S
StoryPublisher
Guest
निर्मला के घर का नजारा बेहद गर्म कर देने वाला था,, अभी रात के 11:00 ही बजे थे कि दोनों की कामलीला की शुरुआत हो चुकी थी,, पहली बार निर्मला अपने कमरे में नहीं बल्कि कमरे से बाहर डाइनिंग हॉल में डाइनिंग टेबल पर अपने खूबसूरत बदन की गर्मी अपने बेटे के द्वारा पिघलाने में जुटी हुई थी,,,, निर्मला बेहद गर्म हो चुकी थी उसके तन बदन में अपने बेटे का लंड लेने की इच्छा ज्यादा बलवंत हो चुकी थी,,,, निर्मला के खूबसूरत भरे हुए बदन से वासियों की चिंगारी फूट गई थी जिसमें शुभम अपने आपको पिघलता हुआ महसूस कर रहा था,,, निर्मला को लगा था कि उसका बेटा अब पीछे से उसकी लेने वाला है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था शुभम के मन में कुछ और चल रहा था वह अपने घुटनों के बल बैठ कर अपनी मां की पेंटी को दोनों हाथों से धीरे-धीरे करके नीचे की तरफ खींचते हुए उसे उतार रहा था,,,, और निर्मला आशा भरी निगाहों से अपने बेटे की तरफ देख कर मन में यह सोच रही थी कि आप उसका बेटा उसकी पैंटी उतार कर उसे संपूर्ण रूप से नंगी कर देगा और अपने मोटे तगड़े लंड को उसके गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रखकर धक्का लगा कर उसे अंदर तक उतार देगा,,,,, लेकिन शुभम के मन में कुछ और था वह देखते ही देखते अपनी मां की गुलाबी रंग की पैंटी जो कि उसकी मां की पसंदीदा पेंटी थी उसे उतारकर एकदम नंगी कर दिया इस समय शुभम घुटनों के बल बैठा हुआ था और उसकी मां डाइनिंग टेबल पर झुककर उसकी आंखों के सामने अपनी बड़ी बड़ी मादकता से भरी हुई गांड को हिला रही थी जिसे देखकर शुभम के लंड में हरकत होने लगी थी,,,, दोनों की सांसो की गति तेज चल रही थी,,, निर्मला इतनी ज्यादा प्यासी हो चुकी थी कि वह अपना एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर बाहर बार अपनी गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड पर जोर जोर से चपत लगा रही थी ,,,जो कि यह चपत सुभम के लिए इशारा था कि अब वह अपना काम शुरू करें,, अपनी मां के उतावलापन को देखकर शिवम भी अब ज्यादा देर नहीं लगाना चाहता था इसलिए अपने दोनों हाथों से अपनी मां की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी जानकी आंखों को पकड़कर उसे हल्के से फैलाने लगा जिससे निर्मला की गांड के फांक के बीचो-बीच उसकी गुलाबी रंग की गुलाबी पत्ती नजर आने लगी साथ ही उसके नीचे छोटा सा भूरे रंग का छेद नजर आने लगा,, सुभम भूरे रंग का छेद कुछ ज्यादा ही गोलाई लिए हुए था उसे देखते ही ना जाने क्यों शुभम के तन बदन में उत्तेजना कुछ ज्यादा ही असर दिखाने लगी,, अभी भी निर्मला पीछे नजर करके अपने बेटे की हरकत को देख रही थी जो कि ठीक उसकी गांड के नीचे बैठा हुआ था,, बड़ा ही मादक नजारा था यह नजारा निर्मला के तन बदन में भी आग लगा रहा था,,, वह पूरी तरह से नंगी डाइनिंग टेबल पर चुप कर खड़ी थी और उसका बेटा पजामा पहन कर घुटनों के बल बैठा हुआ था और यह बात वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसे ईस हाल में देखकर उसके बेटे का लंड पजामे के अंदर गदर मचा रहा होगा,,,,
Nirmala ki khubsurat badi badi chuchiya
शुभम इस सुभम काफी भूखा था और उसके सामने बदन रूपी स्वादिष्ट व्यंजन परोसी हुई थी जिसे देखते ही उसके मुंह में पानी आ गया और उसे ज्यादा सब्र नहीं हुआ,,, और वह अपने दोनों हाथों से अपनी मां की गांड को कस के पकड़ के उसे पके हुए फल की तरह फैलाते हुए अपना मुंह उसके गुलाबी बुर की गुलाबी पत्ती पर दे मारा जैसे ही शुभम की जीभ निर्मला को अपनी बुर की गुलाबी पत्ती पर महसूस हुई उसका बदन अंदर तक सिहर उठा और उसके मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,
ससईईईईईई,,,,,आहहहहहहह ,,,, सुभम,,,,
( फिर क्या था शुभम अपनी मां की गुलाबी बुर पर टूट पड़ा वह उसे मलाई की तरह जीभ से चाटे जा रहा था,,,, शुभम अपनी मां को एकदम मस्त किए जा रहा था लेकिन सिर्फ गुलाबी बुर की गुलाबी पत्ती को चाटना ही उसका मकसद आज बिल्कुल नहीं था आज वह कुछ और करने के मूड में था इसलिए वह अपनी जीभ को थोड़ा सा नीचे की तरफ लेकर आया और अपनी प्यासी जीभ को अपनी मां की गांड की भुरे रंग के छेद पर रख कर उसे गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया,,,,,
आहहहहहहह,,,सहहहहहह,,,,,ऊफफफ,,,,, क्या है यह,,,, गजब,,,,,, अद्भुत,,,,,,ऊहहहहहहह,,,,,( निर्मला अपनी कांड के छोटे से छेद पर अपने बेटे की जीभ की रगड़ को महसूस करते ही उसके मुंह से यह सब बातें अपने आप निकलने लगी,,,, उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसका बेटा जो कि अब तक उसकी गुलाबी बुर को ही चाट कर उसे मस्त करता था आज उसकी गांड के छोटे से छेद को चाट कर उसे सातवें आसमान पर लिए जा रहा है,,,, गजब का एहसास ऐसा स्पर्श उसने आज तक अपने बदन पर किसी कोने पर महसूस नहीं की थी जिस तरह का स्पर्श होते ही आज उसे अपने तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुटते हुए महसूस हो रही थी,,,, शुभम को साफ महसूस हो रही थी कि उसकी मां की गांड की भूरे रंग के छेद में से मादकता भरी खुशबू आ रही थी और वह खुशबू से एकदम मस्त हुए जा रहा था,, धीरे-धीरे उसे कसेला सवाद एकदम मधुर लगने लगा ,,,वो पागलों की तरह अपनी मां की गांड के छेद में अपनी जीभ के पोर को अंदर तक डालकर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,, आज शुभम को अपनी मां की बुर चाटने से ज्यादा उसकी गांड चाटने में मजा आ रहा था,,,, दोनों मदहोश हुए जा रहे थे निर्मला किसी भी तरह से अपने बेटे को उसकी गांड के छेद को चाटने के लिए मना नहीं कर रही थी,, बल्कि वह उसे और ज्यादा ऊकसाते हुए अपनी गांड को गोल-गोल उसके चेहरे पर घुमा रही थी जिससे उसके तन बदन में और ज्यादा मदहोशी छाने लगी थी निर्मला को अपने बदन में नशा सा महसूस हो रहा था,,,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखता चला जा रहा था बार-बार वह अपने थुक से अपने गले को गीला करने की कोशिश कर रही थी वह इतनी ज्यादा मदहोशी के आलम में डुबती चली जा रही थी कि अपने दोनों हाथों से ही अपनी दोनों चूचियों को पकड़ कर खुद ही दबाना शुरू कर दी थी,,
shubham nirmala chuchiyo ka deewana
ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,, सुभम,,, मेरे बेटे यह क्या कर रहा है तू मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि तू मेरी गांड चाट रहा,,, है,,, (गोल गोल गांड घुमाते हुए) सच में तू किसी को भी अपना दीवाना बना ले तो उसमें औरत को खुश करने का हर एक कला है तू अब इस खेल में एकदम पक्का खिलाड़ी हो गया रे,,,( अपनी मां की बात सुनकर सुबह कुछ ज्यादा ही जोश में आकर अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से थोड़ा और ज्यादा फैलाते हुए अपनी जीभ को हल्के से अपनी मां की बड़ी गांड के भूरे रंग के छेद में उतार दिया जिससे निर्मला एकदम सिहर उठी,,) आहहहहहहह,,, मार ही डालेगा क्या रे,,,,( अपनी मां की गरम सिस्कारी और उसकी बातों का जवाब सुभम बिना कुछ बोले अपनी हरकत और अपनी जीभ से दे रहा था,, वो एकदम पागल हुए जा रहा था उसे अपनी मां की गांड चाटने में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी और उत्तेजना के मारे ऊपर से निर्मला की रसीली कसी हुई बुर पसीजती चली जा रही थी,,, जिसमें से मदन रस धीरे-धीरे बुंद बनकर नीचे टपक रही थी और वह सीधा शुभम के होठों पर गिर रही थी जिसे शुभम अपनी जीभ से चाट कर अपने आनंद को दोगुना कर दे रहा था।,,, वह पागलों की तरह अपनी मां की गांड को चाटते हुए कभी-कभी अपनी मां की गुलाबी बुर पर भी जीभ रखकर ऊसे चाट ले रहा था जिससे निर्मला के बदन में कसमसाहट के साथ-साथ उत्तेजना की लहर दौड़ने लग रही थी,,,,,।
धीरे-धीरे कमरे का दृश्य बेहद उस्मा कारक होता जा रहा,, निर्मला लगातार अपने बड़े बड़े नितंबों को गोल-गोल घुमाते हुए उसे अपने बेटे के मुंह पर रगड़ रही थी,,,, जिस का आनंद लेते हुए शुभम लगातार अपनी मम्मी की गांड को चाटे जा रहा था,,, पूरे घर में निर्मला की गर्म सिसकारी की आवाज गूंज रही थी जिसे सुनने वाला उन दोनों के सिवा तीसरा कोई भी नहीं था,,,, शुभम लगभग 25 मिनट तक अपनी अपनी खूबसूरत मां की मदमस्त गांड से उलझा रहा,,, निर्मला को भी आज अपनी बुरर चटवाने से कहीं ज्यादा अत्यधिक आनंद गांड चटवाने में आ रहा था ,,, निर्मला बराबर अपने बेटे का सहयोग दे रही थी वह डाइनिंग टेबल पर झुक कर अपनी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए अपनी दोनों चूचियों से खेल रही थी जो कि बेहद खूबसूरत और किसी पोर्न मूवी की एक्टर से कम नहीं लग रही थी,,,,
Shubham nirmala ki chut chaat ta hua
निर्मला की मदमस्त गांड से आ रही माधव खुशबू शुभम को पूरी तरह से मदहोशी के आलम में लिए जा रही थी,,,, शुभम ठीक अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड के नीचे घुटनों के बल बैठा हुआ था उसकी सांसों की गति बड़ी तीव्र गति से चल रही थी अनहद ऊन्मादक स्थिति में वह अपने आप पर कंट्रोल किए हुए था, वरना जिस तरह से उसकी मां उत्तेजित होकर उसे अपना लंड उसकी बुर में डालने के लिए बोल रही थी शुभम की जगह दूसरा कोई लड़का होता तो कब से उसकी बुर में डालकर पानी छोड़ दिया होता लेकिन यह शुभम था जो कि बड़े ही शिद्दत और धीरे-धीरे संभव है कि हर प्रक्रिया का मजा,, लेता था किस लिए तो तकरीबन 45 मिनट के बाद भी वह संभोग सुख से वंचित अपनी मां को और भी ज्यादा चुदवासा बनाए जा रहा था और खुद अपनी मां के खूबसूरत बदन के हर एक अंग का आनंद लेते हुए उत्तेजनात्माक स्थिति में हर एक पल का मजा ले रहा था,,,
कुछ पल के लिए शुभम अपने जीव को अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद पर से हटा कर उसे तेज चलती सांसों के साथ अच्छे से देखने लगा, ,,, शुभम अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड के घेराव को देखकर पूरी तरह से प्रसन्नता से भर गया ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की गांड नहीं किसी नई दुनिया को देख रहा है,,,, उसने अब तक न जाने कितनी औरतों की गांड को देख चुका था लेकिन जिस तरह की बनावट उसकी खुद की मां की गांड की थी वैसी गांड उसने आज तक किसी औरत के लिए देखा था इसलिए तो वह अपनी मां की गांड देखते इतना अत्यधिक उत्तेजना से भर जाता था,, उसकी आंखों के सामने मदन रस से भीगी हुई उसकी मां की गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियां जिस पर मदन रस की बूंदे किसी मोती की तरह चमक रही थी वह बिल्कुल साफ नजर आ रही थी,,, साथ ही उसके दो अंगूल नीचे गांड का भुरे रंग का छेद जो कि किसी चॉकलेट के कलर का ही लग रहा था वह ऐसा लग रहा था मानो कि उसे आमंत्रित कर रहा हो,,,, उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूख रहा था और निर्मला प्यासी नजरों से शुभम की तरफ आस बांधे देख रही थी,,, शुभम कभी अपनी मां की तरफ देखता तो कभी उसकी गोरी गोरी गांड के गुलाबी छेद और उसके भुरे रंग की छेद की तरफ,,,,, निर्मला की आंखों में अपने बेटे के लंड को अपने बुर में लेने की प्यास साफ नजर आ रही थी,,
अपनी मां की हालत को देखकर शुभम की भी हालत खराब होने लगी उसके भी सब्र का बांध टूटता हुआ नजर आने लगा लेकिन वह इतनी जल्दी टूटने नहीं देना चाहता था इसलिए अपने दोनों हाथों से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को एक बार फिर से थाम लिया,,, और हल्के से उसे एक बार फिर से फैलाने लगा जिससे उसकी गुलाबी बुर्के गुलाबी पत्तियों के साथ-साथ उसके भूरे रंग का छोटा सा छेद भी हल्का सा खुल,, गया,,, जिसे देखते ही उसकी आंखों में चमक आ गई और वह अपने एक उंगली को,, थूक लगाकर धीरे-धीरे उसे अंदर की तरफ डालने लगा जैसे ही निर्मल आप इस बात का आभास हुआ कि उसका बेटा उसकी गांड के छोटे से छेद में उंगली डालना चाहता है वह अपने बदन को आगे की तरफ सिकुड़ने लगी और उसे रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,
नहीं नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल मत कर मुझे दर्द होता है,,
बस एक बार मम्मी कुछ नहीं होगा बस एक बार अंदर डालने दो उंगली,,,( ऐसा कहते हुए वह दोबारा कोशिश करने लगा लेकिन फिर से उसे निर्मला रोकते हुए, बोली,,)
नहीं सुबह में ऐसा मत कर दो तू जानता है मुझे बहुत दर्द करता,, है,,,
लेकिन कोशिश तो करने दो मम्मी कोशिश करने में क्या जाता है,,,( शुभम अच्छी तरह से जानता था कि अगर वह रुक गया तो उसकी मां कभी भी आगे नहीं बढ़ने देगी इसलिए वह बातों में उलझा ते हुए तुरंत अपनी उंगली के आगे वाले भाग को अपनी मां की गांड के अंदर उतार दिया,, जिससे तुरंत निर्मला के मुंह से हल्की कराह की आवाज निकल गई,,,।)
Nirmala ki khubsurat badi badi chuchiya
शुभम इस सुभम काफी भूखा था और उसके सामने बदन रूपी स्वादिष्ट व्यंजन परोसी हुई थी जिसे देखते ही उसके मुंह में पानी आ गया और उसे ज्यादा सब्र नहीं हुआ,,, और वह अपने दोनों हाथों से अपनी मां की गांड को कस के पकड़ के उसे पके हुए फल की तरह फैलाते हुए अपना मुंह उसके गुलाबी बुर की गुलाबी पत्ती पर दे मारा जैसे ही शुभम की जीभ निर्मला को अपनी बुर की गुलाबी पत्ती पर महसूस हुई उसका बदन अंदर तक सिहर उठा और उसके मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,
ससईईईईईई,,,,,आहहहहहहह ,,,, सुभम,,,,
( फिर क्या था शुभम अपनी मां की गुलाबी बुर पर टूट पड़ा वह उसे मलाई की तरह जीभ से चाटे जा रहा था,,,, शुभम अपनी मां को एकदम मस्त किए जा रहा था लेकिन सिर्फ गुलाबी बुर की गुलाबी पत्ती को चाटना ही उसका मकसद आज बिल्कुल नहीं था आज वह कुछ और करने के मूड में था इसलिए वह अपनी जीभ को थोड़ा सा नीचे की तरफ लेकर आया और अपनी प्यासी जीभ को अपनी मां की गांड की भुरे रंग के छेद पर रख कर उसे गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया,,,,,
आहहहहहहह,,,सहहहहहह,,,,,ऊफफफ,,,,, क्या है यह,,,, गजब,,,,,, अद्भुत,,,,,,ऊहहहहहहह,,,,,( निर्मला अपनी कांड के छोटे से छेद पर अपने बेटे की जीभ की रगड़ को महसूस करते ही उसके मुंह से यह सब बातें अपने आप निकलने लगी,,,, उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसका बेटा जो कि अब तक उसकी गुलाबी बुर को ही चाट कर उसे मस्त करता था आज उसकी गांड के छोटे से छेद को चाट कर उसे सातवें आसमान पर लिए जा रहा है,,,, गजब का एहसास ऐसा स्पर्श उसने आज तक अपने बदन पर किसी कोने पर महसूस नहीं की थी जिस तरह का स्पर्श होते ही आज उसे अपने तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुटते हुए महसूस हो रही थी,,,, शुभम को साफ महसूस हो रही थी कि उसकी मां की गांड की भूरे रंग के छेद में से मादकता भरी खुशबू आ रही थी और वह खुशबू से एकदम मस्त हुए जा रहा था,, धीरे-धीरे उसे कसेला सवाद एकदम मधुर लगने लगा ,,,वो पागलों की तरह अपनी मां की गांड के छेद में अपनी जीभ के पोर को अंदर तक डालकर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,, आज शुभम को अपनी मां की बुर चाटने से ज्यादा उसकी गांड चाटने में मजा आ रहा था,,,, दोनों मदहोश हुए जा रहे थे निर्मला किसी भी तरह से अपने बेटे को उसकी गांड के छेद को चाटने के लिए मना नहीं कर रही थी,, बल्कि वह उसे और ज्यादा ऊकसाते हुए अपनी गांड को गोल-गोल उसके चेहरे पर घुमा रही थी जिससे उसके तन बदन में और ज्यादा मदहोशी छाने लगी थी निर्मला को अपने बदन में नशा सा महसूस हो रहा था,,,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखता चला जा रहा था बार-बार वह अपने थुक से अपने गले को गीला करने की कोशिश कर रही थी वह इतनी ज्यादा मदहोशी के आलम में डुबती चली जा रही थी कि अपने दोनों हाथों से ही अपनी दोनों चूचियों को पकड़ कर खुद ही दबाना शुरू कर दी थी,,
shubham nirmala chuchiyo ka deewana
ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,, सुभम,,, मेरे बेटे यह क्या कर रहा है तू मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि तू मेरी गांड चाट रहा,,, है,,, (गोल गोल गांड घुमाते हुए) सच में तू किसी को भी अपना दीवाना बना ले तो उसमें औरत को खुश करने का हर एक कला है तू अब इस खेल में एकदम पक्का खिलाड़ी हो गया रे,,,( अपनी मां की बात सुनकर सुबह कुछ ज्यादा ही जोश में आकर अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से थोड़ा और ज्यादा फैलाते हुए अपनी जीभ को हल्के से अपनी मां की बड़ी गांड के भूरे रंग के छेद में उतार दिया जिससे निर्मला एकदम सिहर उठी,,) आहहहहहहह,,, मार ही डालेगा क्या रे,,,,( अपनी मां की गरम सिस्कारी और उसकी बातों का जवाब सुभम बिना कुछ बोले अपनी हरकत और अपनी जीभ से दे रहा था,, वो एकदम पागल हुए जा रहा था उसे अपनी मां की गांड चाटने में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी और उत्तेजना के मारे ऊपर से निर्मला की रसीली कसी हुई बुर पसीजती चली जा रही थी,,, जिसमें से मदन रस धीरे-धीरे बुंद बनकर नीचे टपक रही थी और वह सीधा शुभम के होठों पर गिर रही थी जिसे शुभम अपनी जीभ से चाट कर अपने आनंद को दोगुना कर दे रहा था।,,, वह पागलों की तरह अपनी मां की गांड को चाटते हुए कभी-कभी अपनी मां की गुलाबी बुर पर भी जीभ रखकर ऊसे चाट ले रहा था जिससे निर्मला के बदन में कसमसाहट के साथ-साथ उत्तेजना की लहर दौड़ने लग रही थी,,,,,।
धीरे-धीरे कमरे का दृश्य बेहद उस्मा कारक होता जा रहा,, निर्मला लगातार अपने बड़े बड़े नितंबों को गोल-गोल घुमाते हुए उसे अपने बेटे के मुंह पर रगड़ रही थी,,,, जिस का आनंद लेते हुए शुभम लगातार अपनी मम्मी की गांड को चाटे जा रहा था,,, पूरे घर में निर्मला की गर्म सिसकारी की आवाज गूंज रही थी जिसे सुनने वाला उन दोनों के सिवा तीसरा कोई भी नहीं था,,,, शुभम लगभग 25 मिनट तक अपनी अपनी खूबसूरत मां की मदमस्त गांड से उलझा रहा,,, निर्मला को भी आज अपनी बुरर चटवाने से कहीं ज्यादा अत्यधिक आनंद गांड चटवाने में आ रहा था ,,, निर्मला बराबर अपने बेटे का सहयोग दे रही थी वह डाइनिंग टेबल पर झुक कर अपनी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए अपनी दोनों चूचियों से खेल रही थी जो कि बेहद खूबसूरत और किसी पोर्न मूवी की एक्टर से कम नहीं लग रही थी,,,,
Shubham nirmala ki chut chaat ta hua
निर्मला की मदमस्त गांड से आ रही माधव खुशबू शुभम को पूरी तरह से मदहोशी के आलम में लिए जा रही थी,,,, शुभम ठीक अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड के नीचे घुटनों के बल बैठा हुआ था उसकी सांसों की गति बड़ी तीव्र गति से चल रही थी अनहद ऊन्मादक स्थिति में वह अपने आप पर कंट्रोल किए हुए था, वरना जिस तरह से उसकी मां उत्तेजित होकर उसे अपना लंड उसकी बुर में डालने के लिए बोल रही थी शुभम की जगह दूसरा कोई लड़का होता तो कब से उसकी बुर में डालकर पानी छोड़ दिया होता लेकिन यह शुभम था जो कि बड़े ही शिद्दत और धीरे-धीरे संभव है कि हर प्रक्रिया का मजा,, लेता था किस लिए तो तकरीबन 45 मिनट के बाद भी वह संभोग सुख से वंचित अपनी मां को और भी ज्यादा चुदवासा बनाए जा रहा था और खुद अपनी मां के खूबसूरत बदन के हर एक अंग का आनंद लेते हुए उत्तेजनात्माक स्थिति में हर एक पल का मजा ले रहा था,,,
कुछ पल के लिए शुभम अपने जीव को अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद पर से हटा कर उसे तेज चलती सांसों के साथ अच्छे से देखने लगा, ,,, शुभम अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड के घेराव को देखकर पूरी तरह से प्रसन्नता से भर गया ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की गांड नहीं किसी नई दुनिया को देख रहा है,,,, उसने अब तक न जाने कितनी औरतों की गांड को देख चुका था लेकिन जिस तरह की बनावट उसकी खुद की मां की गांड की थी वैसी गांड उसने आज तक किसी औरत के लिए देखा था इसलिए तो वह अपनी मां की गांड देखते इतना अत्यधिक उत्तेजना से भर जाता था,, उसकी आंखों के सामने मदन रस से भीगी हुई उसकी मां की गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियां जिस पर मदन रस की बूंदे किसी मोती की तरह चमक रही थी वह बिल्कुल साफ नजर आ रही थी,,, साथ ही उसके दो अंगूल नीचे गांड का भुरे रंग का छेद जो कि किसी चॉकलेट के कलर का ही लग रहा था वह ऐसा लग रहा था मानो कि उसे आमंत्रित कर रहा हो,,,, उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूख रहा था और निर्मला प्यासी नजरों से शुभम की तरफ आस बांधे देख रही थी,,, शुभम कभी अपनी मां की तरफ देखता तो कभी उसकी गोरी गोरी गांड के गुलाबी छेद और उसके भुरे रंग की छेद की तरफ,,,,, निर्मला की आंखों में अपने बेटे के लंड को अपने बुर में लेने की प्यास साफ नजर आ रही थी,,
अपनी मां की हालत को देखकर शुभम की भी हालत खराब होने लगी उसके भी सब्र का बांध टूटता हुआ नजर आने लगा लेकिन वह इतनी जल्दी टूटने नहीं देना चाहता था इसलिए अपने दोनों हाथों से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को एक बार फिर से थाम लिया,,, और हल्के से उसे एक बार फिर से फैलाने लगा जिससे उसकी गुलाबी बुर्के गुलाबी पत्तियों के साथ-साथ उसके भूरे रंग का छोटा सा छेद भी हल्का सा खुल,, गया,,, जिसे देखते ही उसकी आंखों में चमक आ गई और वह अपने एक उंगली को,, थूक लगाकर धीरे-धीरे उसे अंदर की तरफ डालने लगा जैसे ही निर्मल आप इस बात का आभास हुआ कि उसका बेटा उसकी गांड के छोटे से छेद में उंगली डालना चाहता है वह अपने बदन को आगे की तरफ सिकुड़ने लगी और उसे रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,
नहीं नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल मत कर मुझे दर्द होता है,,
बस एक बार मम्मी कुछ नहीं होगा बस एक बार अंदर डालने दो उंगली,,,( ऐसा कहते हुए वह दोबारा कोशिश करने लगा लेकिन फिर से उसे निर्मला रोकते हुए, बोली,,)
नहीं सुबह में ऐसा मत कर दो तू जानता है मुझे बहुत दर्द करता,, है,,,
लेकिन कोशिश तो करने दो मम्मी कोशिश करने में क्या जाता है,,,( शुभम अच्छी तरह से जानता था कि अगर वह रुक गया तो उसकी मां कभी भी आगे नहीं बढ़ने देगी इसलिए वह बातों में उलझा ते हुए तुरंत अपनी उंगली के आगे वाले भाग को अपनी मां की गांड के अंदर उतार दिया,, जिससे तुरंत निर्मला के मुंह से हल्की कराह की आवाज निकल गई,,,।)