S
StoryPublisher
Guest
रघु की जिंदगी की सबसे बेहतरीन रात गुजर चुकी थी,,,। आज की रात के बाद से उसकी जिंदगी की नई शुरुआत हो रही थी इस रात ने रघु को एकदम से बदल कर रख दिया था,,, उसके सोचने समझने का तरीका एकदम से बदल गया था,,,। जिंदगी में पहली बार वह औरत के बदन के हर एक पन्ने को अपने हाथ से एक-एक करके खोल कर उनका अध्ययन जो कर चुका था स्कूल की किताबों से शायद उसका कोई वास्ता नहीं था लेकिन औरत के जिस्मानी शब्दों को वह भली-भांति समझ गया था,,, रघु काफी खुश नजर आ रहा था वह अपने खेतों में इधर से उधर घूम रहा था,,, हालांकि अभी भी वह अपने घर नहीं गया था,,।
हलवाई की बीवी ने अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन और संतुष्टि भरी रात गुजारी थी,, जिसकी कसक अभी तक उसके बदन में महसूस हो रही थी,,। रघु के एक-एक जबरदस्त धक्के को याद करके मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,। उसने कभी जिंदगी में नहीं सोची थी कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर उसे इस तरह से एक अद्भुत सुख का अनुभव होगा,,,। रघु के साथ रात गुजारने का उसे बिल्कुल भी मलाल नहीं था,,। भले ही वह अपने पति को धोखा दे चुकी थी लेकिन जिंदगी का बेहतरीन सुख उसने प्राप्त की थी,,,।
कजरी काफी परेशान थी सुबह हो चुकी थी लेकिन रघु का कहीं भी अता पता नहीं था,,,। उसके मन में बहुत घबराहट हो रही थी सालों में बार-बार रघु के बारे में कजरी से पूछना चाहे लेकिन कजरी बात को टाल ले गई आखिरकार उसके पास शालू को बताने लायक बात ही नहीं थी बताती भी तो क्या बताती कि उसका भाई उसे पेशाब करते हुए देख रहा था सोच कर ही उसे बहुत बुरा लग रहा था अगर वह यह बात अपनी बड़ी बेटी शालू से बताती तो वह उसके बारे में क्या सोचते हैं इसलिए वह बात को आई गई कर गई,,,। रघु के प्रति वह काफी चिंतित नजर आ रही थी इसलिए उसे खेतों पर जाने की इच्छा बिल्कुल भी नहीं हो रही थी लेकिन जानवरों के चारे के लिए घास तो लाना ही था। इसलिए इच्छा ना होने के बावजूद भी वह खेतों की तरफ निकल गई,,,
अरे कजरी कहां जा रही है घास करने रुक जा मैं भी आती हूं,,,,( कजरी जैसे ही ललिया के घर के सामने से गुजरी वैसे ही पीछे से ललिया उसे आवाज देकर रोकने लगे क्योंकि उसे भी घास काटने जाना था वह जल्दी से घर में से टोकरी और घास काटने का औजार लेकर निकल पड़ी,,,। कजरी रघु के बारे में ही सोच रही थी इसलिए ललिया के इस तरह से आवाज देने के बावजूद वह उस पर गौर नहीं की और चलती रही और ललिया लगभग भागते हुए कजरी के करीब पहुंच गई और हांफते हुए बोली,,,।)
क्या हुआ कजरी तुम्हारी आवाज सुने नहीं क्या मैं तेरा इंतजार कर रही थी और तू है की भागी चली जा रही है,,।
नहीं कुछ नहीं बस थोड़ा सा तबीयत ठीक नहीं है,,,।
अरे क्या हुआ तेरी तबीयत को,,,( कजरी के माथे पर अपना हाथ लगाकर,,,।) बुखार तो बिल्कुल भी नहीं है,,,।
नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है ललिया बस थोड़ा सा सर दर्द कर रहा था,,,।
तो तुझे घर पर आराम करना चाहिए था ना शालू को भेज दी होती,,,।
कोई बात नहीं मैं कर लूंगी,,,।
अच्छा रामू कहां है आज सुबह से नजर नहीं आया रघु के साथ तो नहीं है,,,
( कजरी जानबूझकर रामू के बारे में पूछ रही थी ताकि अगर रघु उसके साथ हो तो पता चल सके,,,।)
नहीं रामू तो सो रहा है,,,।
चल कोई बात नहीं ,,,,(इतना कहकर कजरी अपने कदम खेतों की तरफ बड़ा ही चली जा रही थी और साथ में ललिया भी उसके साथ हो चली थी,,, कजरी का मन उदास था लेकिन मनके उदास होने के बावजूद भी वह अपनी चाल में उदास पन ला नहीं पा रही थीं,,,, उसकी चाल मतवाली थी,,, उसकी मतवाली चाल पर उसके मन के उदासपन का बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ रहा था,,, कजरी के बदन का हर एक ऐसा निश्छल और चंचल था जिस पर किसी भी प्रकार का लगाम नहीं था इस तरह से कजरी की मद मस्त जवानी भरा संपूर्ण बदन बेलगाम था,, और शायद इसीलिए इस उम्र में भी कजरी के बदन के हर एक अंग से जवानी की मधुर धारा फूट पड़ती थी,,। यही कारण था कि इस समय आते जाते सबकी नजर कजरी की मद मस्त जवानी पर टिकी हुई थी,,, उसके नितंबों का उठाव और घेराव इतना जबरदस्त था कि ना चाहते हुए भी उस पर सब की नजर पड़ ही जाती थी और कजरी की चूचियां तो कमाल की थी मानो उच्च किस्म की बड़ी-बड़ी दशहरी आम उसके ब्लाउज में भर दी गई हो,,,, जिसे अपने हाथों में लेकर दबा दबा कर पीने का मन गांव के हर मर्द का करता था और उनका यह सपना भी था,,,,।
चिंताओं से घिरे होने के बावजूद भी कजरी की चाल में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आ रही थी,,, कच्ची सड़क पर चलते हुए वह दूर-दूर तक नजर घुमाकर रघु को ही तलाश कर रही थी,,। ललिया भी अपनी ही मस्ती में चली जा रही थी तभी उसका खेत आ गया और वह कच्ची सड़क से नीचे उतर गई,,, तकरीबन 20 30 कदम की दूरी पर कजरी का खेत था और वह भी कच्ची सड़क उतरकर अपने खेत में हरी हरी घास काटने के लिए उतर गई,,,,
वह टोकरी लेकर हरी हरी घास के बीच बैठ गई और घास काटने लगी लेकिन घास काटते समय भी वह अपनी नजरों को इधर-उधर दौड़ाकर रघु को देखने की कोशिश कर ले रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार रात भर से रघु गायब था कहां चला गया इस बारे में उसे बिल्कुल भी पता नहीं था,,,। वह अपने मन में सोचने लगी कि उसने अपने बेटे को इस तरह से डांट कर बहुत बड़ी गलती कर दी है कहीं कुछ हो गया तो वह अपनी ही नजरों में गिर जाएगी इस कल्पना से ही उसका दिल दहल उठा रहा था,,,। अपने मन को तसल्ली देते हुए अपने आप को ही बोल रही थी कि अगर वह देख भी लिया तो क्या हो गया,,,। इस तरह से तो कई लोग की नजर पड़ जाती होगी वह दुनिया में अकेला नहीं था जो अपनी मां को पेशाब करते हुए देख लिया था पैसे कहीं लड़के होंगे जो अपनी मां को जानबूझकर या अनजाने में पेशाब करते हुए देखे ही लेते होंगे या कपड़े पहनते हुए नहाते हुए किसी भी प्रकार से नग्न अवस्था में उनकी नजर पड़ी जाती होगी तो इसका मतलब यह तो नहीं कि अपने ही बेटे को इस तरह से डांट फटकार कर घर से निकाल दिया जाए,,,,। नहीं नहीं अब वह आ गया तो मैं उससे माफी मांग लूंगी और ऐसी गलती दोबारा मुझसे नहीं होगी यह भी कह कर उसे मना लूंगी आखिर वह मेरा राजा बेटा है उसी का तो सहारा है,,,। कजरी यही सब अपने आप से बातें करते हुए अपने मन को तसल्ली दे रही थी कि तभी रघु नदी की तरफ से उसे आता हुआ नजर आया,,,, और वह रघु को देखते ही खुश हो गई और जोर जोर से रखो को आवाज देने लगी,,,, रघु भी अपनी मां की आवाज को सुन रहा था वह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके बिना नहीं रह सकती और वह भी अपनी मां के बिना नहीं रह सकता था आखिरकार गुस्सा कर कितने दिन वह दूर रह सकता है एक न एक दिन तो उसे लौटकर घर पर आना ही था,,,, लेकिन वह यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसकी मां उसे डांट फटकार कर दूर नहीं भगाई होती तो कल की रात वह हलवाई की बीवी के खूबसूरत बदन से खेलते हुए उसकी चुदाई नहीं कर पाता,,, आखिरकार उसे यह बात अच्छी तरह से समझ में आ रही थी कि मां की डांट फटकार भी बच्चे के लिए फायदेमंद होती है,,,। और यह देख भी लिया था कि उसकी मां की डांट फटकार उसके लिए आशीर्वाद साबित हुई थी वरना वह अपनी जवानी का खाता ना खुलवा चुका होता,,।
अभी भी कजरी उसे आवाज देकर बुला रही थी और रघु उसकी तरफ आगे बढ़ता चला जा रहा था लेकिन जैसे-जैसे अपनी मां की तरफ आगे बढ़ता चला जा रहा था वैसे वैसे उसके जेहन में बसा वह दृश्य उसके मन मस्तिष्क पर उधर ने लगा था,,,,। हलवाई की बीवी के साथ पहली बार संभोग सुख भोगने के बाद से उसका नजरिया हर औरत के लिए बदलने लगा था,,, वैसे तो पहले भी उसका यही हाल था लेकिन जब से वह हलवाई की बीवी के नंगे बदन को देखकर उसके नंगे बदन के हर एक अंग से खेल कर उसकी चुदाई किया था तब से अब हर औरत के प्रति उसका नजरिया बदलता जा रहा था इसलिए तो वह जैसे जैसे अपनी मां के करीब बढ़ता जा रहा था जैसे वैसे उसकी आंखों के सामने,,, उसकी मां की नंगी गांड और उसकी बुर में से निकलती हुई पेशाब की तेज धार नजर आने लगी थी और यह दृश्य उसके मन में उभरते ही उसके लंड का तनाव बढ़ना शुरू हो गया था,,, बार-बार वह अपने मन को दूसरी तरफ भटकाने की कोशिश कर रहा था लेकिन ऐसा उसके लिए शायद मुमकिन नहीं हो पा रहा था,,,, पहली बार में ही वह अपनी मां की नंगी गांड के आकर्षण में पूरी तरह से बंध चुका था।
वह धीरे-धीरे खेतों में खड़ी अपनी मां के करीब पहुंच गया और उसकी मां एक पल की भी देरी किए बिना उसे अपने गले से लगा ली,,,,,। पल पल भर में ही उसके पूरे चेहरे पर चुंबनों की बारिश कर दी,,, हलवाई की बीवी के नंगे बदन का मजा चख चुका रघु अपनी मां के इस तरह से चुंबन लेने पर पल भर में ही पूरी तरह से उत्तेजित हो गया,,,, एक पल के लिए तो उसके जी में आया कि वह भी अपनी मां को बाहों में लेकर उसे चुंबन से नहला दे और उसकी गदर आई जवानी को खेतों में लेटा कर निचोड़ ले,,,,। लेकिन अभी इतनी हिम्मत उसके में नहीं थी कि वह इस तरह की मनमानी अपनी मां के साथ कर सके वह बूत बना अपनी मां के चुंबन होता मजा ले रहा था और चुंबनो के बाद कजरी उसे अपने गले से अपने सीने से लगा ली,,,, कजरी के सीने से लगते ही रघु के तन बदन में शोले भड़क में लगे उसका पूरा वजूद उत्तेजना की लहर में कांप गया,,,, क्योंकि जिस तरह से कजरी ने उसे अपने सीने से भींचते हुए गले लगाई थी,,, उससे कजरी की भारी-भरकम चूचियां रघु के सीने से रगड़ खा रही थी और उसकी तनी हुई निप्पल उसके सीने में चुप रही थी जिसकी चुभन को वह अच्छी तरह से अपनी छातियों पर महसूस कर रहा था,,,, उत्तेजना के बारे में पूरी तरह से गनगना गया था,,,, पर अपनी मां की इस हरकत की वजह से उसे अपने पजामे में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा होता हुआ महसूस हो रहा था,,, और उसे यह भी साथ महसूस हो रहा था कि उसके भेजा मैंने उसका खड़ा लंड तंबू की शक्ल लेकर उसकी मां की टांगों के बीच ठीक उसकी बुर वाली जगह पर ठोकर मार रहा था,,,। उसे इस बात का पता तो नहीं था कि उसकी मां को उसके तंबू के कठोर पन का एहसास अपनी बुर पर हो रहा है कि नहीं लेकिन,,, इतने से ही रघु का पूरा वजूद हिल गया था उसका ईमान डोल ने लगा था,,,,। कजरी अभी भी रघु को अपने गले से लगाए उसे दुलार कर रही थी,,, व खेतों के बीचो बीच खड़ी थी लेकिन लंबी लंबी जंगली झाड़ियां होने की वजह से,, उन दोनों को कोई भी नहीं देख पा रहा था रघु तो एकदम मस्त हुआ जा रहा था वाशी तरह से समझ गया था कि औरत की चुदाई का सुख क्या होता है तभी तो वह अपनी मां के खूबसूरत बदन के आकर्षण में पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था उसे बराबर महसूस हो रहा था कि उसके पेंट में बना तंबू उसकी मां की टांग के बीच उसकी गुरु पर ही दस्तक दे रही है लेकिन अपने बेटे को दुलार करने में कजरी को शायद इस बात का अहसास तक नहीं हो पा रहा था कि उसके गुप्तांगों को उसके बेटे का गुप्त अंग स्पर्श कर रहा है एक तरह से कपड़ों के ऊपर से ही शुभम का मोटा तगड़ा लंड अपनी मां की कसी हुई बुर का चुंबन कर रहा था,,,,।
रघु पूरी तरह से उत्तेजना के आवेश में आ चुका था और वह भी अपने हाथ को अपनी मां की पीठ पर रखकर अपना प्यार दर्शा रहा था,,,,।
कहां चला गया था बेटा तू तुझे देखने के लिए मेरी आंखें तरस गई थी,,,( कजरी अपने बेटे को पाकर एकदम से रोते हुए बोली,,,।)
यही था मां तु मुझसे नाराज थी ना इसलिए,,,,( इतना कहते हुए रघु अपनी मां की पीठ पर अपनी हथेली को फेर रहा था,,,।)
अगर आज तो नहीं आता बेटा तुम्हें मर जाते मैं तुझसे बिछड़ना नहीं चाहते मैं तुझसे गुस्से में बोल गई थी इसका मतलब यह नहीं था कि तू मुझसे दूर चला जाए,,,,।
नहीं मम्मी कहीं नहीं जाऊंगा तुझे छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा,,,,( रघु पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था वह अपनी मां को बाहों में समाया हुआ था,,,, उसके तन बदन को उसकी मां की खूबसूरत बदन से उठती हुई मादक खुशबू बेहाल कर रही थी,,,,।)
मुझसे वादा कर रघु तु मुझे छोड़कर कभी नहीं जाएगा भले मैं तुझे कितना भी डाटु या मारु तुम मुझे छोड़कर कहीं नहीं जाएगा,,,,,( इतना कहते हुए कजरी लगातार रोए जा रही थी और दूसरी तरफ रघु पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा,,, था,,,)
मैं कहीं नहीं जाऊंगा मैं तुमसे वादा करता हूं कहीं नहीं जाऊंगा,,,,( इतना कहते हुए रघु पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और वह अपने दोनों हथेली को अपनी मां की चिकनी कमर से होता हुआ उसे नीचे की तरफ उसके नितंबों के उभार पर ले गया और उसे अपने हथेली में भरकर हल्के से दबाता हुआ अपनी तरफ खींच लिया जिससे इस बार उसके लंड की ठोकर कजरी को अपनी बुर की नर्म दीवारों पर एकदम बराबर महसूस हुई और वह एकदम से सकते में आ गई,,, रघु पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और अपनी मां को कहीं ना जाने का दिलासा देते हुए एक बार फिर से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली में लेकर उसे दबाता हुआ फिर से अपनी तरफ खींच लीया,,,। इस बार कजरी एकदम से घबरा गई क्योंकि अपनी दूर पर लगने वाली ठोकर को वह समझ नहीं पाई थी कि यह चुभन कैसा है,,, लेकिन दूसरी बार जब रघु ने उसके नितंबों को अपनी हथेली में दबोच ते हुए अपनी तरफ खींचा तब जाकर उसे साफ महसूस हुआ कि उसकी टांगों के बीच होने वाली चुभन किसी और चीज की नहीं बल्कि उसके बेटे के खड़े लंड की है,,,,। पल भर में ही कजरी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी शर्म के मारे उसका चेहरा लाल हो गया,,,, वह अपने आप को अपने बेटे की बाहों से अलग करते हुए बोली,,,।)
रघु तू पहले घर पर जाकर नहा ले और खाना खा ले कल से तू कुछ नहीं खाया नहीं है,,,।
नहीं मां मैं तुम्हारे साथ चलूंगा मैं भी कुछ देर यही काम कर लेता हूं,,,।
नहीं रघु तू मेरी बात मान पहले जाकर के अच्छे से नहा ले खाना खाकर फिर मेरे लिए भी तू खाना लेकर आ जाना तब तक मैं यही हुं।
रघु घर जाने के लिए तैयार हो गया,,, वैसे उसे भूख भी लगी थी,,,,
हलवाई की बीवी ने अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन और संतुष्टि भरी रात गुजारी थी,, जिसकी कसक अभी तक उसके बदन में महसूस हो रही थी,,। रघु के एक-एक जबरदस्त धक्के को याद करके मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,। उसने कभी जिंदगी में नहीं सोची थी कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर उसे इस तरह से एक अद्भुत सुख का अनुभव होगा,,,। रघु के साथ रात गुजारने का उसे बिल्कुल भी मलाल नहीं था,,। भले ही वह अपने पति को धोखा दे चुकी थी लेकिन जिंदगी का बेहतरीन सुख उसने प्राप्त की थी,,,।
कजरी काफी परेशान थी सुबह हो चुकी थी लेकिन रघु का कहीं भी अता पता नहीं था,,,। उसके मन में बहुत घबराहट हो रही थी सालों में बार-बार रघु के बारे में कजरी से पूछना चाहे लेकिन कजरी बात को टाल ले गई आखिरकार उसके पास शालू को बताने लायक बात ही नहीं थी बताती भी तो क्या बताती कि उसका भाई उसे पेशाब करते हुए देख रहा था सोच कर ही उसे बहुत बुरा लग रहा था अगर वह यह बात अपनी बड़ी बेटी शालू से बताती तो वह उसके बारे में क्या सोचते हैं इसलिए वह बात को आई गई कर गई,,,। रघु के प्रति वह काफी चिंतित नजर आ रही थी इसलिए उसे खेतों पर जाने की इच्छा बिल्कुल भी नहीं हो रही थी लेकिन जानवरों के चारे के लिए घास तो लाना ही था। इसलिए इच्छा ना होने के बावजूद भी वह खेतों की तरफ निकल गई,,,
अरे कजरी कहां जा रही है घास करने रुक जा मैं भी आती हूं,,,,( कजरी जैसे ही ललिया के घर के सामने से गुजरी वैसे ही पीछे से ललिया उसे आवाज देकर रोकने लगे क्योंकि उसे भी घास काटने जाना था वह जल्दी से घर में से टोकरी और घास काटने का औजार लेकर निकल पड़ी,,,। कजरी रघु के बारे में ही सोच रही थी इसलिए ललिया के इस तरह से आवाज देने के बावजूद वह उस पर गौर नहीं की और चलती रही और ललिया लगभग भागते हुए कजरी के करीब पहुंच गई और हांफते हुए बोली,,,।)
क्या हुआ कजरी तुम्हारी आवाज सुने नहीं क्या मैं तेरा इंतजार कर रही थी और तू है की भागी चली जा रही है,,।
नहीं कुछ नहीं बस थोड़ा सा तबीयत ठीक नहीं है,,,।
अरे क्या हुआ तेरी तबीयत को,,,( कजरी के माथे पर अपना हाथ लगाकर,,,।) बुखार तो बिल्कुल भी नहीं है,,,।
नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है ललिया बस थोड़ा सा सर दर्द कर रहा था,,,।
तो तुझे घर पर आराम करना चाहिए था ना शालू को भेज दी होती,,,।
कोई बात नहीं मैं कर लूंगी,,,।
अच्छा रामू कहां है आज सुबह से नजर नहीं आया रघु के साथ तो नहीं है,,,
( कजरी जानबूझकर रामू के बारे में पूछ रही थी ताकि अगर रघु उसके साथ हो तो पता चल सके,,,।)
नहीं रामू तो सो रहा है,,,।
चल कोई बात नहीं ,,,,(इतना कहकर कजरी अपने कदम खेतों की तरफ बड़ा ही चली जा रही थी और साथ में ललिया भी उसके साथ हो चली थी,,, कजरी का मन उदास था लेकिन मनके उदास होने के बावजूद भी वह अपनी चाल में उदास पन ला नहीं पा रही थीं,,,, उसकी चाल मतवाली थी,,, उसकी मतवाली चाल पर उसके मन के उदासपन का बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ रहा था,,, कजरी के बदन का हर एक ऐसा निश्छल और चंचल था जिस पर किसी भी प्रकार का लगाम नहीं था इस तरह से कजरी की मद मस्त जवानी भरा संपूर्ण बदन बेलगाम था,, और शायद इसीलिए इस उम्र में भी कजरी के बदन के हर एक अंग से जवानी की मधुर धारा फूट पड़ती थी,,। यही कारण था कि इस समय आते जाते सबकी नजर कजरी की मद मस्त जवानी पर टिकी हुई थी,,, उसके नितंबों का उठाव और घेराव इतना जबरदस्त था कि ना चाहते हुए भी उस पर सब की नजर पड़ ही जाती थी और कजरी की चूचियां तो कमाल की थी मानो उच्च किस्म की बड़ी-बड़ी दशहरी आम उसके ब्लाउज में भर दी गई हो,,,, जिसे अपने हाथों में लेकर दबा दबा कर पीने का मन गांव के हर मर्द का करता था और उनका यह सपना भी था,,,,।
चिंताओं से घिरे होने के बावजूद भी कजरी की चाल में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आ रही थी,,, कच्ची सड़क पर चलते हुए वह दूर-दूर तक नजर घुमाकर रघु को ही तलाश कर रही थी,,। ललिया भी अपनी ही मस्ती में चली जा रही थी तभी उसका खेत आ गया और वह कच्ची सड़क से नीचे उतर गई,,, तकरीबन 20 30 कदम की दूरी पर कजरी का खेत था और वह भी कच्ची सड़क उतरकर अपने खेत में हरी हरी घास काटने के लिए उतर गई,,,,
वह टोकरी लेकर हरी हरी घास के बीच बैठ गई और घास काटने लगी लेकिन घास काटते समय भी वह अपनी नजरों को इधर-उधर दौड़ाकर रघु को देखने की कोशिश कर ले रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार रात भर से रघु गायब था कहां चला गया इस बारे में उसे बिल्कुल भी पता नहीं था,,,। वह अपने मन में सोचने लगी कि उसने अपने बेटे को इस तरह से डांट कर बहुत बड़ी गलती कर दी है कहीं कुछ हो गया तो वह अपनी ही नजरों में गिर जाएगी इस कल्पना से ही उसका दिल दहल उठा रहा था,,,। अपने मन को तसल्ली देते हुए अपने आप को ही बोल रही थी कि अगर वह देख भी लिया तो क्या हो गया,,,। इस तरह से तो कई लोग की नजर पड़ जाती होगी वह दुनिया में अकेला नहीं था जो अपनी मां को पेशाब करते हुए देख लिया था पैसे कहीं लड़के होंगे जो अपनी मां को जानबूझकर या अनजाने में पेशाब करते हुए देखे ही लेते होंगे या कपड़े पहनते हुए नहाते हुए किसी भी प्रकार से नग्न अवस्था में उनकी नजर पड़ी जाती होगी तो इसका मतलब यह तो नहीं कि अपने ही बेटे को इस तरह से डांट फटकार कर घर से निकाल दिया जाए,,,,। नहीं नहीं अब वह आ गया तो मैं उससे माफी मांग लूंगी और ऐसी गलती दोबारा मुझसे नहीं होगी यह भी कह कर उसे मना लूंगी आखिर वह मेरा राजा बेटा है उसी का तो सहारा है,,,। कजरी यही सब अपने आप से बातें करते हुए अपने मन को तसल्ली दे रही थी कि तभी रघु नदी की तरफ से उसे आता हुआ नजर आया,,,, और वह रघु को देखते ही खुश हो गई और जोर जोर से रखो को आवाज देने लगी,,,, रघु भी अपनी मां की आवाज को सुन रहा था वह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके बिना नहीं रह सकती और वह भी अपनी मां के बिना नहीं रह सकता था आखिरकार गुस्सा कर कितने दिन वह दूर रह सकता है एक न एक दिन तो उसे लौटकर घर पर आना ही था,,,, लेकिन वह यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसकी मां उसे डांट फटकार कर दूर नहीं भगाई होती तो कल की रात वह हलवाई की बीवी के खूबसूरत बदन से खेलते हुए उसकी चुदाई नहीं कर पाता,,, आखिरकार उसे यह बात अच्छी तरह से समझ में आ रही थी कि मां की डांट फटकार भी बच्चे के लिए फायदेमंद होती है,,,। और यह देख भी लिया था कि उसकी मां की डांट फटकार उसके लिए आशीर्वाद साबित हुई थी वरना वह अपनी जवानी का खाता ना खुलवा चुका होता,,।
अभी भी कजरी उसे आवाज देकर बुला रही थी और रघु उसकी तरफ आगे बढ़ता चला जा रहा था लेकिन जैसे-जैसे अपनी मां की तरफ आगे बढ़ता चला जा रहा था वैसे वैसे उसके जेहन में बसा वह दृश्य उसके मन मस्तिष्क पर उधर ने लगा था,,,,। हलवाई की बीवी के साथ पहली बार संभोग सुख भोगने के बाद से उसका नजरिया हर औरत के लिए बदलने लगा था,,, वैसे तो पहले भी उसका यही हाल था लेकिन जब से वह हलवाई की बीवी के नंगे बदन को देखकर उसके नंगे बदन के हर एक अंग से खेल कर उसकी चुदाई किया था तब से अब हर औरत के प्रति उसका नजरिया बदलता जा रहा था इसलिए तो वह जैसे जैसे अपनी मां के करीब बढ़ता जा रहा था जैसे वैसे उसकी आंखों के सामने,,, उसकी मां की नंगी गांड और उसकी बुर में से निकलती हुई पेशाब की तेज धार नजर आने लगी थी और यह दृश्य उसके मन में उभरते ही उसके लंड का तनाव बढ़ना शुरू हो गया था,,, बार-बार वह अपने मन को दूसरी तरफ भटकाने की कोशिश कर रहा था लेकिन ऐसा उसके लिए शायद मुमकिन नहीं हो पा रहा था,,,, पहली बार में ही वह अपनी मां की नंगी गांड के आकर्षण में पूरी तरह से बंध चुका था।
वह धीरे-धीरे खेतों में खड़ी अपनी मां के करीब पहुंच गया और उसकी मां एक पल की भी देरी किए बिना उसे अपने गले से लगा ली,,,,,। पल पल भर में ही उसके पूरे चेहरे पर चुंबनों की बारिश कर दी,,, हलवाई की बीवी के नंगे बदन का मजा चख चुका रघु अपनी मां के इस तरह से चुंबन लेने पर पल भर में ही पूरी तरह से उत्तेजित हो गया,,,, एक पल के लिए तो उसके जी में आया कि वह भी अपनी मां को बाहों में लेकर उसे चुंबन से नहला दे और उसकी गदर आई जवानी को खेतों में लेटा कर निचोड़ ले,,,,। लेकिन अभी इतनी हिम्मत उसके में नहीं थी कि वह इस तरह की मनमानी अपनी मां के साथ कर सके वह बूत बना अपनी मां के चुंबन होता मजा ले रहा था और चुंबनो के बाद कजरी उसे अपने गले से अपने सीने से लगा ली,,,, कजरी के सीने से लगते ही रघु के तन बदन में शोले भड़क में लगे उसका पूरा वजूद उत्तेजना की लहर में कांप गया,,,, क्योंकि जिस तरह से कजरी ने उसे अपने सीने से भींचते हुए गले लगाई थी,,, उससे कजरी की भारी-भरकम चूचियां रघु के सीने से रगड़ खा रही थी और उसकी तनी हुई निप्पल उसके सीने में चुप रही थी जिसकी चुभन को वह अच्छी तरह से अपनी छातियों पर महसूस कर रहा था,,,, उत्तेजना के बारे में पूरी तरह से गनगना गया था,,,, पर अपनी मां की इस हरकत की वजह से उसे अपने पजामे में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा होता हुआ महसूस हो रहा था,,, और उसे यह भी साथ महसूस हो रहा था कि उसके भेजा मैंने उसका खड़ा लंड तंबू की शक्ल लेकर उसकी मां की टांगों के बीच ठीक उसकी बुर वाली जगह पर ठोकर मार रहा था,,,। उसे इस बात का पता तो नहीं था कि उसकी मां को उसके तंबू के कठोर पन का एहसास अपनी बुर पर हो रहा है कि नहीं लेकिन,,, इतने से ही रघु का पूरा वजूद हिल गया था उसका ईमान डोल ने लगा था,,,,। कजरी अभी भी रघु को अपने गले से लगाए उसे दुलार कर रही थी,,, व खेतों के बीचो बीच खड़ी थी लेकिन लंबी लंबी जंगली झाड़ियां होने की वजह से,, उन दोनों को कोई भी नहीं देख पा रहा था रघु तो एकदम मस्त हुआ जा रहा था वाशी तरह से समझ गया था कि औरत की चुदाई का सुख क्या होता है तभी तो वह अपनी मां के खूबसूरत बदन के आकर्षण में पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था उसे बराबर महसूस हो रहा था कि उसके पेंट में बना तंबू उसकी मां की टांग के बीच उसकी गुरु पर ही दस्तक दे रही है लेकिन अपने बेटे को दुलार करने में कजरी को शायद इस बात का अहसास तक नहीं हो पा रहा था कि उसके गुप्तांगों को उसके बेटे का गुप्त अंग स्पर्श कर रहा है एक तरह से कपड़ों के ऊपर से ही शुभम का मोटा तगड़ा लंड अपनी मां की कसी हुई बुर का चुंबन कर रहा था,,,,।
रघु पूरी तरह से उत्तेजना के आवेश में आ चुका था और वह भी अपने हाथ को अपनी मां की पीठ पर रखकर अपना प्यार दर्शा रहा था,,,,।
कहां चला गया था बेटा तू तुझे देखने के लिए मेरी आंखें तरस गई थी,,,( कजरी अपने बेटे को पाकर एकदम से रोते हुए बोली,,,।)
यही था मां तु मुझसे नाराज थी ना इसलिए,,,,( इतना कहते हुए रघु अपनी मां की पीठ पर अपनी हथेली को फेर रहा था,,,।)
अगर आज तो नहीं आता बेटा तुम्हें मर जाते मैं तुझसे बिछड़ना नहीं चाहते मैं तुझसे गुस्से में बोल गई थी इसका मतलब यह नहीं था कि तू मुझसे दूर चला जाए,,,,।
नहीं मम्मी कहीं नहीं जाऊंगा तुझे छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा,,,,( रघु पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था वह अपनी मां को बाहों में समाया हुआ था,,,, उसके तन बदन को उसकी मां की खूबसूरत बदन से उठती हुई मादक खुशबू बेहाल कर रही थी,,,,।)
मुझसे वादा कर रघु तु मुझे छोड़कर कभी नहीं जाएगा भले मैं तुझे कितना भी डाटु या मारु तुम मुझे छोड़कर कहीं नहीं जाएगा,,,,,( इतना कहते हुए कजरी लगातार रोए जा रही थी और दूसरी तरफ रघु पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा,,, था,,,)
मैं कहीं नहीं जाऊंगा मैं तुमसे वादा करता हूं कहीं नहीं जाऊंगा,,,,( इतना कहते हुए रघु पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और वह अपने दोनों हथेली को अपनी मां की चिकनी कमर से होता हुआ उसे नीचे की तरफ उसके नितंबों के उभार पर ले गया और उसे अपने हथेली में भरकर हल्के से दबाता हुआ अपनी तरफ खींच लिया जिससे इस बार उसके लंड की ठोकर कजरी को अपनी बुर की नर्म दीवारों पर एकदम बराबर महसूस हुई और वह एकदम से सकते में आ गई,,, रघु पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और अपनी मां को कहीं ना जाने का दिलासा देते हुए एक बार फिर से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली में लेकर उसे दबाता हुआ फिर से अपनी तरफ खींच लीया,,,। इस बार कजरी एकदम से घबरा गई क्योंकि अपनी दूर पर लगने वाली ठोकर को वह समझ नहीं पाई थी कि यह चुभन कैसा है,,, लेकिन दूसरी बार जब रघु ने उसके नितंबों को अपनी हथेली में दबोच ते हुए अपनी तरफ खींचा तब जाकर उसे साफ महसूस हुआ कि उसकी टांगों के बीच होने वाली चुभन किसी और चीज की नहीं बल्कि उसके बेटे के खड़े लंड की है,,,,। पल भर में ही कजरी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी शर्म के मारे उसका चेहरा लाल हो गया,,,, वह अपने आप को अपने बेटे की बाहों से अलग करते हुए बोली,,,।)
रघु तू पहले घर पर जाकर नहा ले और खाना खा ले कल से तू कुछ नहीं खाया नहीं है,,,।
नहीं मां मैं तुम्हारे साथ चलूंगा मैं भी कुछ देर यही काम कर लेता हूं,,,।
नहीं रघु तू मेरी बात मान पहले जाकर के अच्छे से नहा ले खाना खाकर फिर मेरे लिए भी तू खाना लेकर आ जाना तब तक मैं यही हुं।
रघु घर जाने के लिए तैयार हो गया,,, वैसे उसे भूख भी लगी थी,,,,