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Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

रात के करीब 12 बज रहे थे जब भुवन वहाँ आया , उसके साथ कुछ लड़के और थे , वो बियर की पूरी करीब 10 पेटी वहाँ रखकर चले गये …

“अरे ये सब क्या है “ मैं अपने कमरे मे अकेले थी असल मे ये मेरा कमरा नही था लेकिन मेरे लिए खाली करवाया गया था ..

“अरे इसे सुबह हॉस्टिल के फ्रीज़र मे रखवाना है ताकि कल शाम को यहाँ की लड़कियो को बियर की पार्टी दिया जाए “

भुवन की बात सुनकर मेरा मूह खुला का खुला रह गया

“पागल है क्या लड़किया ये पिएंगी …. किसी को पता चला ना तो इनके मा बाप इन्हे कॉलेज से खिचकर घर ले जाएँगे ..”

वो दौर था जब लड़किया ज़्यादा पढ़ाई नही करती थी , सिर्फ़ पढ़े लिखे घर की लड़किया ही कॉलेज जाया करती थी , उस समय लड़कियो का बियर या सिगरेट पीना बहुत बोल्ड कदम माना जाता था , मजेदार बात ये है की कही कही आज भी ऐसा ही माना जाता है …

“अरे फिकर ना कर सब पीती है “

हम दोनो ही हॉस्टिल के छत पर बैठे तारो को देख रहे थे, आसमान मे तारे चमक रहे थे और हमारे हाथो मे बियर की बॉटल ..

“भुवन अगर मेरे जीवन मे सबसे ज़्यादा कोई अहमियत रखता है तो वो तू है “

मैं हल्के नशे मे आ चुकी थी और भुवन के लिए मेरा प्यार उमड़ने लगा था ..

भुवन मेरी बात सुनकर बस हल्के से मुस्कुराया

“अच्छा और तिवारी “

“तिवारी क्या ??” मैं उसके बात से चौक गई थी

“जिस तरह से तू उसे देखती है तेरी आँखे तो कुच्छ और ही कहती है “

भुवन की बात सुनकर मैं थोड़ा घबरा गयी थी , मैं जानती थी की वो मुझे प्यार करता है लेकिन कभी कहता नही , उसके आवाज़ की उदासी भी इसका सुबूत थी ..

“देख भुवन अभी मैं..”

“कोमल मैं तुझसे प्यार करता हू “ भुवन ने एक ही सांस मे कह दिया था .. मैं स्तब्ध ही उसे देख रही थी मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं उसका क्या जवाब दूं, वो मेरा बेस्ट फ्रेंड था , बचपन से उसने मेरे खुद के भाइयो से ज़्यादा मेरी हिफ़ाज़त की थी, मैं उसका दिल नही दुखाना चाहती थी ..

“मैं जानता हू कोमल की तुम भी ये जानती हो , और ये भी जानता हू की तुम मुझे प्यार नही करती … और मैं शायद ये कभी तुमसे ना कहता लेकिन ……. “

मैने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा ..

“तू मेरे जीवन का एक बहुत ही अहम हिस्सा है भुवन और हमेशा रहेगा .. तू ऐसे दुखी ना होना , मैं किसी की भी रहु लेकिन दोस्त मैं हमेशा तेरी ही रहूंगी ..”

भुवन के चेहरे मे हल्की सी मुस्कुराहट आई उसने मेरे गालो को थाम लिया और हल्के से एक चुम्मन मेरे माथे मे कर दिया ..

“दया शंकर मुझे सही लड़का नही लगता कोमल, मैं जानता हू की तू उसे पसंद करती है लेकिन वो अलग ही तरह का कमीना है , अपने फ़ायदे के लिए कुच्छ भी कर सकता है “

भुवन ने पहली बार दया शंकर के बारे मे मुझसे कोई बात की थी

“शायद हा वो कमीना है लेकिन क्या मेरे लिए भी , मतलब मुझे तो लगता है की वो मुझसे प्यार करता है ..”

“हो सकता है लेकिन कोई भी फ़ैसला बहुत ही सोच समझ कर लेना कोमल , मैं तुम्हे दुखी नही देख सकता “

भुवन की इस बात से मैं उसके सीने से लग गयी , अब ये शराब का नशा था की हमारे बीच का दोस्ताना की मैं अपना दिल खोल कर उससे प्यार जताना चाहती थी ..वो अपनत्व जताना चाहती थी जो एक दोस्त मे होता है ..

वो भी मेरे बालो को सहला रहा था ,

“फिकर मत करो तुम तो हो ना मुझे हर मुसीबत से बचाने वाले “

मैने मुस्कुरा कर उसे देखा

“हा मैं तो तुम्हारे साथ हमेशा ही खड़ा रहूँगा लेकिन … लेकिन कोमल मैं नही चाहता की तुम्हारा दिल टूटे क्योकि दिल टूटने पर कोई किसी के काम नही आता , वो दर्द उसे भी भोगना पड़ता है जिसका दिल टूटता हो ..”

उसकी बात भी सही थी लेकिन प्यार भी तो ऐसी चीज़ है की करने वाला भी करने के लिए छटपटाता रहता है , और जब हो जाए तो फिर उस बेचैनी मे दर्द भरी आहे भरता है , जब अपने प्रेमी से मिलता है तो उसकी ख़ुसी मे खुस होता है और फिर बिच्छुड़ने पर उस दर्द से दुखी होता है..

अजीब सा मामला है प्यार का , लेकिन अभी मेरे लिए ऐसा नही था ,मेरे पास सोचने समझने के लिए समय था , मेरे साथ भुवन था जो मुझे सही सलाह दे सकता था ..

लेकिन दिक्कत ये थी की क्या मैं उसके सलाह को मानती ???

और यही डर भुवन के मान मे भी था ………

इसी सोच मे डुबे हुए मैं भुवन के बाँहो के घेरे मे दबी हुई थी की ..

“दया शंकर ..”

भुवन ने ऐसे कहा जैसे उसने तिवारी को देखा हो , मैं उससे अलग हुई तो छत के नीचे खड़ा हुआ दया शंकर हमे दिखाई दिया वो हमे ही घूर रहा था ..

रात के आँधियरे मे ना जाने उसने क्या देखा था लेकिन ये बात तो साफ थी की उसने हमे पहचान ज़रूर लिया था , और बस वही स्तब्ध सा खड़ा था ….

भुवन ने चिल्लाकर उसे बुलाया लेकिन वो बिना कुछ बोले ही वहाँ से निकल गया …………

मैं और भुवन दोनो ही समझ गये थे की तिवारी ने हमारे बारे मे क्या सोचा लिया है ……….
 
चुनाव के एक दिन पहले

दया शंकर मुझसे और भुवन दोनो से ही ठीक से बात नही कर रहा था , ऐसा नही था की वो हमे इग्नोर कर रहा था, नही वो बस जैसे अपने एमोशन्स को छुपा रहा हो ..

अपने को ज़बरदस्ती बिज़ी करने की या दिखाने की कोशिस कर रहा था लेकिन काम मे उसका दिल भी नही लग रहा था ..

हमने उससे बात करने की और बात को क्लियर करने की भी कोशिस की लेकिन उसने बात को टाल दिया ..

हमने सोच लिया था की चुनाव के बाद ही इस बारे मे बात करेंगे ..

इधर चुनाव की गहमा गहमी भी अपने चरम मे थी ,मेरे और दया शंकर के अलावा हमारी पार्टी के सभी कॅंडिडेट अंडरग्राउंड कर दिए गये थे ..

तभी हमे पता चला की खुद एम एल ए उससे मिलने आया था ..

दोनो ने कमरे मे अकेले मे बात की , ऐसे भी दया शंकर टेन्षन मे था लेकिन एम एल ए से मिलने के बाद वो और भी बेचैन दिख रहा था,

“क्या हुआ क्या बोला उसने “

सभी के मान मे एक ही प्रश्न था

“उसने मुझे एक ऑफर दिया है ..”

“कैसा ऑफर ??”

“यही की चुनाव हार जाऊ ..”

“क्या ??”

सभी स्वाभाविक रूप से चौक गये

“और बदले मे उसने तुम्हे क्या देने की बात कही है “

भुवन मानो गुस्से से आग बाबूला हो रहा था

“उसकी पार्टी के छात्र संघ के अध्यक्ष की पोस्ट “

तिवारी ने बड़े ही शांति के साथ कहा था ..

सभी की आँखे तिवारी पर ही लगी हुई थी , उसने एक बार मुझे घूरा उसकी आँखे ऐसी थी जैसे वो मुझमे गहराई से झाँक रही हो ….

“हम सभी ने इसके लिए बहुत मेहनत की है दया , ये फ़ैसला सिर्फ़ तुम्हारा नही हो सकता .. “

भुवन ने फिर से जोरो से कहा

“हा और हम ये चुनाव जीत कर रहेंगे .. ऐसे भी मैं जीवन मे सभी मोर्चो मे एक साथ तो नही हार सकता , कही ना कही तो अब जीतना ही है “

ये कहते हुए उसने मेरे आँखो मे देखा था , मैं समझ सकती थी की वो क्या बोलना चाहता है …

शाम हो चली थी और एम एल ए तक भी ये बात जा चुकी थी की तिवारी एलेक्षन से नही हट रहा था और उसने अपनी तरफ से धमकिया भी भिजवा दी .. ये सब तो चलता ही रहता था ..

शाम झमाझम बारिश हो होने लगी थी ……

“दया मुझे हॉस्टिल तक छोड़ आओ “

उसने मुझे अजीब निगाहो से घूरा

“भुवन को ले जाओ , या किसी को भी ले जाओ पास ही तो है “

“नही तुम ही चलोगे “

“देख नही रही हो कल एलेक्षन है और इतना काम है “

वो कुच्छ और भी बोलने वाला था की मैने उसका हाथ पकड़कर उसे उठा लिया था ..वो बड़े ही असमंजस से मुझे देख रहा था लेकिन मैं जैसे उसे लगभग घसीट ते हुए बाहर ले गयी ..

“ये क्या बदतमीज़ी है “

वो कुच्छ बोलता उससे पहले मैने उसे एक दीवाल से सटा दिया , ये बॉय हॉस्टिल का एक कोना था जहाँ अभी अंधेरा हो गया था बारिश के कारण हमारे शरीर भी भीग गये थे ..

दूर जल रहे एक स्ट्रीट लाइट से छन कर आने वाली रोशनी मे उसके चेहरे मे उभरते हुए भाव को मैं साफ साफ देख सकती थी , उसके माथे पर पसीना था शायद मेरे माथे पर भी होगा ..

वो कुच्छ समझने की कोशिस कर रहा था ..

“तुम ये क्या कर रही हो कोमल ?”

“मैं बस तुम्हे ये बताना चाहती हू की जो तुमने कल देखा वो सही था लेकिन जो तुमने समझा वो ग़लत था “

उसके चेहरे मे बड़े ही निर्जीव भाव आए , जैसे उसे अब कोई मतलब ही नही रह गया हो /..

“मुझे सफाई क्यो दे रही हो कोमल , ये तुम्हारी जिंदगी है और तुम जिसके साथ भी चाहो जी सकती हो ..”

“मैं सफाई क्यो दे रही हू ???”

मैने उसकी आँखो मे देख कर कहा था ,
 
“भुवन मेरा बेस्ट फ्रेंड है दया , क्या मैं अपने दोस्त के बाहों मे अपना सर भी नही रख सकती .. तुमने बस ये ही देखा था लेकिन तुमने ना जाने क्या समझ लिया “

वो थोड़ी देर तक मेरे चेहरे को देखता रहा

“ये सब मुझे क्यो बता रही हो , मुझे बहुत सारे काम है तुम जाओ यहाँ से ..”

उसने मुझे खुद से थोड़ा दूर हटाने की कोशिस की और तभी मैने जैसे एक फ़ैसला कर लिया था ..

मैने उसे पूरी ताक़त से दीवार मे सटा दिया , शायद उसका सर भी दीवार से टकरा गया था ..

“अऔच ये क्या कर रही हो “

वो थोड़ा बौखलाया लेकिन मैने उसकी एक भी ना सुनी मैने बस उसके गालो को अपने हाथो से दबा लिया था और उसके होंठो पर अपने होंठो को भर दिया , उसकी छटपटाहट जैसे एक ही पल मे बिल्कुल ही शांत हो गयी हो ….

मैं उसके होंठो को बस चूसे जा रही थी , मेरी आँखे बंद थी वही हाल शायद उसका भी था , उसके हाथ अपने ही आप मेरी कमर पर आ गये थे वही मैं उसके गले मे अपने हाथ फँसा कर खड़ी थी ..

तभी मुझे अहसास हुआ की कोई हमे देख रहा है ..

जब किस टूटी तो मैने उस ओर देखा , वो भुवन था ..

दूर खड़े भुवन के चेहरे पर आई उदासी को मैं वही से खड़े हुए भी महसूस कर सकती थी , तिवारी ने भी उस ओर देखा , मैं उसके ओर जाने को मूडी ही थी की भुवन खुद ही मूड गया और मुझसे दूर जाने लगा ..

“भुवन … “ मैं हल्के से चिल्लाई , मैं जानती थी की अभी वो दुखी है लेकिन मैं ये भी जानती थी की वो मुझे समझ सकता है , वो जानता है की प्यार ज़बरदस्ती से नही किया जाता ..

प्यार बस हो जाता है या फिर नही होता , लेकिन अभी … अभी वो दुखी था बहुत दुखी था और अभी शायद उसे मेरी ज़रूरत थी ..

या फिर बस अकेले ही रहने की ज़रूरत थी ???

तभी मेरी नज़रें और कही पड़ी और मैं फिर से चिल्ला पड़ी

“भुवन ..”

इस बार मैने अपनी पूरी ताक़त से चिल्लाया था … लेकिन भुवन ने मानो ना सुनने की कसम ही खा ली हो ..

उसके सामने एक जीप आकर खड़ी हो गयी थी , उसमे एम एल ए का बाबू और उसके दोस्त थे सभी के हाथो मे अलग अलग तरह के हथियार थे , एक लड़के ने बंदूक की नोक सीधे भुवन के ऊपर टीका दी थी लेकिन भुवन था की अपनी ही दुनिया मे खोया हुआ उनके ही ओर चले जा रहा था ..

“भुवन रूको …नही ..”

इस बार मेरे साथ साथ तिवारी भी चिल्ला उठा लेकिन तभी

‘ढायं…. ‘

गोली की एक आवाज़ से पूरा महॉल गूँज गया ..

और मैं जिस अनहोनी के बारे मे सोच रही थी जाइए वही घट गयी .. गोली सीधे भुवन के कंधे पर जा टकराई …

उसे मानो अचानक ही होश आया हो , इससे पहले की वो कुछ समझ पाता गाड़ी और पास आती गयी और एक लड़के ने तलवार लहराई और साइड भुवन के छाती पर दे मारा .. भुवन उस वार से मूड गया था मैं उसके ही ओर भाग रही थी उसका चेहरा मेरे सामने आ गया था वो गिर रहा था ज़मीन मे गिर रहा था , मैं उसके ओर दौड़ रही थी ..

“नही भुवन ..”

लेकिन मानो सुनने वाला कोई नही था , गोलियो की आवाज़ से कुच्छ लड़के बाहर आ गये थे लेकिन अभी इन सबको हुए कुच्छ ही सेकेंड्स तो हुए थे अभी तक कोई भी पूरी तरह से समझ नही पाया था की वो क्या करे ..

वो लोग तलवार मारकर तिवारी को चिढ़ाने के लिए वही खड़े हो गये थे , मैं भुवन तक पहुच चुकी थी ..

मेरे बचपन का दोस्त मेरे गोद मे लहू से नहाया हुआ पड़ा था , कंधे मे एक गोली लगी थी और छाती मे तलवार वार किया गया था..

मैं उसके चेहरे को देखे जा रही थी , उसे जगाने की कोशिस कर रही थी .. तभी ..

“,मादरचोदो बोला था की मुझसे मत टकराओ ..अब तू भी मर “

ये एम एल ए का लड़का था जिसने अब बंदूक की नोक दया के तरफ़ कर दी थी ..

“कमीने ..” मैं चिल्लाई जैसे मेरे अंदर से कुच्छ फूट गया हो …

मैं खड़ी हो चुकी थी जो लोग अभी तक तिवारी की ओर देख रहे थे वो अब मेरी ओर देख रहे थे ..

“नही कोमल ..” दया चिल्लाया था लेकिन अभी तो मेरे सर पर खून सवार था और मेरी नज़रो मे अभी भी भुवन का वो चेहरा झूल रहा था .. मैने पास ही पड़ा हुआ रोड उठा लिया था ..

वो लोग पास मे ही थे और कोई कुच्छ समझ पता उससे पहले ही मैं उन तक पहुच गयी थी , उसने अपनी पिस्टल की नोक मेरे ओर मोधी ही थी लेकिन उससे पहले ..

“आआहह” उसने मूह से एक चीख निकली थी , मैने सरिया सीधे उसके चेहरे मे घुसा दिया था ………

उसके दोस्त तुरंत ही आक्टिव हो गये थे , उन्होने मुझपर तलवारो से वार किया लेकिन मैने झट से उसके ही तलवार को उसके ही पेट मे घुसा दिया , मेरे हाथो मे वो पिस्टल आ गयी जो अभी अभी सरिया घुसने से एम एल ए के बेटे के हाथो से छूट गयी थी , और जैसे मैने अपना आपा खो दिया हो .. मैने जीवन मे पहली बार बंदूक चलाई थी ..

‘ढायं ढायं ढायं ढायं ढायं …’5 गोलिया लगातार

अब तक पूरा हॉस्टिल ही बाहर , तिवारी स्तब्ध सा किसी मूर्ति की तरह खड़ा हुआ बस मुझे ही देख रहा था , गोलियो के शोर के बाद महॉल मे बस सन्नाटा था ………..

गोलियो ने 3 तीनों के चिथड़े उड़ा दिए थे , जिसमे से एक एम एल ए का बाबू भी था , अभी तक उसके चेहरे पर वो सरिया घुसा हुआ था लेकिन उसकी जीवन लीला अब समाप्त हो चुकी थी , जिसके पेट मे तलवार घुसा था वो अभी तक छटपटा रहा था , खून से पूरी जीप ही नहा चुकी थी ,और 2 लोग काँपते हुए कोने मे का दुबके थे जैसे उन्होने काल को ही तांडव करते देख लिया हो …………
 
“ये क्या कर दिया तुमने ..” दया शंकर की आवाज़ अब भी काँप रही थी .. लेकिन मुझे उसकी बातों से कोई भी फ़र्क नही पड़ा, मैं तो बस भुवन को देखने के लिए दौड़ी .. बाकी के लोग भी बाहर आ चुके थे , तभी दो गोलिया और चली ..

मैने जब पलट कर देखा तो वो संपत था ..

“इन दोनो को क्यो बचा दिया था ..” उसके होंठो पर मुस्कान आ गयी थी..

भुवन को तुरत ही हॉस्पिटल के लिए ले जाया गया …

दया शंकर जैसे अभी भी स्तब्ध था वही मुझे जैसे कोई भी फ़र्क नही पड़ रहा था , मैं तो बस भुवन को सही सलामत देखना चाहती थी ..

मैं हॉस्पिटल मे आइक्यू के बाहर ही खड़ी हुई इधर उधर चल रही थी ..

तभी ..

“शाबास मेरी बहन मुझे तुझपर नाज़ है , आज तेरा भी उद्घाटन हो ही गया …”जीवा ने आते ही मुझे गले से लगा लिया , लेकिन मैने उसे अपने से दूर झड़क दिया ..

“देख कोमल जो हो गया अब तू उससे पीछे नही हट सकती , थोड़े ही देर मे बात हवा के जैसे फैलेगी और फिर एक तरफ़ एम एल ए बौखला जाएगा और दूसरी ओर करीम .. कब तक छिपेगी “

“तो क्या करू तुम लोगो के जैसे गॅंग्स्टर बन जाऊ “

जीवा मेरी बात सुनकर हँसने लगा

“अरे तू तो हमसे भी बड़ी गॅंग्स्टर बनेगी आख़िर तू हमसे ज़्यादा समझदार जो है क्यो संपत “

“सही कहा भाई “

दोनो ही हसने लगे …..

उन्होने दया को देखा

“जीतने लोगो ने ये सब देखा था वो तेरे ही लोग थे ना कोई बाहर वाले ने तो ये नही देखा था “

“नही भाई सभी दोस्त ही है , लेकिन पता नही कौन मूह खोल दे “

“बंद करवा .. मूह बंद करवा , समझा की जो इन लोगो के साथ हुआ वो उनके साथ भी हो सकता है इसलिए चुप रहे … और सब लाषो को तो ठिकाना लगा ही दिए है ,”

“हो जाएगा ..”

“अभी कोमल को यहाँ से निकाल कर किसी सेफ जगह पर ले जाना होगा “

जीवा ने मेरी ओर देखा था

“नही मैं कही नही जा रही हू , मैं भुवन के साथ ही रहूंगी “

“पागल मत बनो हम कितना भी लीपापोती कर ले , लीपापोती से पुलिस तो संभाल जाएगी लेकिन करीम और एम एल ए .. नही वो लोग तो तुम्हे हर हाल मे मौत के घाट उतारने को मचल रहे होंगे , ऐसे मे तुम्हारा यहाँ रहना ख़तरे से खाली नही है “

तिवारी की बात का मुझपर असर हुआ लेकिन मैं भुवन के बारे मे सोचने लगी ,

“जब उन लोगो को पूरी बात का पता चलेगा तो भुवन की जान को भी तो ख़तरा हो जाएगा ना , क्या वो लोग इसे छोड़ेंगे “

मेरी बात सुनकर सभी चुप हो गये थे , जीवा जानता था की मैं कितनी जिद्दी थी …

“ठीक है….शुरुआती इलाज करवा कर भुवन को भी तुरंत ही गायब कर देते है “

सभी ने सहमति मे सर हिलाया ..

डॉक्टर ने भुवन के घाव मे मरहम पट्टी कर दी , वो होश मे भी आ चुका था , कंधे मे घुसी हुई गोली निकाल दी गयी थी , अब भुवन जीवन भर अपने एक हाथ को अच्छे से नही चला पाएगा , लेकिन फिर भी जान का कोई ख़तरा नही था इसलिए आराम से किसी सेफ जगह ले जाया जा सकता था ……..

हम रातो रात गाँव आ गये थे जो की जीवा का गढ़ था ..

जब मेरी नींद टूटी तो सूरज निकल चुका था, मैं भुवन के बिस्तर से टिकी हुई ही बैठी थी , जब मैने भुवन की ओर देखा तो वो मुस्कुरा रहा था ….

“अब तबीयत कैसी है ..”

मैं मुस्कुराइ , उसका चेहरा सूरज की छन कर आती हुई धूप से जैसे खिल गया था .. क्या था इसके अंदर जो मुझे इतना आकर्षित कर रहा था , मैं तो दया शंकर से प्यार करती हू लेकिन ये …

मुझे इस पल ऐसा क्यो लगा की यही मेरी किस्मत है , जैसे ऊपर वाले ने ही इसे मेरे लिए बनाया है ……..
 
(उसी समय हाल मे बैठी हुई कोमल ने भुवन की ओर देखा , वो वैसे ही मुस्कुरा रहा था , खिड़की से सूरज की ताजी किराने छन कर आ रही थी ……… और वही बैठी आरती की नज़र अंकित पर गयी .. वो जैसे मंत्रमुग्ध होकर कोमल की बातों को सुन रही थी और उसे इस पल यही लग रहा था जैसे ये उसके साथ ही हो रहा हो )

उस पल मे कुच्छ था जो कुछ होगा था ..

तभी

“तुमने तो कल मेरी जान ही बचा ली “

कमरे मे कोई आया था , जब मैने निगाहे घुमाई तो वो दया शंकर था …

“मैने तुम्हारी जान बचाई ??”

भुवन के चेहरे मे प्रश्न वाचक चिन्ह आ गया

“असल मे तुम दोनो ने मिलकर , वो लोग मुझे ही मारने आए थे लेकिन सामने तुम आ गये , और कोमल ने तो जो किया … वाउ “

तिवारी की बात सुनकर मेरे होंठो मे मुस्कान उभर गयी थी ..

“ये तो ऐसे लड़ी जैसे लड़ना इसकी रोज की आदत रही हो .. कोई डर नही किसी तरह का हिचकिचाहट नही .. ऐसा लगा की तुम ये हमेशा से करते आई हो “

दया की इस बात को सुनकर मेरे चेहरे मे एक फीकी सी मुस्कान आ गयी थी ……….

मैने भुवन को गर्म पानी से सॉफ कर दिया था , इन दो दिनों मे ही भुवन के लिए मेरा प्यार बहुत ही बढ़ गया था , या ये कहो की दबा हुआ प्यार बाहर आ रहा था , हम आज भी दोस्त ही थे , लेकिन एक अपनत्व का अहसास जो अभी तक नही हुआ वो अब होने लगा था , शायद प्रेम भी तब ही बाहर आता है जब उसकी ज़रूरात हो …..

मैं उसे बिस्कुट और चाय खिला रही थी , मेरे हाथ मे आज का पेपर था ..

“तो आख़िर एम एल ए के बेटे की लाश मिल ही गयी , लेकिन ये क्या ??“

“क्या हुआ ..??”

भुवन भी पेपर की ओर ही देखने लगा ,, हमारे शहर की हेडलाइन वाली खबर के रूप मे इसे स्थान मिला हुआ था ..

“इनकी लाश शहर के बाहर हाइवे पर मिली , और शक्ति गेंग ने मारा …??”

मैं न्यूज़ पढ़कर कन्फ्यूज़ थी ..

“ये तो जीवा का ही काम है , उसी ने ये न्यूज़ बनवाई होगी ..”

भुवन हल्के से हँसता है

“हा लेकिन ये शक्ति गेंग क्या है .. शक्ति यही नाम मिला था उसे डालने के लिए “

भुवन जोरो से हंस पड़ा था
 
मैं मुस्कुराइ , उसका चेहरा सूरज की छन कर आती हुई धूप से जैसे खिल गया था .. क्या था इसके अंदर जो मुझे इतना आकर्षित कर रहा था , मैं तो दया शंकर से प्यार करती हू लेकिन ये …

मुझे इस पल ऐसा क्यो लगा की यही मेरी किस्मत है , जैसे ऊपर वाले ने ही इसे मेरे लिए बनाया है ……..

(उसी समय हाल मे बैठी हुई कोमल ने भुवन की ओर देखा , वो वैसे ही मुस्कुरा रहा था , खिड़की से सूरज की ताजी किराने छन कर आ रही थी ……… और वही बैठी आरती की नज़र अंकित पर गयी .. वो जैसे मंत्रमुग्ध होकर कोमल की बातों को सुन रही थी और उसे इस पल यही लग रहा था जैसे ये उसके साथ ही हो रहा हो )

उस पल मे कुच्छ था जो कुछ होगा था ..

तभी

“तुमने तो कल मेरी जान ही बचा ली “

कमरे मे कोई आया था , जब मैने निगाहे घुमाई तो वो दया शंकर था …

“मैने तुम्हारी जान बचाई ??”

भुवन के चेहरे मे प्रश्न वाचक चिन्ह आ गया

“असल मे तुम दोनो ने मिलकर , वो लोग मुझे ही मारने आए थे लेकिन सामने तुम आ गये , और कोमल ने तो जो किया … वाउ “

तिवारी की बात सुनकर मेरे होंठो मे मुस्कान उभर गयी थी ..

“ये तो ऐसे लड़ी जैसे लड़ना इसकी रोज की आदत रही हो .. कोई डर नही किसी तरह का हिचकिचाहट नही .. ऐसा लगा की तुम ये हमेशा से करते आई हो “

दया की इस बात को सुनकर मेरे चेहरे मे एक फीकी सी मुस्कान आ गयी थी ……….

मैने भुवन को गर्म पानी से सॉफ कर दिया था , इन दो दिनों मे ही भुवन के लिए मेरा प्यार बहुत ही बढ़ गया था , या ये कहो की दबा हुआ प्यार बाहर आ रहा था , हम आज भी दोस्त ही थे , लेकिन एक अपनत्व का अहसास जो अभी तक नही हुआ वो अब होने लगा था , शायद प्रेम भी तब ही बाहर आता है जब उसकी ज़रूरात हो …..

मैं उसे बिस्कुट और चाय खिला रही थी , मेरे हाथ मे आज का पेपर था ..

“तो आख़िर एम एल ए के बेटे की लाश मिल ही गयी , लेकिन ये क्या ??“

“क्या हुआ ..??”

भुवन भी पेपर की ओर ही देखने लगा ,, हमारे शहर की हेडलाइन वाली खबर के रूप मे इसे स्थान मिला हुआ था ..

“इनकी लाश शहर के बाहर हाइवे पर मिली , और शक्ति गेंग ने मारा …??”

मैं न्यूज़ पढ़कर कन्फ्यूज़ थी ..

“ये तो जीवा का ही काम है , उसी ने ये न्यूज़ बनवाई होगी ..”

भुवन हल्के से हँसता है

“हा लेकिन ये शक्ति गेंग क्या है .. शक्ति यही नाम मिला था उसे डालने के लिए “

भुवन जोरो से हंस पड़ा था
 
“ये तो तुम्हारे बचपन का नाम है ना “

“हा मेरे पिता जी मुझे शक्ति बोलते थे , ये जीवा भी ना पता नही मुझे गॅंग्स्टर बनाने पर तुला हुआ है .. और जब नाम रखना ही था तो कम से कम मुझसे तो पुच्छ लेता “

मैं मूह बनाते हुए कहा था लेकिन भुवन का चेहरा सच मे गंभीर हो गया ..

“क्या हुआ भुवन ??”

“बात नाम की नही है कोमल , बात तो काम की है ..?? क्या तुम सच मे ये काम करना चाहती हो , जीवा तुम्हारा उपयोग करना चाहता है, शक्ति का नाम देखकर तुमसे ना जाने क्या क्या ग़लत काम करवाएगा ..”

मैने हल्के से उसके गालो पर हाथ रखा

“तुम्हे क्या लगता है की मेरे इजाज़त के बगैर वो मुझसे कोई ग़लत काम करवा सकता है , और ऐसे भी मान तो एक सिंपल सी लड़की ही हू , मुझसे क्या ही काम करवाएगा ??”

भुवन ने एक गहरी सांस ली

“उम्मीद तो है की नही करवा पाएगा .. और अब तुम वो सिंपल सी लड़की नही रह गयी हो , जिसने भी तुम्हे देखा है तुम उसके लिए बदल गयी हो .. पता नही तुम्हारे अंदर क्या हो गया था उस समय जो तुम कोई अलग ही ताक़त मे तब्दील हो गयी थी .. और वही बात मुझे डराए जा रही है “

भुवन की बात सुनकर मैं हंस पड़ी

“वो तो इसलिए की मेरी जान की जान पर बन आई थी “

मेरे मूह से तो निकल गया था लेकिन ऐसा कहते ही मेरे दिल की धड़कन एक बार जोरो धड़क गयी थी .. वही हाल भुवन का भी था ..

लेकिन फिर उसका चेहरा फीका पड़ने लगा

“अजीब लड़की हो तुम , जान मुझे कहती हो और बाँहो मे किसी और के रहती हो “

भुवन ने हल्के आवाज़ मे ही कहा ,लेकिन मैं उसकी बात को समझ सकती थी

“देखो भुवन दया शंकर मेरा प्यार है , और तुम मेरे दोस्त .. तुम तो बचपन से मेरे लिए खास रहे हो , तुमने तो मेरी जितनी देखभाल की उतनी मेरे खुद के भाइयो ने नही की है , और ना ही शायद कोई और करेगा .. मैं तुमसे बहुत प्यार करती हू लेकिन क्या हर प्रेम जिस्मानी ही होता है …”

“पागल मैने तुझसे कब कहा की मुझे जिस्मानी प्यार चाहिए “

उसकी बात से मैं मुस्कुरा उठी

“हम दोस्त है भुवन और एक दोस्त की तौर पर मैं तुझे बहुत प्यार करती हू .. लेकिन दया मेरा .. मेरा बाय्फ्रेंड है और शायद कल को मेरा पति बनेगा …मैं उससे भी प्यार करती हू .. मुझे दोनो मे से एक को चुनने के लिए मत बोलना , मैं तुम दोनो को नही छोड़ सकती .. तुम दोनो ही मेरी जान हो “

भुवन ने मेरे हाथो को अपने हाथो मे थाम लिया …
 
“हूंम्म लेकिन तू जानती है की मैं तुझसे प्यार करता हू और मेरा प्यार सिर्फ़ दोस्ती वाला नही है “

उसका चेहरा रिलॅक्स था और होंठो मे थोड़ी शुरुआत

“जानती हू …. कमीने “

इस बार हम दोनो ही हंस पड़े थे ………

************

दिन गुजरने लगे थे , तिवारी और मेरे बीच के फ़ासले और भी कम होने लगे थे ..

तिवारी पूरी तरह से जीवा के साथ आ चुका था लेकिन भुवन और मैं अपने ही शर्तो मे काम करते थे , हमने सोचा की क्यो ना अपनी ताक़त का प्रयोग लोगो के हित के लिए भी किया जाए , इसलिए हमने अलग तरीके से अपनी गैंग बनाई और इस गैंग का एक विंग ग़रीब बच्चो को पढ़ाने का काम करता था , जीवा सभी के हाथो मे बंदूक थमाने को उतावला था लेकिन मैने उसे रोक कर बच्चो के हाथो मे किताबें थमा दी थी ..

हम सिर्फ़ करप्ट ऑफिसर्स को ही मारा करते थे , लेकिन मेरे साथ एक चीज़ बड़ी ही बेकार थी और वो था की अगर मैं किसी को मारने जाती तो समझो खून की नदिया बहती थी .. मैने कोई खास ट्रैनिंग नही ली थी लेकिन फिर भी जब मैं मारने पर आती तो पता नही मेरे अंदर एक ताक़त का संचार हो जाता ..

मैं जितना खून कर रही थी मेरे अंदर उतनी खून की प्यास बढ़ने लगी थी ,मुझे जान लेने मे मज़ा आता था … मैं बहुत ही बेरहमी से कतल करती और फिर उन्ही लोगो के खून से अपना नाम शक्ति लिख देती ..

एक बार जो वहसीपन मेरे अंदर आ जाता तो उसे बस भुवन ही काबू मे कर पाता था …

मेरे अंदर के शैतान को इस तरह बढ़ता हुआ देखकर भुवन चिंतित था … लेकिन दूसरे लोग नही , जीवा तो मेरा नाम लेकर ही काम करवा लेता था , तिवारी को भी इससे फ़ायदा ही हो रहा था , वो भी मेरा सपोर्ट करता था …….

जीवा गैंग तेज़ी से बढ़ने लगा था साथ ही शक्ति गेंग भी, इसमे मैने बहुत सी लड़कियो को भी दाखिल किया था … लड़किया मार काट से दूर अधिकतर कोई ऐसा काम करती थी जिससे उनकी भी आमदनी हो जाए और उनका भविष्य सवर जाए ..

मेरे दिल मे जहाँ एक तरफ़ प्रेम खिल रहा था लोगो के लिए सहयोगी की भावना जन्म ले रही थी वही दूसरी तरफ एक शैतान ने जन्म ले लिया था …
 
मेरे दिल मे जहाँ एक तरफ़ प्रेम खिल रहा था लोगो के लिए सहयोगी की भावना जन्म ले रही थी वही दूसरी तरफ एक शैतान ने जन्म ले लिया था …

हमारे दो सबसे दुशमन एम एल ए साहब और करीम बहुत हद तक कमजोर पड़ गये थे सभी मुझे मारना चाहते थे , लेकिन मैं अभी तक किसी के हाथ नही लगी थी ..

तभी जीवा ने एक ऐसा प्लान बनाया जिससे सब कुच्छ बदल गया, वो जीवा और तिवारी के साथ मेरा आखरी काम था …

एम एल ए को मार कर तिवारी को नया एम एल ए बनाने का प्लान जिसे पूरा करने की ज़िम्मेदारी मुझे दी गयी ……..

मैने अपनी तलवारे चमका ली थी प्लान बनाने का जिम्मा तिवारी और जीवा का था , आज भुवन बहुत ही उपसते लग रहा था हो भी क्यो ना हमे उसके घर मे घुस कर उसे मारना था .. लेकिन मेरे दिल मे जैसे कोई चीज़ कूद रही हो , मैं एम एल ए को अपने हाथो से काटने के लिए मारी जा रही थी ..

मैं और भुवन तिवारी के कर्मरे की ओर बढ़ गये थे , वहाँ जीवा और तिवारी पहले ही बाते कर रहे थे ..

और कुच्छ आवाज़े हमारे कानो मे आई , जैसे जैसे मैने उनकी बातों को सुना मेरे पैरो से मानो ज़मीन ही खिसकने लगी थी ………

भुवन ने मुझे संभाल रखा था उसने मुझे छुप रहने का इशारा किया लेकिन मेरी आँखो मे बस पानी था ………..
 
“इस काम मे बहुत ख़तरा है जीवा भाई एक बार फिर से सोच लीजिए आख़िर कोमल आपकी बहन है “

ये तिवारी की आवाज़ थी जो की मेरे कानो मे पड़ी , मैं अभी उसके कमरे मे ही जाने वाले थे आज एम एल ए के घर मे हमला करने का इरादा था सीधे सीधे लड़ाई आर या पार वाली कहानी थी ..

भुवन और मैं वही रुक गये थे ..

“बहन अरे कहा की बहन मेरा बाप मंदिर से उठा कर लाया था उसे ..”

“क्या ..” इधर तिवारी बुरी तरह से चौक गया था वही मेरे कानो को इस बात पर अभी भी विस्वास नही हो रहा था ..

“हा .. इसके मा बाप को किसी ने मार दिया था, तो पुजारी ने इसे उठा लिया … मेरे मा बाप धार्मिक आदमी थे , पुजारी ने उसे कहा था की ये कोई खास लड़की है , बहुत ताकतवर होगी और पता नही क्या क्या, इसके साथ एक पुस्तक भी दिया था पुजारी ने मेरे बाप को .. इसलिए मेरा बाप उसे शक्ति शक्ति बोलता रहता था .. मुझे भी लगता था की ये कोई खास होगी लेकिन कभी समझ नही आया की क्या खास होगा … लेकिन जब इसने उन लवांडो को मारा तब समझ आया की ये तो साली पूरी कातिल ही है … लोगो को ऐसे काटती है जैसे कोई गाजर मूली काट रहा हो , तब अपुन समझ गया था की इसमे क्या खास है और मेरा बाप इसका इतना क्यो ख्याल रखता था ..”

“हे भगवान “

तिवारी का मूह खुला का खुला रह गया था ,

“आपके पास वो पुस्तक है, क्या आपने कभी वो पुरस्ताक पढ़ी थी “

तिवारी जैसे कुच्छ सोच कर बोल उठा

“अरे कहा रे , वो तो संस्कृत मे थी और हमे कौन सा संस्कृत पढ़ना आता है … ऐसे भी अभी वो कहा है मुझे नही पता , कभी ज़्यादा ध्यान भी नही दिया था … ऐसे मेरा बाप बोलता था की जब शक्ति को उसका सच्चा प्यार मिल जाएगा तब उसकी शक्ति जागृत हो जाएगी , यही उसका भविष्य है … फिर जब मैने तुझे देखा तो समझ गया की अब उसके साथ कुच्छ हो सकता है और देख ………”

तिवारी बस जीवा को आँखे फाडे देख रहा था

“और ऐसे हमे इन सबसे क्या अपना तो काम हो रहा है ना , अब एम एल ए और करीम को मारकर मैं और तू इस शहर मे राज करेंगे , तू बस कोमल को कंट्रोल कर उसे प्यार मे फँसा कर रख ताकि हम जो भी बोले वो उसे बस चुपचाप करती जाए ..”

जीवा की बात सुनकर मेरे नशो का खून मेरे दिमाग़ मे दौड़ने लगा था , चेहरा तम तमा कर लाल हो चुका था , तभी भुवन ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा …

“नही कोमल , बिना पूरी जानकारी के कोई भी निर्णय लेना घातक हो सकता है “

उसकी बाते जैसे तपते हुए बर्तन मे पानी गिर गयी हो , मैं शांत होने लगी लेकिन अभी भी मेरे कान उनकी बाते सुन रही थी , भाई से बिच्छुड़ने का गम तो था लेकिन अभी अपने प्रेम की बात भी सुननी बाकी थी ….

और तिवारी बोला

“वो तो ठीक है जीवा भाई लेकिन … मैं सिर्फ़ एम एल ए बनकर नही रखना चाहता और अगर ऐसी बात है तो इसका मतलब ये हुआ की कोमल को सिर्फ़ मैं ही कंट्रोल कर सकता हू …..

और मेरे कारण ही उसकी ताक़त है .. तब तो धंधे मे मेरी हिस्सेदारी और भी बढ़नी चाहिए “

मैं दया की बातों से ना सिर्फ़ स्तब्ध थी बल्कि ऐसा लगा की मेरे सीने मे जैसे कोई गहरा जख्म कर दिया गया हो …

मैने जिस शख्स से प्रेम किया वो मुझे महज ईस्तमाल कर रहा है ……

इधर जीवा तिवारी की बात सुनकर हँसने लगा

“वाह बाबू इतनी जल्दी अपने रंग दिखा दिया .. चल ठीक है लेकिन 2 मे से एक ही चीज़ मिलेगी , या तो पावर ले या पैसा ले … अब तुझे खुर्शी भी चाहिए और पैसा भी ये कैसे हो सकता है .. तू अपने खुर्शी के दम पर भी तो कमाएगा “

जीवा की बात सुनकर तिवारी थोड़ी देर के लिए चुप हो गया

“एक काम करते है जीवा भाई पहले इस एम एल ए और करीम को निपटा देते है फिर आगे की सोचते है “

“हा ये सही रहेगा , जा जाकर कोमल को तैयार कर ..”

उनकी ये बात सुनकर मैं जार जार रो रही थी लेकिन भुवन मुझे संभालता हुआ मेरे कमरे मे ले आया था …

वो ना जाने मुझे क्या क्या समझा रहा था , मैने उसे अपने बाँहो मे कस लिया था .. वो मेरे बालो को सहलाए जा रहा था मैं बस रोए जा रही थी ……..

“अभी नही कोमल अभी नही .. इन सबसे जवाब माँगेंगे लेकिन अभी नही “

उसने मेरे कानो मे कहा और जैसे मैने उसके बात को मान लिया , मैने अपने आँसू पोंछे ..

“आज सकती का खेल होगा, खूनी खेल “

मैं अपनी तलवार निकालते हुए वहाँ से निकल गयी थी…………

और फिर खूनी खेल शुरू हुआ , मैने एम एल ए को कई टुकड़ो मे काट दिया , जीवा और तिवारी का पूरा गुस्सा मैने वहाँ निकाला था , देखने वाले बस देख रहे थे , गोलियो की वौछार हो रही थी और अपने तेज तलवारो से लोगो को मूली की तरह काट रही थी …

मेरे अलावा किसी ने भी कोई हथियार नही उठाया … ना जाने कितनी लाषे मैने गिरा दी थी ,मैं तो गिनती भी नही थी .. बस खून से लिख दिया था दीवालो पर …. शक्ति ………

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