पाया..

दोनो की नज़रें मिली और दोनो के चेहरो पर एक स्माइल आ गयी...

और यही वो पल था जब शबाना की नज़रें एक बार फिर से अपनी बेटी को देखने के लिए उठी ...
ये जानने के लिए की कहीं वो उनकी आवाज़ें सुनकर जाग ना जाए..

पर अपनी बेटी को लाला की तरफ मुस्कुराते देखकर और लाला की उंगली उसकी चूत में देखकर उसने अपना माथा पीट लिया...

लाला का लंड मुँह से निकाल दिया उसने...
और फिर उसके मुँह से सिर्फ़ यही निकला

''या अल्लाह......अब क्या होगा..''

नाज़िया बड़े मज़े से अपनी चूत में लाला की उंगली को महसूस करके सिसक रही थी...
और अचानक उसे एहसास हुआ की उसकी माँ ने लाला का लंड चूसना छोड़ दिया है और वो उसे ही देख रही है..

ये वो पल था जब एक जवान हो चुकी लड़की ने अपनी माँ को पहली बार ये एहसास दिलाया की आज तक वो जिस खेल को खेलती आ रही है, वो भी अब उसे खेलने के लिए तैयार हो चुकी है...
वो खेल जिसमे जिस्म को वो मज़ा मिलता है की अपनी तो क्या अपने आस पास क्या चल रहा है उसकी भी सुध नही रहती..
और उसी नशे में डूबकर आज शबाना अपनी ही बेटी के सामने नंगी होकर अपने आशिक का लंड चूस रही थी.

उसका मन तो हुआ की नाज़िया के थोबड़े पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ लगा दे और लाला को भी अपने घर से धक्के देकर बाहर निकाल दे...
पर तभी शबाना को ये एहसास भी हुआ की उसकी बेटी के सामने उसकी भी तो पॉल खुल चुकी है
आज तक जो बात उसने अपनी बेटी से छुपा कर रखी थी की उसकी पीठ पीछे वो कैसे-2 जतन करके अपना और उसका पेट भारती है, लाला से और ना जाने किस किससे अपनी चूत मरवाती है...
जिसके बदले में उसे मज़े भी मिलते है और पेट भरने के साधन भी...

और अपनी इस हालत के लिए उसने खुद को ही ज़िम्मेदार माना...
लाला तो सला ठरकी है
उसे तो बस चूत चाहिए
इसलिए वो नाज़िया की परवाह किए बिना शुरू हो गया था
पर उसे तो सोचना चाहिए था ना
अपनी बेटी के घर पर होते हुए उसे कम से कम ये सब नही करना चाहिए था...

पर अब तो ये आलम था की उसकी इज़्ज़त भी जा चुकी थी और जिस अंदाज से नाज़िया अपनी चूत में उंगली करवा रही थी, उसे लग रहा था की उसकी बेटी भी उसके हाथ से जा चुकी है..

पर फिर भी , एक माँ होने के नाते, उसने उन्हे टोकना ही उचित समझा
 
वो नाज़िया से बोली : "बेशरम....तुझे ज़रा भी लिहाज नही है बड़ों का...चल उठ और बाहर निकल यहां से....''

नाज़िया तो अपनी माँ की आवाज़ का करारापन सुनकर ही समझ गयी की वो कितना गुस्से में ये बात बोल रही है..

उसने लाला की तरफ देखा जो बड़े ही रहस्यमय ढंग से मुस्कुराए जा रहा था...
और अपनी उंगली से उसकी चूत को रगडे भी जा रहा था.

अब वो लाला से तो उस अंदाज बोल नही सकती थी ना...
इसलिए अपनी आवाज़ में थोड़ी नर्मी लाते हुए वो बोली : "लाला....ओ लाला....रहने दे ना इसको....बच्ची है अभी....''

एक बार फिर से 'जवान' हो चुकी नाज़िया के लिए ये अपशब्द सुनकर लाला का खून खोल उठा और उसने नाज़िया की चूत से निकला हाथ सीता शबाना के मुँह में ठूस दिया...
नाज़िया की चूत के रस में भीगी लिसलीसी उंगलियां उसने बड़ी ही बेदर्दी से शबाना के मुँह में ठूसी और फिर वो 'ब्राहमी आँवला तेल' उसके चेहरे पर रगड़ दिया..

शबाना बेचारी सकपका कर रह गयी....
अपनी ही बेटी की चूत का रस उसे ज़बरदस्ती निगलना पड़ा...
उसका मुँह और चेहरा अपनी ही बेटी के रस में नहाकर पूरा महक उठा..

लाला ने गुर्राती हुई आवाज में कहा : "साली...ये देख...ये तुझे किस एंगल से अभी भी बच्ची लग रही है....इसकी चूत से निकले इस रस का स्वाद तो चख ज़रा...कितना रसीला और मीठा है...इसका मतलब की ये पूरी पक चुकी है...तैयार है ये लाला के लंड को लेने के लिए...''

अपनी बेटी की नन्ही सी चूत में लाला के मोटे लंड के जाने की कल्पना मात्र से ही वो सिहर उठी...
उसे लाला से अपनी चूत मरवाते हुए करीब एक साल होने जा रहा था
पर आज भी जब लाला का लंड उसकी चूत में घुसता था तो हर बार पहली बार जैसा ही एहसास देता था...
कारण था उसकी मोटाई और लंबाई जो शायद पूरे गाँव में किसी के पास नही थी...

और ये हरामी लाला उसी लंड से उसकी फूल जैसी बेटी को चोदने की बात कर रहा है...
अर्रे, मर जाएगी वो...
बेचारी सहन नही कर पाएगी उसके रामलाल का बोझ..

इसलिए उसने बिफरते हुए कहा : "लाला...आज तक तूने मेरे साथ जो भी किया वो अलग बात है...उसमे चाहे मेरा स्वार्थ भी है...पर इसमे मेरी बेटी को ना घसीट .... जो करना है तू मेरे साथ कर ...मेरी बेटी को रहने दे अभी...''

लाला ने कटाक्ष भरी आवाज़ में कहा : "तेरे साथ करने के लिए तो पूरा गाँव खड़ा है...ख़ासकर वो गाँव के बाहर जिसका खेत है, वो नरेश....''

नरेश का नाम लाला के मुँह से सुनते ही उसे जैसे लकवा मार गया....
भला लाला को उसके बारे में कैसे पता चला...
वो तो अपना हर कदम फूँक-2 कर रखने वालो में से थी,
ऐसे में भला लाला को उसके और नरेश के बारे में कैसे पता चल गया..

लाला : "नरेश के साथ उस दिन जब तू गाँव के बाहर अपनी चूत मरवा रही थी, तब मैने तुझे देखा था....''

अपनी ही बेटी के सामने अपनी पोल खुलती देखकर वो पानी-2 हो रही थी...
उसका सिर झुक गया...

लाला : "देख, जैसे तू अपनी लाइफ में ना जाने कहां - 2 और कैसे-2 मज़े करती है, वैसे ही मुझे भी वो सब करने का हक है...समझी...और रही बात तेरी इस बेटी की तो एक बात कान खोलकर सुन ले...ये तेरी 'बच्ची' कल शाम ही लाला से चुद चुकी है....और इसलिए इसे अब बार-2 बच्ची कहना बंद कर...अब ये समझदार हो चुकी है...''

लाला ने एक ही बार में माँ -बेटी के राज एक दूसरे के सामने उजागर करके सब कुछ खोलकर रख दिया...
और लाला ने ये जान बूझकर ही किया था, क्योंकि वो जानता था की उसे अगर आगे भी नाज़िया की चूत मारनी है तो शबाना को इस खेल में शामिल करके ही ये काम करना पड़ेगा...

अपनी बेटी के 'जवान' होने की खबर सुनकर उसकी आँखो के सामने अंधेरा सा छा गया...
उसे अपनी पहली चुदाई के वो दिन याद आ गये जब वो अपनी बेटी से भी कम उम्र में अपने यार से चुद बैठी थी...
यानी जैसी माँ थी, वैसी ही बेटी भी निकली..

पर अब इस बात को बड़ाने का कोई फयडा नही था..
क्योंकि शबाना भी जानती थी की लाला को कुछ बोलने का फ़ायदा ही नही है,
वो लक्कड़बुद्धि कुछ भी समझेगा नही और उपर से उससे दुश्मनी लेकर वो उस गाँव में भी रहने लायक नही रहेगी...
एक तो उसका और नरेश के चक्कर के बारे में बताकर लाला ने उसे वैसे ही धमका दिया था और उपर से लाला से मिलने वाली मदद भी हमेशा के लिए बंद हो जानी थी,
ऐसे में उसे और उसकी बेटी को धंधा ही करना पड़ता...
बेटी तो चुद ही चुकी थी, इसलिए लाला के सामने झुककर उसकी बात मानने में ही समझदारी लगी उसे..

शबाना को चुप देखकर लाला उसके करीब खिसक आया और बोला : "देख...तू भी जानती है की मेरी सिर्फ़ एक ही कमज़ोरी है..और वो है सैक्स ..तू अपनी बेटी के साथ मिलकर मुझे खुश रख और मेरा वादा है की पूरी जिंदगी मैं तेरे घर में चूल्हा ठंडा नही होने दूँगा..''

अंदर से निश्चय तो वो पहले से ही कर चुकी थी इसलिए लाला की ये बात सुनकर उसके पास सिर हिलाने के सिवा कोई चारा ही नही बचा था..

अपनी माँ को लाला के सामने सिर हिलाता देखकर सबसे ज़्यादा खुशी तो नाज़िया को हुई थी...
क्योंकि अपनी माँ से हमेशा दब कर रहने वाली नाज़िया अब बिना किसी डर के लाला का लंड ले सकती थी.
और उसी एक्साइटमेंट में वो झट्ट से उठकर बैठ गयी...
उसके चेहरे पर आई खुशी देखते ही बनती थी....
लाला ने भी उसकी खुशी का फायदा उठाया और उसे अपनी गोद में खींच कर उसे चूमना शुरू कर दिया...

अभी कुछ देर पहले तक जिस गोद में शबाना बैठकर अपने होंठ और मुम्मे से चुस्वा रही थी,
वहीं पर इस वक़्त उसकी बेटी नाज़िया बैठ कर वो काम करवा रही थी...
ये वक़्त भी कितनी जल्दी करवट लेता है...

लाला के कदमो में बैठी हुई शबाना उपर मुँह करके अपनी बेटी को वो सब करते देख रही थी की कैसे वो अपनी छातियां लाला के सीने में दबा- दबाकर उनके होंठो को चूस रही है...
और इसी बात से उसे पता चल रहा था की वो कितनी बड़ी रंडी बन चुकी है अभी से..

लाला ने एक ही झटके में उसकी टी शर्ट को उतार फेंका और नीचे हाथ करके उसकी पेंटी भी निकाल दी...
शबाना ने भी शायद पहली बार अपनी बेटी के जवान जिस्म को इस तरह से इतने करीब से नंगा देखा था...
ऐसी तो वो भी नही थी जब वो इस उम्र में थी...
नाज़िआ के हर अंग अच्छे से उभर चुके थे....
लाला की नीयत तो बिगड़नी ही थी.
 
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