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Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

डॉक्टर हल्के से हंस दिया , अब तो मैं भी भाभी को ध्यान से देखने लगा … आख़िर क्या बात वही थी जो मैं समझ रहा था ..

“भाभी …?? क्या जो मैं सोच रहा हू वो सच है “

बदले मे भाभी मुस्कुराइ

“हा सोनू … मैं भी कितनी पागल हू जो इतना नही समझ पाई लेकिन इस कत्ल से मेरे दिमाग़ मे हर चीज़ साफ हो गयी , मेरी मा सच मे सबकी मा है हम दोनो के साथ गेम खेल गयी और हम दोनो एक साथ होते हुए भी उसे समझ नही पाए “

मेरी आँखे चौड़ी हो गयी

“हे भगवान , मैं ही चूतिया निकल गया “मैने अपना सर पकड़ लिया था लेकिन मैं अकेला नही था

“तुम अकेले नही हो मुझे लग रहा है की मैं भी इस गेम मे शामिल हू “ नेहा की मा महिमा ने कहा सभी उसकी ओर देखने लगे और सभी एक साथ जोरो से हंस पड़े ..

“लेकिन उसने ये सब किया कैसे “ डॉक्टर बोल पड़ा ..

“जब सबको मेरे बारे मे पता चल ही गया है तो क्यो ना मैं ही बता दूं “

सभी की नज़र दरवाजे की ओर गयी जहाँ पर कोमल खड़ी थी , बिल्कुल भाभी की कॉपी थी लेकिन उम्र के अंतर के कारण आया बदलाव साफ साफ पता चल रहा था ..

“आख़िर आप आ ही गयी “ मैने , भाभी ने , महिमा ने एक साथ ही बोला था …

जिसे सुनकर कोमल के चेहरे मे मुस्कान खिल गयी ..

*************

“तो कहाँ से शुरू किया जाए “कोमल ने हम सभी को एक नज़र देखा

अभी रात हो चुकी थी खाना खाकर हम सभी एक जगह इकठ्ठा हुए थे , सभी गोल घेरा बनाकर बैठे थे ..

“शायद जब हमने गाँव छोड़ा तब से क्योकि स्टोरी तो वही से शुरू होती है ना “भाभी ने अपनी बात रखी

“नही मेरे ख़याल से तब से जब मैं आपसे पहली बार मिला था , और आपको भाभी समझ लिया था “ ये बोलकर मैने कोमल को देखा उसके होंठो मे एक मुस्कान आ गयी ..

“नही मेरे ख्याल से कहानी तो तब से शुरू हुई जब जीवा और तिवारी ने मिलकर नेहा के पिता की हत्या की थी ..” महिमा ने अपने आँखो मे आया आँसू पोन्छते हुए कहा ..

सभी अभी कोमल की ओर ही देख रहे थे तभी डॉक्टर बोल पड़े

“मेरे ख़याल से तो कहानी चिकारा गाँव के उस छोटे से गैंग वार से शुरू होनी चाहिए जिससे जीवा गैंग बना और फिर कॉलेज का वो एलेक्षन जहाँ से कोमल शक्ति मे बदल गयी “

हम सभी के लिए ये बात बिल्कुल नयी थी हम सभी ये कहानी सुनना चाहते थे इसलिए सभी ने एक साथ हा मे सर हिलाया ..

“हूंम्म तो मुझे शुरू से शुरू करना होगा , ठीक है तो सुनो ..”

उसने एक गहरी सांस छोड़ी …

(नोट-दोस्तो यहाँ से स्टोरी कोमल के गाँव से चलेगी , कोशिस करूँगा की कोमल की स्टोरी ज़्यादा समय ना ले कुच्छ अपडेट्स मे कंप्लीट हो जाए )
 
फ्लॅशबॅक स्टार्ट ..

मैं जीवा और संपत एक साथ ही बड़े हुए थे , मैं एक सीधी साधी सी पढ़ने वाली लकड़ी थी वही संपत और जीवा को पैसे से बहुत प्यार था , और पैसो के लिए ही वो उटपूटांग काम किया करते थे ,उनके लिए मेरी पढ़ाई लिखाई महज टाइमपास ही थी , ऐसे भी वो बेचारे करते भी तो क्या करते , मा बाप का साया बचपन मे ही हमारे ऊपर से छूट गया था , और इसी ग़ुरबत(ग़रीबी) ने संपत से हमारा रिश्ता मजबूत किया था , वो भी हमारे पास वाली झुग्गी मे रहता था, वो भी अनाथ और हम भी और शायद इसीलिए उसने जीवा को ही अपना परिवार मान लिया क्योकि जीवा ही उसे भी खाना खिलाता था ..

इसी सिलसिले मे वो मार पीट करने लगे , जीवा और संपत थे तो दोस्त लेकिन भाई से बढ़कर थे ..

समय बीतता गया और हम बड़े होते गये , ना तो जीवा ने पढ़ाई की और ना ही संपत ने लेकिन मुझे पढ़ना था , मुझे इन चूतियों के चोचलो मे नही पड़ना था..

मैने अपनी पढ़ाई जारी रखी ..

वो समय ऐसा हो चला था की हमारा गाँव गंजे की तस्करी का अड्डा बन गया था , आए दिन इसी बात के लिए मार पीट हुआ करती थी और गांजे के व्यापार मे दो ही लोग थे

एक था जीवा और दूसरा था पठान गैंग का सलीम ..

उस समय पठान गैंग का हर जगह बहुत ही रौब था और सभी लवांडो को बस करीम भाई बनना था..

करीम भाई यानी की करीम पठान , पठान गैंग का बॉस जो की शहर मे रहकर सब कुच्छ चलाता था , सभी छोकरों का वो रोल मॉडेल था …

जीवा को भी डॉन बनना था लेकिन करीम जैसा नही उससे भी बड़ा , उसके पास उस टाइम कोई गैंग नही थी लेकिन जिगर था ..

सलीम और जीवा के आए दिन लड़ाई झगड़े होते रहते थे , सलीम, जीवा को करीम के नाम से डराने की कोशिस भी करता था लेकिन जीवा किसी की सुनता तब ना …

एक दिन जब हम खाना खाने बैठे थे …

“अबे तो सलीम हमारे लड़को को धमका रहा है , साला पठान गैंग का रोब दिखा कर हमारे लड़को को डराता रहता है “

संपत थोड़ा गुस्से मे दिख रहा था जैसा वो हमेशा ही होता था …

“टेन्षन नही लेने का उस मादरचोद को तो एक दिन मौका देखकर उड़ा देना है “

जीवा ने भी स्वाभाविक रूप से कहा था

“सालो तुम लोग कैसे भाई हो, जवान बहन बैठी हुई है और तुम लोग ऐसे गालियाँ दे रहे हो शर्म नही आती क्या “

मैं ऐसे इस बात पर रोज ही चिल्लाया करती थी लेकिन फ़र्क किसे पड़ता था, वो दोनो बस बेशर्मो जैसे हंस पड़े थे ..

तभी अचानक ..

ढायं..

एक तेज गोली आकर सीधे जीवा के ग्लास मे लगी ..

हम सभी झुक गये थे , समझ आ चुका था की हमला हुआ है .

जीवा ने मेरे हाथो मे एक पिस्टल थमा दी

“मैं इसका क्या करूँगी “

मैं चौक गयी थी

“रखो वक्त पड़े तो चलाना “

जीवा इतना बोलकर वहाँ से निकल गया , गोलिया चली और जीवा और संपत भी घायल हुए लेकिन आख़िर मे जीवा ने पूरे बाजार के सामने सलीम का गला काट दिया था …..

सलीम का गला काट कर चौराहे पर टाँग दिया गया … ये सीधे सीधे डिक्लरेशन था की अब से वहाँ बस एक ही डॉन था , जीवा भाई ..

और एक ही गैंग था जीवा गैंग ……..

लेकिन इन सबसे पठान बौखला गया था , लेकिन शायद उसकी इस जगह से दूरी और अपने सभी वफ़ादारो के कत्ल के कारण उसका इस जगह से कंट्रोल खो गया , और जीवा की किस्मत भी उसपर महेरबान थी , सलीम के सभी लोग अब जीवा के साथ आ गये थे , गांजे के साथ साथ ज़मीन और पिस्टल का काम भी चल पड़ा था , सब को पैसे जाने लगे थे इसलिए अब करीम के खास सरकारी लोग भी जीवा के खिलाफ कोई एक्शन नही ले रहे थे ..

सब कुच्छ बढ़िया चल रहा था तभी मेरा सेलेक्षन कॉलेज के लिए हुआ , जीवा को मुझसे कोई मतलब नही था की मैं क्या कर रही हू , कॉलेज शहर मे था तो पहला सवाल ये आया की मैं शहर कैसे जाउन्गी …

अब जीवा तो मेरी मदद करने से रहा ऐसे भी उसे मेरा पढ़ना पसंद भी नही आता था , तब मुझे शहर ले जाने की ज़िम्मेदारी ली मेरे बचपन के दोस्त भुवन ने ….

“बाबा ने “… आरती भाभी अचानक से बोल उठी

“हा बाबू तुम्हारे बाबा ने “ इतना बोलकर कर कोमल ने वहाँ बैठे भुवन की ओर देखा जो की हल्के हल्के मुस्कुरा रहा था ..
 
स्टोरी फिर से शुरू ..

भुवन और मैं भी बचपन से दोस्त थे , भुवन हमेशा से एक सीधा साधा लड़का था , जहाँ गाँव के सभी लोग गांजे और बंदूक मे व्यस्त थे वही मैं किताबो मे और भुवन मुझमे (वो हल्के से हँसती है )..

मुझे पता था की भुवन मुझे पसंद करता है लेकिन मैने उसे हमेशा ही अपना दोस्त ही समझा था , वो मेरी हर चीज़ मे मदद करता था , मेरे हर फ़ैसले मे मेरे साथ खड़ा होता , आज भी मेरे साथ ही है जबकि सभी मुझे छोड़ कर चले गये ..

(कोमल ने भुवन को बड़े ही प्यार से देखा और फिर सर झटककर फिर से बोलने लगी )

तो हा हम कॉलेज पहुचे , और पहले ही दिन कुच्छ लड़के मुझे घेर कर मेरी रेगिंग लेने लगे …

“ये छमिया नाम क्या है रे तेरा “

एक लड़का ने बड़े ही बदतमीज़ी से पूछा ..

“तमीज़ से बात करो “ उस लड़के की बात सुनकर भुवन को गुस्सा आ गया था , लेकिन वो लोग लगभग 10-15 की संख्या मे थे वही हम बस 2 , और भी लड़के और लड़किया वहाँ मौजूद थे लेकिन सभी अपनी नज़रे झुकाए हुए खड़े थे ..

“मादरचोद हमे आँखे दिखाता है जानता नही क्या हम करीम भाई के लड़के है , और यहाँ तुम्हारे सीनियर “

करीम का नाम सुन कर दिमाग़ ही हिल गया था , ये गाँव नही था और अगर किसी को पता चल गया की मैं जीवा की बहन हू तो पता नही करीम हमारे साथ क्या करेगा , मैने भुवन का हाथ दबाया और आँखो से ही समझाया की चुप रहे ..भुवन चुप हो चुका था ..

“करीम भाई का नाम सुनकर देखो साला कैसे दुबक गया “

सभी जोरो से हँसे

“भाई क्या मस्त माल है यार , अगर इसे दिखाने मे इतना लज़ीज़ है तो कहने मे कैसा होगा “ उसी ग्रूप के एक लड़के ने दाँत दिखाते हुए कहा सभी लोग हँसने लगे और सभी की नज़र मुझपर ही टिक गयी थी , मैं उन लोगो की हवसी नज़रो को अपने जिस्म के हर काटाव को घूरते हुए महसूस कर सकती थी ..

वो भूखे भेड़ियो जैसे मुझे देख कर अपने लार टपका रहे थे , जीवन मे पहली बात मुझे इतना डर लग रहा था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे जे लोग आँखो से ही मेरा बलात्कार कर देंगे ,

आज मुझे अहसास हुआ था की मर्द ना सिर्फ़ जिस्म से बल्कि आपनी नज़रो से भी एक लड़की को नंगा कर देता है ..

उनकी नज़रे मुझे चुभाने लगी थी ..

“भाई ये कच्ची कली लग रही है देखो तो कैसे मचल रही है , अभी तो इसे च्छुवा भी नही है और ऐसे शर्मा रही है , जब इस नंगी करके रगड़ेगे तब तो मज़ा ही आ जाएगा “

सभी कुत्ते फिर से हसने लगे थे ..

“बस बहुत हुआ , एक लड़की से बात करने की तमीज़ नही है क्या तुम्हे “

भुवन गुस्से से लाल हो चुका था, मैने जोरो से उसका हाथ दबाया था लेकिन मैं जानती थी की ये लोग भी अपने हद से बढ़ रहे थे और किसी भी सच्चे मर्द के लिए एक लड़की के बारे मे इतना सुनना सहन सकती से बाहर ही होता है ..

हा सच्चा मर्द वही होता है जो औरत की इज़्ज़त करे और उसके इज़्ज़त की रक्षा करे ना की वो जो किसी औरत की इज़्ज़त को उच्छलता हो ..

“मादरचोद हमे सिखाएगा तू की कैसे बात करते है, अभी तेरी आइटम को पूरे कॉलेज के सामने नंगा करके पेल देंगे ना तो भी तू कुच्छ नही कर पाएगा “

एक लड़का सामने बढ़ कर भुवन के कॉलर को पकड़ने लगा , तभी भुवन भी गुस्से भी फुट गया

“मादरचोद इसे नंगा करेगा तेरी मा की “

भुवन ने एक घुशा लड़के के मूह मे मार दिया था , सभी लोग हतप्रद थे , जैसे समय रुक सा गया हो , सभी नये लड़के और लड़किया हमे ही ध्यान से देख रहे थे उनके साथ साथ और भी लोग रुककर हमे ही देख रहे थे ..

भुवन का घुसा लगने पर उस लड़के की हालत वही हुई जो अक्सर नमर्दो की होती है , उसने अपने दोस्तो से भुवन को मारने के लिए कहा … वो बौखला गया था ..

भुवन भी अपने पोज़िशन मे आ गया था लेकिन एक अकेला इंसान आख़िर कितनो से लड़ पाता , कुच्छ ही देर मे उसके ऊपर काबू कर लिया गया था उसके हाथ पैरो को लोगो ने पकड़ लिया था और उसे बुरी तरह से मार रहे थे ..

मेरे सामने ये सब हो रहा था, मेरे कारण मेरा दोस्त मार खा रहा था और मैं बस चुपचाप देख रही थी … अचानक भुवन की आँखे मेरी आँखो से मिली जैसे वो कह रहा हो की जब तक मैं जिंदा हू मैं लड़ता रहूँगा ..

और वही वो पल था जब मेरे अंदर कुछ हो गया …

मेरे हाथ वहाँ गये जहाँ मैने सोचा भी नही था , मेरे बाग मे अभी भी जीवा का दिया वो पिस्टल था मैने पिस्टल निकाल लिया और सीधे उन लोगो पर तान दिया…

“छोड़ो इसे वरना “

मैं जोरो से चिल्लाई थी

सभी की नज़रें मेरे ही ऊपर थी

“साली हमे पिस्टल दिखाती है “

उनमे से एक चिल्लाया और दो तीन लोगो ने अपने अपने जेबो से पिस्टल निकाल ली , मेरे हाथ ट्रिग्गर पर जा चुके थे ,

ढायं ढायं ..

हवा मे तीन गोलिया उड़ने लगी थी ,, ना जाने ये गोलिया किसके किस्मत मे थी ..

एक के कंधे मे ये जा घुसी, तो 2 गोलिया बस लोगो के आजू बाजू से ही निकल गयी थी ..

मैने जीवन मे पहली बार बंदूक चलाई थी , मुझे नही पता था की मेरा निशाना क्या है …

मैं बस मूर्ति के जैसे खड़ी थी की..

“मादरचोद ने गोली चला दी , मारो साली को “

लगभग 4-5 बंदूकों की नोक मेरी ओर हो चुके थे , ढायं ढायं ढायं ..

हवाओं मे गोलियो की आवाज़ गूँज गयी थी , मैं अभी भी मूर्ति के जैसे जमी हुई खड़ी थी की ..

किसी ने मुझे धक्का देकर नीचे गिरा दिया था , और भी गोलिया चली ..

“तिवारी निकल जा यहाँ से ये तेरा मामला नही है ..”

“ये मेरा कॉलेज है , और यहाँ का हर मामला मेरा मामला है … अगर करीम भाई को पता चला की तुम लोग कॉलेज मे ये सब कर रहे थे तो सोचो तुम्हारा क्या हाल होगा …”

उस शख्स की बातों से वो लोग जैसे शांत हो गये

“लेकिन इस साली ने ..”

“तुमने बदतमीज़ी की थी … अब मामला यही ख़त्म करो , मैं इसमे पुलिस और करीम भाई को इन्वॉल्व नही करना चाहता “

“ठीक है आज तो बच गई लेकिन साली अगर कभी अकेली मिली ना तो पूरे शरीर का गोश्त नोच लेंगे “

वो लोग वहाँ से निकल गये थे ..

ये वही शख्स था जिसने मुझे धकेल कर मेरी जान बचाई थी , वो एक लंबा चौड़ा , गोरे रंग का शख्स था .. माथे पर एक तिलक लगा हुआ था जो उसके गोरे रंग मे और भी खिल रहा था ..

गले मे एक दुपपट्ता और कुर्ता और जीन्स पहने हुए ये कोई नेता जैसे लग रहा था ..

“तुम लोग तो बड़े ही बहादुर निकले , अकेले ही इन लोगो से भीड़ गये , गनीमत है की मैं आ गया वरना “

हमारी आँखे मिली और जैसे कुच्छ हो गया , ये अहसास जीवन मे पहली बार हुआ था , जैसे पूरे शरीर मे एक करेंट सी दौड़ गयी थी ..मैं अब भी मूर्ति की तरह खड़ी हुई उसके उन गुलाबी होंठो को देख रही थी जिनसे इतने प्यारे शब्द निकल रहे थे ..

उसकी वो बड़ी बड़ी आँखे , मैं ना जाने क्यो शर्मा सी गयी थी ..

“हेलो ..”

उसने मुझे थोड़ा सा हिलाया

और जैसे मैं किसी सपने से जागी

“जी जी .. थॅंक्स आपने हमे बचा लिया “

“थॅंक्स वाली क्या बात है , ऐसे मैं इस कॉलेज का होने वाला प्रेसीडेंट हू , दया शंकर तिवारी , आप लोगो का पहला दिन है ??”

उसने अपना हाथ बढ़ाया और भुवन और मैने उससे हाथ मिलाया .. उसकी आँखे भी बार बार मेरी ओर ही जा रही थी ..

हम थोड़ी देर तक बात किए , पता चला की कॉलेज मे एलेक्षन होने वाला है और दया शंकर भी एक कॅंडिडेट है ..

लेकिन तो तगड़ा कॅंडिडेट है वो वहाँ के एम एल ए का बाबू है , यहाँ मजेदार बात ये थी की दोनो ही करीम से सपोर्ट मे थे ..

करीम ने दोनो को ही कह दिया था की अपने लेवल मे काम करो ..

करीम का नाम यहाँ ऐसे था जैसे वो कोई भगवान हो, उसकी पर्मिशन के बिना यहाँ कोई भी कुच्छ नही कर सकता था ..

“तो तुम्हारे लिए तो बड़ी मुश्किल होगी “ भुवन ने तिवारी से कहा

“हा मुश्किल तो है , उसका बाप एम एल ए है और उसके पास पैसे भी बहुत है , लड़के भी ऐसे है जो मार काट कर सके … पावर पैसा दोनो है उसके पास .. और मेरे पास है सिर्फ़ मेरा हौसला .. बिना किसी सपोर्ट के इतना आगे बढ़ गया की तो आगे भी कर ही लूँगा , कुच्छ लड़के है मेरे पास और साथ मे करीम भाई से पर्मिशन भी ले ली है चुनाव लड़ने की “

दया की हर बात मुझे और भी इंप्रेस कर रही थी , वो सिर्फ़ हॅंडसम ही नही था उसके अंदर ह्यूमर भी था , कुच्छ करने का जज़्बा उसके आँखो मे दिखाई देता था , उसके चेहरे मे एक तेज था , वो इंटेलिजेंट था बिल्कुल शार्प … कुल मिलाकर मुझे वो पसंद था .. पहली ही मुलाकात मे उसने मुझे इतना इंप्रेस कर दिया था जितना अभी तक कोई नही कर पाया था …….

“ऐसे तुम लोग मेरी पार्टी जाय्न कर रहे हो ना “

उसने आख़िर मे कहा

“हा बिल्कुल “ भुवन और मेरे मूह से एक साथ निकला था ..

चीज़े बड़ी ही सिंपल लग रही थी लेकिन मुझे क्या पता था की ये मुलाकात और वो लड़को से मेरा लड़ जाना आगे कितना बड़ा तांडव करने वाला था ……….
 
दूसरे दिन जब हम कॉलेज पहुचे तो वहाँ पर भीड़ लगी हुई थी जहाँ पर हमारी लड़ाई हुई थी ..

कई लाषे रस्सियो के ज़रिए छत से बाँध दी गयी थी , उनका खून नीचे टपक रहा था , ज़मीन पर खून फैलने लगा था , पुलिस वाले भी अपने नाक मे रुमाल रखे थे, जो भी कमजोर दिल का इंसान उसे देखता वो उल्टी कर डालता ..

जब मैने उन्हे देखा तो मेरी भी साँसे रुक सी गयी ..

वो लोग वही थे जिनके साथ कल हमारा झगड़ा हुआ था ….
 
पुलिस पूछताछ कर रही थी साथ ही करीम भी वहाँ आने वाला था …

उसके लड़को को किसी ने इतनी बेरहमी से मारा था की ये हर जगह चर्चा का विषय बन चुका था ..

दया संकर भी मौके पर पहुच चुका था ,

“तुम दोनो जितनी जल्दी हो सके यहाँ से गायब हो जाओ “

तिवारी ने हमे देखते हुए कहा

“लेकिन क्यो हमने तो कुछ नही किया है “

मुझे समझ नही आ रहा था की आख़िर वो हमे क्यो गायब होने के लिए बोल रहा है ,

“तुम समझ नही रही हो , करीम शैतान है .. और ये उसके ही लोग थे , इनको इतनी बेरहमी से मारा गया है की वो बौखला ही गया होगा, इससे पहले की उसे पता चले की कल तुम लोगो का इन लोगो से झगड़ा हुआ है तुम लोग निकल जाओ “

“लेकिन यार जब हमने कुच्छ किया ही नही तो ..”मैं फिर से कुच्छ बोलने वाली की दया ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे कोने मे खींचा साथ साथ भुवन भी आ गया

“तुम समझ क्यो नही रही हो करीम को तो बस बहाना मिल जाएगा “

“किस बात का “ इस बात भुवन ने कहा था

“वो साला बहुत ही ठरकी टाइप का इंसान है , तुम्हे देखते ही लार टपकाने लगेगा , और जब उसे पता चलेगा की कल इन लोगो का तुमसे झगड़ा हुआ था तो उसे बहाना मिल जाएगा तुम्हे परेशान करने का “

दया के मन मे मेरे लिए इतनी चिंता देख कर मुझे सच मे अच्छा लगा …

“हा कोमल ये सही बोल रहा है , मैने भी करीम के बारे मे बहुत सुना है “

भुवन भी चिंता मे पड़ गया था , दया ने हमे कॉलेज से बाहर कही जाने के लिए कहा लेकिन हम दोनो कॉलेज मे ही ऊपर की एक क्लास मे छिप गये थे जहाँ से बाहर का नज़ारा साफ साफ दिखता था , वो ऐसी जगह थी जहाँ से हम जब चाहे तब बाहर भी भाग सकते थे ..

थोड़े देर मे करीम आया बहुत गाली गलोच वागेर्ह हुए , हमारे बारे मे भी किसी ने बता दिया , उसने पुलिस के सामने ही हमे मार डालने की बात भी कह दी और पिस्टल निकाल कर हवाई फाइयर भी कर दिया , मुझे समझ आ गया था की मेरे पढ़ने का सपना अब सपना ही रह जाएगा ऐसे महॉल होने के बाद मैं फिर से कभी कॉलेज नही आ पाउन्गी …

ये सोचते सोचते ही मेरे आँखो मे आँसू आ रहे थे तभी मैने जो देखा उसे देखकर मेरी हालत ही खराब हो गयी ..

‘धाम धाम धद्म धाइया रे सबसे बड़े लड़ाइया रे ओंकारा ..’

ये गाना सुनकर मैं और भुवन दोनो ही चौक गये थे , चौकने का कारण भी था ये गाना जीवा और संपत का फेव था और वो अपनी जीप मे इसे फुल आवाज़ मे चला कर घुमा करते थे , और ये क्या वो लोग सच मे इधर ही आ रहे थे …

उनकी जीप कॉलेज मे आकर रुकी साथ मे उनके चेलो की पूरी की पूरी टोली भी उतर गयी सभी के हाथो मे बड़े बड़े बंदूक थे ..

सभी लोग आँखे फाडे हुए उन्हे ही देख रहे थे साथ ही कमरे मे खड़े हम लोग भी ..
 
“दीदी जीवा भैया आपको बुलाए है “

हमारे कमरे के बाहर खड़े एक लड़के ने कहा , वो हमारे ही गाँव का था ..

मैने और भुवन ने एक दूसरे को देखा ..

“हो गया सत्यानाश “भुवन के होंठो से निकल गया था ..

“करीम भाई … ये लड़के मेरी बहन को छेड़ रहे थे इसलिए इन लोगो का ये हाल कर दिया, फिर से कोई नज़र उठा कर देखेगा तो उसकी भी आँखे निकाल लूँगा चाहे वो किसी का भी आदमी हो “

जीवा के आदमी करीम के सभी लोगो को घेर कर खड़े थे …

“जीवा… तो तू ही जीवा है .. साले शहर आकर बड़ी ग़लती कर दी तूने “

मैं और भुवन भी नीचे जीवा और संपत के साथ खड़े हुए थे , सब को समझ आ चुका था की माजरा क्या है , ऐसे भी जीवा को शहर मे अपनी धाक जमानी थी और उसके लिए साले ने मेरी कॉलेज लाइफ की कुर्बानी दे दी ..

मैं जानती थी की उन लोगो को कितनी बेरहमी से मारने का कारण ण सिर्फ़ बहन का प्यार नही है बल्कि करीम को उसके घर मे घुसकर चॅलेंज देना है, ताकि सबके होंठो पर जीवा का नाम आ जाए ..

“जैसे अपने गाँव से तेरा धंधा उखाड़ा है वैसे ही यहाँ से भी तुझे उखाड़ दूँगा करीम “

जीवा के होंठो मे मुस्कान आ गयी थी , करीम ऐसी हालत मे था की वो कुच्छ नही कर सकता था , पुलिस वाले भी बस खड़े हुए देख रहे थे शायद जीवा ने पैसा और बंदूक दोनो से उन्हे चुप करवा दिया था …

“तूने अपनी बहन को मेरी नज़र मे लाकर अच्छा किया जीवा “

करीम की आँखो मे मैने एक कमीने पन को देख लिया था, उसकी ललचाई आँखे मेरे पूरे बदन को घूर रही थी ..

तभी ..

“आआआआआअ”

एक चीख से पूरा महॉल ही गूँज गया ..

करीम के ऐसा बोलते ही संपत ने करीम के एक आदमी जो उसकी बात पर हंस रहा था उसके पेट मे आधी तलवार घुसा दी , करीम गुस्से मे अपने पिस्टल पर हाथ को बाँधा लेकिन अगले ही पल उसके कनपटी पे बंदूक टीका दी गयी थी , करीम ने अपने गुस्से का घूट पी लिया ..

“ये तुझे बहुत भारी पड़ेगा जीवा ..”

करीम ने अपने दांतो को कसते हुए कहा

“हल्की चीज़ो का शौक भी नही है करीम “

जीवा की बात सुनकर उसके सभी लड़के हंस पड़े थे .. करीम के जाते ही जीवा के लड़को ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी ..

बाकी के लोग बस किसी मूर्ति की तरह खड़े रह गये , अब तो इन लोगो को इन सभी चीज़ो की आदत सी ही हो गयी थी , लॉ आंड ऑर्डर के नाम पर कुच्छ बचा ही नही था ,, करप्षन और डर का महॉल था , जो पैसो से नही बिकता उसे पिस्टल के दम पर काबू मे लाया जाता था ..

ये महॉल करीम ने ही बनाया था की उसके खिलाफ कोई आवाज़ नही उठा सकता था लेकिन आज उसका पूरा उपयोग जीवा कर रहा था , सभी को पता था की जीवा ने अपने पूरे इलाक़े मे करीम की ऐसी की तैसी कर रखी है , इसलिए लोग उसका सहयोग भी कर रहे थे क्योकि दो गैंग की लड़ाई मे बहुतो का फ़ायदा होता है ..

एक कॉंपिटेशन हो तो लोगो को दाम भी सही मिलता है और प्रतियोगिता तो पैदा हो ही चुकी थी ..

लड़के जीवा भैया की जय संपत भैया की जय के नारे लगा रहे थे , तभी दया भी दौड़ता हुआ आ गया और जीवा के पैर च्छू लिए ..

“अरे तुम कौन हो ..”

“अरे भैया ये वही है जिसने कल कोमल दीदी की मदद की थी “मेरे गाँव वाला लड़का बोल पड़ा अब मुझे समझ आ गया था की आख़िर जीवा को इन सबके बारे मे इसी चूतिए ने बताया था ..

“ओह अच्छा नेता जी “

जीवा ने दया की पीठ थपथपाई

“अरे कहा भैया , हम तो बस अभी चुनाव मे खड़े हो रहे है , मैं चाहता हू की मेरा सपोर्ट आप करो “

दया संकर की बात सुन कर जीवा ने उसे थोड़ा घूरा

“क्यो भाई ..”

“क्योकि भैया हमारे ऑपोसिशन का साथ करीम भाई दे रहे है “

जीवा ने एक बार संपत को देखा

“अबसे करीम , करीम है ना की करीम भाई ..और तू लड़ चुनाव साला पिस्टल और गांजे से पूरा कॉलेज को भर देंगे … जो सामने आए ठुकवा देंगे , करीम की मा चोदनी है हर जगह .. अब से बस एक ही भाई होगा जीवा भाई …समझा छोटे “

दया संकर ऐसे खुस हुआ जैसे साले को कोई वरदान मिल गया हो ..

“बिल्कुल भाई अब तो आपके ही नाम का डंका बजेगा “

तिवारी की नज़र मुझपर पड़ी , लेकिन मैं उसकी इस हरकत से बहुत गुस्से मे थी , मैं नही चाहती थी की जीवा अब इस कॉलेज मे भी अपना उत्पात मचाए .. मेरा बिगड़ा हुआ चेहरा देख कर जीवा ने मेरे गालो को पकड़कर हिलाया

“अब मेरी प्यारी बहन के पूरे कॉलेज मे बस जीवा भाई का नाम होगा “

उसकी आँखो मे शुरुआत थी और वो मुझे चिढ़ा रहा था.. मैं मूह बनाकर भुवन का हाथ पकड़कर वहाँ से निकल गयी और जीवा और संपत जोरो से हंस पड़े थे ……….

******
 
“यार गाँव मे तो जीना हराम कर ही रखा था अब यहाँ भी सर मे बैठ कर नाचेंगे , कॉलेज को पूरा बर्बाद कर देंगे ये लोग, अब रोज बस मार काट और गांजे बाजी होगी यहाँ पढ़ाई तो भूल ही जाओ “

मैं बुरी तरह से अपसेट थी , भुवन को तो कुच्छ फ़र्क ही नही पड़ता जो मैं बोलती वो बस उसी मे सर हिला देता था ..

“ऐसे भी ये कॉलेज पहले से ही बर्बाद था देखी ना कल की लड़कियो से साले कैसे बात कर रहे थे , दादागिरी तो पहले भी थी और नेता गिरी भी … वो साला तिवारी कैसा दल बदलू आदमी है , कल तक तो करीम भाई करीम भाई बोल रहा था आज जीवा के साइड आ गया “

भुवन ने भी गुस्से मे कहा

“हा यार लेकिन अब इस कॉलेज मे बस गैंग वार टाइप की चीज़े होने लगेंगी और सबसे ज़्यादा तो मुझे है ना करीम के आदमियो का हमेशा ख़तरा रहेगा … और जीवा के लोग भी हमेशा नज़र रखेंगे … जिंदगी नर्क बना के रखी है सालो ने “

मेरी बात सुनकर भुवन थोड़ा हंसा

“मैं परेशान और तू हंस रहा है “

“अरे तो क्या करू .. मेरे दिमाग़ मे एक बात आई इसलिए हँसी आ गयी ..”

“अच्छा क्या ??”

“तू गुस्से मे बड़ी प्यारी लगती है”

भुवन की बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठी थी , कभी कभी तो लगता था की इसे अपना ही लू लेकिन फिर लगता की हम अच्छे दोस्त ही अच्छे है …

मैने उसके गालो मे हल्की सी चपत लगा दी

“तुम्हे क्या लगता है की कौन जीतेगा , “

मेरे मन मे एक संदेह आ गया था …

मेरी बात सुनकर भुवन मुस्कुराया

“जिसके साथ तुम हो वो ही जीतेगा “

मैने उसे गुस्से से देखा

“वा .. मैं किसी के साथ नही हू “

वो हंस पड़ा

“तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे की जीवा के ऊपर कोई मुसीबत आ जाए तो तुम पीछे हट जाओगी.. अभी तक जीवा को तुम्हारी ज़रूरत नही पड़ी लेकिन मुझे पता है की आगे पड़ेगी और तुम उसकी मदद भी करोगी …”

मैने एक बार भुवन को घूरा , क्या सच मे ऐसा था …

“मुझे नही लगता की मैं जीवा की मदद करूँगी या ऐसा कुच्छ काम भी करूँगी ..”

“मुझे इतना तो पता है की अगर उसके ऊपर कोई आफ़त आई तो तुम उसकी हेल्प ज़रूर करोगी “

“अब वो मेरा भाई जो है “

मैं खिड़की से बाहर देखने लगी थी…
 
महॉल बदल रहा था कॉलेज का चुनाव ऐसा होता है मैने सोचा भी नही था , पैसे बहाए जा रहे थे ,तलवारे और बंदूकें चल रही थी .. लेकिन फिर भी पढ़ाई चल रही थी , सब कुच्छ अपने अपने जगह पर था , संपूर्ण बॅलेन्स की स्थिति .. के साथ ..

तभी एक दिन दया संकर मेरे पास आया ..

बातों ही बातों मे उसने मुझसे कहा

“तुम हमारी पार्टी की तरफ़ से चुनाव क्यो नही लड़ती ..??”

“तुम्हारी पार्टी ?? तुम तो जीवा के हाथो की कट्पुतली बन गये हो “

मेरी बात सुनकर उसने एक बार मुझे घूरा

“तुम जीवा भाई से नफ़रत क्यो करती हो “

“बात नफ़रत की नही है , वो मेरा भाई है और मैं उससे नफ़रत नही करती लेकिन बात उसूलों की भी तो है , ऐसे किसी को भी मार देना , अपना वर्चस्व फैलाने के लिए किसी की फ़िक्र ना करना .. ये सब कहा तक सही है ..”

“यार सबका अपना काम होता है , और जीवा भाई का काम ही यही है तो वो क्या करे , अपना काम तो ईमानदारी से पूरा कर रहे है ना “

मैने दया को एक बार घूर कर देखा

“अच्छा और तुम्हारा काम क्या है , लोगो के जूते चटवाना , कभी करीम के चाटते थे और अब जीवा के “

मेरी बात सुनकर भुवन सकते मे आ गया था , उसने मेरे हाथो को जोरो से दबाया लेकिन जिसे बुरा मानना था वो बिल्कुल भी बुरा नही मान रहा था , तिवारी के चेहरे पर कोई भी गुस्से वाला भाव नही आया बल्कि वो बस मुस्कुरा रहा था …….

“ये पावर का गेम है कोमल , मुझे पॉलिटिक्स मे आना है और जो भी मुझसे पावरफुल है और आगे बढ़ा सकता है मैं उसके साथ हो जाउन्गा , अगर धोखा देना पड़े तो धोखा भी दूँगा , यही राजनीति है यही सियासत के दाव पेंच है ..”

उसकी इस बात से मेरा गुस्सा और भी तेज हो गया था , मैं उसे पसंद करती थी लेकिन उसकी इन हरकतों से मुझे बहुत ही चिड होती थी

“तो क्या तुम उनके कुत्ते बन जाओगे “

वो जोरो से हंसा

“तुम्हे लग रहा है की मैं उनका कुत्ता बन गया, यही सोच लोगो को आगे बढ़ने नही देती तुम ये नही देख रही हो की पावर मिलने के बाद मैं जीवा और करीम दोनो से ही ज़्यादा पावरफुल हो सकता हू …….

नेता बनने के लिए गुंडे बस सीढ़ी की तरह होते है , एक बार जो पावर मे आ गया उसके सामने फिर करीम और जीवा जैसे गुंडों की कोई औकात नही होती , लेकिन फिर भी नेता लोग इन्हे पाल कर रखते है , अभी मैं तुम्हे इनका कुत्ता लग रहा हू ना , देखना एक दिन ये मेरे कुत्ते की तरह होंगे …”

दया की आँखो मे कोई बात तो थी जिसने मुझे उसकी बातों की सच्चाई और धृड़ता का अहसास दिलाया था ..

मैं स्तब्ध बस उसके तेजस्वी चेहरे को देखे जा रही थी

“और कोमल गुंडा होना से ज़्यादा मेहनत नेता होने मे लगती है , बहुत दिमाग़ का काम है .. और इसलिए मैं चाहता हू की इसमे तुम मेरा साथ दो , पावर की बात ही अलग होती है “

उसकी बात सुनकर मैं जैसे इंप्रेस ही हो गयी थी ..

“मुझे भी पावर चाहिए लेकिन आई ए एस बनकर “

वो जोरो से हंसा

“अगर मंत्री बन जाओगी ना तो कई आई ए एस तुम्हारे नीचे काम करेंगे “

“हा लेकिन सिर्फ़ 5 सालो के लिए .. लेकिन आई ए एस तो जीवन भर के लिए होता है “

वो फिर से हंसा

“तुमने अभी दुनिया देखी नही है इसलिए ऐसा बोल रही हो , यहाँ सब भृष्ट हो जाते ही और एक बार जिसने अपनी ईमानदारी छोड़ी या ग़लती से भी कोई ग़लत काम किया तो फिर आई ए एस की पावर बस नेताओ का खिलौना बनकर ही रह जाता है … आई ए एस की एक ग़लती को जीवन भर के लिए उसके खिलाफ यूज किया जाता है , उन्हे इतना मजबूर कर दिया जाता है की वो अपने पावर का यूज ही नही कर पाते और करते है तो बस नेताओ के इशारे पर …

और एक नेता जीवन भर के लिए नेता होता है , ये सभी जानते है की आज भले ही कोई सत्ता मे ना हो लेकिन कल को हो सकता है .. इसलिए किसी पर हाथ लगाने से पहले 10 बार सोचना पड़ता है “
 
वो फिर से हंसा

“तुमने अभी दुनिया देखी नही है इसलिए ऐसा बोल रही हो , यहाँ सब भृष्ट हो जाते ही और एक बार जिसने अपनी ईमानदारी छोड़ी या ग़लती से भी कोई ग़लत काम किया तो फिर आई ए एस की पावर बस नेताओ का खिलौना बनकर ही रह जाता है … आई ए एस की एक ग़लती को जीवन भर के लिए उसके खिलाफ यूज किया जाता है , उन्हे इतना मजबूर कर दिया जाता है की वो अपने पावर का यूज ही नही कर पाते और करते है तो बस नेताओ के इशारे पर …

और एक नेता जीवन भर के लिए नेता होता है , ये सभी जानते है की आज भले ही कोई सत्ता मे ना हो लेकिन कल को हो सकता है .. इसलिए किसी पर हाथ लगाने से पहले 10 बार सोचना पड़ता है “

तिवारी की बातों से मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा कोई सपना काँच सा टूट गया हो .. मैने आई ए एस अधिकारी के बारे मे जो भी सुना और देखा था यहाँ सब कुच्छ टूटता हुआ दिख रहा था , मुझे किसी ने उनके कमजोर पक्ष के बारे मे नही बताया था , सब बस यही बोला करते थे की एक बार आई ए एस बन जाए तो लाइफ बन जाती है या फिर इतना पावर मिल जाता है की आप ही भगवान हो ..

लेकिन हा ये भी एक काला पक्ष था जिसे सभी इग्नोर कर जाते है , असल मे सभी चीज़ो का एक बॅक डोर भी होता है ..

“हा लेकिन वो इतने भी कमजोर नही होते जितना तुम समझ रहे हो “

मैने अंतिम बार प्रयास किया

“हा मैं मानता हू , लेकिन वो इतने पावरफुल भी नही होते जितना तुम सोचती हो “

दया हंस पड़ा , और मैं मानो नर्वस हो गयी

“देखो कोमल ये एक बहस है की कौन ज़्यादा पावरफुल होता है , याद रखो की कोई पूरी तरह से सही नही हो सकता , सभी के ऊपर कोई ना कोई कंडीशन तो होती ही है जो किसी खास परिस्थिति मे लोगो को पावर प्रदान करती है और किसी खास परिस्थिति मे लोगो को कमजोर कर देती है.. तो सब बाते अभी दिमाग़ से निकाल दो ..

तुम्हे जो करना है वो करना लेकिन कम से कम अभी तो मेरा साथ दो .. समझ लो की मुझे तुम्हारी ज़रूरत है “

मैने उसके चेहरे को देखा , उसके पास बात करने का एक सलीका था , उसने ऐसे कहा था की सच मे मेरे बिना उसका कोई काम नही हो पाएगा , मुझे पता था की वो झूठ था लेकिन फिर भी उसका ये झूठ भी बड़ा ही मीठा था ..

उसने बोलना जारी रखा

“कोमल तुम मेरे पार्टी से और किसी भी पार्टी से अकेली लॅडीस कॅंडिडेट होगी , तो लड़कियो का वोट हमारे तरफ खिचने मे मदद मिलेगी “

मैं उसकी बात सुनकर चौकी

“तो क्या दूसरी पार्टी की तरफ़ से कोई भी लड़की खड़ी नही हुई है “

दया ने एक गहरी सांस ली

“यहाँ की पॉलिटिक्स इतनी खराब है की कोई भी लड़की इसमे फसना नही चाहती , या घर वाले ही मना कर देते है … हमारे सामने वालो के पास इतना दिमाग़ भी नही है की किसी लड़की को खड़ा करने की भी सोचे , उन्हे तो लगता है की जंग बस पैसे और ताक़त के बल पर ही जीती जाती है … ये एक अच्छा बदलाव होगा और ऐसे भी तुम चाहे जो भी बनो मकसद तो एक ही है ना ..

बदलाव……..”

उसकी बात सुनकर मानो मेरा दिमाग़ ही खुल गया था , मैने बस सर हिलाकर उसे सहमति दे दी ……
 
चुनाव अपने पूरे जोरो पर था, मुझे भी एक पोस्ट के लिए खड़ा करवाया गया था सच पूछो . तो सामाजिक काम करने का मज़ा भी अलग ही होता है , मानो एक नशा सा हो …

मैं रोज ही 100 से ज़्यादा लड़कियो से मिल रही थी बहुतो की समस्या सुन रही थी और उन्हे भरोशा दिला रही थी , अधिकतर लड़कियो की तकलीफ़ यही थी की गुंडे उन्हे परेशान करते है..

मैने साफ कह दिया था की अगर मैं जीती और दया शंकर तिवारी प्रेसीडेंट बना तो पहला एक्शन इन्ही पर होगा , लड़किया मेरी बात मान भी रही थी क्योकि उन्हे पता था की मैं भी एक गॅंग्स्टर की बहन हू और छोटे मोटे गुंडों की तो बस मुझे देख कर ही फट जाती थी ..

इधर दूसरी पार्टी भी पूरा दम लगा रही थी , महिला कॅंडिडेट का ना होने का गम अब उन्हे सता रहा था , क्योकि वो लड़को को फुल दारू पार्टी देते थे और वही लड़के दूसरे दिन पार्टी बदल ते हुए देखे जाते थे …

दूसरी तरफ़ से खुद एम एल ए तक अपने बेटे को जिताने मे लगा हुआ था, ये ना सिर्फ़ उसका बल्कि करीम की इज़्ज़त का भी सवाल था ..

कभी भी मार पीट शुरू हो जाती थी , एम एल ए ने अपना पोलिटिकल रुतबा दिखा कर जीवा के बहुत से लोगो को और दया के बहुत से दोस्तो को भी अंदर करवा दिया था लेकिन फिर खुद जीवा पुलिस स्टेशन जाकर उन्हे छुड़वाता ,,

जैसे जैसे चुनाव पास आ रहा था राजनीति का असली रंग दिखना शुरू हो रहा था , वो गंदी से और भी गंदी होते जा रही थी , कॅंडिडेट्स को धमकाने से लेकर किडनॅपिंग तक सब चालू था, दया शंकर , भुवन और संपत हर समय कॉलेज और हॉस्टिल्ज़ मे ही पड़े रहते थे ,मेरी सुरक्षा का इंतज़ाम ऐसे किया गया था जैसे मैं कोई महारानी हू

हमे टूटता हुआ ना देखकर करीम और एम एल ए दोनो ही भड़के हुए थे ,ख़तरा हर समय बढ़ रहा था, एलेक्षन मे बस दो ही दिन बचा था की……….

“कोमल तुम आज यहीं रुक जाओ फिर गाँव जाओगी और फिर कल वापस आओगी , ऐसे भी काम बहुत है और भुवन भी यहीं रुकेगा “

रात होने वाली थी और दया शंकर मुझे समझा रहा था, अब हम दोनो के बीच अच्छी दोस्ती सी हो गयी थी , ऐसे आकर्षण तो दोनो के मन मे था लेकिन काम की अधिकता के कारण कभी हमारी भावनाए बाहर नही आ पा रही थी ,वही भुवन भी अब कॉलेज मे अच्छे से रम गया था उसे भी मज़ा आ रह था ..

“नही यार इतने लड़को के बीच कहा सोओगी “

मैने उसे आँखे दिखाते हुआ कहा

“अरे पागल तेरे लिए गर्ल्स हॉस्टिल मे एक कमरा खाली करवा देते है “

“नही यार जीवा भाई भी अकेला होगा , क्या भुवन सच मे रुक रहा है ??”

तिवारी ने भुवन को देखा ..

और हाथ हिलाया , भुवन भी पास आ चुका था ..

“नही मतलब नही देख रही है की रात होने वाली है मैं तुझे नही जाने दूँगा “

भुवन ने सुनते ही प्रतिकार किया था

“अरे यार कार से जा रही हू और ये लड़के भी तो जा रहे है साथ मे “

भुवन ने एक बार उन लड़को को देखा मुझे गाँव छोड़ने के लिए तिवारी ने 2 लड़को को नियुक्त किया था

“उउउ नही , चल मैं चलता हू साथ “

भुवन की बात सुनकर दया शंकर का मूह थोड़ा उतर गया

“यार भुवन बहुत काम है ..”

“कोमल से ज़्यादा ज़रूरी क्या काम है “

भुवन की बातों का तो तिवारी के पास कोई भी जवाब नही था , भुवन की बात सुनकर मेरे भी होंठो मे मुस्कान आ गयी थी , ऐसे ही नही वो मेरा बेस्ट फ्रेंड था , मेरे भाइयो से ज़्यादा ख्याल तो ये मेरा रखता था ..

“यार कोमल रुक जा ना बहुत काम है ऐसे भी वहाँ जा कर क्या करेगी “ तिवारी ने एक आखरी बार जैसे मुझे रोका …

मैने भुवन की ओर देखा

“तेरी मर्ज़ी है मैं कुच्छ नही बोलूँगा , ऐसे संपत भी रात को यही आ जाएगा, और जाना है तो बता मैं साथ चलूँगा “

भुवन ने पूरी बात मेरे ऊपर डाल दी थी

“सच पूछो . तो इसीलिए नही रुकना चाहती , संपत भी आएगा फिर तुम लोग तो पी कर हो जाओगे टुन्न और फिर करोगी गली गलौच और मैं पड़ जाउन्गी अकेली “

मैने मूह बनाते हुए कहा

“तो गर्ल्स हॉस्टिल मे रुक जा ना “ तिवारी फिर बोल उठा

“वहाँ अकेले क्या करूँगी , बोर हो जाउन्गी “

“अच्छा ऐसा कर की तू गर्ल्स हॉस्टिल मे ही रुक जा , मैं काम होने के बाद आ जाउन्गा , बियर लेके साथ बैठकर बियर पिएँगे “

भुवन का प्लान तो मस्त था लेकिन इससे दया के चेहरे पर चिंता के भाव साफ दिखाई दिए ऐसा लगा जैसे इस बात से उसका दिल जल रहा हो , सच बताऊ तो मुझे ये देखने मे बहुत मज़ा आया और मैने झट से भुवन का ऑफर आक्सेप्ट कर लिया ..

“ठीक है फिर मैं इंतज़ाम करवा देता हू , और रात मे मैं भी वही आ जाउन्गा “

“नही तुम मत आना तुम्हे तो बहुत काम होगा ना ..”

मैने दया को और भी जलाते हुए कहा था ,
 
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