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हलवाई की बीवी को यह समझ में नहीं आ रहा था कि आधी रात को एक जवान लड़के को अपने घर में बुलाकर उसने अच्छा कि या गलत,, लेकिन उसके सामने जो भी नजारा पेश हो रहा था उसे देख कर उसके तन बदन में ना जाने कैसे कैसे उमंग फेलने लगे थे,,, उसे भी यह सब अच्छा लग रहा था,,, उसने रघु के लिए खाना परोस चुकी थी,,, लेकिन ऐसा जान पड रहा था कि रघु हलवाई की बीवी के लिए कुछ और परोसने के इंतजाम में था,,
रघुनाथ ने पहचाने की डोरी को खोल चुका था पजामे की डोरी खुलते ही उसका पजामा एकदम ढीला हो गया,,, अगर वह हाथ से पकड़ कर ना रखा होता तो उसका पैजामा क्षण भर में ही उसके कदमों में गिरा होता,,,
रघु की आंखों में बेशर्मी साफ नजर आ रही थी,, वह औरत जो कि भूखा होने की वजह से उसे खाना खिलाने जा रही थी रघु उसी औरत को अब गंदी नजरों से देखने लगा था,,
रघु के तन बदन में आग लगी हुई थी और यही हाल हलवाई की बीवी का भी था,,, पजामे में बने तंबू को देखकर वह रघु के लंड के बारे में उसके आकार के बारे में तर्क लगाना शुरू कर दी थी,,,बार-बार वह अपनी नजरों को ऊपर करके रघु की तरफ देख ले रही थी कि कब वह अपने पजामे को नीचे करें और उसे उसके लंड के दर्शन हो जाए,,, हलवाई की बीवी शादी के बाद से अपने घर गृहस्ती में ऐसी ऊलझी की ऊलझ के रह गई,, शादी के पहले वह अपने खेतों में काम करते हुए मजदूरों के साथ चुदाई का भरपूर मजा ली थी,, शादी के पहले उसका गोरा बदन बेहद आकर्षक और कसा हुआ था जो कि शादी के बाद एकदम जलेबी और समोसे छान छान कर डीलडोल हो गया था। शादी के बाद उसे अपने पति से शारीरिक सुख बराबर मिल रहा था जिससे वह किसी गैर मर्द के बारे में कभी सोची भी नहीं थी ऐसे में एक बार उसका देवर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश कर रहा था तो वह उसके गाल पर दो तमाचा मार कर उसे होश में ला दी थी,,, अपने पति से चुदाई का भरपूर सुख मिलने की वजह से वह अपने कदम को इधर-उधर बहकने नहीं दी थी,,, लेकिन एक बेटी को जन्म देने के बाद से उसके जीवन में परिवर्तन आना शुरू हो गया उसका शरीर बड़ी तेजी से एकदम मोटा हो गया और कामकाज में वह ईतना व्यस्त रहने लगी कि अपने शरीर के प्रति वह कभी ध्यान ही नहीं दे सकी,,, उसके पति का भी शरीर पहले की तरह कसा हुआ और हट्टा कट्टा नहीं रह गया था उसके पति की भी तोंद निकल आई थी जिससे तोंद के नीचे उसका तगड़ा लंड छोटा लगने लगा था,,, और खुद की भारी-भरकम शरीर हो जाने की वजह से दोनों में अच्छी तरह से चुदाई नहीं हो पा रही थी,,।यह बात हलवाई की बीवी को जल्द ही समझ में आ गई थी कि अब वह अपने शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति अच्छी तरह से नहीं कर पाएगी,, तब से लेकर आज तक वह ऐसे ही अपना जीवन व्यतीत कर रही थी लेकिन आज की रात उसे ऐसा लग रहा था कि उसके जीवन में कुछ बदलाव होने वाला है,,,।
उसके दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी,, वह रसोई के पास बैठी हुई थी,, उसके आगे भोजन की थाली पड़ी हुई थी,,, रघु के मन में भी असमंजसता छाई हुई थी,,
उसका एक मन कहता था कि पैजामा उतार कर हलवाई की बीवी को अपना मोटा तगड़ा लंड के दर्शन करा दे लेकिन फिर वह सोचता है कि अगर ऐसा करने पर वह नाराज हो गई तो क्या होगा,,,,, लेकिन फिर उसके मन में ख्याल आता है कि जो होगा देखा जाएगा आखिरकार अगर हलवाई की बीवी को ऐतराज होता तो वह तभी उसे अपने कमरे में नहीं बुलाती जब वह उसके ऊपर एकदम से पसर गई थी और उसके मोटे तगड़े लंड को अपनी टांगों के बीच एकदम साफ तौर पर महसूस की थी,,,और एक अनुभवी औरत होने के नाते उसे इतना तो पता ही होगा कि एक मर्द का लंड किस अवस्था में और कब खड़ा होता है,,। और वैसे भी इस समय हलवाई की बीवी घर में अकेली थी रात की तन्हाई और पैसे में घर में गैर जवान लड़का यह सब सोचकर ही शायद हलवाई की बीवी का मन बदल जाए,,,
रघु अपने ढीले पजामे को हलवाई की बीवी की तरफ नशीली आंखों से देखते हुए धीरे-धीरे नीचे करने लगा,,, पजामे के ऊपरी सतह कमर पर का भाग का घेराव रघु के कमर के हिसाब से ही था लेकिन इस समय रघु का लंड पूरी तरह से खाना था जो कि काफी बड़ा था और इसलिए रघु अपने पजामे को नीचे करते समय लड़के खड़े होने की वजह से पजामे का घेराव छोटा पड़ने लगा,,, और पैजामा कमर से थोड़ा ही नीचे आकर फिर से अटक गया,,, रघु की आंखों में एक औरत के सामने अपने कपड़े उतारने का नशा साफ नजर आ रहा था उसकी आंखों में खुमारी छाई हुई थी जहां पर उसका पजामा अटक सा गया था,,, रघु को मालूम था कि यह किस वजह से हो रहा है रघु की आंखों में इतनी ज्यादा बेशर्मी नजर आ रही थी कि वह हलवाई की बीवी की आंखों के सामने ही,,, एक हाथ अपने पजामें में डालकर अपने खड़े लंड को पकड़ लिया और उसे अपनी मुट्ठी में पकड़े हुए ही उसे अपने पेट की तरफ उठाया जिससे एक बार फिर से उसके पास जाने का खेड़ा उसकी कमर के हिसाब से एकदम बराबर हो गया और वह एक हांथ से अपनी पजामे को नीचे उतारने लगा,,,, हलवाई की बीवी ये सब चोरी-चोरी अपनी तिरछी नजरों से देख रही थी,, उसे रघु की यह हरकत एकदम साफ नजर आई थी,, जिस तरह से रघु अपना एक हाथ पजामे में डालकर अपने लंड को पकड़ा था उसकी हरकत हलवाई की बीवी के तन बदन में आग लगा गई थी,,, ऊसे समझते देर नहीं लगी थी कि तरघु बेहद बेशर्म लड़का है,,,, सब कुछ अपनी आंखों से देखने के बावजूद भी हलवाई की बीवी रघु के आकर्षण में इस तरह से रंग गई थी कि वह उसे मना भी नहीं कर पा रही थी ना तो उसे अपने घर से चले जाने के लिए बोल पा रही थी,,,,रघु थोड़ा सा झुक कर अपनी पहचाने को घुटनों तक लाया और अपने दूसरे हाथ में पकड़े अपने लंड को छोड़ दिया और जैसे ही वह अपने लंड को छोड़ा उसका लंबा मोटा लैंड हवा में लहराने लगा जोकि यह नजारा हलवाई की बीवी की आंखों से बच नहीं सका,,,जैसे ही उसकी नजरों ने रघु के मोटे तगड़े लंड को हवा में लहराते हुए देखा,,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई जिंदगी में उसने इस तरह के मोटे तगड़े लंड के दर्शन नहीं किए थे,,, उसकी हालत खराब होती जा रही थी सांसो की गति तीव्र होने लगी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह रघु के लंड को एकटक देखती रहे या उस पर से नजरे हटा ले,,, रघु को अच्छी तरह से मालूम था कि उसका लंड हवा में ऊपर नीचे झुल रहा है,,, घुटनों से वापस जाने को पीछे छोड़ दिया उसका पैजामा उसके पैरों में जाकर गिर गया जिसे वह अपने पैरों के सहारे से बाहर निकालने लगा और अपनी प्यासी नजरों से हलवाई की बीवी को देखने लगा जो कि मदहोश होकर उसी की तरफ देख रही थी रघु को उसकी नजरें देखकर इतना तो पता ही था कि वह उसकी तरफ नहीं बल्कि उसकी टांगों के बीच में झूलते हुए उसके लंड को देख रही थी,,, रघु मन ही मन में प्रसन्न हो रहा था,,क्योंकि हलवाई की बीवी की हालत को देखकर उसे इतना समझ में आ गया था कि वह नाराज नहीं है बल्कि उसके मोटे खड़े लंड को देखकर बदहवाश हो गई है,,,
रघु की कामुकता भरी हरकत और उसके झूलते हुए लंड को देखकर हलवाई की बीवी की टांगों के बीच में हलचल होना शुरू हो गया था,,, काफी महीने गुजर गए थे उसे उत्तेजना का अनुभव किए हुए लेकिन पलभर में ही उसे उत्तेजना का एहसास होने लगा था,,,।
हलवाई की बीवी बार-बार रघु की तरफ देख रही थी उसके मन में ना जाने कैसे-कैसे विचार आ रहे थे रघु के बमपिलाट लंड को देखकर उसकी रसीली बुर कुलबुलाने लगी थी,,, बहुत दिनों बाद उसे अपनी बुर के अंदर हलचल होती हुई महसूस हो रही थी,,, बहुत दिनों बाद उसे अपनी बुर की अंदरूनी दीवारें नमी युक्त महसूस हो रही थी उसमें से पानी रिसने लगा था,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूख रहा था बार-बार वह अपने थुक से अपने गले को गिला करने की कोशिश कर रही थी,, रघु के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी औरत के सामने जानबूझकर अपने लंड का प्रदर्शन कर रहा था,,, और उसे ऐसा करने में बेहद उत्तेजना और आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,। उसे लगने लगा था कि जो कुछ भी होता है अच्छे के लिए ही होता है अच्छा ही हुआ कि उसकी मां ने उसे डांट कर भगा दी वरना आज वह इस अतुल्य पल को जी नहीं पाता,,,
देखते ही देखते रघु हलवाई की बीवी की आंखों के सामने अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगा हो गया। और वह अपनी गंदे कपड़ों को पानी भरी बाल्टी में डालता ,,इससे पहले ही वह जानबूझकर हलवाई की बीवी की आंखों के सामने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर उसे कुछ सेकेंड तक ऊपर नीचे करके हिलाना शुरू कर दिया सच मानो उसे ऐसा करने में अद्भुत सुख का अहसास हो रहा था मानो सच में वह संभोग सुख को महसूस कर रहा हो लेकिन रघु की यह हरकत हलवाई की बीवी के तन बदन में जवानी का वह सोला भड़काने लगी जोकि उसने आज तक अपनी बदन में उस शोले को भड़कते हुए महसूस नहीं की थी,,
लंड हिलाने की क्रिया को वह जानबूझकर ही किया था,,, और हलवाई की बीवी इस नजारे को देखकर एकदम मंत्रमुग्ध हो गई उत्तेजना के मारे उसका हलक सूखने लगा,, उसे रहा नहीं जा रहा था रघु की यह हरकत ऊसके बर्दाश्त के बाहर थी,,, उसके जी मैं आ रहा था कि उठ कर उसके पास चली जाए और उसके खड़े लंड को अपने हाथ में लेकर उससे जी भर कर खेलें,,, लेकिन ऐसा करने की हिम्मत उसमे बिल्कुल भी नहीं थी,,, रघु की इस तरह की हरकत से वह बेहद शर्मसार हुई जा रही थी साथ में उत्तेजित भी,,, रघु बेशर्म की तरह अपने बदन पर टावल लपेटे बीना ही,, गंदे कपड़ों को बाल्टी में डालने लगा और उसे धोने लगा,,, जैसे-जैसे वह बाल्टी में कपड़े धोने के लिए अपने हाथ को हिला रहा था वैसे वैसे उसकी टांगों के बीच का मोटा तगड़ा लंड लहरा रहा था,,,, जिसे देख देख कर हलवाई की बीवी अपनी आंखों के साथ-साथ अपने तन बदन को भी सेंक रही थी,, ,,, देखते ही देखते रघु अपने गंदे कपड़ों को साफ कर लिया,,, और उसे बाल्टी में से निकाल कर उसका पानी नीचोड़ कर,,, बोला,,,।
चाची इस रस्सी पर इसे फैला दुं।
( रघु की आवाज सुनते ही वो एकदम से झेंप गई,,, उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं फुटे,,, बस वह हां में सिर हिला दी,, रघु मुस्कुराते हुए अपने गीले कपड़े को उस रस्सी पर फैला दिया और हलवाई की बीवी के द्वारा दी गई तौलिए को अपने कमर पर लपेट कर अपने तगड़े लंड के प्रदर्शन पर पर्दा गिरा दिया लेकिन उसके उभार पन को छुपा पाने में वह तोलिया असमर्थ हो गया,,, क्योंकि तौलिए में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था,,, जिसे रघु एक बार फिर से हलवाई की बीवी की नजरों से छुपाने की बिल्कुल भी दरकार नहीं लिया और उसी तरह से उसकी तरफ आगे बढ़ते हुए बोला,,।)
चाची मुझे माफ करना तोलिया गंदा ना हो जाए इसलिए मैं अपने सारे कपड़े उतार कर साफ करने के बाद तोलिया लपेटा,,,
(रघु उसी तरह से लंबा सा तंबू बनाए हुए हलवाई की बीवी की तरफ आगे बढ़ा आ रहा था,,, हलवाई की बीवी उसके लंबे तगड़े तंबू को देखकर एकदम उत्तेजित होने लगी उसे अपने पैरों में कंपन सा महसूस होने लगा,,,और वह अपनी नजरों को शर्म के मारे नीचे करते हुए सिर्फ इतना ही बोल पाई,,।)
कोई बात नहीं,,, अब खाना खा ले,,,
अरे वाह चाची तुम तो आज मेरी सबसे पसंदीदा पूरी और सब्जी बनाई हो,,,
तेरे घर नहीं बनती है क्या,,,? (हलवाई की बीवी एक बार फिर से अपनी नजरों को ऊपर करते हुए बोली लेकिन फिर से रघु के चोलिया में बने तंबू को देखकर शर्म के मारे वापस नजरें नीचे झुका ली,,)
बनती है लेकिन कभी-कभी,,,,
चल तब तो अच्छा है कि खाना भी तेरे पसंद का है,,,।
यहां बहुत कुछ मेरे पसंद का है चाची,,,
(रघु की यह बात सुनकर हलवाई की बीवी एकदम से जीत गई और पल भर के लिए ऊपर की तरफ नजर की तो वह रघु की नजरों को अपनी दोनों चूचियों के बीच की गहराई पर गडती हुई महसूस की तो वह शर्म के मारे अपनी साडी ठीक करते हुए बोली,,)
चल जल्दी से खाना खा ले मुझे क्या मालूम कि तेरी पसंद का क्या क्या है,,,।
(हलवाई की बीवी की बात सुनकर रघु मुस्कुराते हुए पलाठी मारकर नीचे बैठ गया और खाना खाने लगा,,, हलवाई की बीवी के मन में इस बात से उन्मादकता जागने लगी थी कि इस उम्र में भी एक जवान लड़का उसकी चूचियों को घूर रहा था इसका मतलब साफ था कि इस उमर में भी उसकी जवानी की याद बरकरार थी भले ही वह मोटी हो गई थी लेकिन अभी भी वह आकर्सक थी,,,। हलवाई की बीवी की भी हसरते जागने लगी थी उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि गांव के बाहर वह इस घर में एक जवान लड़के के साथ अकेली थी और वह भी ऐसे लड़के के साथ जो कि खुद उस में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा था ऐसे हालात में हलवाई की बीवी के तन बदन में आग लग रही थी और उसका मन बहक रहा था और वैसे भी वह आज घर में अकेली ही थी,,, काफी दिनों से उसकी बुर में अच्छी तरह से लंड नही घुसा था,, इसलिए आज रघु के मोटे तगड़े लंड को देखकर उसकी बुर में खुजली होने लगी थी। हलवाई की बीवी मन में बहुत कुछ सोच रही थी,,उसके मन में बार-बार यह ख्याल आ रहा था कि क्यों ना आज की रात अपनी पति की गैरमौजूदगी में इस मौके का फायदा उठा लिया जाए।
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रघुनाथ ने पहचाने की डोरी को खोल चुका था पजामे की डोरी खुलते ही उसका पजामा एकदम ढीला हो गया,,, अगर वह हाथ से पकड़ कर ना रखा होता तो उसका पैजामा क्षण भर में ही उसके कदमों में गिरा होता,,,
रघु की आंखों में बेशर्मी साफ नजर आ रही थी,, वह औरत जो कि भूखा होने की वजह से उसे खाना खिलाने जा रही थी रघु उसी औरत को अब गंदी नजरों से देखने लगा था,,
रघु के तन बदन में आग लगी हुई थी और यही हाल हलवाई की बीवी का भी था,,, पजामे में बने तंबू को देखकर वह रघु के लंड के बारे में उसके आकार के बारे में तर्क लगाना शुरू कर दी थी,,,बार-बार वह अपनी नजरों को ऊपर करके रघु की तरफ देख ले रही थी कि कब वह अपने पजामे को नीचे करें और उसे उसके लंड के दर्शन हो जाए,,, हलवाई की बीवी शादी के बाद से अपने घर गृहस्ती में ऐसी ऊलझी की ऊलझ के रह गई,, शादी के पहले वह अपने खेतों में काम करते हुए मजदूरों के साथ चुदाई का भरपूर मजा ली थी,, शादी के पहले उसका गोरा बदन बेहद आकर्षक और कसा हुआ था जो कि शादी के बाद एकदम जलेबी और समोसे छान छान कर डीलडोल हो गया था। शादी के बाद उसे अपने पति से शारीरिक सुख बराबर मिल रहा था जिससे वह किसी गैर मर्द के बारे में कभी सोची भी नहीं थी ऐसे में एक बार उसका देवर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश कर रहा था तो वह उसके गाल पर दो तमाचा मार कर उसे होश में ला दी थी,,, अपने पति से चुदाई का भरपूर सुख मिलने की वजह से वह अपने कदम को इधर-उधर बहकने नहीं दी थी,,, लेकिन एक बेटी को जन्म देने के बाद से उसके जीवन में परिवर्तन आना शुरू हो गया उसका शरीर बड़ी तेजी से एकदम मोटा हो गया और कामकाज में वह ईतना व्यस्त रहने लगी कि अपने शरीर के प्रति वह कभी ध्यान ही नहीं दे सकी,,, उसके पति का भी शरीर पहले की तरह कसा हुआ और हट्टा कट्टा नहीं रह गया था उसके पति की भी तोंद निकल आई थी जिससे तोंद के नीचे उसका तगड़ा लंड छोटा लगने लगा था,,, और खुद की भारी-भरकम शरीर हो जाने की वजह से दोनों में अच्छी तरह से चुदाई नहीं हो पा रही थी,,।यह बात हलवाई की बीवी को जल्द ही समझ में आ गई थी कि अब वह अपने शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति अच्छी तरह से नहीं कर पाएगी,, तब से लेकर आज तक वह ऐसे ही अपना जीवन व्यतीत कर रही थी लेकिन आज की रात उसे ऐसा लग रहा था कि उसके जीवन में कुछ बदलाव होने वाला है,,,।
उसके दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी,, वह रसोई के पास बैठी हुई थी,, उसके आगे भोजन की थाली पड़ी हुई थी,,, रघु के मन में भी असमंजसता छाई हुई थी,,
उसका एक मन कहता था कि पैजामा उतार कर हलवाई की बीवी को अपना मोटा तगड़ा लंड के दर्शन करा दे लेकिन फिर वह सोचता है कि अगर ऐसा करने पर वह नाराज हो गई तो क्या होगा,,,,, लेकिन फिर उसके मन में ख्याल आता है कि जो होगा देखा जाएगा आखिरकार अगर हलवाई की बीवी को ऐतराज होता तो वह तभी उसे अपने कमरे में नहीं बुलाती जब वह उसके ऊपर एकदम से पसर गई थी और उसके मोटे तगड़े लंड को अपनी टांगों के बीच एकदम साफ तौर पर महसूस की थी,,,और एक अनुभवी औरत होने के नाते उसे इतना तो पता ही होगा कि एक मर्द का लंड किस अवस्था में और कब खड़ा होता है,,। और वैसे भी इस समय हलवाई की बीवी घर में अकेली थी रात की तन्हाई और पैसे में घर में गैर जवान लड़का यह सब सोचकर ही शायद हलवाई की बीवी का मन बदल जाए,,,
रघु अपने ढीले पजामे को हलवाई की बीवी की तरफ नशीली आंखों से देखते हुए धीरे-धीरे नीचे करने लगा,,, पजामे के ऊपरी सतह कमर पर का भाग का घेराव रघु के कमर के हिसाब से ही था लेकिन इस समय रघु का लंड पूरी तरह से खाना था जो कि काफी बड़ा था और इसलिए रघु अपने पजामे को नीचे करते समय लड़के खड़े होने की वजह से पजामे का घेराव छोटा पड़ने लगा,,, और पैजामा कमर से थोड़ा ही नीचे आकर फिर से अटक गया,,, रघु की आंखों में एक औरत के सामने अपने कपड़े उतारने का नशा साफ नजर आ रहा था उसकी आंखों में खुमारी छाई हुई थी जहां पर उसका पजामा अटक सा गया था,,, रघु को मालूम था कि यह किस वजह से हो रहा है रघु की आंखों में इतनी ज्यादा बेशर्मी नजर आ रही थी कि वह हलवाई की बीवी की आंखों के सामने ही,,, एक हाथ अपने पजामें में डालकर अपने खड़े लंड को पकड़ लिया और उसे अपनी मुट्ठी में पकड़े हुए ही उसे अपने पेट की तरफ उठाया जिससे एक बार फिर से उसके पास जाने का खेड़ा उसकी कमर के हिसाब से एकदम बराबर हो गया और वह एक हांथ से अपनी पजामे को नीचे उतारने लगा,,,, हलवाई की बीवी ये सब चोरी-चोरी अपनी तिरछी नजरों से देख रही थी,, उसे रघु की यह हरकत एकदम साफ नजर आई थी,, जिस तरह से रघु अपना एक हाथ पजामे में डालकर अपने लंड को पकड़ा था उसकी हरकत हलवाई की बीवी के तन बदन में आग लगा गई थी,,, ऊसे समझते देर नहीं लगी थी कि तरघु बेहद बेशर्म लड़का है,,,, सब कुछ अपनी आंखों से देखने के बावजूद भी हलवाई की बीवी रघु के आकर्षण में इस तरह से रंग गई थी कि वह उसे मना भी नहीं कर पा रही थी ना तो उसे अपने घर से चले जाने के लिए बोल पा रही थी,,,,रघु थोड़ा सा झुक कर अपनी पहचाने को घुटनों तक लाया और अपने दूसरे हाथ में पकड़े अपने लंड को छोड़ दिया और जैसे ही वह अपने लंड को छोड़ा उसका लंबा मोटा लैंड हवा में लहराने लगा जोकि यह नजारा हलवाई की बीवी की आंखों से बच नहीं सका,,,जैसे ही उसकी नजरों ने रघु के मोटे तगड़े लंड को हवा में लहराते हुए देखा,,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई जिंदगी में उसने इस तरह के मोटे तगड़े लंड के दर्शन नहीं किए थे,,, उसकी हालत खराब होती जा रही थी सांसो की गति तीव्र होने लगी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह रघु के लंड को एकटक देखती रहे या उस पर से नजरे हटा ले,,, रघु को अच्छी तरह से मालूम था कि उसका लंड हवा में ऊपर नीचे झुल रहा है,,, घुटनों से वापस जाने को पीछे छोड़ दिया उसका पैजामा उसके पैरों में जाकर गिर गया जिसे वह अपने पैरों के सहारे से बाहर निकालने लगा और अपनी प्यासी नजरों से हलवाई की बीवी को देखने लगा जो कि मदहोश होकर उसी की तरफ देख रही थी रघु को उसकी नजरें देखकर इतना तो पता ही था कि वह उसकी तरफ नहीं बल्कि उसकी टांगों के बीच में झूलते हुए उसके लंड को देख रही थी,,, रघु मन ही मन में प्रसन्न हो रहा था,,क्योंकि हलवाई की बीवी की हालत को देखकर उसे इतना समझ में आ गया था कि वह नाराज नहीं है बल्कि उसके मोटे खड़े लंड को देखकर बदहवाश हो गई है,,,
रघु की कामुकता भरी हरकत और उसके झूलते हुए लंड को देखकर हलवाई की बीवी की टांगों के बीच में हलचल होना शुरू हो गया था,,, काफी महीने गुजर गए थे उसे उत्तेजना का अनुभव किए हुए लेकिन पलभर में ही उसे उत्तेजना का एहसास होने लगा था,,,।
हलवाई की बीवी बार-बार रघु की तरफ देख रही थी उसके मन में ना जाने कैसे-कैसे विचार आ रहे थे रघु के बमपिलाट लंड को देखकर उसकी रसीली बुर कुलबुलाने लगी थी,,, बहुत दिनों बाद उसे अपनी बुर के अंदर हलचल होती हुई महसूस हो रही थी,,, बहुत दिनों बाद उसे अपनी बुर की अंदरूनी दीवारें नमी युक्त महसूस हो रही थी उसमें से पानी रिसने लगा था,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूख रहा था बार-बार वह अपने थुक से अपने गले को गिला करने की कोशिश कर रही थी,, रघु के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी औरत के सामने जानबूझकर अपने लंड का प्रदर्शन कर रहा था,,, और उसे ऐसा करने में बेहद उत्तेजना और आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,। उसे लगने लगा था कि जो कुछ भी होता है अच्छे के लिए ही होता है अच्छा ही हुआ कि उसकी मां ने उसे डांट कर भगा दी वरना आज वह इस अतुल्य पल को जी नहीं पाता,,,
देखते ही देखते रघु हलवाई की बीवी की आंखों के सामने अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगा हो गया। और वह अपनी गंदे कपड़ों को पानी भरी बाल्टी में डालता ,,इससे पहले ही वह जानबूझकर हलवाई की बीवी की आंखों के सामने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर उसे कुछ सेकेंड तक ऊपर नीचे करके हिलाना शुरू कर दिया सच मानो उसे ऐसा करने में अद्भुत सुख का अहसास हो रहा था मानो सच में वह संभोग सुख को महसूस कर रहा हो लेकिन रघु की यह हरकत हलवाई की बीवी के तन बदन में जवानी का वह सोला भड़काने लगी जोकि उसने आज तक अपनी बदन में उस शोले को भड़कते हुए महसूस नहीं की थी,,
लंड हिलाने की क्रिया को वह जानबूझकर ही किया था,,, और हलवाई की बीवी इस नजारे को देखकर एकदम मंत्रमुग्ध हो गई उत्तेजना के मारे उसका हलक सूखने लगा,, उसे रहा नहीं जा रहा था रघु की यह हरकत ऊसके बर्दाश्त के बाहर थी,,, उसके जी मैं आ रहा था कि उठ कर उसके पास चली जाए और उसके खड़े लंड को अपने हाथ में लेकर उससे जी भर कर खेलें,,, लेकिन ऐसा करने की हिम्मत उसमे बिल्कुल भी नहीं थी,,, रघु की इस तरह की हरकत से वह बेहद शर्मसार हुई जा रही थी साथ में उत्तेजित भी,,, रघु बेशर्म की तरह अपने बदन पर टावल लपेटे बीना ही,, गंदे कपड़ों को बाल्टी में डालने लगा और उसे धोने लगा,,, जैसे-जैसे वह बाल्टी में कपड़े धोने के लिए अपने हाथ को हिला रहा था वैसे वैसे उसकी टांगों के बीच का मोटा तगड़ा लंड लहरा रहा था,,,, जिसे देख देख कर हलवाई की बीवी अपनी आंखों के साथ-साथ अपने तन बदन को भी सेंक रही थी,, ,,, देखते ही देखते रघु अपने गंदे कपड़ों को साफ कर लिया,,, और उसे बाल्टी में से निकाल कर उसका पानी नीचोड़ कर,,, बोला,,,।
चाची इस रस्सी पर इसे फैला दुं।
( रघु की आवाज सुनते ही वो एकदम से झेंप गई,,, उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं फुटे,,, बस वह हां में सिर हिला दी,, रघु मुस्कुराते हुए अपने गीले कपड़े को उस रस्सी पर फैला दिया और हलवाई की बीवी के द्वारा दी गई तौलिए को अपने कमर पर लपेट कर अपने तगड़े लंड के प्रदर्शन पर पर्दा गिरा दिया लेकिन उसके उभार पन को छुपा पाने में वह तोलिया असमर्थ हो गया,,, क्योंकि तौलिए में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था,,, जिसे रघु एक बार फिर से हलवाई की बीवी की नजरों से छुपाने की बिल्कुल भी दरकार नहीं लिया और उसी तरह से उसकी तरफ आगे बढ़ते हुए बोला,,।)
चाची मुझे माफ करना तोलिया गंदा ना हो जाए इसलिए मैं अपने सारे कपड़े उतार कर साफ करने के बाद तोलिया लपेटा,,,
(रघु उसी तरह से लंबा सा तंबू बनाए हुए हलवाई की बीवी की तरफ आगे बढ़ा आ रहा था,,, हलवाई की बीवी उसके लंबे तगड़े तंबू को देखकर एकदम उत्तेजित होने लगी उसे अपने पैरों में कंपन सा महसूस होने लगा,,,और वह अपनी नजरों को शर्म के मारे नीचे करते हुए सिर्फ इतना ही बोल पाई,,।)
कोई बात नहीं,,, अब खाना खा ले,,,
अरे वाह चाची तुम तो आज मेरी सबसे पसंदीदा पूरी और सब्जी बनाई हो,,,
तेरे घर नहीं बनती है क्या,,,? (हलवाई की बीवी एक बार फिर से अपनी नजरों को ऊपर करते हुए बोली लेकिन फिर से रघु के चोलिया में बने तंबू को देखकर शर्म के मारे वापस नजरें नीचे झुका ली,,)
बनती है लेकिन कभी-कभी,,,,
चल तब तो अच्छा है कि खाना भी तेरे पसंद का है,,,।
यहां बहुत कुछ मेरे पसंद का है चाची,,,
(रघु की यह बात सुनकर हलवाई की बीवी एकदम से जीत गई और पल भर के लिए ऊपर की तरफ नजर की तो वह रघु की नजरों को अपनी दोनों चूचियों के बीच की गहराई पर गडती हुई महसूस की तो वह शर्म के मारे अपनी साडी ठीक करते हुए बोली,,)
चल जल्दी से खाना खा ले मुझे क्या मालूम कि तेरी पसंद का क्या क्या है,,,।
(हलवाई की बीवी की बात सुनकर रघु मुस्कुराते हुए पलाठी मारकर नीचे बैठ गया और खाना खाने लगा,,, हलवाई की बीवी के मन में इस बात से उन्मादकता जागने लगी थी कि इस उम्र में भी एक जवान लड़का उसकी चूचियों को घूर रहा था इसका मतलब साफ था कि इस उमर में भी उसकी जवानी की याद बरकरार थी भले ही वह मोटी हो गई थी लेकिन अभी भी वह आकर्सक थी,,,। हलवाई की बीवी की भी हसरते जागने लगी थी उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि गांव के बाहर वह इस घर में एक जवान लड़के के साथ अकेली थी और वह भी ऐसे लड़के के साथ जो कि खुद उस में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा था ऐसे हालात में हलवाई की बीवी के तन बदन में आग लग रही थी और उसका मन बहक रहा था और वैसे भी वह आज घर में अकेली ही थी,,, काफी दिनों से उसकी बुर में अच्छी तरह से लंड नही घुसा था,, इसलिए आज रघु के मोटे तगड़े लंड को देखकर उसकी बुर में खुजली होने लगी थी। हलवाई की बीवी मन में बहुत कुछ सोच रही थी,,उसके मन में बार-बार यह ख्याल आ रहा था कि क्यों ना आज की रात अपनी पति की गैरमौजूदगी में इस मौके का फायदा उठा लिया जाए।
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