S
StoryPublisher
Guest
कड़ी_14 विशाल घर वापस, फिर से हाट सेशन ।
ओम ने अपनी किस्मत दोबारा आजमाया अदिति से यह कहते हुए- “प्लीज... आप एक बार फिर से अपने पैर को ऊपर मेटल बार पर रखो ना मेडम... बहुत मजा आया था दिन में। एक बार और करो ना मेडमजी, मेरी आँखों को खुश कर दो ना अदिति जी। जी करता है आप मेरे करीब होती इस वक्त। पैर ऊपर करो ना प्लीज..."
अदिति- “यह तुम्हारे लिए एक खेल है क्या? इसीलिए कह रही हूँ की तुमको शादी कर लेना चाहिए अब। मैं क्यों तुम्हारी आँखों को खुश करूँ भला? शादी के बाद अपनी पत्नी से यही करने को कहना, वो तुमको खुश करेगी हिहिहीही..” और अदिति ने यह सब गुस्से में नहीं हँसते हुए कहा था ओम को।
ओम- “ओहह... तेरी, अब तो लगता है मेडमजी नाराज हो गई। पर दिन में तो आपने यह किया था जी...”
अदिति- “मुझे पता नहीं मैंने क्यों वैसा किया था दिन में, शायद मैं तुमको छेड़ना चाहती थी। मगर वो काफी था, और तुमको अब बिहेव करना होगा, वरना मैं तुमसे बात नहीं करूँगी। बाइ मेरा पति आ रहा है अब..." और अदिति ने फोन काट दिया।
ओम निराश हो गया और सोचा- “इन औरतों की क्या प्राब्लम है? कभी तो रिझाती हैं और कभी सीता बनने की ढोंग करती हैं। इसकी माँ की साली."
विशाल गेट के पास आया तो ओम ने गेट खोला विशाल की कार को अंदर आने के लिए, और ऊपर अदिति को सिर उठाकर देखा की वो विशाल को वेव कर रही है। अदिति ओम के चेहरे में देख रही थी और सोच रही थी
की शायद ओम को टेस पहुँची है, उसकी आखिरी लाइन से।
विशाल यह सोचते हुए की किससे अदिति बात कर रही थी, जल्दी से घर आया अदिति की एक्सप्रेशन्स पढ़ने के लिए। विशाल जैसे ही ऊपर गया, अदिति ने उसको जोर से बाहों में लेते हुए किस किया अपने पूरे जिश्म को उसके जिश्म से सटाते हुए। अदिति बहुत खुश दिख रही थी और खूब हँसमुख थी, और बहुत गरम दिख रही थी, विशाल को जैसे रिझा रही हो उस वक्त। विशाल को बहुत अच्छा लागा। मगर सोच रहा था किससे आखिर वो बात कर रही थी। उसने सोचा की वो कुछ भी नहीं पूछेगा, जब तक अदिति खुद नहीं बताती इस बात को। दोनों घर के अंदर गये, चौखट पर से एक दूसरे की कमर में हाथ डाले, एक पर्फेक्ट शादीशुदा कपल दिख रहे थे दोनों उस वक्त। कुछ बातें किए मियां बीवी ने और विशाल ने नोटिस किया की अदिति कुछ ज्यादा ही कामुक थी उस वक्त, जैसे उसी वक्त सेक्स करना चाहती हो।
कल रात वाली सेशन अभी तक बहुत जीवित थी दोनों के दिमाग में। दोनों की चाह उस वक्त वैसी ही थे सेक्स के बारे में। लगता था दोनों को बिस्तर पर तुरंत जाने का मन हो रहा था। जब विशाल नहाने गया तो उसका लण्ड जमकर खड़ा हुआ था और उसको मूठ मारने का मन किया, मगर अपने आपको रोका और अदिति के लिए बचाकर रखा लण्ड के पानी को।
डिनर टाइम हुआ तो अदिति लाउंज से किचेन आना जाना कर रही थी डिनर बनाते हुए। जबकी विशाल टीवी के
सामने बैठा अदिति को ध्यान से देखा रहा था। अदिति बहुत ही चंचल, सेक्सी, और हाट लग रही थी, जैसे तुरंत चुदवाना चाह रही हो। असल में वो अपनी उस चाल से विशाल को रिझा ही रही थी, अपनी जांघे और क्लीवेज को दिखाते हुए। और जब-जब वो विशाल के पास सोफे पर बैठ रही थी, तो जानबूझ कर अपनी स्कर्ट को ऊपर हो जाने देती थी विशाल को दिखाने के लिए। और विशाल के कंधों पर हर बार झुक जाती थी अपनी चूचियों को उसपर रगड़ते हुए।
विशाल इस इंतेजार में था की अदिति उसको बताएगी की किसी ने उसको फोन किया था, मगर कुछ नहीं बता रही थी अदिति। हालांकी के विशाल ने उससे फोन के बारे में बात भी किया।
अदिति ने डिनर सर्व किया और खाते वक्त दोनों ने ऐसे ही बातें किया। अदिति चुदासी ही लग रही तब भी, खूब हँस रही थी, चुलबुला रही थी, और बहुत खुश दिख रही थी। विशाल को लगा की कुछ तो गड़बड़ है और जानना चाहा की क्या बात थी। विशाल जानना चाहता था की किसने अदिति को फोन किया था मगर समझ में नहीं आता था उसको की कैसे पूछे? चो चाहता था अदिति खुद बताए।
जब अदिति बर्तन धो रही थी सिंक के पास डिनर के बाद तो विशाल ने उसको पीछे से पकड़ा अपने जिश्म को उसकी पीठ से दबाते हुए और अपनी जीभ को उसके गले के पीछे वाले हिस्से पर फेरते हुए चाटा।
अदिति ने मुश्कुराते हुए उसको अपने कहुनी से मारा यह कहते हुये- “सब्र करो अभी वक्त है.."
विशाल अदिति के कानों में बोला- “तुम बहुत ही सेक्सी लग रही हो आज...” और उसने अदिति के गले पर दाँत से काटा और उसके चूतड़ों पर हाथ से थपथपाते हुए वहाँ से निकला। जबकी अदिति ने उसको पानी फेंक के मारा।
विशाल सोफे पर बैठा, हाथ में एक मगजीन लिए अदिति का इंतेजार कर रहा था की वो आकर अपनी पसंदीदा
सीरियल देखे, और अब भी इंतेजार कर रहा था की अदिति उसको फोन के बारे में बताए।
जब अदिति उसके पास आकर बैठी तो खुद को उसकी छाती पर लगा लिया। अपनी उंगलियों को उसकी बाल भरी छाती पर फेरते हुए और पूछा- “तो आज दिन में तुमने मुझको कितना याद किया?"
ओम ने अपनी किस्मत दोबारा आजमाया अदिति से यह कहते हुए- “प्लीज... आप एक बार फिर से अपने पैर को ऊपर मेटल बार पर रखो ना मेडम... बहुत मजा आया था दिन में। एक बार और करो ना मेडमजी, मेरी आँखों को खुश कर दो ना अदिति जी। जी करता है आप मेरे करीब होती इस वक्त। पैर ऊपर करो ना प्लीज..."
अदिति- “यह तुम्हारे लिए एक खेल है क्या? इसीलिए कह रही हूँ की तुमको शादी कर लेना चाहिए अब। मैं क्यों तुम्हारी आँखों को खुश करूँ भला? शादी के बाद अपनी पत्नी से यही करने को कहना, वो तुमको खुश करेगी हिहिहीही..” और अदिति ने यह सब गुस्से में नहीं हँसते हुए कहा था ओम को।
ओम- “ओहह... तेरी, अब तो लगता है मेडमजी नाराज हो गई। पर दिन में तो आपने यह किया था जी...”
अदिति- “मुझे पता नहीं मैंने क्यों वैसा किया था दिन में, शायद मैं तुमको छेड़ना चाहती थी। मगर वो काफी था, और तुमको अब बिहेव करना होगा, वरना मैं तुमसे बात नहीं करूँगी। बाइ मेरा पति आ रहा है अब..." और अदिति ने फोन काट दिया।
ओम निराश हो गया और सोचा- “इन औरतों की क्या प्राब्लम है? कभी तो रिझाती हैं और कभी सीता बनने की ढोंग करती हैं। इसकी माँ की साली."
विशाल गेट के पास आया तो ओम ने गेट खोला विशाल की कार को अंदर आने के लिए, और ऊपर अदिति को सिर उठाकर देखा की वो विशाल को वेव कर रही है। अदिति ओम के चेहरे में देख रही थी और सोच रही थी
की शायद ओम को टेस पहुँची है, उसकी आखिरी लाइन से।
विशाल यह सोचते हुए की किससे अदिति बात कर रही थी, जल्दी से घर आया अदिति की एक्सप्रेशन्स पढ़ने के लिए। विशाल जैसे ही ऊपर गया, अदिति ने उसको जोर से बाहों में लेते हुए किस किया अपने पूरे जिश्म को उसके जिश्म से सटाते हुए। अदिति बहुत खुश दिख रही थी और खूब हँसमुख थी, और बहुत गरम दिख रही थी, विशाल को जैसे रिझा रही हो उस वक्त। विशाल को बहुत अच्छा लागा। मगर सोच रहा था किससे आखिर वो बात कर रही थी। उसने सोचा की वो कुछ भी नहीं पूछेगा, जब तक अदिति खुद नहीं बताती इस बात को। दोनों घर के अंदर गये, चौखट पर से एक दूसरे की कमर में हाथ डाले, एक पर्फेक्ट शादीशुदा कपल दिख रहे थे दोनों उस वक्त। कुछ बातें किए मियां बीवी ने और विशाल ने नोटिस किया की अदिति कुछ ज्यादा ही कामुक थी उस वक्त, जैसे उसी वक्त सेक्स करना चाहती हो।
कल रात वाली सेशन अभी तक बहुत जीवित थी दोनों के दिमाग में। दोनों की चाह उस वक्त वैसी ही थे सेक्स के बारे में। लगता था दोनों को बिस्तर पर तुरंत जाने का मन हो रहा था। जब विशाल नहाने गया तो उसका लण्ड जमकर खड़ा हुआ था और उसको मूठ मारने का मन किया, मगर अपने आपको रोका और अदिति के लिए बचाकर रखा लण्ड के पानी को।
डिनर टाइम हुआ तो अदिति लाउंज से किचेन आना जाना कर रही थी डिनर बनाते हुए। जबकी विशाल टीवी के
सामने बैठा अदिति को ध्यान से देखा रहा था। अदिति बहुत ही चंचल, सेक्सी, और हाट लग रही थी, जैसे तुरंत चुदवाना चाह रही हो। असल में वो अपनी उस चाल से विशाल को रिझा ही रही थी, अपनी जांघे और क्लीवेज को दिखाते हुए। और जब-जब वो विशाल के पास सोफे पर बैठ रही थी, तो जानबूझ कर अपनी स्कर्ट को ऊपर हो जाने देती थी विशाल को दिखाने के लिए। और विशाल के कंधों पर हर बार झुक जाती थी अपनी चूचियों को उसपर रगड़ते हुए।
विशाल इस इंतेजार में था की अदिति उसको बताएगी की किसी ने उसको फोन किया था, मगर कुछ नहीं बता रही थी अदिति। हालांकी के विशाल ने उससे फोन के बारे में बात भी किया।
अदिति ने डिनर सर्व किया और खाते वक्त दोनों ने ऐसे ही बातें किया। अदिति चुदासी ही लग रही तब भी, खूब हँस रही थी, चुलबुला रही थी, और बहुत खुश दिख रही थी। विशाल को लगा की कुछ तो गड़बड़ है और जानना चाहा की क्या बात थी। विशाल जानना चाहता था की किसने अदिति को फोन किया था मगर समझ में नहीं आता था उसको की कैसे पूछे? चो चाहता था अदिति खुद बताए।
जब अदिति बर्तन धो रही थी सिंक के पास डिनर के बाद तो विशाल ने उसको पीछे से पकड़ा अपने जिश्म को उसकी पीठ से दबाते हुए और अपनी जीभ को उसके गले के पीछे वाले हिस्से पर फेरते हुए चाटा।
अदिति ने मुश्कुराते हुए उसको अपने कहुनी से मारा यह कहते हुये- “सब्र करो अभी वक्त है.."
विशाल अदिति के कानों में बोला- “तुम बहुत ही सेक्सी लग रही हो आज...” और उसने अदिति के गले पर दाँत से काटा और उसके चूतड़ों पर हाथ से थपथपाते हुए वहाँ से निकला। जबकी अदिति ने उसको पानी फेंक के मारा।
विशाल सोफे पर बैठा, हाथ में एक मगजीन लिए अदिति का इंतेजार कर रहा था की वो आकर अपनी पसंदीदा
सीरियल देखे, और अब भी इंतेजार कर रहा था की अदिति उसको फोन के बारे में बताए।
जब अदिति उसके पास आकर बैठी तो खुद को उसकी छाती पर लगा लिया। अपनी उंगलियों को उसकी बाल भरी छाती पर फेरते हुए और पूछा- “तो आज दिन में तुमने मुझको कितना याद किया?"