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Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

थोड़ी देर मे महॉल थोड़ा शांत हुआ था

“लेकिन आपने बताया नही की आप कोमल से कैसे मिली “

महिमा की बात सुनने के बाद मैने सवाल किया ..

इस बात का जवाब महिमा ने नही बल्कि डॉक्टर . चूतिया ने दिया ..

“अंकित बात असल मे ऐसी है की जब भुवन और कोमल ने सब कुच्छ छोड़ने मन बनाया था तो वो उसी सिलसिले मे मुझसे भी मिले थे , मैं भुवन को पहले से जानता था , मेरे ही मदद से ये लोग इस गाँव मे बसे थे .. उसके बाद जब कोमल अपनी बेटी को ढूंढते हुए मेरे पास आई तब मैने कोमल और महिमा को मिलवाया था ….. “

“ओह्ह्ह “

मैने कोमल की ओर देखा , फिर भाभी की ओर आपसे ये कैसे मिली

इससे पहले भाभी कुच्छ बोले कोमल बोल पड़ी

“मैं तुम दोनो को पूरे शहर मे ढूँढ रही थी जब मुझे इनस्पेक्टर पांडे के मर्डर की बात पता चली तो जब मैने पता किया तो मुझे समझ आने लगा था की ज़रूर तुम जीवा या संपत के हाथ लग चुकी हो…. जीवा अब तिवारी से छुप कर रहता था या ये कहो की दोनो एक दूसरे के आमने सामने आने से बचते है , क्योकि इसी मे दोनो की भलाई है , तिवारी ने पठान गैंग को हथियार लिया और करीम की लड़कियो के जिस्म की चाह ने तिवारी का काम और भी आसान कर दिया , उसने गैंग वालो को ही करीम के खिलाफ भड़का के उसका मर्डर करवा दिया .. लेकिन फिर जीवा और उसकी सीधी टक्कर थी , तिवारी ने दिमाग़ लगाया और लड़ने झगड़ने के बजाय एक मौन समझोता दोनो मे हो गया ……

तो मुझे लग ही गया था की जब जीवा ने आरती को देखा होगा तो उसके नंबर1 डॉन बनने की ख्वाहिश बलवती हो गयी होगी और आरती को अपने काबू मे लेने की कोशिस करेगा , शायद एमोशनली, मेरे पास अब इतनी ताकत नही बची की मैं एक पूरे गैंग से भीड़ जाऊ , ये शक्ति बड़ी अजीब है जो प्रेम के साथ रहने से ही आती है लेकिन फिर धीरे धीरे गायब होने लगती है , मेरे पास अब बस स्किल्स बचे है जो मैने सीखी थी लेकिन वो ताक़त नही रह गयी , इसलिए मैं चाहती थी की अपने दिमाग़ से कम ताक़त लगाए ही आरती तक पहुंचू ..

और मैने वेट किया पता किया मुझे तुम दोनो के बारे मे कई इन्फर्मेशन से पता चलता गया , लेकिन अभी आरती के अंदर की ताक़त बाहर नही आई थी मतलब साफ है की अभी उसे अपना प्यार नही मिला है, या उसने उसे अच्छे से पहचाना नही है ..

संपत और जीवा भी इसी खोज मे थे की कैसे आरती के अंदर की ताक़त को जगाया जाए , उन्होने इसका ब्रेन वॉश तो कर ही दिया था …

अपनी झूठी कहानिया सुना कर ये तो यकीन दिला दिया था की तिवारी ग़लत है और उसने मेरे साथ बहुत ग़लत किया है , आरती तिवारी से बदला लेने को आतुर हो गयी थी ..

लेकिन फिर मैं उसे मिली उसे समझाया की तिवारी बुरा इंसान है लेकिन जीवा और संपत भी कोई दूध के धुले नही है …

मैं अपनी शक्तियां खो चुकी हू इसलिए सीधे लड़ना तो अब मेरे लिए पासिबल नही था, और ना ही आरती को वहाँ से भागते ही बना क्योकि कोई ना कोई तो उसके साथ होता ही था, अधिकतर वो रानी , और कुच्छ लोग भी हमेशा इसके साथ रहते थे …

वो इसे इसकी शक्ति दिलवाने की कोशिस कर रहे थे , इसे कभी कॉलेज मे ले जाते तो कभी माल मे तो कभी मार्केट ये सोचकर की कोई लड़का इसे पसंद आ जाएगा : :

अब अनपढ़ लोग तो साले रहेंगे ही बेअकल , लड़ने की ट्रैनिंग दिलवाना और घूमते रहना यही चल रहा था, उन्हे इतना तो पता था की जब किसी लड़के से प्यार मे पड़ेगी तो शक्ति जाग जाएगी , लेकिन इन्होने वो पुस्तक नही पढ़ी इसलिए इन्हे ये नही पता की उस लड़के को ढूँढने मे इसे किंतनी दिक्कत होनी है , इसे तो खुद भी पता नही चलेगा की यही वो है जिसे ये ढूँढ रही है ……

बहुत मुश्किल होता है समझना, उन लोगो को ये भी शक हुआ की आरती मे पावर है भी की नही, क्योकि इसका पहला प्यार तो इसका पति ही था फिर भी शक्ति जागृत नही हुई थी ..

अगर शक्ति ना भी होता तो भी इसका चेहरा ही काम मे ले आते ये लोग, ये बोलकर की शक्ति वापस आ गयी है और तिवारी की ऐसे ही फट जानी थी ……..
 
इन्ही सभी चीज़ो की सोचकर मैने इसे शांत ही रहने को कहा था , मौका देखकर ही कोई काम करने की हिदायत दी थी …. फिर जब पता चला की तिवारी के घर मे पार्टी है और तिवारी के घर से ही कोई जीवा के साथ मिलकर तिवारी को रास्ते से हटा ना चाहता है तब वो मौका मिल गया , असल मे कुच्छ करने का नही बल्कि तुम्हे लेकर वहाँ से भागने का ……

संपत और जीवा का प्लान था की वो आरती को किसी तरह तिवारी के सामने लाकर खड़ा कर दे ताकि इसे देखकर वो शॉक मे चला जाए , मैं नही चाहती थी की तिवारी की नज़र आरती पर पड़े , इससे तिवारी सतर्क हो जाएगा और हो सकता है की जीवा और संपत से फिर से मिल जाए , तिवारी का कोई भरोशा नही है वो इसे ख़त्म करने के लिए या इसकी पावर को अपना बनाने के लिए कोई भी चाल चल सकता था ..

भला हो की तुम वहाँ मौजूद थे और तुम्हे देखकर आरती को भागने का बहाना मिल गया और साथ ही , और मुझे गोली चलाने का “

“क्या , आपको गोली चलाने का ??”

मैं चौक गया था

“हा असल मे वो पठान सूट वाला संपत था , उसने जब गोलिया चलानी शुरू की तभी मैने भी चलानी शुरू कर दी लेकिन रिमोट कंट्रोल से … जो दूसरी तरफ़ से गोलिया चल रही थी वो मैं चला रही थी “

“तो आपने तिवारी को मारा क्यो नही “

“उसे मार कर क्या मिलना था , और ऐसे भी इन लोगो ने इतने पाप किए है की इन्हे इतनी आसान मौत नही दे सकती मैं , मुझे तो कोई मतलब भी नही था इन लोगो से वो तो मेरी बेटी के कारण मुझे यहाँ आना पड़ गया……..”

मैने एक नज़र भाभी को देखा ना जाने क्यो लेकिन उन्होने नज़र नीचे कर ली थी …

हम सबने बस हा मे सर हिलाया था …..

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“भाभी आपको सब के बारे मे मुझे बताना था , आपको सब पता होते हुए भी आपने मुझे कुछ नही बताया “

मैने भाभी से शिकायत की

आश्रम से बाहर जंगल के बीचो बीच एक ट्रेन की पटरी पर मैं और भाभी पैदल ही चल रहे थे …

रात का अँधेरा था और जंगली किडो की आवाज़े उस शांति को चीर रही थी ..

हम वही एक जगह बैठ गये थे ..

“मैं क्या करती सोनू , मा ने जब मुझे इन सबके बारे मे बताया था तब से मैं बहुत ही परेशान थी , यही सोचती थी की वो सच्चा प्यार कौन होगा , अगर मुझे मिलेगा तो क्या मैं उसे पहचान पाउन्गी ..”

भाभी मुझे घुरने लगी , अँधेरे मे उनकी नज़रे मुझे उतनी सॉफ दिखाई तो नही दे रही थी लेकिन उनके देखने आभास मुझे ज़रूर हो रहा था , एक अजीब निगाह थी उनकी

“क्या आपने उसे पहचान लिया ??”

मेरे सवाल से वो थोड़ी चुप हो गयी ……

“तुम्हे क्यो लगता है की वो मेरे सामने भी आया होगा “

मुझे उनकी बात पर हँसी सी आ गयी

“ना सिर्फ़ आपके सामने आया है बल्कि आपके बाजू मे बैठा भी है .. “ मैं उनके मुलायम ज़ुल्फो को सरकाते हुए अपने हाथ उनके गले तक ले गया ..

मैने हल्के से उनके चेहरे को अपनी ओर खींचा था ,

“आ..”

उनकी आँखे बंद हो चुकी थी , होंठो से एक हल्की उनकी हल्की सी सिसकी ने मेरे दिल मे ना जाने इतना तूफान सा मचा दिया था ….

मैं उनके सर को और भी खिच कर उनके होंठो को अपने होंठो के बेहद ही करीब ले आया ..

हमारी साँसे तक आपस मे टकरा रही थी

“बोलो ना भाभी क्या आपने उसे पहचान लिया , क्या अपने दिल की धड़कने उसके लिए तेज़ी से धड़कती है “

इस शांत वातावर्ण मे भाभी की दिल की धड़कनो की आवाज़े मेरे कानो तक स्पष्ट आ रही थी , उनकी साँसे अप्रत्याशित रूप से तेज हो चुकी थी , मेरे होंठो उनके नाज़ुक होंठो से टकरा रहे थे ..

मैं उनके होंठो का फड़कना तक महसूस कर सकता था ..

“क्या वो प्यार मैं ही नही हू , क्या आपने ये महसूस नही किया ..”

मेरी बात के जवाब मे वो हल्के से रो पड़ी थी ,

“हूंम्म” उत्तेजना के शीर्ष पर वो भी खुद को संभाल नही पा रही थी और मैं भी नही , वो कुच्छ बोल ही नही पा रही थी और इसी मजबूरी ने उनके मूह से वो आह निकाल दी , वो हल्के से रो पड़ी .. कुच्छ ना कह पाने की मजबूरी ने उन्हे जकड़ लिया था ..

“आई लव यू भाभी “

मैने उनके जाँघों पर अपने हाथ रख दिए थे , ये भाभी की सहन सीमा की परीक्षा थी और बाँध टूट गया , उन्होने मुझे अपने ओर जोरो से खींच लिया था और मेरे होंठो को अपने होंठो मे भर लिया ……

प्यार का वो अनकहा सा इज़हार था , लेकिन अपने मे संपूर्ण था , वो भाभी की अभी तक बिताई सभी वेदनाओं का निचोड़ था , अभी तक जो उन्होने खुद को रोका था जा जैसे बाँध टूट गया हो , पूरा पानी हमे भिगोने लगा ..

हमारे होंठ एक दूसरे के होंठो मे ऐसे घुल रहे थे जैसे मूह मे सहद घुल रही हो , उस चासनी के सुख ने हमारे जीभ को एक दूसरे मे घुसने पर मजबूर कर दिया था , हमारे लार से हमारे चेहरे सनने लगे ..

हम दोनो ने ही एक दूसरे को कसकर जकड़ लिया , और तभी एक तेज प्रकाश हमारे ऊपर पड़ा ..
 
ट्रेन के हॉर्न की आवाज़ कानो मे गूँज उठी थी और प्रकाश हमारे शरीर को नहला रहा था , लेकिन एक दूसरे से अलग होने का दिल ही नही कर रहा था , मैने उन्हे और उन्होने मुझे और भी जोरो से जकड़ लिया , लेकिन वो आवाज़ और प्रकाश और भी गहरी हो गयी थी , बस वो तरीन मेरे आँखो के सामने आ चुका था और ऐसा लगा जैसे अब बस भाभी के बाँहो मे समाकर ही ये शरीर छूट जाएगा , जब मरना ही था तो अलग होके कौन मरता और शायद उनका भी वही हाल था उन्होने मुझे धकका दिया , मैं पटरी के बीचो बीच गिर गया था और अब वो मेरे ऊपर थी ………..

होंठो से होंठ मिले थे , एक दूसरे के बालो को हाथ जकड़े हुए थे , जिस्म एक दूसरे मे सामने को बेताब था , वो मेरे ऊपर थी मैं पटरी के पटतारो के बीच सेमेंट की पट्टी पर लेटा हुआ था, ऐसा लगा जैसे हम दोनो ने ही एक दूसरे को खोज लिया हो, वो खोज जो सदियो की थी आज ख़त्म हो गयी हो ….

तभी ट्रेन की आवाज़ और भी करीब आती मालूम हुई और ऐसा लगा जैसे अब इसी जन्नत मैं हमेशा के लिए खो जाउन्गा ………..

ट्रेन तेज़ी से हमारे बाजू वाले पटरी से गुजर गयी , हम दोनो ने एक पल के लिए एक दूसरे को छोड़ा और एक दूसरे की आँखो मे देखा , मौत का कही डर ही नही था ..

हम दोनो ही जोरो से हंस पड़े ….

भाभी के वो गुलाबी से होंठ मुझे ललचा रहे थे , साँसे तेज थी धड़कनो ने भी थोड़ा आराम करना सीख लिया था, उनके आँखो मे आँसू था ,मेरे आँखो मे वो था या नही मैं नही जानता ..

,मैने फिर से उन्हे अपनी तरफ खींच लिया था और हमारे होंठ फिर से मिल गये थे ..

ये अहसास क्या था , मैने पहले भी कई लड़कियो के होंठो को को चूसा था लेकिन ये क्या था , एक अलग ही खुश्बू थी उनके शरीर मे जो मेरे नाक से होते हुए मेरे मस्तिस्क को हिला जा रही थी , उनके होंठ महज माँस के टुकड़े नही थे वो रस से भरे हुए अंगूर के दानो की तरह कड़े थे , मेरे दाँत कभी कभी उन्हे उन्हे खा जाने को व्याकुल हो रहे थे , कभी वो मेरे होंठो को अपने दांतो से काट जाती ,

चूसने पर उनके होंठ जो रस बहा रहे थे वो क्या था , माँस के एक टुकड़े पर इतना लगाव कैसे पनप रहा था , उनके लार से सने हुए जीभ अब मेरे नही रह गये थे वो बस सैर पर थे कभी यहाँ तो कभी वहाँ …

मदहोशी बढ़ाने लगी थी और उत्तेजना के साथ ही हरकते भी , दीवारे मन से तो गिर ही गयी थी बस तन से गिरना ही बाकी रह गया था, एक बार जो मन के बंधन खुल जाए तो फिर दुनिया मे और कोई बंधन बच ही नही पाते, जो बँधा है वो बस मन से ही बँधा है …….

उनके खुले हुए बाल फैल गये थे और मेरे ऊपर आ रहे थे , वो मेरे ऊपर ही थी , मैने उनके बालो को हल्के हटाया और उनके गले मे अपने होंठो से हल्के से स्पर्श करवा दिया ..

“आ सोनू , मेरे बेटे “

उन्होने इतनी मदहोशी , उत्तेजना और प्रेम से कहा की सभी को अलग करना ही मुश्किल था, और कौन ये समझने की जहमत भी उठाता की वो क्या था ..

उन्होने मुझे सीधे नीचे उसे ऊपर कर दिया , उनमे इतनी ताक़त थी ये मैने आज ही जाना था , ट्रेन की पटरी मे बिछे बड़े बड़े पत्थर भी हमे फूलो की तरह लग रहे थे ये हमारे सुहाग वाली सेज थी ..
 
मैं भी पागलो की तरह उनके गले और गालो को चूसने लगा , वो मचलती हुई मेरे बालो को सहला रही थी , मेरे हाथ भी उन्मुक्त पक्षी की तरह इधर उधर उड़ने लगे थे और सीधे भाभी की ममता से भरे हुए वक्षो को च्छुने लगे …….

“बाबू .. ओह्ह सोनू “

वो मचल गयी और मैने अपने हाथो को थोड़ा और दबाते हुए उस कोमल सी रचना का थोड़ा और भी अवलोकन किया , वो कितने कोमल थे जैसे कठोर बाल पर किसी ने मक्खन की पालिस चढ़ा दी हो , रेशम जैसे मुलायम बदन की च्छुवन से मेरे लिंग का तनाव भी बढ़ने लगा था ..

मैं अपने हाथो से उनके उन्नत वक्षो को सहलाते हुए उनके गले से अपने होंठो को उनके छातियों तक ले जाने लगा था, मेरे लार से उनकी चुचियाँ सनने लगी थी , लाज की मारियादा से बँधे हम दोनो आज सभी नियमो को तोड़ने मे उतारू हो चुके थे ..

मैने मेरे हाथ आपने आप ही भाभी के के पीठ की तरफ जाने लगे उन्होने भी जैसे सहमति दिखाई और थोड़ा ऊपर उठ गयी जिससे मेरे हाथ उनके ब्लाउस के हुक पर चले गये थे , एक ही झटके मे मैने उसे निकाल लिया , शायद ये सुस और रानी से ली गयी ट्रैनिंग का ही कमाल था की मैं आसानी से उनके उपरी वस्त्रो को निकाल कर उन्हे ऊपर से पूर्ण तह नंगा कर दिया था,

मेरे भी कपड़े उतरने ल्गे थे , क्या कब कैसे हो रहा था ना ही मुझे कुच्छ समझ आ रहा था ना ही भाभी को ..

थोड़ी ही देर मे हम दोनो ही पूरे मादरजात नंगे ट्रेन की उस पटरी मे एक दूसरे से गुथे हुए पड़े थे , मैं उन्हे जिस्म को चूसे जा रहा था वो बस मेरे सर को पकड़े हुए अपनी आँखे बंद किए पड़ी थी …….

मेरे होंठ उनके जिस्म का कोई भी कोना नही छोड़ना चाहते थे , हर जगह मेरे लार से उनका जिस्म गीला हो रहा था …

आख़िर मैं उस जगह पहुचा जिसे कोई जन्नत का दरवाजा कहता है तो कोई नर्क का .. मेरे लिए वो महज मेरे भाभी को अपना प्रेम दिखाने का एक साधन था.

मैं भाभी के जाँघो के बीच अपने जीभ से उनके योनि की दीवारो को सहला रहा था , उनके योनि मे उगे हुए वो बाल भी मुझे एक सुखद सा अहसास दे रहे थे , अपनी जीभ से योनि से निकलते उस चिपचिपा पानी को चाट लिया जो की स्वाद मे नमकीन था एक अजीब सी महक मेरे नाक मे घुलने लगी थी ..
 
भाभी ने जोरो से मेरे बालो को पकड़ लिया था

“आहा सोनू मेरे बेटे ..”

उन्होने मेरे बालो को खिच लिया और मुझे ऊपर खिचने लगी , हमारे होंठ फिर से मिल चुके थे, मेरा लिंग जो की अपनी पूरी ताक़त मे खड़ा हुआ था वो भाभी के योनि की दीवारो पर हल्के हालेक प्रहार करने लगा था ,भाभी के चिपचिपे गीले रस से वो थोड़ा थोड़ा गीला होने लगा था ..

आख़िर भाभी ने ही मेरे लिंग को पकड़ कर अपने प्रेम के अंतिम शिखर पर चढ़ा दिया, उन्होने पहले तो मेरे लिंग को अपने योनि से हल्के हल्के घिसा , जब मैं उत्तेजना मे हल्की हल्की सी सिसकिया लेने लगा था तो उन्होने अपने उस छेड़ मे मेरे लिंग को प्रवेश दिलाया जिसके बाद हम दोनो के बीच के हर दीवार हमेशा के लिए टूट जाने थे ..

मेरे लिंग की चमड़ी भाभी की योनि से घिसते हुए अंदर जाने लगी थी , मेरे लिंग मे एक संवेदना का संचार हुआ और

“आअहह भाभी .. मेरी जान .. उम्म्मा आ अया “

मेरे मूह से अनायास ही ना जाने क्या क्या निकलने लगा था , आज तक मुझे ऐसा अहसास कभी नही हुआ था, मुझे पता था की योनि मे लिंग के जाने पर कैसा अहसास होता है लेकिन ये अहसास कुच्छ अलग ही था, मैं उनके अंदर पूरी तरह से धँस चुका था,

उनकी योनि और मेरा लिंग एक दूसरे मे ऐसे कसे हुए थे जैसे की वो कोई दो नही बल्कि एक ही अंग हो , उनकी योनि ने एक तेज धार छोड़ी और वो सिथिल हो गई ..

उनके चेहरे पर एक अजीब से आँड का अतिरेक नाचने लगा था ..

उनकी आँखे बंद थी और होंठो पर एक मुस्कान , ऐसा लगा जैसे भाभी ने बहुत सारा गर्म पानी छोड़ा हो , मैने एक बार अपने लिंग को बाहर खींचा उसे भाभी के योनि के झरने से बहते हुए पानी से भीगो कर फिर से उनके योनि की दीवारो से रगड़ने लगा ..

इस बार मैं आसानी से अंदर बाहर हो रहा था . मेरे कमर एक लय मे चल रहे थे ..

थोड़ी देर तक तो भाभी भी आँखे बंद किए हुए ही लेटी रही फिर उनकी हल्की हल्की सी आ अह्ह्ह निकलने लगी थी , जैसे जैसे मेरे कमर की तेज़ी बढ़ती गयी वैसे वैसे ही उनकी आँहे भी तेज होने लगी थी ..

मैं हांफे जा रहा था उन्होने मुझे कसकर जकड़ लिया था , हम दोनो ही एक दूसरे मे घुलने लगे थे , ज़स्बत कभी आँखो से आँसू बनकर बहते तो कभी अह्ह्ह बनकर निकल जाती , भाभी की आँखो मे पानी था और होंठो मे एक हल्की सी मुस्कान , वो मुझसे ऐसे जकड़े हुए थी जैसे कभी अलग ही नही होना चाहती हो ..

मैं और जो जोरो से धक्के मारे जा रहा था जैसे ये मेरी आखरी रात हो , ये मेरा आखरी मौका हो ये मेरे आखरी जन्नत हो … ये जीवन का आखरी पल हो ..

मैं हाँफ रहा था वो हाँफ रही थी , हम दोनो ही एक दूसरे मे समा रहे थे , अपने दांतो और नाखूनों से वो मेरे जिस्म मे प्यार के कई निशानिया छोड़े जा रही थी , और तभी

“अरे मादरचोद ये साले कौन है पटरी मे चुदाई “

किसी की आवाज़ हमारे कानो मे आई थी , ऐसा लगा जैसे कई लोग एक साथ झुंड बनाकर हमारे ओर आ रहा थे

“आ आ सोनू मेरे बेटे और जोरो से “

“हा मेरी जान , हा मेरी जान आ आ आ “मैं और भी जोरो से धक्के लगाने लगा था

तभी उन्होने अपने अपने टॉर्च हमारे ओर घुमा दिए

“अरे मादरचोद ये लोग तो वही है ना जिन्हें हमे संपत ने खोजने भेजा है , तस्वीर निकाल तो बे “

वो हमारे बिल्कुल ही नज़दीक खड़े थे

“सोनू रुकना मत बाबू आहाआ आ मैं तेरी हू बाबू मैं तेरी हू आज सॉरी मैने तुझे इतने दिनों तक तड़पाया आ मेरी जान “

मैं अपने कमर को और भी तेज़ी से चलाने लगा था ,योनि और लिंग के रगड़ से एक मधुर सी आवाज़ पैदा होने लगी थी, कामरस निकल कर बिखरने लगा था और उस घर्षण से च्चप च्चप की आवाज़ पैदा होने लगी थी ..

“अबे मादरचोद ये लोग तो वही है देखो , पकड़ो इन्हे “

वो हमे घेर कर खड़े होने लगे थे

“आ भाभी आ भाभी , मेरी जान मैं निकलने वाला हू “

मैं अपने तेज़ी के चरम पर था

“आजा मुझे भिगो दे बाबू… आआआः मेरे सोनू .. आ आ एयेए जा आ जा मेरे बेटे “

भाभी ने मुझे जोरो से जकड़ लिया था मैं बस उनके योनि के अंदर च्छुटने वाला था

“अरे ,मादरचोदो उठो … “

किसने एक लात मेरे पिच्छवाड़े मे लगा दी

“आ भाभी मैं आ रहा हू “

मैं जोरो से चिल्लाया

“आजा मेरे बेटे आज भिगो दे मुझे “

भाभी चिल्लाई

“,मादरचोदो को मारो ऐसे नही सुनेंगे “

वो चिल्लाए

“आ भाभी …”

मेरे अंदर का एक सैलाब निकला और मैं जोरो से भाभी के अंदर ही झड़ने लगा …

“आ मेरी जान “

उन्होने मुझे और ही जोरो से अपनी ओर खींच लिया ..

तभी एक डंडा घूमते हुए आया लेकिन ……………..

मैं आराम से भाभी के ऊपर ही गिर गया था , मेरे पीठ मे पड़ने वाले डंडे को भाभी ने हाथो से रोक लिया था, एक हाथ से उन्होने मुझे जकड़ा हुआ था ..

“आई लव यू भाभी “

मैं उनके होंठो को हल्के से चूमते हुए बोला

“आई लव यू मेरी जान .. मेरा प्यारा बाबू ,मेरा सोनू “

उन्होने भी मेरे होंठो को अपने होंठो मे भर लिया

“अबे देख क्या रहे हो सालो एक साथ मारो “

जिसने डंडा चलाया था वो चिल्लाया , भाभी ने तुरत ही मुझे साइड कर दिया था वो ऐसे खड़ी हुई जैसे उनके अंदर कोई बिजली का करेंट दौड़ रहा हो ..

मैं अभी भी अपनी साँसे संभाल रहा था, उन लोगो ने टार्च जलाया हुआ था जिसके प्रकाश मे मुझे दिखाई दे रहा था की कोई 10-15 लोग थे . सभी के हाथो को डंडे थे कुछ शायद बड़ी बड़ी बंदूकें भी पड़के हुए थे..

इससे पहले मैं कुछ करता सभी ने एक साथ हमारे ऊपर डंडा चला दिया , भाभी नग्न ही थी बाल फैले हुए थे,

उनका गोरा बदन और बड़े निकले हुए पिच्छवाड़े को देखकर मेरा लिंग फिर से खड़ा होने लगा था , मेरी नज़र उनके नंगे बदन पर ही टिकी हुई थी ..

“वाउ ..” मेरे मूह से अनायास ही निकल गया था चारो तरफ़ दुश्मन थे लेकिन मैं उनके उठे हुए नितंबों को निहार रहा था ,मेरे मूह मे पानी आने ल्गा , मैं थोड़ा ऊपर उठा और उन्हे मुलायम गद्देदार नितंभ को चूम लिया ..

भाभी ने मेरे बालो को सहलाया

“बाबू थोड़ी देर रुक जा “

सभी डंडे एक साथ चले थे लेकिन भाभी ने अपने पैरो से साइड एक आदमी के गले पर वार किया,
 
“आ मर गया “ वो गिरा ही था की उसका डंडा उठा कर बाकी के वॉर को रोक दिया , एक ही झटके मे भाभी ने ऐसे डंडा चलाया था की सभी लोग तितर बितर हो गये थे ..

“,मादरचोदो को मार डालो “

उनमे से एक चिल्लाया , किसी ने तलवार तो किसी ने बंदूक हमारे ओर कर दी थी कुच्छ अभी भी डंडा लिए ही खड़े थे , मैं कुच्छ समझता उससे पहले ही मेरी नज़रे भाभी की झूलते हुए उरोजो पर पड़ गयी ..

जैसे कोइ आम किसी पेड़ पर लटक रहा हो , लेकिन फिर भी तना हुआ हो ,

भाभी तुरंत ही घूमी और

“आ मार डाला मादरचोद “

किसी का सर फटा , वो उच्छली और किसी के पैर तोड़ डाले ..

उनके हाथो मे एक तलवार थी शायद उसकी जिसका कभी कभी उन्होने पैर थोड़ा था..

एक गोली चली लेकिन बेकार गयी और दूसरे ही पल गोली चलाने वाले का सर हवा मे उड़ रहा था

सभी ऐसे खामोशी हो गये थे जैसे मौत को नाचते हुए देख लिया हो ..

मौत का सन्नाटा बिखरा हुआ था, टार्च का प्रकाश भाभी के जिस्म पर पड़ रहा था , यांका सभी के लिए जीती जागती नंगी मौत थी , गोरे जिस्म मे खून के छीन्टे बिखर रहे थे ..

लाल खून और गोरा रंग गजब ढा रहा था , अभी अभी खून की बूंदे उनके सुरहीदार कमर मे तैरती हुई उनके पिच्छवाड़े तक जा रही थी , मेरा लिंग फिर से अकड़ने लगा था ..

भाभी की नज़र मुझपर गयी , मैं ललचाई हुई आँखो से उन्हे देख रहा था उन्होने एक बार लिंग को देखा .. उनके होंठो पर मुस्कान आ गयी …….

“थोड़ी देर रुक जा बेटे जल्दी ख़त्म करती हू ये सब “

वो तुरंत ही एक्शन मोड़ मे आई और सभी जगह बस चींखे ही चीखे थी और थोड़ी ही देर मे एक आदमी उनके पैरो मे गिरा पड़ा था ..

“माफ़ कर दो मुझे माफ़ कर दो मुझे “ वो रो रहा था

“तू वही है ना जिसने मेरे सोनू को लात मारी थी “

भाभी की बात सुनकर वो चुप हो गया उसने एक बार भाभी को देखा नंगे गोरे रंग का ये देख उसके साथियो के खून से भीगा हुआ था , वो मानो काँप ही गया था , उसका डर उसके आँखो से छलक रहा था ……

वो चुप ही रहा

भाभी ने उसके बालो को पकड़ लिया और उसके गले मे तलवार टीका दिया

“तूने अगर मुझे मारा होता तो शायद मैं तुझे माफ़ भी कर देती लेकिन तूने मेरे सोनू को चोट पहुँचाई “

और तलवार चला उसका सर उसके धड़ से अलग था , भाभी ने वो सर उठा लिया , मानो खून का झरना बह रहा हो , उन्होने सर उठा कर अपने जिस्म से ऊपर किया और उसका गर्म खून अपने जिस्म मे टपकने दिया , भाभी के चेहरे और बालो को छोड़ कर पूरा जिस्म ही खून से भीग चुका था , सर को फेककर वो मेरी ओर बढ़ने लगी ……….

ये वीभत्सय (घृणा के लायक ) था डरावना था लेकिन मेरे लिए नही , अभी मेरी मानो दशा अजीब ही स्थिति मे थी, मुझे बस भाभी का हुस्न दिख रहा था मुझे उनकी वो सुंदरता दिख रही थी , वो इठलाती हुई मेरे पास आई , खून से सना हुआ उनका बदन देखकर मेरा लिंग ऐसे आकड़े जा रहा था जैसे अब तब बाद टूट ही जाएगा ,

मेरे लिंग मे खून की तेज़ी इतनी बढ़ गयी थी की लगा जैसे नशो को फाड़ कर खून बाहर आने वाली है ..

मैने भाभी को दबोच लिया और उन्होने मुझे दोनो ने एक दूसरे के होंठो मे अपने होंठो को घुसा दिया था ..

मेरा लिंग सीधे उनके योनि से टकराया उन्होने खूद फिर से मेरे लिंग को अपने उस छेद मे घुसा दिया था ..

हम दोनो ही अभी खड़े थे और एक दूसरे से जुड़ चुके थे , मैने भाभी ने अपने पैर मेरे कमर मे फँसा लिए ..
 
मैं तेज़ी से धक्के दिए जा रहा था , चारो तरफ लोगो की लाषे पड़ी हुई थी , हम किसी के लाश मे खड़े थे किसी के हाथ पर , मैं उन्हे अपनी गोद मे ही उठाए हुए अपने से मिलने की कोशिस कर रहा था मैं चलते हुए एक पेड़ के पास पहुच गया ..

मैने भाभी को पेड़ से टीका दिया और जोरो से धक्के मारने लगा ..

“आ मेरा बाबू ज़ोर से बेटे और जोरो से “

वो उत्तेजना मे मानो रोने लगी थी , वही हालत मेरी भी थी मैं भी अपना पूरा ताक़त लगा रहा था ..

भाभी अपने पैर मेरे कमर से लपेटे हुए थी और उन्हे उचका उचका कर धक्के मार रहा था उनके हाथ मेरे गले से लिपटे हुए थे ..

उनके जिस्म का खून मेरे जिस्म से लग रहा था ..

“भाभी आई लव यू भाभी .. मैं आपके बिना नही जी सकता .. आ भाभी .. आ भाभी “

मैं उन्हे अपना बना लेना चाहता था और पूरी ताकत भी लगा रहा था और इसी उत्तेजना मे मानो पागल सा हो गया था ………..

हम दोनो ही अपने मे मस्त थे दुनिया जैसे हमारे लिए अब थी ही नही , हम दुनिया और दुनिया की सारी बंदिसो से आज़ाद हो चुके थे ..

हम मस्त थे अपनी ही मस्ती मे लेकिन दुनिया ……………

दो आँखे अब भी दूर से हमे देख रही थी लेकिन इसका इल्म ना मुझे था ना ही भाभी को …………
 
हम दोनो ही अपनी ही दुनिया मे मस्त थे , जब हवस का तूफान थमा तब तक सुबह ने भी अपनी रोशनी बिखेरनी शुरू कर दी थी , हल्की हल्की सी लालिमा आकाश मे दिखाने लगी थी ..

भोर का वक्त था और हम दो प्रेम के पंछी जैसे वक़्त से अंजान से बस अपने ही मस्ती मे मस्त थे , हम उसी पेड़ के नीचे एक दूसरे के जिस्म मे किसी डोर से लिपटे हुए बैठ गये थे …

तभी एक सरसराहट से हमारा ध्यान उस ओर गया , जब नज़र पड़ी तो बस जैसे ऐसा लगा की मेरे पैर से धरती ही खिसक गयी हो ..

वो आँखे मैं भूल नही भूल पाऊँ

इतना गुस्सा था उन आँखो मे , दर्द था , जैसे विस्वास टूटता हो , कोई सपना किसी ताश के महल सा टूट कर बिखर गया हो ..

वो दर्द लिए वो दो आँखे हमे घूर रही थी ..

मैं ही नही भाभी भी मानो सदमे मे थी…

उन दो नयनो से आँसुओ की धारा बहने लगी थी,

वो रोते हुए भागी लेकिन मैं चिल्ला उठा

“नेहा .. रुक जाओ “

वो नही रुकी मैं उसके पीछे भगा था उसके हाथो को पकड़कर अपनी ओर खींचा

“छोड़ दो मुझे .. तुम इतने गिरे हुए हो सकते हो मैने ये सोचा ही नही था और तुम्हारी भाभी … छी मुझे तो सोचते हुए भी शर्म आ रही है “

“नेहा जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नही है ,मेरी बात सो समझो “

“क्या समझू अंकित , क्या मैं अपनी इन आँखो से जो देखा है वो झूठ है … तुम मुझे क्या इतना मूर्ख समझते हो .. मैं भी कितनी पागल थी अंकित जो तुम्हारे प्यार के झूठे वादे मे फँस गयी , जब मैने तुम्हे सुस के साथ देखा था तभी मुझे समझ जाना था .. मैं सच मे पागल ही हू , मैं बेवकूफ़ ही हू “

वो रोते हुए जाने को हुई तभी भाभी बोल उठी

“नेहा रूको .. सुनो ये जो कुच्छ भी तुमने देखा वो आधा सच है .. आधा सच ये है की सोनू तुमसे बहुत प्यार करता है , लेकिन ये हमारा भाग्य है .. हम इसका क्या ही कर सकते है ……

इन लाषो को देखो .. तुम्हे क्या लगता है की कोइ आम इंसान इस तरह से विध्वंस फैला सकता है … नही .. लेकिन सोनू और मेरा ये मिलन और ये कत्लेआम ये सब हमारे नसीब का ही हिस्सा है नेहा .. हम इसका कुच्छ नही कर सकते “

नेहा ने भाभी को बड़े ही अजीब दृष्टि से देखा ..

“आपके कुच्छ भी बोलने से ग़लत सही नही हो जाएगा , आप दोनो तो मा बेटे जैसे रिश्ते मे बँधे हुए हो और एक दूसरे के साथ इस तरह से … च्चि , अगर आपके जगह कोई दूसरा होता तो शायद मैं मान भी जाती लेकिन यहाँ तो ……… मैं कैसे समझू की ये सही है ,कैसे मान लू की ये कुदरत का नियम है .. नही मैं ये नही मान सकती , अगर ऐसा होना था तो मुझसे प्यार का वादा ही क्यो किया, अगर तुम दोनो की किस्मत की लकीरे एक है तो मुझे इसमे क्यो शामिल कर लिया .. तुमने मुझसे धोखा किया है अंकित और मैं तुम्हे कभी भी माफ़ नही करूँगी …”
 
नेहा वहाँ से तेज़ी से निकल गयी , मैं बस उसे जाते हुए देखता रह गया था , मैं उससे कहता भी तो क्या कहता उसने अपनी आँखो से ये सब देखा था ………..

भाभी और मैं दोनो ही इस हादसे के बाद एक अजीब से असमंजस मे पड़ गये थे , एक तो हमारे बीच की सारी दीवारे गिर गयी थी लेकिन वही दूसरी ओर नेहा की कही बात भी सही थी , समाज की नज़रो मे तो हम अभी भी भाभी और देवर ही है , एक ऐसा रिश्ता जो मा-बेटे के समान होता है , समाज के नज़रो मे हमने मारियादा का उल्लंघन ही किया था हम पापी ही थे …

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आश्रम आने से पहले हमने पास ही एक झरने मे स्नान किया और अपने कपड़े पहन लिए , हम अपने रिश्ते को सभी से छुपा सकते थे लेकिन कुच्छ ऐसे भी लोग थे जिससे हम इसे नही छुपा सकते थे , इसलिए हमने कुच्छ लोगो को खुलकर बताने की सोची ..

कोमल , भुवन और डॉक्टर . चूतिया को हमने हमारे रिश्ते के बारे मे बताया और ये भी की कैसे भाभी ने वहाँ पर लाश बिछा दिए है ….

डॉक्टर . ने जल्दी से अपने कुच्छ लोगो को बोलकर लाषो को ठिकाना लगाने का काम कर दिया …..

“तुम्हारी शक्ति और तुम्हारा प्यार तुम्हे मिल गया ये तो अच्छी बात है “

कोमल भाभी के बालो पर अपने हाथो को फेर रही थी

“लेकिन मा क्या समाज हमारे इस रिश्ते को मंजूर करेगा और मैं सोनू की जिंदगी से खिलवाड़ नही कर सकती वो नेहा से प्यार करता है ऐसे मे मैं उसके साथ कैसे रह सकती हू “

भाभी रोने लगी थी , कोमल ने उसके कंधे को सहलाया

“बेटी समाज की चिंता करोगी तो फिर जियगी कैसे और जहाँ तक नेहा की बात है वो सब तो किस्मत पर ही छोड़ दे , अभी से कुच्छ भी कहना सही नही है … तुम दोनो ही एक दूसरे को पूर्ण करते हो ऐसे मे तुम दोनो अगर एक दूसरे से अलग रहोगे तो जी नही पाओगे , ना जाने किस्मत क्या खेल दिखाएगा .. “

इन सभी बातों के बीच मेरे फोन की घंटी बज उठी थी

देखा तो काजल का नंबर था

“हेलो …”

“हेलो अंकित जो तुम्हे और आकाश को फोन करके धमकी दे रहा था हमने उसे विकाश की मदद से गिरफ्तार कर लिया है ..

बहुत ही चालाक था साला इंटरनेट अलग अलग लोकेशन करके कॉल कर रहा था लेकिन उसने फिर से आकाश को कॉल किया और विकाश ने उसे डार्क वेब के ज़रिए जाल बिच्छा कर पकड़ लिया है , तुम जल्दी आ जाओ ,पूर्वी ने उसे अपने कस्टडी मे रखा हुआ है मुझे तो वहाँ जाने नही देगी अगर तुम आ जाओ तो शायद हम वहाँ जा सकते है “

मेरा तो मूह खुला का खुला रह गया था

जब मैने ये बात बाकियो को बताई तो वो लोग भी खुश हो गये थे . तभी नेहा और उसकी मा महिमा भी वहाँ पहुच गये ..

नेहा ने मुझे बिना देखे ही बोलना शुरू किया

“आकाश ने मुझे फोन किया था उसने बताया की जो उसे कॉल करके धमका रहा था वो पकड़ा गया है .. मैं उसके पास जा रही हू ..”

डॉक्टर . ने उसके कंधे पर हाथ रखा

“अब तुम लोगो के वापस जाने का वक्त आ गया है लेकिन याद रखना अभी तुम सबको एक साथ ही रहना होगा “
 
पूर्वी के ऑफीस के बाहर ही हमे अक्की और काजल मिल गये ..

बाकी लोग डॉक्टर . साहब के साथ सुरक्षित जगह पर थे , केवल मैं और नेहा वहाँ आए हुए थे, नेहा सिर्फ़ इसलिए आई थी क्योकि मामला अक्की से जुड़ा हुआ था और वो उससे मिलना चाहती थी ..

“तो अंदर चले “काजल ने कहा था

हम अंदर गये पूर्वी ने पहले तो काजल को देखकर नाक सिकोडा लेकिन फिर मुझसे बात करने लगी

“तो इसने तुम्हे जानकारी दी की हमे उस कातिल को पकड़ लिया है “

“जी हा , ऐसे आप ने तो कहा था की वो बहुत ही शातिर है इंटरनेट से कॉल करता है और लोकेशन हर सेकेंड मे बदलता है फिर उसे कैसे पकड़ लिया , और ये जानकारी आपको हमे देनी थी जो काजल जी ने हमे दी “

मेरी बात सुनकर पूर्वी ने एक बार काजल की ओर देखा जो की बस मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी

“देखो अंकित पहली बात तो इस केस से तुम लोगो का कोई वास्ता नही होना चाहिए , तुम क्यो फालतू के झमेलो मे फँस रहे हो , तुम लोग स्टूडेंट्स हो अपनी लाइफ को एंजाय करो, ऐसे ख़तरे उठाना तुम लोगो के ठीक नही होगा…

विकाश ने उसे ट्रेस कर लिया , हमने तो बहुत ही पूछताछ की लेकिन उसने अभी तक मर्डर को लेकर कुच्छ भी नही बोला है ..

कई तरह से टॉर्चर दिए लेकिन नही टूटता , बहुत ही सख्त और शातिर है साला ”

पूर्वी के चेहरे मे एक गुस्सा आया , तभी काजल बोल उठी

“पहली बात तो मर्डरर वो नही है, सारे मर्डर एक औरत ने किए है , तो तुम उसे कितना भी मारो वो मूह नही खोलेगा क्योकि शायद उसे कोई बात पता ही ना हो ……. तुम अपनी पुलिसगिरी से बाज नही आओगी ,बस लोगो के हाथ पैर तोड़ दो , पहले जान तो लो की वो है कौन , और पहले तो तुम्हे ये पुच्छना था की उसने अंकित और अक्की को कॉल क्यो किया था, और वो लड़की कौन है जिससे उसने इन्हे बार बार दूर रहने के लिए कहा था …..

मुझे पता है की तुमने उसे ये सब तो पूछा भी नही होगा बस उसे मर्डरर मान कर उसको तोड़ना शुरू कर दिया होगा “

काजल की बात से पूर्वी जैसे जल भुन ही गयी

“तुम मुझे मत सिख़ाओ की मुझे कैसे काम करना है , मैं ओं ड्यूटी पुलिस ऑफीसर हू वो भी क्राइम ब्रांच की और तुम पुलिस डिपार्टमेंट के कर्तव्यो को छोड़कर भागने वाली एक भगोड़ी औरत …”

पूर्वी गुस्से से लाल हो गयी थी

“माइंड युवर लॅंग्वेज पूर्वी … वो तुम और वेदांत थे जिनके कारण मुझे ये फोर्स छोड़ना पड़ा , अरे विकाश ने तुमसे रिश्ता तोड़ कर मुझसे जोड़ लिया तो इसका मतलब ये नही हुआ की मैं ग़लत हू ..

और याद रखना की आज भी मेरे नाम पर कारनामे है जो मैने फोर्स मे रहते हुए किए है , आज भी पूरे पुलिस फोर्स मे अब तक के सबसे तेज इन्वेस्टिगेटर मेरा नाम शुमार होता है..”

“ऊ बड़ी आई , सब जानती हू मैं अपने मिया मिट्ठू ना बनो ..

मेरे बाय्फ्रेंड को अपने हुस्न के जाल मे फँसा कर मुझसे दूर कर दिया था तुमने वरना ओह्ह्ह्ह तो बेचारा दूसरी लड़कियो की तरफ देखता भी नही था “

पूर्वी के चेहरे मे जहाँ दुख आ गया वही काजल के चेहरे मे एक कमिनी सी मुस्कान खिल गयी

“यानी की तुम मान रही हो की मैं तुमसे ज़्यादा खूबसूरत हू “
 
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