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Adultery कीमत वसूल

मेरे घर में एक नौकर था जो खाना बनाता था। फिर मैं भी डिनर के बाद सो गया। सुबह में आफिस में जब पहचा तो मेरे केबिन में एक लंच बाबस पड़ा था, साथ में एक स्लिप भी थी। मैंने पढ़ा तो उसमें लिखा था की आज आप मेरे हाथ से बना खाना खाकर बताइए की मुझे खाना बनाना आता है या नहीं?

मैंने लंच टाइम पर ऋत को कैबिन में बुलाया। ऋत से मैंने कहा- "आज लंच दोनों साथ ही करेंगे..." और हम दोनों ने साथ ही लंच किया।

आज ऋत कुरती और पाजामी में थी, सफेद पाजामी में उसकी मोटी-मोटी जाँघों को देखकर लण्ड में तनतनी मच रही थी। लंच के बाद मैंने ऋतु से कहा- "तुम जाने से पहले मेरे से मिलकर जाना.."

ऋत करीब 4:00 बजे मेरे केबिन में आई।

मैंने उसको कहा- "अंदर से लाक कर दो.."

उसने कहा- "क्यों?"

मैंने उसको कहा- "करो तो सही.."

उसने कर दिया। मैं अपनी चयर से उठा और ऋतु को अपनी बाहों में भर लिया और उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किस करने लगा। ऋतु में अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी और मैं उसको चसने लगा। फिर मैंने मत के चतड़ों पर हाथ रख दिया। अत ने अपनी गाण्ड को कस लिया। मैंने अब अपने हाथ उसकी चूचियों पर रख दिए और उसकी चचियों को करती के ऊपर से दबाना शुरन कर दिया। ऋतु की सांस अब तेज चलने लगी थी, और उसका हाथ अब मेरे लण्ड पर आ गया था।

मैंने ऋतु को कहा- "अपनी कुरती उतार दो.."

ऋतु ने मुझे मना कर दिया, बोली- "सर, बस में आपको इससे ज्यादा और कुछ नहीं करने दूंगी."

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..

मैंने कहा- "क्या?"

बोली- "सर मैं आपको पसंद करती हैं पर आप जानते हो मैं अभी बारी हैं और मैं एक गरीब परिवार से हैं। अगर कुछ गलत हो गया तो मेरी लाइफ बर्बाद हो जाएगी..."

मेरे दिमाग में उसका जिस्म घूम रहा था, मैं उस टाइम किसी भी सूरत में उसको अपने लण्ड के नीचे लाना चाहता था। पर कैसे समझ में नहीं आया। मैंने अपने दिमाग का कूल किया और ऋतु से कहा- "ओके... तुम मुझे बो नहीं करने देना पर मुझे प्यार तो करने दो..

ऋतु ने कहा- "मैं आपका लण्ड चूसकर आपको रिलॅक्स कर देती हूँ.."

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मैंने कहा- "ओके... पर मेरी एक शर्त है, तुम पूरी नंगी होकर मेरा लण्ड चूसोगी..."

वो मान गईं। ऋतु ने अपनी करती उतार दी। फिर अपनी लेगिंग अब वो ब्रा पैटी में मेरे सामने खड़ी थी।

उसका गोरा बदन मुझे दीवाना बना रहा था। उसकी ब्लैक कलर की ब्रा उसने उतारी तो ऐसा लगा जैसे में जन्नत में आ गया। उसके 34डी साइज की चूचियां बिल्कुल तनी हुई थी, उसकी चची में अभी निप्पल नहीं थे। मैंने उसकी चूची को अपने हाथ में लेकर अपने मुह से लगा लिया। ऋतु की आँखें बंद हो गई। मैं उसकी चूची को चूसने लगा बारी-बारी से, फिर मैंने उसकी चत पर हाथ फेरा।

उसकी चूत पर हल्के में बाल थे। उसकी चूत में मैंने उंगली लगाई तो मेरी उंगली का जरा सा हिस्सा गया होगा

की वो एकदम से चौंक गई और बोली- "आपने वादा किया है."

मैंने कहा- "पागल, मैं सिर्फ तेरी चूत की खुशबू देख रहा था..." और मैंने बो उंगली अपने मुँह में रख ली। कसम से उसकी चूत का पानी जो मेरी उंगली में लगा था जरा सा, उसका टेस्ट बड़ा मस्त था।

मैंने ऋतु से कहा- "अब मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लो.." और मैं चेयर पर बैठ गया।

 
मैंने कहा- "पागल, मैं सिर्फ तेरी चूत की खुशबू देख रहा था..." और मैंने बो उंगली अपने मुँह में रख ली। कसम से उसकी चूत का पानी जो मेरी उंगली में लगा था जरा सा, उसका टेस्ट बड़ा मस्त था।

मैंने ऋतु से कहा- "अब मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लो.." और मैं चेयर पर बैठ गया।

ऋतु मेरी दोनों टांगों के बीच में आकर बैठ गई और मेरा लण्ड बड़े प्यार से सहलाने लगी। फिर उसने अपना मुँह खोला और लण्ड का सुपाड़ा मुह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।

मैंने कहा- "जान पूरा मह में लो ना..."

ऋतु के छोटे से मुंह में मेरा इतना बड़ा लण्ड आ नहीं पा रहा था। पर फिर भी उसने पूरी कोशिश की उसके गले तक मेरा लण्ड जाकर टकरा जाता था।

मैंने ऋतु से कहा- "आज मेरे लण्ड को ऐसा चूमो जिससे इसकी एक-एक बूंद निकल जाए."

उसने मुझे प्यार से देखा और कहा "ऐसा ही करेंगी जान..."

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फिर वो अपने होंठों का रिंग बनाकर मेरे लण्ड को तेज-तेज चूसने लगी और मेरे दोनों टटों को अपने हाथ से सहलाती जा रही थी। फिर एकदम से उसने मेरे एक टट्टों को अपने मुँह में ले लिया। उसकी इस हरकत से मेरे जिश्म में आग लग गई और मजा बढ़ गया।

इस तरह 10 मिनट चुप्पा मारने के बाद मैंने उसका कहा- "अब मैं में झड़ने वाला हूँ.."

उसने मेरा लण्ड कसकर अपने मुँह में दबा लिया, और जैसे ही मेरा वीर्य निकला उसने मेरे लण्ड के छेद पर अपनी जीभ रख दी और वहां जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया। मेरे पानी की अतिम बैंद्र तक उसने अपना मैंह नहीं रोका। मैं निटाल सा हो गया। सच कहूँ उसके चूसने में मुझे चुदाई से कहीं ज्यादा मजा आ रहा था।

ऋतु ने खड़े होकर अपने कपड़े पहने और मुझे कहा- "सर, मैं अब जाऊँ?"

मैंने कहा- मन तो नहीं कर रहा तुमको भेजने का, पर जाना तो है तो जाओ... उसके जाने के बाद मैं अपनी जीन्स पहनकर वाशरूम में गया। मेरा लण्ड ऐसा सिकह सा गया था जैसे मैंने 5-6 बार चूत मारी हो। मैं सम करके वापिस आ गया। मैंने देखा की मेरा स्टाफ मझे आज अलग नजरों से देख रहा है।

मैंने कुछ कहा नहीं और अपने केबिन में चला गया। अब बस मेरे दिमाग में ऋतु की चूत घूम रही थी। कैसे भी करके अब उसको चोदना ही था। मेरा दिल अब उसकी चूत के लिए बेचैन हो गया था। मैंने उसको फोन किया की घर पहुँच गई या नहीं?

 
ऋतु ने कहा- हाँ मैं घर पहुँच हूँ।

मैंने कहा- तुम्हारे बिना मन नहीं लग रहा है।

ऋतु हँसकर बोली- "घर मत भेजा करा, अपने साथ ही रखा करो। अपने घर ले जाया करो.."

मैं उसकी बात सुनकर कुछ बोला नहीं। क्योंकी उसने जो बात कहीं उसका क्या मतलब था? मैं समझ सकता था। मैंने उस बात को घुमा दिया और बात करने लगा।

इतने में अंजू मरे केबिन में आई। मैंने उसको बैठने को कहा। मेरे दिमाग में ऋतु का जिपम घूम रहा था। मैंने

आज पहली बार अंजू को कामुकता भरी नजर से देखा।

मैंने कहा- क्या काम है?

अंजू बोली- "सर, आज मुझे कुछ पैसों की जरूरत है..."

मैंने कहा- "कितने लेने है?"

उसने कहा- "15000.."

मैंने उसको कहा. "तुम अपनी सेलरी ता ले चुकी हो। अब इतना अमाउंट क्यों माँग रही हो?"

उसने कहा- "मेरी माम की तबीयत ठीक नहीं है..."

मैंने कहा- "ओके ले जाओ... और मैंने उसको 1000 के 5 नोट निकालकर दिए और कहा- "कोई और जरूरत हो

तो माँग लेना...

उसने मुझे बैंक्स कहां और कहा- "सर आप कितने अच्छे हो, आपका एहसान कैसे चुकाऊँगी?"

मैंने हँसकर कहा- "टाइम आने पर बता दूँगा..."

अंज उठकर जाने लगी। उसकी चूचियां देखकर मेरा फिर से मह उत्तेजित होने लगा। पर मैंने खुद को संभाल लिया। अंजू ने स्माइल दी और चली गईं। अगले दिन में आफिस में जल्दी आ गया सब मुझे इतनी जल्दी देखकर दंग रह गये।

क्रमशः..............................

 
मैंने कहा- "ओके ले जाओ... और मैंने उसको 1000 के 5 नोट निकालकर दिए और कहा- "कोई और जरूरत हो

तो माँग लेना...

उसने मुझे बैंक्स कहां और कहा- "सिर आप कितने अच्छे हो, आपका एहसान कैसे चुकाऊँगी?"

मैंने हँसकर कहा- "टाइम आने पर बता दूँगा..."

अंज उठकर जाने लगी। उसकी चूचियां देखकर मेरा फिर से मह उत्तेजित होने लगा। पर मैंने खुद को संभाल लिया। अंजू ने स्माइल दी और चली गईं। अगले दिन में आफिस में जल्दी आ गया सब मुझे इतनी जल्दी देखकर दंग रह गये।

मैने केबिन में जाकर अंज को बुलाया और उसकी मोम का हाल पूछा।

अंजू बोली- "सर मेरी मोम का इलाज किसी बड़े हास्पिटल में होगा और उसमें बहुत पैसा लगेगा। पर मेरे पास इतना इंतजाम नहीं है और ना ही कोई ऐसा जरिया है, जहां से पैसा मिल सकता हो..."

अंजू के पापा नहीं थे। उसकी मौ और उसका छोटा भाई ही थे। बो लोग किराए के मकान में रहते थे। बस अंजू की कमाई से ही उसका घर चलता था।

मैंने अंजू को कहा "कोई बात नहीं, तुम अपनी मोम को लेकर सिटी हास्पिटल में जाना। मैं वहां डाक्टर को फोन कर दूँगा। एक बार वहां मोम को दिखाकर आना और इसमें तुम्हारा कोई पैसा नहीं खर्च होगा। मैं अपने आप देख लगा..."

अंजू की आँख में आँसू आ गये। वो बोली- "सर, आप कितने अच्छे हो। मैं आपके लिए कुछ भी कर सकती हैं."

मैंने अजू के पास जाकर उसके कंधों पर प्यार से हाथ फेरा और कहा- "इसान ही इंसान के काम आता है."

अंजू मेरे गले से लगकर सिसकने लगी। मैंने उसकी कमर पर हाथ फेर कर उसको दिलासा दिया। अंजू की चूचियां मेरे सीने से टकराकर मुझे उत्तेजित कर रही थी।

मैंने अंज को कहा- "अब जाओ और शाम को जल्दी चली जाना..."

वो चली गई। अब में अंजू को भी चोदने की सोच रहा था। क्या करंग ये साली चत चीज ही ऐसी है की इसके आगे सब बैंकार लगता है। मुझे किसी काम से जाना था। मैं आफिस से जल्दी निकल गया।

जब मैं काफी देर तक नहीं आया तब ऋतु का फोन आया- "सर आप कहां हो?"

मैंने कहा- मैं एक मीटिंग में हैं।

उसने कहा- "मुझको जल्दी घर जाना है.."

मैंने कहा- "ही जा सकती हो..."

में जब आफिस गया तो काफी शाम हो चुकी थी। सब चले गये थे बस चपरासी था वहां मैंने सोचा मैं भी घर चला जाता है। तभी मेरे दिल में आया की क्यों ना अंज को फोन करके पलं की वा हास्पिटल में गई या नहीं? अंजू को फोन किया।

 
अंज ने कहा "में डाक्टर को दिखाकर घर आ गई हैं, और मेरी मोम आपसे मिलने को कह रही हैं। क्या आप आ सकतं हो?"

मैंने कुछ सोचकर ही बोल दिया।

मैंने अंजू के घर की तरफ कार मोड़ दी अंजू का घर आफिस के पास ही था। वहां जाकर मैंने कार पार्क की और उसके दरवाजे को खटखटाया। अंजू ने दरवाजे खोला और मुझे बड़ी प्यारी सी स्माइल दी। फिर उसने मुझे कहा "वेलकम सर.

मैं अंदर पहुँचा तो उसकी माम ने मुझसे कहा- "सर, आप हमारे घर आए मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। आज आपकी वजह से हम इतने बड़े डाक्टर को दिखा पाए। मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था की मैं इतने बड़े डाक्टर से इलाज करवा सकती हैं..."

मैंने कहा- नहीं आंटी, आप मुझे शमिंदा नहीं करें और कोई परेशानी तो नहीं हुई?

अंज इतने में पानी लेकर आ गई थी। कहने लगी- "सर, डाक्टर ने हमसे अच्छे से बात की थी। आपका नाम लेने की वजह से हमको ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ा..."

मैंने कहा- मुझे पता है मेरी डाक्टर से बात हो गई थी।

फिर अंजू की मोम ने कहा- "आप चाय पीकर जाइएगा.."

मैंने कहा- जी नहीं, मैं अब चलूँगा कुछ काम है।

अंजू ने कहा- "सर, प्लीज आप पहली बार आए हैं कुछ तो लीजिए."

मैंने कहा- "आज नहीं फिर कभी ले लेंगा.." और मैंने हाके से अंज को आँख मार दी।

अंजू शर्मा गई। मैंने अजू की माँ को नमस्ते की और खड़ा हो गया।

अंजू की मोम ने कहा- "अंज, सर को बाहर तक छोड़ आओ.."

अंजू मेरे साथ बाहर तक आई मैंने हल्के से अजू को कहा- "कल आफिस आओगी या नहीं?"

अंज बोली- "सर, मैं कल क्यों नहीं आऊँगी?"

मैंने कहा- आज का नाश्ता रह गया ना?

अंजू ने भी मुश्कुराते हुए कहा- "मंजूर है कल आपको जैसा नाश्ता करना हो कर लेना सर। आपने हमारे लिए इतना करा है हम तो आपके एहसान से दब गये हैं."

मैंने कहा- "ऐसा कोई एहसान नहीं करा मैंन। बस में तो इंसानियत है...' कहकर मैं चला आया। मेरे दिमाग में अब ऋतु के साथ अंज का भी चोदने का खयाल पनप गया था। मेरे दिमाग में अब दो-दो सीलबंद चूत घूम रही श्री अंजू और ऋतु दोनों को मैं अब अपने लण्ड के नीचे लाने की तरकीब सोचने लगा।

 
मेरा घर कब आ गया पता ही नहीं चला। मैंने दिमाग को फ्रेश करने के लिए बियर पी और डिनर लगाने को कहा। डिनर के बाद मुझे नींद आने लगी। मैं जल्दी सो गया अगले दिन सुबह मैंने आफिस जाने से पहले ऋतु को फोन किया की आज मैं आफिस देर से आऊँगा। तुम मेरे केबिन में जाकर वहां कुछ चेक रखें हैं उनको बैंक में लगवा देना। में जब आफिस पहुँचा तो ऋतु मेरे केबिन में ही बैठी थी।

ऋतु ने कहा- "सर, मेरी मोम आपसे मिलना चाहती हैं। अगर आप कहो तो उनको मैं आफिस में बुला ल...

मैंने ऋतु से पूछ- "उनको क्या काम है मेरे सं?"

उसने कहा- पता नहीं क्या बात है?

मैंने कहा- "ऑक बुला लो... और में बैठा सोच रहा था की ऐसा क्या काम होगा? कहीं मेरे और ऋतु के बारे में कोई बात तो नहीं पता चली? फिर मैंने सिर झटका और कहा देखते हैं।

करीब 3:00 बजे ऋतु की मोम आ गई। ऋतु की मोम को देखकर उनकी उम का आइडिया लगा पाना मुश्किल लग रहा था। ऋतु की मोम भी ऋतु जैसे गोरी और सुंदर थी, उनका फिगर एकदम मस्त था। ऋतु जैसा ही काले लंबे बाल। बस एक खास चीज जो मैंने नोटिस की, वो थी उनकी गाण्ड जो कि बिल्कुल सेंब के आकार में थी। साड़ी में अलग ही उभर रही थी।

ऋतु की मोम मेरे सामने बैठी थी फिर वो बोली- "सर, वैसे तो आपसे कुछ कहते भी नहीं बन पड़ रहा। पा मजबूरी ऐसी है की अगर आप हेल्प कर दो तो आपका बड़ा एहसान होगा हम पर..."

मैंने कहा- "आप बताइए तो सही। अगर मैं आपकी हेल्प कर सकता हैं तो जरूर करेंगा.."

वो बोली- "ऋतु की बड़ी बहन जिसकी शादी को अभी एक साल हुए हैं उसकी शादी के टाइम हमने किसी से इंटरेस्ट पर पैसा ले लिया था। लेकिन ऋतु के पापा अभी तक पैसों का इतजाम नहीं कर पाए। अब जिसको पैसा देना है वो हमको कल धमकी देकर गया है की अगर7 दिन में उसके पैसे नहीं लोटाये तो वो हमको जेल में भिजवा देंगा, और वो बड़ा गंदा आदमी है गंदी-गंदी गालियां देकर बात करता है। हम बड़ी मुशीबत में है और कोई सहारा नहीं है। अगर उसको पैसा नहीं लौटाया तो वो हमें बर्बाद कर देगा। हम कहीं के नहीं रहेंगे..." कहते कहते ऋतु की मम्मी की आँखों में आँसू भर गये और वो सिसकियां लेकर रोने लेगी।

मैंने उनको पानी दिया और कहा- "आप रोना बंद करिए। मैं देखता हैं आप मुझे उस आदमी का नाम बताओ, जिसको पैसे देने हैं, और कितने देने हैं ये बताइए.."

ऋतु की मम्मी ने मुझे उस आदमी का नाम बताया। नाम सुनकर मैं मन ही मन मुश्कुरा उठा। वो बंदा मेरे दोस्त का भाई था, जिसकी मैंने कई बार हेल्प की है। मैंने ऋतु की मम्मी से कहा- "ये आदमी तो सच में ही बड़ा गलत हैं। आपने इससे पैसे क्यों लिए आपको पता नहीं था बया?"

इसके बारे में वो बोली- "अत की बहन की शादी के टाइम हमको अचानक रुपयों की जरूरत पड़ गई और कहीं से इंतजाम नहीं हुआ। मजबूरी में इससे लेना पड़ा। उसने हमसे ब्लैंक चेक और स्टाम्प पेपर साइन करवा के रखें मैंने एक गहरी सांस लेते हुए कहा- "पैसा कितना लिया था?"

बो बोली- "275000 जोकि अब इंटरेस्ट जोड़कर एक लाख हो गया है। अब तो आपका ही सहारा है। अगर आप मदद कर दो तो हम इस मुशीबत से बच सकते हैं.."

मैंने कहा- "आप मुझे थोड़ा सोचने का टाइम दीजिए। मैं देखता है की मैं आपकी क्या हेल्प कर सकता है?" फिर मैंने कहा- "आप ये बताइए की आपको अगर मैं कहीं से इंतजाम करवा भी दूं तो आप वो पैसा कब तक लौटा सकते हैं?"

वो बोली- "ऋतु के पापा की तो कोई ज्यादा इनकम नहीं है। अत को जो आप सेलरी देते हैं, उससे ही घर चलता है। ऋतु की एक छोटी बहन और है जोकि अभी बी.ए. में हैं...

मैंने ये सुनकर कहा- "आप खुद सोचिए की आप किस तरह से इन हालात में पैसा लौटा पाएंगी?"

 
मैंने कहा- "आप मुझे थोड़ा सोचने का टाइम दीजिए। मैं देखता है की मैं आपकी क्या हेल्प कर सकता है?" फिर मैंने कहा- "आप ये बताइए की आपको अगर मैं कहीं से इंतजाम करवा भी दूं तो आप वो पैसा कब तक लौटा सकते हैं?"

वो बोली- "ऋतु के पापा की तो कोई ज्यादा इनकम नहीं है। अत को जो आप सेलरी देते हैं, उससे ही घर चलता है। ऋतु की एक छोटी बहन और है जोकि अभी बी.ए. में हैं...

मैंने ये सुनकर कहा- "आप खुद सोचिए की आप किस तरह से इन हालात में पैसा लौटा पाएंगी?"

ऋतु की मम्मी ने मेरे आगे हाथ जोड़ दिए और कहा- "अब आप ही हमारी मदद कर सकते हैं, वरना हम कहीं के नहीं रहेंगे..."

मैंने कहा- "आप मुझे शर्मिदा नहीं करिए। लेकिन मैं आपकी मदद कैसे करण? ये सोचने की बात है। आप अभी घर जाइए मैं आपको कल तक बता दूँगा.. और ये कहकर मैंने अपनी बात खतम कर दी।

ऋतु की मम्मी चली गई। मैं अपनी चेंगर पर झला झलने लगा। थोड़ी देर में ऋतु मेरे कैबिन में आई।

मैंने उसको बोला- "तुम जानती हो तुम्हारी मम्मी यहां क्यों आई थी?"

ऋतु से कोई जवाब नहीं दिया गया। वो बोली "सर, प्लीज हमारी हेल्प कर दीजिए। नहीं तो हम सबकी लाइफ बर्बाद हो जायेगी और मेरे पापा को हार्ट की प्रोबलम है। उनका कुछ हो गया तो हम सबका क्या होगा?"

मैंने ऋतु को कहा- "मुझे अभी सोचने दो की मैं क्या कर सकता हूँ? और तुम जाने से पहले मुझे मिलकर जाना..."

जानें से करीब 30 मिनट पहले ऋतु मरे केबिन में आईं।

मैंने उसको बड़े प्यार से कहा- "देखो ऋतु, मैं अभी तुमको कोई वादा नहीं कर सकता। पर तुम मुझे ये बताओ की इतना बड़ा अमाउंट वापिस कैसे करोगे तुम लोग? ऋतु मैं जानता हैं की तुम्हारी सेलरी से ही तुम्हारा घर चलता है। उससे अगर कटवावगी तो ये भी सोचकर देखो की घर का खर्चा कैसे चलेगा?"

ऋतु ये सुनकर रूबांसी सी हो गई और मेरे से चिपक कर रोने लगी। कुछ बोली नहीं।

मैंने उसको कहा- "रोना बंद करो। मैं कुछ ना कुछ करता है। पहले तुम जरा मुझं रिलॅक्स तो कर दो.."

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ऋतु समझ गई मैं क्या चाहता है। उसने मेरी जीन्स की जिप खोली और मेरा लण्ड बाहर निकालकर चूसने लगी। मुझे आज चुप्पे में मजा नहीं आ रहा था। वो लण्ड चूस जर रही है, पर मजा नहीं आ रहा था।

मैंने उसको कहा- "तुम दिल से नहीं चूस रही हो.."

उसने कहा- "ऐसा तो नहीं है सर."

फिर मैंने उसको कहा- "मुझे मजा नहीं आया तो में फ्री दिमाग कैसे हो पाऊँगा?"

सुनकर वो एकदम से मेरे लौड़े का पूरा मुँह में लेकर जोर-जार से चूसने लगी। अब मुझे मजा आने लगा। मैं उसकी चूची पर हाथ फेरता रहा। फिर मैंने उसके मुह में ही अपना सारा माल झाड़ दिया। वो सारा माल पी गईं।

अब मैंने उसको अपनी गोद में बैठा लिया और उसके गाल चूमने लगा। फिर मैंने उसकी कुरती में हाथ डाल दिया, तो वो कुछ नहीं बोली। फिर मैंने हल्के-हल्के उसकी सलवार के ऊपर से उसकी चूत को सहलाया। आज पता नहीं क्यों उसने कोई ना-नकुर नहीं की। मैं थोड़ी देर उसके जिश्म से खेलता रहा।

फिर मैंने उसको कहा- "अब घर जाओ, देर हो जाएगी.."

 
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