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Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

“अरे शोभा बेबी शेल्टर नई बेबी सीटर होता है “

मेडम ने थोड़ा हसते हुए कहा

“हा वही “

सभी के चेहरे मे मुस्कान खिल गयी वही सबसे खुस तो अक्की लग रहा था क्योकि उसे इतना तो पता चल गया था की पवन सर का मेडम से कोई टांका नही है .. शायद वो भी मेडम को लाइन मारने वालो मे से एक होगा ..

“तुम शोभा को कैसे जानते हो “

मेडम ने सवाल दागा

“मैं पहले इन्ही की बस्ती मे रहता था इन्होने और इनके पति ने हमारी बहुत मदद की है , मुझे घर और काम दिलवाया था “

“ तो तुम कहा काम करते थे “

मैने वही पुरानी स्टोरी सुना दी जो मैने सभी के सामने सुनाया था , मेडम बड़ी ही इंप्रेस दिखाई दे रही थी ..

आख़िर पढ़ाई शुरू हुई और मुझे तो बहुत ही आलस लगने लगा था अक्की बस मेडम को ही देखे जा रहा था , सुस जमहाई ले रही थी पता नही वो क्यो आ गयी थी बस नेहा ही थी जिसका ध्यान सच मे पढ़ाई पर था..

“अक्की बुक इधर है इधर नही “

मेडम ने अक्की को अपनी ओर देखता पाकर बोला

“किताबो मे क्या रखा है जब हुस्न की मालिका का चेहरा सामने खुला हो ,”

अक्की की नज़र अभी भी मेडम के चेहरे पर थी, अक्की की बात सुनकर उनकी आँखे थोड़ी चौड़ी हो गयी ..वही हम सभी मुस्कुरा उठे

“अक्की … “

उन्होने थोड़ा ज़ोर से कहा

“जी जी मेडम “अक्की बुरी तरह से झेपा था

“क्या कहा तुमने अभी ??”

“क्या कहा मैने अभी ??”

“अक्की बदमाशी नही चलेगी यहाँ “उन्होने थोड़े सख्त लहजे मे कहा

“जी जी मेडम “

“तो बताओ ..”

“क्या???”

“अरे वही की क्या कहा “

“क्या कहा..??”

अक्की हम लोगो को देखने लगा और मैं और नेहा जोरो से हंस पड़े , मेडम के चेहरे मे भी एक मुस्कान आ गयी

“कुछ नही चलो अब ध्यान बुक पर लगाओ ओके “

“जी मेडम “

अक्की ने अपना सर झुका लिया था ……

सभी के बीच कभी कभी मेरी और सुस की नज़रें मिल जाया करती थी तो कभी नेहा के चेहरे मे सुस को देखकर एक नफ़रत के भाव जाग जाया करते थे …

क्लास के बाद भी किसी ने किसी से कोई बात नही की …..

************
 
“तो कैसा रहा ट्यूशन “

“बढ़िया था भाभी ..”

“अरे तेरा चेहरा कल से मुरझाया हुआ क्यो है “

अब मैं भाभी के सवालों का आख़िर जवाब क्या देता , दिमाग़ में कई चीज़े चल रही थी

“आपने मुझे अपना नही समझा तो आख़िर मैं कैसे मुस्कुरा सकता हू “

“तू पागल हो गया है क्या ..सच जानने से तेरे उपर ख़तरा बढ़ सकता था , इसलिए मामा ने ही मुझे मना किया था “

भाभी मेरे मेरे गोद मे अपना सर लगाकर सो गयी थी

“क्या सुस ने कत्ल किया होगा ??”

मेरे दिमाग़ मे अभी भी काजल की बात ही चल रही थी

“मुझे तो लगता है की …”

भाभी इतना बोलकर ही चुप हो गयी

“क्या भाभी??”

“मेरी बात का बुरा मत मानना लेकिन मुझे लगता है की ये कत्ल नेहा कर रही है “

“व्हाट ??”

मैं जोरो से उछल पड़ा था

“ये क्या बकवास है भाभी नेहा इतनी शरीफ लड़की है , उसे पढ़ने के सिवा और कुछ आता ही नही “

भाभी मेरे गालो को सहलाने लगी

“तिवारी ने उसके पिता का खून किया था “

“जीवा भी उसमे शामिल था ..??”

“नही वो शामिल नही थे ये बात खुद जीवा ने बताई है …तिवारी ही था जिसने उसके पिता का खून किया था, और सभी से ज़्यादा मजबूत वजह उसके पास है तिवारी को बर्बाद करने की “

“लेकिन वो बदले पर भरोसा नही करती , उसे बस पढ़ना है और आगे बढ़ना है अपनी मा को एक अच्छी जिंदगी देना है “

“हा ये तो है लेकिन ये महज एक दिखावा भी तो हो सकता है लोगो को भहकावे मे रखने के लिए ताकि किसी का शक़ उसपर ना जाए ..”

“लेकिन उसके पास इतनी काबिलियत नही है की ..”

भाभी जोरो से हंस पड़ी

“तूने मुझे कातिल सोच लिया सुस को कातिल सोच लिया फिर नेहा क्यो नही , हो सकता है की वो भी ट्रेन हो ..”

भाभी की निगाहो मे एक शुरुआत थी

“आप मुझे छेड़ रही हो , और मैने कभी नही कहा की आप या सुस कातिल हो “

“हुम्म लेकिन जनहा तक मैने पता लगाया है नेहा मार्सल आर्ट मे ब्लॅक बेल्ट है वो भी 4त डिग्री की “

“आपको कहाँ से पता लगा ..???”

इस बार जहाँ मैं चौक गया था वही भाभी जोरो से हंस पड़ी

“मेरे सोनू…. अब मैं वो गाँव वही भोली भली भाभी नही रह गयी , मैं एक कुख्यात गैंग लीडर सकती की बेटी हू और दूसरे लीडर जीवा की भांजी , अपने सोनू की गर्लफ्रेंड पर नज़र तो रखनी पड़ती है ना “

उनकी बात सुनकर मुझे पहली बार लगा की भाभी बहुत बदल चुकी है , उनके आवाज़ मे एक कॉन्फिडेन्स था

“वो मेरी गर्लफ्रेंड नही है भाभी और … और इससे ये साबित नही होता की नेहा खूनी होगी .. हा इससे ये ज़रूर साबित होता है की आप अब मेरी वो भाभी नही रह गई “

मेरी आँखो मे आँसू आ गये थे, भाभी ने हमेशा की तरह मेरे आँखो के आँसू को पोछा नही ना ही मुझे दिलासा दिया

“सोनू अब तू बड़ा हो चुका है ये बात बात पर रोना बंद कर “

वो उठ कर बाहर चली गई , मैं उनके इस बदले हुए व्यवहार से हक्काबक्का बस बैठा रह गया था ….
 
अपडेट 32

उनकी बात सुनकर मुझे पहली बार लगा की भाभी बहुत बदल चुकी है , उनके आवाज़ मे एक कॉन्फिडेन्स था

“वो मेरी गर्लफ्रेंड नही है भाभी और … और इससे ये साबित नही होता की नेहा खूनी होगी .. हा इससे ये ज़रूर साबित होता है की आप अब मेरी वो भाभी नही रह गई “

मेरी आँखो मे आँसू आ गये थे, भाभी ने हमेशा की तरह मेरे आँखो के आँसू को पोछा नही ना ही मुझे दिलासा दिया

“सोनू अब तू बड़ा हो चुका है ये बात बात पर रोना बंद कर “

वो उठ कर बाहर चली गई , मैं उनके इस बदले हुए व्यवहार से हक्काबक्का बस बैठा रह गया था ….

अब आगे ….

एक एक पल बिताना मेरे लिए मुश्किल होता जा रहा था , भाभी पर भी शक करने का अब मेरे पास पर्याप्त कारण था और साथ ही नेहा और सुस पर लेकिन क्या सच मे …??

कोई शिवा का नाम लेकर लोगो को मार रहा था और लोगो को क्या दो ही मर्डर हुए थे अब तक …

सबसे ज़्यादा दुख इस बात का था की भाभी इतना कुछ मुझसे छिपा के रखी और अब सच सामने आने के बाद भी उन्होने मुझे थोड़ा भी दिलासा नही दिया बल्कि ऐसे आक्ट कर रही है की मैं ही नादान हू ..

मेरी भाभी ऐसी तो नही थी ????

मुझे यहाँ बैठे बैठे थोड़ी बेचैनी होने लगी थी मैं उठा और सीधे हवेली से बाहर निकल गया और ऑटो से सुस के अपार्टमेंट मे चला गया ……..

“ऊहह माय गॉड .. मुझे यकीन नही हो रहा तुम इस समय मेरे अपार्टमेंट मे “

सुस मुझे देखकर ऐसे खुस हो रही थी जैसे उसने कोई बहुत बड़ी चीज़ देख ली हो ,उसने एक टी-शर्ट डाल रखा था जो की उसके कमर से थोड़े नीचे तक बस थी , नीचे उसने बस एक पैंटी पहनी थी और वो पैंटी साफ साफ दिखाई भी दे रही थी , उसके टी-शर्ट से झाँकते हुए बूब्स से ये भी साफ पता चल रहा था की उसने अंदर कोई भी ब्रा जैसी चीज़ नही पहनी है ..

अंदर आते ही मैं सोफे मे धडाम से गिर गया और सुस भी खुद कर मेरे बाजू मे आकर बैठ गयी

“तो जनाब को मेरी याद कैसे आई “

सुस की ऐसी उत्सुकता देख कर एक बार मेरे दिल को थोड़ी तो ठंडक मिली , चलो कोई तो है जिसे मेरी अभी भी थोड़ी परवाह तो है ..

“अरे क्या हुआ कुछ बोलो तो सही “

सुस ने मुझे अपनी ओर देखता हुआ पाकर कहा

“क्यो तुमने ही तो कहा था ना की ये अपार्टमेंट मेरे लिए है “

सुस ने मुझे ऐसे देखा जैसे कोई बड़ा आश्चर्य देख लिया हो ..

“तुम सच मे यहाँ रहने आ गये हो “

“क्यो नही आ सकता “

“नही यार ये फ्लॅट तुम्हारे लिए ही है , आक्च्युयली मैं बहुत ही सर्प्राइज़ हो गयी हू “

“डॉनट वी सर्प्राइज़ ऐसे मैं यहाँ रहने नही आया हू बस थोड़ा रिलॅक्स करने आ गया “

“वाउ चलो तो मैं तुम्हे अच्छे से रिलॅक्स कर देती हू “

उसने एक मादक स्वर मे कहा मैं कुछ समझ पाता उससे पहले ही वो खड़ी हुई और कमरे मे ही बने एक छोटे से बार से एक बोतल उठा कर ले आई उसने दो ग्लास मे विस्की डाली…..

“इट्स वन ऑफ दा फाइनेस्ट विस्की इन दा वर्ल्ड “

मैने भी जाम थाम लिया और एक चुस्की ली , अब मुझे कौन सा पता था की साला कौन सी दारू कैसी होती है…
 
लेकिन ये जीवन मे पहली बार था जब मैं शराब पी रहा था , पहले ही पेग से थोड़ा थोड़ा शुरूर सा छाने लगा था ..

तुरंत ही दूसरा भी बना दिया गया , सुस मुझसे सट कर बैठ गयी थी उसके एक तरफ़ के बड़े बड़े बूब्स मेरे सीने मे डॅन्स जा रहे थे, यौवन जैसे उसके जिस्म से भर भर कर छलक रहा था ..

“यू आर सो हॉट बेबी “

उसने मेरे कानो मे कहा और मेरे कानो को हल्के से काट लिया

“आ ..”

मेरे मूह से बस एक सिसकी सी निकल कर रह गयी , मैने अपनी आँखे बंद कर ली थी और सोफे मे टिककर आराम से बैठ गया था , मैं कुछ नही करना चाहता था क्योकि क्या करू ये मेरे समझ से बाहर था , मैं बस उस आनंद को लेना चाहता था जो सुस मुझे दे रही थी , अगर मैं कुछ करता तो मेरे दिमाग़ मे सही और ग़लत के लाखों द्वंद शुरू हो जाते उससे अच्छा था मैने खुद को ही छोड़ दिया..

सही ग़लत के द्वंद मे ही मैने सारी जिंदगी बिता दी और मुझे क्या मिला भाभी का धिक्कार ..

भाभी से अलग होने के आभास से ही मेरे आँखो मे आँसू की बूंदे फिर से छलक आई थी और साथ ही भाभी की कही बात की अब तू बड़ा हो गया है ……

पहले जब मेरे आँखो से एक आँसू भी गिरते थे तो वो उसे अपने होठों मे भर लेती थी , और आज उन्होने मुझे धूतकार दिया था, मुझे मेरे हाल मे छोड़ दिया था ..

हो सकता है की वो मुझे ये याद दिलाना चाहती हो की मैं अब बड़ा हो गया हू . लेकिन क्या उनके लिए भी ..??

मैं तो जीवन भर उनके लिए एक बच्चे की तरह ही रहना चाहता था , उन्होने ऐसे मुझे अपने से दूर क्यो कर दिया …

आँखे डबडबा गयी थी, सुस अभी भी मेरे सीने से लगी हुई थी और जैसे मैने एक फ़ैसला कर लिया मैने एक ही घुट मे पूरा पेग अंदर किया और एक दूसरा बना लिया ..

मैने फ़ैसला कर लिया था .. बड़ा होने का फ़ैसला ..
 
मैं तो जीवन भर उनके लिए एक बच्चे की तरह ही रहना चाहता था , उन्होने ऐसे मुझे अपने से दूर क्यो कर दिया …

आँखे डबडबा गयी थी, सुस अभी भी मेरे सीने से लगी हुई थी और जैसे मैने एक फ़ैसला कर लिया मैने एक ही घुट मे पूरा पेग अंदर किया और एक दूसरा बना लिया ..

मैने फ़ैसला कर लिया था .. बड़ा होने का फ़ैसला ..

उन्होने कहा था की अब मैं बच्चा नहीं रहा तो ठीक है मैं अब से वो काम करने शुरू कर दूँगा जो बड़े लोग करते है ..

मैने ये पेग भी एक ही सांस मे अंदर कर गया और सुस के बालो को पकड़कर उसके सर को थोड़ा खींचा ..

उसकी आँखे मेरी आँखो से मिल गयी जो की विस्मय से बड़ी हो चुकी थी …

“अंकित यू आर राइट बेबी ..”

“हा “

मैने मुस्कुराते हुए सुस की आँखो मे देखा और उसके होठों को अपने होठों मे भर दिया ,सुस हल्के से मचली और अपना ग्लास रखकर मेरे उपर टूट पड़ी वो मेरी गोद मे आकर बैठ गयी और मेरे चेहरे को अपने हाथो मे भर कर मुझे चूमने लगी ..

“इतने दिन वेट करवाया तुमने मुझे “

हमारे होंठ मिल चुके थे , वाह क्या अहसास था उसके कोमल होठों की पंखुड़ियो को चूसने मे अलग ही मज़ा आ रहा था ..

मैने उसके कोमल और गद्देदार पिछवाड़े को अपने हाथो मे भर लिया , और उसे हल्के हल्के से मसलने लगा था … दोनो की ही साँसे तेज होने लगी थी और दोनो ही एक दूसरे मे सामने के लिए बेकरार हो गये थे ..

सुस ने अपने पैंटी और टी-शर्ट को भी जल्दी ही निकाल फेका और अब वो मेरे कपड़ो पर झपट पड़ी थी , कुछ ही देर मे दो नंगे जिस्म एक दूसरे मे लिपटे हुए जवानी का मज़ा ले रहे थे .

जीवन मे पहली बार मेरा लिंग किसी योनि को भेद रहा था , गीले पन से सनी हुई वो योनि का नर्म और गर्म सा अहसास … वाह ..

मैं जैसे किसी स्वर्ग की सैर कर रहा था ..

हमारे होंठ बार बार एक दूसरे से मिल जाते आज ऐसा लग रहा था जैसे सच मे सुस मेरे ही लिए बनी हो, उसपर मुझे बेहिसाब प्यार आ रहा था ,, थूक से मैने उसके पूरे चेहरे को भीगा दिया था वही वो भी मुझे बेहिसाब चूमे जा रही थी ..

जिस्म भी मिल रहे थे और हम एक दूजे को प्यार भी दिखा रहे थे , वो मेरे गोद मे बैठी हुई उछल रही थी ..

हर रगड़ से मेरे मूह से आ निकल जाती थी , जब उत्तेजना अपने चरम मे पहुचने लगी तो मैं उसे दांतो से काटने लगा था और वो भी मेरे कंधे पर अपने दाँत गाड़ने लगी उसने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून तक गड़ा दिए थे ..

लेकिन इस उत्तेजना के सामने कोई भी दर्द फीका ही था ..

मैं उसके योनि मे ही फुट पड़ा था .. ऐसा लगा जैसे मेरा अस्तित्व ही उसके अंदर समा गया हो … हम दोनो के नंगे बदन पसीने से तरबतर एक दूसरे से लिपटे हुए सोफे मे ही पडे रहे ………..

जब तक की फिर से उत्तेजना ने हमे जकड़ नही लिया , ये सिलसिला तब तक चला जब तक मुझे ऐसा नही लगा की मेरी आत्मा भी अब मेरा शरीर छोड़ कर चली जाएगी …….

दोनो निर्जीव से ज़मीन मे ही पड़े हुए थे ……..

लेकिन मेरे आँखो के सामने अभी भी बस एक ही चेहरा घूम रहा था .. मेरी भाभी मा का
 
“रात भर से कहाँ था तू “

भाभी बहुत ही गुस्से मे दिख रही थी

“आपसे क्या मतलब “

“सोनू “ वो जोरो से चीखी

“सही तो कह रहा हू भाभी , आप तो अब मेरे आँसू पोछने भी पसंद नही करती तो फिर आप मेरी क्यो चिंता कर रही हो की मैं कहा था ……”

वो चुप थी बिल्कुल ही चुप उन्हे ऐसा देखकर मेरे होठों मे एक व्यंगात्मक सी मुस्कान खिल गयी

“क्या हुआ भाभी चुप क्यो हो गयी , सच कड़वा होता है … है ना ??? और आपने ही तो कहा था की अब आप वो पुरानी औरत नही रह गयी अब आप शक्ति की बेटी हो … अब आप मेरी वो भोली भली भाभी नही रह गयी जो मेरे लिए कुछ भी करने को तैयार रहती थी .. और आप ये क्या पूछ रही हो की मैं कहा था आप तो शक्ति गेंग की हो , जीवा की भांजी आपको नही पता की मैं रात भर कहा था “

अब ये सुस के पास से आने से पहले पिए गये दारू का असर था या सच मे मैं ये बोलना चाहता था लेकिन मैं जी खोलकर बोल रहा था ..

“सुस के पास था ना , कम से कम बता के तो जाता “

उनकी बात सुनकर मुझे और भी जोरो से गुस्सा आया

“जब आपको मेरे बारे मे पता ही था तो पूछ क्यो रही हो , यू केर करने का दिखावा क्यो कर रही हो भाभी “

मेरी बात सुनकर भाभी मुझे अजीब तरह से घुरने लगी

“तुझे हो क्या गया है सोनू , मुझे कहता है की मैं तेरी पुरानी भाभी नही रह गयी लेकिन क्या तू मेरा पुराना सोनू है … मेरा पुराना सोनू क्या दारू पीकर अपनी भाभी के सामने ऐसी बाते करता .. मेरा सोनू क्या कभी अपनी भाभी के प्यार पर शक़ करता , क्या कभी अपनी भाभी की ममता पर कोई सवाल उठा सकता था ..”

भाभी की बाते तीर की तरह मेरे सीने मे लग रही थी , मैं उनके चेहरे पर अपनी नजारे गड़ाए हुए था उनके आँखो मे हल्के हल्के आँसू आ रहे थे लेकिन फिर भी वो अपने चहरे की शक्ति को कम नही कर रही थी , वो अपनी आँखो मे आने वाले पानी को रोकने की कोशिस कर रही थी लेकिन दिल मे छिपा हुआ दर्द तो आँखो मे मोटी बनाकर टपने को बेताब हो रहा था..

शायद वो नही चाहती थी की मैं उनके इस आँसू को देखु वो जाने के लिए पलटी लेकिन मैं उसे देख चुका था मैने तुरंत ही उनका हाथ थाम लिया ..

“भाभी आप ऐसे नही जा सकती ..मेरी तरफ देखिए ..”

वो मुझसे नज़र ही नही मिला रही थी, उन्होने सर पीछे कर लिया था

“भाभी क्या आप मेरी वही भाभी बनकर नही रह सकती ..”

मेरा गला भी भरने लगा था

“अब मेरी जिंदगी अलग है सोनू “

उन्होने भी भरे हुए गले से बड़ी ही मुश्किल से ये कहा

“लेकिन आप तो वही हो ना, मैं भी वही हू , हमारे लिए सारी दुनिया बदल सकती है लेकिन हम ….. हम तो एक दूसरे के लिए आज भी वही है … मेरे लिए आज भी आपकी गोद मे ही जन्नत है , आपकी आँखो मे आज भी मेरे लिए वही ममता और प्रेम है जो हमेशा रहता था .. तो बदल क्या गया है भाभी “

“जीने का उद्देश्य बदल गया है “

“तो क्या हम जीना ही छोड़ दे “

भाभी कुछ देर तक बस चुप ही थी , वो पलटी और मुझे बड़े ही प्रेम से देखने लगी ..

“जानता है , जब तुझे कल यहाँ नही देखा तो मेरी जान ही निकल गयी थी .. वो तो किसी ने तुझे सुस के अपार्टमेंट मे जाते देख लिए था तब जाकर चैन आया ..”

इस बार वो मेरी आँखो मे देख रही थी , मैं सीधे जाकर उनको अपने बाँहो मे भर लिया …. वो भी अपने जिस्म को मेरी बाँहो मे घेरे मे समेटते चली गयी ..

“मैं आज भी आपका वही सोनू हू भाभी मुझसे कभी ये अपेक्षा मत करना की मैं रोना छोड़ दूँगा , और मेरे आँसुओ को आपको ही पोछना पड़ेगा “
 
मैं सच मे फुट गया था , मैं रो रहा था वही भाभी मुझसे हटकर मेरे चेहरे को देखने लगी , आँखो मे आँसू और होठों मे मुस्कान … हे यही वो चेहरा था जिस पर मैं अपना सब कुछ लूटा सकता था ..

उन्होने बड़े ही प्यार से मेरे आँखो का पानी अपने होठों मे ले लिया …

थोड़ी देर तक हम दोनो ही एक दूसरे के सीने से लगे रहे ..

“तो क्या किया रात भर सुस के घर “

भाभी ने हल्के से मेरे कानो मे कहा

“वही जो आपके साथ करना चाहता था “

“व्हाट ..??”

भाभी के साथ साथ मैं भी चौक गया था क्योकि ये बात अंजाने मे ही मेरे मूह से निकल गयी थी

मेरी नज़रें नीचे हो गयी थी वही भाभी के होठों मे एक शरारत सी झूम गयी थी ..

“यानी मेरा कच्चा नीबू अब पक गया “

मैं और भी शर्मा गया

“क्या भाभी आप भी “

मैं वहाँ से जाने लगा तो भाभी ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे रोक लिया और अपने आँखो से काजल निकाल कर मेरे माथे पर लगा दिया ..

“मेरे बेटे को किसी की नज़र ना लगे ..”

उन्हे ऐसा करते देख मुझे अंदर से इतनी ख़ुसी हुई की मेरे आँखो ने फिर से प्रेम के मोतियो से उन्हे गीला कर दिया था ..

“और तू वो सब मेरे साथ करना चाहता था “:

भाभी की आवाज़ मे गुस्सा तो नही था लेकिन एक अलग ही अपनत्व था , अब मैं क्या बोलता मुझे समझ भी तो नही आ रहा था..

“आप तो जानती हो ना की मैं आपसे प्यार करता हू “

वो मुस्कुराइ

“अच्छा तो सुस के साथ वो सब क्या था “

“भाभी मैं सुस को पसंद करता हू प्यार नही “

“चल अब फिर से शुरू मत हो जा , जाकर तैयार हो जा कॉलेज भी तो जाना है “

उन्होने पता नही क्यो लेकिन अपना सर नीचे कर लिया था , लेकिन मैं उनसे और भी सट गया था और उनके चेहरे को पकड़कर उपर कर लिया उनकी आँखे बंद थी , ना जाने क्यो लेकिन महॉल मे एक अजीब सा नशा घुलने लगा था

हमारी साँसे भी एक दूसरे से टकराने लगी थी

“भाभी आई लव यू “

“हुम्म” उन्होने इसके अलावा कुछ भी नही कहा , शायद उनका कुछ ना कहना ही मुझे उनकी अवस्था का बोध करा रहा था मैने होठों को और भी पास लाया और उनके गुलाबी होठों मे मेरे होठों ने हल्के से स्पर्श किया ..

ऐसा लगा जैसे बिजली का कोई तेज झटका दोनो को लगा हो , उन्होने मुझे कसकर जकड़ लिया था , वही मैं अब पीछे हटने के मूड मे नही था आज मैं अपनी भाभी को अच्छे से प्यार करना चाहता था ,

मैने उनके कंधे पर अपने होठों को रख दिया , मेरे जीभ से निकलने वाले लार से उनका कंधा हल्के से गीला हो चुका था ..

वो मेरे बाँहो मे ही कसमसाई ..

“सोनू नही ना ..”

लेकिन उनकी इस ना मे ही इतनी मदहोशी थी की मुझे वो ना और भी उत्तेजित कर गयी ..

“आई लव यू भाभी “

वो मेरे सीने मे छुप गयी थी और उनका चेहरा मैं देख नही पा रहा था , मैने फिर से उनके चेहरे को अपने सामने किया

“मैं आपसे बहुत प्यार करता हू , मुझसे अलग मत होना भाभी “

मैने उनके बंद आँखो को देखते हुए कहा था, उन्होने हल्के से आँखे खोली लेकिन मेरी आँखो से आँखे मिलते ही झट से उन्होने आँखे बंद भी कर ली और मैने उनके फडफडाते हुए कोमल नर्म गुलाबी होठों मे अपने तपते हुए होठों को मिला दिया ..
 
मैने उनके बंद आँखो को देखते हुए कहा था, उन्होने हल्के से आँखे खोली लेकिन मेरी आँखो से आँखे मिलते ही झट से उन्होने आँखे बंद भी कर ली और मैने उनके फडफडाते हुए कोमल नर्म गुलाबी होठों मे अपने तपते हुए होठों को मिला दिया ..

दोनो होंठ आपस मे ऐसे घुलने लगे थे दूध मे मिशरी घुल रही हो , वो मेरे सीने मे पिघल रही थी और मेरे जिस्म की गर्मी उनके जिस्म की गर्मी से एक हो रही थी , मेरे नाक मे उनके ताज़ा धुले हुए बालो की ख़ुसबु चने लगी थी , और मेरे हाथ उनके कोमल घूमाओदार कमर पर जकड़ते जा रहे थे ..

हम दोनो के होंठ आपस मे ऐसे मिल गये जैसे सदियो तक एक दूसरे से अलग नही होने वाले , भाभी का जिस्म मेरे बाँहो मे झूल रहा था और हम दोनो ही बिस्तर मे गिर गये थे ,

प्रेम वासना का रूप लेने लगी थी, मेरा लिंग जो रात भर सुस की योनि मे रगड़ खाकर आया था और पहली बार ये सब करने के कारण छिल गया था वो फिर से अपनी सबाब पर तनने लगा था , भाभी के सारी के उपर से ही मेरा लिंग उनके जाँघो के बीच रगड़ खा गया ..

“आहह..सोनू बाबू नाआहियीईई”

वो तड़पते हुए बोली लेकिन उनके जिस्म की गर्मी और उत्तेजना को मैं आसानी से समझ सकता था मैने और भी जोरो से अपने लिंग को गड़ाया , कपड़ो के बाहर से ही ऐसा करने के बावजूद वो उछल पड़ी थी ..

“नही बाबू ..” वो छटपटाई लेकिन मैने उन्हे अपने बाहों मे कसकर काबू मे कर लिया था और उनके होठों मे फिर से अपने होठों को मिला दिया ..

वो थोड़ी ही देर मे फिर से शांत हो गयी और मदहोशी के समुंदर मे गोते खाने लगी थी

“अरे बाबा रे यहाँ तो काम सूत्र चल रहा है “

किसी की आवाज़ से हम दोनो को मानो होश आया मैने पीछे पलट कर देखा तो वो रानी थी , हम दोनो को इस हालत मे देखकर उसका मूह भी खुला का खुला रह गया था ..

जितनी तेज़ी से मैं उठा उससे भी तेज़ी से भाभी उठ कर अपने कपड़ो को संभालती हुई भागी और तेज़ी से कमरे से निकल गयी …

भाभी के जाने के बाद रानी ने अपने कामीने अंदाज मे मुझे देखा

“अरे साला जिसे हम सतीसावित्री समझते थे वो बोकाची तो सन्नी लियोनी निकल गयी रे..”

वो जोरो से हँसी

“मामी ये आप क्या बोल रही हो , भाभी ऐसी नही है वो तो हम बस बहक गये थे “

उनके होठों मे फिर से एक कमिनी मुस्कान खिल गयी

“कभी हमारे साथ भी बहक जाओ बबुआ .. जवानी जिला गाज़ियाबाद हुई जा रही है हमे भी जाऊनपुर पहुचा दो मेरे फँटमवा “

उन्होने अपने निचले होठों को बड़े ही सेक्सी अंदाज मे अपने दांतो मे फसाया ..

“मामी आप ना “ मैं अपनी उत्तेजना को बड़ी मुश्किल से रोक पा रहा था

“अरे तेरी मामी की मा की चुद , कितनी बार बोला तुझे मैं तेरी मामी नही हू”

अब तो बात मेरे भी कंट्रोल से बाहर हो रही थी, मैं उनके पास आकर उनके लहँगे के उपर से ही उनकी योनि को अपने हाथो मे भर लिया ..

“बहुत गीली हो रही हो मामी आज तुम्हारी योनि फाड़ ही देता हू “

मेरी बात सुनकर रानी के चेहरे मे चमक आ गयी , और मैने उन्हे उठाकर सीधे बिस्तर मे डाल दिया

“भाँझा चेल हमारी फ़राई फुडिया ..” वो गाना गाने लगी

“इसका मतलब क्या हुआ “

मुझे कुछ समझ नही आया और वो जोरो से हसने लगी

“इसका सबदार्थ है की मेरा भांजा आज मेरी फराई पूड़ी अर्थात फटी हुई योनि को चोदेगा “

उनकी बात सुनकर मुझे जोरो से हँसी आ गयी

“मामी आप इतनी सारी बोलियो मे क्यो बात करती हो सीधे सीधे हिन्दी काहे नही बोलती “

वो मेरे आँखो मे देखने लगी

“कहे ना छोरे हमारी चुद मे लगी है आग से , तो हमसे ना होवत है सीधी बात से .. समझा सी..”

और उन्होने अपन घाघरा निकाल कर फेक दिया …

और फिर
 
रात भर सुस और फिर सुबह सुबह रानी के मज़े लेने के बाद ऐसा लगा जैसे पूरा जिस्म ही खुल गया हो ..लग रहा था जैसे अपुन ही भगवान है

सेक्स मे इतना आनद आता है इसका तो मुझे कोई इल्म ही नही था , लेकिन जैसे कहते है ना की हर चीज़ का दो पहलू होता है ..

वही हाल यहाँ भी था एक तरफ़ सेक्स का मज़ा होता है तो दूसरी तरफ़ सेक्स की लत ..

सेक्स के मज़े की लत भी कितनी परेशान करने वाली हो सकती है इसका अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है की पूरी दुनिया ही सेक्स के पीछे दीवानी है

और मेरा भी यही हाल हो रहा था जवानी का जोश तो था ही साथ ही मादक हसिनाओ का संग भी तो साला ये बुखार जल्दी तो उतरने वाला नही था ..

कॉलेज जाते ही पहली नज़र ही सुस पर पड़ गयी , मैने कोशिस की की मैं थोड़ा शरमाऊं लेकिन यकीन मानिए शर्म का नामोनिशान मेरे जहाँ मे कही नही था , वही उसे देखते ही मेरा लिंग अगडाई लेने लगा , वो भी कामिनी मेरे पास इठलाते हुए आई ..

“बेबी सुबह जल्दी चले गये बिना बताए “

असल मे वो इतनी थक गयी थी की मैने उसे उठाया भी नही था

“अब यहाँ तो बेबी मत बोलो “ शर्म तो नही थी लेकिन हल्के से मैं झेप ज़रूर रहा था

“ओह मेरे बेबी को डर लग रहा है ”वो हल्के से खिलखिलाई

“तेरा बेबी किसी से नही डरता समझ गयी , और क्या बेबी बेबी लगा रखा है , देखा रात मे मैं बेबी का बाप हू ”

मैने तो ऐसे ही बोल दिया था लेकिन सुस जोरो से हंस पड़ी

“यू और टू फन्नी ”

“सो हूस युवर दादी ??”

“ओफ़कौरस यू और बाआबयययी “

उसने बड़े ही मादक आवाज़ मे कहा

“हुम्म लेकिन जो लड़की मुझे फटीचर कहा करती थी वो अचानक बेबी बोलने लगे तो दुनिया वाले क्या समझेंगे ”

मेरी बात सुनकर सुस हंस पड़ी

“व्हाट दा फक .. दुनिया वाले ..?? सीरियस्ली ..?? तुम ये सब मानते हो ”

उसकी बात से मुझे भी अपने कहे का आभास हुआ मैं थोड़ा ज़्यादा फिल्मी हो रहा था

“अरे मा छुड़ाए दुनिया वाले लेकिन कम से कम मेरे दोस्तो की तो फ़िक्र है मुझे ”

“ओके ओके सबके सामने नही कहूँगी , ऐसे भी इससे तुम्हारी नेहा जो तुमसे नाराज़ हो जाएगी … क्यो ??”

सुस ने मुझे थोड़े अजीब निगाहो से देखा

“कम-ओंन यार .. नेहा ईज़ माइ गुड फ्रेंड “

“अब मुझे चूतिया ना बनाओ उसकी आँखो मे दिखता है की वो तुमसे प्यार करती है ”

अब सुस की इस बात का मेरे पास कोई जवाब अभी तो नही था

“ओके ओक और हा मैं नही चाहता की हमारे बीच जो भी हुआ वो अभी किसी और को पता चले होप यू अंडरस्टॅंड “

सुस ने हा मे सर हिलाया , लेकिन वो सुस थी….. वो मेरे पास आई और मेरे जाँघो के बीच अपना हाथ घुसा कर मेरे लिंग को थाम लिया

“ऐसे कॉलेज बाथरूम मे सेक्स करने का मज़ा ही कुछ अलग है “

उसके इस हरकत से मैं बुरी तरह से डर गया , हम कॉरिडर मे ही खड़े थे और अभी कई लोग वहाँ से आ जा रहे थे ..

मैने इधर उधर नज़र घुमाई ऐसे कोई हमारे पहचान का तो नही था

“पागल हो गयी हो क्या ..”

मैं सुस का हाथ वहाँ से हटाया

“हा मेरी जान जब से तुम्हारा लिया है तब से खुजली और भी बढ़ गयी है “

उसके होठों मे एक मादक सी मुस्कान आ गयी , तभी मैने अक्की और नेहा को आते हुए देखा

“ओके शाम मे आता हू ..”

सुस का चेहरा खिल गया था

“ओके बेबी “

उसने जाते जाते मेरे गाल मे एक किस भी दे ही दिया , अक्की ने शायद इस पर कोई ध्यान नही दिया लेकिन नेहा दूर से इसे देख रही थी उसकी चाल से पता चल रहा था की उसे इस बात पर कितना धक्का लगा है ..

उसकी स्पीड भी कम होने लगी , उसके आँखो मे गुस्सा साफ साफ दिख रहा था जब वो थोड़ी और पास आए तो समझ आया की उसके आँखो मे आँसू के कुछ बूँद साफ साफ झलक रहे थे , लेकिन मेरे पास आने से पहले ही उसने उसे पोंछ लिया ..

नेहा की ये हालत देखकर मेरे दिल मे एक दर्द सा उठा ..
 
आँखो मे लगाए चस्मे मे उसका मासूम चेहरा और भी मासूम लग रहा था , वो एक सामान्य सी फ्रोक मे थी जिसपर फूल ही फूल बने हुए थे , नाज़ुक गुलाबी होंठ थोड़े फड़फडाने लगे थे और चस्मे के बाजू से आँखो मे आने वाली आँसू की बूँद धूल कर गालो तक आ गयी थी , उसने हल्के से सिसकते हुए उसे पोंछ लिया..

“हे ब्रो “

अक्की मेरे गले से लग गया ..

फिर अचानक उसका ध्यान नेहा के उपर गया

“हे तुझे क्या हुआ रो क्यो रही है “

अक्की ने थोड़े आश्चर्य से कहा

“मैं कहा रो रही हू “

नेहा चाह कर भी उस दर्द को नही संभाल पा रही थी , उसका भरा हुआ गला ही ये बता रहा था की वो रो रही थी

“अरे यार तुम तो साफ साफ झूठ बोलने लगी हो ,तुम्हारा गला भरा हुआ है ,आँखो का काजल उजडा हुआ है सॉफ दिख रहा है की तुम रो रही हो”

अक्की ने किसी जासूस की तरह की चीज़ो को एक्सप्लेन किया था ,

नेहा ने एक बार मेरी ओर देखा और फिर अक्की की ओर देखा

“मैं नही रो रही हू समझे “

और वो सीधे निकल गयी

“अब इसे क्या हो गया ब्रो “

अब मैं अक्की से क्या कहता की इसे क्या हुआ है ????

सभी लोग क्लास मे थे लेकिन नेहा अभी तक क्लास मे नही आई थी

“अबे नेहा कहा है आज ?“

अज्जु ने अक्की से पूछा

“पता नही यार मेरे साथ ही तो आई थी फिर कही चली गयी मुझे लगा की क्लास मे आई होगी या फिर टॉयलेट गयी होगी , थोड़ी परेशान दिख रही थी क्यो अंकित ??”

अब तो मुझे नेहा की और भी चिंता होने लगी थी क्लास शुरू होने मे थोड़ा ही समय बचा था और नेहा अभी तक क्लास मे नही पहुचि थी

“रूको मैं देखता हू “

ये कहते हुए मैं अपना बॅग वही छोड़कर क्लास से निकल गया और सीधे गार्डन मे चला गया , मैने नेहा को दुखी होने पर एक कोने मे आके बैठते हुए देखा था , और मेरे सोचे हुए अनुसार सच मे नेहा एक कोने मे बैठी हुई थी ….

वो रो नही रही थी बल्कि हल्के हल्के ही सूबक रही थी , मैं थोड़ी देर तक झाड़ियो से छिपकर ही उसे देखता रहा और फिर उसके बाजू मे जाकर बैठ गया …

“जब प्यार करती ही हो तो कह क्यो नही देती “

मेरे होने के आभास से वो चौक गयी …

“तुम??? मुझे अकेला छोड़ दो मेरा मूड ठीक नही है “

उसने थोड़ा चिड़ते हुए कहा

लेकिन मैं बस मुस्कुराते हुए उसे देख रहा था

“दोस्त दुख मे छोड़ कर नही जाते बल्कि साथ रहकर साथ देते है “

उसने अजीब निगाहो से मुझे देखा

“लेकिन दर्द तो उसे ही मिलता है ना जो उसे झेल रहा हो , पास बैठने वाले को दिल का हाल कैसे पता होगा “

“अगर बताओगी तो क्यो नही पता चलेगा “

“शब्द कभी फेल्लिंग्स को बता सकते है क्या “

वो उठ कर जाने को हुई लेकिन मैने उसका हाथ थाम कर उसे नीचे बैठा दिया

“क्या कर रहे हो “

वो चिड कर गुस्से से बोली , लेकिन मैं अब भी मुस्कुरा ही रहा था

“नेहा … मुझे पता है की तुम्हारे दिल मे ये दर्द क्यो उठ रहा है.. लेकिन मैं तुम्हे एक चीज़ बता दूं की सुस सिर्फ़ मेरी अच्छी दोस्त है , मेरा प्यार नही “

मेरी बात सुनकर नेहा के चेहरे के भाव अचानक से बदल गये थे , जैसे अचानक से कोई बड़ा बोझ उसके उपर से हट गया हो , थोड़ी देर तक वो कुछ समझ ही नही पाई और बस मुझे देखते रह गयी जैसे जैसे उसे मेरे बोलने का मतलब समझ आते गया उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान खिलने लगी … वो मुस्कान इतनी हल्की थी की बहुत ही गौर से देखने पर ही पता चलता था की वो मुस्कुरा रही है , असल मे ये इसलिए था क्योकि वो अपने चेहरे से ख़ुसी के भाव को छुपाने की कोसिस कर रही थी , लेकिन मन की ख़ुसी तो बाहर आने को बेताब थी….

उसने अपने एग्ज़ाइट्मेंट को बड़े ही मुश्किल से छिपाते हुए कहा

“तो मैं क्या करू , मुझे ये क्यो बता रहे हो “

“अरे क्या तुम्हे फ़र्क नही पड़ता की सुस मेरी क्या है “

मैने उसकी आँखो मे देखते हुए कहा , अब तक उसके चेहरे की मुस्कान स्पष्ट हो चुकी थी .

“मुझे भला क्यो फ़र्क पड़ने लगा , तुम कुछ भी करो और वो कुतिया कुछ भी करे “

जिस तरह से उसने सुस के लिए कुतिया शब्द का प्रयोग किया था मैं जोरो से हँसे बिना नही रह सका
 
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