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एक बार फिर से शालू के तन बदन में हलचल होने लगी,,, उठी थी तो वह पेशाब करने के लिए लेकिन अपने भाई के मोटे तगड़े लंबे खड़े लंड को देखकर बुर में पेशाब के प्रेशर की जगह उत्तेजना की चीटियां रेंगने लगी,,,, पल भर में उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपने भाई के लंड को देखकर वह क्या करें,, तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी,, आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था,, उसकी आंखों से नींद उड़ चुकी थी,,,रघु को चूड़ियों की खनक एकदम करीब सुनाई दे रही थी और वह समझ गया था कि उसके बेहद करीब उसकी बड़ी बहन शालू खड़ी है उसका दिल जोरो से धड़कने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें उसका पूरा बदन उत्तेजना के मारे कसमसा रहा था,, एक तो हलवाई की बीवी की गर्म यादें ऊपर से सालु का इस तरह से उसके लंड को घुरना,,,, आग में घास तेल डालने का काम कर रही थी,,, रघु उस दिन की तरह ही नाटक करते हुए अपनी आंखों को बंद करके लेटा रहा,,, उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी बहन उसके लंड को ही देख रही है,,, और उस पल का एहसास उसे अंदर तक उत्तेजना से भर दे रहा था आखिरकार भाई भी क्या कर सकता था जब इस तरह का वाक्या किसी भाई के सामने पेश आ जाए तो उस समय उसके करने के लिए कुछ भी नहीं होता है जो कुछ भी करना होता है उसकी बहन ही करती है,,, ठीक वैसा ही रघु के साथ हो रहा था तन बदन में उत्तेजना की लहर बरकरार थी टांगों के बीच मुंह उठाए खड़ा लंड अपनी पूरी औकात में था,, जिस पर शालू की नजर बनाकर गढ़ी हुई थी,,, उसकी खुद की दोनों टांगों के बीच कंपन महसूस हो रहा था वह कभी अपनी मां की तरफ तो कभी रघु की तरफ देख ले रही थी जो कि इस समय पूरी तरह से नींद के आगोश में था ऐसा शालू समझ रही थी जबकि वह नाटक करता हुआ आंखें बंद किया था।
उस दिन शालू हिम्मत दिखाते हुए जिस तरह से उसके लंड को पकड़ कर हीलाई थी और ऐसा करते हुए भी रघु की नींद नहीं खुली थी वह समझ गई थी कि रघु घोड़े बेच कर सोने वालों में से जो कि उसके लिए यह फायदे की ही बात थी,,, शालू के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी उसे एक बार फिर से अपने भाई के लंड को अपने हाथ में पकड़ने का मौका जो मिल रहा था,,, चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ था आसमान में सिर्फ तारे तारे नजर आ रहे थे यह चांदनी रात नहीं थी जिसके चांदनी में पूरी छत नहाई हुई लगती थी लेकिन आज अंधेरी रात थी इसकी वजह से सब कुछ अंधेरे में लुप्त हो चुका था,,, ऐसे में शालू के पकड़े जाने की उम्मीद बिल्कुल कम थी अगर उसकी मां की नहीं खुलती जाती है तो इतनी अधूरी में उसकी मां को चालू अपने भाई के साथ नजर ही नहीं आएगी,,, यह सोच कर शालू बड़े आराम से अपने भाई के करीब बिछी हुई चटाई पर बैठ गई,,, शालू के बैठने का आभास रघु को होते ही उसके तन बदन में आग लग गई,,,वह मन से कभी नहीं चाहता था कि जो कुछ भी हो रहा है वह फिर से हो वह अपनी मां और बहन दोनों के प्रति गंदी भावना को निकाल चुका था और उसके दी भावना से हमेशा बचना भी चाहता था लेकिन उसकी नसीब खराब थी क्या अच्छी खुद नहीं समझ पा रहा था क्योंकि जिस चीज से वह भागना चाहता था वह चीज खुद उसे ढूंढते हुए उसके करीब आ जाती थी,,,
शालू बड़े आराम से अपने भाई के करीब बैठ चुकी थी उसके मन में ढेर सारे भावनाओं के बवंडर उठ रहे थे ,, दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी शायद इसलिए कि अगर यह सब एक दूसरे की रजामंदी से होता हो तब शरीर में इस तरह का तूफान नहीं होता लेकिन यही हरकतें जब चोरी-छिपे करने लगे तो कुछ ज्यादा ही उत्तेजना अपना सर बदन में दिखाता है,,,,
सानू का दिल जोरों से धड़क रहा था उसकी हथेलियां अपनी आगोश में रघु के लंड को लेने के लिए तड़प रही थी नाजुक नाजुक नरम नरम ऊंगलियां अपने भाई के लंड की गर्माहट को अपने अंदर महसूस करने के लिए मचल रही थी,,,ज्यादा देर तक चालू अपने ऊपर काबू नहीं कर पाई और अपना हाथ आगे बढ़ा कर एक बार फिर से अपने भाई के लंड को अपने हाथ में ले ली,,, अपनी बहन के हाथ में अपना मोटा तगड़ा लंड आते ही,,, रघु का पूरा बदन कसमसने लगा,,,एक तो पहले से ही वह हलवाई की बीवी के गर्म बदन की कल्पना में पूरी तरह से अपने आप को डुबो चुका था और ऊपर से जवानी की दहलीज पर पूरी तरह से कदम रख चुकी उसकी बहन की यह कामुक हरकत उसे और ज्यादा बेचैन कर रही थी।
शालू अपनी मुट्ठी में रघु के मोटे तगड़े लंड को पूरी तरह से दबोच ली थी,,, और अपने भाई के लंड को अपनी हथेली में दबोचते ही उसकी बुर कुल बुलाने लगी,,, अजीब सी अद्भुत हलचल उसके तन बदन को पूरी तरह से झकझोर दे रही थी,,, वह धीरे-धीरे अपने भाई के लैंड को हिलाना शुरू कर दी,,, उत्तेजना के मारे शालू का गला सूखता जा रहा था और यही हाल रघु का भी था उसकी हालत बिल्कुल नाजुक होती जा रही थी वह ठीक से आहे भी नहीं भर पा रहा था हालांकि उसे अपनी बहन की यह कामुक पढ़कर बेहद ऊन्मादक और उम्दा किस्म की लग रही थी,,, सालु के हाथों में जादू था,, इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से होने लगा था उस की सबसे गहरी चल रही थी लेकिन अपने आप को संभाले हुए था वह दूसरी तरफ मुंह करके अपनी बहन की हरकतों का आनंद ले रहा था,, रघु पूरी तरह से जोश से भर चुका था इस बार फिर से उसकी इच्छा यही हो रही थी कि अपनी बहन की गंदी हरकत का फायदा उठाते हुए जिस लड़की को अपने हाथ में लेकर हिला रही है वहीं उसकी बुर के अंदर डालकर उसे चुदाई कर दे,,,अगर ऐसा वह करता है तो इसमें उसके लिए किसी भी प्रकार की आपत्ति वाली बात नहीं होगी क्योंकि सालु की हरकत को देखते हुए, उसे समझते देर नहीं लगी थी कि उसकी बड़ी बहन एकदम जवान हो गई है और उसे भी लंड की जरूरत है,, लेकिन रघु की हिम्मत नहीं हो रही वह उसी तरह से आंखें बंद किए हुए लेटा रहा और अपनी बहन की गरम हरकत का आनंद लेता रहा।,,, वह अपनी बहन की तरफ देख नहीं पा रहा था क्योंकि अपनी गर्दन घुमा कर उसकी तरफ देखने में उसे डर लग रहा था कि कहीं उसकी बहन को पता ना चल जाए कि वह नींद भी नहीं बल्कि जाग रहा है,,, थोड़ी ही देर में रघु के तन बदन में और ज्यादा हलचल होने लगी क्योंकि शालू के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आने लगी थी और यह गर्म सिसकारी की आवाज बिल्कुल वैसे ही थी जैसे की बीवी के मुंह से आ रही थी,,,और आती भी कैसे नहीं शालू एकदम गरम जो हो गई थी और अपने ही हाथों से अपनी नारंगी जैसी चूची को दबा रही थी।उसे रहा नहीं जा रहा था उसकी बुर में आग लगी हुई थी और वह किसी भी तरह से अपनी यह आग को बुझाना चाहती थी लेकिन इसे आगे बढ़ने में शायद उसे भी डर लग रहा था वह नहीं चाहती थी कि कुछ ऐसा खुद ही करें की उसके भाई को उसके बारे में सोच कर गलत लगे,,,, वह चाहती थी कि उसकी इस तरह की हरकत से ऊन्मादित होकर खुद ही उसकी दोनों टांगे फैलाकर उसे औरत होने का सुख दे। अपने भाई के लंड को पकड़ कर इस तरह से हिलाना वह कभी नहीं चाहती थी लेकिन अपने भाई के लंड को देखते ही वह मजबूर हो जाती थी,, और खुद ही उसके पैर उसे अपने भाई के करीब ले जाते थे और ना करने वाली हरकत उसे करना पड़ता था,,,
शालू की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी तकरीबन 15 मिनट से वह अपने भाई के लंड को हिला रही थी,,, लंड की गर्माहट शालू के संपूर्ण बदन को अपनी गिरफ्त में ले चुका था,,,, रघु के तन बदन में आग लगी हुई थी वह जल्द से जल्द अपना पानी निकालने की सोच रहा था,,, लेकिन आज उसका पानी निकल ही नहीं रहा था शायद इसका कारण यह था कि उसके अंदर डर की भावना भी जागृत थी,,शालू की टांगों के बीच हलचल बढ़ती जा रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था वह यही सोच रही थी कि उसके भाई की नींद खुल जाए और उसका भाई उत्तेजित अवस्था में उसके साथ संभोग करें,,, लेकिन डर भी रही थी कि कहीं उसका भाई जाग गया तो उसके बारे में क्या सोचेगा शालू इतनी नादान है कि उसे इस बात का आभास तक नहीं था कि किसी भी मर्द का लूंगा अपने हाथ में लेकर इतनी देर तक हीलाने से इस मर्द को इस बारे में पता ही नहीं चलेगा,,, जबकि गहरी नींद में होने के बावजूद भी अगर स्त्री या पुरुष दोनों के नाजुक अंगों पर किसी भी प्रकार से हाथ रखा जाए तो उनकी नींद तुरंत खुल जाती है,,,। लेकिन यहां रघु को गहरी नींद मैं समझ कर शालू पूरी तरह से उसके खड़े लंड को हिला रही थी और साथ में अपनी चुचियों को दबाते चली जा रही थी,,,अपनी चुचियों को दबाते हुए सालु एक बात तो समझ गई थी कि अपने हाथ से दबाने में और मर्दो के हाथ से दबवाने में जमीन आसमान का फर्क होता है,,,क्योंकि प्रताप जब उसकी दोनों चूचियों को दबाता था तो उसे अद्भुत एहसास होता था,,,और अभी अपने हाथ से करवानी है उसे वह एहसास नहीं हो रहा था लेकिन हाथ में अपने भाई का लन्ड पाकर उसके तन बदन की हलचल पूरी तरह से बढ चुकी थी,,,,
ससहहहहहह,,,, आहहहहहह,,,,,ऊहहहहहहह,,,ऊममममममन,,,,ओहहहह मां,,,,,,,
इस तरह की गरमा गरम आवाजें शालू के मुख से निकल रही थी लेकिन उसकी आवाज बिल्कुल समिति थी जो कि रघु के कानों में बराबर पड़ रही थी और उन गरमा गरम आवाजों को सुनकर रघु की हालत और बदतर होती जा रही थी वह अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाना चाहता था कुछ नहीं तो अपनी बहन की हथेली में ही अपने लंड को अंदर बाहर करना चाहता था लेकिन ऐसा कर सकने की स्थिति में वह बिल्कुल भी नहीं था,, जबकि यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बहन पुरी तरह से उत्तेजित हो चुकी है,।अगर ऐसे में वह उसको वही पटक कर उसकी चुदाई करता है तो भी उसकी बहन कुछ बोलने वाली नहीं थी जबकि उसकी बहन तो यही चाहती भी थी लेकिन रघु की हिम्मत बिल्कुल भी नहीं हो रही थी,,, हां अगर उसकी बहन की जगह कोई और औरत या लड़की होती तो वह जरूर अपनी मनमानी उसके साथ कर लेता और उसकी भी इच्छा को पूरी कर देता लेकिन यहां तो उसकी बड़ी बहन थी उसे यही लग रहा था कि कभी भी मामला भी कर सकता है वैसे भी उसकी मां ने उसे उसे पेशाब करता हुआ देखकर बहुत खरी-खोटी सुनाई थी और घर से बाहर निकाल दी थी अगर यह बात शालू ने उसकी मां से बता दी तो गजब हो जाएगा यही सोचकर रघु अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहा था मन तो बहुत हो रहा था लेकिन आंखों को बंद किए हुए अपने मन पर भारी पत्थर रखा हुआ था,,,
बेहद गरमा गरम नजारा था तकरीबन अढी बज रहा था और ऐसे में सब लोग कहने नींद में सो रहे थे पास में ही उसकी मां भी गहरी नींद में खर्राटे भर रही थी और शालू को यही लग रहा था कि उसका भाई भी गहरी नींद में सो रहा है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था,,,सालों की नजर उस पर ना पड़ी होती तो अब तक वह हलवाई की बीवी के रंगीन खयालों में मुट्ठ मार कर अपना पानी निकाल दिया होता लेकिन शायद अब यह बीड़ा उसने उठा ली थी,,,बड़ी शिद्दत से वह रघु के लंड को हीला रही थी,,,
शालू की बुर बुरी तरह से गीली होती जा रही थी,,, उसे अपनी सलवार के आगे वाला भाग गिला होता महसूस हो रहा था,,, उसे अपने नितंब कुछ ज्यादा ही भारी लगने लगे थे,,, उसे वह पल याद आ रहा था जब प्रताप उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लेता था और अपने आगे वाले भाग को उसके नितंबों पर दबाता था उस समय शालू पूरी तरह से गन गना जाती थी,,,, उस समय तो प्रताप का लंड पूरी तरह से खड़ा भी नहीं रहता था,,, तब उसके बदन में सनसनी का एहसास होता था यही सोचकर वह अपने मन में यही विचार कर रही थी कि अगर इस समय अपने भाई के आगे वाले भाग से अपनी गांड को रगड़ेगी तो ऊसके तन बदन में कैसी हलचल होगी,,,, यही जानने की और महसूस करने की उत्सुकता उसके तन बदन में बढ़ती जा रही थी,,,,इतना तो उसे एहसास हो गया था कि उसके भाई की नींद काफी गहरी है तभी वह जाग नहीं रहा है यह वह सोच रही थी,,, लेकिन रघु अपने पूरे होशो हवास में था,,, शालू अपने भाई के खड़े लंड कैसे अपना हाथ वापस खींच ली रघु को लगने लगा कि वह वापस चली जाएगी,,
इसलिए वह गहरी नींद में होने का बहाना करते हुए अपनी बहन की तरफ करवट ले लिया,,,,अपने भाई को करवट लेता हुआ देखकर चालू मन ही मन बहुत खुश हुई क्योंकि अब वह ठीक उसकी स्थिति में आ चुका था जैसा कि वह चाहती थी,,,, अंधेरे का फायदा उठाकर रघु हल्की सी आंख खोल कर देखा तो उसकी बहन वहीं बैठी हुई थी,,,वह सोचा कि आप चली जाएगी लेकिन तभी उसका दिल और जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह उसके बगल में लेटने जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी बहन क्या करने जा रही है और उसकी बहन में इस तरह का बदलाव कैसे आ गया,,,, वह कुछ समझ पाता इससे पहले ही वह उसके बगल में लेट गई,,, रघु फिर से अपनी आंखों को बंद कर लिया,,,उसकी बहन पीठ के बल लेटकर कुछ देर तक आसमान की तरफ देखने लगे आसमान में ढेर सारे तारे टिमटिमा रहे थे,,,
उस दिन शालू हिम्मत दिखाते हुए जिस तरह से उसके लंड को पकड़ कर हीलाई थी और ऐसा करते हुए भी रघु की नींद नहीं खुली थी वह समझ गई थी कि रघु घोड़े बेच कर सोने वालों में से जो कि उसके लिए यह फायदे की ही बात थी,,, शालू के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी उसे एक बार फिर से अपने भाई के लंड को अपने हाथ में पकड़ने का मौका जो मिल रहा था,,, चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ था आसमान में सिर्फ तारे तारे नजर आ रहे थे यह चांदनी रात नहीं थी जिसके चांदनी में पूरी छत नहाई हुई लगती थी लेकिन आज अंधेरी रात थी इसकी वजह से सब कुछ अंधेरे में लुप्त हो चुका था,,, ऐसे में शालू के पकड़े जाने की उम्मीद बिल्कुल कम थी अगर उसकी मां की नहीं खुलती जाती है तो इतनी अधूरी में उसकी मां को चालू अपने भाई के साथ नजर ही नहीं आएगी,,, यह सोच कर शालू बड़े आराम से अपने भाई के करीब बिछी हुई चटाई पर बैठ गई,,, शालू के बैठने का आभास रघु को होते ही उसके तन बदन में आग लग गई,,,वह मन से कभी नहीं चाहता था कि जो कुछ भी हो रहा है वह फिर से हो वह अपनी मां और बहन दोनों के प्रति गंदी भावना को निकाल चुका था और उसके दी भावना से हमेशा बचना भी चाहता था लेकिन उसकी नसीब खराब थी क्या अच्छी खुद नहीं समझ पा रहा था क्योंकि जिस चीज से वह भागना चाहता था वह चीज खुद उसे ढूंढते हुए उसके करीब आ जाती थी,,,
शालू बड़े आराम से अपने भाई के करीब बैठ चुकी थी उसके मन में ढेर सारे भावनाओं के बवंडर उठ रहे थे ,, दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी शायद इसलिए कि अगर यह सब एक दूसरे की रजामंदी से होता हो तब शरीर में इस तरह का तूफान नहीं होता लेकिन यही हरकतें जब चोरी-छिपे करने लगे तो कुछ ज्यादा ही उत्तेजना अपना सर बदन में दिखाता है,,,,
सानू का दिल जोरों से धड़क रहा था उसकी हथेलियां अपनी आगोश में रघु के लंड को लेने के लिए तड़प रही थी नाजुक नाजुक नरम नरम ऊंगलियां अपने भाई के लंड की गर्माहट को अपने अंदर महसूस करने के लिए मचल रही थी,,,ज्यादा देर तक चालू अपने ऊपर काबू नहीं कर पाई और अपना हाथ आगे बढ़ा कर एक बार फिर से अपने भाई के लंड को अपने हाथ में ले ली,,, अपनी बहन के हाथ में अपना मोटा तगड़ा लंड आते ही,,, रघु का पूरा बदन कसमसने लगा,,,एक तो पहले से ही वह हलवाई की बीवी के गर्म बदन की कल्पना में पूरी तरह से अपने आप को डुबो चुका था और ऊपर से जवानी की दहलीज पर पूरी तरह से कदम रख चुकी उसकी बहन की यह कामुक हरकत उसे और ज्यादा बेचैन कर रही थी।
शालू अपनी मुट्ठी में रघु के मोटे तगड़े लंड को पूरी तरह से दबोच ली थी,,, और अपने भाई के लंड को अपनी हथेली में दबोचते ही उसकी बुर कुल बुलाने लगी,,, अजीब सी अद्भुत हलचल उसके तन बदन को पूरी तरह से झकझोर दे रही थी,,, वह धीरे-धीरे अपने भाई के लैंड को हिलाना शुरू कर दी,,, उत्तेजना के मारे शालू का गला सूखता जा रहा था और यही हाल रघु का भी था उसकी हालत बिल्कुल नाजुक होती जा रही थी वह ठीक से आहे भी नहीं भर पा रहा था हालांकि उसे अपनी बहन की यह कामुक पढ़कर बेहद ऊन्मादक और उम्दा किस्म की लग रही थी,,, सालु के हाथों में जादू था,, इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से होने लगा था उस की सबसे गहरी चल रही थी लेकिन अपने आप को संभाले हुए था वह दूसरी तरफ मुंह करके अपनी बहन की हरकतों का आनंद ले रहा था,, रघु पूरी तरह से जोश से भर चुका था इस बार फिर से उसकी इच्छा यही हो रही थी कि अपनी बहन की गंदी हरकत का फायदा उठाते हुए जिस लड़की को अपने हाथ में लेकर हिला रही है वहीं उसकी बुर के अंदर डालकर उसे चुदाई कर दे,,,अगर ऐसा वह करता है तो इसमें उसके लिए किसी भी प्रकार की आपत्ति वाली बात नहीं होगी क्योंकि सालु की हरकत को देखते हुए, उसे समझते देर नहीं लगी थी कि उसकी बड़ी बहन एकदम जवान हो गई है और उसे भी लंड की जरूरत है,, लेकिन रघु की हिम्मत नहीं हो रही वह उसी तरह से आंखें बंद किए हुए लेटा रहा और अपनी बहन की गरम हरकत का आनंद लेता रहा।,,, वह अपनी बहन की तरफ देख नहीं पा रहा था क्योंकि अपनी गर्दन घुमा कर उसकी तरफ देखने में उसे डर लग रहा था कि कहीं उसकी बहन को पता ना चल जाए कि वह नींद भी नहीं बल्कि जाग रहा है,,, थोड़ी ही देर में रघु के तन बदन में और ज्यादा हलचल होने लगी क्योंकि शालू के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आने लगी थी और यह गर्म सिसकारी की आवाज बिल्कुल वैसे ही थी जैसे की बीवी के मुंह से आ रही थी,,,और आती भी कैसे नहीं शालू एकदम गरम जो हो गई थी और अपने ही हाथों से अपनी नारंगी जैसी चूची को दबा रही थी।उसे रहा नहीं जा रहा था उसकी बुर में आग लगी हुई थी और वह किसी भी तरह से अपनी यह आग को बुझाना चाहती थी लेकिन इसे आगे बढ़ने में शायद उसे भी डर लग रहा था वह नहीं चाहती थी कि कुछ ऐसा खुद ही करें की उसके भाई को उसके बारे में सोच कर गलत लगे,,,, वह चाहती थी कि उसकी इस तरह की हरकत से ऊन्मादित होकर खुद ही उसकी दोनों टांगे फैलाकर उसे औरत होने का सुख दे। अपने भाई के लंड को पकड़ कर इस तरह से हिलाना वह कभी नहीं चाहती थी लेकिन अपने भाई के लंड को देखते ही वह मजबूर हो जाती थी,, और खुद ही उसके पैर उसे अपने भाई के करीब ले जाते थे और ना करने वाली हरकत उसे करना पड़ता था,,,
शालू की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी तकरीबन 15 मिनट से वह अपने भाई के लंड को हिला रही थी,,, लंड की गर्माहट शालू के संपूर्ण बदन को अपनी गिरफ्त में ले चुका था,,,, रघु के तन बदन में आग लगी हुई थी वह जल्द से जल्द अपना पानी निकालने की सोच रहा था,,, लेकिन आज उसका पानी निकल ही नहीं रहा था शायद इसका कारण यह था कि उसके अंदर डर की भावना भी जागृत थी,,शालू की टांगों के बीच हलचल बढ़ती जा रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था वह यही सोच रही थी कि उसके भाई की नींद खुल जाए और उसका भाई उत्तेजित अवस्था में उसके साथ संभोग करें,,, लेकिन डर भी रही थी कि कहीं उसका भाई जाग गया तो उसके बारे में क्या सोचेगा शालू इतनी नादान है कि उसे इस बात का आभास तक नहीं था कि किसी भी मर्द का लूंगा अपने हाथ में लेकर इतनी देर तक हीलाने से इस मर्द को इस बारे में पता ही नहीं चलेगा,,, जबकि गहरी नींद में होने के बावजूद भी अगर स्त्री या पुरुष दोनों के नाजुक अंगों पर किसी भी प्रकार से हाथ रखा जाए तो उनकी नींद तुरंत खुल जाती है,,,। लेकिन यहां रघु को गहरी नींद मैं समझ कर शालू पूरी तरह से उसके खड़े लंड को हिला रही थी और साथ में अपनी चुचियों को दबाते चली जा रही थी,,,अपनी चुचियों को दबाते हुए सालु एक बात तो समझ गई थी कि अपने हाथ से दबाने में और मर्दो के हाथ से दबवाने में जमीन आसमान का फर्क होता है,,,क्योंकि प्रताप जब उसकी दोनों चूचियों को दबाता था तो उसे अद्भुत एहसास होता था,,,और अभी अपने हाथ से करवानी है उसे वह एहसास नहीं हो रहा था लेकिन हाथ में अपने भाई का लन्ड पाकर उसके तन बदन की हलचल पूरी तरह से बढ चुकी थी,,,,
ससहहहहहह,,,, आहहहहहह,,,,,ऊहहहहहहह,,,ऊममममममन,,,,ओहहहह मां,,,,,,,
इस तरह की गरमा गरम आवाजें शालू के मुख से निकल रही थी लेकिन उसकी आवाज बिल्कुल समिति थी जो कि रघु के कानों में बराबर पड़ रही थी और उन गरमा गरम आवाजों को सुनकर रघु की हालत और बदतर होती जा रही थी वह अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाना चाहता था कुछ नहीं तो अपनी बहन की हथेली में ही अपने लंड को अंदर बाहर करना चाहता था लेकिन ऐसा कर सकने की स्थिति में वह बिल्कुल भी नहीं था,, जबकि यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बहन पुरी तरह से उत्तेजित हो चुकी है,।अगर ऐसे में वह उसको वही पटक कर उसकी चुदाई करता है तो भी उसकी बहन कुछ बोलने वाली नहीं थी जबकि उसकी बहन तो यही चाहती भी थी लेकिन रघु की हिम्मत बिल्कुल भी नहीं हो रही थी,,, हां अगर उसकी बहन की जगह कोई और औरत या लड़की होती तो वह जरूर अपनी मनमानी उसके साथ कर लेता और उसकी भी इच्छा को पूरी कर देता लेकिन यहां तो उसकी बड़ी बहन थी उसे यही लग रहा था कि कभी भी मामला भी कर सकता है वैसे भी उसकी मां ने उसे उसे पेशाब करता हुआ देखकर बहुत खरी-खोटी सुनाई थी और घर से बाहर निकाल दी थी अगर यह बात शालू ने उसकी मां से बता दी तो गजब हो जाएगा यही सोचकर रघु अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहा था मन तो बहुत हो रहा था लेकिन आंखों को बंद किए हुए अपने मन पर भारी पत्थर रखा हुआ था,,,
बेहद गरमा गरम नजारा था तकरीबन अढी बज रहा था और ऐसे में सब लोग कहने नींद में सो रहे थे पास में ही उसकी मां भी गहरी नींद में खर्राटे भर रही थी और शालू को यही लग रहा था कि उसका भाई भी गहरी नींद में सो रहा है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था,,,सालों की नजर उस पर ना पड़ी होती तो अब तक वह हलवाई की बीवी के रंगीन खयालों में मुट्ठ मार कर अपना पानी निकाल दिया होता लेकिन शायद अब यह बीड़ा उसने उठा ली थी,,,बड़ी शिद्दत से वह रघु के लंड को हीला रही थी,,,
शालू की बुर बुरी तरह से गीली होती जा रही थी,,, उसे अपनी सलवार के आगे वाला भाग गिला होता महसूस हो रहा था,,, उसे अपने नितंब कुछ ज्यादा ही भारी लगने लगे थे,,, उसे वह पल याद आ रहा था जब प्रताप उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लेता था और अपने आगे वाले भाग को उसके नितंबों पर दबाता था उस समय शालू पूरी तरह से गन गना जाती थी,,,, उस समय तो प्रताप का लंड पूरी तरह से खड़ा भी नहीं रहता था,,, तब उसके बदन में सनसनी का एहसास होता था यही सोचकर वह अपने मन में यही विचार कर रही थी कि अगर इस समय अपने भाई के आगे वाले भाग से अपनी गांड को रगड़ेगी तो ऊसके तन बदन में कैसी हलचल होगी,,,, यही जानने की और महसूस करने की उत्सुकता उसके तन बदन में बढ़ती जा रही थी,,,,इतना तो उसे एहसास हो गया था कि उसके भाई की नींद काफी गहरी है तभी वह जाग नहीं रहा है यह वह सोच रही थी,,, लेकिन रघु अपने पूरे होशो हवास में था,,, शालू अपने भाई के खड़े लंड कैसे अपना हाथ वापस खींच ली रघु को लगने लगा कि वह वापस चली जाएगी,,
इसलिए वह गहरी नींद में होने का बहाना करते हुए अपनी बहन की तरफ करवट ले लिया,,,,अपने भाई को करवट लेता हुआ देखकर चालू मन ही मन बहुत खुश हुई क्योंकि अब वह ठीक उसकी स्थिति में आ चुका था जैसा कि वह चाहती थी,,,, अंधेरे का फायदा उठाकर रघु हल्की सी आंख खोल कर देखा तो उसकी बहन वहीं बैठी हुई थी,,,वह सोचा कि आप चली जाएगी लेकिन तभी उसका दिल और जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह उसके बगल में लेटने जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी बहन क्या करने जा रही है और उसकी बहन में इस तरह का बदलाव कैसे आ गया,,,, वह कुछ समझ पाता इससे पहले ही वह उसके बगल में लेट गई,,, रघु फिर से अपनी आंखों को बंद कर लिया,,,उसकी बहन पीठ के बल लेटकर कुछ देर तक आसमान की तरफ देखने लगे आसमान में ढेर सारे तारे टिमटिमा रहे थे,,,