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Adultery गर्म सिसकारी

रघु की जिंदगी की सबसे बेहतरीन रात गुजर चुकी थी,,,। आज की रात के बाद से उसकी जिंदगी की नई शुरुआत हो रही थी इस रात ने रघु को एकदम से बदल कर रख दिया था,,, उसके सोचने समझने का तरीका एकदम से बदल गया था,,,। जिंदगी में पहली बार वह औरत के बदन के हर एक पन्ने को अपने हाथ से एक-एक करके खोल कर उनका अध्ययन जो कर चुका था स्कूल की किताबों से शायद उसका कोई वास्ता नहीं था लेकिन औरत के जिस्मानी शब्दों को वह भली-भांति समझ गया था,,, रघु काफी खुश नजर आ रहा था वह अपने खेतों में इधर से उधर घूम रहा था,,, हालांकि अभी भी वह अपने घर नहीं गया था,,।

हलवाई की बीवी ने अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन और संतुष्टि भरी रात गुजारी थी,, जिसकी कसक अभी तक उसके बदन में महसूस हो रही थी,,। रघु के एक-एक जबरदस्त धक्के को याद करके मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,। उसने कभी जिंदगी में नहीं सोची थी कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर उसे इस तरह से एक अद्भुत सुख का अनुभव होगा,,,। रघु के साथ रात गुजारने का उसे बिल्कुल भी मलाल नहीं था,,। भले ही वह अपने पति को धोखा दे चुकी थी लेकिन जिंदगी का बेहतरीन सुख उसने प्राप्त की थी,,,।

कजरी काफी परेशान थी सुबह हो चुकी थी लेकिन रघु का कहीं भी अता पता नहीं था,,,। उसके मन में बहुत घबराहट हो रही थी सालों में बार-बार रघु के बारे में कजरी से पूछना चाहे लेकिन कजरी बात को टाल ले गई आखिरकार उसके पास शालू को बताने लायक बात ही नहीं थी बताती भी तो क्या बताती कि उसका भाई उसे पेशाब करते हुए देख रहा था सोच कर ही उसे बहुत बुरा लग रहा था अगर वह यह बात अपनी बड़ी बेटी शालू से बताती तो वह उसके बारे में क्या सोचते हैं इसलिए वह बात को आई गई कर गई,,,। रघु के प्रति वह काफी चिंतित नजर आ रही थी इसलिए उसे खेतों पर जाने की इच्छा बिल्कुल भी नहीं हो रही थी लेकिन जानवरों के चारे के लिए घास तो लाना ही था। इसलिए इच्छा ना होने के बावजूद भी वह खेतों की तरफ निकल गई,,,

अरे कजरी कहां जा रही है घास करने रुक जा मैं भी आती हूं,,,,( कजरी जैसे ही ललिया के घर के सामने से गुजरी वैसे ही पीछे से ललिया उसे आवाज देकर रोकने लगे क्योंकि उसे भी घास काटने जाना था वह जल्दी से घर में से टोकरी और घास काटने का औजार लेकर निकल पड़ी,,,। कजरी रघु के बारे में ही सोच रही थी इसलिए ललिया के इस तरह से आवाज देने के बावजूद वह उस पर गौर नहीं की और चलती रही और ललिया लगभग भागते हुए कजरी के करीब पहुंच गई और हांफते हुए बोली,,,।)

क्या हुआ कजरी तुम्हारी आवाज सुने नहीं क्या मैं तेरा इंतजार कर रही थी और तू है की भागी चली जा रही है,,।

नहीं कुछ नहीं बस थोड़ा सा तबीयत ठीक नहीं है,,,।

अरे क्या हुआ तेरी तबीयत को,,,( कजरी के माथे पर अपना हाथ लगाकर,,,।) बुखार तो बिल्कुल भी नहीं है,,,।

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है ललिया बस थोड़ा सा सर दर्द कर रहा था,,,।

तो तुझे घर पर आराम करना चाहिए था ना शालू को भेज दी होती,,,।

कोई बात नहीं मैं कर लूंगी,,,।

अच्छा रामू कहां है आज सुबह से नजर नहीं आया रघु के साथ तो नहीं है,,,

( कजरी जानबूझकर रामू के बारे में पूछ रही थी ताकि अगर रघु उसके साथ हो तो पता चल सके,,,।)

नहीं रामू तो सो रहा है,,,।

चल कोई बात नहीं ,,,,(इतना कहकर कजरी अपने कदम खेतों की तरफ बड़ा ही चली जा रही थी और साथ में ललिया भी उसके साथ हो चली थी,,, कजरी का मन उदास था लेकिन मनके उदास होने के बावजूद भी वह अपनी चाल में उदास पन ला नहीं पा रही थीं,,,, उसकी चाल मतवाली थी,,, उसकी मतवाली चाल पर उसके मन के उदासपन का बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ रहा था,,, कजरी के बदन का हर एक ऐसा निश्छल और चंचल था जिस पर किसी भी प्रकार का लगाम नहीं था इस तरह से कजरी की मद मस्त जवानी भरा संपूर्ण बदन बेलगाम था,, और शायद इसीलिए इस उम्र में भी कजरी के बदन के हर एक अंग से जवानी की मधुर धारा फूट पड़ती थी,,। यही कारण था कि इस समय आते जाते सबकी नजर कजरी की मद मस्त जवानी पर टिकी हुई थी,,, उसके नितंबों का उठाव और घेराव इतना जबरदस्त था कि ना चाहते हुए भी उस पर सब की नजर पड़ ही जाती थी और कजरी की चूचियां तो कमाल की थी मानो उच्च किस्म की बड़ी-बड़ी दशहरी आम उसके ब्लाउज में भर दी गई हो,,,, जिसे अपने हाथों में लेकर दबा दबा कर पीने का मन गांव के हर मर्द का करता था और उनका यह सपना भी था,,,,।

चिंताओं से घिरे होने के बावजूद भी कजरी की चाल में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आ रही थी,,, कच्ची सड़क पर चलते हुए वह दूर-दूर तक नजर घुमाकर रघु को ही तलाश कर रही थी,,। ललिया भी अपनी ही मस्ती में चली जा रही थी तभी उसका खेत आ गया और वह कच्ची सड़क से नीचे उतर गई,,, तकरीबन 20 30 कदम की दूरी पर कजरी का खेत था और वह भी कच्ची सड़क उतरकर अपने खेत में हरी हरी घास काटने के लिए उतर गई,,,,

वह टोकरी लेकर हरी हरी घास के बीच बैठ गई और घास काटने लगी लेकिन घास काटते समय भी वह अपनी नजरों को इधर-उधर दौड़ाकर रघु को देखने की कोशिश कर ले रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार रात भर से रघु गायब था कहां चला गया इस बारे में उसे बिल्कुल भी पता नहीं था,,,। वह अपने मन में सोचने लगी कि उसने अपने बेटे को इस तरह से डांट कर बहुत बड़ी गलती कर दी है कहीं कुछ हो गया तो वह अपनी ही नजरों में गिर जाएगी इस कल्पना से ही उसका दिल दहल उठा रहा था,,,। अपने मन को तसल्ली देते हुए अपने आप को ही बोल रही थी कि अगर वह देख भी लिया तो क्या हो गया,,,। इस तरह से तो कई लोग की नजर पड़ जाती होगी वह दुनिया में अकेला नहीं था जो अपनी मां को पेशाब करते हुए देख लिया था पैसे कहीं लड़के होंगे जो अपनी मां को जानबूझकर या अनजाने में पेशाब करते हुए देखे ही लेते होंगे या कपड़े पहनते हुए नहाते हुए किसी भी प्रकार से नग्न अवस्था में उनकी नजर पड़ी जाती होगी तो इसका मतलब यह तो नहीं कि अपने ही बेटे को इस तरह से डांट फटकार कर घर से निकाल दिया जाए,,,,। नहीं नहीं अब वह आ गया तो मैं उससे माफी मांग लूंगी और ऐसी गलती दोबारा मुझसे नहीं होगी यह भी कह कर उसे मना लूंगी आखिर वह मेरा राजा बेटा है उसी का तो सहारा है,,,। कजरी यही सब अपने आप से बातें करते हुए अपने मन को तसल्ली दे रही थी कि तभी रघु नदी की तरफ से उसे आता हुआ नजर आया,,,, और वह रघु को देखते ही खुश हो गई और जोर जोर से रखो को आवाज देने लगी,,,, रघु भी अपनी मां की आवाज को सुन रहा था वह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके बिना नहीं रह सकती और वह भी अपनी मां के बिना नहीं रह सकता था आखिरकार गुस्सा कर कितने दिन वह दूर रह सकता है एक न एक दिन तो उसे लौटकर घर पर आना ही था,,,, लेकिन वह यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसकी मां उसे डांट फटकार कर दूर नहीं भगाई होती तो कल की रात वह हलवाई की बीवी के खूबसूरत बदन से खेलते हुए उसकी चुदाई नहीं कर पाता,,, आखिरकार उसे यह बात अच्छी तरह से समझ में आ रही थी कि मां की डांट फटकार भी बच्चे के लिए फायदेमंद होती है,,,। और यह देख भी लिया था कि उसकी मां की डांट फटकार उसके लिए आशीर्वाद साबित हुई थी वरना वह अपनी जवानी का खाता ना खुलवा चुका होता,,।

अभी भी कजरी उसे आवाज देकर बुला रही थी और रघु उसकी तरफ आगे बढ़ता चला जा रहा था लेकिन जैसे-जैसे अपनी मां की तरफ आगे बढ़ता चला जा रहा था वैसे वैसे उसके जेहन में बसा वह दृश्य उसके मन मस्तिष्क पर उधर ने लगा था,,,,। हलवाई की बीवी के साथ पहली बार संभोग सुख भोगने के बाद से उसका नजरिया हर औरत के लिए बदलने लगा था,,, वैसे तो पहले भी उसका यही हाल था लेकिन जब से वह हलवाई की बीवी के नंगे बदन को देखकर उसके नंगे बदन के हर एक अंग से खेल कर उसकी चुदाई किया था तब से अब हर औरत के प्रति उसका नजरिया बदलता जा रहा था इसलिए तो वह जैसे जैसे अपनी मां के करीब बढ़ता जा रहा था जैसे वैसे उसकी आंखों के सामने,,, उसकी मां की नंगी गांड और उसकी बुर में से निकलती हुई पेशाब की तेज धार नजर आने लगी थी और यह दृश्य उसके मन में उभरते ही उसके लंड का तनाव बढ़ना शुरू हो गया था,,, बार-बार वह अपने मन को दूसरी तरफ भटकाने की कोशिश कर रहा था लेकिन ऐसा उसके लिए शायद मुमकिन नहीं हो पा रहा था,,,, पहली बार में ही वह अपनी मां की नंगी गांड के आकर्षण में पूरी तरह से बंध चुका था।

वह धीरे-धीरे खेतों में खड़ी अपनी मां के करीब पहुंच गया और उसकी मां एक पल की भी देरी किए बिना उसे अपने गले से लगा ली,,,,,। पल पल भर में ही उसके पूरे चेहरे पर चुंबनों की बारिश कर दी,,, हलवाई की बीवी के नंगे बदन का मजा चख चुका रघु अपनी मां के इस तरह से चुंबन लेने पर पल भर में ही पूरी तरह से उत्तेजित हो गया,,,, एक पल के लिए तो उसके जी में आया कि वह भी अपनी मां को बाहों में लेकर उसे चुंबन से नहला दे और उसकी गदर आई जवानी को खेतों में लेटा कर निचोड़ ले,,,,। लेकिन अभी इतनी हिम्मत उसके में नहीं थी कि वह इस तरह की मनमानी अपनी मां के साथ कर सके वह बूत बना अपनी मां के चुंबन होता मजा ले रहा था और चुंबनो के बाद कजरी उसे अपने गले से अपने सीने से लगा ली,,,, कजरी के सीने से लगते ही रघु के तन बदन में शोले भड़क में लगे उसका पूरा वजूद उत्तेजना की लहर में कांप गया,,,, क्योंकि जिस तरह से कजरी ने उसे अपने सीने से भींचते हुए गले लगाई थी,,, उससे कजरी की भारी-भरकम चूचियां रघु के सीने से रगड़ खा रही थी और उसकी तनी हुई निप्पल उसके सीने में चुप रही थी जिसकी चुभन को वह अच्छी तरह से अपनी छातियों पर महसूस कर रहा था,,,, उत्तेजना के बारे में पूरी तरह से गनगना गया था,,,, पर अपनी मां की इस हरकत की वजह से उसे अपने पजामे में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा होता हुआ महसूस हो रहा था,,, और उसे यह भी साथ महसूस हो रहा था कि उसके भेजा मैंने उसका खड़ा लंड तंबू की शक्ल लेकर उसकी मां की टांगों के बीच ठीक उसकी बुर वाली जगह पर ठोकर मार रहा था,,,। उसे इस बात का पता तो नहीं था कि उसकी मां को उसके तंबू के कठोर पन का एहसास अपनी बुर पर हो रहा है कि नहीं लेकिन,,, इतने से ही रघु का पूरा वजूद हिल गया था उसका ईमान डोल ने लगा था,,,,। कजरी अभी भी रघु को अपने गले से लगाए उसे दुलार कर रही थी,,, व खेतों के बीचो बीच खड़ी थी लेकिन लंबी लंबी जंगली झाड़ियां होने की वजह से,, उन दोनों को कोई भी नहीं देख पा रहा था रघु तो एकदम मस्त हुआ जा रहा था वाशी तरह से समझ गया था कि औरत की चुदाई का सुख क्या होता है तभी तो वह अपनी मां के खूबसूरत बदन के आकर्षण में पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था उसे बराबर महसूस हो रहा था कि उसके पेंट में बना तंबू उसकी मां की टांग के बीच उसकी गुरु पर ही दस्तक दे रही है लेकिन अपने बेटे को दुलार करने में कजरी को शायद इस बात का अहसास तक नहीं हो पा रहा था कि उसके गुप्तांगों को उसके बेटे का गुप्त अंग स्पर्श कर रहा है एक तरह से कपड़ों के ऊपर से ही शुभम का मोटा तगड़ा लंड अपनी मां की कसी हुई बुर का चुंबन कर रहा था,,,,।

रघु पूरी तरह से उत्तेजना के आवेश में आ चुका था और वह भी अपने हाथ को अपनी मां की पीठ पर रखकर अपना प्यार दर्शा रहा था,,,,।

कहां चला गया था बेटा तू तुझे देखने के लिए मेरी आंखें तरस गई थी,,,( कजरी अपने बेटे को पाकर एकदम से रोते हुए बोली,,,।)

यही था मां तु मुझसे नाराज थी ना इसलिए,,,,( इतना कहते हुए रघु अपनी मां की पीठ पर अपनी हथेली को फेर रहा था,,,।)

अगर आज तो नहीं आता बेटा तुम्हें मर जाते मैं तुझसे बिछड़ना नहीं चाहते मैं तुझसे गुस्से में बोल गई थी इसका मतलब यह नहीं था कि तू मुझसे दूर चला जाए,,,,।

नहीं मम्मी कहीं नहीं जाऊंगा तुझे छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा,,,,( रघु पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था वह अपनी मां को बाहों में समाया हुआ था,,,, उसके तन बदन को उसकी मां की खूबसूरत बदन से उठती हुई मादक खुशबू बेहाल कर रही थी,,,,।)

मुझसे वादा कर रघु तु मुझे छोड़कर कभी नहीं जाएगा भले मैं तुझे कितना भी डाटु या मारु तुम मुझे छोड़कर कहीं नहीं जाएगा,,,,,( इतना कहते हुए कजरी लगातार रोए जा रही थी और दूसरी तरफ रघु पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा,,, था,,,)

मैं कहीं नहीं जाऊंगा मैं तुमसे वादा करता हूं कहीं नहीं जाऊंगा,,,,( इतना कहते हुए रघु पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और वह अपने दोनों हथेली को अपनी मां की चिकनी कमर से होता हुआ उसे नीचे की तरफ उसके नितंबों के उभार पर ले गया और उसे अपने हथेली में भरकर हल्के से दबाता हुआ अपनी तरफ खींच लिया जिससे इस बार उसके लंड की ठोकर कजरी को अपनी बुर की नर्म दीवारों पर एकदम बराबर महसूस हुई और वह एकदम से सकते में आ गई,,, रघु पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और अपनी मां को कहीं ना जाने का दिलासा देते हुए एक बार फिर से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली में लेकर उसे दबाता हुआ फिर से अपनी तरफ खींच लीया,,,। इस बार कजरी एकदम से घबरा गई क्योंकि अपनी दूर पर लगने वाली ठोकर को वह समझ नहीं पाई थी कि यह चुभन कैसा है,,, लेकिन दूसरी बार जब रघु ने उसके नितंबों को अपनी हथेली में दबोच ते हुए अपनी तरफ खींचा तब जाकर उसे साफ महसूस हुआ कि उसकी टांगों के बीच होने वाली चुभन किसी और चीज की नहीं बल्कि उसके बेटे के खड़े लंड की है,,,,। पल भर में ही कजरी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी शर्म के मारे उसका चेहरा लाल हो गया,,,, वह अपने आप को अपने बेटे की बाहों से अलग करते हुए बोली,,,।)

रघु तू पहले घर पर जाकर नहा ले और खाना खा ले कल से तू कुछ नहीं खाया नहीं है,,,।

नहीं मां मैं तुम्हारे साथ चलूंगा मैं भी कुछ देर यही काम कर लेता हूं,,,।

नहीं रघु तू मेरी बात मान पहले जाकर के अच्छे से नहा ले खाना खाकर फिर मेरे लिए भी तू खाना लेकर आ जाना तब तक मैं यही हुं।

रघु घर जाने के लिए तैयार हो गया,,, वैसे उसे भूख भी लगी थी,,,,
 
वह घर की तरफ निकल गया आज पहली बार हुआ है अपनी मां के नितंबों पर हाथ लगाया था जिसकी गर्माहट का अहसास उसे अभी तक अपने हथेली के साथ-साथ संपूर्ण बदन में हो रहा था,,, और तो और पहली बार उसके पेंट में बना तंबू उसकी मां की टांगों के बीच की मखमली बुर के ऊपर ठोकर लगाई थी जिसकी वजह से वह अपने तन बदन में अत्याधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसे यह तो पता नहीं चला कि उसकी मां को इस बात का एहसास हुआ कि नहीं लेकिन इतने में ही उसे पूरी तरह से मस्ती छा गई थी,,,। इतना तो रखो समझ ही गया था कि हलवाई की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड से उसकी मां की गांड छोटी ही थी,,, लेकिन बेहद भरावदार और सुडोल थी,,, एक खूबसूरत और भरे हुए बदन की औरत के पास जिस तरह की मदमस्त गांड होनी चाहिए थी ठीक वैसे ही गांड उसकी मां के पास थी जिसकी वजह से रघु पूरी तरह से लालायित हो गया था अपनी मां की नंगी गांड को देखने के लिए लेकिन शायद अब यह बिल्कुल मुमकिन नहीं था,,,। इतना उसके लिए काफी था कि आज गले मिलने के बहाने ही सही वह अपनी मां के नितंबों को साड़ी के ऊपर से स्पर्श तो कर पाया था,,, साथ ही उसकी नरम नरम खरबूजे जैसी चूचियों की चुभन को अपने सीने पर महसूस भी किया था,,,।

कजरी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि पल भर में ही यह क्या हो गया जिस तरह की चुभन वह अपनी मखमली बुर के ऊपर महसूस की थी क्या सच में उसके बेटे का लंड बेहद तगड़ा है,,,। क्या रघु ने अपनी हथेली को जानबूझकर उसकी गांड पर रखकर दबाया था या अनजाने में हो गया था,,, कजरी यही सब अपने मन में सोच रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि रघु की हरकत का क्या निष्कर्ष निकाला जाए,,। कजरी को अच्छा तो नहीं लग रहा था रघु के द्वारा इस तरह की हरकत करना लेकिन जो कुछ भी हुआ था ना जाने क्यों उसके तन बदन में आग सी लग गई थी,,,। वह अपने बेटे को दुलार करते हुए गले से तो लगाई थी लेकिन उसके बाद जिस तरह की हरकत रघु ने किया था वह उसे सोचने पर मजबूर कर गया था क्योंकि एक तरह से रघु उसे अपनी बाहों में भर लिया था और अपनी हथेली को उसके संपूर्ण बदन पर इधर से उधर घुमा भी रहा था और दुलार करते समय ना जाने कब उसकी हथेली उसकी बड़ी बड़ी गांड पर आ गई यह उसे पता भी नहीं चला लेकिन अगर यह सब अनजाने में हुआ तो रघु ने उसके नितंबों पर अपनी हथेली का दबाव बनाकर अपनी तरफ क्यों खींचा और तो और वह अपनी टांगों के बीच की चुभन को बराबर महसूस की थी और अच्छी तरह से समझ रही थी कि वह कठोर चीज उसकी मखमली द्वार पर ठोकर मारने वाली कौन सी चीज थी कजरी अच्छी तरह से जानती थी की साड़ी के ऊपर से भी एकदम बराबर अपनी ठोकर को महसूस कराने वाली चीज उसके बेटे का खड़ा लंड था,,, पर एक औरत होने के नाते वह यह बात भी अच्छी तरह से जानती थी कि एक मर्द का लंड कब और किस कारण से खड़ा होता है और यही बात समझ में नहीं पा रही थी कि क्या वाकई में उसका बेटा उसके गले लगते ही पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था जो उसका लैंड खड़ा हो गया और उसी उत्तेजना बसवा उसके नितंबों को पकड़कर अपनी तरफ खींचा था नहीं नहीं यह गलत है मेरा बेटा ऐसा नहीं हो सकता यह सब अनजाने में हुआ था,,, और कजरी अपने मन को झूठी दिलासा देते हुए उस और से अपना ध्यान हटाकर काम में लगा दी और वापस घास काटने लगी,,,

दूसरी तरफ रघु घर पर पहुंच चुका था उसे बहुत जोरों की भूख लगी थी,,,। नहाने से पहले वह खाना खा लेना चाहता था,,,। इसलिए वह अपनी बहन को ढूंढता हुआ अंदर के कमरे में जा पहुंचा,,, जहां पर कजरी अपने ही मस्ती में मगन होकर अपने गीले बालों को कंघी से सवार रही थी,,,। और दरवाजे पर पहुंच कर रघु के पांव वहीं के वहीं जम गए और वह अपनी बहन को आंख फाड़े देखता ही रह गया,,,, क्या करें सामने का नजारा ही कुछ इतना जबरदस्त और गर्म था कि वह अपनी नजरों को हटा नहीं पाया वैसे तो सालों के लिए बेहद औपचारिक ही था लेकिन जवान हो रहे रघु के लिए पूरी तरह से उत्तेजना से भर देने वाला दृश्य था क्योंकि अभी अभी शालू नहाकर घर में आई थी और सिर्फ अपने बदन पर कुर्ती ही पहन रखी थी बाकी नीचे सलवार नहीं पहनी थी नीचे से वह पूरी तरह से नंगी थी और कुर्ती भी उसकी कमर से बस 2 इंच तक ही आती थी जिससे शालू के समस्त नितंबों का भूगोल रघु की आंखों के सामने उजागर हो रहा था,,। क्योंकि शालू की पीठ रघु की तरफ थी रघु तो अपनी बहन की मदमस्त गोरी गोरी गांड और उसकी चिकनी लंबी टांगों को देखकर एकदम मस्त हो गया वह भी भूल गया कि उसकी आंखों के सामने कोई दूसरी लड़की नहीं बल्कि उसकी बड़ी बहन है,,,। लेकिन यह आखों को कहा पता चलता है कि सामने अर्धनग्न अवस्था में कौन है बस उसे तो अपने अंदर गर्माहट महसूस करने से ही मतलब रहता है और वही हो भी रहा था,,,।

हलवाई की बीवी की चुदाई के बाद उसे रघु का नजरिया एकदम से बदल गया था वरना वह इस तरह से आंख पानी अपनी बहन को अर्धनग्न अवस्था में नहीं देखता रहता बल्कि वहां से चला जाता,,। वैसे भी कुछ देर पहले ही वह अपनी मां के गले लग कर उसके नितंबों को अपनी हथेली में दबा दिया था जिसकी गर्माहट को वह अभी तक अपने तन बदन में महसूस कर रहा था। उस पल की सनसनाहट अभी तक उसके बदन से दूर हुई नहीं थी कि उसकी आंखों के सामने एक बार फिर से बेहद गर्म नजारा देखते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,।

आज पहली बार वह अपनी बहन को इस अवस्था में देख रहा था पूरा जाकर पता चला था कि उसकी बहन कितनी खूबसूरत और मादक जिस्म की मालकिन है,,,। अपनी बहन की गोरी गोरी गांड और उसकी बीच की गहरी फांक को देखकर पूरी तरह से मदहोश होने लगा,,,। उसकी चीन में तो आ रहा था कि कमरे में जाकर पीछे से अपनी बहन को अपनी बाहों में भर ले और अपना खड़ा लैंड उसकी मुंह में डालकर उसकी चुदाई कर दे क्योंकि एक बार हलवाई की बीवी की चुदाई करके उसे अब पता चल गया था कि औरत को कैसे चोदा जाता है और उन्हें कैसे खुश किया जाता है लेकिन अभी वह अपनी बहन के साथ यह नहीं कर सकता था हालांकि करने का मन करने लगा था,,,।

तभी अपनी ही मस्ती में बालों को संभाल रही सालू को इस बात का एहसास हुआ कि उसके पीछे कोई खड़ा है तो वह पीछे नजर घुमा कर देखी तो दरवाजे पर रघु खड़ा था और उसे देखते ही वह पूरी तरह से हड़बड़ा गई और अपने नंगे बदन को ढकने की कोशिश करने लगी,,, तभी बिस्तर पर से चादर को खींचकर व अपने नंगे तन को छुपा ली,,,,। अपनी बहन की हड़बड़ाहट देखकर रघु समझ गया कि ज्यादा देर तक खड़ा रहना ठीक नहीं है इसलिए वह वहां से वापस लौटते हुए बोला,,,।

दीदी जल्दी से खाना निकाल दो मैं नहा कर आता हूं और मां के लिए खाना भी ले जाना है,,,। ( इतना कह कर रघु नहाने के लिए चला गया और शालू जल्दी से अपनी सलवार ढूंढ कर उसे पहन ली,,,। उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह भी पहली बार अपने छोटे भाई की आंखों के सामने इस अवस्था में खड़ी थी उसे इस बात का एहसास तो हो ही गया था कि जिस तरह से वह दरवाजे की तरफ पीठ करके अपने बालों को संभाल रही थी उसका भाई जरूर उसकी गोरी गोरी गांड को देख ही लिया होगा,,, और यह एहसास उसके तन बदन को पूरी तरह से झकझोर गया,,,। आईने में अपनी शक्ल को देखकर वह शरमा गई,,,। लेकिन तभी उसे वह पल याद आ गया जब वह अपने भाई को जगाने के लिए उसके कमरे में गई थी और उसका भाई बेसुध होकर सो रहा था जिसकी वजह से उसका लंड बाहर निकल कर पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था और उसके खड़े मोटे तगड़े लंड को देखकर शालू के तन बदन में आग लग गई थी,,,,। उस पल के बारे में सोच कर शालू को ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके भाई ने उस दिन वाली बात का उससे बदला ले लिया हो उस दिन उसने उसके नंगे लंड को देखी थी और आज वह उसकी नंगी गांड को देख लिया था,,

थोड़ी ही देर में शालू रसोई के पास आकर अपने भाई के लिए खाना परोस कर वहीं बैठी रही और रघु नहाने के लिए लकड़ी के बने झुग्गी जैसे स्नानघर में घुस गया था अंदर पहले से ही दो बाल्टी पानी भर के रखा हुआ था,,। रात भर हलवाई की बीवी की चुदाई और सुबह अपनी मां के नितंबों का गर्माहट भरा स्पर्श और घर में अपनी बहन की मदमस्त नंगी गांड को देख कर रघु पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और स्नान घर में घुसते ही वह अपने सारे कपड़े उतार कर अपनी खड़े लंड पर साबुन लगा कर ऊसे हिलाना शुरू कर दिया था,,,,। और अपने लंड को हिलाते हुए रघु रात भर और अभी तक के सारे दृश्य के बारे में सोचने लगा था बार-बार उसकी आंखों के सामने हलवाई की बीवी का नंगा बदन उसकी मां की बड़ी-बड़ी नितंब और शालू की गोरी गोरी गाना नजर आ रही थी जिसमें कल्पना करते हुए बारी-बारी से अपना लंड पल रहा था काफी उत्तेजना का अनुभव करते हुए थोड़ी ही देर में रघु के लंड ने पानी का फव्वारा फेंक दिया,,,, अपनी गर्मी शांत करते हुए वह जल्दी से नहा कर स्नान घर से बाहर आ गया।

जल्दी से कपड़े पहन करवा खाने के लिए बैठ गया,,, और उसके खाना खाने के लिए बैठते ही शर्म के मारे शालू वहां से उठकर अंदर कमरे में चली गई,,,, अपने भाई के द्वारा अपनी नंगी गांड देखे जाने की वजह से उसके तन बदलने में तेज ना की लहर दौड़ रही थी शर्मिंदगी का अहसास तो हो ही रहा था लेकिन साथ में उत्तेजना की आगोश में वह अपने आप को पूरी तरह से डुबोती चली जा रही थी,,,।

थोड़ी ही देर में रघु ने खाना खा लिया और शालू को आवाज देते हुए बोला,,,।

दीदी जल्दी से मां के लिए खाना बांध दो मुझे खेतों पर जाना है,,,।

( इतना सुनते ही शालू अंदर से निकलकर बाहर रसोई के पास आई और अपनी मां के लिए रोटी सब्जी और प्याज काट कर रखने लगी,,, शालू अपने भाई से नजर नहीं मिला पा रही थी उसे बहुत ज्यादा शर्मिंदगी का अहसास हो रहा था लेकिन फिर भी वह अपनी मां के लिए खाना बांधते हुए रघु की तरफ देखे बिना ही बोली,,,,)

रात भर कहां गया था तुझे मालूम है मां कितनी परेशान हो रही थी,,,।

कहीं नहीं दीदी बस दोस्तों के साथ था,,,। ज्यादा रात हो गई तो उन्हीं के घर सो गया,,,,।

कहीं भी जाया कर तो मां को बता कर जाया कर,,, ले जल्दी से खेतों पर जाना वरना मां भूखी रह जाएगी,,,( रघु को खाने की पोटली थमाते हुए शालू बोली,,,)

ठीक है दीदी तुम चिंता मत करो मैं समय पर खेत पर पहुंच जाऊंगा,,,,( इतना कहते हुए रघु खाने की पोटली को हाथ में लेकर खड़ा हुआ और जाते-जाते बोला) दीदी कुछ देर पहले जो कुछ भी हुआ उसे मां से मत बताना मैं अनजाने में दरवाजे पर पहुंच गया था मुझे मालूम नहीं था कि तुम कपड़े नहीं पहनी हो,,,,( रघु के मुंह से यह बात सुनते ही वह एकदम से झेंप गई लेकिन फिर अपने आप को संभालते हुए बोली,,,)

मैं जानती हूं जो कुछ भी हुआ वह गलती से हुआ इस में तेरी कोई गलती नहीं है इसलिए तू जा मैं मां से कुछ नहीं कहूंगी,,,,( शालू की बात सुनते ही रखो मुस्कुराते हुए घर से बाहर चला गया और सालू वहीं खड़ी तब तक उसे देखती रही जब तक कि वह आंखों से ओझल नहीं हो गया,,, वह खड़ी खड़ी यही सोच रही थी कि क्या सच में यह सब अनजाने में हुआ था क्या रखूं सच में अनजाने में ही दरवाजे तक आ गया था लेकिन अगर अनजाने में हुआ था तो वह तुरंत चला क्यों नहीं किया खड़े होकर देख क्यों रहा था,,,। रघु कि मुझे अभी की बात सुनकर और कुछ देर पहले की हरकत को देख कर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या समझे क्या फैसला ले,,,, शालू भी यह सब अनजाने में हुआ होगा ऐसा झूठी दिलासा आपने आपको देकर काम में व्यस्त हो गई,,,। रघु कल रात से लेकर के अबतक के वाकए के बारे में सोचता हुआ चला जा रहा था,,,, उसे एहसास होने लगा था कि किस्मत उसके ऊपर पूरी तरह से मेहरबान हो चुकी थी,,,, कल रात से ही उसके साथ वह सब हो रहा था जिसके बारे में वह सिर्फ कल्पना ही कर पा रहा था,,, कल रात से क्यों दोपहर से ही जब से वह अपनी मां को पेशाब करते हुए देखा था तब से उसकी जिंदगी में सब कुछ बदलता चला जा रहा था अगर वह अपनी मां को पेशाब करते हुए ना देखता तो उसकी मां यह देख कर उस पर डांट फटकार ना लगाते और उस डांट फटकार को दिल पर ले कर रघु घर से दूर गांव के किनारे रात को नहीं रुकता और वहां रघु नहीं रुकता तो हलवाई की बीवी उसे घर में नहीं बुलाती और हलवाई की बीवी के साथ जिंदगी में पहली बार संभोग सुख का सुख नहीं भोग पाता,,,, फिर सुबह उसकी मां परेशान होकर उसे गले नहीं लगाती और ना ही फिर रघु अपनी मां के भारी-भरकम नितंबों को अपनी हथेली से स्पर्श कर पाता,,,, और ना ही वह घर पर खाना खाने के लिए जाता और ना ही किस्मत के जोर पर चलती वह अपनी खूबसूरत बहन की खूबसूरत गांड के दर्शन कर पाता यही सब सोचकर वह मस्त हुआ जा रहा था और अपनी किस्मत पर इठला भी रहा था,,,, लेकिन फिर भी वह अपने मन में यही सोच रहा था कि उसे बहुत सोच समझ कर आगे कदम बढ़ाना है कोई जल्दबाजी नहीं दिखानी है वरना कहीं खेत में जिस तरह से उसकी मां उसे गले लगाई थी और वह उसी का फायदा उठाते हुए उसके नितंबों को अपनी हथेली से स्पर्श करके अपनी तरफ खींच कर उसकी जवानी को अपने अंदर समाने की कोशिश किया था अगर फिर से वह गलती करेगा तो उसकी मां हो सकता है फिर से उसे घर से निकाल दे उस पर नाराज हो जाए ओर ऐसा रघु बिल्कुल भी नहीं चाहता था,,,।

थोड़ी ही देर में खाना लेकर रघु खेतों पर पहुंच गया उसकी मां अभी भी खेतों के बीच बैठकर बड़ी-बड़ी घास को काट रही थी सूरज एकदम सर पर तप रहा था,,,। और कजरी की नजर जैसे ही रघु पर पड़ी एक बार फिर से उसके तन बदन में हलचल होने लगी,,, क्योंकि रघु को देखते ही कुछ देर पहले का वाकया उसे याद आ गया,,,। शर्मिंदगी का अहसास उसे अंदर तक हो रहा था इसलिए वह अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी,,,। रघु भी अब थोड़ा सा अपनी मां से कन्नी काट रहा था क्योंकि वह अपनी मां को एहसास नहीं होने देना चाहता था कि जो कुछ भी हुआ था वह जानबूझकर हुआ था वह यही दिखाना चाहता था कि गले लगते समय जो भी हरकत उसकी तरफ से हुई थी वह अनजाने में हुई थी इसलिए वह एकदम सहज बना रहा,,,।

मां खाना खा लो नहीं तो खाना ठंडा हो जाएगा और धूप भी बहुत है थोड़ी देर आराम कर लो,,,,। ( इतना कहते हुए वह भी खेतों के बीचो बीच पहुंच गया जहां पर उसकी मां घास काट कर घास का ढेर लगा चुकी थी,,, कजरी भी थक चुकी थी इसलिए अपने बेटे की बात मानते हुए खाना खाने के लिए तैयार हो गई,,,, पास में ही खेतों मैं पानी जाने के लिए मेड बनाई गई थी उसमें से एक दम साफ पानी बह रहा था जिसमें कजरी हाथ धोकर पेड़ की छांव के नीचे आ गई,,,। खाली की पोटली रघु अपनी मां को थमा कर वहीं खड़ा हो गया और कजरी नीचे बैठकर खाने की पोटली खोलते हुए बोली,,,।

रघु जाकर ललिया को बुला दे तो पास में अपने खेतों में वह भी घास काट रही हैं अगर वह भी दो रोटी खा लेगी तो उसे भी थोड़ा सुकून मिल जाएगा,,,।

ठीक है मां मैं अभी बुला कर लाता हूं,,,,( इतना कहकर रघु पास वाले खेत में चला गया जहां पर ललिया भी घास काट रही थी,,,)

चाची चलो खाना खा लो मां बुला रही है,,,।

मैं अभी घर नहीं जाऊंगी रघु काम खत्म करने के बाद ही जाऊंगी,,,।

अरे घर नहीं जाना है मैं खाना लेकर आया हूं चलो खा लो,,,

यह तो तूने बहुत अच्छा काम किया मुझे भी बहुत जोरों की भूख लगी है,,।

तो चलो जल्दी चल कर खा लो,,,,

तू चल मैं आती हूं,,,

( रघु चला गया और उसके पीछे पीछे थोड़ी ही देर में ललिया भी वही पहुंच गई,,, तीनों आपके घने पेड़ के नीचे बैठे हुए थे और कजरी रोटी और सब्जी ललिया को भी दे रहे थे रघु घर से खाना खाकर आया था,,,, दोनों खाना खाने लगी तो रघु पानी लेने के लिए चला गया जो कि पास में ही हेडपंप बना हुआ था,,,,। गर्मी बड़े जोरों की पड़ रही थी फिर तुम के करीब पहुंचकर रघु हेंडपंप चलाकर पहले खुद पानी पीकर अपनी प्यास बुझा लिया,,,, तो फिर बर्तन में पानी भरने लगा,,, पानी लेकर जब रघु पेड़ के नीचे पहुंचा दो ललिया निश्चिंत होकर रोटी सब्जी खा रही थी वह एक टांग मोड कर रिप्लाई फैलाकर बैठी हुई थी जिसकी वजह से उसकी साड़ी पेटीकोट सहित उसके घुटनों के ऊपर तक चढ गई थी,,,,। जिसकी वजह से उसकी गोरी गोरी मांसल पिंडलिया साफ नजर आ रही थी पर यह देख कर रघु का मन ललिया के ऊपर डोलने लगा,,,। वह चोर नजरों से बार-बार ललिया की चिकनी टांग को देख ले रहा था,,, और ललिया काम में इतना मशगूल होकर घास की कटाई कर रही थी कि उसके ब्लाउज का एक बटन खुला हुआ है इसका उसे आभास तक नहीं था,,, जिसमें से उसकी गदराई चूचियां नजर आ रही थी,,,, जो देखते ही रघु एकदम से मस्त होने लगा लेकिन वह अपनी नजरें अपनी मां और ललिया दोनों से बचाकर चोरी-छिपे इस नजारे का आनंद ले रहा था,,,, घुटनों तक की खुली नंगी चिकनी टांग देखकर रखो मन में यही कल्पना कर रहा था कि ललिया के दलों के बीच भी हलवाई की बीवी की तरह रसीली बुर होगी,,, और यह ख्याल मन में आते ही रघु के पजामे में उसका लंड हिलोरे लेने लगा,,, लेकिन रघु नहीं चाहता था कि उसके पेंट में बना तंबू उसकी मां और ललिया देखें इसलिए वह वहीं पर बैठ गया,,,।

थोड़ी ही देर में दोनों खाना खा चुके थे धूप बड़ी तेज थी गर्मी का महीना होने की वजह से इस तरह की धूप में काम करना मुमकिन नहीं था,,,। इसलिए रघु उन दोनों से बोला,,,।

तुम दोनों खाना खा चुके हैं इसलिए आराम कर लो तो अच्छा होगा,,, और इस पेड़ के नीचे आराम करना ठीक रहेगा,,,।

तो सही कह रहा है रघु हम दोनों इतनी धूप में काम करके थक चुके हैं और खाना खाने के बाद आराम करना भी जरूरी है इसलिए हम दोनों यहीं आराम कर लेते हैं थोड़ी देर,,,। ( ललिया कजरी की तरफ देखते हुए बोली जिस में दोनों की सहमति थी इसलिए दोनों आराम करने लगे और रघु इधर-उधर घूमने लगा,,, इधर-उधर घूमते हुए थोड़ा दूर निकल गया तो उसे वहां रामू मिल गया और उसे देखते ही रामू बोला,,,।)

कल तू कहां चला गया था,,,, ना घर पर मैं खेतों में कहीं दिखा ही नहीं,,,,।

हां कल जरूरी काम था मुझे एक रिश्तेदार के घर जाना था इसलिए कल मैं घर पर नहीं मिला,,,। और बता क्या चल रहा है,,,। धीरे-धीरे तेरी बहने तो बहुत खूबसूरत होती जा रही है,,,,।

देख रघु तू ऐसी बातें मत किया कर मुझे गुस्सा आ जाता है,,,।

रामू तू पागल हो गया है मैं तो सिर्फ सच कहता हूं तुझे बुरा लग जाता है सच बताना क्या तेरी बहने खूबसूरत नहीं है,,,।

( रघु की यह बात सुनकर रामू कुछ बोल नहीं पाया,,,।) और तो और रामू तेरी बहन को तो छोड़ो तेरी मां कितनी खूबसूरत है अभी अभी देख कर आया हूं,,,।

क्या क्या क्या देख कर आया है रघु तो देख उल्टी-सीधी बातें मत किया करो वरना तेरी और मेरी दोस्ती टूट जाएगी,,,।

अरे पागल जो मैं कहता हूं वह सच कहता हूं अभी अभी देख कर आ रहा हूं तेरी मां और मेरी मां दोनों साथ बैठकर खाना खा रही थी,,,।

कहां खाना खा रही थी,,,?

अरे खेतों में मैं ही तो खाना लाया था दोनों के लिए,,,, सच यार रामू तेरी मां बेफिक्र होकर जिस तरह से एक टांग मोड़ कर बेफिक्र होकर खाना खा रही थी ना तेरी मां की साड़ी घुटनों तक चड़ गई थी जिसकी वजह से तेरी मा की चिकनी चिकनी टांगें मुझे नजर आ रही थी,,, मैं तो देख कर एक दम मस्त हो गया यार रामू मेरा तो मन कर रहा था कि तेरी मां की साड़ी कमर तक उठाकर दोनों टांगें फैलाकर अपना लंड तेरी मां की बुर में डालकर चोद दु,,, लेकिन पता नहीं तेरी मां तैयार होगी कि नहीं,,,, अच्छा तू बता रामू अगर में तेरी मां को चोद ना चाहु तो क्या तेरी मां मुझसे चुदवाएगी,,,

( रघु की बात सुनकर रामू कुछ बोल नहीं रहा था बस गुस्से में उसे देखता जा रहा था,,,।)

देख रहा हूं यह सब अच्छी बात नहीं है मैं अपनी मां से बता दूंगा,,,,।

यार तू नाराज क्यों होता है तू तो मेरा दोस्त है और दोस्त की मां पर इतना तो हक बनता ही है,,,। ( इतना कहते हुए रघु उसके कंधे पर हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचकर उसे मनाने की कोशिश करने लगा और रघु यह बात अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह की गंदी बातें भले ही वह उसकी मां के बारे में करता हूं यह सब बातें रामू को भी अच्छी लगती है तभी तो वह अपनी मां को अभी तक कुछ भी नहीं बताया अगर उसे बुरी लगती तो आप तक वह अपनी मां को सब कुछ बता भी दिया होता और उससे दोस्ती तोड़ दिया होता,,। रामू शांत हो गया था और रघु इधर उधर की बातें करने लगा था,,,, मज़ाक मजाक में रघु अपने मन की बात कह गया था यह बात सच है कि ललिया को लेकर रघु हमेशा कल्पना किया करता था और उसे चोदने का ख्वाब देखा करता था और आज उसकी नंगी चिकनी टांग देखकर उसका मन डोलने लगा था,,,,। इधर उधर की बात और खेतों में घूमते हुए धीरे-धीरे दिन गुजरने लगा और शाम होने लगी तो रघु को ख्याल आया कि उसे तो खेतों पर जाना है और वह तुरंत रामू को लेकर खेत पर पहुंच गया जहां पर अभी तक उसकी मां और ललिया दोनों आराम कर रही थी रघु जल्दी से उन दोनों को जगाया,,,। दोनों हड़बड़ाहट में उठी दोनों को देर हो चुकी थी लेकिन अभी शाम ढलने में कुछ वक्त बाकी था इसलिए दोनों फिर से खेत में उतर गई और घास काटने लगी इस बार रघु और रामू दोनों अपनी अपनी मां का हाथ बंटाने लगे,, थोड़ी ही देर में दोनों का काम निपट गया और अंधेरा होने लगा,,, रघु कटी हुई खास का ढेर सारा ढेर बना कर उसे माथे पर उठा लिया और खेतों से बाहर आ गया,,,, दोनों घर की तरफ जा रहे थे,,, लेकिन अभी भी ललिया का काम खत्म नहीं हुआ था,,,। अंधेरा हो रहा था और रघु के दिमाग में कुछ और चल रहा था वाह रामू जो कि अपनी मां के साथ उसका हाथ बटा रहा था उसे आवाज देकर बुलाया,,,,। रघु की आवाज सुनते ही रामू दौड़ता हुआ उसके पास आया और बोला,,।

क्या हुआ रघु,,,

लगता है चाची का काम अभी तक खत्म नहीं हुआ है एक काम कर तू यह घास का ढेर माथे पर रखकर मेरी मां के साथ घर पर चला जा मैं जल्दी से काम खत्म करके चाची के साथ आ जाता हूं,,,,,

हां रामू रघु ठीक कह रहा है तुझसे जल्दी नहीं हो पाएगा और रघु जल्दी जल्दी काम खत्म कर देगा,,,

( रघु अपने माथे पर का बोझा रामू के सर पर रख दिया और रामू कजरी के साथ घर की तरफ चला गया और रघु कच्ची सड़क से खेत में उतर गया,,,,,।)

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रामू रघु का बोझ सर पर उठाकर कजरी के पीछे पीछे घर चला गया,,, रघु ललिया की मदद करने के लिए खेत में उतर गया,,,, ललिया जल्दी-जल्दी कटी हुई घास का ढेर बना रही थी,,,।

क्या हुआ चाची इतनी देर क्यों लगा दी,,,।

इसकी वजह से ही हुआ है ना तुम मुझे खाना खाने के लिए बुलाता और ना मैं खाना खा कर आराम करने बैठ गई और ना मेरी आंख लग जाती तो इतनी देर ना होती,,,।

अरे कोई बात नहीं चाची मैं आ गया हूं ना अब जल्दी हो जाएगा,,,।

अच्छा हुआ तू आ गया रघु अब जल्दी से घास का ढेर रस्सी से बांधकर मेरे सर पर रख दे,,,,।( ललिया एकदम सीधी खड़ी होते हुए और अपने दोनों हाथ को कमर पर रखकर बड़ी ही मादक अदा दिखाते हुए बोली हालांकि यह बिल्कुल उसके लिए सहज था उसने कोई जानबूझकर इस तरह की अदा नहीं दिखाई थी लेकिन रघु के देखने का रवैया पूरी तरह से बदल चुका था इसलिए ललिया के इस तरह से खड़े होने पर भी ऐसे ललिया के अंदर मादकता नजर आ रही थी,,, रघु घास के ढेर को रस्सी से बांधते बांधते ललिया के खूबसूरत यौवन का रस अपनी आंखों से पीने लगा,,,, ललिया की दोनों चूचियां कसे हुए ब्लाउज में और भी ज्यादा उछाल मार रहे थे,,,। उनको देखते ही रघु के मुंह में पानी आ गया,,,,,

रघु घास के ढेर के बोझ को रस्सी से अच्छी तरह से बांध चुका था,,,। वैसे तो इस बोझ को रघु को ही उठाना था लेकिन रघु के मन में कुछ और चल रहा था,,,। इसलिए वह घास के ढेर को उठाकर ललिया के सर पर रखने की तैयारी करने लगा और ललिया भी इसके लिए पूरी तरह से तैयार थी वह अपने लिए जगह बना कर अच्छी तरह से खड़ी हो गई ताकि रघु आराम से उसके सर पर घास का ढेर रख सके,,, घास के बोझ को उठाकर रघु ललिया के सर पर रखने लगा,,, घास का ढेर कुछ ज्यादा ही था,,, रघु ललिया के ठीक सामने से उसके सर पर बोझ रखने लगा,,, वह बोझ उसके सर पर रखने के बहाने धीरे-धीरे ललिया के एकदम करीब आने लगा इतना करीब के देखते ही देखते ललिया की मदमस्त जवान चूचियां रघु के सीने से स्पर्श होने लगी,,, ललिया कीमत मस्त चूचियों की कड़ी निकल जैसे ही रघु के सीने में स्पर्श करते हुए चुभने लगी वैसे ही तुरंत रघु के तन बदन में आग लग गई उसका पूरा शरीर उत्तेजना के मारे गनगना गया,,,,, पल भर में ही रघु को लगने लगा कि जैसे वह उछल कर चांद को छू लिया हो,,, अद्भुत अहसास से वह पूरी तरह से भर गया,,,, पर यही हाल ललिया का भी होगा भोज उसके सर पर रखने के बहाने खरगोश के बेहद करीब आ गया था और उसे भी अपनी मदमस्त चूचियां रघु की चौड़ी छाती पर स्पर्श के साथ-साथ रगड़ होती हुई भी महसूस होने लगी थी,,,, ललिया के तन बदन में भी उत्तेजना का संचार होने लगा,,,। पल भर में ही उसे भी ना जाने क्या अपने तन बदन में हलचल महसूस होने लगी थी,,,,। रघु के इतने करीब होते हुए ललिया अपने आप को असहज महसूस करने लगी थी,,,। रघु अभी भी उसके माथे पर घास के बोझे को ठीक तरह से रखने की कोशिश कर रहा था,,,, और इसी कोशिश में वह ललिया के और ज्यादा करीब आ गया अब वह इतना ज्यादा करीब आ गया था कि उसके पजामे में बना तंबू देखते ही देखते ललिया की दोनों टांगों के बीच स्पर्श होने लगी,,,, और देखते ही देखते रघु के पजामे का तंबू लग जा की दोनों टांगों के बीच के मखमली द्वार पर ठोकर मारने लगा,,, ललिया तीन बच्चों की मां थी और अभी जवान बच्चे इसलिए उसे समझते देर नहीं लगेगी इसके दोनों टांगों के बीच की है ठोकर रघु के बदन के कौन से अंग की है पर यह एहसास ललिया को होते ही वह पूरी तरह से कसमसाने लगी और वह पूरी तरह से लाचार और असहज हो गई जिसकी वजह से वह अपने आप को संभाल नहीं पाई और पीछे की तरफ गिर गई साथ ही वह गिरते-गिरते अनजाने में ही अपने दोनों हाथ को रघु के कमर पर रखकर अपने आप को संभालने की कोशिश करते हुए उसको भी लेकर गिर गई,,,, रघु ठीक उसके दोनों टांगों के बीच गिरा हुआ था और ललिया उसके ठीक नीचे थी,,,। वह तो अच्छा हुआ था कि ललिया घास के ढेर पर गिरी थी वरना उसे चोट लग जाती,,,,

लेकिन ललिया के होश उड़ गए जब उसे साफ महसूस होने लगा कि शुभम का लंड जोकि पजामे में होने के बावजूद भी तंबू की तरह खड़ा था वह ठीक उसकी बुर के ऊपर ठोकर लगा रहा था रघु का लंड तो पजामे के अंदर था लेकिन गिरने की वजह से ललिया की साड़ी पूरी तरह से कमर के ऊपर चढ़ चुकी थी जिससे वह कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी हो गई थी और इस समय ललिया की नंगी बुर पर रघु के पजामे मैं बना तंबू पूरी तरह से छा चुका था,,,। रघु के लंड के कठोरपन को अपनी मखमली बुर के ऊपर महसूस करते ही ललिया एकदम से गनगना गई,,,, रघु को इस बात का एहसास हो गया था कि उसके लंड की ठोकर लगी या की नंगी बुर के ऊपर हो रही है इसलिए वह पूरी तरह से मदहोश होने लगा था उसने जानबूझकर और अपनी कमर को हल्के से नीचे की तरफ दबा दिया जिससे इस बार रघु के पजामे के तंबू का घेराव ललिया की मखमली बुरके गुलाबी पत्तियों को हल्का सा खोल कर अंदर की तरफ जाने का प्रयास करने लगी,,। और ललिया को इसका एहसास हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बड़ी गर्मजोशी के साथ वह शुभम को अपने आप में समाने की इजाजत दे दे या उसे रोक दें इसी कशमकश में वह,,, दर्द के मारे कराह उठी,,,,

आहहहहह,,,,,,

क्या हुआ चाची तुम्हें चोट तो नहीं लगी,,,,

मेरे ऊपर गिरा पड़ा है और कहता है कि चोट नहीं लगी अच्छा हुआ कि मैं घास के ऊपर गिरी वरना आज तो तेरी वजह से मेरी कमर टूट जाती,,,

क्या चाहती मेरी वजह से तुमसे यह पूछा नहीं संभल रहा है है और तुम उसे उठाने की कोशिश कर रही हो तो गिरोगी ही,,,( रघु अभी भी बातें करता हुआ अपने कमर का दबाव ललिया कि दोनों टांगों के बीच उसकी मखमली बुर पर बनाया हुआ था,,,। सच पूछो तो रघु का मन ललिया के ऊपर से उठने का बिल्कुल भी नहीं कर रहा था उसका मन तो कर रहा था कि पैजामा थोड़ा नीचे करके अपने नंगे लंड को उसकी नंगी बुर में डालकर उसकी चुदाई कर दें लेकिन इस तरह से करना अभी उचित नहीं था,,,।)

चल अब उठेगा भी या इसी तरह से पड़ा रहेगा,,,,

हां चाची उठता हूं मुझे तो तुम्हारी फिक्र थी,,,,( रघु अच्छी तरह से जानता था कि कमर के नीचे से ललिया पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी इसलिए उसके मखमली बदन को स्पर्श करने के लालच को रोक नहीं सका,,, और उसने के बहाने वह ललिया की नंगी चिकनी जांघों को अपनी हथेली से स्पर्श करते हुए उठा जिस तरह से वह अपनी हथेली उसकी जांघों पर रखकर उसे हल्का सा दबाया था,,,, ललिया पूरी तरह से उत्तेजना में सिहर उठी थी उसका संपूर्ण बदन अपना वजूद होता हुआ महसूस कर रहा था,,,,। अपने मन के अरमान को पूरा करते हुए रखो ललिया के ऊपर से उठा तो लग जा झट से अपनी साड़ी को अपनी कमर के नीचे फेंक कर अपने नंगे जिस्म को ढक ली,,,, रघु उसका हाथ पकड़ कर उसे खड़ी किया,,,, पल भर में ही ललिया के लिए सब कुछ बदला बदला सा हो गया था,,,, शराबी पति की चुदाई का सुख ना के बराबर था और रघु के जवान लंड ने जिस तरह का स्पर्श कराकर उसे पूरी तरह से झकझोर दिया था उस तरह का एहसास उसके पति के द्वारा कभी नहीं उसे हुआ था,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूख गया था जिसे वह अपने थूक से गीला करने की कोशिश कर रही थी,,,। रघु भी समझ रहा था कि कुछ ज्यादा ही हो गया था,,,। इसलिए वह ज्यादा छूट छूट लेने की कोशिश नहीं कर रहा था कहीं लेने के देने न पड़ जाए यही सोचकर वह बोला,,,।

चाची तुम एक काम करो यह बोजा में ही उठाकर ले चलता हूं तुमसे नहीं होने वाला,,,,( और वहां पहुंचा उठाकर अपने सर पर रख लिया और आगे आगे चलने लगा क्योंकि उसका काम हो चुका था,,, ललिया की नंगी जांघों को अपनी हथेली से स्पर्श करके उसके तन बदन में आग लग गई थी और तो और उसके पिज्जा में बना तंबू का स्पर्श उसकी मखमली बुर के द्वार पर होते ही हलवाई की बीवी उसे याद आ गई थी,,,, जिस की चुदाई का अद्भुत सुख अभी तक उसके रगों में दौड़ रहा था,,,,। थोड़ी ही देर में रखो घर पर पहुंच गया और घास के ढेर को ललिया के घर पर रखकर अपने घर जाने ही वाला था कि उसे कुछ याद आ गया और वह रामू को आवाज देकर बुलाने लगा रामू जो कि घर के अंदर था वह बाहर आ गया और रघु उसे घर पर थोड़ी दूर ले जाकर उसे बोला,,,।

रामू जन्नत का नजारा देखना है,,,।( रामू अच्छी तरह से जानता था कि रघु किस बारे में बात कर रहा है,,, वह खुश होता हुआ बोला,,,।)

हां जरूर देखूंगा,,,।

तो जब मैं तुझे आवाज दूं तू जल्दी से आ जाना मैं तुझे ले चलूंगा जन्नत का नजारा दिखाने,,,

( इतना कह कर रखो अपने घर चला गया हाथ मुंह धोने के लिए और रामू अपने घर चला गया वह काफी उत्सुक था रघु के साथ जाने के लिए,,,,। रघु अपने घर से ललिया के उपर बराबर नजर रखे हुए था,,,, वह उसके मैदान जाने का इंतजार कर रहा था और थोड़ी देर बाद जब हैंडपंप चलने की आवाज आने लगी तो वह सकते में आ गया वह समझ गया कि अब ललिया सोच करने के लिए मैदान जाएगी और वह हैंडपंप पर डिब्बा भर रही थी,,,,। वह बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था क्योंकि ललिया से पहले उसे वहां पहुंचना था,,,, वह रामू को आवाज दिया रघु की आवाज सुनते ही रामू तुरंत घर से बाहर आ गया और बिना कुछ सोचे समझे सवाल किए रघु उसे जहां ले जाने लगा वह लगभग दौड़ते हुए वहां जाने लगा,,,।

थोड़ी ही देर में रघु रामू को झाड़ियों के पीछे लेकर गया,,

वह दोनों जाकर बैठ गए दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था रघु को अच्छी तरह से मालूम था कि वहां पर सोच करने के लिए कौन आने वाला है लेकिन इस बात का भाई रामू को बिल्कुल भी नहीं था उसे यही लग रहा था कि कोई औरत वहां पर आएगी लेकिन वह यह नहीं जानता था कि वह औरत कोई और नहीं बल्कि उसकी ही मां होगी,

थोड़ी ही देर में दोनों की उत्सुकता खत्म हो गई चांदनी रात होने की वजह से सब कुछ साफ नजर आ रहा था और रघु और रामू दोनों खली झाड़ियों के पीछे बैठे हुए थे जहां से सामने का खाली मैदान एकदम अच्छी तरह से नजर आ रहा था,,,, कुछ दिन का यह मेहनत का ही फल था जो रघु और रामू दोनों को प्राप्त होने वाला था रघु ने इस पर काफी मेहनत किया था वह शाम ढलने के बाद ले लिया कौन सी जगह मैदान जाती है इसके बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लिया था,,,। तभी तो वह बड़े आत्मविश्वास से रामू का हाथ पकड़ कर उधर लाया था वह जानबूझकर रामू को अपने साथ लाया था क्योंकि वह रामू को उसकी मां की मदमस्त गोरी गोरी गांड दिखाना चाहता था,,,। और देखना चाहता था कि रामू अपनी ही आंखों से अपनी मां की मदमस्त गोरी गोरी गांड देखकर क्या करता है,,, क्योंकि रघु को इससे यह पता चलने वाला था कि अगर आगे वह है रामू की मां से शारीरिक संबंध बनाता है तो इसका असर रामू पर किस तरह से पड़ेगा अगर आज वह उठकर नाराज होकर वहां से चला जाएगा तो इसका मतलब साफ था कि उसकी मां के साथ चुदाई करने के बाद उसे एक अच्छा दोस्त खोना पड़ेगा और अगर अपनी मां की मस्त गांड देखकर रामू भी मस्त हो जाता है तो रघु के लिए उसका रास्ता एकदम साफ हो जाएगा इसके बाद वह रामू की मां से रामू की उपस्थिति में भी उसके साथ शारीरिक संबंध बना सकता है,,,।

थोड़ी देर में दोनों की उत्सुकता खत्म हो गई,,, क्योंकि हाथ में डब्बा लिए ललिया ठीक उन दोनों की आंखों के सामने खाली मैदान में जमीन पर नीचे डब्बा रखकर खड़ी हो गई,,, ललिया का चेहरा रघु और रामू दोनों के ठीक सामने था,,,।

ललिया चारों तरफ नजर घुमाकर जाकर पकड़ देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,,, रामू अपनी आंखों के ठीक सामने अपनी मां को खड़ी देखकर एकदम मदहोश हो गया,,, उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था क्योंकि अब उसे इस बात का एहसास हुआ था कि रघु उसे यहां क्या दिखाने के लिए लाया था लेकिन रामू रघु की तरफ बिल्कुल भी नहीं देख रहा था वह आंखें फाड़े अपनी मां को भी देखे जा रहा था जो उसे से 5 मीटर की दूरी पर खुले मैदान में खड़ी थी और किसी भी वक्त अपनी साड़ी कमर तक उठाकर नीचे बैठने वाली थी,,,। रघु का भी दिल जोरों से धड़क रहा था।

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गांव का मौसम बिल्कुल साफ था आसमान में तारे टिमटिम आ रहे थे चांद अपनी पूरी आभा बिखेरे पूरे गांव में अपनी चांदनी लूटा रहा था जिसकी वजह से गांव का हर एक कौन है इस समय लगभग लगभग एकदम साफ नजर आ रहा था लेकिन जहां पर ललिया खड़ी थी वह पूरा मैदान था लेकिन वह एक छोटे से पेड़ के नीचे खड़ी थी जिसके नीचे खड़ी होकर वह अपने आप को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस कर रही थी जबकि यह उसकी सबसे बड़ी गलती थी क्योंकि वह नहीं जानती थी कि 2 जोड़ी आंखें उसके हर एक हरकत पर बड़ी बारीकी से नजर रखे हुए हैं,,।

रामू का दिल बड़ी जोरों से धड़क रहा था,,, क्योंकि जिंदगी में पहली बार हुआ अपनी मां की मदमस्त गांड को देखने जा रहा था हालांकि वह भी अपनी मां को नहाते कपड़े बदलते देख चुका था लेकिन संपूर्ण रूप से उसकी मदमस्त नितंबों के भूगोल से वाकिफ नहीं था,,, जो चाह रघु के अंदर थी वही चाह रामू के अंदर भी पनप रही थी रघु तो अपनी मां की मदमस्त गार्ड के भूगोल से पूरी तरह से वाकिफ हो चुका था पहले ही पल भर के लिए ही सही लेकिन उसे अपनी मां की नितंब रूपी चमकते चांद के दर्शन हो चुके थे और अब रामू की बारी थी,,,। रामू कुछ भी बोल नहीं रहा था रघु और रामू दोनों एकदम करीब बैठे हुए थे झाड़ियों के आड़ में जहां से वह लोग रामू की मां के संपूर्ण बदन का दीदार कर रहे थे लेकिन इस बात की भनक 5 मीटर की दूरी पर स्थित ललिया को बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी,,,। वैसे भी ललिया को सोच करने के लिए आने में देर हो चुकी थी क्योंकि खेतों में ही ज्यादा वक्त चला गया था वरना उसके साथ एक दो और थे और होती है खास करके रघु की खुद की मां लेकिन आज वो लोग जल्दी निपट गए थे इसलिए ललिया इधर-उधर चकर पकर देख रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,,,, उसे भी मैदान पूरी तरह से खाली नजर आ रहा था इसलिए वह भी निश्चिंत हो गई थी,,, रघु धीरे से रामू के कान में बोला,,,।

अभी देखना तेरी मां कैसे अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी बड़ी बड़ी गांड दिखाती है,,, तेरा लंड खड़ा ना हो जाए तो मेरा नाम बदल देना,,,,( रघु की बात सुनकर रामू बोल कुछ नहीं रहा था बस उसे थोड़ा बहुत बनावटी गुस्सा दिखाते हुए देख ले रहा था और जो कुछ भी रघु कह रहा था उसमें सच्चाई भी काफी थी क्योंकि अभी तो उसकी मां ने अपनी साड़ी को कमर तक उठाई भी नहीं थी और रामू के पजामे में हलचल होना शुरु हो गया था,,,। रघु की खुद की हालत खराब थी,,, क्योंकि उसने भी ब्लाउज में जागते हुए उसके दोनों कबूतरों को लगभग लगभग देखी लिया था और उसकी नंगी चिकनी टांगो को देखकर वैसे भी वह मस्त हो चुका था और जिस तरह से शाम ढलने के बाद उसकी मदद के बहाने एक तरह से उसके बदन से खेला था और उसकी नंगी बुर पर अपने पेंट में बने तंबू को धंसाया था वह सब रघु को पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर ले जा रहे थे,,,,, उसके पजामे में भी पूरी तरह से हलचल होना शुरू हो गया था,,, रामू और रघु दोनों अपनी नजरों को ललिया के ऊपर स्थिर किए हुए थे दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था और उस समय उस खाली मैदान में उन दोनों के दिल की धड़कन ही सुनाई दे रही थी बाकी चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,,,।

ललिया पूरी तरह से तैयार थी अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर सोच के लिए बैठने के लिए,,, वह अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी को पकड़ ली थी और यह देखते ही रघु फिर से रामू के कान में फुसफुसाते हुए बोला,,,

देख देख देख रामु,,,,, अब उठेगा पर्दा और दिखेगा अद्भुत नजारा,,, तो खुद अपनी आंखों से अपनी मां की मदमस्त गोरी गोरी गांड देखेगा,,,,

ललिया चारों तरफ खड़ी होकर देखते हुए धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी जैसे जैसे वह साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी वैसे वैसे रघु के साथ-साथ रामू के दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी,,,, पर देखते ही देखते ललिया अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी,,, जैसे ही ललिया की साड़ी कमर तक आई वैसे ही रामू और रघु दोनों को अद्भुत खूबसूरत मादकता से भरी हुई बड़ी बड़ी गांड नजर आने लगी और गांड को देखते ही रघु के मुंह से वाह निकल गया गया,,,,। रामू तो पागलों की तरह अपनी मां की गांड को देखता ही रह गया,,,, पजामे में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था,,,। तीन-चार सेकंड रामू की मां खड़ी होकर अपनी मदमस्त गांड का प्रदर्शन करती रही और उसके बाद सोच करने के लिए नीचे बैठ गई,,,,, और उसके बैठते ही कुछ ही देर बाद ललिया की बुर में से सीटी की आवाज आने लगी वह मुत रही थी,,,, और उसकी बुर में से निकल रही सीटी की आवाज रामू और रघु दोनों के कानों में साफ सुनाई दे रही थी,,,। उस आवाज को सुनते ही रघु पूरी तरह से मस्त हो गया रामू की भी यही हालत थी,,,, ललिया को शायद बहुत जोरो की पिशाब लगी हुई थी तभी उसकी बुर में सीटी की आवाज कुछ ज्यादा ही जोर से निकल रही थी,,,,,, रघु रामू के कान में बोला,,,।

देख रामू तेरी मां तेरी आंखों के सामने मुत रही हैं,,,।

( अपनी मां को नंगी गांड दिखाते हुए और पेशाब करते हुए देखा कर रामू पूरी तरह से मस्त हो जा रहा था और इस तरह की रघु के मुंह से अपनी मां के लिए गंदी बातें सुनकर उसकी उत्तेजना का पारा और ज्यादा बढ़ता जा रहा था,,, रघु एकदम उत्तेजित हुआ जा रहा था उसे यह नजारा बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वह धीरे से अपने पर जाने को सरका कर वह भी उसी तरह से बैठ गया,,। रामू की नजर जब उसके ऊपर पड़ी तो वह दंग रह गया रामू उसके खड़े लंड को देख रहा था जिसे धीरे-धीरे रघु अपने हाथों से हिला रहा था,,, रघु की अपने हाथों से अपने लंड को हिलाते हुए रामू से बोला,,,।)

रामू तू मेरा दोस्त है इसलिए वरना इसी समय तेरी मां की दूर में अपना यह लंड डालकर उसकी चुदाई कर देता,,।

( रघु के मुंह से इस तरह की बात सुनकर रामू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था उसका भी मन कर रहा था अपना लंड बाहर निकालकर हीलाने के लिए,,, रघु रामू की हालत को अच्छी तरह से समझ रहा था क्योंकि वह भी इस तरह के हालात से गुजर चुका था इसलिए वह रामू से बोला,,,)

तू भी बाहर निकाल ले अपनी मां की गांड को देखते हुए हिलाने में बहुत मजा आएगा,,,,।

( रामू तो जैसे इसी पर का इंतजार कर रहा था वह भी धीरे से अपने पजामे को नीचे सरका कर अपने खड़े लंड को हिलाना शुरू कर दिया,,,, रघु रामू को उकसा ते हुए धीरे से उसके कान में बोला,,,।)

रामू तेरा भी मन कर रहा है ना तेरी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर उसकी बुर में लंड डालने के लिए,,,,( रघु की बातें रामू को अंदर तक जला रहे थे कामाग्नि में वह पूरी तरह से तड़प रहा था भले ही उसकी मां के लिए रघु बेहद गंदे शब्दों का उपयोग कर रहा था लेकिन रामू को इसमें बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,)

रामू मेरा तो बहुत मन कर रहा है तेरी मां को चोदने के लिए जब से तेरी मां की गोल गोल गांड देखा हूं तब से मेरी हालत खराब हो गई है,,,,आहहहहह क्या मस्त गांड है तेरी मां की,,,

( रघु हर तरह से आनंद ले रहा था एक बेटे के लिए कोई भी अगर इस तरह की गंदी बातें करता है तो साधारण तौर पर हर बेटा गुस्से में आ जाता है और उसकी मां के प्रति गंदे शब्दों का प्रयोग करने वालों से झगड़ा कर लेता है लेकिन यहां पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं था यहां तो रघु कि हर गंदी बातें रामू को अच्छी लग रही थी रामू खुद प्यासी आंखों से अपनी मां की गांड देख रहा था उसकी मां उसकी आंखों के सामने सोच करने के लिए बैठी हुई थी,,,। रामू और रघु दोनों अपनी मस्ती में थे और इन सब से अनजान ललिया 5 मीटर की दूरी पर बैठकर सोच कर रही थी उसे क्या मालूम था कि उसके पीठ पीछे उसकी सबसे अच्छी सहेली का तरीका बेटा और उसका खुद का बेटा उसकी नंगी गांड को देखकर अपना लंड हिला रहे हैं,,,। रघु रामू को और ज्यादा उकसाने के लिए बेहद गंदे शब्दों का प्रयोग करते हुए बोला,,।)

कसम से रामू अगर तेरी मां एक रात के लिए मुझे मिल जाए ना तो तेरी मां की बुर में अपना मोटा लंड डालकर उसकी बुर का भोसड़ा बना दुं,,,आहहहहह भगवान ने कमाल का जिस्म दिया है तेरी मां को,,,,( ऐसा कहते हुए रघु जोर-जोर से अपने लंड को मुठिया रहा था,,, और रामू भी यही कर रहा था,,,, पति अपनी मां की गांड को देखकर जोर जोर से हिला रहा था,,,। )

आहहहहहहह,,,, रामू बहुत मजा आ रहा है काश तेरी मां अपनी दोनों टांगे फैलाकर मुझे चोदने देती तो बहुत मजा आ जाता,,,,,

( अपनी मां की मदमस्त कांड और रघु की गंदी बातें सुनकर रामू काफी उत्तेजित हो गया था और वह ज्यादा देर तक ठहर नहीं पाया और अपने लंड को हिलाते हुए पानी छोड़ दिया,,, लेकिन रघु अभी भी बरकरार था वह लगातार अपनी प्यारी आंखो से ललिया को सोच करता हुआ देख रहा था जो कि अब सोच कर के पानी में लाए डिब्बे से अपनी गांड धो रही थी और यह देख कर रघु और ज्यादा उत्तेजित होने लगा,,,, क्योंकि वह चाहता था कि ललिया की गोरी गोरी गांड देखते हुए उसका पानी निकले और वो जिस तरह से गांड धो रही थी वह वहां से चली जाने वाली थी इसलिए रघु जोर-जोर से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया,,,, ललिया सोच करके खड़ी हो गई थी लेकिन अभी भी वह अपनी साड़ी को कमर तक उठाए खड़ी थी,,, शायद वहां नितंबों के लगे पानी की बूंदों को नीचे गिर जाने देना चाहती थी इसलिए अपनी बड़ी बड़ी गांड को हम से हिला कर पानी की बूंदों को नीचे गिराने लगी,,, और उसकी यह हरकत पर उसकी बड़ी बड़ी गांड पानी भरे गुब्बारों की तरह हवा में लहरा रहे थे और यह देखकर रघु के सब्र का बांध टूट पड़ा उसके डंडे से भी पानी का फव्वारा छूटने लगा,,,। रामू ऊसके लंड से निकलते हुए पानी को देख कर हैरान हो गया था,,,, क्योंकि उसके लंड से कुछ ज्यादा ही पानी निकल रहा था,,,,। देखते ही देखते राम और रघु दोनों की आंखों के सामने से ललिया वापस घर की तरफ चली गई,,,

दोनों झाड़ियों में से तेरे से खड़े हुए और रघु अपना पैजामा ऊपर करते हुए बोला,,,,।

यार मजा आ गया तेरी मां ने तो क्या मस्त नजारा दिखा दिया,,,,आहहहहहहह,,,,,

( रामू भी अपने पजामे को ऊपर करता हुआ बोला,,,।)

यार रघु तुझे कसम है मेरी दोस्ती की यहां जो कुछ भी हुआ यह बात तु किसी को मत बताना,,,,

पागल हो गया है तू भला मैं यह बात दूसरों को क्यों बताऊंगा यह बात तेरे और मेरे बीच रहेगी और आगे से भी इस तरह का नजारा तेरी मां के द्वारा देखने को मिलेगा,,, और हम दोनों तेरी मां की नंगी गांड को देखकर इसी तरह से मजा लेंगे,,, तुझे कोई एतराज तो नहीं है ना,,,

( रघु की बातें सुनकर रामू बोला कुछ नहीं बस शर्मिंदा होते हुए हां में सिर हिला दिया,,, क्योंकि इस तरह का नजारा देख कर उसे भी काफी आनंद आया था,,।)
 
कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए एक दिन शालू की मुलाकात फिर से बिरजू से हो गई,,,। शालू खेतों पर अपनी मां को खाना देने जा रही थी और रास्ते में बिरजू मिल गया था,,,। बिरजू को आंखों के सामने देखते ही शालू एकदम खुश हो गई,,, और सवालों की झड़ी बरसाते हुए बिरजू से बोली,,।

बिरजू कहां चले गए थे तुम,,, उस दिन के बाद से तो तुम कहीं नजर ही नहीं आए ना मुझसे मिलने की एक भी बार भी कोशिश कीए,,,।

क्या करूं शालू शाम को घर गया तो पता चला कि मामा की तबीयत खराब हो गई है इसलिए मा को लेकर मामा के घर जाना पड़ा,,, आज सुबह ही वापस आया हूं,,।

अब कैसी तबीयत है मामा की,,,

अब तो बिल्कुल ठीक है,,,( दोनों एक पेड़ के नीचे खड़े होकर बातें कर रहे थे,,।)

वैसे बिरजू उस दिन तो हालत खराब हो गई थी अगर थोड़ी देर और वहां रूकती तो पकड़ी जाती है वैसे वह था कौन,,,?( शालू सवालिया अंदाज में बिरजू की तरफ देखते हुए बोली,,, शालू की यह बात सुनकर बिरजू के होठों पर मुस्कुराहट आ गई थी वह मुस्कुरा रहा था और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर शालू बोली,,,।)

तुम मुस्कुरा क्यों रहे हो क्या बात है,,,?

शालू अच्छा ही हुआ था कि तुम समय रहते हो वहां से निकल गई थी,,,।

ऐसा क्यों,,,?

क्योंकि वह दूसरा कोई नहीं बल्कि तुम्हारा भाई ही था थोड़ी देर और तुम्हारा रूकती तो तुम्हारा भाई भी तुम्हारे नंगे बदन को तुम्हारी नंगी गांड को देख लेता,,,,।

( बिरजू की बात सुनते ही सालु के तन बदन में घबराहट की लहर दौड़ गई,,,, वह हैरान होते हुए अपने दांतो तले उंगली दबा ली क्योंकि वाकई में बहुत बड़ी मुसीबत से बच गई थी अगर सच में उसका भाई उसे उस अवस्था में देख लेता तो गजब हो जाता,,,।)

बाप रे तब तो बाल-बाल बच गई,,, वरना मेरी मां मार-मार कर मेरी खाल उधेड़ लेती,,,।

वैसे शालू तुम्हारा भाई रघु तुम्हें पानी में से निकल कर भागते हुए देख लिया था तुम्हारी नंगी गांड दंगे जिसमें को देखकर यह वह मेरे पास आया था और मुझसे पूछ भी रहा था कि आंखीर यह सब माजरा क्या है,,,।

क्या तुम्हारे कहने का मतलब है कि मेरे भाई ने मेरे नंगे बदन को देख लिया था यह तो मेरे लिए शर्म से डूब मरने वाली बात है बिरजू यह सब तुम्हारी वजह से हुआ ना तुम जिद करते ना मैं अपने कपड़े उतार कर तालाब में जाती,,,।

( सालु बिरजू से नाराज होते हुए दूसरी तरफ मुंह फेर कर खड़ी हो गई,,,)

अरे नाराज क्यों होती हो,,,?

नाराज ना होऊ तो क्या होऊ तुम्हारी वजह से मेरे बारे में मेरे मन के बदन को देख लिया जो कि ऐसा कभी होने वाला नहीं था,,,

अरे तो उसे थोड़ी पता है कि तालाब में से जिस लड़की को नंगी निकल कर भागते हुए देखा था वह उसकी बहन है,,,।

वह पूछ रहा था और मैं उसे बोल दिया कि पास के गांव की लड़की है,,,

वह मान गया,,?( शालू आश्चर्य होते हुए बोली,,।)

अरे मानेगा कैसे नहीं उसने तुम्हारा चेहरा थोड़ी देखा था हां यह बात और है कि अगर तुम्हें पहले वह नंगी देखा होगा तो पहचान लेगा,,,,( बिरजू की बात सुनते हैं शालू अपने दोनों हाथों को कमर पर रखकर गुस्से से उसे देखने लगी,,,।)

अरे गुस्सा क्यों होती हो मैं तो मजाक कर रहा हूं,,,।

( बिरजू की बात सुनकर निश्चिंत होकर वह बिना कुछ बोले वहां से जाने लगी तो बिरजू उसे पीछे से आवाज देता हुआ बोला,,,।)

कल इसी समय मिलना आम की बगिया में,,,

( बिरजू की बात सुनकर सानू एक पल के लिए पीछे की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी,,, लेकिन रुकी नहीं और ना ही एक शब्द बोली तो बिरजू ही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,।) मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा,,,।

( इतना सुनकर शालू लगभग भागते हुए खेतों की तरफ जाने लगे वह काफी खुश थी और बीरजु भी काफी प्रसन्न नजर आ रहा था,,।)

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दूसरे दिन शालू ठीक समय पर आम की बगिया पर पहुंच गई,,, आपकी बगिया बिरजू का ही था,,, जहां पर एकदम नीरव शांति थी चारों तरफ हरियाली हे हरियाली और यहां पर दूसरा कोई आता भी नहीं था,,,, इसलिए बिरजू शालू को यहां मिलने के लिए बुलाया था वैसे तो पहले वह लोग नदी के किनारे झरने पर मिला करते थे लेकिन जिस दिन से वहां पर रघु पहुंच गया था तब से वह दोनों की मुलाकात हुई ही नहीं थी,,, और जब मुलाकात हुई तो बिरजू ने शालू को आम की बगिया पर ही बुलाया,,,, शालू का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी आम की बगिया पर उन दोनों के सिवा तीसरा कोई नहीं होगा क्योंकि यह गांव से थोड़ा दूर भी था और अभी आम पके नहीं थे बस अभी-अभी डालियों पर आम लगना शुरू हुए थे इसलिए यहां पर किसी के भी आने का डर नहीं था,,,।

शालू को थोड़ी घबराहट हो रही थी क्योंकि मन के कोने में उसे यह डर रहता था कि कहीं बिरजू उसके साथ उल्टा सीधा ना कर दे लेकिन उसे अपने आप पर थोड़ा विश्वास भी था कि उसके पैर नहीं डगमगाएंगे लेकिन कुछ दिनों से शालू का धैर्य ऐसा लगता कि कभी भी खो जाएगा,,,। और दोनों बार उसके छोटे भाई रघु की ही वजह से हुआ था,,,।

पहली बार तो वह पूरी तरह से अपना आपा खो देखो तो बची थी क्योंकि नजारा ही उसकी आंखों के सामने इस तरह का आ गया था कि वह चाहकर भी अपनी नजरों को हटा नहीं पा रही थी जब वह अपने भाई को जगाने गई थी,, और यह भी सच था की शालू जिंदगी में पहली बार किसी के लंड को अपनी आंखों से देख रही थी,,,, सभी अपने ही छोटे भाई रघु का,,,, उस दिन अपने भाई के लंड चोदने की तरह जिस तरह की कसम साहब उत्तेजना और रुक सकता उसके तन बदन में हलचल मचा रहा था उस तरह का एहसास उसे कभी नहीं हुआ था उस दिन उसका मन अपनी भाई की लंड को अपने हाथ में पकड़ने के लिए मचल उठा था बड़ी मुश्किल से वह अपने आप को संभाले हुए थी,,,।

और दूसरी बात अब जब वहां नहा कर कमरे में अपने बालों को सवार रही थी और उस वक्त वह केवल अपनी कुर्ती पहने हुए थे सलवार नहीं पहनी थी और कब उसका भाई दरवाजे पर आकर उसे ना जाने कब से निहार रहा था इस बात का उसे पता तक नहीं चला जब उसने पीछे मुड़कर देखें तो वह कमर के नीचे के अपने नंगे पन को छुपाने की अफरातफरी में पूरी तरह से शर्मिंदा हो गई थी लेकिन यह बात उसे अंदर तक उत्तेजित कर गई थी कि उसका भाई उसके नंगे बदन को अपनी फटी आंखों से देख रहा था,,,,।

आज आज भी जब वह बिरजू से आम की बगिया में मिलने आई थी तो उसके मन में वही सब बातें चल रही थी,,,।

शालू दूर से देखी तो बिरजू बड़े पत्थर भी छोटे से गड्ढे में भरे पानी में कंकड फेंक रहा था,,

शालू दबे कदमों से उसकी तरफ जाने लगी क्योंकि जिस तरह से वह निश्चिंत होकर पत्थर पर बैठकर गड्ढे में कंकड़ फेंक रहा था शालू ऊसे डराना चाहती थी,,, और धीरे-धीरे जाकर वह बिरजू के कान के पास जोर से चिल्लाई वाकई में बिरजू एकदम से डरकर चिल्ला उठा,,,,। और उसे डरा सहमा देखकर शालू जोर जोर से हंसने लगी उसकी हंसी नहीं समा रही थी और उसको हंसता हुआ देखकर बिरजू को तो थोड़ा गुस्सा आया लेकिन उसकी खूबसूरत चेहरे को देखकर उसका गुस्सा हवा में फुर्र हो गया,,,,।

क्या यार शालू तुम भी,,,।

बिरजू तुम तो बच्चों की तरह डर गए ,,,(शालू हंसते हुए बोली) तुम इतना खो गए कि तुम्हें मेरे आने का एहसास तक नहीं हुआ,,,।

हां तुम सच कह रही हो मैं एकदम से खो गया था लेकिन तुम्हारे ख्यालों में तुम्हारे बारे में सोच रहा था,,,।

मेरे बारे में क्यों,,,? ( शालू भी उस बड़े पत्थर पर बिरजू के करीब बैठते हुए बोली,,,।)

क्योंकि मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,।

क्या समझ में नहीं आ रहा है,,,( शालू इस बार शांत स्वर में बोली)

यही कि हम दोनों का क्या होगा सच कह रहा हूं शालू,,,( बिरजू उसके दोनों कमरों को पकड़कर उसकी तरफ देखते हुए बोला,,,।) तुम अगर मुझे नहीं मिली तो मैं मर जाऊंगा,,,,

ऐसा क्यों कह रहे हो,,,,( शालू तुरंत अपनी हथेली उसके होठों पर रखते हुए बोली)

पता नहीं पिताजी हम दोनों की शादी करने की मंजूरी देंगे या नहीं,,,,।

( फ्रिज की बात सुनकर शालू भी चिंतित हो गई और बोली,)

तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है बिरजू,,,,।

पता नहीं लेकिन ना जाने क्यों मन में डर जैसा लग रहा है,,,

( बिजी हो अपने मन में जिस वजह से डर का सैलाब उठा था उस बात को दबा ले गया क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी औकात और शालू की हालात में जमीन आसमान का फर्क था उसके पिताजी कभी नहीं चाहेंगे कि छोटे घर में उसकी शादी हो,,,।)

तुम चिंता मत करो फिर जो मैं हूं ना अगर तुम्हारे पिताजी दोनों की शादी की इजाजत नहीं भी देंगे तो मैं तुम्हें भगा ले जाऊंगी,,,

( यह सुनकर बिरजू उसकी तरफ देखकर हंसने लगा और उसको हंसता हुआ देखकर शालू बोली,,,।)

क्यों क्या हुआ हंस क्यों रहे हो,,,।

तुम मुझे भगा ले जाने की बात कर रहे हो तुम्हारे में इतनी हिम्मत है,,,।

बिरजू अब तुम ज्यादा बोल रहे हो मेरे में बहुत हिम्मत है,,,।

देखा हूं मैं तुम्हारी हिम्मत कपड़े उतारने के लिए बोलो तो कितना नाटक करती हो,,,।

वह बात अलग है,,, शादी से पहले मैं कुछ ऐसा वैसा नहीं करना चाहती,,,

क्यों नहीं करना चाहती,,,?

तुम सच में पागल हो ,, क्योंकि एक लड़की के लिए उसका इज्जत ही सबसे बड़ा गहना होता है और अगर तुम ही मेरे गहने को लूट लिए और उसके बाद मुझसे शादी करने से इंकार कर दिए तो मेरे पास बचेगा क्या,,,,? मैं तो बर्बाद हो जाऊंगी,,,।

सिर्फ कपड़े उतारने में कैसे बर्बाद हो जाओगी,,,

झरने के नीचे क्या हुआ यह तो तुम अच्छी तरह से जानते हो ना अगर सोचो मेरा भाई मेरा चेहरा देख लिया होता तो क्या होता,,,,

कुछ नहीं होता तुम्हारे खूबसूरत चेहरे हो तुम्हारे खूबसूरत नंगे बदन को देख कर तुम्हारा भाई भी तुम्हारी चुदाई कर देता,,,,

धत्,,,, यह कैसी बातें कर रहे हो तुम्हें शर्म नहीं आती मेरे भाई के बारे में इतनी गंदी बातें कर रहे हो क्या मैं तुमसे बात नहीं नहीं करती,,,,।( इतना कहकर शालू गुस्से में जाने लगे तो बिरजू दौड़ कर उसका हाथ पकड़ते हुए बोला,,,।)

अरे अरे सुनो तो तुम तो एकदम नाराज हो गई,,,

नाराज होने वाली बात ही कर रहे हो क्या कोई अपनी बहन को गंदी नजरों से देखता है जो तुम मेरे भाई के बारे में ऐसा कह रहे हो,,,,

मैं तो सिर्फ मजाक कर रहा था मेरी रानी,,,

मुझे ऐसा मजाक बिल्कुल भी पसंद नहीं है बिरजू,,,( ऐसा कहते हुए सालों अपने दोनों हाथ को बांधकर अपनी छाती पर रखते हो दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी हो गई,,,)

शालू शालू शालू मेरी जान मैं तो मजाक कर रहा था तुम्हारा दिल दुखाने का मेरा बिल्कुल भी ईरादा नहीं था,,,,( बिरजू को लगने लगा कि मजाक में क्या करने का कुछ ज्यादा ही बोल गया है इसलिए शालू के सामने कान पकड़ कर उठक बैठक करते हुए बोला,,,।)

मुझे माफ कर दो शालू आइंदा से ऐसी गलती नहीं होगी,,,,। मुझे क्या मालूम था कि मेरी शालू रानी नाराज हो जाएगी,,,।

नाराज क्यों ना होऊ अगर मैं भी कहूं की तुम भी अपनी मां को नंगी देखकर उसकी चुदाई कर दोगे तो तुम्हें क्या अच्छा लगेगा,,,,।

वाह सालु रानी तुम्हारे मुंह से चुदाई शब्द सुनकर मैं तो धन्य हो गया,,,।

( बिरजू की बात सुनते ही शालू को इस बात का एहसास हुआ कि अनजाने में उसके मुंह से गंदा शब्द निकल गया था इसलिए वह तुरंत अपने दांतो तले उंगली दबाते हुए बोली,,।)

ऊई,,,, मां,,,,, यह क्या हो गया नहीं नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए था,,,, हे भगवान यह मैंने क्या कर दी,,,,

( शालू को परेशान होता हुआ देखकर बिरजू हंसने लगा,,,। बस इतना हंस रहा था सालों इतना ज्यादा परेशान और गुस्सा हो रही थी,,, शालू गुस्से में और भी ज्यादा खूबसूरत लगती है इस बात का एहसास बिरजू को अब हो रहा था,,,, बिरजू काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगा और शालू हे भगवान हे भगवान करके इधर-उधर घूम रहे थे वास्तव में उसके मुख्य से पहली बार इतना गंदा शब्द निकला था इसलिए वह अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी और बिरजू तुरंत उसके पास जाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया,,, लेकिन फिर भी शालू अपने मन में ही बड़बड़ाए जा रही थी,,,, बिरजू को भी इस बात का एहसास हुआ कि शालू वाकई में काफी परेशान है इसलिए उसे शांत करने के लिए बोला,,,।)

कुछ नहीं हुआ शालू कुछ नहीं हुआ तुम गंदी लड़की नहीं हो तुम अच्छी लड़की हो बहुत अच्छी लड़की हो तुम जाने में तुम्हारे मुंह से ऐसी बात निकल गई,,,, तुम बहुत अच्छी लड़की हो,,,,,( बिरजू से कसके अपनी बाहों में लिया हुआ था लिया हुआ क्या था जिस तरह से वहां परेशान हो रही थी उसे देखते हुए फिर जो उसे पकड़े हुए था शालू इस समय बेहद खूबसूरत लग रही थी उसके बाल बिखर गए थे उसके बालों की लट उसकी गानों को छू रही थी,,,,)

मैं अच्छी हूं मैं अच्छी लड़की हूं,,,

हां शालू तुम बहुत अच्छी लगती हो बहुत अच्छी एकदम सीधी-सादी,,,,( ऐसा कहते हुए बिरजू के होंठ शालू के होठों से बेहद करीब आ गए,,,, जब इस बात का एहसास शालू को हुआ तो वह एकदम से शर्मसार हो गए उसका बदन शर्म के मारे कसमसाने लगा,,, लेकिन बिरजू शालू के लाल होठों को इतने करीब देखकर एकदम बदहवास मदहोश होने लगा और वह अपने आप को छोड़ा पाती इससे पहले ही अपने होंठ को शालू के होंठ पर रखकर उसके लाल होठों से मधुर रस को पीना शुरू कर दिया,,,, शुरू शुरू में शालू उसकी पकड़ से अपने आप को छुड़ाने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन थोड़ी ही देर में इस प्रगाढ़ चुंबन के असर मैं वह खुद मदहोश होने लगी,,,, और देखते ही देखते शालू भी बिरजू के होंठों को अपने होठों में भरकर चूसना ,,, शुरू कर दी,,,, देखते ही देखते दोनों मदहोश होने लगे बिरजू काफी उत्तेजित हो गया था इस समय आम की बगिया में किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए बिरजू की हिम्मत बढ़ने लगी थी और जिस तरह से वह उसके होठों को चूम कर उसका सरकार दे रही थी उसे देखते हुए बिरजू छोट लेना चाहता था इसलिए उसकी पीठ पर से अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ लाते लाते शालू के भरपूर जवान नितंबों पर अपनी दोनों हथेली रखकर उन्हें जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,,, शालू को इस बात का एहसास हो रहा था कि बिरजू उसके नितंबों को अपनी हथेली से मसल रहा है और उसे अच्छा भी लग रहा था सलवार के ऊपर से शालू की मदमस्त सुडोल करण को अपने हाथों से दबाने में बिरजू को बहुत आनंद आ रहा था दोनों का चुंबन और भी ज्यादा उत्तेजना से भरपूर होता जा रहा था,,,,, लेकिन तभी ना जाने क्या हुआ कि शालु तुरंत उसको धक्का देकर पीछे हट गई,,,, उसकी सांसे अभी भी बहुत गहरी चल रही थी लेकिन बिरजू से बिना कुछ बोले वह तुरंत वहां से भाग खड़ी हुई,,,, उत्तेजना के मारे हंसते हुए बिरजू भी उसे भागता हुआ बस देखता ही रह गया,,,, बिरजू से रोकने की कोशिश नहीं किया क्योंकि वह समझ गया था कि यह चुंबन और उसकी हरकत जो कुछ भी हुआ था वह अनजाने में हुआ था शालू से ज्यादा आगे बढ़ने नहीं देगी इस बात का एहसास बिरजू को अच्छी तरह से था लेकिन आज पहली बार बिरजू हिम्मत दिखाते हुए उसके होंठों को अपने होठों में लेकर चूस रहा था एक नशा सा उसके बदन में उतर चुका था उसकी नरम नरम नितंबों को दबाकर एक अतुल्य एहसास अपने अंदर भर लिया था,,,। जिसकी वजह से उसके पजामे में अच्छा खासा तंबू बन चुका था,,,। चुंबन से ज्यादा कुछ ना कर सकने का मलाल उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था,,,।

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शाम ढलने को थी रघु घूमते हुए गांव के नुक्कड़ पर हलवाई की दुकान पर पहुंच गया,,, 10 दिन जैसे हो चुके थे वह हलवाई की बीवी के दर्शन नहीं कर पाया था,,, आज भी रघु के नस नस में हलवाई की बीवी की जवानी का नशा पूरी तरह से घूम रहा था,,, पानी भरे गुब्बारों की तरह छातियों पर लहराते हुए इसकी दोनों चूचियां तरबूज से भी बड़ी बड़ी गांड की दोनों फांके केले के वृक्ष के मोटे तने की तरह चिकनी चिकनी उसकी जांघेो की यादें,,, अक्सर रघु के लंड को पूरी तरह से खड़ा कर जाता था,,,, रघु के तन बदन में अभी भी हलवाई की बीवी के खूबसूरत नंगे बदन की मादकता भरी खुशबू बसी हुई थी,,, जिसको अपने जेहन में महसूस करके रघु यहां तक खींचा चला आया था,,,

फिर भाई की बीवी पर दूर से नजर पड़ते ही रघु के तन बदन में जवानी का जोश उमड़ने लगा एक बार फिर से उसे भोगने की इच्छा उसके मन में प्रज्वलित हो गई,,,, हलवाई की बीवी आज भी समोसे तल रही थी और लगभग लगभग उसी तरह से अपनी दोनों टांगे फैलाकर बेफिक्र होकर बैठी हुई थी,,, रघु का लंड एक बार फिर से हलवाई की बीवी की मस्त जवानी देख कर अंगड़ाई लेने लगा,,, रघु हलवाई की बीवी के करीब पहुंच गया वैसे तो दुकान पर बीरबल बिल्कुल की नहीं थी बस इक्का-दुक्का आदमी है अपनी मस्ती में मस्त होकर शराब पीकर समोसे का लुफ्त उठा रहे थे,,,। हलवाई की बीवी की नजर रघु पर पड़ते ही उसके भी अरमान मचल उठे,,, उसके भारी-भरकम शरीर में तरंगे बजने लगी रुको को देखते ही उसे चांदनी रात की संभोगनीय पल याद आने लगा,,, उसे भी अच्छी तरह से याद है था कि रघु किस तरह से सारी रात उसकी जवानी का रस निचोड़ा था,,, उसके पति के गैरहाजिरी में किस तरह से वह संभोग के असीम सुख का अहसास उसे कराया था,,, रघु का हर एक धक्का उसके पूरे वजूद को हच मचा दिया था,,, हलवाई की बीवी समोसे चलते हुए इस बात पर मुस्कुरा देगी अच्छा है उसके पति ने खटिया मजबूत लकड़ी का बनवाया था वरना रघु की घमासान चुदाई की वजह से उसकी खटिया भी टूट जाती है और फिर वह टूटी हुई खटिया के बारे में अपने पति को क्या जवाब देती,,,

क्या बात है चाची बहुत मुस्कुरा रही हो,,,

कुछ नहीं रे कुछ याद आ गया था,,,।

क्या याद आ गया था चाची हमें भी तो बताओ,,,

तुझे बताने लायक नहीं है,,,( हलवाई की बीवी उसी तरह से रघु की तरफ देखे बिना कढ़ाई में से समोसे तलती रही,,,।)

ऐसी कौन सी बात है जो मुझे बताने लायक नहीं है जबकि सब कुछ खोल खोल कर तुमने मुझे दिखा दि हो,,,

( रघु के मुंह से सब कुछ दिखाने वाली बात सुनते ही शर्म के मारे हलवाई की बीवी के गाल लाल हो गए और वह शर्मा कर मुस्कुराने लगी और बोली,,।)

दिखाने और बताने में फर्क होता है,,,।

( रघु समझ गया कि बात पर ज्यादा जोर देने में भलाई नहीं है इसलिए वह बात को बदलते हुए बोला,,,।)

वैसे चाची उस दिन तुम्हारा समोसा बहुत गर्म था,,,( हलवाई की बीवी के ब्लाउज में से जाते हुए उसकी चुचियों को घूरते हुए रघु बोला,,,।)

हमारा समोसा हमेशा गर्म ही रहता है,,, एकदम तरोताजा मसाले से भरपूर,,,,( हलवाई की बीवी मुस्कुराते हुए बोल रही थी,,, वह रघु के कहने का मतलब अच्छी तरह से समझ रही थी तभी तो वह भी उसी के सुर में जवाब भी दे रही थी,,)

पता है क्या जी अभी तक तुम्हारे समोसे के मसाले का स्वाद मेरी जीभ पर है,,, इसलिए तो यहां आया हूं एक बार फिर से तुम्हारे गरमा गरम मसाले से भरपूर तरोताजा समोसे का स्वाद लेना चाहता हूं,,,।( रघु उसी तरह से हलवाई की बीवी की बड़ी-बड़ी चूचियां को घुरता हुआ बोला,,, तिरछी नजरों से हलवाई की बीवी रघु की तरफ देख ले रहे थे मेरे को अच्छी तरह से जान रही थी कि मैं को उसके ब्लाउज में से झांकते हुए उसकी चूचियों को देख रहा है लेकिन फिर भी साड़ी के पल्लू से अपनी छातियों को ढकने की बिल्कुल भी तसदी नहीं ली,,, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि जो इंसान उसके घर पहुंची जैसे चुचियों से रातभर खेला हो भला उसकी नजरों से छुपाने से क्या फायदा,,, रघु की बातें सुनकर हलवाई की बीवी आंखों को ना चाहते हुए रघु की तरफ देखी और बड़े ही मादक स्वर में बोली,,।)

नामुमकिन इस समय तो मैं तुम्हें अपनी गरमा गरम समोसे को बिल्कुल भी नहीं खिला सकती लेकिन हां गरमा गरम समोसे का दूर से दर्शन जरूर करा सकती हूं,,,,( हलवाई की बीवी चकर पकर अपने चारों तरफ देखकर बोली,,,, हलवाई की बीवी की यह बात सुनकर रघु के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ ने लगी,,।)

क्या सच में चाची तुम अपनी गरम गरम समोसे को मुझे दिखा सकती हो वह भी इस समय,,,,

क्यों नहीं मेरे राजा,,,,( हलवाई की बीवी पास में पड़े तपेलें के पानी से अपना हाथ धोते हुए बोली,,,।)

इतनी ही मेहरबान हो तो अंदर चलकर समोसा ही खिला दो दिखाओगी तो भूख और ज्यादा बढ़ जाएगी,,,,।

जब भूख ज्यादा बढ़ेगी तभी तो परोसी गई थाली का भरपूर फायदा उठाओगे और जी भरकर खाओगे तब तुम्हें खाने में और मुझे खिलाने में बहुत मजा आएगा,,,

( हलवाई की बीवी के शब्दों में कामुकता भरी जलेबी की तरह मिठास भरी हुई थी जिसे सुनकर और उसकी कामुक अदा को देखकर रघु के पजामे में खलबली मची हुई थी,,,।)

तो अभी क्या हुआ चाची चलो घर में मौका भी है दस्तूर भी है,,,।

अंदर तेरे चाचा जी है जो ऊबाले हुए आलू को छील रहे हैं,,,

( यह सुनकर रघु के सारे अरमान पानी में बह गए,,, रघु को उदास होता हुआ देखकर हलवाई की बीवी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,।)

तू चिंता मत कर कभी कभी समोसा खाने से बेहतर समोसे का दर्शन करना भी हो जाता है आज दर्शन ही कर ले फिर कभी मौका मिलेगा तो खिला दूंगी,,,।

लेकिन ये दोनों,,,( रघु वहां पास में बैठे दोनों शराबियों की तरफ इशारा करते हुए बोला,,,।)

तुम दोनों की चिंता बिल्कुल भी मत करिए दोनों पक्के शराबी है तू ईनके ऊपर मौत के भी चला जाएगा तो भी नहीं लगेगा कि शराब का जाम छलक गया है,,,

( उसकी बातें सुनकर रघु हंसने लगा और हलवाई की बीवी के ब्लाउज का ऊपर का बटन खुला देख कर बोला,,,।)

चाची यह तुम ब्लाउज के ऊपर का बटन जानबूझकर खोलती हो या तुम्हारी बड़ी बड़ी चूची हो की वजह से अपने आप ही खुल जाता है,,,

मेरे राजा तेरी नजर इधर उधर बहुत जाती है,,, मैं इसे (अपनी चुचियों की तरफ हाथ से इशारा करते हुए) जानबूझकर ही खोल देती हूं क्योंकि चूल्हे के सामने बैठे बैठे पूरा शरीर गरम हो जाता है इसलिए थोड़ी बहुत हवा चाहिए रहता है ना और तू तो अच्छी तरह से जानता है कि मेरे ब्लाउज का साइज मेरी चूचियों के सारे से छोटा ही है इसलिए बहुत कसा कसा सा लगता है इसलिए मुझे एक बटन खोलना ही पड़ता है,,,।

क्या बात है चाची लेकिन तुम्हारी यह जानबूझकर की गई गलती से यहां आने वाले ग्राहकों में कितना उत्साह रहता है जलेबी से ज्यादा तो तुम्हारे ब्लाउज के अंदर से झांकते हुए दोनों दशहरी आम का रस अपनी आंखों से पीकर मस्त हो जाते हैं,,,,।

वह सब सिर्फ आंखों से ही पीते हैं लेकिन तू तो अपना मुंह लगाकर पिया है,,,,,

वह तो है चाची,,,( इतना कहकर अपने पजामे में बने तंबू को अपने हाथ से ठीक करते हुए,,,) अब ऐसा करो चाची की जल्दी से दिखा दो कहीं चाचा जी आ गए तो इस पर भी पानी फिर जाएगा,,,

( अपने पजामे में बने तंबू को ठीक करते हुए हलवाई की बीवी की नजर रघु पर पड़ गई थी और मंद मंद मुस्कुराते हुए बोली)

तेरा खड़ा बहुत जल्दी हो जाता है,,,,

और तब तो तुम यह भी जानती होगी कि बिना तीन चार बार पानी निकाले शांत भी नहीं होता,,,,।

वह तो मैं देखी चुकी हूं जो भी तेरा लेगी ना सच में तेरी दीवानी हो जाएगी,,,

तुम हुई क्या चाची,,,,?

मत पूछ इस जालिम अभी भी पूरे बदन में मीठा मीठा दर्द होता है,,,।

वह तो होगा ही चाची,, मेहनत भी तो तुमने बहुत की थी,,,।

( जितना देखने की उत्सुकता रघु में थी उससे कई ज्यादा उत्सुकता हलवाई की बीवी को अपनी बुर रघु को दिखाने में थी,,,, गंदी गंदी बातें करते हुए हलवाई की बीवी की बुर उत्तेजना के मारे समोसे की तरह फूलने लगी थी,,, वह जल्द से जल्द अपनी पुर के दर्शन रघु को कराना चाहती थी इसलिए एक बार फिर से अपने चारों तरफ देखने लगे और एक नजर दोनों शराबियों पर डाली जो कि अपनी ही मस्ती में डूबे हुए थे,,, एक बार पीछे की तरफ देखें जो कि दरवाजा बंद था वह समझ गए कि अभी भी उसका पति अंदर आलू छील रहा,,, मौका सही था,,, धीरे-धीरे अंधेरा होने लगा था दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था इसलिए मौके की नजाकत को देखते हुए हलवाई की बीवी अपने दोनों टांग को घुटनों से मोड़कर हल्का सा फैला ली और धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ सरकाने लगी,,,, रघु की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी हालांकि रात भर हलवाई की बीवी की ओर से जैसे मर्जी आया वैसे खेल चुका था लेकिन फिर भी उसे देखने की तमन्ना उसके मन में जोर मार रही थी,,,, मर्द और औरत के बीच यही बात एकदम समान होती है चाहे जितना भी औरत मर्द का लंड अपनी बुर में ले ले,,,, लेकिन कुछ समय के अंतराल के बाद एक बार फिर से अपनी बुर में लेने की इच्छा पूरी तरह से प्रज्वलित हो जाती है और उसी तरह से मर्द की भी हालत होती है वह भी औरत की बुर से दिन-रात खेलने के बाद भी उसकी प्यास उसे देखने की और उसमें लंड डालने की हमेशा बनी रहती है और इसी प्यास के चलते रघु धड़कते दिल के साथ हलवाई की बीवी के एकदम करीब खड़ा था जहां पर चूल्हा जल रहा था और उस पर कढ़ाई रखी हुई थी जिसमें तेल एकदम खोल रहा था,,, ऐसे में हलवाई की बीवी अपनी बुर दिखाने के लिए साड़ी ऊपर की तरफ कर रही थी जो कि सारे समा में आग लगा देने वाली थी,,, हलवाई की बीवी भी कुछ कम नहीं थी वह बड़े धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी,,, धीरे-धीरे वह समा में आग लगाने की सोच रही थी यह बात तो अच्छी तरह से जानती थी कि,, चूल्हे की आग से कहीं ज्यादा गर्म और तपन उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर में है,,।

रघु का दिल जोरों से धड़क रहा था वह बार-बार अपने खड़े लंड को अपने हाथ से पकड़ ले रहा था,,, अगर घर के अंदर उसका पति ना होता तो शायद आज वह हलवाई की बीवी को उसी जगह पर लिटा कर उसकी चुदाई कर देता लेकिन वह भी मजबूर था,,,,

जल्दी करो चाची अब क्या मेरा पानी निकाल दोगी,,,

तेरा इतने जल्दी निकलने वाला नहीं है,

तुम इतना तड़पाओगी तो निकल ही जाएगा ,,,( रघु जोर से अपने लंड को दबाते हुए बोला,,,।)

अच्छा ले बस दिखा देती हू,,,( इतना कहने के साथ ही हलवाई की बीवी झट से अपने घुटनों के बल बैठ गई और अपनी साड़ी को एकदम से कमर तक उठा दी,,,, रघु तो आंखें फाड़े देखता ही रह गया,,, हलवाई की बीवी की बुर कचोरी जैसी फूली हुई थी इस समय उसकी बुर एकदम मासूम लग रही थी जिसे देखकर रघु को उसके ऊपर ढेर सारा प्यार आ रहा था लेकिन प्यार करने के लिए समय नहीं था हलवाई की बीवी अपनी साड़ी कमर तक उठाए हुए चारों तरफ देख रही थी कि तभी दरवाजा खुलने की आहट हुई और झट से साड़ी नीचे करके बैठ गई,,,,, अंदर से उसका पति सिले हुए आलू बड़े से पतीले में लेकर आया और उसके करीब रखता हुआ बोला,,,।

ले जल्दी जल्दी ईसे तैयार कर दे,,,,

चाचा जी चाची के हाथों में जादू है चाची का समोसा बहुत गर्मा गर्म और मसालेदार होता है तभी तो मैं रोज यहां आ रहा हूं,,,।

सब भगवान की कृपा है बेटा,,, चाची के समोसे खाने रोज आया करो,,,,

सो जाऊंगा चाचा भला इतने गरमा गरम समोसे कहीं मिल पाते हैं,,, पूरे गांव में नहीं मिलते तभी तो मैं रोज यहां खिंचा चला आता हूं,,,,,

( हलवाई का पति मुस्कुराते हुए अपनी बीवी के करीब बैठकर छिले हुए आलू को जोर जोर से मसलने लगा,,, रघु समझ गया कि अब उसकी दाल से ज्यादा गलने वाली नहीं है,,,, इसलिए वह बोला,,,।)

अच्छा चाची में चलता हूं आज तो गरमा गरम समोसे के दर्शन करके ही मन एकदम भर गया,,,, किसी दिन जी भर कर खाऊंगा,,,,( इतना कहकर रघु गांव की तरफ जाने लगा तो हलवाई की बीवी पीछे से आवाज लगाते हुए बोली,,।)

आते रहना बेटा,,,

आता रहूंगा चाची,,,,

( और इतना कह कर रघु गांव की तरफ चल दिया,,,, रात को हलवाई की बीवी की मस्त चिकनी बुर को याद करके खाना खाने लगा,,,, खाना खाकर जैसे ही बिस्तर पर लेटा नींद की आगोश में चला गया,,,, सुबह हो चुकी थी कजरी खेतों पर चली गई थी और शालू घर का काम करके खाना बना रही थी कि तभी उसे याद आया कि उसका भाई तो घर में सो रहा है उसे जगाना जरूरी था और वह उसे जगाने के लिए रसोई से उठ गई,,,।)

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शालू अपने भाई को जगाने के लिए रसोई करते हुए उठ गई थी वह उस दिन वाली बात बिल्कुल भी भूल गई थी जब अपने भाई को जगाने के लिए गई थी और उसे जबरदस्त नजारा दिखाई दिया था,,,, और दूसरी तरफ रघु और चुका था लेकिन अल शाया हुआ था सुबह का समय था इसलिए शरीर में उत्तेजना का संचार हो रहा था हलवाई की बीवी की मस्ती भरी बातें और उसका साड़ी उठाकर समोसे रूपी बुर के दर्शन कराने वाले दृश्य को याद करके वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था जिसकी वजह से उसका लंड पूरी आजादी के साथ हवा में लहरा रहा था और नींद में होने की वजह से कमर से लपेटा हुआ टावल एकदम से खुल गया था या यूं कह लो कि कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगा था,,, वह यही सोच रहा था कि उसे कोई जगह नहीं नहीं आएगा इसीलिए निश्चिंत होकर कुछ देर और सोने की मन में ठान करवा अपनी आंखों को बंद कर लिया लेकिन कमर के नीचे के अंग में उत्तेजना के संचार की वजह से उसे नींद नहीं आ रही थी,,, वह इधर-उधर सिर घुमा कर आंखों को बंद करके सोने की चेष्टा कर रहा था लेकिन जब एक बार बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगे तो नींद कहां आने वाली थी और वह भी उसके ख्यालों की मल्लिका भी बेहद खूबसूरत है भरे बदन की मालकिन थी जिसकी हर एक अदा में मादकता छलकती हुई उसे नजर आती थी,,, इस समय उसके जेहन हलवाई की बीवी बसी हुई थी और बार-बार उसकी आंखों के सामने उसका साड़ी उठाकर अपनी बुर के दर्शन कराना वही दृश्य नजर आ रहा था,,,

कमरे में वह निश्चिंत होकर सोने की कोशिश कर रहा था और कमर के नीचे पूरी तरह से नंगा होने के बावजूद भी उस पर चादर डालने का ख्याल बिलकुल भी उसके मन में नहीं आ रहा था वह पूरी तरह से निश्चिंत था और दूसरी तरफ शालू काफी देर होने की वजह से उसे जगाने के लिए जा रही थी,,,, रघु पीठ के बल लेटा हुआ था एकदम सीधा और अपना मुंह दूसरी तरफ फिर कर सोने की कोशिश कर रहा था आंखें बंद थी कि तभी उसे दरवाजे पर आठवी चूड़ियों की आवाज सुनकर उसे समझते देर नहीं लगी कि उसकी बड़ी बहन शालू दरवाजे पर है अब वह करे भी तो क्या करें अभी भी उसका लंड पूरी तरह से खड़ा होकर अपनी औकात दिखा रहा था अगर इस समय वह अपने खड़े लंड पर चादर डालकर उसे छुपाने की चेष्टा करता है तो उसकी बहन को यही लगेगा कि उसका भाई कुछ गंदी हरकत कर रहा था तभी उसका नंबर इस तरह से खड़ा है उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें लेकिन शालू के तन बदन में आग लग गई थी एक बार फिर से अपने भाई के खड़े लंड के दर्शन करते ही उसे उस दिन वाला दिल से याद आ गया जो कि आज वही दृश्य दोहराया जा रहा था,,,। शालू का पूरा वजूद कांप गया वह दरवाजे पर ठिठक गई उसकी आंखों के सामने उसके भाई का खड़ा लंड था जोकि कि आज वह दूसरी बार देख रही थी,,,,

शालू को भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वापस चली जाए या हाथ में आई इस मौके का अपनी नजरों से मजा ले,,,, हालांकि शालू का व्यक्तित्व बिल्कुल भी ऐसा नहीं था लेकिन कुछ दिनों से वह बदली बदली सी नजर आ रही थी जब से वह अपने भाई के खड़े लंड को देखी थी और यह बात बीजू के मुंह से सुनी थी कि उस दिन जब हो तब आप से नंगी होकर बाहर भाग रही थी तब पीछे से उसके भाई ने उसके संपूर्ण नंगे व्यक्तित्व को देख लिया था लेकिन यह नहीं जान पाया था कि वह नंगी लड़की उसकी की बहन है,,,,

शालू का दिल जोरों से धड़क रहा था वो कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह से अपने भाई के खड़े लगने के दर्शन कर पाएगी जोकि अनजाने में ही हुआ था और वह भी दूसरी बार वह बार-बार दरवाजे पर खड़ी होकर बाहर की तरफ देख ले रही थी कि कहीं उसकी मां तो नहीं आ रही है वह कुछ देर तक यूं ही दरवाजे पर खड़ी रही,,। रघु को समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी बहन उसकी खड़े लंड को देखने के बावजूद भी दरवाजे पर खड़ी क्यों है शर्मा कर चले क्यों नहीं गई,,, इस समय रघु का बदन पूरी तरह से कसमसा रहा था,,, उसे अपनी बड़ी बहन शालू पर थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था,,,,

रघु ऐसी स्थिति में था कि अपने नंगे बदन को छुपा भी नहीं सकता था,,, वह ऐसा ही जताना चाह रहा था कि उसकी बहन को लगे कि वह पूरी तरह से गहरी नींद में है,,, वह उसी तरह से दूसरी तरफ मुंह करके आंखों को बंद किया हुआ लेटा रहा हलवाई की बीवी की कल्पना इतनी जबरदस्त थी कि इस तरह के कठिन समय में भी उसके लंड की कठोरता बरकरार थी उस में जरा भी ढीलापन नहीं आ रहा था,,,,। शालू का दिल जोरों से धड़क रहा था पूरे कमरे में केवल उसकी दिल की धड़कन की आवाज सुनाई दे रही थी उसकी सांसे गहरी चल रही थी वह भी नहीं समझ पा रही थी कि वापस चली जाए या अपने भाई के खड़े लंड को देखती रहे क्योंकि वाकई में खड़ा लैंड कितना बेहतरीन और लाजवाब होता है यह बात शालू को आज पता चल रही थी वैसे तो वह पहले भी अपने भाई के लंड को देख चुकी थी लेकिन आज कुछ ज्यादा देर तक उसे अपने भाई का लंड देखने को मिला था,,,, साथ ही अपने भाई के लंड को देख कर उसे आम के बगिया वाला दृश्य याद आने लगा जब बिरजू से अपनी बाहों में भर कर उसके होठों को चूम रहा था और पजामे में टाइट हुए अपने लंड को उसकी टांगों के बीच रगड़ रहा था उस रगड़ को महसूस करते ही शालू की हिम्मत बढ़ने लगी,,,। इतनी देर तक खड़े रहने के बाद उसे इस बात का आभास तो हो ही गया था कि उसका भाई गहरी नींद में सो रहा है वरना उसके आने की आहट सुनकर वह अपने नंगे बदन को छुपाने की जरूर कोशिश करता लेकिन उसके बदन में बिल्कुल भी हरकत नहीं हो रही थी इसलिए वह चोर कदमों से आगे बढ़ी,,, वह अपनी कलाइयों में खनक रही चूड़ियों की आवाज को दबाने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन उसकी चूड़ियां खनक जा रही थी और खनकती हुई चूड़ियां की आवाज और पैरों के कदमों की आहट रघु के कानों में साफ सुनाई दे रही थी उसे इस बात का आभास हो गया था कि उसकी बड़ी बहन शालू उसके करीब आ रही है,,,। उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि इस तरह का दृश्य देखने के बाद वह शर्मा कर चले जाने की बजाय उसके करीब क्यों आ रही है,,,। अब तो अपने करीब आ रही चूड़ियों की आवाज को सुनकर उसका बदन कसमसा ने लगा उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था कि इस तरह की चिंता की घड़ी में भी उसका लंड ज्यों का त्यों बना हुआ है ढीला बिल्कुल भी नहीं हो रहा है ताकि उसकी बहन वहां से चली जाए,,,,

शालू धीरे-धीरे करके अपने भाई के खाट के बिल्कुल करीब पहुंच गई,,,, वह कुछ देर तक खड़ी होकर अपने भाई के खड़े लंड को निहारती रही बेहद दमदार और मोटा लंड देखकर उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,,। उत्तेजना के मारे शालू का गला सूख रहा था जिसे वह बार-बार अपने थूक से गिला करने की कोशिश कर रही थी,,,, शालू अभी भी नहीं समझ पा रही थी कि उसे वहां रुकना चाहिए या चले जाना चाहिए,,।

शालू पूरी तरह से जवान हो चुकी थी जवानी की लहर उसके तन बदन को भी हिचकोले खिला रही थी इसीलिए तो वह अपने भाई के खड़े मोटे तगड़े लंबे लंड के आकर्षण से ही वह अपने मन को बहकने से बचा भी नहीं पा रही थी,,,,। शालू कभी रघु के चेहरे की तरफ देखती तो कभी उसकी कमर के नीचे के बेहतरीन नजारे की तरफ रघु अभी भी निश्चिंत होकर आंखों को बंद किया हुआ लेटा था जो कि शालू को यही लग रहा था कि उसका भाई गहरी नींद में सो रहा है आखिरकार शालू निर्णय ले ली वह धीरे से अपने भाई के खटिया के करीब बैठ गई,,, वह निश्चिंत बिल्कुल भी नहीं थी वह पूरी तरह से सजग थी एकदम चौकन्नी,,, पूरी तरह से तैयार था कि जरा भी हलचल रघु के बदन में हो तो वह वहां से नौ दो ग्यारह हो जाए और उसके भाई को पता भी ना चले,,,, गला पूरी तरह से सूख चुका था दिल जोरों से धड़क रहा था,,, वह खटिया के करीब बैठकर अपनी फटी आंखों से अपने भाई के टन टनाते हुए लंड को देख रही थी,,,,, आज पहली बार उसे पता चल रहा था कि जिस तरह से उसकी बुर के इर्द-गिर्द रेशमी बालों का झुरमुट रहता है उसी तरह से मर्दों के लंड के इर्द-गिर्द बालों के झुरमुटो की झांठ रहती है,,,,, और उन झांटों के बीच खड़ा लंड बहुत ही मनमोहक लग रहा था,,,। अपने भाई के खड़े लंड को देख कर उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसका भाई भी अब जवान हो रहा है,,,।

शालू अपने भाई के नंबर को अपने हाथ से अपनी नाचू को मिली है उसे स्पर्श करना चाहती थी उसे छूना चाहती थी उसे अपनी हथेली में पकड़ कर देखना चाहती थी कि कैसा लगता है लेकिन इसमें रघु के जाग जाने का डर था,,, वह पकड़ी जा सकती थी और अगर उसे इस तरह की हरकत करता हुआ उसका भाई देख लेता तो उसके बारे में क्या सोचता,,,, उसके दिमाग में यही ख्याल आ रहा था और फिर उसका मन कहता है कि डर क्यों रही है तेरा भाई गहरी नींद में सो रहा है अगर जाग ना होता तो अब तक जाग चुका होता एक बार अपने भाई के लंड को अपने हाथ में पकड़ कर देख ले,,, महसूस कर ले कि एक लंड को हाथ में पकड़ कर कैसा लगता है,,,,।

शालू अपने मन में चल रहा है ख्यालों के बवंडर मैं से समझ में नहीं आ रहा था कि किसका हाथ पकड़ कर बाहर निकले हालांकि ख्यालों पर आकर्षण का दबाव बराबर बना हुआ था,,, शालू अपनी तेज नजरों से अपने भाई को लंड के मोटे सुपाड़े को देख रही थी जो कि एकदम बदामी रंग का हो गया था,,, और गोलाकार सुपाड़े के नीचे पतली चमड़ी में आई सिकुड़न लंड के आकर्षण को और ज्यादा बढ़ा रही थी,,,, लंड के चारों तरफ नशे ऊभरी हुई थी जिनमें रक्त का संचार बड़ी तेजी से हो रहा था,,,। शालू काफी देर से अपने भाई के खड़े लंड को देख रही थी लेकिन इस बात से हैरान थी कि इतना दमदार मोटा तगड़ा लंड होने के बावजूद भी अभी तक उस में जरा भी झुकाव नहीं आया था ना इधर झुक रहा था ना उधर बस सीधा ही खड़ा था,,,,।

रघु की हालत खराब होती जा रही थी चूड़ियों की खनक और गहरी चल रही सांसो की आवाज से उसे इतना तो आभास हो गया था कि उसकी बहन उसके बेहद करीब बैठी हुई है,,,,। और इस बात का एहसास की उसकी बहन उसके बेहद करीब बैठ कर उसके खड़े लंड को देख रही है वह पूरी तरह से उत्तेजना से भरने लगा,,, क्योंकि अच्छी तरह से जानता था कि भले ही वह आंखें खोल कर अपनी बहन की तरफ ना देखा हो लेकिन इतना तो वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बहन जवान हो चुकी थी और जवानी की याद शायद उसके तन बदन को भी जला रही थी तभी तो वह यहां से चले जाने की वजह उसके खड़े लंड को देखकर उसके बेहद करीब आकर बैठ गई थी इस बात का एहसास रघु को भी उत्तेजना के सागर में खींचता चला जा रहा था,,,।

एक नजर अपने भाई की तरफ डाल कर उसके गहरी नींद में होने की तसल्ली कर लेने के बाद,, अपना हाथ आगे बढ़ाई रघु के लंड की तरफ उसके हाथों के साथ-साथ पूरे बदन में कंपन खेल रही थी खास करके उसकी टांगों के बीच की उस पतली दरार में जिसकी वजह से शालू इतनी हिम्मत दिखा रही थी,,,, उंगलियों में कंपन शालू को साफ नजर आ रही थी,, धीरे-धीरे शालू का हाथ अपने भाई के लंड के बेहद करीब पहुंच गया,,,, एक बार तो उसके मन में आया कि उठकर यहां से चली जाए लेकिन अपने भाई के लंड के आकर्षण में वह पूरी तरह से बंध हो चुकी थी,,, रघु को इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसकी बहन उसके लंड को पकड़ने जा रही है,,,। मुझे ऐसे ही अपनी बहन की नाजुक नाजुक उंगलियों का स्पर्श उसे अपने लंड के ऊपर हुआ वह एकदम से कसमसा गया उसके पूरे बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी,,, साडू अभी अपने भाई के लंड को पूरी तरह से पकड़ी नहीं थी बस अपनी नाज़ुक उंगलियों का स्पर्श भर कराई थी,,,, अपनी बहन के नाजुक हूं गोलियों का स्पर्श अपने लंड पर होते हैं अपने आप ही उसके कमर हल्के से ऊपर की तरफ हो गई थी और अपने भाई के बदन में आई हरकत को देखकर शालू उसी तरह से बस अपने भाई के लंड पर अपनी उंगलियां सटाई रही,, इस बात का इंतजार कर रही थी कि उसकी हरकत पर उसकी भाई की नींद खुलती है या अभी भी वह गहरी नींद में सोया रहता है और रघु जानबूझकर आंखों को बंद किया हुआ सोने का नाटक करता रहा क्योंकि अब उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी कुछ देर पहले जब अपनी बहन की हरकत पर वह गुस्सा हो रहा था,,, तब से इस बात का अहसास तक नहीं था कि अपनी बहन की हरकत की वजह से उसके तन बदन में कामोत्तेजना की लहर दौड़ने लगेगी,,, लेकिन अब उसका ख्याल बिलकुल बदल चुका था,,,

शालू का दिल जोरों से धड़क रहा था और उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था,,, कुछ देर तक अपने भाई के बदन में हरकत ना होता देखकर शालू अपने भाई के लंड को पूरी तरह से अपनी हथेली में जकड़ ली,,, उसकी हथेली पूरी तरह से गर्म हो गई और उससे भी ज्यादा गर्मी उसे अपनी बुर के अंदर महसूस होने लगी पहली बार उसे इस बात का अहसास हो रहा था कि लंड वाकई में बहुत गर्म होता है,,,। शालू को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसके भाई का लंड ज्यादा मोटा था दूसरी तरफ रघु के तन बदन में आग लग रही थी जिस तरह से उसकी बहन उसके लंड को पकड़े हुए थी,,,। उसका मन कर रहा था कि इस नाटक पर पर्दा डाल कर अपनी आंखें खोल दी और अपनी बहन को उसी खटिया पर लेटा कर उसकी बुर में अपना लंड डाल दे क्योंकि अब तक रघु को इस बात का पता चल गया था कि उसकी बहन के मन में भी चुदाई करवाने की भूख बढ़ रही है,,, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी पहली बार में ही वह इस तरह से कैसे अपनी बहन की चुदाई कर दे आखिरकार वह उससे बड़ी थी इसलिए रघु आंखों को बंद किए हुए उसी तरह से लेता रहा वह देखना चाहता था कि अब उसकी बहन क्या करती है,,।

शालू का दिल जोरों से धड़क रहा था और ऐसा होता भी क्यों नहीं जिंदगी में पहली बार तो वह मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड को अपने हाथ में जो ले रही थी उसका कठोर बंद उसे अपनी नरम नरम हथेलियों में चुभ रहा था। अब से पहले वह नहीं जानती थी कि लंड इतना कठोर होता है,,, वह अपनी हथेली को अपने भाई के लंड के इर्द-गिर्द एकदम दबोची हुई थी जिसकी वजह से शुभम के लंड की चमड़ी ऊपर की तरफ चढ़ गई थी और उसका मोटा सुपाड़ा आधा ढक गया था,,,, शालू उसके संपूर्ण सुपाड़े को देखने के लिए अपनी मुट्ठी में कसे हुए रघु के लंड को नीचे की तरफ अपनी हथेली खींची तो वह चमड़ी उसकी सुपाड़े पर से नीचे की तरफ आ गई और उसे लंड का संपूर्ण सुपाड़ा नजर आने लगा,,, और वही हरकत फिर से वह ऊपर की तरफ की और बार-बार वह अपनी हरकत को दोहराने लगे उसे अपने भाई के लंड को मुठिया ने में मजा आ रहा था लेकिन रघु की तो हालत खराब होती जा रही थी शायद उसकी बहन को यह नहीं मालूम था कि इस तरह से लंड को मुठीयाने से उस में से पानी की पिचकारी निकल जाती है,,,, रघु को मजा भी आ रहा था वह आंखों को बंद किए हुए अपनी बहन की हरकत का मजा ले रहा था,,, शालू का दिल जोरों से धड़क रहा था लंड की गर्माहट उसके पूरे वजूद को गर्म कर रही थी,,,लंड की गर्मी को अपनी हथेली में महसूस करके उसे अपनी जांघों के बीच कुछ पिघलता हुआ महसूस हो रहा था,,,,शालू इस खेल को आगे बढ़ा थी कि तभी उसे घर के बाहर बाल्टी रखने की आवाज सुनाई दी और वह छठ से खड़ी हुई और ज्यों का त्यों छोड़कर कमरे से बाहर निकल गई रसोई केकरी पहुंचकर देखी तो उसकी मां हैंड पंप से पानी भरकर लाई थी,,,,वह रसोई के करीब बैठ गई और अपनी ऊखडती सांसो को दुरुस्त करने में लग गई,,,

रघु की हालत खराब थी वह जान गया था कि बाहर उसकी मां आ गई है लेकिन यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि वह उसे जगाने के लिए अंदर नहीं आएगी क्योंकि वह नहाने जा रही थी,,,,, शालू ने जिस तरह का अद्भुत उत्तेजना का संचार उसके तन बदन में फैलाई थी अब उसे पूरा करने का जिम्मेदारी रघु पर आ गई थी और वह अपनी बहन के खूबसूरत चेहरे और उस दिन अनजाने में देखी हुई उसकी नंगी चिकनी गोरी गोरी जांघ और उसकी गोलाकार गांड को याद करके अपने खड़े लंड को हिलाना शुरू कर दिया वह इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि जल्दी ही उसका पानी निकल गया,,,।

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रघु कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी बड़ी बहन इस तरह की गंदी हरकत करेगी,,, उसे गुस्सा तो आ रहा था लेकिन गुस्से के ऊपर उत्तेजना का प्रभाव कुछ ज्यादा ही भारी पड़ रहा था,,। जिंदगी में पहली बार किसी जवान लड़की ने और वह भी उसकी खुद की सगी बहन ने अपनी नाजुक नाजुक कोमल अंगुलियों से उसके कठोर लंड अपनी हथेली में जकड़ कर रखी थी,, कुछ देर अगर वह और उसके लंड को अपनी हथेली में दबाए हुए होती तो निश्चित ही उत्तेजना के मारे रघु का पानी उसकी बड़ी बहन की आंखों के सामने ही पिचकारी मार दिया होता,,, रघु यही सोच रहा था और अपने मन को यह तसल्ली देकर मना रहा था कि अच्छा हुआ उसके लंड का पानी नहीं निकला वरना उसकी बड़ी बहन को यही लगता कि वह जाग रहा है,,,।

रघु अपनी बहन से आंखें नहीं मिला पा रहा था इसलिए जल्दी से नहा धोकर घर से निकल गया उसकी बहन खाने के लिए उससे बोली तो वह बाद में खा लेगा ऐसा कहकर चला गया,,,,

शालू के तन बदन में आग लगी हुई थी जिंदगी में पहली बार उसने किसी लंड को अपने हाथ में ली थी,,, और अपने ही भाई के जवान लंड को अपने हाथ में लेकर खुद को जवान होने का एहसास दिलाई थी,,,। बाकी बची रोटियों को वह तवे पर रखकर उसे पका रहे थे उसे अपनी हथेली से गोल-गोल घुमाते हुए यही सोच रही थी कि गरम रोटी से भी ज्यादा तपन उसके भाई के मोटे तगड़े लंड में था,,, क्या वाकई में मर्दों का लंड इतना गर्म होता है,,। अपने सवाल का जवाब शायद उसके पास बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि वह इस समय जवानी की रूपरेखा में भले ही ढल चुकी थी लेकिन अनुभव की परत उसके तन बदन पर नहीं चढ़ी थी,,, इस सवाल के जवाब को समझने में अभी समय था,,,।

लेकिन इस बात का एहसास हो गया था कि उसके भाई के हस्बैंड को पकड़ कर उसके मन में उसके तन बदन में जिस तरह की खलबली मची हुई थी उससे उसकी टांगों के बीच की पतली दरार में से मदन रस हल्के रस की तरह बह रहा था,,। किसलिए शालू अपने आप को असहज महसूस कर रही थी बार-बार उसका हाथ उसके दोनों टांगों के बीच चला जा रहा था,। अपने भाई के लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसके पूरे तन बदन में उत्तेजना की जो चिंगारी भड़क रही थी वह शोला का रूप धारण करती उससे पहले ही वह अपने आप को संभाल ले गई थी लेकिन फिर भी ना जाने क्यों उसे अपने भाई के समूचे लंड को अपने बुर में लेने का मन कर रहा था,,,। शायद रघु की तरफ से कोई प्रतिक्रिया होती तो ऐसा हो भी सकता था लेकिन ऐन मौके पर उसकी मां आ गई थी,,,।

कुछ दिन तक शालू अपने भाई से नजर नहीं मिला पा रही थी और यही हाल रघु का भी था जबकि शालू इस बात से अनजान थी कि रघु को इस बात का पता था,,। रघु अपने मनोस्थिति को समझ नहीं पा रहा था,,,, अपनी बहन की हरकतों से तन से अच्छी लगती थी लेकिन मन से वह परेशान हो रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है क्या वह सही है अपनी मां के साथ भी वह अश्लील हरकत कर चुका था इसलिए वह कभी कभी अपने आप को भला बुरा कहने लगता था लेकिन अपनी मां और शालू दोनों को अपनी आंखों के सामने देखते ही वह सारी बातों को भूल कर फिर से उनके दैहिक लालित्य के आकर्षण में खो जाता था,,। इसलिए वह कभी-कभी अपने आपको बहुत ज्यादा परेशान और चिंतित महसूस करने लगा था,,,

कजरी खुद अपने बेटे की हरकत की वजह से अब एकदम सजग रहने लगी थी,, ना जाने क्यों अब उसे अपने बेटे के करीब जाने से डर लगने लगा था क्योंकि उसे अब तक अपनी टांगों के बीच उसके कठोर पन का स्पर्श साफ महसूस होता हुआ एहसास होता था,,, जब कभी भी वह एकांत में बैठकर उस दिन के बारे में सोचती थी तो उसके दिल की धड़कन जोरों से बढ़ने लगती थी क्योंकि वह भी तो एक औरत थी और बरसों बीत गए थे पुरुष संसर्ग कीए,,, इसलिए ना चाहते हुए भी उस पल की याद आते ही उसके तन बदन में झनझनाहट सी महसूस होने लगती थी,,,।

फिर भी जैसे तैसे करके हंसी खुशी में ही दिन गुजर रहा था,,,,, रघु दूसरी औरतों में बराबर आकर्षण का मजा ले रहा था लेकिन अब जानबूझकर अपनी मां और बहन दोनों के प्रति गंदी नजर से बच रहा था,,। लेकिन कब तक बच कर रह सकता था आखिरकार घर में दो दो मदमस्त रसीली बुर की मलिका जो थी,,,, सालु तो हमेशा मौके की तलाश में ही रहती थी कि कब उसे फिर से उसके भाई के खड़े लंड के दर्शन हो जाए,,, लेकिन जानबूझकर रघु टॉवल की जगह पजामा पहन कर सोने लगा था,,,। रघु की यह हरकत शालू के अरमानों पर पानी फेर रही थी,,,। दूसरी तरफ कजरी उस दिन की घटना के बाद से अपने बेटे के करीब जाने से थोड़ा सा कतराने लगी थी,,, लेकिन कजरी जितना अपने बेटे के करीब जाने से कतराती थी हालात उतना ही उसके और करीब ले जा रहा था था,,।

खेतों में गन्ने की कटाई हो चुकी थी,,,,, रघु उसकी मां और उसकी बड़ी बहन तीनों मिलकर दिन रात मेहनत करके गन्ने की कटाई करके घर पर बुलाकर रख दिए थे अब उसमें से उस का रस निकालकर गुड़ बनाने का काम चल रहा था जिसमें तीनों लगे हुए थे,,,। उन तीनों की मेहनत रंग लाई और गुड बनकर तैयार हो गया और वह भी एकदम मीठा और स्वादिष्ट,,, यह गुड कजरी साल भर के लिए रख देती थी,,, जोकि हमेशा काम आ जाता था,,,।

दोपहर का समय था शालू आंगन में सो रही थी,,, पांच डिब्बे देसी गुड़ के भरे हुए नीचे रखे हुए थे उसे चढ़ाकर ऊपर रखना था,,, ऊपर थोड़ा सा लकड़ी का छत से बना हुआ था सामान रखने के लिए उसी पर चढ़ाना था,,, रघु भी वही था,,,,,,

रघु तू जा बाहर से सीढ़ी लेकर आ,,,

( रघु झट से बाहर गया और सीढ़ी लेकर आ गया,,,,)

कहां लगाना है मां,,,

इधर ला इस साइट पर खड़ी कर सीढ़ी,,,

( कजरी के बताए अनुसार रघु सीढ़ी को उस दिशा में खड़ी करने लगा कि तभी शिर्डी के ऊपर सिरे से टकराकर ऊपर रखी हुई गुड़ के रस की कटोरी नीचे गिर गई और उसका सारा रस कजरी के साड़ी पर गिर गया,,,, कजरी एकदम से घबरा गई पहले तो उसे समझ में नहीं आया कि क्या हुआ लेकिन तभी उसे एहसास हुआ कि गुड़ का रस उसके ऊपर गिर गया है और गुड़ के रस की वजह से उसकी पूरी साड़ी खराब हो चुकी है,,,। रघु अपनी गलती मानते हुए अपनी मां से माफी मांगने लगा,,,, कजरी भी इस बात को ज्यादा तुलना देते हैं उसे माफ कर दी लेकिन गुड़ के चिपचिपा पन की वजह से उसे अजीब सा लग रहा था,,,।)

हे भगवान कितना खराब लग रहा है बदन पर ऐसा लग रहा है कि जैसे किसी ने गोंद गिरा दिया हो,,,।

मां एक काम करो तुम साड़ी उतार दो,,, और मुझे यह गुड़ का डिब्बा पकड़ाओ मे रख देता हूं,,,।( इतना कहकर वह सीढ़ी पर एक पांव रखा ही था कि उसे रोकते हुए कजरी बोली,,,।)

तू रुक मैं रख देती हूं तू अच्छे से नहीं रख पाएगा,,,

( इतना कहकर कजरी अपने कंधे पर से साड़ी का पल्लू हटाकर उसे उतारने लगी,,, पिछले कुछ दिनों से कजरी को रघु की नजरों में गंदा परन नजर नहीं आया था और रघु भी यह सब से बचता चला आ रहा था,,, इसलिए कजरी को रघु की आंखों के सामने साड़ी को उतारने में जरा भी असहज नहीं लग रहा था और वैसे भी वह जानबूझकर उसकी आंखों के सामने अपनी सारी नहीं उतार रही थी बल्कि उसके ऊपर गुड़ का रस गिर गया था जिसकी वजह से वह अपने आप को असहज महसूस कर रही थी और इसीलिए वह रघु की मौजूदगी में अपनी साड़ी उतार रही थी,,, अपनी मां और अपनी बहन को गंदी नजरों से ना देखने की रघु ने कसम खा रखी थी लेकिन अपनी नजरों को फेरने का कजरी ने रघु को जरा भी मौका नहीं दी थी वह औपचारिक रूप से अपने कंधे पर से साड़ी का पल्लू हटा दी थी और रघु की नजर उसकी उन्नत छातियों पर पड़ गई थी जिसका उपरी बटन खुला हुआ था और जिस में से कजरी की भरपूर जवानी बाहर आने को मचल रही थी उस पर नजर पड़ते ही रघु की ली हुई कसम हवा में फुर्र हो गई,,,, वह आंख फाड़े ब्लाउज में से झांकती हुई अपनी मां की मदमस्त जवानी को घूर रहा था,,,, कजरी यह सब से अनजान अपने बेटे की आंखों के सामने अपनी साड़ी को अपनी कमर पर से खोलने लगी,,, और इस अफरातफरी में कजरी के पेटीकोट की डोरी कमर पर से थोड़ी ढीली हो चुकी थी जिस बात का एहसास तक उसे नहीं हुआ,,,। और रघु की नजर पेटीकोट में कसी हुई उसकी मदमस्त गांड पर टिकी हुई थी जो कि पेटीकोट के अंदर बेहद खूबसूरत और उभरी हुई लग रही थी सुनवाई की बीवी की चुदाई कर चुका रघु संभोग के अनुभव से पूरी तरह से अवगत था इसलिए अपनी मां के नितंबों को देखकर उसका मन कर रहा था पीछे से जाकर उसे अपनी बाहों में भर ले और अपने लंड को उसकी रसीली बुर में पेल दे,,, लेकिन यह ख्याल मन में आते ही फिर से वह अपने मन को धिक्कार ने लगा कि यह वह क्या कर रहा है,,, उसने तो कसम खाई थी कि अपनी मां को गंदी नजरों से कभी नहीं देखेगा तो फिर यह क्या हो रहा है,,,। इसलिए रघु अपने मन को शांत करने के लिए अपनी मां की तरफ से नजरों को दूसरी तरफ फेर लिया,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,, बार-बार उसका मन कर रहा था कि अपनी मां की तरफ देख ले जोकि ब्लाउज और पेटीकोट में स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी,,,।

लेकिन ना जाने क्यों उसका जमीर गवाही नहीं दे रहा था जोकि पहले भी वह अपनी मां के साथ अश्लील हरकत कर चुका था एक तो उसे खेतों में पेशाब करते हुए देख चुका था और उसकी भारी-भरकम नंगी गोरी गांड को देखकर एकदम मस्त भी हो गया था जिसकी वजह से वह खेत में अपनी मां के गले लगने के बहाने उसे अपनी बाहों में भर कर उसके नितंबों पर अपनी हथेली को रखकर अपने लंड के कठोर पन को उसकी टांगों के बीच धंसा दिया था,,,, लेकिन वह यह सब बातों को समझता था वह जानता था कि जो कुछ भी होगा रहा है वह नैतिक तौर पर बेहद गलत था मान मर्यादा के खिलाफ और अपनी ही मां के साथ यह तो सरासर पाप था इसलिए वह अपने आप को इस बात से बचाना चाहता था,,,।

कजरी अपनी साड़ी उतार कर नीचे रख दी और सीढ़ी पर अपना पांव रखते हुए बोली,,,।

अरे उधर क्या देख रहा है मुझे जल्दी से गुड का डब्बा थमा,,,

( कजरी समझ गई कि वह साड़ी उतार रही थी इसलिए उसका बेटा दूसरी तरफ नजर करके खड़ा हो गया था या देखकर कजरी का मन प्रसन्नता से भर उठा कि उसका बेटा अनजाने में ही वह हरकत किया था असल में वह मन से एकदम साफ है,,, रघु के मासूमियत पर उसके होठों पर मुस्कान आ गई और वह जल्दी-जल्दी सीढ़ियां चढ़ गई और रघु से बोली,,।)

रघु अब जल्दी से मुझे गुड़ का डब्बा थमा दे,,,

ठीक है ना मैं अभी गुड़ का डब्बा थमाता हूं,,,,( इतना क्या कर रहा हूं गुड के डब्बे को पकड़कर उसे अपने हाथों में उठा लिया और ऊपर की तरफ करके अपनी मां के हाथों में थमाने लगा उसकी मां थोड़ा सा नीचे झुककर गुड़ का डब्बा अपने हाथों में थाम ली और उसे लकड़ी के बने छत पर रखने लगी,,, रघु ठीक सीढ़ियों के नीचे खड़ा था और उसके ऊपर कजरी चढ़ी हुई थी रघु अपनी मां की तरफ ऊपर देखा तो दंग रह गया एक बार फिर से उसका मन डोलने लगा क्योंकि उसकी नजर ठीक पेटीकोट के अंदर जा रही थी,,, हालांकि पेटीकोट के अंदर पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था लेकिन फिर भी पेटीकोट के अंदर नजर जाते ही एक एहसास रघु के तन बदन को झकझोर गया,,,। क्योंकि यह बात रघु अच्छी तरह से जानता था कि पहले यह उसे पेटीकोट के अंदर काला अंधेरा नजर आ रहा है लेकिन उस काले अंधेरे के अंदर प्रवेश करने के बाद जिंदगी का सच्चा उजाला ही उजाला है,,, जिस में प्रवेश करके इंसान जिंदगी के सारे अंधकार को भूल जाता है और उसकी चकाचौंध रोशनी में अपने आप को पूरी तरह से डूबो देता है,,, तेरे को को अपनी मां की पेटी कोर्ट के अंदर सिर्फ घुटनों तक का हिस्सा ही साफ नजर आ रहा था लेकिन उसके ऊपर का हिस्सा पेटीकोट में फैले अंधेरे की वजह से दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन फिर भी रघु अंदर झांकने की भरपूर कोशिश कर रहा था,,,।

एक डिब्बा रखने के बाद कजरी वापस नीचे झुकी और रघु के हाथों से गुड़ का दूसरा डब्बा भी ले ली। उसी तरह से वह चार डिब्बे को ऊपर रख चुकी थी इस बात से अनजान के नीचे उसका बेटा उसके पेटीकोट के अंदर नजरें गड़ाए खड़ा है उसे तो यही लग रहा था कि उसका बेटा सुधर गया है और वाकई में वह अपनी मां के प्रति गंदी नजर नहीं रखना चाहता था लेकिन अपने मन को कैसे समझाएं जब आंखों के सामने ही इस तरह का मादक दृश्य नजर आ जाता था तो वह अपने मन को रोक नहीं पाता था,,,, रघु अपनी तरफ से पूरी कोशिश किए हुए था कि पेटीकोट के अंदर तक उसे सब कुछ दिखाई दे लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं था लेकिन फिर भी उसकी कोशिश जारी थी,,,,। रघु के पजामे में हलचल मची हुई थी,,, अपनी मां की मदमस्त जवानी को ब्लाउज और पेटीकोट में देखकर वह पूरी तरह से मस्त होने लगा था उत्तेजना की लहर उसके तन बदन को झकझोर रही थी,,,।
 
कजरी पांचवा डब्बा लेने के लिए नीचे झुकी रघु पांचवा डिब्बा उठाकर अपनी मां के हाथों में समाने लगा दोनों की नजरें आपस में टकराई और कजरी अपने बेटे के वात्सल्य में मुस्कुरा दी,,, और जैसे ही वहां अपने बेटे के हाथ में से गुड़ का डब्बा थाम कर ऊपर लकड़ी के बने छत पर रखने लगी वैसे ही पेटिकोट की ढीली पड़ रही डोरी एकदम से छूट गई और और पेटीकोट बिना शर्म बिना बंदिश के खरखरा कर नीचे उसके पैरों में गिर गई,,,। पल भर में यह क्या हो गया ना तो कजरी को पता चला ना ही उसके बेटे रघु को लेकिन पेटीकोट के गिरने के बाद रघु के आंखों के सामने जो नजारा पेश हुआ उसे देखकर वह पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो गया,,, अद्भुत गोलाई लिए हुए अपनी मां की गांड को देखते ही रघु के तन बदन में उत्तेजना के शोले धड़कने लगे वह अपनी मां की मदमस्त नंगी गांड को देखता ही रह गया अपनी मां के नंगे नितंबों का घेराव देखकर वह मदहोश होने लगा उसकी आंखें फटी की फटी रह गई कचरी के नितंबों का घेराव रघु के मन की घेराबंदी करने लगा था,,,, अपनी मां की नंगी गांड को देखकर रघु को इस बात का एहसास हो गया कि आज तक ऊसने इतनी खूबसूरत नंगी गांड नहीं देखा था,,,, हालांकि पहले भी वह अपनी मां की नंगी गांड के दर्शन कर चुका था लेकिन उस समय उसकी मां बैठकर मूत रही थी,,, उस समय अच्छी तरह से अपनी आंखों से वह अपनी मां की नंगी गांड का नाम नहीं ले पाया था लेकिन आज उसकी मां सीढ़ियों पर खड़ी थी जिससे वह पूरी तरह से आंखों ही आंखों में अपनी मां के नंगे नितंबों का चौड़ा पन घेराव और गोलाकार सब का नाप ले रहा था,,,

अपने साथ हुए इस हादसे से कजरी पूरी तरह से घबरा गई थी जब तक उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी कमर में बंधी पेटीकोट छूट कर नीचे गिर गई है तब तक काफी देर हो चुकी थी,,, वह नीचे रघु की तरफ देखिए तो उसके चेहरे पर बदलते भाव को देखकर शर्म से पानी पानी हो गई उसे साफ नजर आ रहा था कि उसका बेटा पागलों की तरह उसकी गांड को भूल रहा था जो कि एकदम अपना नंगापन लिए हुए उसकी आंखों के सामने अपने आप को प्रदर्शित कर रहा था,,,।

कजरी के लिए क्या बेहद शर्मनाक घटना थी वह अपने बेटे की आंखों के सामने कभी भी अपनी नंगे बदन को प्रदर्शित नहीं करना चाहती थी लेकिन यह सब अनजाने में हो गया था जिसमें उसका भी कोई दोष नहीं था उसे तो पता ही नहीं चला कि कब उसके कमर में बनी पेटीकोट टूट कर नीचे गिर गई वह जल्द से जल्द पेटीकोट उठाकर अपने नंगे बदन को ढक लेना चाहती थी और इसी अफरा-तफरी को नीचे की तरफ झुकी लेकिन शर्मिंदगी और मारे भय के उसके पैर कांप रहै थे जिसकी वजह से उसके पैर लड़खड़ा गए और वह सीढ़ियों से नीचे गिरने लगी कि तभी रघु अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां को थाम लिया जो कि सीधा उसकी गोद में आ गई थी,,,, सीढ़ियों पर से फिसलने के बाद तो उसे ऐसा लगा कि जैसे उसके नीचे से जमीन खिसक गई हो और वह समझ गई कि अब उसे चोट लगने वाली है लेकिन बीच में ही वह अटक गई थी क्योंकि वह रघु की मजबूत भुजाओं में थी वह उसकी गोद में थी,,, रघु कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह अपनी मां को इस तरह से गोद में उठा लेगा और तब जब वह संपूर्ण रूप से ना सही लेकिन कमर के नीचे से पूरी तरह से नंगी होगी,,, रघु नाराम नाराम अपनी मां के जवान जिसने का स्पर्श पाकर पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था उसके पजामे में तंबू बन चुका था,,,, रघु अपनी मां को अपनी गोद में लेकर उसे संभाल चुका था लेकिन आकर्षण की वजह से वह पूरी तरह से मंत्रमुग्ध तावा अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को देख रहा था कजरी भी अपने बेटे की ताकत और हिम्मत को देखकर उसकी आंखों में आंखें डालकर कुछ पल के लिए अपलक उसे देखती रह गई,,,। लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह कमर के नीचे पूरी तरह से मांगी है तो वह शर्मा कर अपनी नजरें नीचे झुका ली और इस बात का एहसास रघु को भी हो गया कि उसके ना शर्म आ गई है,,, रघु को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसी तरह से अपनी मां को गोद में उठाए रह गया तो उसकी माही नजरें दूसरी तरफ किए हुए शरमा कर बोली,,,।

नीचे उतारेगा मुझे कपड़े पहनने है,,,।

( अपनी मां की यह बात सुनकर जैसे वह होश में आया,, और अपनी मां को अपनी गोद में से नीचे उतार कर बाहर चला गया उसकी मां भी पूरी तरह से शर्मिंदा थी वह झट से अपना पेटीकोट उठाकर उसे पहन ली,,।)

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कजरी को समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब कैसे हो गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बेटे की आंखों के सामने उसकी पेटीकोट की डोरी खुल गई थी,,कजरी अपनी ही नजरों में शर्म से गड़ी जा रही थी क्योंकि वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके साथ ऐसा कुछ हो जाएगा,, जिस दिन से रघु खेतों में चोरी-छिपे उसे पेशाब करते हुए देख रहा था तब से लेकर के अब तक कजरी हमेशा उससे अपने बदन को छुपाते आ रही थी,,,लेकिन वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि जितना वह अपने बेटे से अपने बदन को छीपाएगी ऊतना ही वह अपने बेटे की आंखों के सामने खुद खुलती जाएगी। अपने बेटे से वो आंख तक नहीं मिला पा रही थी,,, क्योंकि कमर के नीचे से वह संपूर्ण नंगी होकर उसकी गोद में गिरी थी,,लेकिन इस बात की तसल्ली उसके मन में थी कि अगर उसका बेटा उसे थामने लिया होता तो वह नीचे जमीन पर गिर जाती और चोट लग जाती,, एक तरफ कजरी अपनी हरकत की वजह से पूरी तरह से शर्मिंदगी से घड़ी जा रही थी और दूसरी तरफ जिस तरह से रघु ने उसको अपनी गोद में उठा लिया था उसकी ताकत को देखकर ना जाने क्यों उसके तन बदन में अजीब सा एहसास हो रहा था,,, कजरी बहुत हैरान थी यह सोच कर कि उसका बेटा उसके बारे में क्या सोच रहा होगा क्योंकि वह सिर्फ ब्लाउज पहने हुए थी बाकी पूरी तरह से नंगी थी उसके नंगे पन का एहसास उसके बेटे को जरूर हुआ होगा,,,तभी तो वह एकटक उसके चेहरे को गोद में लिए हुए देखता जा रहा था वह यह भी नहीं समझ पा रहा था कि उसे गोद में से नीचे उतार देना चाहिए,,अगर वह उसे उतारने के लिए ना कहीं होती तो शायद वह उसी तरह से उसे गोद में लिए खड़े रहता,, जो भी हो जिस चीज को छुपाते आ रही थी वह अपने आप ही उसके बेटे की आंखों के सामने खुल चुकी थी जिसमें कजरी को अपनी ही गलती दिखाई दे रही थी,, क्योंकि वह अपने मन में यही सोच रही थी कि जो कुछ भी हुआ था उसकी गलती से हुआ था,, उसे कसकर अपनी पेटीकोट की डोरी को बांध लेना चाहिए था,,, लेकिन आज तक ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ था उसका बेटा उसके बारे में क्या सोचेगा कहीं वह यह ना सोचने लगे कि जानबूझकर उसने पेटीकोट को नीचे गिरा दी।,,,, ख्याल मन में आते ही कजरी काफी चिंतित हो गई और शर्मसार होने लगी,,,,

दूसरी तरफ रघु इस घटना के बाद अपने घर पर नहीं रोका बल्कि सीधा जाकर खेत के किनारे पेड़ के नीचे बैठ गया। वह अपने तन बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,, क्योंकि जो कुछ भी हुआ था अनजाने में हुआ था लेकिन फिर भी उस एहसास से कुछ दिनों तक रघु का निकल पाना मुश्किल नजर आ रहा था क्योंकि वह पेड़ के नीचे बैठकर उसी घटना के बारे में कल्पनातीत हुए जा रहा था,, बार-बार उसकी आंखों के सामने वही नजारा घूम रहा था नीचे खड़ा होकर पांचवा गुरु से बड़ा डिब्बा अपनी मां को थमाने के लिए हाथ आगे बढ़ाया था,,, और फिर जिसके बारे में उसने कभी सोचा नहीं था वह हो गया दबा पकड़ने के लिए जैसे ही उसकी मां नीचे की तरफ चुकी वैसे ही उसके पेटीकोट की दूरी एकदम से खुल गई और उसकी पेटीकोट नौटंकी के परदे की तरह का एक नीचे की तरफ गिर गई,,, लेकिन नौटंकी के परदे के गिरने और उसकी मां के पेटीकोट के खेलने में काफी फर्क था नौटंकी का पर्दा तब गिरता है जब नाटक खेल खत्म हो जाता है लेकिन उसकी मां का पेटीकोट गिरने के बाद ही सारा नाटक और खेल शुरू हुआ,, शुभम अभी भी उस अद्भुत नजारे के बारे में याद करके अपने तन बदन में गर्मी का एहसास कर रहा था,,, उसकी आंखों के ठीक सामने ऊंचाई पर कमर के नीचे उसकी मां के गदराई मदमस्त उभरी हुई गोरी गोरी नंगी गांड नजर आ रही थी,,, जिसकी गोलाकार बनावट बेहद अद्भुत और आकर्षक थी शुभम पहली बार अपनी मां के नितंबों का संपूर्ण गोलाकार आकार देख रहा था,,, हालांकि वह अपनी मां को पेशाब करते हुए देखा जरूर था लेकिन उस समय उसकी मां की गांड गोलाकार स्थिति में ना होकर फैली हुई नजर आ रही थी ,,,, कजरी के नितंबों का घेराव रघु के तन बदन में हलचल पैदा कर रहा था और ऊपर से उसकी लंबी चिकनी गोरी टांगें मांसल पिंडलियों यह सब शुभम के लिए उत्तेजना से भर देने वाला नजारा था,,, इस तरह के नजारे के मापने का कोई मापदंड बिल्कुल भी नहीं था लेकिन इस तरह के नजारे को देखकर देखने वाले की क्या हालत होती है बस उसके पजामे की हालत को देखकर ही समझा जा सकता था जोकि इस समय रघु के पजामे में पूरी तरह से गदर मचा हुआ था,,,, रघु का दिमाग उस समय और ज्यादा घूमने लगता था जब वह यह सोचता था कि कहीं उसकी मां यह सब जानबूझकर तो नहीं की,,, क्योंकि उसके दिमाग में यही ख्याल घूम रहा था कि पेटीकोट की डोरी इस तरह से कैसे खुल सकती है और उसकी मां उसकी आंखों के सामने अपनी साड़ी उतारने के लिए तैयार कैसे हो गई,,, रघु यह सब सोचकर अजीब से भंवर में खींचता चला जा रहा था,, रघु को लगने लगा था कि यह सब उसकी मां जानबूझकर की थी उसे उकसाने के लिए,,,पल भर में भी रघु के दिमाग में ढेर सारे सवाल के साथ-साथ खुद ही उसका जवाब भी मिलना शुरू हो गया था,,, अपने मन में यही सोच रहा था कि उसकी मां यह हरकत जानबूझकर की थी जिसका जवाब भी यही था कि काफी दिनों से वह पुरुष संसर्ग से दूर थी,,, यह सब सोचते हुए उसे हलवाई की बीवी का ख्याल आया जिसके पास उसका पति भी था लेकिन फिर भी वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर संतुष्टि का अहसास ली थी,,,इसका मतलब साफ था कि जब एक शादीशुदा पति के होने के बावजूद भी शारीरिक तौर पर भूखी रहकर दूसरे से संबंध बनाती है तो उसकी मां तो बरसों से अपने पति के बिना रह रही थी और ऐसे में उसकी शारीरिक भूख जागना औपचारिक ही था,,, शायद उसे भी मोटे तगड़े लंड की जरूरत थी और इसीलिए वह जानबूझकर अपने नंगे जिस्म का नुमाइश अपने ही बेटे की आंखों के सामने कर रही थी ताकि वह पूरी तरह से उत्तेजित होकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर उसे संपूर्ण रूप से संतुष्टि का अहसास दिलाए वर्षों से दबी प्यास शायद अब जगने लगी थी,,, और शारीरिक प्यास को शारीरिक संबंध बनाकर पूरी तरह से बुझाई जाए,,, अपनी मां के बारे में यह सब सोचकर रघु का माथा ठनक रहा था,,,उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उत्तेजना उसके तन बदन को अपनी गिरफ्त में ले रही थी और यही उत्तेजना सही गलत का फैसला नहीं कर पा रही थी उसे अनजाने में ही गीरी पेटीकोट अपनी मां की तरफ से उसे उकसाने वाला संपूर्ण नाटक ही लग रहा था और यही सोचकर वह काफी उत्तेजना का अनुभव करके सड़क से नीचे खेत में उतर गया और झाड़ियों के बीच जाकर अपने पैजामा को घुटने तक गिरा कर अपनी खड़े लंड को हाथ में ले लिया और आंखों को बंद करके कल्पना के सागर में गोते लगाने लगा,,, इस समय रघु को कल्पना के चित्र हकीकत से भी ज्यादा उन्मादक लग रहे थे,,,जिसमें उसकी मां अपने हाथों से उसके पर जाने को नीचे करके उसके खड़े लंड को अपने हाथ में लेकर हिला रही थी,,,, पर बार-बार उसके लंड की सुपारी पर अपने गुलाबी होठ रखकर चुंबन कर दे रही थी,,, रघु इस तरह का दृश्य सोचते हुए जोर-जोर से अपने लंड को हिला रहा था,,, कल्पना में उसकी मां भी अत्यधिक कामातुर नजर आ रही थी जोकि अपनी बुर में अपनी बेटी के लंड को लेने से पहले उसे मुंह में लेकर अच्छी तरह से गिला कर रही थी,,, देखते ही देखते रघु की कल्पना में उसकी मां घुटनों के बल बैठ गई और अपनी मदमस्त मतवाली गांड को ऊपर की तरफ उठाकर अपने बेटे की आंखों के सामने परोस दी,,,कल्पना मुंह से कम अपनी मां की कामुक हरकतों को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो गया था,, वह अपनी मां को चोदने की पूरी तैयारी कर चुका था और वह कल्पना में जैसे ही अपनी मां को चोदने के लिए अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों में थामा वैसे ही

रघु की उत्तेजना का पारा एकदम से फुट पड़ा और हकीकत में,,, उसके लंड से गर्म पानी की पिचकारी झाड़ियों पर गिरने लगी,,, पानी निकल जाने के बाद रघु अपने आप को बेहद हल्का महसूस कर रहा था,,,जवानी का जोश शांत होते ही उसका दिमाग काम करना शुरू कर दिया उसे लगने लगा था कि जो कुछ भी हुआ था वह अनजाने में हुआ था उसकी मां की कोई गलती नहीं थी उसकी मां ऐसा नहीं कर सकती,,, यह सब सोचकर और अपनी मुठ मारने वाली क्रिया के बारे में सोच कर वह अपने आप को एक बार फिर से घ्रणित महसूस करने लगा,,, अपने मन में आए गंदे ख्याल के बारे में सोचकर वह अपने आप पर गुस्सा होने लगा और अपना ध्यान अपनी मां की तरफ से हटाने के लिए वह खेतों में बने ट्यूबेल पर नहाने के लिए चला गया,,,

दूसरी तरफ कजरी के बदन पर गुड़ का रस पुरी तरह से लग चुका था,,, बनाना चाहती थी और उसे जरूरत भी थी क्योंकि कुछ देर पहले जो कुछ भी हुआ था अनजाने में ही उन सब के बारे में सोच कर वह पूरी तरह से गर्मा चुकी थी,,, कजरी नहाने के लिए गुसल खाने में गई,,, और अंदर पहुंचते ही अच्छे से लकड़ी के दरवाजे को बंद करके अपने सारे कपड़े उतार दी वैसे भी उसके बदन पर ब्लाउज और पेटिकोट के सिवा कुछ भी नहीं था,,, अपने बदन पर से कपड़े उतारते ही सबसे पहले उसका ध्यान अपने दोनों छलकती हुई जवानी पर गई उसे देखकर ना जाने क्यों उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई,,,, वह अपने दोनों हाथों को अपनी दोनों तनी हुई चुचियों के नीचे करके दोनों संतो को अपने दोनों हथेली में इस तरह से ले ली जैसे कि सीपी में मोती,,, वैसे भी कजरी की मदमस्त जवानी की दोनों छलकती हुई रस से भरे हुए संतरे बेशकीमती मोती की तरह ही थे,,, हालांकि उन दोनों गोलाईयों का आकार बस मोदी की तरह गोल था बाकी ,, दोनों खरबूजा जैसी बड़ी बड़ी थी,,,कजरी के मन में क्या चल रहा था यह खुद कजरी भी नहीं समझ पा रही थी वह दोनों चूचियों को अपने हथेली के ऊपर रखकर उनके से दोनों को बारी-बारी से उठाने लगी मानो की जैसे तराजू में खरबूजा रख कर तोल रही हो,,, फिर ना जाने क्या हुआ वह एकाएक अपनी दोनों चुचियों को अपनी हथेली में रखकर जोर से दबा दी,,, और खुद ही उसके मुख से आह निकल गई,, वह अपने मन में यही सोच रही थी कि आज भी उसकी जवानी ,,,जवानी के दिनों जैसी ही थी,,,, अपने ही द्वारा स्तन मर्दन के कारण मुंह से निकली हुई आह की आवाज को सुनकर वह मुस्कुराने लगी। पेट की नाभि पर ढेर सारा गुड़ का रस लगा हुआ था वह बाल्टी में से लोटे से पानी निकालकर अपनी नाभि पर डालने लगी और उसे अच्छी तरह से साफ करने लगी जब उसे संतुष्टि नहीं हुई तो वह साबुन का टुकड़ा लेकर उस पर मरने लगी और थोड़ा थोड़ा पानी अपनी नाभि पर डालने लगी वैसे तो गुड़ का रस उसकी छातियों पर भी लगा हुआ था लेकिन ना जाने के बाद अपनी नाभि को ही धोए जा रही थी,,,ढेर सारा झाग उसकी नाभि से होता हुआ नीचे की तरफ उसकी टांगों के बीच इकट्ठा हो रहा था जोकि उसके रेशमी भुखमरी बालों को पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया था वह ध्यान से अपनी टांगों के बीच देखी तो उसे अपनी बुर नहीं बल्की बुर पर इकट्ठा हुआ साबुन का झाग नजर आ रहा था,,, कचरी अपनी हथेली को अपनी नाभि से नीचे की तरफ ले जाते ले जाते दोनों टांगों के बीच अपनी तपती हुई भट्टी पर रखकर रुक गई,,,, और उस साबुन के झाग को अपनी कचोरी जैसी फूली हुई और बुर रगड़ने लगी,,,,, एक बार फिर से अनजाने में ही उसके मुख से आह निकल गई लेकिन इस बार उसकी आह दर्द से नहीं बल्कि मदहोशी में निकली थी,,,, उसे अच्छा लग रहा था वह साबुन के झाग को अपनी खूबसूरत रेशमी बालों से भरपूर बुर पर रगड़ने लगी रगड़ने के कारण थोड़ी ही देर में उसकी बुर की ऊपरी सतह पर झागो का ढेर हो गया,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कर रही है वह अब तक खड़ी थी अपनी दोनों टांगों को फैला कर साबुन लगा रही थी लेकिन वह आराम से नीचे बैठ गई,, और अच्छे से अपनी दोनों नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच टिकाए हुए जोर-जोर से साबुन के झाग को मलने लगी,,, अनजाने में ही बात साबुन के झाग से खेलते खेलते एकदम गरम हो गई उसके चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे साथ ही आनंद के सागर में डूबते हुए उसकी आंखें बंद हो गई और आंखें बंद होते ही उसकी आंखों के सामने वही दृश्य नजर आने लगा जब रघु की आंखों के सामने उसकी पेटीकोट की पूरी अपनी आंख खोलकर उसका पूरा पेटीकोट उसकी टांगों में गिर गई थी और वह अपने ही बेटे के सामने पूरी तरह से नंगी हो गई थी,,,उस दृश्य को सोचते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी जबकि वह ऐसा कुछ भी नहीं चाहती थी लेकिन यह सब अपने आप ही हो रहा था भला मन के घोड़े को कैसे लगाम लगाया जा सकता है वह तो बेलगाम होता है और बेलगाम घोड़ा कहीं भी दौड़ता है कहीं भी कूदता है और ऐसा कजरी के साथ हो रहा था ना चाहते हुए भी उसका ध्यान बार-बार रघु की तरफ जा रहा था,,, कैसे वह अपने बेटे की आंखों के सामने नंगी हो गई कैसे उसका बेटा सीढ़ी से नीचे खड़ा होकर उसकी मदमस्त गोरी बड़ी बड़ी गांड को घुर रहा था,,,, कैसे हो आप उसे गिरते हुए अपनी बलिष्ठ भूजाओ में पकड़ कर अपनी गोदी में ले लिया,,,,,आहहहहहह अद्भुत अहसास से कजरी पूरी तरह से भर गई पहली बार उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसके बेटे की भुजाएं वाकई में काफी बलिष्ठ है वरना जिस तरह से वह गिरी थी कोई भी उसे अपनी गोदी में नहीं ले सकता था,,,,कजरी जोर जोर से अपनी कचोरी जैसी फुली हुई बुर मसलते हुए अपनी कल्पनाओं में खो रही थी,,,,,वह यही सोच रही थी कि जब उसका बेटा उसके नंगे पन को अपनी गोदी में महसूस किया होगा तो क्या सोच रहा होगा,,,, उसका हाल क्या हुआ होगा जब वह खेतों में उसे पेशाब करता हुआ देखकर एकदम मंत्रमुग्ध हो गया था यहां तो वह खुद एकदम नंगी उसकी गोदी में गिर गई थी,,,,,यही सब सोचते हुए उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी जबकि वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी लेकिन तभी उसके मुख से जोर से आह निकल गई क्योंकि काफी उत्तेजित होकर वह मदहोशी के आलम में अपनी गुलाबी बुर के गुलाबी पत्तियों के बीच से अपनी उंगली को अपनी बुर में डाल दी थी,,,,
 
आहहहहह,,,,,ऊहहहहहहह,,,,, इस तरह मदहोशी भरी आवाज के साथ कजरी अपनी कचोरी जैसी फूली हुई बुर के अंदर अपनी दो उंगली को धीरे धीरे अंदर बाहर कर रही थी,,, कजरी अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई अनजान व्यक्ति उसका हाथ पकड़कर मदहोशी सागर में लिए जा रहा है,,,, यह सब करना पाप आप समझती थी लेकिन आज यह पापों ऊसे पुन्य लग रहा था क्योंकि वह पूरी तरह से मदहोश थी और उत्तेजित सिंह कामवासना के अधीन हो चुकी थी,,,, आंखें बंद थी कल्पना वो का घोड़ा उसे अपनी मर्यादा के विपरीत दिशा में लिए जा रहा था संस्कारों शर्मो हया से मिलो दूर जहां पर इन सब बातों का कोई वजूद नहीं था बस सुख और सुख तृप्ति का एहसास यही सब मायने रखते थे,,,

कल्पनाओं में खोते हुए कजरी अपनी दोनों उंगली को थोड़ी तीव्रता के साथ अपनी बुर के अंदर बाहर कर रही थी।उसे समझ में नहीं आ रहा था यह सब क्या हो रहा है लेकिन आप आज बराबर हो रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है उसमें उसे आनंद की प्राप्ति हो रही थी बरसों के बाद उसने अपनी गुलाबी बुर के अंदर अपनी उंगली डाली थी,,,

वासना में वह इस समय पूरी तरह से खो चुकी थी,,, सही गलत क्या है इसका फैसला बाद में करना था। पहले आनंद की परिभाषा को पूरी तरह से आत्मसत करना था।

छोटे से टूटे हुए गुसल खाने में कजरी पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर अपनी नाजुक अंग में दो उंगली पेवस्त करके जवानी का आनंद लूट रही थी,,,, देखते ही देखते उसकी सांसों की गति तेज होने लगी उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फूटने लगी,,,, और थोड़ी ही देर में वह चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गई,,, उसके हाथों की गति तेज होने लगी वह थोड़ा और अपनी दोनों टांगों को फैला ली,,, और देखते ही देखते तेज चीख के साथ वह अपने चरम सुख को प्राप्त कर ली,,,,, एकदम मस्त हो गई थी चेहरे की रंगत सुर्ख लाल हो चुकी थी चूचियों के निप्पल एकदम कड़ी हो चुकी थी,,,थोड़ी देर में अपनी सांसो को दुरुस्त करके वह अपने हालात पर गौर की तो शर्म से पानी पानी हो गई,,, उसकी उंगली अभी भी उसकी पुर के अंदर थी वह जल्दी से अपनी दोनों उंगलियों को अपनी बुर से बाहर खींच कर उस पर पानी डाली तो उसकी रेशमी बालों से भरपूर गुलाबी बुर बेहद मनमोहक और संतुष्ट लग रही थी। लेकिन वासना का तूफान थमने के बाद कजरी अपने आप को धिक्कार ने लगी उसे अपने आप से घिन्न आने लगी,,, क्योंकि वह बहुत ही घिनौनी हरकत कर दी थी अगर उसके ख्यालों में उसकी कल्पनाओं में उसका बेटा ना होता तो शायद वह अपने आप को माफ कर देती लेकिन ना चाहते हुए भी उसके कल्पनाओं के घोड़े पर उसका बेटा ही सवार था,,,, इसलिए वह अपने आपको अपनी ही नजर से गिरता हुआ महसूस कर रही थी,,, उसकी आंखों में आंसू थे वह अपने आप को कोस रही थी,,,क्योंकि कमरे के अंदर जो कुछ भी हुआ था वह अनजाने में हुआ था लेकिन गुसल खाने में उसमें उसे अपनी ही गलती नजर आ रही थी,,,,, दोबारा कभी ऐसा नहीं होगा ऐसा सोचकर वह मन ही मन में कसम खा रही थी और वह बाल्टी से लोटा भर भर कर पानी अपने ऊपर डाल रही थि ताकि उसका मन एकदम शांत हो जाए ,,,,

इस घटना के बाद से रघु अपनी मां की नजरों के सामने आने से कतराने लगा और कजरी का भी यही हाल था कजरी भी अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी गुसलखाना में की गई हरकत को लेकर उसे ऐसा ही लगता था कि जैसे उसने अपनी उंगली से नहीं बल्कि अपनी कल्पना में अपने बेटे को रखकर उसके लंड को अपनी बुर में लेकर उसे से संभोग सुख प्राप्त की है,,। यह बात उसे अंदर तक झकझोर कर रख दे रही थी,। रघु भी एक बार फिर से अपने आपको अपनी मां के प्रति मन में आए गंदे ख्यालों को रोकने में कामयाब हो गया था। हालांकि शालू बार-बार अपने भाई के लंड के दर्शन करने की चाह लेकर उसे जगाने के लिए उसके कमरे में जाती रही लेकिन दोबारा उसे वह दृश्य नहीं दिखाई दिया जिसकी कामना उसके मन में बसी हुई थी,,,।

लेकिन एक बार फिर वही हुआ जिसका ऊसे डर था,,, रात के तकरीबन 2:00 बज रहे थे,,, चारों तरफ धुप्प अंधेरा छाया हुआ था,, तेरा इतना कहना था कि 2 मीटर की दूरी पर कुछ दिखाई नहीं देता था,,, आसमान में केवल तारे सितारे नजर आ रहे थे,,, चांद बादल के पीछे छिप गया था,,, गर्मी का समय था एक तरफ शालू और उसकी मां सोई हुई थी और दूसरी तरफ रघु अकेले चटाई बिछाकर लेटा हुआ था नींद उसकी आंखों से कोसों दूर थी,,, वह हलवाई की बीवी के ख्यालों में खोया हुआ था बार-बार उसकी बड़ी बड़ी गांड उसकी आंखों के सामने नाच जा रही थी,,,वैसे तो जब भी वह हलवाई की बीवी के बारे में सोचता था तो उसकी आंखों के सामने उसकी मां का जवान जिस में भी नजर आ जाता था,,, लेकिन अपनी मां के बारे में गंदी बातें ना सोचने की कसम खा रखी थी इसलिए वह बार-बार उधर से ध्यान हटा दे रहा था,,,, जिस तरह से भूख लगने पर भोजन करना पड़ता है उसी तरह से शारीरिक भूख इंसान को जब परेशान करती है तो, उसकी भी हालत ठीक रघु की तरह होती है ईस समय उसे शरीर की भूख परेशान कर रही थी और वह हलवाई की बीवी को याद करके मुठ मारने की तैयारी नहीं था वह,, अपनी कमर पर से तो लिया हटाकर अपने खड़े लंड को हाथ में लेकर ऊपर नीचे कर रहा था कि तभी,,,शालू की नींद खुल गई उसे जोर की पेशाब लगी हुई थी,,, बखरी होकर सीढ़ियों से नीचे उतरने ही वाली थी कि ना जाने क्या सोचकर वह रघु की तरफ जाने लगी रघु अपने ही ख्यालों में खोया हुआ था,,,,लेकिन चूड़ियों की खनक कानों में पड़ते ही वह झट से अपना हाथ हटाकर आंखों को बंद कर ली क्योंकि चूड़ियों की खनक उसे बेहद करीब से सुनाई दी थी,,, शालू की नजर रघु पर पड़ी तो वह हैरान रह गई थी फिर से उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था और आसमान की तरफ मुंह उठाए अपनी औकात दिखा रहा था,,,, हालांकि शालू की नजर तब नहीं पड़ी थी जब वह अपने लंड को हाथ में लेकर हिला रहा था,,, इसलिए उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसका भाई पूरी तरह से नींद में है,,, एक बार फिर से शालू के तन बदन में उमंग जगने लगी,,.

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