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मेरे होँठों को अपने होँठों से चिपका कर डॉली मुझे एक अत्यंत प्रगाढ़ चुम्बन देना चाहती थी। मैंने भी अपने होँठों को डॉली के होँठों से चिपका कर मैं डॉली के होंठ और उसकी जीभ को चाटने और चूसने लगा।
मेरी छाती में डॉली की मदमस्त चूँचियाँ की निप्पलें कोंच रहीं थीं। कुछ देर बाद मैं अपने होँठ डॉली के स्तनोँ पर रख दिए और उनको एक के बाद एक बारी से चूसने लगा। डॉली के स्तन भी उत्तेजना से फुले हुए थे और मेरे होँठों में जाते हुए ही उनमें अजीब सी हलचल मैं महसूस करने लगा। स्त्रियों के स्तन स्त्रियों के सम्भोग में बड़ा महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। कहते हैं की अगर आप स्त्रियों के स्तनोँ को दक्षता से सेहलाओ तो स्त्रियां चुदवाने के लिए मजबूर हो जातीं हैं।
मेरा लण्ड डॉली की सख्त चूत में जकड़ा हुआ था। डॉली ने मेरी कमर और कूल्हे को पीछे से अपने बाहुपाश में इतनी ताकत से खिंच कर अपने बदन से जकड़ा दिया था की उसके कारण मेरा पूरा का पूरा लण्ड डॉली की चूत में जा घुसा था। मुझे मेरे लण्ड की सतह के ऊपर डॉली की चूत की सुरंग में हो रही तेज कम्पन महसूस हो रही थी। डॉली कई बार तगड़े लण्ड से चुद चुकी थी। पर फिर भी मेरे लण्ड से चुदने से डॉली को इतनी उत्तेजना होगी थी की उसकी चूत में उत्तेजना के मारे ऐसी कम्पन होगी यह मैंने सोचा भी नहीं था।
डॉली की चुदाई करते हुए मैं मेरी बीबी ज्योति की चुदाई की उसके साथ तुलना करने लगा। हालांकि मुझसे ज्योति पहले शुरुआत में काफी उग्रता और उत्तेजना से चुदवाती थी, पर शादी के कुछ सालों बाद वह गर्मजोशी नहीं रही थी। आखिर में तो मुझे उसे गरम करने के लिए सेठी साहब की कोई ना कोई कहानी बनानी पड़ती थी जिससे वह उत्तेजित हो कर चुदाई में रेस्पॉन्ड करती थी।
पर मैंने कभी ज्योति की चूत में जैसे डॉली की चूत में स्पंदन हो रहे थे वैसे स्पंदन कभी भी अनुभव नहीं किये। शायद गैर मर्दों से चुदवाते हुए औरतों को कुछ अधिक ही उत्तेजना होती होगी जिसके कारण उनकी चूत में ऐसे स्पंदन हो रहे होंगे। या फिर डॉली मुझसे चुदवा कर ज्योति से शायद ज्यादा ही एन्जॉय कर रही होगी।
हो सकता है अगर ज्योति सेठी साहब से चुदवाने के लिए राजी हो गयी तो ज्योति भी सेठी साहब से चुदवाते हुए अपनी चूत में ऐसे स्पंदन महसूस कर रही हो। वैसे मुझे यकीन था की जिस तरह से मैंने ज्योति को बार बार सेठी साहब की बात कर सेठी साहब से चुदवाने के लिए मानसिक रूपसे तैयार किया था, ज्योति अपने मायके में सेठी साहब से जरूर चुदवायेगी।
मुझे यह भी यकीन था की सेठी साहब ज्योति पर इतने फ़िदा हो गए थे की वह ज्योति को चोदे बगैर नहीं छोड़ेंगे। पर फिर भी मुझे चिंता थी की कहीं ज्योति लाज शर्म की वही घिसी पीटी पुरानी बात कर सेठी साहब का मुड़ ऑफ ना करदे। मैंने तो डॉली को चोदने का रास्ता बना लिया था पर ज्योति को भी सेठी साहब से चुदवाना जरुरी था। मैंने तय किया की अगले दिन मैं फ़ोन कर पता करूंगा की रात को सेठी साहब से ज्योति की चुदाई हुई की नहीं।
मेरा खड़ा हुआ सख्त लण्ड डॉली की रसीली चूत में अंदर बाहर जाता हुआ कमरे में “पिचक पिचक” की आवाजें पैदा कर रहा था। साथ साथ में मेरे डॉली को जोरदार धक्के मारने से कई बार डॉली “ओह….. आह….. ” इत्यादि सिसकारियां निकाल रही थीं।
मुझे मेरे लण्ड में एक अनूठा सुरूर महसूस ह रहा था। डॉली की चूत टाइट होते हुए भी रसीली और चिकना थी। डॉली की चूँचियाँ इतनी गोरी और लाल थीं की हाथ लगाने में भी डर लगता था की कहीं हाथ में लाल गुलाबी रंग ना लग जाए। जैसे जैसे मैं चोदते हुए डॉली को धक्के पेल रहा था, डॉली का पूरा बदन हिल जाता था और साथ में उसकी गोरी गुलाबी फूली हुई चूँचियाँ पूरी निप्पलों के साथ ऐसे हिलतीं थीं जैसे बारिस के समय हवाके तेज झोंके से पेड़ हिलते हों।
मुझे डॉली को चोदने का ऐसा बढ़िया मौक़ा मिला था की मैं रुकने वाला नहीं था। डॉली को चोदते हुए डॉली का पूरा नंगा इतना खूबसूरत बदन देखते हुए मैं नहीं थक रहा था। डॉली की गोरी चिट्टी चूत में मेरा तगड़ा चिकना लण्ड अंदर बाहर होते हुए देखने का मजा ही कुछ और था।
कई बार डॉली अचानक ही सिसकारी लगा कर बोल उठती, “राज चोदो मुझे, फ़क मी, तुम बहुत अच्छा चोद रहे हो।” बगैरह बगैरह। काफी देर तक डॉली को चोदने के बाद एक बार डॉली बोल पड़ी, “अच्छा स्टैमिना है राज आपका। मानना पडेगा। आप सेठी साहब से कम नहीं हो। आप सेठी साहब को अच्छी खासी टककर दे सकते हो।” तब मुझे लगा की शायद डॉली कुछ थकने लगी थी।
सब से ज्यादा उत्तेजना मुझे डॉली की उड़ती हुई चूँचियों को देख कर होती थी। जैसे ही मैं डॉली की चूत में अपना लण्ड पेलता और एक धक्का मारता तब डॉली की फूली भरी हुई मदमस्त चूँचियाँ फ़ैल कर हवा में उड़ने लगतीं। जो स्तन स्थिर होते हुए इतने भरे हुए सख्त और सुआकार दीखते थे वह धक्के से फ़ैल जाने के कारण एक अजीब सा आकार बनाते हुए वापस वही सख्त गोलाई और भरी हुई स्थिति में वापस आ जाते थे।
चुदाई की उत्तेजना के मारे डॉली की चूँचियों की निप्पलें फूल कर कोई गुम्बज के शिखर के समान डॉली के स्तनोँ पर अपना वर्चस्व स्थापित कर डटी हुई दिखती थीं।
उन कभी उड़ते तो कभी ठहरे हुए फुले हुए स्तनोँ को अपने हाथों में लेकर मसलना और निप्पलों को इतना दबाना की डॉली के मुंह से दबी हुई सिसकारी निकल जाए उसका मजा ही कुछ और था। मैं झुक कर जब भी मौक़ा मिलता डॉली की कोई एक चूँची की निप्पल को मुंह में ले लेता और जैसे ही दांतों से काटने लगता डॉली चिल्लाती, “राज दर्द हो रहा है। बस करो।”
मेरी छाती में डॉली की मदमस्त चूँचियाँ की निप्पलें कोंच रहीं थीं। कुछ देर बाद मैं अपने होँठ डॉली के स्तनोँ पर रख दिए और उनको एक के बाद एक बारी से चूसने लगा। डॉली के स्तन भी उत्तेजना से फुले हुए थे और मेरे होँठों में जाते हुए ही उनमें अजीब सी हलचल मैं महसूस करने लगा। स्त्रियों के स्तन स्त्रियों के सम्भोग में बड़ा महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। कहते हैं की अगर आप स्त्रियों के स्तनोँ को दक्षता से सेहलाओ तो स्त्रियां चुदवाने के लिए मजबूर हो जातीं हैं।
मेरा लण्ड डॉली की सख्त चूत में जकड़ा हुआ था। डॉली ने मेरी कमर और कूल्हे को पीछे से अपने बाहुपाश में इतनी ताकत से खिंच कर अपने बदन से जकड़ा दिया था की उसके कारण मेरा पूरा का पूरा लण्ड डॉली की चूत में जा घुसा था। मुझे मेरे लण्ड की सतह के ऊपर डॉली की चूत की सुरंग में हो रही तेज कम्पन महसूस हो रही थी। डॉली कई बार तगड़े लण्ड से चुद चुकी थी। पर फिर भी मेरे लण्ड से चुदने से डॉली को इतनी उत्तेजना होगी थी की उसकी चूत में उत्तेजना के मारे ऐसी कम्पन होगी यह मैंने सोचा भी नहीं था।
डॉली की चुदाई करते हुए मैं मेरी बीबी ज्योति की चुदाई की उसके साथ तुलना करने लगा। हालांकि मुझसे ज्योति पहले शुरुआत में काफी उग्रता और उत्तेजना से चुदवाती थी, पर शादी के कुछ सालों बाद वह गर्मजोशी नहीं रही थी। आखिर में तो मुझे उसे गरम करने के लिए सेठी साहब की कोई ना कोई कहानी बनानी पड़ती थी जिससे वह उत्तेजित हो कर चुदाई में रेस्पॉन्ड करती थी।
पर मैंने कभी ज्योति की चूत में जैसे डॉली की चूत में स्पंदन हो रहे थे वैसे स्पंदन कभी भी अनुभव नहीं किये। शायद गैर मर्दों से चुदवाते हुए औरतों को कुछ अधिक ही उत्तेजना होती होगी जिसके कारण उनकी चूत में ऐसे स्पंदन हो रहे होंगे। या फिर डॉली मुझसे चुदवा कर ज्योति से शायद ज्यादा ही एन्जॉय कर रही होगी।
हो सकता है अगर ज्योति सेठी साहब से चुदवाने के लिए राजी हो गयी तो ज्योति भी सेठी साहब से चुदवाते हुए अपनी चूत में ऐसे स्पंदन महसूस कर रही हो। वैसे मुझे यकीन था की जिस तरह से मैंने ज्योति को बार बार सेठी साहब की बात कर सेठी साहब से चुदवाने के लिए मानसिक रूपसे तैयार किया था, ज्योति अपने मायके में सेठी साहब से जरूर चुदवायेगी।
मुझे यह भी यकीन था की सेठी साहब ज्योति पर इतने फ़िदा हो गए थे की वह ज्योति को चोदे बगैर नहीं छोड़ेंगे। पर फिर भी मुझे चिंता थी की कहीं ज्योति लाज शर्म की वही घिसी पीटी पुरानी बात कर सेठी साहब का मुड़ ऑफ ना करदे। मैंने तो डॉली को चोदने का रास्ता बना लिया था पर ज्योति को भी सेठी साहब से चुदवाना जरुरी था। मैंने तय किया की अगले दिन मैं फ़ोन कर पता करूंगा की रात को सेठी साहब से ज्योति की चुदाई हुई की नहीं।
मेरा खड़ा हुआ सख्त लण्ड डॉली की रसीली चूत में अंदर बाहर जाता हुआ कमरे में “पिचक पिचक” की आवाजें पैदा कर रहा था। साथ साथ में मेरे डॉली को जोरदार धक्के मारने से कई बार डॉली “ओह….. आह….. ” इत्यादि सिसकारियां निकाल रही थीं।
मुझे मेरे लण्ड में एक अनूठा सुरूर महसूस ह रहा था। डॉली की चूत टाइट होते हुए भी रसीली और चिकना थी। डॉली की चूँचियाँ इतनी गोरी और लाल थीं की हाथ लगाने में भी डर लगता था की कहीं हाथ में लाल गुलाबी रंग ना लग जाए। जैसे जैसे मैं चोदते हुए डॉली को धक्के पेल रहा था, डॉली का पूरा बदन हिल जाता था और साथ में उसकी गोरी गुलाबी फूली हुई चूँचियाँ पूरी निप्पलों के साथ ऐसे हिलतीं थीं जैसे बारिस के समय हवाके तेज झोंके से पेड़ हिलते हों।
मुझे डॉली को चोदने का ऐसा बढ़िया मौक़ा मिला था की मैं रुकने वाला नहीं था। डॉली को चोदते हुए डॉली का पूरा नंगा इतना खूबसूरत बदन देखते हुए मैं नहीं थक रहा था। डॉली की गोरी चिट्टी चूत में मेरा तगड़ा चिकना लण्ड अंदर बाहर होते हुए देखने का मजा ही कुछ और था।
कई बार डॉली अचानक ही सिसकारी लगा कर बोल उठती, “राज चोदो मुझे, फ़क मी, तुम बहुत अच्छा चोद रहे हो।” बगैरह बगैरह। काफी देर तक डॉली को चोदने के बाद एक बार डॉली बोल पड़ी, “अच्छा स्टैमिना है राज आपका। मानना पडेगा। आप सेठी साहब से कम नहीं हो। आप सेठी साहब को अच्छी खासी टककर दे सकते हो।” तब मुझे लगा की शायद डॉली कुछ थकने लगी थी।
सब से ज्यादा उत्तेजना मुझे डॉली की उड़ती हुई चूँचियों को देख कर होती थी। जैसे ही मैं डॉली की चूत में अपना लण्ड पेलता और एक धक्का मारता तब डॉली की फूली भरी हुई मदमस्त चूँचियाँ फ़ैल कर हवा में उड़ने लगतीं। जो स्तन स्थिर होते हुए इतने भरे हुए सख्त और सुआकार दीखते थे वह धक्के से फ़ैल जाने के कारण एक अजीब सा आकार बनाते हुए वापस वही सख्त गोलाई और भरी हुई स्थिति में वापस आ जाते थे।
चुदाई की उत्तेजना के मारे डॉली की चूँचियों की निप्पलें फूल कर कोई गुम्बज के शिखर के समान डॉली के स्तनोँ पर अपना वर्चस्व स्थापित कर डटी हुई दिखती थीं।
उन कभी उड़ते तो कभी ठहरे हुए फुले हुए स्तनोँ को अपने हाथों में लेकर मसलना और निप्पलों को इतना दबाना की डॉली के मुंह से दबी हुई सिसकारी निकल जाए उसका मजा ही कुछ और था। मैं झुक कर जब भी मौक़ा मिलता डॉली की कोई एक चूँची की निप्पल को मुंह में ले लेता और जैसे ही दांतों से काटने लगता डॉली चिल्लाती, “राज दर्द हो रहा है। बस करो।”