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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

रीमा - मेरे से ऐसी बाते न करो |

आदमी - क्या करी मैडम, आपको देखकर जो अन्दर गुबार उठ रहा है, वो आचा है बातो से निकल जाये कही और से बहकर पंहुच गया तो मै भी खुद को संभल नहीं पाउँगा |

रीमा - तुम सब मर्द एक जैसे ही होते हो |

आदमी - आपकी कमर पर स्प्रे करना है उलटा होना पड़ेगा आपको |

रीमा ने झटके से बाकि बची चादर भी खुद के जिस्म से हटा कर दूर का दी, और हल्की नाराजगी से - लो करो स्प्रे |

रीमा को फिर से नंगा देख अब उसके लिए खुद को काबू में रख पाना बहुत मुश्किल था | उसने के गहरी साँस ली |

रीमा - अब खुस , करो स्प्रे |

उसने रीमा को हाथ पकड़कर आराम से उल्टा लिटाया और स्प्रे कर दिया |

रीमा अंदर ही अंदर दर्द दहशत और और संशय से भरी हुई थी वह उसे इस समय दर्द के अलावा और कुछ महसूस नहीं हो रहा था हालांकि वह यह समझ रही थी वह पूरी तरह से नंगी है और वह आदमी उसे देख रहा है लेकिन इस समय दर्द की पीड़ा से दिमाग बहुत परेशान थी उस आदमी ने दवा लगाने के बाद उसने रीमा को उसी तरह से लेटे रहने दिया वह ट्यूब स्कप्ररे उठकर थैले में रखने चला गया | उसके बाद में वह रीमा के लिए एक गिलास जूस लेकर आया - इसे पी लो मैडम |

रीमा ने उल्वोटा लेटे लेटे ही थोडा सा सर उठाकर गिलास का जूस पी लिया उसके बाद वही चादर से रीमा का नंगा जिस्म ढक दिया |

| रीमा उस आदमी की शराफत से उसकी कायल हो गई कितना शरीफ आदमी है एक नंगी औरत की न केवल मरहम पट्टी कर रहा है बल्कि उसे उसने चादर ओढ़ा दी है मर्द ऐसे भी होते हैं क्या इसके अंदर इच्छा नहीं है मुझे देख कर के मुझे चोदने की |

आदमी बोला - मैडम आप जिसके चंगुल से निकल कर आई हैं वह बहुत ही पावरफुल आदमी है मैं कुछ देर के लिए कुछ काम से बाहर जा रहा हूं और बाहर से में ताला लगा दूंगा आपको दवा दे दी अब आप आराम करो |

पानी नीचे आपके पास रख दिया है अगर आपको भूख लगती हो तो किचन फल रखे हुए हैं और मैं तो 3 घंटे बाद आऊंगा तब तक आप आराम से सो जाइये |

इतना कहकर उस आदमी ने एक जैकेट अपने शरीर पर डाला और एक रुमाल से अपने मुंह को बांध लिया और एक गन निकाल कर अपनी कमर में लगा ली | तेजी से कमरे की लाइट बंद करके बाहर निकल गया |

रीमा गन देखकर डर गयी थी लेकिन जैसे ही वह बाहर निकल गया रीमा सोचने लगी कौन है यह यहां में मुझे यहां उठाकर क्यों लाया है आखिर इसको क्या जरूरत थी मुझे यहां लाने की .............................................रीमा के दिमाग में हजारों थे और साथ ही साथ में वह भगवान को शुक्रिया भी अदा कर रही थी कि आज इतने बड़े हादसे के बाद वह जिंदा भी बच गई थी इसी तरह की उधेड़बुन में खोई हुई थी रीमा की आंख बंद होने लगी | दवाएं अपना असर करने लगी थी और दवाओं के असर के कारण रीमा धीरे-धीरे गहरी नींद के आगोश में चली गई |

इधर अनिल के कहने पर पुलिस ने पूरे शहर पूरे कस्बे में नाकाबंदी कर दी थी हर आने-जाने वाले पर निगाह रखी जा रही थी और उसको चेक किया जा रहा था लेकिन फिर भी रीमा कोई अता-पता नहीं था इधर सूर्यदेव हैरान था जब स्कूटर यहीं पड़ा है तो फिर रीमा अचानक यहां से कहां गायब हो गई जब पुलिस वालों ने उसे बताया कि यहां पर एक भालू रहता है जो लोगों को यहां से उठा ले जाता है रात में तो वह बहुत जोर से ठहाका मार के हंसा - मुझे क्या चुतिया समझ रखा है लेकिन रात में जंगल की छानबीन नहीं करवा सकता था आखिरकार उसने सुबह तक इंतजार करने का फैसला किया |

इधर रीमा काफी देर तक गहरी नींद में सोती रही लेकिन उसके बाद में एकदम से दरवाजे पर जोर जोर से दरवाजे को पीटने की आवाज आई | दरवाजा इतनी जोर से पीता जा रहा था कि घहरी नीद में सो रही रीमा की आंखों से खुल गई वह अभी भी दवाओं के गहरी नशे में थी इसलिए उसे कुछ समझ में नहीं आया क्या हुआ लेकिन उसे पता चला कि दरवाजे पर कोई तेजी से पीट रहा है उसकी नशे की नींद जल्दी से टूट गई | कुछ देर तक दरवाजे को पीटने के बाद में वह आवाजें आनी बंद हो गई ऐसा लग रहा था जैसे वह कहीं आगे बढ़ गए थे |

रीमा हैरान थी कि सूर्य देव के आदमी क्या यहां भी पहुंच गए इतना ताकतवर है आदमी इस कस्बे में | रीमा डर गई क्या सूर्यदेव के आदमी तो नहीं आ गए, उनको मेरी जगह का पता चल गया .....वह काफी डर गई थी उसने अपने आपको चद्दर के अंदर ढक लिया था लेकिन अगले ही पल उसके मन में संतोष था कि दरवाजा तो बाहर से बंद था उन आदमियों की आवाज धीरे-धीरे कम होती गई और थोड़ी ही देर बाद में दरवाजे पर फिर से दस्तक हुई और दरवाजा खुला तेजी से वह आदमी जो रीमा को यहां लेकर आया था अंदर आया उसने एक चाबी निकाली और फिर से दरवाजा बंद करके बाहर निकल गया और ताला लगा दिया | रीमा को कुछ समझ में नहीं आया वह इधर-उधर दिमाग दौड़ाती रही लेकिन उसके कुछ पल्ले पढ़ा ही नहीं| काफी देर बाद जब फिर से पीछे से हल्की सी आवाज आई तो रीमा ने गर्दन घुमाकर कर देखा तो वही आदमी फर्श की दरी को खिसकाकर के नीचे से निकल कर के ऊपर आ रहा था |

रीमा हैरान थी उसके आंखे ये नजारा देखकर पलक झपकाना भूल गयी |

आदमी - मैडम जी हैरान मत होइए पीछे मैंने ४ फुट की सुरंग बना रखी है इमरजेंसी के लिए, ये मेरे घर के 50 मीटर दूर पीछे खुलती है वही से आ रहा हूं | सूर्य देव के आदमी पूरी बस्ती में कुत्तों की तरह घूम रहे हैं और हर जगह आपको सूंघ रहे हैं आप बिल्कुल चिंता मत करो आप पूरी तरह से आराम करो आप यहां पूरी तरह से हो सुरक्षित हो आज रात में लाइट नहीं जलाएंगे कैंडल में ही सारा काम चलाएंगे | बाहर से लगे ताले के बाद अन्दर बल्ब जलाना ठीक नहीं होगा | कही से भी रौशनी की झलक पाकर भी वो आ सकते है | चारो ओर खतरा ही खतरा है, कोई भी गलती जानलेवा हो सकती है |

इतना कह करके उसने एक मोमबत्ती जला दीजिए इसके बाद उसने आगे बोलना शुरू किया - मैडम पर बुरा ना माने तो मैं आपका नाम पूछ सकता हूं

रीमा धीरे से बोली - रीमा |

रीमा - तुमारा नाम क्या है |

जितेश - जितेश कहते है इस गुलाम को, वैसे सूर्यदेव आपके पीछे क्यों पड़ा है | क्या दुश्मनी है आपसे उसकी |

रीमा - पता नहीं, बस मेरी ख़राब किस्मत मुझे यहाँ ले आई है और कुछ नहीं, दो दिन पहले तक मै इस शख्स को जानती तक नहीं थी |

इतना कहकर रीमा सिबुकने लगी |

जितेश - अरे मैडम रोइए मत, मुझे बुरा लग रहा है |
 
रीमा ने मुहँ फेर लिया लेकिन उसकी आँखों की धारा नहीं रुकी | जितेश पास आया रीमा के गाल पर लुढ़क आये आंसू पोछने लगा | आंसू पोछते पोछते कब रीमा के अनिर्वचीय सौन्दर्य में खो गया उसे भी पता नहीं चला | जितेश के पास आने से उसका सहारा लेकर रीमा उठकर बैठ गयी | उसकी चादर उसके बदन पर से खिसक गयी | जितेश की आंखे जो अभी रीमा की आँखों और चेहरे के सौन्दर्य का रस पान कर रही थी |

अब रीमा की गर्दन के नीचे उसके प्राकृतिक गुलाबी गोरे बदन को निहारने लगी | इस हालत में भी रीमा के बदन की चमक और खूबसूरती बरकरार थी | वही चमकता दमकता बदन | वही उठे सुडौल ठोस स्तन और उसकी उन्नत ऊँचाइयों की नुकीली चोटियाँ, चाहे जितना जीभर करके देखो लेकिन जी नहीं भरेगा | सुडौलता सुन्दरता का पैमाना थे रीमा की उन्नत उठे हुए स्तन | कौन स्त्री अपने भरे हुए सीने के हुस्न में खोये हुए मर्द को देखकर अन्दर ही अन्दर आनंदित नहीं होती | रीमा का दुःख और आंसू पीछे रह गए | वो अपने बेमिशाल हुस्न को देखकर चकाचौंध हुई जितेश की जितेश की आँखों को देखने लगी | सच क्या मांसल ठोस तने हुए उरोज थे रीमा के, जितेश का मन किया बस बच्चा बन जाये और सारी दुनिया को भूल अपने ओंठो से रीमा के हुस्न के रस को उसकी उन्नत नुकीली पहाड़ियों की चोटियों से बस पीता रहे पीता रहे | उसका मन था बस रीमा के मांसल उरोजो को हाथ में भरकर उनकी मालिश करने लगे और उसकी चोटियों की किसमिस को अपनी सख्त उंगलियों से मसल डाले | लेकिन न वक्त ऐसा था न माहौल, रीमा का जैसे ही अपने कमर में हलके दर्द का अहसास हुआ उसका बहकता मन हकीकत में लौट आया और उसके रुक गए आंसू ने फिर धार पकड़ ली |

जितेश को लगा रीमा की दुखती रग छेड़ दी | जैसे वो रीमा के हुस्न में खो गया था उसी तरह झटके से बाहर आया | उसको पता चल गया था उसके जांघो के बीच में कुछ हरकत होने लगी थी इससे पहले कुछ भी ऐसा हो जो उसे रीमा के सामने असहज कर दे वो खुद ही रीमा से दूर हो गया | जितेश - मैडम अब आप सेफ है तो रोना धोना छोड़िये | मै खाना ले आया हूँ, बस नहा लू फिर मिलकर खाते है |

इतना कहकर उसने कपड़े उतारे और चड्ढी पहन बाथरूम की तरफ जाने को तौलिया उठाने चला | चड्ढी के उभार पर नजर पड़ते ही सिसकती रीमा के मुहँ से एक ठंडी आह निकल गयी | मन में बस एक ही तस्वीर उभर गयी | ये तो रोहित के लंड की तरह तगड़ा मोटा है | जब मुरझाया लंड इतना मोटा तगड़ा है तो खड़ा होने पर तो चूत के लिए कहर बन जाता होगा | रीमा की नजरे कुछ देर उसकी चड्ढी पर अटकी रही फिर उसने नजर हटा ली | वो अपने आंसू पोंछ खुद को संयमित करने लगी | वो नहीं चाहती थी की जितेश को ये पता चले की वो कहाँ देख रही है और उसको शर्मिंदा होना पड़े | जितेश को भी लगा शायद उसकी चड्ढी उसकी अन्दर उठे उफान की चुगली कर रही तो उसके झट से तौलिया लपेट ली | इतना कहकर वो बाथरूम में घुस गया |

बाथरूम से जितेश - मैडम तो बताइए न अपने बारे में, वो कहते है न बाटने से दुःख बटता है |

रीमा अपनी पलकों की नमी पोछती हुई - अपनी कहानी बताने लगी | कैसे ऑफिस से कुछ लोगो ने उसे किडनैप किया फिर एक जंगल में उसे बांधकर रखा | कैसे जग्गू और उसके चमचो का लंड चूसकर उसने खुद को आजाद कराने की कोशिश की | फिर किसी ने उसे फिर से किडनैप कर लिया और जब आँख खोली तो एक गोदाम में पाया | फिर वहां से गार्ड को कैसे रिझाकर पटाकर, उसका लंड चूसकर, उसका लंड अपनी गांड में लेकर कैसे वहां से भागी |

जितेश - तो अब समझ में आया सूर्यदेव आपके पीछे क्यों पड़ा है |

जितेश रीमा के गुलाबी जिस्म के बारे में सोचते हुए अपने लंड को सहलाते हुए बोला - मानना पड़ेगा बहुत बोल्ड और हिम्मतवाली है मैडम | काफी खुले दिमाग की मालकिन है ..................चलती फिरती सेक्स गॉडेस, किसी भी तरह का सेक्वस आपके लिए वर्जित नहीं वरना कौन ऐसे किसी अनजाने लंड को पिछवाड़ा देना बहुत हिम्मत का काम है |

रीमा - लोग तो आजादी के लिए जान दांव पर लगा देते है, मैंने भी वही किया जो सही लगा | चूत का वादा किया था लेकिन सिर्फ आजादी की कीमत पर ............................क्या करती मै उस समय, प्रोटेक्शन नहीं था, तो चूत का सवाल ही नहीं था इसलिए मैंने कहाँ पीछे कर लो |

अन्दर बाथरूम में जितेश अपना लंड को कसकर मसलता रगड़ता हुआ बोला - पीछे तो काफी तकलीफ होती होगी |

रीमा - एक बार जब हवस की गर्मी चढ़ जाती है बदन पर .................फिर क्या तकलीफ क्या दर्द |

तभी रीमा को अहसास हुआ कहाँ वो अपनी कहानी सुनाते सुनाते लंड चूत की बातो तक पंहुच गयी | उसे लगा कुछ जितेश के बारे में भी जानना चाहिए |

रीमा - मैंने तो अपनी कहानी सुना दी तुम भी बतावो अपने बारे में |

जितेश हकीकत में लौटा और अपने तन रहे लंड पर ठंडा पानी डालता हुआ बोला - क्या जानना चाहती है मेरे बारे |

रीमा - सब कुछ, जैसे मैंने तुम्हे अपने बारे में सब कुछ बता दिया वैसे ही सब कुछ बतावो |
 
जितेश - सब बताऊंगा मैडम लेकिन अभी मेरे दिमाग में कुछ सवाल है |

रीमा - पुछो |

जितेश - सूर्यदेव आपके पीछे क्यों पड़ा है, कोई तो कारण होगा |

रीमा मायूसी से - सूर्य देव को लगता है कि जग्गू को मैंने मारा है इसलिए वह जग्गू के बाप के विलास के सामने मुझे पेश करके अपनी गर्दन बचाना चाहता है विलास के साथ जग्गू की दुश्मनी तो तुम्हें पता ही होगी|

जितेश - जग्गू विलास का बेटा ही है |

रीमा - था |

जितेश - तो सूर्यदेव को लगता है की तुमने जग्गू को मारा है और जब वो तुम्हे विलास को सौंप देगा तो विलास उसकी जान बक्श देगा |

रीमा चुप रही |

जितेश - फिर तो आप बुरा फंसी है मैडम |

जितेश - विलास ना केवल बड़ा गुंडा रह चूका है बल्कि उसका राजनैतिक रसूख भी बहुत है ऐसे में वो अपने बेटे की मौत का बदला लेने के लिए कोई कोर कसर बाकि नहीं छोड़ेगा | आप तो बड़े बड़े माफिया लोगो के गैंगवार में फंस गयी है |

रीमा बोली - मेरी फूटी किस्मत ही ऐसी है |

जितेश - कोई बात नहीं आप यहाँ पूरी तरह से सुरक्षित हैं आपको चोट लगी है तो आप आराम करो ......दवाइयों खाने के बाद अब आपको दर्द तो नहीं हो रहा |

जितेश बाथरूम से बाहर आ गया था | उसके बदन पर एक पतला तौलिया लपेटा था | पूरा बदन पानी से गीला था | उसने कसकर कमर में तौलिया लपेट रखी थी | उसका लंड अभी ठीक से मुरझाया नहीं था इसलिए उसके लंड का उभार और साइज़ दोनों उस तौलिये से नुमाया हो रहे थे |

रीमा की नजर जितेश के बदन पर पड़ी | क्या मर्दों वाली ठोस बॉडी थी | हट्टा कट्टा गबरू जवान | चौड़ा सीना मजबूत कंधे और सपाट पेट | हाथो के मसल्उस देखकर लगता है जैसे रोज कसरत करता हो | उसकी तौलिये के उठान को देखकर लग रहा था जितेश न केवल बदन से असली मर्द है बल्कि उसकी मर्दानगी नीचे भी उतनी ही है | रीमा ने असल में जितेश का लंड नहीं देखा था लेकिन पहले चड्डी और अब तौलिये से बने उभारो से अंदाजा लगा रही थी | रीमा के दिमाग में रोहित और अनिल के मुसल लंड तैर गए | मन ही मन में उसने सोचा - ये तो रोहित से भी उन्नीस है | मुझे तो लग रहा था जीजा जी के मुसल लंड जैसा लंड और किसी का हो ही नहीं सकता लेकिन ये तो जीजा जी और रोहित दोनों को टक्कर दे रहा है | हाय मै तो मर जाउंगी | अगले ही पल रीमा ये क्या सोच रही है......................क्या पूरी की पूरी रंडी बनकर ही दम लेगी | हर जगह तुझे बस लंड ही नजर आते है | दिमाग और अपनी हवस की लालसा को काबू में रख | रीमा जब फैक्ट्री से भागी थी तो वो अतृप्त थी और उसके अन्दर वही आग लगी हुई थी | वोखुद को कोस रही थी, कैसा मुया बदन है , सर फूटने से बचा है हड्डियाँ टूटने से बची है और इसको है बस चुदास चढ़ी हुई है | हाय मै क्या करू जितेश को देखकर मेरी चूत पनिया गयी है तो इसमें मेरी क्या गलती | सारी गलती तेरी ही है , तुझे उसकी इंसानियत नहीं दिखती मुई | बस उसका लंड नजर आ रहा है | वो सीधा शरीफ इंसान है यहाँ कुछ मत करना रीमा | मेरा मन मेरे काबू में नहीं है | उस गार्ड से गांड फड़वा की जी नहीं भरा अभी जो रंडापा करना बाकि है | रीमा के अन्दर तूफ़ान मच गया | रीमा बस उसके भीगे और बलिष्ट बदन को एकटक देखते हुए विचारो में खोयी थी |

जितेश रीमा की तन्द्रा तोड़ता हुआ - मैंने पुछा आपका दर्द कैसा है |

ऐसा लगा जैसे किसी ने खुली आँखों से सोते रीमा को जगाया हो |

रीमा अपनी दिमाग के भावो को सोचकर झेंप गयी | कही जितेश ने उसकी वासना का अंदाजा भी लगा लिया तो कितनी शर्म आएगी उसे | रीमा ने खुद को संभाला |

रीमा - अब पहले से बहुत बेहतर है दर्द काफी हद तक कम हो गया है और कमर भी अब नहीं दुख रही है तुमने मेरी जान बचाई इसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया |

जितेश - मैडम इसमें शुक्रिया की कौन सी बात है यह दुनिया में एक हाथ से ले दूसरे हाथ से दे, मैंने आपकी जान बचाई है आप मेरे लिए कुछ ना कुछ बदले में कर देना हिसाब बराबर हो जाएगा |

रीमा ने उसे शंका की नजर से देखा वह समझ नहीं पाई कि उसका क्या कहने का क्या मतलब है थे इसलिए वह उसके बातों को समझने की नहीं मैंने कोशिश करने लगी | हालाँकि उसका दिमाग बस चुदाई तक ही सोच पाया | उसे लगा जितेश उसकी जान बचाने के बदले उसको चोदने का ख्वाइस मंद है |

जितेश - मैडम ग्यारह बज गए है खाना खाया जाये |

रीमा - मुझे फ्रेश होना है | बहुत धुल मिट्टी लगी है बदन पर |

जितेश - तब भी तो बिलकुल हुस्न परी लग रही हो |

रीमा - तुम सब मर्द एक जैसे होते हो, चिकनी चुपड़ी बाते करवा लो, .............. बाते न बनावो, मुझे बाथरूम जाना है |

जितेश मुस्कुराता हुआ - रीमा को उठाने आ गया | उसने रीमा को एक शर्ट पहनाई | औरत का नंगा बदन देख कर अन्दर की हवस कब उसके दिलो दिमाग को कब्जे में ले ले | कुछ पता नहीं इसलिए उसने रीमा को अपनी एक शर्ट से ढक दिया | हालाँकि कमर के नीचे वो पूरी तरह नंगी थी | शर्ट की लम्बाई रीमा के चुताड़ो को ढके ले रही थी | रीमा जितेश की आँखों में देखती रही फिर मुहँ फेर लिया | जितेश भी रीमा की आँखों में छिपी गहराई में गोते लगाकर कुछ खोजने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसे कुछ मिला नहीं | इस हालत में रीमा से कुछ अपेक्षा करना भी मानवता के हिसाब से गलत था | औरत का बदन भी तो हांड मांस का | उसे भी दर्द होता है तकलीफ होती है बीमारी होती है | औरत का दिल जीतना हो तो उसका ख्याल रखो ये बात तो वो अरसे पहले सीख गया था | उसे खुद को काबू करना आता था | रीमा ने उसके बदन में औरत की लालसा जगा दी नहीं तो वो तो इन सब के बारे में भूल ही गया था |

रीमा काफी हद तक ठीक थी, इसलिए उसने जितेश का सहारा नहीं लिया | शायद अन्दर एक ग्लानी थी कही वो कुछ गलत न समझ ले | हालाँकि उसके मन में सब कुछ उल्टा पुल्टा ही चल रहा था | वो बिना किसी सहारे के अपने पैरो पर चलकर बाथरूम तक गयी |

जितेश खुद के गीले बालो को पोछने लगा |

बाथरूम के अन्दर से कुछ देर बाद रीमा बोली - तुमने अपने बारे में कुछ नहीं बताया जितेश | तुम इस बस्ती के लगते तो नहीं हो |

जितेश - हां मैं यहां का नहीं हूं |

रीमा - फिर कहां के हो और तुम्हारी सूर्यदेव से क्या अनबन है

जितेश - मैं एक रिटायर्ड फौजी हूं |

रीमा हैरानी से - एक फौजी अपराध की दुनिया की इस बस्ती में क्या कर रहा है |

जितेश बोला - एक कहानी बहुत लंबी है कभी मैं भी सूर्यदेव के लिए काम करता था फिर एक बार एक काम को लेकर के झगड़ा हो गया और तब से हमारी राहें अलग हैं |
 
रीमा - रीमा तुम क्या काम करते थे सूर्यदेव जैसे गुंडे के लिए |

जितेश - मै एक कॉन्ट्रैक्ट किलर हूं मैडम मैं कांटेक्ट पर सूर्यदेव के लिए लोगों को मारता था फिर एक बार उसने एक 12 साल की लड़की का मारने का ठेका दिया मैंने मना कर दिया, हालाँकि मैंने उसके पैसे भी नहीं लौटाए | तभी से सूर्यदेव और हमारे बीच में 36 का आंकड़ा चल रहा है मैं बच्चों को नहीं मार सकता ना ही मैं औरतों को मार सकता हूं | इसी बात को लेकर के सूर्यदेव भड़क गया था उसके लिए वह बिजनेस में कुछ इंपॉर्टेंट होगा लेकिन मैं किसी 12 साल की बच्ची का खून कैसे कर सकता हूं |

रीमाँ - तुम अभी भी ये काम करते हो |

जितेश - उसके बाद से मैं इस शहर के पुलिस वालों और दूसरे बड़े धन्ना सेठों के लिए खतरा बने लोगो को निपटाता हूँ |

रीमा यह सुनकर हैरान थी - तो तुम क्या अभी भी यही काम करते हो |

जितेश - हां काम तो अभी भी मैं यही कहता हूं लेकिन असल में यह मेरा काम नहीं था ना ही मैं यहां का हूं |

जितेश एक लम्बी ठंडी साँस लेकर - मै एक रिटायर्ड फौजी हूं या यूं कहिए कि जो एक ऐसा फौजी जिसे फ़ौज से निकाल दिया गया हो | रीमा - तो तुम्हें फ़ौज से क्यों निकाल दिया गया था

जितेश - लंबी कहानी है मैडम सुनाता हूं ....................मैं बहुत अच्छा फौजी था आर्मी में मै पैरा कमांडो था और बतौर स्नाइपर मेरी पोस्टिंग बॉर्डर पर हुई | वहां हम बॉर्डर पार की खबर के लिए लोकल लोगो से जासूसी करवाते थे |

हमारी बटालियन बदलती रहती है लेकिन लोकल वही के वही बने रहते है | अपने कामो से वो दोनों तरफ आते जाते रहते है | इसी का फायदा उठाकर हम उन्हें उधर की खबर लाने को कहते है बदले में उन्हें पैसा भी देते है और सुरक्षा का वादा भी |

जिस चौकी पर मेरी पोस्टिंग थी वही पास में एक गाँव था | वहां एक फिज़ा नाम की औरत रहती थी | उसके तीन बच्चे थे उसका पति उसे छोड़कर दुबई चला गया था | उसने वहाँ किसी और से शादी कर ली | फिजा के पास रोजी रोटी की समस्या आ खड़ी हुई तो उसने अपने आप को बेचना शुरू कर दिया | उसके चाल चलन को देख उसे गाँव से बाहर निकाल दिया गया | जब उसे गाँव से निकाला गया था उस समय बॉर्डर पर जो चौकी इंचार्ज थे उन्होंने उसे अपने छावनी के पास रहने के लिए एक छोटी सी जगह दे दी | बदले में फिजा ने अपना मस्त गदराया बदन उस इंचार्ज को सौप दिया | उसके बाद उसे बॉर्डर पार से खबरे लाने की ट्रेनिंग भी दी गयी | जाहिर सी बात है जो खबर एक आदमी जासूसी की दुनिया में बड़ी मुश्किल से निकाल पाता है वो एक औरत बस अपना ब्लाउज उतार कर निकाल लाती है | फिजा को तो चुदवाने में कोई हर्ज नहीं था | जल्द ही उसके गदराये बदन के हुस्न के कद्रदान उधर भी हो गए | उसके बाद फिजा ने एक से एक दुश्मन की खबरे हम तक पंहुचायी | फिजा के जलवे हो गए | फ़ौज से सीधा सोर्स होने से उसकी गाँव में भी धाक जम गयी | हालाँकि गाँव में सबको पता था ये एक नबर की रंडी है लेकिन अब फिजा के पास न केवल पॉवर थी बल्कि पैसा भी था | उसके बाद सैनिक बदलते रहे चौकी इन चार्ज भी बदलते रहे लेकिन फिजा का जलवा बरकारर रहा | उसकी चूत के दीवाने इंचार्ज से लेकर सैनिक तक सभी बने रहे और उसकी चूत सबके लिए उपलब्ध भी थी |

जब मेरी पोस्टिंग वहां हुई तो मेरा चौकी इंचार्ज संस्कारी ईमानदार और नियम का पक्का था | उसने फिजा के साथ फौजियों का उठना बैठाना बंद कर दिया | साथ ही फिजा को हिदायत दी अगर उसने किसी फौजी के सामने अपना जिस्म परोसा तो उसे मौत के घाट उतार दिया जायेगा | उसे सिर्फ खबरे लानी है और पैसे लेने है और घर लौट जाना है | फिजा को पैसे तभी मिलते जब्वो कोई मतलब की खबर लाती | फिजा अपने खर्चे बढ़ा चुकी थी | अब सैनिको से मिलने वाला चुदाई का पैसा बंद हो गया था | फिजा परेशान थी |

जितेश को बीच में टोकती हुई रीमा बोली - मेरी पीठ जरा गीले तौलिये से साफ़ कर दोगे जितेश |

जितेश उसी तरह से टॉवल में बैठा था - वैसे ही उठकर चला गया | रीमा पैर हाथ और चेहरा गीले तौलिये से पोंछ चुकी थी |

जितेश ने रीमा के हाथ से तौलिया ले लिया और रीमा से शर्ट के बटन खोलने को कहने लगा | रीमा ने बटन खोल दिए और शर्ट खिसकाकर हाथों पर ले आई | जितेश लम्बी सांसे भरता हुआ रीमा को पोछने लगा | थोड़ा सा आगे की तरफ झुककर शर्ट को सर के ऊपर से हाथो में ही फंसाए आगे सीने की तरफ ले आई | लेकिन आगे झुकने के कारन उसके चूतड़ सीधे जितेश की तौलिये से जा टकराए | और तब रीमा को जितेश के तनते मुसल का अहसास हुआ | लेकिन दोनों ने ऐसे जताया जैसे कुछ हुआ ही नहीं | रीमा और जितेश दोनों ही किसी असहज स्थिति से बचना चाहते थे लेकिन हवस की आग धीरे धीरे दोनों के बदन को सुलगाने लगी थी | इसलिए रीमा शर्ट उतार कर सीधे टब में उतर गयी |

इधर जितेश के तौलिये में कैद लंड में झटके लगने लगे | इससे बचने के लिए जितेश रीमा के सर की तरफ आ गया | रीमा उसकी गरम सांसो को अपने कानो से सुन सकती थी |

रीमा ही बोल पड़ी - आगे बतावो |

जितेश रीमा की पीठ और कंधे पर हलके हाथो से गीला तौलिया फिराता हुआ - इस बार हमारा चौकी इंचार्ज काफी सख्त मिजाज था इसलिए फिजा की दाल नहीं गल रही थी उसके खर्चे ज्यादा थे और उसके कमाई का जरिया सिर्फ हमारी तरफ से दिया जाने वाला पैसा ही था इसीलिए उसने हमारी चौकी यूनिट के सैनिकों पर अपना जाल फेंकना शुरू किया | यहां पर जो भी सैनिक चौकी पर पोस्ट होने के लिए आते थे वो अपनी बीबियो से दूर होते थे तो उन्हें भी चूत की ललक लगी रहती थी | इसीलिए फिजा भी उम्मीद कर रही थी कि यह नई यूनिट भी जो है उसके जिस्म के बदले सौदा करके उसे अच्छे खासे पैसे देगी लेकिन हमारी चौकी इंचार्ज एक अलग ही मिजाज का था और इसलिए फिजा की दाल नहीं कर पाई | अब हम सिर्फ उसे खबरें लेते थे और उन खबरों की कीमत के बदले ही हमसे जो कुछ पैसा देते थे उसी से ही फिजा का काम चलता था लेकिन उसके लिए वो नाकाफी था | यही से कमाए पैसो से उसने काफी अच्छा घर बनवाया था | पूरे गांव में मशहूर था कि फिजा फौज की रंडी है लेकिन फ़ौज के डर के कारण कोई भी फिजा को कुछ कह नहीं सकता था और ना ही फिजा की तरफ कोई आंख उठा कर देखता था |
 
फिजा को भी यह बात मालूम थी कि वह सब ठाठ बाट जो उसके हैं वह किस वजह से हैं लेकिन अब हमारे साहब के कारण उन सब पर असर पड़ने लगा था उसकी जैसी जैसी जरूरत थी उस हिसाब से उसको पैसे नहीं मिल रहे थे इसलिए फिजा के हाथ तंग होने लगे |

मेरे साथ एक और मेरा दोस्त था हम दोनों की यह फील्ड की पहली ड्यूटी थी | हमें बॉर्डर पर बतौर स्नाइपर दुश्मन को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी मिली थी | हम जवान थे, हमारी जवानी अभी कच्ची दहलीज निकल कर बस बाहर ही निकली थी और इससे पहले बहुत ज्यादा औरतों का अनुभव नहीं रखते थे | जैसे ही फिजा ने हमारे ऊपर डोरे डालना शुरू किया हम उसके दीवाने हो गए थे |

हमारी ड्यूटी 12 घंटे की होती थी हम जंगलों के झुरमुट में एक जगह पर अपनी पोजीशन लगा कर के जो है 8 से 10 घंटे 11 घंटे ड्यूटी करते थे फिजा हमारे लिए दिन में खाना लेकर आने लगी | 3 दिन खाना लाने के बाद में उसने जब अपने जिस्म को दिखाना शुरू किया, तो हमें भी मजा आने लगा | कभी वह पल्लू गिरा देती थी उसके बड़े बड़े फूले उरोजो हाहाकारी उरोज अपने ब्लाउज को फाड़ बाहर आने को बेताब हो जाते | कभी अपना लहंगा खींच लेती थी और अपनी गोरी जांघे दिखाने लगती | कभी तो सीधे सीधे अपनी जांघे फैलाकर उसी जगह देखने लगती थी |

मैं जवान था मुझ से रहा ना गया एक दिन मैं उसे अपनी झुरमुट से निकलकर सरकते हुए नीचे की तरफ गया और साथ में फिजा को भी खींच लिया और उसका लहंगा उतारकर फेंक दिया और अपने कपड़े भी एक झटके में उतार डाले | फिर उसे लगा चोदने | दाये लिटाकर बाये लिटाकर खूब चोदा | उसने भी खूब गपागप लंड लिया अपनी चूत में | फिर मै झड़ने को हुआ तो लपककर मेरा लंड अपने मुहँ में ले लिया |

एक बार चोदने के बाद उसे मन नहीं भरा तो मैंने उसे वही दोबारा चोदा | घोड़ी बनाकर चूतड़ हवा में उठाकर खूब हचक हचक के चोदा | एक नंबर की रंडी थी मजाल जो कही कराही या चीखी हो | गपागप मेरा लंड अपनी चूत में लेती रही | मै ठोकर पर ठोकर मारता रहा और वो बस अपना सर जमीन पर टिकाये, अपने चुताड़ो को घुटने के सहारे हवा में उठाये चुदती रही | बहुत ही मस्त गदराया भरा पूरा बदन था बिलकुल रुई के गद्दे की तरह नरम कोमल मांसल, भरपूर जवानी की आग में धधकता | बहुत मजा आया उसे चोदकर |

उसके बाद मै अपने कपड़े पहनने लगा | फिजा भी अपने कपड़े समेटने लगी लेकिन तब तक मेरा साथी आ गया | मेरे को देख कर के मेरे दोस्त की भी हिम्मत बढ़ी ..................मुझे देख मेरे साथी से भी नहीं रहा गया | उसका लंड उसकी पेंट से बाहर झूल रहा था | ये देख फिजा वही पर फिर से पीठ के बल लेट गयी और अपनी जांघे हवा में उठा दी | मैंने जल्दी से जाकर अपनी पोजीशन ले ली | बीच बीच में मै उसकी चुदाई देखने के लिए पीछे की तरफ गर्दन घुमाता था | उससे भी फिजा खूब जमकर चुदी | उसने भी दो बार फिजा को खूब हचक हचक के चोदा | एक बार सामने से एक बार पीछे से जैसे मैंने घोड़ी बनाकर चोदा था बिलकुल वैसे ही | उसके बाद उसने अपना लंड भी चुसवाया | फिर हम दोनों ने उसे हजार रुपये दिए, वो बोली कम है तो मैंने उसे अपनी तरफ से पांच सौ रुपये और दे दिए |

धीरे-धीरे यह सिलसिला चल निकला अब अक्सर हम फिजा को चोदते रहते थे इसके बदले में वो बॉर्डर से लाने वाली खबरें भी सबसे पहले हमें ही बताती थी | इसके बाद तो यह सिलसिला जैसे चल निकला अब फिजा को चोदना हमारा लगभग लगभग रोज का ही काम हो गया था और इसी के बदले फिजा को हम अच्छे खासे पैसे भी दे रहे थे |

कुछ दिन बाद एक दिन फिजा कुछ दिनों के लिए गायब हो गई और 3 दिन बाद लगभग वह फिर से वापस आई और जब वह खाना लेकर आई तो काफी दुखी लग रही थी | वो मेरे पास आने के बजाय थोड़ा दूर ही बैठ गयी |

मैंने इशारो में पूछा क्या हुआ | वो कुछ नहीं बोली | मै खिसकता हुआ नीचे की तरफ गया | मैंने उसके उभरे उरोजो को मसलते हुए पुछा - क्या हुआ |

वो आइस्ते से बोली - बॉर्डर पार गयी थी | सालो ने मेरी दुर्गति कर दी आगे भी पीछे भी | रात भर एक के बाद एक करके जानवरों को तरह चोदा | एक साथ दो दो ने आगे पीछे एक साथ किया | तब तक किया जब तक खून नहीं निकल आया | दो दिन से बिस्तर पर पड़ी थी | आज चलने फिरने लायक हुई हूँ |

फिर मेरे कान के पास आते ही मेरे कान में बोला - कि आज रात तुम पर हमला होगा तुम्हारी चौकी की लोकेशन उनको पता चल गई है शायद, वो कुछ बड़ा करने का प्लान बना रहे है |
 
मैं समझ गया था उसे आखिर वापस किस कीमत पर लौटने दिया है | उसके शरीर पर बने हुए जख्मो को देखकर मैं समझ गया था उसको मारा पीटा गया है मैंने फिजा को अपनी बाहों में थाम लिया और अपने सीने से लगा लिया | लेकिन जैसे ही मैंने ऐसा किया पीछे से एक सनसनाती हुई गोलियां फिजा के पीठ के बीच में धंस गई थी और दूसरी गोली मेरे कान को छूती हुई निकल गई थी |

हम दोनों जमीन पर लेट गए, उधर से गोलियाँ बरसने लगी | मेरे ऊपर की तरफ फिजा थी इसलिए सारी की सारी उसकी पीठ में धंस गयी लेकिन मेरे साथी को मौका नहीं मिला था सामने की तरफ से अंधाधुंध गोलियां चल रही थी और मेरे साथी को सिर को चीरती हुई एक गोली सीधे उसके पार हो गई | मेरे पैर में गोली लगी | किसी तरह से मैं नीचे की तरफ लुढ़कता हुआ आया | हमारे चारों तरफ खून ही खून था मुझे समझ में नहीं आ रहा था मैं फिजा को संभाल लूं या अपने दोस्त को आखिरकार किसी तरह से मैंने खुद की जान बचाई थी उधर से ताबड़तोड़ गोलियां कम से कम 20 मिनट तक चलती रही उसके बाद बंद हो गई |

दोनों ने चंद मिनटों में ही दम तोड़ दिया | कुछ देर बाद हमारे साथी आये | दुश्मन की चौकी पर भरी गोला बारूद से हमला किया गया |

चौकी की लोकेशन कैसे एक्सपोज हुई इस पर कोर्ट ऑफ इंक्वायरी बैठा दी गई थी जांच के बाद पता चला कि फिजा ने दुश्मन देश के लोगों को हमारी चौकी की जानकारी दी है उसने हमें डबल क्रॉस किया था और उसके साथ अनैतिक संबंध बनाने के कारण मुझे फौज से निकाल दिया गया था मैं अपनी बदनामी के चलते अपने घर नहीं जा सकता था घर में मां बाप तो थे ही नहीं एक बहन जी और एक भाई था दोनों अपनी दुनिया में मस्त हैं मैं उनके लिए किसी तरह की शर्मिंदगी का कारण नहीं बनना चाहता था इसीलिए मैं यहां इस बदनाम शहर में आ गया |

मुझे पता था पहले से ही यहां क्या होता है इसीलिए मैंने यहां पर रहकर के कॉन्ट्रैक्ट किलिंग शुरू कर दी |

जितेश रीमा को छोड़कर बाथरूम से बाहर आ गया था, रीमा भी पीछे से उसके साथ बाहर आ गयी | उसके बदन पर सिर्फ तोलिया लिपटी हुई थी उसके शरीर पर हल्की-हल्की बूंदे पूरे शरीर पर छाई हुई थी |

वो जितेश की तरफ घूमी और मोमबत्ती की हल्की रौशनी में उसका हट्टा कट्टा बदन देख करके रीमा को रोहित की याद आ गयी | उसको ऐसा लगा जैसे सामने रोहित ही खड़ा हो | रीमा के मन में भी एक बार उसको देखने की लालसा जाग उठी | वह चाहती थी इस समय जितेश तौलिया हटा दें ताकि हुआ जितेश को अंदर तक देख सके ..............जितेश को पूरा का पूरा देख सके जैसे कि उसने रीमा देखा हुआ है सर से लेकर पाँव तक उसके गोरे गुलाबी बदन का पोर पोर सब कुछ जितेश ने अपनी आँखों से दिलो दिमाग में संजो लिया था | जितेश ने एकटक उसको देखती रीमा की तरफ नजर दौडाई फिर नजरे फेर ली |

जितेश - मै खाना गरम कर लेता हूँ, आपको भूख लगी होगी |

रीमा बोली - ठीक है मुझे भी भूख लगने लगी है |

रीमा अपना पानी से भीगा हुआ गीला बदन पोछने लगी | कमरे में सिर्फ एक मोमबत्ती जल रही थी | जितेश जहाँ पर खाना गरम कर रहा था वहां रोशनी नाममात्र की थी | उसे लगा उसे मोमबत्ती जितेश के पास ले जानी चाहिए | उसने गीला तौलिया वही छोड़ दिया और मोमबती हाथ में लेकर चल दी | मोबत्ति की सुनहरी रोशनी में उसका बदन भी सोने के तरह दमक रहा था और उस पर पानी की बुँदे ऐसी लग रही थी जैसे अभी ओस उसे भिगो कर गयी है | जितेश ने जब उसकी तरफ गर्दन घुमाई तो बस देखता रह गया | उसका चेहरा और उठा सीना उस स्वर्णिम रौशनी से नहाया हुआ था | रीमा अपने पतली कमर मटकाती और भारी चूतड़ हिलाती उसकी तरफ आ रही थी | हर बढ़ते कदम के साथ उसकी चूत घाटी की दरार के दोनों पाट आपस में रगड़ खा रहे थे | उसकी लचकती कमर एक बार दाए कुल्हे को उठा देती एक बार बांये कुल्हे को | उसकी वो सुनहरी रौशनी की मदमस्त चाल देखकर जितेश अपनी पलक झपकाना भूल गया | रीमा पास आयी और मोमबती उसके पास रखते हुए बोली - अँधेरे में खाना गरम कर रहे हो कोई कीड़ा मकोड़ा चला गया तो |

जितेश की साँस में साँस आई, वो सपने की दुनिया से वापस लौटा और खाने की तरफ उसका ध्यान गया | रीमा जैसे चूतड़ मटकाते हुए आई थी वैसे ही चली गई | उसने वापस जाकर खुद को पोछना शुरू कर दिया | जितेश रीमा के मटकते चूतड़ देखता रहा | उसकी तौलिया में उसके लंड की अकडन शुरू हो गयी थी | जितेश भी रीमा के रूप हुस्न के जाल में बुरी तरह से फंस चूका था | रीमा के कंधे से लेकर चूतड़ तक पूरी पीठ की खूबसूरती निहारता रहा |

जितेश ने फिर से एक लम्बी साँस छोड़ी, खुद को काबू करने के लिए एक गिलास ठंडा पानी पिया और अपने अन्झिदर के भाव छिपाते हुए थोडा झिझकते हुए पूँछ ही लिया -अब कैसा महसूस हो रहा है आपके हाथ पाँव का दर्द कैसा है |

रीमा - हाँ अब बहुत कम है |

इधर जितेश खाने को गरम करता हुआ पूछ बैठा - मैडम आप बुरा ना मानो तो एक बात पूंछु |

रीमा ने तौलिया से अपने गीला बदन को सुखाते हुए - हाँ पूछो |

जितेश - आप बहुत बोल्ड है लेकिन फिर भी जानना चाहता हूँ आपको शर्म नहीं लगती इस तरह से बिना कपड़ों के नंगे .............. |
 
रीमा जितेश की बात सुनकर मंद ही मंद मुस्कुरायी - पहले सारे कपड़े उतार कर मुझे नंगा कर दिया, अब ऐसा सवाल क्यों पूछ रहे हो |

जितेश को इस सवाल की उम्मीद नहीं थी - मैडम आप तो वही बात पकड़ कर बैठ गयी |

रीमा - कपड़े उतार कर तुम्ही ने तो नंगा किया है |

जितेश - मैडम वो तो जरुरी था.......बताइए न आप इस तरह से बिना कपड़ो के किसी अनजान आदमी के सामने कैसे इतनी कम्फर्ट में है | बिना कपड़ो के तो आदमी झेंप जाता है |

रीमा - तूने कभी किसी औरत को इस तरह से बिना कपड़ों के देखा है |

जितेश - नहीं मैडम मैंने कभी नहीं देखा |

रीमा - क्यों फिजा को नंगा नहीं किया था चोदने से पहले |

रीमा ने पूरी बात जितेश की तरफ घुमा दी | रीमा हाथ पाँव पोंछ चुकी थी अब चेहरा पोंछ कर रही थी |

जितेश - मैडम आप भी न कहाँ पंहुच गयी | इतना कहकर जितेश ने एक लम्बी आह भरी |

रीमा की सारी इन्द्रियां उस आह को सुनकर चौकन्नी हो गयी | उसके दिमाग के घोड़े दौड़ने लगे |

कुछ देर की चुप्पी के बाद रीमा ने ही सवाल पूछ लिया - अच्छा ये बतावो कही तुम्हे फिजां से प्यार तो नहीं हो गया था |

जितेश हंसने लगा - क्या बात कर रही है मैडम | एक रंडी से प्यार |

रीमा ने फिर से सफ़ेद चादर खुद के बदन पर लपेट ली |

रीमा - तुमारी आह बता रही है फिजा तुमारी जिंदगी में खास जगह बना चुकी थी |

जितेश - प्यार का तो पता नहीं लेकिन, हम न केवल उसे चोदते थे बल्कि वो हमारे लिए खाना बना कर भी लाती थी |

रीमा - यही तो प्यार होता है जब किसी के न होने पर उसे तुम मिस करो | अब बताओ न मै गलत तो नहीं कह रही फिजा को नंगा करके ही चोदा था तुम दोनों ने, अभी अभी तुमने बताया था |

जितेश - नहीं मैडम वहां जान हथेली पर लेकर ड्यूटी करते थे उस समय तो बस बदन की आग बुझानी थी, हवस में अगर दो जिस्म नंगे भी होते है तो कोई कहाँ कुछ देखता है उस समय तो बस अपनी आग बुझाने की ललक होती है | उस समय तो बस लंड चूत में पेलने पर ही सारा ध्यान रहता है |

रीमा - मतलब तुमारी ख्वाइश थी कभी फुर्सत में उसे नंगी देखो सर से लेकर पैर तक लेकिन उन हालातों के कारन ये संभव नहीं हो पाया |

जितेश - मैडम आप तो औरत हो इसलिए आपका तो पता नहीं लेकिन औरत के जिस्म से ज्यादा उसकी गंध आदमी के अन्दर उसको चोदने की उसको पाने की लालसा जगाती है | फ़िजा के बदन की महक ही कुछ ऐसी थी | पहली बार ही उसे पूरा नंगा किया था उसके बाद इतना टाइम ही नहीं होता था की उसको सर से लेकर पैर तक पहले नंगा करू फिर चोदु | नीचे से उसका घाघरा उठा देता था और ऊपर से उसके मम्मे खोल लेता था लेकिन जब उसकी वो मदहोश करने वाली गंध नाक से घुसकर दिमाग पर चढ़ती थी लंड तभी पत्थर की तरह ठोस होता था | आज भी मन के किसी कोने में वो गंध महक रही है |

रीमा - मतलब आज भी उसको चोदने की ख्वाइश तुमारे मन में बैठी हुई है | लगता है वो तुमारी जिंदगी की पहली चूत थी |

जितेश चुप रहा |

रीमा - फिजा के बाद भी तो कुछ किया होगा या फिर हाथ से हिलाते रहे |

जितेश - आप तो सारा कच्चा चिट्ठा निकलवाने पर उतारू हो |

जितेश खाना गरम कर रहा था |

तभी रीमा ने आवाज दी - ये शर्मेट मै नहीं पहन पा रही हूँ | मेरे हाथ पीछे की तरफ नहीं पंहुच रहे, |

जितेश समझ गया | वो फिर से अपनी कमर में लगी तौलिये की गांठ को कसकर ठीक करता हुआ रीमा के पास में चला गया | सफ़ेद चादर जमींन पर पड़ी थी और रीमा का बदन उस सुनहरी पीली रौशनी में एक अलग ही छटा बिखेर रहा था | रीमा जितेश की तरफ पीठ करके खुद की हल्की रौशनी में शीशे में निहारने लगी | [/b]

मोमबत्ती की सुनहरी रौशनी में रीमा का दमकता गोरा गुलाबी बदन.....क़यामत ढा रहा था | जितेश ने रीमा को देखकर एक लम्बी साँस ली, कैसे भी खुद को काबू किया | फिर रीमा के हाथ से शर्ट लेकर उसके बांहों में फ़साने लगा | जितेश के मनोभाव उसके नियंत्रण से बाहर थे - मैडम आप बहुत कमाल की हो .........बहुत खूबसूरत हो आपको पता नहीं आपका गोरा गुलाबी बदन बहुत ही खूबसूरत है |

रीमा बस अंदर ही अंदर से खुश होकर रह गई वह कुछ बोली नहीं |

कुछ देर बाद रीमा - अच्छा ये बताओ जितेश तुमारा पहला क्रश कौन था |

जितेश - ये क्या होता है |

रीमा जितेश की अनभिज्ञता पर खिलखिला गयी - अरे बाबा मतलब जिसको देखकर पहली बार तुम्हे उसे चोदने का ख्याल आया हो या तुमारा लंड खड़ा हो गया हो |

जितेश - हमारे यहाँ ये सब नहीं होता था |

रीमा - मतलब तुमने पहली बार सीधे सीधे उस रंडी फिजा को चोदा इसलिए उसकी चूत का फितूर तुमारे दिमाग से नहीं निकल रहा है | जिदंगी की पहली चूत हो या किसी लड़की के लिए पहला लंड हो दोनों ही खास होते है | अब समझ गयी तुम्हे फिजा से इतना लगाव क्यों हो गया |

जितेश - नहीं मैडम आप गलत समझ रही है, फिजा से एक लगाव तो हो गया था लेकिन वो मेरा पहला प्यार नहीं था |

रीमा को हल्का सा आश्चर्य हुआ - अच्छा तो मतलब एक ज्यादा चूत का स्वाद ले चुके हो |

जितेश चुप रहा |

रीमा उसके कुरेदते हुए बोली - बतावो न अपने पहले अनुभव के बारे में |

जितेश - पहला एक्सपीरियंस कुछ खास ही होता है मैडम और मेरा तो कुछ ज्यादा ही खास था |
 
इस बार जितेश ने भी रीमा से दूरी बनाने की कोशिश नहीं की वह रीमा से बिल्कुल सट कर खड़ा हुआ था और उसकी तौलिये के अंदर से उसका तना हुआ लंड रीमा के चूतड़ों पर लग रहा था रीमा को भी इसका एहसास हो रहा था और जितेश को भी पता था लेकिन इस बार जितेश ने किसी तरह की भी आनाकानी या हिचकिचाहट से दूर रहकर बस रीमा को शर्ट पहनाता रहा | उसे अच्छे से पता था कि रीमा को भी इस बात का एहसास है कि उसके तौलिये में तने हुए मुसल लंड की उभार रीमा के चूतड़ों पर छू रही हैं पर अब तक जितेश भी समझ गया था यदि रीमा को भी इससे कोई विशेष आपत्ति नहीं है तो वो क्यों पीछे हटे | वह रीमा से थोडा और सट गया ताकि रीमा अपने नरम गुदाज चुताड़ो पर उसके मोटे मुसल लंड का अहसास ठीक से कर सके | उसने रीमा की शर्अट के बटन लगाने के लिए उसे पलटा नहीं बल्कि पीछे से ही बटन लगाने लगा | रीमा भी समझ गयी जितेश के दिमाग में क्या चल रहा है लेकिन रीमा अपनी तरफ से कोई पहल नहीं करना चाहती थी | वह पीछे से ही सीमा के शर्ट के बटन बंद करता रहा | असल में हकीकत का अहसास होते हुए भी दोनों उलझन में थे | रीमा हैरान थी अगर जितेश के उसको लेकर अगर वासना का ज्वार उमड़ रहा है और जिसकी निशानी उसका तना हुआ लंड है तो वो आगे क्यों नहीं बढ़ रहा | ऐसी हालत में कोई भी मर्द पीछे नहीं हटेगा, वो भी यह जानते हुए की सामने एक औरत पूरी तरह नंगी है | ऐसे में तो मर्द औरतो की परवाह भी नहीं करते, सीधे उनकी जांघे हवा में उठा कर अपना लंड उनकी चूत में घुसा देते है और उनको चोद डालते है बाकि जो भी रोना धोना नखरे नाराजगी होती है बाद में झेल लेते है लेकिन जितेश अपने में ही खुद को संयमित किये हुए था | रीमा हैरान थी आखिर उसने रीमा को बदन को जानबूझकर छूने की कोशिश भी नहीं की | जहाँ भी स्पर्श हुआ सहज था | कोई अलग से खास प्रतिक्रिया नहीं कोई खास चाहत या कोशिश जितेश ने नहीं की | जब वो रीमा के पीछे आया तो जिस सहज भाव से उसका स्पर्श रीमा के पीछे चुताड़ो पर हुआ उससे उसने कुछ अलग प्रतिक्रिया नहीं दी और न ही रीमा को महसूस होने दिया | इतना खुद पर नियंत्रण तो शायद रोहित का भी नहीं था | रीमा समझ नहीं पा रही थी आखिर कैसे रियेक्ट करे | उसके नरम चुताड़ो पर तौलिये का उभार रीमा की धड़कने बढाये हुए था | रीमा भी खुद को उसी के अनुसार भावहीन करने की कोशिश कर रही थी जैसे सब कुछ सहज हो | उसने भी जितेश को कोई अलग प्रतिक्रिया नहीं दी | जैसे ये उसके लिए कुछ मायने ही न रखता हो | जितेश के अन्दर भी वही भाव थे आखिर रीमा को अगर ऐतराज नहीं है तो खुलकर इशारा क्यों नहीं करती | जवानी में सबकी हसरत होती है और रीमा के अन्दर भी हसरत होगी लेकिन उसे वो छिपा क्यों रही है | जितेश रीमा के जिस्म का कोना कोना देख चूका था तो शर्म हया वाली तो कोई बात नहीं थी | अगर किसी तरह की झिझक थी तो उसे लगता था की अब उनके बीच इतनी कम दूरी है की झिझक के लिए कोई जगह ही नहीं बची है | आखिर रीमा जरा ससा पीछे की तरह जोर डालती तो जितेश के उभार रीमा के चुताड़ो पर पूरी तरह से छप जाता | जितेश को भी पता चल जाता की रीमा को आगे बढ़ने में कोई एतराज नहीं है | लेकिन रीमा ने ऐसा कोई इशारा नहीं दिया | जितेश हैरान था की अगर रीमा के अन्दर चुदने की ख्वाइश है तो रीमा जैसी बोल्ड औरत इसे कहने में झिझक क्यों रही है | इधर रीमा के मन ने था की अगर जितेश को कुछ करना है तो आगे क्यों नहीं बढ़ रहा | सब कुछ तो मेरा देख चूका है अब भला मै उसे क्यों रोकूंगी | जब आगे ही नहीं बढ़ेगा तो क्या अपने आप चूत खोलकर बैठ जाऊ की आवो मुझे चोदो | जितेश भी बिलकुल ऐसा ही सोच रहा था, अगर इसको मै पसंद हूँ तो बस एक इशारा दे की मै चुदने के लिए राजी हूँ |

रीमा बस चुताड़ो पर हो रहे उस तौलिये के अन्दर के कठोर उभार को महसूस करती रही और अपनी मन की उलझनों में खोयी रही | जितेश भी अपनी हद में रहा | उसने भी आगे बढ़ने की कोशिश नहीं की | उसके बाद में रीमा जो घूम गई और उसने जितेश की तरफ देखा और उसके तौलिये की उठान को लेकिन बिना कोई भाव लिए वह बिस्तर पर जा करके बैठ गई | नीचे अभी भी उसने कुछ नहीं पहना हुआ था और उसकी चिकनी गोरी सफाचट चूत अलग ही रंग दिखा रही थी | जितेश ने उसे एक नजर देखा वह भी कुछ नहीं बोला और चुपचाप जाकर के खाना गरम करने चला गया | रीमा बिस्तर में घुस गई और उसने अपने ऊपर सफेद चादर डाल दी हल्की आवाज में बोली - तो बताओ ना अपने बारे में फिर क्या कहानी है तुम्हारी | मै भी तुमारी खास कहानी सुनना चाहती हूँ |

जितेश ने भी अपनी कहानी सुनानी शुरु की

जितेश चूल्हे के नजदीक बैठा अपनी कहानी सुनाने लगा - मैडम बहुत पहले की बात है शायद कक्षा 9 में था | मेरी गली में पड़ोस में एक पादरी का परिवार रहता था | पादरी पति पत्नी दोनों दिन भर चर्च में रहते थे उनकी दो बेटियां थी | छोटी बेटी तो मेरे उम्र की थी और बड़ी बेटी मुझे पांच साल बड़ी थी | छोटी बेटी से मेरी कभी नहीं पटती थी | हम सब साथ में ही मोहल्ले में खेलते थे | मेरा ज्यादा दिमाग पढने लिखने में लगता नहीं था | मेरे भाई बहन और पादरी की दोनों बेटियां हम सब एक ही स्कूल में पढ़ते थे | जब मै मैथ में बार बार फ़ैल होने लगा तो पादरी की बड़ी बेटी जिनका नाम क्रिस्टीना था लेकिन मै पड़ोस की वजह से दीदी कहता था उनके पास मुझे ट्यूशन पढ़ने भेजा जाने लगा | वो मोहल्ले की और लडको को भी ट्यूशन पढ़ाती थी | शुरुआत में में से काफी शर्मीला था और दीदी के यहाँ जाकर सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देता था | उनसे बस जरुरी बाते ही करता था | लेकिन दीदी ने धीरे धीरे मुझे सहज कर दिया और मै उनसे खुलकर बाते करने लगा | दीदी पढने में तेज थी जल्दी ही, उन्होंने मुझे भी अच्छे से मैथ समझनी शुरू कर दी | मेरी मैथ ठीक होने लगी | 9 मै आसानी से पास हो गया | 10 में और कठिन मैथ थी इसलिए मै एक घंटे ज्यादा उनसे कोचिंग लेने लगा | जब सारे बच्चे चले जाते तो दीदी एक घंटा मुझे और पढ़ाती थी |

हम बच्चे सभी मिलकर शाम को छुपम छुपायी खेलते थे | अक्सर मेरा नंबर दीदी के साथ ही होता तो हम दोनों साथ साथ में छिप जाते | एक दिन दीदी के साथ साथ मै भी छिपने के लिए भागा लेकिन कोई जगह नहीं मिली तो दीदी ने मुझे अपनी फ्रांक में छिपा लिया | मुझे तो कुछ पता नहीं था लेकिन दीदी को उस उम्र से बहुत कुछ मालूम था | उसके बाद से अक्सर दीदी मेरे साथ ही छिपती थी, जब भी जरुरत होती मुझे अपनी लम्बी फ्रांक में घुसाकर छिपा लेती | वो ऐसी उम्र थी की बस जवानी की पौ फटनी शुरू होती है | दीदी अपनी फ्रांक में घुसाकर मुझे जांघो के बीच दबा लेती | मै साँस बांधे उसमे छिपा रहता | एक दिन मेरा हाथ दीदी की जांघो के ऊपर चला गया मेरी बहन फ्रांक के नीचे चड्ढी पहनती थी लेकिन उनकी जांघो के बीच में मुझे कोई चड्ढी नहीं दिखी | मुझे लगा बड़े लोग नहीं पहनते होंगे | अगले दिन मै भी बिना चड्ढी के सिर्फ हाफ पेंट पहने खेलने चला गया | जब दीदी के साथ मै छिपने को भागा तो पकड़ने वाला मुझे देख न ले इसलिए दीदी ने जल्दी से मेरी पेंट की ज़िप के सामने हाथ लगा कर मुझे जल्दी से अपने से सटा लिया और ऊपर से फ्रांक डाल दी |

दीदी ने लेकिन हाथ नहीं हटाया बल्कि ऐसा लगा मुझे जैसे वो कुछ ढूंढ रही हो | उसके बाद उन्होंने दूसरा हाथ भी अपने पहले हाथ पर रख दिया और कसकर दबा दिया और मुझे किसी तरह की कोई आवाज न करने के लिए इशारा किया | मै उनकी अंधेरी फ्रांक में चुपचाप साँस बांधे छिपा रहा | जब खेल खतम हो गया तो उन्होंने मुझे इशारा करके एक कोने में बुलाया |

दीदी - मुझे एक चीज देखनी है किसी को बताएगा तो नहीं |

मैंने इनकार में सर हिला दिया |

दीदी ने अपना हाथ मेरी पेंट में घुसेड दिया और कुछ टटोलने लगी | अच्छे से पेंट के अन्दर सब कुछ टटोलने के बाद पूछने लगी - आज चड्ढी क्यों नहीं पहनी |

मैंने यू ही बोल दिया - बस यू ही, रोज तो पहनता हूँ |

फिर कुछ सोचकर मैंने उनसे पुछा - मै तो रोज पहनता हूँ लेकिन आपको कभी पहने नहीं देखा | आप हमारी तरह चड्ढी क्यों नहीं पहनती |

दीदी थोडा शर्मा गया - बदमाश मेरी फ्रांक में घुसकर यही सब देखता है | हमारे यहाँ इसका रिवाज नहीं है |

मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ी - दीदी नाराज न हो तो एक बात पूंछु |

दीदी को लगा मै उनसे ये पूछुंगा की वो मेरी पेंट में क्या टटोल रही थी इसलिए पहले ही सफाई देने लगी - अरे वो मै बस ये देख रही थी कि तू चड्ढी पहनकर आया है या नहीं |

उनकी दोनों के बीच में जांघो के सबसे ऊपर कोने में ढेर सारे बाल थे | मुझे नहीं पता था वो क्या था लेकिन एक दिन मैंने देखा मेरे बहन के तो बाल नहीं है | बहुत दिन से मेरे दिमाग में ये सवाल घूम रहा था तो मैंने हिम्मत करके पूँछ लिया - दीदी ये आपकी दोनों जांघो के बीच में बाल है लेकिन मेरी बहन के तो नहीं है |

दीदी कुछ नहीं बोली | कुछ देर तक हम यू ही चुपचाप बैठे रहे | फिर दीदी ये कहते हुए चली गयी - अब धीरे धीरे जवान हो रहे हो अन्दर कुछ न कुछ पहन लिया करो | मुझे दीदी की बात का बिलकुल भी मतलब समझ नहीं आया |

जब अगले दिन मै छुपने के लिए उनकी फ्रांक में घुसा तो वहां सब सफाचट था | मैंने फ्रांक के अन्दर से ही पुछा - दीदी आपके बाल तो गायब हो गया |

दीदी ने मेरा सर अपनी जांघो के बीच में कसकर दबा लिया | वहां से रोज ही एक मदहोश करने वाली गंध आती थी लेकिन आज तो वहां से ऐसी उस गंध के साथ खुसबू भी आ रही थी | मेरी नाक में घुसती उस खुसबू से मै मदहोश होने लगा | एमी आज दीदी की तरफ को छुपकर बैठा था | मेरा सर उनकी जांघो के बीच में फंसा था और मेरी नाक बिलकुल दीदी की जांघो के चीरे के सामने थी | उस समय मुझे पता नहीं था ये क्या है | लेकिन मैंने अपनी बहन को कई बार बिना कपड़ो के नहाते देखा था इसलिए दीदी की जांघो की बनावट भी बिलकुल वैसी थी | आज वहां बाल नहीं थे इसलिए समझ गया की लडकियों की बनावट ही ऐसी होती है बस बाल जम आते है | दीदी ने मेरे सर के पीछे हाथ लगाकर कसकर मुझे अपनी जांघो और बाल वाले इलाके में रगड़ दिया | अगर मै सर बाहर नहीं निकलता तो मेरा दम घुट जाता |
 
खाना गरम हो गया था और जितेश ने रीमा को खाना परोस दिया | रीमा को खाने से ज्यादा इस समय जितेश की कहानी में दिलचस्पी थी | रीमा ने खाने की थाली अपनी तरफ खिसका ली और खाने लगी | सामने आकर जितेश भी बैठ गया | जितेश ने अभी भी चड्ढी नहीं पहनी वो तौलिया बांधे ही बैठा रहा | रीमा उसके तौलिये के ऊपर से उसके लंड का उभार देखती रही | जितेश को ऊपर से उसका तौलिये से झांकता लंड भले ही नजर नहीं आ रहा था लेकिन सामने बैठी रीमा को न केवल अब उसके तौलिये का उभार दिख रहा था बल्कि उसका मुसल लंड भी बाहर झाकता हुआ दिख रहा था | रीमा की तो जैसे मन्नत पूरी हो गयी | कब से वो जितेश के लंड को देखने की लालसा पाले बैठी थी | उसकी चूत में कुछ हलचल हुई लेकिन रीमा ने दूसरी तरफ नजरे फेर ली | उसका जितेश का मुसल लंड देखने का अरमान पूरा हो गया था | इन हालातों में भी रीमा की अपनी वासनाए तृप्त होने का कोई मौका नहीं छोडती | ऐसा लग रहा था जैसे रीमा को जितेश का लंड देखकर ओराग्स्म हो गया हो लेकिन उसने जल्दी ही खुद को संभाल लिया | रीमा जितेश की तरफ देख रही थी | जितेश का ध्यान रीमा पर नहीं था वो तो अपनी अतीत के यादो में खोया हुआ था | जबकि उसका लंड ऐसा लग रहा जैसे तौलिये से झांक कर रीमा की गुलाबी चूत के दर्शन करने को आतुर हो | रीमा ने कमर के नीचे खुद को चादर से ढक रखा था इसलिए वहां से कुछ नजर आने की उम्मीद नहीं थी |

रीमा कभी जितेश को देखती कभी उसके तौलिये से झांकते मुसल लंड को |

इधर जितेश इस हकीकत से दूर अपने ही अतीत में खोया हुआ था उसने एक लम्बी साँस ली और आगे की कहानी सुनाने लगा |

धीरे-धीरे दीदी के साथ मेरा चिपकना लिपटना बढ़ने लगा | दीदी भी मेरे साथ अजीब अजीब हरकते करने लगी | कभी वो फ्रॉक ऊपर जांघो तक खींच कर बैठ जाती और उनके काले काले बाल हलके हलके दिखने लगते, तो कभी वो अपने कंधे के ऊपर से उसकी डोरी नीचे खींच दी थी हालांकि इन सब से मुझे कोई मतलब नहीं था और मैं अपनी गणित के सवालों में ही उलझा रहता था | अक्सर जब मै अकेला दीदी के साथ होता तो उन्हें जांघ के ऊपऋ सिरे पर कोई न कोई कीड़ा काट लेता और वो मुझे उस कीड़े को ढूँढने के लिए कहती | मै उनकी फ्रांक में घुस जाता और सब कही ढूंढता रहता | पहले दीदी की जांघो से आने वाली गंध मुझे कुछ खास नहीं लगती थी लेकिन अब उनकी गंध दिलो दिमाग में घुस जाती | मै अब अक्सर सिर्फ दीदी की उस गंध को सूघने के लिए बेताब रहता था | दीदी भी मुझे एक बार अपनी वो मादक गंध सुंघाकर ही घर वापस भेजती थी | कुछ दिन बाद ट्यूशन पढने के बाद अक्सर दीदी किसी न किसी बहाने मुझे रोक लेती और अपनी बहन को बाहर खेलने भेज देती | कोई न कोई घर का काम मेरे से करवाने लगती, ये उठकर यहाँ से वहां रख दो वो उठकर वहां से यहाँ रख दो और ऐस करने के बीच बीच में मेरे ऊपर गिर पड़ती लिपट जाती या चिपक जाती | एक बार तो सीधे मेरी पेंट में हाथ घुसेड़ कर मेरे लंड को ही सहलाने लगी थी | मै कुछ कर भी नहीं पाता था आखिर मेरी टीचर थी और अच्छे से पढ़ाती थी | ऊपर से मुझे भी अब मजा आने लगा था | वो अलग बात है अभी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की दीदी क्या कर रही है लेकिन मजा आ रहा था |

एक दिन दीदी ने मुझे कुछ सवाल लगाने को दिए और फिर अन्दर चली गयी | काफी देर तक बाहर नहीं आई | कुछ देर बाद जब बाहर निकली तो ऐसा लग रहा था की नहाकर निकली हो | बाहर निकलते ही छोटी बहन को डाटने लगी जिससे वो झुंझलाकर बाहर खेलने भाग गयी | दीदी फिर से कमरे में घुस गयी |

कुछ देर बाद जब दीदी वापस आई तो मै देखकर हैरान रह गया | जो कुछ पहन कर आई उसे देख कर के मेरे होश उड़ने लगे मैंने देखा दीदी ने फ्रॉक नहीं पहनी है दीदी ने आज चड्ढी पहनी है और उसी सेम कपड़े की टॉप ऊपर पहनी है |

मै हैरानी से दीदी को देख रहा था - आज तो आपने चड्डी पहन ली |

मै - आप तो कह रहा थी ना कि मैं चड्डी नहीं पहनती हूं |

दीदी - इसीलिए आज मैंने चड्डी पहन ली अब बताना कैसी लग रही हूँ मै |

मेरी कुछ समझ में नहीं आया मुझे लगा दीदी कपड़ों की बात कर रही थी |

मै- बहुत अच्छी लग रही हो गई | उसके बाद उन्होंने अपनी थोड़ी सी चड्ढी नीचे की तरफ खिसकाई | वहां कोई बाल नहीं थे | उसके बाद वह मेरी पेंट के ऊपर अपना हाथ रखकर कुछ टटोलने लगी | ऐसा लग रहा था जैसे कुछ ढूंढ रही हो | उसके बाद उन्होंने मेरी पेंट की जिप खोली और अपना हाथ अन्दर घुसेड दिया | मेरे लंड को पकड़कर सहलाने लगी | इतना तो पता था की जो मेरे पास है वो लडकियों के पास नहीं होता |

मै हैरानी से - दीदी ये क्या कर रही है |

दीदी - कुछ ढूंढ रही हूँ |

मै - क्या |

दीदी - वही जो मेरे पास नहीं है और अभी मेरी मुट्ठी में है |

मै - जिसे आपने पकड़ रखा है दीदी मै इससे सुसु करता हूँ |

दीदी खिलखिला पड़ी - तू बहुत भोला है इससे और भी कई काम होते है, जल्दी ही सीख जायेगा | इसके बाद दीदी ने अपना हाथ बाहर निकाल लिया |

मेरी आँखों में आंखे डाल पूछने लगी- एक चीज दिखाऊं किसी को बताएगा तो नहीं |

मैंने पुछा - क्या दीदी |

दीदी बोली - पहले कसम खा की इस बारे में किसी से कोई बात नहीं करेगा किसी को कुछ बताएगा | ये सिर्फ हमारे दोनों के बीच की भी बात है हमारे दोनों के बीच में ही रहेगी |

मैंने हामी भर दी - ठीक है दीदी |

दीदी ने मेरा मेरा हाथ अपने सर पे रखा - सोच ले अगर किसी को भी बताया तो दीदी तेरी मर जाएगी और फिर तुझे टूशन कौन पढ़ायेगा | मै थोडा सा डर गया - दीदी मुझे आपकी कसम कभी मुहँ नहीं खोलूँगा |

मै हैरान था की ऐसी कौन सी चीज है जिसके लिए दीदी इतनी भयंकर खसम खिलवा रही है |

उसके बाद दीदी खड़ी हो गयी और धीरे से अपनी चड्डी में दोनों छोर अंगूठे में फंसा कर के अपनी चड्डी नीचे की तरफ खिसका दी |
 
उसके बाद मैंने जो देखा मेरे होश उड़ गए, उस समय मुझे नहीं पता था की उसे ही चूत कहते है लेकिन दीदी की नंगी चिकनी सफाचट चूत मेरी आँखों के सामने थी | हालांकि यह में पहले भी देख चुका था लेकिन कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ अक्सर बहन बिना कपड़ों के ही नहाती थी तो मैं यह चीजें देखता था लेकिन दीदी को देख करके कुछ अलग ही एहसास हुआ दीदी की चूत के इलाके में एक भी बाल नहीं था | मै तो बस दीदी का गोरापन देख रहा था | दीदी के चड्डी के अंदर एक भी बाल नहीं है और जांघो के बीचो बीच एक तिकोना सा चिकना सफाचट इलाका नीचे की तरफ दो मोटे मोटे ओंठो की सटने से बनी दरार के साथ ख़तम हो रहा था | दोनों जांघों के जोड़ों के बीच में एक लंबी पतली सी दरार बनाते हुए दो बड़े-बड़े से ओठ आपस में चिपके हुए हैं |

दीदी बड़ी हसरत से मेरी तरफ देख रही थी और मुस्कुरा रही थी | मै वो सब देखकर पसीने पसीने हो रहा था |

मैंने दीदी से हल्के से पूछा दीदी यह क्या आप मुझे दिखा रही हो |

दीदी ने हल्की मुस्कराहट के साथ पुछा - कभी देखा है इसे |

मै - हाँ बहन जब नहाती है तब सारे कपड़े उतार देती है |

दीदी - मै बहन की बात नहीं कर रही हूँ | किसी जवान लड़की को बिना कपड़े का देखा है |

मै - जवान मतलब ??.........नहीं | लेकिन ये पता है लडकियाँ यही से पेशाब करती है |

दीदी - पेशाब के अलावा कुछ नहीं पता तुझे | अच्छा बता इसका नाम क्या है |

मैंने दिमाग पर जोर लगाया - पता नहीं दीदी |

दीदी बोली - पगले इस चूत कहते हैं इसके अंदर लंड जाता है जो तेरे पास है |

मै - मैं कुछ समझ में नहीं दीदी |

दीदी - तू अभी न समझ तो ही ठीक है नहीं तो बिगड़ जायेगा |

दीदी ने हल्के से मेरे हाथ पकड़ा और अपने उस चूत के चिकने इलाके पर रखते हुए नीचे को फिसलती हुए चली गई | दीदी का वो इलाका बहुत ही नरम और गुनगुना था, मुझे एक झटका सा करंट सा लगा | दीदी समझ गई की इससे पहले मैंने चूत के दर्शन नहीं किए हैं |

मैंने दीदी से पूछा - दीदी यह क्या है और मुझे अजीब सा महसूस क्यों हो रहा है |

दीदी बोली - क्या पगले अब तू जवान होने लगा है इन चीजों के बारे में तुझे पता होना चाहिए | ये मेरी चूत है और यह जो ओंठ आपस में चिपके हुए नीचे तक एक पतली दरार बना रहे है इन्हें चूत के ओठ कहते हैं, जैसे मेरे मुहँ में ओंठ है ऐसे ही चूत के ओंठ है | इसके अंदर एक गुलाबी मखमली सा छेद होता है | जो इन ओंठो को खोलने पर दिखाई देता है | जिसमें घुसने के लिए दुनिया का हर जवान मर्द पगलाया रहता है, ये जो तेरी पेंट में है और जिससे तू पेशाब करता है इसको लंड कहते है | ये लंड ही चूत के छेद में अन्दर घुसता है |

मै - दीदी इसे तो माँ मुनिया कहती है |

दीदी खिलखिला पड़ी - जब तक तुम छोटे थे और सिर्फ इससे पेशाब करते थे तब तक इसे मुनिया कहते है | अब तुम बड़े हो गए हो, अब तुमारी मुनिया भी बड़ी हो गयी है और खड़ी होने लगी है | (मेरी पेंट में हाथ घुसेड़कर मेरा लंड पकड़ते हुए ) तेरी पेंट में जो ये लटकता हुआ लंबा सा है, ये अब मुनिया नहीं लंड कहलाता है |

फिर खुद कुछ रूककर पूछने लगी - अच्छा ये बताओ जब सुबह उठते हो तो जोर से पेशाब लगाती है तब ये तनकर खड़ा नहीं हो जाता | क्या इतना बड़ा ही होता है |

मै हैरानी से - दीदी ये तो बहुत बड़ा हो जाता है इसे तो छुपकर बाथरूम भागना पड़ता है |

दीदी - हाँ तो समझो जब ये खड़ा होता है तभी इस चूत के छेद में घुसता है | दीदी की बता मुझे कुछ समझ न आईओ बल्कि मै और ज्यादा परेशान हो गया | मेरे चेहरे के हव भाव देखकर दीदी बोली - तू अभी ज्यादा जोर मत डाल धीरे धीरे सब समझ में आ जायेगा |

दीदी ने जब से नीचे को अपनी चड्ढी खींची थी तब से मैं उनके उस चिकने गुलाबी त्रिकोण इलाके को देखता रहा | एकटक देखता रहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा था हालांकि मुझे समझ में कुछ नहीं आ रहा था फिर मैंने दीदी से पूछा - दीदी यह सब क्या है | ये सब आप मुझे क्यों बता रही हो और अपनी ये चूत मुझे क्यों दिखा रही हो |

दीदी मेरे पास आकर - अब तू जवान हो रहा है तुझे यह सब चीजें सीखनी चाहिए और तुझे मैं इसलिए बता रही हूं क्योंकि तू मेरा सबसे अच्छा स्टूडेंट है और मै तेरी टीचर | अगर तुझे मै ये सब नहीं बताउंगी तो कौन बताएगा | मै तुझे सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देना चाहती हूँ इसलिए तुझे अपनी सबसे खास चीज दिखाई है | तू बहुत खास स्टूडेंट है मेरा इसलिए तुझे ये सब देखने को मिल रहा है | वरना लोग अपनी बीबी की चूत देखने को तरस जाते है |

मै थोड़ा उलझा हुआ - दीदी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है |

दीदी - ठीक है मै तुझे समझाती हूँ आदमी और औरत ..........ऐसे समझ लड़का और लड़की | तू लड़का है और मै लड़की | ठीक है |

मै - हाँ दीदी मै लड़का हूँ |

दीदी - दोनों के चड्ढी के अन्दर वाली जगह पर अलग अलग बनावट होती है | जिसे तू भी देख भी रहा है (अपनी चूत की तरफ इशारा करके ) इसे हमारी भाषा में चूत कहते हैं और यह देख ये जो दरार है यह दरार इन दोनों को अलग कर रही है इन दोनों को चूत के ओंठ कहते हैं और यहां पर जो तू बाल देख रहा था इन बालों को झांटे कहते हैं मैं तुझे यह सब खुद को नंगा करके इसलिए बता और दिखा रही हूं ताकि तू समय रहते इन सब का ज्ञान ले ले वरना लोगों की शादी हो जाती है उन्हें इस बारे में पता नहीं चलता | अगर तुझे मै ये सब खोलकर नहीं दिखौंगी तो चार्अट और किताबो से तेरा ज्बञान अधूरा रह जायेगा और तू बस किताबी शेर बनकर रह जायेगा | तो समझ गया मैंने क्या बताया इसे क्या कहते हैं यह चूत है गुलाबी चिकनी चूत | अच्छा इसे छू कर देख तुझे कैसा लगता है |
 
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