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फिर मैंने उसको कहा- "अब घर जाओ, देर हो जाएगी.."
उसने कहा- "सर प्लीज... आप हमको इस परेशानी से बचा लीजिए। आप जो कहोगे में करोगी। आपकी हर बात माऊँगी। आपको कोई भी शिकायत नहीं मिलेंगी..."
मैं जानता था की अब उसके पास और कोई रास्ता नहीं है। वो जानती है की मैं हेल्प की कीमत उसकी कुंवारी चूत को फाड़कर वसूल करगा। मैंने कहा- "चिंता मत करो। मैं हैं ना..."
वो चली गई। ऋतु के जाने के बाद मैं कुछ देर सोचता रहा। अब मेरे दिमाग में कुछ और ही नया प्लान चलने लगा था। मैं अब ये तो जान ही चुका था की ऋतु मेरे आगे पूरी तरह से समर्पण कर चुकी है। जब मर्जी उसको चोद सकता है। पर अब मैं उसको ऐसे नहीं चोदना चाहता था।
मैंने तिवारी को फोन लगाया। तिवारी वो बंदा था जिसने ऋतु की मम्मी को लोन दिया था। मैंने उसको कहा की मुझे आज रात को विक्टर बार में मिलो। वो बार मेरे दोस्त का ही है जिसमें मैं कभी-कभी चला जाता हैं। मैं ठीक 9:00 बजे बार में पहुँचा, तो तिवारी वहां पहले से बैठा था। मुझे देखकर तिवारी ने कहा- "आज अचानक से मुझे कैसे याद करा आपने?"
मैंने तिवारी से कहा- "पहले एक-एक पेंग पीते हैं। फिर बात करते हैं..."
तिवारी ने मेरे पेग में आइस डालते हुए कहा- "सरजी, आप मुझे जल्दी से बताओं की क्या बात है। जब में
आपका फोन आया है मैं सोच में पड़ा है."
मैंने मुश्कुराते हुए कहा "तिवारी तुमने किसी रमेश नाम के आदमी को कोई लोन दिया है?"
सुनते ही तिवारी बोला- "हाँ सरजी दिया है। पर आप में क्यों पूछ रहे हो?"
मैंने तिवारी से कहा- "तुमको इंटरस्ट मिल रहा है या नहीं?
तिवारी ने गली देते हुए कहा- "उसकी तो मैं अब माँ चोदकर ही पैसा वसूल करेंगा.."
मैंने कहा- "शांत बैठकर बात करो, गुस्सा मत दिखाओ। मैं तेरा फैसला करवा सकता है."
सुनकर तिवारी उल्लू की तरह मुझे देखने लगा।
मैंने मुश्कुराकर कहा- "पहले मुझे सब बात सच-सच बता। तूने उसको पैसा क्या देखकर दिया था?"
-
-
तिवारी बोला "सर, मैं उस छिनाल की बातों में आ गया था..."
मैं समझा गया की वो ऋतु की माँ की बात कर रहा है। मैंने उससे अंजान बनते हए कहा- "कॉन छिनाल?"
तिवारी बोला. "उसकी रमेश की बीबी। शोभा साली अपनी चूचियां दिखाकर मेरे से पैसा ले गई और कहा की हर
महीने टाइम पर इंटरेस्ट देती रहेगी..."
मैंने भी सोचा- "इसकी दो जवान लड़कियां हैं, साली मुझसे क्या धोखा करेंगी? मैं उसकी लड़कियों को चोदकर पैमा ले लँगा.."
मेरी समझ में अब पूरा माजरा आ गया था। मैंने तिवारी को अपनी जेब से एक लाख का पैकेट निकालकर दिया
और कहा- "मैं अब जैसा बोलता है वैसा ही करता जा."
उसने कहा- "सर प्लीज... आप हमको इस परेशानी से बचा लीजिए। आप जो कहोगे में करोगी। आपकी हर बात माऊँगी। आपको कोई भी शिकायत नहीं मिलेंगी..."
मैं जानता था की अब उसके पास और कोई रास्ता नहीं है। वो जानती है की मैं हेल्प की कीमत उसकी कुंवारी चूत को फाड़कर वसूल करगा। मैंने कहा- "चिंता मत करो। मैं हैं ना..."
वो चली गई। ऋतु के जाने के बाद मैं कुछ देर सोचता रहा। अब मेरे दिमाग में कुछ और ही नया प्लान चलने लगा था। मैं अब ये तो जान ही चुका था की ऋतु मेरे आगे पूरी तरह से समर्पण कर चुकी है। जब मर्जी उसको चोद सकता है। पर अब मैं उसको ऐसे नहीं चोदना चाहता था।
मैंने तिवारी को फोन लगाया। तिवारी वो बंदा था जिसने ऋतु की मम्मी को लोन दिया था। मैंने उसको कहा की मुझे आज रात को विक्टर बार में मिलो। वो बार मेरे दोस्त का ही है जिसमें मैं कभी-कभी चला जाता हैं। मैं ठीक 9:00 बजे बार में पहुँचा, तो तिवारी वहां पहले से बैठा था। मुझे देखकर तिवारी ने कहा- "आज अचानक से मुझे कैसे याद करा आपने?"
मैंने तिवारी से कहा- "पहले एक-एक पेंग पीते हैं। फिर बात करते हैं..."
तिवारी ने मेरे पेग में आइस डालते हुए कहा- "सरजी, आप मुझे जल्दी से बताओं की क्या बात है। जब में
आपका फोन आया है मैं सोच में पड़ा है."
मैंने मुश्कुराते हुए कहा "तिवारी तुमने किसी रमेश नाम के आदमी को कोई लोन दिया है?"
सुनते ही तिवारी बोला- "हाँ सरजी दिया है। पर आप में क्यों पूछ रहे हो?"
मैंने तिवारी से कहा- "तुमको इंटरस्ट मिल रहा है या नहीं?
तिवारी ने गली देते हुए कहा- "उसकी तो मैं अब माँ चोदकर ही पैसा वसूल करेंगा.."
मैंने कहा- "शांत बैठकर बात करो, गुस्सा मत दिखाओ। मैं तेरा फैसला करवा सकता है."
सुनकर तिवारी उल्लू की तरह मुझे देखने लगा।
मैंने मुश्कुराकर कहा- "पहले मुझे सब बात सच-सच बता। तूने उसको पैसा क्या देखकर दिया था?"
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तिवारी बोला "सर, मैं उस छिनाल की बातों में आ गया था..."
मैं समझा गया की वो ऋतु की माँ की बात कर रहा है। मैंने उससे अंजान बनते हए कहा- "कॉन छिनाल?"
तिवारी बोला. "उसकी रमेश की बीबी। शोभा साली अपनी चूचियां दिखाकर मेरे से पैसा ले गई और कहा की हर
महीने टाइम पर इंटरेस्ट देती रहेगी..."
मैंने भी सोचा- "इसकी दो जवान लड़कियां हैं, साली मुझसे क्या धोखा करेंगी? मैं उसकी लड़कियों को चोदकर पैमा ले लँगा.."
मेरी समझ में अब पूरा माजरा आ गया था। मैंने तिवारी को अपनी जेब से एक लाख का पैकेट निकालकर दिया
और कहा- "मैं अब जैसा बोलता है वैसा ही करता जा."